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निजी स्कूलों के लिए राहत, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मनमानी फीस वसूली के खिलाफ फीस वापसी आदेश निरस्त किया

जबलपुर  मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से प्राइवेट स्कूलों के प्रबंधकों को मनमानी फीस वसूली के मामले में हाईकोर्ट से राहत मिली है। हाईकोर्ट जस्टिस विवेक रूसिया तथा जस्टिस प्रदीप मित्तल ने अपने आदेश में कहा है कि राज्य के अधिकारियों ने बहुत ही खराब माहौल में काम किया और अपनी शक्तियों का गलत इस्तेमाल किया। दो दर्जन से अधिक प्राइवेट स्कूल संचालकों ने मनमानी फीस वसूली के खिलाफ प्रकरण दर्ज किये जाने को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। अपील दायर करने वाले अधिकांश स्कूल मिशनरी संस्थाओं के द्वारा संचालित किये जा रहे थे। अपील में मध्य प्रदेश निजी विद्यालय (फीस तथा संबंधित विषयों का विनियमन) अधिनियम, 2017 (जिसे आगे एक्ट कहा जाएगा) के सेक्शन 11 और मध्य प्रदेश निजी विद्यालय (फीस तथा संबंधित विषयों का विनियमन) नियम के तहत फीस वापस लौटाने के आदेश जारी किये जाने को चुनौती दी गई थी। अपील में कहा गया था कि राज्य की गाइडलाइन का कथित तौर पर उल्लंघन करने का आरोप में जिला प्रशासन की शिकायत पर पुलिस ने स्कूल प्रबंधन से जुडे व्यक्तियों तथा प्राचार्य पर प्रकरण दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार भी किया था। अपीलकर्ताओं की तरफ से तर्क दिया गया कि एक्ट के सेक्शन 11 के तहत अंतरिम सुरक्षा देने का कोई अधिकार नहीं है। एक्ट में प्रावधान नहीं होने के बावजूद भी साल 2017-18 के बाद से जमा की गई फीस वापस करने आदेश जारी किये गये हैं। युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि अधिकारियों ने बहुत खराब माहौल में और अपनी पावर का इस्तेमाल करते हुए अपने अधिकार से बाहर काम किया। राज्य के अधिकारियों का कार्य स्कूलों के मैनेजमेंट में दखलंदाज़ी के बराबर है। स्टूडेंट्स की फीस वापस करने का राज्य सरकार का निर्देश टिकने लायक नहीं है। अधिकारी आरोपों को साबित करने में नाकाम रहे। अधिकारियों के पास फीस तय करने और अलग-अलग निर्देश जारी करने का अधिकार नहीं है, जो स्कूल चलाने वाले मैनेजमेंट या सोसाइटी के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। जिस तरह से लोकल एडमिनिस्ट्रेशन ने पूरे मामले को हैंडल किया, उससे स्कूल मैनेजमेंट और पैरेंट्स के बीच अनबन और मतभेद पैदा हो गए, जो स्टूडेंट्स की पढ़ाई और करियर के लिए अच्छा नहीं है। इस मामले को 2017 के एक्ट और 2020 के रूल्स के तहत सही तरीके से हैंडल किया जा सकता था। युगलपीठ ने फीस वापस करने के आदेश को निरस्त करते हुए अपीलकर्ता स्कूलों को राहत प्रदान की। 

प्रदेश में शीतलहर और कोहरे का कहर, ग्वालियर, रीवा में 50 मीटर दृश्यता, भोपाल में शीतलहर जारी

भोपाल  मध्य प्रदेश में जारी शीतलहर के बीच लगभग आधे राज्य में घने कोहरे ने अपनी चपेट में ले लिया है। शीतलहर के साथ कोहरा इतना घना है कि, मौसम विभाग ने सूबे के 22 जिलों में अलर्ट जारी कर दिया है। हालात ये हैं कि, कई जिलों में यातायात बुरी तरह से प्रभावित हो गए हैं। इनमें सड़क परिवहन के साथ साथ रेल सेवा भी शामिल है। प्रदेश के 25 से अधिक जिलों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री से नीचे दर्ज किया जा रहा है। इनमें मुख्य रूप से रीवा में 5.5 डिग्री, राजधानी भोपाल में 5.8 डिग्री, इंदौर में 6.6 डिग्री, बैतूल में भी 5.8 डिग्री। उमरिया में 7 डिग्री, रायसेन में 7.6, मलाजखंड-नौगांव में 7.8, खजुराहो में 8.1, नरसिंहपुर में 8.2, दमोह-मंडला में 8.5, छिंदवाड़ा में 8.6, टीकमगढ़ में 8.9, ग्वालियर में 9.1, उज्जैन में 9.3, जबलपुर में 9.4, सतना में 9.6 और गुना में 9.9 डिग्री तापमान रहा। मंगलवार सुबह के लिए ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज और सीधी में घने कोहरे का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। यानी, इन जिलों में 50 मीटर दूर देखना भी मुश्किल रहेगा। वहीं, भोपाल, विदिशा, सागर, दमोह, जबलपुर, कटनी, मैहर, उमरिया, शहडोल और सिंगरौली में कोहरे का येलो अलर्ट है। यहां 1 से 2 हजार मीटर विजिबिलिटी रहेगी। इससे पहले सोमवार सुबह रीवा, मुरैना-रायसेन में इतना कोहरा था कि 50 मीटर के बाद कुछ नहीं दिखा। भोपाल में 500 से 1 हजार मीटर तक विजिबिलिटी दर्ज की गई। दिनभर कोहरा छाया रहा। दोपहर में भी यह स्थिति थी कि 2-ढाई किलोमीटर बाद कुछ नहीं दिखाई दे रहा है। ठंड के सीजन की यह पहली सुबह रही, जब घना कोहरा छाया हो। कोहरे का सबसे ज्यादा असर रीवा में रहा। छतरपुर के खजुराहो में 50 से 200 मीटर, भोपाल, ग्वालियर, दतिया और सीधी में 500 से 1 हजार मीटर, इंदौर, नर्मदापुरम, सागर, रतलाम, दमोह और मंडला में 1-2 हजार मीटर दृश्यता रही। अशोकनगर, पचमढ़ी, टीकमगढ़, विदिशा, शाजापुर, सीहोर, देवास में भी कोहरे वाली सुबह रही। दूसरी ओर, तापमान में भी खासी गिरावट देखी गई। प्रदेश के 5 बड़े शहरों की बात करें तो सोमवार की रात में भोपाल में सबसे कम 5.8 डिग्री, इंदौर में 6.6 डिग्री, ग्वालियर में 9.1 डिग्री, उज्जैन में 9.3 डिग्री और जबलपुर में पारा 9.4 डिग्री रहा। प्रदेश में सबसे ठंडे पचमढ़ी और राजगढ़ रहे। यहां तापमान 5.4 डिग्री दर्ज किया गया। बैतूल में 5.8 डिग्री, उमरिया में 7 डिग्री, रीवा में 7.5 डिग्री, रायसेन में 7.6 डिग्री, मलाजखंड-नौगांव में 7.8 डिग्री, खजुराहो में 8.1 डिग्री, नरसिंहपुर में 8.2 डिग्री, दमोह-मंडला में 8.5 डिग्री, छिंदवाड़ा में 8.6 डिग्री, टीकमगढ़ में 8.9 डिग्री, सतना में 9.6 डिग्री और गुना में तापमान 9.9 डिग्री रहा। कड़ाके की ठंड बढ़ने की संभावना मौसम विशेषज्ञ अजय शुक्ला ने बताया कि उत्तर भारत के पहाड़ों में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। वहां से आ रही सर्द हवाओं के साथ ही इस बार राजस्थान की तरफ से भी शुष्क एवं सर्द हवाएं लगातार चल रही हैं। इस वजह से प्रदेश में ठंड के तीखे तेवर बरकरार हैं। वर्तमान में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ कमजोर प्रकृति के हैं। इस वजह से मौसम का इस तरह का मिजाज अभी बना रहने की संभावना है।

सिद्धू मूसेवाला के बदले की आग में कबड्डी प्लेयर की हत्या, मोहाली में घटी खौफनाक वारदात

मोहाली  मोहाली के गांव सोहाना में कबड्डी टूर्नामेंट के दौरान प्रमोटर व खिलाड़ी दिग्विजय सिंह उर्फ राणा बलाचौरिया की सिर में गोलियां मारकर हत्या कर दी गई। पंजाब के कुख्यात बंबीहा गैंग ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर हत्या की जिम्मेदारी ली है और कहा है कि सिद्धू मूसेवाला की हत्या का बदला लेने के लिए यह मर्डर किया गया है। राणा बलाचौरिया मूलरूप से वह पंजाब के बलाचौर के रहने वाले थे, लेकिन कुछ समय से मोहाली में ही रह रहे थे। दस दिन पहले ही उनकी शादी हुई थी। आज उनके शव का पोस्टमॉर्टम करवाया जाएगा। सेल्फी लेने के बहाने आए और सिर में गोलियां मार दीं सोमवार शाम को सोहाना में सेक्टर-82 के मैदान में कबड्डी टूर्नामेंट चल रहा था। राणा बलाचौरिया जालंधर के शकरपुर की टीम के मैनेजर थे। वह टूर्नामेंट में दो टीमें लेकर आए थे। वह ग्राउंड में सेमीफाइनल मैच की टाई डलवाने के बाद बाहर आ रहे थे। इसी दौरान हमलावर ने उनके साथ सेल्फी लेने के बहाने नजदीक आए और सिर में गोलियां मार दीं। हमलावर 3 से 4 थे। हमले के बाद बाइक से कुछ लोगों को फरार होते देखा गया वहीं, कुछ लोगों का कहना है कि हमलावर बोलेरो गाड़ी से आए थे। मोहाली के एसपी हरमनदीप सिंह हंस ने बताया कि इसकी बंबीहा गैंग के साथ रंजिश थी। इसकी बंबीहा गैंग के लक्की पटियाल से कोई झगड़ा था। हालांकि, अभी सारे एंगल से पूरे मामले की जांच की जा रही है। एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स, सीआईए की टीमें और मोहाली पुलिस की टीमें जांच कर रही हैं। पुलिस सोहाना के आसपास के एरिया में सीसीटीवी कैमरे चेक कर रही है। साइबर सेल इंटरनेट पर डाली गई पोस्ट के जरिए आईपी एड्रेस ट्रेस करने के प्रयास में है। हमने अपने भाई सिद्धू मूसेवाला की हत्या का बदला लिया बंबीहा गैंग ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर हत्या की जिम्मेदारी ली है। पोस्ट में लिखा है कि आज जो मोहाली में कबड्डी कप में राणा बलाचौरिया का कत्ल हुआ है, उसकी जिम्मेदारी मैं डोनीबल, शगनप्रीत, मोहब्बत रंधावा, अमर खब्बे, प्रभदासुवाल और कौशल चौधरी लेते हैं। राणा हमारे एंटी जग्गू और लॉरेंस के साथ दोस्ती रखता था। इसने सिद्धू मूसेवाला के कातिल को रहने के लिए जगह दिलवाई थी और खुद उन्हें संभाला था। आज राणा को मारकर हमने अपने भाई सिद्धू मूसेवाला की हत्या का बदला लिया। यह काम हमारे भाई मक्खन अमृतसर और डिफॉल्टर करण ने किया है। बाकी आज से सभी प्लेयरों और उनके माता-पिता को एक विनती है कि कोई भी जग्गू और हैरी की टीम में न खेले। वर्ना रिजल्ट ऐसे ही मिलेगा। हमें कबड्‌डी से कोई एलर्जी नहीं। बस जग्गू और हैरी की कबड्‌डी में कोई दखल अंदाजी नहीं चाहिए। वेट एंड वॉच। पोस्ट के लास्ट में गोपी घनश्यामपुरिया ग्रुप, मंघनश्यामपुर, दविंदर बंबीहा ग्रुप, पवन शकील, राणा बाई, आफरीदी तूत, मनजोत सिद्धू एचआर और राणा कंदोवाल के नाम लिखे हैं।

सरकारी नौकरी में बदलाव: ‘स्थाई-अस्थाई’ का भेद मिटेगा, 2 बड़े फायदे होंगे कर्मचारियों को

भोपाल मध्यप्रदेश में जल्द ही शासकीय सेवकों के बीच 50 साल पुराना एक और भेद खत्म होने वाला है। यह नियमित शासकीय सेवाओं में स्थाई और अस्थाई पदों का है, जो मध्यप्रदेश के गठन के साथ ही विभागों के लिए तैयार किए जाने वाले मैनपावर के ढांचे की रचना के समय पैदा हुआ था। तब नए विभाग और नए पद सृजित किए गए थे। सभी नियमित पद थे, लेकिन तत्कालीन सरकार ने एक समान वेतन, भत्तों और सुविधाओं के बावजूद स्थाई और अस्थाई की श्रेणी में बांट दिया था। तभी से दोनों श्रेणियों में भर्तियां होती रहीं, लेकिन जो शासकीय सेवक अस्थाई पदों पर सेवा देते आ रहे हैं, उन्हें कई कानूनी अड़चनों का सामना करना पड़ रहा है। कानूनी अड़चनों का सामना वर्तमान में 7.50 लाख से ज्यादा कुल नियमित पद हैं। इनमें 2 से 5 फीसदी अस्थाई हैं। इस वजह से विभागों को नियंत्रण और प्रबंधन में कई मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है तो नियमित श्रेणी के अस्थाई पदों पर भर्ती होकर सेवा कर रहे अधिकारी, कर्मचारियों को भी कानूनी अड़चनों का सामना करना पड़ रहा है। सूत्रों के मुताबिक यह अहम प्रस्ताव मंगलवार को कैबिनेट बैठक में रखा जा सकता है। सब ठीक रहा तो मंजूरी मिल सकती है। एक जानकारी के अनुसार मंत्रालय सेवा में सहायक अनुभाग अधिकारी 338 हैं। इनमें 284 स्थाई और 54 अस्थाई है। सहायक ग्रेड-2 के 335 पद में 307 स्थाई व 28 अस्थाई हैं। सहायक ग्रेड-3 के कुल 602 पदों में से 534 स्थाई और 68 अस्थाई हैं। वन विभाग की वन सेवा के तहत वन क्षेत्रपाल के कुल 1194 पदों में से 1192 स्थाई और 02 अस्थाई है। इसी तरह दूसरे विभागों में भी है। अस्थाई पद वालों को होंगे ये दो बड़े लाभ -ऐसे शासकीय सेवक यदि दूसरी सेवाओं में चयनित होकर काम करना चाहेंगे और तीन वर्ष की अवधि पूरी होने के बाद पुरानी सेवा में वापस आना चाहेंगे तो आ सकेंगे। अभी इन्हें, इसकी पात्रता नहीं है। -कई बार राज्य व केंद्र के सार्वजनिक उपक्रमों को अनुभवी मैनपावर की जरुरत होती है, वे भर्ती के लिए अधिसूचना जारी करते हैं, जिसमें स्पष्ट उल्लेख होता है कि 3 से 5 साल की नियमित सेवा पूरी कर चुके अभ्यार्थी ही उपक्रमों की भर्ती प्रक्रिया में शामिल हो सकेंगे। अभी अस्थाई पदों पर सेवा देने वाले सेवक इन उपक्रमों में शामिल नहीं हो सकते, जिन्हें स्थायी पदों पर संविलियन करने से यह बाधा दूर होगी। कार्यभारित पदों पर भी होना है निर्णय मंत्रालय समेत प्रदेश में कई विभागों के अंदर कार्यभारित पद भी है, जिन पर शासकीय सेवकों की नियमित भर्ती होती आ रही है। ये पद भी नियमित के समान ही है। सामान्य प्रशासन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि इन पदों पर भी निर्णय होना है। बता दें कि नियमित श्रेणी में अस्थाई पद सबसे ज्यादा मंत्रालय सेवा के अलावा सामान्य प्रशासन विभाग, वित्त विभाग, गृह विभाग समेत लगभग सभी विभागों में हैं। जहां बड़ी संख्या में अस्थाई कर्मचारी सेवा दे रहे हैं। भेद खत्म होने से किस पर क्या पड़ेगा असर सरकार     सेवाओं के प्रबंधन व शासकीय सेवकों पर नियंत्रण में और अधिक मदद मिलेगी। अनावश्यक आदेश-निर्देश की जरुरत नहीं पड़ेगी।     अस्थाई पद: ऐसे जितने भी पद हैं वे धीरेधीरे खत्म होंगे, उन पर कार्यरत शासकीय सेवकों के सेवानिवृत होने के बाद उन पर भर्ती नहीं होंगी। इन पदों को नियमित पदों में शामिल किया जाएगा।     अस्थाई पदों पर सेवारत शासकीय सेवक: ये पूर्व की तरह सेवा में बने रहेंगे। विभाग चाहे तो नियमों में संशोधन कर इन्हें स्थाई श्रेणी में ला सकेंगे।

सीएम डॉ. मोहन यादव ने किया संबल योजना के तहत 160 करोड़ रुपए ट्रांसफर करने का ऐलान, सीधे हितग्राहियों के खातों में

भोपाल   एमपी सीएम डॉ. मोहन यादव आज मंगलवार 16 दिसंबर को राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी संबल योजना के तहत हितग्राहियों को बड़ी राहत देने जा रहे हैं। एक सिंगल क्लिक के माध्यम से वे 7 हजार 227 प्रकरणों में कुल 160 करोड़ रुपए की अनुग्रह सहायता राशि सीधे हितग्राहियों के खातों में ट्रांसफर करेंगे। यह कार्यक्रम राजधानी भोपाल में आयोजित किया जा रहा है। इसमें पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल भी विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे। क्या है संबल योजना दरअसल संबल योजना के तहत दी जाने वाली यह अनुग्रह सहायता असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले श्रमिकों और उनके परिवारों के लिए आर्थिक संबल बनेगी। दुर्घटना, असामयिक मृत्यु या अन्य आपात परिस्थितियों में यह सहायता राशि परिवारों को तात्कालिक सहारा देती है। सरकार का कहना है कि इस योजना का उद्देश्य सिर्फ आर्थिक मदद नहीं, बल्कि संकट के समय परिवारों को आत्मनिर्भर बनाना भी है। सीएम का बड़ा संदेश कार्यक्रम के दौरान सीएम मोहन यादव प्रदेश सरकार की अन्य जनहितैषी योजनाओं की जानकारी भी लोगों तक पहुंचाएंगे। इसमें श्रमिक कल्याण, ग्रामीण विकास, रोजगार सृजन और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं की जानकारी प्रमुख रहेंगी। यही नहीं सीएम यह भी संदेश देंगे कि सरकार समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। पारदर्शिता हो रही मजबूत राज्य सरकार लगातार डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से पारदर्शिता लाते हुए सरकारी व्यवस्थाओं को मजबूत कर रही है, ताकि किसी भी स्तर पर बिचौलियों की भूमिका खत्म हो और लाभ सीधे पात्र हितग्राही तक पहुंचे। संबल योजना के तहत होने वाला यह बड़ा भुगतान इसी दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। सरकार का बड़ा दावा सरकार का दावा है कि आने वाले समय में भी ऐसी योजनाओं के जरिए श्रमिकों और जरूरतमंद परिवारों को निरंतर राहत दी जाती रहेगी।

यमुना एक्सप्रेसवे पर कुहासा का कहर: 5 बसों और कारों में आग, मथुरा, उन्नाव और बस्ती में भिड़ीं वाहन

 मथुरा यूपी के कई जिलों में कोहरे का कहर देखने को मिला. मथुरा में यमुना एक्सप्रेसवे पर कई गाड़ियां आपस में टकरा गईं जिसमें जनहानि हुई. वहीं, उन्नाव में एक तेज रफ्तार फॉर्च्यूनर डिवाइडर से टकराने के बाद पलट गई. इस हादसे में चार लोगों की जान चली गई. इसी तरह बस्ती, बागपत आदि जिलों में भी सड़क हादसे हुए हैं.    टायर फटने से फॉर्च्यूनर बेकाबू, 4 की दर्दनाक मौत उन्नाव में आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर मंगलवार सुबह करीब 5 बजे एक दर्दनाक हादसा हुआ. एक्सप्रेसवे के किलोमीटर 241 (हवाई पट्टी के पास) पर तेज रफ्तार फॉर्च्यूनर कार का टायर फट गया. अनियंत्रित कार पहले एक अज्ञात वाहन से टकराई और फिर डिवाइडर से जा भिड़ी. इस भीषण टक्कर में कार सवार चार लोगों की मौके पर ही मौत हो गई. मृतकों में गाज़ियाबाद निवासी अशोक अग्रवाल और अभिनव अग्रवाल की पहचान हुई है. जबकि, अन्य मृतकों की शिनाख्त नहीं हो पाई है. पुलिस ने क्रेन की मदद से गाड़ी को एक्सप्रेसवे से हटवा दिया है. ट्रैफिक बाधित नहीं हुआ है.  यमुना एक्सप्रेस वे पर आगरा से मथुरा की ओर आने वाले रास्ते पर माइलस्टोन 127 के निकट मंगलवार सुबह करीब 4:30 बजे कोहरे के कारण 5 बस और एक कार भिड़ गईं। घटना के बाद इन सभी वाहनों में आग लग गई। इस घटना में 10 लोगों की मौत हो गई। जबकी 50 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं और एक व्यक्ति झुलस गया है। वाहनों में अंदर भी कुछ व्यक्ति फंसे होने की आशंका जताई जा रही है। घटना की जानकारी मिलने पर जिलाधिकारी सीपी सिंह और एसएसपी श्लोक कुमार मौके पर पहुंच गए। जानकारी के अनुसार यह बसें प्राइवेट हैं और कानपुर से दिल्ली की ओर जा रही थी। जिलाधिकारी सीपी सिंह और एसएसपी श्लोक कुमार ने बताया की इस भिड़ंत में 21 लोग घायल हुए हैं और एक व्यक्ति झुलसी अवस्था में अस्पताल भेजा है। इनमें से 38 लोग जिला अस्पताल भेजे हैं, नौ लोग सीएचसी बलदेव में इलाज करा रहे हैं। बस में अंदर कोई जला है या नहीं, यह जानकारी की जा रही है। वाहनों में आग इतनी भीषण लगी कि दूर-दूर तक आग की लपटें देखी जा रही थीं। इन वाहनों में आग लगने के कारण यमुना एक्सप्रेस वे पर आगरा से मथुरा की ओर का यातायात रुक गया। हादसे में आग इतनी भीषण थी कि कई शव पूरी तरह झुलस गए और लाशें लोथड़ों में बदल गईं। पोस्टमार्टम के लिए शवों को गठरी बांधकर भेजा गया। उधर, सूचना पर पहुंची पुलिस ने इस और आ रहे वाहनों को पहले ही रुकवा दिया। घटना की जानकारी मिलने पर दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंच गईं और आग बुझाने के प्रयास शुरू हो गए। कई एंबुलेंस मौके पर पहुंच गईं, जिनके द्वारा घायलों को अस्पताल भेजा जाने लगा। मृतक के परिजनों को मिलेगा 2-2 लाख का मुआवजा वहीं, इस मामले में जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह ने बताया कि यमुना एक्सप्रेसवे के 127 मील के निशान के पास एक दर्दनाक हादसा हुआ। इसमें 5 बसें और 2 कारें आपस में टकरा गईं और उनमें आग लग गई। इस हादसे में कई लोग घायल हुए और 10 लोगों की मौत हो गई। मुख्यमंत्री ने तुरंत घटना का संज्ञान लिया और रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए मौके पर अधिकारियों को भेजा। सीएम योगी ने मृतकों के परिवारों को 2-2 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया है। जबकि घायलों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक मदद दी जाएगी। इसके अलावा रोडवेज ने भी मुआवजा का ऐलान किया है। रोडवेज बस के मृतकों के परिजनों को रोडवेज 5-5 लाख रुपये मिलेगा।

वृंदावन: बांके बिहारी मंदिर में पहली बार नहीं हुआ ठाकुर जी का भोग, हलवाई को नहीं मिली सैलरी

 मथुरा वृंदावन में बांके बिहारी मंदिर में पहली बार ठाकुर जी को बाल और शयन भोग नहीं लगा. हलवाई को भुगतान न होने के कारण भोग तैयार नहीं किया गया और कई सालों से चली आ रही भोग लगाने की परंपरा टूट गई. इसे लेकर मंदिर के गोस्वामियों में आक्रोश है. वहीं हाई पावर कमेटी अपना पल्ला झाड़ने में लगी है. वृंदावन के श्री ठाकुर बांके बिहारी मंदिर में हर रोज लाखों श्रद्धालु देश-विदेश से आते हैं. सोमवार को ठाकुर जी बिना भोग के ही भक्तों को दर्शन दिए. ठाकुर जी के लिए सुबह बाल भोग और शाम को शयन भोग दिया जाता है. लेकिन आज दोनों ही भोग ठाकुर जी को नहीं लगा. हलवाई ने नहीं तैयार किया भोग श्री ठाकुर बांके बिहारी मंदिर की व्यवस्थाओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने हाई पावर कमेटी का गठन किया है. उसी के अंतर्गत ठाकुर जी के लिए प्रसाद और भोग की सामग्री तैयार करने के लिए हलवाई नियुक्त किया गया है. प्रतिमाह हलवाई को अस्सी हजार रुपये वेतन दिया जाता है, लेकिन कुछ महीनों से हलवाई को वेतन नहीं दिया जा रहा था. जिसके कारण हलवाई ने ठाकुर जी के लिए बाल भोग और शयन भोग तैयार नहीं किया. ठाकुर जी को चार बार लगता है भोग मंदिर के गोस्वामी ने बताया, श्री ठाकुर बांके बिहारी का भोग तैयार करने की जिम्मेदारी मयंक गुप्ता नाम के व्यक्ति के पास है. मयंक हलवाई के माध्यम से ठाकुर जी के लिए सुबह बाल भोग, दोपहर में राजभोग और शाम को उत्थापन भोग और रात्रि में शयव भोग लगाया जाता है. हलवाई द्वारा तैयार किया गया भोग ठाकुर जी को अर्पण किया जाता है. लेकिन आज सेवायतों को भोग नहीं मिला. कमेटी के सदस्य दिनेश गोस्वामी ने बताया, सोमवार को मंदिर परिसर में ठाकुर जी के लिए बाल भोग और शाम को शयन भोग नहीं मिलने की जानकारी मिली थी. मयंक गुप्ता से पूछा गया तो बताया कि हलवाई का भुगतान न होने के कारण भोग तैयार नहीं किया गया. जल्द ही मयंक गुप्ता को भुगतान करने के आदेश दिए गए हैं और इस तरह की घटना की दोबारा पुनरावृत्ति ना हो उसके लिए आदेश कमेटी द्वारा दिया जा रहा है.

मध्यप्रदेश विधानसभा का विशेष सत्र 17 दिसंबर को, ‘विकसित और आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश’ के विज़न पर चर्चा

विकसित, आत्मनिर्भर और समृद्ध मध्यप्रदेश के विज़न पर मध्यप्रदेश विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र 17 दिसम्बर को राज्यपाल पटेल करेंगे विधानसभा की सात दशक की यात्रा एवं मध्यप्रदेश सरकार के दो वर्ष के कार्यों पर केन्द्रित प्रदर्शनी का शुभारंभ भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार की दो वर्ष की ऐतिहासिक उपलब्ध‍ियों पर विधान सभा का एक दिवसीय विशेष सत्र 17 दिसम्बर को आयोजित किया जा रहा है। इस अवसर पर विधानसभा में मध्यप्रदेश विधानसभा की 7 दशक की यात्रा एवं मध्‍यप्रदेश सरकार के दो वर्ष के कार्यों पर केन्द्रित विशेष प्रदर्शनी भी लगाई जा रही है, जिसका शुभारंभ राज्यपाल मंगुभाई पटेल करेंगे। विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने बताया कि 17 दिसंबर का दिन मध्यप्रदेश विधानसभा के इतिहास में महत्वपूर्ण है। इसी दिन मध्यप्रदेश विधानसभा की प्रथम बैठक हुई थी। इस विशेष सत्र में सभी सदस्य विकसित मध्यप्रदेश के विजन को धरातल पर उतारने के लिए क्या कदम उठाना चाहिए इस पर अपने विचार व्यक्त करेंगे। तोमर ने कहा कि आज हमारा प्रदेश विकासशील राज्यों में गिना जाता है। हम सक्षम हैं, अनेक क्षेत्रों में प्रदेश ने नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। लेकिन आने वाले कल में हम विकसित मध्यप्रदेश के निर्माण का लक्ष्य रखते हैं। इसलिए हमारी पीढ़ी का यह दायित्व है कि इस दिशा में हम चिंतन भी करें और सटीक कदम भी उठाएं। राज्‍य पुर्नगठन आयोग की अनुशंसा पर 1 नवम्‍बर, 1956 को मध्‍यप्रदेश राज्‍य का गठन हुआ था। मध्‍यप्रदेश विधान सभा के प्रथम सत्र की अवधि 17 दिसम्‍बर, 1956 से 17 जनवरी, 1957 थी, सत्र की पहली बैठक 17 दिसंबर 1956 को आहूत हुई थी। तब से अब तक 16 विधानसभा गठित हो चुकी हैं। वर्तमान में 16 वीं विधानसभा कार्यरत है। प्रदेश के विकास एवं आमजन के कल्याण में मध्यप्रदेश विधानसभा एवं सदस्यों का सदैव सक्रिय योगदान एवं भूमिका रही है। प्रथम विधानसभा से अब तक विधानसभा के 19 अध्यक्ष आसंदी पर रहे हैं। 17 दिसंबर 2025 को आहूत एक दिवसीय विशेष सत्र में मध्यप्रदेश को विकसित, आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाने पर चर्चा होगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में संपूर्ण राष्ट्र “विकसित भारत” के संकल्प की सिद्धी की ओर अग्रसर है। विकसित भारत के लिए विकसित मध्यप्रदेश आवश्यक है और इसमें विधायिका की अपनी भूमिका और दायित्व है। प्रदेश को विकसित, आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाने के इसी विज़न पर सदन में चर्चा होगी। 17 दिसंबर को प्रातः 10.00 बजे राज्यपाल मंगुभाई पटेल विधानसभा परिसर में विधानसभा की 7 दशक की यात्रा पर चित्र प्रदर्शनी का शुभारंभ करेंगे। इस ऐतिहासिक चित्र प्रदर्शनी मे 136 चित्र लगाये गये है। इसमें कुछ दुर्लभ चित्र भी सम्मिलित हैं। ये चित्र प्रथम विधानसभा से वर्तमान सोलहवीं विधानसभा के विभिन्न महत्वपूर्ण अवसरों के हैं। यह प्रदर्शनी विशेषकर विद्यार्थियों के साथ विशिष्‍ष्‍ट जनों एवं आम नागारिकों के लिए भी खुली रहेगी, 18 से 25 दिसंबर के बीच विधानसभा में प्रवेश पत्र बनवा कर प्रदर्शनी देख सकते हैं। प्रवेश पत्र के लिए आधार कार्ड/विद्यालय/महाविद्यालय का परिचय पत्र भी लाना आवश्यक रहेगा। इस प्रदर्शनी के साथ मध्यप्रदेश सरकार के विकास कार्यों के भी छाया चित्र लगाए गए है, जिसमें प्रदेश सरकार के 2 वर्ष के कामकाज का लेखा−जोखा रखा गया है। यह ऐतिहासिक प्रदर्शनी मध्यप्रदेश के 5 हजार से अधिक जनप्रतिनिधियों के योगदान को भी याद कराती है। इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, मंत्रिगण, सदस्यगण, पूर्व विधायक एवं अन्य गणमान्य जन उपास्थित रहेंगे।  

उत्तर प्रदेश में टाटा समूह के साथ बहुआयामी सहयोग, ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी के लक्ष्य को मिलेगी गति

मुख्यमंत्री योगी से मिले टाटा संस के चेयरमैन, यूपी में एआई सिटी, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और हाई-टेक निवेश पर बनी सहमति उत्तर प्रदेश में टाटा समूह के साथ बहुआयामी सहयोग, ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी के लक्ष्य को मिलेगी गति लखनऊ में एआई सिटी, गोरखपुर में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, युवाओं के लिए तकनीक व रोजगार के नए द्वार टीसीएस की इकाईयों का होगा विस्तार,30 हजार तक बढ़ेगा आईटी कार्यबल, यूपी में जीसीसी की स्थापना पर भी हुई चर्चा इलेक्ट्रॉनिक्स व डिफेंस कॉरिडोर में टाटा समूह बढ़ाएगा निवेश, यूपी बनेगा मैन्युफैक्चरिंग हब लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सोमवार को टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने शिष्टाचार भेंट की। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश में टाटा समूह द्वारा संचालित एवं प्रस्तावित परियोजनाओं की प्रगति, विस्तार तथा नए निवेश प्रस्तावों पर व्यापक और सार्थक चर्चा हुई। बैठक में एआई, आईटी, इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा विनिर्माण, ऊर्जा, नवीकरणीय ऊर्जा, ईवी, पर्यटन, कौशल विकास और डिजिटल अर्थव्यवस्था सहित विभिन्न क्षेत्रों में दीर्घकालिक सहयोग को लेकर सहमति बनी। बैठक के दौरान टाटा संस के चेयरमैन ने राजधानी लखनऊ में ‘एआई सिटी’ विकसित करने का प्रस्ताव प्रस्तुत किया। यह परियोजना उत्तर प्रदेश को कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में वैश्विक हब के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। एआई सिटी के माध्यम से प्रदेश में स्टार्टअप इकोसिस्टम को बढ़ावा मिलेगा तथा भविष्य की तकनीकों पर आधारित हजारों नए रोजगार अवसर सृजित होंगे। इसके साथ ही गोरखपुर में 48 करोड़ रुपये से तैयार हो रहे ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ की स्थापना कार्य की प्रगति पर भी चर्चा हुई, जिससे विशेष रूप से पूर्वांचल के युवाओं को उन्नत तकनीकी प्रशिक्षण और अवसर प्राप्त होंगे। टाटा समूह ने अवगत कराया कि आईआईटी कानपुर के साथ किए गए एमओयू के माध्यम से एआई, साइबर सिक्योरिटी, डेटा साइंस, 3डी प्रिंटिंग, ड्रोन और स्पेस टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में युवाओं को प्रशिक्षित किया जाएगा। यह पहल प्रदेश में स्किल डेवलपमेंट और इंडस्ट्री-रेडी वर्कफोर्स तैयार करने में सहायक होगी। बैठक में टाटा संस के मुखिया की ओर से प्रदेश में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) की स्थापना को लेकर भी विचार-विमर्श हुआ, साथ ही टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज की लखनऊ, नोएडा और वाराणसी इकाइयों के विस्तार पर भी सहमति बनी। टीसीएस की लखनऊ और नोएडा यूनिट में कार्यबल को 16,000 से बढ़ाकर 30,000 किए जाने का प्रस्ताव राज्य के डिजिटल टैलेंट पूल को नई मजबूती प्रदान करेगा। इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश की तेजी से विकसित होती क्षमता को देखते हुए टाटा समूह ने मोबाइल उपकरणों, इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स और अन्य हाई-टेक उत्पादों के निर्माण में निवेश बढ़ाने की इच्छा जताई। इस संदर्भ में टाटा समूह द्वारा इंटेल के साथ किए गए एमओयू का उल्लेख करते हुए प्रदेश में इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को और मजबूत करने पर चर्चा हुई। इसके साथ ही इलेक्ट्रिक बसों, ईवी और अन्य वाहनों के नए मॉडलों के निर्माण में भी सहयोग और निवेश विस्तार पर सहमति बनी। बैठक में उत्तर प्रदेश के डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर को लेकर भी विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। टाटा समूह ने झांसी सहित प्रदेश के विभिन्न रक्षा औद्योगिक नोड्स में ड्रोन, मिसाइल और रक्षा वाहनों के निर्माण के लिए निवेश बढ़ाने का प्रस्ताव रखा। झांसी में बीडा के अंतर्गत परियोजना विस्तार की जानकारी साझा करते हुए टाटा समूह ने मुख्यमंत्री के विजन के अनुरूप प्रदेश की रक्षा प्राथमिकताओं में पूर्ण सहयोग देने का आश्वासन दिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार निवेशकों को स्थिर नीति, पारदर्शी व्यवस्था और अनुकूल कारोबारी वातावरण उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि टाटा समूह के साथ यह बहुआयामी सहयोग राज्य की अर्थव्यवस्था, रोजगार सृजन और तकनीकी आत्मनिर्भरता को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। मुख्यमंत्री और टाटा संस के चेयरमैन के बीच हुई यह बैठक उत्तर प्रदेश को ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी बनाने के संकल्प की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध होगी।

रायपुर : एक चैन माउंटेन एवं 6 हाईवा जब्त, रेत के अवैध उत्खनन एवं परिवहन के मामले में कार्रवाई

रायपुर : अवैध रेत परिवहन के मामले में 9 ट्रैक्टर जब्त रायपुर : एक चैन माउंटेन एवं 6 हाईवा जब्त, रेत के अवैध उत्खनन एवं परिवहन के मामले में कार्रवाई     रायपुर रायगढ जिले में अवैध रेत उत्खनन एवं परिवहन के विरुद्ध चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत खनिज विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए अवैध रूप से रेत का परिवहन कर रहे 9 ट्रैक्टरों को जब्त किया है। साथ ही संबंधित वाहन मालिकों के विरुद्ध खनिज अधिनियम के अंतर्गत प्रकरण दर्ज किया गया है। जिला खनिज अधिकारी ने बताया कि खनिज निरीक्षक श्री सोमेश्वर सिन्हा एवं जांच दल द्वारा सतत निगरानी के दौरान यह कार्रवाई की गई। जांच में पाया गया कि सभी वाहन बिना किसी वैध अनुमति के रेत का परिवहन कर रहे थे। मौके पर विधिवत जांच के पश्चात वाहनों को जब्त करते हुए वाहन मालिकों के विरुद्ध छत्तीसगढ़ गौण खनिज नियम 2015 एवं खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम 1957 के प्रावधानों के तहत कानूनी कार्रवाई की गई है। कार्रवाई के दायरे में जोरापाली के भानुकुमार चौहान (वाहन क्रमांक सीजी 13 बीई 9014), बाल्मिकी प्रजापति (न्यू हालैण्ड सोल्ड), कुरमापाली के नूतन साहू (स्वराज सोल्ड), गोपालपुर के प्रेम उरांव (महिन्द्रा सोल्ड), पतरापाली के समीर पटेल (सीजी 13 एडब्ल्यू 2563), बाबाधाम रायगढ़ के तिरथलाल यादव (सीजी 13 एव्ही 3634), रायगढ़ के प्यारेलाल साहू (सीजी 13 यूएच 2738), धनागर के उत्तम सारथी (सीजी 13 एएस 4893) तथा हण्डी चौक रायगढ़ के गणेश अग्रवाल (महिन्द्रा सोल्ड) शामिल हैं। जिला खनिज अधिकारी ने बताया कि आगे भी अवैध खनन एवं परिवहन के विरुद्ध कार्रवाई जारी रहेंगी।  रायपुर : एक चैन माउंटेन एवं 6 हाईवा जब्त, रेत के अवैध उत्खनन एवं परिवहन के मामले में कार्रवाई     जांजगीर-चांपा जिले में जिला स्तरीय खनिज उड़नदस्ता दल द्वारा अवैध रेत उत्खनन, परिवहन एवं भंडारण के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करते हुए 1 चैन माउंटेन मशीन एवं 6 हाईवा वाहनों को जब्त किया गया है। इसके साथ ही अवैध रेत भंडारण के 2 प्रकरण दर्ज किए गए हैं तथा बम्हनीडीह क्षेत्र में रेत की 2 अस्थायी भंडारण अनुज्ञप्तियां निरस्त की गई हैं। खनिज उड़नदस्ता दल द्वारा जिले के नवापारा, केवा, पीपरदा, पुछेली, खपरीडीह एवं बम्हनीडीह क्षेत्रों में औचक निरीक्षण किया गया। इस दौरान ग्राम केवा में खनिज रेत के अवैध उत्खनन में संलिप्त 1 चैन माउंटेन मशीन पाई गई, जिसे मौके पर सील कर अवैध उत्खनन का प्रकरण दर्ज किया गया। खनिज अधिकारी ने बताया कि ग्राम पीपरदा में 6 हाईवा वाहनों द्वारा खनिज रेत का अवैध परिवहन करते पाए जाने पर वाहनों को मौके पर सील कर नोटिस चस्पा किया गया। इसके अतिरिक्त ग्राम पीपरदा में ही खनिज रेत के अवैध भंडारण के 2 प्रकरण दर्ज किए गए। इनमें एक प्रकरण शासकीय भूमि पर लगभग 200 घन मीटर रेत तथा दूसरा प्रकरण में लगभग 240 घन मीटर रेत के अवैध भंडारण का पाया गया, जिसे श्री तेरस पिता समधीन, निवासी पीपरदा द्वारा किया था। दोनों प्रकरणों में अवैध रूप से भंडारित रेत को जब्त कर ग्राम पंचायत की सुपुर्दगी में दिया गया है। इसके अतिरिक्त बम्हनीडीह क्षेत्र अंतर्गत ग्राम अमोदी में मेसर्स आर.बी. कंस्ट्रक्शन के पक्ष में स्वीकृत गौण खनिज रेत की अस्थायी भंडारण अनुज्ञप्ति तथा ग्राम बम्हनीडीह में मेसर्स बाबा सिद्धेश्वर कंस्ट्रक्शन के पक्ष में स्वीकृत खनिज रेत की अस्थायी भंडारण अनुज्ञप्ति को नियमों के बार-बार उल्लंघन एवं अनियमितताओं के चलते निरस्त कर दिया गया है। गौरतलब है कि जांजगीर-चांपा जिले में कलेक्टर के कलेक्टर के मार्गदर्शन में खनिज के अवैध उत्खनन, परिवहन एवं भंडारण पर प्रभावी नियंत्रण हेतु जिला स्तरीय उड़नदस्ता दल द्वारा निरंतर जांच एवं कार्रवाई की जा रही है। अवैध गतिविधियों में संलिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध कार्रवाई की जा रही है।  रायपुर : अवैध खनिज परिवहन करते 3 हाईवा और 1 ट्रेलर जब्त सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में खनिज विभाग की टीम द्वारा अवैध खनन, परिवहन एवं भण्डारण के विरुद्ध बड़ी कार्रवाई करते हुए 3 हाईवा एवं 1 ट्रेलर वाहन को जब्त किया गया है। खनिज टीम ने टिमरलगा क्षेत्र अंतर्गत गौण खनिज चूना पत्थर के अवैध परिवहन में संलिप्त हाईवा वाहन क्रमांक सीजी 13 एक्यू 6504 को जब्त कर कलेक्टर कार्यालय परिसर, जिला सारंगढ़-बिलाईगढ़ में अभिरक्षा में रखा गया है। इसी प्रकार दो अन्य हाईवा वाहन क्रमांक सीजी 13 एआर 8389, सीजी 13 एवाई 9848 तथा एक ट्रेलर वाहन क्रमांक सीजी 13 एटी 3111 को जब्त कर थाना सारंगढ़ की अभिरक्षा में सौंपा गया है। उक्त कार्रवाई छत्तीसगढ़ गौण खनिज नियम तथा खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 की धारा 21 के अंतर्गत की गई है। गौरतलब है कि कलेक्टर के निर्देशानुसार सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में खनिजों के अवैध उत्खनन, परिवहन एवं भण्डारण की रोकथाम हेतु खनिज अमले द्वारा आकस्मिक निरीक्षण एवं कार्रवाई की जा रही है।