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लालू परिवार को बड़ी राहत! लैंड फॉर जॉब केस पर आज निर्णय नहीं, कोर्ट ने CBI को दिया खास टास्क

पटना  चर्चित लैंड फॉर जॉब केस में राउज एवेन्यू कोर्ट दिल्ली का फैसला टल गया है। इससे लालू परिवार को फौरी राहत मिल गई है। अगली सुनवाई 8 दिसम्बर को होगी। कोर्ट ने जांच एजेंसी सीबीआई को एक अहम टास्क दिया है कोर्ट आज गुरुवार को लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, तेज प्रताप यादव, मीसा भारती, हेमा यादव और अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने को लेकर सुनवाई हुई। इस मामले में कोर्ट ने फिलहाल अपना आदेश स्थगित कर दिया है।   इस मामले में अदालत ने सीबीआई से आरोपियों की स्थिति की जानकारी स्पष्ट करने का टास्क दिया है। कार्यवाही के दौरान इस कांड के कुछ आरोपियों की मृत्यु हो गई। अदालत ने सीबीआई से स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है और मामले की सुनवाई 8 दिसंबर के लिए निर्धारित की है। सीबीआई ने 103 लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया था। हालाँकि, कार्यवाही के दौरान 4 की मृत्यु हो गई। कोर्ट ने मामले की तफ्तीश कर रही सीबीआई को आदेश दिया है कि सभी आरोपियों का स्टेटस वेरिफिकेशन कर रिपोर्ट दाखिल करे। लालू परिवार के लिए नासूर बन चुके इस केस की सुनवाई काफी दिनों से चल रही है। अदालत की कार्यवाही के दौरान कांड के चार आरोपितों की मौत हो गई। इसे लेकर अदालत ने कहा कि जब तक प्रत्येक अभियुक्त की वर्तमान स्थिति स्पष्ट नहीं हो जाए तबतक आरोप तय करने जैसी संवेदनशील प्रक्रिया आगे बढ़ाना उचित नहीं होगा। इसी वजह से कोर्ट ने केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई से अभियुक्तों का स्टेटस रिपोर्ट फाइल करने का निर्देश दिया है। इस मामले में आरोप है कि रेलवे के पश्चिम मध्य क्षेत्र में ग्रुप-डी श्रेणी में लालू यादव के रेल मंत्री रहने के दौरान की गई गलत तरीके से नियुक्तियां की गईं। इसके एवज में लालू परिवार के सदस्यों या अन्य सहयोगियों के नाम पर जमीनों की रजिस्ट्री कराई गई। मामला 2004 से 2009 के बीच का है जब लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री थे।  

CM भगवंत मान का नया अभियान: नशे के खिलाफ संग्राम को मजबूत करेगी मेंटल हेल्थ फैलोशिप

चंडीगढ़  पंजाब में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर ऐतिहासिक शुरुआत हुई है. मुख्यमंत्री भगवंत मान ने देश की पहली सरकारी लीडरशिप इन मेंटल हेल्थ प्रोग्राम लॉन्च किया है. उन्होंने कहा कि युद्ध नशे विरुद्ध सिर्फ नारा नहीं, बल्कि एक जमीनी लड़ाई है, जिसमें हर परिवार की सुरक्षा और भविष्य दांव पर है. यह फेलोशिप 2 साल की होगी. जिसमें न सिर्फ पंजाब, बल्कि पूरे भारत के लिए एक मॉडल बनने जा रही है. एम्स मोहाली और टीआईएसएस मुंबई की साझेदारी में शुरू हुई यह पहल 23 जिलों में मानसिक स्वास्थ्य और नशा-निवारण को बिल्कुल नए स्तर पर ले जाएगी. सरकार 35 ऐसे युवा विशेषज्ञ चुन रही है जो साइकोलॉजी या सोशल वर्क की पढ़ाई कर चुके हैं और जिनके पास मानसिक स्वास्थ्य में काम करने का अनुभव है. ये फेलो पंजाब के गांव, शहर, स्कूल, कॉलेज, कम्युनिटी सेंटर और रिहैब सुविधाओं तक पहुँचकर एक ऐसे मॉडल को लागू करेंगे जिसकी कल्पना भारत ने पहले नहीं की रोकथाम, उपचार और पुनर्वास तीनों को एक साथ जोड़कर. समाज को मजबूत करने की जरूरत भगवंत मान यह मानते हैं कि नशे से लड़ाई सिर्फ पुलिस या प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के मन को मजबूत करने की जरूरत है. इसी सोच के चलते इस कार्यक्रम में फेलोज़ को टीआईएसएस मुंबई से विशेष ट्रेनिंग, मेंटरशिप और जमीनी नेतृत्व सीखने का मौका मिलेगा. उन्हें 60,000 रुपये महीना का सम्मानजनक रिम्यूनरेशन भी मिलेगा, ताकि वे बिना किसी दबाव के पूरी ऊर्जा से पंजाब के युवाओं और परिवारों के साथ काम कर सकें. नशा महामारी की तरह फैल चुका है यह कार्यक्रम असल मायने में पंजाब के दिल की धड़कन है. नशा एक महामारी की तरह फैल चुका था, लेकिन अब पंजाब ने यह लड़ाई विशेषज्ञों के साथ मिलकर, वैज्ञानिक तरीकों से और लोगों के बीच उतरकर लड़ने का फैसला लिया है. भगवंत मान ने दिखा दिया है कि जब नीयत साफ हो और लक्ष्य जनता की भलाई हो, तो सरकारें बदलाव लेकर आती हैं, बयान नहीं. पंजाब के भविष्य में निवेश 7 दिसंबर तक आवेदन खुले हैं, और अधिक जानकारी के लिए https://tiss.ac.in/lmhp पर जाकर देख सकते है. यह सिर्फ एक फेलोशिप नहीं, बल्कि पंजाब के भविष्य में निवेश है, एक ऐसा भविष्य जहां हर घर सुरक्षित हो, हर युवा स्वस्थ हो, और हर माता-पिता नशे के डर के बिना अपने बच्चों को बड़ा कर सकें. यह वही पंजाब है जिसकी कल्पना भगवंत मान ने की थी और अब वह धीरे-धीरे हकीकत बन रहा है.  

इंडिगो फ्लाइट खराबी से पटना हवाई अड्डे पर तबाही, कल कई उड़ानें रद्द

पटना मौसम ठंढा होने की वजह से कई फ्लाइट तो प्रभावित हुए ही लेकिनएयरलाइन इंडिगो के क्रू रोस्टर और शेड्यूलिंग सॉफ्टवेयर में अचानक आई भीषण तकनीकी खराबी के कारण भी बुधवार को पूरे देश में लगभग 130 से ज्यादा उड़ानें रद्द कर दी गई थीं। पटना एयरपोर्ट पर भी यात्री काफी परेशान रहे। तकनीकी खराबी का असर पटना के जयप्रकाश नारायण अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर भी साफ तौर पर दिखा, जहां दिल्ली-पटना-दिल्ली सेक्टर की तीन महत्वपूर्ण जोड़ी फ्लाइट्स को रद्द करना पड़ा। बताया जाता है कि करीब एक दर्जन से अधिक उड़ानें अपने निर्धारित समय से एक से तीन घंटे की भारी देरी से संचालित हुईं। शुक्रवार सुबह की कोलकाता और दिल्ली की एक-एक फ्लाइट भी रद्द रहने की आशंका है। सॉफ्टवेयर की खामी से फंसे रहे लगभग 1000 यात्री तीन जोड़ी फ्लाइट्स रद्द होने के चलते अकेले दिल्ली और पटना में लगभग 1000 यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई यात्री शादी-विवाह जैसे महत्वपूर्ण आयोजनों में शामिल होने के लिए सफर कर रहे थे। यात्रियों ने आक्रोश व्यक्त करते हुए बताया कि उन्होंने 15,000 से 18,000 रुपये तक में टिकट खरीदे थे। इंडिगो ने अपने यात्रियों को राहत देने की घोषणा की हालांकि इसको लेकर इंडिगो का भी बयान सामने आया है। इस संबंध में उनका कहना है कि इस तकनीकी खराबी को एक-दो दिनों में ठीक कर लिया जाएगा। साथ ही, यात्रियों को टिकट का पूरा रिफंड दिया जाएगा या वे चाहें तो अपनी यात्रा तिथि आगे भी बढ़ा सकते हैं। फ्लाइटों में देरी और रद्दीकरण की वजह से पटना एयरपोर्ट के टर्मिनल पर दिन भर भारी भीड़ और अफरातफरी का माहौल बना रहा। हालांकि, एयरलाइन ने कुछ रद्द हुई फ्लाइटों के यात्रियों को अन्य उपलब्ध विमानों से भेजने की व्यवस्था की।

जब भी हम संकट में होते हैं तो महापुरुषों के शौर्य व पराक्रम नई ऊर्जा देते हैः मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

राष्ट्र की संस्कृति समाप्त हो जाए तो वह अपनी एकात्मता व पहचान को खो देता हैः मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जब भी हम संकट में होते हैं तो महापुरुषों के शौर्य व पराक्रम नई ऊर्जा देते हैः मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ  एसडीआरएफ के उपाध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल योगेंद्र डिमरी (से.नि.) ने किया महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के संस्थापक सप्ताह समारोह-2025 का शुभारंभ  महंत दिग्विजयनाथ महाराज ने 1932 में गोरखपुर में की थी महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की स्थापनाः गोरक्षपीठाधीश्वर  गोरखपुर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के संस्थापक सप्ताह समारोह-2025 के शुभारंभ अवसर पर स्वदेश, स्वधर्म व राष्ट्रीय स्वाभिमान का जिक्र किया और कहा कि जब भी हम संकट में होते हैं या कोई राष्ट्रीय चुनौती होती है तो महापुरुषों के चित्र, उनके शौर्य व पराक्रम नई ऊर्जा देते हैं। महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी, गुरु गोविंद सिंह, रानी लक्ष्मीबाई समेत सीमाओं की रक्षा करते हुए बलिदान देने वाले भारत मां के बहादुर जवान देश के लिए प्रेरणा हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राष्ट्र की पहचान वहां की संस्कृति, परंपराएं और महापुरुष होते हैं, यह एक-दूसरे से जुड़े हैं। राष्ट्र की संस्कृति समाप्त हो जाए तो राष्ट्र अपनी एकात्मता व पहचान को खो देता है। संस्कृति उन राष्ट्रीय मूल्यों से बनती है, जिन्हें समय-समय पर अलग-अलग युगांतकारी घटनाओं ने संबल और शक्ति दी। जिन्हें विभिन्न पर्वों के माध्यम से पूरा भारत बिना भेदभाव के आत्मसात करता है। पर्व में मतभेदों को समाप्त करके हम ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की अभिव्यक्ति को प्रदर्शित करते हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जब भी हम संकट में होते हैं तो महापुरुषों के शौर्य व पराक्रम नई ऊर्जा देते है।  महंत दिग्विजयनाथ महाराज द्वारा 1932 में गोरखपुर में स्थपित महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के संस्थापक सप्ताह समारोह-2025 का शुभारंभ उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष लेफ्टिनेंट योगेंद्र डिमरी (से.नि.) ने किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के अध्यक्ष के रूप में कार्य करने वाले स्मृतिशेष प्रो. यूपी सिंह व अन्य दिवंगत सदस्यों को श्रद्धांजलि दी।   यह आत्ममंथन का अवसर  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद अगले छह वर्ष के अंदर होने वाले शताब्दी महोत्सव के कार्यक्रम के साथ बढ़ रहा है। ऐसे में शिक्षा परिषद व संस्थाओं के सामने 100 वर्षों की इस यात्रा के आत्ममंथन का अवसर है। यह समारोह इस पर आत्मावलोकन का अवसर प्रस्तुत कर रहा है कि छात्र के सर्वांगीण विकास, समाज व राष्ट्र के प्रति हमने अपनी भूमिका का निर्वहन किस रूप में किया है। महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के संस्थापकों ने जो विराट लक्ष्य रखा है, वह समाज व राष्ट्र के प्रति हमारी सेवाएं-कर्तव्य के समय-समय पर मूल्यांकन का भी है। हमारे संस्थापकों ने छात्र-छात्राओं के सामने महाराणा प्रताप के रूप में आदर्श रखा।  शिक्षा के विजन के साथ ही स्वास्थ्य, कृषि आदि पर जोर दे रहा परिषद  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि विकसित भारत के निर्माण, अपनी संकल्पना और भावना को बढ़ाने के लिए संस्थापकों ने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की स्थापना की। परिषद शिक्षा के विजन के साथ ही स्वास्थ्य, कृषि, महाराणा प्रताप इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, महाराणा प्रताप पॉलीटेक्निक आदि के जरिए तकनीक पर जोर दे रहा है तो वहीं महिलाओं की शिक्षा, अन्नदाता किसानों के प्रशिक्षण के लिए महायोगी गोरखनाथ कृषि विज्ञान केंद्र या अन्न संस्थाएं दूरदराज के क्षेत्रों में नए प्रयास को बढ़ाने के साथ ही कार्य कर रही हैं।  संस्थापक समारोह का उद्देश्य- हम कर्तव्य व तैयारियों का कर सकें आत्मावलोकन  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि संस्थापक समारोह का उद्देश्य है कि हम संस्थापकों के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करते हुए कर्तव्यों व तैयारियों का आत्मावलोकन कर सकें कि आने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए हमें खुद को कैसे तैयार करना है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भावी भारत के निर्माण में अपने उत्तरदायित्वों को भी बखूबी समझना होगा। संस्थाएं जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए प्रतिवर्ष नयापन करने का प्रयास कर रही हैं।  शिक्षण-प्रशिक्षण संस्थाओं को बनना ही होगा मॉडल स्टडी का माध्यम  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महंत दिग्विजयनाथ पीजी कॉलेज द्वारा शोध पत्रिका ‘दिग्विजयम्’ और महाराणा प्रताप पीजी कॉलेज द्वारा ‘मिशन मंझरिया’ के विमोचन का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि एक ओर शिक्षित बेरोजगारों की फौज खड़ी होती है तो दूसरी तरफ निरक्षरता की लंबी खाई दिखाई पड़ती है। महाराणा प्रताप पीजी कॉलेज को इसमें योजक की भूमिका में दिखाई दिया है। यहां के शिक्षा संकाय के छात्रों द्वारा गांव को शत-प्रतिशत साक्षर बनाने के लक्ष्य को बढ़ाने की दिशा में गोद लिया गया, उन्होंने इसे मॉडल स्टडी के रूप में प्रस्तुत किया। सीएम योगी ने कहा कि शिक्षण-प्रशिक्षण संस्थाओं को मॉडल स्टडी का माध्यम बनना ही होगा।  समाज व राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं संस्थान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारतीय संस्कृति में किसी भी मनुष्य के लिए अयोग्य शब्द नहीं कहा गया है। अयोग्य मतलब उसकी मनुष्यता पर प्रश्नचिह्न खड़ा कर रहे हैं। यदि कोई व्यक्ति अयोग्य है तो इसका मतलब कोई योजक नहीं है। उन्होंने कहा कि अयोग्यता-निरक्षरता शैक्षिक समाज पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। सीएम योगी ने परिषद के सभी शिक्षण-प्रशिक्षण संस्थाओं द्वारा सेवा भाव के कार्यों का जिक्र किया। बताया कि कोई कुष्ठ सेवाश्रम तो कोई संस्थान थारू, वनटांगिया के छात्रों को गोद लेकर पढ़ा रहा है तो कोई संस्थान अन्य जिम्मेदारियों के साथ समाज व राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहा है और यही राष्ट्र के प्रति हमारी सेवा भी है।  समारोह में महापौर डॉ. मंगलेश वास्तव, जिला पंचायत अध्यक्ष साधना सिंह, कुलपति प्रो. पूनम टंडन, प्रो. जेपी सैनी, प्रो. रविशंकर सिंह, डॉ. सुरेंद्र सिंह, विधायक फतेह बहादुर सिंह, विपिन सिंह, महेंद्र पाल सिंह, इंजी. सरवन निषाद, प्रदीप शुक्ला, विधान परिषद सदस्य डॉ. धर्मेंद्र सिंह, रतनपाल सिंह, पूर्व महापौर अंजू चौधरी आदि मौजूद रहे।

इमानदारी से कर्तव्य पालन करना, पर्यावरण संरक्षण, लोक कल्याण और अच्छा नागरिक बनना, वास्तविक देशभक्ति है – ले.जनरल योगेंद्र डिमरी (से.नि.)

अंग्रेजी शासन के दौरान भारतीय मूल्यों और संस्कारों पर आधारित शिक्षण संस्थान की स्थापना करना, सच्ची राष्ट्रसेवा है- लेफ्टिनेंट जनरल योगेंद्र डिमरी (से.नि.)   इमानदारी से कर्तव्य पालन करना, पर्यावरण संरक्षण, लोक कल्याण और अच्छा नागरिक बनना, वास्तविक देशभक्ति है – ले.जनरल योगेंद्र डिमरी (से.नि.)     महाराणा प्रताप शिक्षण परिषद के संस्थापक-सप्ताह उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए यूपी एडीआरएफ के उपाध्यक्ष, ले.जनरल योगेंद्र डिमरी (से.नि.)   गोरखपुर गोरखपुर में महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के संस्थापक-सप्ताह समारोह 2025 का उद्घाटन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष, लेफ्टिनेंट जनरल योगेंद्र डिमरी जी (से.नि.) शामिल हुए। उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए लेफ्टिनेंट जनरल योगेंद्र डिमरी ने छात्र-छात्राओं को महाराणा प्रताप के अनुकरणीय जीवन से प्रेरणा लेने और जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए अनुशासन, साहस, समर्पण, समानता और प्रतिबद्धता के मूल्यों को अपनाने लिए प्रेरित किया। साथ ही उन्होंने कहा कि देशभक्ति केवल सीमा पर साहस दिखाना ही नहीं बल्कि इमानदारी से अपने कर्तव्य का पालन करना, पर्यावरण की रक्षा, लोक कल्याण और समाज का एक अच्छा नागरिक बनना भी  वास्तविक देशभक्ति है। उन्होंने कहा कि आप सभी सौभाग्यशाली हैं कि महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के माध्यम से आप सफलता के इन मूल्यों का संस्कार प्राप्त कर रहे हैं।  महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के संस्थापक-सप्ताह समारोह 2025 के उद्घाटन कार्यक्रम का आयोजन गोरखपुर में किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए लेफ्टिनेंट जनरल योगेंद्र डिमरी (से.नि.) ने अंग्रजों के शासन और  स्वतंत्रा संघर्ष के दौरान भारतीय संस्कारों और शिक्षा मूल्यों पर आधारित महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की स्थापना और उसके निरंतर राष्ट्रसेवा में योगदान देने की सरहाहना की एवं शिक्षा परिषद के संस्थापकों के प्रति आभार और सम्मान व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि जब देश में अग्रेंजी शासन और अंग्रेजियत का बोलबाला था ऐसे में 1916 में काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी और 1932 में महाराणा प्रतापा शिक्षा परिषद की गोरखपुर में नींव रखना भारतीयता और राष्ट्र की सच्ची सेवा थी। उन्होंने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के संस्थापक महंत दिग्विजय नाथ, राष्ट्र संत महंत अवेद्यनाथ व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एवं शिक्षा परिषद के सभी शिक्षकों राष्ट्रसेवा के इस संकल्प को सफल बनाने के लिए आभार व्यक्त किया।   उद्घाटन अवसर पर छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा ही महाराणा प्रताप का जीवन हम सबके लिए अनुकरणीय है किस प्रकार उन्होंने अकेले, अन्य राजपूत राजाओं के सहयोग के बिना भी शक्तिशाली मुगल साम्राज्य की अवज्ञा की और आत्मबलिदान, त्याग और समर्पण के मूल्यों की अमर गाथा हम सबके लिए ये प्रस्तुत की। यही कारण था कि 17वीं शताब्दी में छत्रपति शिवाजी महाराज हो या 19वीं, 20वीं शताब्दी के राष्ट्र के क्रांतिकारियों ने उनसे प्रेरणा प्राप्त की। महाराणा प्रताप के जीवन से हमें अनुशासन, ईमानदारी, समर्पण और प्रतिबद्धता के जिन मूल्यों की शिक्षा मिलती है वो ही आपको जीवन में सफल बनाएंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि आप सभी सौभाग्यशाली हैं कि महाराणा प्रताप शिक्षण संस्थान में आप इन मूल्यों और संस्कारों को प्राप्त कर रहे हैं।  अपने संबोधन में उन्होंने बताया कि देशभक्ति केवल देश की सीमा पर साहस दिखाना ही नहीं, इमानदारी से अपने कर्यव्यों का निर्वहन करने, पर्यावरण संरक्षण, लोक कल्याण और अच्छा नागरिक बनान सच्ची देशभक्ति हैं। अपने जीवन के व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा कि सेना भी ऐसे नौजवानों को चुनती है जो जीवन में अनुशासन, समर्पण और कर्तव्यपालन को सर्वोपरी मानते हैं। अनुशासन ही सफलात की सीढ़ी है। उन्होंने शिक्षा परिषद की प्रतियोगिताओं में छात्र-छात्राओं को भागीदारी करने के लिए भी प्रेरित किया और कहा की हार और जीत निर्णायक नहीं है प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग करना सबसे जरूरी है। असफलता से निराश होने की जरूरत नहीं है, असफलता ही हमें सफलता का मार्ग दिखाती है। उन्होंने सचिन तेंदुलकर के जीवन का प्रसंग और परिणाम की चिंता किए बगैर कर्व्यपालन करने के भागवत् गीता के श्लोक – कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन् को अनुकरणीय बताया। साथ ही उन्होंने तेजी से बदल रही तकनीकि, एआई, रोबोटिक्स के प्रति भी छात्रों को सजग रहने को कहा। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में केवल एक मजबूत चरित्र और सही तकनीक की समझ ही सफलता दिलाएगी। लेकिन हमें ये याद रखना है कि विजय मैदान में नहीं मन पर होती है, शक्ति हथियार में नहीं संस्कार में होती है।

UPPSC भर्ती 2025: 513 लेक्चरर पदों पर आवेदन शुरू, तकनीकी स्नातकों के लिए बड़ा मौका

लखनऊ उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) ने तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ी भर्ती की घोषणा की है। आयोग ने उत्तर प्रदेश प्राविधिक शिक्षा (अध्यापन) सेवा परीक्षा-2025 के तहत पॉलीटेक्निक संस्थानों में लेक्चरर और अन्य समकक्ष पदों के लिए 513 रिक्तियों का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इंजीनियरिंग और तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में करियर बनाने की इच्छा रखने वाले उम्मीदवारों के लिए यह एक सुनहरा मौका है। ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया 2 दिसंबर 2025 से शुरू हो चुकी है और उम्मीदवार जल्द से जल्द आवेदन करके इस अवसर का लाभ उठा सकते हैं। यह भर्ती कुल 513 पदों के लिए हो रही है। इन पदों में मैकेनिकल इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, सिविल इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग, कंप्यूटर, आर्किटेक्चर, फिजिक्स, केमिस्ट्री और गणित जैसे विभिन्न विषय शामिल हैं। आवेदन शुरू होने की तिथि: 2 दिसंबर 2025 आवेदन और फीस जमा करने की अंतिम तिथि: 2 जनवरी 2026 आवेदन में सुधार की अंतिम तिथि: 9 जनवरी 2026 इच्छुक उम्मीदवार अंतिम तिथि से पहले UPPSC की आधिकारिक वेबसाइट uppsc.up.nic.in पर जाकर अपना आवेदन फॉर्म भर सकते हैं। शैक्षणिक योग्यता और आयु सीमा इन पदों पर आवेदन करने के लिए अलग-अलग विषयों के अनुसार शैक्षणिक योग्यता भी अलग-अलग निर्धारित की गई है। इंजीनियरिंग/टेक्निकल ब्रांच के लेक्चरर: उम्मीदवार के पास संबंधित विषय में फर्स्ट क्लास के साथ बी.ई./बी.टेक. या समकक्ष डिग्री होनी चाहिए। कुछ पदों के लिए मास्टर डिग्री भी आवश्यक है। नॉन-इंजीनियरिंग (साइंस एवं ह्यूमैनिटीज) लेक्चरर: संबंधित विषय में फर्स्ट क्लास के साथ मास्टर डिग्री (जैसे फिजिक्स, केमिस्ट्री, अंग्रेजी, गणित)। आयु सीमा: उम्मीदवारों की आयु 1 जुलाई 2025 तक 21 वर्ष से 40 वर्ष के बीच होनी चाहिए। आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार ऊपरी आयु सीमा में छूट दी जाएगी। चयन प्रक्रिया और वेतन लेक्चरर के पदों पर चयन मुख्य रूप से तीन चरणों में होगा। लिखित परीक्षा : यह पहला और सबसे महत्वपूर्ण चरण है। इंटरव्यू: लिखित परीक्षा में सफल उम्मीदवारों को 100 अंकों के इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा। डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन: अंतिम चयन लिखित परीक्षा और इंटरव्यू में प्राप्त अंकों के आधार पर होगा। इन पदों पर चयनित उम्मीदवारों को सातवें वेतन आयोग के तहत आकर्षक वेतनमान दिया जाएगा। शुरुआती वेतन लगभग 56,100 रुपये से 57,700 रुपये प्रति माह (पे लेवल 9A/10) तक होगा, जिसके साथ अन्य सरकारी भत्ते भी मिलेंगे। आवेदन करने से पहले उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे आधिकारिक नोटिफिकेशन को ध्यान से पढ़ें ताकि वे सभी पात्रता मानदंडों को पूरा करते हों।  

दिल्ली में BJP का मास्टरस्ट्रोक: दो सीट कम, पर बढ़त सबसे दमदार!

नई दिल्ली दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) की 12 सीटों पर हुए उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने 7 जीतकर अपना दबदबा कायम रखा। भाजपा दिल्ली में सरकार बनने के बाद हुई अपनी पहली परीक्षा में 'टॉप' करके गदगद है तो आम आदमी पार्टी यह कहकर उसकी जीत को कमतर कर रही है कि सत्ताधारी के पास मौजूद रहीं 9 सीटों पर उपचुनाव हुआ था और वह अब सात ही जीत पाई है। हालांकि, आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि भाजपा ने वोट शेयर के मामले में बड़ी छलांग लगाई है और उसकी खुशी की असली वजह भी यही है।   2022 में हुए नगर निगम चुनाव में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा था। तब पार्टी को 39 फीसदी वोट शेयर हासिल हुए थे, जबकि 42 फीसदी वोट शेयर लेकर अरविंद केजरीवाल की अगुआई वाली वाली 'आप' पहली बार निगम में काबिज हुई थी। हालांकि, विधानसभा चुनाव के बाद आप के कई पार्षदों ने मिलकर नया गुट बना लिया और भाजपा ने दोबारा एमसीडी पर कब्जा कर लिया। इस उपचुनाव में भाजपा के वोट शेयर में बड़ा उछाल देखने को मिला है। 45 फीसदी वोटर्स ने भाजपा के पक्ष में मतदान किया है। 2022 के मुकाबले पार्टी को 6 फीसदी अधिक वोट मिले हैं। जनसमर्थन में हुई इस वृद्धि से निश्चित तौर पर पार्टी गदगद है। चुनाव नतीजों के बाद प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा से जब दो सीटें कम होने पर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि स्थानीय समीकरणों की वजह से ऐसा हुआ होगा, लेकिन उन्हें आम आदमी पार्टी से करीब 10 फीसदी अधिक वोट मिले हैं। आम आदमी पार्टी को बड़ा झटका आप भले ही अपने प्रदर्शन को बरकरार रख पाई, लेकिन वोट शेयर के मामले में उसे बड़ा नुकसान हुआ है। जिन सीटों पर उपचुनाव हुए हैं उनमें से आप के पास पहले तीन सीटें थीं और अब भी पार्टी इतनी ही सीटें जीत पाई है और इसे गिनाकर वह अपना संतोष जाहिर कर रही है। हालांकि, वोट शेयर के मामले में उसे 7 फीसदी का नुकसान झेलना पड़ा है। 2022 में 42 फीसदी वोट शेयर हासिल करने वाली आप को अस बार 35 फीसदी वोटर्स ने ही चुना है। कांग्रेस के वोट शेयर में भी वृद्धि इस उपचुनाव में कांग्रेस भी एक सीट पर जीत हासिल करने में सफल रही। तब कांग्रेस को 11.68 फीसदी वोट मिले थे तो इस बार 13.4 फीसदी वोट मिले हैं।  

रिश्तों में जलन और खौफ़: पूनम ने कैसे रंजिश को बनाया चार कत्लों का कारण?

सोनीपत दिल्ली से सटे हरियाणा के सोनीपत में एक बेहद डरावनी और हैरान करने वाली घटना सामने आई है। यहां पूनम नाम की एक महिला ने चार सालों में चार बच्चों का बेरहमी से कत्ल कर डाला, जिनमें उसका अपना बेटा भी शामिल है। वह जलन की वजह से सुंदर बच्चियों को चुन-चुनकर मारती रही। जांच के दौरान यह भी पता चला है कि जिस भतीजी विधि को पानी में डुबोकर मारने की वजह से पूनम पकड़ी गई, उसकी हत्या की एक कोशिश उसने चार साल पहले भी की थी। तब उसने 2 साल की उस बच्ची के चेहेरे पर एक बड़ी केतली से चाय उड़ेल दी। तब परिवारवालों ने इसे एक हादसा समझा था। सोमवार को पूनम ने अपने दूसरे प्रयास में विधि की जान ले ली। आरोप है कि पूनम ने 6 साल की भतीजी को एक टब में डुबा दिया। बच्ची के दम तोड़ने के बाद उसकी दादी ने बच्ची की लाश को देखा तो चीख-पुकार मच गई। एक बार फिर शुरुआत में विधि की मौत को हादसा समझा गया, लेकिन जांच में जो बातें सामने आईं उससे सभी हैरान रह गए। पता चला कि सुंदरता से जलन की वजह से पूनम ने रिश्तेदारों की तीन बेटियों को मार डाला था। उसने अपने बेटे की जान क्यों ली यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। पुलिस का मानना है कि उसने अपने बेटे शुभम को 2023 में इसलिए मारा क्योंकि पहली हत्या के बाद कुछ लोगों को उस पर शक होने लगा था और वह खुद को भी पीड़ित दिखाकर ध्यान भटका सके। पूनम मूल रूप से पानीपत के सिवाह गांव की रहने वाली है और शादी के बाद सोनीपत के भावर गांव में रहती है। पूनम को बुधवार को अदालत में पेश किया गया, जिसके बाद उसे पुलिस हिरासत में भेज दिया गया। आरोपी का पति नवीन और विधि के पिता संदीप चचेरे भाई हैं। पूनम की पहली शिकार 2023 में 9 साल की इश्किा थी। तीसरी मृतक 8 वर्ष की जिया थी। पुलिस का मानना है कि उसे भी इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि वह ‘ज्यादा सुंदर’ थी। अब तक 3 बच्चों को मार चुकी पूनम को यकीन हो चला था कि वह इसी तरह कत्ल करके अपनी सनक मिटाती रहेगी और पकड़ी नहीं जाएगी, लेकिन विधि के कत्ल के बाद उसका पर्दाफाश हो गया। सोमवार को एक शादी समारोह को लेकर चल रही हंसी-खुशी के बीच 6 साल की विधि अचानक गायब हो गई थी। एसपी भूपेंद्र सिंह ने कहा कि शिकायत दर्ज कराने वाली उसकी दादी ने बताया कि उनके एक परिवार में 30 नवंबर से एक दिसंबर तक शादी समारोह था। इसमें आरोपी समेत कई मेहमान आए थे। जांचकर्ताओं के मुताबिक महिला ने वारदात को 1 दिसंबर को तब अंजाम दिया जब सभी मेहमान घर से बाहर गए थे और उसने पीड़ित को सीढ़ियों से ऊपर जाते देखा। पुलिस ने कहा कि आरोपी बच्ची के पीछे-पीछे छत पर गई। उससे बातचीत करती रही। उसने इस बीच एक स्टोररूम के बाहर प्लास्टिक के एक टब में पानी भरा और विधि को उसमें डुबाकर मार डाला। इसके बाद वह दरवाजे को बाहर से बंद करके नीचे आ गई। जांच के दौरान पता चला कि पीड़िता की चाची ने यह कत्ल किया है। एसपी सिंह ने बताया कि पूछताछ के दौरान पूनम ने अपना गुनाह कबूल कर लिया।  

‘पूरा सिस्टम उलझा’, सरकार पर PCC चीफ डोटासरा का तीखा वार

जयपुर राजस्थान कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष माणिक्य लाल वर्मा की जयंती के उपलक्ष में आयोजित कार्यक्रम में पहुंचे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। प्रेस से बातचीत में उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और उनकी कैबिनेट को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि मैं तो हाथ जोड़कर मुख्यमंत्री जी से निवेदन करना चाहता हूं कि अपने मंत्रियों की सुनवाई करवा दें, क्योंकि आज उनकी भी कोई नहीं सुन रहा। डोटासरा ने भाजपा की ‘वर्कर्स सुनवाई’ पहल पर व्यंग्य करते हुए कहा कि असली समस्या मंत्रियों की सुनवाई न होना है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य सचिव सुधांशु पंत ‘SA लगाकर’ निकल गए और अब मंत्री शिकायत कर रहे हैं कि SA उनकी फाइलें नहीं सुनता, जबकि SA कह रहा है कि मंत्री फाइलें भेजते ही नहीं। “सरकार का पूरा सिस्टम उलझा हुआ है और मंत्री खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं,” डोटासरा ने कहा। उन्होंने आगे कहा कि जब मंत्री अपने प्रभारी जिलों में जाते हैं तो उनके पास कार्यकर्ता भी नहीं आते। “इनको फोन करके कार्यकर्ताओं को बुलाना पड़ता है, अपनी ही इज्जत बचाने की गुहार लगानी पड़ती है। इसका साफ मतलब है कि न जनता को विश्वास है, न कार्यकर्ताओं को कि ये कोई सुनवाई करेंगे,” उन्होंने कहा। डोटासरा ने दावा किया कि आज ऐसा परसेप्शन बन चुका है कि मंत्रियों की सुनवाई नहीं हो रही और अब तो मुख्यमंत्री की भी नहीं। ऐसे में आम जनता की सुनवाई होने की संभावना ही खत्म हो जाती है। उन्होंने कहा, “यह कहते हैं कि 24 घंटे मंत्रियों के दरवाजे खुले हैं, पर मैं चुनौती देता हूं। किसी भी मंत्री का दरवाजा वास्तव में खुला दिखा दें।” खाद संकट पर बोलते हुए डोटासरा ने कहा कि किसान खाद के लिए तरस रहे हैं और सरकार उन्हें लाठियां दे रही है। उन्होंने डॉ. किरोड़ी लाल मीणा के हाल ही के स्टिंग पर भी सवाल उठाया और पूछा कि उसका लाभ क्या निकला आज स्थिति यह है कि असली हो या नकली, कोई भी खाद उपलब्ध नहीं है। सरकार को तो असली खाद का ज्ञान ही नहीं, क्योंकि सरकार ही असली नहीं है, उन्होंने तंज कसा।  

पीएम का आभार जताने पर विरोध, तेजस्वी यादव की अनुपस्थिति चर्चा में

पटना बुधवार को नेता प्रतिपक्ष विधान मंडल नहीं पहुंचे, जिसको लेकर जदयू के मुख्य प्रवक्ता ने उनपर तंज कसा था। उन्होंने कहा था कि जिनके परिवार की सुरक्षा के लिए 160 पुलिसकर्मी तैनात रहते हैं, वे स्वयं सदन में दिखाई नहीं दे रहे। आखिर कहां गायब हो गए तेजस्वी यादव ? इस खबर के प्रकाशित होने के बाद देर शाम राजद ने भी पलटवार करते हुए अपनी प्रतिक्रिया दी। जवाब में बिहार प्रदेश राष्ट्रीय जनता दल के प्रवक्ता एजाज अहमद ने कहा कि जिस तरह की राजनीति जदयू के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार जी आप करते हैं, ऐसा लगता है कि आपके राजनीति का एकमात्र आधार और सोच तेजस्वी प्रसाद यादव ही हैं। आप वास्कोडिगामा की तरह तेजस्वी यादव की खोज में मत लगिए, बिहार की जनता के हित में उनको बुलडोजर नीति से बचाइए।  हालांकि आज भी नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के सदन में आने का इंतजार जरुर किया जायेगा। नरेंद्र नारायण यादव को  निर्विरोध उपाध्यक्ष चुना गया बिहार विधानसभा के शीतकालीन सत्र के चौथे दिन आज सदन को नया उपाध्यक्ष मिल गया है। मधेपुरा जिले के आलमनगर विधानसभा क्षेत्र से आठवीं बार विधायक बने नरेंद्र नारायण यादव को सर्वसम्मति से निर्विरोध उपाध्यक्ष चुना गया। वह इस सत्र के लिए प्रोटेम स्पीकर की भूमिका भी निभा रहे थे। उपाध्यक्ष के चुनाव के बाद सदन में राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा शुरू हुई। इस दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सभी नए विधायकों को बधाई दी और बिहार के विकास पर अपनी सरकार का पक्ष रखा। 2005 से है कानून का राज मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सदन में अपने सरकार की उपलब्धियों की जानकारी देते हुए कहा कि, जब 2005 में एनडीए (NDA) सरकार बनी थी, तब से ही बिहार में कानून का राज है। तभी से मैं लगातार बिहार के विकास में लगा हुआ हूं, और यही मेरा एकमात्र उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि अब बिहार में किसी तरह का डर और भय नहीं है, बल्कि चारों तरफ शांति और भाईचारे का माहौल है। अब नहीं होता हिंदू-मुस्लिम मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि पहले बिहार में बहुत हिंदू-मुस्लिम होता था, लेकिन अब कोई झगड़ा-झंझट नहीं होता है। अपनी सरकार के कार्यों को गिनाते हुए उन्होंने कहा कि कब्रिस्तान की घेराबंदी कराई गई और 2016 से मंदिरों की सुरक्षा भी बढ़ाई गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने  राजद विधायक भाई वीरेन्द्र से कहा कि आपको दो बार मौक़ा दिए। आपके साथ भी विकास किए न , गड़बड़ सड़बड़ किए तो छोड़ दिए। अब इनके साथ हैं। आपके साथ कभी नहीं आएंगे। कुमार सर्वजीत के बयान पर बिहार विधानसभा में बवाल, जदयू नेता रत्नेश सदा को दी चुनौती राजद विधायक कुमार सर्वजीत कुमार ने गया के मगध मेडिकल अस्पताल की बदहाल स्थिति को लेकर कहा कि वहां जाने पर लगता है कि दलित के मोहल्ले में आ गए हैं। उनकी यह बात सुनते ही जदयू विधायक रत्नेश सदा ने राजद विधायक कुमार सर्वजीत कुमार का विरोध करते हुए कहा कि मैं भी उसी दलित की कोख से पैदा हुआ हूं। दलितों के लिए जो हरकत इन्होंने की है वो इसे माफ नहीं करेंगे। उनके इस विरोध के बाद राजद विधायक कुमार सर्वजीत कुमार ने जदयू नेता रत्नेश सदा पर पलटवार करते हुए उनको चुनौती दे डाली। उन्होंने कहा कि अगर इनमें हिम्मत है तो हम इन्हें चुनौती देते हैं। ये हमारे साथ गया जिले के दलित मोहल्लों में चलें और देखें कि गया जिले के मुसहर इलाके में एक भी नाली-गली नहीं बनी है। पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के विरोध के बाद विपक्ष ने विधान परिषद् का किया वॉकआउट बिहार विधान परिषद में महामहीम राज्यपाल के अभिभाषण पर वाद-विवाद शुरू हो गया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बोल रहे थे, तभी पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी अचानक उठीं। इस दौरान उन्होंने कहा कि   पहले सत्ता पक्ष नहीं, बल्कि विपक्ष को बोलने का मौका दिया जाना चाहिए। लेकिन उनकी बात नहीं मानने पर पर पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी समेत विपक्ष के सभी सदस्यों ने विधान परिषद् का वॉकआउट कर बाहर निकल गए। बालू-दारू-भू-माफिया की छाती पर चलेगा बुलडोजर बिहार विधानसभा में उप मुख्यमंत्री और भाजपा नेता विजय सिन्हा और राजद नेता विधायक भाई वीरेंद्र एक दूसरे से भिड़ गए। उप मुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने कहा कि बालू-दारू-भू-माफिया की छाती पर  बुलडोजर चलाया जाएगा। इसी बात पर भाई वीरेन्द्र भड़क गए और खड़े होकर उनका विरोध करने लगे। उन्होंने कहा कि हर्ष फायरिंग के बारे में बोलिए। इस पर विजय सिन्हा ने कहा कि आप जिसे हर्ष फायरिंग बता रहे हैं वह शादी विवाह में पटाखा फोड़े जा रहे थे। इसकी जांच भी की जा चुकी है। अपनी बात खत्म करते करते विजय सिन्हा ने कहा कि मौसम बदल रहा है इसलिए बदलते मौसम में आप अपने कपड़े भी बदल लीजिये वरना तबियत खराब हो जाएगी। और रही बात बुलडोजर की तो बालू-दारू-भू-माफिया की छाती पर बुलडोजर चल के रहेगा। राजद विधायक ने सम्राट चौधरी को कहा – आप  स्मार्ट बुलडोजर चलाईये राजद विधायक इंद्रजीत प्रसाद गुप्ता ने अंग्रेजी में अपनी बात शुरू की लेकिन फिर टोकने पर हिंदी में बोलने लगे। उन्होंने अपनी बात शुरू करते हुए सबसे पहले बिहार के गृह मंत्री सम्राट चौधरी का नाम लेते हुए कहा कि आप मजबूत आदमी हैं। आपको लोग बुलडोजर बाबा कहता है तो ऐसा लगता है कि यह कॉपी किया जा रहा है इसलिए आप सम्राट बुलडोजर नहीं बल्कि स्मार्ट बुलडोजर चलाइए। उन्होंने कहा कि सम्राट जी आप सिर्फ मानवीय पक्ष को सामने रखिए और उसके पीछे हिडन एजेंट को जरूर देखिए और मुझे लगता है कि आप सम्राट बुलडोजर से स्मार्ट बुलडोजर जरूर बनियेगा। राजद विधायक ने मुख्यमंत्री की जमकर की प्रशंसा इंद्रजीत प्रसाद गुप्ता ने फिर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जमकर प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि इसमें कोई शक नहीं कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बहुत बेहतर काम किया है, उनके कार्यों की हम प्रशंसा करते हैं। उन्होंने महिलाओं को 35% आरक्षण दिया है। मैं इसकी भी प्रशंसा करता हूं। उन्होंने जिस तरह से महिला पुलिस की एक बड़ी संख्या खड़ी कर दी है इसके लिए भी मैं उनकी प्रशंसा करता हूं।