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विकास कार्यों की रिपोर्ट सीधे मुख्यमंत्री को: सांसद और विधायक सौंपेंगे कामकाज का लेखा-जोखा

भोपाल मध्य प्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार की दो वर्ष उपलब्धियां जनता को बताई जाएंगी। प्रभारी मंत्रियों ने शनिवार को अपने-अपने जिलों में पत्रकारवार्ता कर बताया कि मोहन सरकार ने दो साल में क्या काम किए गए हैं इसकी जानकारी जनता को दी जाएगी। सरकार की उपलब्धियों के अलावा मंत्री अपने-अपने विभागों के कामकाज का ब्योरा भी जनता के बीच रखेंगे। इसके अलावा सांसदों और विधायकों ने अपने क्षेत्रों में दो साल में क्या काम किए हैं इस संबंध में मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर अवगत कराएंगे।   सीएम ने चार साल का रोडमैप बनाने के लिए कहा था दरअसल, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विधायकों को चार साल का रोडमैप बनाने के लिए कहा था। वहीं विधायकों ने अपनी निधि का जनकल्याण में कितना उपयोग किया, इसकी रिपोर्ट भी तैयार की गई है। यह रिपोर्ट मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी। भाजपा के मोर्चा प्रकोष्ठों की भी जिम्मेदारी तय की गई कि वे मोहन सरकार द्वारा किसान, युवा, महिला, एससी, एसटी और अन्य वर्गों के लिए किए गए कार्यों को उन वर्गों के बीच जाकर बताएं। 25 दिसंबर तक चलेगा कार्यक्रम पार्टी कार्यकर्ता जन-जन तक भाजपा सरकार की उपलब्धियों को बैठकों, संगोष्ठियों और संपर्क अभियान के जरिए पहुंचाएंगे। यह कार्यक्रम 25 दिसंबर तक पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती तक चलेगा। भाजपा इस वर्ष को देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का शताब्दी वर्ष के रूप में मना रही है। उनके जन्मदिवस 25 दिसंबर को प्रदेश भर में बूथ स्तर पर सुशासन दिवस के रूप में मनाया जाएगा। 25 सितंबर से 25 दिसंबर तक आयोजित ‘आत्मनिर्भर भारत संकल्प अभियान’, जो पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती से जुड़ा है, उसको भी बूथ स्तर पर मजबूत रूप से मनाया जाएगा। बताएगी भाजपा, वर्षों कांग्रेस की सरकार रही पर कुछ नहीं किया डॉ. मोहन यादव सरकार के दो वर्ष पूरे होने पर भाजपा प्रदेश कार्यालय में हुई बैठक में तय किया गया है कि पार्टी कार्यकर्ता जनता के बीच जाकर बताएंगे कि आजादी के बाद से वर्षों तक मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकारें रही हैं, लेकिन विकास के कोई कार्य नहीं किए गए। वहीं मप्र में वर्ष 2003 में भाजपा की सरकार बनने के बाद ही विकास की शुरुआत हुई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में भाजपा सरकार ने अद्वितीय और अकल्पनीय विकास कार्य किए हैं। बूथ स्तर तक होंगे कार्यक्रम युवा मोर्चा, महिला मोर्चा, पिछड़ा वर्ग मोर्चा, अजा-अजजा मोर्चा ने मुख्यमंत्री और प्रदेश सरकार का धन्यवाद ज्ञापित कर इन दो वर्षों में हुए जनहितैषी कार्यों को पारदर्शिता और तत्परता के साथ जनता तक पहुंचाने के लिए बूथ स्तर तक जाने का संकल्प लिया। इस बार ‘मन की बात’ कार्यक्रम के पश्चात 15 मिनट तक प्रदेश सरकार एवं केंद्र सरकार की उपलब्धियों पर चर्चा की जाएगी। केंद्र व राज्य सरकार के जनकल्याणकारी कार्यों की एक विस्तृत पीपीटी और पीडीएफ रिपोर्ट तैयार की गई है, इसे बूथ स्तर तक बताया जाएगा। 

पर्यटन पर माफिया की मार: भोपाल में पर्यटकों को गुमराह कर बड़ा तालाब से दूर रख रहे नाव संचालक

भोपाल बड़े तालाब की अथाह जलराशि पर इस महीने की शुरुआत में शुरू हुई शिकारा सेवा माफिया के जाल में फंस गई है। पहले से तालाब पर नावों का संचालन कर रहा यह गिरोह पूरी योजना को पलीता लगा रहा है। इनकी वजह से शिकारा का आनंद लेने पहुंचे लोग बेहद खराब अनुभव से दो-चार हो रहे हैं। नवदुनिया ने शनिवार को इसकी पड़ताल की तो इस बदमाशी की तस्वीर सामने आई। निजी नाव संचालकों के लोग गेट पर ही खड़े रहते हैं। बोट क्लब में घुसने वालों को अपनी नावों की ओर ले जाने में जुट जाते हैं। एक दूसरा समूह बोट क्लब प्रबंधक की मौजूदगी में टिकट खिड़की के सामने ही पर्यटकों को भ्रमित करता है। वे अपनी नावों को शिकारा बताकर पर्यटकों को ले जाते हैं। ऐसा करने पर उन्हें पर्यटन विकास निगम के लोग टोकते भी नहीं। इसकी वजह से पर्यटक उनकी बात को सच मान लेते हैं। शिकायत करने पर विवाद यह सब मिलीभगत से चल रहा है। कोई पर्यटक उनकी अनदेखी कर शिकारा का टिकट लेकर उसमें बैठ जाता है तो उसे दूसरी असुविधा का सामना करना पड़ता है। 300 रुपये के टिकट पर 20 मिनट की शिकारा राइड उपलब्ध है। लेकिन शिकारा चलाने वाले पांच-सात मिनट तालाब के किनारों को घुमाकर पर्यटकों को उतार देते हैं। शिकायत करने पर विवाद हो रहा है। यह सब रोकने वाला कोई नहीं है। पर्यटक ने हाथ जोड़कर कहा-मेरी ही गलती है, जो बोट क्लब आया शनिवार शाम करीब पौने चार बजे एक पर्यटक बोट क्लब के प्रबंधक वसीम के पास पहुंचा। उसने शिकायत कि शिकारा चालक उसे सिर्फ किनारे घुमाकर वापस छोड़ गया। प्रबंधक ने पर्यटक को जेट्टी पर संचालन देख रहे दीक्षित के पास जाने काे कहा। पर्यटक ने कहा, दीक्षित ने ही आपके पास भेजा है, तो मैनेजर ने हाथ खड़े कर दिए। कहा कि वह इस मामले में कुछ नहीं कर सकते। अंततः पर्यटक ने हाथ जोड़कर कहा-मेरी ही गलती है जो मैं बोट क्लब आया। प्रबंधक वसीम का कहना है, शिकारा की संख्या कम है और शाम को पर्यटक ज्यादा आते हैं। इन दिनों अंधेरा जल्दी हो रहा है, इसलिए संचालन बंद करना पड़ता है। इसी वजह से पर्यटकों को शिकारा नहीं मिल पाता। एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि वर्तमान में शिकारा चलाने वाले वही लोग हैं जो यहां नाव चला रहे थे। वे शिकारा को अपने धंधे पर चोट की तरह देख रहे हैं। इसलिए यह सब हो रहा है।   चारों तरफ निजी नाव संचालकों का कब्जा बोट क्लब परिसर में चारों ओर निजी नाव संचालकों का कब्जा है। मुख्य द्वार पर ही दो-तीन लोग खड़े रहते हैं, जो अंदर आने वाले पर्यटकों से कहते हैं-"बोटिंग करनी है तो उधर बोट है।" इसके बावजूद अगर कोई पर्यटक टिकट विंडो तक पहुंच भी जाता है, तो वहां भी इनके लोग मौजूद रहते हैं, जो पर्यटकों को भ्रमित कर निजी बोटों की ओर ले जाते हैं। जल पर्यटन की महत्वाकांक्षी परियोजना मप्र पर्यटन विकास निगम बोट क्लब पर जल पर्यटन बढ़ाने के लिए प्रयास कर रहा है। निगम ने कश्मीरी शिकारा के रूप में 20 नए शिकारे लगभग 48 लाख रुपये की लागत से खरीदे। ये शिकारे पर्यावरण-अनुकूल फाइबर री-इन्फोर्स्ड पालीयूरिथेन सामग्री से तैयार किए गए हैं। चार दिसंबर को ही इसका लोकार्पण हुआ है। निगम के पास जवाब नहीं मप्र पर्यटन विकास निगम के जनसंपर्क अधिकारी विकास खरे से जब इस संबंध में सवाल किया गया तो उन्होंने कहा-पता करके बताता हूं, थोड़ा समय दीजिए। इसके बाद उनका कोई जवाब नहीं आया।  

ग्वालियर व्यापार मेले में डबल धमाल, ऑटोमोबाइल ही नहीं इलेक्ट्रॉनिक सेक्टर भी रहेगा आकर्षण का केंद्र

ग्वालियर ग्वालियर व्यापार मेला 120 साल से अधिक पुराना हो चुका है और देश के बड़े मेलों में शामिल है। इसकी खास बात यह है कि इस मेले में घर में उपयोग होने वाली सुई से लेकर मोटर कार तक छूट के साथ मिलती हैं। इसलिए इस मेले में खरीदारी करने के लिए देश भर से लोग आते हैं। जब जीएसटी लागू नहीं था तब समान रूप से सभी चीजों पर 50 प्रतिशत वाणिज्यकर में छूट मिलती थी। लेकिन एक जुलाई 2017 में जीएसटी लागू होने के बाद मेले की चमक कुछ फीकी पड़ गई। लेकिन ऑटोमोबाइल सेक्टर में सरकार ने रोड टैक्स में 50 प्रतिशत की छूट दे दी। इसके बाद मेले में ऑटोमोबाइल सेक्टर तो चमका, लेकिन इलेक्ट्रॉनिक सहित अन्य सेक्टर में कारोबार उतना अच्छा नहीं रहा। लेकिन इस बार जीएसटी कम होने से ऑटोमोबाइल सेक्टर के साथ इलेक्ट्रॉनिक व अन्य सेक्टरों में अच्छा कारोबार होने की उम्मीद है। क्योंकि जीएसटी कम होने के साथ कंपनियां भी अपने प्रोडक्ट पर तगड़ी छूट देंगी। ऐसे में खरीदारी करने वालों को फायदा होगा। यहां बता दें कि 2024-25 मेले में 3327 करोड़ से अधिक का कारोबार हुआ। इसमें 900 करोड़ से अधिक का कारोबार केवल ऑटोमोबाइल सेक्टर में हुआ।   1937 में टर्नओवर था 5-6 लाख रुपये मेले से जुड़े लोगों के मुताबिक इस मेले के कारोबार की अगर बात करें तो 1937 में इसका टर्नओवर लगभग 5-6 लाख रुपये था। 1984-85 में जहां मेले में करों की छूट मिलने के बाद टर्नओवर 84 लाख 86 हजार 730 रुपये था वहीं 1990-91 में यह बढकऱ 70 करोड़ 36 लाख रुपये हो गया। 1984 में व्यापार मेले का दर्जा मिलने पर इलेक्ट्रॉनिक और ऑटोमोबाइल सेक्टर इसका प्रमुख आकर्षण बन गए। इस आकर्षण के पीछे इन सेक्टरों में मेले में दी जाने वाली पचास फीसदी विक्रय कर की छूट थी। इसके चलते उस समय सभी बड़ी कंपनियां मेले में भागीदारी करती थीं। 1998 में मेले का कारोबार 350 करोड़ और सैलानियों की संख्या 40 लाख तक जा पहुंची थी। वहीं 2018 में मेले के ऑटोमोबाइल सेक्टर में रोड टैक्स में 50 फीसदी छूट मिलने के बाद इसका टर्नओवर 500 करोड़ के पार हो गया था। इसलिए चमकेगा इलेक्ट्रॉनिक सहित अन्य सेक्टर का कारोबार 22 सितंबर से जीएसटी की दरों में सरकार ने कमी की है। जीएसटी कम होने का असर कारोबार के सभी सेक्टरों पर है और चीजें सस्ती हुई हैं। ऑटोमोबाइल सेक्टर में रोड टैक्स की छूट मिलती है। इसलिए कार व बाइक कंपनियां अपनी तरफ से कम ही छूट देती हैं। लेकिन अभी तक इलेक्ट्रॉनिक सेक्टर सहित अन्य सेक्टरों में कंपनियां ही छूट दे रही थी। लेकिन इस बार जीएसटी कम होने व कंपनियों से मिलने वाले डिस्काउंट की वजह से ये चीजें मेले में सस्ती मिलेंगी। इसलिए ऑटोमोबाइल सेक्टर सहित अन्य सेक्टरों में कारोबार अच्छा होने की उम्मीद कारोबारियों को है।

इंदौर से धार के बीच ट्रेन सेवा मार्च 2026 तक शुरू होगी, 17 साल का इंतजार होगा समाप्त

इंदौर  अगले वर्ष 2026 में आदिवासी बहुल क्षेत्र धार जिले में पहली बार ट्रेन दौड़ेगी। इंदौर-दाहोद नई ब्राडगेज रेल लाइन परियोजना (204.76 किमी) का भूमिपूजन वर्ष 2008 में हुआ था। 17 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद रेलवे दावा कर रहा है कि इंदौर से धार नए रूट पर मार्च-2026 तक ट्रेन चलाई जाएगी। हालांकि निर्माण कार्य की गति और जमीनी हकीकत को देखकर लग रहा है कि ट्रेन शुरू होने में छह महीने का और समय लग सकता है। वहीं, रेलवे के कंस्ट्रक्शन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि फरवरी-2026 तक टनल का काम पूरा कर लिया जाएगा। इसके लिए टाइमलाइन बनाकर काम कर रहे हैं। हर दिन की समय सीमा तय की है, क्योंकि पहले ही इस प्रोजेक्ट में टनल की वजह से देरी हो चुकी है। इंदौर और वड़ोदरा के बीच सीधा संपर्क उक्त परियोजना वड़ोदरा और इंदौर के बीच सीधा संपर्क देकर यात्रा समय कम करेगी। अभी रतलाम होकर वड़ोदरा आना-जाना पड़ता है। परियोजना की अनुमानित कुल लागत लगभग 1873 करोड़ रुपये है। वर्तमान स्थिति में इंदौर से टीही (21 किमी) और दाहोद से कटवारा (11.30 किमी) खंड का कुल 32.30 किमी भाग शुरू हो चुका है। टीही से धार के बीच ट्रैक लिंकिंग और मोबिल फ्लैश वेल्डिंग कार्य प्रगति पर है। खंड का सीआरएस निरीक्षण फरवरी 2026 के लिए लक्षित है। टीही टनल (2.9 किमी) कार्य भी तेज गति से चल रहा है। 2.95 किमी टनल में से 1.87 किमी हिस्से का काम पूरा कर दिया है। टनल के अंदर दीवारों पर फिनिशिंग की जा रही है। पानी निकलने के लिए लोहे की 150 व 400 एमएम की लाइन बिछाई जा रही है। पूरी टनल में हर 50 मीटर पर कुल 30 मेन होल बनाए गए हैं। इनके माध्यम से टनल में एकत्रित होने वाला पानी लगातार बाहर निकाला जाएगा। ट्रैक बिछाने का काम शुरू कर दिया गया है पाइप चोक होने की स्थिति में मशीन से हवा का प्रेशर दिया जाएगा, जिससे पाइप साफ हो जाएंगे और पानी नहीं रुकेगा। इसके बाद इस हिस्से में ट्रैक बिछाने का काम भी शुरू कर दिया जाएगा। टनल के अंदर रेलवे बैलास्ट लैस ट्रैक बिछाएगा। रेलवे जनसंपर्क अधिकारी खेमराज मीणा ने दावा किया कि टनल का काम अंतिम चरण में चल रहा है। अगले साल मार्च 2026 तक इंदौर से धार के बीच ट्रेन चलने लगेगी। हम ट्रेन चलाने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहे हैं। टनल में मटेरियल लाने-ले जाने के लिए दोनों एंड पर छोड़ा था काम टनल के दोनों एंड पी-1 और पी-2 पर मटेरियल लाने-ले जाने के लिए रेलवे ने दोनों हिस्से में टनल का काम छोड़ा था। एक हिस्से में 170 मीटर जबकि दूसरे हिस्से में 50 मीटर से ज्यादा हिस्सा था। दोनों टनल के बीच भी 60 मीटर का हिस्सा बचा हुआ है। अब इस हिस्से में भी रेलवे काम शुरू करेगा। प्रोजेक्ट से जुड़े एक अधिकारी ने कहा- अगले दो महीने में इस हिस्से को भी पूरा करने का लक्ष्य है। इंदौर-दाहोद रेल लाइन प्रोजेक्ट     2008 में प्रोजेक्ट स्वीकृत हुआ     2013 में काम शुरू हुआ     1873 करोड़ से अधिक लागत वर्तमान में     204.76 किमी लंबी लाइन इसलिए खास है यह परियोजना, इंदौर-मुंबई की दूरी कम होगी रेल परियोजना के पूरा होने से इंदौर और मुंबई के बीच रेल मार्ग की दूरी लगभग 55 किमी घट जाएगी। गुजरात-महाराष्ट्र से एमपी की बेहतर कनेक्टिविटी: यह नई रेल कड़ी इंदौर को गुजरात और महाराष्ट्र से सीधे जोड़ेगी, जिससे न केवल यात्री, बल्कि माल-ढुलाई में भी सुविधा बढ़ेगी। औद्योगिक विकास व माल भाड़ा सस्ता इस मार्ग से औद्योगिक क्षेत्र, विशेषकर पीथमपुर को लाभ होगा। माल को रेल से सीधे मुंबई व अन्य बंदरगाहों तक भेजना आसान और कम लागत वाला होगा। पिछड़े व आदिवासी क्षेत्रों को रेल सुविधा इस लाइन से प्रदेश के धार, झाबुआ जैसे क्षेत्रों को पहली रेल-कनेक्टिविटी मिलेगी। विकास, रोजगार, आवाजाही जैसे सामाजिक-आर्थिक लाभ होंगे।  

उज्जैन में ‘शनि लोक’ का निर्माण शुरू, महाकाल लोक की तर्ज पर 140 करोड़ की स्वीकृति, 2028 से पहले होगा पूरा

उज्जैन  बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में रोजाना हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं का आगमन होता है। वर्ष 2022 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा महाकाल लोक का लोकार्पण किए जाने के बाद यहां श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई, जो आज भी लगातार बनी हुई है। इसी विकास यात्रा में अब उज्जैन एक और भव्य धार्मिक स्थल का साक्षी बनने जा रहा है। महाकाल लोक की तर्ज पर शनि लोक का भव्य निर्माण किया जाएगा। इसके लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 140 करोड़ रुपये स्वीकृत कर दिए हैं। जानिए कहां दिखेगा शनि लोक का खूबसूरत नजारा  महाकाल की नगरी में अति प्राचीन शनि मंदिर है. यहां यह खूबसूरत नज़ारा देखने को मिलेगा. जल्द ही इसका निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा. यह वह प्रसिद्ध स्थान है, जहां शनि महाराज शिवलिंग स्वरूप में भक्तों को दर्शन देकर भक्तों के कष्ट हरते हैं. इतना ही नहीं, इस मंदिर की और भी कई खासियतें हैं. शिव के रूप में शनिदेव  मंदिर के पुजारी राकेश बैरागी ने बताया, यह मंदिर 2000 वर्ष पुराना है. राजा विक्रमादित्य की जब साढ़ेसाती खत्म हुई थी, तब शनि महाराज राजा पर प्रसन्न हुए और यहां सारे ग्रह एक साथ प्रकट हुए. इसे शनि मंदिर में एक साथ विराजमान हुए, तभी से इस मंदिर में लोगों की आस्था है. यहां पर मुख्य शनिदेव की प्रतिमा के साथ-साथ ढैय्या शनि की भी प्रतिमा स्थापित है. बताया जाता है कि राजा विक्रमादित्य का इतिहास भी इस मंदिर से जुड़ा है. यही नहीं, यह शनि मंदिर पहला मंदिर है, जहां शनिदेव शिव रूप विराजमान हैं. यहां आने वाले श्रद्धालु अपनी मनोकामना के लिए शनिदेव पर तेल चढ़ाते हैं. कहा जाता है कि यहां साढ़ेसाती और ढैय्या की शांति के लिए शनिदेव पर तेल चढ़ाया जाता है. शनि लोक का अद्भुत स्वरूप आएगा नजर उज्जैन स्थित अति प्राचीन शनि मंदिर में शनि लोक का भव्य नजारा जल्द ही दिखाई देगा। शीघ्र ही इसका निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। यह वही स्थान है, जहां शनि महाराज शिवलिंग स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं और उनके कष्ट हरते हैं। इस मंदिर को लेकर कई मान्यताएं और विशेषताएं प्रसिद्ध हैं। शिव के स्वरूप में विराजमान हैं शनिदेव मंदिर के पुजारी राकेश बैरागी के अनुसार यह मंदिर लगभग 2000 वर्ष पुराना है। मान्यता है कि जब राजा विक्रमादित्य की साढ़ेसाती समाप्त हुई, तब शनि महाराज प्रसन्न होकर यहां प्रकट हुए और सभी ग्रहों ने एक साथ दर्शन दिए। यह देश का पहला ऐसा मंदिर माना जाता है, जहां शनिदेव शिवरूप में विराजमान हैं। यहां मुख्य शनिदेव की प्रतिमा के साथ ढैय्या शनि की प्रतिमा भी स्थापित है। भक्त अपनी मनोकामना पूर्ति और शांति के लिए शनिदेव पर तेल चढ़ाने आते हैं। 140 करोड़ में बनेगा भव्य शनि लोक सीएम मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। शनि लोक का निर्माण इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।  गौरतलब है कि नवग्रह शनि मंदिर पर शनिवार व शनिश्चरी अमावस्या के दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। यहां शनि लोक निर्माण के लिए मुख्यमंत्री ने 140 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है। सिंहस्थ से पहले पूरा होगा निर्माण कलेक्टर  ने बताया कि सीएम के निर्देशानुसार विकास कार्य तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। त्रिवेणी स्थित शनि मंदिर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं और सिंहस्थ 2028 के दौरान यहां भारी भीड़ आने की संभावना है। इसी कारण शनि लोक निर्माण के लिए डीपीआर तैयार की जा रही है और लक्ष्य है कि सिंहस्थ से पहले शनि लोक का निर्माण पूरा हो जाए।

लखनऊ में बनकर तैयार हुआ ‘राष्ट्र प्रेरणा स्थल’, भाजपा के तीन दिग्गज नेताओं को समर्पित ₹232 करोड़ की परियोजना

 लखनऊ  लखनऊ में भाजपा के तीन दिग्गज नेताओं को समर्पित 'राष्ट्र प्रेरणा स्थल' पूरी तरह बनकर तैयार हो गया है. बसंतकुंज क्षेत्र में 65 एकड़ में विकसित यह विशाल परिसर अपनी भव्यता, आधुनिक सुविधाओं और विशेष डिजाइन के कारण चर्चा में है. परिसर को कमल के फूल की आकृति में तैयार किया गया है, जो भारतीय संस्कृति और भाजपा के प्रतीक चिन्ह दोनों का प्रतिनिधित्व करता है.  यहां एक साथ करीब एक लाख लोगों के जुटने की क्षमता है, जबकि पूरे परिसर में डेढ़ लाख से अधिक लोगों के कार्यक्रम आयोजित किए जा सकते हैं. तीन हेलीपैड, बड़े मंच, चौड़े पाथवे और कई सुविधाओं से युक्त यह स्थल प्रधानमंत्री के किसी भी बड़े आयोजन के लिए पूरी तरह उपयुक्त माना जा रहा है. गोमती नदी के किनारे बने इस राष्ट्र प्रेरणा स्थल का निर्माण लगभग 232 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है. लंबे समय से प्रतीक्षित यह स्थल अब उद्घाटन के लिए तैयार है और उम्मीद है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25 दिसंबर, पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती पर इसका लोकार्पण करेंगे. पीएम मोदी के कार्यक्रम को मद्दे नजर रखते हुए लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) के अधिकारियों ने स्थल का निरीक्षण तेज कर दिया है. परिसर में वीवीआईपी, वीआईपी और आम जनता की एंट्री के लिए अलग-अलग गेट बनाए गए हैं. साथ ही, ग्रीन कॉरिडोर के माध्यम से पहुंचने की विशेष व्यवस्था भी की गई है. पूरे क्षेत्र में पार्किंग की सुविधा को प्राथमिकता दी गई है. अंदर और बाहर 1000-1000 वाहनों की क्षमता वाली दो बड़ी पार्किंग तैयार की गई हैं. इसके अलावा, चहारदीवारी के बाहर भी एक हजार वाहनों के लिए पार्किंग बनाई गई है ताकि बड़े आयोजनों के दौरान किसी तरह की अव्यवस्था न हो.  परिसर में आठ बड़े ब्लॉक, म्यूजियम ब्लॉक, कैफेटेरिया, मेडिटेशन सेंटर, एमपी थिएटर और पांच टॉयलेट ब्लॉक निर्मित किए गए हैं. यहां विभिन्न रैलियों, जनसभाओं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों को बिना यातायात की समस्या के आयोजित किया जा सकेगा, क्योंकि यह क्षेत्र शहर की भीड़भाड़ से दूर है. प्रेरणा स्थल की सबसे बड़ी आकर्षण भाजपा के तीन प्रमुख नेताओं अटल बिहारी वाजपेयी, पंडित दीनदयाल उपाध्याय और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 63 फीट ऊंची प्रतिमाएं हैं. यह देश में इन नेताओं की सबसे बड़ी मूर्तियां हैं. संरचना, डिजाइन और भव्यता के कारण यह स्थल लखनऊ का नया पहचान बिंदु बनने जा रहा है.  एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने कार्यदायी संस्था को 20 दिसंबर तक इस स्थल को हैंडओवर करने के निर्देश दिए हैं. उसके बाद इसे पीएम मोदी के उद्घाटन कार्यक्रम के अनुरूप सजाया-संवारा जाएगा. पीएम को निमंत्रण भेजा जा चुका है और पूरा प्रशासनिक तंत्र उद्घाटन की तैयारियों में जुट गया है.

1873 करोड़ की रेल लाइन से इंदौर में होगा नया ट्रांसपोर्ट युग, फरवरी तक शुरू हो सकता है ट्रेन संचालन

इंदौर इंदौर शहर का डेड एंड खत्म करने के लिए वर्षों से लंबित इंदौर-दाहोद रेल लाइन का काम अब तेजी से चल रहा है। रेलवे इस प्रोजेक्ट के इंदौर-धार रेल लाइन का काम अंतिम दौर में कर रहा है। फरवरी में सीआरएस (कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी) के निरीक्षण का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद धार तक ट्रेन चल जाएगी।  1873 करोड़ का है प्रोजेक्ट मालूम हो, धार क्षेत्र में आज तक ट्रेन नहीं पहुंची है। पीथमपुर, सागौर, गुणावद, टीही में स्टेशन बिल्डिंग, पटरियां बिछाने और ब्रिजों का काम अंतिम दौर में है। 204.76 किमी में इंदौर-दाहोद रेल लाइन प्रोजेक्ट वर्षों से अटका है। प्रोजेक्ट के लिए 1873.10 करोड़ मिले है। धार तक 21 ब्रिज बनने है, जिनमें से 19 का पूरा हो गया है। राजस्थान तक बढ़ेगी कनेक्टिविटी रतलाम रेल मंडल पीआरओ खेमराज मीना ने बताया कि धार लाइन से इंदौर का दाहोद, छोटा में से उदयपुर के जरिए मुंबई-गुजरात से सीधा जुड़ाव होगा। धार स्टेशन मांडू के जहाज महल की प्रतिकृति बनाया जा रहा है। इस रेल लाइन सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा। कृषि और व्यवसाय के लिए परिवहन मजबूत होगा। काम की स्थिति इंदौर से टीही 21 किमी राऊ से धार के लिए रेल लाइन डाली जानी है। राऊ से टीही तक 21 किमी तक ट्रैक बन चुका है। टीही तक मालगाड़ियों का संचालन हो रहा है। टीही से पीथमपुर 8.29 किमी टीही से पीथमपुर तक पटरियां बिछ चुकी हैं। राऊ से बिछे ट्रैक और नई पटरियों के बीच 2.9 किमी टनल का फिनिशिंग का काम चल रहा है। बाद टनल में पटरियां बिछेंगी। पीथमपुर से सागौर : 9.12 किमी पीथमपुर से सागौर के बीच पटरियां बिछाई जा चुकी हैं। पीथमपुर में स्टेशन की फिनिशिंग चल रही है. हालांकि स्टेशन के पीछे वाली भूमि का अधिग्रहण बाकी है। सागौर से गुणावद : 15.14 किमी 4 किमी से अधिक हिस्से में पटरियां डल गई हैं। इसके अलावा अन्य हिस्सों में पटरियां बिछाई जा रही हैं। स्टेशन का काम अंतिम दौर में है। गुणावय से धार: 14.02 किमी किमी से अधिक किमी तक पटरियां डाली जा चुका है। धार में स्टेशन का स्ट्रक्चर खड़ा होने के बाद फिनिशिंग की 9.8 जा रही है। धार से आगे तिरला तक अर्थ वर्क चल रहा है।

महिला को आज़ादी, शादीशुदा होने के बावजूद अपनी पसंद से रहने का अधिकार — MP हाईकोर्ट

इंदौर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने कहा कि महिला वयस्क है, भले ही वह शादीशुदा है तो वह अपनी मर्जी के हिसाब से किसी के साथ रह सकती है। दरअसल, एक याचिका की सुनवाई के दौरान महिला को शुक्रवार को हाई कोर्ट में पुलिस सुरक्षा के बीच लाया गया। महिला ने कोर्ट में कहा कि वह याचिकाकर्ता के साथ रहना चाहती है, लेकिन उसके माता-पिता ने उसे जबरन अपने पास रखा है। इधर महिला के माता-पिता ने कहा कि उसकी पहले ही शादी हो चुकी है। शादी के बाद उसे अपने पति के साथ रहना चाहिए। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद उक्त टिप्पणी की।  “मैं पूरी तरह बालिग हूँ और कानून मुझे यह अधिकार देता है कि मैं अपनी जिंदगी से जुड़े फैसले खुद लूं। मैं अपनी मर्जी से जिसके साथ चाहूँ, उसके साथ रह सकती हूँ। मेरे माता-पिता मेरी इच्छा के खिलाफ मुझे जबरन अपने पास रखे हुए हैं। मैं किसी दबाव में नहीं हूँ और स्पष्ट रूप से कहना चाहती हूँ कि मैं धीरज के साथ रहना चाहती हूँ। मुझे अपनी पसंद के अनुसार जीवन जीने दिया जाए।” पुलिस सुरक्षा के बीच  इंदौर हाई कोर्ट पहुंची महिला ने न्यायालय के सामने यह स्पष्ट बयान दिया। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर पीठ ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि यदि महिला वयस्क है तो वह अपनी इच्छा के अनुसार किसी के साथ भी रह सकती है। अदालत ने स्पष्ट किया कि महिला का शादीशुदा होना उसकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता और पसंद पर रोक नहीं लगा सकता। यह फैसला उस याचिका की सुनवाई के दौरान आया, जिसमें एक युवक ने आरोप लगाया था कि उसकी साथी को उसके माता-पिता ने जबरन अपने पास रखा हुआ है। यह मामला राजस्थान के सवाई माधोपुर निवासी धीरज नायक से जुड़ा है, जिन्होंने अपने अधिवक्ता जितेंद्र वर्मा के माध्यम से हाई कोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण (हैबियस कॉर्पस) याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया था कि धीरज ने संध्या नामक महिला से विवाह किया है और संध्या उसके साथ रहना चाहती है, लेकिन उसके माता-पिता उसे जबरदस्ती अपने घर में रखे हुए हैं और बाहर जाने की अनुमति नहीं दे रहे। पुलिस सुरक्षा में कोर्ट लाई गई महिला इस मामले की पिछली सुनवाई 2 दिसंबर को हुई थी, जिसमें हाई कोर्ट ने महिला को स्वयं कोर्ट के सामने पेश कर बयान दर्ज कराने के निर्देश दिए थे। कोर्ट के आदेश पर शुक्रवार को पुलिस सुरक्षा के बीच महिला को इंदौर हाई कोर्ट लाया गया। सुनवाई के दौरान महिला ने साफ तौर पर कहा कि वह अपनी मर्जी से याचिकाकर्ता धीरज नायक के साथ रहना चाहती है और उसके माता-पिता उसे उसकी इच्छा के विरुद्ध अपने पास रखे हुए हैं। महिला ने यह भी बताया कि इससे पहले कोर्ट के निर्देश पर एक न्यायिक दंडाधिकारी (JMFC) के समक्ष भी उसके बयान दर्ज कराए जा चुके हैं। उन बयानों में भी उसने यही कहा था कि उसे जबरन अपने माता-पिता के नियंत्रण में रखा गया है और वह स्वतंत्र रूप से अपनी जिंदगी का फैसला नहीं कर पा रही है। माता-पिता ने कहा, पहले से शादीशुदा है बेटी वहीं, महिला के माता-पिता की ओर से यह दलील दी गई कि उनकी बेटी की पहले ही शादी हो चुकी है। उनका कहना था कि शादी के बाद महिला को अपने पति के साथ ही रहना चाहिए और किसी अन्य व्यक्ति के साथ रहने का उसे अधिकार नहीं है। माता-पिता ने इसे सामाजिक और पारिवारिक मर्यादाओं से जोड़ते हुए कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग की। हालांकि, हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद महिला की उम्र और उसकी स्वतंत्र इच्छा को सबसे महत्वपूर्ण आधार माना। अदालत ने कहा कि कानून की नजर में यदि महिला बालिग है, तो उसे यह तय करने का पूरा अधिकार है कि वह किसके साथ और कहां रहना चाहती है। हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि किसी भी वयस्क महिला को उसकी इच्छा के विरुद्ध कहीं रोके रखना कानूनन गलत है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि शादीशुदा होना किसी महिला की व्यक्तिगत स्वतंत्रता को खत्म नहीं करता। संविधान द्वारा प्रदत्त व्यक्तिगत स्वतंत्रता और जीवन के अधिकार (अनुच्छेद 21) के तहत महिला अपने जीवन से जुड़े फैसले खुद लेने के लिए स्वतंत्र है। कोर्ट ने यह भी माना कि माता-पिता या परिवार की असहमति के बावजूद, यदि महिला ने स्पष्ट रूप से अपनी इच्छा जाहिर कर दी है, तो उसे उसी के अनुसार निर्णय लेने दिया जाना चाहिए। धीरज नायक को सौंपी गई महिला की सुपुर्दगी  हुई सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने आदेश दिया कि महिला को धीरज नायक के साथ ही रहने दिया जाए। कोर्ट ने महिला की सुपुर्दगी धीरज को सौंपते हुए पुलिस को निर्देश दिए कि वह दोनों को सुरक्षा प्रदान करे और सुरक्षित रूप से सवाई माधोपुर तक छोड़कर आए। अदालत ने यह आदेश भी दिया कि इस दौरान किसी प्रकार का दबाव, धमकी या हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए, ताकि महिला बिना किसी भय के अपने फैसले पर अमल कर सके। व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर फिर मुहर यह फैसला एक बार फिर यह स्थापित करता है कि भारतीय न्यायपालिका वयस्क महिलाओं की व्यक्तिगत स्वतंत्रता और पसंद के अधिकार को सर्वोपरि मानती है। इससे पहले भी कई मामलों में हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट यह कह चुके हैं कि बालिग महिला को यह अधिकार है कि वह अपनी मर्जी से जीवनसाथी चुने और उसके साथ रहे, चाहे परिवार या समाज को यह पसंद हो या नहीं।  विधि विशेषज्ञ मयंक सिंह ने कहा, कि यह आदेश उन मामलों में नजीर बनेगा, जहां पारिवारिक दबाव के चलते महिलाओं की स्वतंत्रता छीनी जाती है। अदालत का यह रुख साफ संकेत देता है कि कानून की नजर में सबसे अहम महिला की सहमति और उसकी इच्छा है, न कि सामाजिक दबाव या पारिवारिक परंपराएं।

फर्जी वोटरों के खिलाफ निर्णायक जंग: सीएम योगी बोले– बूथ बनेगा रणभूमि

लखनऊ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भाजपा नेतृत्व ने स्पष्ट किया कि आने वाला चुनाव बूथ स्तर पर लड़ा जाएगा और विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) ही उसकी सबसे बड़ी धुरी है। नवनिर्वाचित प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं को चेताते हुए कहा गया कि विरोधियों के पास ताकत नहीं है, लेकिन उनके छद्म और छल का जवाब देने के लिए कार्यकर्ताओं में उतना ही शौर्य और साहस होना चाहिए। मुख्यमंत्री योगी ने रविवार को संगठन पर्व के अंतर्गत प्रदेश अध्यक्ष एवं राष्ट्रीय परिषद सदस्य निर्वाचन समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा गया कि काशी कॉरिडोर का निर्माण, नैमिषारण्य सहित अन्य तीर्थ स्थलों का कायाकल्प और अयोध्या में भव्य राम मंदिर, यह सब बदले हुए उत्तर प्रदेश की पहचान है। पहले प्रदेश में बिजली इसलिए नहीं आती थी क्योंकि डकैती अंधेरे में ही डाली जा सकती थी, लेकिन अब रोस्टर के हिसाब से बिजली आपूर्ति हो रही है। एसआईआर को बेहद अहम बताते हुए कहा कि कार्यकर्ताओं की क्षमता पर कोई शक नहीं है, लेकिन कई बार उदारता के कारण लापरवाही हो जाती है। एसआईआर के दौरान अगर पूछा जाए तो अक्सर जवाब मिलता है कि हमारे यहां काम हो गया जबकि हकीकत यह नहीं होती। एक जिले में तो विरोधियों ने बांग्लादेशी घुसपैठियों के नाम तक मतदाता सूची में दर्ज करवा दिए हैं, जहां बेटे की उम्र 20 साल, पिता 30 साल और दादा 40 साल दिखाए गए हैं, जबकि मतदाता असम के रहने वाले हैं। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि हर बूथ से फर्जी नामों पर आपत्ति दर्ज कराई जाए और जो वास्तविक मतदाता सूची से छूट गए हैं, उनके नाम हर हाल में जुड़वाए जाएं। बताया गया कि यूपी की आबादी करीब 25 करोड़ है, इस हिसाब से लगभग 16 करोड़ मतदाता होने चाहिए, लेकिन एसआईआर के बाद सूची में केवल 12 करोड़ नाम सामने आए हैं। यानी चार करोड़ मतदाताओं का गैप है, जिनमें 85 से 90 प्रतिशत भाजपा के संभावित मतदाता हैं। कार्यकर्ताओं के पास केवल 12 दिन हैं और याद रखें—चुनावी लड़ाई बूथ पर ही जीती जाती है। उन्होंने कहा कि चुनाव की तीन-चौथाई मेहनत अभी करनी है। अगर यह मेहनत कर ली गई तो चुनाव में एक-चौथाई प्रयास से ही तीन-चौथाई सीटें जीती जा सकती हैं। हर बूथ पर फॉर्म नंबर-6 भरवाने में कोई कोताही न बरती जाए, क्योंकि बूथ की मेहनत ही परिणाम लाती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नवनिर्वाचित प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी का स्वागत करते हुए चुनाव प्रक्रिया को निर्विवाद रूप से संपन्न कराने के लिए डॉ. महेंद्रनाथ पांडे का आभार जताया। उन्होंने कहा कि अनुभवी कार्यकर्ता को जिम्मेदारी मिलने से सरकार और संगठन मिलकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत–विकसित उत्तर प्रदेश’ के संकल्प को पूरा करेंगे। सीएम योगी ने कहा कि आज पूरी दुनिया का नजरिया भारत और भारतवासियों के प्रति बदला है। जो देश कभी भारत को नजरअंदाज करते थे, अब वही भारत को वैश्विक नेतृत्व के रूप में देख रहे हैं। उत्तर प्रदेश में जो परिवर्तन हुआ है, वह डबल इंजन सरकार और एक-एक कार्यकर्ता की ताकत का परिणाम है। आज यूपी दंगा, माफिया और अपराध मुक्त होकर पर्यटन और निवेश का बड़ा केंद्र बन चुका है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में पौने नौ लाख युवाओं को सरकारी नौकरी दी गई है, 15 लाख करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाएं धरातल पर उतरी हैं और यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में 11 हजार करोड़ रुपये का व्यापार हुआ है।

झारखंड में सुरक्षाबलों पर हमला, IED ब्लास्ट में CRPF का जवान जख्मी

चाईबासा झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के सारंडा के घने जंगलों में रविवार को चल रहे सर्च ऑपरेशन के दौरान नक्सलियों द्वारा लगाए गए इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी) के विस्फोट में सीआरपीएफ की कोबरा बटालियन 209 का एक जवान गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना छोटानगरा थाना क्षेत्र के बलिबा गांव के पास की बताई जा रही है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, सुरक्षा बलों की संयुक्त टीम नक्सल विरोधी अभियान के तहत जंगल क्षेत्र में सर्च ऑपरेशन चला रही थी। इसी दौरान नक्सलियों द्वारा पहले से बिछाए गए आईईडी में अचानक विस्फोट हो गया, जिसकी चपेट में आकर कोबरा बटालियन का जवान गंभीर रूप से घायल हो गया। विस्फोट के तुरंत बाद ऑपरेशन में शामिल अन्य सुरक्षा कर्मियों ने स्थिति संभालते हुए घायल जवान को मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया। जवान की हालत गंभीर होने के कारण उसे बेहतर इलाज के लिए तत्काल सुरक्षित स्थान पर ले जाने की प्रक्रिया शुरू की गई। प्रशासन द्वारा घायल जवान को जल्द से जल्द एयरलिफ्ट कर रांची ले जाने की व्यवस्था की जा रही है, ताकि उसे उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा सके। घटना के बाद सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके को घेर लिया है और अतिरिक्त बलों की तैनाती के साथ सर्च ऑपरेशन को और तेज कर दिया गया है। आशंका जताई जा रही है कि इलाके में नक्सलियों ने और भी आईईडी बिछा रखे हैं। इसे देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां अत्यंत सतर्कता के साथ इलाके की गहन तलाशी ले रही हैं। सुरक्षा अधिकारियों ने बताया कि नक्सलियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है और क्षेत्र में किसी भी तरह की संदिग्ध हलचल को लेकर कड़ी निगरानी की जा रही है। फिलहाल ऑपरेशन जारी है और स्थिति पर प्रशासन की पैनी नजर बनी हुई है।