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स्वयं को सुरक्षित रखते हुए आग पर काबू पाने की ली ट्रेनिंग

भोपाल  मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा लगातार पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को फायर सेफ्टी की ट्रेनिंग दी जा रही है। इसी तारतम्य में शनिवार शाम पुलिस मुख्यालय के भूतल पर सुरक्षाकर्मियों एवं कर्मचारियों को स्वयं को सुरक्षित रखते हुए आग पर काबू पाने का प्रशिक्षण दिया गया। अग्नि नियंत्रण संबंधी प्रशिक्षण में आधुनिक उपकरणों द्वारा आग बुझाने की मॉकड्रिल भी की गई। मॉकड्रिल के दौरान तरल पदार्थों में लगी आग को पुलिस के जवानों ने अग्निशमन यंत्रों के प्रयोग से किस तरह आसानी से बुझाई जा सकती है, इसका प्रशिक्षण प्राप्त किया। सुरक्षाकर्मियों ने आग को धुएं और लपटों से बचकर बुझाने का प्रशिक्षण प्राप्त कर आग बुझाने का अभ्‍यास भी किया। मॉकड्रिल में प्रमुख रूप से पुलिस मुख्यालय के सुरक्षा इंचार्ज  मुकेश सैनी, निरीक्षक विजय नागले, पुलिस फायर स्टेशन भोपाल के एसआई  शिवनारायण शर्मा व उनकी टीम उपस्थित थी। इन उपकरणों का दिया प्रशिक्षण मॉकड्रिल के दौरान पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को आग बुझाने में प्रयोग किए जाने वाले आधुनिक उपकरणों के संबंध में जानकारी दी गई। आग बुझाने के दौरान प्रयोग में आने वाले कलेक्टिंग ब्रिज, डिवाइडिंग ब्रिज, फायर मेन हेलमेट, फोम नोजल, अग्निशमन सिलेंडर एवं कॉर्टेज, टॉर्च, रिवॉल्विंग नोजल, यूनिवर्सल ब्रांच, न्यू लाइट(ब्रांच), ऑर्डनरी ब्रांच, एडॉफ्टर, जाली, फायर मेन एक्स, लॉक कटर, प्रॉक्सीमेटी सूट, एल्यूमिनियम सूट, कैमिकल सूट, ब्रीदिंग ऑपरेटर सेट, लाइफ जैकेट, हौज पाइप, फायर ब्लैंकेट, अग्निशमन यंत्र आदि की जानकारी दी गई। 5 तरह की होती है आग- बुझाने में बरतें सावधानी प्रशिक्षण के दौरान एसआई  शिवनारायण शर्मा ने बताया कि आग पांच तरह की होती है, जिन्हें बुझाने का तरीका भी अलग-अलग होता है। उन्होंने बताया कि इन्हें ए से इ तक की श्रेणी में रखा गया है। लकड़ी-कोयला में लगी छोटी आग को ए क्लास में रखा गया है। तरल पदार्थों में लगी आग को बी क्लास, गैसों में लगी आग को सी क्लास, मेटल में लगी आग को डी क्लास और इलेक्ट्रिक आग को ई क्लास की श्रेणी में रखा गया है। इन सभी आग को पानी या कैमिकल की मदद से बुझाया जाता है। अग्नि दुर्घटना होने पर यह करें         फायर ब्रिगेड, पुलिस कंट्रोल रूम, पुलिस थाना, विद्युत विभाग एवं चिकित्सालय को सूचना दें।         फायर फायटिंग दल फायर एक्सटिंग्यूशर अथवा पानी या रेत से अग्नि को प्रारंभिक स्थिति में बुझाएं। भवन के विद्युत प्रवाह को मेन स्विच से तत्काल कट-ऑफ करें।         फायर अलार्म दल सभी को अग्नि दुर्घटना की चेतावनी अलार्म बजाकर दें।         बचाव दल (इवेक्युएशन टीम) बिल्डिंग के व्यक्तियों को पूर्व निर्धारित योजना अनुसार सुरक्षित रास्तों से बाहर निकालकर सुरक्षित स्थान तक पहुंचाएं।         भगदड़ नहीं करें।         लिफ्ट का प्रयोग कतई न करें।         संपत्ति बचाव दल महत्वपूर्ण व मूल्यवान सम्पत्ति को बाहर निकालें।         अत्यधिक ज्वलनशील पदार्थों जैसे-पैट्रोल, कैरोसिन, प्लास्टिक, आदि को अग्नि दुर्घटना स्थल से दूर करें। इन नंबरों पर करें सूचित आग की सूचना देने के लिए भोपाल में एमपीईबी के हेल्पलाइन नंबर 0755-2678251, 0755-2678369 पुलिस का हेल्पलाइन नंबर 0755-2555922, पुलिस फायर स्टेशन का हेल्पलाइन नंबर 0755-2441008 और नगर निगम के हेल्पलाइन नंबर 0755-2542222 पर कॉल कर किया जा सकता है।  

बिहार में अतिक्रमण पर जीरो टॉलरेंस: सम्राट चौधरी बोले- बड़ा हो या छोटा, कार्रवाई तय

पटना बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राज्य में चल रहे बुलडोजर ऐक्शन पर दो-टूक कहा कि अतिक्रमण है तो तोड़ा ही जाएगा। लोगों द्वारा उनकी तुलना उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से किए जाने के सवाल पर भी उन्होंने बखूबी अंदाज में जवाब दिया। मीडिया ने सीएम से पूछा कि क्या आप दूसरे योगी आदित्यनाथ हैं? इस पर बिहार सीएम ने कहा- मेरा नाम सम्राट चौधरी है। उनके इस बयान की चर्चा सियासी गलियारों में होने लगी है। दरअसल, केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार के 12 साल पूरे होने के अवसर पर पटना में शुक्रवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शुक्रवार को पटना में मीडिया संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। भाषण की समाप्ति के बाद सीएम ने विभिन्न पत्रकारों से अनौपचारिक रूप से बातचीत की। इस दौरान पत्रकारों ने उनसे बिहार में अतिक्रमण हटाने को लेकर चल रहे बुलडोजर ऐक्शन वाले अभियान पर सवाल किया। इस पर उन्होंने कहा कि मेरा नाम सम्राट चौधरी है। राज्य में जहां भी अतिक्रमण है, चाहे वह किसी उद्योगपति का हो या बड़े व्यक्ति का, उसे तोड़ा ही जाएगा। बुलडोजर बाबा और योगी मॉडल… जनता दल यूनाइटेड (JDU) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार ने लगभग दो दशक तक बिहार की सत्ता के मुखिया रहने के बाद 14 अप्रैल को सीएम पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके अगले दिन, सम्राट चौधरी ने बिहार में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पहले सीएम के रूप में शपथ ली थी। सम्राट के शपथग्रहण के दिन भी पटना स्थित लोकभवन के बाहर बुलडोजर बाबा जिंदाबाद के नारे लगाए थे। इससे पहले लगभग 5 महीने तक सम्राट, नीतीश सरकार में गृह मंत्री रहे। पुलिस और कानून-व्यवस्था की कमान हाथ में आने के बाद सम्राट चौधरी ने राज्य भर में अतिक्रमण के खिलाफ सख्त मुहिम छेड़ रखी थी। अब सम्राट खुद सीएम बन गए तो उन्होंने गृह विभाग अपने पास ही रखा। राज्य भर में जगह-जगह बुलडोजर ऐक्शन जारी है। विपक्ष इसकी आलोचना भी करता रहा है और बिहार में योगी मॉडल लागू होने का आरोप लगाता रहा है। वहीं, सम्राट चौधरी लगातार अधिकारियों को सख्त निर्देश दे रहे हैं कि अतिक्रमण किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाए। इसके लिए राज्यवापी अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने सख्त लहजे में कह दिया है कि अतिक्रमण करने वाला कितना भी बड़ा आदमी क्यों ना हो, प्रशासन कार्रवाई जरूर करेगा। दूसरी ओर, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी सीमावर्ती जिलों में अवैध निर्माण और अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई की पूरी रणनीति बना चुके हैं। उस पर भी प्रशासन काम कर रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी के 12 वर्ष पूर्ण होने पर मंत्री सारंग ने नरेला शासकीय महाविद्यालय में विद्यार्थियों से किया संवाद

भोपाल  सहकारिता, खेल और युवा कल्याण मंत्री  विश्वास कैलाश सारंग ने प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सेवा, सुशासन और विकास के स्वर्णिम 12 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में चलाए जा रहे विभिन्न सामाजिक संस्थाओं एवं शिक्षण संस्थान संवाद के तहत शनिवार को शासकीय महाविद्यालय नरेला में आयोजित कार्यक्रम में सहभागिता की। इस अवसर पर उन्होंने विद्यार्थियों से संवाद कर प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में देश में हुए ऐतिहासिक परिवर्तन, जनकल्याणकारी योजनाओं तथा विकास की उपलब्धियों की जानकारी साझा की। मंत्री  सारंग ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में भारत ने बीते 12 वर्षों में विकास, सुशासन, आत्मनिर्भरता, शिक्षा, खेल, तकनीक और जनसेवा के क्षेत्र में नई ऊँचाइयों को प्राप्त किया है। उन्होंने विद्यार्थियों को राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाने, शिक्षा के साथ नैतिक मूल्यों को आत्मसात करने तथा विकसित भारत के निर्माण में योगदान देने के लिए प्रेरित किया। मंत्री  सारंग ने "एक पेड़ माँ के नाम" अभियान के अंतर्गत पौधारोपण किया। उन्होंने उपस्थित विद्यार्थियों एवं नागरिकों से अधिक से अधिक पौधे लगाने तथा उनकी नियमित देखभाल करने का आह्वान किया। मंत्री  सारंग ने विद्यालय परिसर एवं महाविद्यालय की विभिन्न व्यवस्थाओं का अवलोकन किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा एवं बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। मंत्री  सारंग ने नरेला विधानसभा अंतर्गत करोंद क्षेत्र में संचालित विभिन्न विकास कार्यों का स्थल निरीक्षण किया। उन्होंने निर्माण कार्यों की प्रगति की समीक्षा करते हुए संबंधितों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिये। साथ ही क्षेत्रवासियों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए विकास कार्यों में आवश्यक समन्वय सुनिश्चित करने पर बल दिया। मंत्री  सारंग ने कहा कि नरेला विधानसभा के समग्र एवं सतत विकास के लिए विभिन्न आधारभूत संरचना, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं जनसुविधाओं से जुड़े कार्य निरंतर किए जा रहे हैं, जिससे क्षेत्र के नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हो सकें।  

जमशेदपुर रेलवे प्रोजेक्ट: टाटानगर को मिलेगा हाईटेक वंदे भारत कोचिंग डिपो

जमशेदपुर  टाटानगर रेलवे स्टेशन पर वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों के रख-रखाव और नए कोचिंग डिपो के विस्तार की योजना अंतिम चरण में पहुंच गई है। दक्षिण-पूर्व रेलवे के चक्रधरपुर मंडल ने इस पूरी परियोजना का विस्तृत प्रस्ताव रेलवे बोर्ड को भेज दिया है। 383.78 करोड़ रुपये की लागत वाली यह महत्वाकांक्षी योजना फिलहाल रेलवे बोर्ड के पास प्रशासनिक और वित्तीय मंजूरी के लिए विचाराधीन है। दक्षिण पूर्व रेलवे ने सूचना के अधिकार के तहत रेलवे पैसेंजर कमेटी के सदस्य शशांक शेखर स्वाई को यह जानकारी दी है। वर्तमान में टाटानगर रेलवे स्टेशन से ट्रेन नंबर 20893/ 21893 / 21895 टाटा-पटना वंदे भारत एक्सप्रेस, 20891 टाटानगर – ब्रह्मपुर वंदे भारत एक्सप्रेस चलती है। इसके अलावा 20898 रांची-हावड़ा और 20872 हावड़ा-राउरकेला वंदे भारत एक्सप्रेस टाटानगर से होकर गुजरती है। कोचिंग डिपो का होगा स्थानांतरण प्रस्ताव के मुताबिक, टाटानगर स्टेशन के मौजूदा कोचिंग डिपो को स्थानांतरित (रि-लोकेट) किया जाएगा। नए स्थान (लोको कालोनी) पर अत्याधुनिक और पूर्ण बुनियादी ढांचे का विकास किया जाएगा। इस नए डिपो का मुख्य उद्देश्य अत्याधुनिक वंदे भारत ट्रेन सेटों का सुचारू रूप से मेंटेनेंस और तकनीकी परीक्षण सुनिश्चित करना है। जमशेदपुर को मिलेगा बड़ा फायदा इस हाईटेक डिपो के निर्माण से टाटानगर स्टेशन की क्षमता में भारी इजाफा होगा। भविष्य में जमशेदपुर से अन्य रूटों पर भी नई वंदे भारत ट्रेनें शुरू होने का रास्ता साफ हो जाएगा। इसके अलावा, डिपो के विस्तार से स्थानीय स्तर पर रोजगार और तकनीकी विकास को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। चक्रधरपुर मंडल के अधिकारियों के अनुसार, रेलवे बोर्ड से हरी झंडी मिलते ही इस परियोजना के लिए टेंडर की प्रक्रिया और धरातल पर काम शुरू कर दिया जाएगा।  

भोपाल में बाढ़ और अतिवृष्टि से निपटने के लिए जिला कंट्रोल रूम शुरू, 15 जून से 24 घंटे रहेगा सक्रिय

भोपाल भोपाल जिले में बाढ़ और अतिवृष्टि जैसी प्राकृतिक आपदाओं की संभावित स्थिति से निपटने के लिए जिला प्रशासन ने विशेष तैयारी शुरू कर दी है। इसके तहत जिला कार्यालय भोपाल ने नगर निगम कार्यालय सदर मंजिल स्थित फायर ब्रिगेड स्टेशन (फतेहगढ़) में बाढ़ नियंत्रण कक्ष स्थापित किया है। यह कंट्रोल रूम 15 जून से 15 अक्टूबर 2026 तक 24 घंटे कार्यरत रहेगा। जारी किए गए हेल्पलाइन नंबर आम नागरिक आपदा संबंधी सहायता और जानकारी के लिए निम्न दूरभाष क्रमांक पर संपर्क कर सकते हैं: 0755-2540220 0755-2701401 0755-2542222 अधिकारी और कर्मचारियों को किया गया पाबंद जिला प्रशासन ने कंट्रोल रूम के सुचारु संचालन के लिए अधिकारियों और कर्मचारियों को विशेष रूप से पाबंद किया है। बाढ़ नियंत्रण कक्ष के लिए निम्न अधिकारियों की नियुक्ति की गई है: प्रभारी अधिकारी:  लाखन सिंह चौधरी सहायक प्रभारी:  कृष्णा रावत, प्रभारी तहसीलदार भू-संसाधन प्रबंधन लिंक अधिकारी:  योगेश वास्तव, प्रभारी नायब तहसीलदार भू-संसाधन प्रबंधन इसके अलावा जिला बाढ़ आपदा नियंत्रण कक्ष में कर्मचारियों की शिफ्टवार ड्यूटी भी निर्धारित कर दी गई है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत राहत एवं बचाव कार्य किया जा सके। आपदा प्रबंधन के लिए प्रशासन की तैयारी प्रशासन का उद्देश्य मानसून के दौरान होने वाली भारी बारिश, जलभराव, बाढ़ और अन्य प्राकृतिक आपदाओं की स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया देना है। कंट्रोल रूम के माध्यम से नागरिकों की शिकायतें, सूचना और सहायता अनुरोध तुरंत संबंधित विभागों तक पहुंचाए जाएंगे। जिला प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि मानसून के दौरान सतर्क रहें और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कंट्रोल रूम से संपर्क करें।

मध्यप्रदेश पुलिस ने ढाई साल के कार्यकाल में हासिल कीं कई ऐतिहासिक उपलब्धियां

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि नागरिकों की सुरक्षा और कानून व्यवस्था के प्रति विश्वास बनाए रखना पुलिस का पहला कर्तव्य है। पीड़ित व्यक्तियों के साथ विनम्र व्यवहार और उनके हितों की सुरक्षा के लिए त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। सिंहस्थ-2028, करोड़ों श्रद्धालुओं का आस्था पर्व है। इस आयोजन में संवेदनशीलता, सक्रियता, सतर्कता और सेवा भाव से मध्यप्रदेश पुलिस, आदर्श व्यवस्था का उदाहरण देश-दुनिया में प्रस्तुत कर सकेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शनिवार को पुलिस मुख्यालय में आयोजित आईजी कांफ्रेंस के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए यह विचार व्यक्त किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के पुलिस मुख्यालय पहुंचने पर गार्ड ऑफ ऑनर देकर उनका अभिवादन किया गया। कॉन्फ्रेंस में पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा, अपर मुख्य सचिव  संजय शुक्ला सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आईजी स्तर के बाद संभाग स्तर पर भी समीक्षा बैठकें आयोजित की जाएंगी और वे स्वयं इन बैठकों में शामिल होंगे। साइबर अपराधों की रोकथाम और जनजागरूकता को दी जाए सर्वोच्च प्राथमिकता मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देशित किया कि साइबर अपराधों की रोकथाम और जनजागरूकता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने, नशामुक्ति, मानव तस्करी पर नियंत्रण, महिला और बच्चों की सुरक्षा को अधिक सुदृढ़ बनाने तथा धार्मिक स्थलों पर ध्वनि विस्तारक यंत्रों के संबंध में न्यायालयों द्वारा दिए गए निर्देशों का प्रभावी पालन सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश की आंतरिक सुरक्षा तथा सिंहस्थ-2028 की तैयारियों को पुलिस विभाग की प्रमुख प्राथमिकताएं बताते हुए अधिकारियों को प्रभावी एवं परिणामोन्मुखी कार्यवाही के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में साइबर अपराध, संगठित अपराध, माफिया गतिविधियां, भूमि संबंधी अपराध, सामाजिक चुनौतियों के नए स्वरूप सामने आ रहे हैं। इनसे प्रभावी ढंग से निपटने के लिए पुलिस को तकनीकी दक्षता, संवेदनशीलता और त्वरित कार्रवाई के साथ कार्य करना होगा। प्रदेश को नशामुक्त बनाने के लिए संचालित किया जाए जनजागरण अभियान मुख्यमंत्री डॉ. यादवने मध्यप्रदेश पुलिस की कार्यवाहियों की सराहना करते हुए कहा कि राज्य सरकार के ढाई वर्ष के कार्यकाल में कई ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की गई हैं। मध्यप्रदेश पुलिस के अथक प्रयासों से मंडला और बालाघाट जिले नक्सलवाद की समस्या से मुक्त हुए। मध्यप्रदेश की धरती से लाल सलाम को आखिरी सलाम किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री  अमित शाह के मार्गदर्शन में प्रदेश की धरती से नक्सलवाद का पूरी तरह सफाया कर दिया गया है। प्रदेश सरकार ने सुशासन की मिसाल प्रस्तुत की है। मध्यप्रदेश, नक्सलवाद को जड़ से खत्म करने वाला देश का पहला राज्य बना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ऐसी अनेकों उपलब्धियों के लिए आज प्रदेशवासी मध्यप्रदेश पुलिस और सुरक्षाबलों पर गर्व करते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में संचालित नशामुक्ति अभियान की सराहना करते हुए कहा कि प्रदेश को नशामुक्त बनाने के लिए पुलिस, शैक्षणिक संस्थानों, सामाजिक संगठनों और आमजन की सहभागिता से व्यापक जनजागरण अभियान संचालित किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि युवाओं को नशे की प्रवृत्ति से दूर रखने के लिए जागरूकता, संवाद और सामुदायिक भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है। राज्य सरकार हर साल भर्ती के लिए कर रही है आवश्यक प्रबंधन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार भारत सरकार के नए आपराधिक कानूनों को लागू करते हुए और सभी जरूरी संसाधन जुटाते हुए पुलिस भर्ती प्रक्रिया को जारी रख रही है। अब तक पुलिस विभाग में 22 हजार अलग-अलग पदों पर भर्ती की जा चुकी है। राज्य सरकार हर साल भर्ती करने के लिए सभी आवश्यक प्रबंधन कर रही है। हमारा प्रयास है कि स्वीकृत पदों में से कोई भी पद खाली न रहे। विकास के क्रम में पुलिस अपनी पूरी क्षमता से सुशासन और प्रदेशवासियों की अपेक्षाओं पर खरा उतरने के लिए कार्य करे। सिंहस्थ : 2028 के लिए प्रशिक्षण और आवश्यक व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया जाए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सिंहस्थ-2028 की तैयारियों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह आयोजन केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि विश्वस्तरीय प्रबंधन की बड़ी चुनौती भी है। इसके लिये अभी से प्रशिक्षण, भीड़ प्रबंधन, यातायात व्यवस्था, आपदा प्रबंधन तथा आधुनिक तकनीक आधारित सुरक्षा व्यवस्था की तैयारियों पर विशेष ध्यान दिया जाए। इससे श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सुगम और सुव्यवस्थित वातावरण तथा आवागमन की सुविधा उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। भीड़ प्रबंधन, यातायात व्यवस्था के प्रशिक्षण से प्रदेश में आयोजित होने वाले अन्य बड़े मेलों के प्रबंधन को भी बेहतर बनाया जा सकेगा। साम्प्रदायिक ताकतों पर नियंत्रण के लिए निरंतर सजग रहना जरूरी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि धार में भोजशाला से संबंधित न्यायालय के निर्णय को मध्यप्रदेश पुलिस ने जिला प्रशासन के साथ मिलकर लागू कराया। भोजशाला में वसंत पंचमी के अवसर पर शांति पूर्ण स्थिति कायम रखने में भी पुलिस की अहम भूमिका रही। इसके लिए धार प्रशासन और पुलिस बल बधाई के पात्र हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में साम्प्रदायिक ताकतों को नियंत्रण में रखने के लिए पुलिस को निरंतर सजग रहना होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रमुख निर्देश     पेट्रोलिंग के लिए छोटी और तंग गलियों में उपयुक्त व्यवस्था हो, यह सुनिश्चित किया जाए कि पेट्रोलिंग में किसी प्रकार का व्यवधान नहीं आए।     थानों में शुचिता का माहौल बने।     वरिष्ठ अधिकारी आकस्मिक निरीक्षण सुनिश्चित करें।     वर्षाकाल से पहले नगरीय निकायों के सहयोग से खतरनाक बिल्डिंगों को चिन्हित कर आवश्यक कार्यवाही की जाए।     यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई भी बाजार देर रात तक संचालित न हो। मैदानी पुलिस कार्यों की त्रैमासिक समीक्षा की नई व्यवस्था आरंभ : डीजीपी  मकवाणा कॉन्फ्रेंस में पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा ने कहा कि पुलिस मुख्यालय द्वारा मैदानी पुलिस कार्यों की त्रैमासिक समीक्षा की नई व्यवस्था प्रारंभ की गई है, जिससे शासन की प्राथमिकताओं और जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप पुलिस कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित होगी। उन्होंने बताया प्रदेश में डायल-112 सेवा, अपराध नियंत्रण, महिला एवं बाल सुरक्षा, साइबर अपराध नियंत्रण तथा नई आपराधिक न्याय प्रणाली के प्रभावी क्रियान्वयन के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। उन्होंने कहा कि पुलिस बल के सुदृढ़ीकरण के लिए विभिन्न स्तरों पर बड़ी संख्या में भर्ती प्रक्रियाएं संचालित की जा रही हैं तथा लंबित पदोन्नति संबंधी मामलों के निराकरण की दिशा में भी … Read more

बिहार पुलिस में सुधार: फील्ड पुलिसिंग मजबूत करने को जोनल ढांचा फिर बनेगा

पटना सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार बिहार पुलिस में बड़ा बदलाव करने जा रही है। इसके तहत पुरानी जोनल व्यवस्था को फिर से लागू किया जाएगा, जिसे 7 साल पहले खत्म कर दिया गया था। इसके बाद राज्य में फील्ड पुलिसिंग को अलग-अलग रेंज में बांटा गया था। अब फिर से बिहार के 12 पुलिस रेंज को जोन में बांट दिया जाएगा। फील्ड पुलिसिंग को सुदृढ़ करने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है। इसकी प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। जोनल सिस्टम फिर से लागू करने को लेकर पुलिस मुख्यालय से प्रस्ताव तैयार कर गृह विभाग को भेजा गया था जिसे मंजूरी मिलने की बात कही जा रही है। बहुत जल्द इसे लागू कर दिया जाएगा। नई व्यवस्था में पहले की तरह ही चार जोन बनाए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, उसमें कुछ सुधार की भी संभावना है। अभी हैं 12 पुलिस रेंज बिहार पुलिस में बड़ा बदलाव जुलाई 2019 में किया गया था, तब 4 जोन को खत्म कर सिर्फ रेंज रहने दिया गया था। बेगूसराय को नया रेंज बनाकर तत्कालीन 11 रेंज को बढ़ाकर 12 कर दिया गया था। वर्तमान रेंज के जिलों की बात करें तो पटना रेंज में पटना और नालंदा, मगध रेंज में गया, नवादा, औरंगाबाद, जहानाबाद और अरवल जिले शामिल हैं। भागलपुर रेंज में भागलपुर, बांका और नवगछिया पुलिस जिला शामिल है। वहीं, तिरहुत रेंज में मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, शिवहर और वैशाली जिले आते हैं। कोसी रेंज में सहरसा, सुपौल और मधेपुरा हैं। पूर्णिया रेंज में पूरा सीमांचल यानी पूर्णिया, कटिहार, अररिया और किशनगंज जिले आते हैं। मुंगेर रेंज में मुंगेर, जमुई, लखीसराय और शेखपुरा, तो बेगूसराय रेंज में बेगूसराय एवं खगड़िया जिले शामिल हैं। इन सभी रेंज में आईजी रैंक के अधिकारियों की तैनाती की जाती है। 2019 से पहले थे 4 जोन बिहार पुलिस में जोन की व्यवस्था 37 साल तक चली। 1982 में जोनल सिस्टम को लागू किया गया था। कुल चार जोन बनाए गए थे। पटना, भागलपुर, कोसी और तिरहुत जोन हुआ करते थे। जुलाई 2019 तक यही व्यवस्था थी और कुल 11 रेंज को तत्कालीन चार जोन में बांटा गया था। रेंज में डीआईजी जबकि जोन में आईजी बैठते थे। तत्कालीन भागलपुर जोन की बात करें तो उस समय इस जोन में भागलपुर और मुंगेर रेंज के 9 जिले शामिल थे। भागलपुर के अंतिम आईजी विनोद कुमार थे।

दालमंडी में फिलहाल नहीं चलेगा बुलडोजर, हाईकोर्ट के आदेश से प्रशासनिक कार्रवाई पर ब्रेक

वाराणसी  इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वाराणसी के दालमंडी मार्ग चौड़ीकरण योजना से जुड़े भवन ध्वस्तीकरण मामले में प्रभावित पक्ष को बड़ी राहत दी है. अदालत ने विवादित संपत्ति पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश देते हुए स्पष्ट किया है कि अगली सुनवाई तक किसी भी प्रकार की ध्वस्तीकरण कार्रवाई नहीं की जाएगी. इस फैसले से स्थानीय निवासियों और व्यापारियों को अस्थायी राहत मिली है, जो लंबे समय से प्रस्तावित सड़क चौड़ीकरण योजना को लेकर चिंतित थे।  याचिकाकर्ता ने नोटिस को दी थी चुनौती यह आदेश न्यायमूर्ति सलिल कुमार राय और न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने अलिमुन्निशा द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान पारित किया. याचिका में नगर निगम वाराणसी के जोनल अधिकारी/सहायक नगर आयुक्त द्वारा 26 मई 2026 को उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम, 1959 की धारा 331 के तहत जारी नोटिस को चुनौती दी गई थी. याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि कार्रवाई में प्रक्रियात्मक अनियमितताएं हैं और बिना उचित सुनवाई के ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू की गई है।  हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए फिलहाल यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया है और संबंधित पक्षों को अगली सुनवाई में विस्तृत दलीलें पेश करने का अवसर दिया है. यह मामला दालमंडी क्षेत्र में प्रस्तावित चौड़ीकरण परियोजना को लेकर चल रहे विवाद का अहम हिस्सा माना जा रहा है। याचिकाकर्ता ने दी थी ये दलीलें याचिकाकर्ता का कहना था कि नगर निगम ने उनके मकान को जर्जर बताते हुए ध्वस्तीकरण का नोटिस जारी किया है, जबकि उनकी आपत्तियों पर अब तक कोई अंतिम आदेश न तो पारित किया गया और न ही विधिवत तामील किया गया है. ऐसे में मकान गिराने की कार्रवाई कानून सम्मत नहीं मानी जा सकती।  मामले की पृष्ठभूमि में यह भी सामने आया कि पूर्व में नगर निगम द्वारा जारी नोटिस को चुनौती दिए जाने पर हाईकोर्ट ने संबंधित प्राधिकरण को संयुक्त समिति गठित कर याचिकाकर्ताओं को सुनवाई का अवसर देने और उनके पक्ष पर विचार करने के बाद निर्णय लेने का निर्देश दिया था. इसके बावजूद बाद में जारी नोटिस में कहा गया कि संयुक्त समिति की रिपोर्ट में भवन को जर्जर पाया गया है और उसे ध्वस्त किया जाना आवश्यक है।  याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता काज़ी मुहम्मद अकरम एवं उनकी टीम ने न्यायालय के समक्ष दलील दी कि बिना अंतिम आदेश की विधिवत सेवा और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी किए ध्वस्तीकरण की कार्रवाई असंवैधानिक एवं अवैध होगी. पक्षकारों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने मामले को विचारणीय मानते हुए राज्य सरकार व अन्य प्रतिवादियों से जवाब तलब किया।  20 जुलाई को होगी अगली सुनवाई अदालत ने राज्य सरकार और अन्य प्रतिवादियों को काउंटर एफिडेविट दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया है. इसके बाद याचिकाकर्ता को दो सप्ताह के भीतर प्रत्युत्तर हलफनामा दाखिल करने की अनुमति प्रदान की गई है।  खंडपीठ ने मामले की अगली सुनवाई 20 जुलाई 2026 निर्धारित करते हुए आदेश दिया कि तब तक विवादित परिसर के संबंध में यथास्थिति बनाए रखी जाए. साथ ही 26 मई 2026 के नोटिस के आधार पर किसी भी प्रकार की ध्वस्तीकरण कार्रवाई न की जाए।  हाईकोर्ट के इस आदेश को दालमंडी मार्ग चौड़ीकरण परियोजना के दायरे में आने वाले प्रभावित भवन स्वामियों के लिए महत्वपूर्ण राहत माना जा रहा है. अब मामले की अगली सुनवाई में राज्य सरकार और नगर निगम अपना पक्ष न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करेंगे।   

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सतत प्रयासों से साकार हुआ दशकों पुराना सपना

रायपुर जशपुर जिले के विकास इतिहास में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज हुई है। भारत सरकार के रेल मंत्रालय द्वारा धरमजयगढ़–पत्थलगांव–लोहरदगा नई रेल लाइन परियोजना को विशेष रेल परियोजना के रूप में अधिसूचित किए जाने के साथ ही जशपुर को पहली बार रेल नेटवर्क से जोड़ने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। यह केवल एक रेल परियोजना नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के सामाजिक, आर्थिक और औद्योगिक विकास की नई आधारशिला है। लगभग 291.881 किलोमीटर लंबी यह महत्वाकांक्षी रेल लाइन रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ से प्रारंभ होकर जशपुर जिले के पत्थलगांव होते हुए झारखंड के लोहरदगा तक पहुंचेगी। परियोजना के क्रियान्वयन से जशपुर जिला सीधे राष्ट्रीय रेल नेटवर्क से जुड़ जाएगा और क्षेत्र के विकास को अभूतपूर्व गति मिलेगी। यह ऐतिहासिक उपलब्धि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में विकसित की जा रही आधुनिक आधारभूत संरचना तथा मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के विशेष प्रयासों का परिणाम है। वर्षों से क्षेत्रवासियों द्वारा उठाई जा रही रेल संपर्क की मांग अब साकार होने की दिशा में निर्णायक चरण में पहुंच गई है। रेल मंत्रालय द्वारा भारत के राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना के अनुसार रेल अधिनियम, 1989 के प्रावधानों के तहत सार्वजनिक हित और राष्ट्रीय अवसंरचना विकास को ध्यान में रखते हुए इस परियोजना को अधिसूचित किया गया है। अधिसूचना के प्रकाशन के साथ ही परियोजना औपचारिक रूप से प्रभावशील हो गई है। विकास की मुख्यधारा से जुड़ेगा वनांचल क्षेत्र प्राकृतिक संसाधनों और संभावनाओं से समृद्ध जशपुर जिला अब तक रेल संपर्क से वंचित था। परिवहन के लिए मुख्यतः सड़क मार्ग पर निर्भरता के कारण आम नागरिकों, विद्यार्थियों, किसानों, व्यापारियों और रोजगार की तलाश में बाहर जाने वाले युवाओं को अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। नई रेल लाइन के निर्माण से जिले की कनेक्टिविटी में ऐतिहासिक बदलाव आएगा और लोगों को सुरक्षित, सुलभ तथा किफायती परिवहन सुविधा उपलब्ध होगी। किसानों और उद्यमियों के लिए खुलेगी नई संभावनाएं रेल संपर्क स्थापित होने से जशपुर के कृषि एवं उद्यानिकी उत्पादों को देश के बड़े बाजारों तक पहुंचाना आसान होगा। जैविक खेती, सुगंधित धान, मक्का, दलहन, सब्जियां और बागवानी उत्पादों के लिए पहचान रखने वाले इस क्षेत्र के किसानों को बेहतर बाजार और बेहतर मूल्य मिलने की संभावना बढ़ेगी। परिवहन लागत कम होने से स्थानीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता भी बढ़ेगी। साथ ही व्यापार और लघु उद्योगों को विस्तार का नया अवसर मिलेगा। पर्यटन को मिलेगी नई उड़ान जशपुर अपनी प्राकृतिक सुंदरता, घने वन क्षेत्रों, जलप्रपातों, धार्मिक स्थलों और पर्यटन स्थलों के लिए विशेष पहचान रखता है। रेल संपर्क स्थापित होने के बाद पर्यटकों की पहुंच अधिक आसान होगी, जिससे पर्यटन गतिविधियों में वृद्धि होगी। इससे होटल, परिवहन, हस्तशिल्प, स्थानीय उत्पादों और अन्य सेवा क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक बढ़ेगी पहुंच नई रेल लाइन विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा संस्थानों तक पहुंच को सुगम बनाएगी। वहीं गंभीर मरीजों को बड़े शहरों के अस्पतालों तक शीघ्र पहुंचाने में भी सहायता मिलेगी। इससे शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता के साथ उनकी उपलब्धता और पहुंच में भी उल्लेखनीय सुधार आएगा। रोजगार और निवेश का नया केंद्र बनेगा क्षेत्र रेल परियोजना के निर्माण और संचालन से प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से हजारों रोजगार अवसर सृजित होंगे। बेहतर परिवहन सुविधा उपलब्ध होने से क्षेत्र में निवेश की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। औद्योगिक एवं व्यावसायिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था और अधिक मजबूत होगी। क्षेत्रवासियों के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि परियोजना की अधिसूचना जारी होने के बाद जशपुर सहित पूरे क्षेत्र में उत्साह और खुशी का माहौल है। लोगों का मानना है कि यह रेल लाइन केवल यातायात सुविधा नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए विकास, समृद्धि और नए अवसरों का मार्ग प्रशस्त करेगी। दशकों की प्रतीक्षा के बाद जशपुर का रेल मानचित्र पर स्थान सुनिश्चित होना जिले के इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक माना जा रहा है। धरमजयगढ़–पत्थलगांव–लोहरदगा रेल परियोजना जशपुर के विकास को नई दिशा देने वाली आधारभूत संरचना साबित होगी, जो आने वाले वर्षों में जिले की तस्वीर और तकदीर दोनों बदलने का सामर्थ्य रखती है।

गर्मी का असर या बदलती पसंद? दिल्लीवासियों ने मई में गटक ली 11.12 लाख केस बीयर, बिक्री में बड़ा उछाल

नई दिल्ली दिल्ली में गर्मियों के दौरान बीयर लोगों की सबसे पसंदीदा अल्कोहल ड्रिंक में से एक है। जैसे-जैसे गर्मी अपना रंग दिखाना शुरू करती है, बीयर की दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ बढ़ जाती है। दिल्लीवासी गर्मी भगाने के लिए बीते साल मई के मुकाबले में इस मई में ज्यादा बीयर गटक गए। राजधानी में दुकानों में फिर से लोकप्रिय ब्रांडों के आने से इस साल मई में बीयर की बिक्री बीते साल इसी टाइम पीरियड के मुकाबले 10 फीसदी बढ़ी है। आबकारी विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, बढ़ोत्तरी की वजह रिटेल दुकानों पर देश के लोकप्रिय बीयर ब्रांडों की वापसी है। आंकड़ों के अनुसार, लोकप्रिया देसी बीयर ब्रांडों की रिटेल दुकानों में हिस्सेदारी इस साल मई में बढ़कर 54 फीसदी हो गई जो कि मई 2025 में 24 फीसदी जबकि 2024 में 38 फीसदी थी। कम लोकप्रिय ब्रांड की बिक्री पर असर आंकड़ों के मुताबिक, कम लोकप्रिय ब्रांड जिनमें नेपाल और भूटान के ब्रांड भी शामिल हैं उनकी हिस्सेदारी 46 फीसदी रही जो कि मई 2024 में 62 फीसदी थी। एक ऑफिशियल डॉक्यूमेंट के अनुसार, बीयर की बिक्री इस साल मई में 10 फीसदी बढ़ी है जो कि बीते साल इसी टाइम पीरियड के दौरान कम थी। बीते साल मई में बीयर की 10,10,524 केस की बिक्री हुई थी, जबकि इस साल 11,12,761 केस की बिक्री हुई। इसमें से इस मई में देसी ब्रांडों की हिस्सेदारी 5,96,351 केस जबकि पिछले साल इसी अवधि के दौरान यह 2,47,143 केस थी। ड्रॉफ्ट बीयर की बिक्री के क्या आंकड़े? वहीं आंकड़ों से भी पता चलता है कि ड्रॉफ्ट बीयर की बिक्री ज्यादात्तर रेस्टोरेंट और क्लब में ही होती है। मई के महीने में ड्रॉफ्ट बीयर की कुल 1,521 केस बिके जिनमें से 1,365 रेस्टोरेंट में तो 126 क्लब जबकि 30 दिल्ली स्टेट इंडस्ट्रियल एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (DSIIDC) की दुकानों पर बिके। अधिकारियों के मुताबिक, मई और जून में बीयर की बिक्री के लिए पीक सीजन माना जाता है क्योंकि इस बढ़ते तापमान के वजह से ग्राहक चिल्ड ड्रिंक का सेवन करना पसंद करते हैं। दिल्ली में कैसा है मौसम? दिल्ली में बीते दिनों तापमान 40 डिग्री सेल्सियस को पार गया था लेकिन फिलहाल दिल्लीवासी भीषण गर्मी का सामना नहीं कर रहे है। शुक्रवार रात को भी दिल्ली के कुछ इलाकों में तेज हवाएं और हल्की बारिश दर्ज की गई थी। बारिश और गरज के साथ छींटे पड़ने से तापमान में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई, जिससे यह जून का अब तक का सबसे ठंडा दिन रहा।