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इस महीने HKRNL की नई भर्ती शुरू, अंतिम तारीख से पहले करें आवेदन और पाएं मासिक सैलरी!

चंडीगढ़  हरियाणा कौशल रोजगार निगम लिमिटेड (HKRNL) की ओर से जिला स्तर पर फर्स्ट एड इंस्ट्रक्टर पदों पर भर्ती की जाएगी। यह नियुक्तियां सेंट जॉन एंबुलेंस इंटरनेशनल एसोसिएशन के माध्यम से की जाएंगी। कुल 48 पदों के लिए आवेदन प्रक्रिया जारी है, जो 20 अक्टूबर तक चलेगी। प्रत्येक जिले में एक पुरुष और एक महिला उम्मीदवार की नियुक्ति की योजना है। आवेदन के लिए ANM, GNM या BSC नर्सिंग जैसी योग्यताएं अनिवार्य रखी गई हैं और अभ्यर्थी के पास कम से कम एक वर्ष का अनुभव होना चाहिए। हर महीने मिलेंगे इतने रूपये योग्य उम्मीदवारों को चयन के बाद मासिक 17,500 रुपये का वेतन दिया जाएगा। भर्ती प्रक्रिया का उद्देश्य राज्यभर में प्राथमिक उपचार प्रशिक्षण को सशक्त बनाना और युवाओं को रोजगार के अवसर प्रदान करना है।

योगी आदित्यनाथ ने खोला राज का पर्दा: बिहार में बढ़ा भाई-भतीजावाद और अपराध, जिम्मेदार कौन?

पटना उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गुरुवार को आधिकारिक रूप से बिहार विधानसभा चुनाव प्रचार में उतर गए। दानापुर में एक रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने कांग्रेस और राजद पर जुबानी हमला किया। विशाल रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने उत्तर प्रदेश और बिहार के बीच साझा सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों का हवाला दिया। वहीं, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए उन पर राज्य में जंगल राज और भाई-भतीजावाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश और बिहार का न सिर्फ एक रिश्ता है, बल्कि एक साझा विरासत भी है। एक आत्मा, एक संस्कृति और एक संकल्प का बंधन। यह बंधन भगवान राम और माता जानकी के बंधन जितना ही अटूट है। योगी आदित्यनाथ ने लोगों को बिहार के राजनीतिक अतीत की याद दिलाते हुए कहा कि 1990 से 2005 तक राज्य जंगल राज से ग्रस्त था, जहां ज्ञान और अध्यात्म की जगह भाई-भतीजावाद और अपराध ने ले ली थी। उन लोगों (कांग्रेस और राजद) ने बिहार की ज्ञान की आध्यात्मिक भूमि को भाई-भतीजावाद और अपराध की भूमि में बदल दिया, जिससे हमारे युवाओं के लिए पहचान का संकट पैदा हो गया। सीएम योगी ने कहा कि बिहार को उस कलंक से मुक्त करने के लिए एनडीए सरकार ने 20 साल तक काम किया है। आज डबल इंजन वाली सरकार प्रभावी विकास के लिए काम कर रही है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने विपक्षी दल इंडिया ब्लॉक पर निशाना साधा। उन्होंने उन पर चुनावों में धांधली करने और बिहार के विकास को बाधित करने की साजिश रचने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि एनडीए सरकार पारदर्शी मतदान का समर्थन करती है, लेकिन कांग्रेस, आरजेडी और उनके सहयोगी कहते हैं कि धांधली होनी चाहिए। क्या उन्हें चुनावों में धांधली करने का अधिकार दिया जाना चाहिए? क्या विदेशी घुसपैठियों को यहां आकर दलितों, गरीबों और बिहार के नागरिकों के अधिकारों पर डाका डालने की इजाजत दी जानी चाहिए? उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश ने माफिया राज का सफाया कर दिया है और बिहार में भी ऐसा ही शासन जारी रहना चाहिए। उन्होंने मतदाताओं से बिहार में एनडीए की सत्ता में वापसी सुनिश्चित करने की अपील करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में माफिया पहले ही नरक में जा चुके हैं। हमने उनकी संपत्ति भी जब्त कर ली है और गरीबों के लिए घर बनाना शुरू कर दिया है। दानापुर रैली के बाद, योगी आदित्यनाथ ने सहरसा में एक और सभा को संबोधित किया, जहां उन्होंने विपक्ष पर हमला तेज किया। उन्होंने कहा कि गरीबों का कल्याण कांग्रेस या राजद के एजेंडे में कभी नहीं रहा। परिवार कल्याण ही उनका एकमात्र एजेंडा था। जब कांग्रेस ने लोकतंत्र का गला घोंटने की कोशिश की, तो बिहार ही उठ खड़ा हुआ। आज राजद ने खुद को उसी कांग्रेस के हाथों गिरवी रख दिया है। वे जयप्रकाश नारायण के सपनों को चकनाचूर कर रहे हैं।

आज बाढ़ में नामांकन, मोकामा में RJD ने वीणा को बनाया उम्मीदवार

 पटना  बिहार में मोकामा सीट पर अनंत सिंह और सूरजभान सिंह की पत्नी वीणा देवी के बीच मुकाबला 100 फीसदी कन्फर्म हो गया है। लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी प्रसाद यादव के राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) ने मोकामा सीट से मुंगेर की पूर्व सांसद वीणा देवी को टिकट दे दिया है। सिंबल लेकर मोकामा के बाहुबली सूरजभान सिंह वीणा देवी का नामांकन कराने बाढ़ निकल गए हैं। मोकामा में पहले चरण में चुनाव है। नामांकन का आखिरी दिन कल है। जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के उम्मीदवार और बाढ़ के बाहुबली अनंत सिंह 14 अक्टूबर को पर्चा भर चुके हैं। अनंत सिंह इस सीट से पहले पांच बार लगातार जीते हैं। 2022 में अनंत सिंह को एके 47 रखने के केस में जब सजा हुई तो विधायकी जाने के बाद उनकी पत्नी नीलम देवी उप-चुनाव जीती थीं। अनंत सिंह 2005 से 2010 तक तीन बार जेडीयू के टिकट पर जीते, 2015 में निर्दलीय जीत गए और 2020 में राजद के सिंबल पर जीते। 2022 में नीलम देवी राजद से ही जीती, लेकिन 2024 में नीतीश कुमार के बहुमत परीक्षण में सरकार के साथ चली गईं। विधानसभा के रिकॉर्ड में यह सीट राजद के ही खाते में दर्ज है।   दूसरी ओर, सूरजभान सिंह 2000 में मोकामा से पहली बार और आखिरी बार विधायक बने थे। तब उन्होंने अनंत सिंह के बड़े भाई दिलीप सिंह को बड़े अंतर से हराया था। दिलीप सिंह राजद के दबंग नेता और राबड़ी देवी की सरकार में कद्दावर मंत्री थे। 2004 में सूरजभान सिंह लोजपा के टिकट पर बलिया से लोकसभा सांसद बन गए। बाद में सजा हुई और चुनाव नहीं लड़ पाए तो 2014 में पत्नी वीणा देवी को मुंगेर से लोजपा का सांसद बनाया।  

लोकल फॉर वोकल को बढ़ावा देने खाद्य मंत्री सपरिवार खरीदी करने पहुंचे बाजार

अपना त्योहार, अपनों के हाथों से बनी वस्तुएं खरीद कर मनाये : गोविंद सिंह राजपूत  भोपाल  स्थानीय दुकानदारों, हस्तशिलपियों एवं लोकल फाॅर, वोकल को बढ़ावा देने के लिए दीपावली के अवसर पर खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने परिवार सहित कटरा बाजार सागर पहुंचकर खरीदारी की । स्थानीय दुकानदारों से बातचीत करते हुए श्री राजपूत ने शहरवासियों से भी अपील करते हुए कहा कि अपना त्यौहार अपने के हांथों से बनी वस्तुओं को खरीदकर मनायें ताकि हर घर में दीवाली की खुशियां पहुंच सकें। यह सभी व्यापारी आपके द्वारा खरीदी गये साज-सामग्री से प्रोत्साहित होते हैं, उनके घर भी त्यौहार की खुशियां पहुंचती हैं। मंत्री गोविंद सिंह राजपूत एवं उनकी पत्नी पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती सविता सिंह ने बाजार से मिट्टी के दीपक तथा अन्य पूजा सामग्री खरीदी। त्योहारी सीजन में लोकल फॉर वोकल को बढ़ावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘लोकल फॉर वोकल’ और ‘स्वदेशी अपनाओ, देश बचाओ’ अभियान को गति देने के लिए मंत्री श्री राजपूत ने इस दिवाली पर स्वदेशी वस्तुओं को बढ़ावा देने का आह्वान किया। त्योहारी सीजन में स्थानीय बाजारों में खरीदारी कर उन्होंने न केवल स्वदेशी उत्पादों को प्रोत्साहन दिया, बल्कि छोटे व्यापारियों और कारीगरों के लिए रोजगार के अवसरों को भी बल दिया। मंत्री श्री राजपूत ने कटरा बाजार का दौरा कर स्थानीय हस्तशिल्प, मिट्टी के दीये, हस्तनिर्मित वस्त्र और स्वदेशी खाद्य पदार्थों की खरीदारी की। उन्होंने कहा, स्वदेशी अपनाने से न केवल हमारी अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि लाखों कारीगरों, छोटे व्यापारियों और उद्यमियों को आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिलेगा।यह कदम स्थानीय उत्पादकों और विक्रेताओं के लिए आर्थिक समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करता है। ‘लोकल फॉर वोकल’ अभियान का लक्ष्य उपभोक्ताओं को स्वदेशी उत्पादों के प्रति जागरूक करना है, जिससे विदेशी वस्तुओं पर निर्भरता कम हो। इससे न केवल देश का पैसा देश में रहेगा, बल्कि स्वरोजगार को बढ़ावा मिलेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था सशक्त होगी।  लोकल फाॅर वोकल के मंत्री श्री राजपूत ने बताये फायदे  मंत्री श्री राजपूत ने नागरिकों से अपील की कि वे इस दिवाली स्थानीय दुकानों से खरीदारी करें, ताकि त्योहारों की रौनक के साथ-साथ देश की आर्थिक आत्मनिर्भरता भी बढ़े। इस पहल से न केवल व्यापारियों को लाभ होगा, बल्कि सांस्कृतिक विरासत भी संरक्षित होगी। स्वदेशी अपनाकर हम एक सशक्त, आत्मनिर्भर और समृद्ध भारत का निर्माण कर सकते हैं। मंत्री राजपूत ने कहा कि लोकल फॉर वोकल से स्थानीय उत्पादों और सेवाओं को बढ़ावा मिलता है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होती है। लोकल फॉर वोकल से स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिलते हैं, जिससे उनकी आय बढ़ती है और वे अपने परिवार का पालन-पोषण कर सकते हैं। स्थानीय संस्कृति और परंपराओं का संरक्षण होता है, जिससे हमारी सांस्कृतिक विरासत बनी रहती है। लोकल फॉर वोकल से परिवहन की आवश्यकता कम होती है, जिससे ईंधन की बचत होती है और पर्यावरण प्रदूषण कम होता है। स्थानीय उत्पादों की गुणवत्ता बढ़ती है, क्योंकि उत्पादक अपने उत्पादों को अच्छी तरह से बनाने के लिए प्रेरित होते हैं। देश आत्मनिर्भर बनता है, क्योंकि हमें आयात पर निर्भर नहीं रहना पड़ता है।

टिकट की राजनीति: क्या तेजस्वी का फैसला पारिवारिक विवाद थामने की चाल है या यादव वोट बैंक को साधने की रणनीति?

पटना  बिहार विधानसभा चुनाव की जंग जीतने के लिए सियासी दलों ने हर दांव चल रहे हैं. आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद के सियासी विरासत संभाल रहे तेजस्वी यादव ने अपने बड़े भाई तेज प्रताप यादव की चचेरी साली करिश्मा राय को परसा विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया है. हालांकि, तेज प्रताप का अपनी पत्नी ऐश्वर्या राय के साथ विवाद चल रहा है और मामला अदालत में है. करिश्मा राय बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री दरोगा प्रसाद राय की पोती हैं. दरोगा राय के छोटे बेटे पूर्व मंत्री चंद्रिका राय की बेटी ऐश्वर्या राय के साथ तेज प्रताप की शादी हुई थी, कुछ समय के बाद उनके रिश्ते खराब हो गए. इसे लेकर लालू परिवार बैकफुट पर आ गया है. तेजस्वी यादव ने तेज प्रताप के ससुर चंद्रिका राय के बड़े भाई विधानचंद्र राय की बेटी करिश्मा राय को प्रत्याशी बनाया है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या तेजस्वी का यह सियासी डैमेज कंट्रोल करने का दांव है या फिर यादव वोटों को जोड़े रखने की स्ट्रैटेजी है? करिश्मा राय पिछले विधानसभा चुनाव में भी आरजेडी से टिकट मांग रही थीं, लेकिन तब उन्हें टिकट नहीं मिल पाया था. तेज प्रताप और उनकी पत्नी ऐश्वर्या के बीच चल रहे केस की वजह से लालू परिवार ने करिश्मा को टिकट नहीं दिया था. लालू परिवार उस समय तेज प्रताप के साथ था, लेकिन पिछले दिनों लालू यादव ने तेज प्रताप को परिवार और पार्टी से बेदखल कर दिया. तेज प्रताप यादव इस बार के विधानसभा चुनाव में खुद अपनी पार्टी बनाकर लड़ रहे हैं. तेज प्रताप यादव महुआ सीट से ताल ठोक रहे हैं. लालू यादव द्वारा पारिवारिक संबंधों और राजनीतिक समीकरणों को साधते हुए करिश्मा राय को परसा सीट से मैदान में उतारना, क्षेत्र की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है. परसा से टिकट देकर तेजस्वी एक तीर से कई दांव साधते नजर आ रहे हैं. परसा विधानसभा सीट जीतने का सियासी दांव   बिहार की सियासत में दरोगा प्रसाद का राजनीतिक रसूख किसी से छिपा नहीं है. वह बिहार के सीएम रहे और परसा सीट पर उनका सियासी दबदबा था. 1952 में पहली बार परसा सीट से जीतकर विधायक बने दरोगा राय ने 1970 में मुख्यमंत्री की कुर्सी संभाली. इस सीट को दरोगा राय के बेटे चंद्रिका राय ने अपनी कर्मभूमि बनाते हुए अपने पिता की विरासत को आगे बढ़ाया. 2015 में परसा सीट पर चंद्रिका राय आरजेडी से विधायक चुने गए, उससे पहले जेडीयू से जीतते रहे. तेज प्रताप और ऐश्वर्या के रिश्ते बिगड़े तो चंद्रिका राय ने आरजेडी का दामन छोड़कर जेडीयू में वापसी कर ली. 2020 के विधानसभा चुनाव में जेडीयू के टिकट पर चंद्रिका राय चुनाव लड़े और आरजेडी से छोटे राय मैदान में थे. छोटे लाल राय ने जीत दर्ज कर विधायक बने, लेकिन बाद में वे पार्टी छोड़कर जेडीयू में शामिल हो गए. अब 2025 के चुनाव में परसा में मुकाबला दिलचस्प होगा. चंद्रिका राय के जेडीयू में अलग-थलग पड़ जाने के चलते तेजस्वी ने बड़ा दांव चला. आरजेडी ने करिश्मा राय को उतारा है तो जेडीयू से छोटे लाल राय मैदान में है. इस तरह मुकाबला काफी रोचक होगा. तेजस्वी यादव ने सियासी संदेश देने का चला दांव  तेजस्वी यादव ने तेज प्रताप यादव की साली को टिकट देकर सियासी संदेश दे दिया है. तेजस्वी ने तेज प्रताप को स्पष्ट संदेश दिया है कि आरजेडी अब उन लोगों से दूरी बनाकर नहीं रखेगा, जिनसे उनके निजी विवाद के चलते 2020 में दूरी बनाई गई थी. इसी के चलते तेजस्वी ने करिश्मा को पार्टी का टिकट दिया है. चंद्रिका राय अब जब खुद चुनावी मैदान में नहीं हैं तो अपनी भतीजी के लिए सियासी समर्थन कर सकते हैं. बिहार में यादव समुदाय के करीब 15 फीसदी वोटर हैं, जो ओबीसी में सबसे ज्यादा हैं. यादव आरजेडी का परंपरागत वोटर माना जाता है. तेज प्रताप यादव के हरकतों से यादव समाज नाराज भी माना जा रहा था, चाहे ऐश्वर्या राय के साथ विवाद का मामला हो या फिर अनुष्का यादव के साथ फोटो वायरल होने की बात हो. ऐसे में तेजस्वी ने करिश्मा राय को प्रत्याशी बनाकर यादव समुदाय की नाराजगी को दूर करने का दांव चला है.

राकेश किशोर की मुश्किलें बढ़ीं: CJI पर हमला मामले में कोर्ट ने दिया हरी झंडी

नई दिल्ली  भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) बीआर गवई पर सुप्रीम कोर्ट में जूता फेंकने की कोशिश करने वाले राकेश किशोर की मुश्किलें बढ़ गई हैं। अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने गुरुवार को जूताकांड में राकेश किशोर के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई चलाने की अपनी मंजूरी दे दी है। भगवान विष्णु पर सीजेआई गवई की टिप्पणी से नाराज राकेश किशोर ने छह अक्टूबर को उन पर भरी कोर्ट में जूता फेंकने की कोशिश की थी। हालांकि, बाद में सीजेआई ने उन्हें माफ करते हुए कोई भी कार्रवाई करने से इनकार कर दिया था। अटॉर्नी जनरल द्वारा अवमानना की मंजूरी दिए जाने की बात की जानकारी सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने तब दी, जब सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) अध्यक्ष और वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच के सामने इस मामले को उठाया। कोर्ट की अवमानना क नियम सेक्शन 15 के अनुसार, किसी भी व्यक्ति के खिलाफ इसकी कार्रवाई शुरू किए जाने से पहले अटॉर्नी जनरल की मंजूरी की जरूरत होती है। सीजेआई गवई पर जूता फेंकने के मामले में अटॉर्नी जनरल की ओर से यह मंजूरी दी गई है। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने राकेश किशोर के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की मांग की थी और एजी वेकंटरमणी को पत्र लिखा था। विकास सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में इस मामले को कल लिस्ट करने की मांग की। उन्होंने लिखा, ''जूता फेंकने के मामले को ऐसे ही नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। राकेश किशोर को जूता फेंकने पर कोई पछतावा नहीं है। मैंने अटॉर्नी जनरल से मंजूरी मांगी थी और इसे कल लिस्ट किया जा सकता है। सोशल मीडिया इस मामले में पागल हो गया है।'' सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी इस मामले को गंभीर बताया है। उन्होंने कहा, ''राकेश किशोर के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू करने के लिए एजी द्वारा मंजूरी दी जा चुकी है। संस्था की ईमानदारी दांव पर है। कुछ कार्रवाई की जरूरत है।'' हालांकि, इतना सब सुनने के बाद कोर्ट ने कहा कि इस घटना को जाने देना ही सबसे बेहतर होगा। मेहता और सिंह ने अदालत से सोशल मीडिया पर ऐसी सामग्री पोस्ट करने पर रोक से संबंधी आदेश पारित करने का अनुरोध करते हुए कहा कि हर तरह की अपमानजनक टिप्पणियां की जा रही हैं। पीठ ने कहा कि भाषण और अभिव्यक्ति का मौलिक अधिकार दूसरों की गरिमा की कीमत पर नहीं हो सकता है। इसने सोशल मीडिया की अनियमित प्रकृति के दुष्प्रभावों की ओर इशारा किया और कहा, ‘‘हम सामग्री के उत्पाद और उपभोक्ता दोनों हैं’’। हालांकि, कोर्ट ने मामले की कल मामले की सुनवाई के लिए लिस्ट नहीं किया है। जस्टिस कांत ने कहा, ''देखते हैं एक हफ्ते में क्या होता है और भी बिकने वाली चीजें पढ़ेंगे।'' वहीं, जस्टिस बागची ने कहा कि शायद छुट्टियों के बाद कुछ और बिकने वाली चीजें सामने आएंगी। प्रधान न्यायाधीश पर जूता फेंकने के प्रयास की यह अभूतपूर्व घटना छह अक्टूबर को हुई। उस दिन सुबह करीब 11:35 बजे अदालत कक्ष संख्या-एक में 71-वर्षीय अधिवक्ता राकेश किशोर ने अपने जूते उतारकर उन्हें प्रधान न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ की ओर फेंकने का प्रयास किया। सुरक्षाकर्मियों ने आरोपी अधिवक्ता को तुरंत हिरासत में ले लिया। अदालती कार्यवाही के दौरान हुई इस घटना से अविचलित प्रधान न्यायाधीश ने अदालत के अधिकारियों और अदालत कक्ष में मौजूद सुरक्षाकर्मियों से इसे नजरअंदाज करने और राकेश किशोर नामक दोषी वकील को चेतावनी देकर छोड़ देने को कहा।  

डिजिटल इंडिया (भारत सरकार) के जोनल हेड अभिनव शर्मा 17 अक्टूबर को भोपाल में, नई शिक्षा नीति 2020 पर आयोजित कार्यशाला में होंगे शामिल

भोपाल  भारत सरकार की महत्वाकांक्षी योजना डिजिलॉकर, APAAR id, NAD की मध्यप्रदेश एवं अन्य राज्यों में सुचारू रूप से संचालन की  महत्वपूर्ण  जिम्मेदारी संभाल रहे  डिजिटल इंडिया के जोनल हेड अभिनव शर्मा 17 अक्टूबर को भोपाल पधार रहे है, यहां वह उच्च शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित नई शिक्षा नीति 2020 विषय पर कार्यशाला में भाग लेंगे।   

18 महीने की जांच के बाद इंसाफ: बच्ची के हत्यारों को मिली फांसी की सजा

आगरा  यूपी के आगरा में मासूम बच्ची से गैंगरेप के बाद उसकी हत्या करने के मामले में कोर्ट ने गुरुवार को अपना फैसला सुनाया। 18 महीने बाद आए इस फैसले में कोर्ट ने दो दोषियों को फांसी की सजा सुनाई है। विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट सोनिका चौधरी की अदालत ने ये फैसला सुनाया है। बतादें कि 2024 में दो लड़कों ने एक बच्ची की गैंगरेप के बाद हत्या कर दी गई थी। इसके बाद बच्ची के पिता को फोन करके छह लाख की फिरौती भी मांगी थी। पीड़ित ने बाह थाने में केस दर्ज कराया था। इसके बाद से कोर्ट में केस विचाराधीन था। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता सुभाष गिरि के मुताबिक मामले में गुरुवार को कोर्ट में गवाह और अहम साक्ष्य प्रस्तुत किए गए। कोर्ट ने दोनों को दोषी मानते हुए फांसी की सजा सुनाई। मामला बाह थाना क्षेत्र का है। ग्राम पंचायत फरेरा में 18 मार्च 2024 को हुकम सिंह के लड़के हरेंद्र की पुत्री (पल्लवी) को परिवार के ही अमित पुत्र रामसरन जो कि रिश्ते में चाचा लगता है। उसने अपने साथी निखिल निवासी होलीपुरा के साथ 18 मार्च को अगवा करके बलात्कार कर गला घोंट कर मौत के घाट उतार दिया था ‌और हत्या के बाद 6 लाख की फिरौती मांगी गई थी। ‌जिसको परिवार वाले देने को तैयार थे लेकिन हत्या पहले ही कर दी गई थी, जिस कारण आरोपी गुमराह करते रहे और पैसे के लिए बार-बार जगह व मोबाइल नंबर बदल कर गुमराह करते रहे थे। बाद में जिसको पुलिस व एसओजी एवं एसटीएफ ने 20 मार्च 2024 को आरोपियों को पकड़ा था और आरोपियों के निशानदेही पर शव को बरामद कर आरोपियों को जेल भेजा था, जिसमें पॉस्को एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज हुआ था।  

UP विधानसभा 2027: मायावती की रणनीति पर BSP कार्यकर्ताओं की बैठक में चर्चा

लखनऊ  बसपा प्रमुख मायावती ने 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों की तैयारी के लिए लखनऊ में पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। हालांकि, उनके भतीजे आकाश आनंद खराब स्वास्थ्य के कारण इसमें शामिल नहीं हो सके। चुनावी रणनीति और पांचवीं बार सरकार बनाने की कोशिश के चलते मायावती ने ये बैठक बुलाई। बैठक के दौरान, मायावती ने पार्टी नेताओं का चुनावी तैयारियों पर मार्गदर्शन किया और उत्तर प्रदेश में बसपा को पांचवां कार्यकाल दिलाने की रणनीति की रूपरेखा पर चर्चा की। मुख्य चर्चा आगामी चुनावों के प्रति पार्टी के दृष्टिकोण पर केंद्रित रही। बसपा सुप्रीमो मायावती ने गुरुवार को पार्टी पदाधिकारियों की बैठक में निर्देश दिए की बूथ स्तर तक संगठन के गठन का काम अगले तीन महीने में पूरा किया जाए। मान्यवर कांशीराम की पुण्यतिथि पर उमड़ी कार्यकर्ताओं की भीड़ के लिए बूथ स्तर तक पदाधिकारी जाएं और धन्यवाद ज्ञापित करें। सर्व समाज के लोगों को पार्टी से जोड़ें। 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटें। 15 जनवरी को मायावती का जन्मदिन जनकल्याणकारी दिवस के रूप में सभी जिलों में मनाया जाएगा। इसकी अभी से तैयारियां शुरू करने के भी निर्देश दिए गए। बैठक में मायावती और आकाश आनंद के उत्तर प्रदेश भर में होने वाले दौरों के कार्यक्रमों को भी अंतिम रूप दिया गया। ये दौरे पार्टी का आधार मजबूत करने और चुनाव के लिए समर्थन जुटाने के उद्देश्य से किए जाएंगे। साथ ही बैठक में निर्देश दिए गए कि 10 प्रतिशत बचे बूथ हर हाल में नवंबर से जनवरी तक गठित किए जाएं। चार बार बसपा की सरकार रही है उस समय सरकार ने जो काम किए वह जन-जन तक पहुंचाए जाएं। अपनी जमीनी रणनीति के अलावा, बसपा अपनी भाईचारा समितियों के जरिए मुसलमानों, ओबीसी, दलितों और ब्राह्मणों सहित विभिन्न समुदायों का समर्थन मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित करेगी। यह चुनावों से पहले एक व्यापक सामाजिक गठबंधन बनाए रखने के पार्टी के निरंतर प्रयास को दर्शाता है।  

मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि केस की सुनवाई तेज, अदालत ने अगली तारीख 7 नवंबर तय की

प्रयागराज इलाहाबाद हाई कोर्ट में गुरुवार को मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि -शाही ईदगाह मस्जिद विवाद की करीब डेढ़ घंटे सुनवाई चली और अगली तारीख सात नवंबर नियत कर दी गई। न्यायमूर्ति अवनीश कुमार सक्सेना की पीठ के समक्ष वादकारियों की तरफ से वाद की पृष्ठभूमि और अब तक विभिन्न तिथियों में हुए आदेशों के बारे में जानकारी दी गई। अर्जी में क्या कहा? मंदिर पक्ष से वाद संख्या नौ में अधिवक्ता सौरभ तिवारी ने बताया कि कोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद निर्देश दिया कि पूर्व में प्रतिनिधि रूप के रूप में चयनित वाद संख्या 17 पर शाही ईदगाह मस्जिद कमेटी के आवेदन को लेकर जिन्होंने आपत्ति नहीं दायर की है, वह आगामी तारीख से पहले दे दें। शाही ईदगाह मस्जिद ने अपनी अर्जी में कहा है कि अन्य वाद निरस्त कर केवल वाद संख्या 17 ही सुना जाए। रजिस्ट्री से कहा है कि फाइलों को व्यवस्थित किया जाए।  मामले में पक्षकार और श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास के अध्यक्ष एडवोकेट महेंद्र प्रताप सिंह ने वाद संख्या तीन में आर्कियोलॉजी सर्वे आफ इंडिया (एएसआइ) से जवाब नहीं मिलने की बात कही। उन्होंने बताया कि अदालत ने सभी अर्जियों (प्रार्थना पत्रों) को एक साथ करने का आदेश दिया है।