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सरकारी अफसरों के लिए अलर्ट! मोहन सरकार ने रोक दी छुट्टियां, मुख्यालय से दूर रहने पर कार्रवाई

भोपाल  मध्यप्रदेश में विधानसभा के बजट सत्र को लेकर सरकार ने अधिकारियों और कर्मचारियों पर सख्त शिकंजा कस दिया है। सरकार ने साफ निर्देश जारी किए हैं कि कोई भी अधिकारी-कर्मचारी बिना पूर्व अनुमति मुख्यालय (Headquarters) नहीं छोड़ेगा। आदेशों का उल्लंघन करने पर कड़ी विभागीय कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र 16 फरवरी से शुरू होकर 6 मार्च तक चलेगा, जिसमें राज्य का वार्षिक बजट पेश किया जाएगा। सत्र को सुचारु रूप से संचालित करने और विधानसभा प्रश्नों के समय पर जवाब सुनिश्चित करने के लिए यह फैसला लिया गया है। बिना अनुमति मुख्यालय छोड़ा तो एक्शन तय विधानसभा सत्र को ध्यान में रखते हुए प्रदेशभर के जिला कलेक्टरों ने अपने-अपने जिलों में सख्त निर्देश जारी कर दिए हैं।  आदेश के मुताबिक— अधिकारी किसी भी हाल में बिना अनुमति मुख्यालय नहीं छोड़ेंगे.. अपरिहार्य स्थिति में अपर कलेक्टर से अनुमति लेना अनिवार्य,अवकाश के लिए भी पूर्व स्वीकृति जरूरी,नियम तोड़ने पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी। विधानसभा प्रश्नों पर खास फोकस सरकार ने विधानसभा से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता देते हुए — नोडल अधिकारियों की नियुक्ति के निर्देश, विधानसभा प्रश्नों के तत्काल और सही उत्तर भेजने की जिम्मेदारी ,जिला कार्यालयों में कंट्रोल रूम स्थापित करने के आदेश जारी किए हैं। स्पष्ट किया गया है कि प्रश्नों के जवाब में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सरकार का साफ संदेश सरकार का स्पष्ट संदेश है — बजट सत्र के दौरान प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहेगा। मुख्यालय से गैरहाजिरी अब नहीं चलेगी। लापरवाही पर सीधा एक्शन होगा।

मध्य प्रदेश की EVM राजस्थान निकाय चुनाव में, दोनों राज्यों के बीच समझौता

 ग्वालियर राजस्थान राज्य में स्थानीय निकाय चुनाव कराने के लिए मध्य प्रदेश से इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनें किराए पर लेगा. प्रदेश के चुनाव आयुक्त राजेश्वर सिंह ने कहा कि EVM की उपलब्धता के संबंध में राजस्थान और मध्य प्रदेश के राज्य चुनाव आयोगों के बीच एक अतिरिक्त MoU साइन किया गया है. उन्होंने कहा कि MoU के तहत, मध्य प्रदेश राज्य चुनाव आयोग शहरी स्थानीय निकाय और पंचायती राज चुनावों में इस्तेमाल के लिए राजस्थान को किराए पर 30 हजार कंट्रोल यूनिट और 60 हजार बैलेट यूनिट देगा. उन्होंने कहा कि EVM की सप्लाई, इस्तेमाल, रखरखाव, सुरक्षा और वापसी से संबंधित सभी शर्तों को भारत निर्वाचन आयोग के दिशानिर्देशों के अनुसार सुनिश्चित किया जाएगा. राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह ने बताया- MOU के तहत मध्य प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग की तरफ से राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग को चुनावों के लिए कुल 30 हजार कंट्रोल यूनिट और 60 हजार बैलेट यूनिट किराए पर उपलब्ध कराई जाएंगी। स्थानीय निकाय और पंचायत चुनावों के लिए मध्यप्रदेश से मंगाई जाएंगी ईवीएम मशीन। (फाइल फोटो) इन्होंने कहा कि इन ईवीएम का उपयोग प्रदेश में नगर निकाय एवं पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों में किया जाएगा। ईवीएम की आपूर्ति, उपयोग, रख-रखाव, सुरक्षा और वापसी से संबंधित सभी शर्तें भारत निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के तहत सुनिश्चित की जाएंगी। ईवीएम के तकनीकी परीक्षण (एफ.एल.सी.), मरम्मत और आवश्यक तकनीकी सहयोग का काम भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (ईसीआईएल), हैदराबाद के अधिकृत इंजीनियरों द्वारा किया जाएगा। राजेश्वर सिंह ने यह भी कहा कि यह समझौता दोनों आयोगों के बीच EVM की उपलब्धता और इस्तेमाल पर पहले हुई सहमति का ही विस्तार है. चुनाव अधिकारी ने कहा कि EVM की सुरक्षा, ट्रांसपोर्टेशन, स्टोरेज और संचालन की व्यवस्था निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार सुनिश्चित की जाएगी और मशीनों के लिए टेक्निकल टेस्टिंग (फर्स्ट-लेवल चेकिंग), मरम्मत और जरूरी टेक्निकल सपोर्ट इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (ECIL) हैदराबाद के इंजीनियर करेंगे.

जिस पत्नी की हत्या में काटी सजा वह जिंदा मिली

फरीदाबाद. फरीदाबाद में हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां पत्नी की हत्या के आरोप में पति ने करीब छह साल जेल की सजा काट ली, लेकिन बाद में पत्नी जिंदा मिल गई। इसके बाद कोर्ट ने आरोपी पति को हत्या के प्रयास का दोषी मानते हुए छह साल की सजा सुनाई। चूंकि आरोपी पहले ही छह साल से अधिक समय जेल में बिता चुका था, इसलिए एडिशनल सेशन जज ज्योति लांबा की कोर्ट ने सजा को अंडरगोन मानते हुए 13 हजार रुपए का जुर्माना लगाकर उसे रिहा करने के आदेश दिए। क्या है पूरा मामला नई दिल्ली निवासी मलखान ने सराय ख्वाजा थाना पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उन्होंने अपनी बेटी सुधा की शादी वर्ष 2005 में गांव जनौली किशनपुर (हाथरस, यूपी) निवासी मुकेश उर्फ मनोज से की थी। दंपती के छह बच्चे हैं। शादी के कुछ समय बाद दोनों फरीदाबाद आकर रहने लगे और दिहाड़ी मजदूरी करने लगे। 13 दिसंबर 2019 को सुधा और मुकेश रोज की तरह काम पर निकले थे। शाम को मुकेश अकेला घर लौट आया। बच्चों के पूछने पर उसने बताया कि सुधा मायके गई है। अगले दिन जब बच्चों ने मामा के यहां फोन किया तो पता चला कि सुधा वहां नहीं पहुंची थी। चरित्र पर शक, उस्तरे से रेत दिया गला इसके बाद पिता मलखान ने सराय ख्वाजा थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने जांच के दौरान सुधा के पति मुकेश को गिरफ्तार किया। पूछताछ में मुकेश ने कबूल किया कि उसे सुधा के चरित्र पर शक था। उसने 13 दिसंबर 2019 को काम के बहाने उसे साथ ले जाकर गुरुग्राम नहर के किनारे उस्तरे से उसका गला रेत दिया और चुन्नी से गला घोंट दिया। सुधा को मरा समझकर वह मौके से फरार हो गया। मुकेश की निशानदेही पर पुलिस ने उस्तरा और खून से सना गमछा बरामद किया, लेकिन सुधा का शव नहीं मिला। नहर में भी तलाश की गई, मगर कोई सुराग नहीं लगा। इसके बाद पुलिस ने हत्या के आरोप में मुकेश को अदालत में पेश कर जेल भेज दिया।

पंजाब में कोहरे और लो-विजिबिलिटी की मार झेल रही जनता

जालंधर. जालंधर महानगर में घना कोहरा पड़ने की वजह से विजिबिलिटी भी 30 मीटर से भी कम है। ऐसे में वाहन चालकों को परेशानी आ रही है। इसके साथ-साथ सर्द हवाएं चलने की वजह से ठंडक ज्यादा बढ़ गई है। मौसम विभाग की तरफ से दिन निकलने के साथ ही मौसम पूरी तरह से साफ हो जाएगा और धूप निकलने से तापमान में वृद्धि भी दर्ज की जाएगी। मौसम विभाग के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्रा ने बताया है कि फरवरी महीने में देश के अधिकांश हिस्सों में तापमान सामान्य से अधिक और वर्षा सामान्य से कम रहने की संभावना है, विशेषकर उत्तर-पश्चिम भारत में, जिसमें पंजाब भी शामिल है। इस सूचना के बाद कृषि विशेषज्ञों और किसानों में फसलों पर संभावित प्रभाव को लेकर चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मौसम रबी फसलों, विशेषकर गेहूं पर नकारात्मक असर डाल सकता है। फरवरी में गेहूं की बल्ली में दाना बनना शुरू होता है और इस समय यह दूध जैसे तरल पदार्थ के रूप में होता है। यदि तापमान औसत से अधिक रहा, तो यह दाना सूख सकता है, जिससे दाने का आकार छोटा होने की संभावना बढ़ जाती है। यदि ऐसा हुआ, तो यह चौथी बार होगा जब पंजाब के किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। पिछले वर्ष भी फरवरी में गर्मी के कारण गेहूं की पैदावार में कमी आई थी, जिससे किसानों को नुकसान हुआ।

सीएम योगी के पास पहुंच कर बालहठ के साथ निश्छल मन से अपनी बात रखते हैं प्रदेश भर के बच्चे

सीएम योगी का बाल प्रेम  जनसेवा, संवेदना और सुशासन की जीवंत तस्वीर प्रस्तुत करते हैं मुख्यमंत्री सीएम योगी के पास पहुंच कर बालहठ के साथ निश्छल मन से अपनी बात रखते हैं प्रदेश भर के बच्चे  बच्चों के सामने झलक पड़ता है सीएम योगी का कोमल हृदय, समाज को जोड़ती है सीएम की बच्चों से यह दोस्ती बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा व सुरक्षा पर सीएम योगी का है विशेष फोकस एडमिशन, उपचार के लिए तत्काल आर्थिक सहायता भी उपलब्ध कराते हैं मुख्यमंत्री  लखनऊ  नर्सरी में एडमिशन कराने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पास पहुंची मासूम बच्ची की जिद हो या चॉकलेट की मांग करने वाले बच्चों की हठ। जिन मुख्यमंत्री का नाम सुनकर अपराधी कांप उठते हैं, बच्चे उन्हीं से मिलकर सहजता से अपनी जिद मनवा लेते हैं। कहते हैं, ‘बच्चे मन के सच्चे’, वे अपने दिल की भावना को अत्यंत निश्छलता से प्रकट कर देते हैं, यही भाव उस समय सामने आया, जब सीएम योगी आदित्यनाथ को देखते ही एक छोटी बच्ची ने उन्हें सैल्यूट किया। सीएम ने भी मुस्कुराते हुए बच्ची को खूब मन लगाकर पढ़ने के लिए कहा। उनका यह बाल प्रेम उनके कोमल हृदय व सर्वसुलभ होने के साथ-साथ जनसेवा, संवेदना व सुशासन की जीवंत तस्वीर प्रस्तुत करता है। मुख्यमंत्री के बच्चों से जुड़ाव और उनके साथ भावनात्मक संवाद के कई दृश्य समय-समय पर सामने आते रहते हैं। विगत सोमवार को ‘जनता दर्शन’ में मां के साथ आई बच्ची अनाबी अली से सीएम का संवाद इन दिनों चर्चा में है। अपने एडमिशन के लिए जिद, फिर एबीसीडी व कविता सुनाकर अनाबी ने सीएम का दिल जीत लिया। वहीं मकर संक्रांति पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का गोरखनाथ मंदिर में एक बच्चे से “और क्या चाहिए” पूछना और उसका मासूम जवाब सुनकर खिलखिलाकर हंसना भी उनके बालप्रेम को प्रकट करता है। बच्चों से अत्यंत आत्मीयता से संवाद और उनके भविष्य को लेकर त्वरित निर्णय मुख्यमंत्री की संवेदनशीलता को प्रदर्शित करते हैं। बीते दिनों ‘जनता दर्शन’ में दो साल की अनन्या से संवाद भी लोगों के मन को छू गया। इसी तरह 31 दिसंबर को मेजर की बेटी अंजना भट्ट ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर अपने मकान पर कब्जे की शिकायत की, जिस पर मुख्यमंत्री ने 24 घंटे के भीतर न सिर्फ मकान को कब्जा मुक्त कराया, बल्कि आरोपियों पर एफआईआर व तत्काल गिरफ्तारी भी कराई। यह मामला सीएम की जन समस्याओं के प्रति गंभीरता को प्रकट करते हुए स्पष्ट संदेश देता है कि वे कानून व्यवस्था, बच्चों, महिलाओं और कमजोर वर्गों से जुड़े मामलों का समाधान कराने में तनिक भी विलंब नहीं करते।  कानपुर की मूक-बधिर युवती खुशी गुप्ता की कहानी भी इन दिनों हर किसी की जुबां पर है। मुख्यमंत्री से मिलने की उसकी जिद और अकेले पैदल चलकर लखनऊ पहुंचने की जानकारी जब सीएम योगी आदित्यनाथ को मिली तो उन्होंने उसे बुलाकर उसके बनाए चित्रों को स्वीकार किया और उसके शिक्षित-सुरक्षित भविष्य का आश्वासन दिया। मुख्यमंत्री के अपनत्व से भाव-विभोर खुशी की ‘अनकही भावनाओं’ ने 25 करोड़ प्रदेशवासियों के बीच मुख्यमंत्री की ‘प्रदेश ही परिवार’ धारणा की विश्वसनीय तस्वीर पेश की।  ‘जनता दर्शन’ के जरिए लखनऊ की अनाबी अली, कानपुर की मायरा, गोरखपुर की पंखुड़ी और मुरादाबाद की वाची का स्कूल में एडमिशन कराना भी सीएम योगी की संवेदनशीलता का हिस्सा है। कानपुर की नन्ही मायरा ने कहा था कि मैं बड़ी होकर डॉक्टर बनना चाहती हूं। इस पर सीएम ने तत्काल उसका प्रवेश कराने का निर्देश दिया। वाची ने कहा कि मैं पढ़ना चाहती हूं,  सीएम ने उसका भी प्रवेश कराया। गोरखपुर की पंखुड़ी की फीस माफ कराने के साथ ही उसे पुनः विद्यालय भेजना भी सुनिश्चित कराया। गणतंत्र दिवस परेड में भी सीएम के पास पहुंच गए बच्चे 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस परेड में आए बच्चे सीधे सीएम योगी के पास पहुंच गए। सभी ने सीएम के साथ फोटो खिंचवाई, उनसे बातचीत की। सीएम ने उन्हें दुलारा और एक नन्ही बच्ची को गोद में लेकर अपना वात्सल्य भाव प्रकट किया।   वृद्ध मां के दर्द से द्रवित सीएम ने कैंसर पीड़ित बेटे को भिजवाया अस्पताल बीते सितंबर में ‘जनता दर्शन’ में कानपुर की रायपुरवा निवासी एक वृद्ध मां अपने कैंसर पीड़ित बेटे का दर्द लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पास पहुंची थीं। उनकी तकलीफ देखकर सीएम द्रवित हो गए और कैंसर पीड़ित बेटे को एंबुलेंस से सीधे कल्याण सिंह सुपर स्पेशियिलिटी कैंसर इंस्टीट्यूट भिजवाकर उसका इलाज प्रारंभ कराया। ऐसे अनेक उदाहरण हैं, जो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बाल प्रेम, जनसेवा, संवेदना व सुशासन की जीवंत तस्वीर प्रस्तुत करते हैं।

सहेलियों ने बदनामी से तंग आकर महिला की पीट-पीटकर की हत्या

गरियाबंद. जिले में एक महिला से बर्बरता के बाद उसकी ही सहेलियों ने पीट-पीटकर मौत के घाट उतार दिया. आरोपियों ने पहले महिला के प्राइवेट पार्ट पर जबरदस्ती लाल मिर्च डाल दिया. आपा खो चुकी दोनों आरोपी महिला ने डंडे से जमकर पीट, साथ ही लात-घूंसों से हमलाकर हत्या कर दी. मृतिका की पहचान सुमित्रा नेताम (37) के रूप में हुई है. पुलिस की प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि वारदात समाज में बदनाम करने और चरित्र पर आरोप लगाने की रंजिश के कारण अंजाम दिया गया है. मृतका की पहचान सुमित्रा नेताम (37) के रूप में हुई है. पूरा मामला मैनपुर ब्लाक के शोभा थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम गरीबा का है. जानकारी के मुताबिक, आरोपी सुगतिन नेताम (36) और ईतवारिन बाई (46) के चरित्र को लेकर सुमित्रा गांव में लोगों के बीच आरोप लगाने लगी थी, जिससे उनकी सामाजिक छवि धूमिल हो रही थी. इसी बात को लेकर तीनों के बीच लंबे समय से तनाव बना हुआ था. घटना के दिन दोनों आरोपी महिलाएं सुमित्रा को सबक सिखाने के इरादे से उसके घर पहुंची थी. आरोप है कि आरोपियों ने सुमित्रा के साथ गंभीर शारीरिक हिंसा की. दोनों महिलाओं ने सुमित्रा के घर पहुंचकर पहले उसके गुप्तांग में लाल मिर्च और अन्य ज्वलनशील पदार्थ डालकर तड़पाया, फिर सीने पर चढ़कर डंडे और लात-घूंसों से हमला कर उसे मौत के घाट उतार दिया. घटना के बाद आरोपी फरार होने की कोशिश में थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया. नक्सल प्रभावित क्षेत्र होने के कारण पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच की. शव का पोस्टमॉर्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया गया है.

भागीरथपुरा हादसे के पीड़ितों को आर्थिक और रोजगार राहत देने की मांग जोर पकड़ रही

इंदौर  देश के सबसे स्वच्छ और मध्य प्रदेश के आर्थिक शहर इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से बीमार हुए लोगों और जान गवाने वालों के परिजन को न्याय दिलाने की मांग उठाते हुए कांग्रेस ने शहर के राजबाड़ा पर धरना-प्रदर्शन किया। इस दौरान उन 32 लोगों के परिवार के सदस्य भी शामिल हुए, जिनकी मौत उल्टी-दस्त से ग्रस्त होने से हुई है। इस दौरान कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मंच से मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि, सरकार पीड़ित परिवारों को एक करोड़ रुपए मुआवजा दें। नगर निगम में परिवार के एक सदस्य को नौकरी दी जाए। अगर ये मांग पूरी नहीं होती है तो 8 दिन के बाद कांग्रेस पार्टी पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए जनता से निवेदन कर पूरा इंदौर बंद कराएगी। इंदौर में बनाई जाएं दो वाटर लैब शहर अध्यक्ष चिंटू चौकसे ने कहा कि, दो वाटर लैब हर तैयार की जाए। कार्यकर्ता का यह दायित्व है कि घर-घर जाकर उस पानी के सैंपल लेकर जांच कराएं। भागीरथपुरा में रहने वाले छह माह के अव्यान साहू की मां ने कहा, इंदौर के दूषित पानी ने मेरे बेटे की जान ले ली। अन्य परिवारों ने भी उनकी परेशानी बताई। कई परिवारों ने कहा कि, अभी तक सहायता तक नहीं मिल सकी। धरना स्थल पर पूर्व मंत्री सज्जन वर्मा, महिला कांग्रेस अध्यक्ष रीना सेतिया, विपिन वानखेड़े, शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे, उषा नायड़, अधिवक्ता प्रमोद द्विवेदी, शेख अलीम, पंडित कृपा शंकर शुक्ला, सत्यनारायण पटेल समेत अन्य पदाधिकारी व कार्यकर्ता मौजूद रहे। प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि, हर परिवार की अपनी वेदना है। शहरवासियों ये महसूस करो कि, हमारे घर ये त्रासदी आ जाती तो क्या होता? जिन्हें हमने कुर्सी दी, वोट दिया उनसे सवाल करना जरूरी है। अब पानी से किसी की मौत न हो इसके लिए सभी को जागना जरूरी है। संसद तक इस मामले कि गूंज उठ चुकी है। देश के प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री, सुमित्रा महाजन और शिवराज सिंह चौहान ने सवाल क्यों नहीं पूछा? जिस पानी को हम जीवन देने का माध्यम मानते हैं, उस पानी का जहर इंदौर नगर निगम ने लोगों को पिला दिया। ये सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, व्यवस्था का पतन है। सवाल पूछा तो बोले- इंदौर को बदनाम कर रहे हैं पटवारी ने कहा- भागीरथपुरा में जो हुआ वो पूरे इंदौर और पूरे प्रदेश के पानी की स्थिति है। जनता का जीवन इतना सस्ता है कि, दो लाख रुपए देकर सबने अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन कर दिया। उन परिवारों को लालच दिया गया कि, आवाज मत उठाना, एक भी शब्द कहा तो सहायता नहीं मिलेगी। सज्जन सिंह वर्मा और प्रतिनिधि मंडल को काले झंडे दिखाए गए। आखिर कैसा शहर बन रहा है हमारा इंदौर ? जब हम सवाल पूछते हैं तो मंत्री कहते हैं- इंदौर को बदनाम कर रहे हैं। दो हजार करोड़ रुपए की बन गई नकली फाइल जीतू पटवारी ने कहा, निगम में 2 हजार करोड़ रुपए की नकली फाइल बन गई। उनके पैसे भी निकल गए। कोर्ट में मुकदमा चल रहा है, लेकिन आरोपी कोई नहीं है। एक भी राजनीतिक व्यक्ति की जिम्मेदारी नहीं। महापौर की साइन से फाइल बनती है। एमआइसी की साइन से फाइल बनती है। पार्षद फाइल पर साइन कर आगे बढ़ाते हैं। अधिकारी उसे आगे बढ़ाते हैं तो राजनीतिक लोगों की 2 हजार करोड़ रुपए के घोटाले में कोई जिम्मेदारी क्यों नहीं? ये रुपए जनता के ही थे। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से इस्तीफे की मांग वहीं, पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने कहा कि, हमने इंदौर की जनता से आह्वान किया था कि, न्याय के लिए आएं। इस दौरान उन्होंने मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से इस्तीफा देने की मांग की। साथ हीये भी कहा कि, कांग्रेस न्याय के लिए हमेशा लड़ती रहेगी। जिस शहर के सीएम खुद प्रभारी, वहां नहीं रुक रहीं मौतें- रीना सेतिया महिला प्रदेश अध्यक्ष रीना सेतिया ने कहा कि, 9 विधायक, 2 मंत्री, महापौर भाजपा के हैं। सीएम खुद इंदौर के प्रभारी मंत्री हैं, बावजूद इसके शहर को जहरीला पानी मिला। इंदौर में लगातार मौतें हो रही हैं, लेकिन अब तक किसी पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। हम इन पीड़ित परिवारों के साथ संवेदना व्यक्त करते हैं और उनके न्याय के लिए लंबी लड़ाई भी लड़नी पड़ी तो पीछे नहीं हटेंगे।

सरकारी कर्मचारियों के लिए चेतावनी: ट्रांसफर के 6 महीने बाद घर नहीं छोड़ा तो होगी सख्त कार्रवाई

भोपाल  मध्यप्रदेश में शासकीय आवासों को लेकर अब कोई ढिलाई नहीं चलेगी। राजधानी भोपाल से तबादला होने के बाद अधिकारी-कर्मचारी लंबे समय तक सरकारी आवास पर कब्जा नहीं रख सकेंगे। गृह विभाग ने शासकीय आवास नियमों में संशोधन करते हुए सख्त गाइडलाइन जारी कर दी है, जो चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी से लेकर वरिष्ठ अधिकारियों तक सभी पर समान रूप से लागू होगी। 6 माह की सीमा, उसके बाद कड़ा एक्शन नए आदेश के अनुसार, भोपाल से बाहर स्थानांतरण होने की स्थिति में शासकीय सेवक अधिकतम 6 माह तक ही सरकारी आवास रख सकेगा। इस अवधि में सामान्य किराया लिया जाएगा 6 माह के बाद आवास खाली नहीं करने पर दंडात्मक किराया वसूला जाएगा.. साथ ही जबरन बेदखली की कार्रवाई की जाएगी..दंडात्मक किराया 90 हजार रुपये तक हो सकता है। कैबिनेट के फैसले के बाद मचा हड़कंप यह फैसला पहले ही कैबिनेट में लिया जा चुका है। इसके बाद कई विधायकों, मंत्रियों और अधिकारियों को नोटिस जारी किए गए। कुछ अधिकारियों ने यह तर्क दिया कि उनके बच्चे भोपाल में पढ़ रहे हैं, इसलिए समय दिया जाए, लेकिन गृह विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि नियम सभी के लिए बराबर हैं। सेवानिवृत्त कर्मचारियों को सीमित राहत सेवानिवृत्ति की स्थिति में कर्मचारियों को कुल 6 माह की सशर्त अनुमति मिलेगी— पहले 3 माह: सामान्य किराया अगले 3 माह: सामान्य किराए का 10 गुना 6 माह बाद भी आवास नहीं छोड़ा तो दंडात्मक किराया और बेदखली इस्तीफा या सेवा से पृथक होने पर सिर्फ 3 माह यदि कोई कर्मचारी— त्यागपत्र देता है सेवा से पृथक होता है. या अनधिकृत पाया जाता है, तो उसे केवल 3 माह तक ही सरकारी आवास में रहने की अनुमति होगी। इसके बाद तत्काल बेदखली और दंडात्मक वसूली की जाएगी। सरकार का मकसद साफ गृह विभाग का कहना है कि इन संशोधित नियमों का उद्देश्य — शासकीय आवासों के दुरुपयोग को रोकना वास्तविक जरूरतमंद अधिकारियों-कर्मचारियों को समय पर आवास उपलब्ध कराना.. अब मियाद खत्म होते ही सख्त कार्रवाई तय है, किसी भी स्तर पर ढील नहीं दी जाएगी। सरकारी आवास पर अनावश्यक कब्जा अब भारी पड़ेगा। तबादला, रिटायरमेंट या सेवा समाप्त—हर स्थिति में तय समय पर आवास खाली करना अनिवार्य होगा, वरना जेब पर सीधा असर पड़ेगा।

करोड़ों की ठगी का खुलासा: इंदौर में लग्जरी कार रेंटल के नाम पर आरोपी गिरफ्तार, 39 कारें जब्त

 इंदौर मध्य प्रदेश के इंदौर में लग्जरी कारों के नाम पर की जा रही करोड़ों रुपए की ठगी का सनसनीखेज मामला सामने आया है. अन्नपूर्णा थाना पुलिस ने आरोपी संजय कालरा को गिरफ्तार कर अब तक 39 महंगी और लग्जरी कारें बरामद की हैं, जिनकी कुल कीमत करीब 6 करोड़ रुपए बताई जा रही है. आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी सहित विभिन्न धाराओं में मामले दर्ज किए गए हैं और जांच लगातार आगे बढ़ रही है. दरअसल, पिछले दिनों एक फरियादी की शिकायत पर आरोपी संजय कालरा के खिलाफ धोखाधड़ी सहित विभिन्न धाराओं में पुलिस ने मामला दर्ज किया था. जब आरोपी की गिरफ्तारी हुई तो उसके बाद कई लोग एक के बाद एक थाने पहुंचे और आरोपी के खिलाफ आवेदन दिए. इसमें बताया गया कि संजय कालरा उनकी महंगी और लग्जरी कार किराए पर ले लेता था और हर महीने उन्हें मोटा मुनाफा देने का लालच भी देता था लेकिन कई महीनों तक आरोपी द्वारा कार का किराया तक नहीं दिया गया. इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए अलग-अलग स्थान से 24 लग्जरी कार बरामद कीं.  साथ ही पुलिस ने आरोपी को रिमांड में लिया जिसमें और भी खुलासे हुए. वहीं कालरा पर दो और धोखाधड़ी सहित विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है जिसके बाद पुलिस ने कुल 39 महंगी और लग्जरी कारें बरामद कर ली हैं. फिलहाल आरोपी की रिमांड अवधि और भी बढ़ाई जाएगी जिससे मामले का खुलासा हो सके. वहीं शिकायतकर्ताओं का थाने पहुंचना अब तक जारी है. आरोपी से जब्त की गई कारों की कीमत 6 करोड़ रुपए बताई जा रही है जो उसने किराए पर ली थीं और उन्हें कहीं और  गिरवी रख दिया था.

हरियाणा में जल्द लगेंगे स्मार्ट बिजली मीटर

हिसार. हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज ने कहा कि प्रदेशभर में चरणबद्ध तरीके से सभी पुराने बिजली मीटर बदले जाएंगे और उनकी जगह आधुनिक स्मार्ट मीटर लगाए जाएंगे। जैसे मोबाइल सेवाओं में प्रीपेड और पोस्टपेड विकल्प उपलब्ध होते हैं, उसी तर्ज पर स्मार्ट मीटर व्यवस्था भी लागू की जाएगी, जिससे उपभोक्ता अपनी सुविधा अनुसार प्रीपेड अथवा पोस्टपेड प्रणाली का चयन कर सकेंगे। इससे न केवल बिजली आपूर्ति व्यवस्था में सुधार होगा, बल्कि उपभोक्ताओं को भी पारदर्शी और सुविधाजनक सेवा मिलेगी। भूमिगत बिजली तारें बिछाने की प्रक्रिया गुरुग्राम और फरीदाबाद में प्रारंभ कर दी गई है। परिस्थितियों के अनुसार अन्य क्षेत्रों में भी अंडरग्राऊंड केबल डाली जाएंगी, जिससे खंभे गिरने या ऊपर से तार टूटने जैसी समस्याओं से निजात मिलेगी और बिजल आपूर्ति अधिक सुरक्षित एक विश्वसनीय बनेगी। विजने कहा कि लगभग पूरे प्रदेश में बिजली आपूति संतोषजनक रही है और केवल 6 अधीक्षण अभियंताओं से ही स्पष्टीकरण मांगा गया है। खेदड़ में लगेगी बिजली की नई यूनिट कोल आबंटन की मिली मंजूरी: विज ने कहा कि हिसार के खेदड़ में बिजली की नई यूनिट लगाई जाएगी। इसके लिए हमें कोल आबंटन की मंजूरी मिल चुकी है। इसके अलावा बरसात के समय जिन सब स्टेशनों में पानी भर जाता है, उनको उंचा उठाया जाएगा। अनिल विज ने कहा कि कोई भी थर्मल लगाना है तो उसके लिए कोल की मंजूरी जरूरी होती है और यह हमें मिल चुकी है। ऐसे में अब ये प्रक्रिया आगे बढ़ पाएगी। उन्होंने कहा कि बरसात के दिनों में कई जगह ये सामने आया कि कई सब स्टेशनों में पानी भर गया और पूरे इलाके की बिजली काटनी पड़ी। ऐसे में हमने निर्देश दिए हैं कि ऐसे सभी सब स्टेशनों को उंचा उठाया जाए। बस ट्रैकिंग सिस्टम औरएप से मिलेगी यात्रियों को सुविधाः हरियाणा रोडवेज के आधुनिकीकरण को लेकर विज ने बताया कि परिवहन विभाग द्वारा लगातार सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं। यात्रियों की सुविधा के लिए बसों में ट्रैकिंग सिस्टम विकसित किया जा रहा है जिससे बसों की आवाजाही की सटीक जानकारी मिल सकेगी। वहीं उन्होंने कहा राज्य में होने वाले नगर निकाय चुनावों में भाजपा एक बार फिर प्रचंड जीत दर्ज कर विजयी पताका फहराएगी। भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष के संबंध में पूछे गए प्रश्न पर अनिल विज ने कहा कि मैं पार्टी का एक बहुत छोटा सा कार्यकर्ता हूं। प्रदेशाध्यक्ष कौन बनेगा, इसका निर्णय पार्टी का शीर्ष नेतृत्व ही करेगा।