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प्रेम विवाह करने पर सामाजिक बहिष्कार! हिसार के गांव में पंचायत के फैसले से विवाद

 हिसार  हिसार के आर्य नगर गांव में बीते रविवार को हुई एक सामाजिक पंचायत में गांव के लोगों के बीच होने वाले प्रेम विवाह के सामाजिक बहिष्कार का प्रस्ताव पारित किया गया। पंचायत में कहा गया कि गांव में ऐसे विवाह करने वाले लोगों और इसका समर्थन करने वाले परिवार के सदस्यों का सामाजिक बहिष्कार किया जाएगा। पिछले कुछ महीनों में गांव में ऐसे तीन विवाह होने के बाद यह प्रस्ताव पारित किए जाने की बात सामने आई है। गांव के बुजुर्गों की मौजूदगी में हुई सभा में करीब एक हजार ग्रामीण शामिल हुए। पंचायत की अध्यक्षता गांव के बुजुर्ग कुलवंत गोसला ने की। प्रस्ताव में यह भी कहा गया कि ऐसे विवाह का समर्थन करने वाले परिवार के सदस्यों या अन्य लोगों के खिलाफ भी सामाजिक बहिष्कार की कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा 21 सदस्यीय एक समिति गठित कर घर-घर जाकर ग्रामीणों की राय जानने की बात कही गई है, ताकि प्रेम विवाह पर रोक लगाने के संबंध में लोगों के विचार लिए जा सकें। तीन विवाह के बाद लिया निर्णय मामले से जुड़े लोगों के अनुसार, पिछले कुछ महीनों में गांव में तीन ऐसे विवाह हुए हैं, जिनमें गांव के ही रहने वाले युवक-युवतियों ने विवाह किया। गांव के सरपंच रतन सिंह के अनुसार इनमें दो जोड़े अलग-अलग जातियों से थे, जबकि एक जोड़ा एक ही जाति से था। निर्वाचित पंचायत ने फैसले से बनाई दूरी गांव के सरपंच रतन सिंह ने बताया कि दो दिन पहले सभी ग्रामीणों ने एकत्रित होकर फैसला लिया है कि गांव के ही युवक-युवती आपस में प्रेम विवाह नहीं करेंगे, ऐसा करते है तो उनका सामाजिक बहिष्कार किया जाएगा। गांव में पुलिस भी तैनात नहीं की गई है। सरपंच ने बताया कि इस निर्णय में निर्वाचित ग्राम पंचायत की कोई भूमिका नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह फैसला सामाजिक पंचायत की ओर से लिया गया है। अधिवक्ता बोले- वयस्कों को जीवनसाथी चुनने का अधिकार वरिष्ठ अधिवक्ता लाल बहादूर खोवाल ने बताया कि सहमति से विवाह करने वाले वयस्कों को संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत अपनी पसंद का जीवनसाथी चुनने का मौलिक अधिकार है। उनके अनुसार सामाजिक बहिष्कार का आदेश देने वाली पंचायत के ऐसे फरमान की कानूनी वैधता नहीं है और परिस्थितियों के आधार पर आपराधिक व अन्य कानूनी कार्रवाई हो सकती है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में संवाद के माध्यम से स्थिति को संभालना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि धमकी देने या दबाव बनाने की स्थिति में भारतीय न्याय संहिता के तहत आपराधिक कार्रवाई हो सकती है। नहीं हुई कोई अप्रिय घटना पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि गांव आर्य नगर में शांतिप्रिय माहौल है। वहां किसी तरह की कोई अप्रिय घटना सामने नहीं आई है। अगर कोई समस्या आती है तो गांव में सुरक्षा मुहैया करवा दी जाएगी।  

बिहार पुलिस की बड़ी कार्रवाई, नाबालिग का वीडियो शेयर करने वाले 120 सोशल मीडिया अकाउंट निशाने पर

पटना  जमुई में नाबालिग छात्रा से छेड़खानी की घटना से जुड़ा वीडियो इंटरनेट मीडिया पर वायरल होने के बाद बिहार पुलिस मुख्यालय ने सख्त कार्रवाई शुरू की है। अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित हो रहे आपत्तिजनक वीडियो को हटाने की कार्रवाई की गई है। पुलिस मुख्यालय के अनुसार, घटना से जुड़े दो दर्जन से अधिक वीडियो फेसबुक और एक्स से टेकडाउन कराए गए हैं। नाबालिग की पहचान उजागर करने और उसका वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित करने के आरोप में पुलिस ने 120 सोशल मीडिया अकाउंट संचालकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। बिहार पुल‍िस ने आमजन से की अपील पुलिस अब ऐसे अन्य लोगों, अकाउंट, पेज और वेबसाइट की पहचान कर रही है, जिन्होंने नाबालिग से संबंधित आपत्तिजनक सामग्री पोस्ट या प्रसारित की है। बिहार पुलिस ने लोगों से ऐसे वीडियो को साझा या रीपोस्ट नहीं करने की अपील की है। पुलिस का कहना है कि संवेदनशील सामग्री को आगे प्रसारित करने के बजाय उसकी सूचना संबंधित एजेंसी को देनी चाहिए। ऐसे में सवाल है कि यदि किसी नाबालिग से जुड़ा आपत्तिजनक वीडियो या फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो जाए तो क्या करना चाहिए? ऐसी स्थिति में कुछ जरूरी सावधानियां बरतनी चाहिए। वीडियो वायरल हो तो सबसे पहले क्या करें? किसी नाबालिग से संबंधित आपत्तिजनक वीडियो सामने आने पर उसे आगे शेयर, रीपोस्ट या किसी दूसरे प्लेटफॉर्म पर अपलोड नहीं करना चाहिए। इससे वीडियो का प्रसार और बढ़ सकता है। यदि किसी अकाउंट से ऐसी सामग्री पोस्ट की गई है तो संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के रिपोर्ट विकल्प से उसकी शिकायत की जा सकती है। जरूरत होने पर पुलिस या साइबर सेल को भी सूचना दें। पीड़िता की पहचान उजागर न करें नाबालिग का नाम, चेहरा, पता, स्कूल, परिवार, मोहल्ला या ऐसी कोई अन्य जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए, जिससे उसकी पहचान सामने आ सके। POCSO की धारा 23 के तहत मीडिया में बच्चे की पहचान उजागर करने वाली जानकारी प्रकाशित करने पर रोक है। इसमें नाम, पता, फोटो, परिवार, स्कूल, पड़ोस या पहचान सामने लाने वाली अन्य जानकारी शामिल है। आपात स्थिति में 112 पर करें कॉल यदि किसी महिला या बच्चे को तत्काल खतरा है या घटना उसी समय हो रही है तो 112 पर पुलिस सहायता ली जा सकती है। बिहार पुलिस की वेबसाइट पर 112 को आपातकालीन हेल्पलाइन के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। जरूरी हेल्पलाइन: 112 — आपातकालीन पुलिस सहायता 181 — महिला हेल्पलाइन 1098 — चाइल्ड प्रोटेक्शन हेल्पलाइन 1930 — साइबर क्राइम हेल्पलाइन यदि किसी नाबालिग का आपत्तिजनक वीडियो या फोटो सोशल मीडिया पर प्रसारित किया जा रहा है तो इसकी शिकायत साइबर अपराध तंत्र को की जा सकती है। बिहार पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट पर साइबर अपराध की शिकायत के लिए 1930 और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग की सुविधा उपलब्ध है। शिकायत करते समय वीडियो को दोबारा सार्वजनिक रूप से पोस्ट करने के बजाय संबंधित अकाउंट या पोस्ट की जानकारी पुलिस को देना उचित है। घटना होने पर तुरंत क्या करें? यदि छेड़खानी या किसी अन्य तरह की बदसलूकी की घटना हो रही है तो सबसे पहले सुरक्षित स्थान पर पहुंचने की कोशिश करें। आसपास मौजूद भरोसेमंद लोगों से मदद लें और आवश्यकता होने पर पुलिस को सूचना दें। किसी तरह की बदसलूकी होने पर घटना को छिपाने के बजाय माता-पिता, अभिभावक या किसी भरोसेमंद वयस्क को तुरंत जानकारी दें। बच्चे को अकेले स्थिति संभालने के लिए मजबूर न करें। घटना की सूचना जल्द देने से पुलिस को उपलब्ध साक्ष्यों और संबंधित डिजिटल सामग्री की जांच करने में मदद मिल सकती है। सोशल मीडिया पर प्रसारित सामग्री की जानकारी भी पुलिस को दी जा सकती है। किसी संज्ञेय अपराध की स्थिति में क्षेत्राधिकार को लेकर तत्काल सहायता लेने में देरी नहीं करनी चाहिए। पीड़िता या उसके अभिभावक पुलिस से संपर्क कर शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं। आवश्यकता होने पर पुलिस से जीरो एफआईआर की प्रक्रिया के बारे में जानकारी ली जा सकती है। अपने स्मार्टफोन में सुरक्षा ऐप्स (जैसे 112 India App) इंस्टॉल रखें, जिसमें पैनिक बटन (Panic Button) की सुविधा होती है। देर शाम या रात के समय अपरिचित या कम रोशनी वाले रास्तों (जैसे पहाड़ियों के पास, सुनसान हाईवे या खाली मैदानों) पर अकेले जाने से बचें। चलते समय हमेशा सतर्क और आत्मविश्वासी दिखें। आस-पास के माहौल पर नज़र रखें । अपने बैग में सुरक्षा के लिहाज से पेपर स्प्रे (Pepper Spray) या चाबी का गुच्छा जैसी चीजें रखें, जिनका उपयोग आत्मरक्षा में किया जा सके। सोशल मीडिया पर वीडियो डालने वालों पर कार्रवाई पुलिस मुख्यालय ने स्पष्ट किया है कि नाबालिग पीड़िता का चेहरा दिखाने अथवा उसकी पहचान उजागर करने वाली सामग्री को इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित करना गंभीर कानूनी मामला है। पुलिस ऐसे अकाउंट संचालकों की पहचान कर कार्रवाई कर रही है।  

निष्पक्ष और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया पर जोर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नवचयनित युवाओं को सौंपे नियुक्ति पत्र

लखनऊ  छह महीने में एक लाख सरकारी नौकरियां देने के लक्ष्य के साथ योगी सरकार का जॉब कैलेंडर ऑन हो गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महज चार दिन में तीन बड़े नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रमों के जरिए 5,297 युवाओं को सरकारी सेवा से जोड़ा है। 19 सितंबर को स्वास्थ्य, आयुष और कौशल विकास विभाग से शुरू हुआ नियुक्तियों का सिलसिला अगले दिन पुलिस और मंगलवार को शिक्षा विभाग तक पहुंचा। तीनों कार्यक्रमों में मुख्यमंत्री योगी ने खुद नवचयनित युवाओं को नियुक्ति पत्र सौंपे।   आंकड़े भी जॉब कैलेंडर की रफ्तार बता रहे हैं। 19 सितंबर को 818 नियुक्तियां हुईं। अगले ही दिन पुलिस के मिनिस्टीरियल कैडर में चयनित 912 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र मिले। एक दिन के अंतराल के बाद मंगलवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में एक साथ 3,567 प्रधानाचार्यों, प्रधानाध्यापकों, प्रवक्ताओं और सहायक अध्यापकों को नियुक्ति पत्र दिए गए। इसके साथ चार दिन में नियुक्तियों का आंकड़ा 5,297 पहुंच गया।   पहले 818, अगले दिन 912 को नियुक्ति 19 सितंबर को लोकभवन में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग और उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग से चयनित 818 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिए गए। इनमें चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा विभाग के एक्स-रे टेक्नीशियन, आयुष विभाग के होम्योपैथिक फार्मासिस्ट, प्रोफेसर, रीडर और प्रवक्ता के अलावा एमएसएमई और व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास विभाग के विभिन्न पदों पर चयनित युवा शामिल रहे।   अगले ही दिन पुलिस के मिनिस्टीरियल कैडर में 912 नियुक्तियां हुईं। इनमें 259 पुलिस उपनिरीक्षक गोपनीय, 449 पुलिस सहायक उपनिरीक्षक लिपिक और 204 पुलिस सहायक उपनिरीक्षक लेखा शामिल हैं।   तीसरे कार्यक्रम में 5,297 पहुंचा आंकड़ा मंगलवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में तीसरा और चार दिनों का सबसे बड़ा नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम हुआ। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग से चयनित 3,567 अभ्यर्थियों को अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में नियुक्ति मिली।   इनमें 319 प्रधानाचार्य, 258 प्रधानाध्यापक, 618 प्रवक्ता पीजीटी और 2,372 सहायक अध्यापक टीजीटी हैं। चयनित अभ्यर्थियों में 1,090 महिलाएं और 2,477 पुरुष शामिल हैं।   नौकरी के साथ पारदर्शी भर्ती का संदेश लगातार हो रहे नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रमों के जरिए सरकार निष्पक्ष, पारदर्शी और योग्यता आधारित भर्ती का संदेश भी दे रही है। मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने साफ कहा कि नियुक्ति मिलने के बाद किसी शिक्षक से पैसे मांगने की शिकायत मिली तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि युवाओं को उनकी योग्यता के आधार पर नौकरी मिलनी चाहिए।   5,297 के बाद अब एक लाख पर नजर सरकार के मुताबिक पिछले नौ वर्षों में साढ़े नौ लाख युवाओं को सरकारी नौकरी दी जा चुकी है। अब अगले छह महीने में एक लाख और युवाओं को सरकारी नौकरी देने का लक्ष्य रखा गया है। पुलिस और होमगार्ड समेत विभिन्न विभागों की भर्तियां भी इसी रोजगार महाभियान का हिस्सा हैं।   चार दिन में तीन बड़े कार्यक्रम और 5,297 नियुक्तियां जॉब कैलेंडर की शुरुआती तस्वीर हैं। अब अगले छह महीने में अलग-अलग विभागों की भर्तियों और नियुक्ति पत्र वितरण के जरिए एक लाख सरकारी नौकरियों के लक्ष्य को आगे बढ़ाया जाएगा।

चंडीगढ़ वोटर लिस्ट पर बड़ा अपडेट, 56 हजार नामों को लेकर आज होगा फैसला

चंडीगढ़. विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद मतदाता सूची में हुए बड़े बदलाव को लेकर मुख्य निर्वाचन अधिकारी प्रेरणा पुरी मंगलवार को प्रेस वार्ता करेंगी। दोपहर 1:15 बजे सेक्टर-18 स्थित निर्वाचन विभाग के नगर योजना भवन के सी-विंग के भूतल पर होने वाली प्रेस वार्ता में SIR की पूरी प्रक्रिया, अब तक हुए सत्यापन और मतदाता सूची में हुए बदलाव की जानकारी दी जाएगी। चंडीगढ़ में SIR के बाद मतदाताओं की संख्या में बड़ी गिरावट सामने आई है। पुनरीक्षण से पहले शहर में 5,16,427 मतदाता दर्ज थे, जबकि उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार अब यह संख्या करीब 4,60,109 रह गई है। हालांकि, अंतिम मतदाता सूची मंगलवार को जारी होने के बाद ही स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी। किस वार्ड में कितने नाम घटे, आज मिल सकती है जानकारी प्रेस वार्ता में सबसे अहम सवाल यह रहेगा कि SIR के दौरान किस वार्ड में कितने नाम हटे, कितने नाम बरकरार रहे और कितने नए मतदाता जोड़े गए। डुप्लीकेट, मृत और दूसरे स्थान पर जा चुके मतदाताओं के नामों के सत्यापन के साथ दावे और आपत्तियों पर हुई कार्रवाई की जानकारी भी सामने आ सकती है।

तीन नेत्रदान, छह कॉर्निया और चार बुजुर्गों की जिंदगी में लौटी रोशनी

सागर  बुंदेलखंड चिकित्सा महाविद्यालय के नेत्र रोग विभाग और आई बैंक ने कॉर्निया प्रत्यारोपण में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। पिछले 15 दिनों में मरणोपरांत तीन नेत्रदानों की मदद से नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. प्रवीण खरे और उनकी टीम ने जटिल सर्जरी कर चार बुजुर्ग मरीजों की आंखों की रोशनी वापस लौटाई है। इस चिकित्सीय टीम में मुख्य रूप से डॉ. नीलम, डॉ. मानसी, डॉ. शिवानी, डॉ. अजय एवं डॉ. श्रेया शामिल रहीं। रोशनी पाने वाले सभी लाभार्थी सागर शहर व आसपास के ग्रामीण अंचलों के किसान एवं मजदूर वर्ग से ताल्लुक रखते हैं। इन मरीजों को मिला नया जीवन (परिवर्तित नाम): इमरान खान (73 वर्ष): पांच महीने पहले फंगल इन्फेक्शन के कारण कॉर्निया पूरी तरह खराब हो चुका था और दिखना बंद हो गया था। प्रत्यारोपण के बाद अब उनकी रोशनी लौट आई है। सीता बाई (70 वर्ष): दो वर्ष पूर्व चोट लगने से पुतली खराब हो गई थी। लगातार दर्द और अंधेपन से जूझ रही महिला का सफल ऑपरेशन कर पुतली बदली गई। अशोक (70 वर्ष): बीते पांच वर्षों से पुतली में सफेदी आने के कारण दृष्टिहीनता का शिकार थे। बीएमसी में जांच और प्रत्यारोपण के बाद अब वे देख सकते हैं। शिवदयाल (71 वर्ष): आठ महीने पहले मोतियाबिंद का ऑपरेशन हुआ था, लेकिन कॉर्निया में सूजन व फफोले पड़ने से रोशनी चली गई थी। नया कॉर्निया लगने से उनकी दृष्टि बहाल हो गई है। रिसर्च में काम आएंगी शेष दो कॉर्निया नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. प्रवीण खरे ने बताया कि हाल ही में तीन दानदाताओं से मरणोपरांत कुल छह कॉर्निया प्राप्त हुई थीं। जांचोपरांत इनमें से चार स्वस्थ कॉर्निया को मरीजों में प्रत्यारोपित किया गया। शेष दो कॉर्निया प्रत्यारोपण के मानकों के अनुकूल नहीं थीं, इसलिए उनका उपयोग विभाग के पीजी डॉक्टर्स शोध और चिकित्सीय अध्ययन के लिए करेंगे। सर्जरी और नेत्रदान पूरी तरह निःशुल्क बीएमसी डीन डॉ. पीएस ठाकुर ने बताया कि अस्पताल में कॉर्निया प्रत्यारोपण की अत्याधुनिक सुविधा उपलब्ध है और यह पूरी प्रक्रिया एवं सर्जरी पूरी तरह निःशुल्क की जाती है। उन्होंने कहा कि नेत्रदान एक स्वैच्छिक और पुनीत कार्य है, जिसके लिए समाज को बढ़-चढ़कर आगे आना चाहिए। आई बैंक की प्रभारी इंचार्ज डॉ. रोशी जैन एवं डॉ. अंजलि वीरानी ने सभी पीजी छात्रों, नर्सिंग स्टाफ (चेतना शुक्ला और रामलखन मीणा) व पैरामेडिकल स्टाफ के साथ मिलकर नेत्रदान प्राप्त करने से लेकर प्रत्यारोपण तक का कार्य बेहतर समन्वय के साथ पूरा किया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बांटे नियुक्ति पत्र, मंच पर 12 अभ्यर्थियों को सौंपे पत्र

लखनऊ  प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों को मंगलवार को 3,567 नए शिक्षक और संस्था प्रधान मिले। इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग, प्रयागराज से चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिए। इनमें से 12 अभ्यर्थियों को मुख्यमंत्री ने मंच पर नियुक्ति पत्र सौंपे।   नियुक्ति पाने वालों में 319 प्रधानाचार्य, 258 प्रधानाध्यापक, 618 प्रवक्ता पीजीटी और 2,372 सहायक अध्यापक टीजीटी हैं। इन सभी का चयन आयोग की ओर से पूर्व में विज्ञापित रिक्त पदों के लिए किया गया है।   नौ वर्षों में 48 हजार से अधिक को नियुक्ति माध्यमिक शिक्षा विभाग के मुताबिक वर्ष 2017 से 22 सितंबर 2026 तक अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में संस्था प्रधान और शिक्षक के विभिन्न पदों पर 48,018 अभ्यर्थियों का चयन और नियुक्ति हुई है। कार्यक्रम में चयनित अभ्यर्थियों और माध्यमिक शिक्षा विभाग की उपलब्धियों पर आधारित एक लघु फिल्म भी दिखाई गई।   इन 12 अभ्यर्थियों को मुख्यमंत्री ने सौंपे नियुक्ति पत्र मुख्यमंत्री से मंच पर नियुक्ति पत्र पाने वालों में डीएवी इंटर कॉलेज कानपुर नगर के प्रधानाचार्य राम सिंह और इंटर कॉलेज बीरा पट्टी वाराणसी के प्रधानाध्यापक राघवेंद्र प्रताप सिंह शामिल रहे।   प्रवक्ता पद पर चयनित अग्रसेन कन्या कॉलेज वाराणसी की आंचल शुक्ला, केडीईएम इंटर कॉलेज बरेली के अनुराग श्रीवास्तव, जिला पंचायत इंटर कॉलेज उग्रसेन प्रयागराज की प्रज्ञा सिंह, वैष्णव हरिहर दास इंटर कॉलेज आजमगढ़ के गोपाल प्रजापति और दीप चंद ग्रेन चैंबर इंटर कॉलेज मुजफ्फरनगर के मोहम्मद शादाब को भी मुख्यमंत्री ने नियुक्ति पत्र दिए।   सहायक अध्यापक के पद पर चयनित पंडित दीनदयाल इंटर कॉलेज गोरखपुर की उषा सिंह, जनता राष्ट्रीय इंटर कॉलेज संभल के आकाश कुमार, लाला राम स्वरूप शिक्षण संस्थान लखनऊ की रीना यादव, नगर पालिका कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय झांसी की सोनम त्रिपाठी और नेहरू इंटर कॉलेज कुशीनगर के अमन कुमार ने मुख्यमंत्री से नियुक्ति पत्र प्राप्त किए।

सड़क हादसे में बच्चे की मौत पर मिला 28.66 लाख का मुआवजा, जगदलपुर का मामला

जगदलपुर. सड़क हादसे में चार साल के बच्चे की मौत के मामले में मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण ने मुआवजा तय किया है. प्रथम अपर मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण ने 28 लाख 66 हजार 40 रुपये की राशि निर्धारित की है. मामला नवंबर 2025 में डिमरापाल के नाटखोलका पारा में हुए सड़क हादसे से जुड़ा है. बताया गया कि कृष्णा बघेल बच्चों के साथ खड़ा था, तभी बाइक ने पीछे से उसे टक्कर मार दी. हादसे के बाद बकावंड के सिविल अस्पताल में बच्चे की मौत हो गई थी. मामले में मृतक के माता-पिता, भाई और बहन की ओर से मुआवजे का दावा पेश किया गया. अधिकरण ने मृत बच्चे की संभावित आय को निर्धारित करने के लिए न्यायिक मिसालों का आधार लिया. पीठासीन अधिकारी सिद्धार्थ अग्रवाल ने मृतक की मासिक संभावित आय 12 हजार 500 रुपये मानी. बीमा कंपनी को मुआवजा राशि के साथ नौ प्रतिशत सालाना ब्याज देने का आदेश दिया गया है. आदेश के अनुसार राशि का भुगतान चारों आवेदकों के बैंक खातों में एक माह के भीतर किया जाना है. हादसे के करीब दस महीने में मामले में फैसला आने से पीड़ित परिवार को न्यायिक राहत मिली है.

बावड़िया कलां में 22 मकानों पर नगर निगम का एक्शन, स्वीकृत नक्शे के विपरीत हुआ निर्माण

 भोपाल  बावड़िया कलां स्थित शुभालय विहार में टीएंडसीपी के स्वीकृत नक्शे के विपरीत बने 22 मकानों पर नगर निगम ने कार्रवाई शुरू कर दी है। इनमें 17 मकान मालिकों को नोटिस देकर 15 दिन में निर्माण खुद हटाने को कहा गया है। पांच अधूरे मकानों का निर्माण रोकने के नोटिस दिए गए हैं। हाईकोर्ट में याचिका के बाद शुरू हुई कार्रवाई इस कार्रवाई के पीछे की वजह यह है कि गौरव गृह निर्माण सहकारी संस्था की 5 एकड़ जमीन पर बने ये निर्माण टीएंडसीपी के स्वीकृत नक्शे के अनुरूप नहीं हैं। हाईकोर्ट में अवमानना याचिका के बाद उपायुक्त सहकारिता ने 13 फरवरी 2026 को निगम को पत्र लिखा था। इसके बाद निगम ने कार्रवाई शुरू की। खास बात है कि जिन मकानों को अब अवैध निर्माण बताकर हटाने के नोटिस दिए गए हैं, उन्हें नगर निगम की बिल्डिंग परमिशन शाखा ने ही निर्माण की अनुमति दी थी। इससे निगम की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। 48 प्लॉट अवैध तरीके से बेचे गए याचिकाकर्ता विवेक दीक्षित के मुताबिक, संस्था के 44 संस्थापक सदस्यों की जमीन पर 48 प्लॉट अवैध तरीके से बेचे गए थे। सहकारिता विभाग इनकी रजिस्ट्रियां शून्य कराने के लिए सिविल कोर्ट भी पहुंच चुका है। 38 रजिस्ट्रियों के 18.74 करोड़ रुपए गायब फरवरी 2026 में सहकारिता विभाग की जांच में सामने आया कि 2018 से 2023 के बीच वास्तविक सदस्यों को दरकिनार कर बाहरी लोगों के नाम करीब 50 रजिस्ट्रियां की गईं। इनमें 32 अवैध पाई गई। 38 रजिस्ट्रियों के करीब 18.74 करोड़ रुपए संस्था के खाते में नहीं आए। ऑडिटर अनिल कुमार रावत की रिपोर्ट के मुताबिक फर्जी दस्तावेजों और हैंडराइटिंग में हेरफेर कर वास्तविक सदस्यों का अधिकार छीना गया। ये रजिस्ट्रियां तत्कालीन अध्यक्ष अनिता विष्ट और तत्कालीन प्रबंधक मनोज साहू के कार्यकाल में हुई थीं।

DGP का सख्त फरमान: वर्दी में रील बनाई तो होगी कार्रवाई, AI पर भी रोक

भोपाल   मध्य प्रदेश पुलिस में सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर पुलिस मुख्यालय ने सख्त गाइडलाइन जारी की है. डीजीपी कैलाश मकवाना के निर्देश पर जारी 24 बिंदुओं की इस गाइडलाइन में पुलिसकर्मियों के फेसबुक, वॉट्सएप, एक्स, इंस्टाग्राम और यूट्यूब सहित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल को लेकर स्पष्ट नियम तय किए गए हैं. अब वर्दी में रील बनाकर सोशल मीडिया पर पोस्ट करना, सरकारी संसाधनों का निजी प्रचार के लिए इस्तेमाल करना और संवेदनशील सरकारी जानकारी को सोशल मीडिया या AI टूल्स पर साझा करना अनुशासनात्मक कार्रवाई का कारण बन सकता है।  वर्दी में रील और फोटो डालना पड़ेगा भारी नई गाइडलाइन के मुताबिक पुलिस अधिकारी या कर्मचारी ड्यूटी के दौरान या ड्यूटी के बाद वर्दी अथवा अशोभनीय वेशभूषा में रील, फोटो, वीडियो या अन्य सामग्री सोशल मीडिया पर पोस्ट नहीं कर सकेंगे. वर्दी का इस्तेमाल व्यक्तिगत छवि बनाने या सोशल मीडिया पर लोकप्रियता हासिल करने के लिए करने पर कार्रवाई हो सकती है. डीजीपी के आदेश के बाद PHQ ने पुलिसकर्मियों को सरकारी वाहन, कार्यालय, आवास, वर्दी और अन्य सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल निजी प्रचार के लिए नहीं करने के निर्देश दिए हैं. पुराने सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर भी पुलिसकर्मियों को सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं।  सोशल मीडिया से कमाई पर भी नियम गाइडलाइन में सोशल मीडिया से होने वाली कमाई को लेकर भी महत्वपूर्ण प्रावधान किया गया है. बिना शासन की अनुमति के पुलिसकर्मी सोशल मीडिया के जरिए आय अर्जित नहीं कर सकेंगे. पेड प्रमोशन, स्पॉन्सरशिप या किसी कंपनी, प्रोडक्ट, सर्विस या कारोबार का पैसे लेकर प्रचार करने पर भी रोक रहेगी. जिन पुलिसकर्मियों ने पहले सोशल मीडिया के जरिए आय अर्जित की है, उन्हें निर्धारित अवधि में अपनी कमाई की जानकारी विभाग को देनी होगी. रिपोर्ट्स के मुताबिक इसके लिए 30 दिन की समयसीमा तय की गई है।  परिवार के किसी सदस्य के सोशल मीडिया अकाउंट से ऐसी आय होने की स्थिति में भी इसकी जानकारी विभाग को देने का प्रावधान है।  AI टूल्स को लेकर भी डीजीपी की गाइडलाइन सोशल मीडिया के साथ-साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल्स के इस्तेमाल को लेकर भी पुलिस मुख्यालय ने विशेष सावधानी बरतने को कहा है. किसी भी तरह के विभागीय डॉक्यूमेंट्स को एआई टूल्स पर अपलोड करने की मनाही है. इसी तरह सरकारी गोपनीय जानकारी को सोशल मीडिया पर शेयर करने पर भी रोक रहेगी. पुलिस से जुड़ी संवेदनशील जानकारी के लीक होने की आशंका को देखते हुए यह प्रावधान खास तौर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है. इसके अलावा पुलिसकर्मी संवेदनशील ड्यूटी के दौरान अपनी लोकेशन, तैनाती स्थल और ड्यूटी से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी सोशल मीडिया पर साझा नहीं कर सकेंगे।  VIP ड्यूटी के दौरान फोटो पोस्ट, सेल्फी पर पाबंदी नई गाइडलाइन के मुताबिक VIP-VVIP सुरक्षा, महत्वपूर्ण सरकारी प्रतिष्ठानों या संवेदनशील स्थानों पर तैनाती के दौरान फोटो या सेल्फी पोस्ट करने पर भी रोक रहेगी. हथियारों की ट्रेनिंग, ड्रिल, छापेमारी, दबिश और पुलिस की अन्य संवेदनशील कार्रवाई से जुड़े फोटो-वीडियो या किसी अन्य तरह से प्रसारण भी सोशल मीडिया पर नहीं किया जा सकता।  पीड़ित, आरोपी और गवाह की पहचान उजागर करने पर रोक पीड़ित, गवाह और आरोपियों के नाम जाहिर नहीं होंगे डीजीपी के आदेश में यह भी कहा गया है कि पुलिस जांच और जनसुनवाई से जुड़े मामलों में पीड़ित, गवाह, शिकायतकर्ता और आरोपी की पहचान सार्वजनिक नहीं करने के निर्देश हैं. ऐसे मामलों पीड़ितों से संबंधित फोटो या वीडियो भी सोशल मीडिया पर जारी करने से पहले आवश्यक अनुमति लेनी होगी और पहचान छिपानी होगी. खासतौर पर महिला और बाल पीड़ितों की पहचान उजागर करने वाली कोई भी जानकारी मीडिया से साझा नहीं की जा सकेगी।  निजी अकाउंट के लिए सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल नहीं पुलिसकर्मी अपने निजी सोशल मीडिया अकाउंट चलाने के लिए सरकारी CUG सिम, इंटरनेट, वाई-फाई, IP एड्रेस या सरकारी ई-मेल का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे. इसके अलावा निजी मोबाइल फोन में विभाग के सरकारी सोशल मीडिया अकाउंट को लॉगिन करने को लेकर भी प्रतिबंध तय किए गए हैं. मकसद सरकारी डिजिटल संसाधनों और निजी सोशल मीडिया गतिविधियों को अलग रखना है।  उल्लंघन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई PHQ के आदेश के मुताबिक, '' सोशल मीडिया से जुड़े निर्देशों का उल्लंघन गंभीरता से लिया जाएगा. मामले की गंभीरता के आधार पर विभागीय कार्रवाई की जा सकती है और निलंबन तक की प्रक्रिया भी अपनाई जा सकती है। 

GMDA स्कैम पर ED की बड़ी कार्रवाई, जालंधर और दिल्ली समेत कई ठिकानों पर छापेमारी

चंडीगढ़/नई दिल्ली पंजाब के मोहाली स्थित ग्रेटर मोहाली क्षेत्र विकास प्राधिकरण ( GMDA ) के कार्यालय में मंगलवार को प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीमों ने छापेमारी की। सूत्रों के अनुसार, जालंधर, चंडीगढ़ और दिल्ली से पहुंची ईडी की टीमें तीन वाहनों में कार्यालय पहुंचीं और जांच शुरू की। अधिकारियों ने मामले से संबंधित दस्तावेजों और अभिलेखों की पड़ताल की। बताया जा रहा है कि छापे मुख्य रूप से जीएमएडीए कार्यालय और पंजाब आवास विभाग के प्रमुख सचिव आईएएस विकास गर्ग के कार्यालय में मारे गए। सूत्रों के मुताबिक, जांच टीमों ने दफ्तरों में दस्तावेज खंगाला और कंप्यूटर रिकॉर्ड को भी देखा। बताया जा रहा है कि कुछ अधिकारियों के फोन भी जांच के लिए लिए लिए गए हैं। ईडी की ओर से फिलहाल छापेमारी को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी जारी नहीं की गई है। बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई जीएमएडीए में लगभग 150 करोड़ रुपये के भू-उपयोग परिवर्तन (CLU) घोटाले और शुल्क में कथित अनियमितता से जुड़े मामले की जांच के तहत की जा रही है। जांच में सनटेक सिटी (न्यू चंडीगढ़) सहित कई परियोजनाएं शामिल हैं। इससे पहले ईडी इस मामले में दो भवन निर्माताओं के ठिकानों पर भी छापेमारी कर चुकी है। मामले में आईएएस अधिकारी कंवलप्रीत बराड़ से 18 और 27 अगस्त को पूछताछ की गई थी। 18 अगस्त को उनसे करीब आठ से नौ घंटे तक पूछताछ किए जाने की जानकारी सामने आई थी। बराड़ नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग की पूर्व निदेशक रह चुकी हैं। पूर्व मुख्य सचिव अनुराग वर्मा 9 सितंबर को ईडी के जालंधर स्थित क्षेत्रीय कार्यालय में पेश हुए थे। रिपोर्टों के अनुसार, उनसे आठ घंटे से अधिक समय तक पूछताछ की गई थी। उस समय वह आवास एवं शहरी विकास विभाग के प्रमुख थे। ईडी ने 10 सितंबर को मोहाली के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को भी समन जारी कर मामले से संबंधित अभिलेख और जांच की जानकारी मांगी थी। मंगलवार को जीएमडीए कार्यालय में हुई कार्रवाई को इसी मामले से जोड़कर देखा जा रहा है