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19 जून से 5 जुलाई तक तबादलों की मंजूरी, सभी विभागों में प्रक्रिया तेज

जयपुर राजस्थान में सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के ट्रांसफर-पोस्टिंग पर लगा बैन हट गया है. सरकार ने 16 दिनों के लिए ट्रांसफर विंडो खोली है. प्रशासनिक सुधार एवं समन्वय विभाग ने आदेश जारी कर 19 जून से ट्रांसफर-पोस्टिंग की अनुमति दी है. इसके साथ ही लंबे समय से बैन हटने का इंतजार कर रहे कर्मचारियों और अधिकारियों को राहत मिली है. आदेश के मुताबिक, तबादलों की अनुमति 5 जुलाई तक रहेगी. इस दौरान सभी विभाग अपने स्तर पर तबादला प्रस्ताव तैयार कर स्वीकृति की प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे. अब तेज होगी ट्रांसफर की प्रक्रिया सरकार ने 16 दिनों के लिए ट्रांसफर विंडो खोली है. ऐसे में आदेश जारी होने के साथ ही तबादलों को लेकर चल रही अटकलों पर भी विराम लग गया है. अब विभिन्न विभागों में प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर तबादलों की प्रक्रिया तेज होने की संभावना है. यह आदेश राज्य के सभी विभागों के साथ-साथ निगमों, मंडलों, बोर्डों और स्वायत्तशासी संस्थाओं पर भी लागू होगा. चिकित्सा विभाग में बैन, थर्ड ग्रेड टीचर्स का इंतजार लंबा हालांकि, थर्ड ग्रेड टीचर्स को अभी लंबा इंतजार करना होगा. इस बार भी शिक्षा विभाग के तृतीय श्रेणी वेतन श्रृंखला के अध्यापकों को तबादलों की प्रक्रिया से बाहर रखा गया है. इसके अलावा संभावित वर्षाकाल को देखते हुए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के कार्मिकों पर तबादला प्रतिबंध अगले आदेश तक यथावत रहेगा. इन कर्मचारियों को दी जाएगी प्राथमिकता सरकार के आदेश में यह भी कहा गया है कि तबादलों में एकल महिला, विधवा, परित्यक्ता, मेडिकल बोर्ड या सक्षम प्राधिकारी द्वारा प्रमाणित गंभीर बीमारियों जैसे कैंसर, मस्तिष्क, हृदय, फेफड़े और किडनी सहित अन्य प्राणघातक रोगों से पीड़ित कर्मचारियों को प्राथमिकता दी जाएगी. इसके साथ ही दिव्यांग कर्मचारी, दीर्घावधि सेवा वाले कर्मचारी तथा राजकीय सेवा में कार्यरत पति-पत्नी के मामलों को भी प्राथमिकता मिलेगी.

सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर, ट्रांसफर बैन हटा; 5 जुलाई तक जारी रहेगी तबादला प्रक्रिया

जयपुर   भजनलाल सरकार ने तबादलों से प्रतिबंध हटा दिया है । 19 जून से 5 जुलाई तक यह प्रतिबंध हटाया गया है । प्रशासनिक सुधार एवं समन्वय विभाग के मुताबिक शिक्षा विभाग के तृतीय श्रेणी के वेतन श्रृंखला के शिक्षकों और वर्षा काल में संभावित बीमारियों के दृष्टिगत चिकित्सा विभाग के कार्मिकों के लिए स्थानांतरण पर प्रतिबंध अग्रिम आदेशों तक यथावत रहेगा ।यह आदेश प्रदेश के सभी निगमों, मंडलों, बोर्ड और स्वायत्तशाषी संस्थाओं पर भी लागू होगा । राजस्थान की भजनलाल सरकार ने कर्मचारियों और अधिकारियों के तबादलों पर लंबे समय से लागू प्रतिबंध को अस्थायी रूप से हटा दिया है. सरकार के इस फैसले के बाद राज्यभर के हजारों कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए तबादलों का रास्ता खुल गया है. प्रशासनिक सुधार विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार 19 जून से 5 जुलाई 2026 तक तबादले किए जा सकेंगे. इस अवधि के दौरान विभिन्न विभागों में प्रशासनिक आवश्यकताओं और कर्मचारियों की मांग के आधार पर स्थानांतरण किए जाएंगे।  हालांकि सरकार ने कुछ श्रेणियों को इस प्रक्रिया से फिलहाल बाहर रखा है. शिक्षा विभाग के तृतीय श्रेणी अध्यापकों पर तबादला प्रतिबंध जारी रहेगा. इसके अलावा चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के कार्मिकों के तबादलों पर भी अग्रिम आदेश तक रोक बरकरार रखी गई है. ऐसे में इन दोनों वर्गों के कर्मचारियों को अभी तबादला प्रक्रिया का लाभ नहीं मिल सकेगा।  इन कर्मचारियों को दी जाएगी प्राथमिकता सरकार ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि एकल महिला, विधवा, परित्यक्ता, दिव्यांग और गंभीर बीमार कर्मचारियों के मामलों को प्राथमिकता के आधार पर देखा जाएगा. इसके साथ ही राजकीय सेवा में कार्यरत पति-पत्नी के मामलों को भी विशेष वरीयता देने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि उन्हें एक ही स्थान या निकटवर्ती क्षेत्र में पदस्थापित करने पर विचार किया जा सके. यह आदेश राज्य के सभी विभागों के साथ-साथ निगमों, बोर्डों, मंडलों और स्वायत्तशासी संस्थाओं पर भी लागू होगा।  सरकार ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि एकल महिला, विधवा, परित्यक्ता, दिव्यांग और गंभीर बीमार कर्मचारियों को प्राथमिकता दी जाएगी भाजपा विधायक दल की बैठक में भी उठा था तबादले का मुद्दा तबादला बैन हटाने का फैसला अचानक नहीं लिया गया है. पिछले कुछ समय से जनप्रतिनिधियों और मंत्रियों की ओर से लगातार इस मुद्दे को उठाया जा रहा था. हाल ही में मुख्यमंत्री निवास पर आयोजित भाजपा विधायक दल की बैठक में भी तबादलों का मुद्दा प्रमुखता से सामने आया था. कई विधायकों ने अपने-अपने क्षेत्रों की प्रशासनिक जरूरतों का हवाला देते हुए कर्मचारियों के तबादलों पर लगी रोक हटाने की मांग की थी. विधायकों का कहना था कि लंबे समय से तबादले बंद होने के कारण कई विभागों में कार्य प्रभावित हो रहे हैं और कर्मचारियों को भी व्यक्तिगत तथा पारिवारिक कारणों से परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. इससे पहले मंत्रिमंडल की बैठकों में भी कई मंत्रियों ने तबादला बैन हटाने की पैरवी की थी।  लगातार मंथन और विभिन्न विभागों से फीडबैक लेने के बाद लिया निर्णय सरकार स्तर पर लगातार मंथन और विभिन्न विभागों से फीडबैक लेने के बाद आखिरकार प्रतिबंध हटाने का निर्णय लिया गया. सरकार के इस फैसले को प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है. माना जा रहा है कि इससे विभागों में रिक्त पदों के संतुलन, कार्यकुशलता बढ़ाने और कर्मचारियों की लंबे समय से लंबित मांगों के समाधान में मदद मिलेगी. अब 5 जुलाई तक राज्यभर में तबादलों की प्रक्रिया तेज होने की संभावना है और विभिन्न विभागों में स्थानांतरण संबंधी गतिविधियां बढ़ सकती हैं। 

भीलवाड़ा, जोधपुर, बीकानेर समेत सभी जिलों में सुबह 6 बजे से योग कार्यक्रम, तैयारियों के निर्देश जारी

 जयपुर 12वां अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 21 जून, 2026 का आयोजन रविवार को प्रातः 6.00 बजे से राज्य में जिला मुख्यालय, ब्लॉक मुख्यालय एवं ग्राम पंचायत स्तर पर किया जायेगा। राज्यभर में कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए जिला प्रभारी मंत्रिगण एवं बोर्ड, आयोग एवं निगम के अध्यक्ष एक दिन पूर्व, 20 जून को ही जिला मुख्यालय पहुंचेंगे। प्रमुख शासन सचिव नवीन जैन ने बताया कि उपमुख्यमंत्री सुश्री दिया कुमारी अजमेर तथा डॉ. प्रेमचन्द बैरवा भीलवाड़ा जिले में अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस के आयोजन में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लेंगे। मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ दौसा जिले में, मंत्री मदन दिलावर जोधपुर में, मंत्री किरोडी लाल अलवर में, मंत्री गजेन्द्र सिंह बीकानेर, मंत्री जोगाराम पटेल जयपुर जिले में, मंत्री सुमित गोदारा श्रीगंगानगर जिले में, मंत्री कन्हैयालाल नागौर में, मंत्री जोराराम कुमावत बाडमेर में, मंत्री हेमन्त मीणा उदयपुर, मंत्री सुरेश सिंह रावत भरतपुर जिले में, मंत्री बाबूलाल खराड़ी बांसवाडा जिले में, मंत्री अविनाश गहलोत चूरू जिले में अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर आम जनता के साथ योगाभ्यास करेंगे। इसी प्रकार राज्यमंत्री गौतम कुमार (स्वतंत्र प्रभार) कोटा जिले में, राज्यमंत्री श्री हीरालाल नागर (स्वतंत्र प्रभार) टोंक जिले में, राज्यमंत्री झाबर सिंह खर्रा (स्वतंत्र प्रभार) पाली में, राज्यमंत्री संजय शर्मा (स्वतंत्र प्रभार) सीकर में, राज्यमंत्री ओटा राम देवासी झालावाड में, राज्यमंत्री कृष्ण कुमार विश्नोई सिरोही में, राज्यमंत्री विजय सिंह कोटपूतली-बहरोड में, राज्यमंत्री जवाहरसिंह बेढम करौली में एवं राज्यमंत्री डॉ. मंजू बाघमार चित्तौडगढ जिले में अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस के आयोजन में शामिल होंगे। इसी प्रकार राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष अरूण चतुर्वेदी जैसलमेर जिले में, राजस्थान धरोहर प्राधिकरण के अध्यक्ष औंकार सिंह लखावत हनुमानगढ़ में, राज्य स्तरीय सैनिक कल्याण सलाहकार समिति के अध्यक्ष प्रेम सिंह बाजोर सवाई माधोपुर में, राज्य स्तरीय अनु. जाति वित्त एवं विकास निगम के अध्यक्ष राजेन्द्र नायक अध्यक्ष, प्रतापगढ़ में, राज्य जीव जन्तु कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष जसवन्त सिंह विश्नोई धौलपुर में, देवनारायण बोर्ड के अध्यक्ष ओमप्रकाश भडाना जालौर में, श्रीयादे माटी कला बोर्ड के अध्यक्ष प्रहलाद टांक बांरा में, राजस्थान किसान आयोग के अध्यक्ष सी. आर. चौधरी डूंगरपुर में तथा विश्वकर्मा कौशल विकास बोर्ड के अध्यक्ष रामगोपाल सुथार झुन्झुनू जिले में अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस के आयोजन में शामिल होंगे। ब्यावर, राजससमन्द, फलौदी, खेरथल-तिजारा, डीग, डीडवाना-कुचामन, बालोतरा, सलुम्बर एवं बून्दी जिलों में स्थानीय जनप्रतिनिधि उपस्थित रहकर अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस के तहत आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करेंगे।

15 हजार से अधिक अभ्यर्थियों की परीक्षा के लिए सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था कड़ी करने के निर्देश

 जोधपुर जोधपुर समेत राज्य के  कई जिलों में 21 जून को  रीनीट यूजी-2026 परीक्षा होगी। इसी दिन राज्यभर में 12वां अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम होगा। दोनों आयोजन का शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित तरीके से संचालन सुनिश्चित करने  के लिए जोधपुर जिला प्रभारी सचिव भवानी सिंह देथा ने गुरुवार को जिला मुख्यालय पर अटल सेवा केंद्र  में सम्बंधित अधिकारियों की बैठक ली, समीक्षा की और आवश्यक निर्देश दिए। प्रभ्ज्ञारी सचिव ने बताया कि रीनीट यूजी-2026 परीक्षा जिले के 46 परीक्षा केन्द्रों पर आयोजित होगी, जिसमें 15 हजार 407 अभ्यर्थियों को प्रवेश पत्र जारी किए गए हैं। प्रभारी सचिव ने परीक्षा के निष्पक्ष, पारदर्शी एवं कदाचारमुक्त संचालन के लिए सभी व्यवस्थाएं समयबद्ध रूप से सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रश्न पत्रों एवं गोपनीय सामग्री के सुरक्षित भंडारण एवं परिवहन, अभ्यर्थियों के बायोमीट्रिक सत्यापन, दोहरे स्तर की फ्रिस्किंग, परीक्षा केन्द्रों पर सुरक्षा व्यवस्था तथा सतत निगरानी व्यवस्था सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने जिला कलक्टर आलोक रंजन को जिला स्तरीय समन्वय समिति के माध्यम से नियमित मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए। साथ ही परीक्षा केन्द्रों पर पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती, ड्यूटी मजिस्ट्रेटों की नियुक्ति एवं उनके प्रशिक्षण, परीक्षा केन्द्रों के आसपास कानून व्यवस्था बनाए रखने तथा नकल एवं संदिग्ध गतिविधियों पर प्रभावी निगरानी रखने के निर्देश दिए। परीक्षा केन्द्रों के 300 मीटर परिधि क्षेत्र में ई-मित्र, फोटोकॉपी एवं साइबर कैफे सहित संबंधित गतिविधियों पर नियमानुसार नियंत्रण सुनिश्चित करने को कहा।  21 जून को सम्राट अशोक उद्यान में आयोजित होने वाले जिला स्तरीय अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम की तैयारियों की भी प्रभारी सचिव ने समीक्षा की। उन्होंने योग संगम पोर्टल पर अधिकाधिक पंजीकरण करवाकर जनभागीदारी बढ़ाने तथा कार्यक्रम को व्यापक स्तर पर सफल बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी उपखण्ड अधिकारियों को उपखण्ड एवं ग्राम पंचायत स्तर पर योग दिवस कार्यक्रमों का प्रभावी आयोजन सुनिश्चित करने, जनप्रतिनिधियों, गणमान्य नागरिकों एवं आमजन की सहभागिता बढ़ाने तथा व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए। साथ ही कार्यक्रम स्थलों पर माइक, योगा मैट, पेयजल, चिकित्सा सुविधा एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं समय पर उपलब्ध करवाने के लिए संबंधित विभागों को पारंपरिक समन्वय स्थापित कर व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। प्रभारी सचिव ने कहा कि योग स्वस्थ जीवनशैली का आधार है। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के माध्यम से आमजन को योग को दैनिक जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित किया जाए। उन्होंने सभी विभागों से समन्वित प्रयास करते हुए दोनों आयोजनों को सफल बनाने का आह्वान किया।

राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी के नेतृत्व में योग दिवस के उपलक्ष्य में अधिकारी हुए शामिल

 जयपुर अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस-2026 के उपलक्ष्य में राजस्थान विधानसभा परिसर स्थित कर्तव्य द्वार पर शुक्रवार प्रातः 6 बजे सामूहिक योग कार्यक्रम योगोत्‍सव का आयोजन किया गया। राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में विधायकगण, विधानसभा सचिवालय के अधिकारी एवं कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।  इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष देवनानी ने कहा कि योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि शरीर, मन और आत्मा के बीच सामंजस्य स्थापित करने वाली भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर है। योग स्वस्थ शरीर, संतुलित मन एवं सकारात्मक जीवन दृष्टि प्रदान करता है। शारीरिक समन्वय, मानसिक एकाग्रता और आत्मविश्वास को बढ़ाता है। देवनानी ने कहा कि आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली में योग तनावमुक्त जीवन, रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि तथा स्वस्थ समाज के निर्माण का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने सभी नागरिकों से योग को दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बनाने का आह्वान किया।   सामूहिक योगाभ्यास की शुरुआत देवनानी ने दीप प्रज्‍ज्‍वलन के साथ किया। कार्यक्रम में विधायक गोपाल शर्मा, गोपीचन्‍द मीणा, हरि सिंह रावत, शंकर सिंह रावत, ताराचन्‍द जैन, श्रीमती गीता बरवड और श्रीमती शोभा रानी कुशवाहा मौजूद थे। वैदिक मंगलाचरण एवं प्रार्थना के साथ सूक्ष्म व्यायाम जैसी शिथिलीकरण क्रियाएं कराई गई। योगाचार्य सत्‍यपाल सिंह और योगाचार्य मेघसिंह ने सामान्‍य योग प्रोटोकाल के अनुरूप योगासन, प्राणायम, ध्‍यान और शांतिपाठ कराया। ताड़ासन, वृक्षासन, अर्धचक्रासन, पादहस्तासन एवं त्रिकोणासन का अभ्यास खडे होकर कराया गया। भद्रासन, वज्रासन, उष्‍ट्रासन, शशकासन, उन्‍तानमंडूकासन, वक्रासन और अर्ध-उष्ट्रासन का अभ्यास बैठकर कराया गया। उदर के बल लेट कर मकरासन, भुजंगासन, शलभासन, वहीं पीठ के बल लेट कर किए जाने वाले आसनों में सेतुबंधासन, उत्तानपादासन, अर्ध-हलासन, पवनमुक्तासन एवं शवासन का अभ्यास कराया गया। योगाभ्यास के दौरान प्रतिभागियों ने प्राणायाम एवं ध्यान की विभिन्न विधियों का भी अभ्यास किया, जिससे शारीरिक स्फूर्ति, मानसिक शांति और आत्मिक संतुलन का अनुभव प्राप्त हुआ।  कार्यक्रम का समापन देवनानी ने सामूहिक संकल्प के साथ किया। देवनानी ने विश्व कल्याण, मानव एकता और स्वस्थ जीवन की कामना के साथ योग ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना को सशक्त बनाते हुए सम्पूर्ण मानवता को स्वस्थ, सद्भाव और संतुलित जीवन को दिशा प्रदान करने का संकल्‍प कराया। योग कार्यक्रम में प्रमुख सचिव भारत भूषण शर्मा, विशिष्‍ट सहायक के.के. शर्मा सहित विधानसभा सचिवालय के अधिकारीगण, कर्मचारीगण एवं अन्य गणमान्यजन उपस्थित थे।  

खाटूश्याम भक्तों को झटका, मंदिर के कपाट बंद; दर्शन शुरू होने की तारीख आई सामने

जयपुर  विश्व प्रसिद्ध बाबा श्याम के भक्तों के लिए जरूरी सूचना है। अगर आप बाबा श्याम के दरबार में उनके दर्शन के लिए जाने वाले हैं तो पहले यह खबर जान लें। क्योंकि बाबा श्याम का मंदिर उनके भक्तों के लिए बंद रहने वाला है, इसके बारे में श्री श्याम मंदिर कमेटी ने सूचना जारी की है। जानकारी के अनुसार बाबा श्याम के विशेष श्रृंगार और पूजा के चलते मंदिर को 18 जून 2026 की रात 10 बजे से अगले 19 घंटों के लिए बंद रखा जाएगा। इस दौरान भक्तों को बाबा के अस्थाई रूप से दर्शन नहीं मिल पाएंगे। मंदिर की परंपरा के तहत अमावस्या के बाद बाबा श्याम का विशेष तिलक और श्रृंगार किया जाता है। यह अनुष्ठान पूरे विधि-विधान के साथ संपन्न किया जाता है। इस दौरान वैदिक मंत्रोच्चार और पूजा के बीच बाबा के मस्तक पर चंदन का विशेष तिलक लगाया जाता है। इस प्रक्रिया के पूरा होने में करीब 8-10 घंटे लग जाते हैं। कब और कितने बजे खुलेगा मंदिर: कोषाध्यक्ष रवि सिंह चौहान ने मंदिर खुलने के समय की भी जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि मंदिर के कपाट 19 जून 2026 को शाम 5 बजे खोल दिए जाएंगे। इसके बाद फिर से श्रद्धालु बाबा श्याम के दर्शन कर पाएंगे। मंदिर प्रशासन ने भक्तों से अपील की है कि किसी भी परेशानी या असुविधा से बचने के लिए मंदिर खुलने और बंद होने के समय का ध्यान रखें और मंदिर बंद रहने तक दर्शन के लिए नहीं पहुंचे। जानिए कौन हैं बाबा श्याम: खाटू श्याम जी का मंदिर राजस्थान के सीकर जिले के खाटू गांव में स्थित है। यह मंदिर महाभारत के एक महत्वपूर्ण पात्र बर्बरीक को समर्पित है। बाबा श्याम को ‘हारे का सहारा’ भी कहा जाता है। इन्हें भगवान श्रीकृष्ण का अवतार माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महाभारत युद्ध के समय भीम के पौत्र बर्बरीक कौरवों की सेना की ओर से लड़ने के लिए मैदान में उतरे थे, तभी भगवान श्रीकृष्ण ने ब्राह्मण रूप धारण करके उनसे शीश का दान मांगा था। बर्बरीक ने बिना सोच-विचार किए अपना शीश दान कर दिया था। तब भगवान श्रीकृष्ण ने प्रसन्न होकर उन्हें वरदान दिया था कि उन्हें कलियुग में उनके नाम ‘श्याम’ से जाना जाएगा। मान्यता है कि खाटू स्थित बाबा श्याम के मंदिर में हाजिरी लगाने से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

एएफडी फ्रांस वित्त पोषित परियोजना में हरित विकास और जल संरक्षण पर जोर

 जयपुर राजस्थान वानिकी एवं जैव विविधता विकास परियोजना की तीसरी उच्चाधिकार समिति की बैठक गुरुवार को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में  शासन सचिवालय में आयोजित हुई। बैठक में एएफडी, फ्रांस द्वारा वित्त पोषित इस परियोजना के विभिन्न घटकों की विस्तृत समीक्षा कर वित्तीय वर्ष 2026-27 की वार्षिक कार्य योजना प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई। मुख्य सचिव ने कहा कि परियोजना के तहत किए जा रहे कार्यों में लक्ष्य पूर्ति के साथ परिणाम जमीनी स्तर पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रत्येक गतिविधि का प्रभाव स्थानीय समुदाय, पर्यावरण एवं प्राकृतिक संसाधनों पर सकारात्मक एवं परिवर्तनकारी रूप में परिलक्षित होना चाहिए। परियोजना कार्यों में दिखे परिवर्तन, सफलता की कहानियां बनें प्रेरणा मुख्य सचिव ने कहा कि परियोजना के तहत किए जा रहे कार्यों की सफलता के उदाहरण सामने आने चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ऐसे मॉडल विकसित किए जाएं जिनसे क्षेत्र में हरित आवरण बढ़ने, भूजल स्तर में सुधार, जैव विविधता संरक्षण तथा स्थानीय समुदायों की आजीविका पर सकारात्मक प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई दे। उन्होंने कहा कि परियोजना के कार्य परिवर्तनकारी होने चाहिए। इनका लाभ आमजन प्रत्यक्ष रूप से अनुभव कर सकें।  हितग्राहकों और स्थानीय जनसमुदाय की सहभागिता सुनिश्चित करने के निर्देश मुख्य सचिव ने सभी विभागों को सौंपे गए दायित्वों का प्रभावी निर्वहन सुनिश्चित करने के निर्देश देते हुए कहा कि परियोजना से जुड़े हितग्राहकों एवं स्थानीय समुदायों के विचारों और सुझावों को भी प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि स्थानीय आवश्यकताओं एवं अपेक्षाओं के अनुरूप कार्यों की योजना बनाकर उनका क्रियान्वयन किया जाए। तकनीकी मानकों के अनुरूप हो कार्यों का क्रियान्वयन मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि सभी गतिविधियों का निष्पादन निर्धारित तकनीकी मापदंडों एवं गुणवत्ता मानकों के अनुरूप किया जाए। उन्होंने परियोजना के प्रत्येक घटक की नियमित मॉनिटरिंग एवं समय-समय पर प्रभावी पर्यवेक्षण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।   स्थानीय प्रजातियों का संरक्षण और उच्च घनत्व हरित क्षेत्र हो विकसित मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पौधारोपण एवं चारागाह विकास कार्यों में स्थानीय एवं क्षेत्र विशेष के अनुकूल प्रजातियों को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने उच्च घनत्व वाले हरित क्षेत्र विकसित करने, बड़े आकार के पौधों के रोपण तथा उन्नत एवं बड़ी नर्सरियों के विकास पर विशेष ध्यान देने को कहा। परिवर्तन के सूचकांक का निर्धारण किया जावे मुख्य सचिव महोदय ने निर्देश दिये कि परियोजना में किये जा रहे कार्यों के प्रभाव का आंकलन करने के लिए परिवर्तन के सूचकांकों का निर्धारण कर परियोजना के प्रारम्भ एवं वर्तमान स्थिति की तुलनात्मक समीक्षा करें। जल संरक्षण और भूजल स्तर सुधार के प्रयास हों प्रभावी उन्होंने कहा कि परियोजना के माध्यम से जल संरक्षण संरचनाओं का विकास इस प्रकार किया जाए कि भूजल स्तर में वृद्धि हो तथा स्थानीय जल संसाधनों का पुनर्भरण सुदृढ़ हो। मृदा एवं जल संरक्षण गतिविधियों के दीर्घकालिक प्रभावों का भी नियमित मूल्यांकन किया जाए। एएफडी ऋण अनुबंध और लंबित वित्तीय मामलों के शीघ्र निस्तारण के निर्देश मुख्य सचिव ने फ्रांसीसी विकास एजेंसी एएफडी की द्वितीय ट्रांच से संबंधित ऋण अनुबंध प्रक्रिया को आगामी जुलाई  तक पूर्ण करने के निर्देश दिए। अंतर-विभागीय समन्वय से हासिल होंगे बेहतर परिणाम मुख्य सचिव ने कहा कि परियोजना के उद्देश्यों की प्रभावी प्राप्ति के लिए सभी संबंधित विभागों के बीच मजबूत समन्वय आवश्यक है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि परियोजना कार्यों को गुणवत्तापूर्ण, समयबद्ध एवं परिणामोन्मुखी ढंग से पूर्ण किया जाए। इससे विकसित राजस्थान के लक्ष्य को साकार करने में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा। बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव वन विभाग श्री आनंद कुमार, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (हाफ) श्री अरिजीत बनर्जी, प्रधान मुख्य वन संरक्षक विकास सुश्री शिखा मेहरा, मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक श्री के. सी.ए. अरूण प्रसाद, राजस्थान वानिकी एवं जैव विविधता विकास परियोजना निदेशक श्री राजेश गुप्ता एवं वित्त, कृषि, आयोजना, महिला बाल विकास, पर्यटन, ग्रामीण विकास विभाग सहित अन्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

माइंस विभाग की समीक्षा बैठक: राजस्व बढ़ाने और खनन प्रक्रिया को समयबद्ध करने पर जोर

जयपुर अतिरिक्त मुख्य सचिव माइंस एवं पेट्रोलियम श्रीमती अपर्णा अरोरा ने खान एवं भूविज्ञान विभाग के फील्ड अधिकारियों को डेलिनियेशन से लेकर आॅक्शन तक के लिए मिनरल ब्लाॅक तैयार करने के कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि मिनरल ब्लाॅकों की समय पर नीलामी से वैध खनन को बढ़ावा, अवैध खनन पर प्रभावी रोक, माइनिंग सेक्टर में निवेश और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर विकसित होंगे। एसीएस माइंस श्रीमती अपर्णा अरोरा गुरुवार को खनिज भवन में विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की हाईब्रिड मोड पर बैठक को संबोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा कि मिनरल ब्लाॅकों के तैयार करने से नीलामी तक की प्रक्रिया का क्रियान्वयन टाइमलाइन बनाकर किया जाए ताकि क्रियान्वयन व प्रभावी मोनेटरिंग संभव हो सके। उन्होंने कहा कि इससे राज्य सरकार के राजस्व में भी बढ़ोतरी होगी। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा माइनिंग सेक्टर में राजस्थान को अग्रणी प्रदेश बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का अवैध खनन गतिविधियों के खिलाफ जीरो टाॅलरेंस की नीति पर कार्य करने के निर्देश है। इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए विभाग द्वारा वैध खनन को बढ़ावा देने के लिए मिनरल ब्लाॅकों के ऑक्शन पर जोर दिया जा रहा है। श्रीमती अरोरा ने कहा कि विभाग को राजस्व संग्रहण का बड़ा लक्ष्य मिला है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए अभी से कार्ययोजना बनाने के साथ ही पुराने बकाया और अवैध खनन गतिविधियों पर कार्यवाही की बकाया राशि की वसूली पर भी फोकस करना होगा। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को फील्ड में सक्रिय होने से राजस्व में बढ़ोतरी और अवैध खनन गतिविधियों पर कारगर रोक लग सकेगी। एसीएस माइंस श्रीमती अपर्णा अरोरा ने निर्माण कार्य से जुड़ी संस्थाओं से उपलब्ध एम-सेंड के अधिक से अधिक उपयोग पर जोर दिया ताकि बजरी के विकल्प के रुप में एम-सेंड को प्रोत्साहित किया जा सकें। उन्होंने बजट घोषणाओं की क्रियान्विति प्रगति, राजस्व संग्रहण सहित महत्वपूर्ण बिन्दुओं की समीक्षा की और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।  

भानगढ़ किला का श्राप और इतिहास: जानें तांत्रिक और संत बालू नाथ की कथाएं

अलवर राजस्थान के अलवर जिले में स्थित भानगढ़ किला भारत की सबसे भूतिया जगहों में से एक माना जाता है। इस किले की कहानी और इसके रहस्यमयी श्राप ने इसे रहस्यमयी और डरावनी जगह बना दिया है। यहां रात में जाना मना है, इस किले का इतिहास रहस्यमयी कहानियों से भरा पड़ा है। और इसके पीछे की कहानी भी बेहद दिलचस्प है। भानगढ़ किले का निर्माण 16वीं शताब्दी में राजा माधो सिंह ने करवाया था। यह किला अपनी स्थापत्य कला और वास्तुकला के लिए तो मशहूर है ही, लेकिन इसके अलावा यह किला अपने रहस्यों और भूतिया गतिविधियों के लिए भी जाना जाता है। भूतिया श्राप की कहानी भानगढ़ किले की कहानी संत बालू नाथ से जुड़ी हुई है। राजा माधो सिंह ने इस किले का निर्माण करवाया था, लेकिन उन्होंने पहले बालू नाथ से इसकी स्वीकृति ली थी। बालू नाथ जो एक तपस्वी थे, उन्होंने शर्त रखी कि महल की छाया उनके ध्यान स्थल पर नहीं पड़नी चाहिए। जब ​​किले का निर्माण पूरा हुआ तो इसकी छाया बालू नाथ के ध्यान स्थल पर पड़ी। छाया अपने ऊपर पड़ने से संत क्रोधित हो गए और उनका गुस्सा किले के लिए श्राप साबित हुआ। किले के निर्माण के तुरंत बाद ही भानगढ़ नष्ट हो गया और अब तक इसे फिर से बसाया नहीं जा सका है। बालू नाथ की तपस्या स्थली आज भी खंडहर में है, जो इस शापित स्थान के रहस्य को और बढ़ा देता है। राजकुमारी रत्नावती की कहानी भानगढ़ किले के बारे में एक और प्रसिद्ध कहानी यह है कि एक तांत्रिक के श्राप के कारण यह किला पूरी तरह से बर्बाद हो गया था। ऐसा कहा जाता है कि किले की खूबसूरत राजकुमारी रत्नावती इस किले के पतन का मुख्य कारण थी। राजकुमारी से प्यार करने वाले एक तांत्रिक ने उसे पाने के लिए एक चालाक योजना बनाई। लेकिन जब उसकी साजिश का पता चला तो उसे मौत की सजा सुनाई गई। इस तांत्रिक के श्राप के परिणामस्वरूप किला जल्द ही खंडहर में बदल गया और एक प्रेतवाधित स्थान के रूप में जाना जाने लगा। इसके बाद किले में अजीबोगरीब घटनाएं होने लगीं। स्थानीय लोग आज भी दावा करते हैं कि रात में किले से चीखें, चूड़ियाँ टूटने की आवाज़ और संगीत सुनाई देता है। उनका यह भी मानना ​​है कि किले में कभी-कभी परछाइयाँ दिखाई देती हैं और उन्हें लगता है कि कोई उनका पीछा कर रहा है। इन रहस्यमयी घटनाओं ने भानगढ़ किले को एक भूतिया जगह बना दिया है, जहाँ आज भी लोग डर के मारे जाते हैं। भानगढ़ किले का भ्रमण भानगढ़ किला सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक पर्यटकों के लिए खुला रहता है। यह किला राजस्थान के अलवर जिले में स्थित है, जो जयपुर और दिल्ली के बीच आता है। दिन के समय पर्यटक किले की खूबसूरती और वास्तुकला का लुत्फ़ उठा सकते हैं, लेकिन रात में यहाँ जाने की हिम्मत बहुत कम लोग ही कर पाते हैं। कहा जाता है कि भानगढ़ किले में रात के समय भूत-प्रेतों का वास होता है। रात में यहाँ अजीबोगरीब आवाज़ें भी सुनाई देती हैं, जो इस किले के रहस्यमयी माहौल को और बढ़ा देती हैं। इस किले के बारे में यह भी कहा जाता है कि जो भी रात में किले में प्रवेश करता है, वह सुबह वापस नहीं आ पाता। यही वजह है कि यहाँ रात में जाना मना है।इतना भूतहा किला होने के बाद भी यहां करन-अर्जुन, ट्रिप टू भानगढ़, फियर-फाइल्स और झांसी की रानी जैसे फिल्मों और शोज की शूटिंग हो चुकी है। भानगढ़ किले को भूतिया क्यों माना जाता है? भानगढ़ किले को भूतिया इसलिए माना जाता है क्योंकि यहाँ की स्थानीय मान्यता है कि एक तांत्रिक ने किले को श्राप दिया था, जिसके कारण किला नष्ट हो गया और यहाँ के निवासी भी खत्म हो गए। लोग अजीबोगरीब आवाजें सुनने और रात में परछाई देखने की बात करते हैं, जिसकी वजह से यह किला भूतहा जगह बन गया है। भानगढ़ किले का श्राप क्या था? भानगढ़ किले को एक तांत्रिक ने श्राप दिया था, जिसने कहा था कि किला कभी समृद्ध नहीं होगा और इसके निवासी नष्ट हो जाएंगे। इस श्राप की वजह से किला तेजी से नष्ट हो गया और आज भी इसे भूतहा जगह माना जाता है।

सचिवालय में 149 नए पदों को मंजूरी, युवाओं को मिलेगा रोजगार का अवसर

जयपुर  राजस्थान की भजन लाल शर्मा सरकार ने सरकारी कर्मचारियों और युवाओं के हित में एक बड़ा फैसला लिया है। बजट 2026-27 की घोषणा के तहत, मुख्यमंत्री ने राज्य कर्मचारियों को पदोन्नति (प्रमोशन) के लिए जरूरी अनुभव सीमा में 2 वर्ष की विशेष छूट देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। सरकार के बयान के मुताबिक, इस फैसले के तहत प्रमोशन के लिए जरूरी अनुभव या सेवा अवधि में दो साल की छूट देने के लिए अलग-अलग सेवा नियमों में बदलाव किए जाएंगे। हालांकि, जिन कर्मचारियों ने 2023-24, 2024-25 और 2025-26 के लिए डिपार्टमेंटल प्रमोशन कमेटी (DPC) की प्रक्रिया के दौरान पहले ही ऐसी छूट का लाभ उठा लिया है, वे इस फायदे के लिए पात्र नहीं होंगे। सचिवालय में 149 नए पदों को मंजूरी इसके साथ ही मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने प्रशासनिक कामकाज को बेहतर बनाने के लिए सरकारी सचिवालय में 149 नए पद बनाने को भी मंजूरी दी है। इनमें सरकार के असिस्टेंट सेक्रेटरी के 15 पद, असिस्टेंट सेक्शन ऑफ़िसर के 67 पद और क्लर्क ग्रेड-I के 67 पद शामिल हैं। सरकार के अनुसार, इस कदम से न केवल मौजूदा कर्मचारियों के प्रमोशन के मौके बेहतर होंगे, बल्कि युवाओं के लिए रोजगार के अतिरिक्त अवसर भी पैदा होंगे। सेवा से जुड़े मामलों में 29 मामलों में छूट कर्मचारियों के हित में लिए गए एक और फ़ैसले में, मुख्यमंत्री ने अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति और सेवा से जुड़े मामलों में 29 मामलों में छूट दी। इनमें से 16 मामलों में सरकारी कर्मचारियों की मौत के बाद अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन जमा करने में हुई देरी के कारण छूट दी गई। नौ मामलों में, आवेदन में देरी पर विचार करने के बाद उम्र सीमा में छूट को मंजूरी दी गई। मुख्यमंत्री ने तबादले से जुड़े चार मामलों में भी छूट को मंजूरी दी, ताकि कर्मचारी अपनी आश्रित पत्नियों की सुविधा के लिए अपने घरों के पास पोस्टिंग पा सकें। इस बीच, राज्य सरकार ने चार हाउसकीपर्स – सत्यदेव सिंह कृष्णावत, गिरिराज प्रसाद मीणा, योगेंद्र सिंह सिसोदिया और तरुण जोशी को हटाने का आदेश दिया है।