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राजनीति और विवाद: तेज प्रताप यादव की संपत्ति व आपराधिक रिकॉर्ड पर एक नजर

वैशाली  बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए नामांकन प्रक्रिया जारी है। इसी क्रम में राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव ने बृहस्पतिवार को वैशाली जिले की महुआ विधानसभा सीट से जनशक्ति जनता दल के प्रत्याशी के रूप में नामांकन पत्र दाखिल किया। नामांकन के साथ दाखिल हलफनामे में तेज प्रताप ने अपनी संपत्ति, शिक्षा और लंबित आपराधिक मामलों की जानकारी साझा की है। हलफनामे के अनुसार, तेज प्रताप यादव के पास कुल 2.88 करोड़ रुपये की संपत्ति है, जिसमें 91.65 लाख रुपये की चल संपत्ति और 1.96 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति शामिल है। वर्ष 2020 में उन्होंने कुल 1.22 करोड़ रुपये की चल और 1.6 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति घोषित की थी, यानी उनकी संपत्ति में पिछले पांच वर्षों में मामूली वृद्धि हुई है। तेज प्रताप यादव ने बताया कि उन पर कुल आठ आपराधिक मामले लंबित हैं। इनमें भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराएं 147, 149, 188, 307, 333, 353, 427 और 504 शामिल हैं। इसके अलावा उनके खिलाफ SC/ST Act और Epidemic/Disaster Management Act की धाराओं के तहत भी मुकदमे दर्ज हैं। हालांकि, इन मामलों में से किसी में भी उन्हें दोषी नहीं ठहराया गया है। हलफनामे में तेज प्रताप यादव की पत्नी ऐश्वर्या राय का कोई विवरण शामिल नहीं किया गया है, क्योंकि दोनों के बीच तलाक का मामला इस समय पटना की पारिवारिक अदालत में विचाराधीन है। तेज प्रताप यादव पहले वर्ष 2020 तक महुआ सीट से राजद के टिकट पर विधायक रहे थे। इसके बाद पार्टी ने उन्हें हसनपुर सीट से उम्मीदवार बनाया था। शैक्षिक योग्यता के अनुसार, तेज प्रताप यादव ने वर्ष 2010 में इंटरमीडिएट परीक्षा उत्तीर्ण की थी। उन्होंने यह परीक्षा बिहार विद्यालय परीक्षा समिति, पटना से संबद्ध राममोहन राय सेमिनरी +2 स्कूल से पास की थी। इससे स्पष्ट होता है कि उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी करने के बाद राजनीति में सक्रिय भूमिका निभानी शुरू की।

राजस्थान में सियासी हलचल, बिहार के स्टार प्रचारकों की घोषणा से मची खलबली

 जयपुर बीजेपी ने बिहार विधानसभा चुनावों के लिए स्टार प्रचारकों की जो सूची जारी की है उसने राजस्थान की सियासत में हडकंप मचा दिया है। पार्टी ने गुरुवार शाम बिहार चुनावों के लिए 40 स्टार प्रचारकों की सूची जारी की है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा और मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सहित कई दिग्गजों को शामिल किया गया है। इस सूची में उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, असम और दिल्ली के मुख्यमंत्रियों को भी जगह दी गई है। लेकिन इस बार राजस्थान से किसी भी केंद्रीय मंत्री, मुख्यमंत्री, पूर्व सीएम वसुंधरा राजे या वरिष्ठ नेता को स्टार प्रचारक नहीं बनाया गया, जिससे राजनीतिक हलकों में अटकलों का दौर शुरू हो गया है। प्रदेश में गुरुवार शाम से ही कयासों के दौर चल पड़े हैं क्या गुजरात पेटर्न पर राजस्थान में भी कुछ बड़ा बदलाव होने वाला है।  क्यों अहम है राजस्थान की भागीदारी? बिहार में राजस्थानी मूल के वोटर्स और व्यापारिक समुदाय का अच्छा खासा प्रभाव है। राज्य के हर बड़े शहर में मारवाड़ी व्यापारी समुदाय सक्रिय है। पूर्व में भाजपा राजस्थान के नेताओं को बिहार में प्रचार के लिए भेजती रही है। पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ सहित कई नेता पूर्व चुनावों में प्रचार में सक्रिय रहे हैं। वसुंधरा राजे को स्टार प्रचारकों में शामिल नहीं किए जाने को लेकर भी काफी चर्चाएं हैं। हालांकि राजे इन दिनों राजस्थान में पूरी तरह सक्रिय नजर आ रही हैं। वे न सिर्फ राजस्थान के दौरे कर रही हैं बल्कि सोशल मीडिया पर अपने कार्यकाल की योजनाओं का प्रचार भी कर रही हैं।  स्टार प्रचारक नहीं, लेकिन ग्राउंड पर मौजूद हैं राजस्थानी नेता हालांकि इस बार किसी नेता को स्टार प्रचारक नहीं बनाया गया है, लेकिन सूत्रों के अनुसार, राजस्थान बीजेपी के कई नेता और कार्यकर्ता बिहार में सक्रिय हैं। राजेंद्र राठौड़ सहित कई वरिष्ठ नेता पिछले दो हफ्तों से बिहार में चुनावी प्रचार, जनसंपर्क और संगठनात्मक काम में जुटे हुए हैं। सियासी संकेत और अटकलें राजस्थान को पूरी तरह नजरअंदाज किए जाने पर सियासी विश्लेषक इसे पार्टी के भीतर बदलते समीकरणों से जोड़ कर देख रहे हैं। कुछ इसे केंद्रीय राजनीति में राजस्थान नेताओं के कम होते प्रभाव की ओर भी इशारा मान रहे हैं। जबकि राजस्थान से कई वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री भाजपा के संगठनात्मक ढांचे में प्रभावी भूमिका निभाते हैं। अब देखना यह होगा कि चुनावी रणनीति में इस बदलाव के पीछे पार्टी का क्या तर्क सामने आता है और क्या राजस्थान की अनदेखी का कोई असर बिहार चुनाव में देखने को मिलेगा।  

MP कैडर के IAS अरुण पिथोड़े को सीएक्यूएम में अहम भूमिका, केंद्र सरकार में पहले से कार्यरत

भोपाल  मध्यप्रदेश कैडर के ईमानदार और सरल स्वभाव के आईएएस अधिकारी तरुण पिथोड़े को केंद्र में नई जिम्मेदारी मिली है। उन्हें पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अंतर्गत वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) में मेंबर सेक्रेट्री बनाया गया है। पिथोड़े अभी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति में अभी मिनिस्ट्री ऑफ एनवायर्नमेंट फॉरेस्ट एंड क्लाइमेट चेंज में जॉइंट सेक्रेटरी हैं। बता दें कि वर्ष 2009 बैच के आईएएस अधिकारी तरुण पिथोड़े की नियुक्ति को एप्वाइंटमेंट कमेटी ऑफ कैबिनेट ने अप्रूवल दे दिया। पिथोड़े अगले पांच साल तक इस जिम्मेदारी को निभाएंगे। यह जिम्मेदारी उनकी लीडरशिप केपेसिटी के अनुसार दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में गंभीर वायु प्रदूषण से निपटने के लिए रणनीतियां बनाने के लिए की गई है। इससे पहले वह राजगढ़, सीहोर, बैतूल और भोपाल के कलेक्टर के रूप में भी जिम्मेदारी का निर्वहन कर चुके हैं। कौन हैं तरुण पिथोड़े तरुण कुमार पिथोड़े मध्य प्रदेश कैडर के 2009 बैच के आईएएस हैं। वर्तमान में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में संयुक्त सचिव के पद पर कार्यरत हैं। पिथोड़े एमपी के छिंदवाड़ा जिले के छोटे इलाके पसरिया से आते हैं। उनकी स्कूली शिक्षा केंद्रीय विद्यालय से हुई। इसके बाद भोपाल के मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान इलेक्ट्रॉनिक एवं संचार इंजीनियरिंग में स्नातक की उपाधि प्राप्त की। सॉफ्टवेयर इंजीनियर से कलेक्टर तक का सफर पिथोड़े ने अपने करियर की शुरूआत जीई इंडिया में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में अपना करियर शुरू किया। आईएएस बनने से पहले उन्होंने कुछ समय तक मध्य रेलवे में सहायक सिग्नलिंग और दूरसंचार इंजीनियर के रूप में काम किया। वह बचपन से कलेक्टर बनने का सपना देखा करते थे। इसके लिए उन्होंने 2008 की यूपीएससी की परीक्षा में आल इंडिया लेवल पर सातवीं और महाराष्ट्र में प्रथम रैंक हासिल करने के बाद कलेक्टर बने। एमपी कैडर के अधिकारी का बढ़ता कद गौरतलब है कि पिछले हफ्ते ही प्रीति मैथिल को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ किए जाने के आदेश जारी किए गए थे। प्रीति को ट्राइबल को-आपरेटिव मार्केटिंग डेवलपमेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया (ट्राइफेड) में डिप्टी जनरल मैनेजर बनाया गया। 2009 बैच की आईएएस अधिकारी प्रीति मैथिल की ट्राइफेड में प्रतिनियुक्ति पर पांच साल के लिए पदस्थापना की गई है। प्रीति मैथिल मंडला, सागर और रीवा की कलेक्टर रह चुकी हैं। वे मुख्यमंत्री सचिवालय, किसान कल्याण और कृषि विकास विभाग में भी संचालक और अपर सचिव के पद पर काम कर चुकी हैं। वहीं, 10 दिन पहले 2009 बैच की ही आईएएस अधिकारी सूफिया फारुकी वली को भारतीय खाद्य निगम में एमपी रीजन में जनरल मैनेजर के रूप में पदस्थ किया जा चुका है। यह अफसर भी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति में हैं मार्च 2025 में प्रियंका दास, पंकज जैन, प्रवीण सिंह अढायच, अगस्त में तन्वी सुंद्रियाल, सितंबर में नीरज कुमार सिंह की पदस्थापना केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर की जा चुकी हैं। एमपी कैडर के 6 अधिकारी केंद्रीय मंत्रियों के यहां विशेष सहायक के रूप में काम कर रहे हैं, जिनमें से अधिकांश की पदस्थापना 2024 में हुई है।  

अस्पताल ने सरोगेसी के नाम पर किया छल, उपभोक्ता आयोग ने लगाया जुर्माना और लौटाई पूरी रकम

भोपाल  मरीज और डॉक्टर के बीच रिश्ता भरोसे का होता है। अगर कोई डॉक्टर या अस्पताल मरीज को धोखा देता है तो वह वित्तीय नुकसान ही नहीं, भरोसे को भी ठेस पहुंचाता है। भोपाल उपभोक्ता आयोग ने ऐसे ही एक मामले में ऐतिहासिक फैसला देते हुए एक अस्पताल को मरीज से ली गई पूरी रकम लौटाने का आदेश दिया है। इसके साथ ही उसे क्षतिपूर्ति देने का भी आदेश दिया है। अस्पताल ने मरीज को सरोगेसी के नाम पर धोखा दिया था। दरअसल, चूनाभट्ठी निवासी एक दंपती को 15 वर्षों के वैवाहिक जीवन में कोई संतान नहीं थी। बावड़िया कला स्थित पुष्पांजलि सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल और डॉ. वर्षा जैन के यहां सरोगेसी से संतानसुख का विज्ञापन देखकर वे वहां पहुंचे। उनका परीक्षण करने के बाद डॉक्टर ने सरोगेसी की सलाह दी। बताया गया कि इस प्रक्रिया पर नौ लाख रुपये का खर्च आएगा। एक बार सफल नहीं हुआ तो यह प्रक्रिया तीन बार की जाएगी। उसके बाद एक अनुबंध कराया गया। दूसरी महिला मिलने पर बताने की बात कही बताया गया कि गर्भधारण के लिए उदयपुर से एक महिला को बुलाकर अस्पताल के पहले तल पर रखा गया है। उस महिला से दंपती को कभी मिलने नहीं दिया गया। बाद में कहा गया कि सरोगेसी के लिए आई महिला का गर्भपात हो गया है। वह कभी मां नहीं बन पाएगी। दंपती से कहा गया कि दूसरी महिला मिलने पर उन्हें बताया जाएगा, लेकिन फिर ऐसा हुआ ही नहीं। कई महीनों बाद भी जब अस्पताल से सूचना नहीं आई तो दंपती ने अपने पैसे वापस मांगे। अस्पताल ने अपना पता बदल दिया। शाहपुरा थाने में शिकायत हुई तो अस्पताल संचालक ने कह दिया कि उसने सरोगेसी का काम छोड़ दिया है। दो साल परेशान होने के बाद 2022 में पीड़ित महिला ने आयोग में याचिका लगाई। चिकित्सकीय उपेक्षा से इन्कार सुनवाई के दौरान अस्पताल संचालक का कहना था कि उनके द्वारा कोई चिकित्सकीय उपेक्षा या लापरवाही नहीं की गई है। उनके द्वारा सभी कार्य बीमित हैं। इस कारण बीमा कंपनी उत्तरदायी होगा। बीमा कंपनी ने कहा कि ये सभी प्रक्रियाएं बीमा के अंतर्गत नहीं आती हैं। 3.75 लाख देने का आदेश सुनवाई के बाद आयोग की अध्यक्ष गिरीबाला सिंह व सदस्य अंजुम फिरोज ने अस्पताल को सेवा में कमी और अनुचित व्यापार का दोषी माना। उन्होंने अस्पताल को आदेश दिया कि वह दो महीने के भीतर दंपती को तीन लाख 75 हजार रुपये अदा करे। इसमें ढाई लाख रुपये इलाज पर हुआ खर्च और एक लाख 25 हजार रुपया मानसिक क्षतिपूर्ति के लिए तय हुआ।

फिर एक्टिव हुआ भोपाल प्रशासन, भीख मांगने वालों को SDM-DSP ने क्या समझाया?

भोपाल  मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में भीख मांगना और देना दोनों अपराध हैं। 3 फरवरी 2025 को कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने इसके आदेश जारी किए थे। इन आदेशों के बाद एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए गए थे। पहले तो कुछ दिनों तक प्रशासन खूब मुस्तैद दिखा था, लेकिन बाद में कार्रवाई ठंडे बस्ते में चली गई। अब कुछ महीने बाद फिर जिला प्रशासन भीख मांगने वालों पर कड़ाई करते दिख रहा है। भिक्षा मांगने वालो पर एक्शन लेने के लिए अफसर भोपाल की सड़कों पर उतरे। अफसरों ने व्यापमं चौराहे पर कार्रवाई की। यहां कई लोगों को भिक्षावृत्ति करने से रोका। वहीं, गुटखा-पाउच बेचते हुए महिला को रोका। कलेक्टोरेट में बैठक होने के बाद एमपी नगर एसडीएम एलके खरे और एसीपी मनीष भारद्वाज पुलिस बल के साथ अलग-अलग इलाकों में सख्ती बरतते दिखाई दिए। यह है आदेश आपको बता दें कि कलेक्टर ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 के तहत आदेश जारी किया था। साथ ही भिखारियों के लिए कोलार के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में रहने-खाने की व्यवस्था की गई है। भोपाल में एक भिखारी पर 26 जनवरी की रात एफआईआर दर्ज हुई थी। एमपी नगर थाने में यह मामला दर्ज हुआ था। इससे पहले इंदौर में भी ऐसा ही आदेश लागू किया गया था। भीख न देने पर बदतमीजी दरअसल, एक नागरिक ने भीख न देने पर भिखारी द्वारा की गई बदतमीजी की शिकायत की थी। पुलिस ने भिखारी को पकड़ा और पूछताछ की। जमानती धारा होने के कारण उसे नोटिस देकर छोड़ दिया गया। इस घटना के बाद प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए भीख मांगने और देने पर प्रतिबंध लगा दिया है। भिक्षावृत्ति करने वालों के लिए पुनर्वास भिखारियों के पुनर्वास के लिए भी व्यवस्था की गई है। कोलार स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को भिक्षुक गृह बनाया गया है। यहां भिखारियों के रहने, खाने-पीने की व्यवस्था होगी। उन्हें यहां आश्रय दिया जाएगा। प्रशासन का मानना है कि इससे भिखारियों को भीख मांगने की जरूरत नहीं पड़ेगी। वे एक सम्मानजनक जीवन जी सकेंगे। यह कदम शहर की सुंदरता और सुरक्षा दोनों के लिए जरूरी है। इससे नागरिकों को भीख मांगने वालों से होने वाली परेशानी से भी निजात मिलेगी।

व्यापक हित में मुख्यमंत्री का बड़ा निर्णय, मार्च 2026 तक ₹1960 करोड़ का अतिरिक्त व्ययभार वहन करेगी सरकार

दीपावली पर मुख्यमंत्री योगी का बड़ा उपहार: प्रदेश के 28 लाख कर्मचारियों व पेंशनरों के महंगाई भत्ते में 3 प्रतिशत की वृद्धि व्यापक हित में मुख्यमंत्री का बड़ा निर्णय, मार्च 2026 तक ₹1960 करोड़ का अतिरिक्त व्ययभार वहन करेगी सरकार अब 55 प्रतिशत से बढ़कर 58 प्रतिशत हुआ महंगाई भत्ता और महंगाई राहत, 01 जुलाई 2025 से लागू होगा निर्णय कर्मचारियों और पेंशनरों के हितों के प्रति सरकार पूर्णतः प्रतिबद्ध: मुख्यमंत्री महंगाई से राहत और जीवन स्तर सुधार के लिए योगी सरकार का संवेदनशील कदम मुख्यमंत्री ने दिए निर्देश, बढ़ा हुआ महंगाई भत्ता व राहत अक्टूबर 2025 से नकद भुगतान के रूप में मिले नवंबर 2025 में ₹795 करोड़ का आएगा अतिरिक्त नकद व्ययभार, ओपीएस कार्मिकों के जीपीएफ में ₹185 करोड़ जमा होंगे जुलाई से सितंबर 2025 के एरियर भुगतान पर सरकार उठाएगी ₹550 करोड़ से अधिक का अतिरिक्त भार दिसंबर 2025 से प्रत्येक माह ₹245 करोड़ का अतिरिक्त व्ययभार वहन करेगी राज्य सरकार लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रकाश पर्व दीपावली के अवसर पर प्रदेश के 28 लाख कर्मचारियों और पेंशनरों को महंगाई भत्ता (डीए) और महंगाई राहत (डीआर) की दरों में वृद्धि का उपहार दिया है। गुरुवार को लिए गए मुख्यमंत्री के इस निर्णय के अनुसार अब प्रदेश के सभी पात्र 16.35 लाख कर्मचारियों एवं 11.52 लाख पेंशनरों व पारिवारिक पेंशनरों को 01 जुलाई 2025 से 55 प्रतिशत के स्थान पर 58 प्रतिशत की दर से महंगाई भत्ता एवं महंगाई राहत का लाभ प्राप्त होगा। बढ़ोतरी की घोषणा करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राज्य सरकार अपने कर्मचारियों और पेंशनरों के हितों के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध है। महंगाई के प्रभाव से उन्हें राहत पहुंचाना और उनके जीवनस्तर में सुधार करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय प्रदेश के लाखों कर्मचारियों और पेंशनरों के प्रति संवेदना और सम्मान का प्रतीक है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि दीपावली का यह उपहार उनके जीवन में नई ऊर्जा, प्रसन्नता और समृद्धि लेकर आएगा।  इस निर्णय का लाभ सभी कर्मचारियों को मिलेगा, जिनमें सहायता प्राप्त शिक्षण एवं प्राविधिक शिक्षण संस्थानों के कर्मचारी, शहरी स्थानीय निकायों के नियमित एवं पूर्णकालिक कर्मचारी, कार्यप्रभारित कर्मचारी तथा यूजीसी वेतनमान के कर्मचारी शामिल हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह भी निर्देश दिए हैं कि बढ़ा हुआ महंगाई भत्ता एवं राहत का भुगतान माह अक्टूबर 2025 से नकद रूप में किया जाए। व्यापक हित मे लिए गए इस निर्णय से मार्च 2026 तक राज्य सरकार पर ₹1960 करोड़ का अतिरिक्त व्यय भार आएगा। बता दें कि मंहगाई भत्ता एवं मंहगाई राहत का भुगतान माह अक्टूबर, 2025 से नकद किये जाने की स्थिति में माह नवम्बर, 2025 में क्रमशः ₹161 करोड़ तथा ₹84 करोड़ का व्ययभार का व्ययभार आयेगा। माह जुलाई से सितम्बर, 2025 तक के मंहगाई भत्ता एवं मंहगाई राहत के एरियर के भुगतान पर माह नवम्बर, 2025 में क्रमशः ₹298 करोड़ एवं ₹252 करोड़ का अतिरिक्त नकद व्ययभार आयेगा। इस प्रकार माह नवम्बर, 2025 में कुल ₹795 करोड़ का अतिरिक्त नकद व्ययभार आयेगा। ओपीएस से आच्छादित कार्मिकों के जीपीएफ में ₹185 करोड़ जमा होगा, तत्पश्चात् माह दिसम्बर, 2025 से प्रत्येक माह ₹245 करोड़ का अतिरिक्त व्ययभार आयेगा।

विश्व बैंक अध्यक्ष ने एक कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश में कृषि को तकनीक से जोड़ने के लिए किए जा रहे प्रयासों को सराहा

उत्तर प्रदेश में छोटे किसानों के लिए रेज़िलिएंस मॉडल बना उदाहरण: अजय बंगा विश्व बैंक अध्यक्ष ने एक कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश में कृषि को तकनीक से जोड़ने के लिए किए जा रहे प्रयासों को सराहा अजय बंगा बोले- उत्तर प्रदेश में देखा ‘रेज़िलिएंट एग्रीकल्चर’ का जीवंत मॉडल छोटे किसानों के लिए यूपी का कृषि मॉडल बना वैश्विक मिसालः बंगा गर्मी-सहनशील बीज और डिजिटल तकनीक से बदल रहा यूपी का ग्रामीण परिदृश्यः विश्व बैंक अध्यक्ष  बोले- उत्तर प्रदेश ने दिखाया रास्ता, एक खराब सीजन अब नहीं बिगाड़ेगा कृषक की पूरी जिंदगी डिजिटल प्लेटफॉर्म बना किसानों की मजबूती की रीढ़, यूपी में तकनीक, बीमा और वित्त का अनूठा संगम विश्व बैंक प्रमुख बोले — उत्तर प्रदेश का मॉडल पूरी दुनिया अपना सकती है लखनऊ  विश्व बैंक समूह के अध्यक्ष अजय बंगा ने एक कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश में विकसित हो रहे छोटे किसानों के कृषि मॉडल की सराहना करते हुए कहा है कि “यह सिद्धांत नहीं, बल्कि जमीनी हकीकत है जिसे मैंने अपनी आँखों से देखा है।” उन्होंने कहा कि राज्य में कृषि प्रणाली को इस तरह से तैयार किया गया है कि उसमें रेज़िलिएंस (लचीलापन) शुरुआत से ही निहित है, यह बाद में जोड़ा गया तत्व नहीं है। अजय बंगा एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे और यहां उन्होंने उत्तर प्रदेश और योगी सरकार की प्रशंसा करते हुए कहा कि जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए उत्तर प्रदेश में किसानों के साथ जो प्रयोग हो रहे हैं, वे अद्भुत हैं। यहाँ गर्मी सहन करने वाले बीज, मिट्टी के अनुकूल उर्वरक, पुनर्जीवित करने की तकनीकें, कुशल सिंचाई व्यवस्था और मजबूत बीमा-फाइनेंसिंग प्रणाली किसानों के जीवन को स्थिरता देती है। इसका मकसद यही है कि एक खराब मौसम या एक खराब सीज़न किसी किसान के लिए पूरी ज़िन्दगी का संकट न बन जाए। डिजिटल तकनीक है प्रणाली की रीढ़ विश्व बैंक अध्यक्ष ने आगे कहा कि इस पूरी प्रक्रिया का केंद्र डिजिटल तकनीक है। उन्होंने कहा कि डिजिटल ही वह ग्लू (गोंद) है जो पूरे सिस्टम को जोड़ता है। एक साधारण एआई टूल और बेसिक मोबाइल फ़ोन किसान की फ़सल की बीमारी की पहचान कर सकता है, उर्वरक की जानकारी दे सकता है, मौसम की चेतावनी पहले ही दे सकता है और भुगतान को सुरक्षित बना सकता है। यही डेटा आगे चलकर किसान की क्रेडिट हिस्ट्री बन जाता है, जिससे उसे सस्ता ऋण और बेहतर वित्तीय पहुंच मिलती है। उन्होंने इसे ‘वर्चुअस लूप’ (सकारात्मक चक्र) बताया, जहां डेटा आधारित विश्वास बेहतर अंडरराइटिंग को बढ़ाता है, ऋण सस्ता होता है और अधिक निवेशक इस पारिस्थितिकी तंत्र से जुड़ते हैं। उत्तर प्रदेश बना उदाहरण अजय बंगा ने कहा कि उन्होंने कुछ महीने पहले उत्तर प्रदेश का दौरा किया था, जहां उन्होंने इस मॉडल को वास्तविक रूप में क्रियान्वित होते देखा। उन्होंने कहा कि मैंने वहाँ देखा कि नींव से लेकर सहकारी संस्थाओं तक, किसानों की रेज़िलिएंस और सबसे बढ़कर डिजिटल प्रणाली, सबने मिलकर एक जीवंत पारिस्थितिकी तंत्र तैयार किया। यह एक प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट है, यह मॉडल काम करता है। अब इसे बड़े पैमाने पर लागू करने की आवश्यकता है, और यह पूरी तरह स्केलेबल है। उन्होंने कहा कि इस तरह का मॉडल तभी सफल हो सकता है जब सरकार, व्यवसाय और डेवलपमेंट पार्टनर्स एक ही दिशा में आगे बढ़ें। उत्तर प्रदेश और विश्व बैंक की साझेदारी हाल ही में विश्व बैंक और उत्तर प्रदेश सरकार ने मिलकर ‘यूपी एग्रीज’ परियोजना शुरू की है, जिसका उद्देश्य राज्य में कृषि प्रणाली को तकनीकी और वित्तीय रूप से मजबूत बनाना है। इस परियोजना से लगभग 10 लाख छोटे और सीमांत किसानों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। राज्य सरकार ने डिजिटल एग्रीकल्चर इकोसिस्टम की रूपरेखा भी तैयार की है, जिससे किसानों को मौसम, बीज, बाजार और बीमा से जुड़ी जानकारी वास्तविक समय पर उपलब्ध होगी। विश्व बैंक अध्यक्ष का यह बयान इस बात का संकेत है कि उत्तर प्रदेश अब सिर्फ एक राज्य नहीं, बल्कि “स्मार्ट कृषि परिवर्तन” का मॉडल बनता जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह समय है जब दुनिया ऐसे मॉडल्स को खुले तौर पर अपनाए, ताकि छोटे किसानों की आजीविका सुरक्षित और समृद्ध हो सके।

CM मोहन यादव की बिहार में रैली, कांग्रेस पर साधा निशाना – कहा युवाओं के भविष्य से किया खिलवाड़

भोपाल/पटना  मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 16 अक्टूबर को बिहार की राजधानी पटना में विधानसभा चुनाव के मद्देनजर प्रचार किया। उन्होंने पटना की कुम्हरार निर्वाचन क्षेत्र के कदमकुआं और बिक्रम विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत पार्वती स्कूल स्पोर्ट्स ग्राउंड में विशाल जनसभा को संबोधित किया। उन्होंने विधानसभा कुम्हरार में भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी संजय गुप्ता और बिक्रम नर्वाचन क्षेत्र में सिद्धार्थ सौरव के पक्ष में जनता से वोट की अपील की। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार के नेतृत्व में लगातार तीसरी बार एनडीए की सरकार बनेगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश का आर्थिक तंत्र बदल रहा है। सीएम डॉ. यादव की रैलियों में हुजूम उमड़ पड़ा। वे जैसे ही मंच पर आए, लोगों ने एनडीए और बीजेपी के समर्थन में नारे लगाना शुरू कर दिए। इस मौके पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मैं विक्रमादित्य की नगरी से आता हूं और विक्रम विधानसभा में आने का अलग ही आनंद है। विक्रम नाम से ही सुशासन, दान, वीरता का भाव प्रकट होता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में हमारी सरकार मध्यप्रदेश में विकास के कई काम कर रही है। बिहार में नीतीश कुमार एनडीए सरकार में मुख्यमंत्री है। उन्होंने सुशासन के सिद्धांतों से बिहार को विकास की नई गति प्रदान की है। बिहार हर काल में अच्छा ही करता है। अवंतिका उज्जैनी और पाटिलपुत्र का 2 हजार साल पुराना रिश्ता है। जब सम्राट अशोक को गद्दी संभालने का अवसर मिला तो वे उज्जैन में थे और वहीं से बिहार लौटे थे। बिहार ने झेला है जंगलराज सीएम डॉ. यादव ने कहा कि बिहार महात्मा गौतम बुद्ध की धरती है। इस चुनाव में हमारे प्रत्याशी सिद्धार्थ ने निस्वार्थ भाव से जनता की सेवा की है। बिहार की जनता ने कभी जंगलराज भी झेला है। कांग्रेस और विपक्षी दलों की सरकारों में लाइसेंस, कोटा और परमिट राज चलता था। कांग्रेस के राज में देश की हालत दयनीय हो गई थी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने युवाओं की योग्यता का गला घोंटा और बिहार को बर्बाद किया। उसके बाद हाथ में लालटेन पकड़ा दी। बिहार की ऐसी दुर्दशा तब है, जब देश में सबसे ज्यादा आईएएस यहीं से निकलते हैं। एनडीए में मौजूद है लोकतंत्र मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने लोकतंत्र की रक्षा की। हमारी पार्टी और एनडीए में एक चाय बेचने वाला भी प्रधानमंत्री बन सकता है, क्योंकि यहां लोकतंत्र है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का भी इतिहास यही है। आज लोकतंत्र को बचाने की चुनौती है। उन्होंने कहा कि दूसरी ओर, लाल किताब वाले की बुद्धि को अजीरण हो गया। भाषा और भाव कैसा हो, पता ही नहीं। सुप्रीम कोर्ट में बार-बार माफी मांगते हैं, लेकिन सुधरने को तैयार ही नहीं हैं। कांग्रेस परिवारवादी पार्टी है। अयोध्या के बाद अब बारी मथुरा की मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश के आर्थिक तंत्र में बदलाव आया है। आज गरीबों को 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिल रहा है। दुनिया में भारत की साख बढ़ रही है। कांग्रेसी तो भगवान श्रीराम के अस्तित्व पर भी सवाल उठाते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने रामजी के लिए फैसला दे दिया है, अब बारी मथुरा की है। जमुना किनारे भी कन्हैया मुस्कुराएंगे। नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार में लगातार तीसरी बार एनडीए की सरकार बनेगी।  

अंता उपचुनाव में मोरपाल सुमन होंगे बीजेपी के उम्मीदवार, कांग्रेस-रालोपा से कड़ी टक्कर तय

अंता  अंता विधानसभा उपचुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने लंबे मंथन के बाद मोरपाल सुमन को अपना प्रत्याशी घोषित किया है। पार्टी ने स्थानीयता, सादगी और जातिगत संतुलन को ध्यान में रखते हुए मोरपाल सुमन के नाम पर मुहर लगाई है। सुमन की पहचान क्षेत्र में एक लो-प्रोफाइल लेकिन जमीन से जुड़े नेता के रूप में है। बताया जा रहा है कि उनके नाम पर पार्टी के तमाम वरिष्ठ नेताओं में सहमति बनने के बाद ही टिकट फाइनल किया गया। बीजेपी के निर्णय के बाद अब अंता सीट पर मुकाबला दिलचस्प होता जा रहा है। कांग्रेस ने यहां से पूर्व मंत्री और वरिष्ठ नेता प्रमोद जैन भाया को प्रत्याशी बनाया है, जो पहले भी इस सीट से विधायक रह चुके हैं। भाया क्षेत्र में अपने संगठनात्मक नेटवर्क और पुराने जनसंपर्क के लिए जाने जाते हैं। वहीं, नरेश मीणा ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनावी मैदान में उतरकर मुकाबले को और कठिन बना दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार अंता सीट पर त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिलेगा। बीजेपी मोरपाल सुमन के स्थानीय होने और संगठन की मजबूती पर भरोसा जता रही है, जबकि कांग्रेस प्रमोद जैन भाया के अनुभव और लोकप्रियता को अपनी ताकत मान रही है। दूसरी ओर, नरेश मीणा युवा और जातीय समीकरण के दम पर चुनावी माहौल को प्रभावित करने की कोशिश में हैं। आने वाले दिनों में प्रचार अभियान के तेज होने के साथ ही यह सीट प्रदेश की सबसे चर्चित उपचुनाव सीटों में से एक बनने की संभावना है।

त्योहारी बुकिंग बनी मुश्किल: IRCTC सर्वर क्रैश से यात्रियों की परेशानी बढ़ी

नई दिल्ली इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन की वेबसाइट शुक्रवार को फिर तकनीकी खामियों की वजह से ठप हो गई। ऑनलाइन टिकट बुक करने की कोशिश कर रहे यात्रियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। सूत्रों के मुताबिक, समस्या सर्वर से जुड़ी है और इसे ठीक करने के लिए टीम काम कर रही है। वेबसाइट के साथ-साथ मोबाइल ऐप भी फिलहाल काम नहीं कर रहा था।इस मामले आईआरसीटीसी के अधिकारियों का कहना है कि, तकनीकी खराबी के चलते वेबसाइट में दिक्कत आ गई थी। जिसे 11:15 पर ठीक कर लिया गया है। दरअसल, हर रोज सुबह 10 बजे आईआरसीटीसी की वेबसाइट पर एसी श्रेणी की तत्काल टिकट बुकिंग शुरू होती है, जबकि नॉन-एसी टिकटों की बुकिंग 11 बजे से खुलती है। शुक्रवार को धनतेरस (शनिवार) के सफर के लिए तत्काल टिकट बुकिंग का समय था, लेकिन वेबसाइट के डाउन होने से यात्रियों की उम्मीदों पर पानी फिर गया। जिन लोगों ने त्योहार पर घर जाने के लिए टिकट बुक करने की योजना बनाई थी, उन्हें बड़ी निराशा हाथ लगी। भारतीय रेलवे की टिकट बुकिंग के लिए एकमात्र आधिकारिक प्लेटफॉर्म आरसीटीसी की वेबसाइट है।रोजाना इस वेबसाइट के जरिए लगभग 12.5 लाख टिकटें बुक की जाती हैं। रेलवे की कुल टिकट बुकिंग में से करीब 84 प्रतिशत बुकिंग आईआरसीटीसी की वेबसाइट और मोबाइल ऐप के माध्यम से होती है। गुरुवार को आईआरसीटीसी का शेयर सुबह 11 बजे तक बीएसई पर 0.28 प्रतिशत की गिरावट के साथ 717.05 रुपये के स्तर पर ट्रेड हो रहा है। हालांकि, पिछले 1 सप्ताह में कंपनी के शेयर में 0.34 फीसदी की तेजी देखने को मिली है। वही, पिछले 2 सप्ताह में इसमें 1.44 फीसदी का उछाल आया है। पिछले 6 महीने में कंपनी का शेयर -6.74 फीसदी गिरा है। वही, पिछले 1 साल में कंपनी के शेयर में -17.69 फीसदी की गिरावट देखने को मिली है। कंपनी का मार्केट कैप करीब 57,400.00 करोड़ रुपये है। 1999 में भारतीय रेलवे में शामिल हुआ था आईआरसीटीसी इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन भारत सरकार के रेल मंत्रालय के अंतर्गत एक मिनीरत्न पीएसयू है। IRCTC को 27 सितंबर 1999 को भारतीय रेलवे की एक शाखा के रूप में शामिल किया गया था। इसका उद्देश्य स्टेशनों, ट्रेनों और अन्य स्थानों पर  कैटरिंग और हॉस्पिटैलिटी को मैनेज करना है। इसके साथ ही बजट होटल्स, स्पेशल टूर पैकेज, इंफॉर्मेशन एंड कॉमर्शियल पब्लिसिटी और ग्लोबल रिजर्वेशन सिस्टम के डेवलपमेंट के माध्यम से घरेलू और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन को बढ़ावा देना है।