samacharsecretary.com

बदलेगा बस्तर का भविष्य! मुख्यमंत्री साय बोले- अब विकास, रोजगार और समृद्धि की नई कहानी लिखेगा संभाग

रायपुर  नक्सलवाद का दंश झेलते-झेलते बस्तर चार दशकों तक विकास की मुख्यधारा से दूर रहा, लेकिन अब नक्सलवाद की समाप्ति के साथ केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त प्रयासों से बस्तर को देश का सबसे सुंदर और विकसित आदिवासी संभाग बनाया जाएगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने  आज राजधानी रायपुर में आयोजित ‘तेरा राज नहीं आएगा रे’ पुस्तक के विमोचन समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही। कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, साहित्य अकादमी के अध्यक्ष डॉ. शशांक शर्मा, पांचजन्य के संपादक हितेश शंकर सहित अनेक प्रबुद्धजन उपस्थित थे। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि नक्सलवाद के कारण बस्तर विकास की दौड़ में काफी पीछे रह गया था। अब परिस्थितियां बदल रही हैं और एक नए, विकसित तथा समृद्ध बस्तर के निर्माण का अवसर प्राप्त हुआ है। राज्य सरकार लगातार ऐसे प्रयास कर रही है, जिनसे आमजन को मूलभूत सुविधाओं सहित सभी आवश्यक सेवाएं सहज रूप से उपलब्ध हो सकें। मुख्यमंत्री ने कहा कि दो दिन पूर्व ही यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने कार्यकाल के 12 वर्ष पूर्ण किए हैं। उनके नेतृत्व में देश ने अनेक ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की हैं, जिनमें नक्सलवाद की समाप्ति की दिशा में मिली सफलता भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद देश की आंतरिक सुरक्षा के समक्ष सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री  अमित शाह के मार्गदर्शन में इस चुनौती का प्रभावी ढंग से सामना किया गया। उन्होंने कहा कि मजबूत नेतृत्व समाज में विश्वास और उत्साह का संचार करता है। प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में देश में माओवाद के विरुद्ध सामूहिक संकल्प विकसित हुआ। सुरक्षा बलों का मनोबल बढ़ा, आम जनता खुलकर माओवाद के विरोध में सामने आई और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज बुलंद की। इस संघर्ष में लेखकों, पत्रकारों और बुद्धिजीवियों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। मुख्यमंत्री ने उल्लेख किया कि हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह बस्तर आए थे, जहां उन्होंने पत्रकारों से मुलाकात कर उनके योगदान की सराहना की थी।

सोनम रघुवंशी ने तोड़ी चुप्पी, मीडिया से बातचीत में बताईं कई अहम बातें

इंदौर  राजा रघुवंशी हत्याकांड की आरोपी और फिलहाल जमानत पर रिहा सोनम रघुवंशी ने पहली बार सार्वजनिक रूप से सामने आकर अपने ऊपर लगाए जा रहे आरोपों का जवाब दिया है। मीडिया से संक्षिप्त बातचीत में सोनम ने साफ कहा कि उसके नेपाल भागने की खबरें पूरी तरह बेबुनियाद हैं और लोगों को ऐसी अफवाहों पर विश्वास नहीं करना चाहिए। कोर्ट परिसर से बाहर निकलते समय पत्रकारों ने जब उससे सवाल किए तो उसने कहा कि वह कानूनी प्रक्रिया का सम्मान कर रही है और अदालत द्वारा तय सभी शर्तों का पालन कर रही है। इंदौर लौटने को लेकर पूछे गए सवाल पर भी सोनम ने फिलहाल कोई संभावना नहीं जताई और कहा कि अभी उसका वहां जाने का कोई मन नहीं है। लोकेशन बताने से किया इनकार सोनम ने यह जरूर स्वीकार किया कि वह शिलांग में रह रही है, लेकिन सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए अपने ठिकाने की जानकारी साझा करने से मना कर दिया। आर्थिक खर्च और जीवन-यापन से जुड़े सवालों को भी उसने निजी विषय बताते हुए टाल दिया। परिवार के आरोपों पर पलटवार गौरतलब है कि राजा रघुवंशी के बड़े भाई ने हाल ही में आरोप लगाया था कि सोनम देश छोड़कर नेपाल जा सकती है और मामले की जांच केंद्रीय एजेंसी से कराई जानी चाहिए। अब सोनम ने सामने आकर इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। जमानत पर कानूनी लड़ाई जारी सोनम को निचली अदालत से राहत मिलने के बाद जांच एजेंसी ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। जमानत रद्द कराने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई पूरी हो चुकी है और अदालत का फैसला आना बाकी है। कैसे बना देशभर में चर्चा का विषय यह मामला? राजा रघुवंशी और सोनम रघुवंशी की शादी के कुछ ही दिनों बाद दोनों मेघालय पहुंचे थे। इसके बाद उनके अचानक लापता होने से सनसनी फैल गई। बाद में राजा का शव मिलने और जांच में कई चौंकाने वाले खुलासों के बाद मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया। जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर सोनम को भी आरोपी बनाया गया था।

कूनो में राष्ट्रपति मुर्मु का विशेष कार्यक्रम, आदिवासी समुदाय से मुलाकात और चीता सफारी की तैयारी पूरी

ग्वालियर  राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु सोमवार, 22 जून को चीतों की धरती श्योपुर जिले स्थित कूनो नेशनल पार्क में आ रही हैं। राष्ट्रपति यहां सहरिया आदिवासियों की संस्कृति से रूबरू होंगी और उनसे चर्चा भी करेंगी। इसके अलावा कूनो नेशनल पार्क में दो नंबर बाड़ा और तीन-ए बाड़ा में तैयारियां जारी हैं क्योंकि यहां राष्ट्रपति को सफारी का अनुभव कराए जाने का प्रस्तावित है। तीन-ए बाड़ा में यहां जन्मी चीता मुखी व उसके चार शावक चीते हैं। कूनो में जोर शोर से तैयारियां की जा रही हैं चार हैलीपेड तैयार किए जा चुके हैं और आदिवासियों को चिन्हित भी किया जा रहा है जिन्हें राष्ट्रपति से मिलवाया जाएगा। इसके अलावा चीता मित्र भी इस दौरान मौजूद रहेंगे। राष्ट्रपति 21 जून को ग्वालियर होकर कूनो पहुंच जाएंगी और रात्रि विश्राम यहीं कर 22 जून को यहां विजिट प्रस्तावित है। बता दें, राष्ट्रपति दौपद्री मुर्मु इन दिनों मप्र के प्रवास पर हैं जिस क्रम में उनका ग्वालियर चंबल आगमन प्रस्तावित है। श्योपुर स्थित कूनो नेशनल पार्क में उनके आगमन को लेकर सुरक्षा व्यवस्था सहित मैदानी इंतजाम किए जा रहे हैं। चार हैलीपेड तैयार कर दिए गए हैं और 200 बैरीकेड से हद तैयार की जा रही है। श्योपुर पुलिस प्रशासन की ओर से नो फ्लाइंग जोन के आदेश भी जारी कर दिए गए हैं। आदिवासियों को प्रशिक्षण भी मिलेगा सहरिया आदिवासियों के गांवों की श्योपुर जिले में काफी संख्या है, इन आदिवासियों को पहले चीते को लेकर जागरूक भी किया जा चुका है और कई चीता मित्र की भूमिका भी निभा रहे हैं। ऐसे में कुछ आदिवासियों को चिन्हित कर प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है क्योंकि राष्ट्रपति सहरिया आदिवासियों से चर्चा कर सकती हैं। वन विभाग की ओर से वन रक्षकों को भी चीता मित्रों से संपर्क करने के लिए निर्देश मिले हैं। मुखी चीता को सफारी में देख सकती हैं राष्ट्रपति जानकारी के अनुसार मादा चीता मुखी को सफारी के दौरान राष्ट्रपति को दिखाया जा सकता है क्योंकि यह पहली भारतीय मादा चीता है। दोनों बाड़ों में विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं।  

पंजाब की सियासत में बढ़ी हलचल, जल्द चुनाव की संभावना पर कांग्रेस ने कसी कमर

चंडीगढ़ पंजाब विधानसभा चुनाव भले ही आधिकारिक तौर पर फरवरी 2027 में प्रस्तावित हों, लेकिन राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोर पकड़ती जा रही है कि राज्य में चुनाव तय समय से पहले, यानी नवंबर 2026 में भी कराए जा सकते हैं। इस संभावित राजनीतिक परिदृश्य को देखते हुए राज्य की प्रमुख पार्टियों ने अपनी-अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (आप) जहां सरकार की उपलब्धियों के सहारे चुनावी अभियान की शुरुआत कर चुकी है, वहीं कांग्रेस भी संगठनात्मक स्तर पर सक्रिय होती दिखाई दे रही है। पार्टी आलाकमान लगातार पंजाब इकाई के नेताओं के साथ बैठकें कर रणनीति बनाने में जुटा है। पंजाब की राजनीति में पिछले कुछ सप्ताह से असामान्य गतिविधियां देखने को मिल रही हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की दिल्ली में लगातार बैठकें, राज्य के नेताओं से फीडबैक लेना, संगठन की स्थिति की समीक्षा और चुनावी तैयारियों पर जोर इस बात का संकेत माना जा रहा है कि पार्टी किसी भी संभावित राजनीतिक परिस्थिति के लिए तैयार रहना चाहती है। कांग्रेस ने शुरू की चुनावी तैयारी सूत्रों के अनुसार, पिछले लगभग एक महीने के दौरान कांग्रेस आलाकमान की ओर से पंजाब कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के साथ चार से पांच महत्वपूर्ण बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं। इन बैठकों में संगठन की स्थिति, पार्टी की मजबूती और कमजोरियों, संभावित उम्मीदवारों, विभिन्न जिलों की राजनीतिक परिस्थितियों और चुनावी रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई। इन बैठकों में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष, विधायक दल के नेता, पूर्व मंत्रियों और विभिन्न जिलों से जुड़े वरिष्ठ नेताओं की राय भी ली गई। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि पंजाब में कांग्रेस अभी भी एक मजबूत राजनीतिक विकल्प के रूप में मौजूद है और यदि संगठन को एकजुट रखते हुए समय रहते तैयारी कर ली जाए तो आगामी चुनाव में बेहतर प्रदर्शन किया जा सकता है। तीन सदस्यीय ऑब्जर्वर कमेटी का गठन कांग्रेस आलाकमान ने पंजाब की राजनीतिक स्थिति पर नजर रखने और संगठनात्मक तैयारियों का आकलन करने के लिए तीन सदस्यीय ऑब्जर्वर कमेटी का गठन भी किया है। इस समिति में पार्टी के वरिष्ठ नेता अजय माकन, मीनाक्षी नटराजन और भजनलाल जाधव को शामिल किया गया है। कमेटी की जिम्मेदारी राज्य के नेताओं से संवाद स्थापित करना, संगठन की गतिविधियों की निगरानी करना, जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं की सक्रियता का मूल्यांकन करना और आगामी चुनाव के लिए पार्टी को आवश्यक सुझाव देना है। माना जा रहा है कि यह समिति नियमित रूप से अपनी रिपोर्ट कांग्रेस अध्यक्ष और केंद्रीय नेतृत्व को सौंपेगी। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि पंजाब में कांग्रेस लंबे समय से गुटबाजी की समस्या से जूझती रही है। ऐसे में ऑब्जर्वर कमेटी का गठन संगठन को एकजुट रखने और संभावित मतभेदों को समय रहते दूर करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। जमीनी स्तर पर सक्रिय हुई पंजाब कांग्रेस पंजाब कांग्रेस ने भी चुनावी तैयारियों को लेकर कार्यकर्ताओं को सक्रिय करना शुरू कर दिया है। जिला और ब्लॉक स्तर पर बैठकों का दौर चल रहा है। बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करने की रणनीति बनाई जा रही है ताकि चुनावी समय में पार्टी के पास प्रभावी नेटवर्क मौजूद रहे। सूत्रों के मुताबिक आने वाले दिनों में विभिन्न जनसंपर्क अभियानों की शुरुआत की जाएगी। गांव-गांव और शहर-शहर जाकर लोगों से संवाद स्थापित करने, मौजूदा सरकार के खिलाफ मुद्दों को उठाने और कांग्रेस की नीतियों को जनता तक पहुंचाने की योजना तैयार की जा रही है। इसके अलावा युवाओं, महिलाओं, किसानों और व्यापारियों जैसे विभिन्न वर्गों के लिए अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किए जाने की भी तैयारी है। कांग्रेस का मानना है कि यदि जनता के बीच लगातार उपस्थिति बनाए रखी जाए तो पार्टी के पक्ष में माहौल तैयार किया जा सकता है।  

महिला एवं बाल विकास विभाग का अभियान: पोषण और परिवार सहभागिता पर जागरूकता

 जयपुर महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा प्रदेशभर के आंगनबाड़ी केन्द्रों पर सोमवार को अभिभावक-आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बैठक (PAM) का आयोजन किया गया। इस माह की बैठक का मुख्य विषय "पोषण, संतुलित आहार एवं स्वास्थ्य" तथा "बच्चे के जीवन में पिता की भूमिका" रहा। शासन सचिव महिला एवं बाल विकास विभाग श्रीमती पूनम ने बताया कि बच्चों के समग्र विकास में पिता की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि प्रदेशभर में आयोजित PAM की बैठकों के माध्यम से बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य, शिक्षा एवं समग्र विकास के लिए जन-जागरूकता को नई गति देने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि बच्चों के सामग्र विकास हेतु परिवारों की सहभागिता को और खास कर पिता की भूमिका को अधिक मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास किये जाएंगे। आईसीडीएस निदेशक  वासुदेव मालावत ने बताया कि बैठक में बच्चों के सर्वांगीण विकास, पोषण, स्वास्थ्य, प्रारम्भिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा (ECCE) तथा परिवार की सामूहिक भागीदारी पर विस्तार से चर्चा की गई। इस बार PAM बैठकों में पिता, दादा, चाचा एवं अन्य पुरुष अभिभावकों की सहभागिता बढ़ाने पर विशेष बल दिया गया। अमावस्या के अवसर पर आयोजित इस बैठक का उद्देश्य परिवार के पुरुष सदस्यों को बच्चों के विकास में सक्रिय भागीदार बनाना तथा उनके दायित्वों के प्रति जागरूक करना रहा। उन्होंने बताया कि PAM बैठक में यह संदेश दिया गया कि "एक पिता का हाथ पकड़कर चलना बच्चे को पूरी दुनिया की ताकत देता है।" PAM कार्यक्रम केवल एक बैठक नहीं, बल्कि परिवार एवं समुदाय को बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए एकजुट करने का सशक्त माध्यम है। PAM में अभिभावकों को बताया गया कि पिता की सक्रिय सहभागिता बच्चों को भावनात्मक सुरक्षा, आत्मविश्वास तथा सकारात्मक वातावरण प्रदान करती है। शोधों के अनुसार जिन बच्चों को पिता का पर्याप्त समय और मार्गदर्शन प्राप्त होता है, उनमें बौद्धिक, सामाजिक एवं भावनात्मक विकास बेहतर होता है। पिता बच्चों को साहस, धैर्य, अनुशासन एवं जिम्मेदारी जैसे जीवन मूल्यों की शिक्षा देते हैं। साथ ही उनकी सहभागिता से बच्चों की शैक्षणिक उपलब्धियों में भी सकारात्मक सुधार देखने को मिलता है। PAM बैठक के दौरान अभिभावकों को बच्चों के नियमित पोषण, स्वास्थ्य जांच एवं वृद्धि निगरानी के महत्व से अवगत कराया गया। साथ ही 3 से 6 वर्ष आयु वर्ग के समस्त बच्चों का APAR ID एवं ABHA ID तैयार करवाने, आधार नामांकन सुनिश्चित करने तथा बच्चों की नियमित उपस्थिति बनाए रखने के लिए प्रेरित किया गया। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने अभिभावकों के साथ केन्द्र की आगामी कार्ययोजना, बच्चों की नियमित उपस्थिति, शाला पूर्व शिक्षा गतिविधियों तथा पोषण संबंधी व्यवहार परिवर्तन पर चर्चा की। अभिभावकों को यह भी बताया गया कि बच्चों के विकास में माता-पिता दोनों की समान भागीदारी आवश्यक है। महिला एवं बाल विकास विभाग ने सभी महिला पर्यवेक्षकों एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को निर्देशित किया है कि बैठक की ऑनलाइन रिपोर्टिंग निर्धारित प्रारूप में 18 जून 2026 तक अनिवार्य रूप से पूर्ण करें, जिससे कार्यक्रम की प्रभावी मॉनिटरिंग एवं मूल्यांकन सुनिश्चित किया जा सके।

सीमाओं की सुरक्षा की तरह महत्वपूर्ण है डेटा की सुरक्षा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल.  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि आज की सबसे मूल्यवान संपत्ति डेटा है। डिजिटल सुरक्षा समय की मांग है। डेटा की सुरक्षा, राष्ट्र की सीमा की सुरक्षा जितनी महत्वपूर्ण है। पिछले कुछ वर्षों में न केवल देश अपितु पूरी दुनिया में सायबर तकनीक और उससे जुड़ी चुनौतियों का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। हर दिन इसके नए आयाम सामने आ रहे हैं। अपराध के तरीके भी लगातार बदल रहे हैं। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी आधुनिक तकनीक और द्रोण जैसे साधनों के उपयोग से सुरक्षा चुनौतियों का नया स्वरूप देखने को मिला। प्रधानमंत्री मोदी का देश की सुरक्षा को हर तरह से सशक्त बनाने के लिए अभिनंदन है। प्रधानमंत्री मोदी की विशेषता है कि वह समय से पहले आने वाले वाली चुनौतियों को पहचान लेते हैं और शासन-प्रशासन और जन सामान्य को उसके प्रति जागरूक करने के लिए तत्काल आवश्यक कदम भी उठाते हैं। प्रधानमंत्री मोदी के निर्देश पर सायबर अपराध, डीप फेक और अन्य चुनौतियों पर केंद्रित कार्यशाला में सायबर सुरक्षा संस्कृति को सशक्त बनाने में सभी मार्ग खोजे जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव "राज्य डेटा के लिए सायबर सुरक्षा फ्रेमवर्क को सुदृढ़ बनाने" पर सोमवार को कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में कार्यशाला के शुभारंभ सत्र को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्जवलित कर कार्यशाला का शुभारंभ किया। कार्यशाला का उद्देश्य राज्य शासन के विभिन्न विभागों में सायबर सुरक्षा से जुड़ी वर्तमान चुनौतियों, उभरते सायबर खतरों, डेटा संरक्षण की आवश्यकताओं और डिजिटल शासन प्रणालियों की सुरक्षा पर व्यापक विचार-विमर्श करना है। सायबर सुरक्षा, अनुसंधान, नवाचार और कौशल विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा सेंटर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सायबर अपराध और डेटा सुरक्षा की दिशा में ठोस कदम उठाते हुए राज्य में सायबर सिक्योरिटी रिसर्च सेंटर स्थापित करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि महू स्थित मिलिट्री कॉलेज ऑफ टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग और शैक्षणिक संस्थानों के सहयोग से यह रिसर्च सेंटर स्थापित किया जाएगा। सेंटर केंद्रीय सायबर सुरक्षा, अनुसंधान, नवाचार और कौशल विकास के लिये महत्वपूर्ण आधार बनेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सायबर अटैक की समय पर पहचान और निगरानी में आधुनिक सुरक्षा व्यवस्था से लैस सेंटर की महती भूमिका होगी। यह व्यवस्था केवल प्रतिक्रियात्मक नहीं, बल्कि पूर्वानुमान आधारित निरंतर सतर्कता की दिशा में ठोस कदम साबित होगी। डीबीटी की पारदर्शी व्यवस्था से हितग्राहियों तक पहुंचने लगा है शत-प्रतिशत लाभ मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश बदलते दौर में हर तरह की चुनौतियों से निपटने में पूरी तरह सक्षम है। सायबर अपराधियों के विरुद्ध मध्यप्रदेश पुलिस ने अच्छा काम करके दिखाया है। वर्ष 2014 के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने जीरो बैलेंस पर बैंक अकाउंट खोलने की शुरुआत की। जनधन खाते खुलने से देशभर में जरूरतमंदों को डीबीटी के माध्यम से हितलाभ सीधे उनके बैंक खाते में दिया जाने लगा। डीबीटी की पारदर्शी व्यवस्था लागू होने से शत प्रतिशत लाभ हितग्राहियों तक पहुंचने लगा। दुनिया ने भारत की यूपीआई पेमेंट सिस्टम का लोहा माना है। ऐसे समय में जब नागरिकों को डिजिटल और ऑनलाइन माध्यम से लाभ पहुंच रहा है तो सरकार पर सुरक्षा की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। नागरिकों के मन में विश्वास पैदा करने के लिए राज्य सरकार हर पहलू को ध्यान में रखकर कार्य कर रही है। सायबर क्राइम के अदृश्य खतरों से निपटने के लिये आवश्यक प्रबंधन जरूरी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सुरक्षा के तमाम चाक-चौबंद उपायों के बाद भी अगर जीवनभर की गाढ़ी कमाई एक झटके में कोई सायबर अपराधी उड़ा ले जाए तो दु:ख होता है। सायबर क्राइम के अदृश्य खतरों से निपटने के लिये सभी आवश्यक प्रबंधन करना वर्तमान दौर की जरूरत है। सायबर क्राइम और डेटा सेफ्टी के मामले में लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं है। राज्य का डेटा हमारी सबसे मूल्यवान संपत्ति है। डेटा ब्रीच की स्थिति में आर्थिक भरपाई की जिम्मेदारी भी सरकार की होगी। प्रदेश सरकार सायबर सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। नागरिकों को अधिकाधिक डिजिटल सेवाएँ उपलब्ध कराने के लिये हो रहा निरंतर कार्य : पी.एस. सेल्वेन्द्रन प्रमुख सचिव, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी एम. सेल्वेन्द्रन ने कहा कि मध्यप्रदेश ई-गवर्नेंस के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। विभाग नागरिकों को अधिकाधिक डिजिटल सेवाएँ उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की विभिन्न डिजिटल नवाचारों को राष्ट्रीय स्तर पर सराहना और पुरस्कार प्राप्त हुए हैं। डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ सायबर सुरक्षा और डेटा संरक्षण की चुनौतियाँ भी बढ़ी हैं, इसलिए नागरिकों के व्यक्तिगत, वित्तीय, भूमि, शिक्षा एवं स्वास्थ्य संबंधी डेटा की सुरक्षा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्रमुख सचिव सेल्वेन्द्रन ने कहा कि इसी उद्देश्य से एमपी-सीईआरटी की स्थापना की गई है, जो सायबर खतरों की निगरानी, त्वरित प्रतिक्रिया और समन्वित कार्रवाई से प्रदेश की सायबर सुरक्षा को सुदृढ़ कर रहा है। उन्होंने बताया कि भारत सरकार के मार्गदर्शन में आयोजित यह कार्यशाला सायबर सुरक्षा के लिए मजबूत संस्थागत एवं नीतिगत ढाँचा विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। कार्यशाला में प्राप्त सुझावों के आधार पर प्रदेश में सुरक्षित, विश्वसनीय एवं भविष्य उन्मुख साइबर सुरक्षा फ्रेमवर्क को और मजबूत किया जाएगा। एमपी-सीईआरटी और आधुनिक सुरक्षा तंत्र से सुदृढ़ हो रही सायबर सुरक्षा व्यवस्था : एम.डी. वशिष्ठ प्रबंध संचालक एमपीएसईडीसी आशीष वशिष्ठ ने कहा कि प्रदेश में 1700 से अधिक शासकीय सेवाएं डिजिटली नागरिकों को उपलब्ध कराई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ सायबर सुरक्षा और डेटा संरक्षण का महत्व भी बढ़ा है। नागरिकों के स्वास्थ्य, शिक्षा, भूमि एवं संपत्ति सहित विभिन्न शासकीय अभिलेखों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। एमडी वशिष्ठ ने बताया कि प्रदेश में एमपी-सीईआरटी, स्टेट डेटा सेंटर के सिक्योरिटी ऑपरेशन सेंटर और सुरक्षित स्टेट वाइड एरिया नेटवर्क (स्वान) से सायबर सुरक्षा तंत्र को सुदृढ़ किया जा रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि कार्यशाला में प्राप्त सुझावों और विशेषज्ञों के अनुभवों के आधार पर राज्य के लिए एक मजबूत, प्रभावी और भविष्य उन्मुख साइबर सुरक्षा फ्रेमवर्क विकसित करने में सहायता मिलेगी। प्रदेश में 44 सायबर कमांडो और 3 हजार सायबर वॉरियर तैयार किए जाएंगे : एडीजी मनोहर एडीजी ए. साई मनोहर ने कहा कि सायबर अपराध और डेटा सुरक्षा आज डिजिटल युग की … Read more

25 साल बाद पूरा हुआ सपना: जेवर एयरपोर्ट पर पहली फ्लाइट से लखनऊ पहुंचे किसान

25 साल के लंबे इंतजार और तमाम उतार-चढ़ाव के बाद सोमवार को आखिरकार यूपी की आंखों में पला-बढ़ा जेवर एयरपोर्ट का सपना पूरा हो गया। 172 किसानों को लेकर जेवर एयरपोर्ट से लखनऊ की पहली फ्लाइट सुबह करीब 9:55 बजे चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पहुंची। खुशी और उत्साह से लबरेज चेहरों के साथ किसानों ने 5 कालीदास मार्ग स्थित मुख्यमंत्री आवास पहुंचकर सीएम योगी आदित्यनाथ से मुलाकात और संवाद किया। 172 किसानों के इस दल में 20 महिला किसान शामिल रहीं। किसानों ने अपने इलाके के विकास के लिए सीएम के प्रति आभार व्यक्त किया। इस दौरान सीएम योगी ने जेवर एयरपोर्ट बनाने के लिए किए जा रहे प्रयासों के दौरान का एक किस्सा साझा किया। उन्होंने कहा कि मुझे याद है कि जब हमारी कैबिनेट ने जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिए प्रस्ताव पारित किया तो हमने अधिकारियों को समय सीमा दी थी। यह 100 दिन की थी लेकिन जमीन अधिग्रहण की कार्रवाई शुरू नहीं हो पाई। इसके बाद मैं वहां गया तो किसानों के साथ बैठक में करीब 100 किसानों से हमने कहा कि वहां एयरपोर्ट बनाना है। तब वाकई मुझे यही सुनने को मिला कि हम जमीन नहीं देंगे। सीएम योगी ने बताया कि तब मैंने कहा कि आपको एक घंटे का समय दे रहा हूं। एयरपोर्ट बना तो यह आपके इलाके की तस्वीर बदल देगा क्योंकि समय सबका आता है, कुछ बन जाते हैं, कुछ बिखर जाते हैं"…। जो मौके को गंवा देता है, वह बिखर जाता है। सीएम योगी ने कहा कि आपने मुझ पर विश्वास किया। ये कार्यवाही युद्धस्तर पर आगे बढ़ी तो परिणाम है कि 13 हजार एकड़ से अधिक जमीन पर पहले फेज का काम होकर,नया इतिहास रच दिया है। सीएम योगी ने आगे कहा कि जेवर अब वह जेवर नही रहा। अब तो यहां कुबेर आना चाहते हैं सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि इसी क्षेत्र में उत्तर प्रदेश का सबसे अधिक आपराधिक गतिविधियों का क्षेत्र बन गया था। शाम होते ही आवागमन बंद हो जाता था। बेटियां असुरक्षित थीं। किसानों के लिए कोई सुविधा नहीं थी। यही नहीं किसानों का उत्पीड़न होता था। हम इसको देखते थे। सड़क, सुविधा, रोजगार कुछ नहीं था। उन स्थितियों में दिल्ली के नज़दीक जेवर मात्र एक कस्बा था, एक गांव था। सीएम योगी ने कहा कि अब आप जरा सोचिए, दिल्ली को फेल करने जा रहे हैं, दुनिया का हर बड़ा व्यक्ति वहां आना चाहता है। आप परी की बात कर रहे थे, अब तो वहां कुबेर आना चाहते हैं। संवाद के दौरान किसानों ने सीएम योगी से अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने कृषि और ग्रामीण विकास से जुड़े विषयों पर भी चर्चा की।

ACB का बड़ा एक्शन, करनाल में घूस लेते रंगे हाथों दबोचा गया बाबू

करनाल. हरियाणा में भ्रष्टाचार के खिलाफ एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) का अभियान लगातार जारी है। इसी कड़ी में करनाल एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम ने डीसी कार्यालय में तैनात एक असिस्टेंट को 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। आरोपी ने आर्म लाइसेंस बनवाने के नाम पर शिकायतकर्ता से कुल 20 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी। मिली जानकारी के अनुसार गिरफ्तार किए गए आरोपी की पहचान अनिल कुमार के रूप में हुई है, जो डीसी कार्यालय करनाल में असिस्टेंट के पद पर कार्यरत है। शिकायतकर्ता ने एंटी करप्शन ब्यूरो को दी शिकायत में बताया था कि उसे आर्म लाइसेंस बनवाना था। आरोप है कि इस काम के बदले अनिल कुमार ने उससे 20 हजार रुपये की रिश्वत की मांग की थी। शिकायत मिलने के बाद एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम ने जाल बिछाया और आरोपी को दूसरी किस्त के 10 हजार रुपये लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया। ACB ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है।

मनरेगा की जगह नई योजना: 125 दिन रोजगार और साप्ताहिक भुगतान का प्रावधान

 जयपुर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की दूरदर्शी सोच और गरीब कल्याण की भावना को साकार करते हुए विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम 1 जुलाई 2026 से पूरे देश में लागू होने जा रहा है। मनरेगा के स्थान पर लाई गई वीबी-जीरामजी योजना पूरे देश के साथ-साथ राजस्थान की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी आत्मनिर्भर, समावेशी और सशक्त बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम साबित होगी। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए केंद्र सरकार ने इस योजना में 95 हजार 692 करोड़ रुपये का बजटीय आवंटन किया है, जो ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम के लिए अब तक का सर्वाधिक आवंटन है। राज्यों के राज्यांश सहित इस कार्यक्रम का कुल परिव्यय 1.51 लाख करोड़ रुपये से अधिक होने का अनुमान है। राजस्थान के लिए केंद्र सरकार ने इस योजना में 7 हजार 581 करोड़ रुपये से अधिक का अंतरिम आवंटन निर्धारित किया है। इसके साथ ही राज्य सरकार द्वारा 4 हजार करोड़ रुपये की अतिरिक्त धनराशि का प्रावधान किया जाएगा, जिसे आवश्यकता एवं मांग के अनुसार बढ़ाया भी जा सकेगा। इस प्रकार राजस्थान में इस योजना के लिए कुल 11 हजार 581 करोड़ रुपये से अधिक की राशि उपलब्ध होगी, जो प्रदेश में ग्रामीण रोजगार गांरटी के लिए अब तक का सर्वाधिक आवंटन है। नई व्यवस्था, नया अधिकार विभिन्न विभागों की योजनाओं में संसाधनों का कन्वर्जेन्स करते हुए दोहराव रोकने, गुणवत्तायुक्त निर्माण सुनिश्चित करने और ग्रामीण श्रमिकों को वैधानिक रोजगार सुरक्षा देने के उद्देश्य से यह अधिनियम लाया गया है। मुख्यमंत्री के कुशल नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा इस योजना का प्रदेश में सफल क्रियान्वयन करते हुए सुनिश्चित किया जाएगा कि राजस्थान का कोई भी पात्र ग्रामीण परिवार इस योजना के लाभ से वंचित न रहे। 125 दिन रोजगार, साप्ताहिक भुगतान ग्रामीण क्षेत्र के ऐसे प्रत्येक पात्र परिवार को अब एक वित्तीय वर्ष में 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिनों की रोजगार गारंटी का वैधानिक अधिकार दिया गया है, जिनके वयस्क सदस्य अकुशल शारीरिक श्रम करने के लिए स्वेच्छा से आगे आते हैं। पहले श्रमिकों को 15 दिनों में भुगतान किया जाता था, अब साप्ताहिक भुगतान का प्रावधान किया गया है। भुगतान डीबीटी के माध्यम से सीधे बैंक अथवा डाकघर खातों में जाएगा, जिससे पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित होंगी। वहीं, निर्धारित समयावधि में रोजगार उपलब्ध न होने पर बेरोजगारी भत्ते का तथा मजदूरी भुगतान में देरी होने पर क्षतिपूर्ति का वैधानिक प्रावधान किया गया है। यह निर्णय ग्रामीण आय में वृद्धि और आजीविका सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक ठोस कदम है। जिन मौजूदा मनरेगा जॉब कार्ड के लिए ई-केवाईसी की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, वे वीबी-जीरामजी अधिनियम, 2025 के प्रावधानों के अनुसार नए ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड जारी होने तक वैध बने रहेंगे।

सभी समाजों को, उनकी परम्पराओं को जोड़ें, आल्हा-ऊदल स्मृति उत्सव और श्रावण महोत्सव भी मनायें : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल.  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि आगामी छह-सात माह में बड़े त्यौहार, सांस्कृतिक पर्व एवं मेले मनायें जायेंगे। ये सभी त्यौहार हमारी धार्मिक आस्थाओं और प्रकृति के प्रति हमारी कृतज्ञता के प्रतीक हैं। इन सभी अवसरों पर संस्कृति विभाग सभी समाजों को, उनकी आस्थाओं और सांस्कृतिक परम्पराओं को जोड़कर वृहद आयोजन करें। आल्हा-ऊदल वीर रस गायन के प्रतीक हैं, उनकी स्मृति में आयोजन किए जाएं। श्रावण महोत्सव और भुजरिया पर्व भी मनाएं। नागपंचमी पर जैव विविधता संरक्षण (सर्प प्रजातियों के संरक्षण) का संदेश दिया जाये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि संस्कृति विभाग लोगों को जोड़कर ऐसे आयोजन करें, जिनसे हमारी कला और संस्कृति के संवर्धन के साथ ही सरकार के संदेश का भी प्रसार हो। मुख्यमंत्री सोमवार को मंत्रालय में संस्कृति विभाग अंतर्गत संचालित योजनाओं एवं गतिविधियों की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश की कला, संस्कृति, परम्पराएं और समृद्ध पुरातात्त्विक धरोहरें प्रदेश की अमूल्य पूंजी हैं, जिन्हें संरक्षित और संवर्धित करना हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने के लिए योजनाबद्ध और प्रभावी प्रयास किए जाएं। डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के सांस्कृतिक अभ्युदय के लिए हमारी सरकार हर जरूरी प्रयास कर रही है। हम समाज को साथ लेकर इस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। बैठक में संस्कृति, पर्यटन एवं धार्मिक न्यास राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेन्द्र सिंह लोधी भी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संस्कृति विभाग द्वारा वित्त वर्ष 2026-27 के लिए तैयार किये गये 'कला पंचांग' का विमोचन भी किया। इसमें विभाग द्वारा वर्ष भर की जाने वाली कलात्मक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों का पूरा कैलेंडर तैयार किया गया है। अब इन्हें सिलसिलेवार क्रियान्वित किया जायेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भविष्य में प्रदेश में धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का दायरा और तेजी से बढ़ेगा। विभागीय आंतरिक विशेषताओं और विशेषज्ञताओं का समुचित संयोजन करते हुए संस्कृति विभाग की और बेहतर पुनर्संरचना की जाये। विभागीय गतिविधियों का आधुनिक संदर्भों में विस्तार भी किया जाये। उन्होंने कहा कि संस्कृति, पर्यटन, धार्मिक न्यास और कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग सभी मिलकर काम करें, ताकि प्रदेश में धार्मिक एवं आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिले। इससे प्रदेश में उत्कृष्ट कारीगरी से निर्मित होने वाले क्रॉफ्ट आइटम्स, हैंडलूम आइटम्स और कशीदाकारी को भी पहचान मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सम्राट वीर विक्रमादित्य के नाम से एक पृथक अकादमी का गठन किया जाये। इसमें विक्रमादित्य के जीवनवृत्त पर समग्र शोध एवं अन्य संगत गतिविधियां भी संचालित की जायें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य के बाहर के प्रसिद्ध मंदिरों और देव स्थानों के अतिरिक्त अब प्रदेश में मौजूद 2 ज्योतिर्लिंगों, जागृत एवं मंशापूर्ण शक्ति पीठों एवं अन्य धार्मिक स्थलों को भी मुख्यमंत्री तीर्थदर्शन योजना में शामिल किया जाये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विशेष रूप से श्रीराम वन गमन पथ और श्रीकृष्ण पाथेय परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को इनके निर्माण कार्यों में और अधिक गति लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि उक्त दोनों परियोजनाएं धार्मिक आस्था के केंद्र होने के साथ ही प्रदेश के सांस्कृतिक और पर्यटन विकास की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इनका कार्य शीघ्र पूर्ण होने से प्रदेश में धार्मिक पर्यटन को नई दिशा मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सांस्कृतिक गतिविधियों में जनसहभागिता बढ़ाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश के गांवों, कस्बों और शहरों में आयोजित होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों से अधिक से अधिक लोगों को जोड़ा जाए, ताकि नई पीढ़ी अपनी समृद्ध कला और सांस्कृतिक विरासत से परिचित हो सकें। बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संस्कृति विभाग की विभिन्न योजनाओं, संरक्षण कार्यों तथा आगामी सांस्कृतिक आयोजनों की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को और सशक्त बनाने के लिए समन्वित प्रयास किए जाने पर बल दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भोपाल के नजदीक जगदीशपुर स्थित पुराने किले की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने कहा कि इस किले के इतिहास को जीवंत करने और इसे राष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए भविष्य में जल्द ही यहां स्टेट कैबिनेट मीटिंग की जायेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में जन्मे या यहां से निकलकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने वाले गायकों, कलाकारों और अन्य जनों की जानकारी एकत्रित कर इन्हें मध्यप्रदेश में प्रस्तुति देने के लिए राज़ी किया जाये। इससे मध्यप्रदेश की कला एवं सांस्कृतिक विविधताओं को देश-दुनिया में नई पहचान और एक्सपोजर मिलेगा और अपनी माटी से जुड़कर ऐसे कलाकारों को भी खुशी होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पद्म पुरस्कारों के लिए प्रदेश के कलाकारों, समाजसेवियों, पर्यावरणविदों के केंद्र सरकार को भेजे जाने वाले प्रस्तावों पर संस्कृति विभाग भी अपनी ओर से अनुशंसा करे। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी पद्म पुरस्कार विजेताओं की आर्थिक मदद के लिए एक स्थायी योजना तैयार की जाये, ताकि जरुरतमंदों को शासन की योजना के तहत आर्थिक सहयोग दिया जा सके। अपर मुख्य सचिव संस्कृति शिव शेख़र शुक्ला ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को बताया कि प्रदेश में वर्तमान में 17 धार्मिक/सांस्कृतिक लोक और 20 संग्रहालयों का निर्माण किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2023 से अब तक संस्कृति विभाग के अधीन करीब 4160 करोड़ रुपए के निर्माण कार्यों पर काम जारी हैं। कुछ काम पूरे भी हो चुके हैं। जल्द ही लोकार्पण भी कराया जायेगा। प्रदेश में श्रीराम वन गमन पथ निर्माण पर 160 करोड़ रुपए के काम जारी हैं। महाकाल लोक में मूर्ति स्थापना के कार्य प्रगति पर है। ओरछा में भगवान राम राजा लोक एकदम नये स्वरूप में (छह नई थीम पर) तैयार किया जा रहा है। प्रदेश के सभी लोकों के नियमित संचालन के लिए स्थायी प्रबंधन भी किये जा रहे हैं। प्रदेश के सभी संगीत महाविद्यालयों और सांची स्थित बौद्ध भारतीय ज्ञान अध्ययन अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालय के सुचारू संचालन के लिए भी जरूरी व्यवस्थाएं की जा रही हैं। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश के नाट्य विद्यालय में विभाग द्वारा डिग्री कोर्सेस चलाये जा रहे हैं। यह विद्यालय इतना प्रसिद्ध है कि अब नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा के पदाधिकारी विजिट करके यहां उपलब्ध सुविधाओं और कोर्सेस की जानकारी ले रहे हैं। उन्होंने बताया कि चित्रकूट के समग्र विकास के लिए उत्तरप्रदेश सरकार के साथ लगातार … Read more