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यति नरसिंहानंद ने कहा- गांधी समाज के लिए जहर, गोडसे ने गांधी का वध किया

ग्वालियर जूना अखाड़ा डासना के पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरी रविवार को ग्वालियर पहुंचे। यहां वे हिन्दू महासभा कार्यालय पहुंचे और पत्रकारों से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने महात्मा गांधी को लेकर विवादित बयान देते हुए उन्हें समाज के लिए नुकसानदायक बताया और नाथूराम गोडसे द्वारा की गई हत्या को वध करार दिया। नाथूराम गोडसे को बताया ‘बलिदानी’ पत्रकारों से बातचीत के दौरान यति नरसिंहानंद गिरी ने कहा कि उनके लिए यह सौभाग्य की बात है कि वे अपने सहयोगी जयवीर भारद्वाज के निमंत्रण पर गोडसे से जुड़े स्थल पर पहुंचे और वीर सावरकर की प्रतिमा को नमन किया। उन्होंने हिन्दू महासभा भवन आने को भी अपने लिए गौरवपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि अगर हम सावरकर जी के सिद्धांतों पर नहीं चलेंगे तो सनातन धर्म बहुत जल्दी विनष्ट हो जाएगा। अमर बलिदानी पंडित नाथूराम गोडसे जी वह व्यक्ति थे जिन्होंने सावरकर के बताए हुए रास्ते पर चलकर जैसे हजारों बलिदानियों ने, हजारों क्रांतिकारीयों ने सावरकर जी की बातों को माना, उसी तरह वीर, वीर विनायक सावरकर जी की बात को अमर बलिदानी पंडित नाथूराम गोडसे जी ने भी माना और गांधी का वध किया। महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरी बोले- गांधी समाज के लिए जहर महामंडलेश्वर ने कहा कि यह स्वतंत्र भारत का पहला अमूल्य बलिदान था, जो सनातन धर्म की रक्षा के लिए दिया गया। उनके अनुसार, नाथूराम गोडसे एक विचार पुंज हैं और यदि सनातन धर्म व हिंदू समाज उनका सही मूल्यांकन नहीं करेगा, उन्हें नहीं समझेगा, तो हिंदू समाज बहुत जल्दी विनष्ट हो जाएगा। उन्होंने कहा कि गांधी समाज के लिए जहर हैं। उनके मुताबिक, गांधी और उनके जैसे नेता अपने लोगों को दूसरों के लिए धोखा देते हैं, जबकि नाथूराम गोडसे उस नस्तर की तरह हैं, जिससे उस कैंसर और जहर का इलाज किया जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि सनातन धर्मियों की ओर से अब तक नाथूराम गोडसे के साथ जो हुआ, उसके लिए वे उनसे क्षमा प्रार्थी हैं। हर घर में गोडसे की प्रतिमा होनी चाहिए पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर आगे कहा कि, मैं इसकी निंदा करता हूं। क्या लगता है इसका मंदिर बनेगा? बनना चाहिए। हर सनातनी, हर जीवित हिंदू के घर में नाथूराम गोडसे जी की प्रतिमा होनी चाहिए। उनकी फोटो होनी चाहिए, उनकी तस्वीर होनी चाहिए। लेकिन सब कई बार तो विरोध हुआ है। देखिए, विरोध तो गद्दार करते ही हैं। गांधीवाद देश को बर्बाद करने का नाम है। गांधीवाद धर्म को बर्बाद करने का नाम है। गांधीवाद हिंदू समाज से विश्वासघात का नाम है। लेकिन गांधीवाद से नेताओं को खुलकर अय्याशी करने का मौका और अपनी अय्याशी को छुपाने का मौका मिलता है। वीर सावरकर जी और नाथूराम गोडसे जी सनातन धर्म की सबसे प्रज्वलित अग्नि है। अगर आप उनके विचारों को अपनाएंगे तो आपको आत्मबलिदान देना पड़ेगा। जो लोग आत्मबलिदान देना नहीं चाहते, जो सुविधाओं को भोगना चाहते हैं वो वीर विनायक दामोदर सावरकर जी के और नाथूराम गोडसे जी के कट्टर विरोधी हैं, तो वो तो विरोध करेंगे। उनका विरोध इंपोर्टेंट नहीं है। जरूरी यह है कि उनके विचारों के मानने वालों ने क्या किया और जो भी गोडसे जी का विरोध करते हैं वो सभी निंदनीय हैं। उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए।

निलंबित DIG भुल्लर का मोबाइल जांच में आया सामने, कई अफसरों की संदिग्ध चैट मिली

चंडीगढ़  रिश्वत मामले में फंसे पंजाब पुलिस के निलंबित डी.आई.जी. हरचरण सिंह भुल्लर के मोबाइल में आई.ए.एस. और आई.पी.एस. के साथ संदिग्ध चैट मिली है। चैट पैसों का लेन-देन और अवैध कामों में शामिल है। सी.बी.आई. ने अज्ञात अफसरों के खिलाफ प्रारंभिक जांच शुरू कर दी है। सी.बी.आई. की डी.एस.पी. सोनाली ने मामले में अर्जी सी.बी.आई. की विशेष अदालत में दर्ज की है। सी.बी.आई. ने कहा कि भुल्लर के साथ पंजाब सरकार के कई अफसर अवैध कामों में शामिल हैं। चैट सी.बी.आई. को भुल्लर के मोबाइल फोन और लैपटॉप में मिले हैं। सी.बी.आई. ने भुल्लर का मोबाइल फोन और लैपटॉप जांच के लिए सी.एफ.एस.एल. भेज दिया है। सी.बी.आई. ने भुल्लर के साथ अवैध कामों में शामिल करीब 30 लोगों की लिस्ट बना ली है। इनमें डी.एस.पी. से लेकर आई.पी.एस. तक शामिल हैं। सी.बी.आई. के अधिकारियों ने कहा कि उनकी टीम जल्द ही भुल्लर के साथ अवैध कारोबार और पैसों के लेन-देन में शामिल अफसरों को पूछताछ के लिए बुलाएगी और उन्हें पुलिस जांच में शामिल होने के लिए सम्मन भेजेगी। जांच एजैंसी के अनुसार यह मामला पिछले वर्ष दर्ज भ्रष्टाचार केस से जुड़ा हुआ है। जांच के दौरान इलैक्ट्रॉनिक उपकरणों की फॉरैंसिक जांच, व्हाट्सएप चैट, पूछताछ और दस्तावेजों से कई वरिष्ठ अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क के सबूत मिले हैं। सी.बी.आई. का दावा है कि आरोपी अपनी पहुंच का इस्तेमाल कर निजी लोगों को लाभ दिलाने के बदले रिश्वत लेते थे। इससे पहले भुल्लर की जमानत याचिका हाईकोर्ट से खारिज हो चुकी है और वे फिलहाल चंडीगढ़ की बुड़ैल जेल में बंद हैं। बता दें कि 6 अक्तूबर, 2025 को भुल्लर और बिचौलिए कृष्णु शारदा को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद भुल्लर के ठिकानों से 2 किलो के करीब सोना, साढ़े 7 करोड़ कैश समेत काफी सामान बरामद किया गया था। 13 मार्च को सी.बी.आई. कोर्ट ने भुल्लर और कृष्णु शारदा के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले में संज्ञान लेते हुए ट्रायल शुरू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई थी। पिछले महीने ही भुल्लर के खिलाफ केस चलाने के लिए केंद्र सरकार से मंजूरी ली गई थी। भुल्लर से पूछताछ में 14 अफसरों के नाम मिले सी.बी.आई. ने हरचरण सिंह भुल्लर को गिरफ्तार करने के बाद पहली बार 5 दिन का रिमांड लिया। सी.बी.आई. सोर्सेज के मुताबिक भुल्लर ने बताया कि पंजाब के अफसर पटियाला के प्रॉपर्टी डीलर के जरिए प्रॉपर्टी में इन्वैस्टमैंट करते हैं। इस पूछताछ में सी.बी.आई. को ऐसे 14 अफसरों का पता चला। जिसमें 10 आई.पी.एस. और 4 आई.ए.एस. अधिकारी थे। सी.बी.आई. ने जब छानबीन की तो पता चला कि 10 आई.पी.एस. में से 8 अभी भी फील्ड में अहम पदों पर तैनात हैं। वहीं 2 पंजाब पुलिस की एकेडमी में हैं। इसके अलावा 4 आई.ए.एस. अफसरों का संबंध किसी ने किसी तरह से मंडी गोबिंदगढ़ से है। इसके बाद सी.बी.आई. ने प्रॉपर्टी डीलर के पटियाला और लुधियाना के ठिकानों पर रेड कर डॉक्यूमैंट्स जब्त किए थे।

MP में पेट्रोल-डीजल की पर्याप्त आपूर्ति, रसोई गैस पर पैनिक: भोपाल में दो दिनों में 28,000 सिलेंडर बुक, सप्लाई 70% हुई

भोपाल  मध्य प्रदेश में LPG सिलेंडर को लेकर 'पैनिक' जैसा माहौल है। कई शहरों में सिलेंडर की बुकिंग बढ़ गई है। अकेले भोपाल में ही 20 से ज्यादा गैस एजेंसियों पर सिलेंडर की बुकिंग दो से तीन गुनी तक बढ़ी है। यहां सुबह से दोपहर तक लोगों की भीड़ लग रही है। पिछले 2 दिन में ही भोपाल में 28 से 30 हजार तक बुकिंग हो गई, जबकि सप्लाई 22 हजार तक ही है। इससे पेंडिंग बुकिंग का आंकड़ा 40 हजार तक पहुंच गया है। वहीं, घरों में सप्लाई भी 4 से 5 दिन में हो रही है। भोपाल में पहले से दोगुनी हो रही बुकिंग फूड कंट्रोलर चंद्रभान सिंह जादौन ने बताया कि भोपाल में रसोई गैस को लेकर कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन पिछले 2-3 दिन में बुकिंग काफी बढ़ गई है। पहले से लगभग दोगुनी बुकिंग हो रही है। वहीं, सप्लाई 11 हजार सिलेंडर की है। इस कारण हर रोज 3 हजार तक पेंडिंग बुकिंग चल रही है। हालांकि, गैस पर्याप्त है। भोपाल में ही एजेंसियों के पास 5 से 6 दिन का स्टॉक है। भौंरी स्थित ऑयल डिपो से सिलेंडर की सप्लाई भी जारी है। स्टॉक खत्म होने की वजह से ईंधन खत्म नहीं, कम ड्राई हुए पंप मध्य प्रदेश पेट्रोल पंप ओनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय सिंह ने बताया कि भोपाल में पिछले दो-तीन दिन से पंप ड्राई हो रहे थे। यह स्टॉक की कमी की बजाय से नहीं, बल्कि कंपनियों को एडवांस राशि नहीं देने की वजह से था। कंपनियां अब क्रेडिट दे रही है। इसलिए पर्याप्त मात्रा में ईंधन पंपों पर आ रहा है। शनिवार को कहीं से भी पंप ड्राई होने की खबरें नहीं आई। भोपाल में 192 पंप पर पर्याप्त ईंधन रहा। उन्होंने बताया कि अफवाहों के चलते ईंधन की खपत में तेजी जरूर आई है। भोपाल, इंदौर और उज्जैन में भीड़ अपेक्षाकृत कम है, लेकिन खपत करीब 25% तक बढ़ गई है। लोग जरूरत से ज्यादा ईंधन भरवा रहे हैं, जिससे दबाव बढ़ रहा है। इस वजह से पेट्रोल की ही रोज की खपत 15 से 20 लाख लीटर तक पहुंच गई है, जबकि सामान्य दिनों में यह 9 लाख लीटर तक है। MP में पेट्रोल-डीजल पर्याप्त ईरान, अमेरिका और इजराइल युद्ध का असर विश्व के बाकी देशों की तरह भारत पर भी पड़ रहा है. कच्चे तेल की कीमतों में उछाल का असर हर देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को प्रभावित कर रहा है. इसी बीच बार-बार उड़ रही पेट्रोल-डीजल की कमी की अफवाहों के चलते लोग जरूरत से ज्यादा ईंधन अपने वाहनों में भरवा रहे हैं, इसी की वजह से पेट्रोल पंप में पेट्रोल-डीजल खत्म हो रहा है और अफवाहों को और हवा मिल रही है. नरसिंहपुर से ऐसा ही एक हैरान करने वाला वीडियो सामने आया है जहां कई लोग किसानों के नाम पर बड़ी-बड़ी कैन लेकर पेट्रोल-डीजल भरवाने पहुंच रहे हैं. ऐसी जमाखोरी से असली अन्नदाताओं के लिए परेशानी खड़ी हो रही है।  ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादा फैलाई जा रही अफवाहें अफवाहों का असर अब मध्य प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में ज्यादा दिख रहा है. नरसिंहपुर के ग्रामीण इलाकों में अधिकांश पेट्रोल पंप आउट ऑफ स्टॉक हो रहे हैं. यहां भी लोगों द्वारा जरूरत से ज्यादा ईधन लेने के मामले सामने आ रहे हैं. वीडियो में देखा जा सकता है कि सैकड़ों की तादाद में लोग 45 लीटर तक की कैन लेकर पंपों पर पहुंच रहे हैं. ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या ये सारे के सारे किसान हैं या किसानों की आड़ में जमाखोर? ग्रामीण क्षेत्रों में जो गिनती के पंप मौजूद हैं वहां भी जमाखोरों की वजह से असली किसानों को जरूरत के मुताबिक डीजल नहीं मिल पा रहा। 

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने की मन की बात की 132वीं कड़ी पर चर्चा

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सुनी मन की बात की 132वीं कड़ी जल संरक्षण में छत्तीसगढ़ बना देश के लिए मिसाल: कोरिया जिले के जल संरक्षण मॉडल की प्रधानमंत्री ने की सराहना मन की बात में छत्तीसगढ़ के जल संवर्धन प्रयासों को मिली राष्ट्रीय पहचान, अब इसे जन आंदोलन बनाना हमारा संकल्प – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज मुख्यमंत्री निवास में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकप्रिय मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ की 132वीं कड़ी सुनी और इसे राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरणादायी बताया। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम देश के कोने-कोने में हो रहे सकारात्मक नवाचारों और जनभागीदारी को राष्ट्रीय मंच प्रदान कर समाज में नई ऊर्जा और प्रेरणा का संचार करता है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कोरिया जिले के किसानों के जल संरक्षण प्रयासों की सराहना छत्तीसगढ़ के लिए अत्यंत गर्व और प्रेरणा का विषय है। यह दर्शाता है कि प्रदेश में जमीनी स्तर पर हो रहे कार्य अब राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि ‘आवा पानी झोंकी’ जैसे अभिनव मॉडल के माध्यम से किसानों ने अपने खेतों में रिचार्ज तालाब और सोख्ता गड्ढों का निर्माण कर वर्षा जल को सहेजने का सराहनीय कार्य किया है। यह जनभागीदारी आधारित पहल आज भूजल स्तर में सुधार की एक सशक्त मिसाल बन चुकी है और अन्य क्षेत्रों के लिए भी मार्गदर्शक बन रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जल संरक्षण अब एक जन आंदोलन का रूप ले चुका है और छत्तीसगढ़ में भी इसे जनभागीदारी से जोड़ते हुए व्यापक स्तर पर कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने प्रदेशवासियों से जल संरक्षण को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने और इसमें सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि ‘मन की बात’ कार्यक्रम में प्रधानमंत्री द्वारा मत्स्य उत्पादन में आत्मनिर्भरता, फिटनेस को बढ़ावा, शुगर इंटेक में कमी और खेलों के लिए अनुकूल वातावरण निर्माण जैसे विषयों पर दिए गए संदेश अत्यंत उपयोगी और प्रेरणादायी हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में मत्स्य पालन को बढ़ावा देने, युवाओं को खेलों से जोड़ने और स्वस्थ जीवनशैली को प्रोत्साहित करने के लिए योजनाबद्ध प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और युवाओं के लिए नए अवसर सृजित होंगे। मुख्यमंत्री साय ने पश्चिमी एशिया में उत्पन्न परिस्थितियों के संदर्भ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए संदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि देश हर चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है और केंद्र तथा राज्य सरकारें समन्वय के साथ कार्य कर रही हैं। उन्होंने प्रदेशवासियों को आश्वस्त किया कि छत्तीसगढ़ में पेट्रोलियम उत्पादों, रसोई गैस और अन्य आवश्यक वस्तुओं की पर्याप्त उपलब्धता है तथा आपूर्ति व्यवस्था पूरी तरह सुचारु और सामान्य है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे अफवाहों से दूर रहें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही विश्वास करें। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जनभागीदारी की शक्ति के साथ जल संरक्षण को और मजबूत कर छत्तीसगढ़ को सुरक्षित, समृद्ध और जल-संपन्न भविष्य की ओर ले जाने के लिए राज्य सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है तथा प्रदेश निरंतर नवाचार, सहभागिता और सुशासन के माध्यम से विकास की नई दिशा तय कर रहा है। इस अवसर पर विधायक पुरंदर मिश्रा, छत्तीसगढ़ नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष संजय श्रीवास्तव, मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार कृष्णा दास सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

जेवर की गलियों में गूंजा, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर रचित गीत

योगी जी लायो जेवर में एयरपोर्ट जेवर की गलियों में गूंजा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर लिखा गया गीत  लोकार्पण समारोह में संगीत, जनसमर्थन और राजनीतिक तालमेल का अनोखा संगम दिखा जेवर नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पहले चरण का लोकार्पण और एमआरओ सुविधा का शिलान्यास उत्तर प्रदेश के इतिहास में स्वर्णिम अध्याय दर्ज कराने वाला क्षण बन गया। शनिवार को इस अवसर पर जहां एक ओर देशभर की निगाहें इस ऐतिहासिक परियोजना पर टिकी रहीं, वहीं दूसरी ओर जेवर की गलियों से लेकर जनसभा स्थल तक एक अलग ही माहौल देखने को मिला। पूरे क्षेत्र में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लेकर रचे गए गीतों की गूंज सुनाई दी, जिसने इस बड़े आयोजन को उत्सव में बदल दिया। गलियों से मंच तक गूंजे सीएम योगी की तारीफ में गीत शनिवार को जेवर क्षेत्र में हर गली नुक्कड़ पर एक खास गीत लोगों की जुबान पर था  “योगी जी लायो जेवर में एयरपोर्ट”, यह गीत स्थानीय लोगों के बीच इस कदर लोकप्रिय रहा कि पूरे दिन वातावरण में उत्साह और गर्व का भाव बना रहा। उद्घाटन और शिलान्यास कार्यक्रम के दौरान भी संगीत का यह रंग मंच तक पहुंचा। गायक हेमंत ब्रजवासी ने अपने प्रस्तुति से पूरे जनसभा स्थल को झूमने पर मजबूर कर दिया। उनके गीत के बोल कुछ इस तरह थे, “गोरखपुर की गलियों में योगी जी हैं डोले, बजा-बजाकर चुटकी सियाराम बोले, होठों पर इनके अफसाने हो गए, सियाराम तेरे नाम के दीवाने हो गए”… इस गीत को सुनकर उपस्थित लोग झूमते नजर आए। यह नजारा केवल एक सांस्कृतिक प्रस्तुति नहीं था, बल्कि यह उस जनसमर्थन और जुड़ाव का प्रतीक था जो इस परियोजना के साथ लोगों ने महसूस किया। जनउत्साह ने कार्यक्रम को बनाया यादगार इस अवसर पर बड़ी संख्या में लोग जुटे। जैसे ही मंच से एयरपोर्ट परियोजना और उसके महत्व का जिक्र हुआ, जनसभा स्थल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा 25 नवंबर 2021 को हुए शिलान्यास का उल्लेख करते ही लोगों में विशेष उत्साह देखने को मिला। यह क्षण कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण बन गया, जहां जनता ने जोरदार समर्थन जताया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस उपलब्धि को उत्तर प्रदेश और देश के लिए एक बड़ा और ऐतिहासिक पल बताया, जिससे माहौल और भी ऊर्जावान हो गया। विकास और सांस्कृतिक उत्सव का संगम इस पूरे आयोजन में विकास और संस्कृति का अनोखा संगम देखने को मिला। एक ओर जहां आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और वैश्विक स्तर की सुविधाओं की चर्चा हो रही थी, वहीं दूसरी ओर लोकगीत और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों ने इस कार्यक्रम को जनोत्सव का रूप दे दिया। स्थानीय लोगों के लिए यह केवल एक एयरपोर्ट का उद्घाटन नहीं था, बल्कि यह उनके क्षेत्र के विकास, पहचान और भविष्य की नई शुरुआत का प्रतीक बन गया। सीएम योगी ने दिया पीएम मोदी को श्रेय प्रधानमंत्री मोदी के ठीक बगल में बैठे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कार्यक्रम के दौरान कई बार उनसे बातचीत की। यह सिलसिला पूरे कार्यक्रम में चलता रहा। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी की जमकर सराहना करते हुए 25 नवंबर 2021 को हुए शिलान्यास से लेकर शनिवार को लोकार्पण तक का श्रेय उन्हें दिया। इस पर जनसभा में जोरदार प्रतिक्रिया देखने को मिली। इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी भी मंच से सीएम योगी का उत्साहवर्धन करते नजर आए। दोनों नेताओं की एक-दूसरे के प्रति इस भावना ने आयोजन को और भी खास बना दिया।

चप्पे-चप्पे पर पहरा, जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट बना अभेद्य किला

चप्पे-चप्पे पर पहरा, जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट बना अभेद्य किला एयरपोर्ट की सुरक्षा को सशक्त बनाने के लिए 05 नई अस्थाई पुलिस चौकियों का सृजन      दो स्थानों पर 07-07 यूनिट के अग्निशमन केंद्र किए जाएंगे स्थापित एयरपोर्ट के आसपास के क्षेत्रों में आंतरिक एवं बाह्य सुरक्षा तथा यातायात व्यवस्था सुदृढ़ एयरपोर्ट की सुरक्षा में लगे पुलिसकर्मियों को जेवर इमिग्रेशन कोर्स के माध्यम से विशेष प्रशिक्षण तकनीक और प्रशिक्षित बल के साथ तैयार हुआ मजबूत सुरक्षा मॉडल लखनऊ/जेवर नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के प्रथम चरण के शनिवार को शुभारंभ के दौरान सुरक्षा के दृष्टिगत नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट और उसके आसपास का पूरा क्षेत्र अभेद्य सुरक्षा घेरे में तब्दील कर दिया गया। मजबूत सुरक्षा व्यवस्था अब यहां स्थाई तौर पर सुनिश्चित की जा रही है। एयरपोर्ट क्षेत्र की सुरक्षा को सशक्त बनाने के लिए 05 नई अस्थायी पुलिस चौकियों का सृजन किया गया है तो साथ ही किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए दो स्थानों पर 07-07 यूनिट के अग्निशमन केंद्र भी स्थापित किए जाएंगे। पुलिस कमिश्नर (गौतमबुद्ध नगर) लक्ष्मी सिंह के नेतृत्व में जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट के आसपास के क्षेत्रों में आंतरिक एवं बाह्य सुरक्षा तथा यातायात व्यवस्था को सुदृढ़ एवं सुचारु बनाए रखने के उद्देश्य से व्यापक स्तर पर व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गईं हैं। सुरक्षा और यातायात प्रबंधन को इस प्रकार व्यवस्थित किया गया कि भविष्य में यहां वीआईपी मूवमेंट के दौरान आम जनमानस को किसी प्रकार की असुविधा न होने पाए। 70 पुलिसकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण जॉइंट सीपी राजीव नारायण मिश्रा ने बताया कि एयरपोर्ट की सुरक्षा एवं संचालन से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जेवर इमिग्रेशन कोर्स के अंतर्गत 03 निरीक्षक, 24 उपनिरीक्षक, 17 मुख्य आरक्षी एवं 26 आरक्षियों सहित कुल 70 पुलिस कर्मी प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं। इसके अतिरिक्त आगामी प्रशिक्षण के लिए 30 उपनिरीक्षक, 14 मुख्य आरक्षी एवं 17 आरक्षियों सहित कुल 61 पुलिसकर्मियों को नामित किया गया है, जिससे सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक दक्ष एवं प्रभावी बनाया जा सके। थाना जेवर डॉमेस्टिक टर्मिनल के लिए 35 पुलिसकर्मी एयरपोर्ट क्षेत्र में थाना जेवर डॉमेस्टिक टर्मिनल के लिए कुल 35 नागरिक पुलिसकर्मियों के पद स्वीकृत/नियुक्त किए गए हैं। इनमें 01 निरीक्षक, 02 उपनिरीक्षक, 09 मुख्य आरक्षी, 03 कंप्यूटर ऑपरेटर ग्रेड-ए, 15 आरक्षी, 02 आरक्षी चालक तथा 03 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी शामिल हैं। चौकियों से एयरपोर्ट की परिधि सुरक्षा को मिलेगी मजबूती जॉइंट सीपी राजीव नारायण मिश्रा ने बताया कि एयरपोर्ट क्षेत्र की सुरक्षा को सशक्त बनाने के लिए 05 नई अस्थायी पुलिस चौकियों का सृजन किया गया है। इन चौकियों में पुलिस चौकी माइल स्टोन-32 कि.मी., कार्गो टर्मिनल, डॉमेस्टिक टर्मिनल, माइल स्टोन-27 कि.मी. तथा माइल स्टोन-15 कि.मी. शामिल हैं। इन सभी चौकियों के माध्यम से एयरपोर्ट की परिधि सुरक्षा को मजबूत किया गया है तथा आवागमन मार्गों पर प्रभावी निगरानी सुनिश्चित की जा रही है। सुरक्षा व्यवस्था हर समय सक्रिय इसके अतिरिक्त पीसीआर/पीआरवी वाहनों का आवंटन किया गया है, जो आधुनिक उपकरणों से सुसज्जित हैं। इन वाहनों के माध्यम से लगातार गश्त की जा रही है और पुलिस चौकियों तथा पीआरवी/पीसीआर वाहनों पर  पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं, जिससे सुरक्षा व्यवस्था हर समय सक्रिय और प्रभावी बनी रहे। अग्नि सुरक्षा के लिहाज से किसी भी आपात स्थिति में होगा तुरंत एक्शन अग्नि सुरक्षा के दृष्टिकोण से यमुना प्राधिकरण क्षेत्र के सेक्टर-32 एवं सेक्टर-18 में दो नए अग्निशमन केंद्र स्थापित किए जाने की स्वीकृति प्रदान की गई है। दोनों स्थानों पर 7485 वर्गमीटर भूमि पर 07-07 यूनिट के अग्निशमन केंद्र स्थापित किए जाएंगे। इनके निर्माण के लिए लोक निर्माण विभाग को कार्यदायी संस्था नामित किया गया है। प्रत्येक अग्निशमन केंद्र के लिए 01 अग्निशमन अधिकारी, 03 अग्निशमन द्वितीय अधिकारी, 01 एएसआईएम, 08 एलएफएम, 09 एफएस चालक तथा 44 फायरमैन के पद सृजित किए गए हैं, जिससे किसी भी आपात स्थिति में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित हो सके। जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए 05 राजपत्रित अधिकारियों 01 पुलिस उपायुक्त, 01 अपर पुलिस उपायुक्त तथा 03 सहायक पुलिस आयुक्त के साथ लगभग 70 सहायक स्टाफ के पदों की स्वीकृति के लिए प्रस्ताव है। इसी क्रम में 'थाना जेवर इंटरनेशनल टर्मिनल' के निर्माण के लिए 4000 वर्गमीटर भूमि उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। प्रस्तावित थाने के लिए 01 निरीक्षक, 02 उपनिरीक्षक, 09 मुख्य आरक्षी, 03 कंप्यूटर ऑपरेटर ग्रेड-ए, 15 आरक्षी, 02 आरक्षी चालक एवं 03 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के पदों की स्वीकृति के प्रस्ताव भी विचाराधीन हैं। एयरपोर्ट के पास पुलिस लाइन्स के निर्माण के लिए 10,000 वर्गमीटर भूमि उपलब्ध कराने का प्रयास  इसके अतिरिक्त, कमिश्नरेट गौतमबुद्धनगर पुलिस लाइन्स की एयरपोर्ट से लगभग 55 कि.मी. दूरी को दृष्टिगत रखते हुए एयरपोर्ट के समीप एक पुलिस लाइन्स के निर्माण के लिए यमुना औद्योगिक विकास प्राधिकरण से लगभग 10,000 वर्गमीटर भूमि उपलब्ध कराने के लिए प्रयास किया जा रहा है।  प्रस्तावित परिसर में बीडीडीएस टीम, डॉग स्क्वाड, परिवहन शाखा, शस्त्रागार, प्रशिक्षण केंद्र, इमिग्रेशन स्टाफ के लिए बैरक, आवास, गैरेज एवं कार्यालय आदि की समस्त आवश्यक व्यवस्थाएं विकसित की जाएंगी। सुरक्षा के क्षेत्र में एक नया मानक स्थापित करेगा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पुलिस कमिश्नरेट गौतमबुद्धनगर उपर्युक्त सभी व्यवस्थाओं से जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट की सुरक्षा, संरक्षा एवं संचालन को उच्चतम मानकों के अनुरूप सुनिश्चित किए जाने की दिशा में निरंतर प्रभावी कार्रवाई कर रहा है। इस व्यापक, बहुस्तरीय और तकनीक-संपन्न सुरक्षा व्यवस्था से स्पष्ट है कि जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट न केवल देश की कनेक्टिविटी को नई दिशा देगा, बल्कि सुरक्षा के क्षेत्र में भी एक नया मानक स्थापित करेगा।   संपूर्ण क्षेत्र नो-फ्लाई जोन घोषित कर एंटी-ड्रोन सिस्टम रहा सक्रिय जॉइंट सीपी राजीव नारायण मिश्रा ने बताया कि पीएम नरेंद्र मोदी के जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट उद्घाटन कार्यक्रम को लेकर पूरे इलाके में 5-स्तरीय सुरक्षा घेरा बनाया गया। जहां हाईटेक एंटी-ड्रोन, सीसीटीवी, इंटेलिजेंस नेटवर्क से चप्पे-चप्पे पर नजर रखी गई। इसी के साथ 100 से अधिक प्रवेश द्वारों पर 200 डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर, एंटी-सैबोटाज चेक, बम डिस्पोजल स्क्वाड, एंटी-माइंस चेकिंग, स्निफर डॉग्स तैनात किए गए। इसके साथ ही करीब 5000 पुलिस कर्मियों की तैनाती की गई। चप्पे चप्पे पर सुरक्षा के लिए पीएसी, आरएएफ, एटीएस, सीआईएसएफ के साथ एसपीजी भी मुस्तैद रहे। नो-फ्लाई जोन, सोशल मीडिया मॉनिटरिंग, कंट्रोल रूम, हेल्प डेस्क, एनडीआरएफ/एसडीआरएफ अलर्ट के साथ ही … Read more

पर्यटन के साथ रोजगार भी: बस्तर में होमस्टे नीति से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा बल

बस्तर. बस्तर में होमस्टे नीति 2025-30 के जरिए पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। इस योजना से पर्यटक आदिवासी संस्कृति और जीवनशैली को करीब से अनुभव कर सकेंगे। गोंड और मुरिया समुदायों के साथ रहकर उनकी परंपराओं को समझने का अवसर मिलेगा। प्राकृतिक वातावरण में बने होमस्टे जंगल और झरनों के बीच अनूठा अनुभव देंगे। पारंपरिक भोजन और ग्रामीण जीवन इस अनुभव को खास बनाएंगे। प्रशासन ने नोडल अधिकारी नियुक्त कर क्रियान्वयन तेज किया है। सब्सिडी और निर्माण कार्यों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा और बस्तर को नई पहचान मिलेगी। छत्तीसगढ़ विकास के नए दौर में प्रवेश कर चुका है। सुरक्षा, आधारभूत ढांचे और सांस्कृतिक अस्मिता के संतुलन के बीच राज्य सरकार ने पर्यटन क्षेत्र को नई दिशा देने की पहल की है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में लागू की गई ‘छत्तीसगढ़ होमस्टे नीति 2025-30’ को ग्रामीण और जनजातीय अर्थव्यवस्था के सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। यह नीति केवल पर्यटन प्रोत्साहन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे सामाजिक और आर्थिक पुनर्जागरण के व्यापक अभियान के रूप में देखा जा रहा है। पर्यटन के माध्यम से समावेशी विकास की पहल छत्तीसगढ़ प्राकृतिक सौंदर्य, घने वनों, जलप्रपातों और जैव विविधता से भरपूर राज्य है। विशेषकर बस्तर और सरगुजा संभाग अपनी जनजातीय संस्कृति, परंपराओं और ऐतिहासिक धरोहर के लिए प्रसिद्ध हैं। वर्षों तक विकास की मुख्यधारा से अपेक्षाकृत दूर रहे ये क्षेत्र अब पर्यटन की नई संभावनाओं के केंद्र बन रहे हैं। सरकार का मानना है कि यदि स्थानीय समुदायों को पर्यटन गतिविधियों से सीधे जोड़ा जाए, तो आय के स्थायी स्रोत तैयार किए जा सकते हैं। होमस्टे नीति के तहत ग्रामीण परिवार अपने घरों को पर्यटकों के लिए होमस्टे के रूप में विकसित कर सकेंगे। इससे पर्यटकों को स्थानीय जीवनशैली का वास्तविक अनुभव मिलेगा और ग्रामीण परिवारों की आय में वृद्धि होगी। स्थानीय संस्कृति से सीधा जुड़ाव बस्तर और सरगुजा में गोंड, मारिया, मुरिया, हल्बा, धुरवा, उरांव और कोरवा जैसे अनेक जनजातीय समुदाय आज भी अपनी परंपराओं को जीवंत रखे हुए हैं। होमस्टे के माध्यम से पर्यटक इन समुदायों के पारंपरिक व्यंजन, लोकनृत्य, हस्तशिल्प और प्राकृतिक जीवनशैली से सीधे जुड़ सकेंगे। यह नीति ‘वोकल फॉर लोकल’ की अवधारणा को भी मजबूत करती है। स्थानीय कारीगरों द्वारा निर्मित बांस शिल्प, ढोकरा कला, हस्तनिर्मित वस्त्र और अन्य पारंपरिक उत्पादों को सीधे बाजार तक पहुंचाने का अवसर मिलेगा। इससे न केवल रोजगार सृजन होगा, बल्कि राज्य की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी। आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम होमस्टे नीति से ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यटन आधारित सूक्ष्म उद्यमों को बढ़ावा मिलेगा। स्थानीय युवाओं को गाइड, ट्रांसपोर्ट, फूड सर्विस और सांस्कृतिक प्रस्तुति जैसे क्षेत्रों में रोजगार के अवसर मिलेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नीति का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया गया, तो आने वाले वर्षों में बस्तर और सरगुजा जैसे क्षेत्र छत्तीसगढ़ के पर्यटन विकास के प्रमुख स्तंभ बन सकते हैं। पर्यटन मानचित्र पर उभरता छत्तीसगढ़ ‘छत्तीसगढ़ होमस्टे नीति 2025-30’ राज्य को देश के प्रमुख इको-टूरिज्म और सांस्कृतिक पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। यह नीति विकास को केवल शहरों तक सीमित न रखकर ग्रामीण अंचलों तक पहुंचाने का प्रयास है। सरकार का लक्ष्य स्पष्ट है- पर्यटन को माध्यम बनाकर आर्थिक सशक्तिकरण, सांस्कृतिक संरक्षण और समावेशी विकास को एक साथ आगे बढ़ाना।

बरनाला में मकान गिरने से 3 मजदूरों की मौत, मरम्मत के दौरान हुआ हादसा; चौथे मजदूर की तलाश जारी

 बरनाला  पंजाब के बरनाला जिले के गांव फरवाही में रविवार सुबह एक दर्दनाक हादसा सामने आया, जब एक मकान अचानक गिरने से तीन मजदूर युवकों की मौत हो गई, जबकि एक अन्य युवक की तलाश जारी है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, विशाल पुत्र जीवन कुमार निवासी फरवाही का मकान सीवरेज का पानी नींव में जाने के कारण एक तरफ से कमजोर होकर बैठ गया था। इस मकान की मरम्मत का काम रणजीत ठेकेदार निवासी मोगा द्वारा किया जा रहा था और मकान को ऊपर उठाने का कार्य चल रहा था। शनिवार रात चार युवक बॉबी सिंह, प्रिंस, गुरजीत सिंह और एक अज्ञात युवक (सभी निवासी मोगा) उसी मकान के अंदर सो रहे थे। रविवार सुबह अचानक मकान की एक दीवार झुक गई, जिससे पूरा ढांचा भरभराकर गिर पड़ा। हादसे में तीन युवकों की मलबे के नीचे दबने से मौके पर ही मौत हो गई। मृतकों के शवों को सिविल अस्पताल बरनाला के शव ग्रह में रखवाया गया है। वहीं चौथे युवक की तलाश के लिए राहत एवं बचाव कार्य जारी है। घटना के बाद इलाके में शोक की लहर दौड़ गई है, जबकि प्रशासन द्वारा मामले की जांच शुरू कर दी गई है।  

एमपी में 169 नगरीय निकायों में एल्डरमैन नियुक्त, 123 नगर परिषदों में 4-4 और 46 नगर पालिकाओं में 6-6 पार्षद मनोनीत

भोपाल  मध्य प्रदेश में शहरी स्थानीय निकायों को मजबूत करने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने एल्डरमैन की बड़े पैमाने पर नियुक्ति की है. राज्य की 123 नगर परिषदों में से प्रत्येक में चार-चार एल्डरमैन नियुक्त किए गए हैं, जिससे कुल 492 सदस्यों की नियुक्ति हुई है. इसके अलावा 169 अन्य शहरी स्थानीय निकायों में भी एल्डरमैन तैनात किए गए हैं. शहरी विकास एवं आवास विभाग ने इस संबंध में एक आधिकारिक आदेश जारी किया है।  कामकाज की देखरेख प्रशासन के प्रतिनिधियों के तौर पर एल्डरमैन नगर परिषदों के कामकाज की देखरेख करेंगे और विकास कार्यों को गति देने में अहम भूमिका निभाएंगे. इस नियुक्ति के माध्यम से पार्टी ने शहरी स्थानीय निकायों के भीतर अपने कार्यकर्ताओं को भी जिम्मेदारियां सौंपी हैं, जिससे संगठन और प्रशासन के बीच तालमेल और मजबूत हुआ है।  इन परिषदों की लिस्ट हुई जारी जारी की गई परिषदों की सूची में सागर, रीवा, मऊगंज, शहडोल, उमरिया, कटनी, डिंडोरी, नरसिंहपुर, बालाघाट, सिवनी, छिंदवाड़ा, पांढुर्ना, नर्मदापुरम, हरदा, बैतूल, बुरहानपुर, खरगोन, बड़वानी, अलीराजपुर, झाबुआ, धार, देवास, रतलाम, मंदसौर और नीमच शामिल हैं।  CM मोहन ने दी बधाई मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सभी नियुक्त एल्डरमैन को बधाई देते हुए लिखा कि, मध्यप्रदेश के 169 नगरीय निकायों में नव-नियुक्त एल्डरमैन साथियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं. आप सभी को शहरों के समग्र विकास, सुशासन और जन-भागीदारी को बढ़ाने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है. मुझे विश्वास है कि ‘विकसित मध्यप्रदेश-विकसित भारत’ के संकल्प के साथ आप सभी अपनी ऊर्जा, अनुभव और समर्पण से अपने-अपने नगरों में प्रगति के नये आयाम जोड़ेंगे. नागरिकों की अपेक्षाओं पर शत प्रतिशत खरा उतरेंगे।  चंबल और बुंदेलखंड में लिस्ट होल्ड नव-नियुक्त पार्षदों का कार्यकाल वर्तमान परिषद के कार्यकाल के साथ ही समाप्त हो जाएगा और अगले आदेश तक प्रभावी रहेगा. प्रत्येक नगर परिषद में अधिकतम चार एल्डरमैन नियुक्त किए गए हैं. चंबल और बुंदेलखंड क्षेत्रों के लिए सूचियों को फिलहाल रोककर (होल्ड) रखा गया है. कई नगरीय निकायों में नामों को लेकर आम सहमति न बन पाने के कारण सूचियों को फिलहाल के लिए रोक दिया गया है।  एल्डरमैन कैसे चुने जाते हैं? एल्डरमैन नगरीय निकाय (नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायत) के अंतर्गत मनोनीत (नियुक्त) पार्षद होते हैं. इनका चुनाव जनता द्वारा सीधे तौर पर नहीं किया जाता, बल्कि इनकी नियुक्ति सरकार या संबंधित प्राधिकारी द्वारा की जाती है. ये शहरी स्थानीय निकाय की बैठकों में भाग लेते हैं और अपनी राय देते हैं।  25 जिलों के 123 नगर परिषदों की पहली लिस्ट चंबल, बुंदेलखंड में फिलहाल लिस्ट होल्ड रखी गई है। कई निकायों में नामों को लेकर सहमति न बन पाने के कारण फिलहाल लिस्ट होल्ड रखी गई है। एल्डरमैन के नामों की घोषणा नगरीय निकाय में सबसे शुरुआती इकाई यानी नगर परिषद से की गई है। इन जिलों के नगर परिषदों के एल्डरमैन जारी हुई सूची सागर, रीवा, मऊगंज, शहडोल, उमरिया, कटनी, डिंडोरी, नरसिंहपुर, बालाघाट, सिवनी, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, नर्मदापुरम, हरदा, बैतूल, बुरहानपुर, खरगोन, बड़वानी, आलीराजपुर, झाबुआ, धार,देवास, रतलाम, मंदसौर, नीमच इन नामों की हुई घोषणा जिला: सागर नगर परिषद कर्रापुर: प्रभु सिंह, कमलेशरानी राय, श्रीपाल जैन, विक्रम सिंह नगर परिषद बिलहरा: मनीष गर्ग, राजू पटेल, पुष्पेन्द्र ठाकुर, हीरालाल अहिरवार पेंटर नगर परिषद सुरखी: अरुण गौतम, गोपाल पटैल, अभय जैन, विजय सिंह लोधी नगर परिषद राहतगढ़: अर्पित जैन चौधरी, सोनू सोती, पूरनदास कबीरपंथी, अनुराग चौरसिया जिला: रीवा नगर परिषद् वैकुण्ठपुर: कैलाश बारी, बहादुर सिंह, सीमा पाण्डेय, सतीश रजक नगर परिषद् सिरमौर: उर्मिला सिंह, सविता कोल, लालपति लोध नगर परिषद् डभौरा: लीलावती विश्वकर्मा, बृजनाथ साहू, ज्योति केशरवानी, भूपनारायण मिश्रा नगर परिषद् सेमरिया: गीता देवी विश्वकर्मा, बनारसी दास गुप्ता, मुकेश कुशवाहा, विमलेश द्विवेदी, राजकुमार सेन नगर परिषद् त्योंथर: सतीश तिवारी, मंगलेश्वर सिंह, पुष्पा देवी, अभयनाथ श्रीवास्तव नगर परिषद् चाकघाट: उमाशंकर केशरवानी, सौखीलाल सोनी, दीपिका नामदेव, पंकजदत्त त्रिपाठी नगर परिषद् मनगवां: पूनम बंसल, कुसुमलता वर्मा, भागवत प्रसाद द्विवेदी, लवकुश गुप्ता नगर परिषद् गोविन्दगढ़: नरेन्द्र बुधौलिया, ब्रम्हानन्द पाण्डेय, श्रीनिवास साकेत, शैलेन्द्र सोनी नगर परिषद् गुढ: शंभु प्रसाद लोनिया, शैलेन्द्र कुमार बंसल, खुशबू कोरी, रामप्रसाद गुप्ता जिला: मऊगंज नगर परिषद् नई गढ़ी: श्याम सुन्दर गुप्ता, ललित कुमार पटेल, विजय शंकर यादव, रामपाल सिंह जिला: शहडोल नगर परिषद् बुढार: तारा शर्मा, अशोक वैश, संजू पात्रीक, रविकांत चौरसिया नगर परिषद् बकहो: पंकज नापित, अनिल वर्मा, राहुल जैन, रजनीश प्रसाद मिश्रा नगर परिषद् ब्यौहारी: नीता साहू, विश्वनाथ कोल, प्रशांत गुप्ता, मनोज शुक्ला नगर परिषद् खाँड (बाणसागर): रामपाल गौतमा, शारदा प्रसाद गुप्ता, अरुणा केवट, रामबाबू पनिका नगर परिषद् जयसिंहनगर: रामलाल खटीक, चंद्रशेखर नामदेव, रामनिवास तिवारी, देवकी सोनी जिला: उमरिया नगर परिषद् नौरोजाबाद: झाला नरेश पटेल, गणेश सिंह, शिवनारायण गौतम, तीर्थबती कोल नगर परिषद् चंदिया: संजय यादव, राजकुमारी तिवारी, राकेश वर्मा, गोविन्द कोल नगर परिषद् मानपुर: हरीश विश्वकर्मा, रसिक खण्डेलवाल, रामनिधि शुक्ला, अमर बैगा जिला: कटनी नगर परिषद कैमोर: शोभा सोनी, अरुण गुप्ता, सुनीता मुंगेरिया, किरण बर्मन नगर परिषद बरही: किरण पटेल, रजनीश नामदेव, रघुनाथ प्रसाद गुप्ता, मनोज रावत कोल नगर परिषद विजयराघवगढ़: राकेश पाण्डेय, भारत कोल, महेन्द्र ताम्रकार, रोशनी सोनी जिला: डिण्डोरी नगर परिषद् शहपुरा: राजेश साहू, मनोज सोनी, हारून मंसूरी, रामलाल रजक नगर परिषद् डिण्डौरी: कुवरिया मरावी, सुदील बरगैया, मोहन सिंह राठौर, आशीष सोनी जिला: नरसिंहपुर नगर परिषद सालीचौका: पंकज सहेला, राजेन्द्र वर्मा, सरस्वती विश्वकर्मा, भैरो प्रसाद गहरा नगर परिषद चीचली: कैलाश काशीवाले, चंद्रकांत गुप्ता, जगदीश कौरव, कलाबाई मेहरा नगर परिषद् साईखेड़ा: सुरेन्द्र सिंह तोमर, मोहन पटेल, शांति राजपूत, ब्रजेश चौधरी नगर परिषद तेंदूखेड़ा: परषोत्तम पटेल, राजू पाली, मनीष चौबे, ठाकुर दास हरिजन जिला: बालाघाट नगर परिषद बैहर: राजेश उइके, प्रिती मेरावी, राजेश्वर कदम, किर्ती शुक्ला नगर परिषद कटंगी: प्रगति बिसेन, संजय वाघमारे, प्रितम खटवानी, चंदन खरे नगर परिषद लांजी: आलोक चौरसिया, सुशीला दुग्गड, प्रगति पालिवाल, अविनाश रैच जिला: सिवनी नगर परिषद बरघाट: राजेन्द्र ठाकुर, किरण टेंभरे, रमन लुधियाना, प्रदीप ठाकुर नगर परिषद छपारा: स्वर्णिम साहू, रेखा जावरे, सुनील दत्त पाठक, दिनेश लोधी नगर परिषद लखनादौन: आशीष गोल्हानी, देवेन्द्र जैन, प्रकाश सोनी, नरेश सेन नगर परिषद केवलारी: सुधीर पाण्डेय, राजकुमार बघेल, त्रिवेणी दमाहे, संजय तिवारी जिला: छिंदवाडा नगर परिषद हर्रई: योगेन्द्र शर्मा, मनबोध बघेल, अशोक ठाकुर, नितिन चौरसिया नगर परिषद चांद: रमाकांत सिंग लोधी, ओम चौरसिया, तुलसीराम साहू, मुकेश चौरिया नगर परिषद् बिछुआ: भजनलाल गाकरे, चुकन प्रसाद विश्वकर्मा, रघुराज सिंग रघुवंशी, गणेश चौरागढ़े नगर परिषद् चांदामेटा बूटरिया: मनीष जैन, विक्रम सिंह गौर, उमेश … Read more

डेडलाइन से पहले सुकमा में भिड़ंत, सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता; एक नक्सली मारा गया

सुकमा. केंद्र सरकार द्वारा देश से नक्सलवाद को जड़ से खत्म करने के लिए तय की गई 31 मार्च 2026 की समयसीमा अब नजदीक आ गई है। इस डेडलाइन को पूरा होने में अब केवल दो दिन बचे हैं। इसी बीच सुकमा जिले से बड़ी खबर सामने आई है। यहां गट्टापाड़ क्षेत्र में सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हुआ है। इस मुठभेड़ में एक नक्सली के मारे जाने की खबर सामने आई है। मिली जानकारी के अनुसार, सुरक्षा बलों को गट्टापाड़ इलाके में नक्सलियों की मौजूदगी की सूचना मिली थी, जिसके बाद सर्च ऑपरेशन चलाया गया। इसी दौरान आज सुबह नक्सलियों ने फायरिंग शुरू कर दी, जिसके जवाब में सुरक्षा बलों ने भी मोर्चा संभाला। जंगलों के बीच दोनों ओर से गोलीबारी चलती रही। वहीं इस मुठभेड़ में एक नक्सली के मारे जाने की सूचना है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। फिलहाल, इलाके में सुरक्षा बलों द्वारा सर्च ऑपरेशन तेज कर दिया गया है। इस पूरे ऑपरेशन की मॉनिटरिंग सुकमा एसपी किरण चव्हाण कर रहे हैं। जानकारी के मुताबिक, घटना स्थल से सुरक्षाबलों ने .303 राइफल भी बरामद की है. इलाके में सर्च ऑपरेशन तेज कर दिया गया है. जवान जंगल में नक्सलियों की घेराबंदी में जुटे हैं.  इस पूरे ऑपरेशन को सुकमा एसपी किरण चव्हाण लीड कर रहे हैं. फिलहाल, सुरक्षा कारणों से ऑपरेशन से जुड़ी ज्यादा जानकारी साझा नहीं की गई है. यह बताया गया कि मुठभेड़ में 5 लाख रुपये के इनामी नक्सली को मार दिया गया है. मुठभेड़ अभी जारी है, सर्च के बाद ही कुछ कहा जा सकेगा. पूर्व नक्सलियों की साथियों से अपील इससे पहले शनिवार को कांकेर में परतापुर थाना में आत्मसमर्पण करने वाले तीन नक्सलियों ने अपने साथियों से मुख्यधारा में लौटने की अपील की है. उन्होंने गोंडी भाषा में पत्र लिखकर लीडर चंदर और रूपी को संबोधित करते हुए कहा कि हथियार छोड़कर परिवार के साथ सामान्य जीवन जीना ही बेहतर है. नक्सलियों ने जंगल की कठिन जिंदगी और लगातार खतरे का जिक्र करते हुए बाकी साथियों से भी जल्द सरेंडर करने की अपील की है.