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नगर निगम की गलती? इंदौर में चौराहों के नाम बदलने पर कार्रवाई संभव

 इंदौर  चंदन नगर में रातोरात चौराहों के नाम बदलकर बोर्ड लगाने के मामले में जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट निगमायुक्त शिवम वर्मा को सौंप दी है। रिपोर्ट में सहायक इंजीनियर वैभव देवलासे और सब इंजीनियर राम गुप्ता की गलती सामने आई है। निगमायुक्त सोमवार को रिपोर्ट के आधार पर जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दे सकते हैं। चंदन नगर क्षेत्र में पिछले दिनों कई सड़कों के नाम बदलते हुए बोर्ड लगा दिए गए थे। चंदूवाला रोड को गौसिया रोड, मिश्रावाला रोड को ख्वाजा रोड और लोहा गेट रोड को रजा गेट नाम दे दिया गया था। सोशल मीडिया पर इन बोर्ड की तस्वीर वायरल होने के बाद पूरे शहर में बवाल मचा था। शिकायत महापौर पुष्यमित्र भार्गव तक पहुंची जिसके बाद निगम ने कार्रवाई करते हुए बोर्ड हटा दिए थे। इस मामले में जांच के लिए निगमायुक्त ने अपर आयुक्त अभय राजनगांवकर की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित की थी। इस कमेटी ने अपनी रिपोर्ट निगमायुक्त को सौंप दी है। रिपोर्ट में प्रथमदृष्टत: सहायक इंजीनियरों को इस गड़बड़ी के लिए दोषी माना गया है। रिपोर्ट में कहा है कि सहायक इंजीनियर देवलासे ने बोर्ड पर नाम गलत होने के बावजूद ठेकेदार द्वारा दी गई डिजाइन को जस का तस स्वीकार कर लिया। उन्हें बोर्ड पर नाम गलत होने की जानकारी अपने वरिष्ठ अधिकारियों को देनी थी, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। इसी तरह गलत नाम वाले बोर्ड की डिजाइन सब इंजीनियर गुप्ता ने देखी, उन्होंने ही इस डिजाइन को अप्रूव किया था। जांच में यह बात भी सामने आई है कि ठेकेदार कंपनी ने अधिकारियों को नामों की जानकारी दिए बगैर डिजाइन बनाई और सोशल मीडिया पर ही इसकी मंजूरी लेकर बोर्ड तैयार कर लगवा दिए। हमने रिपोर्ट दे दी है     जांच समिति ने मामले की जांच पूरी कर अपनी रिपोर्ट निगमायुक्त को सौंप दी है। रिपोर्ट पर क्या कार्रवाई होनी है, वह निगमायुक्त ही तय करेंगे। – अभय राजनगांवकर, अपर आयुक्त इंदौर नगर निगम  

एम्स, हमीदिया और जेपी अस्पताल में बदलते मौसम के चलते मरीजों की संख्या बढ़ी

भोपाल भोपाल में मौसम अचानक करवट बदल रहा है। कभी तेज बारिश, कभी कड़ी धूप और फिर उमस। इस वजह से लोग बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। एम्स, हमीदिया और जेपी अस्पताल की ओपीडी में बीते दो दिन में ही 20 हजार से ज्यादा मरीज पहुंचे। यह संख्या पिछले हफ्ते की तुलना में करीब चार हजार ज्यादा है। सबसे ज्यादा असर बच्चों पर दिख रहा है। जेपी अस्पताल की बाल रोग ओपीडी में मरीजों की संख्या दोगुनी हो गई है। सामान्य दिनों में जहां 60 बच्चे आते थे, अब यह संख्या 170 तक पहुंच गई है। इनमें ज्यादातर बच्चे वायरल और बैक्टीरियल संक्रमण से पीड़ित हैं। करीब सात से आठ प्रतिशत बच्चों को गंभीर हालत में भर्ती करना पड़ रहा है। इनमें सांस लेने में तकलीफ और फेफड़ों का इंफेक्शन देखने को मिल रहा है। आरएसवी वायरस बना चिंता की वजह डॉक्टरों के मुताबिक, इस समय रेस्पीरेट्री सिंसेशियल वायरस (आरएसवी) बच्चों में ज्यादा एक्टिव है। यह वायरस सामान्य सर्दी-जुकाम जैसे लक्षण देता है, लेकिन छोटे बच्चों में यह न्यूमोनिया और ब्रोंक्योलाइटिस का कारण बन सकता है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार, हर साल दुनियाभर में करीब 30 लाख बच्चे आरएसवी से प्रभावित होते हैं। हालांकि, यह वायरस बच्चों को ज्यादा प्रभावित करता है, लेकिन कमजोर इम्यूनिटी वाले बुजुर्ग और दिल या अस्थमा के मरीज भी इसके शिकार हो सकते हैं। दूषित पानी और अस्वच्छ भोजन के कारण टाइफाइड और उल्टी-दस्त के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं। डॉक्टरों ने बचाव के तरीके बताए जेपी अस्पताल के डॉ. पियूष पंचरत्न का कहना है कि कई परिजन मेडिकल स्टोर से मनमर्जी की दवाएं देकर बच्चों का इलाज करने की कोशिश करते हैं, जिससे स्थिति बिगड़ जाती है। बच्चों को केवल पैरासिटामाल दी जा सकती है, लेकिन लक्षण बने रहें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है। डॉ. योगेंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि इस बार ह्यूमन राइनोवायरस और ई-कोलाई बैक्टीरिया भी सक्रिय हैं, जो वयस्क मरीजों को प्रभावित कर रहे हैं। ज्यादातर मरीज एक से दो हफ्ते में सामान्य दवाओं से ठीक हो जाते हैं। लेकिन मरीजों को सावधानी बरतना बेहद जरूरी है। यह लक्षण दिखने पर सतर्क रहें गले में खराश, तेज सर्दी, लगातार खांसी, बुखार, पेट दर्द या थकान जैसे लक्षण दिखें तो लापरवाही न करें और तुरंत डॉक्टर से जांच कराएं। ये उपाय करना जरूरी     हमेशा उबला या शुद्ध पानी पिएं।     ठंडी और बासी चीजों से बचें।     बच्चों को अन्य बीमार बच्चों से दूर रखें और बीमारी की स्थिति में स्कूल न भेजें।     गले में खराश हो तो गुनगुने पानी से गरारे करें।     मास्क का इस्तेमाल करें और स्वच्छता का ध्यान रखें। क्यों बढ़ रहीं बीमारियां     लगातार बदलता मौसम     धूल और गंदगी से फैलता संक्रमण     लोगों द्वारा लापरवाही और सावधानी न बरतना इसका प्रमुख कारण है। बदलते मौसम का दिख रहा असर     मौसम बदलते ही मरीजों की संख्या बढ़ रही है। डॉक्टरों को निर्देश दिए हैं कि हर मरीज को पर्याप्त समय दें और उन्हें विस्तार से समझाएं कि बीमारी से कैसे बचा जा सकता है। – डॉ. राकेश श्रीवास्तव, सिविल सर्जन, जेपी अस्पताल  

जिम में ड्रग्स डोज़ देने का खुलासा, पुलिस पकड़ने से पहले संचालक हुआ फरार

भोपाल  भोपाल के हाई प्रोफाइल ड्रग तस्करी, रेप-ब्लैकमेलिंग और जमीन कब्जाने के गिरोह से जुड़ा बड़ा खुलासा हुआ है। आरोपी चाचा शाहवर और भतीजे यासीन मछली के गुर्गों से भोपाल के एक फेमस जिम का संचालक मोनिस खान सबसे ज्यादा ड्रग्स खरीदता था।  इसका खुलासा 18 जुलाई 2025 को सबसे पहले गिरफ्तार किए गए सैफउद्दीन ने पूछताछ में किया था। मोनिस जिम संचालन करने से पहले फिटनेस ट्रेनर भी रह चुका है। क्राइम ब्रांच ने मेमोरेंडम के आधार पर मोनिस को आरोपी बनाया है, लेकिन केस में नाम आने के बाद वह मलेशिया भाग गया। अब पुलिस उसके खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी कराने की तैयारी में है। सैफउद्दीन की ही निशानदेही पर मछली चाचा-भतीजे अरेस्ट सैफउद्दीन की ही निशानदेही पर पुलिस ने शाहवर और यासीन की गिरफ्तारी की थी। पूछताछ में उसने दोनों से ड्रग लेकर बेचने की बात स्वीकार की थी। तब मेमोरेंडम में पुलिस ने चाचा और भतीजे को आरोपी बना दिया था। इसकी जानकारी इन दोनों को नहीं थी। 21 जुलाई को घेराबंदी कर अलग-अलग जगहों से टीम ने चाचा-भतीजे को गिरफ्तार कर लिया। यासीन के मोबाइल से नाबालिग किशोर, युवक और युवतियों को टॉर्चर करते वीडियो मिले थे। जिसके बाद उसके खिलाफ रेप पॉक्सो और धोखाधड़ी की शिकायतें अलग-अलग थानों में दर्ज की गईं। बेन नाम के नाइजीरियन से अंशुल खरीदता था एमडी चाचा-भतीजे की निशानदेही पर पुलिस ने पुराने बदमाश अंशुल सिंह उर्फ भूरी को गिरफ्तार किया। शाहवर और यासीन इसी से ड्रग खरीदते थे। अंशुल ने पूछताछ में बताया था कि वह बेन नाम के नाइजीरियन नागरिक से एमडी ड्रग खरीदकर भोपाल लाता था और पार्टियों में खास ग्राहकों को बेचा करता था। यासीन और शाहवर भी उसके ग्राहक थे। सैफउद्दीन से ड्रग खरीदकर आगे बेचने का काम करते थे सैफउद्दीन ने ही पूछताछ में इस बात का भी खुलासा किया था कि कोहेफिजा और चूना भट्‌टी में स्थित जिम का संचालन करने वाले मोनिस खान और जहांगीराबाद के उमेर पट्‌टी भी ड्रग की तस्करी करते हैं। ये लोग उससे नशे का सामान लेकर आगे बेचने का काम करते थे। मोनिस इस ड्रग्स को अपने जिम में आने वाली युवतियों सहित युवकों को वजन कम कराने की दवा बताकर बेचता था। अरेरा कॉलोनी निवासी विशाल उर्फ सावन और अशोका गार्डन निवासी लारिब उर्फ बच्चा भी सैफउद्दीन से ड्रग खरीदकर आगे बेचने का काम करते थे। शाहिद मछली को सालाना 30 हजार कारतूस की लिमिट ड्रग्स तस्करी के बाद भोपाल के मछली परिवार का कनेक्शन अब शूटिंग की आड़ में कारतूसों की हेराफेरी से भी जुड़ गया है। जांच के दौरान पता चला है कि मछली परिवार के बुधवारा निवासी शाहिद अहमद पिता शरीफ अहमद का आपराधिक रिकॉर्ड है। इसी वजह से उसके तीन गन लाइसेंस निरस्त कर दिए गए। शाहिद मछली को 2012 में लाइसेंस मिला था। उसके पास तीन हथियार 0.32 बोर रिवॉल्वर, 12 बोर सेमी-ऑटोमैटिक गन और 30.06 राइफल (विदेश से खरीदी गई) थे। उसे सालाना 30 हजार कारतूस की लिमिट मिली थी। शाहिद ने किसी शूटिंग प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं लिया जांच में सामने आया कि शाहिद ने किसी शूटिंग प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं लिया। न इस आधार पर कारतूस खरीदे। उसने सिर्फ आत्मरक्षा के लिए जरूरी कारतूस खरीदे। जिला प्रशासन के मुताबिक मछली परिवार से जुड़े कुल 5 लोगों के लाइसेंस सस्पेंड किए गए हैं। शाहिद के अलावा सोहेल, शहरयार, शफीक और शावेज के नाम पर भी शस्त्र लाइसेंस थे। इन पर कुल 8 हथियार दर्ज थे।

तीन दिन में 83 हजार रुपए का जुर्माना वसूला, MP फ्लाईओवर पर रीलबाजों की धूम

जबलपुर कुछ दिन पहले जबलपुर में मध्यप्रदेश के सबसे लंबे फ्लाईओवर का केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने उद्घाटन किया था. उद्घाटन के बाद से ही फ्लाईओवर पर बड़ी संख्या में रील बनाने के लिए लोग पहुंच रहे थे, जिससे यातायात पर असर पड़ रहा था और दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ गई थी. लेकिन अब ऐसे रीलबाज़ों और पुल पर स्टंट करने वालों के खिलाफ जबलपुर पुलिस ने सख्त कार्रवाई करते हुए 190 लोगों का चालान काटा है. उद्घाटन के बाद से ही रोमांच और मनोरंजन का केंद्र बन गया है दरअसल, 23 अगस्त को एमपी के इस सबसे लंबे फ्लाईओवर का उद्घाटन किया गया, लेकिन उसके बाद से ही यह फ्लाईओवर लोगों के लिए अब रोमांच और मनोरंजन का केंद्र बनता जा रहा है. सोशल मीडिया पर कई ऐसी रील्स और वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिसमें युवा फ्लाईओवर पर स्टंट, डांस और फोटोशूट करते नजर आ रहे हैं.  190 से ज्यादा लोगों के चालान काटे गए रीलबाजों की इन हरकतों से फ्लाईओवर के उपर ट्रैफिक व्यवस्था बाधित होने लगी और ब्रिज पर भीड़ के चलते कानून-व्यवस्था पर भी असर पड़ने लगा, जिसके बाद पुलिस को सख्ती बरतनी पड़ी. जबलपुर एसपी सूर्यकांत शर्मा के निर्देश पर मदनमहल थाना पुलिस ने फ्लाईओवर पर गश्त बढ़ाई और बीते तीन दिनों में पुल पर नियम तोड़ने वाले 190 से ज्यादा लोगों के चालान काटे गए, जिससे करीब 83 हजार रुपए का जुर्माना वसूला गया. पुलिस का कहना है कि फ्लाईओवर का इस्तेमाल सिर्फ यातायात के लिए किया जाए. रील बनाने, डांस, स्टंट, फोटोशूट करने वालों पर पुलिस की लगातार नजर रहेगी और ऐसे मामलों में किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा.

मध्य प्रदेश में बारिश का कोटा फुल, 17 जिलों में जारी है मूसलाधार बारिश

 भोपाल  मध्य प्रदेश में दो स्ट्रांग सिस्टम एक्टिव होने की वजह से लगातार तेज बारिश का दौर चल रहा है। सोमवार को प्रदेश के 17 जिलों में भारी बारिश का यलो अलर्ट जारी किया गया है। इनमें इंदौर, उज्जैन, देवास, सीहोर, खरगोन, खंडवा, हरदा, बुरहानपुर, नर्मदापुरम, बैतूल, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी और अनूपपुर शामिल हैं। यहां अगले 24 घंटे में ढाई से साढ़े 4 इंच तक पानी गिर सकता है। भोपाल में सुबह से ही बारिश का दौर जारी है। 2 और 3 सितंबर को भी तेज बारिश की चेतावनी है। वहीं, 4 सितंबर को ग्वालियर-चंबल में तेज बारिश का अलर्ट है।  इंदौर और उज्जैन संभाग में अगले 3 दिन भारी बारिश का अलर्ट है। मध्य प्रदेश में बारिश का कोटा पूरा हो चुका है यहां 37.8 डिग्री पानी गिर चुका है। इसलिए हो रही प्रदेश में तेज बारिश मौसम विभाग की सीनियर वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन ने बताया- प्रदेश के बीचोंबीच से एक मानसून टर्फ गुजर रही है। वहीं, रविवार को तीन साइक्लोनिक सर्कुलेशन (चक्रवात) की एक्टिविटी भी बनी रही। इस वजह से कई जिलों में तेज बारिश का दौर रहा। सोमवार को भी सिस्टम की एक्टिविटी देखने को मिलेगी। रतलाम में 1 इंच से ज्यादा बारिश मध्यप्रदेश में रविवार को बारिश का दौर जारी रहा। 18 से अधिक जिलों में पानी गिरा। रतलाम में सबसे ज्यादा 1 इंच पानी गिर गया। गुना में पौन इंच और पचमढ़ी में आधा इंच बारिश हुई। भोपाल, इंदौर, शाजापुर, उज्जैन, छतरपुर, दतिया, मुरैना, रायसेन, विदिशा, सीहोर, बैतूल, गुना, पचमढ़ी, रतलाम, छिंदवाड़ा, सतना, सीधी में भी बारिश का दौर जारी रहा। प्रदेश में बारिश का कोटा पूरा मौसम विभाग के अनुसार मध्य प्रदेश में अब तक 37.1 इंच बारिश हो चुकी है। शनिवार-रविवार की रात में हुई बारिश से आंकड़ा बढ़ गया। पिछले मानसूनी सीजन में औसत 44 इंच बारिश हुई थी। प्रदेश की सामान्य बारिश औसत 37 इंच है। इस बार बारिश के मामले में गुना सबसे बेहतर है। यहां 55.4 इंच बारिश हो चुकी है। गुना में 24 इंच पानी ज्यादा गिर चुका है। मंडला में 54 इंच बारिश हो चुकी है। श्योपुर में साढ़े 51 इंच, अशोकनगर में 51.1 इंच और रायसेन में 50.5 इंच पानी गिरा है। वहीं, सबसे कम बारिश वाले 5 जिले इंदौर और उज्जैन संभाग के हैं। शाजापुर में सबसे कम 21 इंच बारिश हुई है। इंदौर में 

इंदौर सराफा बाजार विवाद: चौपाटी लगाने को लेकर व्यापारी आज महापौर से करेंगे मुलाकात

इंदौर  सराफा चाट-चौपाटी को लेकर तकरार जारी है। सराफा व्यापारी चौपाटी को पूरी तरह से हटाने पर अड़े हुए हैं, जबकि जनप्रतिनिधि परंपरागत दुकानों के साथ चौपाटी जारी रखने की बात कह रहे हैं। सोमवार को सराफा व्यापारी (Indore Sarafa Market) इस संबंध में महापौर पुष्यमित्र भार्गव से मिलेंगे। चर्चा में सराफा एसोसिएशन के पदाधिकारियों के अलावा बाजार के वरिष्ठ व्यापारी भी शामिल रहेंगे। व्यापारियों का कहना है कि महापौर सराफा चौपाटी (Indore Sarafa Bazar) को इंदौर की पहचान बता रहे हैं तो सराफा का सोना-चांदी व्यापार भी पूरे देश में अपनी पहचान रखता है। यह एक धरोहर है। चौपाटी के लिए सराफा के व्यापार का नुकसान नहीं होना चाहिए। व्यापारियों का कहना है कि वे महापौर से सोमवार दोपहर मिलेंगे। चर्चा में निकले निष्कर्ष के बाद आगे की योजना बनाई जाएगी। महापौर किसी एक पक्ष के नहीं पूरे शहर के हैं। सराफा व्यापारियों का कहना है कि चौपाटी की वजह से सराफा की मूल पहचान गुम हो गई है। महापौर सराफा चौपाटी जारी रखने की बात कह रहे हैं। उन्हें समझना चाहिए कि वे किसी एक पक्ष के नहीं बल्कि पूरे शहर के महापौर हैं। उन्हें दोनों पक्षों को समान महत्व देते हुए विचार करना चाहिए। यह है विवाद 13 फरवरी 2024 को हरदा जिला स्थित एक पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट हो गया था। इस हादसे में 11 लोगों की मौत हुई थी। हादसे के बाद इंदौर की सराफा चौपाटी को लेकर भी सवाल उठने लगे। इस सराफा चौपाटी में कई दुकानदार हैं जो गैस सिलिंडर का इस्तेमाल करते हैं। शनिवार-रविवार को तो सराफा चौपाटी में पैदल चलने तक की जगह नहीं रहती। सराफा के सोना-चांदी व्यापारी चौपाटी को अन्यत्र शिफ्ट करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि इस चाट-चौपाटी की वजह से उनका सोने-चांदी का व्यापार प्रभावित हो रहा है। इधर जनप्रतिनिधियों का कहना है कि सराफा चौपाटी पूरे देश में इंदौर की पहचान है। इसे हटाया नहीं जा सकता।

खास है वैदिक घड़ी: CM मोहन यादव आज करेंगे भोपाल में अनावरण

 भोपाल मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज भोपाल में एक ऐतिहासिक पल का साक्षी बनने जा रहे हैं। वे दुनिया की पहली विक्रमादित्य वैदिक घड़ी और इसके मोबाइल ऐप का लोकार्पण करेंगे। यह घड़ी भारतीय काल गणना की प्राचीन परंपरा को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़कर समय को एक नए अंदाज में पेश करती है। इस घड़ी की खासियत हम आपको बता रहे हैं। 24 घंटे नहीं, 30 मुहूर्त का अनोखा समय विक्रमादित्य वैदिक घड़ी पारंपरिक 24 घंटे की घड़ी से पूरी तरह अलग है। यह भारतीय वैदिक काल गणना पर आधारित है, जिसमें दिन को 30 मुहूर्तों में बांटा गया है। इस घड़ी में सूर्योदय को शून्य और सूर्यास्त को 15 मुहूर्त माना जाता है। हर मुहूर्त लगभग 48 मिनट का होता है, जो भारतीय पंचांग के हिसाब से दिन और रात के समय को प्रकृति के साथ जोड़ता है। यह घड़ी न केवल समय बताती है, बल्कि भारतीय संस्कृति की वैज्ञानिक और आध्यात्मिक गहराई को भी दर्शाती है। कैसे काम करती है यह घड़ी? विक्रमादित्य वैदिक घड़ी भारतीय पंचांग और वैदिक काल गणना की प्राचीन पद्धति को आधार बनाकर संचालित होती है। यह सूर्योदय और सूर्यास्त के समय के अनुसार दिन को 30 मुहूर्तों में विभाजित करती है, जिससे समय की गणना प्रकृति के चक्रों के साथ संनादित रहती है। इसका मोबाइल ऐप उपयोगकर्ताओं को 3179 विक्रम पूर्व (श्रीकृष्ण के जन्म) से लेकर 7000 वर्षों से अधिक का विस्तृत पंचांग उपलब्ध कराता है, जिसमें तिथि, नक्षत्र, योग, करण, वार, मास, व्रत और त्योहारों की दुर्लभ जानकारी शामिल है। इसके अलावा, यह धार्मिक कार्यों, व्रत और साधना के लिए 30 अलग-अलग शुभ और अशुभ मुहूर्तों की जानकारी देता है, साथ ही अलार्म की सुविधा भी प्रदान करता है। यह ऐप वैदिक समय के साथ-साथ आधुनिक समय (GMT और IST), मौसम की जानकारी जैसे तापमान, हवा की गति और आर्द्रता को भी प्रदर्शित करता है। खास बात यह है कि यह 189 से अधिक वैश्विक भाषाओं में उपलब्ध है, जिससे इसे विश्व स्तर पर आसानी से उपयोग किया जा सकता है। भारतीय संस्कृति का गौरवपूर्ण प्रतीक विक्रमादित्य वैदिक घड़ी भारतीय परंपरा, वैदिक गणना और वैज्ञानिक दृष्टिकोण का अद्भुत मेल है। इसकी शुरुआत पहली बार 29 फरवरी 2024 को उज्जैन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई थी, जिसे देश-दुनिया में खूब सराहा गया। यह घड़ी भारत की प्राचीन काल गणना को पुनर्जनन देती है, जो विश्व की सबसे विश्वसनीय और वैज्ञानिक पद्धतियों में से एक मानी जाती है। यह न केवल समय को मापने का एक नया तरीका है, बल्कि भारत की सांस्कृतिक धरोहर को वैश्विक मंच पर ले जाने का एक प्रयास भी है।

मध्य प्रदेशवासियों को बड़ी राहत, अब सस्ती होगी बिजली

भोपाल  मध्य प्रदेश सरकार विद्युत उपभोक्ताओं को सस्ती बिजली देने की तैयारी कर ही है। इस दिशा में बिजली कंपनियों की माली हालत में सुधार, सब्सीडी में कमी, शत-प्रतिशत वसूली का लक्ष्य लेकर राज्य सरकार ने पांच वर्ष की एक कार्य योजना बनाई है। सरकार ने बिजली कंपनियों की बिल दक्षता, संग्रहण दक्षता, पारेषण हानि और सब्सीडी कम करके वर्ष 2028 -29 में पांच प्रतिशत की दर घटाने का लक्ष्य रखा गया है यानी सरकार की कार्ययोजना सफल हुई तो चुनावी साल में बिजली सस्ती भी हो सकती है। इस प्लान के तहत अगले वर्ष यानी 2026- 27 में टैरिफ में एक प्रतिशत वृद्धि का विकल्प रखा गया है। वहीं, वर्ष 2027-28 में बिजली की दरों में कोई वृद्धि नहीं करने की भी तैयारी है। कंपनियों ने 4107.18 करोड़ का घाटा बताया, तब महंगी हुई 3.46 प्रतिशत बिजली वैसे तो बिजली कंपनियों को करीब छह हजार करोड़ का फायदा है, लेकिन उन्होंने 4107.18 करोड़ का घाटा बताते हुए बिजली के मौजूदा टैरिफ में 7.52 फीसदी इजाफा करने की मांग की है। बिजली कंपनियों ने साल 2025-26 के लिए 58744.15 करोड़ के राजस्व की आवश्यकता बताई है। कंपनी के मुताबिक प्रचलित दरों पर 54636 करोड़ का राजस्व मिलेगा। इससे बिजली कंपनियों को 4107.18 करोड़ का नुकसान होगा। इसकी भरपाई के लिए कंपनियों ने टैरिफ बढ़ाने की मांग की है। फिर भी नियामक आयोग ने 3.46 प्रतिशत बिजली दरें बढ़ाने की मंजूरी दी थी। 2023-24 के अनुसार घाटे में नहीं थी कंपनियां मध्य प्रदेश की बिजली कंपनियां वर्तमान में वित्तीय वर्ष 2023-24 के अनुसार घाटे में नहीं थी, बल्कि उनकी आय और खर्च बराबर ही थे। हालांकि, 2025-26 के लिए बिजली दरों को बढ़ाने की मांग की गई है। 2022-23 में राज्य की वितरण उपयोगिताओं का कुल घाटा 57,223 करोड़ रुपये था, जो कि 2021-22 के 26,947 करोड़ रुपये से बढ़कर था। वहीं बिजली कंपनियों को वित्तीय वर्ष 2023-24 में 54,637 करोड़ रुपये की आय हुई और उतना ही खर्च हुआ। विद्युत दरों में कमी लाने नियमित होगी समीक्षा विद्युत वितरण कंपनियों की वित्तीय स्थिति में सुधार, तकनीकी और वाणिज्यिक (एटी एंड सी) हानियों में कमी तथा उपभोक्ताओं के लिए वित्तीय वर्ष 2028-29 तक विद्युत दरों में वर्ष-दर-वर्ष कमी लाने के लिए पांच वर्षीय (वित्तीय वर्ष 2024-25 से वित्तीय वर्ष 2028-29 तक) लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। इन लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए विद्युत वितरण कंपनी एवं मैदानी स्तर पर इन लक्ष्यों के अनुरूप आंतरिक लक्ष्य निर्धारित किए जाएंगे और कार्ययोजना बनाकर इनकी प्राप्ति के लिए समुचित कार्रवाई की जाएगी। इन लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए एमपी पावर मैनेजमेंट कंपनी एवं विभाग द्वारा नियमित रूप से समीक्षा की जाएगी।

स्कूल शिक्षा मंत्री सिंह कुशवाहा का संदेश: समाज की प्रगति में प्रतिभाओं का सम्मान अहम

स्कूल शिक्षा मंत्री सिंह कुशवाहा का संदेश: समाज की प्रगति में प्रतिभाओं का सम्मान अहम सिंह कुशवाहा बोले: शिक्षा और समाज की तरक्की के लिए प्रतिभाओं को मिलेगा सम्मान स्कूल शिक्षा मंत्री सिंह कुशवाहा समाज संगठन के कार्यक्रम में हुए शामिल भोपाल स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा है कि किसी भी समाज का विकास सही मायनों में तभी हो सकता है, जब उस समाज की प्रतिभाओं को सार्वजनिक रूप से सम्मानित किया जाये। प्रतिभाओं के सम्मान से अन्य वर्गों के लोगों को भी प्रेरणा मिलती है। मंत्री सिंह रविवार को नरसिंहपुर जिले के गाडरवारा में लव-कुश जन्मोत्सव एवं कुशवाह समाज के प्रतिभा सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में सांसद चौधरी दर्शन सिंह, नगरपालिका अध्यक्ष शिवाकांत मिश्रा, कुश कल्याण बोर्ड के चेयरमेन नारायण कुशवाहा भी मौजूद थे। स्कूल शिक्षा मंत्री सिंह ने कुशवाहा समाज के जन-कल्याण कार्यों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं के सशक्तिकरण के लिये लगातार प्रयास कर रही है। समाज की बेटियाँ शिक्षित हों, इसके लिये सामूहिक प्रयास की जरूरत है। बेटियों के शिक्षित होने से पूरा समाज शिक्षित हो सकेगा। उन्होंने शिक्षक महेश कुमार अध्रुज के अर्द्धवार्षिकी आयु पूर्ण कर सेवानिवृत्त होने पर उनका सम्मान किया। मंत्री सिंह भारतीय जीवन बीमा निगम के स्व-निर्माण कार्यक्रम में भी शामिल हुए।  

सरकारी स्कूलों के लिए बजट जारी, मिलेगा नया खाना खाने का सामान

सिंगरौली  मध्यप्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को मध्यान्ह भोजन अब नए बर्तनों में दिया जाएगा। राज्य शासन की ओर से बर्तन खरीदने के लिए जिलेवार राशि जारी कर दी गई है। बता दें कि, प्रदेश के कुल 69,051 हजार स्कूलों में पढ़ने वाले 51,75,194 बच्चों के लिए बर्तन खरीदने 91,06,75,000 रुपए जारी किए गए हैं। सिंगरौली जिले में 2.09 करोड़ रुपए के बर्तन इस आवंटन के बाद खरीदे जाएंगे। राज्य समन्वयक ने जारी किए आदेश इस संबंध में प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण के राज्य समन्वयक दिनेश जैन ने आदेश जारी कर दिए हैं। जिलावार विद्यालयवार राशि जारी करते हुए जिला पंचायत सीईओ नवीन बर्तन खरीदी संबंधी निर्देश भी जारी किए गए हैं। जिला पंचायत की एमडीएम सेल से मिली जानकारी के अनुसार इसके पहले वर्ष 2010 के लगभग नये बर्तन खरीदे गए थे। लिहाजा अब 15 साल बाद स्कूलों में मध्यान्ह भोजन के लिए नये बर्तनों की खरीदी होगी।   बर्तन खरीदने के लिए शाला स्तर पर समिति गठित की जाएगी। जिसमें शाला प्रबंधन समिति, प्रधानाध्यापक, स्वसहायता समूह के अध्यक्ष व सचिव शामिल होंगे। जिन विद्यालयों में छात्रों की संख्या 50 के लगभग हैं। उन्हें 10 हजार रुपए, 51 से 150 छात्र संख्या वाले विद्यालय को 15 हजार, 151 से 250 छात्र संख्या वाले विद्यालयों को 20 हजार एवं 251 से ज्यादा छात्र संख्या वाले स्कूलों को 25 हजार रुपए बर्तन खरीदने के लिए दिए जाएंगे। ये बर्तन मिलेंगे राज्य शासन की ओर से जारी की गई राशि से स्टील की 3 खंड वाली थाली, स्टील की चम्मच, दाल और सब्जी परोसने के लिए स्टील के भगोने, पानी पीने के लिए स्टील के गिलास सहित कई अन्य बर्तन दिए जाएंगे।