samacharsecretary.com

भोपाल में शुरू होगा ड्रोन तकनीक एक्सपो-2025, मुख्यमंत्री डॉ. यादव देंगे स्टार्टअप्स को नई उड़ान

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद् के मुख्य सभागृह में "ड्रोन तकनीक कार्यशाला एवं एक्सपो-2025” का 11:45 बजे शुभारंभ करेंगे। कार्यशाला का आयोजन मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद्, मध्यप्रदेश राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम एवं आई. आई. टी, इंदौर द्वारा किया जा रहा है। मध्यप्रदेश स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित यह दो दिवसीय कार्यशाला एवं एक्सपो राज्य में ड्रोन तकनीक के विकास, उपयोग और नवाचारको को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। ड्रोन टेक वर्कशॉप एवं एक्सपो-2025 का मुख्य उद्देश्य राज्य में ड्रोन तकनीक की समझ, उपयोगिता और क्षमता निर्माण को बढ़ावा देना है। कार्यशाला से युवाओं, शोधकर्ताओं, स्टार्टअप्स, उद्योगों और नीति निर्माताओं को एक साझा मंच मिलेगा जिससे ड्रोन तकनीक के व्यावहारिक, सामाजिक और औद्योगिक उपयोग को बढ़ावा दिया जा सकेगा। कार्यक्रम में ड्रोन प्रदर्शनी एवं हैंड्स ऑन वर्कशॉप आयोजित की जाएगी। एक्सपो में राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय विशेषज्ञों के प्रेरक व्याख्यान, ड्रोन उड़ान के लाइव डेमो एवं टेक्निकल शोकेस, इनोवेशन चैलेंज एवं प्रतियोगिताएँ,सहभागी संस्थाओं, विद्यार्थियों को डिजिटल सहभागिता प्रमाण पत्र वितरण किया जायेगा। कार्यशाला में विज्ञान एवं प्रौद्योगिक के अपर मुख्य सचिव श्री संजय दुबे, मुख्यमंत्री के संस्कृति सलाहकार श्रीराम तिवारी, स्कूल ऑफ प्लानिंग एण्ड आर्किटेक्चर के निदेशक डॉ. कैलासा राव, म.प्र. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के महानिदेशक डॉ. अनिल कोठारी उपस्थित रहेंगे।  

बिजली की बर्बादी पर लगेगी लगाम — सरकारी स्कूलों में शुरू होगी प्री-पेड मीटर व्यवस्था

पटना जिले के सभी सरकारी विद्यालयों में बिजली आपूर्ति को लेकर प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाने का निर्देश दिया गया है। इसको देखते हुए शिक्षा विभाग स्तर पर प्रारंभिक, माध्यमिक व उच्च माध्यमिक विद्यालयों में बिजली के बकाया राशि के भुगतान की कार्रवाई की जा रही है। बिजली की बकाया राशि भुगतान किए जाने के बाद स्कूलों में स्मार्ट मीटर प्री-पेड मीटर लगाया जाएगा। जिले के वैसे सरकारी स्कूल जहां अब तक प्रीपेड स्मार्ट मीटर नहीं लगा है, वहां प्रीपेड मीटर लगाने को कहा गया है। जिला शिक्षा कार्यालय के अनुसार स्कूलों में स्मार्ट प्री-पेड मीटर की राशि का भुगतान विभागीय स्तर पर किया जा रहा है। स्कूलों में बिजली की खपत के अनुसार बिजली बिल का भुगतान किया जाएगा। इसके अलावा जिन स्कूलों में सोलर पैनल लगे हैं वहां विभाग उसी आधार पर बिजली विभाग को क्लेम कर राशि का भुगतान करेगी।   जिला शिक्षा पदाधिकारी ने कहा है स्मार्ट प्री-पेड मीटर लगाए जाने से बिजली की खपत भी कम होगी। बच्चों को बिजली की बचत के लिए शिक्षक भी जागरूक करेंगे। इससे होगा कि बच्चे स्कूल के साथ-साथ अपने घर के बिजली के खपत पर ध्यान देंगे। स्कूलों में स्मार्ट प्री-पेड मीटर लगाए जाने के बाद स्कूलों के प्रधानाध्यापक की यह जिम्मेवारी होगी, वे बिजली की खपत पर नजर रखें। इसके साथ ही शिक्षक भी विद्यार्थियों को बिजली की बचत के लिए जागरूक करेंगे। एवरेज से अधिक बिजली खपत होने पर प्रधानाध्यापक यह सुनिश्चित करेंगे कि कहीं गलत कनेक्शन तो नहीं हुआ है। इसके साथ ही स्कूल में लगने वाले मीटर के साथ-साथ कोई किसी तरह का छेड़-छाड़ न हो इसको ध्यान में प्रधानाध्यापक रखेंगे।  

विशेष आर्टिकल :गांव से ग्लोबल तक: विकसित भारत 2047 में उत्तर प्रदेश की प्रेरक कहानी

लखनऊ 'समर्थ उत्तर प्रदेश – विकसित उत्तर प्रदेश @2047' अभियान केवल कागजी योजना नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के हर कोने में बदलाव की जीवंत कहानी है। 57 लाख से अधिक सुझावों से तैयार यह विजन डॉक्यूमेंट अब ग्रामीण स्मार्ट गांव, सोलर सिटी, डिजिटल कृषि, और महिला उद्यमिता के रूप में जमीन पर उतर रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में यह अभियान आर्थिक शक्ति, सृजन शक्ति और जीवन शक्ति के तीन स्तंभों पर खड़ा है। आइए, उत्तर प्रदेश के वास्तविक उदाहरणों से जानें कैसे यह अभियान लोगों की किस्मत बदल रहा है, और कैसे भाजपा सरकार का यह कदम लाखों को लाभ पहुंचा रहा है। 1. अयोध्या: सोलर सिटी का मॉडल – धार्मिक पर्यटन + हरित ऊर्जा • उदाहरण: अयोध्या को भारत की पहली सोलर सिटी बनाने का लक्ष्य। • क्या हुआ? o 2025 तक 10,000 सोलर रूफटॉप लगाए गए। o राम मंदिर परिसर 100% सोलर पावर्ड। o नॉन-टैक्स रेवेन्यू दोगुना – ₹500 करोड़+ वार्षिक। o पर्यटक संख्या: 2017 में 50 लाख → 2025 में 5 करोड़+। • लोगों की किस्मत बदली: मेयर गिरीश पति त्रिपाठी कहते हैं, "अभियान ने हमें सुझाव दिया – सोलर + साफ-सफाई। अब स्थानीय युवा सोलर टेक्नीशियन बन रहे हैं, 5,000+ नौकरियां पैदा हुईं।" • विकसित यूपी कनेक्शन: सृजन शक्ति (हरित ऊर्जा) + आर्थिक शक्ति (पर्यटन)। 2. मथुरा (महावन): ग्रामीण स्मार्ट गांव – डिजिटल क्रांति गांव में • उदाहरण: महावन नगर पंचायत को स्मार्ट विलेज मॉडल बनाया। • क्या हुआ? o Wi-Fi हॉटस्पॉट 50 गांवों में। o डिजिटल हेल्थ कार्ड हर परिवार को। o ऑनलाइन कृषि बाजार – किसान सीधे दिल्ली को बेच रहे। o प्रति व्यक्ति आय: 2017 में ₹8,000/माह → 2025 में ₹25,000/माह। • लोगों की किस्मत बदली: नगर पंचायत अध्यक्ष मंजू देवी कहती हैं, "अभियान के सुझाव से हमने डिजिटल कियोस्क लगाए। अब बेटियां ऑनलाइन पढ़ रही हैं, किसान ऐप से मौसम जान रहे हैं।" किसान रामू (28): पहले मजदूरी, अब ड्रोन से खेती, मासिक ₹40,000 कमाई। • विकसित यूपी कनेक्शन: जीवन शक्ति (स्वास्थ्य + शिक्षा) + सृजन शक्ति (डिजिटल इंफ्रा)। 3. गोरखपुर: ODOP + मुद्रा + विकसित यूपी = टेराकोटा निर्यातक • उदाहरण: गोरखपुर का टेराकोटा ODOP उत्पाद अब अमेरिका-जापान जा रहा। • क्या हुआ? o मुद्रा ऋण: ₹3 लाख → मशीनरी। o विकसित यूपी सुझाव: डिजाइन ट्रेनिंग + ई-कॉमर्स लिंक। o निर्यात: 2017 में शून्य → 2025 में ₹50 करोड़। o रोजगार: 2,000+ महिलाएं जुड़ीं। • लोगों की किस्मत बदली: सीता देवी (42): पहले मिट्टी के बर्तन बनाती थीं, अब 'गोरखपुर क्राफ्ट' ब्रांड की मालकिन। मासिक आय ₹1 लाख। "अभियान ने कहा – लोकल को ग्लोबल बनाओ। आज मेरा उत्पाद टोक्यो में बिकता है।" • विकसित यूपी कनेक्शन: आर्थिक शक्ति (ODOP + निर्यात)। 4. वाराणसी: डिजिटल स्वास्थ्य + काशी विश्वनाथ कॉरिडोर • उदाहरण: काशी मॉडल – स्वास्थ्य + पर्यटन। • क्या हुआ? o डिजिटल हेल्थ कार्ड: 25 लाख लोगों को। o काशी विश्वनाथ कॉरिडोर: 3 करोड़+ यात्री/वर्ष। o मेडिकल टूरिज्म: आयुर्वेदिक सेंटर शुरू। • लोगों की किस्मत बदली: डॉक्टर अनीता शर्मा: पहले छोटा क्लिनिक, अब आयुर्वेदिक वेलनेस सेंटर, 50 स्टाफ। युवा गाइड राहुल: पहले बेरोजगार, अब डिजिटल टूर गाइड ऐप, मासिक ₹30,000। • विकसित यूपी कनेक्शन: जीवन शक्ति (स्वास्थ्य) + आर्थिक शक्ति (पर्यटन)। 5. नोएडा: ग्लोबल निवेश हब – सेमीकंडक्टर + डेटा सेंटर • उदाहरण: नोएडा इलेक्ट्रॉनिक्स सिटी। • क्या हुआ? o 2025 में 10 डेटा सेंटर शुरू। o ₹50,000 करोड़ निवेश, 1 लाख नौकरियां। o सेमीकंडक्टर यूनिवर्सिटी की नींव। • लोगों की किस्मत बदली: इंजीनियर प्रिया (24): ग्रामीण पृष्ठभूमि, अब डेटा सेंटर में जॉब, सैलरी ₹80,000/माह। "अभियान ने कहा – स्किल इंडिया। मुझे मुफ्त AI ट्रेनिंग मिली।" • विकसित यूपी कनेक्शन: सृजन शक्ति (टेक्नोलॉजी) + आर्थिक शक्ति (निवेश)। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रेरक उद्गार • 3 सितंबर 2025 (लॉन्च): "अयोध्या सोलर सिटी बनेगी, मथुरा डिजिटल विलेज बनेगा, गोरखपुर टेराकोटा का ग्लोबल हब बनेगा – यही विकसित यूपी है।" • 14 अगस्त 2025 (विधानसभा): "2047 तक उत्तर प्रदेश 6 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनेगा। हर गांव में स्मार्ट स्कूल, हर घर में सोलर लाइट – यह हमारा संकल्प है।" • 26 सितंबर 2025 (ग्राम प्रधान सम्मेलन): "57 लाख सुझाव आए। यह जनता का विजन है। ग्रामोदय से राष्ट्रोदय तक – हर गांव अब विकसित यूपी का हिस्सा है।" भाजपा सरकार का ऐतिहासिक कदम: लाखों लाभार्थी लाभ संख्या सुझाव 57 लाख+ स्मार्ट गांव 5,000+ सोलर रूफटॉप 1 लाख+ डिजिटल हेल्थ कार्ड 2 करोड़+ रोजगार 40 लाख+ यह अभियान भ्रष्टाचार मुक्त, डिजिटल और जन-केंद्रित है – भाजपा की समावेशी नीति का प्रमाण। निष्कर्ष: विकसित यूपी @2047 – हर गांव, हर शहर, हर सपना अयोध्या की सोलर लाइट से मथुरा का डिजिटल कियोस्क, गोरखपुर की टेराकोटा से नोएडा का डेटा सेंटर तक – विकसित भारत @2047 उत्तर प्रदेश में साकार हो रहा है। योगी सरकार ने साबित किया: जब जनता साझेदार बने, तो 22 साल में क्रांति संभव है। आप भी सुझाव दें: viksitup2047.up.gov.in #ViksitUP2047 #YogiHaiToVikasHai #SamriddhiKaShatabdi

अब बिना रुकावट पहुंचे दूसरे देश! यूपी में बनेगा 102 KM लंबा फोर लेन हाईवे

लखनऊ जल्द ही लखनऊ से बाराबंकी-बहराइच होते हुए नेपाल तक का सफर आसान हो जाएगा। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) ने बाराबंकी से जरवल होते हुए बहराइच तक बनने जा रहे फोर लेन हाईवे को नेपाल सीमा पर स्थित रूपईडीहा तक विस्तार देने की तैयारी की है। इस प्रस्ताव को शीघ्र ही मंजूरी मिल जाने की उम्मीद है। एनएचएआइ द्वारा बाराबंकी-जरवल-बहराइच तक 102 किमी. लंबे फोर लेन हाईवे के निर्माण का काम मार्च तक शुरू किया जाएगा। एनएचएआइ सूत्रों के मुताबिक इस परियोजना की लागत करीब 3600 करोड़ रुपये है। काम शुरू करने के लिए टेंडर की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी। हाईवे निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण की कार्यवाही चल रही है। बाराबंकी-जरवल-बहराइच तक की फोर लेन हाईवे परियोजना का काम शुरू कराने के साथ ही बहराइच से रूपईडीहा तक हाईवे को विस्तारित किए जाने के मुद्दे पर एनएचएआइ कई बैठकें कर चुका है। नेपाल से जुड़ने के कारण इस हाईवे का महत्व बहुत अधिक होगा। अभी यह मार्ग दो लेन का है। परियोजना का उद्देश्य भारत व नेपाल के बीच होने वाली व्यापारिक गतिविधियों को सुगम करना है। परियोजना का काम पूरा होने पर लखनऊ के साथ ही मध्य और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों से नेपाल तक की यात्रा सुगम हो जाएगी।  

विशेष आर्टिकल : बेटियों को सशक्त बनाने की राह: कन्या सुमंगला योजना की अनोखी कहानी

विशेष आर्टिकल : कन्या सुमंगला योजना: बेटियों के सपनों को पंख लगाने वाली क्रांतिकारी पहल लखनऊ उत्तर प्रदेश में महिलाओं और बालिकाओं के सशक्तिकरण की दिशा में मिशन शक्ति फेज-5.0 एक मील का पत्थर साबित हो रहा है। इस अभियान का अभिन्न हिस्सा है मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना, जो बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ के संकल्प को साकार करने वाली एक ऐसी योजना है। इस योजना ने न केवल कन्या भ्रूण हत्या जैसी कुरीतियों पर अंकुश लगाया है, बल्कि लाखों बेटियों को शिक्षा और आत्मनिर्भरता की राह दिखाई है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, योजना के तहत अब तक 26 लाख से अधिक बेटियों को लाभ पहुंचाया गया है, जो उत्तर प्रदेश को महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। योजना का उद्देश्य और संरचना: एक विस्तृत नजर मिशन शक्ति के स्वावलंबन स्तंभ के तहत संचालित कन्या सुमंगला योजना का मुख्य उद्देश्य बेटियों के जन्म से लेकर उच्च शिक्षा तक वित्तीय सहायता प्रदान करना है, ताकि परिवारों पर आर्थिक बोझ कम हो और बेटियां बिना रुकावट पढ़ सकें। योजना को छह चरणों में विभाजित किया गया है, जिसमें कुल 25,000 रुपये की धनराशि दी जाती है: • प्रथम चरण: बेटी के जन्म पर 5,000 रुपये (1 अप्रैल 2019 या उसके बाद जन्मी बेटियों के लिए)। • द्वितीय चरण: पूर्ण टीकाकरण पर 2,000 रुपये। • तृतीय चरण: कक्षा-1 में प्रवेश पर 3,000 रुपये। • चतुर्थ चरण: कक्षा-6 में प्रवेश पर 3,000 रुपये। • पंचम चरण: कक्षा-9 में प्रवेश पर 5,000 रुपये। • षष्ठम चरण: कक्षा-10/12 उत्तीर्ण करने पर 7,000 रुपये (स्नातक या 2 वर्षीय डिप्लोमा में प्रवेश के लिए)। पात्रता के मानदंड सरल हैं: लाभार्थी परिवार उत्तर प्रदेश का स्थायी निवासी हो, वार्षिक आय 3 लाख रुपये से कम हो, और परिवार में अधिकतम दो बेटियां लाभार्थी हो सकें। आवेदन ऑनलाइन (mksy.up.gov.in) या ऑफलाइन दोनों तरीकों से किया जा सकता है। योजना ने लिंगानुपात में सुधार लाया है और बाल विवाह जैसी प्रथाओं को कम किया है, जिससे उत्तर प्रदेश का लिंगानुपात राष्ट्रीय औसत से बेहतर हो गया है। प्रेरणादायक कहानी: वाराणसी की प्रिया – योजना की जीवंत मिसाल कन्या सुमंगला योजना की सच्ची ताकत तो उसके लाभार्थियों की सफलता कहानियों में झलकती है। ऐसी ही एक प्रेरक कहानी है वाराणसी की प्रिया सिंह की, जो एक साधारण किसान परिवार से ताल्लुक रखती हैं। प्रिया का जन्म 2020 में हुआ, जब उनके परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर थी कि बेटी की पढ़ाई का खर्च उठाना मुश्किल था। लेकिन मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना ने उनके परिवार को नई उम्मीद दी। प्रिया को योजना के पहले चरण में जन्म पर 5,000 रुपये मिले, जिससे परिवार ने टीकाकरण और पोषण पर खर्च किया। कक्षा-1 में प्रवेश पर 3,000 रुपये से स्कूल फीस और किताबें खरीदी गईं। कक्षा-6 में 3,000 रुपये ने यूनिफॉर्म और स्टेशनरी का इंतजाम किया, जबकि कक्षा-9 में 5,000 रुपये ने अतिरिक्त ट्यूशन की सुविधा प्रदान की। अब कक्षा-10 उत्तीर्ण करने के बाद उन्हें 7,000 रुपये मिल चुके हैं, जिसका उपयोग आईएएस की तैयारी के लिए कोचिंग में किया जा रहा है। प्रिया बताती हैं, "यह पैसा मेरे लिए सिर्फ धन नहीं, बल्कि सपनों का ईंधन है। योजना ने मुझे साबित किया कि बेटी भी परिवार का सहारा बन सकती है।" आज प्रिया न केवल अपनी कक्षा में टॉपर हैं, बल्कि गांव की अन्य लड़कियों को पढ़ाई के लिए प्रेरित भी कर रही हैं। उनकी कहानी मिशन शक्ति के उस विजन को दर्शाती है, जहां हर बेटी एक भविष्य की नारी शक्ति है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का दूरदर्शी नेतृत्व: तारीफ के काबिल योगदान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दूरदृष्टि के बिना कन्या सुमंगला योजना इतनी सफल न होती। उन्होंने 25 अक्टूबर 2019 को योजना का उद्घाटन किया और इसे मिशन शक्ति का मजबूत स्तंभ बनाया। हाल ही में मिशन शक्ति 5.0 के लॉन्च पर लखनऊ में दिए गए अपने भाषण में सीएम योगी ने कहा, "बेटी के जन्म से स्नातक तक 25,000 रुपये का पैकेज देकर हम नारी शक्ति को मजबूत कर रहे हैं। यह योजना बेटियों को आत्मनिर्भर बनाएगी और समाज की कुरीतियों को जड़ से उखाड़ फेंकेगी।" उनके नेतृत्व में योजना ने 26 लाख बेटियों को जोड़ा, जो एक रिकॉर्ड है। योगी जी का यह प्रयास न केवल प्रशासनिक कुशलता का प्रतीक है, बल्कि संवेदनशील शासन का भी उदाहरण। उन्होंने नवरात्रि के कन्या पूजन के दौरान भी जोर दिया कि "कन्या पूजन से हम भविष्य की नारियों को सम्मान दे रहे हैं, और कन्या सुमंगला जैसी योजनाएं इसे साकार कर रही हैं।" योगी आदित्यनाथ का यह समर्पण उत्तर प्रदेश को 'बेटी-रक्षक' राज्य बनाने में मीलों आगे ले गया है। भाजपा सरकार का सराहनीय कदम: महिला सशक्तिकरण की नई मिसाल भाजपा सरकार के इस कदम की सराहना किए बिना न्याय नहीं होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' अभियान को मजबूत करने वाली यह योजना उत्तर प्रदेश में भाजपा शासन की प्राथमिकता को दर्शाती है। गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए वरदान साबित हुई कन्या सुमंगला ने न केवल आर्थिक सहायता दी, बल्कि सामाजिक परिवर्तन भी लाया। सरकार ने योजना को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाकर पारदर्शिता सुनिश्चित की, जिससे भ्रष्टाचार मुक्त वितरण संभव हुआ। यह कदम नारी सम्मान और समानता की दिशा में भाजपा की प्रतिबद्धता का प्रमाण है, जो पूरे देश के लिए प्रेरणा स्रोत बनेगा। निष्कर्ष: योगी सरकार की दूरदर्शी सोच से सशक्त बेटियां, समृद्ध उत्तर प्रदेश मिशन शक्ति और कन्या सुमंगला योजना मिलकर उत्तर प्रदेश को एक ऐसा राज्य बना रही हैं, जहां हर बेटी सुरक्षित, शिक्षित और आत्मनिर्भर हो। प्रिया जैसी लाखों कहानियां साबित करती हैं कि यह योजना सिर्फ कागजी नहीं, बल्कि जीवन बदलने वाली है। योगी आदित्यनाथ सरकार की यह पहल न केवल प्रशंसनीय है, बल्कि ऐतिहासिक भी है। • 2017 से पहले की अराजकता को याद करें, जब बेटियां घर से बाहर निकलने में डरती थीं। आज योगी सरकार ने महिला पुलिस बीट ऑफिसर, पिंक पेट्रोलिंग, महिला हेल्प डेस्क और 1090 हेल्पलाइन जैसे ठोस कदम उठाकर सुरक्षा का मजबूत कवच तैयार किया है। • कन्या सुमंगला योजना ने 26 लाख बेटियों को सीधे वित्तीय सहायता दी, जिससे लिंगानुपात में 50 अंकों का सुधार हुआ। • डिजिटल पारदर्शिता के जरिए हर पैसा सही हाथों तक पहुंच रहा है … Read more

गंगा एक्सप्रेसवे का निर्माण दिसम्बर तक पूरा करने का लक्ष्य, मुख्यमंत्री ने दिए गति बढ़ाने के निर्देश

उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था और औद्योगिक तरक्की की रीढ़ हैं एक्सप्रेसवे: मुख्यमंत्री गंगा एक्सप्रेसवे का निर्माण दिसम्बर तक पूरा करने का लक्ष्य, मुख्यमंत्री ने दिए गति बढ़ाने के निर्देश मुख्यमंत्री ने की यूपीडा के परियोजनाओं की समीक्षा, कहा समयबद्धता और गुणवत्ता सुनिश्चित हो मेरठ-हरिद्वार, नोएडा-जेवर, चित्रकूट-रीवा और विंध्य-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे के रूट पर हुई गहन चर्चा, मुख्यमंत्री ने एनएचएआई के साथ रूट समन्वय पर दिया बल डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के सभी नोड्स पर स्किल डेवलपमेंट सेंटर स्थापित होंगे: मुख्यमंत्री भूमि आवंटन के तीन वर्ष में निवेश न होने पर आवंटन रद्द किया जाए: मुख्यमंत्री लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को उत्तर प्रदेश इंडस्ट्रियल एक्सप्रेसवे डेवलपमेंट अथॉरिटी (यूपीडा) की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में कहा कि एक्सप्रेसवे केवल सड़कों का जाल नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था और औद्योगिक भविष्य की रीढ़ हैं। उन्होंने निर्देश दिया कि गंगा एक्सप्रेसवे का निर्माण कार्य दिसम्बर तक हर हाल में पूरा कराने के लक्ष्य के साथ तेज गति से आगे बढ़ाया जाए, ताकि राज्य के पश्चिमी और पूर्वी अंचलों के बीच सहज कनेक्टिविटी स्थापित हो सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक परियोजना की प्रगति की साप्ताहिक समीक्षा हो और कार्य की गुणवत्ता पर किसी प्रकार का समझौता न हो। बैठक में गंगा एक्सप्रेसवे के विस्तार स्वरूप प्रस्तावित मेरठ-हरिद्वार लिंक एक्सप्रेसवे, नोएडा-जेवर लिंक एक्सप्रेसवे, चित्रकूट-रीवा लिंक एक्सप्रेसवे तथा प्रयागराज, मिर्जापुर, वाराणसी, चंदौली और सोनभद्र तक प्रस्तावित विंध्य एक्सप्रेसवे व विंध्य-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे के रूट पर विस्तृत चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन नए एक्सप्रेसवे की योजना बनाते समय भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा प्रस्तावित एक्सप्रेसवे और हाइवे नेटवर्क का पूरा ध्यान रखा जाए, ताकि दोहराव से बचते हुए राज्य में एकीकृत और समन्वित सड़क तंत्र विकसित हो सके। मुख्यमंत्री ने डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर से जुड़े सभी नोड्स (लखनऊ, कानपुर, झांसी, आगरा, अलीगढ़ और चित्रकूट) में स्किल डेवलपमेंट सेंटर की स्थापना के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन केंद्रों के माध्यम से स्थानीय युवाओं को तकनीकी प्रशिक्षण देकर रक्षा उद्योग से जोड़ना चाहिए, जिससे रोजगार सृजन के साथ ही क्षेत्रीय आत्मनिर्भरता को बल मिलेगा। बैठक में बताया गया कि डिफेंस कॉरिडोर के लिए अब तक लगभग 30,819 करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिल चुके हैं। 5039 एकड़ भूमि अधिग्रहीत की जा चुकी है। विभिन्न कंपनियों द्वारा कार्य प्रारंभ भी किया जा चुका है। मुख्यमंत्री ने भूमि आवंटन नीति पर विशेष बल देते हुए कहा कि भूमि आवंटन के तीन वर्ष के भीतर यदि निवेशक द्वारा यथोचित उपयोग नहीं किया जाता है तो ऐसा आवंटन स्वतः निरस्त किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि भूमि उपयोग की निगरानी की पारदर्शी व्यवस्था बनाई जाए और निवेशक को केवल वास्तविक प्रगति की स्थिति में ही आगे की सुविधाएँ दी जाएँ। बैठक में यह भी बताया गया कि एक्सप्रेसवे के किनारे विकसित हो रहे औद्योगिक क्लस्टर और लॉजिस्टिक पार्कों में निवेश आकर्षित करने के लिए यूपीडा ने बिजली, जलापूर्ति, ट्रक टर्मिनल और हेल्थ-इमरजेंसी सुविधाओं की व्यवस्था हेतु समयबद्ध योजना बनाई है।

पर्यटन में बड़ा दांव! पंजाब में शुरू हुए 6 मेगा प्रोजेक्ट्स, PPP मॉडल से होगी विकास की रफ्तार तेज

चंडीगढ़ पंजाब के पर्यटन और मेहमान नवाज़ी (Hospitality) के क्षेत्र को नई ऊँचाइयों पर ले जाने के लिए राज्य सरकार ने एक साहसिक और दूरदर्शी कदम उठाया है! यह पहल न केवल पर्यटन को बढ़ावा देगी, बल्कि यह भी सुनिश्चित करेगी कि पंजाब के लोगों को बेहतर सुविधाएँ मिलें और राज्य की अर्थव्यवस्था मज़बूत हो। ओएसडी टू सीएम अमनजोत सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में, पंजाब बुनियादी ढांचा विकास बोर्ड (पी.आई.डी.बी.) ने चंडीगढ़ में एक ऐतिहासिक निवेशक सम्मेलन आयोजित किया, जिसका मकसद सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पी.पी.पी.) मॉडल के ज़रिए निवेश आकर्षित करना और राज्य की पर्यटन क्षमता को वैश्विक स्तर पर लाना है। यह कदम दर्शाता है कि पंजाब सरकार राज्य के गौरवशाली इतिहास को आधुनिक विकास के साथ जोड़कर एक 'नया पंजाब' बनाने के लिए कितनी प्रतिबद्ध है।  ओएसडी टू सीएम अमनजोत सिंह ने बताया कि इस महत्वपूर्ण बैठक में, सरकार ने देशभर के प्रमुख निवेशकों, डेवलपर्स और सलाहकारों के सामने छह महत्वाकांक्षी परियोजनाओं की रूपरेखा पेश की, जो पंजाब के हर कोने में पर्यटन के लिए नए रास्ते खोलेंगी। अमृतसर की धार्मिक और ऐतिहासिक गलियों में अब अर्बन रोपवे (Urban Ropeway) परियोजना शुरू होगी, जिससे न केवल यातायात आसान होगा, बल्कि शहर का नजारा भी शानदार दिखेगा। वहीं, हमारी सदियों पुरानी विरासतों जैसे सरहिंद के आम-खास बाग और कपूरथला के दरबार हाल को पुनर्जीवित कर उन्हें लक्ज़री विरासती होटलों में बदला जाएगा। इसके अलावा, रोपड़ के आम-खास बाग में पिंकासिया टूरिस्ट कॉम्प्लेक्स बनाकर पर्यटकों की सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। ओएसडी टू सीएम अमनजोत सिंह ने बताया कि व्यापारिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए, मोहाली और लुधियाना जैसे औद्योगिक केंद्रों में अत्याधुनिक कन्वेंशन सेंटर कम प्रदर्शनी केंद्र बनाए जाएंगे। ये केंद्र पंजाब को उत्तर भारत का व्यापार और सम्मेलन हब बनाकर नए निवेश के अवसर खोलेंगे। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य इन परियोजनाओं को 'अधिक निवेशक-अनुकूल' बनाना था। पी.आई.डी.बी., पर्यटन एवं सांस्कृतिक मामले विभाग और आवास निर्माण एवं शहरी विकास विभाग के अधिकारियों ने निवेशकों के साथ गहन विचार-विमर्श किया। परियोजनाओं की संभावनाओं, समय-सीमाओं और कानूनी स्वीकृतियों पर चर्चा हुई। ओएसडी टू सीएम अमनजोत सिंह ने बताया कि सरकार ने निवेशकों को आश्वस्त किया कि पी.पी.पी. फ्रेमवर्क के तहत प्रतिस्पर्धी बोली की प्रक्रिया और राजस्व-साझा (Revenue-Sharing) मॉडल पूरी तरह पारदर्शी होंगे। निवेशकों को खुलकर अपनी प्रतिक्रिया साझा करने के लिए प्रोत्साहित किया गया ताकि परियोजना से संबंधित शर्तों को भरोसेमंद और निवेशक-अनुकूल बनाया जा सके। यह पहल स्पष्ट करती है कि सरकार निजी क्षेत्र के साथ एक सार्थक संवाद और सहयोग के लिए मंच तैयार कर रही है। ओएसडी टू सीएम अमनजोत सिंह ने बताया कि राज्य सरकार ने अपनी प्रतिबद्धता दोहराई कि वह निवेशकों के लिए एक पारदर्शी और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करेगी, ताकि विश्व-स्तरीय पर्यटन और आतिथ्य बुनियादी ढांचे का विकास किया जा सके। सरकार ने कहा कि यह जन और निजी क्षेत्रों की साझेदारी, पंजाब आने वाले पर्यटकों को बेहतर अनुभव प्रदान करने और पर्यटन क्षेत्र में सतत विकास को प्रोत्साहित करने के लिए आवश्यक है। ओएसडी टू सीएम अमनजोत सिंह ने बताया कि यह पहल स्पष्ट करती है कि पंजाब सरकार एक समृद्ध, पारदर्शी और प्रगतिशील राज्य बनाने के लिए प्रतिबद्ध है, जहां निवेश का स्वागत है और विकास की गति तेज़ है। पंजाब, अब पर्यटन और विकास के मानचित्र पर तेज़ी से आगे बढ़ रहा है!

मौसम विभाग की चेतावनी: झारखंड में मोंथा तूफान से भारी बारिश के आसार

रांची भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने बीते मंगलवार को बंगाल की खाड़ी में बने चक्रवात के प्रभाव के कारण 31 अक्टूबर तक झारखंड के कुछ हिस्सों में भारी से बहुत भारी वर्षा होने का अनुमान जताया है। आईएमडी ने एक बुलेटिन में बताया कि चक्रवाती तूफान ‘मोंथा' मंगलवार सुबह साढ़े पांच बजे तक एक भीषण चक्रवाती तूफान में तब्दील हो गया। थाई भाषा में ‘मोंथा' का अर्थ सुगंधित फूल होता है। तूफान सुबह साढ़े पांच बजे मछलीपत्तनम से 190 किमी दक्षिण-पूर्व में, काकीनाडा से 270 किमी दक्षिण-पूर्व में तथा आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम से 340 किमी दक्षिण-दक्षिण पूर्व में केंद्रित था। बुलेटिन में कहा गया है, ‘इसके उत्तर-उत्तर पश्चिम की ओर बढ़ने और शाम और रात के दौरान भीषण चक्रवाती तूफान के रूप में मछलीपत्तनम और कलिंगापत्तनम के बीच काकीनाडा के आसपास आंध्र प्रदेश के तट को पार करने की आशंका है। इस दौरान हवा की अधिकतम गति 90-100 किमी प्रति घंटा होगी और हवाएं 110 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकती हैं।' मौसम वैज्ञानिकों ने झारखंड के लिए चेतावनी जारी करते हुए कहा कि बुधवार को चतरा, गढ़वा, लातेहार और पलामू के कुछ हिस्सों में बहुत भारी बारिश हो सकती है। उन्होंने कहा कि आज और 31 अक्टूबर को गिरिडीह, कोडरमा, लोहरदगा, बोकारो, रामगढ़, हजारीबाग, रांची, खूंटी, गुमला, दुमका, गोड्डा, पाकुड़ और साहेबगंज के कुछ हिस्सों में भी भारी बारिश की आशंका है।  

33.21 करोड़ की लागत से खातेगांव जल प्रदाय परियोजना का कार्य तेजी से प्रगति पर

खातेगांव जल प्रदाय परियोजना का कार्य तेजी से जारी परियोजना की लागत 33 करोड़ 21 लाख रूपये खातेगांव देवास जिले की खातेगांव जल प्रदाय परियोजना का कार्य एशियन डेवलपमेंट बैंक के सहयोग से तेजी से किया जा रहा है। परियोजना के तहत नर्मदा नदी से जल लेकर 7.9 एमएलडी क्षमता वाले जल शोधन संयंत्र में शुद्ध किया जाएगा। वर्तमान में 4.75 एमएलडी क्षमता का नया जल शोधन संयंत्र बनाया जा रहा है, जबकि 3.75 एमएलडी क्षमता का संयंत्र पहले से ही कार्य कर रहा है। जल संग्रहण के लिए 1000 किलोलीटर क्षमता का नया ओवरहेड टैंक बनाया जा रहा है। साथ ही एक मौजूदा ओवरहेड टैंक का उपयोग भी किया जाएगा। परियोजना के अंतर्गत कुल 6 हजार 300 घरों में नल कनेक्शन दिए जाने का कार्यक्रम बनाया गया है, इनमें से अब तक 3 हजार 526 घरों को जल प्रदाय नेटवर्क से जोड़ा जा चुका है। इस योजना से खातेगांव की लगभग 18 हजार से अधिक की आबादी को शुद्ध पेयजल की सुविधा प्राप्त होगी। परियोजना की कुल लागत करीब 33 करोड़ 21 लाख रुपये है और कार्य निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। परियोजना के पूर्ण होने से क्षेत्र में पेयजल संकट का स्थायी समाधान होगा तथा नागरिकों के जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार आएगा। उल्लेखनीय है कि कार्य के अंतर्गत नर्मदा नदी पर निर्माणाधीन इंटेक वेल का कार्य भी पंप के फ्लोर लेवल तक पूर्ण होकर एपोर्च ब्रिज का कार्य जारी है। वहीं खातेगॉव नगर परिषद के पुराने ट्रेंचिंग ग्राउंड पर जल शोधन संयंत्र के विभिन्न घटकों का निर्माण भी तेज गति से जारी है। नेमावर इनटेक वेल से खातेगॉव तक रॉ वॉटर पाइप लाइन बिछाने का कार्य भी शीघ्र प्रारंभ किया जा रहा है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अंतर्गत मध्यप्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कंपनी की उज्जैन इकाई के अंतर्गत यह कार्य किया जा रहा है। कंपनी द्वारा कार्य की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि यह परियोजना लंबे समय तक जनहित में उपयोगी सिद्ध हो सके। परियोजना की खास बात यह है कि सभी कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप किए जा रहे हैं और शीघ्र ही खातेगांव को नियमित एवं स्वच्छ पेयजल आपूर्ति का लाभ मिलेगा।    

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बोले – माँ नर्मदा में मगरमच्छ को पुनर्स्थापित करने का संकल्प हो रहा पूर्ण

पुण्य सलिला माँ नर्मदा के वाहन मगरमच्छ को माँ नर्मदा में बसाने का पूर्ण हो रहा है संकल्प : मुख्यमंत्री डॉ. यादव 30 अक्टूबर गुरुवार को माँ नर्मदा के जल में छोड़े जाएंगे मगरमच्छ भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राज्य सरकार पुण्य सलिला माँ नर्मदा के वाहन मगरमच्छ को माँ नर्मदा में बसाने का अपना संकल्प पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। मगरमच्छों के आवास के लिए नर्मदा जी की धारा अत्यंत अनुकूल है। गुरुवार 30 अक्टूबर को माँ नर्मदा के जल में मगरमच्छों को छोड़ा जाएगा। राज्य सरकार सभी प्रकार के जीवों के संरक्षण के लिए संकल्पित है। प्रदेश में वन्य जीवों के साथ ही घड़ियाल, मगरमच्छ जैसे सभी प्रकार के जलीय जीवों की संख्या में निरंतर वृद्धि हो रही है। उल्लेखनीय है कि गत वर्ष चंबल नदी में घड़ियाल छोड़े गए थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह जानकारी अटल पथ पर मीडिया से चर्चा के दौरान दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में सभी प्रकार के वन्यजीवों के संरक्षण का अभियान चल रहा है। भारतीय संस्कृति में मनुष्य एवं वन्य जीव परस्पर एक-दूसरे पर निर्भर हैं। मां नर्मदा जी का वाहन निर्मल जल में अठखेलियां करता दिखाई देगा। नर्मदा जी में मगरमच्छों को छोड़ते समय इस बात का भी विशेष ध्यान रखा जाएगा कि इस जलीय जीव को ऐसे स्थान पर छोड़ा जाए, जहां लोगों को इससे खतरा न हो। मगरमच्छ की मौजूदगी मां नर्मदा के लिए शुभ होगी और यह जल की धारा को सशक्त बनाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव 30 अक्टूबर को खण्डवा जिले के नर्मदानगर प्रवास पर रहेंगे।