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पानीपत में बुलडोजर एक्शन: अवैध कॉलोनियों पर चला प्रशासन का डंडा, 29 गलियां तोड़ी गईं

पानीपत. नगर निगम की डीटीपी ब्रांच की टीम ने शुक्रवार को शहर में 3 जगहों पर काटी जा रही अवैध कालोनियों में 29 कच्ची व पक्की गलियां और 18 प्लॉट में बनाई जा रही नींव को उखाड़ा। नगर निगम अधिकारियों ने बताया कि संबंधित अवैध कॉलोनियां काटने वालों को नगर निगम अधिनियम 1994 के तहत 3 बार नोटिस जारी किए गए थे। जिसके बाद भी इन अवैध कालोनियों में न तो कोई निर्माण कार्य हुए और न ही कॉलोनियां काटने वालों ने प्लॉट बेचने का काम बंद कराया। कच्ची सड़कों को अब पक्का बनाने का काम भी चल रहा था। जबकि नोटिस के माध्यम से कालोनाइजरों को बोला जा रहा था कि वे निर्माण कार्य बंद करवाकर इस भूमि को कृषि योग्य बनाए। ऐसा नहीं करने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद भी आदेशों की अनुपालना नहीं की गई। अब केस भी दर्ज होंगे हरियाणा नगर निगम अधिनियम 1994 की धारा 350-सी के तहत अवैध कॉलोनी काटने वाले मालिकों व डीलरों पर पुलिस केस दर्ज होंगे। साथ ही उचित कानूनी कार्यवाही करते हुए गिरफ्तार करने के निर्देश जारी किए गए हैं। अब इन अवैध कालोनियों को तोड़ने के लिए जिलाधीश पानीपत द्वारा नियुक्त डयूटी मैजिस्ट्रेट भी लगाया गया। साथ ही जिला नगर योजनाकार जितेंद्र, रिंकू व राजेश के अलावा पुलिस बल भी तैनात किया गया। कॉलोनियों में की गई कार्रवाई पावर हाउस के पास कुटानी रोड के नजदीक काटी जा रही अवैध कॉलोनी में 15 सड़कें व 8 नींव उखाड़ी गई। जगदीश कॉलोनी के सामने वर्मा चौक के पास काटी जा रही अवैध कॉलोनी में 6 गलियां और 3 नींव को उखाड़ा गया। कुटानी रोड पर ही पवन नाम के व्यक्ति द्वारा काटी जा रही अवैध कॉलोनी में 8 नींव और 5 नींव को उखाड़ा गया।

हरियाणा में नहीं थम रही पराली जलाने की घटनाएं, आदेश के बावजूद 7 गुना बढ़े केस

चंडीगढ़. हरियाणा-पंजाब सहित विभिन्न राज्यों में किसानों को फाने (गेहूं के फसल अवशेष) जलाने से रोकने के आदेश 'धुएं' में उड़ने लगे हैं। एक अप्रैल से अब तक पंजाब में 1759, हरियाणा में 1709, दिल्ली में 28, उत्तर प्रदेश में 13 हजार 378 और मध्य प्रदेश में 32 हजार 369 स्थानों पर गेहूं के फसल अवशेष जलाए जा चुके हैं। शुक्रवार को ही पंजाब में 341, हरियाणा में 144, दिल्ली में छह, उत्तर प्रदेश में 70 और मध्य प्रदेश में 158 स्थानों पर फाने जलाने के मामले सामने आए। हरियाणा में वर्ष 2023 के मुकाबले इस बार फसल अवशेष जलाने के मामले सात गुणा बढ़ गए हैं। धान सहित अन्य फसलों की बुआई के लिए खेतों को खाली करने की आपाधापी में किसान फसल अवशेषों को आग लगा रहे हैं। यह स्थिति तब है, जबकि फसल अवशेष जलाने वाले किसानों पर दो एकड़ तक पांच हजार रुपये, पांच एकड़ तक 10 हजार रुपये तथा इससे ज्यादा जमीन पर 30 हजार रुपये तक जुर्माने का प्रविधान है। साथ ही एफआईआर भी दर्ज कराई जा सकती है। प्रदेश सरकार ने अब तक मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर 552 किसानों के रिकॉर्ड में रेड एंट्री दर्ज की है, जिससे यह किसान दो सीजन तक न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर अपनी फसल नहीं बेच सकेंगे। इन्हें सब्सिडी का लाभ भी नहीं मिलेगा और कृषि यंत्रों पर मिलने वाली छूट रोक दी जाएगी। फसल की कटाई के उपरांत बचे हुए अवशेषों में आग लगाना एक गंभीर पर्यावरणीय संकट है, जो मानव स्वास्थ्य के लिए खतरा पैदा कर रहा है। फसल अवशेषों को जलाने से हवा में हानिकारक गैसें फैलती हैं जिससे सांस लेने में तकलीफ, आंखों में जलन और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं होती हैं। मिट्टी में मौजूद पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं। सूक्ष्म जीवों और केंचुओं की संख्या कम हो जाती है जिससे मिट्टी की उर्वरता घटती है।

90 दिन से बकाया चालान पर सख्ती, गुरुग्राम में वाहनों की जब्ती अभियान तेज

गुरुग्राम दिल्ली से सटे गुरुग्राम में वाहन चालकों को बार-बार नियम तोड़ने की आदत ऐसी है कि चालान कटने के बाद भी कोई सुधार नहीं। ट्रैफिक पुलिस की ओर से अब ऐसे वाहन चालकों पर कार्रवाई की जा रही है। 90 दिन से अधिक चालान बकाया वाले वाहन चालकों के खिलाफ अभियान जारी है। उनके वाहन जब्त किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में सेक्टर 4/7 के चौक पर ट्रैफिक पुलिस की टीम ने गुरुवार को एक बाइक को जब्त कर लिया। इस बाइक के 26 चालान बकाया थे। इतना ही नहीं, इस पर एक लाख पांच हजार का जुर्माना बकाया था। पुलिस ने बाइक को किया जब्त सेक्टर 4/7 चौक पर तैनात एएसआई मदनपाल की टीम ने चेकिंग के दौरान एक बाइक चालक को रोका। ट्रैफिक पुलिस ने जांच के दौरान पाया कि वाहन चालक पर 26 चालान बाकी है। बिना पैटर्न नंबर प्लेट, बिना इंश्योरेंस, बिना डीएल आदि के यह चालान हैं। इस बाइक पर एक लाख पांच हजार का जुर्माना भी बकाया था। ट्रैफिक पुलिस ने टीम ने इस बाइक को जब्त कर लिया। एससीपी सत्यपाल यादव ने बताया कि यह ड्राइव जारी रहेगा। इसे लेकर लोगों को जागरुक किया जा रहा है। नियम तोड़ने वाले ई रिक्शा चालकों के खिलाफ यह अभियान जारी रहेगा। 366 ई रिक्शा चालकों पर सख्ती ट्रैफिक नियमों की अनदेखी करने वाले ई रिक्शा चालकों के खिलाफ भी ट्रैफिक पुलिस का अभियान जारी है। अप्रैल में नियम तोड़ने वाले ई रिक्शा चालकों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई। जिलेभर में एक से 29 अप्रैल तक 366 ई रिक्शा चालकों के चालान किए गए। इसके एवज में जुर्माना भी लगाया गया। एसीपी ट्रैफिक सत्यपाल यादव ने बताया कि नियम तोड़ने वाले ई रिक्शा चालकों के खिलाफ यह अभियान जारी रहेगा।  

हुड्डा सरकार पर नियम बदलकर भूखंड आवंटन में गड़बड़ी के गंभीर आरोप

पंचकूला केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने पंचकूला औद्योगिक भूखंड आवंटन मामले में पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा व अन्य आरोपियों के खिलाफ विशेष अदालत में चार्जशीट दायर कर दी है। आरोपों में आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी के साथ-साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं शामिल हैं। इसमें धोखाधड़ी से धन का गबन और स्वयं या दूसरों के लिए आर्थिक लाभ प्राप्त करने का आरोप है। सीबीआई ने आरोप पत्र के साथ हरियाणा सरकार की केस चलाने की मंजूरी को भी चार्जशीट के साथ अदालत में जमा कराया है। इसमें हुड्डा के अलावा हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) के पूर्व उप अधीक्षक बीबी तनेजा का नाम शामिल है। इस मामले में अदालत ने संबंधित लिपिक को दस्तावेजों की जांच कर चार जून को रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। सीबीआई ने यह मामला 19 मई 2016 को दर्ज किया था। चार्जशीट के मुताबिक भूपेंद्र सिंह हुड्डा जब मुख्यमंत्री रहते हुए एचएसवीपी के अध्यक्ष थे तो उन्होंने पंचकूला में 14 औद्योगिक भूखंडों के लिए आवेदन मांगे थे। अपने चहेतों को प्लॉट देने के लिए हुड्डा ने आवेदन की तिथि बीत जाने के बाद नियमों में बदलाव कर दिया। इसमें अनुभव व योग्यता कम कर दी गई और मौखिक परीक्षा के अंक बढ़ा दिए गए। वित्तीय क्षमता के अंक 25 से घटाकर 10 कर दिए गए जबकि वाइवा-वॉइस के अंक 15 से बढ़ाकर 25 कर दिए गए। 14 भूखंडों के लिए 582 आवेदन आए थे। जांच के अनुसार 30.34 करोड़ रुपये के भूखंड 7.85 करोड़ रुपये में आवंटित किए गए। इससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ। सीबीआई ने कोर्ट में यह भी बताया कि डीपीएस नांगल के खिलाफ धारा 197 के तहत तो स्वीकृति मिल चुकी है मगर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 19 के तहत मंजूरी का इंतजार है। मामले की सुनवाई के दौरान सीबीआई की ओर से एक गवाह नरेंद्र कुमार सोलंकी की धारा 164 सीआरपीसी के तहत दर्ज बयान भी सीलबंद लिहाफे में अदालत में पेश किया गया जिसे सुरक्षित रखने के आदेश दिए गए हैं। इन्हें बनाया गया आरोपी पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा : पूर्व मुख्यमंत्री व हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के चेयरमैन धर्मपाल सिंह नांगल : पूर्व आईएएस व हुडा के पूर्व मुख्य प्रशासक सुभाष चंद्र कांसल : हुडा के पूर्व मुख्य वित्तीय नियंत्रक भारत भूषण तनेजा : हुडा के डिप्टी सुपरिटेंडेंट वाईपीटी इंटरटेनमेंट हाउस प्राइवेट लिमिटेड के मालिक रेनू हुड्डा : पूर्व सीएम की करीबी व उनके पैतृक गांव की निवासी अशोक वर्मा : कांग्रेस नेता अशोक काका के दामाद सिद्धार्थ भारद्वाज : कांग्रेस नेता संजीव भारद्वाज के बेटे कंवर प्रीत सिंह संधू : हुड्डा के सहपाठी डीडी संधू के बेटे डॉ. गणेश दत्त रतन : हुड्डा के दोस्त। मोना बेरी : हुड्डा के ओएसडी बलदेव राज बेरी डागर कात्याल : हुड्डा के दोस्त सुनील कात्याल के बेटे प्रदीप कुमार : हुड्डा के निजी सचिव राम सिंह के बेटे मनजोत कौर : हुड्डा की परिचित की बहू चंडीगढ़ साफ्टेक प्राइवेट लिमिटेड के मालिक नंदिता हुड्डा : हुड्डा के पैतृक गांव की निवासी व कांग्रेस नेत्री    

शहरी स्थानीय निकाय विभाग और कर्मचारी संघ में टकराव, सफाई व्यवस्था ठप होने की आशंका

चंडीगढ़ हरियाणा में शहरी स्थानीय निकाय विभाग और कर्मचारी संघ के बीच खींचतान अब बड़े टकराव का रूप ले चुकी है। चंडीगढ़ में निकाय विभाग के उच्च अधिकारियों और कर्मचारी नेताओं के बीच हुई मैराथन वार्ता बेनतीजा रहने के बाद, आज से प्रदेश के करीब 30 हजार निकाय कर्मी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। वार्ता विफल होने के मुख्य कारण हरियाणा सर्व कर्मचारी संघ के राज्य प्रधान और नगर पालिका कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष नरेश शास्त्री के नेतृत्व में 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने शहरी स्थानीय निकाय विभाग के आयुक्त एवं सचिव अशोक मीना के साथ मुलाकात की। वार्ता के दौरान कर्मचारियों ने अपनी मांगों को पुरजोर तरीके से रखा, लेकिन सरकार की ओर से कोई ठोस आश्वासन न मिलने के कारण सहमति नहीं बन सकी। कर्मचारियों की प्रमुख मांगें     पक्का करने की मांग: सीवरेज से संबंधित ठेका कर्मचारियों को नियमित किया जाए।     ठेका प्रथा का अंत: सीवरेज कार्य से जुड़े सभी ठेकों को तुरंत समाप्त किया जाए।     वेतन वृद्धि: सीवरेज कर्मचारियों का न्यूनतम वेतन ₹30,000 निर्धारित हो।     बहाली की मांग: गुरुग्राम के 3,480 कर्मचारियों को वापस नौकरी पर रखा जाए और 26 आंदोलनकारी नेताओं की बर्खास्तगी रद्द हो। प्रशासन की अपील और संघ का रुख बैठक के दौरान विभाग के सचिव अशोक मीना ने प्रदेश में चल रहे विशेष सफाई अभियान का हवाला देते हुए कर्मचारियों से हड़ताल वापस लेने की भावुक अपील की। हालांकि, कर्मचारी नेताओं ने इसे सिरे से नकार दिया। नगर पालिका कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष नरेश शास्त्री ने बताया कि हमें लंबे समय से केवल आश्वासन दिए जा रहे हैं। अब हमारे पास आंदोलन के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है। जब तक मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, हड़ताल जारी रहेगी। आम जनजीवन पर असर की आशंका इस हड़ताल में सफाई कर्मचारी, सीवरेज कर्मी और अन्य निकाय कर्मचारी शामिल हैं, जिसके चलते प्रदेश के शहरों में सफाई व्यवस्था और सीवरेज प्रबंधन पूरी तरह ठप हो सकता है। वार्ता के दौरान निकाय विभाग के अतिरिक्त निदेशक वाईएस गुप्ता और कई दिग्गज कर्मचारी नेता भी मौजूद रहे। टोहाना में सफाई व्यवस्था ठप, 240 कर्मचारी दो दिन की हड़ताल पर नगर परिषद कार्यालय में दमकल कर्मचारियों की 24 दिन से जारी हड़ताल के बीच अब सफाई कर्मचारियों ने भी दो दिवसीय हड़ताल शुरू कर दी है। इसके चलते शहर में डोर-टू-डोर कचरा उठाने का काम पूरी तरह ठप हो गया है। कर्मचारी नेताओं का दावा है कि इस हड़ताल में नगर परिषद के कच्चे, पक्के और डोर-टू-डोर वाले करीब 240 कर्मचारी शामिल हैं। कर्मचारियों ने शुक्रवार को नगर परिषद परिसर में सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और चेतावनी दी कि जब तक मांगें नहीं मानी जातीं, परिवार सहित प्रदर्शन जारी रहेगा।   कर्मचारी नेता रविंद्र व सुरेश कुमार ने बताया कि ड्यूटी के दौरान दमकल कर्मचारी की मौत के बाद भी सरकार ने कोई सुनवाई नहीं की। परिवार को मुआवजा और नौकरी देने की मांग को लेकर दमकल कर्मचारी 24 दिन से धरने पर हैं, लेकिन सरकार का रवैया उदासीन है। इसी के विरोध में सफाई कर्मचारियों ने भी काम बंद कर दिया है। नेताओं ने कहा कि फिलहाल यह हड़ताल दो दिन के लिए है। अगर इसके बाद भी सरकार नहीं जागी तो आंदोलन को अनिश्चितकाल के लिए बढ़ाया जाएगा। हड़ताल के पहले दिन ही शहर की गलियों और बाजारों में कचरे के ढेर लगने शुरू हो गए हैं, जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। नगर परिषद बहादुरगढ़ के सफाई कर्मचारी हड़ताल पर, कामकाज प्रभावित बहादुरगढ़ में नगर परिषद के सभी कच्चे और पक्के सफाई कर्मचारी अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आज हड़ताल पर चले गए। कर्मचारियों ने सुबह से ही काम बंद कर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया, जिसके चलते शहर में सफाई व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित रही। जगह-जगह कूड़े के ढेर लगने से आम लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हड़ताली कर्मचारियों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर प्रशासन को अवगत करा रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। उनकी प्रमुख मांगों में नौकरी की सुरक्षा, वेतन में बढ़ोतरी और ठेका प्रथा को खत्म करना शामिल है। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें जल्द पूरी नहीं की गईं तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे।

एचएसवीपी की 1.67 लाख एकड़ जमीन योजना, गुरुग्राम-फरीदाबाद समेत कई जिलों में सेक्टर विकसित होंगे

गुरुग्राम हरियाणा में नए सेक्टर विकसित करने का पहला चरण शुरू कर दिया है। हरियाणा के 69 शहरों में रिहायशी, व्यावसायिक और संस्थागत सेक्टर विकसित करने के लिए जमीन जुटाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। सरकार की इस पहल को आम लोगों के हित से जोड़ कर देखा जा रहा है, क्योंकि इससे ना सिर्फ आवासीय विकल्प बढ़ेंगे वरन रोजगार, व्यापार और बुनियादी सुविधाओं का भी विस्तार होगा। हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) ने इसके लिए 1 लाख 67 हजार एकड़ जमीन खरीदने की योजना बनाई है। ई-भूमि पोर्टल खोला गया जमीन खरीदने के लिए ई-भूमि पोर्टल भी खोल दिया गया है, जहां किसान और भूमि मालिकों से आवेदन मांगे गए हैं। हरियाणा के शहरी निकाय मंत्री विपुल गोयल ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में नए सेक्टरों का विकास प्लान्ड अर्बन एक्सपेंशन के तहत किया जाएगा। इससे अवैध कालोनियों पर रोक लगेगी, लोगों को रैगुलेटेड और बेसिक सुविधाओं वाले प्लॉट/सेक्टर मिलेंगे। सरकार बड़ी जमीन चिन्हित करके फेज वाइज सैक्टर डिवैल्प करेगी। इंफ्रास्ट्रक्चर, सडक़, सीवर, बिजली के साथ सेक्टर बसाए जाएंगे। गुरुग्राम में खरीदी जाएगी जमीन, फरीदाबाद पर भी प्लान गुरुग्राम में 36 गांवों से 17,358 एकड़ जमीन खरीदी जाएगी, फरीदाबाद के 19 गांवों से 4500 एकड़ और होडल क्षेत्र के 3 गांवों से 1729 एकड़ जमीन ली जाएगी। पंचकूला-अंबाला क्षेत्र में कोट-कैहला के 8 गांवों से 2804 एकड़ जमीन खरीदी जाएगी। इन जिलों में भी खरीदी जाएगी जमीन कुरुक्षेत्र के लाडवा में 3 गांवों से 459 एकड़, करनाल के घरौंडा में 329 एकड़, अंबाला के 24 गांवों में 3668 एकड़, नारायणगढ़ में 7 गांवों से 512 एकड़, फतेहाबाद के पिहोवा में 3 गांवों से 687 एकड़, पानीपत के समालखा में 3 गांवों से 499 एकड़, हांसी (नया जिला) में 5 गांवों से 1495 एकड़, जींद के नरवाना में 2172 एकड़, पिंजौर-कालका के चंडी मंदिर क्षेत्र में 3914 एकड़ जमीन खरीदी जाएगी। पहले चरण में 13 शहरों में कटेंगे सेक्टर पहले चरण में 13 शहरों में करीब 40 हजार एकड़ जमीन खरीदी जाएगी, जिसके लिए 104 गांवों के किसान शामिल होंगे। इनमें पहले चरण में गुरुग्राम, फरीदाबाद, पंचकूला, हिसार, पानीपत, सिरसा और यमुनानगर जैसे शहरों में सेक्टर विकसित किए जाएंगे। हिसार, पानीपत, सिरसा और यमुनानगर समेत कई जिलों में जमीन की नीलामी की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस नीलामी में बिचौलियों की कोई भूमिका नहीं होगी, जिससे प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहेगी और किसानों को सीधा लाभ मिलेगा। एक ही जगह मिलेंगी जरूरी सुविधाएं नए सेक्टरों के विकास से अनियोजित कालोनियों पर अंकुश लगेगा। साथ ही, नए व्यावसायिक क्षेत्रों में एक ही स्थान पर खुदरा बाजार, कार्यालय, सेवाएं, स्कूल, अस्पताल और सरकारी इमारतें जैसी सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएंगी। इससे लोगों को बेहतर शहरी जीवन मिलेगा और शहरों का संतुलित विकास होगा। इन सेक्टरों में बिल्डिंग कोड में बदलाव के तहत, नए आवासीय और व्यावसायिक क्षेत्रों में इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग प्वाइंट अनिवार्य होंगे। बेहतर कनेक्टिविटी और औद्योगिक सुविधाएं होंगी इसके अलावा बिजली, सीवरेज, पानी की आधुनिक व्यवस्था और स्मार्ट सड़कों का प्रावधान होगा। सैक्टरों में रहने के लिए आधुनिक आवासीय प्लॉट के साथ-साथ व्यावसायिक (कमर्शियल) और औद्योगिक इकाइयां भी विकसित की जाएंगी। औद्योगिक मॉडल टाऊनशिप (आईएमटी) को बढ़ावा देने के लिए बेहतर कनेक्टिविटी और औद्योगिक सुविधाएं होंगी। सेक्टरों को पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए पार्क और हरित क्षेत्र विकसित किए जाएंगे।

पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता से हरियाणा में बारिश और तेज आंधी की संभावना

चंडीगढ़ हरियाणा में अप्रैल के जाते-जाते मौसम के मिजाज में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता के कारण प्रदेश के कई हिस्सों में बादल छाए हुए हैं और तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। मौसम विभाग ने आज, गुरुवार (30 अप्रैल) को प्रदेश के 6 जिलों में भारी बारिश और तेज आंधी का येलो अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग की चेतावनी मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, आज पंचकूला, अंबाला, यमुनानगर, करनाल, सोनीपत और पानीपत में धूल भरी आंधी चलने और गरज-चमक के साथ बारिश होने की पूरी संभावना है। इसके साथ ही गुरुग्राम, नूंह, पलवल और फरीदाबाद जैसे जिलों में भी हल्की से मध्यम बूंदाबांदी हो सकती है। भिवानी सबसे गर्म, सोनीपत में ठंडक पिछले 24 घंटों के दौरान प्रदेश के न्यूनतम तापमान में औसतन 1.2°C की बढ़ोतरी देखी गई है।     सबसे कम तापमान: सोनीपत में 20.2°C दर्ज किया गया।     सबसे अधिक तापमान: भिवानी में न्यूनतम तापमान 28°C रहा, जो प्रदेश में सबसे ज्यादा है।     अधिकतम तापमान: नूंह (बोपानी) में पारा 38.7°C तक पहुँचा, जबकि नारनौल में 36.5°C और हिसार में 38.6°C रिकॉर्ड किया गया। 2 मई से फिर बदलेगा मौसम राहत की बात यह है कि भीषण गर्मी से फिलहाल कुछ दिन और निजात मिलेगी। मौसम विभाग का अनुमान है कि 2 से 5 मई के बीच एक और पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होगा। इसके प्रभाव से 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं और प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में दोबारा बारिश और ओलावृष्टि की संभावना बन रही है। मौसम विभाग ने की एडवाइजरी मौसम में अचानक आए इस बदलाव और तेज हवाओं को देखते हुए विशेषज्ञों ने सतर्क रहने की सलाह दी है:     किसान भाई: कटी हुई फसलों और अनाज को सुरक्षित स्थानों पर ढक कर रखें।     आम नागरिक: आंधी के दौरान पेड़ों और बिजली के खंभों के नीचे शरण न लें।     वाहन चालक: धूल भरी आंधी के दौरान दृश्यता कम होने पर सावधानी से वाहन चलाएं।

जनगणना अभियान शुरू: हरियाणा में सिरसा-करनाल ने मारी बाजी, नूंह पिछड़ा

चंडीगढ़. हरियाणा में 77 लाख से अधिक परिवार हैं, पर अभी तक मात्र दो लाख 46 हजार परिवारों ने ही स्वगणना कराई है। गुरुवार को स्वगणना का अंतिम दिन है, शुक्रवार से वास्तविक मकान सूचीकरण और जनगणना कार्य शुरू हो जाएगा। स्वगणना में सिरसा और करनाल सबसे आगे हैं, जबकि नूंह पिछड़ा हुआ है। जनगणना निदेशक ललित जैन ने प्रदेश के लोगों से कहा है कि वे अंतिम दिन अधिक से अधिक स्वगणना के लिए आगे आएं। जनगणना निदेशालय हरियाणा के निदेशक डा. ललित जैन के अनुसार स्वगणना बहुत ही सरल प्रक्रिया है और पोर्टल se.census.gov.in पर जाकर इसे पांच-सात मिनट में पूरा किया जा सकता है। इसके बाद जनगणना करने वाले (एन्यूमरेटर) के साथ केवल वह जारी किया गया आइडी नंबर साझा करना होगा। पूरे राज्य में एक मई से वास्तविक मकान सूचीकरण और जनगणना कार्य शुरू होंगे। उन्होंने आमजन से अपील की कि वे सभी एन्यूमरेटर और सुपरवाइजर को पूरा सहयोग दें और उन्हें सही, सटीक तथा अद्यतन जानकारी प्रदान करें। इस जानकारी को पूरी तरह से गोपनीय रखा जाएगा और किसी भी व्यक्ति या संस्था के साथ साझा नहीं किया जाएगा। आवश्यक जानकारी देने से इन्कार है दंडनीय अपराध जनगणना निदेशक ने चेतावनी दी कि जनगणना अधिकारियों को जरूरी जानकारी देने से इन्कार करना या उनके साथ असहयोग करना जनगणना अधिनियम के तहत दंडनीय अपराध है। यदि किसी एन्यूमरेटर, सुपरवाइजर या नागरिक को किसी भी प्रकार की कठिनाई का सामना करना पड़ता है तो वे अपने संबंधित सुपरवाइजर से संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा जनगणना विभाग का हेल्पलाइन नंबर 1855 भी उपलब्ध कराया गया है, जिस पर कोई भी नागरिक, गणनाकार या पर्यवेक्षक अपनी समस्याओं की रिपोर्ट कर सकता है। प्रत्येक शिकायत या समस्या पर उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। जिला     स्वगणना कराने वाले परिवार सिरसा     22,845 करनाल     22,836 जींद     19,486 फतेहाबाद     14,602 सोनीपत     12,780 महेंद्रगढ़     12,674 गुरुग्राम     12,607 हिसार     11,927 रोहतक     11,366 यमुनानगर     11,348 पंचकूला     10,910 झज्जर     10,560 रेवाड़ी     10,494 फरीदाबाद     9,623 चरखी दादरी     9,586 भिवानी     8,307 हांसी     7,963 कैथल     6,341 कुरुक्षेत्र     4,912 अंबाला     4,846 पानीपत     4,841 पलवल     3,134 नूंह     1,897

निवेशकों के लिए बड़ी पहल: Haryana Government का ओम्निबस बिल, खत्म करेगा नियमों का मकड़जाल

चंडीगढ़. हरियाणा सरकार ने निवेश के मामले में प्रदेश को अग्रणी गंतव्य बनाने के मकसद से प्रशासनिक सुधारों की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए विनियमन में ढील (डी-रेगुलेशन) देने का अभियान शुरू किया है। इसी कड़ी में प्रस्तावित सर्वग्राही विधेयक (ओम्निबस बिल) के माध्यम से राज्य सरकार द्वारा सुधारों को संस्थागत रूप देने की तैयारी है। कैबिनेट सचिवालय के विशेष सचिव श्री के.के. पाठक और हरियाणा के मुख्य सचिव श्री अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में यहां हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में अनुपालन में कमी और डी-रेगुलेशन फेज-2 के अन्तर्गत हुए सुधारों की समीक्षा की गई। ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ के लिए प्रस्तावित हरियाणा ओम्निबस बिल विभिन्न नियामकीय बदलावों को एकीकृत विधायी ढांचे में समाहित करेगा। इससे विभागों में एकरूपता सुनिश्चित होगी और लालफीताशाही को कम करने तथा शासन को सरल बनाने वाले सुधारों को दीर्घकालिक कानूनी आधार मिलेगा। वरिष्ठ प्रशासनिक सचिवों ने प्रगति की समीक्षा की बैठक में वरिष्ठ प्रशासनिक सचिवों और विभागाध्यक्षों ने 28 प्राथमिकता वाले सुधार क्षेत्रों में हुई प्रगति की समीक्षा की। इन सुधारों का उद्देश्य अनुपालन बोझ को कम करना, स्वीकृति प्रक्रियाओं में तेजी लाना तथा व्यवसायों, संस्थानों और नागरिकों के लिए एक सुगम पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करना है। अधिकांश सुधार प्रस्ताव प्रस्तुत किए जा चुके हैं और कई लागू होने की प्रक्रिया में हैं, जो राज्य के सुधार एजेंडे में तेजी को दर्शाता है। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने सभी विभागों को लंबित प्रस्तावों को शीघ्र पूरा करने, एमआईएस पोर्टल पर कार्ययोजनाएं तुरंत अपलोड करने और यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि सुधारों का जमीनी स्तर पर स्पष्ट और मापनीय प्रभाव दिखाई दे। उन्होंने कहा कि इन सुधारों की सफलता जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन और विभागों के बीच बेहतर समन्वय पर निर्भर करेगी। सुधारों के प्रमुख क्षेत्रों में भूमि और निर्माण नियमों का सरलीकरण शामिल है। अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश के लगभग 70 प्रतिशत क्षेत्र में ‘चेंज ऑफ लैंड यूज’ (सीएलयू) की आवश्यकता नहीं है, जिससे निवेशकों और भूमि मालिकों को बड़ी राहत मिली है। सीएलयू स्वीकृतियों को स्वचालित बनाने की दिशा में कार्य शेष नियंत्रित क्षेत्रों में भी सीएलयू स्वीकृतियों को स्वचालित बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। यह प्रणाली औद्योगिक क्षेत्रों में पहले से लागू है और मार्च 2027 तक इसका अन्य श्रेणियों में भी विस्तार करने की योजना है। मांग आधारित भूमि उपयोग प्रणाली में गतिविधियों की अनुमति होगी जब तक कि वे विशेष रूप से प्रतिबंधित न हों। इससे नियामकीय बाधाओं में और कमी आएगी। निर्माण क्षेत्र में कब्जा प्रमाण पत्र के लिए आवश्यक अनुमोदनों को सरल बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। कई अनावश्यक एनओसी को हटाने का प्रस्ताव है, जिससे समय और लागत में उल्लेखनीय कमी आएगी। हरियाणा उद्यम प्रोत्साहन केन्द्र को एक सशक्त सिंगल-विंडो प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित किया जा रहा है। इससे सभी व्यावसायिक स्वीकृतियों के लिए एकीकृत प्रणाली उपलब्ध होगी। यह प्लेटफॉर्म विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर तेज निर्णय प्रक्रिया सुनिश्चित करेगा। लगभग 30 दिनों में स्वीकृति देने के लक्ष्य के साथ ‘सर्विस लेवल एग्रीमेंट’ लागू किए जा रहे हैं। साथ ही, पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए डिजिटल डैशबोर्ड भी विकसित किया जा रहा है, जिससे स्वीकृति की समय-सीमा की निगरानी की जा सकेगी। राज्य सरकार के इस सुधार एजेंडे में क्या? सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) राज्य सरकार के इस सुधार एजेंडे के केंद्र में हैं। नए सुधारों के तहत औद्योगिक प्लॉट के उप-विभाजन, पूर्व स्वीकृति के बिना व्यवसायिक गतिविधियों में बदलाव, संपत्तियों के हस्तांतरण या सब-लीज की प्रक्रिया को सरल बनाया जा रहा है। प्रस्तावित ‘हरियाणा राइट टू बिजनेस एक्ट’ के तहत उद्यमों को स्व-घोषणा के आधार पर कार्य शुरू करने की अनुमति होगी और शुरुआती चरण में निरीक्षणों में भी कमी की जाएगी। इंफ्रास्ट्रक्चर को सुदृढ़ करने के लिए 500 करोड़ रुपये का ‘सक्षम’ फंड प्रस्तावित है, जिससे पुराने औद्योगिक क्षेत्रों का उन्नयन किया जाएगा। इसके अलावा, अपशिष्ट उपचार और अग्नि सुरक्षा जैसी साझा सुविधाओं के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल पर भी कार्य किया जा रहा है। हरियाणा अब पारंपरिक और जटिल प्रावधानों के स्थान पर वैश्विक मानकों के अनुरूप जोखिम-आधारित आधुनिक अग्नि सुरक्षा नियम लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। औद्योगिक क्षेत्रों में साझा अग्नि सुरक्षा ढांचा विकसित करने से लागत कम होगी और सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी। अनावश्यक लाइसेंस समाप्त करने में भी उल्लेखनीय प्रगति राज्य ने अनावश्यक लाइसेंस समाप्त करने में भी उल्लेखनीय प्रगति की है। नगर निगम कानूनों से ट्रेड लाइसेंस पहले ही हटाए जा चुके हैं और प्रस्तावित ओम्निबस बिल के तहत अन्य लाइसेंसों को भी सरल बनाने की योजना है, जिससे विनियामक ढांचे में दोहराव खत्म होगा। बैठक में लोक निर्माण (भवन एवं सड़कें) विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव ए.के. सिंह, उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के आयुक्त एवं सचिव डाॅ. अमित कुमार अग्रवाल, अग्निशमन सेवाएं विभाग के महानिदेशक शेखर विद्यार्थी, हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष जे. गणेशन तथा उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के महानिदेशक यश गर्ग सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

हरियाणा: पुलिस परिवारों के लिए शगुन योजना लागू, शादी खर्च में मिल रही मदद

चंडीगढ़ हरियाणा पुलिस द्वारा पुलिस परिवारों के सशक्तिकरण के लिए शुरू की गई शगुन योजना 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी रूप से लागू हो चुकी है। इस पहल के तहत अप्रैल माह में अब तक 18 पुलिसकर्मियों को उनके बच्चों की शादी के लिए 2.5-2.5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की गई है। इसके अलावा 12 नए आवेदन वर्तमान में प्रक्रियाधीन हैं। डीजीपी अजय सिंघल ने कहा कि यह योजना विशेष रूप से पुलिसकर्मियों के बच्चों, खासकर बेटियों के विवाह के दौरान आर्थिक सहयोग देने के उद्देश्य से शुरू की गई है, ताकि पुलिसकर्मी बिना वित्तीय दबाव के अपने पारिवारिक दायित्व निभा सकें। योजना से लाभान्वित एसआई कमल चंद ने बताया कि बेटी की शादी जैसे भावनात्मक अवसर पर आर्थिक प्रबंधन चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन शगुन योजना से मिली सहायता उनके परिवार के लिए बड़ी राहत बनी है। अनुभव साझा करते हुए लाभार्थियों की प्रतिक्रिया एसआई कमल चंद ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि बेटी के विवाह जैसे महत्वपूर्ण और भावनात्मक अवसर पर आर्थिक प्रबंधन करना कई बार चुनौतीपूर्ण हो जाता है, ऐसे में शगुन योजना के तहत मिली सहायता हमारे लिए बड़ी राहत साबित हुई है। इसी प्रकार, एक अन्य लाभार्थी सुरेंद्र कुमार ने कहा कि इस योजना ने हमें आत्मसम्मान के साथ अपने सामाजिक दायित्व निभाने की शक्ति दी है। यह केवल आर्थिक सहयोग नहीं, बल्कि विभाग की ओर से हमारे प्रति विश्वास और सम्मान का प्रतीक है। कुछ कर्मियों ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने जिस संवेदनशीलता के साथ हमारे परिवारों की जरूरतों को समझा है, वह सराहनीय है। इससे हमें यह भरोसा मिलता है कि विभाग हर परिस्थिति में हमारे साथ खड़ा है।