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भेड़ाघाट-लम्हेटाघाट को मिलेगी विश्व धरोहर की मान्यता? प्राचीन चट्टानों और भूगर्भीय रहस्यों से भरा क्षेत्र

जबलपुर  भेड़ाघाट व लम्हेटाघाट की चट्टानें यूनेस्को के विश्व धरोधर सूची में शामिल होने के करीब पहुंच गई हैं। जिसके बाद नर्मदा तट पर बसे जबलपुर की प्राचीन धरा को अब पूरी दुनिया में पहचान मिलेगी। भूगर्भ शास्त्र के अनुसार दो हजार करोड़ वर्ष पुरानी जबलपुर के नर्मदा तट की चट्टानें सदियों से पृथ्वी की कई संरचनाओं के निर्माण की गवाह रही हैं। कुछ वर्ष पहले यूनेस्को ने भेड़ाघाट और लम्हेटाघाट (भूगर्भशास्त्र में लमेटा फार्मेशन के नाम से विख्यात) की चट्टानों को विश्व धरोहर सूची में शामिल करने का निर्णय किया और वर्ष 2021 में लम्हेटा यूनेस्को की संभावित सूची में शामिल हुआ। संगमरमर के पत्थरों को चीरकर निकलती नर्मदा के इस तट को दुनिया के प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों की सूची में लाने के लिए वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट आफ इंडिया (डब्ल्यूआइआइ), जियोलाजिकल सर्वे आफ इंडिया, मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड समेत राष्ट्रीय स्तर की अन्य एजेंसी कार्य कर रही हैं। विशेषज्ञों के दल ने किया दौरा विशेषज्ञों का एक दल ने भेड़ाघाट, लम्हेटा का दौरा किया और इस बात पर सहमति जताई कि यह स्थल अगले दो वर्ष के अंदर यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में स्थायी रूप से नाम दर्ज करवा लेगा। डब्ल्यूआइआइ के विषय विशेषज्ञ भूमेश सिंह भदौरिया ने बताया कि यह साइट प्राकृतिक श्रेणी में भूगर्भ के महत्व के लिहाज से देश की पहली अति प्राचीन धरोहर होगी। इधर, डब्ल्यूआईआई द्वारा तैयार प्रारंभिक मूल्यांकन को यूनेस्को ने स्वीकार कर लिया है। इसके साथ ही नामांकन प्रक्रिया आरंभ हो चुकी है। आगे यूनेस्को से प्रारंभिक मूल्यांकन की रिपोर्ट आने के बाद नामांकन डोजियर यूनेस्को को सौंपा जाएगा। डोजियर जमा होने के बाद यूनेस्को के इंटरनेशनल यूनियन फार कंजर्वेशन आफ नेचर (आइयूसीएन) का मूल्यांकन दल स्थल का निरीक्षण करेगा। इस पूरी प्रक्रिया में लगभग दो वर्ष का समय लगेगा। क्या है भूगर्भीय महत्व भेडाघाट और इसके निकट दो हजार से बाइस सौ करोड़ वर्ष पुरानी चट़टानों से लेकर पंद्रह लाख वर्ष पुरानी चट्टानें मौजूद हैं। इस समयावधि के बीच पृथ्वी में हुई भू वैज्ञानिक गतिविधियों के प्रमाण यहां मौजूद हैं। यहां की इगनिंग बराइट नाम की चटटानें इस बात का प्रमाण हैं कि यहां कभी ज्वालामुखी फटने जैसी घटनाएं भी हुई थीं। यहां नर्मदा नदी का प्रवाह के परिवर्तन प्रमाण में देखने मिलते हैं जिसे नदी अपहरण कहा जाता है। नर्मदा के इस तट को पूरे विश्व में लमेटा फार्मेशन के नाम से जाना जाता है। भूगर्भ शास्त्रियों के लिए यह स्थल बेहद महत्वपूर्ण हैं क्योंकि यहां विभिन्न समय कालखंड की चट़टानों के साथ-साथ डायनासोर के अंडों के फासिल भी मिले हैं। केंद्र के निर्देश पर चल रही प्रक्रिया केंद्रीय पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के निर्देश पर शुक्रवार को विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने भेड़ाघाट, लम्हेटाघाट के स्थलों का निरीक्षण किया। दल में वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट आफ इंडिया के विज्ञानी डा. गौतम तालुकदार, विषय विशेषज्ञ भूमेश सिंह भदौरिया, प्रोजेक्ट एसोसिएट दीपिका सायरे एवं स्नेहा पांडे, जियोलाजिकल सर्वे आफ इंडिया के डा. सुहेल अहमद, सर्वे आफ इंडिया के जयप्रकाश पाटीदार, कुलदीप सिंह बागरी, हेमंत तथा भेडाघाट नगर परिषद के सीएमओ विक्रम सिंह तथा मध्य प्रदेश टूरिज्म कार्पोरेशन के मार्केटिंग प्रमुख योगेंद्र रिछारिया, जीएम अमित सिंह आदि शामिल थे। 2200 करोड़ साल पुरानी हैं चट्टानें     लम्हेटाघाट में 2200 करोड़ साल पुरानी चट्टानें हैं इन्हें महाकोशल राक कहा जाता है। करोड़ों साल पहले यहां समुद्र था जिसके किनारे नमी में डायनासोर प्रजनन करते थे। अंडे देते थे। करीब 65 करोड़ साल पहले लम्हेटा में ज्वालामुखी फटा जिसका लावा ठंडा होकर लम्हेटाघाट की चट्टानों में बदल गया। प्राकृतिक रूप से यह अदभुत है कि यहां की चट्टानों में खड़े हो तो एक पैर जिस चट्टान पर होगा वह 22 करोड़ साल पुरानी होगी वहीं दूसरा पैर जिस पर रखा होगा वह 65 करोड़ साल पुरानी। ये बेहद दुर्लभ है। देश में प्राकृतिक श्रेणी में भूगर्भीय महत्व वाली यह पहली साइट है। – भूमेश सिंह भदौरिया, विषय विशेषज्ञ, वर्ल्ड हेरिटेज नर्मदा घाटी रहस्य समेटे हुए है     मां नर्मदा पृथ्वी पर सबसे प्राचीन और पवित्र नदियों में से एक हैं। नर्मदा घाटी अपने आप में अनेक रहस्य समेटे हुए है जो मानव सभ्यता के उन अनजान पहलुओं से अवगत कराती है जिसकी खोज में आधुनिक मानव निरंतर प्रयत्नशील है। नर्मदा मैया के तट पर संगमरमर की चट्टानें करोडों वर्ष के भूगर्भीय परिवर्तन की मूक गवाह हैं जो मानव मात्र को अचंभित कर देती है। जबलपुर का लम्हेटा और भेड़ाघाट यूनेस्को की विश्व धरोहरों की स्थायी सूची में अपना गहरा हस्ताक्षर दर्ज कराने की कगार पर है। इस स्थल को विश्व पर्यटन मानचित्र पर लाने के लिए मध्य प्रदेश पर्यटन निरंतर प्रयत्नशील है।- शिव शेखर शुक्ल, पर्यटन सचिव, एमडी मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड  

शिक्षकों को मिलेगा सरकारी मकान, मध्यप्रदेश में स्कूलों के पास बनेगा आवास

भोपाल  स्कूलों में नियमित पढ़ाई हो सके इसके लिए मध्यप्रदेश शिक्षा विभाग स्कूलों के पास शिक्षकों को मकान बनाकर देगा। यह महिला शिक्षकों(Government Teacher) के लिए होंगे। लोक शिक्षण संचालनालय इसकी डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करेगा। यह रिपोर्ट जिलों से मिली जानकारी के आधार पर बनेगी। आवास ऐसे स्कूलों के आसपास बनेंगे जहां आवाजाही मुश्किल होती है। लोक शिक्षण ने सभी जिलों को इसके लिए निर्देश भेजे थे। जिलों से जमीन तलाश करने के बाद उसकी रिपोर्ट मांगी थी। बारिश के कारण इस काम में रुकावट आई। इसे अब फिर शुरू किया जाएगा। विभाग के निर्देश के तहत हर जिले में 100 आवास बनेंगे। महिला शिक्षकों के लिए प्राथमिकता होगी। तीन से पांच एकड़ में बहुमंजिला इमारत इस प्रोजेक्ट के तहत फ्लैट दिए जाने हैं। यानि विभाग बहुमंजिला इमारतें तैयार कराएगा। हर जिले से इन इमारतों के लिए तीन से पांच एकड़ जमीन को चिन्हित कर रिपोर्ट मांगी गई थी। यह पहला चरण है। हर विकासखंड मुख्यालय पर 100 आवास बनाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसके लिए 3 से 5 एकड़ जमीन की आवश्यकता होगी। लोक शिक्षण संचालनालय के संचालक डीएस कुशवाहा ने इसके संबंध में निर्देश जारी किए गए थे। जिलों से मिली रिपोर्ट के आधार पर अब समीक्षा होना है। इन्हें मिलेगा लाभ मध्यप्रदेश में 94 हजार स्कूल हैं। इनमें एक लाख से अधिक महिला शिक्षक(Government Teacher) हैं। ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में इनकी संख्या 25 हजार से अधिक है। वहीं फिलहाल मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार गांवों और छोटे जिलों के स्कूलों में पदस्थ शिक्षकों के लिए ही घर का निर्माण कराने की तैयारी कर रहा है।

कम उपयोग में पीएमश्री एयर एंबुलेंस सेवा, 4 महीने में सिर्फ 85 मरीजों ने लिया लाभ

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की महत्वाकांक्षी योजना 'पीएमश्री एयर एंबुलेंस सेवा' की उपयोगिता पर सवाल उठाने लगे हैं। इस सेवा के उपयोग में न जनता रुचि ले रही, न ही जनप्रतिनिधि और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी। मई 2024 में प्रारंभ हुई इस सेवा से अभी तक 85 रोगियों को ही प्रदेश के भीतर या दूसरे राज्य में उपचार के लिए पहुंचाया गया है। खास बात यह है कि एंबुलेंस का उपयोग हो या नहीं, पर सरकार की तरफ से एंबुलेंस का संचालन करने वाली कंपनी को प्रतिमाह नियत घंटों के किराये का भुगतान करने की शर्त है। सरकार हेलीकाप्टर का 40 घंटे और हवाई जहाज का 60 घंटे का फिक्स किराया कंपनी को देती है, पर इतने घंटे भी सेवा नहीं ले पा रही है। हेलीकाप्टर का किराया प्रतिघंटे सवा तीन लाख रुपये और हवाई जहाज का दो लाख रुपये है। यानी एक करोड़ 30 लाख रुपये हेलीकाप्टर और एक करोड़ 20 लाख रुपये हवाई जहाज का किराया सरकार प्रति माह चुका रही है, जबकि प्रतिमाह औसतन पांच रोगी ही योजना का लाभ उठा रहे हैं। लाभ उठाने वालों में सबसे ज्यादा रीवा के कुल 85 मरीजों ने अब तक योजना का लाभ उठाया है, जिनमें सबसे ज्यादा रीवा के 30 (35 प्रतिशत) रोगी हैं। इसका प्रमुख कारण यह है कि रीवा उप मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राजेन्द्र शुक्ल का गृह जिला है। वह यहां बैठकों और आम सभाओं में सेवा का उपयोग करने के लिए अपील करते रहे हैं। इस तरह लगभग 16 माह में प्रदेश के 55 में से 17 जिलों के रोगियों को ही इसका लाभ मिला है। यह स्थिति तब है जब खुद मुख्यमंत्री इस सेवा का अधिक से अधिक प्रचार-प्रसार करने के लिए अधिकारियों को निर्देशित करते रहे हैं। ऐसे ले सकते हैं मदद आयुष्मान योजना के हितग्राहियों के लिए यह सेवा निश्शुल्क मिलती है। अन्य मरीजों को निर्धारित दर पर भुगतान करना होता है। जरूरत के मुताबिक, रोगी को एक शहर से दूसरे शहर या दूसरे राज्य एयरलिफ्ट किया जाता है। दूसरे राज्य के अस्पताल भेजने के लिए सीएमएचओ की अनुशंसा पर कलेक्टर अनुमति देते हैं। रीवा दूर होने के कारण लोग इस सेवा की मदद ले रहे हैं     भौगोलिक रूप से रीवा दूर होने के कारण त्वरित उपचार के लिए लोग इस सेवा की मदद ले रहे हैं। दूसरा यह कि लोगों में वहां जागरूकता भी अच्छी है। अन्य जिलों के अधिकारियों को भी प्रचार-प्रसार के लिए लगातार कहा जा रहा है। – तरुण राठी, आयुक्त, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा  

पावर जनरेटिंग कंपनी के ताप विद्युत गृह सारनी की यूनिट 10 ने 200 दिन तक किया लगातार उत्पादन

भोपाल मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी(MPPGCL) के सतपुड़ा ताप विद्युत गृह सारनी (STPS) की 250 मेगावाट क्षमता की यूनिट नंबर 10 ने अभियंताओं व तकनीकी कर्मियों के असाधारण समर्पण व कड़ी मेहनत की बदौलत 200 दिन तक सतत् और निर्बाध विद्युत उत्पादन करने में सफलता हासिल की है। यह यूनिट इस वर्ष 5 मार्च से अभी तक लगातार विद्युत उत्पादन कर रही है। ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने सारनी की यूनिट नंबर 10 के अभियंताओं व तकनीकी कर्मियों को इस गौरवशाली उपलब्ध‍ि पर बधाई दी है। पिछले 12 वर्षों में रचे नए कीर्तिमान सतपुड़ा ताप विद्युत गृह सारनी की 250 मेगावाट क्षमता की यूनिट नंबर 10 की कमीशनिंग 18 अगस्त 2013 को हुई थी। पिछले बारह वर्षों में इस यूनिट ने विद्युत उत्पादन और ऑपरेशन के नए कीर्तिमान रचे। यूनिट नंबर 10 ने वित्तीय वर्ष 2022-23 में 305 दिन तक लगातार विद्युत उत्पादन करने का रिकार्ड बनाया था। वर्ष 2023-24 में इस यूनिट ने क्रमश: 170 व 200 दिनों तक लगातार विद्युत उत्पादन करने का कीर्तिमान बनाया था। यूनिट ने अर्जित किया 98.34% पीएएफ सतपुड़ा ताप विद्युत गृह सारनी की यूनिट नंबर 10 ने जब 200 दिनों तक लगातार विद्युत उत्पादन करने में सफलता हासिल की तब यूनिट का प्लांट अवेलेबिलिटी फेक्टर (पीएएफ) 98.34 फीसदी, प्लांट लोड फेक्टर 84.23 फीसदी व ऑक्जलरी कंजम्पशन 8.94 प्रतिशत रहा।  

ग्रामीण अंचल के अंतिम छोर और अंतिम किसान तक पहुंचे कृषि नवाचार के फायदे

‘डिजिटल-कृषि’ नवाचार से सीमांत किसानों को सशक्त बनाने की पहल आईआईटी इंदौर में हुई ‘एग्रीकनेक्ट’ कार्यशाला भोपाल कृषि नवाचार के फायदे ग्रामीण अंचल के अंतिम छोर और अंतिम किसान तक पहुंचने चाहिए तभी खेती को लाभ का सौदा बनाकर किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाया जा सकेगा। डिजिटल कृषि के माध्यम से किसानों को सशक्त बनाने के उद्देश्य से आईआईटी इंदौर में सी-डैक पुणे, आईसीएआर-एनएसआरआई इंदौर और आईसीएआर-सीआईएई भोपाल के सहयोग से दो दिवसीय एग्रीकनेक्ट कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्य़शाला में एमईआईटीवाई के संयुक्त सचिव श्री के. के. सिंह ने बताया कि किसानों को सशक्त बनाने में डिजिटल कृषि नवाचार की भूमिका महत्वपूर्ण है। कार्याशाला के तकनीकी सत्रों में फसल सुधार, सटीक कृषि, ड्रोन अनुप्रयोग, और एआई-संचालित कीट व रोग निदान जैसे विषयों पर प्रकाश डाला गया। आईसीएआर-आईएएसआरआई, नई दिल्ली के डॉ. अनिल राय ने डिजिटल डिसीडन-सपोर्ट-सिस्टम को अपनाये जाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इससे सीमित संसाधनों वाले किसानों को सही निर्णय लेने में सहयोग मिलेगा। कार्यशाला में गैर-सरकारी संगठन, उद्योग प्रतिनिधि, किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) एवं कामदार ग्रुप और हाईमीडिया लैब जैसे स्टार्टअप्स ने हिस्सा लिया। इंटरैक्टिव गोलमेज बैठकों में नकली उर्वरकों की पहचान, किफायती तकनीकों, और बाजार पहुंच जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। पीआई, एग्रीहब, आईआईटी इंदौर की प्रोफेसर अरुणा तिवारी ने कृषि नवाचारों को गांव-गांव और प्रत्येक किसान तक पहुंचाये जाने की आवश्यकता जताई। कार्यशाला में आये प्रतिभागियों सहमित जताई कि एग्रीहब मॉडल, कृषि नवाचार, डिजिटल परिवर्तन और किसान सशक्तिकरण के लिए राष्ट्रीय अधो-संरचना के रूप में प्रभावी भूमिका निभा सकता है।  

राज्य स्तरीय वन खेल-कूद प्रतियोगिता-2025 का समापन

अखिल भारतीय वन खेल-कूद प्रतियोगिता में विजेता खिलाड़ी करेंगे प्रदेश का नेतृत्व भोपाल राज्य स्तरीय 28वीं वन खेल-कूद प्रतियोगिता का समापन रविवार को टी.टी. नगर स्टेडियम, भोपाल में हुआ। प्रतियोगिता में विजेता खिलाड़ी उत्तराखण्ड में 12 से 16 नवम्बर तक 28वीं अखिल भारतीय वन खेल-कूद प्रतियोगिता में भाग लेकर प्रदेश का नेतृत्व करेंगे। अपर मुख्य सचिव वन श्री अशोक बर्णवाल ने प्रतियोगिता में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को मेडल एवं प्रमाण-पत्र देकर पुरस्कृत किया। प्रतियोगिता में बेस्ट एथलेटिक्स का पुरस्कार प्रबंध संचालक मध्यप्रदेश राज्य लघु वनोपज संघ डॉ. समिता राजौरा को दिया गया। अखिल भारतीय वन खेल-कूद प्रतियोगिता में शामिल होने के लिये भोपाल में एक अभ्यास शिविर का आयोजन किया गया। समापन समारोह में पुलिस बैण्ड पार्टी द्वारा शानदार प्रस्तुति दी गयी और खिलाड़ियों द्वारा मार्चपास्ट किया गया। इस अवसर पर प्रधान मुख्य वन संरक्षक, वन बल प्रमुख श्री व्ही.एन. अंबाड़े और वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।  

घर वापसी की धमकी और गंगाजल-गौमूत्र का ज़िक्र: गरबा आयोजन में लगा भड़काऊ पोस्टर

भोपाल  मध्य प्रदेश में नवरात्रि से पहले गरबा उत्सवों को लेकर सनातनी संगठनों का सख्त रुख देखने को मिल रहा है. राजधानी भोपाल में श्रीकृष्ण सेवा समिति ने गरबा पंडालों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर चेतावनी जारी की है. कमेटी ने पंडालों पर पोस्टर लगाए हैं, जिनमें लिखा है कि गैर-हिंदू यदि गरबा में आएंगे तो उनकी 'घर वापसी' कराई जाएगी.  पोस्टर पर जूते-चप्पल, लट्ठ की फोटो के साथ 'जिहादियों की उचित व्यवस्था की जाएगी' का संदेश दिया गया है. कमेटी के कार्यकर्ता हाथों में लट्ठ लेकर पंडालों पर तैनात रहेंगे. श्रीकृष्ण सेवा समिति के अध्यक्ष गोपाल ठाकुर ने कहा, "हम गरबा देखने आने वालों को गंगाजल पिलाएंगे और गौमूत्र छिड़केंगे." पूछने पर उन्होंने स्पष्ट किया कि कार्यकर्ता आत्मरक्षा के लिए लट्ठ लेकर नजर रखेंगे. हाथों में लट्ठ लेकर तैनात रहेंगे समिति के कार्यकर्ता. उधर, गरबा पंडालों पर मुस्लिम लोगों की एंट्री को लेकर बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि जिस तरह सनातन हिंदू विचारधारा के लोग हज यात्रा में नहीं जाते, उसी तरह उनके लोगों को भी गरबा में नहीं आना चाहिए. उन्होंने गरबा के मुख्य दरवाजे पर गोमूत्र रखने की सलाह भी दी.  

सम्पदा 2.0 को मिला ई-गवर्नेंस अवार्ड

पेपरलेस और फेसलेस पंजीयन की दिशा में अग्रणी बना मध्यप्रदेश : मुख्यमंत्री डॉ. यादव भोपाल डिजिटल इंडिया के सपने को साकार करते हुए मध्यप्रदेश ने एक और बड़ी उपलब्धि अपने नाम की है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अभिनव पहल संपदा 2.0 को भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस स्वर्ण पुरस्कार-2025 से नवाजा गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि पेपरलेस और फेसलेस पंजीयन की दिशा में मध्यप्रदेश अग्रणी बना है। यह सम्मान तकनीक के माध्यम से शासन व्यवस्था में परिवर्तन लाने की श्रेणी- गवर्नमेंट प्रोसेस री-इंजीनियरिंग बाई यूज ऑफ टेक्नोलॉजी फॉर डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन-में प्रदान किया गया है। विशाखापट्टनम में ई-गवर्नेंस पर आयोजित नेशनल कॉन्फ्रेंस में केन्द्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह एवं सचिव भारत सरकार डीएआरपीजी श्री वी. श्रीनिवास ने महानिरीक्षक पंजीयन श्री अमित तोमर तथा संपदा परियोजना अधिकारी श्री स्वप्नेश शर्मा को यह अवार्ड प्रदान किया। ई-गर्वेनेंस अवार्ड मिलना प्रदेश के लिए ऐतिहासिक : उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा उप मुख्यमंत्री श्री जगदीश देवड़ा ने इस उपलब्धि को प्रदेश के लिए ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि सम्पदा 2.0 ने संपत्ति एवं दस्तावेजों के पंजीयन को पूर्णत: पेपरलेस और फेसलेस बना दिया है। उन्होंने बताया कि यह प्रणाली नागरिकों को बिना कार्यालय आए सुरक्षित और सरल पंजीयन की सुविधा देती है, जिससे पारदर्शिता और दक्षता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि इस पुरस्कार ने केवल प्रदेश की तकनीकी दक्षता को प्रमाणित किया है, बल्कि सुशासन और नागरिक सेवाओं में पारदर्शिता और गति लाने की दिशा में मध्यप्रदेश की प्रतिबद्धता को भी रेखांकित किया है। उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और गुड गवर्नेंस के क्षेत्र में लगातार नई पहचान बना रहा है। सम्पदा 2.0 से न केवल प्रशासनिक कार्यप्रणाली में सुधार हुआ है, बल्कि निवेश और व्यावसायिक वातावरण को भी मजबूती मिली है। उन्होंने परियोजना से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों को बधाई देते हुए कहा कि यह पुरस्कार मध्यप्रदेश के सुशासन मॉडल की राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठा को दर्शाता है। मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है जिसने दस्तावेजों का पूर्णतः पेपरलेस ई-पंजीयन प्रारंभ किया है। भारतीय स्टाम्प अधिनियम के अंतर्गत लगभग 140 प्रकार के दस्तावेजों में से 75 दस्तावेजों का फेसलेस पंजीयन वीडियो केवाईसी के माध्यम से संभव हुआ है। यह प्रक्रिया छद्मरूपण एवं भूमि विवादों को कम करने में सहायक सिद्ध हो रही है। सम्पदा 2.0 में जीआईएस तकनीक सहित आधुनिक डिजिटल सुविधाएं उपलब्ध हैं। अब नागरिक कहीं से भी, कभी भी www.sampada.mpigr.gov.in पोर्टल अथवा मोबाइल एप से ई-स्टाम्प प्राप्त कर सकते हैं और राज्य की किसी भी क्षेत्र की गाइडलाइन दरें तत्काल देख सकते हैं। पंजीयन पूर्ण होते ही दस्तावेज ईमेल और व्हाट्सऐप पर उपलब्ध हो जाते हैं। गौरतलब है कि पिछले वर्ष भी मध्यप्रदेश को राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार राज्य को लास्ट माइल कनेक्टिविटी श्रेणी में उत्कृष्ट कार्य के लिए प्राप्त हुआ था। लगातार दूसरे वर्ष राष्ट्रीय स्तर पर हासिल यह उपलब्धि प्रदेश की तकनीक आधारित पारदर्शी कार्यप्रणाली और सुशासन के प्रति प्रतिबद्धता को और मजबूत करती है।  

सात-समंदर पार धार के बाग-प्रिंट की धूम

मध्यप्रदेश के शिल्पकार मोहम्मद खत्री "मास्टर ऑफ द बेस्ट क्रॉफ्ट" अवॉर्ड से सम्मानित कोकन अंतर्राष्ट्रीय हस्तशिल्प महोत्सव में बाग प्रिंट को मिली मान्यता भोपाल भारत की अनमोल धरोहर और मध्यप्रदेश के धार जिले की शान बाग प्रिंट ने एक बार फिर वैश्विक मंच पर अपनी चमक बिखेरी है। उज़्बेकिस्तान के ऐतिहासिक शहर कोकन में 19 से 21 सितंबर तक आयोजित अंतर्राष्ट्रीय हस्तशिल्प महोत्सव-2025 में बाग प्रिंट के युवा शिल्पकार मोहम्मद खत्री ने अपनी अद्भुत कारीगरी से सबका मन मोह लिया। इस महोत्सव में 70 देशों के 278 मास्टर कारीगरों ने भाग लिया। भारत से केवल 2 शिल्पकार महोत्सव में शामिल हुए। महोत्सव में श्री मोहम्मद खत्री को उनकी बाग प्रिंट कला और परंपरा के संरक्षण के लिये "मास्टर ऑफ द बेस्ट क्रॉफ्ट" के अवार्ड से सम्मानित किया गया। यह अवार्ड उन्हें उज़्बेकिस्तान के फरगना रीजन के गवर्नर ख़ैरुल्लो बोज़ारोव ने प्रदान किया। विदेशी फैशन डिजाइनर्स और कला समीक्षकों ने भी माना कि श्री खत्री की बाग प्रिंट कला "विश्वस्तरीय फैशन का भविष्य" है। उन्होंने इसे सस्टेनेबल टेक्सटाइल की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया। वर्ष 2017 में श्री खत्री को बैंकॉक (थाईलैंड) में इंटरनेशनल फैशन डिजाइनर क्रिएशन अवॉर्ड से सम्मानित किया जा चुका है। वहीं मलेशिया के कुआलालम्पुर इंटरनेशनल क्रॉफ्ट्स फेस्टिवल में भी उन्होंने बाग प्रिंट की अद्वितीय छाप छोड़ी थी। देश में भी श्री खत्री निरंतर बाग प्रिंट की परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। देशभर में कई राष्ट्रीय प्रदर्शनियों में उन्होंने अपनी कला से दर्शकों का दिल जीता है। बाग प्रिंट कला के साथ संस्कृति की पहचान मोहम्म्द खत्री ने कहा कि इस सम्मान के पीछे मेरे पूर्वजों की मेहनत, परिवार की परंपरा और भारत की मिट्टी की खुशबू है। बाग प्रिंट सिर्फ एक कला नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति की पहचान है। इस कला को दुनिया के कोने-कोने तक पहुँचाना चाहता हूँ ताकि आने वाली पीढ़ियाँ भी अपनी परंपरा और संस्कृति से जुड़ी रहें।  

प्रधानमंत्री जन-मन योजना से सहरिया समुदाय को मिला नव जीवन : राज्यपाल पटेल

राज्यपाल ने युवाओं से समाज सेवा के लिए आगे आने का किया आह्वान भोपाल राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना और आयुष्मान कार्ड की सुविधाओं से जनजातीय समुदाय को नव जीवन मिला है। उन्होंने कहा कि जनजातीय बहुल क्षेत्रों के भ्रमण के दौरान उन्होंने आवास हितग्राहियों से चर्चा की है। सभी का कहना है कि उनके मकान पक्के होंगे, सोचा भी नहीं था। लोक शक्ति रथ के यात्रियों ने आयुष्मान भारत योजना को सभी के लिए जीवन दायिनी बताया है। राज्यपाल  पटेल सोमवार को मुरैना विकासखंड के ग्राम धनेला में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने टीबी रोगियों से मुलाकात की और रोगियों को निक्षय मित्र के रूप में फलों की टोकरी भेंट की। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि युवा पीढ़ी को समाज सेवा के कार्यों में सहभागिता करनी चाहिए। वंचितों और गरीबों की सेवा के लिए अपना कर्तव्य समझकर आगे आना चाहिए। समाज की सेवा का सबसे प्रभावी तरीका शिक्षा है। शिक्षित युवाओं का आव्हान किया है कि सेवा पखवाड़े के दौरान सेवा के कार्यों में आगे बढ़कर सहभागिता करें। उन्होंने कहा कि टी.बी. एक रोग मात्र है और नियमित दवाएं, उचित पोषण से मरीज 6 माह में ठीक हो सकते हैं। जरूरत रोग के बारे में सही जानकारी होने और उचित दवाएं लेने की है। उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा चलाए गए सेवा पखवाड़े के दौरान 2 अक्टूबर तक स्वास्थ्य शिविर लग रहे हैं। जाँच के साथ ही जरूरत के अनुसार दवाएं भी निःशुल्क दी जा रही है। राज्यपाल   पटेल ने कहा कि सरकार द्वारा जनजातीय आबादी के कल्याण और विकास के लिए प्रदेश में धरती आबा योजना लागू की है। अत्यंत पिछड़े जनजातीय समूह बैगा, भारिया और सहरिया के विकास और कल्याण के लिए क्रांतिकारी पहल प्रधानमंत्री जन-मन योजना के द्वारा की गई है। योजना के लिए केन्द्र सरकार ने 24 हजार करोड़ रूपए का प्रावधान किया है। जनजातीय बहनों, भाईयों के लिए विकास और कल्याण के सभी कार्य और सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देशित किया कि योजना का क्रियान्वयन सुनियोजित तरीके से किया जाए। सबसे वंचित को सबसे पहले लाभान्वित करने के लिए प्राथमिकता निर्धारित कर हितग्राहियों को लाभान्वित करना चाहिए। राज्यपाल ने श्रीअन्न से बने हलवे का स्वाद चखा  राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास और आजीविका मिशन की प्रदर्शिनी का अवलोकन किया। आगनवाड़ी कार्यक्रर्ताओं द्वारा पोषण अभियान के तहत बाटे जाने वाले विभिन्न व्यंजनों के संबंध में जानकारी ली। उन्होंने श्रीअन्न (मोटे अनाज) से बने हलवे का स्वाद भी चखा और स्वास्थ्य परीक्षण शिविर में उपस्थित महिलाओं और कार्यकर्ताओं से चर्चा की। स्व-सहायता समूह द्वारा बनाए गए उत्पादों का अवलोकन किया। हितग्राहियों के गृह प्रवेश में शामिल हुए राज्यपाल  पटेल ने ग्राम धनेला में हितग्राही   दिलीप,  बंटी एवं   पप्पू सहरिया को नये आवास में प्रवेश कराया।   दिलीप सहरिया की पत्नी ने अपने घर की सुखद अनुभूतियां राज्यपाल के साथ साझा की। इस अवसर पर सांसद   शिवमंगल सिंह तोमर, जिला पंचायत अध्यक्ष  आरती गुर्जर, सबलगढ़ विधायक  सरला रावत एवं प्रशासनिक अधिकारी सहित अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।