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लखपति दीदी योजना में छत्तीसगढ़ की बड़ी उपलब्धि, 13.96 लाख महिलाएं आत्मनिर्भर

छत्तीसगढ़ में 13.96 लाख महिलाएं बनीं लखपति दीदी लखपति महिला पहल की राज्य स्तरीय स्टीयरिंग समिति की तृतीय बैठक संपन्न लक्ष्य के 179 प्रतिशत महिलाएं लखपति दीदी बन हुईं आत्मनिर्भर रायपुर  पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ द्वारा संचालित लखपति महिला पहल को प्रदेश में उल्लेखनीय सफलता मिली है। भारत सरकार द्वारा वर्ष 2023-26 के लिए छत्तीसगढ़ को 7.82 लाख ग्रामीण महिलाओं को लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। इसके विरुद्ध अब तक प्रदेश की 13.96 लाख ग्रामीण महिलाओं को लखपति दीदी की श्रेणी में लाकर आत्मनिर्भर बनाया गया है। यह निर्धारित लक्ष्य का 179 प्रतिशत है।        लखपति महिला पहल की राज्य स्तरीय स्टीयरिंग समिति की तृतीय बैठक मंगलवार को नवा रायपुर स्थित महानदी भवन में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव श्री भीम सिंह की अध्यक्षता में संपन्न हुई। बैठक में राज्य के 27 विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ के मिशन संचालक श्री अश्वनी देवांगन ने लखपति महिला पहल के अंतर्गत प्रदेश में संचालित गतिविधियों और अब तक हुई प्रगति की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की। विभागीय अभिसरण से महिलाओं की आय बढ़ाने पर जोर        बैठक में विभिन्न विभागों के साथ अभिसरण के माध्यम से स्व-सहायता समूहों से जुड़ी ग्रामीण महिलाओं की आय में वृद्धि करने तथा उन्हें स्थायी आजीविका के अवसरों से जोड़ने पर विस्तृत चर्चा हुई। महिलाओं को विभिन्न आर्थिक गतिविधियों, स्वरोजगार और आजीविका के स्थायी साधनों से जोड़कर उनकी वार्षिक आय में वृद्धि सुनिश्चित करने के प्रयासों को और गति देने पर भी विचार-विमर्श किया गया। महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल        लखपति महिला पहल का उद्देश्य ग्रामीण स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को विविध आजीविका गतिविधियों से जोड़कर उनकी आय में निरंतर वृद्धि करना और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। बैठक में इस दिशा में विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष जोर दिया गया। इस अवसर पर पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग तथा छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ के अधिकारी-कर्मचारी भी उपस्थित रहे।

वाहन चालकों के लिए जरूरी खबर, बिना PUC के 1 अक्टूबर से नहीं मिलेगा Fuel

 नई दिल्ली No Valid PUCC No Fuel Rule: अगर आप दिल्ली-एनसीआर में रहते हैं और आपका आना-जाना गाजियाबाद-दिल्ली के बीच होता रहता है तो ये ख़बर आपके लिए बेहद जरूरी है. गाजियाबाद में वाहन चालकों के लिए एक अक्टूबर से फ्यूल खरीदने के नियम में बड़ा बदलाव होने जा रहा है. अब बिना वैलिड पॉल्यूशन अंडरकंट्रोल सर्टिफिकेट (PUCC) वाले वाहनों को पेट्रोल और डीजल नहीं दिया जाएगा. जिला पूर्ति विभाग ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है।  वाहन मालिकों से कहा गया है कि वे 30 सितंबर से पहले अपने वाहनों के प्रदूषण प्रमाणपत्र की वैधता जांच लें और प्रमाणपत्र समाप्त हो चुका है या जल्द समाप्त होने वाला है तो समय रहते उसे रिन्यू करा लें. जिला पूर्ति अधिकारी अमित कुमार तिवारी ने बताया कि एक अक्टूबर से व्यवस्था लागू होने के बाद पेट्रोल पंप पर फ्यूल देने से पहले वाहन के प्रदूषण प्रमाणपत्र की वैधता की जांच की जाएगी।  इसके लिए जिले के पेट्रोल पंपों पर विशेष ऐप की व्यवस्था की गई है. वाहन का नंबर स्कैन या दर्ज करने के बाद ऐप के माध्यम से तत्काल पता चल सकेगा कि संबंधित वाहन का प्रदूषण प्रमाणपत्र वैध है या नहीं. वैध प्रमाणपत्र होने पर ही फ्यूल दिया जाएगा.  उन्होंने बताया कि विभाग की ओर से फिलहाल व्यवस्था को लेकर पेट्रोल पंपों पर परीक्षण भी किया जा रहा है, ताकि एक अक्टूबर से इसे लागू करने में तकनीकी दिक्कत न आए. पेट्रोल पंप संचालकों को भी निर्देश दिए गए हैं कि निर्धारित तिथि से बिना वैध प्रदूषण प्रमाणपत्र वाले वाहनों को ईंधन उपलब्ध न कराया जाए।  वाहन चालकों को पहले से जानकारी देने पर जोर नई व्यवस्था को लेकर वाहन चालकों के बीच जागरूकता बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है. अधिकारियों का कहना है कि वाहन मालिक आखिरी समय का इंतजार करने के बजाय 30 सितंबर तक अपने दस्तावेज जांच लें. खासतौर पर ऐसे वाहन जिनका PUCC पहले ही समाप्त हो चुका है या उसकी अवधि खत्म होने वाली है, वे समय रहते प्रमाणपत्र बनवा लें।  हालांकि, ट्रायल के दौरान यह भी सामने आया कि कई वाहन चालकों को अभी तक इस व्यवस्था की जानकारी नहीं है. कुछ वाहन मालिकों ने प्रमाणपत्र की अनिवार्यता और फ्यूल लेने से पहले उसकी जांच को लेकर जानकारी की कमी की बात कही. वहीं, कुछ वाहन चालकों ने प्रदूषण जांच को जरूरी बताते हुए व्यवस्था का समर्थन भी किया. दूसरी ओर, इसे लागू करने के तरीके को लेकर यह सवाल भी उठ रहे हैं कि आपात स्थिति में फ्यूल की जरूरत पड़ने पर क्या होगा और पेट्रोल पंपों पर जांच के कारण भीड़ या अव्यवस्था की स्थिति न बने, इसके लिए क्या व्यवस्था होगी।  जिला पूर्ति अधिकारी अमित कुमार तिवारी ने स्पष्ट किया कि बिना वैलिड PUCC वाहन चलाने पर केवल पेट्रोल-डीजल मिलने में परेशानी नहीं होगी, बल्कि नियमों के तहत चालान की कार्रवाई भी की जा सकती है. इसके लिए संबंधित स्तर पर आवश्यक व्यवस्था की जा रही है. विभाग का कहना है कि नई व्यवस्था का उद्देश्य वाहन चालकों को परेशान करना नहीं, बल्कि वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर नियंत्रण के साथ लोगों को समय से प्रदूषण प्रमाणपत्र बनवाने के लिए प्रेरित करना है। 

सिंहस्थ की तैयारियां तेज, उज्जैन में 50 किमी सड़कें और पानी-सीवरेज नेटवर्क बनेगा

 उज्जैन  उज्जैन में सिंहस्थ मेला क्षेत्र में 50 किमी लंबी सीमेंट की सड़क बनाने का काम शुरू हो गया है। उज्जैन विकास प्राधिकरण (यूडीए) 600 करोड़ रुपये की लागत से इनका निर्माण करवा रहा है। इसके लिए दो कंपनियों को ठेका दिया गया है। सड़कें बनाने की समय सीमा जुलाई 2027 तय की गई है। सिंहस्थ मेला क्षेत्र में यह सड़कें करीब 24 मीटर चौड़ी रहेंगी। मेला क्षेत्र में कुछ ऐसे क्षेत्र भी हैं जहां अभी फसल लगी हुई है। ऐसे में इन इलाकों में अभी सड़क बनाने का काम शुरू नहीं हो पाया है। उज्जैन विकास प्राधिकरण द्वारा 20 किसानों को 9 करोड़ रुपये का मुआवजा देकर जमीन की रजिस्ट्री भी करवाई गई है। वहीं अन्य किसानों से भी जमीन को लेकर बात जारी है। जिन जमीनों पर फसल लगी है उसकी कटाई खत्म होने के बाद वहां सड़क का निर्माण शुरू हो जाएगा। सड़क के साथ पेयजल और सीवरेज की भी होगी व्यवस्था उज्जैन में सिंहस्थ क्षेत्र में सड़कों के साथ पेयजल और सीवरेज की व्यवस्था भी की जाएगी। इसके लिए 1300 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। वहीं सिंहस्थ क्षेत्र में किसानों से जमीन अधिग्रहण के लिए यूडीए करीब 450 करोड़ रुपये खर्च करेगा। सिंहस्थ क्षेत्र में सीवरेज निर्माण को लेकर पहले विरोध भी हुआ था। खजूर वाली मस्जिद से अब्दालपुरा, जीवाजीगंज थाने होते हुए गणेश चौक तक करीब 730 मीटर लंबी सड़क को 15 मीटर चौड़ा किया जाएगा। इस काम पर लगभग 9.80 करोड़ रुपए खर्च होंगे। सोमवार से सड़क की सीमा तय करने के लिए नपती और मार्किंग का काम शुरू कर दिया गया है। इस सड़क चौड़ीकरण से कुल 272 भवन प्रभावित होंगे। नगर निगम की टीम ने सोमवार को मौके पर पहुंचकर सड़क की नपती की और तय सीमा के हिसाब से भवनों को चिन्हित करना शुरू किया। मार्किंग के जरिए यह तय किया जा रहा है कि सड़क चौड़ीकरण में कौन से भवन आएंगे। नगर निगम आयुक्त अभिलाष मिश्रा के निर्देश पर भवन निरीक्षक शिवम गुप्ता और निगम की टीम ने सड़क का निरीक्षण किया। टीम ने सड़क की सीमा के हिसाब से नपती की और प्रभावित होने वाले भवनों से जुड़ी जरूरी जानकारी भी जुटाई। नगर निगम के मुताबिक, खजूर वाली मस्जिद से गणेश चौक तक का रास्ता शहर के मुख्य और व्यस्त रास्तों में से एक है। सिंहस्थ के दौरान उज्जैन में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ेगी, जिससे यातायात का दबाव भी बढ़ेगा। इसी को देखते हुए इस रास्ते को 15 मीटर चौड़ा करने की योजना बनाई गई है। नपती और सर्वे का काम पूरा होने के बाद नियमों के हिसाब से आगे की कार्रवाई की जाएगी।  

इंदौर एयरपोर्ट के पास शुरू हुआ अंडरग्राउंड मेट्रो टनल का काम

इंदौर  प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में मेट्रो के एलिवेटेड कॉरिडोर के बाद अब मेट्रो रेल प्रशासन ने अपनी पहली भूमिगत मेट्रो निर्माण की दिशा में ऐतिहासिक कदम बढ़ाया. मंगलवार को शहर के एयरपोर्ट स्थित साइट पर टनल बोरिंग मशीन की मदद से भूमिगत टनल निर्माण का कार्य शुरु हुआ है. यह इंदौर शहर के इतिहास में पहली बार है, जब टनल बोरिंग मशीन ने भूमिगत होकर टनल निर्माण का कार्य शुरू किया है।  निर्माण कार्य संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों को सख्त निर्देश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड के प्रबंध संचालक एस. कृष्ण चैतन्य ने परियोजना से जुड़े सभी अधिकारियों, इंजीनियरों, तकनीकी टीम को आगामी टनल निर्माण कार्यों में सुरक्षा, गुणवत्ता एवं निर्धारित तकनीकी मानकों का सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।  उन्नत तकनीक से टनल निर्माण इंदौर में अंडरग्राउंड तरल की खुदाई के विरोध के चलते भूमिगत निर्माण के दौरान आमजन और आसपास की संरचनाओं की सुरक्षा के लिए व्यापक तैयारियां की गई हैं. मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के प्रबंध संचालक चैतन्य ने बताया, " जमीन और भवनों की स्थिति पर लगातार निगरानी रखने के लिए विस्तृत इंस्ट्रूमेंटेशन स्क्रीम तैयार की गई है।  उन्होंने आगे बताया, "इसके अंतर्गत लगाए जाने वाले सेंसर जमीन और भवनों में होने वाले अत्यंत मामूली बदलाव की भी जानकारी विशेषज्ञों को उपलब्ध कराएंगे. इससे आवश्यकता होने पर समय रहते उचित निर्णय लिया जा सकेगा. इस प्रकार सुरंग निर्माण के दौरान आमजन की सुरक्षा, भवनों की संरचनात्मक सुरक्षा और जमीन की स्थिरता की निरंतर निगरानी सुनिश्चित की जाएगी।  कैसे काम करती है टीबीएम नर्मदा? टीबीएम नर्मदा, अर्थ प्रेशर बैलेंस (ईपीबी) मिक्स शील्डतकनीक पर आधारित है. मशीन के आगे बढ़ने के साथ प्री-कास्ट कंक्रीट रिंग्स स्थापित होती जाती हैं. निर्धारित अलाइनमेंट पर सटीक संचालन, गैस मॉनिटरिंग सिस्टम, आपात स्थिति में वन सेकेंड इमरजेंसी स्टॉप, 24×7 कंट्रोल रूम मॉनिटरिंग जैसी तकनीकी व्यवस्थाएं टनल निर्माण की सुरक्षा एवं निगरानी सुनिश्चित करती हैं।  नर्मदा मशीन का कटिंग व्हील 6.65 मीटर व्यास का है और कुल लंबाई लगभग 102 मीटर है. इस मशीन ने 25 अप्रैल 2026 को थाईलैंड में Factory Acceptance Test (FAT) सफलतापूर्वक पूरा किया. इसके बाद इसे इंदौर लाया गया और साइट पर सावधानीपूर्वक असेंबल करने के पश्चात एयरपोर्ट स्टेशन से लॉन्च किया गया है. सतह से लगभग 20 मीटर तक की गहराई में यह मशीन एयरपोर्ट स्टेशन से भूमिगत टनल का निर्माण करेगी। 

डायल-112 हीरोज: आधी रात दो अलग-अलग घटनाओं में डायल 112 बनी मददगार—आधी रात रास्ता भटकी 80 वर्षीय बुजुर्ग महिला को जवानों ने परिजनों से मिलाया

भोपाल  मध्यप्रदेश पुलिस की डायल-112 सेवा आपात परिस्थितियों में त्वरित पुलिस सहायता के साथ-साथ संवेदनशील मानवीय जरूरतों में भी तत्परता से लोगों की मदद कर रही है। 23 सितम्बर की देर रात प्रदेश में सामने आई दो अलग-अलग घटनाओं में डायल-112 के जवानों ने अपनी तत्परता और संवेदनशीलता से एक ओर रास्ता भटकी 80 वर्षीय बुजुर्ग महिला को उनके परिजनों से मिलाया, वहीं दूसरी ओर घर में घुसे सांप को सुरक्षित पकड़वाकर परिवार को राहत दिलाई। सागर में आधी रात रास्ता भटकी बुजुर्ग महिला को मिला परिवार का सहारा सागर जिले के थाना बीना क्षेत्र में खुरई रोड स्थित पावर हाउस के पास 80 वर्षीय बुजुर्ग महिला रास्ता भटक जाने के कारण अकेली मिलीं। इस संबंध में 23 सितम्बर को रात्रि करीब 1 बजे राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम डायल-112 भोपाल को सूचना प्राप्त हुई। सूचना मिलते ही बीना थाना क्षेत्र में तैनात एफआरवी वाहन को तत्काल मौके के लिए रवाना किया गया। डायल-112 स्टाफ आरक्षक विक्रम प्रताप एवं पायलट फरहान खान ने मौके पर पहुंचकर बुजुर्ग महिला को सुरक्षित संरक्षण में लिया। जवानों ने एफआरवी वाहन से आसपास के क्षेत्रों में जाकर परिजनों की तलाश की और लोगों से पूछताछ की। इसी दौरान महिला के परिजन भी उनकी तलाश करते हुए वहां पहुंच गए। पहचान एवं सत्यापन के बाद डायल-112 जवानों ने बुजुर्ग महिला को सकुशल उनके परिजनों के सुपुर्द कर दिया। देवास में घर में घुसे सांप को सुरक्षित पकड़वाकर जंगल में छुड़वाया देवास जिले के थाना औद्योगिक क्षेत्र अंतर्गत विकास नगर में 23 सितम्बर की रात करीब 2:20 बजे एक घर में सांप घुस आने की सूचना राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम डायल-112 भोपाल से जिला देवास डायल-112 कंट्रोल रूम को प्राप्त हुई। सूचना पर तत्काल एफआरवी क्रमांक 08 को मौके के लिए रवाना किया। एफआरवी स्टाफ एएसआई सुरेश चंद्र शिवर एवं पायलट विजय मालवीय ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। घर के अंदर सांप मौजूद होने की जानकारी मिलने पर एफआरवी स्टाफ ने तत्काल सर्पमित्र को मौके पर बुलवाया। सांप को सुरक्षित पकड़वाकर जंगल में छुड़वा दिया गया, जिससे परिवार को राहत मिली और सांप को भी सुरक्षित प्राकृतिक वातावरण में छोड़ दिया गया। डायल-112 एफआरवी स्टाफ की त्वरित कार्रवाई से कॉलर को तत्काल सहायता मिली। कॉलर ने डायल-112 की तत्परता की सराहना करते हुए पुलिस जवानों का धन्यवाद व्यक्त किया। डायल-112 — संकट की घड़ी में त्वरित सहायता और संवेदनशीलता का भरोसा मध्यप्रदेश पुलिस की डायल-112 सेवा आपात परिस्थितियों में त्वरित सहायता उपलब्ध कराने के साथ ही जरूरतमंदों की सुरक्षा और सहायता के लिए निरंतर तत्पर है। आमजन किसी भी आपातकालीन परिस्थिति में डायल-112 पर कॉल कर पुलिस सहायता प्राप्त कर सकते हैं। 

योगी सरकार बिजली व्यवस्था को मजबूत बनाने में जुटी, एसएलडीसी के आधुनिकीकरण के निर्देश

लखनऊ  प्रदेश में सुचारु, सुरक्षित और विश्वसनीय बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए योगी सरकार विद्युत व्यवस्था को मजबूत बनाने पर लगातार जोर दे रही है। इसी क्रम में प्रमुख सचिव ऊर्जा एवं यूपी पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष रणवीर प्रसाद ने लखनऊ स्थित स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर (एसएलडीसी) का सघन निरीक्षण किया। उन्होंने केंद्र के आवश्यक आधुनिकीकरण को शीघ्र पूरा कराने के निर्देश दिए। ग्रिड फ्रीक्वेंसी स्थिर रखने और ओवरलोडिंग रोकने पर जोर निरीक्षण के दौरान रणवीर प्रसाद ने एसएलडीसी की कार्य प्रणाली, रियल टाइम ग्रिड मॉनिटरिंग, स्काडा सिस्टम और लोड प्रबंधन की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने कहा कि प्रदेश की सम्पूर्ण विद्युत व्यवस्था में एसएलडीसी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। एसएलडीसी ही वह केंद्र है, जो प्रदेश के विद्युत भार (लोड) का रियल टाइम आंकलन एवं पूर्वानुमान करता है। उत्पादन केंद्रों से प्राप्त बिजली एवं वितरण निगमों की मांग के बीच संतुलन बनाता है। ग्रिड की फ्रीक्वेंसी को स्थिर रखता है तथा लाइनों को ओवरलोड होने से बचाता है। सतर्कता से लोड डिस्पैच करने के निर्देश प्रमुख सचिव ने कहा कि ट्रिपिंग, ब्रेकडाउन की स्थिति में त्वरित रिस्टोरेशन एवं वैकल्पिक स्रोत से आपूर्ति सुनिश्चित करता है। नवीकरणीय ऊर्जा (सोलर/विंड) के एकीकरण एवं ए.बी.टी. मीटरिंग का प्रबंधन करता है। साथ ही उन्होंने कहा कि आने वाला एक महीना गर्मी एवं अधिक मांग के दृष्टिकोण से चुनौतीपूर्ण है, इसलिए पूरी सावधानी के साथ लोड डिस्पैच किया जाए। जिससे कहीं भी अनावश्यक ओवरलोडिंग व ट्रिपिंग न हो और उपभोक्ताओं को निर्बाध आपूर्ति मिल सके।

पीएम सूर्य घर योजना की राह होगी आसान, नर्मदापुरम में ‘सेवा सेतु शिविर’

भोपाल  सेवा संकल्प अभियान अंतर्गत नर्मदापुरम जिले में 24 सितंबर 2026 को ‘सेवा सेतु शिविर’ का आयोजन किया जाएगा। शिविर का उद्देश्य नागरिकों को प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना की जानकारी उपलब्ध कराने के साथ ही घरों पर सोलर सिस्टम लगाने की प्रक्रिया को सरल और सुगम बनाना है। नर्मदापुरम के कोठी बाजार (सदर बाजार) स्थित आर.आर. मैरिज गार्डन एंड लाउंज में आयोजित ‘सेवा सेतु शिविर’ में नागरिकों को बिजली के बढ़ते बिलों से राहत दिलाने के लिए रूफटॉप सोलर संयंत्र लगाने की प्रक्रिया, सोलर प्लांट की लागत, उपलब्ध सब्सिडी और बैंक ऋण की आसान प्रक्रिया की जानकारी दी जाएगी। पात्र हितग्राहियों के लिए मौके पर ही ऑनलाइन पंजीयन की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी। आवेदन से लेकर सोलर प्लांट की स्थापना तक की प्रक्रिया को समझाने के लिए विशेषज्ञों द्वारा आवश्यक मार्गदर्शन दिया जाएगा। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना अन्तर्गत पात्र हितग्राहियों को 3 किलोवाट तक के रूफटॉप सोलर संयंत्र पर ₹78 हजार तक की सब्सिडी का प्रावधान है। शिविर के माध्यम से अधिक से अधिक नागरिकों को योजना से जोड़ने और सौर ऊर्जा के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया जाएगा। नागरिक बंधु 24 सितंबर को आयोजित सेवा सेतु शिविर में पहुंचकर योजना की जानकारी प्राप्त कर योजना का लाभ लेकर घरों को सौर ऊर्जा से रोशन कर बिजली बिल में राहत पायें। योजना से संबंधित विस्तृत जानकारी pmsuryaghar.gov.in  पोर्टल पर भी उपलब्ध कराई गई है।  

सौर सुजला योजना से बदली किसान चरण सिंह की खेती की तस्वीर

रायपुर दंतेवाड़ा जिले के ग्राम मुरकी निवासी किसान चरण सिंह ठाकुर के लिए सौर सुजला योजना खेती में नई संभावनाओं का आधार बनी है। योजना के तहत स्थापित सोलर पंप से सिंचाई की सुविधा मिलने के बाद उन्होंने न केवल अपनी कृषि गतिविधियों का विस्तार किया, बल्कि खेती के साथ मछली पालन को जोड़कर आमदनी का अतिरिक्त साधन भी तैयार किया है। विकासखंड दंतेवाड़ा के ग्राम मुरकी में रहने वाले ठाकुर पहले सिंचाई के लिए पारंपरिक साधनों और पानी की उपलब्धता पर निर्भर थे। पर्याप्त एवं नियमित सिंचाई सुविधा नहीं होने के कारण खेती का दायरा सीमित था। सौर पंप लगने से उनकी यह समस्या काफी हद तक दूर हो गई। अब उन्हें सिंचाई के लिए बिजली अथवा डीजल पर निर्भर नहीं रहना पड़ता और वे समय पर फसलों को पानी दे पा रहे हैं। सिंचाई की सुविधा मिलने के बाद ठाकुर खरीफ और रबी, दोनों मौसमों में खेती कर रहे हैं। वे धान के साथ उड़द और अरहर जैसी दलहनी फसलें उगा रहे हैं। इसके अलावा लौकी, भिंडी, करेला, बरबट्टी सहित विभिन्न मौसमी सब्जियों का उत्पादन कर स्थानीय बाजार में बिक्री से अतिरिक्त आय अर्जित कर रहे हैं। फसलों में विविधता आने से उनकी खेती अधिक उपयोगी और लाभकारी हुई है। श्री ठाकुर ने सौर पंप की सुविधा का उपयोग केवल खेतों की सिंचाई तक सीमित नहीं रखा है। वे इसके माध्यम से तालाब में पानी की उपलब्धता बनाए रखते हुए मछली पालन भी कर रहे हैं। खेती और मछली पालन के समन्वित प्रयास से उपलब्ध भूमि एवं जल संसाधनों का बेहतर उपयोग हो रहा है और परिवार के लिए आय के अलग-अलग स्रोत विकसित हुए हैं। इन्हीं गतिविधियों के माध्यम से उनकी वार्षिक आमदनी में 80 से 90 हजार रुपये का इजाफा हुआ है। श्री ठाकुर बताते हैं कि सोलर पंप ने खेती के प्रति उनका भरोसा बढ़ाया है। अब वे मौसम के साथ अलग-अलग फसलें और सब्जियां उगा पा रहे हैं। मछली पालन से भी अतिरिक्त आय मिल रही है। सौर ऊर्जा से संचालित होने के कारण पंप पर ईंधन का खर्च नहीं आता, जिससे खेती की लागत कम रखने में मदद मिलती है। दूरस्थ एवं आदिवासी बहुल दंतेवाड़ा जिले में सौर सुजला योजना किसानों तक स्वच्छ ऊर्जा आधारित सिंचाई सुविधा पहुंचाकर उनकी खेती को नया आधार दे रही है। चरण सिंह ठाकुर का उदाहरण बताता है कि सिंचाई के भरोसेमंद साधन और उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग से किसान परंपरागत खेती से आगे बढ़कर बहुफसली कृषि, सब्जी उत्पादन और मछली पालन जैसी गतिविधियां अपनाते हुए अपनी आय बढ़ा सकते हैं।

यूपीआईटीएस में काशी के हुनर को मिलेगा ग्लोबल बाजार, यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में दिखेगी बनारसी विरासत

वाराणसी काशी अपनी प्राचीन विरासत, समृद्ध धरोहर, पारंपरिक हस्तशिल्प और आधुनिक बाजार की जरूरतों के अनुरूप तैयार किए जा रहे उत्पादों को ग्रेटर नोएडा में आयोजित होने वाले यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में प्रदर्शित करने के लिए तैयार है। 25 से 29 सितंबर तक इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट, ग्रेटर नोएडा में आयोजित होने वाले यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो के चौथे संस्करण में काशी के खानपान से लेकर पहनावे तक, घर की सजावट और पारंपरिक परिधान से लेकर दैनिक उपयोग के उत्पादों तक की विविधता देखने को मिलेगी। बनारसी सिल्क साड़ी, लकड़ी के खिलौने, गुलाबी मीनाकारी, सॉफ्ट स्टोन जाली वर्क, हैंडमेड बनारसी सिल्क के विभिन्न उत्पाद और अन्य पारंपरिक उत्पादों के साथ आधुनिक बाजार की मांग के अनुरूप तैयार किए गए उत्पाद भी प्रदर्शित किए जाएंगे। आयोजन के जरिए स्थानीय उद्यमियों और हस्तशिल्पियों को वैश्विक बाज़ार से जुड़ने का अवसर मिलेगा। 45 उद्यमियों ने कराया पंजीकरण जिला उद्योग प्रोत्साहन तथा उद्यमिता विकास केंद्र के उपायुक्त अभिषेक प्रियदर्शी ने बताया कि वाराणसी से 45 उद्यमियों ने यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में भाग लेने के लिए पंजीकरण कराया है। इनमें वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट, सूक्ष्म, एमएसएमई, जीआई उत्पाद,   नए और पुराने निर्यातक,एक जिला एक व्यंजन तथा मुख्यमंत्री युवा योजना से जुड़ी महिला उद्यमी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि ट्रेड शो में लकड़ी के खिलौने, गुलाबी मीनाकारी, बनारसी सिल्क साड़ी समेत काशी के विभिन्न पारंपरिक और आधुनिक उत्पादों को प्रदर्शित किया जाएगा। इसके अलावा ओडीओसी के उत्पादों में लौंगलता ,तिरंगी बर्फ़ी और बनारसी पान भी खाने को मिलेगा।  यूपीआईटीएस का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर तैयार उत्पादों को बड़े बाजार तक पहुंचाने के साथ उद्यमियों को नए व्यापारिक संपर्क उपलब्ध कराना है। काशी की विरासत से आधुनिक उत्पाद तक दिखेगी विविधता एमएसएमई और युवा उद्यमियों के उत्पाद काशी में बदलते कारोबारी परिवेश और नए बाजारों की ओर बढ़ते कदम को प्रदर्शित करेंगे। प्राकृतिक वेलनेस उत्पाद , कंटेनर्स बैग, मल्टीफिलामेंट यार्न और अन्य उत्पाद प्रदर्शित किए जायेंगे, जिनका उपयोग विभिन्न वस्तुओं के परिवहन के लिए किया जाता है। विदेश में इस बैग की अच्छी मांग है। यूपीआईटीएस से खरीदारों को काशी की पारंपरिक कला, शिल्प और उद्यमिता की विविधता एक ही मंच पर देखने को मिलेगी। उद्यमियों ने कहा- बनारस के उत्पादों को वैश्विक मंच मिलना महत्वपूर्ण ट्रेड शो में शामिल होने वाले उद्यमियों का कहना है कि ऐसे आयोजनों से स्थानीय उत्पादों को बड़े बाजार तक पहुंचाने का अवसर मिलता है। जीआई और ओडीओपी गुलाबी मीनाकारी के राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता हस्तशिल्पी कुञ्ज बिहारी तथा वाराणसी 'वुडेन लेकर वेयर' लकड़ी के खिलौने उद्योग से जुड़ी उद्यमी अमृता सिंह ने बताया कि ऐसे आयोजनों से पारंपरिक शिल्प से जुड़े लोगों को बड़ा बाजार मिल जाता है। सीएम युवा योजना से लाभान्वित, महिला स्वास्थ्य से जुड़ी प्राकृतिक वेलनेस उत्पाद बनाने वाली कंपनी 'श्री विधि ऑर्गेनिक प्रोडक्ट्स' की निदेशक अदिति सिंह ने बताया कि इस तरह के आयोजन उद्यमियों को अपने उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने का अवसर देते हैं।  वर्जन   उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो पूर्वांचल सहित पूरे प्रदेश के एमएसएमई तथा हैंडीक्राफ्ट को स्थानीय बाजार से राष्ट्रीय एवं वैश्विक बाजार तक पहुंचाने, नए खरीदारों से जोड़ने तथा तकनीकी एवं औद्योगिक विस्तार का महत्वपूर्ण मंच बन गया है। नए ऑर्डर, निवेश और औद्योगिक विस्तार से रोजगार तथा स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिल रहा है।     

ट्रेड शो में प्रवाहित होगी संगम नगरी के हस्तशिल्प, खानपान और परिधानों की त्रिवेणी

प्रयागराज ग्रेटर नोएडा में 25 से 29 सितंबर तक आयोजित होने वाले 'उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो' (यूपीआईटीएस) 2026 में संगम नगरी प्रयागराज के उद्यमी अपनी व्यापारिक क्षमता और हुनर की धमक दिखाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। प्रदेश सरकार की इस पहल से प्रयागराज के स्थानीय उद्यमियों, हस्तशिल्पियों और नवाचारियों को एक बड़ा ग्लोबल मंच उपलब्ध हो रहा है। इस वृहद आयोजन में प्रयागराज जनपद की भागीदारी हर साल बढ़ रही है। इस वर्ष जिले के 10 उद्यमी यूपीआईटीएस में हिस्सा लेंगे, जिनके लिए आवंटित स्टाल में जिले के उत्पादों का डंका बजेगा। हस्तशिल्प, खानपान और परिधानों की त्रिवेणी   यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो  के चौथे संस्करण में प्रयागराज  के विभिन्न वर्गों के उद्यमियों को अवसर दिया गया है। उपायुक्त उद्योग शरद टंडन बताते हैं कि प्रयागराज से विभिन्न श्रेणियों मे इस बार दस प्रतिभागियों को अवसर दिया गया है। मेले में ओडीओपी ( एक जनपद एक उत्पाद) श्रेणी के तहत 3  इकाइयों के  स्टाल लगेंगे। इसके अलावा  एमएसएमई मे 5  इकाइयां और  'नवोदित निर्यातक' श्रेणी में  एक और ओडीओसी के लिए एक इकाई का चयन किया गया है, जिन्हें कुल 12  स्टाल  दिए गए हैं। चयनित इकाइयों मे संगम नगरी के परंपरागत हस्तशिल्प,  यहां के खानपान और परिधानों का मेल देखने को मिलेगा । * पहचान बनाएंगे परंपरागत हस्तशिल्प मूंज के उत्पाद* एक जनपद एक उत्पाद की श्रेणी में चयनित मूंज के उत्पादों को ट्रेड शो मे खास पहचान मिलेगी। इस श्रेणी के अंतर्गत प्रयागराज में मूंज के अंतर्राष्ट्रीय स्तर के उत्पाद बनाने वाली इकाई 'द परफेक्ट बाजार' का चयन किया गया है । ‘द परफ़ैक्ट बाजार' के पार्टनर पवन कुमार मिश्रा बताते हैं कि उन्हें ट्रेड शो के हॉल नंबर 10 मे स्टाल मिला है। उनकी इकाई अलग -अलग श्रेणियों में एक दर्जन से अधिक तरह के उत्पाद के स्टाल यहाँ लगाएगी। उनके सभी उत्पाद ईकोफ़्रेंडली हैं और सभी  ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म पर पहले से उपलब्ध हैं ।  खानपान में पैक्ड समोसे के जायके का बिखरेगा स्वाद उत्तर प्रदेश के समृद्ध व्यंजनों की विरासत की ग्लोबल ब्रांडिंग के लिए योगी सरकार द्वारा शुरू की गई ‘एक जनपद एक व्यंजन योजना’ में चयनित उत्पाद भी यूपी आईटीएस 2026 में अपने जायके का स्वाद बिखेरेंगे। उपायुक्त उद्योग शरद टंडन का कहना है कि पहली बार यूपी आईटीएस मे ओडीओसी श्रेणी को शामिल किया गया है, जिसे वहां निःशुल्क स्टाल दिया जा रहा है। इस श्रेणी के लिए 11 आवेदन आए थे, जिसमें परम्परागत जायके में अपनी खास पहचान रखने वाले प्रयागराज के पैक्ड समोसे को जगह मिली है। ओडीओसी श्रेणी में चयनित प्रयागराज के बलुआ घाट स्थित मुंडा स्नैक्स के पैक्ड समोसे का जायका इंटरनेशनल ट्रेड शो में जा रहा  है। मुंडा स्नैक्स के प्रतिनिधि अमित यादव का कहना है कि वैसे तो देशी घी, पनीर और ड्राई फ्रूट्स से बने उनके समोसे अपने लज़ीज जायके के लिए मशहूर हैं, लेकिन ट्रेड शो में मूल जायके को बनाए रखने के उनका ड्राई मसाला समोसा जा रहा है। इसके 5  हजार से अधिक ड्राई पीस ट्रेड शो के लिए ले जा रहे हैं | इसकी पैकिंग पर भी खास ध्यान दिया गया है, क्योंकि इसे घर पर 15 दिन रखा जा सकता है । इसके अलावा  खानपान की श्रेणी में ही केशरी गृह उद्योग , इकावा एग्रो और श्याम डेयरी उत्पादों को भी जगह मिली है। विशिष्ट परिधानों और फ्रैगनेंस का मेल इस बार  ट्रेड शो के लिए चयनित उद्यमियों में हुनर की विविधता भी देखने को मिलेगी। इस बार परिधान और इत्र की इकाइयों का चयन किया गया है। परिधान की श्रेणी में तीन उद्यमी हिस्सा ले रहे हैं, जिसमें पुष्पांजलि की मिली मेहरोत्रा, अकील एम्ब्रायडरी के अकील अहमद और पवन मिश्रा ग्रामोद्योग के पवन मिश्रा शामिल है।  इस श्रेणी के उद्यमी खादी, कॉटन, एम्ब्रॉयडरी और हैंड प्रिंटिंग में अपने हुनर का जादू बिखेरेंगे। पहली बार whiffhaus fragrance इकाई को इसमें जगह मिली है। एमएसएमई श्रेणी के अंतर्गत चयनित इस इकाई के प्रतिनिधि अनवर आजम कहते हैं कि परंपरा और आधुनिकता से जुड़ी 60 तरह की खुशबू के इत्र ट्रेड शो मे अपनी महक बिखेरेंगे ।