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पेयजल संकट से राहत: एक दिन में 3 हजार से ज्यादा शिकायतों का निस्तारण

जयपुर प्रदेशवासियों को पेयजल संकट से राहत दिलाने के लिए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान सरकार लगातार सक्रिय और संवेदनशील रूप से कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री के स्पष्ट निर्देशों, प्रभावी मॉनिटरिंग और जनहित सर्वोपरि की सोच के अनुरूप जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (पीएचईडी) द्वारा संचालित विशेष राज्यव्यापी अभियान प्रदेशभर में राहत का मजबूत आधार बनकर उभरे हैं। इन अभियानों के माध्यम से न केवल हजारों पेयजल समस्याओं का त्वरित समाधान किया गया है, बल्कि गर्मी के इस चुनौतीपूर्ण दौर में लाखों लोगों तक निर्बाध एवं गुणवत्तापूर्ण पेयजल पहुंचाने में भी उल्लेखनीय सफलता प्राप्त हुई है। एक ही दिन में 3 हजार से अधिक समस्याओं का निस्तारण, टीमों ने दिखाई असाधारण तत्परता शनिवार को आयोजित आठवें विशेष अभियान के दौरान विभागीय टीमों ने शहरों से लेकर दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों तक जल स्रोतों, पाइपलाइन नेटवर्क और जलापूर्ति व्यवस्थाओं का व्यापक निरीक्षण किया। अभियान के तहत 718 खराब हैंडपंपों को पुनः चालू किया गया, 612 पाइपलाइन लीकेज दुरुस्त किए गए, 226 प्रेशर संबंधी समस्याओं का समाधान किया गया तथा 265 क्षेत्रों में बाधित जलापूर्ति बहाल की गई। इसके अतिरिक्त कम अवधि की जलापूर्ति, कम सप्लाई और प्रदूषित जल संबंधी शिकायतों का भी त्वरित निस्तारण किया गया। कुल मिलाकर एक ही दिन में 3,010 पेयजल संबंधी कार्य पूर्ण कर विभाग ने अपनी प्रतिबद्धता और कार्यकुशलता का परिचय दिया। तकनीकी टीमों की तत्परता से 2987 शिकायतों का मौके पर समाधान आठवें अभियान के दौरान तकनीकी टीमों ने समन्वित एवं त्वरित कार्रवाई करते हुए लगभग 2987 शिकायतों का मौके पर ही निस्तारण किया। विभाग की सक्रियता के कारण आमजन को तत्काल राहत मिली और पेयजल संबंधी समस्याओं का शीघ्र समाधान संभव हो सका। विशेष अभियानों से पेयजल व्यवस्था में आया व्यापक बदलाव 5 अप्रैल से 13 जून तक संचालित आठ विशेष राज्यव्यापी अभियानों के दौरान प्रदेशभर में कुल 22 हजार 396 पेयजल संबंधी कार्य सफलतापूर्वक संपन्न किए गए। इनमें 4 हजार 484 हैंडपंपों की मरम्मत, 2 हजार 848 पाइपलाइन लीकेज की दुरुस्ती, 1 हजार 445 प्रेशर संबंधी समस्याओं का समाधान तथा 1 हजार 655 बाधित जलापूर्ति मामलों का निस्तारण शामिल है। इसके अलावा 8 हजार 238 अन्य सुधारात्मक कार्यों के माध्यम से पेयजल व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़, प्रभावी एवं भरोसेमंद बनाया गया है। अवैध जल कनेक्शनों पर सख्ती से जल संरक्षण को मिला नया संबल जल संरक्षण और संसाधनों के समुचित प्रबंधन को प्राथमिकता देते हुए विभाग ने अवैध जल उपयोग के खिलाफ भी व्यापक अभियान चलाया। विशेष कार्रवाई के तहत 359 अवैध जल कनेक्शन हटाए गए, जिनमें होटल, ढाबे तथा कृषि कार्यों में उपयोग किए जा रहे कनेक्शन शामिल थे। अब तक आठ अभियानों में कुल  2 हजार 186 अवैध जल कनेक्शन हटाए जा चुके हैं, जिससे जल की बर्बादी पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित हुआ है और आमजन के लिए उपलब्ध जल संसाधनों की सुरक्षा सुनिश्चित हुई है। ग्रामीण अंचलों में मजबूत हुई जलापूर्ति, हजारों परिवारों को राहत हैंडपंपों और पाइपलाइनों की मरम्मत के साथ-साथ  आठवें अभियान में 578 अन्य सुधारात्मक कार्यों ने ग्रामीण क्षेत्रों की पेयजल व्यवस्था को नई मजबूती प्रदान की है। इन प्रयासों से हजारों परिवारों को गर्मी के इस कठिन दौर में राहत मिली है तथा जलापूर्ति की गुणवत्ता और उपलब्धता में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। 30 जून तक जारी रहेगा विशेष राहत अभियान मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देशानुसार प्रदेशभर में पेयजल व्यवस्थाओं को मजबूत बनाए रखने के लिए विशेष राज्यव्यापी अभियान 30 जून तक निरंतर संचालित किए जाएंगे। इन अभियानों का उद्देश्य हर घर तक स्वच्छ, पर्याप्त और निर्बाध पेयजल उपलब्ध कराना तथा गर्मी के मौसम में किसी भी नागरिक को पेयजल संकट का सामना न करने देना है।

स्वच्छता और सौंदर्यीकरण पर फोकस, जयपुर के विकास की समीक्षा में सीएम के बड़े निर्देश

जयपुर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि जयपुर के सुव्यवस्थित विकास, स्वच्छता और सौंदर्यीकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए इसे देश के मॉडल शहर के रूप में विकसित किया जाए। इसके लिए उन्होंने संबंधित विभागों को समन्वित कार्ययोजना के साथ मिशन मोड पर कार्य करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने रविवार को मुख्यमंत्री निवास पर जयपुर के विकास, स्वच्छता एवं सौंदर्यीकरण को लेकर विभागीय अधिकारियों की बैठक ली। मुख्यमंत्री ने कहा कि राजधानी की स्वच्छता व्यवस्था सुदृढ़ करने के लिए कचरा संग्रहण, परिवहन एवं वैज्ञानिक निस्तारण के लिए बेहतर कार्ययोजना बनाकर प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करें। उन्होंने स्वच्छता व्यवस्था को अनुशासित बनाने के लिए खुले में कचरा फेंकने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वच्छता केवल प्रशासनिक दायित्व नहीं बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व भी है। इसलिए जनभागीदारी को बढ़ावा देते हुए जनजागरूकता अभियान चलाएं तथा सामाजिक संगठनों, स्वयंसेवी संस्थाओं एवं भामाशाहों को भी इस अभियान से जोड़े। उन्होंने आधुनिक तकनीक पर बल देते हुए कहा कि मशीनीकृत सफाई व्यवस्था को बढ़ावा तथा मैनुअल व्यवस्था पर निर्भरता को कम करने के निर्देश दिए। मानसून सीजन की तैयारियों को दें अंतिम रूप मानसून सीजन को देखते हुए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को समयबद्ध तैयारियां सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नालों की व्यापक सफाई समय रहते पूर्ण की जाए। इससे जलभराव की संभावित समस्याओं वाले क्षेत्रों की विशेष निगरानी करते हुए सुगम जल निकासी सुनिश्चित होगी। साथ ही, उन्होंने मानसून सीजन के दौरान नागरिकों को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए संबंधित विभागों को समन्वित रूप से कार्य करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि राजधानी में विशेष स्वच्छता अभियान चलाकर पूरे शहर को स्वच्छ, सुंदर और व्यवस्थित स्वरूप प्रदान किया जाए। इसके लिए उन्होंने पर्याप्त संख्या में डस्टबिन उपलब्ध कराने तथा कचरा निस्तारण प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि जयपुर केवल प्रदेश की राजधानी ही नहीं, बल्कि राजस्थान की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और पर्यटन पहचान का प्रमुख केंद्र है। उन्होंने निर्देश दिए कि पर्यटन स्थलों, प्रमुख मार्गों और सार्वजनिक स्थलों को विशेष रूप से स्वच्छ, आकर्षक और पर्यटन अनुकूल बनाया जाए, ताकि जयपुर की वैश्विक पहचान और अधिक सुदृढ़ हो सके राजधानी के सौंदर्यीकरण को नई दिशा देने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री ने शहर की एक प्रमुख सड़क को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में ‘मॉडल रोड’ विकसित करने के निर्देश दिए। इस मॉडल रोड पर स्वच्छता, हरियाली, प्रकाश व्यवस्था, सौंदर्यीकरण, यातायात प्रबंधन, पैदल यात्री सुविधाएं एवं अन्य नागरिक सुविधाओं के उच्च मानक विकसित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि इस परियोजना की सफलता के आधार पर अन्य प्रमुख मार्गों पर भी इसी मॉडल को लागू किया जाएगा। बैठक के दौरान जयपुर विकास प्राधिकरण, राजस्थान आवासन मंडल एवं नगर निगम द्वारा राजधानी में संचालित विकास कार्यों तथा आगामी कार्ययोजना पर आधारित विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया गया। मुख्यमंत्री ने विभिन्न परियोजनाओं की प्रगति की जानकारी लेते हुए गुणवत्ता, पारदर्शिता और समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बैठक में मुख्यमंत्री कार्यालय, शहरी विकास विभाग, राजस्थान आवासन मंडल, जयपुर विकास प्राधिकरण, जयपुर नगर निगम, जिला प्रशासन सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

अलवर: केंद्र-राज्य योजनाओं और विकास कार्यों की मंत्री ने दी जानकारी

 जयपुर 12 साल विश्वास के, विकास के, जनकल्याण के विषय पर आधारित तीन दिवसीय प्रदर्शनी का जल संसाधन मंत्री श्री सुरेश सिंह रावत ने सूचना एवं जन सम्पर्क कार्यालय, धौलपुर में प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की प्रदर्शनी न केवल सरकारी योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराती है, बल्कि प्रशासनिक अधिकारियों को भी जनकल्याणकारी कार्यक्रमों की व्यापकता एवं प्रभावशीलता को समझने का अवसर प्रदान करती है। प्रदर्शनी के माध्यम से यह स्पष्ट रूप से देखने को मिला कि सरकार की विभिन्न योजनाओं ने समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक लाभ पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। प्रदर्शनी में प्रधानमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत योजना, उज्ज्वला योजना, जल जीवन मिशन, स्वच्छ भारत मिशन, डिजिटल इंडिया, किसान सम्मान निधि सहित विभिन्न केंद्रीय योजनाओं तथा राज्य सरकार की जनहितकारी पहल, सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों, शिक्षा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र में किए गए सुधारों तथा विकास परियोजनाओं की विस्तृत जानकारी प्रदर्शित की गई। इसके अतिरिक्त महिला एवं बाल विकास, कौशल विकास, रोजगार संवर्धन तथा ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं के विस्तार से संबंधित उपलब्धियों को भी प्रमुखता से दर्शाया गया। उन्होंने प्रदर्शनी के सफल आयोजन के लिए सूचना एवं जनसंपर्क विभाग की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन आमजन एवं प्रशासन के बीच संवाद स्थापित करने तथा विकास यात्रा को समझने का प्रभावी माध्यम हैं। उल्लेखनीय है कि सूचना एवं जनसंपर्क विभाग द्वारा आयोजित यह प्रदर्शनी केंद्र एवं राज्य सरकार की विकासोन्मुखी नीतियों, जनकल्याणकारी कार्यक्रमों तथा सुशासन के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाने का महत्वपूर्ण माध्यम बन रही है। प्रदर्शनी के माध्यम से नागरिकों को सरकार द्वारा संचालित योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराने के साथ-साथ उन्हें इन योजनाओं का लाभ उठाने के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है। इस दौरान जिला कलक्टर निधि बी टी, जिला अध्यक्ष राजवीर सिंह राजावत, गिर्राज सिंह, डॉ. शिवचरण कुशवाह, नीरजा शर्मा, मोतीलाल मीणा सहित अन्य जनप्रतिनिधि व कर्मचारी उपस्थित रहे।

नमक उत्पादकों के लिए नए नियम, लीज नवीनीकरण और 6 माह की छूट मंजूर

जयपुर राजस्‍थान सरकार द्वारा नमक उत्‍पादकों के हित को ध्‍यान में रखते हुए भूखंड आवंटन से संबंधित नियमों में संशोधन किया गया है। राज्य में नमक उद्योग को बढावा देने के लिए वतर्मान में प्रचलित नियमों में संशोधन कर राजस्‍थान (लवण क्षेत्रों में भूखंड आवटंन) संशोधन नियम, 2026 जारी किए गए हैं। नए नियमों के अनुसार, अब नमक उद्योग के लिए भूखंड आवंटन ई-ऑक्शन के माध्यम से किया जाएगा। पूर्व में यह प्रक्रिया लॉटरी आधारित थी। साथ ही, नियमों में अपील किए जाने, नमक इकाइयों के वर्गीकरण संबंधी प्रावधान भी शामिल किए गए हैं। जिन जिलो में नमक उत्‍पादन हेतु लवणीय भूमि उपलब्‍ध है, उनमें अब  सर्वे सीमांकन और भूखंडो के मापन के बाद आवंटन की कार्यवाही की जा सकेगी। इन नियमों की लंबे समय से नमक उत्‍पादको द्वारा  मांग की जारी रही थी। वर्तमान में लीज नवीनीकरण से वंचित नमक उत्‍पादक इकाइयों का नवीनीकरण किए जाने से नमक उद्यमियों को राहत मिलेगी।  नए लवण क्षेत्रों मे आवंटन की राह खुलेगी, जिससे इस क्षेत्र में और अधिक निवेश होगा। इससे लोगों को रोजगार भी मिलेगा। 300 इकाइयां नवीनीकरण से थी वचिंत, अब 6 माह की छूट मिलेगी पूर्व के नियमों में लीज समाप्‍त होने के चार वर्ष पश्‍चात नवीनीकरण करने को कोई प्रावधान नही होने से लगभग 300 नमक उत्‍पादक इकाइयां लीज नवीनीकरण से वंचित थी, जिसके कारण नमक उत्‍पादक काफी परेशान थे। राज्‍य सरकार द्वारा ऐसी इकाईयों को 6 माह की एकमुश्‍त छूट प्रदान कर नमक उत्‍पादकों को काफी राहत प्रदान की है। इस छूट से नमक उत्‍पादक इकाईयों का लीज नवीनीकरण हो सकेगा और राज्‍य सरकार को राजस्‍व में भी लाभ मिलेगा ।

ग्राम पंचायत स्तर पर बड़े बदलाव, IAS–RAS अधिकारियों को मिली विशेष शक्तियां

 जयपुर राज्य सरकार द्वारा प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिकों की समस्याओं, विशेषकर जमीन से जुड़े मामलों का मौके पर ही त्वरित निस्तारण करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है। जनकल्याण शिविर के अन्तर्गत प्रदेश की प्रत्येक ग्राम पंचायत मुख्यालय पर दिनांक 12 जून से 15 जुलाई तक 'ग्रामीण सेवा शिविर-2026' का वृहद स्तर पर आयोजन किया जा रहा है। संभागीय आयुक्त और जिला कलक्टरों को मिले विशेष अधिकार इस महा-अभियान के प्रभावी एवं सफल क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए राजस्व विभाग ने प्रशासनिक शक्तियों का विकेंद्रीकरण किया है। अभियान की अवधि के लिए समस्त संभागीय आयुक्तों और जिला कलक्टरों को विशेष रूप से प्राधिकृत किया गया है। इसके तहत वे अपने-अपने क्षेत्राधिकार में 'नॉन-फील्ड' (कार्यालयों/गैर-क्षेत्रीय पदों पर) कार्यरत तहसीलदारों एवं नायब तहसीलदारों को तुरंत प्रभाव से तहसीलों या उप-तहसीलों के रिक्त पदों पर पदस्थापित कर सकेंगे राज्यभर में 12 जनवरी से शुरू हो रहे 'ग्रामीण सेवा शिविर-2026' अभियान में मौके पर ही समस्या समाधान के लिए राज्य सरकार ने कई अधिकारियों की शक्तियों को शिविर प्रभारियों व अन्य अधिकारियों को डेलीगेट कर दी है। ये आदेश 12 जून से 15 जुलाई तक प्रभावी होंगे। शिविर प्रभारी आईएएस, आरएएस को मिली ये शक्तियां आदेशों के अनुसार राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम, 1956 की धारा 92 के अंतर्गत आबादी विस्तार हेतु भूमि आरक्षित किये जाने एवं राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम, 1956 की धारा 92 के अंतर्गत आबादी विस्तार हेतु भूमि आरक्षित किये जाने की जिला कलक्टर की शक्तियां 'ग्रामीण सेवा शिविर-2026' के लिये शिविर प्रभारी बनाए गए भारतीय प्रशासनिक सेवा एवं राजस्थान प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को दे दी गई हैं।   राजस्थान भू-राजस्व (कृषि प्रयोजनार्थ भूमि आवंटन) नियम, 1970 के अंतर्गत उपखण्ड अधिकारी की शक्तियां भी इन अधिकारियों को दी गई हैं। राजस्थान काश्ताकारी अधिनियम, 1955 (अधिनियम सख्यां 3, वर्ष 1955) की धारा 251-ए व उसके अन्तर्गत बने नियमों के तहत अन्य खातेदार की जोत में से होकर भूमिगत पाइपलाइन बिछाने या नया मार्ग खोलने या विद्यमान मार्ग को चौड़ा करने के लिये उपखण्ड अधिकारियों को प्रदत्त शक्तियां भी इन अधिकारियों को दी गई हैं। राजस्व अभिलेख की त्रुटियों के शुद्धिकरण के प्रकरणों के निस्तारण हेतु उपखण्ड अधिकारी की  शक्तियां भी शिविर प्रभारी बनाए गए भारतीय प्रशासनिक सेवा एवं राजस्थान प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को दी गई हैं। शिविरों में नियुक्त तहसीलदार/नायब तहसीलदार को मिली शक्तियां राजस्थान काश्तकारी अधिनियम, 1955 (संख्या 3, वर्ष 1955) की धारा 53 की उप-धारा (1) व (2) एवं उसके अन्तर्गत बने नियमों के तहत भूमि के बंटवारे की तहसीलदार की शक्तियां 'ग्रामीण सेवा शिविर-2026' के लिये नियुक्त तहसीलदार/ नायब तहसीलदार को दी गई हैं। राजस्थान काश्तकारी अधिनियम, 1955 (अधिनियम संख्या 3, वर्ष 1955) की धारा 251 (1) के तहत रास्ते तथा अन्य निजी सुखाचार के अधिकार के तहत तहसीलदार की शक्तियां शिविरों के लिए नियुक्त  समस्त नायब तहसीलदारों को प्रदान की गई हैं। नामान्तरकरण के मामलों की ग्राम पंचायत की शक्तियां और राजस्थान भू-राजस्व (कृषि प्रयोजनार्थ भूमि आवंटन) नियम, 1970 के नियम 18 के अन्तर्गत तहसीलदार की शक्ति व राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम, 1956 (अधिनियम संख्या 15, वर्ष 1956) की धारा 128 के परन्तुक एवं अधिसूचना क्रमांक 5 (21) राज-4/80/36 दिनांक 04.09.1982 के तहत अविवादित सीमा ज्ञान के मामलो को निर्णित करने की ग्राम पंचायत की शक्तियां शिविर में नियुक्त तहसीलदार/ नायब तहसीलदार को प्रदत्त की गई हैं। ऐसे तहसीलदारों व नायब तहसीलदारों को  राज्य सरकार राजस्थान काश्ताकारी अधिनियम, 1955 (अधिनियम सख्यां 3, वर्ष 1955) की धारा 251 एवं अधिसूचना क्रमांक 5 (21) राज-4/80/34 दिनांक 14.09.1982 के तहत मार्गाधिकार या अन्य सुखाचार के वास्तविक उपयोग में विघ्न डाले जाने के मामलों को निर्णित करने की ग्राम पंचायत की शक्तियां भी दे दी गई हैं। समय अवधि 15 दिन से 7 दिन की राजस्थान भू-राजस्व (कृषि प्रयोजनार्थ भूमि आवंटन) नियम, 1970 के नियम के खण्ड (ख) के द्वितीय परन्तुक में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुये भूमि आवंटन के लिये आवेदन प्रस्तुत किये जाने के लिये जारी उद्घोषणा के लिये निर्धारित पन्द्रह दिवस की कालावधि को कम कर सात दिन कर दिया गया है। भूमि आवंटन की राज्य सरकार की पॉवर कलेक्टर को राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम, 1956 की धारा 102क के अन्तर्गत आबादी विस्तार हेतु आरक्षित भूमि को स्थानीय निकायों के अधीन किये जाने की राज्य सरकार को प्रदत्त शक्तियां  जिला कलक्टर को दी गई है।  

पश्चिमी विक्षोभ के असर से बदला मौसम, 4–5 दिन और बारिश के आसार

 लखनऊ प्रदेश में आंधी बारिश का दौर लगातार जारी है.  बरसात के बीच लोगों को गर्मी से राहत मिल रही है.  शनिवार को भी राज्य के कई स्थानों में बरसात हुई.  राजस्थान में प्री मानसून अच्छी बरसात हो रही है. कई जगहों पर ओलावृष्टि भी हुई. बरसात के कारण कई जगहों के तापमान में गिरावट हुई.  प्रदेश में जैसलमेर में तापमान सर्वाधिक 40.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो कि शुक्रवार की तुलना में करीब 3.4 डिग्री सेल्सियस कम हुआ.   राजधानी जयपुर में भी सुबह से ही सूरज और बादल की आंख मिचौली चल रही है.  लोगों का उमस से हाल बेहाल है.  लेकिन तापमान में पिछले दिनों की तुलना गिरावट हुई है.   बदला मौसम का मिजाज मौसम विभाग के निदेशक राधेश्याम शर्मा ने बताया कि राजस्थान में पश्चिमी विक्षोभ के असर से मौसम का मिजाज बदला हुआ है.  वर्तमान में पश्चिमी विक्षोभ हरियाणा और आसपास के क्षेत्र में परिसंचरण तंत्र के रूप में सक्रिय है.  इसके साथ ही बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से आ रही नम हवाओं के कारण प्रदेश में आंधी-बारिश की गतिविधियां बढ़ी हैं. तेज मेघगर्जन के साथ आंधी-बारिश पिछले 24 घंटे में बीकानेर, जयपुर और भरतपुर संभाग के कुछ हिस्सों में तेज मेघगर्जन, आंधी के साथ बारिश दर्ज की गई.  सीकर के दांतारामगढ़ में सबसे ज्यादा 50 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड हुई. आज भी बीकानेर, जयपुर, भरतपुर, अजमेर, जोधपुर और कोटा संभाग के कुछ क्षेत्रों में तेज आंधी के साथ बारिश की संभावना जताई गई है.  इस दौरान 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं.  अगले 4 से 5 दिन तक प्रदेश के कई हिस्सों में आंधी-बारिश का दौर जारी रह सकता है.

विश्व धरोहर चित्तौड़गढ़ दुर्ग से हटाया गया अतिक्रमण, 2 मंजिला होटल ध्वस्त

चित्तौड़गढ़ विश्व विरासत में शुमार ऐतिहासिक चित्तौड़गढ़ दुर्ग के भीतर प्रशासन का बुलडोजर चला. फोर्ट के भीतर अतिक्रमण को लेकर प्रशासन ने यह कार्रवाई की. यहां पुरातत्व विभाग की जमीन पर अवैध 2 मंजिला होटल बनाया जा रहा था. प्रशासन रविवार (14 जून) अलसुबह भारी पुलिस जाब्ते के साथ मौके पर पहुंचा और अवैध निर्माण को ढहा दिया. सुबह ठीक 4 बजे, जब पूरा शहरवासी गहरी नींद में थे, तब प्रशासनिक अमला अपने दुर्ग पर पहुंचा. अवैध रूप से बन रही इमारत को जमींदोज करने के लिए 10 जेसीबी, 8 ट्रेक्टर, 3 ब्रेकर मशीनों की मदद ली गई. सुरक्षा के लिहाज से दुर्ग की तरफ आने-जाने वाले सभी रास्तों को ब्लॉक कर दिया गया. चप्पे-चप्पे पर भारी पुलिस बल भी तैनात रहा. शहर कोतवाली में नामजद मामला भी दर्ज पिछले दिनों कलेक्ट्रेट में उच्च स्तरीय बैठक में प्लानिंग बनाई गई और आज सुबह एक्शन लिया गया. जिला कलक्टर डॉ. मंजू ने बैठक में सख्त रुख अपनाते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि पुरातत्व विभाग की जमीन पर अवैध निर्माण करने वालों के खिलाफ तुरंत एफआईआर दर्ज की जाए. कलक्टर के आदेश के बाद पुरातत्व विभाग के अधिकारी ने चित्तौड़गढ़ शहर कोतवाली में एक नामजद मामला भी दर्ज हुआ. पुरातत्व विभाग की जमीन पर पहली बार ऐसी कार्रवाई पुरातत्व विभाग के अधिकारी मनोज द्विवेदी ने बताया कि हमारे संरक्षित क्षेत्र में यह अवैध निर्माण किया गया था. अवैध निर्माण हटाने को लेकर पहले नोटिस भी दिया गया था. जिला प्रशासन के सहयोग से पुरातत्व विभाग की जमीन पर अवैध निर्माण होटल को हटा दिया गया है. राजस्थान में यह अपने आप में पहली ऐसी बड़ी कार्रवाई है, जहां पुरातत्व विभाग की जमीन से अतिक्रमण हटाया गया है. अगर ऐसी कार्रवाई होती रही, तो हमारी राष्ट्रीय धरोहरें हमेशा सुरक्षित रहेंगी. 8 से 10 रेस्टोरेंट पर चल सकता है बुलडोजर प्रशासन की इस बुलडोजर कार्रवाई के बाद दुर्ग क्षेत्र के आसपास हलचल तेज हो गई है. साल 2020 के बाद से चित्तौड़गढ़ दुर्ग पर करीब 8 से 10 अवैध रेस्टोरेंट और होटलों का निर्माण हुआ है. इन सभी पर कार्रवाई के लिए दिल्ली स्थित आर्कियोलॉजिकल डिपार्टमेंट को पत्र लिखा जा चुका है. जैसे ही वहां से उच्च स्तरीय स्वीकृति मिलेगी, दुर्ग पर बने अन्य अवैध होटलों और रेस्टोरेंट्स पर भी प्रशासन का बुलडोजर चलना तय माना जा रहा है.

जयपुर डेयरी का मेगा अपग्रेड तैयार, CM भजनलाल शर्मा करेंगे उद्घाटन; बढ़ी प्रोसेसिंग क्षमता

जयपुर  जयपुर जिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लिमिटेड (जयपुर डेयरी) ने अपने उपभोक्ताओं और पशुपालकों को बड़ी सौगात देते हुए प्लांट की उत्पादन व प्रोसेसिंग क्षमता में ऐतिहासिक विस्तार किया है। डेयरी ने करीब 133 करोड़ रुपए की लागत से अपने मौजूदा प्लांट का आधुनिकीकरण (Modernization) पूरा कर लिया है। इस अपग्रेडेशन के बाद प्लांट की दूध प्रोसेसिंग क्षमता अब 12 लाख लीटर से सीधे बढ़कर 20 लाख लीटर प्रतिदिन हो गई है। इस अत्याधुनिक नए प्लांट का उद्घाटन मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा जल्द ही करेंगे। विद्युत और प्रोसेसिंग यूनिट्स के सफल संचालन के बाद डेयरी मंत्री जोराराम कुमावत ने प्लांट का दौरा कर उद्घाटन समारोह की तैयारियों की समीक्षा की। मंत्री कुमावत ने अधिकारियों से नई ऑटोमैटिक प्रोसेसिंग यूनिट्स की कार्यप्रणाली को बारीकी से समझा और कार्यक्रम के सफल आयोजन को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।  इस अवसर पर राजस्थान कोऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन (RCDF) की प्रबंध संचालक (MD) श्रुति भारद्वाज और जयपुर डेयरी के एमडी मनीष फौजदार सहित कई आला अधिकारी मौजूद रहे। संवाददाताओं से बातचीत करते हुए डेयरी मंत्री ने बताया कि इस नए और सर्वसुविधायुक्त प्लांट से उत्पादन क्षमता में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है, जिसका सीधा फायदा जयपुर और आसपास के जिलों के दुग्ध उत्पादकों को मिलेगा: पैकेजिंग क्षमता: दूध की प्रोसेसिंग के साथ ही पाउच पैकिंग की क्षमता को भी रफ्तार दी गई है। अब प्रतिदिन दूध पाउच पैक करने की क्षमता 10 लाख लीटर से बढ़कर 16.50 लाख लीटर हो गई है। घी उत्पादन: प्लांट की नई तकनीक के चलते अब यहाँ रोजाना 70 टन घी का उत्पादन आसानी से किया जा सकेगा। आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर : प्लांट में नई जनरेशन के बॉयलर और हैवी मशीनरी स्थापित की गई है, जो प्रति घंटे लगभग 70 मीट्रिक टन भाप जेनरेट कर सकती है। इसकी मदद से घी, बटर और वे-वाटर (Whey Water) जैसे विभिन्न दुग्ध उत्पादों का निर्माण और अधिक शुद्धता व गति से संभव हो सकेगा। महत्व : जयपुर डेयरी का यह नया रूप न केवल मिलावट रहित और शुद्ध दुग्ध उत्पादों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करेगा, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सहकारिता आंदोलन को भी राजस्थान में एक नई मजबूती प्रदान करेगा।

मानव हस्तक्षेप से प्रभावित अरावली क्षेत्र की जैव विविधता में गिरावट

 उदयपुर  उदयपुर संभाग के जंगलों में आज भले ही तेंदुए, सियार और जंगली सूअर बड़ी संख्या में दिखाई दे रहे हों, लेकिन एक सदी पहले मेवाड़ के वन बाघ, शेर, चीता और जंगली कुत्तों जैसे शीर्ष वन्यजीवों की शरणस्थली थे। जयसमंद वन्यजीव अभयारण्य पर किए गए एक शोध अध्ययन में यह तथ्य सामने आया है कि मानव हस्तक्षेप, जंगलों के विखंडन और प्राकृतिक वन्यजीव गलियारों के टूटने से क्षेत्र की जैव विविधता में भारी गिरावट आई है। शोध के अनुसार जयसमंद और आसपास का क्षेत्र कभी बाघ, शेर, चीता, भेड़िया, जंगली कुत्ता, काला हिरण, चिंकारा, चीतल, सांभर और नीलगाय जैसे वन्यजीवों से समृद्ध था। उस समय अरावली के जंगल पाली के गोरमघाट और कमलीघाट से लेकर मध्यप्रदेश तक फैले हुए थे, जिससे वन्यजीवों का आवागमन निर्बाध बना रहता था। शिकार और जंगलों की कटाई बनी बड़ी वजह विशेषज्ञों के अनुसार राजशाही काल में बड़े पैमाने पर शिकार और बाद के वर्षों में बढ़ते मानव दबाव ने वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को नुकसान पहुंचाया। खेती के विस्तार, खनन गतिविधियों, सड़क निर्माण और आबादी बढ़ने से वन क्षेत्र छोटे-छोटे हिस्सों में बंट गए। इसका सीधा असर उन प्रजातियों पर पड़ा जिन्हें बड़े और निरंतर जंगलों की आवश्यकता होती है। कई प्रजातियां हुईं स्थानीय रूप से विलुप्त शोध में बताया गया है कि बाघ, शेर, चीता, जंगली कुत्ता और काला हिरण जैसी कई प्रजातियां जयसमंद क्षेत्र से स्थानीय रूप से विलुप्त हो चुकी हैं। वर्ष 2005 से 2009 के बीच किए गए अध्ययन में केवल 21 स्तनधारी प्रजातियां दर्ज की गईं, जिनमें से बड़ी संख्या कम या दुर्लभ श्रेणी में पाई गई। वर्तमान में तेंदुआ और जंगली सूअर का दबदबा हाल ही में उदयपुर संभाग की वन्यजीव गणना के अनुसार वर्तमान में जंगली सूअर 515, सियार 251, जरख 173 और तेंदुए 57 दर्ज किए गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि तेंदुए जैसे अनुकूलनशील वन्यजीव बदलते परिवेश में खुद को ढालने में सफल रहे हैं, जबकि कई संवेदनशील प्रजातियां लगातार सिमटती जा रही हैं। कॉरिडोर बचाने की जरूरत वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि फुलवारी की नाल, जयसमंद, सज्जनगढ़ और कुंभलगढ़ के बीच प्राकृतिक वन्यजीव कॉरिडोर का संरक्षण नहीं किया गया तो आने वाले वर्षों में जैव विविधता पर और गंभीर खतरा मंडरा सकता है। शोधकर्ताओं ने वन्यजीव आवासों की सुरक्षा, मानव हस्तक्षेप में कमी और स्थानीय समुदायों की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया है।  

SSO आईडी से ऑनलाइन पेंशन वेरिफिकेशन की नई व्यवस्था लागू

जयपुर अब तक पेंशन चालू रखने के लिए हर साल बुजुर्गों को बैंकों में जाकर लंबी लाइनों में लगना पड़ता था। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। सरकार ने तकनीक का इस्तेमाल करते हुए फेस ऑथेंटिकेशन को हरी झंडी दे दी है। इसका मतलब है कि पेंशनर्स अब मोबाइल या कंप्यूटर पर सिर्फ अपना चेहरा स्कैन करके अपना जीवन प्रमाण पत्र घर बैठे ही जमा कर सकेंगे। SSO ID से वेरिफिकेशन हुआ बेहद आसान पेंशनर्स के वेरिफिकेशन की प्रक्रिया को भी बहुत आसान बना दिया गया है। सचिवालय के सूत्रों के मुताबिक, अब चतुर्थ श्रेणी से ऊपर के कोई भी सरकारी कर्मचारी अपनी एसएसओ आईडी का इस्तेमाल कर सकेंगे। वे इसके जरिए ई-साइन करके किसी भी पेंशनर के जीवन प्रमाण पत्र को तुरंत ऑनलाइन वेरिफाई कर पाएंगे। इससे कागजी कार्रवाई से पूरी तरह छुटकारा मिल जाएगा। दिव्यांग बच्चों की आजीवन पेंशन पर नया नियम सरकार ने दिव्यांग बच्चों को मिलने वाली आजीवन पारिवारिक पेंशन के नियमों में भी बड़ा सुधार किया है। अब दिव्यांगता का सर्टिफिकेट किसी सक्षम अधिकारी या विशेषज्ञों के मेडिकल बोर्ड से ही बनवाना होगा। अगर दिव्यांगता स्थाई है, तो यह सर्टिफिकेट पूरी जिंदगी में सिर्फ एक ही बार जमा करना होगा। अगर दिव्यांगता अस्थाई है, तो पेंशन जारी रखने के लिए हर 3 साल में नया सर्टिफिकेट जमा कराना जरूरी होगा।