samacharsecretary.com

संतों का संवाद, विवाद नहीं: ऋतेश्वर महाराज ने योगी सरकार की उपलब्धियां गिनाईं

सतना  प्रसिद्ध कथावाचक और आध्यात्मिक गुरु संत ऋतेश्वर धारकुंडी आश्रम जाने से पूर्व सतना जिले की धर्मनगरी चित्रकूट पहुंचे है। उनके साथ भारतीय कुश्ती संघ के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह भी मौजूद रहे। चित्रकूट प्रवास के दौरान उन्होंने मीडिया से खुलकर बातचीत की और उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था, संतों के बीच चल रहे वैचारिक मतभेदों और देश के सामाजिक मुद्दों पर अपनी बेबाक राय रखी। वे यहां से सतना जिले के धारकुंडी आश्रम के लिए रवाना हुए, जहां उन्होंने ब्रह्मलीन परमहंस स्वामी सच्चिदानंद जी महाराज की समाधि पर श्रद्धांजलि अर्पित की। जमकर की CM योगी की तारीफ उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था पर बोलते हुए ऋतेश्वर महाराज ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा योगी आदित्यनाथ एक संत-महंत भी हैं और एक कुशल प्रशासक भी। उनके नेतृत्व में उत्तर प्रदेश को भयमुक्त वातावरण मिला है, इस सच से कोई इनकार नहीं कर सकता। एक सन्यासी जब सत्ता संभालता है, तो वह राजधर्म का पालन पूरी निष्ठा से करता है। 'वादे वादे जायते बोध:' हाल के दिनों में संतों के बीच विभिन्न मुद्दों पर चल रही बयानबाजी और मतभिन्नता पर ऋतेश्वर महाराज ने बहुत ही संतुलित और शास्त्र सम्मत जवाब दिया। उन्होंने संस्कृत के सूत्र 'वादे वादे जायते बोध:' का उदाहरण देते हुए कहा कि मैं इसे विवाद के रूप में नहीं, बल्कि वाद के रूप में देखता हूं। संवाद और चर्चा से ही तत्व का बोध होता है। अगर संतों के बीच किसी बात को लेकर मतभिन्नता है, तो उस मंथन से सनातन धर्म के लिए सुखद और सकारात्मक परिणाम ही निकलेंगे। यूजीसी को क्या बोले संत रितेश्वर यूजीसी के संदर्भ में पूछे गए सवाल और सामाजिक कानूनों पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि देश का बहुसंख्यक समाज शांतिप्रिय है और एक गांव की तरह मिलजुल कर रहना चाहता है। उन्होंने कहा कि मैंने देखा है कि अगर कोई गलत फैसला आता है, तो समाज सामूहिक रूप से उसका विरोध करता है। मुझे विश्वास है कि जो लोग नीति-निर्धारक हैं, वे पुनर्विचार करेंगे। देश में ऐसा कोई कानून नहीं बनना चाहिए, जिससे समाज में विद्वेष पैदा हो या आपसी भाईचारा खंडित हो। धारकुंडी पहुंचकर दी श्रद्धांजलि चित्रकूट में अल्प प्रवास और दर्शन-पूजन के बाद संत ऋतेश्वर महाराज और बृजभूषण शरण सिंह का काफिला सतना के धारकुंडी आश्रम के लिए रवाना हो गया। वहां वे आश्रम के संस्थापक परमहंस स्वामी सच्चिदानंद जी महाराज के अंतिम दर्शन कर उनकी समाधि स्थल पर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की है।  

किसानों के लिए बड़ी खबर! छत्तीसगढ़ में इस योजना से मिलेगा 1.5 लाख रुपये, ऐसे करें अप्लाई

रायपुर  छत्तीसगढ़ सरकार किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए राज्य बकरी उद्यमिता विकास योजना चला रही है। इस योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में बकरी पालन को बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि किसानों को रोजगार के साथ अतिरिक्त आय का जरिया मिल सके। योजना के अंतर्गत एक यूनिट में 13 बकरी और 2 बकरे दिए जाते हैं, जिसकी कुल लागत करीब 1.50 लाख रुपये तय की गई है। जांजगीर-चांपा जिले के पशु विकास विभाग के वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी ने जानकारी देते हुए बताया कि इस योजना में पशु खरीद, बीमा और शुरुआती आहार तक का खर्च शामिल किया गया है, ताकि किसान शुरुआत से ही बकरी पालन का काम सही तरीके से कर सकें। योजना में क्या-क्या मिलेगा? योजना के तहत एक यूनिट में  कुल 15 पशु दिए जाते हैं। इसमें 13 बकरी (प्रति बकरी लगभग ₹7,500) ,2 बकरे (प्रति बकरा लगभग ₹12,000) ,पशुओं का बीमा – लगभग ₹7,500 तक शुरुआती चारा और देखभाल – ₹10,000 से ₹12,000 तक इस तरह पशु खरीद, बीमा और आहार मिलाकर पूरी यूनिट की लागत करीब ₹1.50 लाख बैठती है।  कितनी मिलेगी सब्सिडी? इस योजना में अनुदान (सब्सिडी) का भी प्रावधान है— सामान्य एवं पिछड़ा वर्ग के किसानों को 25% तक सब्सिडी अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग को 33% तक सब्सिडी इस तरह किसान को अधिकतम करीब ₹50,000 तक की सरकारी सहायता मिल सकती है। कौन कर सकता है आवेदन? छत्तीसगढ़ का निवासी किसान पशुपालन में रुचि रखने वाले ग्रामीण युवा जिनके पास पशु रखने की जगह हो बैंक लोन लेने की पात्रता रखने वाले आवेदक कैसे करें आवेदन? जानिए पूरा प्रोसेस अपने नजदीकी पशु चिकित्सालय / पशु विकास विभाग कार्यालय में संपर्क करें योजना से जुड़ा आवेदन फॉर्म प्राप्त करें जरूरी दस्तावेज जमा करें – आधार कार्ड ,निवास प्रमाण पत्र ,जाति प्रमाण पत्र (यदि लागू हो) बैंक पासबुक विभाग द्वारा सत्यापन के बाद योजना का लाभ मिलेगा क्यों फायदेमंद है बकरी पालन योजना? कम लागत में शुरू होने वाला व्यवसाय ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार का बढ़िया साधन दूध और पशु बिक्री से नियमित आमदनी सरकार की सब्सिडी से शुरुआती बोझ कम अगर आप खेती के साथ-साथ अतिरिक्त कमाई का मजबूत जरिया ढूंढ रहे हैं, तो राज्य बकरी उद्यमिता विकास योजना आपके लिए शानदार मौका है।

क्या हम प्लास्टिक पी रहे हैं? यमुना वॉटर में खतरनाक माइक्रोप्लास्टिक का खुलासा

नई दिल्ली  जिसे आप पानी समझकर पी रहे हैं वह पानी नहीं प्लास्टिक है.हाल ही में आई द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (TERI) की एक रिसर्च काफी डराने वाली है. टेरी की ओर से एक साल तक किए गए वैज्ञानिक अध्ययन में दिल्ली से गुजरने वाली यमुना नदी, नलों से आने वाले भूजल, शहर के खुले नालों और बाढ़ क्षेत्र की मिट्टी में बड़ी मात्रा में माइक्रोप्लास्टिक के कण मिले हैं. टेरी की स्टडी ऑन माइक्रोप्लास्टिक्स इन रिवर यमुना एंड ग्राउंडवॉटर इन दिल्ली (2024–25) बताती है कि शोधकर्ताओं ने दिल्ली के सभी 11 जिलों की विभिन्न जगहों से 88 नमूने लिए थे और उनकी जांच की थी, जिनमें से हर सैंपल में माइक्रोप्लास्टिक की मात्रा काफी ज्यादा मिली है. इस स्टडी को दिल्ली सरकार के पर्यावरण विभाग ने करवाया था. जिसके परिणाम काफी डराने वाले आए हैं. खबर के मुताबिक टेरी की ये रिपोर्ट पिछले साल के अंत में दिल्ली सरकार को सौंप दी गई थी. रिपोर्ट बताती है कि मौसम के अनुसार यमुना जल सहित बाकी जल स्त्रोतों में प्रदूषण का स्तर बदलता रहता है. जहां बारिश यानि मानसून से पहले यमुना नदी के पानी में बहाव और जल की आपूर्ति बढ़ने के कारण माइक्रोप्लास्टिक की मात्रा ज्यादा देखी गई और मॉनसून के बाद यह कम हो जाती है क्योंकि यह गंदगी और प्लास्टिक आसपास की मिट्टी में फैल जाती है. माइक्रोप्लास्टिक क्या होती है? माइक्रोप्लास्टिक 5 मिलीमीटर से छोटे प्लास्टिक के कण होते हैं जो पानी में मिले रहते हैं और दिखाई भी नहीं देते लेकिन अगर इस पानी को पीया जाता है तो यह कण अपने साथ जहरीले रसायनों को चिपका कर शरीर के अंदर ले जाते हैं और भारी नुकसान पहुंचाते हैं. माइक्रोप्लास्टिक की मात्रा शरीर में पहुंचने के चलते काफी सारी गंभीर बीमारियां सामने आ सकती हैं. जांच में पाया गया कि करीब 95 फीसदी कण माइक्रोफाइबर (बहुत छोटे रेशे) थे. इससे अंदाजा लगाया गया कि घरों से निकलने वाला कपड़े धोने का पानी और कपड़ा उद्योग से निकलने वाला कचरा भी इस प्रदूषण का बड़ा कारण हो सकता है. सबसे खास बात है कि इस परीक्षण में पानी के अंदर 13 तरह के प्लास्टिक कण पाए गए, जिससे पता चलता है कि ये कण घरों के कचरे, फैक्ट्रियों के गंदे पानी और पैकेजिंग सामग्री जैसे कई स्रोतों से आकर मिल रहे हैं. मौसम के अनुसार बदला स्तर स्टडी कहती है कि मॉनसून में यानि मई–जून 2024 में यमुना के पानी में औसतन 6,375 माइक्रोप्लास्टिक कण प्रति घन मीटर मिले. जबकि दिसंबर 2024 से जनवरी 2025 (मानसून के बाद) यह घटकर 3,080 कण प्रति घन मीटर रह गए. यानी लगभग 50 फीसदी की कमी देखी गई. शोधकर्ताओं का कहना है कि यह कमी प्लास्टिक कम बनने से नहीं, बल्कि बारिश के कारण पानी बढ़ने से कण बह जाने और पतले पड़ने (डायल्यूशन) की वजह से हुई. मानसून के दौरान तेज बहाव कणों को नीचे की ओर बहा देता है, लेकिन सबसे बड़ी बात है कि नदी किनारे की मिट्टी में माइक्रोप्लास्टिक की मात्रा चार गुना से ज्यादा बढ़ गई. मानसून से पहले औसतन 24.5 कण प्रति किलो मिट्टी थे, जो बाद में बढ़कर 104.45 कण प्रति किलो हो गए.

सीएम डॉ. यादव मुंबई क्लाइमेट वीक में संभालेंगे विशेष सत्र की कमान

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश शासन द्वारा 17 से 19 फरवरी 2026 तक आयोजित मुंबई क्लाइमेट वीक 2026 में राज्य की सतत, स्केलेबल एवं निवेश-अनुकूल नवकरणीय ऊर्जा तथा ऊर्जा भंडारण संबंधी नवाचारों का प्रेजेंटेशन किया जायेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव 18 फरवरी 2026 को सायं 6:30 बजे से 8:10 बजे तक मुंबई के बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स (बीकेसी) स्थित होटल सोफिटेल में विशेष आयोजन में प्रदेश की नवकरणीय ऊर्जा एवं ऊर्जा भंडारण रोडमैप पर केंद्रित प्रेजेंटेशंस का नेतृत्व करेंगे। ‘मुंबई क्लाइमेट वीक 2026’ का आयोजन भारत में जलवायु संबंधी कार्यवाहियों को गति देने के लिये एक केंद्रीकृत राष्ट्रीय मंच के रूप किया जा रहा है। इस मंच पर राज्यों की जलवायु संबंधी नवाचारों के प्रस्तुतिकरण के साथ स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन और जलवायु संबंधी बेसिक इको सिस्टम पर हितधारकों के साथ प्रत्यक्ष संवाद किया जायेगा। देश-विदेश के नीति-निर्माता, अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञ, निवेशक एवं क्लाइमेट क्षेत्र से जुड़े प्रैक्टिशनर भाग लेंगे। यह आयोजन राज्य को हरित ऊर्जा निवेश के लिए एक आकर्षक गंतव्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण सिद्ध होगा। मुंबई क्लाइमेट वीक 2026 में म.प्र. सरकार के प्रेजेंटेशन से यह प्रदर्शित किया जायेगा कि प्रदेश ग्रीन एनर्जी की सुलभता, विश्वसनीयता और निवेश प्रतिस्पर्धा के साथ सतत विकास की दिशा में अग्रसर है।  

तेजस्वी यादव का बड़ा बयान: नीतीश कुमार पर साधा निशाना, कहा- बिहार को मिला ‘कठपुतली’ मुख्यमंत्री

पटना राजद के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने मंगलवार को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को 'अचेत' और 'कठपुतली' सीएम बताते हुए कहा कि यह बिहार का दुर्भाग्य है कि उसे ऐसा नेतृत्व मिला। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आज प्रदेश को मुख्यमंत्री नहीं बल्कि कुछ चुनिंदा भ्रष्ट अधिकारी चला रहे हैं। तेजस्वी यादव ने मंगलवार को जननायक कर्पूरी ठाकुर की पुण्यतिथि समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि हम सभी कर्पूरी ठाकुर के अनुयायी हैं। हम सभी का फर्ज बनता है कि उनके सपनों को पूरा करें, लेकिन आज देश की स्थिति बदली हुई है। आज लोकतंत्र और संविधान को मिटाया जा रहा है, संवैधानिक संस्थाओं को समाप्त किया जा रहा है, और तानाशाही चरम पर है। ऐसे में हमारी लड़ाई का रास्ता इतना सरल नहीं है। उन्होंने राज्य में बढ़ते अपराध और भ्रष्टाचार पर सरकार को घेरते हुए कहा कि बिहार में विकास के नाम पर केवल जनता की आंखों में धूल झोंकी जा रही है। उन्होंने सवाल किया कि पिछले 100 दिनों के शासन में बिहार में कितने नए कारखाने खुले और कितने युवाओं को रोजगार मिला। उन्होंने मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना को लेकर भी कहा कि क्या महिलाओं को 1.90 लाख रुपए मिल गए? उन्होंने राजद के कार्यकर्ताओं को एकजुट रहने की अपील करते हुए कहा कि राजद कमजोर नहीं है, समय कमजोर है। तेजस्वी ने प्रशासनिक अधिकारियों के रवैये पर कड़ा आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य में पुलिस और प्रशासन द्वारा राजद कार्यकर्ताओं को प्रताड़ित किया जा रहा है। तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान मतदाताओं को डराने का काम किया गया। उन्होंने कहा कि जब हम लोगों का समय आएगा तो ऐसे लोगों को जवाब दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि पार्टी का जनाधार लगातार बढ़ रहा है और राजद का वोट शेयर 23-24 प्रतिशत से बढ़कर अब 40 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। उन्होंने कहा कि होली के बाद बिहार के सभी जिलों में कार्यक्रम होगा और संगठन को विस्तार और मजबूत करने का कार्य किया जाएगा। यह कार्यक्रम अन्य राज्यों में भी चलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि राजद को राष्ट्रीय पार्टी बनाने के लिए अन्य प्रदेशों में भी हमें मजबूत बनना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि वे झुकने वाले नहीं हैं और हर अत्याचार के खिलाफ संघर्ष जारी रखेंगे।

सावधान! मध्य प्रदेश में नकली मसालों का जाल, जांच में सामने आई खतरनाक सच्चाई

ग्वालियर आज के दौर में  खाद्य पदार्थों में जो मिलावटी जहर मिलाकर बेचा जा रहा है वो किसी से छिपा नहीं है।  मिटावटी चीजें खाने से ही लोगों का स्वास्थ्य खराब हो रहा है और कई तरह की बीमारियां भी लग रही हैं। मिलावट का ये धंधे थमने का नाम नहीं ले रहा है। मध्य प्रदेश के ग्वालियर में जो खाद्य विभाग ने कार्रवाई की है वो रौंगटे खड़े करने वाली है। साबुत हल्दी, साबुत लाल मिर्च, साबुत धनिया में भूसी (चौकर) और लकड़ी का बुरादा मिलाकर लोगो की सेहत के साथ मजाक किया जा रहा है। हॉस्पिटल रोड पर स्थित एक मसाला पिसाई चक्की पर टीम ने कार्रवाई की है मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले मे खाद्य विभाग ने मिलावट के संदेह पर बड़ी कार्रवाई की है। मसाला पिसाई केंद्र पर जांच के दौरान लकड़ी का बुरादा मिलने से हड़कंप मच गया। खाद्य विभाग की टीम ने गरम मसाले और अन्य मसालों के नमूने जांच के लिए भेजे हैं और मौके से करीब 30 हजार 700 रुपये कीमत का मसाला जब्त किया गया है। लोगो के स्वास्थ्य से किया जा रहा खिलवाड़ आम जनता को शुद्ध खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कलेक्टर रुचिका चौहान के निर्देश पर यह कार्रवाई की गई। जांच में धनिया, हल्दी, लाल मिर्च और गरम मसाले के साथ चौकर और लकड़ी का बुरादा भी पाया गया, जिसे मिलावट के लिए इस्तेमाल किए जाने का संदेह है। निरीक्षण के दौरान जो सामने आया, उसने टीम भी चौंक गई।  परिसर में ही साबुत हल्दी, साबुत लाल मिर्च, साबुत धनिया और तैयार धनिया पाउडर के साथ गरम मसाला पाउडर और भूसी (चौकर) और लकड़ी का बुरादा भी पाया गया है। जांच में सामने आया कि, भूसी और लकड़ी के बुरादे का इस्तेमा धनिया पाउडर में मिलावट के लिए किया जा रहा था। भूसी और लकड़ी का बुरादा मिलाकर यहां धनिया बेचा जा रहा था। चक्की को किया गया सील खाद्य विभाग का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद यदि मिलावट की पुष्टि होती है तो संबंधित पिसाई केंद्र का पंजीयन निरस्त किया जाएगा और नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, जांच में अनियमितताएं सामने आने के बाद टीम ने तत्काल ही मसाला कारोबार बंद करा दिया है। साथ ही, पिसाई केंद्र को सील कर दिया।  

रोड शो के साथ विकास कार्यों का करेंगे लोकार्पण व भूमि-पूजन

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कृषक कल्याण वर्ष के पहले राज्य स्तरीय विशाल एवं भव्य किसान सम्मेलन 18 फरवरी बुधवार को ग्वालियर जिले के ग्राम कुलैथ में शुभारंभ करेंगे। वे 87.86 करोड़ रुपए लागत के 41 विकास कार्यों का भूमि-पूजन एवं लोकार्पण भी करेंगे। किसान सम्मेलन में विधानसभा अध्यक्ष  नरेन्द्र सिंह तोमर एवं सांसद भी भारत सिंह कुशवाह सहित अन्य अतिथिगण शामिल होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव उन्नत खेती कर रहे प्रगतिशील किसानों को हितलाभ वितरित करेंगे। कुलैथ में उन्नत कृषि तकनीक पर प्रदर्शनी भी लगेगी। प्रदर्शनी में उद्यानिकी, प्राकृतिक खेती व पशु नस्ल सुधार को प्रमुखता से शामिल किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव किसान सम्मेलन में लगाई गई कृषि प्रदर्शनी का अवलोकन करेंगे। इस अवसर पर स्थानीय किसानों की पारंपरिक बैलगाड़ी-दौड़ होगी। साथ ही भगवान कृष्ण आधारित लोकगीतों की प्रस्तुति भी होगी।

अश्लील साइट्स की लत ने उजाड़ा घर, पति ने पत्नी का 13 मिनट का वीडियो किया वायरल

नई दिल्ली डिजिटल दौर में फेम और व्यूज की भूख इंसान को किस हद तक गिरा सकती है इसकी एक भयावह मिसाल मध्य प्रदेश के रीवा से सामने आई है। यहां एक शख्स ने अपनी ही पत्नी की अस्मत को इंटरनेट पर नीलाम कर दिया। आरोपी ने अपनी पत्नी का 13 मिनट 14 सेकेंड का निजी वीडियो एक पोर्न साइट पर अपलोड कर दिया ताकि वह ऑनलाइन स्टार बन सके। भरोसे का कत्ल: पोर्न स्टार बनने की थी चाह पुलिस जांच में जो खुलासा हुआ है वह किसी के भी रोंगटे खड़े कर देने वाला है। आरोपी पति लंबे समय से अश्लील साइट्स देखने का आदी था और खुद को पोर्न इंडस्ट्री का स्टार समझने लगा था। इसी सनक में उसने पत्नी के साथ निजी पलों का वीडियो रिकॉर्ड किया। जब पत्नी ने वीडियो वायरल होने पर विरोध किया तो पति ने बिना किसी पछतावे के कहा कि उसने यह सब जानबूझकर किया है ताकि लोग उसे पहचानें और वह पॉपुलर हो जाए। दहेज विवाद और बदले की साजिश पीड़िता के परिवार का आरोप है कि इस घिनौनी करतूत के पीछे सिर्फ सनक नहीं बल्कि दहेज का लालच भी था। 10 मई को हुई शादी के बाद से ही ससुराल पक्ष 3 लाख रुपये की मांग कर रहा था। 1 लाख रुपये बकाया होने के कारण आरोपी अक्सर विवाद करता था। आरोप है कि दहेज की रकम न मिलने पर उसने अपनी पत्नी से बदला लेने के लिए उसका वीडियो सार्वजनिक कर दिया और उसे कहीं मुंह दिखाने लायक नहीं छोड़ा।   सोशल मीडिया पर आक्रोश: यह इंसान नहीं, दरिंदा है वीडियो वायरल होने के बाद जब रिश्तेदारों और गांव वालों तक यह बात पहुंची तो सोशल मीडिया पर गुस्से की लहर दौड़ गई। यूजर्स ने आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उसने मेरी जिंदगी तबाह कर दी। वह वीडियो मेरे परिचितों को भी भेजता रहा। यूजर्स की प्रतिक्रिया: लोग इसे सिर्फ साइबर क्राइम नहीं बल्कि एक महिला की गरिमा की हत्या मान रहे हैं। मुंबई फरार हुआ आरोपी, पुलिस की दबिश जारी रीवा के समान थाना क्षेत्र में मामला दर्ज होने के बाद पुलिस ने आरोपी की लोकेशन ट्रेस कर ली है। पता चला है कि वह मुंबई फरार हो गया है। सीएसपी राजीव पाठक के मुताबिक पुलिस की एक टीम मुंबई भेजी जा रही है और जल्द ही आरोपी को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। पुलिस ने इस मामले में आईटी एक्ट और दुष्कर्म व धमकी की धाराओं के तहत कार्रवाई शुरू कर दी है।  

‘उधार नहीं रखते हिसाब’—कुबेरेश्वर धाम से धीरेंद्र शास्त्री का सख्त संदेश

सीहोर धर्म और आस्था की नगरी सीहोर उस समय ऐतिहासिक पल की साक्षी बनी जब कुबेरेश्वर धाम में चल रही शिव महापुराण कथा के बीच पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का आगमन हुआ। उनके मंच पर पहुंचते ही पूरा परिसर 'जय श्री राम' और 'हर-हर महादेव' के जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ ने बागेश्वर सरकार के स्वागत में उत्साह का अभूतपूर्व प्रदर्शन किया। कथा स्थल पर उपस्थित संतों और भक्तों को संबोधित करते हुए पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने अपने चिरपरिचित चुटीले अंदाज में कहा कि उन्होंने “महाराज जी का कर्ज उतार दिया है।' उनका इशारा कुबेरेश्वर धाम के पंडित प्रदीप मिश्रा की ओर था। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा महाराज जी बागेश्वर धाम आए थे, अब हम यहां आ गए हैं। हम किसी का कर्ज उधार नहीं रखते, आज हिसाब बराबर हो गया, उनके इस वक्तव्य पर पंडाल तालियों और जयघोष से गूंज उठा, उन्होंने आगे कहा कि पंडित प्रदीप मिश्रा उनसे वरिष्ठ हैं और वे उनका सम्मान करते हैं। महाराज जी जैसा करते हैं, वैसा ही हम भी करते हैं, कहते हुए उन्होंने आपसी स्नेह और संत परंपरा की मर्यादा को रेखांकित किया। मंच से उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि वह डबरा से आए हैं तो अब हम डबरा जा रहे हैं, जिससे श्रोताओं के बीच सहज हंसी और आनंद का वातावरण बन गया। यह पहला अवसर था जब बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर सीहोर की पावन धरा पर पहुंचे। कुबेरेश्वर धाम समिति के प्रवक्ता मनोज दीक्षित के अनुसार पंडित शास्त्री ने व्यासपीठ पर पहुंचकर विधिवत नमन किया और संत परंपरा का सम्मान किया। दो प्रखर सनातनी संतों के इस मिलन को देखने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचे थे, जिससे पूरा क्षेत्र आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा। कथा स्थल पर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। प्रशासन और धाम समिति द्वारा भीड़ प्रबंधन, पार्किंग और श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए विशेष व्यवस्था की गई थी। आयोजन के दौरान अनुशासन और व्यवस्थाओं की सराहना भी की गई। सीहोर में इन दोनों संतों का यह मिलन श्रद्धालुओं के लिए किसी उत्सव से कम नहीं रहा। मंच से दिए गए संदेशों में आपसी सम्मान, धर्म के प्रति समर्पण और समाज सेवा की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई दी। कार्यक्रम के समापन पर श्रद्धालुओं ने इसे ऐतिहासिक और अविस्मरणीय क्षण बताया।

विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर कोचिंग संस्थानों के लिए नए नियमों पर मंथन

भोपाल  उच्च शिक्षा विभाग द्वारा मंगलवार को सरोजिनी नायडू शासकीय कन्या स्नातकोत्तर स्‍वशासी महाविद्यालय भोपाल में कोचिंग संस्थानों के नियमों को लेकर महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता अपर मुख्य सचिव, उच्च शिक्षा  अनुपम राजन ने की। बैठक में माननीय सर्वोच्‍च न्‍यायालय के निर्देश एवं राष्‍ट्रीय कार्यबल के अनुक्रम में उच्‍च शिक्षण संस्‍थानों में विद्यार्थियों की आत्‍महत्‍या की रोकथाम एवं मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य संरक्षण के लिए माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के पैरा-37 के तहत कोचिंग सेंटरों के लिए नि‍यम अधि‍सूचित किए जाने के संबंध में विस्तृत चर्चा की गई। इस दौरान अपर मुख्य सचिव, उच्च शिक्षा  राजन ने विद्यार्थियों, बैठक में सहभागिता करने वाले विभिन्न-विभागों के प्रतिनिधियों, कोचिंग सेंटर संचालकों एवं समिति सदस्यों से महत्वपूर्ण सुझाव प्राप्त किए। कार्यक्रम के दौरान भोपाल जिले के बीएसएस कॉलेज के विद्यार्थियों द्वारा विद्यार्थियों पर बढ़ते मानसिक दबाव पर नुक्कड़ नाटक की प्रस्तुति भी दी गई। अपर मुख्य सचिव  राजन ने कहा कि विद्यार्थियों में बढ़ती मानसिक दबाव की स्थिति को गंभीरता से समझते हुए घटनाओं की प्रभावी रोकथाम आवश्यक है। उन्होंने कहा कि कोचिंग संस्थानों को भी अपनी सामाजिक जिम्मेदारी समझनी चाहिए और विद्यार्थियों को सकारात्मक एवं सहयोगात्मक वातावरण उपलब्ध कराना चाहिए। उन्होंने कहा कि कई बार विद्यार्थी जीवन की चुनौतियों और मानसिक समस्याओं का सामना नहीं कर पाते, जिसके कारण गंभीर परिस्थितियां उत्पन्न हो जाती हैं। इसलिए सभी संबंधित संस्थाओं के सहयोग से विद्यार्थियों के हित में एक प्रभावी नि‍यम तैयार किया जाना है, जिससे मानसिक दबाव से उत्‍पन्‍न होने वाली गंभीर परिस्‍थ‍ितियों को रोकने में मदद मिल सके। उन्होंने कहा कि सभी उच्‍च शि‍क्षण संस्‍थानों में विद्यार्थियों के मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य को लेकर जारी किए गए हेल्‍पलाइन नंबर अनिवार्य रूप से प्रदर्शि‍त किए जाएं। साथ ही व्‍यापक स्‍तर पर इसका प्रचार प्रसार भी किया जाए। बैठक के दौरान राज्य में संचालित सभी कोचिंग संस्‍थानों का पंजीकरण, बेहतर संचालन, निर्धारित मानकों का पालन, कोचिंग संस्थानों में सुरक्षित वातावरण, पारदर्शी शुल्क व्यवस्था, विद्यार्थियों एवं अभिभावकों के लिए एक समयबद्ध और पारदर्शी शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करने पर चर्चा की गई। साथ ही सुझाव प्राप्‍त किए गए। यह बैठक प्रदेश में कोचिंग संस्थानों के संचालन को सुव्यवस्थित, जवाबदेह और छात्र हितैषी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। उच्च शिक्षा आयुक्त  प्रबल सिपाहा ने कहा कि विद्यार्थियों को यह जानकारी अवश्य होनी चाहिए कि उनके लिए ऐसे माध्यम उपलब्ध हैं, जहां वे अपनी समस्याओं के समाधान के लिए सहायता और मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि समय पर उचित सहयोग और परामर्श मिलने से विद्यार्थियों को मानसिक दबाव से उबरने में सहायता मिलती है और सकारात्मक वातावरण का निर्माण होता है। बैठक में एम्स के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. तन्यम जोशी ने प्रजेंटेशन के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य के संबंध में विस्तृत जानकारी प्रदान की। बैठक में गृह, जिला न्‍यायालय भोपाल, विधि एवं विधायी कार्य, राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य पुनर्वास संस्थान, तकनीकी शिक्षा, स्कूल शिक्षा, महिला एवं बाल विकास, स्वास्थ्य, नगरीय प्रशासन, सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण और एडि‍शनल डीसीपी पुलि‍स और एनएलआईयू के प्रतिनिधि उपस्‍थ‍ित रहे।