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रतलाम मंडल से होकर चलेंगी तीन नई स्पेशल ट्रेनें, रेलयात्रियों को मिलेगी राहत

 रतलाम  यात्रियों की सुविधाओं तथा विशेष रूप से ग्रीष्मकालीन छुट्टियों के दौरान बढ़ती यात्रा मांग को ध्यान में रखते हुए रेलवे द्वारा पश्चिम रेलवे के रतलाम मंडल से होकर तीन जोड़ी स्पेशल ट्रेनें चलाई जाएंगी। ये ट्रेनें बांद्रा टर्मिनस से वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी, सूबेदारगंज और आगरा कैंट के बीच विशेष किराये पर संचालित होंगी।  रतलाम रेल मंडल के जनसंपर्क अधिकारी मुकेश कुमार ने बताया कि ये ट्रेनें रतलाम मंडल के विभिन्न स्टेशनों के साथ ही आसपास के अनेक रेलवे स्टेशनों से होकर गुजरेंगी। इससे यात्रियों को ग्रीष्मकालीन अवधि में यात्रा के दौरान आवागमन में सुविधा मिलेगी। बांद्रा टर्मिनस-वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी सुपरफास्ट साप्ताहिक स्पेशल ट्रेन संख्या 02200 बांद्रा टर्मिनस-वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी स्पेशल ट्रेन प्रत्येक शनिवार को 4 अप्रैल से 11 जुलाई 2026 तक चलाई जाएगी। यह ट्रेन बांद्रा टर्मिनस से सुबह 5:10 बजे प्रस्थान कर अगले दिन सुबह 5:00 बजे झांसी पहुंचेगी। यह ट्रेन रतलाम मंडल के दाहोद (12:43/12:45), रतलाम (14:30/14:40), नागदा (15:43/15:45), उज्जैन (16:55/17:10) और मक्सी (18:00/18:02) स्टेशनों पर रुकेगी। वापसी में ट्रेन संख्या 02199 झांसी-बांद्रा टर्मिनस स्पेशल 2 अप्रैल से 9 जुलाई 2026 तक प्रत्येक गुरुवार को झांसी से शाम 16:50 बजे प्रस्थान कर अगले दिन शाम 16:10 बजे बांद्रा टर्मिनस पहुंचेगी। यह ट्रेन बोरीवली, वापी, सूरत, भरूच, वडोदरा, गोधरा, दाहोद, रतलाम, नागदा, उज्जैन, मक्सी, ब्यावरा, गुना, शिवपुरी, ग्वालियर, दतिया आदि स्टेशनों पर ठहरेगी। इसमें एसी 2-टियर, एसी 3-टियर, एसी 3-टियर (इकोनॉमी), स्लीपर और जनरल कोच होंगे। बांद्रा टर्मिनस-सूबेदारगंज सुपरफास्ट साप्ताहिक स्पेशल ट्रेन संख्या 04126 बांद्रा टर्मिनस-सूबेदारगंज स्पेशल 7 अप्रैल से 14 जुलाई 2026 तक प्रत्येक मंगलवार को चलाई जाएगी। यह ट्रेन बांद्रा टर्मिनस से सुबह 11:15 बजे प्रस्थान करेगी और अगले दिन शाम 17:00 बजे सूबेदारगंज पहुंचेगी। वापसी में ट्रेन संख्या 04125 सूबेदारगंज-बांद्रा टर्मिनस स्पेशल 04 अप्रैल से 13 जुलाई 2026 तक प्रत्येक सोमवार को चलाई जाएगी। यह ट्रेन सूबेदारगंज से सुबह 5:20 बजे प्रस्थान कर रतलाम (21:45/21:55) होते हुए अगले दिन सुबह 9:30 बजे बांद्रा टर्मिनस पहुंचेगी। यह ट्रेन बोरीवली, वापी, सूरत, वडोदरा, रतलाम, कोटा, सवाई माधोपुर, गंगापुर सिटी, आगरा क्षेत्र सहित कई स्टेशनों पर रुकेगी। इसमें एसी 3-टियर, एसी 3-टियर (इकोनॉमी), स्लीपर और जनरल कोच होंगे। उधना-आगरा कैंट स्पेशल ट्रेन ट्रेन संख्या 01908 उधना-आगरा कैंट स्पेशल 8 अप्रैल से 15 जुलाई 2026 तक प्रत्येक बुधवार को चलाई जाएगी। यह ट्रेन उधना से दोपहर 15:25 बजे प्रस्थान कर रतलाम (22:25/22:30) होते हुए अगले दिन सुबह 8:30 बजे आगरा कैंट पहुंचेगी। वापसी में ट्रेन संख्या 01907 आगरा कैंट-उधना स्पेशल 7 अप्रैल से 14 जुलाई 2026 तक प्रत्येक मंगलवार को चलाई जाएगी। यह ट्रेन आगरा कैंट से शाम 18:45 बजे प्रस्थान कर रतलाम (06:15/06:20) होते हुए अगले दिन दोपहर 13:25 बजे उधना पहुंचेगी। यह ट्रेन सूरत, वडोदरा, रतलाम, कोटा, सवाई माधोपुर, गंगापुर सिटी, बयाना, फतेहपुर सीकरी आदि स्टेशनों पर ठहरेगी। इसमें एसी 2-टियर, एसी 3-टियर, स्लीपर और जनरल कोच उपलब्ध रहेंगे। 

नीतीश सीएम की कुर्सी छोड़ने को तैयार, BJP के इशारे का इंतजार! कब होगा बिहार में सरकार का बदलाव?

पटना  बिहार में सरकार का बदलना तय है. नीतीश कुमार सीएम पद छोड़ने को तैयार हैं. विधान परिषद से उन्होंने इस्तीफा दे दिया है. यानी अब अगर-मगर की कोई गुंजाइश नहीं बची है. जल्द ही इस आशंका पर भी विराम लग जाएगा कि वे संवैधानिक प्रावधानों के तहत राज्यसभा की शपथ लेने के बाद 6 महीने तक सीएम रह सकते हैं. नीतीश ने अब दिल्ली की राजनीति में जाने का पक्का मन बना लिया है. यही वजह रही कि उन्होंने ससमय विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया. राज्यसभा की सदस्यता की शपथ के लिए भी वे तारीख तय होने का इंतजार कर रहे हैं. अनुमान है कि सीएम पद से इस्तीफा की औपचारिकता भी अप्रैल के दूसरे सप्ताह में पूरी हो जाएगी।  इस्तीफा शपथ के पहले या बाद में? यह सवाल जरूर बनता है कि नीतीश कुमार सीएम पद कब छोड़ेंगे. राज्यसभा की सदस्यता की शपथ के पहले पद छोड़ देंगे या बाद में, यह अभी तक स्पष्ट नहीं है. चूंकि नीतीश कुमार ने मीडिया से मुखातिब होना बंद कर दिया है, इसलिए इसे लेकर संशय बना हुआ है. तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं. कोई कह रहा कि वे इस्तीफा अभी नहीं देंगे. 6 महीने की संवैधानिक व्यवस्था का लाभ लेते हुए वे मुख्यमंत्री पद पर बने रहेंगे. हालांकि जेडीयू के सूत्र बता रहे हैं कि नीतीश कुमार राज्यसभा की सदस्यता की शपथ लेने के पहले ही इस्तीफा दे सकते हैं, बशर्ते भाजपा चेहरा घोषित कर दे. चर्चा यह भी है कि सरकार के स्वरूप पर एनडीए में अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है, इसीलिए विलंब हो रहा है. इतना तो तय है कि मुख्यमंत्री भाजपा का ही बनेगा. लेकिन, कौन बनेगा, इसे लेकर भाजपा ने अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं. जेडीयू के बड़े नेता लगातार कहते रहे हैं कि सीएम भाजपा से ही बनेगा, लेकिन वह नीतीश के मन मुताबिक होगा।  अगला सीएम नीतीश की पसंद का? सीएम के लिए नीतीश कुमार की पसंद की बात करें तो उन्होंने अपनी समृद्धि यात्रा के दौरान इशारों-इशारों में अपनी पसंद जाहिर कर दी है. यात्रा के दौरान जनसंवाद के दौरान वे मंच पर सम्राट के कंधे पर हाथ रखते रहे. इतना ही नहीं, उन्होंने कई जगह कहा भी कि अब ये ही सब काम देखेंगे. अब इससे बड़ा संकेत क्या हो सकता है. यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा नीतीश के चयन पर मुहर लगाती है या पुरानी परिपाटी निभाते हुए कोई चौंकाने वाला नाम घोषित करती है. भाजपा ने 2014 से ही यह परिपाटी शुरू की है कि सीएम वह नहीं बनता, जिसकी सर्वाधिक चर्चा होती है. हरियाणा में मनोहर खट्टर और झारखंड में रघुवर दास के नाम चौंकाने वाले थे. मध्य प्रदेश, राजस्थान और दिल्ली में भी भजपा ने यही किया।  बिहार की राजनीति में सम्राट फिट बिहार का मिजाज जातीय समीकरण को पसंद करता है. नीतीश कुमार ने भले जातिवाद को बढ़ावा नहीं दिया, लेकिन उनके उत्थान के पीछे लव-कुश (कुर्मी-कोइरी) समीकरण सहायक बना. इस समीकरण को अक्षुण्म रखते हुए नीतीश ने हर जाति में अपने रणनीतिक कौशल से वोट बैंक बनाया. कुर्मी-कोइरी की 10 फीसद से भी कम आबादी के बावजूद वे 20 साल तक बिहार के सीएम बनते रहे. चूंकि सम्राट चौधरी कोइरी जाति से आते हैं, इसलिए नीतीश के पैटर्न में दूसरों के मुकाबले ज्यादा फिट बैठेंगे. नीतीश अगर उन्हें अपना उत्तराधिकारी बता रहे हैं तो इसकी बड़ी वजह यही हो सकती है. भाजपा भी वोट बैंक की राजनीति में माहिर है. संभव है, वह दूसरे राज्यों के प्रयोग से बिहार में बचे।  भाजपा भी बढ़ाती रही है सम्राट को सम्राट का पलड़ा एक और वजह से भारी दिखता है. भाजपा में आने के बाद उन्हें बड़ा फलक मिला है. भाजपा ने उन्हें पहले प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेवारी सौंपी. उन्हें दूसरी बार डेप्युटी सीएम बनाया. इस बार तो भाजपा ने नीतीश के पास शुरू से ही रहने वाला गृह विभाग भी उनसे लेकर सम्राट को सौंप दिया है. सम्राट के प्रमोशन के संकेत उस वक्त भी मिले थे, जब लोकसभा और विधानसभा चुनावों के दौरान भाजपा ने उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ मंच साझा करने के अलावा बोलने का भी अवसर दिया. मसलन भाजपा सम्राट को प्रमोट करने का काम शुरू से ही इसीलिए कर रही है कि समय आने पर उन्हें सूबे की कमान सौंपी जा सके।  नीतीश कर रहे BJP का इंतजार जेडीयू के सूत्र बताते हैं कि नीतीश ने अब सीएम पद का मोह छोड़ दिया है. वे इंतजार कर रहे हैं कि भाजपा नए सीएम का ऐलान करे तो वे बागडोर सौंप कर मुक्त हो जाएं. यानी वे भाजपा के ग्रीन सिग्नल का इंतजार कर रहे हैं. जानकारी तो यह भी मिल रही है कि राज्यसभा की शपथ के पहले ही भाजपा नाम की घोषणा कर देगी. चूंकि लंबे इंतजार के बाद भाजपा को बिहार में सरकार बनाने का मौका मिल रहा है, इसलिए वह इस आयोजन को भव्य बनाना चाहती है. पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह समेत केंद्रीय स्तर के नेता नए सीएम के शपथ ग्रहण समारोह में शिरकत कर सकते हैं. 5 राज्यों में चुनाव प्रचार तेज होने के कारण सबका शिड्यूल देखा जा रहा है. नए नेता के चुनाव की औपचारिकताएं भी पूरी करनी हैं. अनुमान है कि अप्रैल के दूसरे हफ्ते के आरंभ में नेता चयन की रस्म पूरी कर ली जाएगी. इसके साथ ही शपथ ग्रहण की तैयारी भी शुरू हो जाएगी. बंगाल चुनाव शुरू होने से पहले भाजपा बिहार में नई सरकार का गठन कर लेगी। 

एम्स भोपाल और ग्वालियर आयुर्वेद संस्थान मिलकर खोजेंगे घुटनों के दर्द का परमानेंट इलाज

ग्वालियर  घुटनों के दर्द (आस्टियोआर्थराइटिस) से जूझ रहे मरीजों के लिए अच्छी खबर है। एम्स भोपाल और क्षेत्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान ग्वालियर मिलकर इस बीमारी का समाधान खोज रहे हैं। जल्द ही दोनों संस्थानों के बीच आधिकारिक समझौता होने वाला है, जो जोड़ों के दर्द के इलाज की दिशा बदल सकता है। केंद्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (सीसीआरएएस) आयुष मंत्रालय से इस रिसर्च प्रोजेक्ट की अनुमति मिल गई है। शोध का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि घुटने के आस्टियोआर्थराइटिस के इलाज में पारंपरिक आयुर्वेदिक औषधियां, आधुनिक एलोपैथी की तुलना में कितनी सुरक्षित और असरदार हैं। शोध का मुख्य कार्यक्षेत्र एम्स भोपाल रहेगा, जहां की आधुनिक लैब और डाक्टरों की देखरेख में मरीजों पर आयुर्वेदिक उपचार के प्रभावों का बारीकी से अध्ययन किया जाएगा। यह रिसर्च आधुनिक मानकों पर आधारित होगी, ताकि इसके परिणामों पर भरोसा किया जा सके। एम्स भोपाल के अस्थिरोग विभाग के प्रोफेसर डा. रेहान उल हक प्रोजेक्ट का नेतृत्व करेंगे। वहीं क्षेत्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान ग्वालियर के विशेषज्ञ डा. अनिल मंगल इसके सह-अन्वेषक और कोआर्डिनेटर होंगे। मरीजों को क्या होगा फायदा?     इस शोध से मरीजों को पता चलेगा कि आयुर्वेद की कौन-सी दवाएं विज्ञानी रूप से सुरक्षित हैं।     अगर आयुर्वेदिक औषधियां प्रभावी साबित होती हैं, तो मरीजों को पेन-किलर (दर्द निवारक दवाओं) के दुष्प्रभावों से मुक्ति मिल सकती है।     यह रिसर्च गठिया और जोड़ों के दर्द के उपचार का तरीका बदल सकती है।

मध्यप्रदेश में 2 हजार से ज्यादा सैंपल फेल, 60% डेयरी प्रोडक्ट मिलावटी

भोपाल  मध्य प्रदेश में दूध, मावा, पनीर, घी, मिर्च, धनिया पाउडर समेत कई चीजों में मिलावट हो रही है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन की जांच में यह खुलासा हुआ है। बताया जा रहा है कि करीब 2000 से ज्यादा फूड सैंपल फेल पाए गए है। करीब 30 जिलों में दो हजार सैंपल फेल हुए। इनमें ग्वालियर नंबर वन पर है। आइए जानते है कहां कौन से सैंपल फेल हुए है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। मोबाइल वैन के जरिए लिए गए सैंपल की तीन साल की रिपोर्ट सामने आई है। मोबाइल वैन के संचालन से लेकर अब तक करीब एक लाख सैंपल लेने का दावा किया गया है। जिसमें रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले दूध, मावा, पनीर और घी जैसे डेयरी प्रोडक्ट ही सबसे ज्यादा मिलावटी पाए गए है। मिठाइयों के साथ मसाले और तेल भी सुरक्षित नहीं है। जलेबी, लड्डू, बर्फी गजक और नमकीन में मिलावट मिली। लाल मिर्च, धनिया पाउडर, हल्दी और सोयाबीन तेल के कई सैंपल फेल हो गए। फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) की हाल में एक रिपोर्ट सामने आई। जिसमें 2000 से ज्यादा फूड सैंपल फेल पाए गए। सबसे ज्यादा मामले करीब 420 ग्वालियर से सामने आए हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले दूध, मावा, पनीर और घी जैसे डेयरी प्रोडक्ट ही सबसे ज्यादा मिलावटी पाए गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह मिलावट केवल फूड पॉइजनिंग ही नहीं, बल्कि डायबिटीज, हार्ट डिजीज और हार्मोनल बीमारियों तक का कारण बन रही है। FDA की यह रिपोर्ट मोबाइल वैन के जरिए लिए गए सैंपल और उनकी टेस्ट रिजल्ट के आधार पर तैयार की गई है। जिसमें बीते तीन साल के आंकड़े शामिल हैं। यह पहली बार है जब मोबाइल वैन के संचालन से लेकर अब कर लिए गए एक लाख सैंपल की कंपाइल रिपोर्ट सामने आई है। ग्वालियर सबसे आगे, कई जिलों में फैला मिलावट का जाल राज्य के खाद्य सुरक्षा विभाग की रिपोर्ट के अनुसार ग्वालियर जिले में सबसे ज्यादा मिलावट के मामले सामने आए हैं, जहां करीब 420 सैंपल फेल पाए गए। इसके बाद गुना (110), उज्जैन (95), भिंड (90) और बुरहानपुर (75) जैसे जिलों में भी बड़ी संख्या में नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे। इसके अलावा शाजापुर, इंदौर, धार, रीवा, सागर, सीहोर और नरसिंहपुर सहित 30 से अधिक जिलों में मिलावट का जाल फैला हुआ है। जांच में दूध, पनीर, मावा, मिठाइयों और मसालों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी सामने आई है। मिलावट से शरीर को कैसे हो रहा नुकसान गांधी मेडिकल कॉलेज के एंडोक्रिनोलॉजिस्ट डॉ. मनुज शर्मा बताते हैं कि मिलावटी भोजन में मौजूद एंडोक्राइन डिसरप्टिंग केमिकल्स (जैसे माइक्रोप्लास्टिक, हेवी मेटल) शरीर में जाकर हार्मोन सिस्टम को प्रभावित करते हैं। इससे गट हेल्थ खराब होती है। बॉडी में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया नष्ट होते हैं। शरीर में पोषण की कमी होती है। इसके साथ ही मोटापा, डायबिटीज और पीसीओडी जैसी बीमारियां बढ़ती हैं। मसाले और तेल भी नहीं सुरक्षित सिर्फ डेयरी ही नहीं, मसाले और खाद्य तेल भी मिलावट से अछूते नहीं हैं। लाल मिर्च, धनिया पाउडर, हल्दी और सोयाबीन तेल के कई सैंपल फेल पाए गए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इनका लगातार सेवन लिवर और किडनी को नुकसान पहुंचा सकता है और लंबे समय में कैंसर का खतरा भी बढ़ा सकता है। जलेबी, लड्डू, बर्फी, गजक और नमकीन जैसे खाद्य पदार्थों में भी बड़े पैमाने पर मिलावट सामने आई है। त्योहारों के दौरान यह खतरा और बढ़ जाता है। दमोह, भिंड और मुरैना जैसे जिलों में मिठाइयों के सैंपल बड़ी संख्या में फेल पाए गए हैं। लगातार चल रही मॉनिटरिंग FDA आयुक्त दिनेश श्रीवास्तव ने कहा कि फेल सैंपलों के आधार पर संबंधित दुकानदारों और निर्माताओं के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। जुर्माना और कानूनी कार्रवाई की लगातार की जा रही है। निगरानी सख्त की गई है। मिलावट का यह नेटवर्क खत्म करने के लिए नई योजना के तहत प्रदेश में काम किया जा रहा है। मोबाइल वैन प्रदेशभर में घूमकर सैंपल एकत्र कर उनकी टेस्टिंग कर रही हैं। मिलावट में ग्वालियर नंबर वन     ग्वालियर जिला मिलावट में पहले स्थान पर है। यहां दो हजार में से लगभग 420 सैंपल फेल हुए है।     गुना – 110     उज्जैन – 95     भिंड – 90,     बुरहानपुर – 75,     जबलपुर – 75     शाजापुर – 70     खरगोन – 65     सीहोर – 55     धार – 40     राजगढ़ – 35     नीमच – 30     नरसिंहपुर – 28     रीवा – 25     दमोह – 20     हरदा – 20     अलीराजपुर – 20     विदिशा – 18     झाबुआ – 18     सागर – 15     मंडला – 15     दतिया – 15     शिवपुरी – 12     छिंदवाड़ा – 12     बालाघाट – 10     डिंडोरी – 08     पन्ना – 08     कटनी – 06     शहडोल – 06 कहां कौन से सैंपल फेल     ग्वालियर- दूध, दही, पनीर, घी, मिक्स्ड मिल्क, गजक, मावा बर्फी, मालाई बर्फी, चावल, आटा     इंदौर- लस्सी, मिल्क केक, मावा कतली, पनीर, इडली, सांभर     शाजापुर- दूध, घी, पनीर, मावा, बेसन, लाल मिर्च पाउडर, कुकिंग ऑयल     दमोह- जलेबी, बेसन लड्डू, आलू मटर, चाउमीन, घी, पनीर, दही     भिंड- मालाई बर्फी, मावा पेड़ा, सौंफ और काली मिर्च     मुरैना- मावा, घी, पनीर, बेसन लड्डू, बूंदी लड्डू     धार- मावा, पनीर, धनिया पाउडर, पताशे     सागर- मोतीचूर लड्डू में मिलावट     रीवा- तुअर दाल और मिठाई     सिवनी- गुजिया, सेव और पनीर     नरसिंहपुर- दूध में मिलावट     खंडवा- गुड़ चिक्की का सैंपल फेल     बैतूल- दही और काली मिर्च में मिलावट     सीहोर- खाने का तेल  

गैस किल्लत और ओवररेटिंग से मिलेगी मुक्त,गुरुग्राम DC ने जारी किया हेल्पलाइन नंबर, तुरंत होगी कार्रवाई

गुरुग्राम डीसी अजय कुमार ने बताया कि जिले में एलपीजी की कालाबाजारी, जमाखोरी और अवैध डायवर्जन को रोकने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है. LPG की कालाबाजारी को लेकर बना कंट्रोल रूम गुरुग्राम में एलपीजी गैस को लेकर आने वाली शिकायतों पर अब तुरंत कार्रवाई होगी. जिला प्रशासन ने आम लोगों की सुविधा के लिए लघु सचिवालय में 24 घंटे चलने वाला कंट्रोल रूम शुरू कर दिया है. इसके साथ ही कालाबाजारी और जमाखोरी पर भी सख्ती बढ़ा दी गई है, ताकि लोगों को गैस की किल्लत का सामना न करना पड़े. डीसी अजय कुमार ने बताया कि जिले में एलपीजी की कालाबाजारी, जमाखोरी और अवैध डायवर्जन को रोकने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है. खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग की टीमें अलग-अलग इलाकों में निरीक्षण कर रही हैं. प्रशासन का साफ कहना है कि किसी भी हालत में उपभोक्ताओं को परेशानी नहीं होने दी जाएगी और गैस की सप्लाई पूरी तरह पारदर्शी रखी जाएगी. अब 24 घंटे दर्ज कर सकते हैं शिकायत शिकायतों के समाधान को और मजबूत बनाने के लिए लघु सचिवालय के एनआईसी रूम में 24×7 कंट्रोल रूम बनाया गया है. यहां लोग गैस सिलेंडर की कमी, सप्लाई में देरी, ज्यादा कीमत वसूली या अवैध भंडारण जैसी समस्याओं की शिकायत दर्ज करा सकते हैं. प्रशासन का लक्ष्य है कि हर शिकायत पर तुरंत कार्रवाई हो और लोगों को जल्दी राहत मिले. फोन नंबर जारी, तुरंत होगी कार्रवाई डीसी ने बताया कि कंट्रोल रूम के लैंडलाइन नंबर 0124-2868930 पर आने वाली शिकायतों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जाएगा. अगर किसी जगह कालाबाजारी या अवैध स्टॉक की जानकारी मिलती है तो संबंधित अधिकारी तुरंत जांच कर सख्त कार्रवाई करेंगे. लोगों से भी अपील की गई है कि अगर कहीं गड़बड़ी दिखे तो तुरंत प्रशासन को सूचना दें. एलपीजी व्यवस्था को दुरुस्त रखने के लिए रोजाना 6 टीमें फील्ड में सक्रिय कर दी गई हैं. ये टीमें गैस एजेंसियों, गोदामों और संदिग्ध स्थानों पर लगातार छापेमारी और निरीक्षण कर रही हैं. इससे किसी भी तरह की अनियमितता को तुरंत पकड़कर कार्रवाई की जा रही है. गैस का पर्याप्त स्टॉक, घबराने की जरूरत नहीं डीसी अजय कुमार ने साफ किया कि जिले में एलपीजी का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है. फिलहाल 58 गैस एजेंसियों के पास कुल 15,311 सिलेंडर मौजूद हैं और सप्लाई पूरी तरह सुचारू है. विभाग रोजाना निगरानी कर रहा है, ताकि आगे भी किसी तरह की कमी न आए. प्रशासन ने साफ कर दिया है कि गुरुग्राम में एलपीजी को लेकर कोई संकट नहीं है. लोगों को सिर्फ सतर्क रहने और किसी भी गड़बड़ी की जानकारी तुरंत देने की जरूरत है, ताकि सिस्टम साफ और मजबूत बना रहे.  

JAC मॉडल स्कूल एंट्रेंस टेस्ट का सफल आयोजन, मेरिट से होगा कक्षा 6 में नामांकन

 रांची झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद, रांची द्वारा संचालित राज्य के 82 मॉडल विद्यालयों में कक्षा 6 में सत्र 2026–27  के नामांकन  के लिए झारखंड एकेडमिक काउंसिल (JAC) द्वारा आयोजित प्रवेश परीक्षा आज 28 मार्च (शनिवार) को राज्य भर के 19 जिलों के 60 परीक्षा केंद्रों पर शांतिपूर्ण एवं सुव्यवस्थित वातावरण में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुई. परीक्षा का आयोजन पूर्वाह्न 11:00 बजे से अपराह्न 1:00 बजे तक किया गया. सभी परीक्षा केंद्रों पर परीक्षार्थियों का आगमन समय से पहले ही प्रारंभ हो गया था, जिससे विद्यार्थियों में इस परीक्षा को लेकर उत्साह, अनुशासन एवं आत्मविश्वास स्पष्ट रूप से देखने को मिला. 100 अंकों की ऑब्जेक्टिव परीक्षा परीक्षा 100 अंकों की  बहुविकल्पीय  प्रश्न आधारित थी, जिसमें अंग्रेजी (30 अंक), गणित (30 अंक) एवं सामाजिक विज्ञान (40 अंक) से प्रश्न पूछे गए.  जिसमें प्राप्त अंकों के आधार पर मेरिट सूची तैयार की जाएगी, जिसके पश्चात चयनित छात्र मॉडल विद्यालयों में नामांकन करा सकेंगे. परीक्षा के सफल संचालन हेतु सभी जिला प्रशासन, जिला शिक्षा पदाधिकारी, केंद्राधीक्षक एवं संबंधित कर्मियों द्वारा समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की गई. सभी केंद्रों पर कदाचार मुक्त एवं शांतिपूर्ण वातावरण में परीक्षा सम्पन्न कराई गई. मॉडल स्कूल का उदेश्य क्या है? झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद, रांची द्वारा संचालित मॉडल विद्यालयों में JAC बोर्ड के अंतर्गत अंग्रेजी माध्यम से कक्षा 6 से 12वीं तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान की जाती है. इन विद्यालयों का उद्देश्य ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को उत्कृष्ट एवं आधुनिक शिक्षा उपलब्ध कराना है, ताकि वे भविष्य में प्रतिस्पर्धात्मक परीक्षाओं एवं उच्च शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन कर सकें. परिषद राज्य के अभिभावकों एवं विद्यार्थियों से अपील करता है कि वे अपने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य हेतु इन मॉडल विद्यालयों में अधिक से अधिक नामांकन कराएं तथा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का लाभ उठाएं.

आत्मनिर्भर भारत की नई उड़ान,नेवी में शामिल हुआ ASW युद्धपोत मालवन, 80% स्वदेशी तकनीक से है लैस

नई दिल्ली भारतीय नौसेना को दूसरा एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शिप 'मालवन' सौंप दिया गया है। 80% स्वदेशी तकनीक से बना यह जंगी जहाज दुश्मनों की पनडुब्बियों को नेस्तनाबूद करने में सक्षम है। जानें इसकी ताकत और खासियतें। पनडुब्बियों का काल, पानी में छिपकर करेगा वार! नेवी को मिला समंदर का नया सिकंदर 'मालवन' भारतीय नौसेना की ताकत और तटीय सुरक्षा को और अधिक मजबूत करने के लिए 31 मार्च, 2026 को 'मालवन' नामक पनडुब्बी रोधी युद्धक शैलो वॉटर क्राफ्ट (ASW SWC) नौसेना को सौंप दिया गया है। यह देश में स्वदेशी रक्षा निर्माण को बढ़ावा देने वाली 'आत्मनिर्भर भारत' पहल के तहत एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इस युद्धपोत का निर्माण कोच्चि स्थित 'कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड' (CSL) द्वारा किया गया है। नौसेना की परिचालन आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित किए जा रहे आठ विशेष युद्धपोतों की श्रृंखला में 'मालवन' दूसरा जहाज है। अधिकारियों के अनुसार, इस जहाज के शामिल होने से भारत की तटीय रक्षा और पानी के भीतर युद्ध (अंडरवाटर वारफेयर) करने की क्षमताओं में भारी वृद्धि होगी। शिवाजी महाराज की विरासत इस युद्धपोत का नाम महाराष्ट्र के ऐतिहासिक तटीय शहर मालवन के नाम पर रखा गया है, जो छत्रपति शिवाजी महाराज की गौरवशाली समुद्री विरासत से गहराई से जुड़ा हुआ है। यह नाम भारतीय नौसेना के पूर्व जहाज 'आईएनएस मालवन' की विरासत को भी आगे बढ़ाता है, जो एक माइनस्वीपर था और जिसने वर्ष 2003 तक नौसेना में अपनी सेवाएं दी थीं। प्रमुख विशेषताएं और तकनीकी क्षमताएं इस युद्धपोत में 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है, जो रक्षा उत्पादन में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) सहित घरेलू उद्योग की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है। इसकी लंबाई लगभग 80 मीटर है और इसका विस्थापन करीब 1,100 टन है। यह उन्नत 'वाटरजेट प्रोपल्शन' प्रणाली द्वारा संचालित होता है। हथियार और सेंसर यह आधुनिक रडार, सोनार सिस्टम, टॉरपीडो और एंटी-सबमरीन रॉकेट से लैस है। यह पानी के भीतर छिपे खतरों का सटीक पता लगाने और उन्हें नष्ट करने में पूरी तरह सक्षम है। यह जहाज तटीय जल में पनडुब्बी रोधी अभियानों, अंडरवाटर सर्विलांस (निगरानी), कम तीव्रता वाले समुद्री संचालन और खदान युद्ध (माइन वारफेयर) मिशनों को अंजाम देने में माहिर है।  मेक इन इंडिया के तहत एक और बड़ा रक्षा सौदा स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को बढ़ावा देने के इस व्यापक अभियान के बीच, रक्षा मंत्रालय ने एक और बड़ा कदम उठाया है। 'मेक इन इंडिया' कार्यक्रम को और गति देते हुए, मंत्रालय ने भारतीय वायु सेना (IAF) के लिए दो माउंटेन रडार की खरीद हेतु 'भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड' (BEL) के साथ लगभग 1,950 करोड़ रुपये के कॉन्ट्रैक्ट पर हस्ताक्षर किए हैं।

सामुदायिक पुलिसिंग को नई दिशा, सृजन अभियान के तहत शुरू हुई पहल

भोपाल मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा संचालित सृजन अभियान के अंतर्गत सामुदायिक पुलिस सुरक्षा योजना के तहत कमजोर वर्ग की बस्तियों के किशोरों एवं युवाओं को पुलिस की कार्यप्रणाली एवं जन सुरक्षा व्यवस्थाओं से परिचित कराने हेतु एक महत्वपूर्ण पहल की गई। इसी क्रम में दिनांक 31 मार्च 2026 को निवसीद बचपन संस्था द्वारा पुलिस विभाग के सहयोग से बाबा नगर भोपाल स्थित बचपन संस्था के बच्चों एवं युवाओं के लिए डायल-112 का भ्रमणकराया गया। इसका उद्देश्य बच्चों को एकीकृत आपातकालीन सेवा प्रणाली की जानकारी देना एवं विभिन्न आपात परिस्थितियों में त्वरित सहायता प्राप्त करने के तरीकों से अवगत कराना रहा। कार्यक्रम के दौरान पुलिस टीम ने बच्चों को सरल एवं सहज भाषा में बताया कि अब अलग-अलग परिस्थितियों के लिए विभिन्न हेल्पलाइन नंबरों—108 (स्वास्थ्य), 101 (अग्निशमन), 1930 (साइबर क्राइम), 1098 (चाइल्ड हेल्पलाइन) एवं 139 (रेलवे सहायता)पर कॉल करने के स्थान पर केवल डायल-112 के माध्यम से किसी भी आपात स्थिति की सूचना तत्काल दर्ज कराई जा सकती है। इस एकीकृत प्रणाली की उपयोगिता एवं प्रभावशीलता को उदाहरणों के माध्यम से समझाया गया, जिससे बच्चों में जागरूकता एवं आत्मविश्वास का विकास हुआ। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि 112 पर प्राप्त प्रत्येक कॉल के आधार पर तत्काल एक इवेंट तैयार किया जाता है, जिसमें घटना का प्रकार, स्थान एवं आवश्यक सहायता का विवरण दर्ज किया जाता है। इसके पश्चात संबंधित पुलिस वाहन, एम्बुलेंस या फायर यूनिट को तुरंत मौके से जोड़ा जाता है, जिससे समयबद्ध एवं प्रभावी सहायता सुनिश्चित होती है। बच्चों ने इस प्रक्रिया को बड़े उत्साह एवं रुचि के साथ समझा। बच्चों को कंट्रोल रूम का भ्रमण भी कराया गया, जहाँ उन्हें लाइव कॉल हैंडलिंग, तकनीकी उपकरणों का संचालन, लोकेशन ट्रैकिंग सिस्टम, इवेंट मैनेजमेंट एवं वाहन ट्रैकिंग प्रक्रिया की जानकारी दी गई। पुलिस अधिकारियों ने बच्चों के प्रश्नों के उत्तर भी दिए तथा उन्हें यह भी बताया गया कि आपातकालीन सेवाओं का दुरुपयोग एवं झूठी सूचना देने के गंभीर कानूनी परिणाम हो सकते हैं। मध्यप्रदेश पुलिस की यह पहल सामुदायिक पुलिसिंग को सशक्त बनाने एवं समाज के कमजोर वर्गों में सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।  

मध्यप्रदेश पुलिस की वाहन चोरों पर प्रभावी कार्यवाही विगत एक माह में 109 चोरी किए गए दोपहिया वाहन बरामद

भोपाल  मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा प्रदेश में वाहन चोरी पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने हेतु लगातार सख्त एवं सुनियोजित कार्यवाहियां की जा रही हैं। इसी क्रम में विगत एक माह में प्रदेश के विभिन्न जिलों में पुलिस द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए वाहन चोरों के गिरोहों का पर्दाफाश करते हुए 109 चोरी किए गए दोपहिया वाहन बरामद किए हैं। जबलपुर थाना माढोताल पुलिस ने अंतर्राज्यीय वाहन चोर एवं वाहन काटने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए जबलपुर एवं रायपुर (छत्तीसगढ़) से चोरी किए गए 15 वाहन जप्त किए। इसी प्रकार थाना लाडगंज पुलिस ने 2 शातिर आरोपियों को गिरफ्तार कर 12 वाहन बरामद किए, जबकि थाना पाटन पुलिस द्वारा एक आरोपी को गिरफ्तार कर 7 दोपहिया वाहन जप्त किए गए। इस प्रकार तीनों कार्यवाहियों में पुलिस ने चोरी किए गए 34 दुपहिया वाहन बरामद किए हैं। राजगढ़ थाना ब्यावरा सिटी पुलिस ने अंतरजिला मोटरसाइकिल चोरी गिरोह का पर्दाफाश कर 2 आरोपियों से 15 मोटरसाइकिलें जप्त कीं। वहीं थाना सुठालिया पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 10 चोरी की गई मोटरसाइकिलें बरामद कर एक आरोपी को गिरफ्तार किया। इस प्रकार दोनों कार्यव‍हियों में पुलिस ने चोरी किए गए कुल 25 वाहन बरामद किए हैं। रतलाम रतलाम पुलिस ने वाहन चोरी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए 09 मोटरसाइकिलें बरामद कीं। इस कार्रवाई में 1 मुख्य आरोपी एवं 3 बाल अपचारियों को पकड़ा। वहीं थाना स्टेशन रोड पुलिस ने भी 4 मोटरसाइकिलें बरामद कर एक आरोपी को गिरफ्तार किया। इस प्रकार कुल 13 मोटरसाइकिलें बरामद की गई। अन्य जिलों में भी की गई कार्यवाही बैतूल जिले में भैंसदेही पुलिस द्वारा अंतर्राज्यीय वाहन चोरो को गिरफ्तार कर 10 मोटरसाइकिलें, खरगोन पुलिस ने 7 मोटरसाइकिल, ग्वालियर जिले में 5 वाहन, गुना जिले में त्वरित कार्रवाई करते हुए 4 मोटरसाइकिलें, शिवपुरी जिले में 4,मंदसौर जिले में 3 मोटरसाइकिलें तथा शाजापुर एवं कटनी जिलों में 2-2 मोटरसाइकिल बरामद कर आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इन सभी कार्यवाहियों में पुलिस की तत्परता, तकनीकी साक्ष्यों का उपयोग एवं प्रभावी समन्वय प्रमुख रूप से सामने आया है। मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा वाहन चोरी जैसे अपराधों पर नियंत्रण हेतु सतत अभियान जारी है तथा भविष्य में भी इसी प्रकार सख्त कार्रवाई जारी रखी जाएगी।  

21 जिलों के निरीक्षण में खामियां उजागर, राज्य खाद्य आयोग ने विभागों को दिए सख्त निर्देश

रायपुर छत्तीसगढ़ राज्य खाद्य आयोग के निरीक्षण में 21 जिलों में संचालित शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन में कई कमियां सामने आई हैं। इन खामियों को लेकर आयोग ने सख्ती दिखाते हुए संबंधित विभागों को त्वरित सुधार के निर्देश दिए हैं। आयोग के अध्यक्ष  संदीप शर्मा की अध्यक्षता में नवा रायपुर स्थित कार्यालय में आयोजित अंर्तविभागीय बैठक में खाद्य, महिला एवं बाल विकास, स्कूल शिक्षा और आदिम जाति एवं अनुसूचित जनजाति विभाग के अधिकारियों के साथ समीक्षा की गई। निरीक्षण में उचित मूल्य दुकानों, आंगनबाड़ी केन्द्रों, स्कूलों के मध्यान्ह भोजन और आश्रम-छात्रावासों की व्यवस्था का जायजा लिया गया था। बैठक में बालक छात्रावासों में भोजन की गुणवत्ता और सामग्री आपूर्ति में सुधार की जरूरत बताई गई, जबकि कन्या छात्रावासों की स्थिति बेहतर पाई गई। 21 जिलों से निरीक्षण संबंधी अनुशंसाओं के पालन प्रतिवेदन समय पर नहीं मिलने पर अध्यक्ष ने नाराजगी जताई और शीघ्र रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।आयोग ने निर्देश दिए कि सभी आश्रम-छात्रावासों में दैनिक भोजन मैन्यू और कॉल सेंटर नंबर स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किए जाएं, ताकि शिकायत और सुझाव दर्ज किए जा सकें। आंगनबाड़ी केन्द्रों में बच्चों की उपस्थिति ‘पोषण ट्रैकर’ में सही दर्ज करने और आकस्मिक निरीक्षण से उसका मिलान करने को कहा गया। उचित मूल्य दुकानों में अनियमितता पर भी सख्त रुख अपनाते हुए नियमित रूप से दुकान नहीं खोलने, सूचना प्रदर्शित नहीं करने और स्टॉक में गड़बड़ी पाए जाने पर संचालकों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए। मध्यान्ह भोजन योजना के तहत प्रदेश में संचालित दो केंद्रीकृत किचनों की व्यवस्था संतोषजनक पाई गई। आयोग ने इन किचनों से अधिक से अधिक स्कूलों को जोड़ने की अनुशंसा की है। इसके अलावा छात्रावासों और स्कूलों में भोजन की गुणवत्ता पर नजर रखने के लिए किसी छात्र को ‘मेस प्रभारी’ बनाने का सुझाव दिया गया। साथ ही सभी संस्थानों में चावल, दाल, सब्जी और खाद्य तेल की निर्धारित मात्रा का प्रदर्शन और उसका पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। अध्यक्ष  शर्मा ने कहा कि अधिकांश जिलों में योजनाएं ठीक चल रही हैं, लेकिन जहां कमियां मिली हैं, वहां जल्द सुधार करना जरूरी है। बैठक में आयोग के सदस्य  राजेंद्र महिलांग,  कुलदीप शर्मा और सदस्य सचिव  राजीव कुमार जायसवाल सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।