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सीएम योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह- 2026 के लिए तय किया गया ‘जीरो फेटेलिटी’ का लक्ष्य

परिवहन, पुलिस, स्वास्थ्य, शिक्षा, पंचायती राज और सूचना विभाग समन्वित रूप से चलाएगा प्रदेशव्यापी अभियान नो हेलमेट, नो फ्यूल का चलेगा प्रदेशव्यापी अभियान, दोपहिया वाहन चालकों को किया जाएगा जागरूक लखनऊ- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में प्रदेश सरकार ने सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को शून्य करने के लक्ष्य के साथ राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह को ‘जीरो फेटेलिटी माह’ के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया है। राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह- 2026, 01 जनवरी से शुरू होकर 31 जनवरी तक चलेगा । इस दौरान प्रदेश का परिवहन, पुलिस, लोक निर्माण, स्वास्थ्य, शिक्षा, पंचायती राज और सूचना विभाग सहित सभी संबंधित स्टेकहोल्डर विभागों को समन्वित रूप से कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। इस क्रम में प्रदेश के सभी जनपदों में 25 दिसंबर से जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठकों का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें सड़क सुरक्षा माह के दौरान चलाये जाने वाले विशेष अभियानों की रूपरेखा तैयार की जा रही है। प्रदेश में 363 हाई रिस्क कॉरिडोर चिह्नित, होगी सख्त प्रवर्तन कार्रवाई सीएम के विजन के अनुरूप राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह में जीरो फेटेलिटी के लक्ष्य को पाने के उद्देश्य से प्रदेश के परिवहन एवं पुलिस विभाग ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। इस क्रम में प्रदेश में 363 हाई रिस्क कॉरिडोर चिह्नित किये हैं, जहां सख्त प्रवर्तन अभियान चलाये जाएंगे। इसके साथ ही पहले से चल रही जीरो फेटेलिटी डिस्ट्रिक्ट योजना के तहत चुने गये 20 जनपदों में 233 क्रिटिकल पुलिस थाना क्षेत्रों का चयन किया गया है। जिनमें विशेष अभियान चलाकर दुर्घटनाओं पर नियंत्रण सुनिश्चित किया जाएगा। साथ ही शराब पीकर वाहन चलाने, ओवरस्पीडिंग, लेन उल्लंघन, गलत दिशा में वाहन चलाने, हेलमेट व सीट-बेल्ट न पहनने, रिफ्लेक्टर टेप, फॉग लाइट, बिना परमिट व बिना फिटनेस संचालित वाहनों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई करने के दिशा-निर्देश जारी किये गये हैं। स्वास्थ्य विभाग कर रहा इमरजेंसी रिस्पॉन्स प्रोटोकॉल में सुधार   जनवरी माह में “नो हेलमेट, नो फ्यूल” का प्रदेशव्यापी अभियान चलाया जाएगा, ताकि दोपहिया चालकों में हेलमेट पहनने की आदत विकसित की जा सके। रोड एक्सीडेंट से होने वाली मौतों की संख्या में कमी लायी जा सके। लोक निर्माण विभाग व अन्य रोड ओनिंग एजेंसियों को चिह्नित किये गये 1484 ब्लैक स्पॉट्स पर अल्पकालिक सुधार कार्यों जैसे- रोड मार्किंग, साइनेज और क्रैश बैरियर लगाने का कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं। इसी क्रम में स्वास्थ्य विभाग द्वारा इमरजेंसी रिस्पॉन्स प्रोटोकॉल सुधारने, एएलएस एम्बुलेंस की संख्या बढ़ाने तथा ट्रॉमा केयर सेंटरों में गैप, इंफ्रास्ट्रक्चर और मैनपावर की कमी दूर करने के जरूरी प्रयास किये जा रहे हैं। शिक्षा और सूचना विभाग चलायेगा जागरूकता अभियान पंचायती राज विभाग, प्रत्येक ग्राम सभा में सड़क सुरक्षा पर बैठकें आयोजित करेगा, जो ग्रामीण स्तर पर जागरूकता बढ़ाने और ग्रामीण क्षेत्रों में पड़ने वाली सड़कों पर दुर्घटनाओं में कमी लाने के जरूरी इंतजाम को सुनिश्चित करेगीं। तो वहीं शिक्षा विभाग स्कूलों में चित्रकला, भाषण और नाटक प्रतियोगिताओं के माध्यम से बच्चों को सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक करेगा, जबकि सूचना विभाग परिवहन विभाग के साथ मिलकर यातायात नियमों के व्यापक प्रचार-प्रसार का कार्य को अंजाम देगा। सरकार का लक्ष्य है कि इन समन्वित प्रयासों से विशेषकर राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह, जनवरी 2026 में सड़क दुर्घटनाओं में उल्लेखनीय कमी लाई जाए और सीएम योगी आदित्यनाथ के ‘जीरो फेटेलिटी’ के सपने को साकार किया जा सके। साथ ही इस अभियान को आगे भी लागू किया जाएगा।

3 साल की बच्ची की मासूम शिकायत ने जीता दिल, थाने पहुंचते ही पुलिस हरकत में आई

शाजापुर जिले के शुजालपुर में एक रोचक मामला सामने आया है, जहां स्कूल में पढ़ने वाली एक 3 साल की मासूम छात्रा चेरी का स्कूल बैग गुम हो गया. मासूम बच्ची इसकी शिकायत लेकर अपने पिता के साथ पुलिस तक पहुंच गई और पुलिस को अपनी परेशानी बताई. बच्ची ने कहा कि उसका स्कूल बैग गुम हो गया है और स्कूल बैग ना होने से मैं अपना होमवर्क कैसे करूंगी ? नन्ही चेरी के आंसू और स्कूल की नोट बुक्स, बॉटल के लिए उसका लगाव देखकर पुलिस तुरंत हरकत में आई और स्कूल बैग की तलाश शुरू कर दी. पूछताछ में पता चला कि मासूम छात्रा अपने परिजनों के साथ ऑटो रिक्शा में घर लौट रही थी. इसी दौरान स्कूल बैग ऑटो रिक्शा में छूट गया. इसके लिए पुलिस ने शहर के सैकड़ों सीसीटीवी कैमरे तलाशे. इसी दौरान शहर के पुलिस चौकी चौराहा से बच्ची और उसके परिजनों को सवारी ऑटो में बैठते हुए सीसीटीवी कैमरा फुटेज पुलिस को मिल गया. बस फिर क्या था पुलिस ने उस ऑटो की तलाश शुरू कर दी. ऐसे मिला मासूम का बैग वीडियो के आधार पर ऑटो को पुलिस सहायक उप निरीक्षक धर्मेंद्र परस्ते, यातायात पुलिस प्रधान आरक्षक सुनील ने ढूंढने कोशिश की, लेकिन वाहन पर नंबर नहीं होने से दिक्कत आई. हालांकि वाहन के आगे लिखे नाम और ऊपर लगे लोहे के स्टैंड से आखिरकार खासी मशक्कत के बाद पुलिस इस ऑटो तक पहुंच ही गई. फिर ऑटो ड्राइवर परवेज खान से शुजालपुर सिटी ने स्कूल बैग जब्त किया. मासूम छात्रा का स्कूल बैग मिलते ही उसे एसडीओपी कार्यालय शुजालपुर पहुंचाया गया, जहां शुजालपुर एसडीओपी निमिष देशमुख ने मासूम छात्रा और उसके परिवार वालों को बुलाकर उसका स्कूल बैग सौंपा. पुलिस अंकल को थैंक्स अपना स्कूल बैग पाकर मासूम बेहद खुश नजर आई और उसने कहा कि बैग गुम होने से वह टेंशन में थी कि अब होमवर्क कैसे करेगी. सब वर्कबुक भी बेग में थी. मैंने पुलिस अंकल को बताया और उन्होंने बैग लाकर दिया, पुलिस अंकल को थैंक्स. यातायात पुलिस ने बच्ची के कंधों पर बेग टांगकर उसे घर रवाना किया, परिवार के आग्रह पर पुलिस ने ऑटो चालक को भी समझाइश देकर छोड़ दिया कि आगे से कोई भी बैग, सामान यात्री भूले तो तत्काल पुलिस को सौंपे. क्या बोले अधिकारी? एसडीओपी निमिष देशमुख ने बताया कि बच्ची का अपने स्कूल बैग के लिए लगाव देखकर पुलिस ने प्रयास किया और कैमरे फुटेज की मदद से बैग सौंपा. साथ ही उन्होंने वाहन चालकों से अपील की है कि अगर किसी का कोई सामान वाहन में छूट जाए तो उस सामान को पुलिस को सौंपकर सामाजिक जिम्मेदारी निर्वाह करना चाहिए, बच्ची के दादा, पिता ने भी पुलिस के प्रति आभार व्यक्त किया.

शराब घोटाले में बड़ी कार्रवाई: ED ने दाखिल किया 29,000+ पन्नों का अंतिम चालान, 82 आरोपी कटघरे में

रायपुर छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में ED ने आज कोर्ट में लगभग 29 हजार 800 से अधिक पन्नों का अंतिम चालान पेश किया. सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर 82 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट पेश की गई है. अब मामले का ट्रायल शुरू होगा. क्या है शराब घोटाला ? छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में ED जांच कर रही है. ED ने ACB में FIR दर्ज कराई है. दर्ज FIR में 3200 करोड़ रुपए से ज्यादा के घोटाले की बात कही गई है. इस घोटाले में राजनेता, आबकारी विभाग के अधिकारी, कारोबारी सहित कई लोगों के खिलाफ नामजद FIR दर्ज है. ED ने अपनी जांच में पाया है कि तत्कालीन भूपेश सरकार के कार्यकाल में IAS अफसर अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के एमडी AP त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर के सिंडिकेट के जरिए घोटाले को अंजाम दिया गया था. अब तक इनकी हो चुकी है गिरफ्तारी शराब घोटाला मामले में अब तक कई बड़े नामों की गिरफ्तारी हो चुकी है. इनमें पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल, पूर्व आईएएस अनिल टुटेजा, अनवर ढेबर, सौम्य चौरसिया शामिल हैं। इसके अलावा आबकारी विभाग के 28 अधिकारियों को भी आरोपी बनाया गया था, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल चुकी है।

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को यमुना, ईस्टर्न पेरिफेरल और दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेसवे से मिलेगी हाई-स्पीड कनेक्टिविटी

  RRTS और रेल नेटवर्क से दिल्ली–हावड़ा व दिल्ली–मुंबई कॉरिडोर से सीधा जुड़ाव ग्रीन एनर्जी, ईवी और सोलर सेक्टर में निवेश से रोजगार और निर्यात को नई रफ्तार लखनऊ/नोएडा,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) क्षेत्र को देश के सबसे महत्वाकांक्षी मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट हब (MMTH) के रूप में विकसित कर रही है। इस समग्र योजना का उद्देश्य उत्तर प्रदेश को निवेश, उद्योग, लॉजिस्टिक्स और रोजगार के क्षेत्र में राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना है। इस पूरे विजन का केंद्र नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, जेवर है, जो पूर्ण होने के बाद उत्तर भारत का सबसे बड़ा एविएशन और लॉजिस्टिक्स गेटवे बनेगा। निर्बाध कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने पर फोकस यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के एसीईओ शैलेन्द्र कुमार भाटिया ने बताया कि योगी सरकार की प्राथमिकता है कि एयर, रोड, रेल, आरआरटीएस और एक्सप्रेसवे—पांचों माध्यमों से निर्बाध कनेक्टिविटी उपलब्ध कराई जाए। इसके तहत 8 लेन एक्सेस कंट्रोल यमुना एक्सप्रेसवे को एयरपोर्ट से सीधे जोड़ा गया है, जिससे दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक तेज आवाजाही संभव होगी। ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे के माध्यम से हरियाणा और उत्तराखंड की सीधी कनेक्टिविटी मिलेगी, जबकि दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेसवे बल्लभगढ़ इंटरचेंज के जरिए जेवर एयरपोर्ट से जुड़कर देश के सबसे बड़े औद्योगिक और वाणिज्यिक कॉरिडोर को सीधा लाभ पहुंचाएगा। नॉर्थ और ईस्ट डेडिकेटेड एक्सेस रोड विकसित करने की योजना लॉजिस्टिक्स सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए योगी सरकार ने एयर कार्गो हेतु नॉर्थ और ईस्ट डेडिकेटेड एक्सेस रोड विकसित करने की योजना बनाई है, जिससे भारी मालवाहक वाहनों को शहरों में प्रवेश किए बिना एयरपोर्ट तक सीधा रास्ता मिलेगा। इसके साथ ही भविष्य में गंगा एक्सप्रेसवे और NH-34 को YEIDA सेक्टर और यमुना एक्सप्रेसवे से जोड़ने की तैयारी है, जिससे पूर्वांचल, मध्य और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की कनेक्टिविटी और मजबूत होगी। RRTS नेटवर्क से दिल्ली और एनसीआर से जुड़ेगा YEIDA सेक्टर शहरी परिवहन को आधुनिक बनाने की दिशा में प्रस्तावित RRTS नेटवर्क के जरिए दिल्ली और एनसीआर से YEIDA सेक्टर और नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को जोड़ने की योजना है। इसके अलावा औद्योगिक इकाइयों और एयरपोर्ट के लिए रेल कनेक्टिविटी भी विकसित की जा रही है, जिसमें दिल्ली–हावड़ा और दिल्ली–मुंबई रेल कॉरिडोर से सीधा जुड़ाव शामिल है। इससे माल परिवहन की लागत कम होगी और निर्यात को नई गति मिलेगी। EMC पार्क में बड़े पैमाने पर हो रहा निवेश इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ-साथ योगी सरकार की उद्योग-हितैषी नीतियों का असर यह है कि यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक क्षेत्र और EMC पार्क में बड़े पैमाने पर निवेश आ रहा है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में एचसीएल–फॉक्सकॉन समूह की वामा सुंदरी इन्वेस्टमेंट द्वारा सेमीकंडक्टर टेस्टिंग सुविधा, हैवेल्स इंडिया की एंकर यूनिट, डिक्सन टेक्नोलॉजीज, एडिटेक सेमीकंडक्टर्स, एसेंट के सर्किट जैसी कंपनियां इस क्षेत्र को हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग हब बना रही हैं। ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी सेक्टर में भारी निवेश इसके अतिरिक्त ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी सेक्टर में एस्कॉर्ट कुबोटा, मिंडा कॉर्पोरेशन, नीनजास इलेक्ट्रिक जैसी कंपनियों के निवेश से रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं। रिन्यूएबल एनर्जी और ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए सैल सोलर, एंबर एंटरप्राइजेज और इलेक्ट्रिक व्हीकल मैन्युफैक्चरर्स वेलफेयर ट्रस्ट जैसी इकाइयों की मौजूदगी उत्तर प्रदेश को स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में अग्रणी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। वहीं पाइन वैली वेंचर और डेकी इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे प्रोजेक्ट्स टेक्सटाइल और इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स सेक्टर को मजबूती दे रहे हैं। लाखों युवाओं के लिए उपलब्ध हो रहे रोजगार के अवसर सरकार का मानना है कि मजबूत कनेक्टिविटी, आधुनिक लॉजिस्टिक्स और उद्योगों के अनुकूल वातावरण से YEIDA क्षेत्र लाखों युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करेगा।

कॉलेज-स्कूल परिसरों में आवारा कुत्तों की मॉनिटरिंग अनिवार्य, शिक्षकों को जल्द सौंपनी होगी रिपोर्ट

चंडीगढ़  सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुरूप विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने हरियाणा के सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को परिसर में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या पर नियंत्रण के लिए नए निर्देश जारी किए हैं। शिक्षा निदेशालय की ओर से आए आदेशों में कहा गया है कि प्रत्येक विश्वविद्यालय, कॉलेज और स्कूल में एक प्रोफेसर या शिक्षक को नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाए, जो कुत्तों की निगरानी और जोखिम की स्थिति में स्थानीय प्रशासन या नगर निगम को सूचित करने की जिम्मेदारी निभाएगा। इसके तहत रोहतक स्थित महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, हिसार, कैथल सहित अन्य जिलों के स्कूलों में खंड शिक्षा अधिकारियों को आदेश भेजे जा चुके हैं। हर स्कूल में नोडल अधिकारी का नाम, पद और मोबाइल नंबर परिसर में प्रदर्शित करना अनिवार्य किया गया है। साथ ही इस कार्य की रिपोर्ट शुक्रवार तक मांगे जाने के निर्देश भी दिए गए हैं। हसला ने जताई नाराजगी हालांकि, इस आदेश के बाद शिक्षक संगठनों ने नाराजगी जाहिर की है। हरियाणा स्कूल लेक्चरर एसोसिएशन (HASLA) के राज्य प्रधान सतपाल सिंधु ने कहा कि शिक्षक पहले ही शिक्षण कार्य के अतिरिक्त 20 से अधिक गैर-शैक्षणिक जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। अब कुत्तों की निगरानी जैसी व्यवस्थाएं सौंपना बिल्कुल अनुचित है।   आदेश तुरंत रद्द किए जाऐं उन्होंने कहा कि शिक्षकों की मूल भूमिका विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना है, न कि पशु नियंत्रण से जुड़े कार्य करना। आवारा पशुओं व कुत्तों को नियंत्रित करना नगर निगम, पशुपालन विभाग और स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारी है, इसे शिक्षकों पर थोपना शैक्षणिक माहौल को प्रभावित करेगा। शिक्षक संगठनों ने मांग की है कि यह आदेश तुरंत रद्द किया जाए और आवारा कुत्तों के प्रबंधन का दायित्व संबंधित विभागों को ही सौंपा जाए।

31 दिसंबर को मनाई जाएगी श्रीरामलला प्राण प्रतिष्ठा की दूसरी वर्षगांठ

27 दिसंबर से शुरू होंगे धार्मिक अनुष्ठान, 2 जनवरी तक चलेंगे कार्यक्रम रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह होंगे मुख्य अतिथि, सीएम योगी की भी रहेगी उपस्थिति मां अन्नपूर्णा मंदिर में ध्वजारोहण, प्रतिष्ठा द्वादशी में विशिष्ट सहभागिता अयोध्या,  रामनगरी अयोध्या में भगवान श्रीरामलला की प्राण प्रतिष्ठा की दूसरी वर्षगांठ आगामी 31 दिसंबर 2025 को श्रद्धा, भव्यता और धार्मिक उल्लास के साथ मनाई जाएगी। श्रीरामलला की प्राण प्रतिष्ठा 22 जनवरी 2024 को संपन्न हुई थी, लेकिन वर्षगांठ का निर्धारण हिंदू पंचांग के अनुसार किया जा रहा है। इसी परंपरा के तहत पहली वर्षगांठ 11 जनवरी 2025 को मनाई गई थी। दूसरी वर्षगांठ के अवसर पर धार्मिक अनुष्ठानों की शुरुआत 27 दिसंबर 2025 से होगी। मुख्य समारोह 31 दिसंबर को आयोजित किया जाएगा, जबकि पूजन-अनुष्ठान और अन्य धार्मिक कार्यक्रम 2 जनवरी 2026 तक चलते रहेंगे। इस भव्य आयोजन में देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भी कार्यक्रम में गरिमामयी उपस्थिति रहेगी। पूजन-अनुष्ठान जगद्गुरु मध्वाचार्य जी की देखरेख में संपन्न कराए जाएंगे। कार्यक्रमों की श्रृंखला के तहत 29 दिसंबर से सांस्कृतिक आयोजनों की शुरुआत होगी, जिसमें विविध धार्मिक और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां होंगी।श्रद्धालुओं की सुविधा और सुव्यवस्थित आवागमन को ध्यान में रखते हुए अंगद टीला तक पहुंचने के लिए सुग्रीव पथ से आने-जाने की व्यवस्था की गई है।इसी क्रम में 31 दिसंबर को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह श्रीराम जन्मभूमि मंदिर परिसर स्थित मां अन्नपूर्णा मंदिर में ध्वजारोहण भी करेंगे। वे प्रतिष्ठा द्वादशी कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में सहभागिता करेंगे। इस दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी उनके साथ उपस्थित रहेंगे। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर की व्यवस्थाओं से जुड़े गोपाल जी ने आयोजित कार्यकर्ताओं की बैठक में इन कार्यक्रमों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आयोजन को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में हैं। रामनगरी में देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के स्वागत और सुचारु व्यवस्था के लिए व्यापक इंतजाम किए जा रहे हैं।

पंजाब में मान सरकार का बड़ा ऐलान, इन लोगों को मिलेगा सीधा फायदा

चंडीगढ़ मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार राज्य के हर वर्ग की भलाई के लिए प्रतिबद्ध है। इसी कड़ी में सरकार आश्रित और अनाथ बच्चों की सुरक्षित, सम्मानजनक और सर्वांगीण विकास सुनिश्चित करने के लिए लगातार उचित कदम उठा रही है। सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने कहा कि पंजाब सरकार ने अब तक राज्य के आश्रित और अनाथ बच्चों के लिए 314.22 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता जारी की है, जिससे हजारों बच्चों के जीवन में सुरक्षा और स्थिरता आई है। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत राज्य के 2 लाख 37 हजार 406 आश्रित और अनाथ बच्चों को नियमित वित्तीय सहायता दी जा रही है ताकि ये बच्चे वित्तीय सहायता से पढ़-लिखकर समाज की मुख्यधारा में शामिल हो सकें और आत्मनिर्भर जीवन की ओर आगे बढ़ सकें। डॉ. बलजीत कौर ने कहा कि आश्रित और अनाथ बच्चे सिर्फ सरकारी आंकड़े नहीं हैं, बल्कि समाज की साझा जिम्मेदारी हैं। उन्होंने कहा कि मान सरकार यह पक्का कर रही है कि कोई भी बच्चा मजबूरी, अनदेखी या आर्थिक कमजोरी की वजह से अपनी पढ़ाई और सपनों से दूर न रहे। पंजाब सरकार ऐसे हर बच्चे के साथ संवेदनशीलता और ज़िम्मेदारी के साथ खड़ी है। कैबिनेट मंत्री ने आगे बताया कि इस स्कीम का फ़ायदा वे बच्चे उठा सकते हैं जिनकी उम्र 21 साल से कम है और जिनके माता-पिता या तो दोनों गुज़र चुके हैं या दोनों घर से दूर हैं या शारीरिक और मानसिक विकलांगता की वजह से परिवार की देखभाल करने में असमर्थ हैं। डॉ. बलजीत कौर ने कहा कि मान सरकार की यह पहल सिर्फ़ आर्थिक मदद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राज्य के हर बच्चे को सुरक्षित, सम्मानित और उज्ज्वल भविष्य की ओर ले जाने का साफ़ और पक्का वादा दिखाती है। 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में आईटी सेक्टर को मिला नया विस्तार

लखनऊ  उत्तर प्रदेश तेजी से देश के प्रमुख आईटी और डिजिटल हब के रूप में अपनी पहचान बना रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में लागू की गई नीतियों और मजबूत प्रशासनिक व्यवस्था का असर अब धरातल स्टार पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। प्रदेश में आईटी कंपनियों का लगातार विस्तार हो रहा है, जो रोजगार सृजन निवेश और तकनीकी नवाचार के नए अवसर पैदा कर रही हैं। इनमें से सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (एसटीपीआई) के अंतर्गत प्रदेश में लगभग 400 आईटी कंपनियां पंजीकृत हैं।    उत्तर प्रदेश में संचालित आईटी कंपनियों में स्टार्टअप्स, मध्यम उद्यम और वैश्विक स्तर की बड़ी कंपनियां शामिल हैं। ये कंपनियां मुख्य रूप से सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, आईटीईएस, क्लाउड सर्विसेज और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित सेवाओं पर कार्य कर रही हैं। आईटी विशेषज्ञ प्रदीप यादव का कहना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की टेक्नोलॉजी सेक्टर को बढ़ावा देने विज़न से आईटी कंपनियों का उत्तर प्रदेश की ओर रुझान बढ़ रहा है। नोएडा और ग्रेटर नोएडा उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े आईटी गंतव्य के रूप में स्थापित हो चुके हैं। जो डेटा सेंटर और नई तकनीकों पर आधारित सेवाएं प्रदान करने का काम कर रही हैं। इसके अलावा कानपुर और वाराणसी जैसे शहर भी तेजी से उभरते डिजिटल केंद्र बन रहे हैं, जिससे प्रदेश के संतुलित विकास को मजबूती मिल रही है। सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया के अंतर्गत प्रदेश में लगभग 400 इकाइयां पंजीकृत हैं। ये इकाइयां आईटी निर्यात में अहम भूमिका निभा रही हैं। आईटी विशेषज्ञों का कहना है कि वर्ष 2026  तक प्रदेश में एसटीपीआई पंजीकृत इकाइयों की संख्या 500 से अधिक हो जाएगी। उत्तर प्रदेश में माइक्रोसॉफ्ट, टीसीएस, एचसीएल, विप्रो, इंफोसिस, पेटीएम और एडोब जैसी प्रमुख कंपनियां बड़े स्तर पर संचालन कर रही हैं। इसके साथ ही लगभग 90 ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) स्थापित किए जा चुके हैं, जहां रिसर्च और उच्च स्तरीय सेवाओं पर काम हो रहा है। इन कंपनियों की मौजूदगी से प्रदेश के युवाओं को वैश्विक स्तर पर काम करने का अवसर मिल रहा है। सरकार की स्किल डेवलपमेंट योजनाओं के अंतर्गत युवाओं को तकनीकी प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

जब भ्रम टूटा और सच्चाई जीती: राजस्थान पुलिस ने कायम की भरोसे की मिसाल

जयपुर राजस्थान की वीर धरा पर 'खाकी' केवल एक वर्दी नहीं, बल्कि लाखों युवाओं का स्वाभिमान और प्रदेश की सेवा का संकल्प है। जब एक युवा पुलिस मुख्यालय की सीढ़ियां चढ़ने का सपना देखता है, तो उसके पीछे सालों की तपस्या, माता-पिता की उम्मीदें और एक निष्पक्ष व्यवस्था का भरोसा होता है। हाल ही में राजस्थान पुलिस दूरसंचार विभाग द्वारा कांस्टेबल (ऑपरेटर/चालक) भर्ती-2025 के जो परिणाम जारी किए गए हैं, वे इसी अटूट विश्वास और अटूट पारदर्शिता की एक जीवंत मिसाल बनकर उभरे हैं। ​ भ्रामक खबरों का अंत: केवल योग्यता को सलाम ​अक्सर देखा गया है कि जब भी कोई बड़ी भर्ती प्रक्रिया अपने अंतिम चरणों में होती है, तो कुछ स्वार्थी तत्व और अफवाहों के सौदागर प्रक्रिया को धूमिल करने की कोशिश करते हैं। लेकिन राजस्थान पुलिस ने स्पष्ट कर दिया है कि "न्याय केवल तथ्यों और योग्यता के आधार पर होगा, न कि धारणाओं के आधार पर।" ​ पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी प्रेस नोट इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि विभाग हर एक पहलू पर पैनी नज़र बनाए हुए है। विभाग ने उन चर्चाओं को सिरे से खारिज कर दिया है जिनमें प्रक्रिया पर सवाल उठाए जा रहे थे। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान परिणाम 'अस्थाई' (Tentative) है। इसका अर्थ यह है कि अभी केवल लिखित और शारीरिक दक्षता के अंकों के आधार पर एक सूची तैयार हुई है, लेकिन अंतिम चयन की अग्निपरीक्षा अभी बाकी है। ​ दस्तावेज़ सत्यापन: जहां दूध का दूध और पानी का पानी होगा ​राजस्थान पुलिस की कार्यप्रणाली की सबसे बड़ी खूबसूरती इसकी बहुस्तरीय जांच प्रक्रिया (Multi-layered verification) है। विभाग ने यह साफ कर दिया है कि 26 दिसंबर 2025 से 4 जनवरी 2026 तक चलने वाले दस्तावेज सत्यापन (DV) में एक-एक कागज़ की बारीकी से जांच की जाएगी। ​विशेष संज्ञान: विभाग के ध्यान में यह बात आई है कि कुछ अभ्यर्थियों ने अपनी मूल कैटेगरी के अलावा अन्य कैटेगरी (जैसे OBC से MBC) में फॉर्म भरे हैं। यहां पुलिस का रुख बेहद सख्त और स्पष्ट है—"मात्र सूची में नाम आने से नियुक्ति नहीं मिलेगी।" ​ यह कदम उन मेहनती अभ्यर्थियों के लिए एक सुरक्षा कवच है, जिन्हें डर था कि गलत जानकारी देकर कोई उनकी सीट छीन लेगा। राजस्थान पुलिस ने वचन दिया है कि मूल दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही श्रेणी का अंतिम निर्धारण होगा। यदि कोई अभ्यर्थी गलत पाया जाता है, तो उसे तुरंत अयोग्य घोषित कर मेरिट के आधार पर अगले पात्र उम्मीदवार को अवसर दिया जाएगा। यह प्रक्रिया दर्शाती है कि यहाँ "सिफारिश नहीं, केवल सर्टिफिकेट और सच्चाई" चलती है। ​ एक भावुक कहानी: पसीने की बूंद और खाकी का सम्मान ​कल्पना कीजिए शेखावाटी की तपती रेत में सुबह 4 बजे दौड़ने वाले उस युवा की, जिसके पिता मजदूरी करते हैं ताकि बेटा पुलिस में भर्ती हो सके। या उस बेटी की, जिसने गृहस्थी संभालते हुए रातों को जागकर ऑपरेटर परीक्षा की तैयारी की। इन युवाओं के लिए पुलिस विभाग केवल एक नियोक्ता नहीं, बल्कि एक 'अभिभावक' है। राजस्थान पुलिस ने इन भावनाओं को समझा है। इसीलिए प्रेस नोट में यह संवेदना झलकती है कि विभाग अभ्यर्थियों की 'कड़ी मेहनत और प्रयास' का सम्मान करता है। पुलिस विभाग जानता है कि एक भी गलत चयन हज़ारों मेहनती युवाओं का मनोबल तोड़ सकता है। इसीलिए, मेडिकल परीक्षण, चरित्र सत्यापन और शैक्षणिक योग्यता की जांच को इतना कठोर बनाया गया है कि कोई भी 'अपात्र' व्यक्ति सिस्टम में सेंध न लगा सके। ​ कानूनी और नैतिक पक्ष: क्यों निराधार हैं सवाल? ​किसी भी लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सवाल उठाना आसान है, लेकिन व्यवस्था को पारदर्शी बनाए रखना चुनौतीपूर्ण। राजस्थान पुलिस ने इस चुनौती को स्वीकार किया है। कानूनी दृष्टि से देखें तो विभाग ने अपनी हर कार्रवाई को नियमों के दायरे में रखा है। ​अस्थाई सूची: यह फाइनल सिलेक्शन नहीं है, अतः किसी के अधिकारों का हनन नहीं हुआ। ​सत्यापन का अवसर: सभी को अपने दस्तावेज पेश करने का समान अवसर दिया गया है। ​पारदर्शिता: आधिकारिक वेबसाइट पर सूचनाएं साझा कर विभाग ने 'सूचना के अधिकार' और 'न्यायिक सुचिता' का पालन किया है। आमजन को संदेश: अफवाहों से बचें, खाकी पर भरोसा रखें ​इस डिजिटल युग में 'व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी' के दावों पर यकीन करने से बेहतर है कि हम उस विभाग पर भरोसा करें जो दिन-रात हमारी सुरक्षा में तैनात है। राजस्थान पुलिस की भर्ती सेल ने आधुनिक तकनीक और निष्पक्ष जांच के तालमेल से यह सुनिश्चित किया है कि "मेहनत करने वाला कभी हारेगा नहीं, और धोखाधड़ी करने वाला कभी जीतेगा नहीं।" यह परीक्षा केवल अंकों की नहीं थी, बल्कि राजस्थान पुलिस की ईमानदारी की भी थी, जिसमें वह शत-प्रतिशत सफल रही है। विभाग का यह कहना कि "हम आपकी मेहनत और भरोसे के साथ खिलवाड़ नहीं होने देंगे," हर अभ्यर्थी के दिल में सुरक्षा का भाव पैदा करता है। सुशासन और पारदर्शिता का नया अध्याय ​अंत में, यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि राजस्थान पुलिस ने इस भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से सुशासन (Good Governance) का एक नया मानक स्थापित किया है। चयन प्रक्रिया के हर पड़ाव पर पारदर्शिता का पहरा है। यह उन सभी के लिए करारा जवाब है जो पुलिस की कार्यप्रणाली पर संदेह करते थे। ​राजस्थान के युवाओं को अब निश्चिंत होकर अपने अगले पड़ाव की तैयारी करनी चाहिए, क्योंकि उनकी खाकी, उनकी मेहनत और उनकी ईमानदारी का रक्षक स्वयं राजस्थान पुलिस मुख्यालय है।  

फतेहाबाद में महिला का गुस्सा फूटा, मेडिकल स्टोर संचालक पर बेटी से गलत हरकत का आरोप

फतेहाबाद  हरियाणा के फतेहाबाद में एक मेडिकल स्टोर संचालक की महिला ने जमकर पिटाई कर दी। गुस्साई महिला ने जमकर थप्पड़ मारे व लात भी मारी। चप्पल से पिटाई कर कुर्सी उठाकर भी मारने की कोशिश की। महिला का आरोप है कि उसने बेटी पेट दर्द की दवा लेने मेडिकल स्टोर पर भेजा था। स्टोर संचालक ने इंजेक्शन लगाने के लिए कहा। इसी दौरान उसने गलत हरकत की। को मेडिकल स्टोर पर दवाई लेने भेजा था। मेडिकल संचालक ने उसकी बेटी से गलत हरकत की। बेटी ने घर आकर यह बात परिजनों को बताई। यह भी आरोप है कि जब मेडिकल स्टोर संचालक से इस बारे में पूछा गया तो माफी मांगने की बजाय उनके साथ ही अभद्रता की। इससे महिला का गुस्सा भड़क गया। हालांकि मेडिकल स्टोर संचालक पुलिस को बुलाने के लिए कहता रहा, लेकिन महिला ने उसकी एक नहीं सुनी। मामले में अभी तक पुलिस को शिकायत नहीं दी गई है, लेकिन इसका एक वीडियो सामने आया है, जिसमें महिला मेडिकल स्टोर में हंगामा करती दिख रही है।