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शिवपुरी की चोरी हुई नवजात सागर में मिली, पुलिस ने ‘ऑपरेशन सेफ बेबी’ में बच्चा चोर को पकड़ा

शिवपुरी  शिवपुरी जिला अस्पताल से शारदा आदिवासी नाम की महिला एक दिन की नवजात बच्ची को चुराकर लगभग 280 किलोमीटर दूर पहुंच गई थी। पुलिस ने 200 सीसीटीवी कैमरों की मदद और घेराबंदी से आरोपी महिला को सागर में एक बस से गिरफ्तार कर लिया। बच्ची को सुरक्षित बरामद कर सागर के जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। पुलिस अब आरोपी महिला को शिवपुरी लाकर उससे पूछताछ करेगी। जानकारी अनुसार मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिला अस्पताल से एक महिला द्वारा नवजात बच्ची के चोरी किए जाने के मामले में पुलिस को सफलता मिल गई है। पुलिस ने 200 सीसीटीवी कैमरों की मदद से उक्त आरोपी महिला को पकड़ लिया है। शिवपुरी के जिला अस्पताल से नवजात बच्ची को चुराने के बाद महिला एक बस के माध्यम से सागर जिले तक पहुंच गई थी। सागर में पुलिस ने इस महिला को अपनी गिरफ्त में ले लिया है। नवजात बच्ची को भी सुरक्षित बरामद कर लिया है और उसे सागर के जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। आरोपी महिला को शिवपुरी लाया जा रहा है और पुलिस अब इस मामले में आगे कार्रवाई करते हुए इससे पूछताछ करेगी। 30 हजार का ईनाम घोषित किया था जिला अस्पताल से बुधवार सुबह अज्ञात महिला आदिवासी प्रसूता की एक दिन की बच्ची चोरी करके ले गई थी। महिला सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है। इस वारदात के बाद आईजी ने महिला का पता बताने वाले को 30 हजार रुपए इनाम देने की घोषणा की थी। बताया जाता है कि बामौरकलां के विशुनपुरा निवासी रौशनी पत्नी सुनील आदिवासी उम्र 23 साल को 27 अक्टूबर को प्रसव के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया था। 27-28 अक्टूबर की दरम्यानी रात 1:56 बजे उसने एक बच्ची को जन्म दिया। प्रसूता की हालत गंभीर होने के कारण उसे मेटरनिटी विंग के एचडीयू वार्ड (हाई डिपेंडेंसी यूनिट) में भर्ती करवाया गया। इसी क्रम में 28 अक्टूबर की रात एक अज्ञात महिला प्रसूता की ननद रामवती से मिली। प्रसूता महिला के परिजनों से संपर्क बढ़ाया पुलिस और परिजन के अनुसार आरोपी महिला ने रामवती से बातें करते हुए खुद को उनके गांव की आशा कार्यकर्ता की रिश्तेदार बता कर पहचान कर ली। उसने अपना नाम लता आदिवासी बताया। वह पूरी रात उनके संपर्क में रही, वह प्रसूता के लिए खाने पीने का सामान, चाय-दूध आदि भी लेकर आई। बहाने से उठाई बच्ची और फरार हो गई 29 अक्टूबर की सुबह करीब 4 बजकर 48 मिनट पर वह महिला प्रसूता व उसकी सास से यह कहकर बच्ची को बेड से उठा लाई कि, वह बच्ची को अपने पति सुनील को खिलाने के लिए ले जा रही है। इसके बाद वह बच्ची को लेकर फरार हो गई। घटना की जानकारी मिलने के बाद से पुलिस ने महिला की तलाश में शहर भर के सीसीटीवी कैमरे खंगालने के साथ साथ बस स्टेंड, रेलवे स्टेशन आदि जगह पर तलाश किए। पुलिस ने घेराबंदी कर महिला को पकड़ा पुलिस अधीक्षक अमन सिंह राठौड़ ने अलग-अलग टीमें गठित कर मामले की पड़ताल के निर्देश दिए। पुलिस को छानबीन के दौरान महिला के संबंध में मिली जानकारी के अनुसार आरोपित महिला की पहचान बड़ागांव निवासी शारदा आदिवासी के रूप में हुई है। वह आपराधिक किस्म की महिला बताई गई है। बताया तो यहां तक जा रहा है कि महिला पर पूर्व में भी चोरी संबंधी एक अपराध दर्ज हो चुका है। इस दौरान पुलिस इस महिला तक पहुंच गई। बताया जाता है कि उक्त महिला इस नवजात बच्ची को लेकर सागर जाने वाली बस में बैठकर निकली है। सागर पुलिस से संपर्क कर जानकारी दी तो पकड़ी गई शिवपुरी पुलिस ने सागर पुलिस से संपर्क किया और बच्चा चोर महिला की जानकारी, फोटोग्राफ व सीसीटीवी फुटेज शेयर किए थे। इधर सागर एसपी, एएसपी और तमाम थानों की पुलिस को सक्रिय कर दिया गया था। जिसमें भैंसा के पास ललितपुर की तरफ जाने वाली बस में महिला मिल गई। पूछताछ में पहले तो उसने बच्ची को अपनी बताया, बाद में पुलिस ने जब सख्ती से पूछा तो उसने बता दिया कि वह चोरी करके लाई है। जांच होगी, पूछताछ करेंगे- एसपी शिवपुरी पुलिस अधीक्षक अमन सिंह राठौड़ ने बताया कि हमें जो इनपुट मिले थे, उसके आधार पर हमने सागर पुलिस को दी। उक्त सूचना के आधार पर सागर पुलिस ने महिला को एक यात्री बस से गिरफ्तार कर लिया है। बच्ची का वहां के जिला अस्पताल में स्वास्थ्य परीक्षण करवाया गया है बच्ची पूर्णत: स्वस्थ है। सुबह महिला और बच्ची शिवपुरी लाकर पूछताछ करेंगें। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने दी बधाई केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने शिवपुरी के जिला अस्पताल से नवजात बच्ची के चोरी किए जाने के मामले में पुलिस को मिली सफलता पर बधाई दी है। केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर इस मामले में शिवपुरी पुलिस को बधाई देते हुए कहा कि इस संवेदनशील मामले में पुलिस ने सक्रियता से उक्त मामले का खुलासा किया।  

देवास निगम में अनोखी प्रदर्शन: महिला पार्षद ने चप्पल की माला पहनकर विरोध जताया

उज्जैन प्रदेश भाजपा और कांग्रेस के निगम पार्षदों ने  अनोखा प्रदर्शन किया। देवास जिले की BJP महिला पार्षद चप्पल की माला पहनकर निगम पहुंचीं और अधिकारियों पर भ्रष्टाचार और कामचोरी के आरोप लगाते हुए वार्ड की समस्याओं का समाधान नहीं होने पर सवाल-जबाव किए तो उज्जैन जिले के नागदा में कांग्रेस पार्षदों ने सड़क खराब होने और हादसों को लेकर सड़क पर ही केक काट दिए। अब दोनों मामले चर्चा का विषय बन गए हैं। उज्जैन के नागदा में कांग्रेस पार्षदों ने सड़क की बदहाली को लेकर उखड़ी सड़क पर केक काटकर प्रदर्शन किया। इस दौरान पार्षदों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द सड़क का निर्माण नहीं हुआ तो उग्र आंदोलन किया जाएगा। कांग्रेस पार्षदों ने आरोप लगाया कि नगर सरकार नई सड़कें बनाना तो दूर सड़कों के गड्ढे भी नहीं भर पा रही है। वहीं दूसरी ओर देवास जिले की वार्ड क्रमांक 24 की भाजपा की महिला पार्षद रितु सावनेर नगर निगम परिषद बैठक सम्मेलन में चप्पलों की माला पहनकर शामिल हुईं। बैठक के दौरान उन्होंने अधिकारियों से सवाल-जवाब किए, लेकिन उन्हें संतोष जनक जवाब नहीं मिले। उन्होंने आरोप लगाया कि काफी समय से मेरे वार्ड में नाली पानी की समस्याएं व्याप्त हैं। जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से इस बारे में कोई सुनवाई नहीं की जा रही है। उन्होंने कहा कि अपने वार्ड की समस्याओं को लेकर कई बार निगम अधिकारियों को अवगत करा चुकी हूं लेकिन उनकी शिकायतों का कोई समाधान नहीं हुआ है। उन्होंने अधिकारियों पर भ्रष्ट और कामचोर होने का आरोप भी लगाया। मैंने स्वयं इसे स्वीकार किया है। एक कांग्रेस पार्षद ने उनसे महिला होने के नाते चप्पलों की माला उतारने का आग्रह किया तो बैठक में कांग्रेस पार्षद दीपेश कानूनगो और भाजपा नेता मनीष सेन के बीच कुछ देर के लिए बहस भी हुई। देवास जिले के वार्ड क्रमांक 24 की भाजपा पार्षद रितु सावनेर ने बताया कि वार्ड के लोग अच्छा काम होता है तो हमें फूलों की माला अर्पण करते हैं लेकिन हमारे वार्ड की जो दयनीय स्थिति नगर निगम ने बनाकर रखी है। इसे बताने के लिए यह चप्पलों की माला पहनकर आई हूं। मुझे न्याय चाहिए मेरी समस्या हल नहीं हुई तो मैं यही माला जिम्मेदार अधिकारियों को अर्पित करूंगी।

विधानसभा सत्र की अवधि बढ़ाने की मांग, नेता प्रतिपक्ष ने लिखा औपचारिक पत्र

भोपाल  मध्यप्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आगामी 16वीं विधानसभा का शीतकालीन सत्र (दिसंबर 2025) की अवधि बढ़ाने की मांग की है। इस संबंध में उन्होंने राज्यपाल, विधानसभा अध्यक्ष और मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि सत्र की समयावधि इतनी सीमित न रखी जाए कि जनहित के मुद्दों पर समुचित चर्चा ही न हो सके।सिंघार ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि विधानसभा सत्र की अधिसूचना के अनुसार यह सत्र 1 दिसंबर से 5 दिसंबर 2025 तक आयोजित किया जाना प्रस्तावित है, जिसमें केवल चार बैठकें होंगी। उन्होंने कहा कि यह अवधि प्रदेश के ज्वलंत, सामाजिक, आर्थिक और प्रशासनिक मुद्दों पर विचार-विमर्श के लिए पर्याप्त नहीं है। प्रदेश इस समय कई गंभीर चुनौतियां नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि प्रदेश इस समय कई गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। किसानों की समस्याएं, बढ़ती बेरोजगारी, महंगाई, कानून-व्यवस्था की स्थिति, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्र अनेक प्रश्न खड़े कर रहे हैं। इन विषयों पर गहराई से चर्चा के लिए पर्याप्त समय आवश्यक है, ताकि सरकार अपने जवाब दे सके और विपक्ष जनता की आवाज़ प्रभावी ढंग से उठा सके। जनता की समस्याओं के समाधान का माध्यम उन्होंने पत्र में लिखा कि विधानसभा लोकतंत्र का सर्वोच्च मंच है। यह केवल कानून बनाने का स्थल नहीं, बल्कि जनता की समस्याओं के समाधान का माध्यम भी है। यदि सत्र की अवधि सीमित रहेगी, तो लोकतांत्रिक परंपराओं और जनप्रतिनिधियों की भूमिका दोनों ही प्रभावित होंगी।” सत्रों की अवधि लगातार होती जा रही है कम सिंघार ने यह भी कहा कि हाल के वर्षों में सत्रों की अवधि लगातार कम होती जा रही है, जिससे न केवल विपक्ष की भूमिका सीमित होती है बल्कि जनता के प्रश्न भी अधूरे रह जाते हैं। उन्होंने आग्रह किया कि इस बार सत्र की अवधि बढ़ाकर अधिक दिनों तक चलाया जाए, ताकि प्रदेश के महत्वपूर्ण मुद्दों पर खुली और विस्तृत बहस संभव हो सके। विस्तार सत्ता पक्ष के लिए भी उपयोगी उन्होंने यह भी कहा कि सत्र का विस्तार न केवल विपक्ष के लिए, बल्कि सत्ता पक्ष के लिए भी उपयोगी रहेगा। इससे सरकार को अपनी नीतियों और योजनाओं पर विस्तार से चर्चा करने तथा जनता के सामने अपनी उपलब्धियाँ रखने का अवसर मिलेगा। पत्र के अंत में नेता प्रतिपक्ष ने राज्यपाल, विधानसभा अध्यक्ष और मुख्यमंत्री से अपील की है कि वे इस विषय पर गंभीरता से विचार करें और लोकतांत्रिक परंपराओं को सुदृढ़ करने की दिशा में सकारात्मक निर्णय लें।  

शीतकालीन सत्र से पहले तय होगा विधायकों के वेतन भत्ते का प्रस्ताव

भोपाल  मध्य प्रदेश में विधायक और पूर्व विधायकों के वेतन में बढ़ोतरी जल्द ही की जाएगी. विधानसभा में उठाई गई इस मांग को लेकर सरकार ने गंभीरता दिखाई है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देश पर सामान्य प्रशासन विभाग ने कमेटी गठन करने का फैसला किया है। वित्त विभाग के मंत्री जगदीश देवड़ा, पूर्व मंत्री और भाजपा विधायक अजय बिश्नोई के साथ कांग्रेस विधायक सचिन यादव को सदस्य बनाया गया है। इस संबंध में सामान्य प्रशासन विभाग निर्देश जारी किया है। विधायकों, पूर्व विधायकों के वेतन, भत्ते बढ़ाने को लेकर बुलाई गई बैठक में डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा, विधायक अजय विश्नोई और एसीएस अनुपम राजन। जनवरी में सौंपी जाएगी रिपोर्ट अपर मुख्य सचिव मध्य प्रदेश संसदीय कार्य विभाग समिति के सदस्य सचिव होंगे। समिति की आवश्यकता अनुसार अन्य विभागों और विधानसभा सचिवालय के अधिकारियों को भी बैठक में शामिल किया जाएगा। मध्य प्रदेश के विधायक और पूर्व विधायक को का वेतन बढ़ाने के लिए विधानसभा में चर्चा हुई थी। विधायकों की मांग थी कि 45% वेतन में बढ़ोतरी की जाए। इस पर सरकार ने कमेटी बनाकर निर्णय लेने का विचार किया है। माना जा रहा है कि अगले वर्ष 2026 के जनवरी महीने में रिपोर्ट भी शासन को भेज दी जाएगी। विधायकों का कितने प्रतिशत वेतन बढ़ाया जा सकता है। उनके महत्व में कितनी बढ़ोतरी होगी। इसके विषय में वित्त मंत्री की अध्यक्षता में कमेटी फैसला करेगी। हालांकि वेतन बढ़ाई जाने को लेकर कांग्रेस बीजेपी दोनों के विधायकों ने ही सरकार से मांग की थी कि उनके वेतन को रिवाइज किया जाए। कई राज्यों के वेतन मध्य प्रदेश से ज्यादा है। इसलिए विधायकों की सहूलियत को ध्यान में देते हुए सैलरी में बढ़ोतरी की जाए। विधायकों को 1.10 लाख रुपये सैलरी मध्य प्रदेश में विधायकों को वर्तमान में वेतन-भत्तों को मिलाकर करीब 1 लाख 10 हजार रुपए हर महीने मिलते हैं। आगामी प्रस्ताव के मुताबिक अगर सरकार वेतन बढ़ती है तो 1 लाख 60 हजार रुपए प्रति महीना दिया जा सकता है। जिसमें चिकित्सा भत्ता, अर्दली और निजी सचिव का भत्ता भी शामिल रहता है। अभी मध्य प्रदेश में 230 विधायकों में 31 मंत्रियों का वेतन सामान्य प्रशासन विभाग देता है। मुख्यमंत्री को 2 लाख, कैबिनेट मंत्री को एक लाख 70 हजार और राज्य मंत्री को 1 लाख 45 हजार रुपये मिलते हैं। इन राज्यों में एमपी के MLAs से कम विधायकों की सैलरी नागालैंड 1 लाख रुपए पंजाब 94 हजार रुपए ओडिशा 65,170 रुपए केरल 70 हजार रुपए छत्तीसगढ़ 80 हजार रुपए इन राज्यों में एमपी के MLAs से ज्यादा विधायकों की सैलरी बिहार 1.24 लाख रुपए गुजरात 1.10 लाख रुपए हरियाणा 1.95 लाख रुपए हिमाचल 2.10 लाख रुपए महाराष्ट्र 2.32 लाख रुपए राजस्थान 1.12 लाख रुपए अरुणाचल 1.20 लाख रुपए असम 1.20 लाख रुपए झारखंड 1.38 लाख रुपए उमंग सिंघार ने साधा निशाना विधायकों की सैलरी बढ़ाए जाने के प्रस्ताव को लेकर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार ने सरकार से सवाल पूछे कि सरकार के पास तो सोयाबीन का पैसा किसानों को देने के लिए नहीं है  मंडी की जमीन गिरवी रखी जा रही है, फिर भला विधायकों का वेतन कैसे बढ़ाएंगे।

भोपाल में 10 नवंबर को बीएल संतोष होंगे मौजूद, जबलपुर में मनाया जाएगा बिरसा मुंडा उत्सव

जबलपुर  मध्य प्रदेश के जबलपुर में आगामी 15 नवंबर को भगवान बिरसा मुंडा जयंती के अवसर पर जनजातीय गौरव दिवस का भव्य आयोजन किया जाएगा। इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वर्चुअल माध्यम से शामिल होकर राज्यवासियों को संबोधित करेंगे। आयोजन की तैयारियां जोरों पर हैं और प्रशासनिक अधिकारियों से लेकर भाजपा संगठन तक पूरी तरह सक्रिय हो गया है। सूत्रों के अनुसार, इस उत्सव में आदिवासी संस्कृति, परंपरा और वीरता को प्रदर्शित करने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम, प्रदर्शनियां और जनजागरूकता अभियान आयोजित किए जाएंगे। प्रदेश के विभिन्न जनजातीय अंचलों से सैकड़ों प्रतिनिधि जबलपुर पहुंचेंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव स्वयं कार्यक्रम स्थल पर मौजूद रहेंगे। देशभर में इस कार्यक्रम का प्रसारण होगा। एक हफ्ते तक लगातार जनजातीय गौरव दिवस के कार्यक्रम होंगे। एमपी बीजेपी के संगठन और सरकार की ओर से अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। 7 नवंबर को प्रोफाइल फोटो बदलेंगे बीजेपी नेता इसमें जनजातीय प्रतीकों, स्थानीय जनजाति समाज के व्यक्तियों की सक्सेस स्टोरी और बीजेपी के विकास कार्यक्रमों की जानकारी दी जाएगी। 7 नवंबर को सभी सोशल मीडिया प्लेटफार्म की प्रोफाइल फोटो बदली जाएंगी। सीएम और बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष से लेकर तमाम नेता सोशल मीडिया प्रोफाइल फोटो बदलेंगे। बीएल संतोष 10 को आएंगे भोपाल जनजातीय गौरव दिवस की तैयारियों की समीक्षा करने के लिए बीजेपी के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष 10 नवंबर को भोपाल आएंगे। संतोष बीजेपी के राष्ट्रीय नेतृत्व द्वारा तय किए गए कार्यक्रमों को लेकर समीक्षा बैठक करेंगे। वहीं, भाजपा संगठन स्तर पर भी गतिविधियां तेज हो गई हैं। राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बी.एल. संतोष 10 नवंबर को भोपाल आएंगे। उनके दौरे के दौरान संगठन की राजनीतिक और रणनीतिक बैठकें प्रस्तावित हैं, जिनमें जनजातीय समाज से जुड़ाव, आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा और संगठन विस्तार पर चर्चा होगी। राज्य में जनजातीय आबादी का बड़ा राजनीतिक प्रभाव देखते हुए, पार्टी इस अवसर को सामाजिक और राजनीतिक दृष्टि से बेहद अहम मान रही है। प्रधानमंत्री मोदी का संबोधन न केवल आदिवासी समाज को सम्मान देने का प्रतीक होगा, बल्कि 2025 के लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा के जनसंपर्क अभियान को नई दिशा देगा। 11 से आदिवासी बहुल जिलों में निकलेंगी यात्राएं 11 नवंबर से 15 नवंबर तक एमपी के जनजातीय बहुल जिलों में बिरसा मुंडा गौरव यात्राएं निकाली जाएंगी। इन यात्राओं में जनजातीय कला समूह, झांकियां, प्रदर्शनियां लगाई जाएंगी। जिला स्तर पर सम्मेलन आयोजित होंगे। जिनमें विधायक, सांसद, विशेषकर जनजातीय समुदाय के जनप्रतिनिधि शामिल होंगे। सड़कों, चौराहों के नाम बदलेंगे 7 नवंबर से 15 नवंबर के बीच सड़कों, चौराहों, पार्क और सरकारी भवनों को चिह्नित कर उनका नाम भगवान बिरसा मुंडा और दूसरे जनजातीय विशिष्ट व्यक्तियों के नाम पर किया जाएगा। आदिवासी नेताओं की बड़ी प्रतिमाएं स्थापित करने के लिए सार्वजनिक स्थानों को चिह्नित किया जाएगा। भगवान बिरसा मुंडा के जीवन इतिहास और उपलब्धियों पर आधारित स्मारक भी बनाए जाएंगे। यूनिवर्सिटीज में शुरू होगी जनजातीय शोध पीठ प्रदेश के विश्व विद्यालयों में नए जनजातीय पीठ शुरू की जाएंगी। आदिवासी बहुल प्रदेश पर ध्यान केन्द्रित किया जाएगा। इन पीठों के माध्यम से आदिवासी समुदाय से जुडे़ विषयों पर हायर स्टडी (उच्च स्तरीय शोध) का अवसर मुहैया कराया जाएगा। जनजातीय समुदायों के कल्याण के लिए नई योजनाओं की शुरुआत की जाएगी। जिससे उनके सामाजिक आर्थिक और शैक्षणिक विकास को बढ़ावा मिलेगा। जनजातीय गौरव दिवस पर बीजेपी के कार्यक्रम 10 नवंबर को प्रदेश स्तर पर भोपाल में और 11 नवंबर को सभी जिलों में प्रेस कॉन्फ्रेंस होगी। जनजातीय स्वाभिमान सम्मेलन: आदिवासी बहुल जिलों में जनजातीय स्वाभिमान सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। इसमें स्थानीय आदिवासी नेता और युवा कार्यकर्ता भाग लेंगे। जनजातीय समाज की विभूतियों का होगा सम्मान पिछले 11 सालों में पद्म पुरस्कार से सम्मानित और मन की बात कार्यक्रम में पीएम मोदी द्वारा उल्लेखित जनजातीय समाज के लिए काम करने वाले लोगों का सम्मान किया जाएगा। कॉलेजों, यूनिवर्सिटीज में टाउन हॉल कॉलेजों और यूनिवर्सिटीज में जनजातीय थीम पर टाउन हॉल के आयोजन होंगे। इन टाउन हॉल में मुख्य रूप से चार विषयों पर चर्चा होगी।     जनजातीय समाज- भारतीय सामाजिक व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा     स्वतंत्रता संग्राम में जनजातीय समाज और नेताओं की भूमिका     जनजातीय ज्ञान प्रणाली     जनजातीय जीवन शैली का सांस्कृतिक पहलू लेख: मुख्यमंत्री और प्रमुख नेताओं द्वारा भगवान बिरसा मुंडा की विरासत और जनजातीय सशक्तिकरण के लिए बिरसा मुंडा के योगदान पर लेख शेयर किया जाएगा। पॉडकास्ट: पॉड कास्ट में जनजातीय नेताओं और बीजेपी द्वारा आदिवासी समाज के लिए किए गए कामों को बताया जाएगा। एमपी सहित देशभर में स्टूडेंट्स के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन क्विज कॉम्पटीशन कराए जाएंगे। ये प्रतियोगिताएं जनजातीय आंदोलनों के इतिहास और आदिवासी नेताओं के योगदान पर आधारित होंगी। जबलपुर में होगा कार्यक्रम पीएम मोदी वर्चुअल संबोधन करेंगे। जनजातीय बहुल जिलों में बिरसा मुंडा गौरव यात्रा 11 से शुरू होंगी और 15 नवंबर तक चलेंगी।

5.5 लाख भोपालियों के घर पहुंचेंगे BLO, 60% मतदाता स्पेशल रिवीजन में शामिल

भोपाल मध्य प्रदेश में शुरु हुई स्पेशल इंसेन्टिव रिवीजन यानी एसआईआर की प्रक्रिया को 2003 की वोटर लिस्ट के आधार पर तय किया जाएगा। 2003 से 2025 के बीच जिले की मतदाता सूची में कुल 9.26 लाख से अधिक मतादाता बढ़ चुके हैं। एसआईआर प्रक्रिया से जुड़े प्रशासनिक अफसरों के अनुसार, बढ़े हुए मतदाताओं में से 60 फीसदी यानी करीब साढ़े पांच लाख मतदाता ऐसे हैं जो अन्य शहरों, राज्यों से भोपाल पहुंचे हैं। इन्हें ही अब एसआईआर में अपने मूल निवास, पहचान, जन्म से जुड़े दस्तावेज दिखाने होंगे। 2003 की मतदाता सूची में शामिल मतदाताओं और उनके परिजन को स्वत: ही 2025 की सूची में शामिल कर लिया गया है। 2003 में भोपाल -04 विधानसभाएं थीं -11.88 लाख वोटर्स थे इन विधानसभाओं में -3.45 लाख वोटर्स गोविंदपुरा विधानसभा -4.22 लाख वोटर्स दक्षिण विधानसभा -2.21 लाख वोटर्स नार्थ विधानसभा -1.99 लाख वोटर्स बैरसिया में थे आज से लगेगी ड्यूटी बीएलओ के साथ सहायक भी दिया जाएगा। गुरुवार से इसके लिए ड्यूटी शुरू हो जाएगी। एसआईआर के लिए प्रशिक्षण का एक भाग पहले ही तय हो चुका है। एसडीएम के माध्यम से बीएलओ ने 2003 की सूची से मौजूदा सूची का मिलान की प्रक्रिया अपने स्तर पर पूरी कर ली है। आगामी काम के लिए विधानसभा स्तर पर प्रशिक्षण होगा। एक विधानसभा में 12 से अधिक स्थान इसके लिए तय किए जा रहे हैं। तय समय में पूरे होंगे काम- कलेक्टर भोपाल कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने कहा कि, एसआईआर के लिए टीम ट्रेनिंग शुरू की जा रही है। तय समय में मतदाता सूची से जुड़े काम पूरे कर लिए जाएंगे।

रेलवे ब्रिज कंस्ट्रक्शन के दौरान बड़ा हादसा, धार जिले में क्रेन पलटने से दो मजदूरों की मौत

पीथमपुर धार में औद्योगिक क्षेत्र पिथमपुर के सागौर में रेलवे ब्रिज निर्माण के दौरान एक बड़ा हादसा हो गया जिसमें दो लोगों की मौत हो गई. दरअसल, यहां रेलवे ब्रिज का निर्माण कार्य चल रहा है. इसी दौरान ब्रिज निर्माण में लगी क्रेन पलटी खा गई और एक पिकअप वाहन पर जा गिरी. जिससे पिकअप में सवार दो लोगों की मौके पर मौत हो गई. पुलिस अधीक्षक मयंक अवस्थी ने बताया कि जानकारी के अनुसार रेलवे निर्माण में लगी क्रेन अचानक पलटी खा गई और क्रेन रास्ते से गुजर रही पिकअप वाहन पर जा गिरी. इसमें दबकर दो लोगों की मौत हो गई.साथ ही क्रेन के नीचे अन्य लोगों के भी दबे होने की आशंका जताई जा रही है. घटना की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन व बडी संख्या में पुलिस बल मौके पहुंची है और पिकअप में फंसे दोनों शवों को बाहर निकालने की कोशिश कर रहे है. बता दें कि कंस्ट्रक्शन साइट्स पर अक्सर मशीनों के चलते ऐसे बड़े हादसे हो जाते हैं. भारी भरकम मशीनों की जरा सी गलत हैंडलिंग का नतीजा हो जाता है कोई बड़ा हादसा जिसमें जनहानि भी हो जाती है.

गाड़ी पार्किंग की समस्या से छुटकारा: भोपाल में 18 माह में तैयार होगी नई हाइड्रोलिक पार्किंग

भोपाल  एमपी के भोपाल शहर में पहली हाइड्रोलिक पार्किंग बनने जा रही है। शहर के सबसे व्यस्त बाजारों में से एक बिट्टन मार्केट में अब पार्किंग की समस्या से जल्द ही निजात मिलने वाली है। नगर निगम यहां पीपीपी मॉडल पर एक अत्याधुनिक हाइड्रोलिक पार्किंग बनाने की तैयारी में है, जिसका अनुमानित प्रोजेक्ट मूल्य 15-20 करोड़ तक होगा। 15 हजार वर्ग मीटर में बनने वाली यह पार्किंग करीब रोज पहुंचने वाले 1.5 लाख ग्राहकों को परेशानियों से मुक्त करने का काम करेगी। यह पार्किंग सब्जी हाट क्षेत्र में विकसित की जाएगी। अभी है पार्किंग की समस्या बिट्टन मार्केट में सब्जी हाट, कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स और रोजमर्रा के सामान की खरीदारी के लिए भी शहरभर से लोग आते हैं। सामान्य दिनों में भी यह क्षेत्र वाहनों की पार्किंग से अटा रहता है, जिससे यहां अक्सर ट्रैफिक जाम की स्थिति बन जाती है। यहां सप्ताह में तीन दिन सब्जी हाट लगता है, जिसमें भारी भीड़ होती है। लोगों को अक्सर अपने वाहन सड़क किनारे या दूर-दराज की कॉलोनियों में खड़े करने पड़ते हैं, जिससे चोरी और यातायात बाधित होने का खतरा बना रहता है। प्रोजेक्ट की समय-सीमा और तैयारी -ईओआई (एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट) जारी: अगले 15 दिन के भीतर। प्रारंभिक तौर पर दो कंपनियों ने इसमें रुचि दिखाई है। -फाइनल प्रोपोजल: ईओआइ के बाद 50 दिन के भीतर तय होने की संभावना। -डीपीआर (विस्तृत परियोजना रिपोर्ट): 100 दिन के अंदर बनकर तैयार होगा। -अनुमति के लिए मंत्रालय को रिपोर्ट: अगले 4 माह में भेजी जाएगी। -पार्किंग निर्माण: अधिकारियों का अनुमान है कि 18 माह में नई हाइड्रोलिक पार्किंग बनकर तैयार हो जाएगी। क्या होती है हाइड्रोलिक पार्किंग हाइड्रोलिक पार्किंग एक आधुनिक तकनीक है, जिसे मल्टी-लेवल कार पार्किंग सिस्टम भी कहा जाता है। इस तकनीक में हाइड्रोलिक लिफ्टों का इस्तेमाल करके वाहनों को एक के ऊपर एक या कम जगह में अधिक ऊंचाई पर पार्क किया जाता है। पारंपरिक पार्किंग की तुलना में कई गुना ज्यादा वाहन खड़ा करने की क्षमता रखती है। यह परियोजना न केवल वर्तमान बल्कि भविष्य की आवश्यकताओं को भी ध्यान में रखकर बनाई जा रही है। सकती है। संस्कृति जैन, आयुक्त, निगम

परिजनों ने थाने में शिकायत दर्ज कराई: छिंदवाड़ा में कफ सिरप पीने से बच्ची की मौत की आशंका

छिंदवाड़ा  छिंदवाड़ा जिले में जहरीले कफ सिरप का संकट गहराता जा रहा है। बिछुआ में कफ सिरप के सेवन के बाद एक 5 महीने की बच्ची की मौत का मामला सामने आया है। परिजनों ने बच्ची को सिरप पिलाने के बाद उसकी जान जाने का आरोप लगाते हुए बिछुआ थाने में शिकायत दर्ज कराई है। आयुर्वेदिक सिरप पर संदेह बच्ची का नाम रुही मिनोटे (पिता संदीप मिनोटे, निवासी बिछुआ वार्ड नंबर 12) बताया जा रहा है। परिजनों का कहना है कि उन्होंने क्षेत्र के किसी निजी मेडिकल स्टोर से कफ सिरप खरीदकर बच्ची को पिलाया था, जिसके बाद उसकी तबीयत बिगड़ी और मौत हो गई। बताया जा रहा है कि जिस कफ सिरप पर संदेह है, वह आयुर्वेदिक है। घटना की सूचना मिलते ही स्वास्थ्य विभाग की टीम भी मौके पर पहुंची और संदेह के घेरे में आए सिरप का पंचनामा बनाने की कार्रवाई कर रही है। परिजन इस मामले में कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए बिछुआ थाने पहुंचे हैं। पुलिस ने शिकायत दर्ज कर ली है और स्वास्थ्य विभाग की जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।  

कृषि संकट: MP में बेमौसम बारिश से धान, सरसों, मटर और तिल की फसल प्रभावित

भोपाल  वर्तमान समय प्रदेश में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि अपना कहर बरपा रही है। प्रदेश  में कहीं भारी बारिश तो कहीं ओलावृष्टि हो रही है, इसके चलते किसान अपनी फसलों को लेकर बहुत चिंतित है। तेज हवा, बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से किसानों की लाखों रूपये की फसल बर्बाद हो गयी है। वर्तमान समय में रबी फसलों की कटाई का दौर चल रहा है। किसानों के सामने इस समय बहुत बड़ा संकट यह है  बेमौसम बारिश ने राज्य के कई क्षेत्रों में किसानों की मुसीबत बढ़ा दी है। आगर मालवा, ग्वालियर-चंबल व विंध्य महाकोशल से फसलों के नुकसान की खबरें हैं। खेत खलिहानों में रखी कटी फसल और खेतों में खड़ी फसल को खासा नुकसान पहुंचा है। खंडवा में इस बार मौसम (MP Rains) ने पहले सोयाबीन की फसल को प्रभावित किया और अब फसल भीगने से मक्का में अंकुरण शुरू हो गया है। सूखने के लिए रखी उपज भीगने से काली भी पड़ रही है। 50 से 60 प्रतिशत नुकसान हुआ है। चक्रवात (Cyclone Montha) की वजह से रतलाम जिले में पांचवें दिन बुधवार को भी मावठे का असर बना रहा। इससे मटर की फसल खराब हो रही है, वहीं ज्यादातर किसान खेतों में जलजमाव, अत्यधिक नमी के चलते रबी की तैयारी व बोवनी नहीं कर पा रहे हैं। बुरहानपुर जिले की खकनार तहसील के 20 से ज्यादा गांवों में मक्का, सोयाबीन, कपास फसल भीगी है। किसानों को फसल सुखाने का मौका नहीं मिल रहा है। आलीराजपुर में मक्का, सोयाबीन और उड़द की फसलों को नुकसान की आशंका जताई जा रही है। उज्जैन के नागदा, बड़नगर और खाचरौद में खेतों में पानी भर गया है। गेहूं और मटर की फसल प्रभावित हुई है। धार के बदनावर क्षेत्र में चार घंटे में 76 मिमी बारिश हुई है। इससे खेतों में जलभराव की स्थिति बनी। खुले में पड़ी सोयाबीन और मक्का की फसल भीग गई। तेज हवा से पपीता के पौधे टूटकर गिर गए। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यह बारिश मटर के फूल और फलियों दोनों के लिए हानिकारक है। गुणवत्ता और उपज दोनों पर असर पड़ेगा। महाकोशल-विंध्य में भी नुकसान महाकोशल-विंध्य के जिलों में भी फसलों को असमय बारिश से नुकसान पहुंचा है। डिंडौरी जिले में बारिश होने से सोयाबीन की फसल अधिक प्रभावित हुई है। दाने काले पड़ गए हैं। पककर तैयार धान की फसल भी प्रभावित हो रही है। बारिश से सोयाबीन,उड़द की फसल पहले ही खराब हो चुकी है। खेत में कटकर रखी धान की फसल भीग गई है, जिसमें अंकुरण होने का अंदेशा बना हुआ है। अभी बारिश के आसार बने हुए हैं, जिससे धान सहित अन्य फसलों और सब्जियों को भारी नुकसान हो सकता है। अनूपपुर में खेतों में पानी भरने से फसलों को काफी नुकसान हुआ है। हालांकि कृषि विभाग के अनुसार 15 प्रतिशत से कम क्षति हुई है, जिसे नुकसान के दायरे में नहीं माना जाएगा। जल्द ही सर्वे शुरू होगा। ग्वालियर चंबल अंचल में बारिश ने रबी फसलों पर बरसाया कहर ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में खरीफ के समय बारिश से फसल बर्बादी की बाद अब रबी के मौसम में तीन दिन की बारिश ने खेतों में खड़ी धान, बाजरा, मटर, तिल, ज्वार आदि की फसलों में करीब 50 से 60 प्रतिशत नुकसान कर दिया है। सरसों की बुवाई हो चुकी है, खेतों में पानी भरने से फसल खराब हो गई है। ग्वालियर, दतिया, श्योपुर आदि जिलों में धान की फसल को अधिक नुकसान पहुंचा है। ग्वालियर जिले में ही एक लाख 10 हजार हेक्टेयर में धान की फसल है। अभी तक 15 प्रतिशत फसल ही कट सकी है। ऐसे में बारिश से धान की खड़ी फसल जमीन पर गिरने इसे सबसे अधिक नुकसान हो रहा है। खेतों में पानी भरने से धान की बालियां काली पड़ने और अंकुरण का खतरा बढ़ गया है। ग्वालियर, मुरैना, भिंड में बाजरा भी खेतों में पका हुआ खड़ा है। बारिश से बाली के दाने काले पड़ने की आशंका है। कई आलू व मटर जैसी फसलों के पौधे सड़ गए हैं। इन फसलों में 60 से 70 प्रतिशत तक नुकसान होने की आशंका जताई गई है। मुरैना में बाजरे की जो फसल में 50 प्रतिशत से अधिक के नुकसान की आशंका जताई गई है। दतिया में करीब पांच सौ से अधिक गांवों में धान की फसल खेतों में बिछ गई है। श्योपुर में धान की फसल में 30 से 50 फीसदी तक नुकसान हुआ है। सरसों पूरी तरह नष्ट हो गई     यदि बारिश के साथ-साथ हवा भी चलेगी तो यह नुकसान अधिक होगा। आलू, सरसों, मटर एवं चना तथा मसूर में भी नुकसान है। सरसों की जो 10 दिन के अंदर बोई गई थी वह पूरी तरह नष्ट हो गई है। बारिश से धान की चमक कम होगी और गिरने की वजह से उत्पादन कम हो जाएगा। – डॉ. शैलेंद्र सिंह कुशवाह, वरिष्ठ विज्ञानी कृषि विज्ञान केंद्र ग्वालियर।