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डोबड़ा बना ग्राम पंचायत, विकास की नई शुरुआत; मंत्री मदन दिलावर का ऐतिहासिक स्वागत, 51 फीट साफा बना आकर्षण

कोटा राजस्थान की भाजपा सरकार के दो वर्ष पूर्ण होने पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का विकास रथ लेकर गांव-गांव घूम रहे मदन दिलावर ने आज रथ यात्रा के कारवें की शुरुआत नवगठित ग्राम पंचायत डोबड़ा से की | ग्राम पंचायत बनने के बाद पहली बार डोबड़ा गांव पहुंचे शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर का ग्राम वासियों ने जबरदस्त स्वागत किया| ढोल-नगाड़ों, आतिशबाजी और गुलाब की पंखुड़ियों की पुष्प वर्षा कर पूरे गांव में दिलावर के विकास रथ को घुमाया गया| सभा स्थल पर पहुंचने पर मंच पर ग्रामीणों ने 51 फीट लंबा साफा पहनकर दिलावर के प्रति कृतज्ञ और आभार प्रकट किया| गांव के युवाओं की ओर से दिलावर को 51 किलो पुष्प से बना भारी भरकम हार पहनाया गया|  कार्यक्रम में स्वागत भाषण करते हुए भारतीय जनता पार्टी के पूर्व प्रदेश महामंत्री मोतीलाल मीणा से की मुलाकात है इसी गांव के रहने वाले हैं ने डोबड़ा गांव को ग्राम पंचायत बनाए जाने पर पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर के प्रति आभार प्रकट करते हुए कहा कि कि हमारे विधायक और राजस्थान सरकार के शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री के कारण ही ग्राम डोबड़ा आज पंचायत बन गया है| हम सब इस गांव के निवासी मदन दिलावर के सदैव ऋणी रहेंगे| भाजपा नेता मोतीलाल मीणा ने एक-एक कर मदन दिलावर द्वारा दो वर्षों में गांव के विकास के लिए कराए गए कामों को गिनाया| मोतीलाल मीणा ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि इस गांव से हमेशा भारतीय जनता पार्टी चुनाव हारती है उसके बावजूद विधायक और सरकार के मंत्री मदन दिलावर ने जितना दिल खोलकर विकास का काम किया है उतना कोई नेता नहीं कर सकता| गांव के लोगों को यह सोचना चाहिए केवल बीजेपी के नेता और सरकार ही है जो लगातार उनका भला कर रही है| शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर ने ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा कि डोबड़ा वासियों को बधाई देता हूं अब आपका गांव ग्राम पंचायत बन गया है| अब आपको अपने कामों के लिए ग्राम पंचायत कालिया खेड़ी नहीं जाना पड़ेगा| सरपंच भी आपका अपना होगा और विकास अधिकारी भी अब यही बैठेगा तो आपके सारे काम यही गांव में ही हो जाएंगे| मदन दिलावर ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा आपकी ग्राम पंचायत में 750 परिवारों को निःशुल्क खाद्य सुरक्षा योजना का गेहूं देते हैं और 850 लोगों को 1250 रूपये पेंशन हर महीने मिलती है| मदन दिलावर ने कालिया खेड़ी से डोबड़ा तक सड़क निर्माण से लेकर गांव में इंटरलॉकिंग, श्मशान घाट का विकास, स्कूल में मरम्मत के कार्य,सामुदायिक भवन में निर्माण सहित 2 वर्षों में गांव में कराए गए विकास कार्यों की सूची बताई| विकास रथ यात्रा के साथ भारतीय जनता पार्टी के पूर्व प्रदेश महामंत्री मोतीलाल मीणा,कोटा जिला प्रमुख मुकेश मेघवाल, मंडाना मंडल भाजपा अध्यक्ष नंदलाल मेघवाल, युवा मोर्चा के देहात जिला अध्यक्ष युधिष्ठिर खटाना, ग्राम पंचायत कालिया खेड़ी की सरपंच बजरंगी भाई मीणा,पूर्व मंडल अध्यक्ष जगदीश हाडा पूर्व मंडल अध्यक्ष हुकम चंद शर्मा,पूर्व मंडल महामंत्री तेजस शर्मा, दरा के सरपंच रामगोपाल सहित अन्य भाजपा कार्यकर्ता और नेता शामिल थे |

एक महीने से लापता युवक पाकिस्तान में मिला, नशे के चक्कर में पार की भारत-पाक सीमा

चंडीगढ़  पंजाब के जालंधर जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है जहां सतलुज दरिया से सटे गांव भोयपुर का रहने वाला एक युवक गलती से सीमा पार कर पाकिस्तान पहुंच गया. युवक की पहचान शरणजीत सिंह के रूप में हुई है. इस बात की जानकारी तब सामने आई जब पाकिस्तानी रेंजर्स ने हथकड़ी लगाए युवक की तस्वीर अपने सोशल मीडिया हैंडल पर शेयर की.तस्वीर वायरल होते ही उसके परिवार में हड़कंप मच गया. शरणजीत सिंह के परिजनों ने बताया कि वह बीते कई दिनों से लापता था. उसके पिता सतनाम सिंह और माता अमरजीत कौर के अनुसार शरणजीत 2 नवंबर की शाम को घर से निकला था. उसे गांव का ही एक युवक मंदीप सिंह अपने साथ ले गया था. इसके बाद शरणजीत वापस घर नहीं लौटा. परिवार ने काफी तलाश की लेकिन जब कोई सुराग नहीं मिला तो थाना शाहकोट में उसकी गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई गई. कुश्ती खिलाड़ी है शरणजीत परिजनों का कहना है कि शरणजीत पिछले करीब 10 सालों से कुश्ती का खिलाड़ी रहा है लेकिन बीते एक साल से वह नशे की लत का शिकार हो गया था. नशे की वजह से उसका व्यवहार भी बदल गया था और वह घरवालों की बात नहीं मानता था. परिवार का आरोप है कि उसका दोस्त मंदीप सिंह भी नशे का आदी है. वही उसे खेमकरण बॉर्डर एरिया के पास छोड़कर आया था. पहले मंदीप लगातार गुमराह करता रहा लेकिन बाद में उसने स्वीकार किया कि वह शरणजीत को तरनतारन के खेमकरण इलाके में छोड़ आया था. करीब 21 दिसंबर को सोशल मीडिया के जरिए परिवार को जानकारी मिली कि शरणजीत पाकिस्तान में पकड़ा गया है. वायरल तस्वीर में वह पाकिस्तानी रेंजर्स के साथ हथकड़ियों में नजर आया. जानकारी के अनुसार शरणजीत को 20 दिसंबर को पाकिस्तान के कसूर जिले के सेहजरा इलाके में गंडा सिंह पुलिस स्टेशन क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया. उस पर अवैध रूप से सीमा पार करने का आरोप लगाया गया है. एक बेटा विदेश में, दूसरा पहुंचा सीमा पार शरणजीत के पिता सतनाम सिंह ने बताया कि उनका बड़ा बेटा कई सालों से विदेश में रह रहा है जबकि बेटी पंजाब में पढ़ाई कर रही है. परिवार पहले ही एक बेटे से दूर है और अब इस घटना ने उन्हें पूरी तरह तोड़ दिया है. माता-पिता ने भारत सरकार और प्रशासन से अपील की है कि उनके बेटे को सुरक्षित भारत वापस लाने के प्रयास किए जाएं. फिलहाल परिवार को प्रशासन की ओर से किसी ठोस जानकारी का इंतजार है. यह मामला एक बार फिर नशे और सीमा से सटे इलाकों में युवाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है.

मोबाइल विवाद पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: पत्नी की अपील नामंजूर, तलाक पर लगी मुहर

जबलपुर  मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने हाल ही में अपने एक फैसले में एक आदमी को उसकी पत्नी से दी गई तलाक को बरकरार रखा। कोर्ट ने कहा कि अपीलकर्ता का मोबाइल तोड़ना स्वाभाविक प्रतीत होता है। कोई भी आदमी अपनी पत्नी को व्यभिचार जारी रखते देखना पसंद नहीं करेगा। इसलिए पति ने गुस्से में आकर पत्नी का प्रेमी से संपर्क तोड़ने के लिए उसका मोबाइल तोड़ दिया।   बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने कथित व्यभिचार को दर्शाने वाली मोबाइल फोन की तस्वीरों के आधार पर दी गई तलाक को बरकरार रखा। कोर्ट ने भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 65बी के तहत प्रमाण पत्र पर जोर नहीं दिया। भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 65बी इलेक्ट्रॉनिक अभिलेखों को सबूत के रूप में स्वीकार्यता से संबंधित है। किसी इलेक्ट्रानिक उपकरण से प्राप्त साक्ष्य को वैध माने जाने के लिए धारा 65बी का प्रमाण पत्र पेश करना जरूरी है। हाई कोर्ट के जस्टिस विशाल धागत और जस्टिस बीपी शर्मा की पीठ ने कहा कि भारतीय साक्ष्य अधिनियम वैवाहिक मामलों पर सख्ती से लागू नहीं होता है क्योंकि फैमिली कोर्ट को किसी भी प्रकार का साक्ष्य स्वीकार करने की अनुमति है। हाई कोर्ट ने कहा कि फैमिली कोर्ट अधिनियम की धारा 14 के अनुसार, फैमिली कोर्ट किसी भी रिपोर्ट, बयान, दस्तावेज, सूचना या मामले को साक्ष्य के रूप में स्वीकार कर सकता है, जो उसके विचार से किसी विवाद से प्रभावी ढंग से निपटने में सहायक हो। चाहे वह भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 के तहत प्रासंगिक या स्वीकार्य हो या न हो। भारतीय साक्ष्य अधिनियम वैवाहिक मामलों में सख्ती से लागू नहीं होता है और कोर्ट को सत्य का पता लगाने के लिए किसी भी रिपोर्ट, बयान, दस्तावेज को साक्ष्य के रूप में स्वीकार करने का अधिकार दिया गया है। अतः कोर्ट को उक्त तस्वीरों पर भरोसा करते हुए फैमिली कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले में कोई गलती नहीं दिखती है। तलाक के फैसले के खिलाफ अपील करने वाली पत्नी ने तर्क दिया था कि कथित तस्वीरें किसी दूसरे मोबाइल से ली गई थीं क्योंकि पति ने उसका मोबाइल फोन तोड़ दिया था। कोर्ट ने इस बात पर गौर किया कि पत्नी ने तस्वीरों में अपनी मौजूदगी से इनकार नहीं किया था, बल्कि सिर्फ इतना कहा था कि तस्वीरें फर्जी हैं। कोर्ट ने कहा कि केवल इतना कहा गया है कि ये तस्वीरें किसी चालबाजी का उपयोग करके बनाई गई हैं। इन फर्जी तस्वीरों को किसने और कैसे बनाया है, इसका जिक्र नहीं किया गया है। इन तस्वीरों को लेकर टकराव से बचने के लिए केवल एक सामान्य बयान दिया गया है। पत्नी की इस दलील पर कि प्राथमिक उपकरण (पहला मोबाइल) उपलब्ध नहीं था, कोर्ट ने कहा कि पति ने तस्वीरों को अपने फोन में ट्रांसफर करने के बाद गुस्से में आकर उसे तोड़ दिया था। कोर्ट ने कहा कि अपीलकर्ता ने अपने बयान में कहा था कि तस्वीरें उसके मोबाइल से पति के मोबाइल में ट्रांसफर की गई थीं, जिसके बाद पति ने उसका मोबाइल तोड़ दिया। कोर्ट ने कहा कि पति का मोबाइल तोड़ना स्वाभाविक प्रतीत होता है। पति के मोबाइल फोन में पत्नी के व्यभिचार के सबूत थे। उसने वे तस्वीरें अपने मोबाइल में ट्रांसफर कर लीं। कोई भी आदमी अपनी पत्नी को व्यभिचार जारी रखते देखना पसंद नहीं करेगा। इसलिए पति ने गुस्से में आकर और पत्नी का प्रेमी से संपर्क तोड़ने के लिए उसका मोबाइल तोड़ दिया। रिकॉर्ड में मौजूद सबूतों, पत्नी की स्वीकारोक्ति और तस्वीरें तैयार करने वाले व्यक्ति के साक्ष्यों पर विचार करते हुए कोर्ट ने पाया कि फैमिली कोर्ट के फैसले के खिलाफ पत्नी की अपील में कोई दम नहीं है। कोर्ट ने पत्नी द्वारा दायर अपील खारिज कर दी।  

‘लिव-इन संस्कृति खत्म करो’— खाप पंचायतों ने हरियाणा सरकार को चेताया

चंडीगढ़  हरियाणा में जारी लिव-इन-रिलेशनशिप कानून विवाद में अब खाप पंचायतों की एंट्री हो गई है. लिव-इन-रिलेशनशिप पर खापों ने भी सख्त रुख अख्तियार किया है. उन्होंने मांग की है कि लिव-इन-रिलेशनशिप को पूरी तरह खत्म किया जाए. खापों ने विधानसभा के शीतकालीन सत्र में बीजेपी विधायक लक्ष्मण यादव की उत्तराखंड सरकार की तर्ज पर लाये गए प्रावधानों की मांग को भी ठुकरा दिया है. उन्होंने कहा कि आधा-अधूरा सुधार नहीं बल्कि लिव-इन-रिलेशनशिप को पूरी तरह से खत्म होना चाहिए. हरियाणा में लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर सख्त कानून बनाने की मांग उठने लगी है. बीजेपी विधायक लक्ष्मण यादव ने हरियाणा विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान यह मुद्दा उठाया. बीजेपी विधायक ने अपनी सरकार से लिव इन पर सख्त कानून लाने की मांग की. उन्होंने दावा किया किकई विधायक इसके खिलाफ हैं. वो जल्द ही मुख्यमंत्री से मिलेंगे और उत्तराखंड की तर्ज पर हरियाणा सरकार से भी लिव-इन पर सख्त कानून लाने की मांग करेंगे. लिव-इन से खराब हो रहे रिश्ते बीजेपी विधायक ने कहा कि लिव-इन से सामाजिक ताने-बाने के साथ-साथ पारिवारिक रिश्ते भी खराब हो रहे हैं. उन्होंने कहा कि हमारी मांग है कि उत्तराखंड सरकार की तर्ज पर हरियाणा में भी लिव-इन-रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन शुरू किया जाए ताकि लोगों का सरकार के पास पूरा आंकड़ा हो. विधायक ने मांग की है कि सरकार की और से लिव-इन के मानदंड तय करने के लिए कमेटी गठित करनी चाहिए. रेवाड़ी विधायक की मांग है कि समाज में लिव-इन की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, जिससे सामाजिक व्यवस्था पूरी तरह खराब हो रही है. हरियाणा में भी इसको कानूनी मान्यता देने के लिए उत्तराखंड सरकार की तर्ज पर पंजीकरण जरूरी हो. उत्तराखंड में क्या है नियम? उत्तराखंड सरकार की ओर से समान नागरिक संहिता के अंतर्गत लिव-इन रजिस्ट्रेशन का प्रावधान किया गया है. हरिद्वार में लिव-इन के 40 मामले सामने आए, जब पंजीकरण कराने के निर्देश दिए गए तो उनमें से 13 मामले ऐसे थे, जो पहले से ही शादीशुदा थे. महिला सुरक्षा को मिलेगी मजबूती विधायक लक्ष्मण यादव ने कहा कि रजिस्ट्रेशन से महिला सुरक्षा को मजबूती मिलेगी और पुरुष द्वारा महिला को छोड़ने के बाद हताशा में जीवन लीला को खत्म करने वाले कदमों पर भी अंकुश लगेगा. उन्होंने कहा कि लिव-इन के मामलों में आत्महत्या का ग्राफ भी बढ़ रहा है. उनके रेवाड़ी जिले में तीन मामले सामने आए हैं.  

ट्रांसको प्रीमियर क्रिकेट लीग 26 दिसम्बर से

ट्रांसको प्रीमियर क्रिकेट लीग 26 दिसम्बर से  जबलपुर  एम.पी. ट्रांसको (मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी) मुख्यालय, जबलपुर में अंतरविभागीय वार्षिक खेलकूद प्रतियोगिता के अंतर्गत “ट्रांसको प्रीमियर क्रिकेट लीग–2025-26” का आयोजन 26 दिसम्बर 2025 से किया जा रहा है।प्रतियोगिता के संयोजक कार्यपालन अभियंता श्री इकबाल खान ने बताया कि टेनिस बॉल से खेली जाने वाली इस प्रतियोगिता के सभी लीग एवं फाइनल मुकाबले रामपुर स्थित पांडुताल खेल प्रांगण में आयोजित किए जाएंगे। इस क्रिकेट लीग में एम.पी. ट्रांसको की तीन महिला टीमें, वेंडर्स एवं आउटसोर्स की एक-एक टीम सहित कुल सात पुरुष टीमें भाग लेंगी। इसके अतिरिक्त, 40 वर्ष से अधिक आयु के वर्तमान कार्मिकों की सीनियर इलेवन, सेवानिवृत्त कार्मिकों की इलेवन तथा ट्रांसको परिवार की घरेलू महिला इलेवन की भी विशेष सहभागिता रहेगी। प्रतियोगिता का उद्घाटन एम.पी. ट्रांसको के प्रबंध संचालक श्री सुनील तिवारी एवं मध्यप्रदेश विद्युत महिला मंडल की अध्यक्ष डॉ. अंजना तिवारी द्वारा दोपहर 12 बजे किया जाएगा। आज का पहला मुकाबला महिला टीम पावर स्मैसर्स विरुद्ध पावर एंजिल्स रहेगा.

मुख्यमंत्री पोषण मार्ट से आम जनता को सुविधा, किराना और जनरल स्टोर की तरह मिलेगा हर सामान: मंत्री राजपूत

भोपाल  मध्य प्रदेश में राशन की दुकानों पर किराना और जनरल स्टोर की तरह जरूरत की हर सामग्री मिलेगी। मप्र के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया कि मध्यप्रदेश में पहली बार राशन दुकानों को ‘मुख्यमंत्री पोषण मार्ट’ के रूप में विकसित करने की तैयारी।  अभी तक प्रदेश की राशन दुकानों में केवल गेहूं, चावल, शक्कर जैसी सीमित सामग्री ही उपलब्ध रहती है, लेकिन सरकार का उद्देश्य इस व्यवस्था को और व्यापक व उपयोगी बनाना है। राशन दुकान पर जरूरत का हर सामान मिले मंत्री ने बताया कि सरकार का विचार है कि राशन दुकानों पर किराने और जनरल स्टोर से जुड़ी आवश्यक वस्तुएं भी उपलब्ध कराई जाएं, ठीक उसी तरह जैसे विकसित देशों में कम्युनिटी स्टोर या सोशल स्टोर की व्यवस्था होती है। इससे हितग्राहियों को रोजमर्रा की जरूरत का सामान एक ही स्थान पर मिल सकेगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पोषण मार्ट के रूप में विकसित होने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सबसे अधिक लाभ होगा। गांव-गांव में रहने वाले नागरिकों को छोटी-छोटी जरूरतों के लिए अलग-अलग दुकानों या दूर के बाजारों तक नहीं जाना पड़ेगा। राशन के साथ-साथ अन्य जरूरी वस्तुएं भी एक ही जगह मिलने से समय, पैसा और श्रम तीनों की बचत होगी। मंत्री के अनुसार, इस योजना से न केवल हितग्राहियों को सुविधा मिलेगी, बल्कि राशन दुकानदारों की आय भी बढ़ेगी, जिससे पूरी सार्वजनिक वितरण प्रणाली अधिक मजबूत और टिकाऊ बन सकेगी। सरकार इसे चरणबद्ध तरीके से लागू करने की तैयारी कर रही है। भोपाल के होटल पलाश में मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की उपलब्धियां बताईं। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना की उपलब्धि मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया कि बीते दो सालों में प्रदेश में प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत बड़े पैमाने पर नि:शुल्क राशन का वितरण किया गया। इस अवधि में सरकार ने 22 हजार 800 करोड़ रुपए मूल्य का अनाज गरीब और जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचाया। मंत्री के अनुसार, योजना का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र परिवार खाद्यान्न से वंचित न रहे। योजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता लाने के लिए तकनीक का सहारा लिया गया है, जिससे वितरण व्यवस्था पहले की तुलना में अधिक सुचारु हुई है। मुख्यमंत्री अन्न जागरूकता सेवा अभियान राशन दुकानों में गड़बड़ियों को खत्म करने के उद्देश्य से सरकार ने मुख्यमंत्री अन्न जागरूकता सेवा अभियान शुरू किया है। मंत्री ने बताया कि इसके तहत एक विशेष मोबाइल एप तैयार किया गया है। इस एप के जरिए जैसे ही राशन की गाड़ी दुकान पर पहुंचेगी, उसकी सूचना एसएमएस के माध्यम से सीधे हितग्राहियों को मिल जाएगी। इससे हितग्राही समय पर दुकान पहुंचकर राशन ले सकेंगे। इस व्यवस्था में राशन वाहन की स्थिति हितग्राही, दुकानदार और वाहन सेवा प्रदाता तीनों को दिखाई देगी, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और गड़बड़ी की गुंजाइश कम होगी। साल में दो साल ग्राम सभाओं में पढ़ी जाएगी राशन लेने वालों की लिस्ट मंत्री ने बताया कि विभाग ने पारदर्शिता बढ़ाने के लिए ग्राम सभा स्तर पर राशन वितरण का सार्वजनिक वाचन शुरू किया है। इसमें यह जानकारी दी जाएगी कि गांव में कितने लोगों को राशन मिल रहा है, कितने लोग वंचित हैं और कितने पात्र लोगों के पास अभी पात्रता पर्ची नहीं है। इससे मौके पर ही वास्तविक स्थिति सामने आएगी और शिकायतों का तुरंत समाधान संभव होगा। मंत्री ने इसे सामाजिक ऑडिट जैसा मॉडल बताया, जिससे ग्रामीण स्तर पर जवाबदेही तय होगी। ई-केवाईसी और फेस ऑथेंटिकेशन प्रदेश में राशन वितरण को व्यवस्थित करने के लिए बड़े स्तर पर ई-केवाईसी अभियान चलाया गया है। मंत्री के अनुसार अब तक 1 करोड़ 70 लाख से अधिक हितग्राहियों की ई-केवाईसी पूरी की जा चुकी है। इसके साथ ही ‘मेरा ई-केवाईसी ऐप’ के माध्यम से चेहरे के सत्यापन (फेस ऑथेंटिकेशन) की सुविधा दी गई है। 80 साल से अधिक उम्र के बुजुर्गों और दिव्यांगों को ई-केवाईसी से छूट दी गई है, ताकि वे तकनीकी कारणों से राशन से वंचित न हों। बुजुर्गों और दिव्यांगों को राशन लेने नॉमिनी की व्यवस्था कई बार अंगूठे का निशान काम न करने के कारण बुजुर्ग और दिव्यांग हितग्राही राशन नहीं ले पाते थे। इसे देखते हुए सरकार ने नॉमिनी व्यवस्था लागू की है। मंत्री ने बताया कि अब कोई भी वृद्ध या दिव्यांग व्यक्ति किसी एक व्यक्ति को नॉमिनी बना सकता है और उसी के माध्यम से उसे राशन मिलेगा। इस व्यवस्था का मकसद यह है कि कोई भी पात्र व्यक्ति तकनीकी कारणों से राशन से वंचित न रहे। 14 लाख नई राशन पात्रता पर्चियां मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया कि सरकार ने अब तक 14 लाख नई राशन पात्रता पर्चियां जारी की हैं और यह प्रक्रिया अभी भी जारी है। जो पात्र व्यक्ति अब तक योजना से छूट गए थे, वे अपनी केवाईसी पूरी कराकर राशन दुकान से पात्रता पर्ची प्राप्त कर सकते हैं। सरकार का लक्ष्य है कि सभी पात्र परिवारों को खाद्य सुरक्षा के दायरे में लाया जाए। वन नेशन-वन राशन कार्ड से प्रवासियों को राहत मंत्री ने कहा कि वन नेशन–वन राशन कार्ड योजना प्रदेश और देश दोनों के लिए बड़ी उपलब्धि साबित हुई है। पहले मध्यप्रदेश के मजदूर जब बाहर काम करने जाते थे, तो उन्हें वहां राशन नहीं मिलता था और दूसरे राज्यों से आने वाले श्रमिक यहां राशन से वंचित रहते थे। अब स्थिति बदल गई है। मंत्री के अनुसार, हर महीने करीब 39 हजार परिवार दूसरे राज्यों से आकर मध्यप्रदेश में राशन ले रहे हैं, जबकि लगभग 5 हजार परिवार मध्यप्रदेश के होकर अन्य राज्यों में रहकर नि:शुल्क राशन प्राप्त कर रहे हैं। लाड़ली बहना योजना में गैस अनुदान मंत्री ने बताया कि लाड़ली बहना और उज्ज्वला योजना के तहत बीते दो सालों में 6 करोड़ 70 लाख गैस सिलेंडर रिफिल कराए गए हैं। इसके लिए 911 करोड़ रुपए का अनुदान राज्य सरकार ने दिया है। सरकार का वादा है कि लाड़ली बहनों को 450 रुपए में गैस सिलेंडर उपलब्ध कराया जाएगा और शेष राशि सरकार अनुदान के रूप में वहन कर रही है। शहरी क्षेत्रों में पाइपलाइन गैस योजना प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में घर-घर पाइपलाइन के जरिए गैस पहुंचाने का काम किया जा रहा है। मंत्री ने स्वीकार किया … Read more

ग्रीन कैंपस की ओर कदम: बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी में IIT मॉडल पर शुरू हुए ई-रिक्शे

भोपाल  बरकतउल्ला विश्वविद्यालय (बीयू) परिसर को आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। ग्रीन कैंपस अभियान के तहत विश्वविद्यालय को 5 ई-रिक्शे मिले हैं, जिनसे अब कैंपस के भीतर आवाजाही आसान, सस्ती और प्रदूषण मुक्त होगी। विश्वविद्यालय प्रशासन का लक्ष्य बीयू परिसर को आईआईटी की तर्ज पर विकसित करना है, जहां हरित परिवहन को प्राथमिकता दी जाए। अब तक छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों को परिसर के भीतर लंबी दूरी तय करने के लिए निजी वाहनों या ऑटो पर निर्भर रहना पड़ता था। इससे न सिर्फ ईंधन की खपत बढ़ती थी, बल्कि प्रदूषण भी। ई-रिक्शा संचालन शुरू होने से कार्बन उत्सर्जन घटेगा और कैंपस में सुरक्षित व सुविधाजनक परिवहन विकल्प उपलब्ध होगा। एसबीआई का सहयोग, सीएसआर से मिली सौगात कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी (सीएसआर) के तहत स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने बीयू को 5 ई-रिक्शे उपलब्ध कराए।  एसबीआई के महाप्रबंधक कुंदन ज्योति ने कुलगुरु प्रोफेसर एस.के. जैन को ई-रिक्शों की चाबियां सौंपीं। इस मौके पर कुल सचिव डॉ. अनिल शर्मा, डीजीएम साई कृष्णश्रीधर, फाइनेंस कंट्रोलर सगीरा सिद्दीकी और एसबीआई शाखा प्रबंधक पूजा गोयल भी मौजूद रहीं। साइकिल संस्कृति को भी मिलेगा बढ़ावा यह भी घोषणा की गई कि परिसर को और हरित बनाने के लिए विश्वविद्यालय को 15 साइकिलें दी जाएंगी। कुलगुरु प्रोफेसर एस.के. जैन ने बताया कि आने वाले समय में अलग–अलग विभागों में साइकिल उपलब्ध कराई जाएंगी, ताकि छात्र और कर्मचारी छोटी दूरी के लिए साइकिल का उपयोग कर सकें। ग्रीन कैंपस की ओर मजबूत कदम ई-रिक्शा और साइकिल के जरिए बीयू प्रशासन न केवल परिवहन व्यवस्था सुधार रहा है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और स्वस्थ जीवनशैली को भी बढ़ावा दे रहा है। यह पहल विश्वविद्यालय को आईआईटी जैसे आधुनिक, स्वच्छ और हरित शैक्षणिक परिसरों की कतार में खड़ा करने की दिशा में अहम मानी जा रही है।  

आतंकी साजिश की आशंका से पंजाब में हड़कंप, इनपुट मिलते ही एजेंसियां सतर्क

गुरदासपुर  एक वरिष्ठ राज्य पुलिस अधिकारी ने कहा कि मिलिट्री इंटैलिजैंस (एम.आई) से एक अलर्ट मिला है कि पाकिस्तान की गुप्तचर एजैंसी समर्थित दुश्मन तत्व पाकिस्तान से भारतीय पंजाब में घुसने और सैन्य ठिकानों पर आतंकवादी हमला करने की कोशिश कर सकते हैं। जानकारी के अनुसार पाकिस्तान के साथ अंतरर्राष्ट्रीय सीमा से पठानकोट और आसपास के इलाकों की ओर जाने वाली सड़कों पर विशेष चैक पॉइंट बनाए गए हैं और इलाके में अतिरिक्त बल भी भेजा गया है। खुफिया एजैंसियों ने मंगलवार को पंजाब में पाकिस्तान की आई.एस.आई. द्वारा अंतरराष्ट्रीय सीमा पार से संभावित घुसपैठ की कोशिश को लेकर अलर्ट जारी किया, जिसके बाद पंजाब पुलिस ने सुरक्षा तैयारियों को बढ़ा दिया है। अधिकारी ने कहा, तदनुसार हमने अपनी अलर्ट की स्थिति बढ़ा दी है और इन इनपुट को गंभीरता से ले रहे हैं। अधिकारी ने कहा, बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (बी.एस.एफ.) और पंजाब पुलिस पंजाब में किसी भी तरह की गड़बड़ी की कोशिश को नाकाम करने के इन प्रयासों में समन्वय कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि 27 जुलाई, 2015 को भारतीय सेना की वर्दी पहने 3 भारी हथियारों से लैस आतंकवादी पाकिस्तान से गुरदासपुर जिले में घुस आए थे। कहा जाता है कि वह रावी नदी सीमा के पास से घुसे थे। उन्होंने सुबह करीब 5.30 बजे एक कार को हाईजैक करके, सडक़ किनारे एक विक्रेता पर गोलीबारी करके, चलती पंजाब रोडवेज बस पर हमला कर यात्रियों को घायल किया। फिर दीनानगर पुलिस स्टेशन पर धावा बोलकर अपना हमला शुरू किया। उन्होंने अमृतसर-पठानकोट लाइन पर पास के एक रेलवे ट्रैक पर पांच बम भी लगाए थे, जिन्हें बाद में डिफ्यूज कर दिया गया। इस हमले में तीन आम नागरिकों और चार पुलिस कर्मियों समेत सात लोग मारे गए। पंजाब पुलिस ने तब सेना की मदद से करीब 120 घंटे तक चले गनफाइट के बाद तीनों आतंकवादियों को मार गिराया। इसी तरह 2 जनवरी, 2016 को, जैश-ए-मोहम्मद के भारी हथियारों से लैस आतंकवादी, जो आर्मी की वर्दी पहने हुए थे, पठानकोट में इंडियन एयर फोर्स बेस की बाउंड्री में घुस गए। उन्होंने रास्ते में एक पंजाब पुलिस के एस.पी. रैंक के अधिकारी की गाड़ी अगवा कर ली। गनफाइट कई दिनों तक चली, और सर्च ऑपरेशन 5 जनवरी तक जारी रहा। सफाई अभियान के दौरान एक हुए ब्लास्ट में एक सैनिक अधिकारी सहित सात भारतीय सुरक्षाकर्मी मारे गए। तक सभी आतंकवादियों को मार गिराया गया।

नशे के कारोबार पर करारा प्रहार, पुलिस ने बरामद की चरस, लाखों की नकदी और हथियार

मनेर पटना जिले के मनेर थाना क्षेत्र में ड्रग्स कारोबार के खिलाफ पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए ड्रग्स माफियाओं के कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की है। गुप्त सूचना के आधार पर दानापुर डीएसपी-2 अमरेंद्र कुमार झा के नेतृत्व में मनेर पुलिस ने मनेर सरकारी अस्पताल मोड़ के पास ड्रग्स माफियाओं के तीन से चार घरों में छापा मारकर भारी मात्रा में मादक पदार्थ, नकदी और हथियार बरामद किए हैं। पुलिस की इस कार्रवाई में करीब 500 ग्राम ड्रग्स, 500 ग्राम चरस, एक देसी कट्टा, कुछ मैगजीन, लगभग 12 लाख रुपये नकद, इसके अलावा सोने-चांदी के गहने बरामद किए गए हैं। छापेमारी के दौरान एक महिला समेत कुल पांच लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया है और उनसे गहन पूछताछ की जा रही है। जानकारी के अनुसार, मनेर नगर परिषद क्षेत्र के मनेर सरकारी अस्पताल मोड़ के पास स्थित एक चाय दुकान में ड्रग्स कारोबार की सूचना मिलने पर पुलिस ने विशेष रूप से कार्रवाई की। चाय दुकानदार से जुड़े कई घरों में पुलिस टीम ने घंटों तक तलाशी अभियान चलाया और घर के सामानों को बारीकी से खंगाला। इस दौरान अलग-अलग घरों से मादक पदार्थों के साथ कुछ शराब, हथियार और कीमती सामान भी बरामद किए गए। पुलिस ने जिन लोगों को हिरासत में लिया है, उनमें बस्ती रोड निवासी पवन कुमार का पुत्र वीरू कुमार, अस्पताल मोड़ निवासी शुभभ गुप्ता, एक महिला ड्रग्स कारोबारी समेत कुल पांच लोग शामिल हैं। सभी से पूछताछ के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। मामले की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचे पश्चिमी सिटी एसपी भानु प्रताप सिंह ने ड्रग्स माफियाओं से खुद भी मामले को लेकर विस्तृत पूछताछ की। सिटी एसपी पश्चिम भानु प्रताप सिंह ने बताया कि छापेमारी में मादक पदार्थों के साथ बड़ी मात्रा में नकदी बरामद हुई है। पूरे नेटवर्क का खुलासा करने के लिए एक विशेष टीम गठित कर आगे भी छापेमारी की जा रही है। उन्होंने बताया कि फिलहाल महिला समेत करीब पांच लोगों को हिरासत में लिया गया है और मामले की गहन जांच जारी है।  

पेसा एक्ट को दी हरी झंडी, रांची में आदिवासी समुदाय में उल्लास का माहौल

रांची झारखंड में पेसा नियमावली लागू होने की खुशी में रांची के अल्बर्ट एक्का चौक पर आदिवासी-मूलवासी समाज की ओर से भव्य जश्न मनाया गया। सैकड़ों की संख्या में जुटे लोगों ने राज्य सरकार के इस ऐतिहासिक फैसले का स्वागत करते हुए उत्साहपूर्वक खुशी जाहिर की। केंद्रीय सरना समिति के नेतृत्व में कार्यक्रम के दौरान पटाखे फोड़े गए, एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर बधाइयां दी गईं और नारेबाजी के साथ उत्सव मनाया गया। मौके पर मौजूद लोगों ने इस फैसले को आदिवासी समाज के अधिकारों की दिशा में मील का पत्थर बताया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अजय तिर्की ने कहा कि पेसा नियमावली आदिवासी स्वशासन, आत्मनिर्भरता और अधिकारों की मजबूत रीढ़ है। उन्होंने कहा कि इस नियमावली के तहत ग्रामसभा को सर्वोच्च निर्णयकारी संस्था का दर्जा दिया गया है, जिससे अब गांव से जुड़े विकास कार्य, योजनाएं और नियम ग्रामसभा की सहमति से ही लागू होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि जल, जंगल, जमीन, खनिज एवं अन्य प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा और उपयोग का अधिकार ग्रामसभा को मिलना आदिवासी समाज के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है। इससे आदिवासी समुदाय को अपने संसाधनों और भविष्य पर अधिकार मिलेगा लक्ष्मी नारायण मुंडा ने राज्य सरकार के इस फैसले को सराहनीय बताते हुए कहा कि इससे आदिवासी समुदाय को अपने संसाधनों और भविष्य पर अधिकार मिलेगा। इस अवसर पर विजय कच्छप, प्रकाश हंस, अनिल पुरती, कृष्णा लोहरा, संजय लोहरा, श्यामलाल, गौतम उरांव, अजय कच्छप, बाहा उरांव, कृष्णा मुंडा, डब्लू कच्छप, माना, अशोक कच्छप, पुष्पा कुमारी सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।