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काला हिरण मामले में सलमान खान को बड़ी राहत, हाईकोर्ट ने अनादर बेंच को जारी किए आदेश

जोधपुर बहुचर्चित कांकाणी काला हिरण शिकार प्रकरण में सोमवार को राजस्थान हाईकोर्ट में अहम सुनवाई हुई. राजस्थान हाई कोर्ट के जस्टिस बलजिंदर सिंह संधू ने सुनवाई से किया इनकार. कोर्ट ने पुट अप अनादर बेंच के दिए निर्देश. अब मामले में किसी अन्य बेंच में होगी सुनवाई. अभिनेता सलमान खान की भूमिका से जुड़ी अपील पर अदालत को विचार करने के लिए याचिका दायर की गई थी. जोधपुर की निचली अदालत ने 5 अप्रैल 2018 को सलमान खान को पांच साल के जेल की सजा सुनाई थी. इस फैसले के खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट में अपील दायर कर रखी है, जिस पर अब सुनवाई होनी है. इससे पहले उनके अधिवक्ता हस्तीमल सारस्वत ने सभी संबंधित अपीलों पर एक साथ सुनवाई की मांग की थी, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया था. इसी प्रकरण में सह-अभियुक्त सैफ अली खान, तब्बू, नीलम, सोनाली बेंद्रे और स्थानीय निवासी दुष्यंत सिंह को ट्रायल कोर्ट ने बरी कर दिया था. राज्य सरकार ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी है. सरकार की ओर से दायर ‘लीव टू अपील’ याचिका पर भी सुनवाई निर्धारित की गई थी. अब अदालत राज्य की अपील को अस्वीकार कर लिया है. इसके अतिरिक्त, 15 अक्टूबर 1998 को लूणी थाने में दर्ज आर्म्स एक्ट से जुड़े मामले की अपील भी 21 मार्च 2022 को हाईकोर्ट में स्थानांतरित की जा चुकी है. क्या है काला हिरण शिकार का पूरा मामला? साल 1998 में फिल्म ‘हम साथ-साथ हैं’ की शूटिंग जोधपुर के आसपास ग्रामीण इलाकों में चल रही थी. इसी दौरान आरोप लगा कि सलमान खान समेत अन्य कलाकारों ने काले हिरणों का शिकार किया. इस घटना के बाद सलमान खान के खिलाफ हिरण शिकार के तीन अलग-अलग मामले दर्ज किए गए, जबकि एक मामला अवैध हथियार रखने से संबंधित था. निचली अदालत ने दो मामलों में उन्हें पांच-पांच वर्ष की सजा सुनाई, जबकि एक अन्य मामले में एक वर्ष का कारावास दिया गया. अब हाईकोर्ट में एक साथ होने वाली सुनवाई से इस लंबे समय से चल रहे मामले में अहम मोड़ आने की उम्मीद की जा रही है.

चैकिंग के दौरान ट्रक ने ड्यूटी पर तैनात RTO इंस्पेक्टर के ड्राइवर को कुचला

जयपुर. जयपुर के कानोता थाना क्षेत्र के हिंगोनिया टोल प्लाजा के पास रिंग रोड पर रविवार दोपहर ड्यूटी के दौरान हादसे में RTO इंस्पेक्टर के वाहन चालक की मौत हो गई। परिवहन निरीक्षक असगर अली खां के अनुसार हिंगोनिया टोल प्लाजा पर वाहनों की चैकिंग और चालान की कार्रवाई चल रही थी। इसी दौरान आगरा रोड की ओर से आए एक अज्ञात ट्रक ने परिवहन जाप्ते में संविदा पर लगे कार चालक को टक्कर मार दी और मौके से फरार हो गया। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि चालक गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे तुरंत सवाई मानसिंह अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने मामला दर्ज कर टोल प्लाजा के सीसीटीवी फुटेज खंगालने शुरू कर दिए हैं। पुलिस के मुताबिक हादसे के शिकार व्यक्ति की पहचान राजाराम रावत (48) निवासी पनियाला, कोटपूतली के रूप में हुई है। घटना के बाद पुलिस आगरा रोड से आए ट्रक चालक की जानकारी जुटा रही है। पुलिस ने ट्रक चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। राजस्व टारगेट का दबाव परिवहन विभाग में राजस्व टारगेट पूरा करने के लिए सभी आरटीओ को निर्देश दिए गए हैं। इसके कारण अधिक से अधिक वाहनों पर कार्रवाई कर सड़क पर आरटीओ उड़नदस्तों की ओर से चालान किए जा रहे हैं। समय पर टारगेट पूरा करने का दबाव भी लगातार बना हुआ है।

राजस्थान की पटाखा फैक्ट्री में आग से 7 मजदूरों मौत

जयपुर. राजस्थान के औद्योगिक हब भिवाड़ी में सोमवार का सूरज काल बनकर उतरा। खुशखेड़ा करौली इंडस्ट्रियल एरिया स्थित एक पटाखा फैक्ट्री में सुबह अचानक भीषण आग लग गई। देखते ही देखते आग ने इतना विकराल रूप धारण कर लिया कि वहां काम कर रहे मजदूरों को बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिला। प्रारम्भिक जानकारी के अनुसार, अब तक 7 शव निकाले जा चुके हैं, जो पूरी तरह जल चुके हैं। कैसे हुआ हादसा? प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसा सोमवार सुबह उस वक्त हुआ जब फैक्ट्री में शिफ्ट बदली जा रही थी और करीब 25 मजदूर काम पर तैनात थे। अचानक फैक्ट्री के भीतर एक के बाद एक कई धमाके हुए। आग पलक झपकते ही पूरी बिल्डिंग में फैल गई। काले धुएं का गुबार कई किलोमीटर दूर से देखा जा सकता था। दमकल इंचार्ज राजू खान ने बताया की औद्योगिक क्षेत्र के प्लॉट नंबर G-1, 118 में स्थित फैक्ट्री पिछले कई महीनों से बंद पड़ी थी। फैक्ट्री परिसर में बड़ी मात्रा में गत्तों का स्टॉक रखा हुआ था। सोमवार सुबह 10 बजे अचानक फैक्ट्री के अंदर से धुआं उठता दिखाई दिया और कुछ ही देर में आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। आग से 7 लोग जिंदा जल गए। भिवाड़ी पुलिस के आला अधिकारी मौके पर मौजूद है। 3 से 4 बार जोरदार धमाके बंद फैक्ट्री में ऐसा क्या बन रहा था कि जो तेज धमाका हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आग लगने के दौरान 3 से 4 बार जोरदार धमाके हुए, जिससे लोगों में दहशत फैल गई। धमाकों की आवाज काफी दूर तक सुनी गई। आधा दर्जन गाड़ियां मौके पर प्राथमिक अंदेशा जताया जा रहा है कि फैक्ट्री के अंदर रखे गैस सिलेंडर फटने से ये तेज धमाके हुए होंगे। हालांकि आग लगने के वास्तविक कारणों का अभी तक स्पष्ट पता नहीं चल पाया है। सूचना मिलते ही दमकल विभाग की करीब आधा दर्जन गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग बुझाने का कार्य शुरू किया गया। आग पर काबू पाने के लिए दमकल कर्मियों को काफी मशक्कत करनी पड़ी, क्योंकि फैक्ट्री में रखा गत्ता तेजी से आग पकड़ रहा था। आसपास की फैक्ट्रियों को खाली कराया एहतियात के तौर पर आसपास की फैक्ट्रियों को भी खाली करा लिया गया और बिजली आपूर्ति अस्थायी रूप से बंद कर दी गई, ताकि कोई बड़ा हादसा न हो। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। दमकल कर्मियों ने घंटों की कड़ी मेहनत के बाद आग पर काफी हद तक नियंत्रण पा लिया, हालांकि पूरी तरह शीतलन कार्य देर तक जारी रहा। नुकसान का किया जा रहा आकलन गनीमत रही कि फैक्ट्री लंबे समय से बंद थी। अगर फैक्ट्री चालू रहती तो और जनहानि हो सकती थी। फिलहाल आग से हुए नुकसान का आकलन किया जा रहा है। प्रारंभिक अनुमान के मुताबिक लाखों रुपए का सामान जलकर राख हो गया। पुलिस ने जांच शुरू की पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि आग शॉर्ट सर्किट से लगी या किसी अन्य कारण से। प्रशासन ने औद्योगिक क्षेत्र की अन्य इकाइयों को भी सुरक्षा मानकों की जांच करने के निर्देश दिए हैं, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं से बचा जा सके। 7 लोगों की मौत की पुष्टि पुलिस अधीक्षक प्रशांत किरण ने हादसे में सात लोगों की मौत की पुष्टि करते हुए कहा कि मरने वालों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। अतिरिक्त जिलाधिकारी सुमिता मिश्रा ने बताया कि पुलिस टीम ने नियमित गश्त के दौरान कारखाने में आग लगी देखी जिसके बाद राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया। उन्होंने कहा कि कारखाने में नौ लोग फंसे हुए थे। अब तक सात शव निकाले जा चुके हैं। 7 की मौत, 2 अभी भी लापता प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक़ मलबे से 7 लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं। शवों की स्थिति इतनी खराब है कि उनकी पहचान करना भी मुश्किल हो रहा है। रेस्क्यू टीम के मुताबिक, 2 मजदूर अभी भी लापता हैं, जिनके फैक्ट्री के पिछले हिस्से में फंसेने की आशंका जताई जा रही है। फायर ब्रिगेड की दर्जनों गाड़ियां मौके पर आग बुझाने के लिए भिवाड़ी, खैरथल, तिजारा और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों से करीब 15-20 फायर ब्रिगेड की गाड़ियां बुलाई गई हैं। चूंकि फैक्ट्री केमिकल की है, इसलिए पानी के साथ-साथ फोम (Foam) का इस्तेमाल किया जा रहा है।

थैलीसीमिया पीड़ितों के लिए बड़ा ऐलान, मुफ्त ट्रांसप्लांट और पेंशन योजना जारी

 जयपुर  राजस्थान में थैलीसीमिया पीड़ितों को निःशुल्क बोन मैरो ट्रांसप्लांट के साथ 1250 रुपए मासिक पेंशन मिल रही है। विधायक रूपिन्द्र सिंह कुन्नर द्वारा पूछे गए तारांकित प्रश्न के उत्तर में सरकार ने चिकित्सा सहायता से लेकर आर्थिक सुरक्षा तक के प्रावधानों को लेकर जवाब पेश किया है। निःशुल्क चिकित्सा और डे-केयर की सुविधा सरकार ने अवगत कराया कि प्रदेश के चिकित्सा महाविद्यालयों में थैलीसीमिया मरीजों के लिए विशेष 'डे-केयर सेंटर' संचालित हैं । इन केंद्रों पर मरीजों को बिना किसी रिप्लेसमेंट के ब्लड ट्रांसफ्यूजन, आयरन केलेशन थेरेपी और सभी प्रकार की जाँचे पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही हैं । इसके अतिरिक्त, गंभीर मरीजों के लिए वार्ड में भर्ती होने और बोन मैरो ट्रांसप्लांट जैसी महंगी चिकित्सा सुविधा भी सरकार द्वारा मुफ्त दी जा रही है । आर्थिक संबल : 1250 रुपए की मासिक पेंशन सामाजिक सुरक्षा के तहत, राज्य सरकार थैलीसीमिया पीड़ित बच्चों को 'मुख्यमंत्री विशेष योग्यजन सम्मान पेंशन योजना' का लाभ दे रही है । इस श्रेणी के बच्चों को वर्तमान में 1250 रुपये प्रति माह की न्यूनतम पेंशन दर से सहायता दी जा रही है । सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि थैलीसीमिया को दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 के तहत 21 दिव्यांगता श्रेणियों में शामिल किया गया है, जिसके आधार पर इन बच्चों के यूडीआईडी (UDID) कार्ड और दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनाए जा रहे हैं । आधार और बायोमेट्रिक नियमों पर स्पष्टीकरण सदन में आधार कार्ड की अनिवार्यता और बायोमेट्रिक सत्यापन को लेकर उठ रहे सवालों पर विभाग ने स्थिति स्पष्ट की। 5 वर्ष से कम आयु: जन्म से 5 वर्ष तक के बच्चों का उपचार माता-पिता के आधार कार्ड के आधार पर ही सुनिश्चित किया जाता है । छोटे बच्चों का आधार नामांकन 'हेड ऑफ फैमिली' (HoF) के सत्यापन से किया जाता है । बायोमेट्रिक की बाध्यता नहीं : सरकार ने विशेष आदेश जारी कर यह सुविधा दी है कि जिन बच्चों के बायोमेट्रिक (हाथों के निशान) अपडेट नहीं हो पा रहे हैं, उनकी पेंशन नहीं रोकी जाएगी । ओटीपी आधारित सत्यापन : ऐसे मामलों में जहाँ फिंगरप्रिंट या फेस रिकॉग्निशन संभव नहीं है, वहाँ संबंधित पेंशन स्वीकृतिकर्ता अधिकारी पंजीकृत मोबाइल पर ओटीपी (OTP) के माध्यम से आवेदन स्वीकार कर स्वतः स्वीकृति जारी कर सकते हैं । यह वैकल्पिक प्रक्रिया उन विशेष मामलों के लिए 'अपवाद स्वरूप' लागू की गई है, ताकि तकनीकी कारणों से कोई भी पात्र बच्चा सहायता से वंचित न रहे ।

खाद्य सुरक्षा योजना में जुड़ेंगे नाम और शादी के बाद नहीं अटकेगा राशन

भरतपुर. राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना (एनएफएसए) के तहत चयनित परिवारों के राशन कार्ड में जो सदस्य अब तक जुड़ने से शेष रह गए थे, उनके नाम अब जोड़े जा सकेंगे। इसके लिए विभागीय पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन की सुविधा शुरू कर दी गई है। सरकार की ओर से यह प्रक्रिया पुन: शुरू किए जाने से हजारों परिवारों को राहत मिलेगी, जिनके यहां बच्चों का जन्म हुआ है या विवाह के बाद परिवार में नए सदस्य जुड़े हैं। जिला रसद अधिकारी पवन अग्रवाल ने बताया कि जारी निर्देशों के अनुसार परिवार का कोई भी सदस्य विभाग के पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर सकता है। शेष सदस्यों के नाम जनआधार एपीआई के माध्यम से राशन कार्ड में जोड़े जाएंगे। यदि जुड़ने वाले सदस्य के नाम पर एलपीजी गैस कनेक्शन है तो उसकी एलपीजी आईडी का विवरण भी आवेदन में दर्ज किया जा सकेगा। आवेदन जिला रसद अधिकारी, विकास अधिकारी अथवा अधिशासी अधिकारी के स्तर से अनुमोदित होने के बाद संबंधित सदस्य का नाम खाद्य सुरक्षा योजना में जोड़ा जाएगा। ई-केवाईसी कराना अनिवार्य इसके बाद 90 दिनों के भीतर सभी नए जुड़े सदस्यों की ई-केवाईसी कराना अनिवार्य होगा, ताकि उन्हें योजना का लाभ निर्बाध रूप से मिल सके। यह पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन है, इसलिए पात्र लाभार्थियों को अनावश्यक रूप से ई-मित्र केंद्रों पर जाने की आवश्यकता नहीं होगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य आमजन को सुविधा देना और पारदर्शिता बढ़ाना है। साथ ही जिला रसद अधिकारियों को अपने अधीनस्थ प्रवर्तन स्टाफ को इस प्रक्रिया का प्रशिक्षण देने और इसका व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। उल्लेखनीय है कि काफी समय से यह सुविधा बंद थी, जिसे सरकार ने अब पुन: चालू कर दिया है। इससे राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के पात्र लाभार्थियों को समय पर पूरा अनाज और अन्य सामग्री प्राप्त करने में सुविधा होगी। यह बोले डीएसओ राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के अंतर्गत चयनित परिवारों के राशन कार्ड में शेष रह गए सदस्यों के नाम जोड़ने की प्रक्रिया शुरू की गई है। इसके लिए विभागीय पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। जिन परिवारों में बच्चों का जन्म हुआ है या विवाह के बाद नए सदस्य जुड़े हैं, वे निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन कर सकते हैं। पात्रता की जांच के बाद संबंधित सदस्यों को राशन कार्ड में जोड़ा जाएगा।

सैकड़ों शिक्षकों को स्थाईकरण के लिए 6 महीने और करना होगा इंतजार!

बांसवाड़ा. अधिकारियों के आपसी सामंजस्य के अभाव के चलते जिले के सैकड़ों शिक्षकों की सांसें अटकी हुई हैं। शिक्षक भर्ती 2022 के तहत बांसवाड़ा में लगे तृतीय श्रेणी के लेवल-2 के 220 शिक्षकों के स्थाईकरण की फाइल चार माह से प्रारम्भिक शिक्षा विभाग के दफ्तर में धूल फांक रही है। वहीं पड़ोसी जिले में यह काम परीविक्षा काल पूरा होते ही पूरा कर लिया गया है और शिक्षकों को समस्त परिलाभ मिलने भी शुरू हो गए हैं। जबकि बांसवाड़ा के शिक्षक वेतन वृद्धि, एरियर और अन्य सेवा लाभों से वंचित हो रहे हैं। शिक्षकों को डर सता रहा है कि यदि पंचायती राज चुनाव की आचार संहिता लग जाती है तो स्थाईकरण की फाइल कम से कम छह माह और अटक सकती है। यह है मामला शिक्षक भर्ती 2022 के तहत चयनित शिक्षक प्रारम्भिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत राजकीय प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में सेवाएं दे रहे हैं। उनका परीविक्षा काल अक्टूबर 2025 में पूर्ण होने के बाद प्रावधानों के अनुसार स्थाईकरण होना है, लेकिन चार माह बाद भी फाइल लंबित है। ये हो रहा है नुकसान स्थायीकरण में हो रही देरी का सीधा असर शिक्षकों की वेतन वृद्धि, एरियर और अन्य सेवा लाभों पर पड़ रहा है। समय पर स्वीकृति नहीं मिलने से शिक्षक आर्थिक नुकसान के साथ मानसिक तनाव का सामना कर रहे हैं। वहीं कई बार प्रकरण लंबित रहने पर बाद में विभाग को एरियर सहित एक साथ बड़ी राशि देनी पड़ती है। इससे विभाग का बजट भी प्रभावित होता है। 2 बार लेकर गई फाइल : डीईओ स्थायीकरण का काम हमारी तरफ से नवंबर में ही पूरा हो गया है। पहली बार 30 नवंबर और दूसरी बार 10 फरवरी को फाइल भेजी गई। पर दोनों बार कलक्ट्रेट में कहा गया कि डीईसी की बैठक होगी, तब बताएंगे। डीईओ कार्यालय ने पूरा काम कर दिया है। – शम्मे फरोजा बतुल अंजूम, जिला शिक्षा अधिकारी प्रारंभिक, बांसवाड़ा फाइल देंगे, तो बुला लेंगे मीटिंग : सीईओ हमारे पास स्थायीकरण की कोई फाइल नहीं आई है। फाइल आएगी तो तुरंत जिला स्थापना समिति की बैठक बुला लेंगे। फाइल मेरी टेबल पर देंगे, तो कार्रवाई करेंगे। – गोपाललाल स्वर्णकार, सीईओ, जिला परिषद, बांसवाड़ा

पत्रकारों को रेल यात्रा की रियायतें पुनः बहाल हों: सांसद नीरज डांगी

आबूरोड/सिरोही. सांसद नीरज डांगी ने राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान देश के लोकतांत्रिक ढांचे के चौथे स्तंभ-पत्रकारिता से संबंधित, संवेदनशील एवं जनहित से सीधे जुड़े विषय की ओर ध्यान आकर्षित किया। सांसद डांगी ने बताया कि कोविड-19 महामारी से पूर्व भारतीय रेल की ओर से पत्रकारों को दी जा रही यात्रा रियायतें महामारी के दौरान स्थगित की गई थीं। सांसद डांगी ने बताया कि महामारी के दौरान स्थगित करना उस समय की परिस्थितियों में एक अस्थायी एवं व्यावहारिक निर्णय था, लेकिन खेद का विषय है कि देश में सामान्य स्थिति बहाल होने, सभी आर्थिक एवं सामाजिक गतिविधियां सुचारू रूप से प्रारंभ होने तथा अन्य श्रेणियों को दी गई रियायतें फिर लागू होने के बावजूद पत्रकारों की यह महत्वपूर्ण सुविधा आज तक बहाल नहीं की गई है। सांसद डांगी ने कहा कि पत्रकार केवल समाचार संकलन तक सीमित नहीं रहते, बल्कि वे देश के दूर-दराज़, दुर्गम एवं संवेदनशील क्षेत्रों में जाकर आम नागरिकों की समस्याओं, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन, आपदाओं, सामाजिक असमानताओं तथा लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की निष्पक्ष रिपोर्टिंग करते हैं। कई बार उन्हें सीमित संसाधनों, जोखिमपूर्ण परिस्थितियों और समयबद्ध दबावों में कार्य करना पड़ता है। ऐसे में भारतीय रेल की ओर से दी जाने वाली यात्रा रियायतें किसी प्रकार का विशेषाधिकार नहीं, बल्कि उनके कर्तव्यों के निर्वहन में सहायक एक आवश्यक सुविधा रही हैं। लोकतांत्रिक मूल्यों की भावना के अनुरूप नहीं सांसद डांगी ने कहा कि पत्रकारों को यात्रा रियायतों से वंचित रखना अप्रत्यक्ष रूप से उनकी कार्यक्षमता को सीमित करता है और यह स्थिति लोकतांत्रिक मूल्यों की भावना के अनुरूप नहीं कही जा सकती। विशेष रूप से छोटे एवं स्वतंत्र पत्रकार, ग्रामीण एवं क्षेत्रीय मीडिया से जुड़े संवाददाता इस निर्णय से सर्वाधिक प्रभावित हुए हैं। लोकतंत्र सशक्त, जीवंत और उत्तरदायी लोकतंत्र तब ही रह सकता है जब उसकी आवाज़ निर्भय, स्वतंत्र और निर्बाध हो। सांसद डांगी ने सरकार से मांग की है कि कोविड-19 महामारी से पूर्व भारतीय रेल की ओर से पत्रकारों को प्रदान की जा रही सभी यात्रा रियायतों को तत्काल प्रभाव से पुनः बहाल किया जाए। मान्यता प्राप्त पत्रकारों के लिए एक स्पष्ट, पारदर्शी एवं स्थायी नीति का निर्माण किया जाए, जिससे भविष्य में किसी भी आपात स्थिति में उनके अधिकारों एवं सुविधाओं की अनावश्यक समाप्ति ना हो। यह भी सुनिश्चित किया जाए कि इस नीति का लाभ वास्तविक एवं सक्रिय पत्रकारों तक सरल प्रक्रिया के माध्यम से पहुंचे।

जयपुर सड़क हादसे: शनिवार सुबह अलग-अलग घटनाओं में 7 लोगों की मौत, चाकसू में भी बड़ा हादसा

जयपुर  जिले के चाकसू इलाके में एक बार फिर तेज रफ्तार का कहर देखने को मिला. राष्ट्रीय राजमार्ग 52 पर टिगरिया मोड़ के पास शनिवार सुबह हुए भीषण सड़क हादसे में महिला समेत पांच लोगों की दर्दनाक मौत हो गई. तेज रफ्तार कार आगे चल रहे डंपर से जा भिड़ी, जिससे कार के परखच्चे उड़ गए. टक्कर इतनी भीषण थी कि चार लोगों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया. पुलिस के अनुसार कार सवार सभी लोग जबलपुर (मध्यप्रदेश) के निवासी थे और दर्शन कर जयपुर की ओर आ रहे थे. हादसे की प्रारंभिक वजह चालक को झपकी आना बताई जा रही है. सुबह साढ़े पांच बजे हुआ हादसा : चाकसू थाना प्रभारी मनोहर लाल मेघवाल ने बताया कि शनिवार सुबह करीब साढ़े पांच बजे टिगरिया मोड़ के पास दुर्घटना हुई. कार कोटा-जयपुर मार्ग पर जा रही थी, तभी चालक को झपकी आने से वाहन आगे चल रहे डंफर में जा घुसा. टक्कर के बाद कार पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और शव गाड़ी में बुरी तरह फंस गए. क्रेन की सहायता से वाहन को हटाकर यातायात सुचारू कराया गया. हादसे के बाद हाईवे पर लंबा जाम लग गया, जिसे पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद खुलवाया. मृतकों की पहचान : हादसे में मृतकों की पहचान हो गई है. जिनमें रेशमा श्रीवास्तव (55), पत्नी अखिलेश श्रीवास्तव, पीयूष पुत्र राजेश राय, रजक राहुल पुत्र बबलू रजक, चालक अनुराग और शानू सभी मृतक जबलपुर के निवासी बताए जा रहे हैं. रजक राहुल खेरमाई मंदिर के पास जबलपुर सिटी क्षेत्र का रहने वाला था. महाकाल के दर्शन के बाद जा रहे थे खाटूश्यामजी : पुलिस के अनुसार मृतका रेशमा श्रीवास्तव की बेटी पलक श्रीवास्तव ने बताया कि उनकी मां दो दिन पहले उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन के लिए निकली थी. 13 फरवरी को दर्शन करने के बाद वे खाटू श्याम जी मंदिर (रींगस, सीकर) के दर्शन के लिए जा रहे थे. गाड़ी में सवार शानू पहले रेशमा का ड्राइवर रह चुका था. रजक राहुल, अनुराग का दोस्त था और पीयूष उनका परिचित था. परिजनों को हादसे की सूचना दे दी गई है. बताया जा रहा है कि पलक को अभी तक उनकी मां के निधन की जानकारी नहीं दी गई है, उन्हें केवल घायल होने की सूचना दी गई है. पुलिस जांच में जुटी : दुर्घटना थाना सेकेंड के जांच अधिकारी जयसिंह ने बताया कि शवों को चाकसू की मॉर्चरी में रखवाया गया है. पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंपे जाएंगे. पुलिस हादसे के वास्तविक कारणों की गहन पड़ताल कर रही है. तेज रफ्तार और नींद की झपकी एक बार फिर जानलेवा साबित हुई है, जिससे क्षेत्र में शोक की लहर है. ​चीख-पुकार और रेस्क्यू ऑपरेशन : ​टक्कर की आवाज इतनी तेज थी कि आसपास के लोग और वहां से गुजर रहे अन्य वाहन चालक तुरंत मदद के लिए दौड़े. कार के अंदर का नजारा बेहद हृदयविदारक था. ​पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद कार में फंसे लोगों को बाहर निकाला. मौके पर ही चार लोगों ने दम तोड़ दिया था. एक महिला गंभीर रूप से घायल थी, जिसे तुरंत एंबुलेंस की सहायता से नजदीकी अस्पताल ले जाया गया लेकिन, इलाज के दौरान चिकित्सकों ने उसे भी मृत घोषित कर दिया. ​दूदू में भी 2 ने तोड़ा दम : दूदू क्षेत्र में नेशनल हाईवे-48 पर दातरी के पास अचानक टायर फटने से प्लाईवुड से भरी एक पिकअप गाड़ी पलट गई, जिससे दर्दनाक सड़क हादसा हो गया. दुर्घटना में प्लाईवुड के नीचे दबने से दो महिलाओं की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो से तीन लोग घायल बताए जा रहे हैं. सूचना मिलते ही ड्यूटी ऑफिसर रामअवतार चौधरी मौके पर पहुंचे और क्रेन की मदद से दबे हुए लोगों को बाहर निकाला गया. घायलों को तुरंत दूदू के उप जिला अस्पताल भेजा गया, जबकि मृतकों के शव मोर्चरी में रखवाए गए हैं. पुलिस मामले की जांच में जुटी है और हादसे के कारणों की पड़ताल की जा रही है.

जांच रिपोर्ट में बड़ा खुलासा: प्रेम बाईसा की मौत का कारण अस्थमा, कोई जहर नहीं

जोधपुर. कथावाचक प्रेम बाईसा की संदिग्ध मौत के मामले में अब बड़ा खुलासा सामने आया है. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार मेडिकल बोर्ड द्वारा किए गए पोस्टमार्टम और एफएसएल की अंतिम रिपोर्ट पुलिस को सौंप दी गई है. इन रिपोर्ट्स में प्रेम बाईसा की मौत का संभावित कारण अस्थमा अटैक बताया गया है. रिपोर्ट के अनुसार सांस रुकना उनकी मौत की मुख्य वजह मानी जा रही है. एफएसएल जांच में जहर या किसी भी प्रकार के विषाक्त पदार्थ की पुष्टि नहीं हुई है, जिससे जहरीला पदार्थ देने की आशंका लगभग खत्म मानी जा रही है. गौरतलब है कि 28 जनवरी को प्रेम बाईसा की आश्रम में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी. 29 जनवरी को उनके पिता ने मर्ग दर्ज कराते हुए पूरे मामले की जांच की मांग की थी. इसके बाद पुलिस ने मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम करवाया, जो महात्मा गांधी अस्पताल में किया गया. पोस्टमार्टम प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता के साथ संपन्न की गई. एफआईआर में मौत को संदिग्ध बताते हुए गहन जांच की मांग की गई थी. इसके बाद पुलिस ने मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम करवाने का निर्णय लिया. महात्मा गांधी अस्पताल में मेडिकल बोर्ड की देखरेख में पूरी पोस्टमार्टम प्रक्रिया संपन्न हुई थी, ताकि मौत के कारणों को लेकर किसी भी तरह का संदेह न रहे. मामले में इंजेक्शन रिएक्शन के एंगल से भी जांच की गई थी. इसी क्रम में एमडीएम अस्पताल के कम्पाउंडर देवी सिंह से एक बार फिर पूछताछ की गई. उन्हें करीब चार घंटे तक एसीपी कार्यालय में बैठाकर सवाल-जवाब किए गए. पुलिस यह सुनिश्चित करना चाहती है कि इलाज के दौरान किसी प्रकार की लापरवाही या गलत दवा का इस्तेमाल तो नहीं हुआ. फिलहाल रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है और पुलिस मामले की गहन जांच में जुटी हुई है. रिपोर्ट में जहर या नशीले पदार्थ के अंश नहीं मिले सूत्रों के मुताबिक, मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट में अस्थमा अटैक के चलते अचानक सांस रुकने को मौत का संभावित कारण बताया गया है. साथ ही, एफएसएल रिपोर्ट में भी किसी प्रकार के जहर या नशीले पदार्थ के अंश नहीं मिलने की पुष्टि हुई है. इससे पहले मामले में इंजेक्शन रिएक्शन के एंगल से भी गहन जांच की गई थी. पुलिस ने इस बिंदु पर भी पड़ताल करते हुए संबंधित मेडिकल स्टाफ और अस्पताल कर्मियों से पूछताछ की थी. एमडीएम अस्पताल के कंपाउंडर से पूछताछ लगातार जारी इसी क्रम में एमडीएम अस्पताल के कंपाउंडर देवी सिंह से भी लगातार पूछताछ की जा रही है. पुलिस सूत्रों के अनुसार, देवी सिंह से एक बार फिर करीब चार घंटे तक एसीपी कार्यालय में पूछताछ की गई. इस दौरान इंजेक्शन देने की प्रक्रिया, इस्तेमाल की गई दवाओं और उस समय मौजूद अन्य स्टाफ के बारे में विस्तार से जानकारी ली गई. पुलिस यह सुनिश्चित करना चाहती है कि कहीं किसी प्रकार की लापरवाही या गलत दवा देने की स्थिति तो नहीं बनी थी. आपराधिक साजिश के नहीं मिले हैं ठोस सबूत पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अब तक की जांच में किसी आपराधिक साजिश या जहरीले पदार्थ के प्रयोग के ठोस सबूत सामने नहीं आए हैं. हालांकि, पूरे मामले की निष्पक्ष और गहन जांच की जा रही है, ताकि सभी पहलुओं को स्पष्ट किया जा सके. मेडिकल और एफएसएल रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी. पुलिस यह भी जांच कर रही है कि प्रेम बाईसा को पहले से अस्थमा की समस्या थी या नहीं और क्या उन्हें नियमित रूप से कोई दवा दी जा रही थी. प्रेम बाईसा की अचानक हुई मौत से उनके अनुयायियों और स्थानीय लोगों में शोक और असमंजस का माहौल है. आश्रम से जुड़े लोग और परिजन अब भी पूरे मामले की सच्चाई सामने आने का इंतजार कर रहे हैं. पुलिस का कहना है कि जांच पूरी पारदर्शिता के साथ की जा रही है और किसी भी तथ्य को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा. आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी.

14 लड़कियों का ‘अश्लील फोटो’ ब्लैकमेल कांड विधानसभा में गूंजा

अजमेर. राजस्थान का चर्चित 'अजमेर ब्लैकमेल कांड' एक बार फिर सुर्ख़ियों में है। दरअसल, विधानसभा के बजट सत्र के बीच गुरुवार को 1992 के अजमेर ब्लैकमेल कांड की पीड़िताओं के मुआवजे का मुद्दा गरमाया रहा। कोटा दक्षिण से भाजपा विधायक संदीप शर्मा ने सरकार से पूछा कि आखिर न्यायालय के आदेश के बावजूद पीड़िताओं के खातों में 'पीड़ित प्रतिकर राशि' क्यों नहीं पहुंची? सरकार की ओर से जो जवाब आया, उसने इस मामले की पेचीदगी और पीड़िताओं के सामाजिक डर को एक बार फिर उजागर कर दिया। 17 में से सिर्फ 2 तक पहुंची मदद विधानसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, माननीय न्यायालय ने 20 अगस्त 2024 को एक ऐतिहासिक आदेश जारी करते हुए इस कांड की 17 पीड़िताओं को प्रत्येक को 7-7 लाख रुपये की मुआवजा राशि देने का निर्देश जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) को दिया था। हैरान करने वाला आंकड़ा: आदेश के महीनों बाद भी अब तक केवल 2 पीड़िताओं को ही कुल 14 लाख रुपये का भुगतान हो पाया है। बाकी का क्या हुआ? शेष 14 पीड़िताओं को मिलने वाली 98 लाख रुपये की राशि अभी भी सरकारी फाइलों में कैद है। एक पीड़िता का निधन हो चुका है। "इच्छा जाहिर नहीं की": सामाजिक डर या प्रशासन की विफलता? सरकार ने सदन में जो तर्क दिया, वह काफी चौंकाने वाला है। उत्तर में बताया गया कि प्रशासन ने पीड़िताओं से संपर्क करने के प्रयास किए, लेकिन कई पीड़िताओं या उनके परिजनों ने मुआवजा राशि प्राप्त करने की 'इच्छा जाहिर नहीं की' है। विशेषज्ञों का मानना है कि 32 साल बीत जाने के बाद कई पीड़िताएं अब अपनी नई पहचान के साथ समाज में रह रही हैं। वे मुआवजा लेने के लिए सामने आकर अपनी पहचान उजागर होने से डर रही हैं। यह 'खामोशी' उस गहरे मानसिक आघात का प्रतीक है जो अजमेर कांड ने इन मासूमों को दिया था। 1992 का वो 'काला अध्याय' जिसने अजमेर को रुला दिया था जो लोग नहीं जानते, उनके लिए बता दें कि 1992 में अजमेर में रसूखदार लोगों के एक गिरोह ने स्कूल और कॉलेज जाने वाली दर्जनों लड़कियों को नशीला पदार्थ खिलाकर या डरा-धमका कर उनके अश्लील फोटो खींचे थे। आरोप था कि इन फोटो के आधार पर लड़कियों का सालों तक यौन शोषण और ब्लैकमेल किया गया। यह आजाद भारत के सबसे बड़े और घिनौने सेक्स स्कैंडल्स में से एक माना जाता है, जिसकी गूँज संसद तक सुनाई दी थी। विधायक संदीप शर्मा की मांग: "घर जाकर दें हक" विधायक संदीप शर्मा ने सरकार के जवाब पर असंतोष जाहिर करते हुए एक मानवीय सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि प्रशासन को केवल औपचारिक पत्राचार नहीं करना चाहिए, बल्कि पीड़िताओं की निजता का ध्यान रखते हुए उनके घर जाकर संपर्क करना चाहिए। शर्मा ने मांग की कि सरकार ऐसी व्यवस्था करे जिससे पीड़िताओं की पहचान गुप्त रहे और उनका हक (7 लाख रुपये की राशि) सीधे उनके खातों में जमा हो जाए। अगले 3 साल तक जारी रहेंगे प्रयास सरकार ने आश्वासन दिया है कि आगामी 3 साल तक शेष पीड़िताओं को मुआवजा दिलाने के निरंतर प्रयास किए जाएंगे। यदि इस अवधि के बाद भी कोई पीड़िता सामने आती है, तो नियमानुसार उसे भुगतान किया जाएगा। वर्तमान में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को निर्देश दिए गए हैं कि वे संवेदनशीलता के साथ इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाएं।