samacharsecretary.com

80 हजार करोड़ की रिफाइनरी परियोजना को रफ्तार, राजस्थान में 300 से अधिक नए पेट्रोल पंप खुलेंगे

जयपुर राजस्थान में करीब 80 हजार करोड़ रुपए के रिफाइनरी परियोजना के तहत हिन्दुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) प्रथम चरण में 300 से अधिक नये पेट्रोल पंप खोलेगा। राज्य के मुख्य सचिव वी श्रीनिवास ने शनिवार को सचिवालय में एक उच्च स्तरीय बैठक लेकर एचपीसीएल और एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी लिमिटेड के अधिकारियों के साथ चर्चा कर सरकारी भूमि को पट्टे पर देकर 300 से ज्यादा स्थानों पर पेट्रोल पंप लगाने के मामले में अब तक हुई प्रगति की समीक्षा की। उल्लेखनीय है कि राजस्थान रिफाइनरी राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए बहुत जरूरी है। 80 हजार करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट से राज्य में नए निवेश, उद्योग और रोजगार को बड़ा बूस्ट मिलेगा। इस योजना के तहत 304 स्थानों की पहचान की जा चुकी है। इन नए रिटेल आउटलेट्स की स्थापना के लिए एचपीसीएल लगभग 400 करोड़ रुपए का निवेश करेगा। एक नई नीति तैयार की जाएगी बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि 31 जुलाई तक इस संबंध में एक नई नीति तैयार की जाएगी, जिसके तहत सरकारी भूमि एचपीसीएल को पट्टे पर उपलब्ध कराई जाएगी ताकि नए पेट्रोल पंप स्थापित किए जा सकें। एक नई नीति तैयार की जाएगी पीएम चार जुलाई को रिफाइनरी का उद्घाटन करेंगे इसके अलावा एचपीसीएल और एचआरआरएल ने राज्य सरकार से अनुरोध किया कि आरटीपीपी अधिनियम के तहत सरकारी विभागों द्वारा ईंधन खरीद में उन्हें प्रेफरेंशियल सप्लायर का दर्जा दिया जाए। इसका उद्देश्य राजस्थान में स्थित एचआरआरएल रिफाइनरी की क्षमता का अधिकतम इस्तेमाल सुनिश्चित करना है। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चार जुलाई को रिफाइनरी का उद्घाटन करेंगे। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने क्या-क्या कहा? मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने शनिवार को कहा कि सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम राज्य की आर्थिक प्रगति, रोजगार सृजन और आत्मनिर्भरता के आधार हैं।'अंतरराष्ट्रीय एमएसएमई दिवस' पर एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि 'राज्य सरकार युवाओं को एंटरप्रेन्योरशिप के लिए बढ़ावा दे रही है, स्थानीय प्रोडक्ट्स को दुनियाभर में पहचान दिलाना चाहते हैं। हम विकास के साथ-साथ विरासत को भी बचाना चाहते हैं। के समन्वय के साथ राजस्थान को देश का अग्रणी औद्योगिक राज्य बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास कर रही है। राजस्थान देश में सबसे आगे रहने वाला इंडस्ट्रियल राज्य बने इसके लिए लगातार काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार की पॉलिसी, कोशिशों और एंटरप्रेन्योर के साहस और मेहनत की वजह से राजस्थान आज देशा का चौथा सबसे बड़ा एमएसएमई राज्य बन चुका है जहां 33 लाख से ज्यादा एमएसएमई इंडस्ट्री काम कर रही है।

भजनलाल शर्मा बोले- सेवा शिविरों में जनता की समस्याओं का हो स्थायी समाधान

 जयपुर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि ग्रामीण एवं शहरी सेवा शिविर आमजन की समस्याओं का मौके पर ही समाधान करने का मजबूत माध्यम बन रहे हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि इन शिविरों का क्रियान्वयन सड़क, पानी, बिजली और चिकित्सा से जुड़ी समस्याओं के स्थायी समाधान के रूप में किया जाए। साथ ही, उन्होंने इन शिविरों में लापरवाही करने वाले अधिकारियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई के भी निर्देश दिए। मुख्यमंत्री शनिवार को मुख्यमंत्री निवास पर ग्रामीण एवं शहरी सेवा शिविरों की प्रगति तथा वीबी-जी राम जी योजना के क्रियान्वयन के संबंध में आयोजित बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने सेवा शिविरों में आने वाले नए प्रकरणों एवं लंबित प्रकरणों के निस्तारण की अलग-अलग सूची तैयार करने के निर्देश दिए। साथ ही, उन्होंने कहा कि यह सूची जिलेवार तैयार की जाए। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से ग्रामीण सेवा शिविरों में वर्षों से लंबित राजस्व प्रकरणों का तुरंत निस्तारण किया जाए, जिससे ग्रामीणों को राहत मिल सके तथा इस कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। वहीं, उन्होंने शिविरों में सभी विभागों के कार्यों की प्रगति की निरंतर मॉनिटरिंग करने के भी निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) योजना को लेकर संबंधित विभाग को निर्देश दिए कि 1 जुलाई से प्रदेश में इस योजना के क्रियान्वयन की सभी तैयारियां समय से पूर्ण कर ली जाएं। उन्होंने कहा कि यह योजना विकसित राजस्थान-2047 के संकल्प को साकार करने के लिए वरदान साबित होगी।

बिड़ला सभागार में ‘क्षितिज’ कार्यक्रम: सीए प्रोफेशनल्स से राष्ट्र प्रथम की भावना से काम करने की अपील

जयपुर राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने कहा कि सीए हमारे देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। आयकर और जी.एस.टी. से जुड़े नियमों की पालना कराने के साथ ही सीए प्रोफेशनल्स औद्योगिक क्षेत्रों में पर्यावरण मानकों के अंकेक्षण की दिशा में भी विशेष रूप से सजग रहें। इसी से औद्योगिक विकास के साथ जलवायु परिवर्तन के खतरों से राष्ट्र बचा रहेगा। उन्होंने कहा कि चार्टेड एकाउण्टेट व्यवसाय और आर्थिक क्रियाकलापों के  सूक्ष्म अंकेक्षण के अंतर्गत राष्ट्र के राजस्व वृद्धि के लिए अधिकाधिक योगदान दें। उन्होंने कैपिटल बजटिंग, बजट पूर्वानुमान, वित्तपोषण आदि कार्यों के अंतर्गत चार्टेड  एकाउंटेंट्स   को 'राष्ट्र प्रथम' की भावना रखते हुए कार्य करते हुए देश के विकास में अहम भूमिका निभाने का आह्वान किया। राज्यपाल बागडे शनिवार को बिड़ला सभागार में ’द इन्टीट्यूट ऑफ चार्टेड एकाउण्टेट्स ऑफ इण्डिया’ द्वारा आयोजित 2047 में भारत की उत्कृष्टता के आलोक में आयोजित ’क्षितिज’ कार्यक्रम में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने 'द इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड एकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया' के आदर्श वाक्य ’य एष सुप्तेषु जागर्ति’ की चर्चा करते हुए कहा कि कठोपनिषद का यह मंत्र विद्यार्थियों के जीवन का आलोक बनना चाहिए। इसका अर्थ है, जब सब सोए हुए हों तो भी हमें जागते रहना चाहिए। उन्होंने राष्ट्र के प्रति समर्पित होकर सभी को अपना योगदान देने के लिए निरंतर सजग रहने पर जोर दिया।  सीएसआर के तहत शिक्षा, स्वास्थ्य और राष्ट्र विकास के कार्यों में सामाजिक सहभागिता के तहत अधिक से अधिक व्यावहारिक कार्य करवाए जाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि फर्म, व्यावसायिक संगठनों, कंपनियों को सीए प्रोफेशनल्स ऐसे सुझाव दें जिससे सीएसआर के तहत ऐसे अछूते क्षेत्रों में कार्य हो सके जिनकी की समाज को आवश्यकता है। उन्होंने शिक्षा प्रसार के अंतर्गत, वंचितों को गुणवत्ता की शिक्षा और साधन उपलब्ध कराने, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए योगदान जैसे क्षेत्रों में सरकारी क्षेत्र के साथ निजी क्षेत्र की भी प्रभावी भूमिका सुनिश्चित किए जाने पर जोर दिया। राज्यपाल ने सीए विद्यार्थियों से जी.एस.टी.,फोरेन्सिक अंकेक्षण आदि से जुड़े तमाम कार्यों में कानून की मर्यादाओं में रहकर कार्य करने,  नियमों का पालन कराने और पारदर्शिता रखते हुए औद्योगिक विकास के साथ देश के विकास में योगदाने देने पर जोर दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को भारत की ज्ञान परम्परा से जुड़कर आधुनिक विकास की राहों पर आगे बढ़ने की आवश्यकता जताई। इससे पहले राज्यपाल ने  स्मारिका "क्षितिज" का भी विमोचन किया।

जयपुर में पोलियो अभियान की तैयारियां तेज, 75 हजार टीमें घर-घर जाकर पिलाएंगी दवा

जयपुर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने शनिवार को बताया कि राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान के तहत 28 जून से 30 जून तक राज्य के 1.04 करोड़ से अधिक बच्चों को पल्स पोलियो की खुराक पिलाई जाएगी। अभियान के प्रथम दिन 5 वर्ष तक की आयु के बच्चों को बूथ पर दवा पिलाई जाएगी तथा अगले 2 दिन पर घर-घर जाकर टीमों के द्वारा बच्चों को खुराक पिलाई जाएगी ताकि दवा पीने से कोई भी बच्चा वंचित नहीं रहे। खींवसर ने बताया कि 5 वर्ष तक के बच्चों को पोलियोरोधी खुराक पिलाने के लिए प्रदेश में 59 हजार 217 बूथ स्थापित किए गए हैं एवं 75 हजार 232 टीमें बनाई गई हैं, जो पोलियो की खुराक पिलाएगी। इसमें 7011 ट्रांजिट व 9004 मोबाइल टीम भी है। अभियान के दौरान 1.38 लाख से अधिक स्वास्थ्य कर्मी एवं अन्य विभागों के कार्मिक सक्रिय रूप से भाग लेंगे। प्रमुख शासन सचिव, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य गायत्री राठौड़ ने बताया कि अभियान के पहले दिन सभी शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित बूथों पर बच्चों को पोलियो की दवा पिलाई जाएगी। अभियान में प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मी, एएनएम, आशा सहयोगिनी और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता तैनात रहेंगे। उन्होंने अभिभावकों से अपील की है कि वे 5 वर्ष तक के अपने बच्चों को बूथों पर लाकर पोलियो की खुराक अवश्य पिलाएं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन निदेशक डॉ. जोगाराम ने बताया कि तीन दिन के अभियान के लिए मोबाइल एवं ट्रांजिट टीम द्वारा बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, राष्ट्रीय राजमार्गों एवं अन्य आवागमन स्थलों पर आने जाने वाले बच्चों को भी दवा पिलाई जाएगी। अभियान में घुमक्कड़ जनजाति के डेरों, ईंट भट्टों पर काम करने वाले मजदूरों के पांच साल तक बच्चों और दुर्गम क्षेत्रों के बच्चों का भी ध्यान रखा गया है। उन्होंने बताया कि अभियान के सफल संचालन के लिए चिकित्सा विभाग, आईसीडीएस, आयुर्वेद विभाग, सामाजिक कार्यकर्ता एवं अन्य विभागों से सहयोग लेते हुए वैक्सीनेटर्स एवं मॉनिटर्स की व्यवस्था की गई है ताकि एक भी बच्चा वंचित नहीं रहे। भारत में वर्ष 1995 में पल्स पोलियो अभियान के शुरूआत की गई। जनवरी, 2011 के पश्चात गत 15 वर्षों में भारत में कोई भी पोलियो का नया केस नहीं पाया गया है। 27 मार्च, 2014 को भारत को पल्स पोलियो मुक्त प्रमाण पत्र मिल चुका है। वर्ष 2026 में अभी तक पाकिस्तान में 3, अफगानिस्तान मे 4 पोलियो पाए गए हैं।

यूरोपियन टूरिस्ट्स के लिए जैसलमेर बना पसंदीदा डेस्टिनेशन, होटल और कारोबारियों में उम्मीद

 जैसलमेर रेगिस्तान की भीषण गर्मी के बीच जैसलमेर एक बार फिर विदेशी पर्यटकों के स्वागत के लिए तैयार है. इस ऑफ-सीजन रहने में भी शहर यूरोपियन पर्यटकों के स्वागत के लिए तैयार है. 15 जुलाई से पर्यटकों की आवाजाही शुरू होने की संभावना है. यूरोप में समर वेकेशन के चलते फ्रांस, इटली, स्पेन और जर्मनी समेत कई देशों से बड़ी संख्या में लॉन्ग-स्टे टूरिस्ट जैसलमेर पहुंचेंगे. इसे देखते हुए होटल, रिसॉर्ट, ट्रैवल एजेंसियां और टूर ऑपरेटर तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुट गए हैं. भीड़भाड़ के बचने के लिए इन महीनों में आते हैं पर्यटक पर्यटन व्यवसायियों के अनुसार, यूरोपीय पर्यटक भीड़भाड़ वाले पीक सीजन के बजाय जुलाई-अगस्त में जैसलमेर आना पसंद करते हैं. वे यहां की संस्कृति, लोकजीवन, विरासत और रेगिस्तानी परिवेश को करीब से समझने के लिए लंबे समय तक ठहरते हैं. इससे होटल उद्योग के साथ टैक्सी संचालकों, गाइड, हस्तशिल्प कारोबारियों और लोक कलाकारों को भी अच्छा रोजगार मिलता है. टूरिज्म सेक्टर से जुड़े जितेंद्र कुमार होटल कारोबारी जितेंद्र कुमार बिस्सा ने बताया कि जैसलमेर में पर्यटन सीजन की शुरुआत जुलाई से मानी जाती है. 15 जुलाई के बाद यूरोप से पर्यटकों का आगमन बढ़ जाता है और जुलाई से सितंबर तक का समय पर्यटन के लिए काफी महत्वपूर्ण रहता है. उन्होंने कहा कि वैश्विक हालात सामान्य होने से इस बार पर्यटन कारोबार के बेहतर रहने की उम्मीद है. 'स्लो टूरिज्म' पसंद करते हैं यूरोपीय पर्यटक वहीं, फ्रेंच भाषी पर्यटन व्यवसायी कौशल के मुताबिक, शुरुआती दौर में अंतरराष्ट्रीय तनाव के कारण बुकिंग को लेकर चिंता थी. अब यूरोप से लगातार बुकिंग मिल रही है. यूरोपीय पर्यटक 'स्लो टूरिज्म' को प्राथमिकता देते हैं और जैसलमेर की विरासत व संस्कृति को आराम से अनुभव करना चाहते हैं. टूरिज्म सेक्टर से जुड़े नरेंद्र छंगानी बताते हैं कि इस सीजन में होटलों के किराए अपेक्षाकृत कम रहते हैं. इससे पर्यटक लंबे समय तक रुकते हैं. सितंबर के बाद होटल दरें बढ़ने से पहले उन्हें बेहतर सुविधाएं और विशेष डिस्काउंट का लाभ मिलता है. यूरोप में गर्मियों की छुट्टियां होने के चलते पर्यटक जैसलमेर पहुंचेंगे. ऑफ-सीजन में टूरिज्म से जगी उम्मीद पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों को बड़ी उम्मीद है. उनका मानना है कि अगर हर साल की तरह इस बार भी यूरोपियन पर्यटकों का सिलसिला शुरू होता है तो ऑफ-सीजन में भी जैसलमेर का पर्यटन उद्योग गुलजार रहेगा. भीषण गर्मी के बावजूद स्वर्णनगरी की गलियां एक बार फिर विदेशी मेहमानों की चहल-पहल से आबाद नजर आएंगी.

अजमेर में खीरे की खेती परियोजना को लेकर मंत्री के सब्सिडी लाभ पर हितों के टकराव के सवाल उठे

अजमेर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी को अपने ही मंत्रालय के अधीन आने वाली एक योजना से लगभग 99 लाख रुपये की भारी-भरकम सब्सिडी मिली है। यह सब्सिडी उन्हें राजस्थान में उनके खीरे के खेत के लिए दी गई है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि यह पैसा जिस बोर्ड द्वारा मंजूर किया गया, मंत्री महोदय खुद उसके पदेन उपाध्यक्ष हैं। साइनबोर्ड खोलता है राज: क्या है पूरा मामला? इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, राजस्थान के अजमेर स्थित पीह में एक विशाल खेत है, जहां कृत्रिम तालाब और चार बड़े पॉलीहाउस बने हैं। यहां लगे सफेद साइनबोर्ड पर लिखा है, "राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB), कृषि मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा सहायता प्राप्त।" बोर्ड पर लाभार्थी का नाम 'भागीरथ चौधरी' और 50% सब्सिडी की रकम '99,60,000 रुपये' लिखी गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, जांच में यह सामने आया है कि केंद्रीय राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी को यह सब्सिडी कुछ महीने पहले उसी मंत्रालय की योजना से मिली है, जिसमें वह खुद मंत्री (MoS) हैं। यह पैसा राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) की योजना "हॉर्टिकल्चर फसलों के उत्पादन और फसल के बाद के प्रबंधन के माध्यम से वाणिज्यिक बागवानी का विकास" के तहत दिया गया है। 2025 में इस योजना के तहत जिन 467 प्रोजेक्ट्स को मंजूरी मिली, उसमें मंत्री जी का 16,592 वर्ग मीटर में खीरे की खेती का प्रोजेक्ट भी शामिल है। मंजूरी में 'सुपरफास्ट' स्पीड: प्रोजेक्ट और लोन की फुल डिटेल साइनबोर्ड के मुताबिक, प्रोजेक्ट की कुल लागत 1.99 करोड़ रुपये है। इसमें प्रमोटर का शेयर 49.8 लाख रुपये है। चौधरी ने इस प्रोजेक्ट के लिए HDFC बैंक से 1.49 करोड़ रुपये का लोन लिया था। मार्च 2026 में NHB से अंतिम मंजूरी मिलने के कुछ ही हफ्तों के भीतर 99 लाख रुपये से ज्यादा की सब्सिडी सीधे उनके HDFC बैंक के लोन खाते में क्रेडिट कर दी गई। मंत्री जी ने 15 अप्रैल 2025 को आवेदन किया था और सिर्फ 14 दिनों के भीतर ही इसे सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई थी। जबकि, नियमों के मुताबिक मंजूरी से पहले साइट का संयुक्त रूप से निरीक्षण होना अनिवार्य है। सवालों के घेरे में क्यों है यह सब्सिडी? जिस बोर्ड (NHB) ने इस सब्सिडी को पास किया है, भगीरथ चौधरी उसके पदेन उपाध्यक्ष हैं। हालांकि अंतिम मंजूरी देने वाली कमेटी में अध्यक्ष या उपाध्यक्ष शामिल नहीं होते हैं। अप्रूवल से एक महीने पहले प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को दी गई संपत्ति की घोषणा में मंत्री ने अपनी पीह वाली कृषि भूमि का जिक्र तो किया है, लेकिन इस पेंडिंग NHB प्रोजेक्ट की कोई जानकारी नहीं दी। हालांकि, उनके एक सहयोगी का कहना है कि इसका "खुलासा किया जाएगा।" भगीरथ चौधरी ने इससे पहले 2018 में भी इस योजना के तहत आवेदन किया था, लेकिन तब हार्ड कॉपी जमा करने में देरी के चलते उनका आवेदन रिजेक्ट हो गया था। क्या है मंत्रालय की यह योजना? इस योजना का मुख्य उद्देश्य व्यावसायिक खेती (मुनाफे के लिए) को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देना है। इसके तहत शिमला मिर्च, खीरा, टमाटर जैसी 3 सब्जियों और गुलाब व आर्किड सहित 8 प्रकार के फूलों की खेती के लिए प्रोजेक्ट कॉस्ट की अधिकतम 50 प्रतिशत सब्सिडी दी जाती है। एक परिवार के लिए सब्सिडी की अधिकतम सीमा 1 करोड़ रुपये तय है। प्रोजेक्ट पूरा होने के तीन महीने के भीतर सब्सिडी की रकम लोन अकाउंट में जमा कर दी जाती है। हितों के टकराव को लेकर जब मीडिया संस्थान ने केंद्रीय मंत्री भगीरथ चौधरी से संपर्क किया और सवालों की सूची भेजी, तो उनके कार्यालय ने ईमेल मिलने की पुष्टि की, लेकिन मंत्री की तरफ से कोई जवाब या टिप्पणी नहीं आई।  

राजस्थान में किसानों की आय बढ़ाने के लिए मशरूम खेती पर विशेष अभियान, व्यापक प्रशिक्षण की योजना

उदयपुर  कृषि आयुक्त श्री नरेश कुमार गोयल ने उदयपुर संभाग के दौरे के दौरान कहा कि राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए कृषि में नवाचार, प्राकृतिक खेती तथा उच्च मूल्य वाली फसलों को प्राथमिकता दे रही है। इसी क्रम में प्रदेश के सभी जिलों में मशरूम की खेती को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा तथा किसानों को व्यापक प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाएगा। उदयपुर संभाग के कृषि अधिकारियों की समीक्षा बैठक में आयुक्त ने निर्देश दिए कि Farmers Fertilisers Framework (FFS) को संभाग के सभी जिलों में तत्काल प्रभाव से लागू किया जाएगा, ताकि उर्वरकों का पारदर्शी, वैज्ञानिक एवं प्रभावी वितरण सुनिश्चित हो सके और किसानों को समय पर आवश्यक सुविधाएं मिलें। बैठक में कृषि शिक्षा को अधिक सशक्त बनाने पर भी जोर देते हुए उन्होंने निर्देश दिए कि राजकीय कृषि महाविद्यालयों के व्याख्याता आधुनिक तकनीक के माध्यम से ऑनलाइन कक्षाएं संचालित करें, जिससे विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण एवं नियमित शिक्षा उपलब्ध हो सके।  गोयल ने प्रताप विश्वविद्यालय को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर विकसित करने की दिशा में आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश भी दिए, जिससे कृषि शिक्षा, अनुसंधान एवं कौशल विकास को नई गति मिल सके। दौरे के दौरान उन्होंने मशरूम सेंटर ऑफ एक्सीलेंस तथा प्राकृतिक खेती से संबंधित गतिविधियों का भी निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, प्राकृतिक खेती, मूल्य संवर्धन तथा मशरूम उत्पादन के संबंध में अधिक से अधिक प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जाए। आयुक्त कृषि ने कहा कि कृषि विभाग का लक्ष्य किसानों तक नई तकनीक, गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण एवं बेहतर सेवाएं पहुंचाकर कृषि को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाना है। इसके लिए सभी अधिकारी योजनाओं का समयबद्ध एवं प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करें।

राजस्थान क्रीड़ा अधिनियम के तहत RCA में चुनाव प्रक्रिया में देरी, प्रशासनिक जांच बनी वजह

जयपुर राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन के चुनाव अगले 3 महीने के लिए टल गए हैं. इस दौरान आरसीए की एडहॉक कमेटी का कार्यकाल बरकरार रहेगा. सहकारिता विभाग के रजिस्ट्रार डॉ. समित शर्मा ने आदेश जारी कर कार्यकाल को एक बार फिर अगले तीन महीनों के लिए बढ़ा दिया है. हालांकि, इसमें चुनाव से जुड़ी एक और बड़ी अपडेट है. राजस्थान क्रीड़ा अधिनियम, 2005 की धारा 24 (1) (क) के तहत मिली शक्तियों का प्रयोग करते हुए रजिस्ट्रार ने समिति की अवधि को आगे बढ़ाने का फैसला लिया. विवादित मामलों को बताया चुनाव में देरी की वजह एडहॉक कमेटी के कार्यकाल बढ़ाने के पीछे कई अहम वजह बताई जा रही हैं. इसमें पूर्ववर्ती कार्यकारिणी की वित्तीय व प्रशासनिक गड़बड़ियों की जांच करना शामिल है. इसके साथ ही राज्य के विभिन्न जिला स्तरीय खेल संघों के विवादित मामलों की जांच भी अभी प्रक्रियाधीन है, ताकि आरसीए के चुनाव पूरी तरह निष्पक्ष और नियमों के मुताबिक हो सकें. चुनाव कराने के लिए भी निर्देश जारी इससे पहले, मार्च-2024 में आरसीए के निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए इस तीन महीने की कमेटी का गठन हुआ था. लेकिन कई अपरिहार्य और तकनीकी कारणों से समय सीमा के भीतर चुनाव संपन्न नहीं हो सके. इसके बाद से लगातार 3-3 महीनों के लिए समिति का कार्यकाल बढ़ाया जा रहा है. अब इस ताजा आदेश के बाद समिति को अगले तीन महीनों के भीतर अनिवार्य रूप से चुनाव प्रक्रिया पूरी करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं. इस वजह से फिलहाल चुनाव संभव नहीं इस फैसले के पीछे समिति ने क्रिक्रेट टूर्नामेंट्स को भी अहम वजह बताया है. कमेटी की ओर से तर्क दिया कि वर्तमान खेल सत्र के दौरान खिलाड़ियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए क्रिकेट टूर्नामेंट्स का लगातार आयोजन कराया जा रहा है. इसकी वजह से सीमित समय में चुनाव कराना संभव नहीं हो पाया.

सिरोही जिले के मांडवरिया गांव में मृत्युभोज विवाद: आर्थिक तंगी बनी सामाजिक बहिष्कार की वजह

सिरोही राजस्थान के सिरोही जिले के एक गांव में अंतिम संस्कार के बाद आयोजित मृत्युभोज में पारंपरिक घी के मालपुए नहीं परोसने पर 43 परिवारों का कथित तौर पर सामाजिक बहिष्कार कर दिया गया। अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। यह मामला जिले के बरलूट थाना क्षेत्र के मांडवरिया गांव का है, जहां आर्थिक रूप से कमजोर एक परिवार ने इसी महीने अपने एक सदस्य के निधन के बाद मृत्युभोज में सादा भोजन परोसा था। बरलूट थाने के सहायक उपनिरीक्षक रमेश कुमार ने बताया, ''हमें शिकायत मिली है और मामले की जांच की जा रही है। प्रथम दृष्टया यह मामला पुराने विवाद से जुड़ा प्रतीत होता है। जांच पूरी होने के बाद प्राथमिकी दर्ज की जाएगी।'' शिकायत में ये बताया गया शिकायत के अनुसार, आर्थिक तंगी के कारण परिवार मृत्युभोज में परंपरा के अनुरूप घी के मालपुए नहीं बनवा सका और उसकी जगह सामान्य भोजन की व्यवस्था की गई। इससे समुदाय के एक दर्जन से अधिक पंच कथित तौर पर नाराज हो गए और 18 जून को शोकाकुल परिवार के साथ-साथ उसका समर्थन करने वाले 42 अन्य परिवारों के सामाजिक बहिष्कार का फरमान जारी कर दिया। आवश्यक सुविधाओं से भी वंचित किया जा रहा मृतक सदर राम का पांच जून को निधन हुआ था, जबकि मृत्युभोज का आयोजन 17 जून को किया गया। प्रभावित परिवारों का आरोप है कि सामाजिक बहिष्कार के बाद उन्हें आवश्यक सुविधाओं से भी वंचित किया जा रहा है। उनका कहना है कि गांव के दुकानदार उन्हें राशन नहीं बेच रहे हैं, उन्हें गांव के कुएं से पानी भरने नहीं दिया जा रहा है और खेत मालिकों ने उन्हें काम पर रखना भी बंद कर दिया है। प्रभावित परिवारों का क्या कहना? प्रभावित परिवारों में शामिल तेजाराम ने संवाददाताओं से कहा, ''स्थिति बहुत कठिन हो गई है। हमें राशन नहीं दिया जा रहा है और यहां तक कि कुएं से पानी भी नहीं भरने दिया जा रहा सामाजिक बहिष्कार का असर पारिवारिक और सामाजिक संबंधों पर भी पड़ा है। एक अन्य प्रभावित व्यक्ति गोपाल ने कहा, ''20 जून को मेरे एक रिश्तेदार की शादी थी, लेकिन पंचों द्वारा जुर्माना लगाए जाने के डर से मैं उसमें शामिल नहीं हो सका।'' 11 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा ऐसा बताया गया है कि पंचायत के कथित फरमान में चेतावनी दी गई है कि जो भी व्यक्ति इस बहिष्कार का उल्लंघन करेगा, उस पर 11 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा और उसे पूरे समाज के लिए भोज भी कराना होगा। कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है? प्रभावित परिवारों ने 20 जून को बरलूट थाने में शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन उनका आरोप है कि अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। बृहस्पतिवार को सभी 43 परिवारों के सदस्य न्याय की मांग को लेकर सिरोही के जिलाधिकारी से भी मिले। इस संबंध में जिलाधिकारी रोहिताश्व सिंह से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनकी टिप्पणी उपलब्ध नहीं हो सकी।  

भारत-अमेरिका ऊर्जा साझेदारी: राजस्थान और कैलिफोर्निया मिलकर बनाएंगे स्मार्ट ग्रिड और क्लीन एनर्जी मॉडल

जयपुर राजस्थान की ऊर्जा यात्रा अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गई है, जो आने वाले वर्षों में प्रदेश की तस्वीर बदल सकता है। यह सिर्फ एक सरकारी समझौता नहीं, बल्कि उस भविष्य की शुरुआत है, जहां बिजली सिर्फ पैदा नहीं होगी, बल्कि नई तकनीक के सहारे ज्यादा सुरक्षित, सस्ती और भरोसेमंद भी बनेगी। इस बदलाव की कहानी हजारों किलोमीटर दूर अमेरिका के कैलिफोर्निया से जुड़ गई है। राजस्थान और अमेरिकी राज्य कैलिफोर्निया ने स्वच्छ और हरित ऊर्जा के क्षेत्र में तकनीकी सहयोग के लिए बड़ा कदम उठाया है। राजस्थान विद्युत विनियामक आयोग (RERC), कैलिफोर्निया ऊर्जा आयोग (CEC) और कैलिफोर्निया पब्लिक यूटिलिटीज कमीशन (CPUC) के बीच वर्चुअल माध्यम से सहमति पत्र (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इस दौरान राजस्थान के ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर भी ऑनलाइन जुड़े और इसे दोनों राज्यों के लिए भविष्य की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण समझौता बताया। सिर्फ कागजों पर हस्ताक्षर नहीं, तकनीक का होगा सीधा आदान-प्रदान इस समझौते की सबसे बड़ी खासियत यह है कि अब राजस्थान को दुनिया के उन क्षेत्रों से सीखने का मौका मिलेगा, जिन्होंने ऊर्जा प्रबंधन में मिसाल कायम की है। कैलिफोर्निया लंबे समय से ग्रिड मॉडर्नाइजेशन, नवीकरणीय ऊर्जा और स्मार्ट बिजली व्यवस्था के लिए जाना जाता है। अब वही अनुभव राजस्थान के साथ साझा किया जाएगा। इस साझेदारी के तहत सौर और पवन ऊर्जा के बेहतर प्रबंधन, ऊर्जा भंडारण तकनीकों, इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने, स्मार्ट ग्रिड सिस्टम विकसित करने और आधुनिक बिजली प्रबंधन से जुड़े शोध व अनुभव साझा किए जाएंगे। विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे राजस्थान की ऊर्जा व्यवस्था और अधिक मजबूत और भविष्य के लिए तैयार हो सकेगी। हजारों किलोमीटर की दूरी, लेकिन सोच और लक्ष्य एक ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने कहा कि भले ही राजस्थान और कैलिफोर्निया भौगोलिक रूप से एक-दूसरे से काफी दूर हों, लेकिन दोनों का लक्ष्य समान है। दोनों स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देना चाहते हैं और आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित एवं टिकाऊ भविष्य तैयार करने की दिशा में काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह समझौता केवल तकनीकी सहयोग तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दोनों राज्यों के नियामक ढांचे, नीतिगत अनुभव और जमीनी स्तर पर किए गए सफल प्रयोगों को भी साझा करने का अवसर देगा। इससे राजस्थान को ऊर्जा क्षेत्र में नई दिशा और नई गति मिलने की उम्मीद है। राजस्थान पहले से बना रहा है हरित ऊर्जा में पहचान ऊर्जा मंत्री ने कहा कि राजस्थान आज देश के अग्रणी स्वच्छ ऊर्जा उत्पादक राज्यों में शामिल हो चुका है। प्रदेश में विशाल सौर ऊर्जा पार्क और अनुकूल पवन गति का लाभ उठाकर बड़े पैमाने पर हरित बिजली का उत्पादन किया जा रहा है। सरकार केवल बिजली उत्पादन बढ़ाने पर ही नहीं, बल्कि आम लोगों तक सुरक्षित, किफायती और निर्बाध बिजली पहुंचाने पर भी लगातार काम कर रही है। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए आधुनिक पावर ग्रिड, बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) और स्मार्ट मीटरिंग जैसी अत्याधुनिक तकनीकों को तेजी से लागू किया जा रहा है। रिकॉर्ड बिजली उत्पादन पर मिला वैश्विक सम्मान इसी बीच राजस्थान के ऊर्जा क्षेत्र को एक और बड़ी उपलब्धि मिली है। राज्य विद्युत उत्पादन निगम के कोयला आधारित बिजली घरों ने रिकॉर्ड स्तर पर बिजली उत्पादन कर नया इतिहास रचा है। इस उपलब्धि के लिए ‘मल्टीनेशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ ने ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर को वैश्विक अवार्ड से सम्मानित किया। विद्युत भवन में आयोजित समारोह में संस्था के मैनेजर अरिहंत उपाध्याय और कोऑर्डिनेटर गरिमा जैन ने ऊर्जा मंत्री को सम्मान पत्र सौंपा। साथ ही उत्पादन निगम के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक देवेन्द्र श्रृंगी को भी इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए सम्मानित किया गया। 2 जून बना बिजली उत्पादन का ऐतिहासिक दिन ऊर्जा मंत्री ने बताया कि 2 जून 2026 को प्रदेश की 7580 मेगावाट क्षमता वाली सभी 23 थर्मल इकाइयों ने 94.60 प्रतिशत उपयोग क्षमता के साथ रिकॉर्ड 7171 मेगावाट बिजली उत्पादन किया। यह राजस्थान के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा उत्पादन माना जा रहा है। इतना ही नहीं, सूरतगढ़ थर्मल पावर स्टेशन की सभी आठ इकाइयों ने भी अपनी कुल 2820 मेगावाट क्षमता में से 2790 मेगावाट बिजली उत्पादन कर नया रिकॉर्ड बनाया। यह उपलब्धि बताती है कि प्रदेश न केवल हरित ऊर्जा में आगे बढ़ रहा है, बल्कि पारंपरिक ऊर्जा उत्पादन में भी नई मिसाल कायम कर रहा है। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका के साथ हुई यह तकनीकी साझेदारी और रिकॉर्ड बिजली उत्पादन, दोनों मिलकर राजस्थान को आने वाले वर्षों में देश के सबसे मजबूत और आधुनिक ऊर्जा राज्यों की कतार में खड़ा कर सकते हैं। अब सबकी नजर इस बात पर होगी कि यह अंतरराष्ट्रीय सहयोग जमीन पर कितनी तेजी से बदलाव लाता है और प्रदेश के करोड़ों बिजली उपभोक्ताओं को इसका कितना फायदा मिलता है।