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सिंधु और कावेरी जैसी 10 पवित्र नदियों के नाम पर बसेगी टाउनशिप

सांस्कृतिक पुनरुद्धार से होगा ग्रेटर आगरा का नवनिर्माण सिंधु और कावेरी जैसी 10 पवित्र नदियों के नाम पर बसेगी टाउनशिप नोएडा और गुरुग्राम जैसे शहरों पर बढ़ते दबाव को कम करेगा ग्रेटर आगरा वर्ल्ड क्लास इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी से ताज नगरी की बदलेगी पहचान, ग्रेटर आगरा बनेगा नया ग्रोथ इंजन 10 टाउनशिप में 1.5 लाख लोगों के लिए होंगी आधुनिक आवासीय सुविधाएं सांस्कृतिक विरासत के साथ होगा आधुनिकता का संगम लखनऊ/आगरा पर्यटन नगरी आगरा अब केवल अपने ऐतिहासिक स्मारकों के लिए ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पुनरुद्धार और आधुनिक शहरी विकास के संगम के रूप में नई पहचान बनाने जा रहा है। ग्रेटर नोएडा की तर्ज पर विकसित हो रहे ‘ग्रेटर आगरा’ में सांस्कृतिक पुनरुद्धार के जरिए नवनिर्माण की अनूठी अवधारणा को केंद्र में रखा गया है, जहां सिंधु से लेकर कावेरी तक 10 पवित्र नदियों के नाम पर टाउनशिप बसाई जाएंगी। सबसे खास बात ये है कि नोएडा और गुरुग्राम जैसे शहरों पर बढ़ते दबाव को कम करने में भी ग्रेटर आगरा महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह परियोजना संतुलित क्षेत्रीय विकास के विजन के अनुरूप एक नए शहरी केंद्र के रूप में उभरेगी। मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण / नये शहर प्रोत्साहन योजना के तहत आगरा विकास प्राधिकरण द्वारा ग्राम रायपुर और रहनकलां में लगभग 450 हेक्टेयर क्षेत्र में यह महत्वाकांक्षी परियोजना विकसित की जा रही है। करीब 5142 करोड़ रुपए की लागत वाली यह योजना आगरा को एक आधुनिक, योजनाबद्ध और बहुआयामी शहर के रूप में स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है। भारतीय संस्कृति को सम्मान देने वाली पहलः जयवीर पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि ग्रेटर आगरा की सबसे बड़ी खासियत इसका सांस्कृतिक दृष्टिकोण है। यहां विकसित की जा रही 10 टाउनशिप सिंधुपुरम, गोमतीपुरम, गंगापुरम, यमुनापुरम, बेतवापुरम, महानदीपुरम, नर्मदापुरम, गोदावरीपुरम, कृष्णापुरम और कावेरीपुरम भारतीय सभ्यता की पवित्र नदियों के नाम पर बसाई जा रहीं हैं। यह पहल न केवल भारतीय संस्कृति को सम्मान देती है, बल्कि शहर के विकास को एक नई पहचान भी प्रदान करती है। आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित होगा नया शहर इन टाउनशिप में लगभग 1.5 लाख लोगों के लिए आधुनिक आवासीय सुविधाएं विकसित की जा रहीं हैं। कुल 4712 भूखंडों में आवासीय, ग्रुप हाउसिंग, कमर्शियल और मिश्रित उपयोग के प्लॉट शामिल हैं। यहां स्कूल, अस्पताल, कम्युनिटी सेंटर, होटल, बैंक, डाकघर, पुलिस चौकी और फायर स्टेशन जैसी सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध होंगी, जिससे यह क्षेत्र पूरी तरह आत्मनिर्भर बन सके। परियोजना के तहत आधुनिक सड़क नेटवर्क, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, वाटर ट्रीटमेंट प्लांट, इलेक्ट्रिक सब-स्टेशन और सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम विकसित किए जाएंगे, जिससे यह क्षेत्र एक स्मार्ट और सस्टेनेबल शहरी मॉडल के रूप में उभरेगा।  बेहतर कनेक्टिविटी बनेगी विकास की रीढ़ ग्रेटर आगरा योजना की लोकेशन इसे और भी खास बनाती है। यह परियोजना 100 मीटर चौड़ी इनर रिंग रोड के पास स्थित है और नेशनल हाईवे-19, फतेहाबाद रोड तथा यमुना एक्सप्रेसवे से जुड़ी हुई है। साथ ही, यमुना नदी की निकटता और कुबेरपुर रेलवे स्टेशन की आसान पहुंच इसे आवागमन और व्यापार के लिए बेहद उपयुक्त बनाती है।  ग्रीन और सस्टेनेबल विकास पर जोर हर टाउनशिप में कम से कम 15 प्रतिशत क्षेत्र ग्रीन स्पेस के लिए आरक्षित रखा गया है। पार्क, ओपन स्पेस और स्पोर्ट्स सुविधाओं के साथ यह योजना पर्यावरण संतुलन और बेहतर जीवन गुणवत्ता सुनिश्चित करेगी।  कमर्शियल और पर्यटन का नया केंद्र योजना के तहत यमुनापुरम को कमर्शियल हब के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। वहीं कावेरीपुरम को वाटर-बेस्ड एक्टिविटी और मनोरंजन के लिए तैयार किया जाएगा, जिससे पर्यटन को नई दिशा मिलेगी। रोजगार और निवेश का बड़ा केंद्र बनेगा ग्रेटर आगरा पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि ग्रेटर आगरा केवल एक आवासीय परियोजना नहीं, बल्कि रोजगार और निवेश का बड़ा केंद्र बनने जा रहा है। निर्माण कार्य से लेकर उद्योग और सेवा क्षेत्र तक लाखों लोगों को रोजगार के अवसर सृजित होंगे। साथ ही, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी के कारण बड़ी-बड़ी कंपनियां यहां निवेश के लिए आकर्षित होंगी, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। देश के लिए आदर्श शहरी विकास का बनेगा मॉडल ग्रेटर आगरा योजना केवल इंफ्रास्ट्रक्चर विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सांस्कृतिक पुनरुद्धार और आधुनिक विकास का एक ऐसा मॉडल है, जो आगरा को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाएगा। आने वाले समय में यह परियोजना न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे देश के लिए एक आदर्श शहरी विकास मॉडल साबित हो सकती है।

वीडियो वायरल: कान में ईयरफोन और मोबाइल पकड़े छात्र से मैडम बोलीं- पंखा करो

 रीवा मध्य प्रदेश के रीवा से शिक्षा व्यवस्था को शर्मसार करने वाला एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है. जहां एक सरकारी स्कूल में महिला हेडमास्टर खुद कुर्सी पर बैठकर आराम करती नजर आईं, जबकि एक छात्र उनसे पंखा झलवाता दिखा. इतना ही नहीं, हेडमास्टर के कान में ईयरफोन भी लगा हुआ था. इस पूरी घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।  शिक्षा व्यवस्था को कटघरे में खड़ा करने वाला यह मामला रीवा जिले के त्योंथर विधानसभा क्षेत्र के शासकीय माध्यमिक शाला पनासी का बताया जा रहा है. जहां स्कूल की महिला हेडमास्टर वर्षा मांझी एक छात्र से पंखा झलवाती नजर आईं।  वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि हेडमास्टर कुर्सी पर आराम से बैठी हुई हैं, उनके कान में ईयरफोन लगा हुआ है, जबकि एक छात्र हाथ में पंखा लेकर उन्हें हवा कर रहा है. यह दृश्य न सिर्फ हैरान करने वाला है, बल्कि शिक्षा के मंदिर कहे जाने वाले स्कूलों की स्थिति पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है।  स्थानीय लोगों का कहना है कि यह घटना शिक्षा व्यवस्था की सच्चाई को उजागर करती है. सरकारी स्कूलों में पढ़ाई की गुणवत्ता पहले से ही सवालों के घेरे में है और अब इस तरह के वीडियो सामने आने के बाद व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।  हालांकि वीडियो वायरल होने के बाद शिक्षा विभाग ने मामले को संज्ञान में लिया है और जांच के निर्देश दिए गए हैं. अधिकारियों का कहना है कि जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। 

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अम्बिकापुर में भटगांव विधानसभा के पूर्व विधायक पंडित रविशंकर त्रिपाठी की प्रतिमा का किया अनावरण

रायपुर   मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सरगुजा जिला प्रवास के दौरान अम्बिकापुर में पीडब्ल्यूडी ऑफिस के पास पंडित रविशंकर त्रिपाठी चौक में भटगांव विधानसभा के पूर्व विधायक पंडित रविशंकर त्रिपाठी की पुण्यतिथि पर उनकी प्रतिमा का अनावरण कर श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर कहा कि पंडित रविशंकर त्रिपाठी जी का जीवन जनसेवा, समर्पण और संगठन के प्रति निष्ठा का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने कहा कि यह प्रतिमा केवल एक स्मारक नहीं, बल्कि उनके विचारों और कर्मठता की जीवंत प्रेरणा है, जो आने वाली पीढ़ियों को समाज और राष्ट्र के लिए कार्य करने की दिशा दिखाती रहेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे व्यक्तित्वों का योगदान हमें यह सिखाता है कि जनसेवा ही सच्चा राष्ट्रधर्म है और इसी मार्ग पर चलकर हम एक सशक्त और समृद्ध छत्तीसगढ़ का निर्माण कर सकते हैं। इस दौरान कृषि मंत्री रामविचार नेताम, पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल सहित अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

डिप्टी सीएम अरुण साव की मंजूरी के बाद लखनपुर में दो स्टॉप-डैम निर्माण को हरी झंडी

रायपुर छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण और स्थानीय विकास को गति देने के उद्देश्य से नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने सरगुजा जिले के लखनपुर नगर पंचायत में दो स्टॉप-डैम निर्माण के लिए कुल 33 लाख 26 हजार रुपए की स्वीकृति प्रदान की है। यह निर्णय उप मुख्यमंत्री एवं नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव के अनुमोदन के बाद लिया गया, जिसके पश्चात विभागीय संचालनालय ने आधिकारिक आदेश जारी कर दिए हैं। स्वीकृत योजना के तहत ढोढ़ी घाट में स्टॉप-डैम निर्माण के लिए 17 लाख 86 हजार रुपए और चिलरा घाट में 15 लाख 40 हजार रुपए की राशि मंजूर की गई है। इन परियोजनाओं का मुख्य उद्देश्य वर्षा जल का संरक्षण, भूजल स्तर में वृद्धि और स्थानीय किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराना है। उप मुख्यमंत्री श्री साव ने संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि निर्माण कार्य निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण किया जाए और गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता न हो। इन स्टॉप-डैम्स के निर्माण से क्षेत्र में जल संकट की समस्या कम होने के साथ-साथ कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।

निजी स्कूलों की मनमानी बर्दाश्त नहीं की जाएगी: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

निजी स्कूलों की मनमानी बर्दाश्त नहीं की जाएगी: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय रायपुर   मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने निजी स्कूलों द्वारा की जा रही मनमानी के संबंध में पूछे गए प्रश्न के उत्तर में कहा कि प्रदेश में ऐसी किसी भी प्रवृत्ति को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अभिभावक निश्चिंत रहें, प्रदेश में निजी स्कूलों की मनमानी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि शिकायत प्राप्त होने पर और स्कूल द्वारा नियमों का उल्लंघन किए जाने पर संबंधित संस्थान के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। मुख्यमंत्री साय ने स्पष्ट किया कि अभिभावकों पर किसी भी प्रकार का अनावश्यक दबाव या आर्थिक बोझ स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस विषय पर नजर बनाए हुए है और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता व संतुलन सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

पुलिस आरक्षक भर्ती परीक्षा का अंतिम परिणाम घोषित, 7500 पदों के लिए चयन प्रक्रिया पूर्ण

भोपाल.  मध्यप्रदेश पुलिस में आरक्षक पदों पर भर्ती के लिए आयोजित परीक्षा का अंतिम परिणाम घोषित कर दिया गया है। यह भर्ती प्रक्रिया मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल द्वारा संपन्न कराई गई, जिसके अंतर्गत 7500 पदों के लिए अगस्त 2025 में विज्ञापन जारी किया गया था। उक्त भर्ती के लिए प्रदेशभर से 9 लाख से अधिक अभ्यर्थियों द्वारा आवेदन प्रस्तुत किए गए थे, जो युवाओं में पुलिस सेवा के प्रति बढ़ते आकर्षण को दर्शाता है। लिखित परीक्षा का आयोजन मध्यप्रदेश के विभिन्न शहरों में लगभग एक माह तक किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने भाग लिया। लिखित परीक्षा के उपरांत शारीरिक दक्षता परीक्षा हेतु कुल 57,990 अभ्यर्थियों को आमंत्रित किया गया। यह परीक्षा 23 फरवरी से 14 मार्च 2026 तक प्रदेश के 10 निर्धारित केंद्रों पर आयोजित की गई, जिसमें लगभग 44,483 अभ्यर्थी सम्मिलित हुए। पूरी चयन प्रक्रिया को पारदर्शिता एवं निष्पक्षता के साथ संपन्न कराया गया। सभी चरणों के सफलतापूर्वक पूर्ण होने के पश्चात आज अंतिम परिणाम घोषित कर दिया गया है, जिसे कर्मचारी चयन मंडल की आधिकारिक वेबसाइट पर देखा जा सकता है। घोषित परिणाम के अनुसार कुल 6,525 अभ्यर्थियों को उत्तीर्ण घोषित किया गया है, जिनमें से 5,916 अभ्यर्थियों का चयन जिला पुलिस बल के लिए तथा 609 अभ्यर्थियों का चयन विशेष सशस्त्र बल के लिए किया गया है। 

पंजीयन कार्यालयों का नया टाइम टेबल लागू, शाम 4 बजे के बाद ही होगी विशेष रजिस्ट्री

रायपुर पंजीयन कार्यालयों में दस्तावेजों के पंजीयन को लेकर लंबे समय से चल रही अव्यवस्था और समय को लेकर शिकायतों के बीच अब बड़ा फैसला लिया गया है। महानिरीक्षक पंजीयन के निर्देश पर पूरे प्रदेश में ऑनलाइन अपॉइंटमेंट की समय-सीमा तय कर दी गई है। इसके तहत अब नियमित अपॉइंटमेंट शाम चार बजे तक ही मिलेंगे। जबकि चार से पांच बजे के बीच केवल विशेष अपॉइंटमेंट ही लिए जाएंगे। इस बदलाव से जहां कार्यप्रणाली में अनुशासन आने की उम्मीद है, वहीं आम लोगों को भी समय पर सेवा मिलने का रास्ता साफ होगा। वहीं शाम चार से पांच बजे के बीच केवल विशेष अपॉइंटमेंट छत्तीसगढ़ पंजीयन एवं मुद्रांक कार्यपालिक अधिकारी/कर्मचारी कल्याण संघ, रायपुर द्वारा तीन फरवरी को भेजे गए पत्र के बाद शासन ने यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। बता दें कि सुबह 10 से शाम चार बजे तक ही नियमित अपॉइंटमेंट दिए जाएंगे। वहीं शाम चार से पांच बजे के बीच केवल विशेष परिस्थितियों में स्पेशल अपॉइंटमेंट ही उपलब्ध होंगे। इस संबंध में NGDRS (National Generic Document Registration System) प्रणाली संचालित करने वाली एनआइसी को तत्काल तकनीकी बदलाव करने के निर्देश दिए गए हैं। लोगों को क्या होगा फायदा नई व्यवस्था से अब अपॉइंटमेंट और वास्तविक काम के समय में टकराव नहीं होगा। इससे पंजीयन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और समयबद्ध बनेगी। साथ ही स्पेशल अपॉइंटमेंट को अलग स्लॉट मिलने से आपात या विशेष मामलों का तेजी से निपटारा भी संभव होगा। बता दें कि लंबे समय से पंजीयन कार्यालयों में अपॉइंटमेंट के समय और कार्यालयीन समय के बीच तालमेल नहीं होने की शिकायतें सामने आ रही थीं। कई बार ऐसा होता था कि अपॉइंटमेंट समय कार्यालय बंद होने के करीब या बाद का होता था, जिससे आम नागरिकों को परेशानी उठानी पड़ती थी। पहले यह थी समस्या अब तक अपॉइंटमेंट सिस्टम में समय-सीमा स्पष्ट नहीं थी, जिससे कई बार अंतिम समय में भी बुकिंग हो जाती थी और काम पूरा नहीं हो पाता था। इससे न केवल आवेदकों को परेशानी होती थी, बल्कि कर्मचारियों पर भी अनावश्यक दबाव बनता था। नई समय-सीमा का कड़ाई से पालन किया जाएगा। सभी जिलों के कलेक्टर, जिला पंजीयक और उप पंजीयकों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं। अब देखने वाली बात यह होगी कि यह व्यवस्था जमीनी स्तर पर कितनी प्रभावी साबित होती है।   

मंत्रालय महानदी भवन में 15 अप्रैल को मंत्रिपरिषद की बैठक, कई मुद्दों पर होगी चर्चा

रायपुर  रायपुर में 15 अप्रैल 2026 को राज्य शासन की एक महत्वपूर्ण मंत्रिपरिषद बैठक आयोजित की जाएगी। यह बैठक मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में पूर्वान्ह 11:30 बजे से शुरू होगी। बैठक का आयोजन मंत्रालय महानदी भवन स्थित मंत्रिपरिषद कक्ष एम-5/20 में किया जाएगा, जहां प्रदेश के विभिन्न विभागों से जुड़े अहम प्रस्तावों और नीतिगत निर्णयों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। इस बैठक को लेकर प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां तेज कर दी गई हैं। माना जा रहा है कि इसमें विकास योजनाओं, बजट आवंटन, बुनियादी ढांचे के विस्तार, शिक्षा और रोजगार से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले लिए जा सकते हैं। इसके अलावा राज्य में चल रही विभिन्न योजनाओं की समीक्षा भी एजेंडा का हिस्सा हो सकती है। मुख्यमंत्री की अगुवाई में होने वाली इस बैठक से प्रदेश की नीतिगत दिशा तय होने की उम्मीद है। अधिकारियों और मंत्रियों के बीच समन्वय स्थापित कर जनहित से जुड़े निर्णयों को गति देने पर भी विशेष जोर रहेगा। यह बैठक आगामी समय में छत्तीसगढ़ के विकास एजेंडे को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

प्रियंक मिश्रा बने भोपाल के नए कलेक्टर, प्रदेश में 26 IAS अफसरों का तबादला

 भोपाल मध्य प्रदेश सरकार ने गुरुवार रात एक बड़ी ट्रांसफर लिस्ट जारी की है. इसमें 2008 से लेकर 2017 बैच तक के 26 IAS अफसरों के नाम शामिल हैं. इस फेरबदल में सबसे चर्चित नाम प्रियंक मिश्रा का है, जिन्हें राजधानी भोपाल की कमान सौंपी गई है।  2013 बैच के IAS प्रियंक मिश्रा को धार कलेक्टर से अब भोपाल के नए कलेक्टर बनाया गया है. वहीं, कौशलेंद्र विक्रम सिंह (2010) निवर्तमान भोपाल कलेक्टर को अब मुख्यमंत्री का सचिव नियुक्त किया गया है. साथ ही उन्हें नगर और ग्राम निवेश का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया है।  इनको मिली नई जिम्मेदारी  भोपाल कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह को मुख्यमंत्री का सचिव बनाया गया है। वहीं धार कलेक्टर प्रियंक मिश्रा अब भोपाल के नए कलेक्टर होंगे। नर्मदापुरम की कलेक्टर सोनिया मीणा को वित्त विभाग में अपर सचिव बनाया गया है। वहीं मंडला के कलेक्टर रहे सोमेश मिश्रा नर्मदापुरम के नए कलेक्टर होंगे। तबादलों को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और मुख्य सचिव अनुराग जैन के बीच गुरुवार को लंबी बैठक हुई। इसके बाद सूची को मंजूरी दी गई। मुख्यमंत्री ने इस अहम बैठक के लिए पूरा दिन अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान में रिजर्व रखा था। इसके बाद सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने तबादलों को अंतिम रूप देते हुए आदेश जारी कर दिए। दरअसल, चुनाव आयोग द्वारा अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में शुरू कराई गई SIR (विशेष गहन पुनरीक्षण) की प्रक्रिया के बाद ही इन तबादलों की तैयारी शुरू हो गई थी। योजना के अनुसार 22 फरवरी के बाद तबादले किए जाने थे, लेकिन त्योहारों और बजट सत्र के चलते यह फैसला लगातार टलता रहा। 14 अफसरों में 9 महिलाएं शामिल 14 आईएएस अफसरों में 9 महिलाएं हैं। इनमें शिल्पा गुप्ता, प्रतिभा पाल, सोनिया मीणा, शीतला पटले, नेहा मीना, रानी बाटड, राखी सहाय, शीला दाहिमा और बिदिशा मुखर्जी का नाम शामिल हैं। इनमें से 5 को कलेक्टर पद पर पदस्थापना मिली है। इनमें प्रतिभा पाल और नेहा मीना पहले से ही अन्य जिलों में कलेक्टर थीं, जबकि राखी सहाय, शीला दाहिमा और बिदिशा मुखर्जी को अन्य पदों से हटाकर पहली बार जिले की कमान सौंपी गई है। पहली बार जिले की कमान     राखी सहाय – कलेक्टर, उमरिया     शीला दाहिमा – कलेक्टर, श्योपुर     बिदिशा मुखर्जी – कलेक्टर, मैहर पहले से कलेक्टर, अब नई जिले की जिम्मेदारी     प्रतिभा पाल – कलेक्टर, सागर।     नेहा मीना – कलेक्टर, सिवनी। प्रतिभा दूसरी अफसर जिसे रीवा के बाद सागर कलेक्टर बनाया प्रीति मैथिल के बाद प्रतिभा पाल ऐसी दूसरी आईएएस हैं जो रीवा जिले की कलेक्टर बनने के बाद सागर कलेक्टर बनी हैं। इसके पहले पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में प्रीति मैथिल को रीवा कलेक्टर के बाद सागर कलेक्टर की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। तीन महिला अधिकारी को कलेक्टर बनाया, दो के जिले बदले, तीन को हटाया तबादला सूची में महिला अधिकारियों को भी अहम जिम्मेदारियां दी गई हैं। इंदौर लोक सेवा आयोग की सचिव राखी सहाय को उमरिया कलेक्टर, सहकारिता विभाग की उप सचिव शीला दाहिमा को श्योपुर कलेक्टर और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की उप सचिव बिदिशा मुखर्जी को मैहर कलेक्टर बनाया गया है। इसके अलावा, नेहा मीना को झाबुआ से स्थानांतरित कर सिवनी कलेक्टर तथा प्रतिभा पाल को रीवा से सागर कलेक्टर की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं, नर्मदापुरम की कलेक्टर सोनिया मीना को हटा कर वित्त विभाग में अपर सचिव और सिवनी कलेक्टर शीतला पटले को लोक सेवा आयोग में सचिव बनाया गया है। मैहर कलेक्टर रानी बाटड़ को सहकारिता विभाग में उपसचिव बनाया है।  नर्मदापुरम संभाग के आयुक्त बदले नर्मदापुरम संभाग के आयुक्त कृष्णगाेपाल तिवारी को हटा कर आयुक्त सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण बनाया गया है। उनकी जगह पर आयुक्त सह संचालक नगर तथा ग्राम निवेश श्रीकांत बनोठ को आयुक्त नर्मदापुरम संभाग बनाया गया है। इनको जिले से हटाया शिवपुरी जिले के कलेक्टर रवींद्र कुमार चौधरी को नर्मदा घाटी विकास विभाग में अपर सचिव बनाया गया है। वहीं, उमरिया कलेक्टर धरणेन्द्र कुमार जैन को विमानन विभाग का अपर सचिव बनाया गया। सागर कलेक्टर संदीप जी आर को विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी सह श्रम आयुक्त इंदौर, दमोह कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर को मुख्यमंत्री कार्यालय में उप सचिव तथा पर्यावरण नियोजन एवं समन्वय संगठन के संचालक का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।  इन अधिकारियों को भी फील्ड में भेजा विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी सह आयुक्त-सह संचालक संस्थागत वित्त तथा संचालक, बजट राजीव रंजन मीना को धार कलेक्टर, मछुआ कल्याण तथा मत्स्य विकास विभाग के उप सचिव प्रताप नारायण यादव को दमोह कलेक्टर, नर्मदा घाटी विकास विभाग तथा जल संसाधन के उप सचिव का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे राहुल नामदेव धोटे को मंडला कलेक्टर, आयुष्मान भारत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी योगेश तुकाराम भरसट को झाबुआ कलेक्टर, नगर पालिक निगम रीवा के आयुक्त डॉ.सौरभ संजय सोनवणे को बैतूल कलेक्टर बनाया गया है।  इन कलेक्टर के जिले बदले श्योपुर कलेक्टर अर्पित वर्मा को शिवपुरी कलेक्टर, झाबुआ कलेक्टर नेहा मीना को सिवनी कलेक्टर, मंडला कलेक्टर सोमेश मिश्रा को नर्मदापुरम कलेक्टर, धार कलेक्टर प्रियंक मिश्रा को भोपाल कलेक्टर, बैतूल कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी को रीवा कलेक्टर, रीवा कलेक्टर प्रतिभा पाल को सागर कलेक्टर की कमान सौंपी गई है।  संभाग और मंत्रालय स्तर पर फेरबदल कृष्ण गोपाल तिवारी (2008): नर्मदापुरम कमिश्नर से अब सामाजिक न्याय विभाग के आयुक्त होंगे. शिल्पा गुप्ता (2008): लोक शिक्षण आयुक्त से अब गृह विभाग की सचिव होंगी. अभिषेक सिंह (2009): गृह विभाग से अब आयुक्त, लोक शिक्षण की जिम्मेदारी संभालेंगे. श्रीकांत बनोठ (2009): अब नर्मदापुरम संभाग के नए कमिश्नर होंगे. एसीएस की तर्ज पर डीजी, एडीजी बने संभाग प्रभारी:वरुण कपूर भोपाल, उपेंद्र जैन उज्जैन, पंकज श्रीवास्तव जबलपुर संभाग प्रभारी राज्य सरकार ने अपर मुख्य सचिवों की तर्ज पर स्पेशल डीजी और एडीजी स्तर के अधिकारियों को संंभागीय स्तर पर कानून व्यवस्था की समीक्षा की जिम्मेदारी सौंपी है। यह अधिकारी रेंज स्तर पर पदस्थ आईजी के अलावा संभागों की कानून व्यवस्था की निगरानी करेंगे। डीजी वरुण कपूर को भोपाल, उपेंद्र जैन को उज्जैन तथा स्पेशल डीजी पंकज श्रीवास्तव को जबलपुर संभाग का प्रभारी बनाया गया है। यह व्यवस्था प्रदेश में यूसीसी लागू करने के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के फैसले के बाद प्रभावी की गई है।  

प्रदेश में 10 से 25 अप्रैल तक मनेगा नारी शक्ति वंदन का उत्सव

भोपाल.  राज्य शासन द्वारा महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए आगामी 10 अप्रैल से 25 अप्रैल 2026 तक प्रदेशव्यापी "नारी शक्ति वंदन" पखवाड़ा मनाने का निर्णय लिया गया है। इस पखवाड़े का मुख्य उद्देश्य "नारी शक्ति वंदन अधिनियम" के प्रावधानों से आम जनता को अवगत कराना और महिला नेतृत्व का उत्सव मनाना है। राज्य शासन द्वारा जन-उत्सव के रूप में आयोजित करने के निर्देश जारी किए हैं। संभागों में बड़े सम्मेलन अभियान का शंखनाद राजधानी भोपाल के रविन्द्र भवन स्थित हंसध्वनि सभागार में होगा, जहाँ प्रबुद्धजनों का एक राज्य स्तरीय सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। इसके साथ ही प्रदेश के सभी संभाग मुख्यालयों और छिंदवाड़ा, खरगोन एवं मंदसौर जिला मुख्यालयों पर भव्य "नारी शक्ति वंदन" सम्मेलन आयोजित होंगे। इन कार्यक्रमों में महिला सांसदों, विधायकों, महापौर और पंचायत प्रतिनिधियों सहित सफल महिला उद्यमियों को सम्मानित कर उनके अनुभवों को साझा किया जाएगा। पदयात्रा और युवा शक्ति का जुड़ाव महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा प्रत्येक लोकसभा और विधानसभा क्षेत्र में "नारी शक्ति पदयात्रा" निकाली जाएगी, जिसमें समाज की प्रबुद्ध महिलाएँ सहभागिता करेंगी। युवाओं को इस अभियान से जोड़ने के लिए खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा विशेष 'नारी शक्ति वंदन दीवार' (Wall of Message) तैयार की जाएगी, जहाँ युवा पीढ़ी पेंटिंग और संदेशों के माध्यम से नारी शक्ति के प्रति अपने विचार व्यक्त करेगी। अंबेडकर जयंती पर 'विशेष ग्राम सभा' पखवाड़े का एक महत्वपूर्ण पड़ाव 14 अप्रैल डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती होगा। इस दिन प्रदेश की समस्त ग्राम पंचायतों में "विशेष ग्राम सभाएं" आयोजित की जाएंगी। बाबा साहेब के चित्र पर पुष्पांजलि के साथ नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। साथ ही त्रि-स्तरीय पंचायतों, नगरीय निकायों और शैक्षणिक संस्थानों में गोष्ठियाँ व सेमिनार आयोजित होंगे। डिजिटल और सामाजिक संगठनों की भागीदारी जनसंपर्क विभाग द्वारा इस पूरे अभियान को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ले जाया जाएगा। "नारी शक्ति वंदन" के प्रेरक वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित किए जाएंगे। वहीं, जिला कलेक्टर्स के माध्यम से महिला स्व-सहायता समूहों, 'लखपति दीदी' और 'लाड़ली बहना' को इस अभियान का मुख्य चेहरा बनाया जाएगा। औद्योगिक, व्यापारिक और सहकारी संगठनों में भी व्याख्यान आयोजित कर महिलाओं की आर्थिक और सामाजिक भागीदारी पर जोर दिया जाएगा। शिक्षा संस्थानों में गूँजेगा विषय उच्च शिक्षा और स्कूल शिक्षा विभाग के माध्यम से प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और स्कूलों में व्याख्यान और प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी, जिससे भावी पीढ़ी महिला सशक्तिकरण के कानूनी और सामाजिक पहलुओं को समझ सके। राज्य शासन ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सभी स्तरों पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में जन-प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाकर इस पखवाड़े को लोक उत्सव के रूप में मनाया जाये।