samacharsecretary.com

न्याय हुआ पूरा! डिप्टी कलेक्टर अभय सिंह खराड़ी दोषी, 10 साल की जेल

बड़वानी बड़वानी की तृतीय जिला एवं सत्र न्यायालय ने महिला पटवारी के साथ दुष्कर्म और प्रताड़ना के गंभीर मामले में तत्कालीन एसडीएम (सेंधवा) और वर्तमान उज्जैन डिप्टी कलेक्टर अभय सिंह खराड़ी को दोषी करार दिया है। न्यायालय ने आरोपी अफसर को 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 1 लाख 1 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। फैसले के तुरंत बाद पुलिस ने आरोपी डिप्टी कलेक्टर को हिरासत में लेकर जेल भेज दिया। इस मामले में एफआईआर के बाद फरार होने पर 4 मई 2024 को बड़वानी पुलिस ने खराड़ी को भोपाल से गिरफ्तार किया गया था। उस वक्त तत्कालीन उज्जैन कलेक्टर नीरज कुमार सिंह ने उन्हें सस्पेंड किया था। तभी से वह सस्पेंड थे। अभियोजन के अनुसार, आरोपी अभय सिंह खराड़ी वर्ष 2016 से 2024 के बीच महिला का लगातार यौन शोषण करता रहा। पीड़िता ने आरोप लगाया कि आरोपी ने अपने पद का रसूख दिखाकर 4 से 5 बार उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। दिसंबर 2023 में आरोपी ने पीड़िता के घर में घुसकर उसके साथ मारपीट की और जान से मारने की धमकी भी दी थी। ब्लैकमेलिंग और सिंदूर भरकर तस्वीरें लीं न्यायालय में प्रस्तुत साक्ष्यों के अनुसार, आरोपी अफसर महिला को मानसिक रूप से भी प्रताड़ित करता था। वह महिला के आने वाले रिश्तों को तुड़वा देता था और फोन पर तेजाब डालने और अपहरण करने की धमकी देता था। पीड़िता ने बताया कि आरोपी ने उसे बेहोश कर उसकी मांग में सिंदूर भर फोटो खींची थी, ताकि समाज में उसे अपनी पत्नी बताकर बदनाम और ब्लैकमेल कर सके। पत्नी को जान से मारने के आरोप भी लग चुके 31 अक्तूबर 2017 में खराड़ी पर पत्नी को बेहोशी का इंजेक्शन देकर जान से मारने के आरोप भी लगे थे। खराड़ी उस वक्त झाबुआ डिप्टी कलेक्टर थे और पत्नी सुनीता खराड़ी धार जिले के दीनदयालपुरम में रहती थीं। कोतवाली पुलिस ने खराड़ी को बेहोशी की हालत में मिलने पर इलाज करवाया था। सुनीता खराड़ी ने पुलिस को बताया उनके पति ने गुंडे बुलाकर उनके साथ मारपीट की और उसको बेहोशी का इंजेक्शन लगाया। घटना के दिन रात 3 बजे उनके पति ने उनकी दूसरी पत्नी के तीन भाइयों के साथ दो और लोगों को बुलाया। दूसरी पत्नी का मुंह दबा दिया और अपने साथियों के साथ मिलकर बेहोशी का इंजेक्शन लगा दिया, जिसके बाद जान से मारने की कोशिश की। कोतवाली पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया था।  

एम्स भोपाल के डॉक्टरों की सफलता: अत्यंत चुनौतीपूर्ण ‘होल लंग्स लैवेज’ प्रक्रिया पूरी की

 भोपाल  पत्थर, सीमेंट और निर्माण से जुड़ी दुनिया जितनी मजबूत दिखती है, उतनी ही कमजोर जिंदगियां उसके पीछे काम कर रही होती हैं। इन्हीं जिंदगियों को धीरे-धीरे निगल लेने वाली एक खामोश और जानलेवा बीमारी है सिलिकोसिस। यह ऐसी बीमारी है, जिसमें फेफड़े धीरे-धीरे पत्थर जम जाता है।  एम्स भोपाल में मध्य भारत की पहल एम्स भोपाल के डॉक्टरों ने इस मरीज के इलाज के लिए ‘होल लंग्स लैवेज’ नाम की अत्यंत जटिल प्रक्रिया को अंजाम दिया। इस प्रक्रिया में फेफड़ों के अंदर जमा प्रोटीन और धूल को सलाइन वाटर से धोकर बाहर निकाला जाता है। एम्स प्रबंधन के अनुसार, मध्य भारत में यह पहला मौका है, जब सिलिकोसिस से प्रभावित फेफड़ों में जमे प्रोटीन को इस तकनीक से सफलतापूर्वक साफ किया गया हो। डॉक्टरों का कहना है कि यह सिर्फ एक मरीज का इलाज नहीं, बल्कि उन हजारों मजदूरों के लिए उम्मीद की किरण है, जो रोजाना पत्थरों और धूल के बीच काम करते हुए अपनी सांसें दांव पर लगा देते हैं। स्टोन क्रशर की धूल ने बिगाड़ी हालत एम्स के पल्मोनोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. अल्केश खुराना और असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अभिनव खुराना ने बताया कि मरीज लंबे समय से स्टोन क्रशर में काम कर रहा था। वहां उड़ने वाली बारीक सिलिका धूल सांस के साथ उसके फेफड़ों में पहुंचती रही और धीरे-धीरे वहां जमती चली गई। इस स्थिति को मेडिकल भाषा में डिफ्यूज एल्वियोलर प्रोटीनोसिस कहा जाता है। इसमें फेफड़ों की हवा वाली थैलियों में प्रोटीन भर जाता है, जिससे ऑक्सीजन का आदान-प्रदान रुकने लगता है। यही कारण था कि मरीज को सांस लेने में अत्यधिक परेशानी हो रही थी और उसका ऑक्सीजन स्तर लगातार गिरता जा रहा था। 6 घंटे चली बेहद जोखिमभरी प्रक्रिया डॉ. खुराना के अनुसार, होल लंग्स लैवेज एक बेहद जटिल और जोखिमभरी प्रक्रिया है। इसमें फेफड़ों के अंदर 6 से 8 लीटर तक सलाइन वाटर डाला जाता है और फिर उसे बाहर निकाला जाता है, ताकि जमा प्रोटीन साफ हो सके। यह प्रक्रिया इसलिए भी खतरनाक होती है क्योंकि ज्यादा मात्रा में पानी फेफड़ों में जाने से मरीज की जान को सीधा खतरा हो सकता है। इसी वजह से पूरी प्रक्रिया को अत्यंत सावधानी के साथ करीब 6 घंटे में पूरा किया गया। डॉक्टरों की एक पूरी टीम लगातार मरीज के ऑक्सीजन स्तर, हृदय गति और ब्लड प्रेशर पर नजर रखे हुए थी। कार्डियक ओटी में हुआ ऑपरेशन इस जटिल प्रक्रिया को कार्डियक ओटी में किया गया, जिसमें कार्डियक थोरेसिक सर्जन डॉ. योगेश निवारिया भी शामिल थे। उन्होंने बताया कि इस इलाज की सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि जब एक फेफड़े को साफ किया जा रहा होता है, तब मरीज को दूसरे फेफड़े के सहारे ही सांस लेनी पड़ती है। इस मरीज के मामले में मुश्किल और बढ़ गई थी, क्योंकि दूसरा फेफड़ा भी काफी कमजोर हो चुका था। ऐसे हालात में कई बार मरीज को हार्ट-लंग मशीन यानी आर्टिफिशियल लंग्स पर रखना पड़ता है। हालांकि, डॉक्टरों की सतर्कता और सही रणनीति के चलते इस मरीज को मशीन पर डालने की जरूरत नहीं पड़ी और प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी हो गई। क्या है सिलिकोसिस और क्यों है यह जानलेवा सिलिकोसिस सिलिका नामक बेहद बारीक धूल के कणों से होने वाली बीमारी है। ये कण सांस के साथ फेफड़ों में पहुंच जाते हैं और वहां जमा होकर फेफड़ों की कोमल झिल्लियों को नुकसान पहुंचाते हैं। धीरे-धीरे फेफड़े स्पंज जैसे नरम रहने के बजाय पत्थर की तरह सख्त हो जाते हैं। जैसे-जैसे बीमारी बढ़ती है, मरीज को सांस लेने में तकलीफ, लगातार खांसी, थकान और ऑक्सीजन की कमी महसूस होने लगती है। अंतिम चरण में शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती और मरीज की मौत तक हो सकती है। मजदूर सबसे ज्यादा चपेट में सिलिकोसिस का सबसे बड़ा शिकार वे मजदूर होते हैं, जो खदानों, स्टोन क्रशर, पत्थर की पाउडर मिलों, सीमेंट फैक्ट्रियों और कांच-सिरेमिक उद्योगों में काम करते हैं। इनमें से ज्यादातर मजदूर गरीब तबके से आते हैं और सुरक्षा उपकरणों की कमी या जानकारी के अभाव में इस जानलेवा धूल के संपर्क में रहते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि सिलिकोसिस से बचाव ही सबसे बड़ा इलाज है। इसके लिए कार्यस्थलों पर धूल नियंत्रण, मास्क और नियमित स्वास्थ्य जांच बेहद जरूरी है।

ख़मतरा में शैला महोत्सव की धूम, विधायक नारायण सिंह पट्टा ने दिखाई सहभागिता

शैला महोत्सव का भव्य आयोजन, विधायक नारायण सिंह पट्टा ने बढ़ाया उत्साह ख़मतरा में शैला महोत्सव की धूम, विधायक नारायण सिंह पट्टा ने दिखाई सहभागिता भव्य शैला महोत्सव में उमड़ा उत्साह, विधायक नारायण सिंह पट्टा ने लोगों को किया प्रेरित     ख़मतरा  आदिवासी समाज की गौरवशाली विरासत और परंपराओं को सहेजने के उद्देश्य से 1 फरवरी को पैतृक ग्राम ख़मतरा (घुघरी) में 'शैला महोत्सव' का गरिमामय आयोजन किया गया। रात्रि 9 बजे आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में क्षेत्रीय विधायक श्री नारायण सिंह पट्टा उपस्थित रहे। संस्कृति और परंपरा का अनूठा संगम महोत्सव के दौरान पूरा वातावरण आदिवासी संस्कृति के रंगों में सराबोर नजर आया। ढोल और मांदर की थाप पर थिरकते नर्तक दलों ने अपनी कला से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस अवसर पर विधायक पट्टा ने समाज के लोगों के साथ मिलकर अपनी जड़ों और रीति-रिवाजों का उत्सव मनाया। एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को विरासत सौंपने का पर्व उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए यह संदेश दिया गया कि हमारी नृत्य कलाएं, उत्सव और परंपराएं केवल मनोरंजन का साधन नहीं हैं। बल्कि, ये वे अनमोल क्षण हैं जब हम अपनी सांस्कृतिक धरोहर को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को सौंपते हैं। यह महोत्सव हमारी पहचान को जीवित रखने और युवाओं को अपने मूल से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम बना।  * पारंपरिक शैला नृत्य: नर्तक दलों द्वारा अनुशासन और तालमेल का अद्भुत प्रदर्शन।  * रीति-रिवाज का संरक्षणसमाज की प्राचीन परंपराओं का जीवंत चित्रण।  * एकता का संदेश: 'जय सेवा' और 'जय जोहार' के उद्घोष से गूंजा आयोजन स्थल।

दुखद हादसा: नागपुर AIIMS में बच्चा नहीं बच सका, कफ सिरप ने की किडनियों को नुकसान

 बैतूल  कथित जहरीले कोल्ड्रिफ कफ सिरप से जुड़ा मामला लगातार भयावह होता जा रहा है। पहले ही बच्चों सहित 12 से अधिक लोगों की जान लेने के आरोपों से घिरे इस सिरप ने अब बैतूल जिले के चार वर्षीय हर्ष यदुवंशी की भी जिंदगी छीन ली। 120 दिन तक नागपुर एम्स में चले लंबे इलाज के बाद मासूम ने बीती रात अंतिम सांस ली। सोमवार को पोस्टमार्टम के बाद जब हर्ष का शव उसके गांव टीकाबरी (बोरदेही) पहुंचा तो पूरा गांव गमगीन हो उठा। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, वहीं ग्रामीणों में जिम्मेदारों के खिलाफ भारी आक्रोश देखा जा रहा है। एक साधारण सर्दी-जुकाम से शुरू हुआ दर्दनाक सफर हर्ष यदुवंशी (4 वर्ष) पिता गोकुल यदुवंशी, जो की  ग्राम टिकाबर्री, तहसील आमला, जिला बैतूल का रहने वाला था। परिजनों के अनुसार सितंबर 2025 में हर्ष को सर्दी-जुकाम और बुखार की शिकायत हुई थी। 26 सितंबर को छिंदवाड़ा के परासिया क्षेत्र के एक निजी चिकित्सक डॉ. एस.एस. ठाकुर से उसका इलाज कराया गया। आरोप है कि इसी दौरान उसे कोल्ड्रिफ कफ सिरप दिया गया। दवा लेने के कुछ समय बाद ही बच्चे की तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी। उल्टी, कमजोरी और पेशाब की दिक्कत के बाद उसे पहले स्थानीय अस्पताल, फिर बड़े मेडिकल सेंटर ले जाया गया। हालत गंभीर होने पर उसे नागपुर रेफर किया गया, जहां अक्टूबर से एम्स में उसका इलाज चल रहा था। डॉक्टरों ने परिजनों को बताया था कि बच्चे की दोनों किडनियां गंभीर रूप से प्रभावित हो चुकी हैं। 120 दिन तक डायलिसिस और गहन उपचार के बावजूद आखिरकार मासूम जिंदगी की जंग हार गया। शिकायत के बाद भी धीमी रही कार्रवाई हर्ष के चाचा श्याम देवा यदुवंशी ने पहले ही प्रशासन को लिखित शिकायत देकर आशंका जताई थी कि बच्चे की किडनी फेल होने के पीछे संदिग्ध कफ सिरप हो सकता है। उन्होंने आरोप लगाया था कि डॉक्टर को दवा के संभावित दुष्परिणामों की जानकारी होने के बावजूद सिरप दिया गया। 22 नवंबर 2025 को एसडीओपी ने परासिया थाने में दर्ज जहरीले कफ सिरप प्रकरण में इस शिकायत को शामिल करने के निर्देश दिए थे। पुलिस द्वारा न्यायालय में पेश केस डायरी में क्रमांक 39 पर हर्ष का मामला दर्ज बताया गया है। साथ ही श्रीसन फार्मा निर्मित कोल्ड्रिफ सिरप की जब्त बोतल का उल्लेख भी है। गिरफ्तारी हुई, पर सवाल अब भी बाकी अब तक इस मामले में 9 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जिनमें दवा कंपनी से जुड़े लोग, केमिकल सप्लायर, मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव और मेडिकल स्टोर संचालक शामिल हैं। कुंडीपुरा पुलिस ने भी अलग प्रकरण में दो और गिरफ्तारियां की हैं, लेकिन बड़ा सवाल अब भी कायम है। परासिया के स्टेशन रोड स्थित उस निजी क्लीनिक पर अब तक ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई, जहां इलाज के बाद कई बच्चों में किडनी फेल होने के मामले सामने आए थे? पीड़ित पक्ष के वकील संजय पटोरिया का कहना है कि पुलिस डायरी में डॉ. एस.एस. ठाकुर और डॉ. अमित ठाकुर (पिता-पुत्र) के नाम दर्ज हैं, फिर भी क्लीनिक न तो सील किया गया और न ही उनके खिलाफ वैसी सख्ती दिखाई गई जैसी अन्य आरोपियों पर की गई। गांव में मातम, परिजनों की एक ही मांग “दोषियों को सजा” हर्ष की मौत ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है। गांव में मातम पसरा है। परिजन बार-बार एक ही सवाल पूछ रहे हैं “अगर समय पर कार्रवाई होती, तो क्या हमारा बच्चा बच सकता था?” परिवार ने सरकार से आर्थिक मदद, निष्पक्ष जांच और सभी जिम्मेदारों चाहे वे डॉक्टर हों, दवा निर्माता या सप्लाई चेन से जुड़े लोग, सभी पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। स्वास्थ्य व्यवस्था पर फिर उठे बड़े सवाल यह मामला केवल एक दवा या एक डॉक्टर तक सीमित नहीं रह गया है। यह दवा गुणवत्ता जांच, लाइसेंसिंग, निजी क्लीनिकों की निगरानी और मेडिकल स्टोर्स की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। जब तक जांच पूरी नहीं होती और जिम्मेदारों को सजा नहीं मिलती, तब तक लोगों के मन से यह डर खत्म होना मुश्किल है कि एक साधारण सर्दी-जुकाम की दवा भी जानलेवा साबित हो सकती है।  

MP के रायसेन में जल्द बन सकता है रोप-वे! शिवराज ने साझा की बड़ी खबर

भोपाल मध्य प्रदेश के विदिशा-रायसेन संसदीय क्षेत्र में पिछले 100 दिनों से जारी सांसद खेल महोत्सव का समापन हो गया। इस मौके पर स्थानीय सांसद और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान क्षेत्र को बड़ी सौगात देते हुए एक बड़ी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वे रायसेन में स्थित किले तक रोप-वे बनाने की अनुमति लेकर आए हैं। साथ ही उन्होंने इस बारे में जारी आदेश को समारोह में मौजूद रायसेन के विधायक प्रभुराम चौधरी को सौंप दिया। इसके अलावा केंद्रीय कृषि मंत्री ने बताया कि रोप-वे बनने के साथ ही किले पर एक म्यूजियम भी बनाया जाएगा, जिसमें इलाके के गौरवशाली इतिहास को बताते हुए इससे जुड़ी धरोहरों को वहां संजोया जाएगा। साथ ही इलाके के किसानों की भलाई के लिए लगने वाले मेले की जानकारी देते हुए शिवराज ने कहा कि यहां पर अप्रैल महीने में तीन दिनों के लिए किसान कुंभ और किसानों का मेला लगेगा। जिसमें उन्हें खेती का प्रशिक्षण दिया जाएगा। अप्रैल महीने में तीन दिन लगेगा किसान कुंभ और मेला कार्यक्रम के दौरान किसानों को संबोधित करते हुए शिवराज ने कहा, 'रायसेन वालों, अभी डॉ प्रभुराम चौधरी जी कह रहे थे कि किला बहुत ऊपर है, तो प्रभुरामजी आज आप ये आदेश ले लीजिए, जो हमारा रायसेन के किले में रोपवे की अनुमति भारत सरकार से मैं लेकर आया हूं रायसेन वालों। मैं आपको आदेश की कॉपी दे रहा हूं, अब रायसेन रोप-वे जाएगा और किले के ऊपर एक शानदार म्यूजियम भी बनाया जाएगा। ऊपर वाले किले को भी शानदार बनाया जाएगा। रायसेन में मेडिकल कॉलेज तो खुलेगा ही, उसकी घोषणा माननीय मुख्यमंत्री कर चुके हैं और किसानों के लिए 12, 13 और 14 अप्रैल को किसान कुंभ और किसानों का मेला लगेगा। जिसमें खेती के लिए किसानों को प्रशिक्षण देने का काम किया जाएगा। रायसेन अब हिंदुस्तान में आइडियल बनेगा।' इसके आगे शिवराज ने कहा, 'मैं फिर आपको वचन देता हूं कि आपकी मुस्कुराहत ही मेरी जिंदगी है, आपके चेहरे पर खुशी लाने के लिए मामा कोई कसर नहीं छोड़ेगा।' MLA बोले- नई ऊंचाई तक ले जाना हमारा संकल्प वहीं कार्यक्रम में मौजूद रायसेन के विधायक व पूर्व मंत्री प्रभुराम चौधरी ने इस बारे में जानकारी देते हुए सोशल मीडिया पर लिखा, ‘रायसेन के मेरे प्रिय भाई-बहनों, आज हमारे लिए ऐतिहासिक क्षण है। माननीय केंद्रीय मंत्री शिवराज चौहान जी के प्रयासों से रायसेन किले में रोप-वे निर्माण की अनुमति भारत सरकार से प्राप्त हुई है। यह आदेश पत्र प्राप्त कर मैं आप सभी के साथ इस सुखद समाचार को साझा कर रहा हूं। अब श्रद्धालु और पर्यटक रोप-वे के माध्यम से किले तक सहज और सुरक्षित रूप से पहुंच सकेंगे। साथ ही, किले में एक भव्य संग्रहालय (म्यूजियम) का निर्माण भी किया जाएगा, जिससे रायसेन की गौरवशाली विरासत को नई पहचान मिलेगी। रायसेन के विकास और पर्यटन को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का हमारा संकल्प निरंतर जारी रहेगा।’ बहुत ऊंची पहाड़ी पर बना है 11वीं शताब्दी का किला रायसेन के जिस किले तक पहुंचने के लिए शिवराज ने रोपवे बनाने की अनुमति मिलने की जानकारी दी है, वह किला राजधानी भोपाल से लगभग 40 किलोमीटर दूर है और एक ऊंची पहाड़ी की चोटी पर स्थित है। साथ ही मध्यप्रदेश के प्रमुख किलों में से एक है। इसका निर्माण 11वीं शताब्दी में किया गया था और यह पहले हिंदू राजाओं का गढ़ था। बाद में यह किला अफगान और मुग़ल शासकों के अधीन रहा। इस किले में हिंदू और मुगल वास्तुकला का मिश्रण दिखा देता है। इस किले के अंदर बादल और रानी महल, जलाशय, मंदिर, और हजरत पीर फतेह उल्लाह शाह बाबा की दरगाह स्थित हैं, जहां प्रतिवर्ष उर्स के मौके पर हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं, जिसमें सभी धर्मों के लोग शामिल होते हैं। बता दें कि पिछले सौ दिनों से विदिशा-रायसेन संसदीय क्षेत्र में सांसद खेल महोत्सव चल रहा था। जिसका समापन सोमवार को हो गया। इस मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में यहां पर भारतीय टीम के स्टार क्रिकेटर रविंद्र जडेजा पहुंचे थे और उन्होंने रोड शो में हिस्सा लेते हुए खेल महोत्सव में हिस्सा लेने वाले खिलाड़ियों को संबोधित भी किया।

फीस कानून पर बड़ा अपडेट! सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दिया स्पष्टीकरण, अगले सत्र में नहीं होगा लागू

नई दिल्ली   दिल्ली में प्राइवेट स्कूलों की फीस नियंत्रित करने वाले नए कानून पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई है। दिल्ली सरकार ने कोर्ट को बताया कि दिल्ली स्कूल एजुकेशन (ट्रांसपेरेंसी इन फिक्सेशन एंड रेगुलेशन ऑफ फीस) एक्ट, 2025 को वर्तमान शैक्षणिक सत्र 2025-26 में लागू नहीं किया जाएगा। यह कानून अब अगले शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू होगा। शिक्षा निदेशालय की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने यह जानकारी दी। पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कानून को शैक्षणिक सत्र के बीच में जल्दबाजी से लागू करने पर सवाल उठाए थे। कोर्ट ने कहा था कि ऐसा करने से स्कूलों और अभिभावकों को परेशानी हो सकती है और यह व्यावहारिक नहीं होगा। जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा की पीठ ने माना कि कानून का उद्देश्य अच्छा है। लेकिन, इसे सही समय पर लागू करना जरूरी है। सरकार के इस फैसले के बाद कोर्ट ने कहा कि अब इस पर दखल देने की जरूरत नहीं है, क्योंकि सरकार ने समझदारी दिखाई है। यह कानून प्राइवेट स्कूलों में फीस की मनमानी बढ़ोतरी रोकने के लिए बनाया गया है। इसके तहत हर स्कूल को फीस तय करने के लिए एक स्कूल लेवल कमेटी बनानी होगी। इस कमेटी में स्कूल प्रबंधन का प्रतिनिधि, प्रधानाचार्य, तीन शिक्षक, पांच अभिभावक और शिक्षा निदेशालय का एक प्रतिनिधि शामिल होगा। कमेटी फीस के प्रस्ताव पर विचार करेगी और पारदर्शिता सुनिश्चित करेगी। इसके अलावा जिला स्तर पर अपील कमेटी भी होगी। कानून कैपिटेशन फीस वसूलने पर रोक लगाता है और अतिरिक्त शुल्क पर भी नियंत्रण रखता है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कानून की वैधता से जुड़ा मामला दिल्ली हाई कोर्ट में लंबित है। अब आगे की सुनवाई और फैसला हाई कोर्ट ही करेगा। प्राइवेट स्कूल एसोसिएशंस ने इस कानून को चुनौती दी है। लेकिन, कोर्ट ने फिलहाल इसे लागू करने के तरीके पर ही ध्यान दिया। अभिभावक संगठनों ने इस फैसले का स्वागत किया है, क्योंकि इससे फीस में अचानक बढ़ोतरी पर लगाम लगेगी। अगले साल से लागू होने पर स्कूलों को भी तैयारी का समय मिलेगा। यह कदम दिल्ली में शिक्षा की पहुंच और पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण है।

गर्लफ्रेंड-बॉयफ्रेंड ने बाइक पर दिखाया हैरतअंगेज स्टंट, सुरक्षा कानूनों की अनदेखी

सागर  मध्य प्रदेश के सागर जिले में बाइक चलाते हुए युवक और युवती की स्टंट का वीडियो इंटरनेट पर हॉट केक बना हुआ है. वायरल वीडियो में बाइक की सीट पर पीछे बैठने के बजाय युवती आगे बैठी हुई है और उसका मुंह पीछे की तरफ घूमा हुआ है. सोशल मीडिया पर अपलोड हुआ यह वीडियो लोगों द्वारा खूब पंसद किया जा रहा है.   आमतौर पर बाइक पर बॉय फ्रेंड और गर्लफ्रेंड बाइक की सीट पर आगे-पीछे के बैठकर राइड करते हैं. समय बदला युवतियां पर दोनों पैर एक साइड रखने के बजाय क्रॉस बैठने लगी, लेकिन सागर जिले के अतरंगी जोड़े बाइक पर ऐसी मुद्रा में सवार हुआ कि सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया. बाइक चला रहे बॉय फ्रेंड पर झप्पी डाल कर बैठी है गर्लफ्रेंड वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि युवती बाइक चला रहे बॉय फ्रेंड को बाइक पर झप्पी डाल कर बैठी है. बॉय फ्रेंड और गर्लफ्रेंड के स्टंट को सड़क पर साथ चल रहे राहगीरों ने अपने मोबाइल पर कैद कर लिया और सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया. देखते ही देखते यह अतरंगी बाइक राइड का वीडियो वायरल हो गया.     बाइक पर गर्लफ्रेंड-बॉयफ्रेंड का हैरतअंगेज स्टंट     मध्य प्रदेश के सागर जिले में बाइक चलाते हुए युवक और युवती की स्टंट का वीडियो इंटरनेट पर वायरल हो रहा है. युवती बाइक चला रहे बॉय फ्रेंड को बाइक पर झप्पी डाल कर बैठी है. बॉय फ्रेंड और गर्लफ्रेंड के स्टंट को सड़क पर साथ चल रहे…  युवती ने मुंह ढक रखा है, ताकि पहचान सार्वजनिक न हो सके वीडियो जरुआखेड़ा–जलंधर रोड का है, जहां किसी ने अतरंगी जोड़े को अजीबोगरीब मुद्रा में बाइक राइड करते हुए कैमरे में कैद कर लिया. वीडियो में देखा जा सकता है कि युवक ने युवती को आगे उल्टा बैठाकर बाइक चला रहा है. युवती ने अपना मुंह कपड़े से ढक रखा है, जिससे उसकी पहचान सार्वजनिक हो सके. खतरनाक और अतरंगी तरीके से बाइक राइड कर रहे युवा जोड़े को सड़क पर चल रहे कई राहगीरों ने ऐसा करने से रोका, लेकिन उन्होंने ध्यान नहीं दिया. सवाल है कि ट्रैफिक और सड़क सुरक्षा नियमों की धज्जी उड़ाने वाले जोड़े के वायरल वीडियो को पुलिस संज्ञान में कब लेगी? सड़क पर स्टंटबाजी करने को लेकर क्या है ट्रैफिक कानून? गौरतलब है प्रदेश में सड़क पर स्टंटबाजी के खिलाफ सख्त प्रावधान हैं, मोटर व्हीकल एक्ट के तहत दोषी पर भारी जुर्माना, ड्राइविंग लाइसेंस रद्दीकरण और गिरफ्तारी शामिल है. पुलिस IPC की धाराओं के तहत भी कार्रवाई कर सकती है. 1 जनवरी 2026 से नए नियमों के अनुसार, बार-बार नियम तोड़ने पर लाइसेंस सस्पेंड किया जा सकता है.

सीआईआई मध्य प्रदेश के उपाध्यक्ष और आईसेक्ट समूह के कार्यकारी उपाध्यक्ष डॉ सिद्धार्थ चतुर्वेदी द्वारा केंद्रीय बजट 2026 पर प्रतिक्रिया…

सीआईआई मध्य प्रदेश के उपाध्यक्ष और आईसेक्ट समूह के कार्यकारी उपाध्यक्ष डॉ सिद्धार्थ चतुर्वेदी द्वारा केंद्रीय बजट 2026 पर प्रतिक्रिया…  भोपाल  केंद्रीय बजट 2026–27 ‘विकसित भारत 2047’ के विज़न के अनुरूप एक दूरदर्शी और विकासोन्मुख रोडमैप प्रस्तुत करता है। एमएसएमई, रोजगार सृजन, कौशल विकास और बेहतर ऋण उपलब्धता पर दिया गया विशेष जोर उद्यमिता और रोज़गार के नए अवसरों को मजबूती देगा, विशेष रूप से मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में जहाँ एमएसएमई का मजबूत आधार मौजूद है। इंफ्रास्ट्रक्चर, लॉजिस्टिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तथा रोबोटिक्स जैसी उन्नत तकनीकों में निरंतर निवेश से उत्पादकता और क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धात्मकता में वृद्धि होगी। साथ ही, महिलाओं की भागीदारी, स्किलिंग और उभरते क्षेत्रों को समर्थन देने वाली पहलें सतत और समावेशी विकास की समग्र सोच को दर्शाती हैं। कुल मिलाकर यह बजट एक सशक्त, भविष्य-तैयार और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव रखता है। डॉ. सिद्धार्थ चतुर्वेदी उपाध्यक्ष, सीआईआई मध्य प्रदेश कार्यकारी उपाध्यक्ष, आईसेक्ट समूह कुलाधिपति, स्कोप ग्लोबल स्किल्स यूनिवर्सिटी

Get Set Parent की फाउंडर एवं AISECT समूह की कार्यकारी उपाध्यक्ष डॉ. पल्लवी राव सी. चतुर्वेदी द्वारा केंद्रीय बजट 2026 पर प्रतिक्रिया:

Get Set Parent की फाउंडर एवं AISECT समूह की कार्यकारी उपाध्यक्ष डॉ. पल्लवी राव सी. चतुर्वेदी द्वारा केंद्रीय बजट 2026 पर प्रतिक्रिया: स्कूलों में कंटेंट क्रिएटर और एवीजीसी (एनीमेशन, विज़ुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स) लैब कार्यक्रम लागू करने का प्रस्ताव एक प्रगतिशील कदम है, जो यह दर्शाता है कि डिजिटल कंटेंट अब बच्चों की रचनात्मक अभिव्यक्ति को कितनी गहराई से प्रभावित कर रहा है। एनीमेशन, गेमिंग और विज़ुअल स्टोरीटेलिंग से संरचित परिचय न केवल रचनात्मकता को बढ़ावा देगा, बल्कि एकाग्रता, सहयोग और स्क्रीन के सजग उपयोग जैसे आवश्यक कौशल भी विकसित करेगा। ये भविष्य के लिए तैयार करने वाली क्षमताएँ हैं, जो बच्चों की पूरी शैक्षणिक यात्रा में सहायक होंगी और उभरते रचनात्मक करियर के लिए नए अवसर खोलेंगी। उतनी ही महत्वपूर्ण है सेल्फ-हेल्प एंटरप्रेन्योर (SHE) मार्ट्स की शुरुआत। महिलाओं उद्यमियों और स्वयं सहायता समूहों द्वारा संचालित सामुदायिक स्वामित्व वाले रिटेल आउटलेट्स बनाकर, बजट बच्चों को ऐसे परिवेश से जोड़ता है जहाँ वे वास्तविक जीवन में महिलाओं को नेतृत्व करते, उद्यम संचालित करते और बदलाव लाते हुए देख सकते हैं। इससे उन्हें सार्थक सामाजिक और आर्थिक रोल मॉडल मिलते हैं, साथ ही शिक्षा, उद्यमिता और सामाजिक आत्मविश्वास के बीच मजबूत संबंध भी स्थापित होता है। मिलकर, ये पहलें ऐसा शिक्षण वातावरण तैयार करती हैं जो रचनात्मकता, आत्मनिर्भरता और आकांक्षा को प्रोत्साहित करता है।

मैहर में शिक्षा विभाग में घोटाला: 3.72 करोड़ की हेराफेरी, स्कूल निर्माण में किया गया दुरुपयोग

मैहर  मध्य प्रदेश के मैहर जिले में स्कूलों में लघु निर्माण कार्य जैसे पार्किंग शेड और साइकिल स्टैंड बनाने के नाम पर हुए 3.72 करोड़ रुपये के कथित घोटाले की जांच शुरू हो गई है. दरअसल खबर प्रसारित होने के बाद प्रशासन हरकत में आया और कलेक्टर के निर्देश पर एसडीएम के नेतृत्व में पांच सदस्यीय जांच दल गठित कर दिया गया. जांच में सामने आया कि जिन स्कूलों में लाखों रुपये का भुगतान दिखाया गया, वहां ज़मीन पर कोई ठोस निर्माण कार्य नजर ही नहीं आया. जांच टीम को क्या मिला? एसडीएम एस.पी. मिश्रा के नेतृत्व में बनी टीम ने कई स्कूलों का भौतिक सत्यापन किया. टीम में संदीपनी विद्यालय मैहर के प्राचार्य दिनेश गोस्वामी, तहसीलदार ललित धार्वे, बीईओ राजेश द्विवेदी, बीआरसीसी चंद्र प्रताप शुक्ला, सहायक लेखपाल विनय सिंह और पटवारी आनंद पांडेय शामिल थे. टीम ने पाया कि अधिकांश स्कूलों में सिर्फ रंगाई-पुताई दिखाई दी, जबकि पार्किंग शेड और साइकिल स्टैंड जैसे निर्माण कार्य का कोई प्रमाण नहीं मिला. किन फर्मों को हुआ भुगतान जांच में सामने आया कि भोपाल की वाणी इंफ्रास्ट्रक्चर, मैहर की श्री रुद्र इंटरप्राइजेज और सतना की श्री महाकाल ट्रेडर्स को करोड़ों रुपये का भुगतान किया गया. विभिन्न स्कूलों से 21 लाख से 24 लाख रुपये तक के बिलों का भुगतान दर्शाया गया है. कुल मिलाकर 17 स्कूलों में लगभग 3 करोड़ 72 लाख रुपये के बिल पास किए गए.  फर्जी हस्ताक्षरों की आशंका कई प्राचार्यों का कहना है कि उन्होंने न तो कोई वर्क ऑर्डर जारी किया और न ही ऐसे किसी बिल को मंजूरी दी. इससे फर्जी हस्ताक्षरों और दस्तावेजी हेराफेरी की आशंका गहरा गई है. प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, इस मामले में आपराधिक प्रकरण दर्ज होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. जांच समिति ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट कलेक्टर को सौंप दी है. रिपोर्ट में संबंधित फर्मों के साथ-साथ लगभग 14 प्राचार्यों की भूमिका की जांच की सिफारिश की गई है. माना जा रहा है कि जल्द ही निलंबन, एफआईआर और वित्तीय वसूली जैसी कड़ी कार्रवाई हो सकती है. फिलहाल, मामला संभागीय स्तर तक पहुंच चुका है और आगे की कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं.