samacharsecretary.com

अपेक्स बैंक एवं सहकारी विचार मंच के संयुक्त तत्वावधान में संगोष्ठी आयोजित

अपेक्स बैंक एवं सहकारी विचार मंच के संयुक्त तत्वावधान में  संगोष्ठी आयोजित सहकारिता क्षेत्र में माईक्रो फायनेंस के प्रयास अत्यन्त  सराहनीय – व्ही.जी.धर्माधिकारी शासन के मार्गदर्शन में सकारात्मक प्रयास हेतु तत्पर अपेक्स बैंक  – मनोज गुप्ता भोपाल  अन्तर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष,  2025 के दौरान अपेक्स बैंक एवं सहकारी विचार मंच के संयुक्त तत्वावधान में समन्वय भवन  के सभागार में बैंकिंग क्षेत्र में नये परिवेश में राष्ट्रीयकृत एवं क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के सामने सहकारी बैंकों के लिए उपस्थित चुनौतियों एवं उनके निराकरण की दिशा में उचित प्रबंधन के माध्यम से किस प्रकार अधिक से अधिक लोगों को माईक्रो फाईनेंस करते हुए सहकारी आन्दोलन से जोड़कर अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति को सूक्ष्म वित्त सुविधा का लाभ प्रदान किया जा सके, इस विषय पर सम्बोधित करते हुये मैनिट की सहायक प्राध्यापक डाॅ.जागृति गुप्ता ने कहा कि मध्यप्रदेश में विविध संस्कृति एवं बोलचाल क्षेत्रीय आधार पर विद्यमान हैं, अतः उपयुक्त होगा कि सेेल्फ हेल्प ग्रुप (एस.एच.जी) एवं अन्य समूहों के माध्यम से गरीब तबके तक सूक्ष्म वित सहायता की सुविधा आंगनबाड़ियों, एनजीओ एवं अन्य लोकल समूह के कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित करके प्रदान करायी जा सकती है। उन्होंने कहा कि सूक्ष्म वित्त (माईक्रो फायनेंस) ने सामाजिक एवं आर्थिक उत्थान को प्रत्यक्ष रूप से जन्म दिया है तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था के परिवर्तन को तीव्र व स्थायी रूप से गति भी प्रदान की है ।  सहकारी विचार मंच के अध्यक्ष  मध्यप्रदेश के पूर्व सचिव, सहकारिता श्री व्ही.जी. धर्माधिकारी ने कहा कि मध्यप्रदेश में सहकारिता के क्षेत्र में बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध है और आज के परिदृश्य में उत्तम ढंग से उपलब्ध तकनीक के माध्यम से सूक्ष्म वित्त (माईक्रो फायनेंस) के क्षेत्र में अधिक से अधिक लोगों को जोड़ने का जो काम किया जा रहा है, वह अत्यन्त सराहनीय है ।  अपेक्स बैंक के प्रबंध संचालक श्री मनोज गुप्ता ने बताया कि मैंने अपेक्स बैंक में विगत लगभग डेढ़ वर्ष के दौरान बेहतर मानव संसाधन उपलब्ध कराने की दिशा में प्रयास किए हैं, जिन्हें म.प्र.शासन के सहयोग से पूर्ण करने में मुझे सफलता भी प्राप्त हुई है और अपेक्स बैंक व जिला बैंकों के लिये नवागत अधिकारियों व कर्मचारियों को बैंकिंग व अन्य समस्त प्रकार के प्रशिक्षण के माध्यम से पारंगत करने हेतु भी हम प्रयासरत हैं । उन्होंने आश्वस्त किया कि वर्तमान में उपस्थित चुनौतियों का सुनियोजित ढंग से सामना करने के दिशा में अपेक्स बैंक निरन्तर सकारात्मक प्रयास कर रहा है और हमें पूर्ण विश्वास है कि हम शासन के नीति-निर्देशों का पालन करते हुये इसे धरातल पर उतारने में अवश्य सफल होंगे। संगोष्ठी का संचालन अपेक्स बैंक ट्रेनिंग कालेज के प्राचार्य श्री पी.एस.तिवारी द्वारा एवं आभार प्रदर्शन अपेक्स बैंक के सेवानिवृत्त महाप्रबंधक (ऋण/परिचालन/जनसम्पर्क) श्री एस.के.गुप्ता ने किया ।  संगोष्ठी में उप सचिव, सहकारिता श्री मनोज सिन्हा, पूर्व मुख्य महाप्रबंधक, अपेक्स बैंक श्री के.आर.साहू, पूर्व सलाहकार, अपेक्स बैंक श्री एल.डी.पंडित, अति.मु.कार्य.अधिकारी, जिला बैंक, उज्जैन श्री नीलेश जिंदल, शरण माईक्रो फाईनेंस कंपनी के प्रतिनिधि ने भी अपने विचार व्यक्त किये ।  संगोष्ठी में सहकारिता विभाग एवं शीर्ष सहकारी संस्थाओं के सेवानिवृत्त व सेवारत अधिकारीगण उपस्थित हुए।                  

3 राज्यों की कार्यशाला भोपाल में होना गौरव का विषय : डॉ. पटेल

भोपाल  केन्द्र सरकार अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय द्वारा उम्मीद पोर्टल के संबंध में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन भोपाल में मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड के सहयोग से किया गया। कार्यशाला में मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान वक्फ बोर्ड के अधिकारी शामिल हुए। इस दौरान वक्‍फ बोर्ड में सुधार के लिये आईआईटी दिल्‍ली की पांच स्‍तंभ आधारित रिपोर्ट में की गई अनुशंसाओं पर समीक्षा की गई। मध्यप्रदेश वक़्फ़ संपत्ति के संस्थागत प्रशासन और संपत्ति डेटा से संबंधित स्तंभ में टॉप परफ़ॉर्मर बना। अन्य स्तंभों में भी बेहतर प्रदर्शन के लिए वक़्फ़ बोर्ड की कार्य योजना की प्रशंसा की गई। मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सनवर पटेल ने कहा कि प्रदेश के लिए यह गौरव की बात है कि तीन राज्यों के वक्फ बोर्ड की संयुक्त कार्यशाला भोपाल में आयोजित हो रही है। उन्होंने बताया कि वक्फ संपत्तियों के डिजिटलीकरण के क्षेत्र में मध्यप्रदेश ने WAMSI-MP पोर्टल के माध्यम से उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है और इस कार्य के लिए विभाग के आयुक्त  सौरभ कुमार सुमन विशेष बधाई के पात्र हैं। मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड का प्रस्तुतीकरण सहायक संचालक सु इतिशा जैन ने प्रस्तुत किया। छत्तीसगढ़ की ओर से  तारीक अशरफी तथा राजस्थान की ओर से  आसिफ इकबाल एवं  मोहसिन ने प्रस्तुतिकरण दिया। कार्यशाला में केन्द्र सरकार के नवीन सेंट्रल 'उम्मीद' पोर्टल पर प्रशिक्षण दिया गया। इस दौरान केन्द्र सरकार के अधिकारियों ने वक्फ संपत्तियों के डिजिटलीकरण में नवाचार के लिए WAMSI-MP पोर्टल को प्रतिष्ठित स्कॉच अवॉर्ड मिलने पर आयुक्त  सौरभ कुमार सुमन को बधाई दी और विभाग के प्रयासों की सराहना की। कार्यशाला में केन्द्र सरकार अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के उपसचिव  समीर सिन्हा एवं अवर सचिव  विशाल विश्वकर्मा, मध्यप्रदेश पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के आयुक्त  सौरभ कुमार सुमन, मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड की मुख्य कार्यपालन अधिकारी डॉ. फरजाना गजाल, राजस्थान वक्फ बोर्ड से  आसिफ इकबाल तथा छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड से प्रभारी मुख्य कार्यपालन अधिकारी  पवन कुमार सहित तीनों राज्यों के अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन सहायक संचालक डॉ. ममता भट्टाचार्य ने किया।  

29 सितंबर को छात्रों के खातों में पहुंचेगी फीस सहायता : सिंगल क्लिक से मुख्यमंत्री करेंगे ट्रांसफर

29 सितंबर को छात्रों के खातों में पहुंचेगी फीस सहायता : सिंगल क्लिक से मुख्यमंत्री करेंगे ट्रांसफर फीस प्रतिपूर्ति में नई तकनीक की पहल, मुख्यमंत्री डॉ. यादव करेंगे डिजिटल ट्रांसफर 20 हजार से अधिक अशासकीय विद्यालयों को अंतरित की जायेगी 489 करोड़ रुपये की राशि 8 लाख 45 हजार विद्यार्थियों की फीस की होगी प्रतिपूर्ति भोपाल  मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव शिक्षा का अधिकार अधिनियम अन्तर्गत अशासकीय विद्यालयों में निःशुल्क अध्ययनरत बच्चों की 489 करोड़ रुपये फीस प्रतिपूर्ति की राशि सिंगल क्लिक से सीधे स्‍कूलों के खातों में अंतरित करेंगे। फीस अंतरण का कार्यक्रम हरदा जिले के खिरकिया नगर में 29 सितम्बर, 2025 को होगा। राज्य शिक्षा केन्द्र की अपर मिशन संचालक मती हरसिमरन प्रीत कौर ने बताया कि निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार वर्ष 2023-24 के अशासकीय विद्यालयों के प्रेषित प्रस्ताव पर नियमानुसार पोर्टल से जनरेटेड इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट के माध्यम से फीस प्रतिपूर्ति की कार्यवाही की गयी है। प्रदेश के 20 हजार 652 अशासकीय विद्यालयों में शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत नि:शुल्क अध्ययनरत करीब 8 लाख 45 हजार विद्यार्थियों की फीस की प्रतिपूर्ति की जायेगी। उल्‍लेखनीय है कि प्रदेश में शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 के अंतर्गत गैर अनुदान प्राप्त अशासकीय विद्यालयों में वंचित समूह एवं कमजोर वर्ग के बच्चों को उनके ग्राम, वार्ड अथवा पड़ोस में स्थित स्कूल की प्रथम प्रवेशित कक्षा की न्‍यूनतम 25 प्रतिशत सीटों पर निःशुल्क प्रवेश दिये जाने का प्रावधान है। वर्तमान में शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 के तहत प्रदेश में लगभग 8.50 लाख बच्चे अशासकीय स्कूलों में निःशुल्क अध्ययनरत होकर शिक्षा प्राप्त कर रहे है। पूर्व के वर्षों में प्रवेशित छात्रों की संख्या को देखा जाये तो सत्र 2011-12 से लागू इस प्रावधान के तहत अशासकीय स्कूलों में नि:शुल्‍क अध्‍ययन से लगभग 19 लाख बच्चे लाभान्वित हो चुके हैं। इन बच्चों की निजी विद्यालयों में नि:शुल्‍क शिक्षण व्‍यवस्‍था के तहत राज्‍य सरकार द्वारा अब तक लगभग 3 हजार करोड़ रूपये की फीस प्रतिपूर्ति की गयी है।  

उद्योगपतियों को मिलेगा हरसंभव सहयोग : म.प्र. सरकार प्रतिबद्ध

उद्योगपतियों को राज्य सरकार का पूरा सहयोग : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री से अनेक उद्योगपतियों ने की भेंट भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश में उद्योगों के विकास से बड़ी संख्या में रोजगार सृजित हो रहे हैं। निवेश के इस यज्ञ में उद्योगपतियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव से शुक्रवार को समत्व भवन, मुख्यमंत्री निवास में विभिन्न औद्योगिक संस्थानों के पदाधिकारियों ने भेंट की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उद्योग स्थापना के लिए नीतियां निर्धारित की गई हैं, जिसके फलस्वरूप राज्य में अनुकूल वातावरण निर्मित हुआ है। उद्योगपतियों को नीतियों की परिधि में और आवश्यकता होने पर नीतियों से बाहर जाकर भी उद्योग लगाने के लिए राज्य सरकार पूरा सहयोग प्रदान करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव से भेंट करने वालों में लोहिया ग्रीन एनर्जी ग्रुप के  प्रदीप मित्तल एवं  सुरेन्द्र सुमन, ट्रायडेंट ग्रुप के चेयरमैन राजिन्दर गुप्ता, जैक्सन ग्रुप के प्रोप्राइटर,  संदीप गुप्ता और  गगनदीप चानना, पैसिफिक आयरन मैन्युफैक्चरिंग लिमिटेड के चेयरमैन  जे. पी. अग्रवाल एवं  सुमीत अग्रवाल, आर. एस. डब्ल्यू. एम. लिमिटेड (एल. एन. जे. भीलवाड़ा समूह) के  राजीव गुप्ता और  अंकुर खेतान, एल्टिस इंडस्ट्रीज प्रा. लिमिटेड के  विशाल खासगीवाला, एन-विज़न एनवायरनमेंटल सर्विसेज एवं शेष एनवायरो इन्फ्रा प्रा. लिमिटेड के  कुनाल शाह और डॉ. उमंग शाह तथा पार्थ कंस्ट्रक्शन के  नितिन अग्रवाल शामिल थे।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया भावांतर योजना का किसानों पर सकारात्मक असर

किसानों को लाभान्वित करेगी भावांतर योजना : मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोयाबीन विक्रय का पूरा लाभ लेंगे अन्नदाता 10 अक्टूबर से ई-उपार्जन पोर्टल पर प्रारंभ होंगे पंजीयन एमएसपी से अंतर की राशि का भुगतान करेगी राज्य सरकार मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंस द्वारा कलेक्टर्स को दिए गए निर्देश भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में सोयाबीन उत्पादक किसानों के हित में प्रारंभ की जा रही भावांतर योजना को लागू करने के लिए जिला स्तर पर प्रशासनिक अमले को दायित्व दिए जाएं। इस योजना की विशेषताओं को प्रत्येक स्तर पर प्रचारित किया जाए, जिससे अधिक से अधिक किसानों को इसका लाभ मिले। सांसद, विधायक एवं अन्य जनप्रतिनिधि योजना के प्रचार-प्रसार के लिए सोशल मीडिया प्लेटफार्म का भी उपयोग करें। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने अन्नदाताओं की चिंता कर सोयाबीन को निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूलय 5328 रूपए प्रति क्विंटल निर्धारित की है। मध्यप्रदेश सरकार किसानों को उनके उत्पादन का मूल्य दिलवाने के लिए प्रतिबद्ध है। जिस तरह धान और गेहूं पर किसानों को उनके परिश्रम की कीमत दिलवाने का कार्य किया गया है, उसी तरह सोयाबीन उत्पादक किसानों को भी लाभ दिलवाया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोयाबीन उत्पादक किसानों के लिए लागू की जा रही भावांतर योजना के संबंध में शुक्रवार को समत्व भवन मुख्यमंत्री निवास से वीडियो कॉन्फ्रेंस द्वारा कलेक्टर्स को निर्देशित कर रहे थे। वीडियो कांफ्रेंस में वरिष्ठ विधायक और प्रदेश अध्यक्ष  हेमंत खंडेलवाल भी उपस्थित थे। वीडियो कॉन्फ्रेंस में विभिन्न मंत्री, सांसद, विधायक, जिला पंचायत अध्यक्ष, उच्च शिक्षा मंत्री  इन्दर सिंह परमार, मुख्य सचिव  अनुराग जैन, संबंधित वरिष्ठ अधिकारी, समस्त कलेक्टर्स-कमिश्नर्स, राजस्व और कृषि विभाग के अधिकारी भी शामिल हुए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सभी कलेक्टर्स किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य दिलवाने के लिए व्यवस्थाएं सुनिश्चित करें। किसी भी स्तर पर गड़बड़ी नहीं होना चाहिए। हितग्राही को सीधा लाभ मिलना चाहिए। सभी के प्रयासों से भावांतर योजना पूर्णता सफल होगी। 10 अक्टूबर से शुरू होंगे पंजीयन भावांतर योजना के लिए निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार प्रदेश में ई-उपार्जन पोर्टल पर पंजीयन का कार्य 10 अक्टूबर से प्रारंभ होकर 25 अक्टूबर 2025 तक चलेगा। भावांतर की अवधि 01 नवम्बर से 2025 से 31 जनवरी 2026 तक रहेगी। पंजीकृत कृषक और उनके रकबे के सत्यापन की प्रक्रिया राजस्व विभाग के माध्यम से होगी। किसानों के भावांतर की राशि पंजीयन के समय दर्ज बैंक खाते में सीधे हस्तांतरित की जाएगी। भावांतर योजना, एक नजर में प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान के अंतर्गत अधिसूचित तिलहनी फसल के लिए भावांतर योजना वर्ष 2018-19 से लागू की गई है। भारत सरकार ने घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) तथा राज्य के मंडी के मॉडल भाव/विक्रय मूल्य अंतर की राशि कृषकों को दिलवाने का प्रावधान किया है। किसान पूर्व की तरह अपनी उपज मंडियों में बेचेंगे। एमएसपी और मंडी का मॉडल भाव/विक्रय मूल्य के बीच के अंतर की राशि का किसान को डीबीटी से भुगतान किया जायेगा। किसान द्वारा ई-पोर्टल पर पंजीयन अनिवार्य होगा। उदाहरण के लिए किसान का उत्पादन मॉडल भाव 4600 रूपए पर हुआ है तो समर्थन मूल्य 5328 में से शेष अर्थात् भावांतर राशि 628 रूपए प्रति क्विंटल राज्य सरकार द्वारा प्रदान किए जाएंगे। किसान को समर्थन मूल्य बराबर ही राशि प्राप्त होगी। यदि किसान की उपज का विक्रय मूल्य एमएसपी से कम है परंतु राज्य के औसत मॉडल प्राइज के समतुल्य है, ऐसी स्थिति में भी किसान को एमएसपी और बिक्री मूल्य के भावांतर की राशि प्रदान की जाएगी। तीसरी स्थिति में कृषि उपज का विक्रय मूल्य राज्य के औसम मॉडल प्राइस से कम होने की दिशा में किसान को एमएसपी और घोषित औसत मॉडल प्राइस के भावांतर की राशि प्रदान की जाएगी। प्रत्येक स्थिति में किसान का लाभ सुनिश्चित किया जाएगा। ये जनप्रतिनिधि जुड़े वीसी से मुख्यमंत्री डॉ. यादव को वीडियो कॉन्फ्रेंस से जुड़े अनेक जनप्रतिनिधियों ने इस योजना को प्रारंभ करने की पहल के लिए बधाई दी। किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री  एदल सिंह कंषाना, कौशल विकास एवं रोजगार राज्य मंत्री  गौतम टेटवाल, सांसद खण्डवा  ज्ञानेश्वर पाटिल, विधायक जावरा  राजेन्द्र पांडे, विधायक खातेगांव  आशीष शर्मा, विधायक बागली  मुरली भंवरा, विधायक करैरा  रमेश खटीक, विधायक सुवासरा  हरदीप सिंह डंग, विधायक शाजापुर  अरूण भीमावद, विधायक आगर  मधु गेहलोत, विधायक नागदा खाचरौद  तेज बहादुर सिंह चौहान सहित अनेक जनप्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को धन्यवाद देते हुए कहा कि किसानों को सोयाबीन उत्पादन का पूरा लाभ मिलेगा। निश्चित ही यह सही समय पर उठाया गया सही कदम है। सेवा पखवाड़े और अंत्योदय उत्सव को सफल बनाएं जनप्रतिनिधि मुख्यमंत्री डॉ. यादव एवं  हेमंत खण्डेलवाल ने प्रदेश में प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के जन्मदिवस 17 सितम्बर से प्रारंभ होकर गांधी/शास्त्री जयंती 02 अक्टूबर तक हो रहे सेवा पखवाड़े, पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की जयंती 25 सितम्बर से 02 अक्टूबर तक स्वदेशी जागरण सप्ताह और 22 सितम्बर से आगामी दीपावली तक निरंतर चलने वाले जीएसटी उत्सव की गतिविधियों को सफल बनाने का आग्रह, जनप्रतिनिधियों से किया। मुख्यमंत्री के प्रमुख निर्देश              सभी आवश्यक व्यवस्था की जाएं। कलेक्टर और संबंधित अधिकारी किसानों का हित निश्चित करें। अधिकारियों को क्षेत्रवार दायित्व दिए जाएं।              भावांतर योजना के क्रियान्वयन को प्राथमिकता दें।              जिला स्तर पर नियमित समीक्षा भी हो। किसानों को सही दाम मिले, इसकी मॉनिटरिंग हो।              भावांतर योजना किसानों के हित में है, इसका प्रचार-प्रसार किया जाये।              सभी जनप्रतिनिधि सोशल मीडिया से प्रचार में भी सहयोग करें।              पात्र किसान समय पर पंजीयन करवा लें जिससे पात्र किसान लाभ से वंचित न रहें।  

रेल हादसों की रोकथाम को बड़ा कदम, धौलपुर-बीना रूट पर लगेगा ‘कवच 4.0’ सिस्टम

ग्वालियर  उत्तर मध्य रेलवे के धौलपुर-बीना के 321 किमी लंबे रेल खंड को रेल दुर्घटना रोकने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) से लैस आधुनिक टक्कररोधी तकनीक कवच 4.0 से लैस किया जाएगा। इसके लिए 300 करोड़ रुपये की राशि खर्च की जाएगी, जिसकी टेंडर प्रक्रिया पूरी कर कार्यादेश जारी कर दिया गया है। संबंधित कंपनी ने प्राथमिक कार्य भी शुरू कर दिया है। आधुनिक उपकरण इंस्टाल किए जाएंगे आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस आधारित कवच 4.0 के लिए ट्रैक किनारे व रेल स्लीपर में आधुनिक उपकरण भी इंस्टाल किए जाएंगे। कवच 4.0 को इंटरनेट से जोड़ने के लिए धौलपुर से मुरैना-ग्वालियर-झांसी होते हुए बीना के बीच 38 नए टावर लगाए जाएंगे। इसमें हर दस किलोमीटर की दूरी पर एक लांग टर्म इवोल्यूशन (एलटीई) टावर स्थापित किया जाएगा। इससे ट्रेन की हर गतिविधि पर नजर भी रखी जाएगी। एआई कवच से जोड़ने के लिए ट्रेन के इंजन पर भी एक टावर लगाया जाएगा। इसके साथ ही AI डिवाइस भी इंजन की कैब में लगाई जाएगी। एक किलोमीटर के फासले पर डिवाइस लगेंगे एआई कवच 4.0 का संपर्क ट्रेन से न टूटे, इसके लिए जिन सीमेंट के स्लीपर पर पटरी को बिछाया जाता है, उस पर भी हर एक किलोमीटर के फासले पर डिवाइस लगाई जाएगी। जब भी ट्रेन उस स्लीपर के ऊपर से निकलेगी, तो उसकी जानकारी कंट्रोल रूम तक अपने आप पहुंच जाएगी। कवच 4.0 ट्रेन को सुरक्षा प्रदान करने के साथ ही क्रासिंग पर होने वाले हादसों को रोकने में भी मददगार होगा। हर रेलवे क्रासिंग पर कवच के जरिए अपने आप हॉर्न बजने लगेगा। यदि सिग्नल लाल है और ट्रेन नहीं रुकती है, तो सिग्नल से 50 मीटर पहले ही AI ट्रेन को रोक देगा। क्या है कवच 4.0? रेलवे का कवच 4.0 पूरी तरह आटोमेटेड प्रोटेक्शन सिस्टम है। यह नई आधुनिक तकनीक पर आधारित है। यह सिस्टम ट्रेन की निर्धारित गति से दो किमी प्रतिघंटा से ज्यादा की स्पीड होने पर ओवर स्पीड अलार्म बजा देगा। अगर ट्रेन की निर्धारित स्पीड से पांच किमी प्रतिघंटा से ज्यादा होगी तो फिर आटोमैटिक ब्रेक लग जाएंगे। अगर ट्रेन निर्धारित स्पीड से नौ किमी प्रतिघंटा से ज्यादा की स्पीड पर पहुंचेगी तो फिर ऐसा होने पर खुद इमरजेंसी ब्रेक लग जाएंगे। कवच सिस्टम 4.0 पर इंटरलाकिंग लगाई गई है, जिससे अगले सिग्नल रेडियो वेव व इंटरनेट के जरिए से सीधे इंजन तक पहुंचेगी। कवच 4.0 का कार्य अक्टूबर से शुरू किया जाएगा और वर्ष 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। रेलवे अधिकारियों ने क्या कहा? रेलवे अधिकारियों के मुताबिक अब तक कवच तकनीक मुख्य रूप से रेलवे ट्रैक पर ट्रेनों की टक्कर को रोकने पर केंद्रित रही है, लेकिन कवच 4.0 मानवीय भूल-चूक पर भी अंकुश लगाएगा। रेल मंडल झांसी के जनसंपर्क अधिकारी मनोज सिंह ने कहा कि धौलपुर से ग्वालियर-झांसी होते हुए बीना रेल खंड पर आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस से युक्त कवच 4.0 प्रणाली स्थापित की जाएगी। इस पर 300 करोड़ रुपये की राशि खर्च होगी। इसकी टेंडर प्रक्रिया पूरी कर दी गई है और काम अक्टूबर माह में शुरू हो जाएगा।

9 साल बाद मध्य प्रदेश में प्रमोशन का रास्ता साफ, नए साल से पहले कर्मचारियों को मिलेगा तोहफा

भोपाल  मध्य प्रदेश सरकार द्वारा बनाए गए प्रमोशन के नए नियमों को लेकर मामला हाईकोर्ट में उलझा हुआ है. राज्य सरकार द्वारा 17 जून 2025 को जारी लोक सेवा पदोन्नति नियम 2025 जारी करते हुए कहा था कि पिछले 9 सालों से प्रमोशन बंद होने से सभी वर्गों के कर्मचारियों पर इसका विपरीत असर पड़ा है. कर्मचारी बिना प्रमोशन के ही रिटायर्ड हो रहे हैं. हाईकोर्ट में भी सरकार इस तथ्य को मजबूती से रख रही है, हालांकि इस मामले में दायर याचिका पर सुनवाई अब 16 अक्टूबर को होगी. माना जा रहा है कि हाईकोर्ट में इस मामले में फैसला अगले 3 माह में सुना सकती है. ऐसे में दिसंबर माह तक प्रदेश के कर्मचारियों को पदोन्नति का लाभ मिल सकता है. 2 दिन बाद कर दिए थे नियम जारी प्रदेश की मोहन सरकार ने 17 जून को प्रमोशन के नए नियमों को जारी किया और इसके 2 दिन बाद नए नियम बनाकर इसे लागू भी कर दिया. लेकिन नियम जारी करने के पहले सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दायर विशेष अनुमति याचिका को वापस नहीं लिया साथ ही पुराने पदोन्नति नियम का लाभ ले चुके कर्मचारियों का प्रमोशन वापस नहीं लिया गया. इसलिए सरकार के नियम लागू करने के बाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई. सुनवाई के दौरान सरकार से कहा गया कि वे प्रमोशन में आरक्षण के 2002 के पुराने नियम और 2025 के नए नियमों का अंतर स्पष्ट करें. यही वजह है कि अब इस मामले को लेकर सामान्य पिछड़ा एवं अल्पसंख्यक वर्ग अधिकारी कर्मचारी संस्था यानी सपाक्स सवाल उठा रही है कि नए नियम जारी करने का मतलब है कि पुराने नियम गलत थे. तो ऐसे में इसके तहत जिन कर्मचारियों को पदोन्नत किया गया है, उनका डिमोशन किया जाए और फिर सीनियरटी लिस्ट तैयार करें और इसके आधार पर प्रमोशन किया जाए. सरकार नहीं रख सकी थी अपना पक्ष हालांकि मामले में 12 अगस्त को हुई सुनवाई के दौरान सरकार अपना पक्ष ठीक से प्रस्तुत नहीं कर सकी थी. सरकार के वकील महाधिवक्ता यह नहीं बता पाए थे कि प्रमोशन में आरक्षण के पुराने और नए नियमों में क्या अंतर है. इसके बाद सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता सीएम वैद्यनाथन की सेवाएं ली हैं, लेकिन 25 सितंबर को वे कोर्ट में प्रस्तुत नहीं हुए और इस वजह से अब कोर्ट की सुनवाई को 16 अक्टूबर तक आगे बढ़ा दिया गया है. सरकार की कोशिश है कि 9 सालों से बंद प्रमोशन जल्द शुरू हो जाए. हालांकि सुप्रीम कोर्ट में मामला अभी विचाराधीन है ऐसे में यदि प्रमोशन का लाभ दिया भी गया तो वह कोर्ट के अंतिम फैसले पर ही निर्भर करेगा. विभागों को अंतिम आदेश का इंतजार उधर कोर्ट का फैसला अभी नहीं आया हो, लेकिन विभागों ने प्रमोशन को लेकर अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं. माना जा रहा है कि प्रमोशन का लाभ प्रदेश के करीबन साढ़े 4 लाख कर्मचारियों को मिलेगा. इसके लिए कर्मचारियों की सीआर के आधार पर प्रस्ताव तैयार कर लिए हैं. हालांकि कोर्ट के फैसले के बाद ही इस पर कदम आगे बढ़ाए जाएंगे. माना जा रहा है कि अगले 3 माह में इस पर कोर्ट से मामला सुलझ सकता है और ऐसे में दिसंबर में कर्मचारियों को प्रमोशन मिल सकता है.  

नया टीएंडसीपी नियम: अब कॉलोनी प्लानिंग में खुला क्षेत्र छोड़ना अनिवार्य

भोपाल   भोपाल शहर की हरियाली अब और बढ़ेगी। मप्र भूमि विकास अधिनियम और कालोनी विकास की शर्तो में संशोधन के बाद ऐसा हो सकेगा। टीएंडसीपी ने शहर में ग्रीन कॉलोनी बनाने के लिए नए नियम जारी किए जा रहे हैं। अब नयी कॉलोनियों के कुल क्षेत्रफल का दस फीसदी ग्रीन व खुला स्पेस रखना होगा। यानी दस हेक्टेयर की कॉलोनी है तो वहां एक हेक्टेयर क्षेत्रफल सिर्फ पार्क व मैदान के तौर पर होगा। इसके लिए नई पॉलिसी में प्रावधान किए जा रहे हैं। अक्टूबर में ये पॉलिसी लागू होगी। कोई भी डेवलपर सिर्फ मकान, सड़क बनाकर काम पूरा नहीं कर पाएगा। कॉलोनी विकास की अनुमति देते समय ही ग्रीन एरिया का क्षेत्रफल आरक्षित करने का प्रावधान किया गया है। यह नियम 10 हेक्टेयर की कॉलोनी में लागू किया जाएगा। – श्रीकांत बानोट, संचालक टीएंडसीपी ऐसे समझें नए नियम -10 से 40 हेक्टेयर की कॉलोनी है तो 60 फीसदी विकसित किया जा सकेगा। -60 फीसदी विकसित किए जाने वाले क्षेत्र का 80 फीसदी आवासीय विक्रय होगा। -20 फीसदी वर्क सेंटर यानि दुकानों के तौर पर विक्रय किया जाएगा। -10 फीसदी कुल क्षेत्र का कम से कम पार्क व खुला क्षेत्र रखना होगा। -25 फीसदी क्षेत्र वनीकरण के तौर पर यानी छायादार पेड़ लगाने होंगे। -5 फीसदी क्षेत्र में सामाजिक अधोसंरचनाएं विकसित करनी होंगी। -15 फीसदी आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए आवासीय इकाईयों में आरक्षित होंगी। शहर में अभी यह स्थिति इस समय राजधानी में 1200 से अधिक कॉलोनियां ऐसी हैं, जिनमें लोगों को खुला क्षेत्र नहीं दिया गया है। गुलमोहर में ही 30 से अधिक ऐसी कॉलोनियां हैं। कोलार में सबसे अधिक परेशानी है। यहां 600 से अधिक कॉलोनियों में पार्क और खुला क्षेत्र नहीं है। बच्चों को पार्क के लिए स्वर्ण जयंती या फिर शाहपुरा जाना पड़ता है।

महाकाल मंदिर में डिजिटल बदलाव, प्रोटोकॉल दर्शनार्थियों को मोबाइल लिंक से मिलेगी दर्शन की सुविधा

उज्जैन  श्री महाकालेश्वर मंदिर में प्रोटोकॉल से दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं के लिए नई ऑनलाइन व्यवस्था जल्द शुरू होने जा रही है। दर्शनार्थियों को पारंपरिक टोकन नंबर लेने की जरूरत नहीं होगी। मंदिर प्रबंध समिति प्रोटोकॉल दर्शनार्थी के मोबाइल पर लिंक भेजगी, जिसके माध्यम से वे दर्शन के लिए स्लॉट बुकिंग कर सकेंगे। नई व्यवस्था भस्म आरती की बुकिंग प्रक्रिया की तर्ज पर होगी, जिसका उद्देश्य व्यवस्था में पारदर्शिता लाना और श्रद्धालुओं के लिए प्रक्रिया को सुगम बनाना है। पंजीकृत मोबाइल नंबर पर मिलेगी लिंक प्रशासक प्रथम कौशिक ने बताया नई व्यवस्था के तहत, प्रोटोकॉल के माध्यम से दर्शन करने के इच्छुक श्रद्धालुओं को विवरण दर्ज कराना होगा, जिसके बाद उनके पंजीकृत मोबाइल नंबर पर लिंक प्राप्त होगी। लिंक पर क्लिक करके श्रद्धालु 250 रुपए का निर्धारित शुल्क ऑनलाइन जमा कर सकेंगे। भुगतान सफल होने पर, उन्हें दर्शन के लिए तिथि और समय स्लॉट आवंटित किया जाएगा, जिसकी जानकारी भी उन्हें मोबाइल पर प्राप्त होगी। मंदिर समिति के अनुसार, इस कदम से प्रोटोकॉल दर्शन प्रणाली में हो रही अनियमितताओं पर अंकुश लगेगा। पहले यह थी व्यवस्था अब तक प्रोटोकॉल के जरिए नंदी हॉल से दर्शन के लिए प्रोटोकॉल अधिकारी के मोबाइल पर सभी के नाम और फोन नंबर देना होते थे। अधिकारी उक्त नंबर पर एक टोकन नंबर भेजते थे। जब श्रद्धालु दर्शन करने मंदिर पहुंचते, तो पहले प्रोटोकॉल ऑफिस जाकर उन्हें प्रति व्यक्ति 250 की रसीद कटाना होती थी, लेकिन कुछ दिनों से टोकन प्रणाली में शिकायतें मिल रही थीं, जिनसे व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल उठते थे। नई लिंक-आधारित प्रणाली से प्रत्येक बुकिंग का डिजिटल रिकॉर्ड रहेगा, जिससे पूरी प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित और जवाबदेह बनेगी। अब भस्म आरती की तरह होगी दर्शन व्यवस्था महाकाल मंदिर में जिस तरह से भस्म आरती के लिए ऑनलाइन बुकिंग व्यवस्था है, जिसमें भक्तों को उनके मोबाइल पर पुष्टिकरण और लिंक प्राप्त होती है। इसी सफलता को देखते हुए अब प्रोटोकॉल दर्शन के लिए भी यही तकनीक सुविधा अपनाई जा रही है। इस नई व्यवस्था से न केवल श्रद्धालुओं का समय बचेगा, बल्कि मंदिर प्रबंधन के लिए भी दर्शनार्थियों की संख्या का प्रबंधन करना अधिक आसान हो जाएगा।

मैहर को मिलेगी सीवरेज समस्या से राहत, जल्द पूरी होगी परियोजना, 75 हजार लोग होंगे लाभान्वित

 मैहर नगरीय विकास एवं आवास विभाग के उपक्रम मध्यप्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कम्पनी द्वारा एशियन डेवलपमेंट बैंक के सहयोग से माता शारदा की नगरी मैहर में सीवरेज परियोजना पर तेजी से कार्य किया जा रहा है। यह परियोजना शहर के समग्र विकास के साथ जनस्वास्थ्य में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। परियोजना के अंतर्गत 15 हजार से अधिक घरों को सीवरेज नेटवर्क से जोड़े जाने का कार्यक्रम है, जिससे लगभग 75 हजार से अधिक की आबादी को सीधा लाभ पहुंचेगा। इसके साथ ही मैहर में माता शारदा दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुजन भी इस सुविधा से लाभान्वित होंगे। इस परियोजना से शहर की स्वच्छता और पर्यावरण में सकारात्मक बदलाव आएगा। एशियन डेवलपमेंट बैंक की 160 करोड़ 34 लाख रुपये लागत वाली परियोजना में 10 वर्षों के संचालन और संधारण की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है। शहर में करीब 130 किलोमीटर सीवरेज लाइन बिछाई जा रही है, इसमें से अब तक 104 किलोमीटर लाइन का कार्य पूरा हो चुका है। कार्य की तेज गति को देखते हुए यह अनुमान है कि शेष कार्य भी तय समय-सीमा में पूरा होगा। परियोजना के पूर्ण होने पर न सिर्फ मल-जल के शोधन की आधुनिक व्यवस्था सुदृढ़ होगी, बल्कि इससे जल जनित बीमारियों में कमी, स्वास्थ्य में सुधार और सड़कों व नालियों की स्वच्छता सुनिश्चित होगी। नालियों में गंदा पानी बहने की समस्या समाप्त होगी और वातावरण अधिक स्वच्छ व सुरक्षित बन सकेगा। यह सीवरेज परियोजना स्वच्छ भारत मिशन और सतत नगरीय विकास की दिशा में एक ठोस पहल है, जो मैहर को एक आधुनिक, स्वच्छ और स्वस्थ नगरी के रूप में विकसित करने में सहायक सिद्ध होगी।