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CM डॉ. यादव का बड़ा बयान- स्वच्छता व पर्यावरण में मध्यप्रदेश बना देश का अग्रणी राज्य

स्वच्छता और पर्यावरण के क्षेत्र में मध्यप्रदेश ने फिर रचा इतिहास : मुख्यमंत्री डॉ. यादव CM डॉ. यादव का बड़ा बयान- स्वच्छता व पर्यावरण में मध्यप्रदेश बना देश का अग्रणी राज्य स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2025 में इंदौर प्रथम, जबलपुर द्वितीय और श्रेणी-3 में देवास प्रथम मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दी प्रदेशवासियों को बधाई भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्वच्छता और पर्यावरण के क्षेत्र में इंदौर, जबलपुर और देवास को 'स्वच्छ वायु सर्वेक्षण- 2025" सम्मान प्राप्त होने पर प्रदेशवासियों को बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्वच्छता और पर्यावरण के क्षेत्र में मध्यप्रदेश ने फिर इतिहास रचा है। संपूर्ण भारत के लिए यह सफलता अत्यंत प्रेरणादायी है। मध्यप्रदेश के इन शहरों के नागरिकों की स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता, अटूट संकल्प और अद्वितीय जनभागीदारी सराहनीय है। उल्लेखनीय है कि केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने नई दिल्ली में "स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2025" के पुरस्कार समारोह में श्रेणी-1 के अंतर्गत इंदौर को प्रथम पुरस्कार (पुरस्कार राशि 1.5 करोड़ रुपए), जबलपुर को द्वितीय पुरस्कार (पुरस्कार राशि एक करोड़) और श्रेणी -3 के अंतर्गत देवास को प्रथम पुरस्कार (पुरस्कार राशि 37.50 लाख रुपए) देकर सम्मानित किया। राष्ट्रीय स्तर के इस सर्वेक्षण में इंदौर ने 200 में से 200 अंक, जबलपुर ने 199 अंक और देवास ने 193 अंक प्राप्त किए हैं।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नव निवार्चित उप राष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन को दी बधाई

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वरिष्ठ नेता श्री सी.पी. राधाकृष्णन को देश के 15वें उप राष्ट्रपति के रूप में निर्वाचित होने पर बधाई दी है।  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि श्री राधा कृष्णन का जीवन जनकल्याण के लिए समर्पित रहा है। निश्चित ही वे उप राष्ट्रपति पद की गरिमा को बढ़ाने का कार्य करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि  प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के कुशल मार्गदर्शन में राष्ट्र प्रगति की नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है। नवनिर्वाचित उप राष्ट्रपति श्री राधाकृष्णन का मार्गदर्शन भी हमारे राष्ट्र को प्राप्त होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने श्री राधाकृष्णन को मध्यप्रदेश की समस्त 9 करोड़ जनता की ओर से बधाई और अनंत शुभकामनाएं दी हैं।

यात्रियों को मिलेगा जाम से निजात: एबी रोड पर 622 करोड़ से बनेंगे 9 फ्लायओवर

इंदौर  प्राधिकरण द्वारा कराए गए सर्वे के आधार पर कलेक्टर ने प्रमुख सचिव लोक निर्माण विभाग को पत्र भेजा है। इसमें जिलास्तरीय यातायात समिति की रिपोर्ट भी संलग्न की गई है। पत्र में एबी रोड पर 9 फ्लायओवरों के निर्माण को मंजूरी देने का अनुरोध किया गया है। कुल 622 करोड़ रुपए की लागत से इन फ्लायओवरों का निर्माण प्रस्तावित है। नीरंजनपुर से लेकर राजीव गांधी चौराहा तक इनका निर्माण होगा। बीआरटीएस हटाने की कवायद के बीच फ्लायओवर योजना वर्तमान में एबी रोड पर बीआरटीएस को हटाने का कार्य शुरू हो चुका है। निगम ने लगभग ढाई करोड़ रुपए के टेंडर को मंजूरी दी है और ठेकेदार फर्म द्वारा रेलिंग हटाने का कार्य प्रारंभ किया जा सकता है। साथ ही लगभग 13 करोड़ रुपए की राशि डिवाइडर निर्माण के लिए भी स्वीकृत कर दी गई है। ऐसे में फ्लायओवर योजना को लेकर प्राधिकरण का सर्वे और कलेक्टर का पत्र नई दिशा देता है। अधूरे एलिवेटेड कॉरिडोर पर भी सवाल नीरंजनपुर और सत्यसांई चौराहे पर एमपीआरडीसी द्वारा फ्लायओवर निर्माण का कार्य पहले से ही जारी है। वहीं एलआईजी से नवलखा तक एलिवेटेड कॉरिडोर का टेंडर लोक निर्माण विभाग ने कुछ वर्ष पूर्व मंजूर किया था, लेकिन काम अब तक शुरू नहीं हो पाया। मुख्यमंत्री और अन्य जनप्रतिनिधियों ने इस परियोजना से असहमति जताई, जिसके चलते यह अधर में है। हाईकोर्ट के आदेश पर बीआरटीएस को हटाया जा रहा है और अब एबी रोड के प्रमुख चौराहों पर फ्लायओवर बनाने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। 622 करोड़ में होगा 9 फ्लायओवरों का निर्माण कलेक्टर ने पहले चरण में एलआईजी चौराहा, शिवाजी वाटिका और गीता भवन चौराहा पर फ्लायओवर बनाने का अनुरोध किया है। इन तीन फ्लायओवरों की अनुमानित लागत 283.56 करोड़ रुपए बताई गई है। इसके अलावा अन्य 11 चौराहों में से पांच फ्लायओवर—जंजीरवाला चौराहा, टॉवर, चाणक्यपुरी, गौपुर और अग्रसेन चौराहा पर निर्माण प्रस्तावित है, जिन पर 380 करोड़ रुपए की लागत आएगी। इस तरह कुल 9 फ्लायओवरों पर 622 करोड़ रुपए खर्च होंगे। 

यात्रियों की सुरक्षा पर जोर: शताब्दी एक्सप्रेस में लागू हुआ वंदे भारत जैसा डोर सिस्टम

ग्वालियर नई दिल्ली से रानी कमलापति के बीच चलने वाली शताब्दी एक्सप्रेस अब हाईटेक हो गई है। इस ट्रेन में मेट्रो, वंदे भारत और तेजस एक्सप्रेस की तर्ज पर अब ऑटोमेटिक डोर लगा दिए गए हैं। इसका ट्रायल भी हो चुका है और अब वंदे भारत की तरह इसके गेट खुलने भी लगे हैं। कोच के दरवाजों पर इंडिकेटर और अलार्म भी लगाए गए हैं। यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाने और आपराधिक घटनाओं को रोकने में यह ऑटोमेटिक डोर कारगर साबित होंगे। शताब्दी के चलने से 10 सेकंड पहले इसके सभी दरवाजे अपने आप बंद होने लगे हैं। इस ट्रेन में अभी हाल ही में इस व्यवस्था को शुरू किया गया है। चेन पुलिंग पर भी नहीं खुलेंगे गेट शताब्दी एक्सप्रेस के डोर लॉकिंग सिस्टम को वंदे भारत एक्सप्रेस की तर्ज पर विकसित किया गया है। वंदे भारत एक्सप्रेस में अगला स्टेशन आने की सूचना के साथ यह भी बताया जाता है कि दरवाजे किस ओर खुलेंगे। इसी तरह की व्यवस्था शताब्दी एक्सप्रेस में की गई है। कई बार लोग परिजनों के छूट जाने या अन्य किसी कारण से ट्रेन में चेन पुलिंग कर देते थे। अब ऐसा नहीं होगा। अब चेन पुलिंग करने पर भी दरवाजे नहीं खुलेंगे। चोटिल होने से भी बचेंगे अभी तक देखने में आ रहा है कि ट्रेनों के चलते समय प्लेटफॉर्म पर यात्री चढऩे और उतरने के प्रयास में चोटिल हो जाते हैं। कभी- कभी तो यात्रियों की मौत तक हो जाती है, लेकिन अब इस नई व्यवस्था से शताब्दी में इस तरह की घटनाएं नहीं हो सकेंगी। क्योंकि दरवाजे अपने आप ही बंद हो जाएंगे। चोरी, छीना-झपटी की घटनाओं से मिलेगी राहत शताब्दी एक्सप्रेस में सफर के दौरान यात्रियों को चोरी छीना-झपटी की घटनाओं से भी इस व्यवस्था के शुरू होने से राहत मिल जाएगी। इसके पहले शताब्दी एक्सप्रेस के दरवाजों को मैन्युअल तरीके से बंद किया जाता था। ट्रेन के चलने के दौरान रास्ते में आमतौर पर दोनों तरफ के दरवाजे खुले रहते थे और इसका फायदा शरारती तत्व उठा लेते थे, जिस नई प्रणाली से ट्रेन को लैस किया गया है। वह इसके स्टेशन पहुंचने और चलने के समय ही कार्य करेंगे। शताब्दी एक्सप्रेस में ऑटोमेटिक डोर लगाए गए हैं। यह ट्रेन उत्तर रेलवे मंडल की है। उन्हीं के द्वारा इसे नया रूप दिया है।– शशिकांत त्रिपाठी, सीपीआरओ उत्तर मध्य रेलवे

मुक्ता सिंह का कमाल: चंबल की बेटी ने रचा इतिहास, बनीं सेना में पहली महिला लेफ्टिनेंट

ग्वालियर  चंबल की धरती को वीरों की भूमि कहा जाता है। अब इसी धरती की एक बेटी ने देश का नाम रोशन किया है। ग्वालियर की मुक्ता सिंह भारतीय थल सेना में लेफ्टिनेंट बन गई हैं। बिहार के गया स्थित ऑफिसर ट्रेनिंग एकेडमी (ओटीए) में आयोजित पासिंग आउट परेड में उन्होंने ओवरऑल ऑर्डर ऑफ मेरिट में तीसरा स्थान प्राप्त कर कांस्य पदक हासिल किया। विशेष बात यह है कि वे ओटीए गया से कांस्य पदक पाने वाली पहली महिला ऑफिसर कैडेट बनी हैं। ग्वालियर की रहने वाली हैं मुक्ता सिंह मुक्ता सिंह मूल रूप से ग्वालियर की रहने वाली हैं, हालांकि उनका जन्म भिंड स्थित ननिहाल में हुआ। उनके पिता राजबीर सिंह भारतीय वायुसेना में अधिकारी रह चुके हैं, जबकि उनकी मां बृजमोहिनी यादव खेल जगत से जुड़ी रहीं। देशभक्ति का जज़्बा परिवार में पहले से ही था, जिसका असर मुक्ता के जीवन पर भी पड़ा। पिता ने बेटी के जन्म के समय ही तय कर लिया था कि वह डिफेंस में जाएगी और नामकरण के समय ही उसका नाम ‘मुक्ता’ रखा गया। इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन किया मुक्ता ने इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन ग्वालियर से पूरी की और मालनपुर की एक फैक्ट्री में कुछ समय नौकरी भी की। लेकिन बचपन से ही डिफेंस फोर्सेज में जाने का सपना उन्हें प्रेरित करता रहा। फिजिकल ट्रेनिंग के लिए उन्होंने अपने ननिहाल भिंड में मामा राधे गोपाल यादव से तैराकी व अन्य ट्रेनिंग ली। उनके नाना हरबीर सिंह यादव का सपना था कि घर से कोई आर्मी में जाए, जो अब मुक्ता ने पूरा किया। तीसरी बार में मिली सफलता वहीं, मुक्ता सिंह सफर आसान नहीं था। शुरुआती दो प्रयासों में मेरिट में जगह नहीं मिली, लेकिन तीसरे प्रयास में उन्होंने शॉर्ट सर्विस कमीशन टेक्निकल महिला-32 कोर्स में ऑल इंडिया-1 रैंक हासिल कर सफलता पाई। शुरुआत में प्रशिक्षण चेन्नई ओटीए में हुआ, बाद में कोर्स बिहार के गया ओटीए में ट्रांसफर कर दिया गया। यहां पर उनकी मेहनत ने उन्हें लीडरशिप के कई मौके दिलाए। अकादमी अंडर ऑफिसर (AUO), जूनियर अंडर ऑफिसर (JUO) और बटालियन अंडर ऑफिसर (BUO) जैसे पदों पर रहते हुए उन्होंने अपनी प्रतिभा साबित की। तीन बार चोट भी लगी तीन बार चोटों के कारण कोर्स दोबारा शुरू करने के बावजूद उसने हार नहीं मानी। आखिरकार 6 सितंबर को आयोजित पासिंग आउट परेड में अपनी मेहनत और लगन के दम पर तीसरा स्थान हासिल कर इतिहास रच दिया। उन्हें 118 इंजीनियर रेजिमेंट में कमीशन मिला है। ग्वालियर और चंबल की यह बेटी आज पूरे देश का गर्व बनी हुई है और जल्द ही अपने गृह नगर ग्वालियर लौटने वाली हैं।

मूंग और उड़द की खरीद में बड़ा घोटाला, जबलपुर में 1.75 करोड़ की हेराफेरी उजागर

जबलपुर  उड़द-मूंग उपार्जन कार्य में पौने दो करोड़ रुपए का फर्जीवाड़ा हुआ है। फर्जीवाड़े के आरोप में समिति प्रबंधक और वेयर हाउस संचालक सहित दस व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गयी है। फर्जी किसानों के नाम पर खरीदी दर्शाकर पूरा घालमेल किया गया है। शिकायत पर एफआईआर दर्ज एएसपी ग्रामीण सूर्यकांत शर्मा ने बताया कि कार्यालय उपसंचालक किसान कल्याण और कृषि विकास के सहायक संचालक रवि कुमार आम्रवंशी ने लिखित शिकायत दी थी। जिसमें बताया गया था कि वे जिले में संचालित समस्त उपार्जन समितियों द्वारा मूंग, उड़द उपार्जन के नोडल अधिकारी के सहायक के रूप में कार्यरत हैं। उपार्जन नीति के परिपालन में कार्यालय कलेक्टर जबलपुर के आदेश द्वारा सेवा सहकारी संस्था 6 बसेड़ी का गोदाम स्त्रीय उपार्जन केन्द्र (5833041) एमएलटी वेयर हाउस मजीठा में स्थापित किया गया था। कम मिले मूंग और उड़द बसेड़ी के गोदाम स्तरीय उपार्जन एमएलटी वेयरहाउस में मूंग 3231 बोरी (1615.5 क्विं.) एवं उड़द 652 बोरी (326 क्विं.) कम पाया गया था। कलेक्टर के निर्देश पर जांच दल गठित किया गया था। जांच में पाया गया कि मूंग एवं उड़द में कुल स्टाक में 2187 क्विंटल की कमी है, जिसका मूल्य 18663188 रुपए है। जांच में कुल 23 किसानों की 1003 क्विंटल खरीदी गयी। मूंग और 5 किसानों की 125.50 क्विंटल खरीदी की उड़द की। ऑनलाइन एंट्री संदिग्ध पाई गई। किसानों के नाम पर फर्जी खरीदी गई भारतीय किसान संघ महाकौशल प्रांत जिला जबलपुर द्वारा ग्राम पथरिया के 13 किसानों की सूची प्रदान की गई है, जिनके नाम पर फर्जी खरीदी दर्ज की गई है। उनके नाम पर फर्जी पंजीयन कराकर अन्य किसानों के खसरे जोड़कर कुल 561.50 क्विंटल मूंग की फर्जी तरीके से ऑनलाइन एंट्री की गई है। कम्पयूटर ऑपरेटर ने मिलान नहीं किया ग्रीष्मकालीन मूंग और उड़द उपार्जन नीति 2025-26 अनुसार उपार्जन समिति प्रबंधक कमल सिंह ठाकुर निवासी ग्राम बेलखेड़ी बेलखेड़ा द्वारा प्रतिदिन किसानों से मूंग एवं उड़द का उपार्जन उपरांत स्कंध का सुरक्षित, व्यवस्थित भंडारण नहीं कराया जाना पाया गया। इतना ही नहीं लेखा मिलान न करते हुए कम्पयूटर ऑपरेटर के माध्यम से सीधे ऑनलाइन फीडिंग कराना, निर्धारित समयावधि तक खरीदी न किया जाना भी सामने आया। इसके अलावा आरोपियों ने किसानों को न तो तौल पर्ची जारी की और न ही उपार्जन नीति का पालन किया। किसानों एवं प्रशासन को आर्थिक क्षति पहुंचाते हुए आरोपियों ने अवैध लाभ प्राप्त करने के उद्देश्य से मूंग की 1934 क्विंटल की राशि 16790988/-रुपए एवं उड़द की 253 क्विंटल मात्रा जिसकी राशि 1872200/-रुपए कुल मूंग एवं उड़द में 2187 क्विंटल कुल राशि 18663188/-रुपए की छलपूर्वक कूट रचना करने व कूट रचित दस्तावेजों का प्रयोग अपने स्वंय के लाभ के लिए उक्त पूरा षडयंत्र रचा। इनलोगों पर केस दर्ज शिकायत पर भेड़ाघाट पुलिस ने समिति प्रबंधक कमल सिंह ठाकुर, कम्यूटर ऑपरेटर राजपाल सिंह एवं अतिरिक्त ऑपरेटर दीपेन्द्रे सिंह ठाकुर, प्रभारी शाखा प्रबंधक, जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक मर्यादित शहपुरा शाखा अजय तिवारी, अंकित सिंह उर्फ राजशेखर, शंभु ठाकुर, बिन्दुखराय, सर्वेयर रोहित यादव एवं देवेन्द्र यादव तथा एमएलटी वेयरहाउस मजीठा के संचालक आदेश तिवारी के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया है।  

गुयाना, सोमालिया और अफ्रीका के देशों में बालाघाट चावल का क्रेज, सेहत के लिए भी रामबाण

बालाघाट  वे लोग जो चावल खाने के शौकीन हैं लेकिन बीमारियों की वजह से नहीं खा पाते उनके लिए खास तरह का पारबॉइल्ड चावल बेहद कारगर होता है. खास बात यह है कि मध्य प्रदेश के बालाघाट के किसान इसको अपने खेतों में उगा रहे हैं, जिसकी डिमांड दुनिया भर के कई देशों में हो रही है. आइए जानते हैं इस खास किस्म में चावल की क्या हैं खासियतें- मध्य प्रदेश में धान का कटोरा, विदेशों में चावल की माँग बालाघाट जिसे घाटों वाला जिला भी कहा जाता है यहां पैदा होने वाले चावल की मांग भारत के अलावा विदेशों में भी बढ़ी है. जिले का पारबॉइल्ड चावल अफ्रीकी और खाड़ी देशों में विशेष रूप से पसंद किया जाता है. IR-64 किस्म के धान से बने चावल की गुयाना, सोमालिया, बेनिन, टोगो जैसे अफ्रीकी देशों में काफी डिमांड है. क्या होता है पारबॉइल्ड चावल बालाघाट राइस मिलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष मोनू भगत ने बताया "पारबॉइल्ड चावल ऐसे चावल होते हैं जो आंशिक रूप से चावल के भूसे के अंदर ही उबाल दिए जाते हैं. इसके तीन मेन स्टेप्स में इन्हें धोना, स्टीम करना और ड्राई करना शामिल होता है. मोटे पारबॉइल्ड चावल की सबसे ज्यादा डिमांड विदेशों में है जो IR-64 और IR-36 धान से बनता है." मप्र में धान का कटोरा है बालघाट बालाघाट के उपसंचालक कृषि फूल सिंह मालवीय ने बताया "बालाघाट में 2.67 लाख हेक्टेयर भूमि पर धान का उत्पादन होता है, जिसमें लगभग 82,77,000 क्विंटल धान पैदा होती है. बालाघाट को "प्रदेश का धान का कटोरा" भी कहा जाता है और यहां की अर्थव्यवस्था धान की खेती पर ही निर्भर है. किसानों से यहां की राइस मिल के व्यापारी और मप्र सरकार धान की खरीदी करती है. फिर से मिलों के ज़रिए चावल बनाकर तैयार किया जाता है." मप्र में चिन्नौर धान को मिला है जीआई टैग केंद्र सरकार की "एक जिला, एक उत्पाद" योजना में शामिल होने वाली चिन्नौर धान मध्य प्रदेश से जीआई टैग प्राप्त करने वाली पहली चावल की किस्म है. जीआई टैग से इसका अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रचार हो रहा है. इसे 14 सितंबर 2021 को भौगोलिक संकेत रजिस्ट्री द्वारा मान्यता दी गई थी. यह मध्य प्रदेश का पहला चावल है जिसे जीआई टैग मिला और इसने बालाघाट को पहचान दी. 

17 सितंबर को मध्यप्रदेश दौरे पर पीएम मोदी, राज्य को मिलेंगी दो बड़ी गिफ्ट्स

भोपाल  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपने 75वें जन्मदिन के मौके पर एक बड़ी सौगात देने मध्यप्रदेश दौरे पर आ रहे हैं. पीएम मोदी 17 सितंबर को धार जिले के भैंसोला में देश के पहले पीएम मित्रा पार्क का शिलांन्यास करेंगे. इसके अलावा स्वस्थ्य नारी सशक्त परिवार अभियान का भी शुभारंभ उनके द्वारा किया जाएगा. ऐसे में ये कहना गलत नहीं होगा कि प्रधानमंत्री अपने 75वें जन्मदिन पर मध्य प्रदेश को करोड़ों के गिफ्ट देने आ रहे हैं. मील का पत्थर साबित होगी पीएम की यात्रा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मध्यप्रदेश यात्रा को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा, '' 17 सितंबर को पीएम मोदी पीएम मित्रा पार्क का शिलांन्यास करने के लिए आ रहे हैं. धार जिले के आदिवासी अंचल को एक बड़ी सौगात मिलने जा रही है. खासतौर से किसानों के लिए यह एक बड़ी सौगात रहेगी. धार, झाबुआ, उज्जैन, खंडवा, खरगौन बड़वानी कपास आधारित क्षेत्र हैं. कॉटन पर आधारित यह बड़ा इंडस्ट्रियल पार्क विकसित होने से प्रदेश के 1 लाख युवाओं को प्रत्यक्ष और 2 लाख अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होंगे. यह सभी मध्यप्रदेश के लिए गौरव की बात है. हम सभी प्रयास कर रहे हैं कि पीएम का यह दौर मध्यप्रदेश और देश के लिए मील का पत्थर साबित हो.'' पीएम मित्र पार्क बदलेगा एमपी की तस्वीर धार जिले के भैसोला में 2177 एकड़ में तैयार हो रहा पीएम मित्र पार्क मध्यप्रदेश के लिए बड़ी सौगात माना जा रहा है. प्रधानमंत्री मोदी के मेगा इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल रीजन एंड एपेरल पार्क को पीएम के 5 एफ विजन फार्म टू फाइवर टू, फैशन टू, फॉरेन के तहत डेवलप किया जा रहा है. इस पर 2050 करोड़ रुपए की राशि खर्च होगी. पहले चरण के लिए केन्द्र सरकार 773 करोड़ के टेंडर जारी कर चुका है. पीएम मित्र पार्क में निवेश के लिए मध्यप्रदेश सरकार को कई निवेशकों द्वारा निवेश प्रस्ताव भी दिए गए हैं. 75 वर्ष के हो जाएंगे मोदी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस वर्ष 17 सितंबर को अपना 75वां जन्मदिन मनाएंगे. पीएम मोदी के जन्मदिन के अवसर पर पूरे देशभर में कार्यक्रम रखे गए हैं. 17 सितंबर से 2 अक्टूबर गांधी जयंती तक पूरे देश में बीजेपी द्वारा 'सेवा पखवाड़ा' मनाया जाएगा. सेवा पखवाड़ा में रक्तदान शिविर से लेकर स्वच्छता अभियान जैसे कई आयोजन होंगे. वहीं, पीएम मोदी इस दिन मध्य प्रदेश के भी दौरे पर होंगे.  

मध्य प्रदेश में प्रमोशन आरक्षण पर विवाद जारी, कोर्ट में तय होगी आगे की राह

जबलपुर मध्य प्रदेश में प्रमोशन में आरक्षण मामले पर हाईकोर्ट में सुनवाई जारी है। राज्य सरकार ने हाई कोर्ट में आज जवाब पेश किया है। इसमें पुरानी और नई प्रमोशन पॉलिसी के बीच अंतर बताया है। वहीं, याचिकाकर्ताओं ने अधूरा जवाब पेश करने का आरोप लगाया है। 16 सितंबर को अंतरिम राहत पर हाईकोर्ट में सुनवाई याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाते हुए कहा है कि इसमें क्रीमी लेयर, क्वांटिफायबल डेटा पर जवाब नहीं है। हाईकोर्ट ने इस मामले पर अगली सुनवाई एक हफ्ते बाद तय की है। ऐसे में अब 16 सितंबर को एमपी प्रमोशन में आरक्षण मामले में अंतरिम राहत पर हाईकोर्ट सुनवाई करेगी। नई प्रमोशन पॉलिसी लागू नहीं करने का वादा बता दें कि राज्य सरकार ने कोर्ट के अंतरिम राहत की मांग की है। साथ ही नई प्रमोशन पॉलिसी लागू करने की इजाजत भी मांगी है। इस मामले पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से एक अंडरटेकिंग ली है, जिसके तहत नई पॉलिसी का क्रियान्वयन रुका हुआ है। आसान भाषा में कहे तो सरकार ने नई प्रमोशन पॉलिसी को तब तक लागू नहीं करने का वादा किया है जब तक कोर्ट से इस मामले में को अंतिम फैसला नहीं आ जाता।

MP में दिवाली तोहफा: वंदे भारत स्लीपर ट्रेन जल्द शुरू, यात्रा होगी और तेज़

भोपाल   देश में दिवाली से पहले वंदे भारत स्लीपर ट्रेन शुरू करने की तैयारी है। रेलवे सूत्रों के अनुसार दिल्ली से पटना के रूट पर देश की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन सितंबर में ही शुरू की जाएगी। बाद में दिल्ली से भोपाल और अहमदाबाद के लिए ये सेवा शुरू होगी। बता दें कि इससे पहले चर्चा थी कि वंदे भारत स्लीपर ट्रेन सबसे पहले एमपी की राजधानी भोपाल से नई दिल्ली के लिए चलाई जाएगी। लेकिन अब नई दिल्ली-भोपाल के रूट पर चलाई जाने वाली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन भारत की दूसरी वंदे भारत स्लीपर ट्रेन होगी। दिल्ली से अहमदाबाद जाने वाली वंदे भारत का मार्ग अभी तय नहीं है लेकिन माना जा रहा है कि यह जयपुर हो कर जा सकती है। वंदे भारत स्लीपर ट्रेन दिल्ली से करीब 1000 किमी दूरी पर बसे शहरों के लिए शुरू करने की योजना है। माना जा रहा है कि पटना के लिए पहली वंदे भारत स्लीपर बिहार में विधानसभा चुनाव की घोषणा से पहले शुरू की जाएगी जिसके लिए पीएम नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम का इंतजार है। वहीं भोपाल वासियों समेत पूरे एमपीको वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का बेसब्री से इंतजार है। देशभर में अभी दौड़ रहीं 150 चेयरकार वंदे भारत ट्रेनें देश में अभी 150 चेयरकार वंदे भारत ट्रेनें दिन के शिड्यूल में चल रही है। रात के सफर को सुगम व बेहतर बनाने के लिए अब वंदेभारत स्लीपर ट्रेन (Vande Bharat Sleeper Train) तैयार की गई है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने पिछले दिनों संसद में कहा था कि चेन्नई की इंट्रीगल कोच फैक्ट्री में वंदे भारत स्लीपर के 10 सैट तैयार हो जाएंगे और फैक्ट्री ने 50 अतिरिक्त वंदेभारत स्लीपर का उत्पादन भी शुरू कर दिया है। ऐसे होगी समय की बचत नई दिल्ली से पटना: 972 किमी, अन्य ट्रेनों में समय- 17 घंटे, वंदे भारत स्लीपर- 11 घंटे नई दिल्ली से अहमदाबाद: (वाया जयपुर): 1000 किमी, अन्य ट्रेन-14 घंटे, वंदे भारत स्लीपर- करीब 8-9 घंटे नई दिल्ली से भोपाल (New Delhi to Bhopal): 790 किमी, अन्य ट्रेनों में समय 13 घंटे, वंदे भारत स्लीपर- 6-7 घंटे