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राज्यपाल पटेल ने हाट बाजारों में सिकल सेल और टीबी की स्क्रीनिंग कराने की दी सलाह

राज्यपाल पटेल का निर्देश: हाट बाजार में स्वास्थ्य स्क्रीनिंग, सिकल सेल और टीबी पर खास ध्यान सिकल सेल अभियान की अवधि बढ़ाएं : राज्यपाल पटेल राजभवन में हुई समीक्षा बैठक भोपाल  राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि हाट बाजारों में सिकल सेल और टीबी की स्क्रीनिंग शिविर लगाए जाने चाहिए जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की विरल आबादी तक पहुंच हो सके। उन्होंने कहा कि सिकल सेल जाँच के 100 दिवसीय अभियान की उपलब्धियां प्रभावी है और अभियान को 125 दिन तक बढ़ाया जाना चाहिए। राज्यपाल पटेल राजभवन के जवाहर खण्ड में बुधवार को लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, आयुष और जनजातीय कार्य विभाग की समीक्षा कर रहे थे। इस अवसर पर जनजातीय प्रकोष्ठ के अध्यक्ष दीपक खांडेकर भी मौजूद थे। राज्यपाल पटेल ने स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को आगनबाड़ियों के साथ सतत संपर्क पर विशेष बल दिया है। उन्होंने कहा कि परिवार कल्याण कार्यक्रम के प्रभावी संचालन में आगनबाड़ी के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बेहतर हो सकती है। उन्होंने कहा कि जिलों के प्रवास के दौरान वह पीएम जनमन, धरती आबा अभियान, सिकल सेल और टी.बी. रोग की समीक्षा अनिर्वायत: करेंगे। उन्होंने अपेक्षा की है कि जिलों में राज्यपाल के प्रवास के दौरान कार्यक्रम स्थल पर टी.बी., सिकल सेल रोग की स्क्रीनिंग शिविरों का आयोजन किया जाए। उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए जन प्रतिनिधियों का सहयोग प्राप्त करने की भी जरूरत बताई है। उन्होंने कहा है कि स्वास्थ्य सेवाओं के लिए सांसद और विधायक निधि से वित्तीय सहयोग प्राप्त करने के प्रयास किए जाएं। उन्होंने कहा कि वे सहयोग की जनप्रतिनिधियों से भी अपील करेंगे।    राज्यपाल पटेल ने कहा कि स्वास्थ्य कार्यक्रमों की सफलता में स्वास्थ्य सेवाओं की अंतिम कड़ी तक पहुंच बहुत महत्वपूर्ण है। समुदाय के बीच पहुंच कर स्वास्थ्य शिक्षा के प्रयास बहुत प्रभावी होते हैं। उन्होंने एकलव्य विद्यालयों में सिकल सेल जांच शिविरों के आयोजन की पहल की सराहना की। जनजातीय छात्रावास के प्राचार्य और शिक्षकों को सिकल सेल रोग के संबंध में सेंसेटाईज करने के प्रयास करने के लिए कहा है। राज्यपाल पटेल ने आयुर्वेदिक औषधियों की वितरण व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाए जाने की जरूरत बताई। उन्होंने सिकल सेल रोगियों को आयुर्वेदिक औषधियां उपलब्ध करवाने को कहा। बताया गया कि विभाग द्वारा चयनित पायलट जिले धार में 1546 और बड़वानी में 1015 रोगियों को सिकल सेल की आयुर्वेदिक औषधियाँ दी जा रही है। प्रदेश में 17 सितम्बर से स्वस्थ नारी सशक्त परिवार अभियान चलाया जाएगा। सिकल सेल के लिए संचालित 100 दिवसीय अभियान के दौरान सिकल सेल रोगियों को जेनेटिक कार्ड वितरण कार्य बहुत तेज गति से हुआ है। अभियान अवधि में 12 लाख से अधिक कार्ड वितरित हुए है। विभाग द्वारा 1 करोड़ वां कार्ड प्रधानमंत्री द्वारा वितरित करावाने की योजना है। प्रदेश में टी.बी. और सिकल सेल रोग प्रबंधन प्रयासों के परिणामों के बेहतर संकेत मिल रहे हैं। टी.बी. रोगियों के ड्रॉप आउट और मृत्यु दर में कमी दिख रही है। सिकल सेल प्रबंधन से मातृ मृत्यु दर में भी कमी होने की जानकारी मिली है।          बैठक में राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी, प्रमुख सचिव आयुष डी.पी. आहूजा, प्रमुख सचिव जनजातीय कार्य गुलशन बामरा, प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण संदीप यादव, आयुक्त आयुष श्रीमती उमा महेश्वरी, मिशन संचालक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन सुसलोनी सिडाना, राज्यपाल के अपर सचिव उमाशंकर भार्गव और जनजातीय प्रकोष्ठ की सचिव श्रीमती जमुना भिड़े मौजूद थीं।        

बच्चों की मौत के बाद इंदौर में चूहों पर अभियान, ऑपरेशन रैट किल में मारे और पकड़े गए चूहों की जांच

इंदौर इंदौर के सरकारी एमवाय अस्पताल में चूहों के काटने से दो नवजातों की मौत के बाद पेस्ट कंट्रोल एजाइल कंपनी को हटाने की जानकारी सामने आई है। अब इस काम की मॉनिटरिंग के लिए मंगलवार रात डॉ. महेश कछारिया को असिस्टेंट सुपरिटेंडेंट की नियुक्ति कर विशेष जिम्मेदारी।  अस्पताल में चूहों को पकड़ने के लिए चूहामार दवाइयां (कुछ विशेष तरह का पॉयजन, जिसका तुरंत असर हो) डाली जा रही हैं। साथ ही हर यूनिट में बड़े पिंजरे और रोडेंट ग्लू ट्रेप (जिसमें कुतरने वाले जीव, खासकर चूहे, फंस जाते हैं) लगाए जा रहे हैं। बता दें, नवजातों की मौत के मामले में डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया और सुपरिटेंडेंट डॉ. अशोक यादव सहित अन्य पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। कितने चूहे पकड़ाए, इसकी जवाबदेही इंचार्ज की चूहों को पकड़ने को लेकर तुरंत फीडबैक लिया जा रहा है कि रातभर में कितने चूहे पकड़े गए और कितने मारे गए। इसके लिए हर यूनिट के इंचार्ज की जवाबदेही तय की गई है कि 24 घंटे में क्या नतीजे रहे। इसमें NICU (Neonatal Intensive Care Unit) और PICU (Pediatric Intensive Care Unit) पर खास फोकस है। नवजातों को शिकार बनाते हैं चूहे दूसरी मंजिल पर इन NICU और PICU में पूरे कॉरिडोर में गार्डों को सख्त हिदायत दी गई है कि यहां किसी भी हालत में चूहों की एंट्री नहीं होनी चाहिए। इस संबंध में सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। दरअसल, इन दोनों यूनिट्स में उन गंभीर नवजात शिशुओं को रखा जाता है, जिनकी स्थिति काफी क्रिटिकल रहती है। इनमें से अधिकतर वेंटिलेटर पर रहते हैं। कम वजनी इन नवजातों का हर अंग नाजुक होता है। जिन गंभीर बीमारियों के कारण उन्हें इन यूनिट्स में एडमिट किया जाता है, उनकी वजह से वे पहले से ही काफी कमजोर रहते हैं और बीमारियों से लड़ने की क्षमता (Immunity Power) बहुत कम होती है। ऐसे में इन दूधमुंहे नवजातों को बड़े चूहे आसानी से अपने भोजन का शिकार बना लेते हैं। हाल की दो घटनाओं में, चूहों ने एक नवजात की चारों उंगलियां तक खा लीं। अस्पताल के बाहर बम चेक करने जैसी चेकिंग चूहों के आतंक को खत्म करने के लिए अस्पताल के और भी ज्यादा सख्ती की गई है। यहां तीन-तीन गार्डों की ड्यूटी लगाई गई है। वे दिन-रात एंट्री करने वाले अटेंडर्स के सामान को बारीकी से चेक कर रहे हैं कि उसमें कोई खाद्य पदार्थ तो नहीं है। इसके अलावा परिसर के बाहर, जहां सार्वजनिक पार्किंग और अस्पताल के बगीचे हैं, वहां किसी भी जूठन या अन्य वेस्ट खाद्य पदार्थ तो नहीं है, उस पर भी कड़ी नजर रखी जा रही है। सीढ़ियों और 6 लिफ्टों में चूहों पर नजर मुख्य सीढ़ियों सहित छह लिफ्टों में चूहो नजर आते हैं तो इसकी जानकारी तुरंत इंचार्ज को देने के लिए कहा गया है। इसे लेकर हर फ्लोर और अन्य स्थानों पर पर्चे चिपकाए गए हैं, जिनमें लिखा है कि यदि किसी स्टाफ को चूहे दिखें तो वे तुरंत इन नंबरों पर सूचना दें। आखिरी तक झूठ बोलते रहे जिम्मेदार केस में जिम्मेदार कहते रहे कि चूहों ने मामूली काटा है। मौत का कारण नवजात का हीमोग्लोबिन कम होना और अंदरूनी अंगों का पूरी तरह से विकसित न होना बताया गया। इन सारे झूठों का खुलासा शनिवार को तब हुआ, जब धार निवासी मंजू के नवजात का शव लेकर परिवार अपने गांव पहुंचा। वहां रात को लाइट नहीं थी, तो उन्होंने मोबाइल की रोशनी में शव की पैकिंग खोली। देखा तो एक हाथ की चारों उंगलियां गायब थीं और घाव देखकर सभी सिहर उठे। दरअसल, चूहों के लिए भोजन के रूप में नवजातों की उंगलियां ही सबसे पहले रहती हैं। वहां से वे धीरे-धीरे शरीर का बड़ा हिस्सा कुतर सकते हैं। अंदाजा लगाया जा सकता है कि चूहों ने दो दिनों में उसे कितना जख्मी किया होगा। सीसीटीवी कैमरों से 24 घंटे मॉनिटरिंग चूहों की धरपकड़ के लिए हर कॉरिडोर, वार्ड और यूनिट में लगे सीसीटीवी कैमरों से भी नजर रखी जा रही है। हालांकि अस्पताल में चूहों का ज्यादातर मूवमेंट फ्लोर पर ही रहा है। साथ हा वे पलंग, स्लाइन बोतलों के स्टैंड, वार्डों में मरीजों और ड्यूटी रूम में रखी भोजन की छोटी आलमारियों और बड़ी टेबलों तक पहुंच जाते हैं। वे टेबलों और अलमारियों में रखी दवाइयां तक खा जाते हैं। खाने का लालच देकर घेराबंदी कर रहे चूहों की घेराबंदी के लिए सरकारी कैंसर और चाचा नेहरू अस्पताल की सीमा तक प्रयास किए जा रहे हैं। इसके लिए टीमें उन्हें बिस्किट, केक और दानों का लालच देकर पास बुला रही हैं। हालांकि दिन में सक्रियता कम रहती है। कई स्थानों पर रात में रोडेंट ग्लू ट्रैप में अनाज के दाने रखे गए, जिससे चूहे लालच में आकर चिपक गए और मर गए। अलसुबह इन रोडेंट ग्लू ट्रैप में चिपके मृत चूहों को तुरंत उठाकर ठिकाने लगाया जा रहा है। ऐसे में बाहर और सड़कों पर मृत चूहे देखे जा रहे हैं। बड़े स्तर पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं दूसरी ओर, डीन द्वारा एजाइल कंपनी को हटाकर उसे ब्लैकलिस्टेड करने के लिए भोपाल पत्र लिखा गया है। इस मामले में एजाइल कंपनी पर सिर्फ एक लाख रुपए जुर्माना लगाकर खानापूर्ति कर दी गई, जबकि हटाने संबंधी अधिकृत पत्र की पुष्टि नहीं की गई। जिम्मेदार वरिष्ठ अधिकारियों पर भी अब तक कोई एक्शन नहीं लिया गया। इन डॉक्टर्स को कारण बताओ नोटिस मंगलवार को उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने मंत्रालय, भोपाल में इस मामले की कार्रवाई की समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि पूरी कार्यवाही निष्पक्षता, पारदर्शिता और तथ्यों के आधार पर की जाए। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की घटनाएं स्वास्थ्य सेवाओं की छवि को धूमिल करती हैं, दोषी व्यक्तियों की पहचान कर कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने निर्देश दिए कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी रोकथाम उपाय तुरंत लागू किए जाएं। उन्होंने कहा कि अस्पताल सुपरिटेंडेट डॉ. अशोक यादव, डॉ. बृजेश लाहोटी (HOD, PIC), प्रो. डॉ. मनोज जोशी और सहायक प्रभारी नर्सिंग अधिकारी कलावती भलावी को घटना के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। डॉ. मुकेश जायसवाल (असिस्टेंट सुपरिटेंडेंट और भवन प्रभारी), प्रवीणा सिंह (प्रभारी नर्सिंग ऑफिसर), नर्सिंग ऑफिसर आकांक्षा बेंजामिन और श्वेता चौहान को सस्पेंड किया गया है। नर्सिंग … Read more

मध्यप्रदेश की प्रगति पर CM डॉ. यादव का बयान, राज्य तेजी से आगे बढ़ रहा

मुख्यमंत्री डॉ. यादव का कोलकाता में निवेशकों से सीधा संवाद भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश प्रगति पथ पर तेजी से गतिमान है। उन्होंने कहा कि रिफार्म, परफार्म और ट्रांसफार्म के विजन को आत्मसात कर मध्यप्रदेश अपनी युवा शक्ति एवं उद्योग हितैषी नीतियों के साथ भारत के मानचित्र पर निवेश का ड्रीम डेस्टिनेशन बनने जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इसी कड़ी में बुधवार को कोलकाता में मध्यप्रदेश में निवेश के अवसरों पर इंटरैक्टिव सत्र में निवेशकों से सीधा संवाद कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि अपार निवेश से ही मध्यप्रदेश में एक समृद्ध परिवेश का निर्माण होगा।  

तेजस ट्रेन के नए फेरे से इंदौर-मुंबई यात्रा हुई आसान, शेड्यूल में बदलाव यात्रियों के लिए खुशखबरी

इंदौर ट्रेन से सफर करने वाले लाखों यात्रियों को रेलवे ने बड़ा तोहफा दिया है। पश्चिम रेलवे द्वारा यात्रियों की सुविधा तथा विशेष रूप से यात्रा की मांग को ध्यान में रखते हुए मुंबई सेंट्रल से इंदौर के मध्य चलने वाली मुंबई सेंट्रल-इंदौर तेजस सुपरफास्ट स्पेशल ट्रेन के फेरे बढ़ाए गए हैं। 30 सितंबर तक इस दिन चलेगी ट्रेन मुंबई सेंट्रल-इंदौर तेजस स्पेशल ट्रेन(Tejas Express Indore-Mumbai) का अंतिम फेरा 12 सितंबर 2025 तक निर्धारित है। अब यह 29 सितंबर 2025 तक मुंबई सेंट्रल से प्रति सोमवार, बुधवार एवं शुक्रवार को चलेगी। इंदौर-मुंबई सेंट्रल तेजस स्पेशल ट्रेन का अंतिम फेरा 13 सितंबर 2025 निर्धारित था। यह 30 सितंबर 2025 तक इंदौर से प्रति मंगलवार, गुरुवार एवं शनिवार को चलेगी। ट्रेन पूर्व निर्धारित मार्ग, कोच कंपोजिशन दिन एवं ठहराव के साथ ही चलेगी। इनमें कोई बदलाव नहीं किया गया है। आईआरसीटीसी पर बुकिंग तेजस स्‍पेशल ट्रेन दोनों दिशाओं में बोरिवली, वापी, सूरत, वडोदरा, दाहोद, रतलाम और उज्जैन स्टेशनों पर रुकेगी। इस ट्रेन में फर्स्ट एसी, सेकंड एसी एवं थर्ड एसी कोच होंगे। ट्रेन टिकट बुकिंग पीआरएस काउंटर और आईआरसीटीसी वेबसाइट के माध्यम से कर सकते हैं। 21 जुलाई से शुरू हुई थी बुकिंग ट्रेन संख्या 09085 एवं 09086 की बुकिंग 21 जुलाई से सभी पीआरएस काउंटरों एवं आईआरसीटीसी वेबसाइट पर प्रारंभ हुई। ट्रेनों के ठहराव, समय और संरचना के संबंध में विस्तृत जानकारी के लिए यात्री कृपया www.enquiry.indianrail.gov.in पर जाकर अवलोकन कर सकते हैं।

गोलू अग्निहोत्री की संपत्ति पर ईडी का बड़ा कदम, 34 करोड़ की प्रॉपर्टी हुई अटैच

इंदौर  इंदौर के कांग्रेस नेता गोलू अग्निहोत्री पर प्रवर्तन निदेशालय(ईडी)ने शिकंजा कसा है। दस माह पहले गोलू के घर और दफ्तर में ईडी ने छापा मारा था। उस पर आनलाइन सट्टा चलाने व डिब्बा ट्रेडिंग का आरोप है। तब उसके खिलाफ केस भी दर्ज किया गया था। ईडी ने गोलू सहित उसके छह साथियों की 34 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच की है। इसमें नकदी के अलावा कृषि भूमि, फ्लैट, पेट्रोल पंप, प्लाॅट सहित अन्य संपत्ति शामिल है।   गोलू के साथ उसके व्यापारिक साझेदार हितेश अग्रवाल, तरुण श्रीवास्तव, करण सोलंकी, धवल जैन, श्रीनिवास व अन्य है। ईडी की जांच में पता चला था कि गोलू व उसके साझेदारों ने कई प्लेफार्मों का संचालन कर सट्टा व डिब्बा ट्रेडिंग से करोड़ों रुपये कमाए। निवेशकों व प्रतिभागियों को पैसा हवाला चैनलों व क्रिप्टो के जरिए दिया जाता था। मनी लांड्रिंग कर पैसा इधर-उधर खपाया जाता था। गोलू की इंदौर के अलावा महाराष्ट्र व दूसरे शहरों में भी संपत्ति है। इसके अलावा मुबंई और पुणे में भी दफ्तार है।उसका भी पता लगाया जा रहा है। गोलू व उसके साथियों के तार दुबई तक सट्टा कारोबार से जुड़े है। कांग्रेस का कार्यकारी अध्यक्ष रह चुका है गोलू अग्निहोत्री शहर कांग्रेस कमेटी का कार्यकारी अध्यक्ष रह चुका है। इसके अलावा विधानसभा क्षेत्र का एक बार टिकट भी मिला था, लेकिन विरोध के कारण फिर प्रत्याशी बदला गया था। गोलू की गिनती कमल नाथ समर्थकों में होती है। गोलू के भाई राजा अग्निहोत्री व गोलू की पत्नी भी पार्षद रह चुकी है।  

टीकमगढ़ में 18 कॉलोनियों पर रोक, कलेक्टर ने अवैध घोषित किया प्लॉट और नामांतरण; राजनीतिक कॉलोनी भी प्रभावित

टीकमगढ़ टीकमगढ़ कलेक्टर विवेक श्रोतिय ने शहर की 18 कॉलोनियों को अवैध घोषित करते हुए उनके प्लॉट विक्रय और नामांतरण पर तत्काल रोक लगा दी है। यह कार्रवाई मध्य प्रदेश नगर पालिका नियम 2021 के तहत की गई है। आदेश के अनुसार, ये कॉलोनियां अनधिकृत तरीके से विकसित की गई थीं और नगर पालिका के मानकों का पालन नहीं कर रही थीं। कलेक्टर ने बताया कि कॉलोनी विकसित करते समय नियमों के अनुसार केवल 65% एरिया ही बेचा जा सकता है। शेष भूमि पर सड़क, गार्डन, मंदिर और सीवर लाइन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराना आवश्यक है, लेकिन किसी भी कॉलोनी में इन नियमों का पालन नहीं किया गया। इस कार्रवाई में भाजपा नेता की कॉलोनी सहित 18 लोगों के नाम शामिल हैं। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि यह पहली कार्रवाई है, जिसके तहत प्लॉट विक्रय और नामांतरण पर रोक लगाई गई है। यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो दूसरी कार्रवाई में मामले दर्ज होंगे और तीसरी कार्रवाई के तहत अवैध कॉलोनियां तोड़ी जाएंगी। कलेक्टर ने कहा कि नियमों की अनदेखी से भविष्य में आम नागरिकों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है, इसलिए यह कदम उठाया गया है। उन्होंने मध्य प्रदेश हाउसिंग बोर्ड को भी पत्र लिखा है ताकि शहर को नियमों के अनुसार विकसित किया जा सके। भाजपा जिला अध्यक्ष सरोज राजपूत ने कहा कि वह इस मामले पर कलेक्टर से चर्चा करेंगी। 

भाजपा उज्जैन: नगर और ग्रामीण स्तर के नए जिला पदाधिकारी घोषित, देर रात हुई सूची जारी

उज्जैन  राजनीतिक गलियारों में लगातार चर्चा के बीच भाजपा की नगर व ग्रामीण स्तर पर नवनियुक्त जिला पदाधिकारियों(MP BJP District Executive) की सूची मंगलवार देररात 12.30 बजे जारी की। इसमें नगर में 5 उपाध्याक्ष, 3 महामंत्री, 8 मंत्री, एक कोषाध्यक्ष और एक जिला कार्यालय मंत्री के रूप में 18 पदाधिकारी के नामों की घोषणा की गई। इसी तरह ग्रामीण में 7 उपाध्यक्ष, 2 महामंत्री, 6 मंत्री, एक कोषाध्यक्ष और एक कार्यालय मंत्री के रूप में 17 पदाधिकारी घोषित किए। नगर कार्यकारिणी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल जी की सहमति से भाजपा ग्रामीण जिलाध्यक्ष राजेश धाकड़ ने उज्जैन ग्रामीण के नवनियुक्त पदाधिकारियों(MP BJP District Executive) की घोषणा की, वहीं भाजपा नगर अध्यक्ष संजय अग्रवाल ने भी नगर स्तर के नए पदाधिकारियों के नामों की घोषणा की। शहर कार्यकारिणी में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से जुड़े नामों की प्रमुखता है। नगर पदाधिकारियों में उमेश सिंह सेंगर, कल्याण शिवहरे, सोनल जोशी, अशोक कैथवास और शैलेंद्र शर्मा को उपाध्यक्ष बनाया। आनंद सिंह खिंची, जगदीश पांचाल और कमल बैरवा को महामंत्री, सुभाष डोडिया, विजय चौधरी, जितेंद्र कृपलानी, प्रेमलता बैंडवाल, कांता विश्वकर्मा, वर्षा कछवाय, विजय दीक्षित और पवन विश्वकर्मा को मंत्री बनाया है। कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी प्रकाश यादव और कार्यालय मंत्री अनिल शिंदे को सौंपी है। उज्जैन ग्रामीण उज्जैन ग्रामीण में पदम सिंह पटेल, राजेंद्र अवाना, संदीप व्यास, पंकज यादव, महिपाल सिंह उमठ, अनिल यादव, अश्विन दिंडोरकर को जिला उपाध्यक्ष, राकेश यादव, श्याम शर्मा जिला महामंत्री, विजय चौधरी, रितु पाटीदार, कृष्णा सूर्यवंशी (अजा), वर्षा पाटोदी, अजीता परमार (अजा), निरंजन मेहता को जिला मंत्री बनाया गया। कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी ज्योति पलोड़ को दी गई है। सुमेर सिंह कालूहेड़ा को जिला कार्यालय मंत्री बनाए गए हैं। सूची जारी होते ही शहर में उत्साह की लहर दौड़ पड़ी। वायरल सूची को नकारते रहे एक सूची सोशल मीडिया पर वायरल हो गई थी, जिसमें उपाध्यक्ष, महामंत्री, मंत्री, कोषाध्यक्ष, कार्यालय मंत्री सहित अन्य पदों के नाम सामने आए थे। विशेष बात यह रही कि वायरल सूची से राजनीतिक हलचल तेज हो गई। उत्सव की तैयारी जैसे ढोल-बाजे व आतिशबाजी तक की खबरें सामने आईं, लेकिन भाजपा नगर अध्यक्ष संजय अग्रवाल और प्रचार प्रमुख दिनेश जाटवा ने इसे आधिकारिक नहीं बताया। प्रचार प्रमुख ने स्पष्ट किया था कि सूची अभी प्रदेश स्तर पर होल्ड पर है और जल्द जारी की जाएगी। फिर देर रात 12:30 बजे दोनों नगर व ग्रामीण पदाधिकारी सूची आधिकारिक रूप से जारी की गई।

मायका सूना: 32 नदियों का निरीक्षण करने गए मंत्री प्रहलाद पटेल को केवल 7 में पानी मिला

भोपाल  मध्यप्रदेश में 962 छोटी और बड़ी नदियां हैं, जिनका उद्गम स्थल इस प्रदेश में है। इसलिए इसे नदियों का मायका कहा जाता है। लेकिन अब इन नदियों को संकट का सामना करना पड़ रहा है। वहीं सरकार भी इस समस्या को लेकर चिंतित है। पंचायत मंत्री प्रहलाद पटेल पिछले दो साल से इन नदियों के उद्गम स्थलों का दौरा कर रहे हैं ताकि इस समस्या का समाधान ढूंढ सकें। प्रहलाद पटेल ने दो बार नर्मदा परिक्रमा की है। साथ ही, उनके पास नर्मदा के संरक्षण का 35 साल का अनुभव है। इस अनुभव से प्रेरित होकर उन्होंने एक किताब लिखी है। इसका नाम है परिक्रमा कृपा सार। इस किताब का विमोचन 14 सितंबर को इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख डॉ. मोहन भागवत करेंगे। एक महीने में 32 नदियों किया दौरा     इसके बाद यह सवाल किए जाने पर कि पिछले साल उद्गम की यात्रा में कैसा अनुभव रहा? इस पर पटेल ने साफ कहा कि मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव और मैंने बेतवा के उद्गम से शुरुआत की थी। एक महीने में 32 नदियों के उद्गम पर गए। हमें 7 जगह ही पानी मिला और बाकी जगह सूखा था। यह चिंता का विषय था। फिर 30 जून आ गया। चाहकर भी कुछ कर नहीं पाए। हम सिर्फ इतना निर्णय ही कर पाए कि इस बार पौधरोपण नहीं होगा। मध्य प्रदेश में छोटी-बड़ी 962 नदियों के उद्गम स्थल हैं। इस वजह से प्रदेश को नदियों का मायका कहा जाता है। लेकिन, सरकार नदियों की टूटती सांसों को लेकर चिंतित है। मप्र के पंचायत मंत्री प्रहलाद पटेल नदियों के उद्गम स्थलों की दो सालों से यात्रा कर रहे हैं। नदियों के उद्गम स्थल पर चर्चा  मंत्री प्रहलाद पटेल अब तक 32 नदियों के उद्गम स्थलों का दौरा कर चुके हैं, लेकिन इनमें से केवल 7 नदियों के उद्गम स्थल पर पानी मिला। इससे यह साफ हो गया है कि कई नदियां सूख रही हैं। इस समस्या को हल करने के लिए सरकार अब नदियों के संरक्षण के लिए एक नई योजना पर काम कर रही है।   मंत्री पटेल की नदियों के उद्गम स्थलों की यात्रा पर एक नजर     प्रहलाद पटेल ने अब तक 32 नदियों के उद्गम स्थलों का दौरा किया, जिनमें से केवल 7 स्थानों पर पानी मिला, बाकी जगह सूखा था।     मंत्री पटेल ने बताया कि जब जल गंगा अभियान शुरू हुआ, तब उन्हें राज्य का अनुभव नहीं था, लेकिन मुख्यमंत्री ने उन्हें योजना बनाने का जिम्मा सौंपा।     मंत्री पटेल ने पौधारोपण रोकने का फैसला लिया, क्योंकि पौधों के बचाव के लिए जरूरी सुविधाएं जैसे बाड़ और पानी की व्यवस्था नहीं थी।     पटेल ने नर्मदा परिक्रमा के दौरान अपने गुरुदेव से सीखा कि नदी के संगम और उद्गम स्थल पर जीवन की संभावना होती है, और इनका संरक्षण बेहद जरूरी है।     पटेल का मानना है कि बड़ी नदियाँ तभी बच सकेंगी, जब हम छोटी नदियों को बारहमासी बनाए रखेंगे। पटेल ने रखी अपनी बात मंत्री प्रहलाद पटेल ने कहा कि जब जल गंगा संवर्धन अभियान शुरू हुआ, तब मैं राज्य में मंत्री बना। मेरा राज्य का अनुभव नहीं था। मैंने मुख्यमंत्री जी से पूछा कि कार्ययोजना क्या होगी? उन्होंने कहा कि आपके विभाग को ही तय करना है। पटेल ने आगे कहा कि इस अभियान का लक्ष्य बहुत सुंदर है। नए स्त्रोत बनाएं और पुराने स्रोतों की क्षमता का वर्धन करें। नए स्रोतों में खेत तालाब और अमृत सरोवर ही बन सकते हैं। तीसरा कोई विकल्प आपके पास है नहीं। पुराने स्रोतों में कुएं, बावड़ी, तालाब और नदियां हैं। इनकी साफ-सफाई पंचायत के आसपास हैं तो ये काम हम कर सकते हैं। ये काम मैं वर्षों से करता आ रहा हूं। मुझे लगा मंत्री होने के नाते मैं क्या करूंगा। तब मुझे लगा कि हमें नदी के उद्गम से यात्रा शुरू करनी चाहिए। मैं नर्मदा का परिक्रमा वासी हूं। मैं जब परिक्रमा में था और जब नदी का संगम होता था तो मेरे गुरुदेव कहते थे कि एक किलोमीटर ऊपर चलो उस नदी को पार करेंगे फिर वापस आओ और फिर नर्मदा जी के किनारे चलेंगे। गुरू आज्ञा थी इसलिए ज्यादा बुद्धि नहीं लगाई। इस दौरान एक जगह सूखा नाला मिला। मैं अंदर घुसने लगा तो मेरे गुरुदेव ने इशारा किया। हम ऊपर की तरफ गए। फिर डेढ़ किलोमीटर वापस नीचे आए। गर्मी बहुत थी। तीन किलोमीटर ज्यादा चले तो मन खराब हुआ। मैने रात में सेवा करते समय गुरु जी से पूछ ही लिया कि जब पानी नहीं था तो इतना परेशान क्यों किया। मैं तो बहुत परेशान था। वो उठकर बैठे और मुझसे कहा: जहां नदी पहाडों या स्त्री पुरुष का संगम हो वहां जीवन की संभावना होती है उसको रौंदने की गलती मत करना। हमें जागने में 30 साल लग गए मंत्री पटेल ने कहा: मेरे गुरु जी ने कहा और जहां नदी का उद्गम होता है वहां सर्वाधिक ऊर्जा होती है। उद्गम किसी मनुष्य ने नहीं बनाया। उद्गम पहले से था उसके किनारे जीवन आया। उद्गम छोटा हो या बड़ा हो। ये बात 1994-95 की थी आज 2025 चल रहा है। हमको भी जगने में 30 साल लग गए। अब बाद में कई बातें ध्यान में आतीं हैं लोग संगम पर स्नान करने जाते हैं। संगम पर साधना करने जाते हैं अपने आश्रम बनाते हैं। लेकिन, क्यों करते हैं कभी इस पर बहस नहीं हुई। तब मुझे लगा कि बड़ी नदियां जैसे नर्मदा को मैने बचपन से देखा है उसका अस्तित्व तब तक है जब तक हम छोटी नदियों को बारहमासी रखेंगे। मंत्री पटेल ने साझा किया अपना अनुभव मंत्री प्रहलाद पटेल ने अपने अनुभव को साझा करते हुए कहा कि वह नर्मदा नदी परिक्रमा में शामिल थे। जब वह परिक्रमा करते थे और नदी का संगम आता था, तो उनके गुरुदेव उन्हें कहते थे कि एक किलोमीटर ऊपर चलो, उस नदी को पार करो, फिर वापस आओ और नर्मदा जी के किनारे चलो। गुरुदेव की आज्ञा मानकर उन्होंने ज्यादा सोचे बिना यह किया। एक दिन, जब वह एक सूखे नाले के पास पहुंचे, तो वह अंदर जाने लगे, लेकिन उनके गुरुदेव ने उन्हें इशारा किया। फिर वे … Read more

शिप्रा नदी से मिली आरक्षक आरती की लाश, उज्जैन में राजकीय सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार

उज्जैन   मध्य प्रदेश के उज्जैन की शिप्रा नदी में बिना रैलिंग वाले पुल से कार समेत गिरे तीन पुलिसकर्मियों की तलाश में शुरु हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन मंगलवार शाम को आरक्षक आरती पाल का शव बरामद होने के साथ पूरा हो गया। करीब 68 घंटे की जद्दोजहद के बाद आरती का शव नदी के बड़े पुल से 80 मीटर दूरी में स्थित गहरे गड्ढे से बरामद किया गया। वहीं, आज बुधवार को दिवंगत आरक्षक आरती पाल को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। वैसे तो आरती मूल रूप से रतलाम जिले की रहने वाली खीं, लेकिन रेस्क्यू के दौरान उनका पूरा परिवार उज्जैन ही आ गया था। ऐसे में सभी की सहमति से आज बुधवार को उज्जैन चक्र तीर्थ श्मशान घाट पर आरती का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई आरती पाल की अंतिम विदाई के मौके पर एडीजी उमेश जोगा, डीआईजी नवनीत भसीन, एसपी प्रदीप शर्मा, कलेक्टर रोशन कुमार सिंह, निगम आयुक्त अभिलाष मिश्रा, परिवार के लोगों के साथ साथ हजारों की संख्या में उज्जैन वासी शामिल हुए। सभी ने उन्हें नम आंखों से अंतिम विदाई दी। शिप्रा नदी से निकला कॉन्स्टेबल आरती पाल का शव, परिवार में पसरा मातम उज्जैन की शिप्रा नदी में बिना रैलिंग वाले पुल से कार समेत गिरे तीन पुलिसकर्मियों की तलाश में शुरु हुआ सर्च ऑपरेशन मंगलवार देर शाम तीसरे दिन पूरा हो गया। दरअसल, करीब 68 घंटे की जद्दोजहद के बाद महिला कांस्टेबल आरती पाल का शव नदी के बड़े पुल से 80 मीटर दूरी पर स्थित गहरे गड्ढे से बरामद हुआ है। उज्जैन के उन्हेल थाने में कार्यरत महिला आरक्षक आरती पाल मूल रूप से रतलाम की रहने वाली हैं। उनका शव मिलने की सूचना के बाद से परिवार के बीच कोहराम मच गया। माता-पिता समेत उनके घर के हर सदस्य का रो-रोकर बुरा हाल है। जबकि, हर कोई सदमें में है। शिप्रा नदी में हादसे का शिकार होकर जान गवाने वाली आरती पाल मूल रूप से रतलाम शहर के अरिहंत परिसर की रहती थीं। आरती के पिता अशोक पाल कलेक्टर कार्यालय से सेवानिवृत हुए हैं और माता शीला पाल गृहणी हैं। साल 2013 में पुलिस सेवा में आई आरती के परिवार में उनका एक छोटा भाई लोकेंद्र 12वीं कक्षा में पढ़ रहा है। बेटी का शव मिलने की खबर मिलते ही उसके बचे होने की नामुमकिन सी उम्मीद बांधे बैठे परिवार में मातम पसर हुआ है। मां का कहना है कि, जबतक बेटी को देख नहीं लेती, यकीन नहीं करूंगी कि अब वो इस दुनिया में नहीं है। बता दें कि, आरती अपने परिवार के प्रति इतनी जिम्मेदार थी कि, माता-पिता की सेवा के चलते अबतक विवाह नहीं किया था। घर की जिम्मेदारियां निभाने अबतक नहीं की शादी आरती के चाचा अजय पाल ने बताया कि, ऐसी जानकारी मिली थी कि, हादसे का शिकार हुआ वाहन आरती ही चला रही थी। आपको बता दें कि, एनडीआरएफ – एसडीआरएफ, पुलिस और उज्जैन-महिदपुर के लोकल रेस्क्यू दलों के कुल 130 जवानों ने 68 घंटे में 40 फीट गहराई तक तलाशने के बाद मंगलवार शाम महिला कांस्टेबल का शव नदी से ढूंढ निकाला है। बताया जा रहा है कि, आरती पाल का शव वाहन के साथ नदी में बड़े पुल से करीब 80 मीटर की दूरी पर स्थित एक गहरे गड्ढे में फंसा मिला है। हादसे से एक दिन पहले बोलकर गई थी 'जल्दी आऊंगी' चाचा के अनुसार, आरती के एक अन्य भाई जितेंद्र पाल का इसी साल 30 जुलाई को बीमारी के कारण निधन हो गया था। सवा माह पूरा होने पर धूप-ध्यान करने आखिरी बार बेटी 4 सितंबर को ही घर आई थी। उस दिन पूरा परिवार एक साथ था। वहीं, 5 सितंबर को जाते समय उसने घर वालों से कहा था, 'इस बार जल्दी आऊंगी'। लेकिन, घर से लौटने के अगले ही दिन इस तरह की दिल दहला देने वाली खबर आई, जिसने परिवार को झकझोर कर रख दिया और अब पता चला है कि, बेटी का शव मिला है। हमें पता नहीं था कि, बेटी इस हाल में जल्दी घर आएगी। ये सिर्फ आरती के माता-पिता नहीं, बल्कि पूरे परिवार के लिए गहरी क्षति है। पुलिस महकमें में हड़कंप आपको बता दें कि, 6 सितंबर शनिवार रात को उज्जैन की शिप्रा नदी के पुल से एक वाहन नदी में गिर गया था। प्रत्यक्षदर्शियों की सूचना पर रात डेढ़ बजे तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर वाहन और उसमें सवारों की तलाश की गई पर नदी का बहाव तेज होने के कारण रेस्क्यू रोकना पड़ा। रविवार सुबह 6 बजे दोबारा तलाश दोबारा से शुरु हुई। इसी बीच रेस्क्यू दल समेत पुलिस महकमे में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब शिप्रा पुल से करीब 2 किलोमीटर दूर मिली कार से उन्हेल थाना प्रभारी अशोक शर्मा का शव निकला। बाद में मालूम हुआ कि, बीती रात जो वाहन हादसे का शिकार हुआ है, उसमें टीआई के साथ एसआई मदनलाल निनामा और महिला आरक्षक आरती पाल भी मौजूद थीं। 68 घंटे बाद पूरा हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन घटना ने पुलिस महकमें को सन्न कर दिया। टीआई के साथ एसआई और महिला आरक्षक होने की पुष्टि होने पर रेस्क्यू ऑपरेशन की रफ्तार बढ़ाई गई, लेकिन रविवार देर रात तक दोनों लापता पुलिसकर्मियों का कोई सुराग नहीं लगा। सोमवार की सुबह से एक बार फिर एसडीआरएफ ने रेस्क्यू शुरु किया तब जाकर शाम को एसआई मदनलाल का शव भी मिल गया। इसके बाद रेस्क्यू अभियान आगे बढ़ा और मंगलवार शाम करीब 68 घंटे बाद आरक्षक आरती पाल का शव भी नदी से बरामद कर लिया गया। नदी में कार गिरने का वीडियो हुआ वायरल इधर, सोमवार रात शिप्रा नदी के बड़े पुल से पुलिसकर्मियों की कार गिरने का लाइव वीडियो भी तेजी से वायरल हुआ। वीडियो में कार अन्य वाहनों के साथ जाती दिख रही थी ऐर अचानक ही पुल से नीचे गिर गई। फिलहाल, सोशल मीडिया पर वीडियो को लेकर अब भी प्रतिक्रियाओं का दौर जारी है।

36 लोगों को नोटिस, भोपाल के अनंतपुरा कोकता में विभागीय जमीन पर कब्जे की जांच शुरू

भोपाल  भोपाल के अनंतपुरा कोकता में पशुपालन विभाग की जमीन पर कब्जे के मामले में नोटिस जारी किए गए हैं। गोविंदपुरा तहसीलदार सौरभ वर्मा ने 36 लोगों से 10 दिन में जवाब मांगा है। जिसमें कब्जे से जुड़ी पूरी जानकारी शामिल रहेगी।  बता दें, डायमंड सिटी के 20 मकान भी जद में है। इसके अलावा खेती कार्य के लिए कब्जा करने पर 8, कॉलोनी के पहुंच मार्ग के लिए 4 नोटिस दिए हैं। इसके अलावा बीपीएस स्कूल, द ग्रीन स्केप मेंशन शादी हॉल/रिसोर्ट समेत एक हॉस्टल और एक दुकान संचालक को भी नोटिस दिए हैं। पक्ष रख चुके लोग, कहा-कोई लेना नहीं सीमांकन के दौरान निशान और जमीन पर खूटियां लगाई गई थी। इससे स्पष्ट हो गया था कि प्रशासन किन लोगों को नोटिस देगा। इसलिए लोग एसडीएम रवीश कुमार श्रीवास्तव को अपनी पीड़ा सुना चुके हैं। वहीं, कई लोग पहले से ही अपना पक्ष बता चुके थे। स्कूल के लिए 2400 स्क्वायर फीट जमीन दिसंबर 2021 में सिद्धार्थ सिन्हा ने खरीदी थी। जमीन की जानकारी जुटाई तो यह सही बताई गई थी। इसके बाद एसडीएम ऑफिस से नामांतरण कराया। सभी अनुमति लेने के बाद ही बिल्डिंग बनाई और स्कूल संचालित करना शुरू किया। स्कूल को लेकर भी जिला शिक्षा विभाग से सभी अनुमति और मान्यता प्राप्त की गई। लोगों का भी कहना है कि जमीन खरीदते समय सारे रिकॉर्ड देखें थे। डायवर्जन, रजिस्ट्री, नक्शे, नामांकन कराया। सरकारी तौर पर जब बटांकन कराया तो आरआई-पटवारी आए। उन्होंने ही बताया था कि उनके हिस्से में कहीं कोई सरकारी जमीन नहीं है। सीमांकन में इतना कब्जा मिला था सीमांकन रिपोर्ट के अनुसार, 4 कॉलोनी के गेट, सड़क और पार्क भी कब्जे में शामिल हैं। वहीं, डायमंड सिटी कॉलोनी में 20 मकान, एक प्राइवेट स्कूल, शादी हॉल/रिसोर्ट, 1 एकड़ जमीन पर खेती, फार्म हाउस और पक्का निर्माण और 130 डेसीमल भूमि पर अवैध तरीके से खेती करना पाया गया। दुकानें, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और पेट्रोल पंप नगर निगम के हैं। वहीं, बायपास का 200 फीट हिस्सा भी पशुपालन विभाग की जमीन पर ही निकला था। ऐसे में इन्हें सरकारी प्रक्रिया में कोई राहत मिल सकती है। अब तक यह प्रक्रिया हुई     27 अगस्त को गोविंदपुरा एसडीएम रवीश कुमार श्रीवास्तव, तहसीलदार सौरभ वर्मा की मौजूदगी में 11 पटवारी और 3 राजस्व निरीक्षकों ने सीमांकन शुरू किया था।     तीन दिन के भीतर सीमांकन कार्य पूरा हो गया। इसके बाद रिपोर्ट एसडीएम और तहसीलदार को दी गई। रिपोर्ट में बताया गया कि किस रकबे में किसका और कितना कब्जा है?     इसी बीच 2 सितंबर को डायमंड सिटी समेत आसपास रहने वाले कई लोग एसडीएम ऑफिस पहुंचे और न्याय की गुहार लगाई।     3 सितंबर को यह रिपोर्ट एसडीएम श्रीवास्तव और तहसीलदार वर्मा ने कलेक्टर को पेश की।     8-9 सितंबर को चिंह्नित कब्जाधारियों को नोटिस भेजे गए।     नोटिस में 10 दिन की मोहलत दी गई है। इसलिए किया गया था सीमांकन 34 साल बाद पशुपालन विभाग को सीमांकन के पीछे भोपाल के मछली परिवार पर हुई कार्रवाई है। ड्रग्स और रेप केस के मामले में इस परिवार के दो सदस्य जेल में बंद है, जबकि अन्य पर भी कार्रवाई की जा रही है। इसके बाद 30 जुलाई और फिर 21 अगस्त को जिला प्रशासन ने दो बड़ी कार्रवाई करते हुए 7 बड़े अवैध निर्माण जमींदोज कर दिए। ये सभी सरकारी जमीन पर बनाए जाना सामने आए। इस जमीन की कीमत सवा सौ करोड़ रुपए आंकी गई। इसी बीच पशुपालन विभाग ने गोविंदपुरा एसडीएम श्रीवास्तव और तहसीलदार वर्मा को एक आवेदन दिया, जिसमें कहा गया कि उनकी जमीन पर भी कब्जा हो सकता है। इसलिए सीमांकन किया जाए। प्रशासन ने पड़ताल की तो कब्जे की बात सही निकली। इसके बाद मछली परिवार समेत 20 लोगों को नोटिस दिए गए। इन्हें भी सीमांकन के दौरान मौजूद रहने को कहा गया था। हालांकि, मछली परिवार की तरफ से वकीलों ने अपना पक्ष भी रखा। कहा कि जमीन पर उनका कब्जा नहीं है।