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विधानसभा में बड़ा बदलाव: अरविंद शर्मा नए प्रमुख सचिव, AP सिंह की ढाई साल बाद सेवानिवृत्ति

भोपाल  लोकसभा से प्रतिनियुक्ति पर मध्य प्रदेश विधानसभा आए सचिव अरविंद शर्मा का संविलियन मध्य प्रदेश विधानसभा में हो चुका है. अब उन्हें इस माह के अंत में मध्य प्रदेश विधानसभा के प्रमुख सचिव के पद पर प्रमोट किया जाएगा. 2 साल सेवा वृद्धि और 6 महीने का संविदा नियुक्ति पूरी करके विधानसभा के मौजूदा मुख्य सचिव एपी सिंह इसी माह रिटायर होने जा रहे हैं. मध्यप्रदेश विधानसभा के प्रमुख सचिव एपी सिंह इस महीने 30 सितंबर को रिटायर होने वाले हैं और अब उनके पुनर्नियुक्ति की संभावना नहीं है। इसे देखते हुए विधानसभा में सचिव की जिम्मेदारी निभा रहे अरविंद शर्मा को नया प्रमुख सचिव बनाए जाने की संभावना है। प्रमुख सचिव की नियुक्ति का अधिकार विधानसभा अध्यक्ष को होता है। चूंकि अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ही अरविंद शर्मा को लोकसभा से प्रतिनियुक्ति पर लेकर आए थे, इसलिए उनका प्रमुख सचिव बनना लगभग तय माना जा रहा है। 1 अक्टूबर से मिल सकती है जिम्मेदारी वर्तमान प्रमुख सचिव एपी सिंह को मानसून सत्र के दौरान सदन में स्वयं विधानसभा अध्यक्ष ने विदाई दी थी और विधायकों से शुभकामनाएं दिलाई थीं। इससे यह संकेत स्पष्ट हो गया था कि एपी सिंह का कार्यकाल आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। ऐसे में यह माना जा रहा है कि एपी सिंह का कार्यकाल अब नहीं बढ़ेगा और नया प्रमुख सचिव नियुक्त किया जाएगा। अरविंद शर्मा की दावेदारी सबसे मजबूत विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने विधानसभा चुनाव के बाद अध्यक्ष बनने के बाद अरविंद शर्मा को लोकसभा से प्रतिनियुक्ति पर लाकर विधानसभा सचिव बनाया था। एक साल की प्रतिनियुक्ति के बाद उनका संविलियन विधानसभा में हो गया। वर्तमान में वे 60 साल की उम्र पार कर चुके हैं और विधानसभा नियमों के अनुसार वे 62 साल की उम्र तक सेवा में रह सकते हैं। इस हिसाब से यदि उन्हें प्रमुख सचिव बनाया जाता है, तो वे अगले दो सालों तक इस पद पर कार्यरत रह सकते हैं। चूंकि स्पीकर की पसंद वे स्वयं हैं, इसलिए उनकी नियुक्ति लगभग तय मानी जा रही है। दूसरी बार सेवा हुई वृद्धि विधानसभा के प्रमुख सचिव एपी सिंह ढाई साल पहले सेवानिवृत्ति हो रहे थे. उन्हें साल 2023-24 के लिए एक साल की सेवा वृद्धि दी गई. इसके बाद 2024-25 में दूसरी बार 1 साल की सेवा वृद्धि दी गई. यह कार्यकाल 5 महीने पहले समाप्त हो गया था. इसके बाद 6 महीने की संविधान नियुक्ति प्रमुख सचिव के पद पर दी गई थी. यह अवधि इसी महीने 30 सितंबर को खत्म हो रही है. मध्य प्रदेश विधानसभा में हुआ संविलियन विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने मध्य प्रदेश में विधानसभा के कामों के लिए अरविंद शर्मा को सचिव बनाकर प्रतिनियुक्ति पर मध्य प्रदेश लेकर आए थे. अब उनका संविलियन मध्य प्रदेश विधानसभा में कर दिया गया है. मध्य प्रदेश विधानसभा के मौजूदा प्रमुख सचिव एपी सिंह का इसी महीने 30 सितंबर को कार्यकाल समाप्त हो रहा है. इसके बाद अरविंद शर्मा विधानसभा के प्रमुख सचिव बन जाएंगे. प्यासी का सबसे ज्यादा लंबा रहा कार्यकाल मध्य प्रदेश विधानसभा के पांचवें प्रमुख सचिव के तौर पर अरविंद शर्मा जिम्मेदारी संभालने वाले हैं. इससे पहले अवधेश प्रताप सिंह, भगवान देव इसरानी, राजकुमार पांडे और ए के प्यासी मध्य प्रदेश विधानसभा के प्रमुख सचिव रह चुके हैं. सभी विधानसभा प्रमुख सचिव में सबसे लंबा डॉक्टर एके पयासी का कार्यकाल रहा है साल 2002 से लेकर 2011 तक विधानसभा प्रमुख सचिव की जिम्मेदारी में रहे थे. हालांकि की 9 से 10 साल तक अवधेश प्रताप सिंह भी प्रमुख सचिव विधानसभा की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं. एपी सिंह को सेवा विस्तार की उम्मीद नहीं एपी सिंह पहले ही 62 साल की उम्र में रिटायर हो चुके हैं, फिर उन्हें दो साल का विस्तार और फिर 6 महीने की संविदा सेवा दी गई थी, जो 30 सितंबर को समाप्त हो रही है। अब वे 64 साल से ज्यादा के हो चुके हैं और स्पीकर द्वारा उन्हें औपचारिक विदाई दी जा चुकी है, इसलिए सेवा बढ़ाने की संभावना नहीं बची है। हालांकि सिंह ने प्रमुख सचिव के रूप में विधानसभा में लंबा कार्यकाल पूरा किया है। डीजे को पीएस बनाने का स्पीकर को है पावर विधानसभा अधिनियम के तहत स्पीकर के पास यह भी अधिकार है कि वे जिला न्यायाधीश (डीजे) स्तर के अधिकारी को भी प्रमुख सचिव नियुक्त कर सकते हैं। लेकिन सूत्रों के अनुसार फिलहाल इसकी संभावना कम है, क्योंकि अरविंद शर्मा ही स्पीकर की प्राथमिकता में हैं। विधानसभा सचिव पद की स्थिति विधानसभा में सचिव के दो पद होते हैं। फिलहाल एक पद पर अरविंद शर्मा कार्यरत हैं जबकि दूसरा पद रिक्त है। चूंकि प्रमोशन में आरक्षण का मामला कोर्ट में लंबित है, इसलिए अगर शर्मा को प्रमुख सचिव बनाया जाता है, तो सचिव के दोनों पद कुछ समय के लिए रिक्त रखे जा सकते हैं और जिम्मेदारियां प्रभार से संचालित की जा सकती हैं। विधानसभा में अपर सचिव के चार पद हैं, जिनमें से तीन भरे हुए हैं जबकि एक पद रिक्त है।  

इंदौर और उज्जैन में जल्द शुरू होगी सस्ती सुगम परिवहन सेवा, मार्च से यात्रियों के लिए सुविधा

इंदौर  मध्य प्रदेश में सुगम परिवहन सेवा प्रारंभ करने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने डेडलाइन तय कर दी है। अब हर हाल में मार्च के पहले बसों का संचालन प्रारंभ किया जाएगा। सबसे पहले इंदौर और इसके बाद उज्जैन से सेवा प्रारंभ की जाएगी। मुख्यमंत्री ने मंगलवार को मंत्रालय में परिवहन विभाग के कामकाज की समीक्षा की। यहां अधिकारियों ने बताया कि अब यातायात नियम तोड़ने पर चालानी कार्रवाई का अधिकार प्रधान आरक्षक को भी दिया जाएगा। इस संबंध में शीघ्र ही अधिसूचना जारी होने वाली है। बता दें कि वर्ष 2006 में मप्र राज्य सड़क परिवहन निगम बंद होने के बाद से सार्वजनिक परिवहन की सुविधा नहीं है। परिवहन सचिव मनीष सिंह ने बताया कि उज्जैन जिले में सार्वजनिक बस संचालन का विस्तृत सर्वे पूरा कर लिया गया है। जबलपुर और इंदौर में रूट सर्वे और श्रेणीवार संचालित बसों की संख्या का अनुमान और सर्वे भी लगभग पूरा हो गया है। वाहनों की स्पीड पर नियंत्रण जरूरी मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए अंतरविभागीय बैठक नियमित रूप से हो। सड़कों पर सुरक्षा से जुड़ी कमियां पाए जाने पर उन्हें तत्काल दूर किया जाए। बस स्टाप पर नागरिकों को साफ-सफाई के साथ आवश्यक सुविधाएं मिलें। परिवहन विभाग की राजस्व संग्रह निगरानी प्रणाली को और मजबूत करें। वाहनों की गति सीमा पर नियंत्रण बेहद जरूरी है। इसके साथ गाड़ी चलाने वाले व्यक्ति के पास आवश्यक कागजों की वैधता की जांच भी नियमित हो। परिवहन विभाग में बेहतर प्रबंधन के लिए अधिकारी-कर्मचारियों के प्रशिक्षण पर भी जोर दिया। सुगम परिवहन सेवा में हो कम से कम किराया मुख्यमंत्री ने कहा कि सुगम परिवहन सेवा में यात्रियों की सुविधाओं और कम से कम किराये पर विशेष ध्यान दिया जाए। इसमें इलेक्ट्रिक बसों के उपयोग को प्रोत्साहित करें। परिवहन सेवा के लिए बने नियमों का सख्ती से पालन हो। बसों में शहरों एवं गांवों के नाम सामने के कांच पर अनिवार्य रूप से प्रदर्शित किए जाएं। इसके साथ ही बस स्टाप पर भी गांव और नगरों के नाम लिखे हों। यात्री बसों का बीमा अनिवार्य हो। सभी कार्य नियमों के अंतर्गत हों, पारदर्शिता रहे। दिव्यांग यात्रियों का विशेष ध्यान रखा जाए। बसें फिट हों, स्टाफ का व्यवहार अच्छा हो। अप-डाउनर्स को भी आवश्यक सुविधाएं दी जाएं। इस वर्ष 16 लाख 60 हजार नए वाहन आए, जिनमें 15 प्रतिशत ईव्ही बैठक में बताया गया कि इस वर्ष 16 लाख 60 हजार वाहनों का पंजीयन किया गया है। इसमें 2 लाख 58 हजार यानी 15 प्रतिशत इलेक्ट्रिकल वाहन हैं। प्रदेश में आन रोड वाहनों की संख्या एक करोड़ 80 लाख के करीब है। परिवहन से प्राप्त होने वाली राजस्व में पिछले वर्ष के मुकाबले लगभग छह प्रतिशत की वृद्धि हुई है। बैठक में राजस्व वृद्धि के किए जाने वाले उपायों पर भी चर्चा की गई।

फार्मेसी पंजीयन पूरी तरह ऑनलाइन होगा, उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने पारदर्शिता पर जोर दिया

मध्यप्रदेश स्टेट फार्मेसी परिषद की बैठक हुई भोपाल  उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि अब ऑनलाइन प्रणाली से घर बैठे पंजीयन प्रमाणपत्र मेल और डिजिलॉकर के माध्यम से उपलब्ध होंगे। इससे पंजीयन प्रक्रिया सुव्यवस्थित हुई है और लंबित मामलों का निपटारा तेजी से किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लगभग 50 प्रतिशत विद्यार्थियों के आवेदन अपूर्ण हैं, जिन्हें समय पर पूरा करवाना आवश्यक है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल होटल पलाश भोपाल में मध्यप्रदेश स्टेट फार्मेसी परिषद की बैठक में शामिल हुए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि प्राइवेट विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों की जिम्मेदारी है कि वे सभी विद्यार्थियों की सही जानकारी उपलब्ध कराएँ। यदि गलती छात्रों की है तो उन्हें सुधार के लिये सूचित किया जाए और यदि संस्थान की लापरवाही है तो मान्यता एवं एफिलिएशन पर कार्रवाई करें। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि फार्मासिस्ट, पैरामेडिकल और नर्सिंग स्टाफ राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ हैं। विकसित और स्वस्थ भारत के लिए गुणवत्तापूर्ण मानव संसाधन उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। बैठक में जून 2025 से अगस्त 2025 तक की कार्यप्रगति की समीक्षा की गई। इसमें 3500 से अधिक नए पंजीयन सफलतापूर्वक पूर्ण हुए, 5800 आवेदन प्रक्रिया में लंबित रहे तथा 1650 आवेदन निजी विश्वविद्यालयों की सूची उपलब्ध न होने के कारण शेष रहे। बताया गया कि संपूर्ण कार्यप्रणाली को अब डिजिटल मोड पर स्थानांतरित कर दिया गया है। इसमें समग्र आईडी, डिजिलॉकर, विवाह एवं निवास प्रमाणपत्र तथा एफडीए का एकीकरण किया गया है। नई प्रणाली से स्लॉट बुकिंग एवं परिषद कार्यालय में उपस्थित होकर सत्यापन कराने की आवश्यकता समाप्त होगी और सिस्टम आधारित ऑटो वेरिफिकेशन से प्रमाणपत्र सीधे डिजिलॉकर पर उपलब्ध होंगे। यह पहल परिषद को डिजिटल गवर्नेंस में देश की अग्रणी परिषद बनाएगी। बैठक में परिषद अध्यक्ष संजय कुमार जैन, सदस्य राजू चतुर्वेदी, गौतमचंद धींग, रामरतन गर्ग, सत्येन्द्र सिंह चौहान, देवेंद्र कुमार बजाजत्य, अशोक जैन एवं डॉ. पवन दुबे सहित दिनेश मौर्य (ड्रग कंट्रोलर, म.प्र.), आत्री मुख्य विश्लेषक और चिकित्सा शिक्षा, स्वास्थ्य एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के प्रतिनिधि शामिल हुए। परिषद की रजिस्ट्रार श्रीमती भव्या त्रिपाठी ने प्रगति और आगामी योजनाओं का विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया।

शिक्षा विभाग में हड़कंप, संकुल प्रिंसिपल रिश्वत लेते पकड़ी गईं, लोकायुक्त ने किया कार्रवाई

  सांवेर सांवेर क्षेत्र के कछालिया गांव के शासकीय सांदीपनी स्कूल में रिश्वत का मामला सामने आया है। एक महिला प्रिंसिपल ने दो शिक्षकों के स्थाईकरण की फाइल जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय तक पहुंचाने के एवज में दो हजार रुपए की रिश्वत मांगी। प्रिंसिपल मनीषा पहाड़िया ने शिक्षकों से कहा था कि वह रिश्वत के पैसे लिफाफे में रखकर लाए। फाइल बढ़ाने के लिए दो हजार की रिश्वत मांगने पर दोनों शिक्षक हैरान थे। उन्होंने लोकायुक्त विभाग को इसकी शिकायत की। लोकायुक्त पुलिस ने महिला प्रिंसिपल को रंगे हाथों पकड़ने के लिए जाल बिछाया। केमिकल लगे नोट लिफाफे में रखवा कर शिकायतकर्ता शिक्षकों को दिए।  बुधवार को दोनों शिक्षक प्रिंसिपल मनीषा के केबिन में पहुंचे और लिफाफा टेबल पर रख दिया। प्रिंसिपल ने लिफाफा पर्स में रखकर कहा कि अब फाइल आगे बढ़ा दूंगी।  इस बीच लोकायुक्त की टीम इशारा पाते ही केबिन में पहुंची और महिला प्रिंसिपल को रिश्वत लेते रहेंगे हाथों पकड़ लिया। उन्होंने मनीषा के हाथ धुलवाए तो हाथ केमिकल के कारण पीले हो गए।भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रिंसिपल के खिलाफ केस दर्ज किया और रिश्वत लेने के उपयोग में लाया गया पर्स भी टीम ने जप्त कर लिया है।  पकड़े जाने के बाद प्रिंसिपल मनीषा ने कहा कि उससे गलती हो गई ,उसे रिश्वत के पैसे नहीं लेना चाहिए थे। शिकायतकर्ता शिक्षकों की चार साल पहले स्कूल में नियुक्ति हुई थी। उन्होंने तय नियम के तहत स्थाई करने के लिए प्राचार्य को फाइल जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में भेजने के लिए कहा था। प्रिंसिपल ने दोनों से फाइल आगे बढ़ाने की एवज में दोनों से एक- एक हजार रुपए मांगे थे। अब महिला प्रिंसिपल को निलंबित किया जा सकता है।  

टीकमगढ़ परीक्षण संभाग को एम.पी. ट्रांसको की सर्वोत्तम दक्षता ट्रॉफी

भोपाल  मध्यप्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी (एम.पी. ट्रांसको) के टीकमगढ़ परीक्षण संभाग ने उत्कृष्ट प्रदर्शन कर प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त किया है। इस उपलब्धि के लिए टीकमगढ़ को राज्य स्तरीय सर्वोत्तम दक्षता ट्रॉफी से सम्मानित किया गया। जबलपुर मुख्यालय में आयोजित समारोह में एम.पी. ट्रांसको के प्रबंध संचालक श्री सुनील तिवारी ने यह ट्रॉफी टीकमगढ़ टीम को प्रदान की। टीकमगढ़ की ओर से कार्यपालन अभियंता श्री आर.पी. कान्यकुब्ज, सहायक अभियंता श्री जी.पी. राय और श्रीमती चंदा यादव ने यह सम्मान ग्रहण किया। प्रबंध  संचालक श्री सुनील तिवारी ने कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद टीकमगढ़ की टीम की यह उपलब्धि सभी के लिए प्रेरणा है।

गुमशुदा मोबाइल लौटाने पर मंडला पुलिस को गोवा में किया गया सम्मानित

 मंडला भारत सरकार के दूरसंचाल विभाग द्वारा गोवा में आयोजित वेस्ट जोन वार्षिक सुरक्षा सम्मेलन आयोजित किया गया था. जिसमें पश्चिम क्षेत्र के जो कई राज्य हैं हैं, जैसे मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात, छत्तीसगढ़ शामिल हुए थे. इसमें जिसने सबसे अच्छी रिकवरी की थी, उसे सम्मानित किया गया है. मध्य प्रदेश के मंडला साइबर सेल को सम्मानित किया गया. यह क्षण आदिवासी जिला मंडला के लिए गौरव का क्षण है. मंडला पुलिस को सीईआईआर पोर्टल का इस्तेमाल कर 74 फीसदी मोबाइल रिकवरी के साथ वेस्ट जोन में पहला स्थान मिला है. मंडला पुलिस ने जब्त किए गुमशुदा मोबाइल दरअसल, मंडला पुलिस ने CEIR पोर्टल का उपयोग कर डेढ़ साल में 2031 मोबाइल जब्त किए हैं. जिसकी कीमत लगभग 3 करोड़ बताई जा रही है. उन मोबाइलों को तलाश कर पुलिस ने उनके मालिकों को सौंपे. वहीं साल 2024 में 1046 और 2025 में 985 मोबाइल पुलिस ने रिकवर किए हैं. बता दें इससे पहले मध्य प्रदेश डीजीपी द्वारा मंडला पुलिस को उनकी कार्यशैली को लेकर सम्मानित किया जा चुका है. मंडला पुलिस को 50 हजार रुपए के पुरस्कार से पुरस्कृत किया गया था. मंडला पुलिस ने इस सफलता के लिए पंच स्तरीय कार्य प्रणाली लागू की गई थी. थाना स्तर पर मोबाइल फोन की शिकायतों व अन्य साइबर फ्रॉड को ऑनलाइन दर्ज करने साइबर डेस्क का गठन किया गया था. नेशनल साइबर रिपोर्टिंग हेल्पलाइन 1930, CEIR पोर्टल व लोकल साइबर हेल्पलाइन नंबर 7587644088 का प्रचार किया गया. सभी थानों में हेल्पलाइन नंबर, स्कूल व साप्ताहिक बाजार में प्रचार, चौराहों पर फ्लेक्स बैनर लगाकर सोशल मीडिया के माध्यम से प्रचार किया गया. शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया हुई आसान थाना पर प्राप्त होने वाली सभी शिकायतों को थाना स्तर पर ही तत्काल दर्ज की गई. वहीं लोकल स्तर पर जारी हेल्पलाइन नंबर से आमजन को मोबाइल के गुम जाने वाली शिकायत दर्ज करने में आसानी हुई. खरीद बिल या IMEI नंबर अनुपलब्ध होने पर भी शिकायत प्राप्त की गई. डिस्ट्रिक्ट, थाना व बीट स्तर पर मोबाइल फोन का डिस्ट्रीब्यूसन मोबाइल फोन पहले जिला स्तर पर ट्रेस कर लिए जाते थे. अब विकेन्द्रीकृत वितरण से सीधे मोबाइल फोन को पुलिस स्टेशन स्तर पर या माइक्रो बीट पुलिसकर्मियों द्वारा दूर गांवों में लोगों के घर जाकर सौंपा गया.  

गरीबी से करोड़ों के विवाद तक: जानें ग्वालियर के कुक रविंद्र सिंह की संघर्ष भरी कहानी

ग्वालियर  मध्य प्रदेश के ग्वालियर से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है. यहां एक होटल में काम करने वाले कुक हेल्पर रविंद्र सिंह चौहान को आयकर विभाग ने 46 करोड़ रुपए का नोटिस भेज दिया. जबकि रविंद्र सिंह चौहान की सैलरी महज 8 से 10 हजार रुपए है. अचानक इतने बड़े नोटिस ने उनकी जिंदगी उलट-पुलट कर दी है. रविंद्र सिंह चौहान को समझ ही नहीं आया कि ये सब आखिर हुआ कैसे? दरअसल, भिंड के रहने वाले रविंद्र सिंह चौहान का कहना है कि वह सिर्फ खाना बनाने का काम करते हैं. उनके अकाउंट में कभी सालभर में तीन लाख रुपए का लेन-देन भी नहीं हुआ, लेकिन उनके नाम से 46 करोड़ रुपए का ट्रांजेक्शन दिखाया गया. रविंद्र सिंह चौहान ने भिंड स्थित पंजाब नेशनल बैंक से अपने खाते का पिछले पांच वर्षों का बैंक स्टेटमेंट निकलवाया. स्टेटमेंट में कुल लेन-देन तीन लाख रुपये से भी कम पाया गया, जो उन्हें काफी अजीब लगा. इस संदेह के चलते उन्होंने बैंक मैनेजर से मामले की गहराई से जांच कराने के लिए कहा. फर्जी खाता और करोड़ों का लेनदेन जांच के दौरान चौंकाने वाला खुलासा हुआ ये हुआ कि रविंद्र सिंह चौहान के नाम से दिल्ली के उत्तम नगर में एक और खाता मौजूद था और हैरान करने वाली बात ये थी कि उस खाते में अभी भी 12.5 लाख रुपये जमा हैं. जांच में सामने आया कि टोल कंपनी में काम करने के दौरान उनके सुपरवाइजर ने पीएफ के नाम पर उनके कागज लेकर फर्जी अकाउंट खुलवा दिया था. इसी खाते से करोड़ों का लेन-देन हुआ. हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया रविंद्र सिंह चौहान ने थाने और एजेंसियों से शिकायत की, लेकिन कोई मदद नहीं मिली. अब उन्होंने ग्वालियर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. इस मामले में यह भी सामने आया है कि रविंद्र के नाम पर भिंड और दिल्ली में दो खाते खुले हुए हैं, जिनमें से दिल्ली वाला खाता एक ट्रेडिंग कंपनी से जुड़ा हुआ है. अब देखना यह होगा कि हाईकोर्ट से उसे आयकर विभाग के इस भारी-भरकम नोटिस से राहत मिलती है या नहीं.  

सबलगढ़ में चीते की दहशत, जंगल से निकलकर सड़क पर चलता नजर आया ‘राजा’

मुरैना  सबलगढ़ क्षेत्र में एक बार फिर चीते की मौजूदगी से लोगों में दहशत फैल गई है। घाटी नीचे के इलाके सालई गांव में सुबह अचानक सड़क पर एक चीता टहलता हुआ नजर आया। इस नजारे को देखकर ग्रामीणों में अफरा-तफरी मच गई। कई लोगों ने चीते को अपने मोबाइल कैमरों में कैद कर लिया और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। शावक के होने की आशंका जानकारी के मुताबिक यह वही मादा चीता ‘केपी-1’ का शावक होने की आशंका है, जो कूनो नेशनल पार्क से बाहर निकलकर लंबे समय से मुरैना जिले के सबलगढ़ क्षेत्र में घूम रहा है। वन विभाग का मानना है कि यह चीता अपने सुरक्षित क्षेत्र से भटक कर घाटी नीचे के इलाके में पहुंच गया है। यह रामपुर कला और सालई गांव के पास देखा गया। ग्रामीणों ने जैसे ही सड़क पर चीते को देखा, आसपास के लोगों को सतर्क कर दिया। कुछ देर के लिए गांव में दहशत का माहौल बन गया। वन विभाग की टीम रख रही है नजर वन विभाग और चीता मित्रों की टीम लगातार इस इलाके पर नजर बनाए हुए है। टीम ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे अकेले खेतों में न जाएं, बच्चों को भी खुले में न छोड़ें। चीते के पास जाने या उसे परेशान करने की कोशिश बिल्कुल न करें। साथ ही ग्रामीणों को सलाह दी गई है कि किसी भी तरह की गतिविधि या चीते के मूवमेंट की सूचना तुरंत वन विभाग को दें, ताकि उसकी सुरक्षित ट्रैकिंग की जा सके। कई बार पार्क की सीमा से निकल जाते हैं बाहर कूनो नेशनल पार्क में नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से लाए गए चीते पिछले कुछ महीनों में कई बार पार्क की सीमाओं से बाहर निकलकर आसपास के गांवों में देखे गए हैं। हालांकि अब तक किसी तरह की जनहानि या नुकसान की खबर नहीं आई है। वन विभाग के मुताबिक चीते आमतौर पर इंसानों से दूरी बनाए रखते हैं, लेकिन उनकी सुरक्षा और ग्रामीणों की सावधानी बेहद जरूरी है। लोगों में है उत्सुकता सबलगढ़ क्षेत्र में चीते के आने से जहां दहशत का माहौल है, वहीं लोग इसे नजदीक से देखने के लिए उत्सुक भी हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि वन विभाग की गाइडलाइन का पालन किया जाए तो किसी भी तरह के खतरे से बचा जा सकता है। ग्रामीणों से लगातार शांति और सतर्कता बनाए रखने की अपील की जा रही है।

कलेक्टर का सख्त आदेश: छिंदवाड़ा में ई-अटेंडेंस में लापरवाही बर्दाश्त नहीं, शिक्षक होंगे जिम्मेदार

छिंदवाड़ा  ई-अटेंडेंस (e-attendance) नहीं लगाने वाले शिक्षकों पर कार्रवाई तय है, ई अटेंडेंस नहीं भरने वाले वि‌द्यालय इंचार्ज की सूची मांगते हुए छिंदवाड़ा कलेक्टर शीलेंद्र सिंह ने स्पष्ट कहा है कि उनके विरुद्ध कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि शिक्षकों की उपस्थिति एवं समय पालन शिक्षा की गुणवत्ता का मूल आधार है, इसलिए इस व्यवस्था में ढिलाई बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कलेक्ट्रेट में हुई बैठक कलेक्टर शीलेंद्र सिंह ने  कलेक्टर कार्यालय के सभाकक्ष में आयोजित बैठक में स्कूल शिक्षा विभाग और जनजातीय कार्य विभाग की गतिविधियों की समीक्षा की। बैठक में जिला शिक्षा अधिकारी जीएस बघेल, सहायक संचालक शिक्षा जनजातीय कार्य विभाग उमेश सातनकर, डीपीसी जगदीश इड़पाचे, जिले के सभी विकासखंड शिक्षा अधिकारी, एपीसी, बीआरसीसी उपस्थित रहे।  जेईई एवं नीट परीक्षा की तैयारी जेईई एवं नीट (JEE-NEET Exam) की तैयारी तेज समीक्षा बैठक के दौरान जिला शिक्षा अधिकारी जीएस बघेल ने सरकारी स्कूलों में संचालित जेईई एवं नीट कक्षाओं की वार्षिक कार्ययोजना की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सभी विकासखंडों में शिक्षक-विद्यार्थियों के वॉट्सएप ग्रुप बनाकर ऑनलाइन टेस्ट लिए जाएंगे। उनका रिकॉर्ड संधारित किया जाएगा। विषय विशेषज्ञों द्वारा तैयार नया पाठ्यक्रम कक्षा 11 वीं और 12 वीं के साथ जोड़ा गया है। पालकों के घरों में होगी पेरेंट-टीचर मीटिंग कलेक्टर ने नवाचार करते हुए शिक्षा विभाग के अधिकारियों एवं शिक्षकों को निर्देश दिए कि अब पेरेंट-टीचर मीटिंग (Parent-teacher meeting) सीधे पालकों के घरों में आयोजित होगी। प्रत्येक 15 दिन में कम से कम एक पालक के घर में बैठक की व्यवस्था की जाएगी, ताकि अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित हो। कलेक्टर ने शिक्षकों से आत्ममंथन करते हुए वेतन अनुरूप कार्य करने की उमीद की है। उन्होंने कहा कि हर शिक्षक को स्वयं से यह प्रश्न करना चाहिए कि उन्हें जो वेतन और सुविधाएं मिलती हैं, क्या वे उसके अनुरुप अपने कर्तव्यों का इमानदारी से निर्वहन कर रहे हैं। नियमित संचालित हों रेमेडियल कक्षाएं कलेक्टर शीलेंद्र सिंह ने रेमेडियल कक्षाएं लगातार संचालित करने के निर्देश देते हुए कमजोर वि‌द्यार्थियों की कमियों को दूर करने के निर्देश दिए ताकि वे परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन कर सकें। उन्होंने अपने दायित्वों का ईमानदारी से निर्वहन नहीं करने वाले अतिथि शिक्षकों पर कार्यवाही करने के दिए निर्देश भी दिए हैं, उन्होंने स्पष्ट किया कि अतिथि शिक्षक यदि अपने दायित्वों का ईमानदारी से निर्वहन नहीं कर रहे हैं तो उन्हें तत्काल हटाया जाए। उन्होंने अतिथि शिक्षकों को नियमित और समय पर कक्षाएं नहीं लेने पर सेवाएं समाप्त करने की हिदादयत दी। 

अब भोपाल AIIMS में लाइन में खड़े होने की जरूरत नहीं, मरीज पाएंगे तेज OPD पंजीकरण और त्वरित डॉक्टर से मिलने का मौका

भोपाल  एम्स भोपाल ने ‘एम्स स्वास्थ्य’ मोबाइल ऐप में नई डिजिटल सुविधाएं शुरू की हैं, जिनसे मरीजों का इंतजार समय कम होगा और परामर्श प्रक्रिया तेज तथा पारदर्शी बनेगी। स्वास्थ्य मंत्रालय की डिजिटल हेल्थकेयर सर्विसेज एट योर फिंगरटिप्स के आधार पर यह ऐप अब स्वास्थ्य सेवाओं का वन-स्टॉप डिजिटल प्लेटफॉर्म बन गया है। यह ऐप आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) के अनुरूप है। इसके जरिए मरीज अपना आभा आइडी बना सकते हैं या पहले से बनी आईडी को लिंक कर सकते हैं। इससे अस्पताल में बने स्वास्थ्य अभिलेख देशभर के अन्य अस्पतालों में भी आसानी से उपलब्ध हो जाएंगे। मिलेंगी नई डिजिटल सुविधाएं नई सुविधा ई-विजिट के तहत मरीज बिना कतार में लगे ओपीडी पंजीकरण कर सकते हैं। अस्पताल परिसर में लोकेशन एक्सेस देकर ऐप से खुद टिकट जेनरेट कर प्रिंट करवाया जा सकता है। ऐप से परामर्श शुल्क और ओपीडी सेवाओं का सीधे डिजिटल भुगतान भी किया जा सकता है। इससे डिजिटल प्रिस्क्रिप्शन, डिस्चार्ज समरी और लैब रिपोर्ट कभी भी, कहीं भी देखा और डाउनलोड किया जा सकता है। इससे समय की बचत के साथ ही कागज़ का इस्तेमाल भी घटेगा।