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पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने हटाई सेना के जवानों की डिसेबिलिटी पेंशन पर रोक

चंडीगढ़  भारतीय सेना के जवानों के हितों की रक्षा करते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सशस्त्र बलों के सदस्यों को दी जाने वाली डिसेबिलिटी पेंशन (Disability Pension) को तकनीकी आधार पर नहीं रोका जा सकता। अदालत ने केंद्र सरकार और सैन्य अधिकारियों को फटकार लगाते हुए निर्देश दिया है कि सेवा के दौरान दिव्यांग हुए जवानों को उनका जायज हक तुरंत दिया जाए। यह फैसला उन हजारों पूर्व सैनिकों के लिए उम्मीद की किरण लेकर आया है जो लंबे समय से कानूनी लड़ाई लड़ रहे थे। 1. कोर्ट का कड़ा रुख: "सेवा की परिस्थितियों को नजरअंदाज नहीं कर सकते" हाई कोर्ट की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि सेना की ड्यूटी अत्यंत कठिन परिस्थितियों में होती है। यदि कोई जवान सेवा के दौरान किसी शारीरिक अक्षमता या बीमारी का शिकार होता है, तो यह माना जाना चाहिए कि वह 'Attributable to Military Service' (सैन्य सेवा के कारण) है। कोर्ट ने उन दलीलों को खारिज कर दिया जिनमें कहा गया था कि जवान की बीमारी का ड्यूटी से सीधा संबंध नहीं है। 2. पेंशन रोकने के नियमों पर सवाल अदालत ने पाया कि कई मामलों में सैन्य अधिकारियों द्वारा पेंशन के दावों को यह कहकर खारिज कर दिया जाता है कि दिव्यांगता 'अग्रवेटेड' (Aggravated) नहीं है। हाई कोर्ट ने साफ किया कि अगर मेडिकल बोर्ड ने भर्ती के समय जवान को पूरी तरह फिट घोषित किया था, तो सेवा के दौरान पैदा हुई किसी भी अक्षमता के लिए विभाग ही जिम्मेदार है। 3. पूर्व सैनिकों को मिलेगी बड़ी राहत इस फैसले के बाद अब उन जवानों के लिए पेंशन का रास्ता साफ हो गया है जिन्हें 'डिस्चार्ज' के समय मेडिकल ग्राउंड पर अनफिट घोषित कर घर भेज दिया गया था। कोर्ट ने आदेश दिया है कि पिछले बकाया (Arrears) के साथ पेंशन का भुगतान निर्धारित समय सीमा के भीतर किया जाए। 4. सैन्य नियमों की व्याख्या में स्पष्टता हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि कल्याणकारी नियमों की व्याख्या हमेशा लाभार्थी (जवान) के पक्ष में होनी चाहिए। प्रशासन को संवेदनशीलता दिखाते हुए ऐसे मामलों में अनावश्यक मुकदमेबाजी से बचना चाहिए।

पटना हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: दुलारचंद मर्डर केस में अनंत सिंह के भतीजों को मिली अग्रिम जमानत

पटना  दुलारचंद यादव हत्याकांड में पटना हाई कोर्ट (Patna High Court) से जेडीयू विधायक अनंत सिंह के भतीजे राजवीर सिंह और करमवीर सिंह को बड़ी राहत मिली है। अदालत ने दोनों की अग्रिम जमानत याचिका मंजूर कर ली है। न्यायाधीश प्रभात कुमार सिंह की एकलपीठ ने वरीय अधिवक्ता नरेश दीक्षित और अधिवक्ता कुमार हर्षवर्दन को सुनते हुए उक्त आदेश पारित किया। इससे पहले, इसी मामले में 19 मार्च को अनंत सिंह को भी हाईकोर्ट से नियमित जमानत मिल चुकी है। वह 2 नवंबर 2025 से बेऊर जेल में बंद थे और करीब साढ़े चार महीने बाद उन्हें राहत मिली थी। मामला 30 अक्टूबर 2025 का है। मोकामा के घोसवरी थाना क्षेत्र के बसावनचक गांव में चुनाव प्रचार के दौरान जन सुराज समर्थक दुलारचंद यादव की हत्या कर दी गई थी। राजवीर और कर्मवीर पर क्या आरोप हैं? राजवीर सिंह और कर्मवीर सिंह पर आरोप है कि उन्होंने जबरदस्ती दुलारचन्द को गाड़ी से खींच लिया और अनंत सिंह ने जान मारने की नियत से उनके बाएं पैर पर चला दी थी, इसके पश्चात दुलारचंद की मृत्यु हो गई थी। प्राथमिकी में अनंत सिंह, उनके भतीजे राजवीर और करमवीर सिंह समेत अन्य को नामजद किया गया था। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि दोनों को राजनीतिक द्वेषवश फंसाया गया है और उनके खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य नहीं है। वहीं, अभियोजन पक्ष ने जमानत का विरोध करते हुए आरोपों की गंभीरता का हवाला दिया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और केस डायरी का अवलोकन करने के बाद अदालत नेपी दोनों को अग्रिम जमानत दे दी। अदालत ने निर्देश दिया कि अभियुक्त जांच में सहयोग करेंगे।  

रतलाम में अंतर्राज्यीय ड्रग नेटवर्क पर करारा प्रहार, कई गिरफ्तार

रतलाम में अंतर्राज्यीय ड्रग नेटवर्क पर करारा प्रहार एमडीएमए निर्माण फैक्ट्री का भंडाफोड़, 500 ग्राम एमडी व ब्राउन शुगर सहित आरोपी गिरफ्तार लगभग 80 लाख रुपये से अधिक का मादक पदार्थ व वाहन जप्त रतलाम पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा अवैध मादक पदार्थों के विरुद्ध सख्त एवं सतत कार्यवाही जारी है। इसी क्रम में रतलाम जिले में विगत दो दिनों में पुलिस द्वारा एक के बाद एक प्रभावी कार्रवाई करते हुए न केवल ड्रग तस्करों को गिरफ्तार किया गया, बल्कि एक संगठित सिंथेटिक ड्रग निर्माण नेटवर्क का भी भंडाफोड़ किया गया है, जो प्रदेश में मादक पदार्थों के विरुद्ध चल रही मुहिम की बड़ी सफलता है। यह कार्यवाही पुलिस अधीक्षक रतलाम अमित कुमार के निर्देशन में थाना रिंगनोद पुलिस तथा थाना पिपलोदा पुलिस द्वारा की गई हैं। 31 मार्च को थाना पिपलोदा क्षेत्र के ग्राम बोरखेड़ा में पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए अवैध एमडी (MDMA) सिंथेटिक ड्रग निर्माण फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया है। एक पोल्ट्री फार्म की आड़ में संचालित इस अवैध लैब पर दबिश देकर पुलिस ने लगभग 175 किलोग्राम रासायनिक पदार्थ, 200 ग्राम तैयार एमडीएमए, गैस सिलेंडर, हीट गन, स्टोव एवं अन्य ड्रग निर्माण सहित 24 लाख रूपए से अधिक की संपत्ति जब्‍त की है। इस कार्रवाई में मुख्य सरगना जमशेद खान उर्फ “जमशेद लाला” उर्फ “जमशेद सेठ” को गिरफ्तार किया गया। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी जमशेद लाला एक अंतर्राज्यीय ड्रग नेटवर्क का प्रमुख संचालक है, जिसके विरुद्ध विभिन्न राज्यों में आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं। पूछताछ में यह भी ज्ञात हुआ है कि ड्रग निर्माण हेतु रसायनों की आपूर्ति राजस्थान के प्रतापगढ़ क्षेत्र से की जा रही थी तथा घटना से पूर्व बड़ी मात्रा में एमडी की सप्लाई भी की जा चुकी थी। इसी प्रकार 29 मार्च को पुलिस चौकी माननखेड़ा थाना रिंगनोद द्वारा मुखबिर सूचना के आधार पर फोरलेन रोड पर घेराबंदी कर बोलेरो पिकअप वाहन से 500 ग्राम एमडी ड्रग्स (कीमत लगभग 50 लाख रुपये) जब्‍त करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। साथ ही घटना में प्रयुक्त बोलेरो वाहन (कीमत लगभग 5 लाख रुपये) भी जप्त किया गया। इस प्रकार पुलिस ने लगभग 55 लाख रुपये की संपत्ति जप्त की है। इसी दिन एक अन्‍य कार्यवाही में थाना रिंगनोद पुलिस द्वारा 100 ग्राम ब्राउन शुगर (कीमत लगभग 1 लाख रुपये) साथ एक आरोपी को मोटरसाइकिल सहित गिरफ्तार किया है। आरोपी से कुल 1 लाख 50 हजार रुपये की संपत्ति  जप्त की गई। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व भी रतलाम जिले में एमडीएमए निर्माण फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया जा चुका है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि क्षेत्र में संगठित ड्रग नेटवर्क सक्रिय रहा है, जिस पर मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा लगातार प्रभावी कार्यवाही की जा रही है। पुलिस द्वारा मादक पदार्थों के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए संपूर्ण सप्लाई चेन को ध्वस्त करने, नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी तथा अवैध संपत्ति के विरुद्ध कार्रवाई हेतु विस्तृत विवेचना की जा रही है। यह कार्रवाई प्रदेश में नशे के कारोबार के खिलाफ पुलिस की दृढ़ प्रतिबद्धता एवं प्रभावी रणनीति को दर्शाती है।  

रेल यात्रियों को राहत: गया-सासाराम से सीधे बक्सर पहुंचेंगी ट्रेनें, बनेगा नया डीडीयू बाईपास लिंक

बक्सर. पूर्व मध्य रेलवे के इंजीनियरिंग विभाग ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय (डीडीयू) जंक्शन पर ट्रेनों के बढ़ते दबाव को कम करने और परिचालन को सुगम बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। डीडीयू बाईपास लाइन को सुदृढ़ करने के लिए डीडीयू-दानापुर रेलखंड के ईस्ट आउटर केबिन (ईओसी) से डीडीयू-गया लाइन के फ्लाईओवर केबिन (एफओसी) तक नई ब्राड गेज (बीजी) रेल लाइन निर्माण के लिए ई-टेंडर जारी कर दिया गया है। यह परियोजना बक्सर से भभुआ रोड और सासाराम के रास्ते गया तक निर्बाध रेल संपर्कता प्रदान करेगी। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य बक्सर ताप बिजली घर को सुगम परिवहन के माध्यम से कोयले की आपूर्ति करना है। इसके जरिए गढ़वा या गया की तरफ से आने वाली मालगाड़ियां बिना डीडीयू जंक्शन के यार्ड में प्रवेश किए बाहर से ही बक्सर की तरफ निकल सकेंगी। इससे इंजन रिवर्सल की समस्या भी नहीं रहेगी। ट्रेन गंज ख्वाजा स्टेशन से सीधे कुछमन पहुंचेगी। परियोजना की मुख्य विशेषताएं और लागत रेलवे द्वारा जारी टेंडर के अनुसार, इस नई रेल लाइन की कुल लंबाई 2.666 किलोमीटर होगी। इस महत्वपूर्ण परियोजना की अनुमानित लागत 11.58 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है। चयनित एजेंसी को काम शुरू होने के छह महीने के भीतर निर्माण कार्य पूरा करना होगा। इस प्रोजेक्ट के तहत व्यापक स्तर पर तकनीकी कार्य किए जाएंगे, जिनमें भारी पैमाने पर मिट्टी भराई (अर्थवर्क), पुलों के सब-स्ट्रक्चर और सुपर-स्ट्रक्चर का निर्माण, रेल ट्रैक बिछाना, बैलास्टिंग और वेल्डिंग, सीमेंट, स्टील की आपूर्ति और ट्रैक फिटिंग शामिल है। बक्सर थर्मल पावर प्लांट को होगा सीधा लाभ इस बाईपास लाइन के निर्माण का सबसे बड़ा रणनीतिक लाभ बक्सर (चौसा) स्थित थर्मल पावर प्लांट को मिलेगा। धनबाद की ओर से आने वाली कोयला लदी मालगाड़ियों को अब डीडीयू जंक्शन के मुख्य यार्ड में आने की आवश्यकता नहीं होगी। ये ट्रेनें बाईपास के जरिए सीधे डीडीयू-पटना रेलखंड पर चौसा के पास स्थित पावर प्लांट तक पहुंच सकेंगी, जिससे कोयला आपूर्ति की प्रक्रिया तेज और निर्बाध हो जाएगी। आपको बता दें कि बक्सर ताप बिजली घर को निर्बाध कोयला आपूर्ति के लिए एक ऐसी ही व्यवस्था आरा जंक्शन के पास डीडीयू-पटना रेलखंड के जगजीवन हाल्ट और आरा-सासाराम रेलखंड के उदवंतनगर के बीच भी की जा रही है। वहां भी बाईपास लाइन के जरिए ऐसी व्यवस्था की जा रही है, जिससे सासाराम से आने वाली ट्रेन बिना आरा जंक्शन जाए और बिना इंजन रिवर्स किए बक्सर की तरफ जा सके। परिचालन में सुधार और दबाव में कमी वर्तमान में डीडीयू जंक्शन पर प्रतिदिन लगभग 175 यात्री ट्रेनों और 150 मालगाड़ियों का आवागमन होता है। इस नई लाइन के शुरू होने से डीडीयू जंक्शन परिसर की मुख्य लाइन पर दबाव कम होगा। इससे एक वैकल्पिक मार्ग विकसित होगा और किसी भी आपात स्थिति में ट्रेनों को बाईपास के जरिए पटना और गया रेलखंड की ओर मोड़ा जा सकेगा। बिजली घर की तीसरी यूनिट जल्दी ही शुरू होने की उम्मीद बक्सर ताप बिजली घर 1320 मेगावाट की कोयला आधारित बिजली परियोजना है। यहां 660-660 मेगावाट की दो बिजली उत्पादन यूनिट की स्थापना होनी है। इनमें से एक यूनिट बीते नवंबर महीने में औपचारिक रूप से कार्यशील हो चुकी है। इसका उद्घाटन बीते 22 अगस्त को ही गयाजी में आयोजित समारोह में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किया था। परियोजना की दूसरी यूनिट का निर्माण भी लगभग पूरा हो चला है। जल्दी ही इससे भी उत्पादन शुरू करने की तैयारी है। इसे कार्यशील करने के लिए निर्बाध तरीके से कोयले की आपूर्ति आवश्यक होगी। इसमें प्रतिदिन दो रैक कोयले की खपत का अनुमान है। बक्सर-सासाराम-गया-बिहटा-आरा-बक्सर ट्रेन की बनेगी गुंजाइश यह नई बाईपास रेल लाइन परियोजना शाहाबाद और मगध क्षेत्र के बीच महत्वपूर्ण कड़ी बन सकती है। फिलहाल बक्सर और आरा जिले के लोगों के लिए जहानाबाद, गया की सीधी ट्रेन सेवा नहीं है। बक्सर के लिए तो सासाराम और कैमूर की भी सीधी ट्रेन सेवा नहीं है। डीडीयू बाईपास और बिहटा-दनियांवा रेल लाइन के माध्यम से यह समस्या दूर हो सकती है। आईएमए के पूर्व अध्यक्ष डॉ. महेंद्र प्रसाद, शिक्षाविद निर्मल सिंह, सरोज सिंह आदि का कहना है कि बक्सर-कुछमन-चंदौली-सासाराम-गया-जहानाबाद-जट डुमरी-बिहटा-आरा-बक्सर होते हुए इस क्षेत्र में लोकल ट्रेनें चलाना संभव हो सकेगा। इससे सात से आठ जिले को लोगों को लाभ मिल सकेगा।

राज्यपाल पटेल बोले: रोगियों के उपचार में सेवा भाव की भूमिका अहम

रोगियों के उपचार प्रयासों में सेवा भाव प्रमुख : राज्यपाल पटेल राज्यपाल ने की लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण और आयुष विभाग की समीक्षा भोपाल राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि दीन-दुखियों की सेवा मानवता की सेवा है। इससे आत्म संतोष मिलता है। प्रदेश को सिकल सेल और टी.बी. मुक्त बनाने के प्रयासों में सेवा भाव को सर्वोपरि होना चाहिए।    राज्यपाल पटेल मंगलवार को लोकभवन में सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन 2047 एवं टी.बी. मुक्त भारत अभियान के तहत लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण और आयुष विभाग की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। जनजातीय प्रकोष्ठ द्वारा जवाहर खण्ड सभागार में आयोजित बैठक में उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल और आयुष मंत्री इंदर सिंह परमार भी मौजूद थे। राज्यपाल पटेल ने कहा कि सिकल सेल रोगियों को आयुष्मान योजना के तहत दी जाने वाली सुविधाएं और पात्रता आदि की समुचित जानकारी दें। प्रदेश स्तरीय सिकल सेल उन्मूलन कार्यक्रम के तहत शून्य से 40 वर्ष तक के व्यक्तियों की विशेष तौर पर जाँच करें। जाँच शिविरों में आमजन को बताएँ कि आयुष्मान भारत योजना के तहत सिकल सेल एनीमिया का इलाज कवर होता है। उन्होंने आयुष्मान योजना के तहत सिकल सेल रोगियों के इलाज की जिलेवार समीक्षा की। जन प्रतिनिधि पोषण आहार वितरण में करें सक्रिय सहयोग राज्यपाल पटेल ने बैठक में टी.बी. उन्मूलन कार्यक्रम की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने कहा कि प्रदेश को टी.बी. मुक्त बनाने स्थानीय जन प्रतिनिधियों का सहयोग अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि विशेष कर जनजातीय क्षेत्रों के जन प्रतिनिधि टी.बी. रोगियों को पोषण आहार वितरण में सक्रिय सहयोग करें। राज्यपाल पटेल ने नि:क्षय मित्रों की जिलेवार समीक्षा की। उन्होंने जनजातीय क्षेत्रों में और अधिक नि:क्षय मित्रों को जोड़कर पोषण आहार वितरण को बढ़ाने के प्रयासों पर बल देने के निर्देश दिए है।  खनन क्षेत्रों में भी कराएं टी.बी. की सघन जाँच राज्यपाल पटेल ने खनन क्षेत्रों में निवासरत और कार्यरत व्यक्तियों की टी.बी. जाँच कराने के निर्देश भी दिए। उन्होंने सिकल सेल जाँच लक्ष्य एवं पूर्ति, जेनेटिक कार्ड वितरण, हाईड्राक्सी यूरिया की उपलब्धता, गर्भावस्था में माताओं और शिशुओं का सिकल सेल प्रबंधन, सिकल सेल रोगियों को आयुष्मान कार्ड वितरण, आयुष्मान योजना का लाभ, दिव्यांगता प्रमाण पत्र वितरण, 125 दिवसीय सिकल सेल जागरूकता अभियान आदि विस्तार से समीक्षा कर जरूरी निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री और लोक स्वास्थ्य परिवार कल्याण मंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने आयुष्मान कार्ड की प्रगति, सिकल सेल और टी.बी. उन्मूलन कार्यक्रम के विभिन्न मानको को शत-प्रतिशत पूरा करने विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए। राज्यपाल पटेल को आयुष विभाग के प्रमुख सचिव शोभित जैन ने जिलेवार दवा वितरण, घर-घर दवाई वितरण, जाँच आदि कार्यक्रमों की विस्तार से जानकारी दी। जैन ने अनुसूचित जनजाति बाहुल्य जिलों में औषधि वितरण के विशेष प्रयासों और नवाचारों की जानकारी भी दी। राज्यपाल पटेल को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की संचालक डॉ. सलोनी सिडाना ने राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम की उपलब्धियों, सघन स्क्रीनिंग, 100 दिवसीय नि:क्षय अभियान, नि:क्षय मित्र, पोषण आहार वितरण आदि की जानकारी दी। राज्यपाल पटेल के निर्देशानुसार प्रारंभ किए गए अनुसूचित जनजाति छात्रावासों में विद्यार्थियों की टी.बी. जाँच, परामर्श, उपचार आदि के बारे में भी बताया। बैठक में जनजातीय प्रकोष्ठ के अध्यक्ष दीपक खांडेकर, लोक स्वास्थ्य परिवार कल्याण के अपर मुख्य सचिव अशोक कुमार बर्णवाल, राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी, जनजातीय प्रकोष्ठ की सचिव श्रीमती मीनाक्षी सिंह, लोक स्वास्थ्य परिवार कल्याण एवं आयुष विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और लोकभवन के अधिकारी मौजूद रहे।    

राज्यसभा उपसभापति का बयान: ‘विकसित भारत के लिए 66 साल का सफर, कई देशों में लॉकडाउन, भारत में हालात सामान्य’

भोपाल  भोपाल में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के युवा विधायकों के सम्मेलन का समापन सत्र चल रहा है। कार्यक्रम में राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश सिंह बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। उन्होंने मध्य प्रदेश विधानसभा की त्रैमासिक पत्रिका का विमोचन किया। इस बीच उन्होंने कहा कि विकसित भारत का सपना देखने में 66 साल लगा दिए गए। कई देशों में आज लॉकडाउन जैसे हालात लेकिन भारत आराम से चल रहा है। एक समय था जब दुनिया के अर्थशास्त्री, जिन्हें हम बहुत मानते थे- यह कहते थे कि भारत 2 से 3 प्रतिशत से अधिक विकास नहीं कर सकता। इसे “हिंदू ग्रोथ रेट” कहा जाता था। उस समय यह भी माना जाता था कि केवल अलग तरह की राजनीतिक व्यवस्थाओं वाले देश ही तेजी से आगे बढ़ सकते हैं। लेकिन आज भारत ने लोकतांत्रिक व्यवस्था में दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होकर यह साबित कर दिया है कि लोकतंत्र में भी तेज विकास संभव है। उन्होंने कहा कि भारत ने यह भी सिद्ध किया है कि सही नीतियों और संकल्प के साथ देश तेजी से तरक्की कर सकता है। विधानसभा अध्यक्ष बोले- छतीसगढ़ अलग हुआ तो आंखों में आंसू थे वहीं, विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने बताया कि दो दिनों तक चले इस सम्मेलन में अलग-अलग विचारधाराओं के विधायकों ने अपनी सीमाओं से ऊपर उठकर विषय के अंतर्गत अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि सम्मेलन में टेक्नोलॉजी के उपयोग, स्वच्छता कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने, सोलर एनर्जी को बढ़ावा देने, शिक्षा के विस्तार के साथ उसकी गुणवत्ता सुधारने, व आधारभूत संरचना के विकास जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। तोमर ने कहा कि, मुझे वह क्षण आज भी याद है जब छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश विधानसभा से अलग हुआ। उस दिन मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के सभी विधायकों की आंखों में आंसुओं के अलावा कुछ नहीं था। इसीलिए आज भी दोनों राज्यों के बीच वही आत्मीयता बनी हुई है। उज्जैन जाएंगे विधायक युवा विधायक सम्मेलन का समापन होने के बाद विधायक उज्जैन में भगवान महाकाल के दर्शन करने जाएंगे। सोमवार को मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने इस सम्मेलन का उद्घाटन किया था। एमपी के विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर, राजस्थान के विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी, संसदीय कार्यमंत्री कैलाश विजयवर्गीय और नेता प्रतिपक्ष मौजूद थे।

स्कूलों में बदला मिड डे मील मेनू, अब शनिवार को परोसी जाएगी पौष्टिक माह की दाल

लुधियाना. पंजाब स्टेट मिड-डे-मील सोसाइटी की ओर से पी.एम. पोषण स्कीम के तहत स्कूलों में दिए जाने वाले दोपहर के भोजन (मिड-डे-मील) के लिए साप्ताहिक मेन्यू जारी आकर दिया है। यह नया मेन्यू 1 से 30 अप्रैल तक लागू रहेगा। सोसाइटी के जनरल मैनेजर द्वारा जारी पत्र के अनुसार, स्कूल के विद्यार्थियों को कतार में बिठाकर मिड-डे-मील इंचार्ज की निगरानी में मेन्यू के अनुसार खाना खिलाना यकीनी बनाया जाए। आदेशों में स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी स्कूल में मेन्यू का पालन नहीं किया जाता या नियमों की अनदेखी होती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी स्कूल मुखी की होगी। इसके अलावा 'तिथि भोजन' के तहत गांव के सरपंच या दानी सज्जनों के सहयोग से विशेष अवसरों, त्यौहारों या जन्मदिन पर विद्यार्थियों को फल, मिठाई या विशेष भोजन देने के प्रयास करने के लिए भी कहा गया है। साप्ताहिक मेन्यू सोमवार : दाल और रोटी। मंगलवार : राजमाह-चावल और खीर। बुधवार : काले या सफेद चने (आलू के साथ) और पूरी या रोटी। गुरुवार : कढ़ी (आलू और प्याज के पकौड़ों के साथ) और चावल। शुक्रवार : मौसमी सब्जी, रोटी और मौसमी फल। शनिवार : साबुत माह की दाल और चावल। पी.टी.एम. के दौरान विद्यार्थियों को मिलेंगे आयुर्वेद के टिप्स पंजाब स्टेट मिड-डे-मील सोसाइटी की ओर से सरकारी स्कूलों के लिए नए निर्देश जारी किए गए हैं। इसके अनुसार अब स्कूलों में पेरैंट्स-टीचर मीटिंग वाले दिन विद्यार्थियों और अध्यापकों को आयुर्वेद के प्रति जागरूक करने के लिए विशेष लेक्चर आयोजित किए जाएंगे। पंजाब स्टेट फूड कमीशन के सुझाव पर आधारित इन निर्देशों में कहा गया है कि आयुर्वैदिक मैडीकल ऑफिसर अपने नजदीकी स्कूलों में जाकर बच्चों को आयुर्वेद के अनुसार खान-पान और रहन-सहन की जानकारी देंगे। स्कूल मुखियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे आयुष डॉक्टरों या आयुर्वेद के माहिर व्यक्तियों के माध्यम से ऐसे लेक्चर करवाने के प्रयास करें।

PACL घोटाले में ईडी की बड़ी कार्रवाई: 15,582 करोड़ की संपत्तियां लोढ़ा कमेटी को सौंपे गए

चंडीगढ  प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पर्ल्स एग्रीटेक कारपोरेशन लिमिटेड (पीएसीएल) मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए 15,582 करोड़ के अनुमानित बाजार मूल्य वाली 455 अचल संपत्तियों को जस्टिस आरएम लोढ़ा कमेटी को सौंपने की प्रक्रिया पूरी कर ली है। यह कार्रवाई प्रिवेंशन आफ मनी लान्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के तहत की गई है, जिसका उद्देश्य लाखों प्रभावित निवेशकों को उनकी राशि वापस दिलाना है। ईडी के अनुसार, चालू वित्त वर्ष में ही लगभग 26,324 करोड़ की संपत्तियां अटैच की गई हैं, जिससे इस मामले में कुल अटैचमेंट बढ़कर 27,030 करोड़ हो गई है। इनमें भारत के अलावा आस्ट्रेलिया सहित विदेशों में स्थित संपत्तियां भी शामिल हैं। ये संपत्तियां एमएस पीएसीएल लिमिटेड, उससे जुड़ी कंपनियों और दिवंगत निर्मल सिंह भंगू के परिवार व सहयोगियों बरिंदर कौर, हरसतिंदर पाल सिंह हेयर, सुखविंदर कौर, गुरप्रताप सिंह और प्रेम कौर के नाम पर पाई गई हैं। सीबीआइ ने 19 फरवरी 2014 को पर्ल्स ग्रुप (पीएसीएल और पीजीएफ लिमिटेड) और उसके प्रमोटरों पर लाखों निवेशकों से धोखाधड़ी करने के आरोप केस दर्ज किया था। सीबीआइ की चार्जशीट और पूरक चार्जशीट के अनुसार, दिवंगत निर्मल सिंह भंगू और उनके सहयोगियों के नियंत्रण में एक बड़े पैमाने पर अवैध कलेक्टिव इन्वेस्टमेंट स्कीम चलाई गई, जिसके जरिए देशभर से 68,000 करोड़ से अधिक की राशि जुटाई गई। इस स्कीम में निवेशकों से नकद और किस्तों में पैसा लेकर उन्हें भ्रामक दस्तावेज जैसे एग्रीमेंट, स्पेशल पावर आफ अटार्नी आदि पर हस्ताक्षर करवाए गए। कई मामलों में बिना जमीन के स्वामित्व के ही अलाटमेंट लेटर जारी किए गए, जिससे बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी हुई। करीब 48,000 करोड़ की राशि अब भी निवेशकों को लौटाई जानी बाकी है। सुप्रीम कोर्ट ने 2 फरवरी 2016 को सेबी को जस्टिस आरएम लोढ़ा (सेवानिवृत्त) की अध्यक्षता में कमेटी गठित करने का निर्देश दिया था, ताकि पीएसीएल की संपत्तियों को बेचकर निवेशकों को भुगतान किया जा सके। इसी मामले में ईडी ने 26 जुलाई 2016 मामला दर्ज कर जांच शुरू की। जांच में सामने आया कि अपराध से अर्जित धन को कई कंपनियों और सहयोगियों के जरिए घुमाकर भारत और विदेशों में संपत्तियां खरीदी गईं। इस मामले में कुछ आरोपितों के खिलाफ भगोड़ा की कार्यवाही शुरू की गई है। साथ ही, हरसतिंदर पाल सिंह हेयर को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि बरिंदर कौर और प्रेम कौर के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किए गए हैं। पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पर्ल ग्रुप घोटाले को गंभीरता से लेते हुए इसकी जांच के आदेश दिए थे। सरकार के निर्देश पर राज्य के सभी जिलों में पर्ल ग्रुप की संपत्तियों की पहचान करवाई गई और डिप्टी कमिश्नरों से रिपोर्ट मंगवाई गई। इसके आधार पर पंजाब में कंपनी की संपत्तियों की सूची भी तैयार की गई है, जो सुप्रीम कोर्ट और जस्टिस लोढ़ा कमेटी के निर्देशों के अनुरूप है।

विकास की रफ्तार,अदाणी-अंबानी के बाद अब टाटा पावर चमकाएगा गोरखपुर, 300 लोगों को मिलेगा रोजगार

गोरखपुर विकास की राह पर तेजी से आगे बढ़ते उत्तर प्रदेश के गोरखपुर शहर के लिए एक और गुड न्यूज है। यहां अदाणी और अंबानी ग्रुप के बाद टाटा पावर ने दिलचस्पी दिखाई है। टाटा पावर यहां 100 मेगावाट क्षमता का सोलर प्लांट लगाना चाहता है जिसके लिए सरकार उसे करीब 300 एकड़ जमीन मुहैया कराएगी। गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण ( गीडा) ने टाटा पावर को सोलर प्लांट के लिए यह जमीन मुहैया कराने की कवायद शुरू कर दी है। इसके लिए धुरियापार औद्योगिक कारिडोर में 300 एकड़ जमीन चिन्हित की गई है। जल्द टाटा पावर की तकनीकी टीम निरीक्षण को आएगी। जमीन पसंद आते ही आवंटन प्रक्रिया शुरू होगी। अदाणी और अंबानी समूह के बाद अब टाटा पावर कंपनी की ओर से 100 मेगावाट क्षमता का सोलर पावर प्लांट लगाने का प्रस्ताव दिया गया है। इस प्लांट पर लगभग 800 करोड़ रुपये के निवेश होंगे। परियोजना पूरी तरह से सौर ऊर्जा आधारित होगी, जिससे स्वच्छ और हरित ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा। सोलर प्लांट से हर साल करीब 20 करोड़ यूनिट बिजली का उत्पादन हो सकता है। गीडा अधिकारियों का कहना है कि कंपनी के प्रतिनिधि जल्द ही चिह्नित भूमि का निरीक्षण को धुरियापार आ सकते हैं। अनुमान है कि इस परियोजना से 300 से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिल सकता है। वायु गुणवत्ता सुधारने को 30.35 करोड़ केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के तहत गोरखपुर समेत उत्तर प्रदेश के 10 शहरों के लिए 163.70 करोड़ रुपये जारी किए हैं। यह धनराशि शहरों में बढ़ते वायु प्रदूषण को नियंत्रित कर वायु गुणवत्ता सुधारने के उद्देश्य से दी गई है। गोरखपुर को इस मद में 30.35 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं। राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के तहत पांच साल में गोरखपुर को 150.31 करोड़ रुपये मिले हैं जिनमें 82.28 करोड़ रुपये की धनराशि अब तक खर्च की जा चुकी है। क्या बोले गीडा के अधिकारी गीडा के एसीईओ राम प्रकाश ने कहा कि टाटा पावर कंपनी ने 800 करोड़ के निवेश से 100 मेगावाट क्षमता का सोलर प्लांट लगाने का प्रस्ताव दिया है। कंपनी की मांग के अनुसार 300 एकड़ जमीन चिह्नित कर ली गई है। जल्द ही प्रतिनिधियों को जमीन दिखा दी जाएगी।

मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश मिलकर लिखेंगे सुशासन और आध्यात्मिक पर्यटन की नई इबारत:CM यादव

मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश मिलकर लिखेंगे सुशासन और आध्यात्मिक पर्यटन की नई इबारत : मुख्यमंत्री डॉ. यादव बाबा विश्वनाथ से की प्रदेश की जनता की खुशहाली और निरंतर प्रगति की मंगलकामना क्रॉउड मैनेजमेंट, दर्शन व्यवस्था और मोबाइल ऐप आधारित टोकन सिस्टम का किया अवलोकन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वाराणसी में काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का किया भ्रमण भोपाल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में विकास की एक नई इबारत लिखी जा रही है। मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश की सरकारें "विरासत के साथ विकास" के मंत्र को आत्मसात करते हुए सुशासन और धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र में साझा संस्कृति विकसित कर रही हैं। यह न केवल दोनों राज्यों के संबंधों को प्रगाढ़ करेगा, बल्कि जन-कल्याण के नए मार्ग भी प्रशस्त करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने यह बात वाराणसी में विश्व प्रसिद्ध काशी विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर के भ्रमण के दौरान कही। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने वाराणसी भ्रमण की शुरूआत देवादिदेव महादेव काशी विश्वनाथ जी के दर्शन और पूजन के साथ किया। उन्होंने मंदिर के गर्भगृह में विधि-विधान से पूजन कर मध्यप्रदेश की जनता की खुशहाली और निरंतर प्रगति की मंगलकामना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पावन गंगा घाट पहुँचकर पतित पावनी माँ गंगा के दर्शन किए। उन्होंने श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ माँ गंगा का पूजन किया और गंगाजल से आचमन किया। दर्शन और पूजन के बाद उन्होंने कहा कि बाबा विश्वनाथ के धाम में आकर जो आध्यात्मिक शांति प्राप्त होती है, वह अद्भुत है। काशी-महाकाल के बीच व्यवस्थाओं का साझा संगम मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंगलवार को वाराणसी भ्रमण के दौरान विश्व प्रसिद्ध काशी विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर का भ्रमण किया। उन्होंने कहा कि बाबा विश्वनाथ और बाबा महाकाल के धामों के बीच व्यवस्थाओं के सुदृढ़ीकरण और सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए एक महत्वपूर्ण एमओयू (MOU) किया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य दर्शनार्थियों को सुगम और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंदिर परिसर में लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया। सिंहस्थ-2028 के लिए प्रबंधन का रोडमैप मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वाराणसी के अनुभवों को मध्यप्रदेश के उज्जैन में होने वाले आगामी सिंहस्थ-2028 के लिए अत्यंत प्रासंगिक बताया। उन्होंने काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट के न्यासियों के साथ बैठक की। बैठक में प्रेजेंटेशन से कॉरिडोर में तीर्थयात्री प्रबंधन, क्राउड कंट्रोल (भीड़ प्रबंधन), दर्शन व्यवस्था और मोबाइल ऐप आधारित टोकन सिस्टम का बारीकी से अवलोकन किया। उन्होंने कहा कि प्रयागराज कुंभ और काशी कॉरिडोर के प्रबंधन से सीख लेकर हम उज्जैन में श्रद्धालुओं के लिए दूरगामी योजनाएं तैयार कर रहे हैं। श्रद्धालुओं को दर्शन की उच्चतम और सुगम व्यवस्था देना हमारा लक्ष्य है। प्रेजेंटेशन से तीर्थ स्थल प्रबंधन की एसओपी (SOP) को समझा। इसमें रियल टाइम सीसीटीवी मॉनिटरिंग, जोन-बेस्ड क्राउड कंट्रोल, सुरक्षा प्रोटोकॉल और स्वच्छता प्रबंधन के आधुनिक तौर-तरीकों पर चर्चा की गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को इस अवसर पर काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट द्वारा 'ग्लोबल सनातन' पुस्तक भी भेंट की गई। वाराणसी में महानाट्य सम्राट विक्रमादित्य का भव्य मंचन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य के सुशासन और न्यायप्रियता को जन-जन तक पहुँचाने के लिए आगामी 3 से 5 अप्रैल तक वाराणसी में महानाट्य का मंचन किया जा रहा है। सम्राट विक्रमादित्य शोध संस्थान के माध्यम से आयोजित होने वाले इस महानाट्य में सैकड़ों कलाकार हिस्सा लेंगे, जिसमें हाथी, घोड़े और ऊंटों के साथ प्राचीन विधाओं का जीवंत प्रदर्शन होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच बढ़ते आर्थिक और बुनियादी ढांचे के सहयोग का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि केन-बेतवा लिंक परियोजना से दोनों राज्यों के किसानों का भाग्य बदल रहा है। दोनों राज्यों के किसानों को सस्ती और निर्बाध बिजली उपलब्ध होगी। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर भ्रमण और बैठक के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार के औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता 'नंदी', सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री राकेश सचान के साथ अपर मुख्य सचिव राघवेंद्र सिंह, सचिव पर्यटन डॉ. इलैया राजा टी, उज्जैन संभागायुक्त आशीष सिंह, वाराणसी कलेक्टर सत्येंद्र सिंह और काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट के सीईओ विश्व भूषण मिश्र सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।