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अरविंद केजरीवाल को लेकर अमित शाह ने दिया करारा जवाब, सोशल मीडिया पर वायरल

नई दिल्ली  केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह एक बार फिर दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर जमकर बरसते नजर आए। गृहमंत्री ने पूर्व सीएम पर भ्रष्टाचार के कई आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने इतने घोटाले किए कि जनता ने उनके चुनाव का 'घोटाला' कर दिया और अब वह घर बैठे हुए हैं। इसी साल फरवरी में हुए चुनाव में आम आदमी पार्टी की सरकार को हार का सामना करना पड़ा था और पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल अपनी सीट तक नहीं बचा पाए थे। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को यमुना नदी की सफाई के लिए 1,816 करोड़ रुपये के प्रॉजेक्ट्स की शुरुआत की। इस दौरान उन्होंने पूर्व की आप सरकार और इसके राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल पर जोरदार निशाना साधा। शाह ने कहा, 'केजरीवाल जी ने 11 साल में मोहल्ला क्लीनिक का घोटाला, सीएनजी का घोटाला, शराब घोटाला, विज्ञापन का घोटाला, दवा का घोटाला, क्लासरूम का घोटाला, दिल्ली जल बोर्ड का घोटाला, शीशमहल का घोटाला, सीसीटीवी लगाने का घोटाला और पैनिक बटन का घोटाला। इतने घोटाले कर दिए कि दिल्लीवालों ने उनके चुनाव का ही घोटाला कर दिया। और अब वह घर पर बैठ हुए हैं।' गृहमंत्री ने इस दौरान कांग्रेस पर भी जोरदार हमला किया और कहा कि देश में उसकी सरकार थी तो 12 लाख करोड़ के घोटाले हुए। उन्होंने कहा, 'कांग्रेस की सरकार थी देश में तब 12 लाख करोड़ रुपये के घोटाले किए थे। मोदी जी के 11 साल के शासन में एक भी आरोप हमारे प्रधानमंत्री पर नहीं लगे। यही बताता है कि भारतीय जनता पार्टी की सरकारें जनता को समर्पित सरकारें हैं।' केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा है कि भ्रष्टाचार कम करने और विज्ञापनों पर कम पैसा खर्च करने मात्र से ही यमुना का शुद्धिकरण हो जाएगा। उन्होंने कहा कि जब दिल्ली की जनता ने परिवर्तन को चुना तब प्रधानमंत्री ने कहा था कि हमारी सरकार की प्राथमिकता में सर्वोच्च स्थान पर मां यमुना को शुद्ध करना है। मोदी ने वादा किया था कि हम 2029 से पहले यमुना जी को स्वच्छ करने का काम पूरा कर देंगे। उन्होंने कहा है कि भ्रष्टाचार कम करने और विज्ञापनों पर कम पैसा खर्च करने मात्र से ही यमुना जी का शुद्धिकरण हो जाएगा। उन्होंने कहा कि आज यमुना के शुद्धिकरण और साफ यमुना के स्वप्न को साकार करने का रास्ता प्रशस्त हो चुका है।  

65 लाख का राशन गायब! छत्तीसगढ़ में चावल, शक्कर और चना घोटाले में 6 पर FIR

सरगुजा छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में राशन घोटाला का मामला सामने आया है। यहां गरीबों के हक का करीब 65 लाख रुपए का चावल, शक्कर और चना का घोटाला किया गया है। इसका खुलासा तब हुआ जब भाजपा नेता आलोक दुबे की शिकायत के बाद कलेक्टर ने पूरे मामले की जांच कराई। जांच के बाद खाद्य विभाग के इंस्पेक्टर की रिपोर्ट पर पुलिस ने सहकारी समिति के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष समेत 6 लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी और आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत FIR दर्ज किया है। अंबिकापुर में 62 सरकारी राशन दुकाने हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में दूसरे राशन दुकानों के संचालकों के खिलाफ भी बड़ी कार्रवाई हो सकती है। जानकारी के मुताबिक, अंबिकापुर में जनकल्याण खाद्य सुरक्षा पोषण एवं उपभोक्ता सेवा सहकारी समिति सरकारी राशन दुकान संचालित कर रही थी, लेकिन लंबे समय से शिकायत मिल रही थी कि समिति द्वारा संचालित राशन दुकानों में चावल, चना और शक्कर की बड़े पैमाने पर अफरा तफरी की जा रही है. भाजपा नेता आलोक दुबे ने इस मामले की शिकायत कलेक्टर से की थी। जांच में 1631 क्विंटल चावल, 48 क्विंटल चना और शक्कर घोटाले का खुलासा शिकायत मिलने पर कलेक्टर अजीत वसंत ने खाद्य विभाग के इंस्पेक्टर से राशन दुकानों की भौतिक रूप से जांच कराई. जांच में फूड इंस्पेक्टर को पता चला कि राशन दुकानों में जितना राशन का स्टॉक होना चाहिए उतना नहीं है। मतलब साफ था कि सरकारी राशन निजी दुकानों और राशन माफिया को बेच दिया गया है। जांच में खुलासा हुआ कि 1631 क्विंटल चावल और 48 क्विंटल चना का घोटाला किया गया है। यहां तक कि शक्कर का भी घोटाला सामने आया। इसके बाद फूड इंस्पेक्टर शिव कुमार मिश्रा ने राशन दुकान संचालन एजेंसी जनकल्याण खाद्य सुरक्षा पोषण एवं उपभोक्ता सेवा सहकारी समिति के अध्यक्ष पवन सिंह निवासी घुटरापारा, उपाध्यक्ष सुनिता पैकरा, सहायक विक्रेता फरहान सिद्धीकी और प्रिंस जायसवाल, सहायक विक्रेता सैफ अली, मुकेश यादव के खिलाफ अपराध दर्ज कराया है. आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीम गठित एफआईआर दर्ज होने के बाद आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने तीन टीम का गठन किया है। यह भी बात सामने आई है कि आरोपियों के खिलाफ ऐसे धाराओं के तहत अपराध दर्ज हुआ, जिससे उन्हें थाना से ही जमानत दिया जा सकेगा, लेकिन कलेक्टर से राशन घोटाला की शिकायत करने वाले भाजपा नेता ने पुलिस अधिकारियों को इसकी जानकारी दी। फिर धारा 409 भी जोड़ा गया।

आवास विकास का धमाका ऑफर: कम ब्याज, भारी छूट और लम्बी EMI सुविधा सिर्फ दिवाली पर!

लखनऊ उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद (UPAVP) ने अपनी 2273वीं बोर्ड बैठक में दिवाली से पहले आम जनता के लिए घर खरीदना आसान बनाने वाले कई बड़े फैसले लिए हैं. 2000 से अधिक खाली पड़े फ्लैटों को जल्द बेचने के लिए 15% तक की छूट, ब्याज दर में भारी कटौती और 50% भुगतान पर कब्जे जैसे आकर्षक ऑफर दिए गए हैं. इसके अलावा, लखनऊ की अवध विहार योजना में रुका हुआ निर्माण फिर से शुरू होगा, जबकि पुरानी योजनाओं में हुई अनियमितताओं पर सख्त कार्रवाई के आदेश भी जारी हुए हैं. एक साथ पांच जिलों में 5,502 करोड़ की नई आवासीय योजनाओं को हरी झंडी देकर परिषद ने राज्य भर में आवासीय योजनाओं की नई शुरुआत की है. बोर्ड बैठक में लिया गया सबसे चर्चित फैसला खाली फ्लैटों की बिक्री को बढ़ावा देने वाला है. परिषद के पास इस वक्त 2000 से ज्यादा फ्लैट खाली पड़े हैं, जिन्हें दिवाली के मौके पर विशेष छूट के साथ बेचा जाएगा. अब तक 60 दिनों में पूरा भुगतान करने पर सिर्फ 5% छूट मिलती थी, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 15% कर दिया गया है. वहीं, 90 दिनों के भीतर भुगतान पर 10% छूट का प्रावधान किया गया है. इसके साथ ही, फ्लैट की कीमत का 50% भुगतान करने पर ही खरीदार को कब्जा मिल जाएगा, जबकि बाकी राशि को 10 वर्षों की आसान किश्तों में चुकाना होगा. सबसे बड़ी राहत ब्याज दर में है. पहले 11.50% थी, अब घटाकर 8.50% कर दी गई है.   अपर मुख्य सचिव आवास एवं शहरी नियोजन की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में ये फैसले आम आदमी के लिए घर का सपना साकार करने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकते हैं. आवास आयुक्त डॉ. नीरज शुक्ला ने बताया, ये ऑफर विशेष रूप से सरकारी कर्मचारियों और मध्यम वर्ग के लिए हैं. पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर आवंटन होगा. हमारा लक्ष्य है कि दिवाली तक कम से कम 500 फ्लैट बिक जाएं. लखनऊ की अवध विहार योजना सेक्टर के तहत 7D में सरयू एनक्लेव के 7 प्रस्तावित टावरों का निर्माण अब फिर से शुरू होगा. 2017 में कम मांग के कारण यहां पर काम रुक गया था, जिसमें सिर्फ 27 फ्लैट ही बिक पाए थे. 2018 में दोबारा शुरू हुए काम में भी सिर्फ दो टावरों का कुछ हिस्सा बन पाया, बाकी रुक गया. ऑडिट में सामने आया कि अब तक 48 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं, जिस पर आपत्ति दर्ज की गई थी. बोर्ड ने फैसला लिया है कि बाकी टावरों को ‘जैसा है वैसे में’ 319 करोड़ रुपये में नीलाम किया जाएगा. खरीदार को न केवल निर्माण पूरा करना होगा, बल्कि पहले से बिके 27 फ्लैट मालिकों को परिषद द्वारा दी गई सभी सुविधाएं (जैसे पार्किंग, सिक्योरिटी) भी उपलब्ध करानी पड़ेंगी. इससे न केवल परिषद को राजस्व मिलेगा, बल्कि सैकड़ों फ्लैटों का निर्माण भी पूरा हो सकेगा. विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम निजी बिल्डरों को आकर्षित करेगा और योजना को नई जिंदगी देगा. सहारनपुर में डिमांड सर्वे की प्रक्रिया पर काम शुरू सहारनपुर जिले के लिए डिमांड सर्वे की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. ऐसे में यहां जल्द ही नई योजना की घोषणा की जा सकती है. ये योजनाएं न केवल हजारों प्लॉट और फ्लैट उपलब्ध कराएंगी, बल्कि स्थानीय रोजगार और बुनियादी ढांचे को भी मजबूत करेंगी.  

सुबह-शाम बढ़ी ठिठुरन: पंजाब में शुरू हुई सर्दियां, देखें अगले हफ्ते का मौसम हाल

पंजाब  पंजाब में सर्दी का मौसम तेजी से शुरू हो गया है और तापमान में गिरावट पाई जा रही है। सुबह-शाम के समय कोहरा देखने को मिल रही है और ठंडी हवाओं के कारण दिन-ब-दिन ठंड बढ़ रही है। पिछले 24 घंटे के दौरान तापमान गिरा है जो कि सामान्य तापमान से 9.6 डिग्री कम है।  मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में बारिश की संभावना नहीं है और मौसम साफ रहेगा। विभाग द्वारा 13 अक्टूबर तक कोई भी अलर्ट जारी नहीं किया गया है और दिन के समय ठंड बढ़ सकती है। इससे साफ होता है कि पंजाब में सर्दी ने दस्तक दे दी है और ठंडी हवाओं का दौर जारी रहेगा। 

सिंचाई व्यवस्था के बदले गुपचुप पम्प स्टोरेज परियोजना को बढ़ावा

क्षेत्रीय किसानों के साथ वादाखिलाफी बर्दाश्त नहीं होगा दुलीचंद मार्को फतवा समाचार पत्र मंडला/जबलपुर जिले के आदिवासी बाहुल्य ग्रामीण अंचल क्षेत्र अंतर्गत विकासखण्ड बीजाडांडी और नारायणगंज के किसानों द्वारा विगत पांच वर्षों से बरगी बांध से सिंचाई के लिए पानी की मांग की जा रही है। विगत विधानसभा सभा चुनाव में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते की उपस्थिति में मीडिया के समक्ष चार लिफ्ट सिंचाई योजना मंजूर करने की घोषणा किया था। इसी क्रम वहीं क्षेत्रीय किसानों ने बड़ी धूमधाम से स्वागत अभिनन्दन वंदन भी किया था। परंतु क्षेत्र के किसान 2023 से आज भी लिफ्ट सिंचाई परियोजना शुरू होने की बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।   दरअसल इधर पर्यावरण,वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के वेबसाइट से जानकारी मिला है कि नदी घाटी परियोजना के लिए गठित विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति के समक्ष एजेंडा नंबर तीन पर  बरगी ओपन पम्प स्टोरेज हाइड्रो पावर (1000 मेगावाट) को परियोजना प्रवर्तक  सिरेन्टिका रिन्यूएबल्स इंडिया 21 प्रा. लि. द्वारा संदर्भ बिन्दु (टर्म ऑफ रेफ्रेंस ) प्राप्त करने के लिए भेजा गया है। यह गांव पिंडरई माल (सहजपुरी) नारायणगंज  और सलैया माल (बरंगाडा), जमठार, खापा, निवारी और पोंडी बीजाडांडी जिला मंडला में बनना प्रस्तावित है। और पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा गठित विशेषज्ञ मुल्यांकन समिति की बैठक आगामी 13 अक्टूबर को प्रस्तावित किया गया है। परन्तु क्षेत्रीय  ग्राम सभाओं को इसकी कोई जानकारी नहीं दिया गया है और ना ही उन्हें विश्वास में लिया गया है। इस परियोजना की जानकारी मिलने से लोग अचंभित हैं। लोग पूछ रहे हैं कि हमारे लिफ्ट सिंचाई से खेतों में पानी पहुंचाने का क्या हुआ? पम्प स्टोरेज परियोजना क्या है… पम्प स्टोरेज पावर प्लांट एक जलविद्युत प्रणाली होती है, जिसमें दो जलाशय  बनाए जाते हैं। एक ऊपरी जलाशय दूसरा निचला जलाशय(जैसे बरगी जलाशय) है। दोनों को एक सुरंग या पाइप से जोड़ा जाता है। जब बिजली की मांग कम होती है तब पानी को निचले जलाशय से ऊपरी जलाशय तक पम्प किया जाता है। ऊपरी जलाशय से जब पानी छोड़ा जाता है तो बिजली की मांग अत्यधिक होता है। पानी पाइपों से नीचे बहते हुए टर्बाइन  को घुमाता है और टर्बाइन जनरेटर  से जुड़ी होती है, जो बिजली उत्पन्न करती है। पम्प स्टोरेज प्लांट में रिवर्सिबल टर्बाइन-पम्प लगे होते हैं। यानी वही मशीन पम्प के रूप में ऊपर पानी चढ़ा सकती है और टर्बाइन के रूप में नीचे गिरते पानी से बिजली बना सकती है। यह चक्र बार-बार दोहराया जा सकता है। क्षेत्रीय किसानों को जब-तक सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल जाता है तब तक नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के किसी भी परियोजना को क्षेत्र में नहीं लगने दिया जाएगा। युवा झामसिंह तेकाम,  ग्राम पिंडरई नारायणगंज लिफ्ट सिंचाई परियोजना के लिए मंडला से भोपाल तक के प्रशासनिक स्तर के जिम्मेदारों को जानकारी दे रहे हैं। परन्तु आम लोगों का जरूरी काम पूंजीपतियों के सामने कोई महत्व नहीं रखता है। क्षेत्रीय लोगों द्वारा पम्प  स्टोरेज परियोजना का जमकर विरोध किया जाएगा। राजेन्द्र पुट्ठा , जनपद सदस्य बीजाडांडी बरगी बांध से तो जल विद्युत उत्पादन किया  जा रहा है। परन्तु बरगी जलाशय के ईर्द-गिर्द बिजली उत्पादन का जाल खङा करने का सिलसिला कंपनीयों ने जारी रखा है। जिसमें चुटका एवं पिंडरई परमाणु परियोजना, झाबुआ पावर प्लांट, जलाशय में फ्लोटिंग सोलर पैनल और अब पम्प स्टोरेज बिजली परियोजना शामिल है। राजकुमार सिन्हा, बरगी बांध विस्थापित एवं प्रभावित संघ

SDOP पूजा पांडे को निलंबित किया गया, DGP ने लिया सख्त एक्शन

 सिवनी  मध्य प्रदेश के सिवनी में पुलिसकर्मियों पर करोड़ों रुपये की हवाला राशि जब्त कर आपस में बांटने का गंभीर आरोप लगा है। इस मामले में बड़ी कार्रवाई हुई है। सिवनी एसडीपीओ पूजा पांडे को निलंबति कर दिया गया है।  SDOP पूजा पांडे को डीजीपी कैलाश मकवाना ने सस्पेंड कर दिया है । हवाला के करीब डेढ़ करोड़ रुपए हड़पने के मामले में SDOP पूजा पांडे को डीजीपी कैलाश मकवाना ने सस्पेंड कर दिया है। दरअसल, सिवनी जिले के बंडोल थाना इलाके में पुलिसकर्मियों पर गंभीर आरोप लगे हैं। उन पर व्यापारी के कर्मचारियों के साथ मारपीट और 1.45 करोड़ रुपए हड़पने का आरोप है।  इससे पहले मामले में जबलपुर जोन के आईजी प्रमोद वर्मा ने नौ पुलिसकर्मियों को सस्पेंड किया था। बता दें कि पांडे के खिलाफ कार्रवाई के लिए प्रस्ताव शासन को भेजा गया था। हवाला के 3 करोड़ जब्त, डेढ़ करोड़ हड़पे बुधवार और गुरुवार की दरम्यानी रात, बंडोल थाना प्रभारी अर्पित भैरम के नेतृत्व में पुलिस ने सूचना के आधार पर महाराष्ट्र के जालना निवासी ज्वेलर्स सोहन परमार के कर्मचारियों से हवाला के करीब तीन करोड़ रुपए की नकदी जब्त की थी। जब्ती के बाद पुलिसकर्मियों ने कथित रूप से कर्मचारियों के साथ मारपीट की और हवाला की रकम में से करीब डेढ़ करोड़ रुपए हड़पने की योजना बनाई। कर्मचारियों को धमकाकर वहां से भगा दिया गया, लेकिन जब व्यापारी सोहन परमार को इस घटना की जानकारी मिली, तो उसने सिवनी कोतवाली में पुलिस पर लूट की शिकायत दर्ज कराई। जानिए आखिर क्या है पूरा मामला? 8 अक्टूबर, बुधवार की देर रात बंडोल पुलिस को टिप मिली थी कि कटनी से जालना जा रही एक कार (एमएच13ईके3430 ) में हवाला की बड़ी रकम 1.45 करोड़ रुपए छिपाई गई है। इसके बाद बंडोल पुलिस ने कार का पीछा किया और शीलादेही इलाके में उसे पकड़ लिया। बताया गया कि गाड़ी में जालना निवासी कथित हवाला कारोबारी-व्यापारी सोहन परमार और उसके साथ तीन-चार अन्य लोग थे। पुलिस ने वाहन से 1.45 करोड़ की रकम जब्त की है। पुलिसकर्मियों पर सवाल: राशि जब्ती के बाद क्या किया? जब पुलिस ने हवाला की रकम जब्त की, तो मामला बिगड़ने की बजाय सस्पेंशन की ओर बढ़ता गया। सूत्रों के अनुसार, पुलिसकर्मियों ने रकम की पूरी जब्ती को लेकर विवादित तरीके से कुछ राशि को वापस करने का प्रयास किया। पहले तीन करोड़ की राशि जब्ती की बात सामने आई थी,  लेकिन बाद में 1 करोड़ 45 लाख रुपए की रकम को जब्त करने की बात सामने आई। इसके बाद मामला गर्माया और पुलिस अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठने लगे। पुलिस कस्टडी में आरोपियों का मोबाइल कैसे पहुंचा नागपुर? इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब पुलिस ने सोहन परमार और उसके साथियों को अपनी कस्टडी में लिया, तो उनके मोबाइल फोन नागपुर तक कैसे पहुंच गए? यह सवाल पुलिस प्रशासन के लिए एक यक्ष प्रश्न बन गया है। फिलहाल, यह पूरी घटना सिवनी जिले के पुलिस अधिकारियों के लिए चुनौती बन चुकी है और मामले की जांच जारी है। एसपी ने कहा- अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं सिवनी एसपी सुनील मेहता ने द सूत्र से कहा कि महाराष्ट्र के जालना निवासी व्यापारी सोहन परमार से 1.45 करोड़ रुपए की रकम जब्त की गई है। मामले की जांच की जा रही है और सभी आरोपी पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में निष्पक्ष जांच की जाएगी और किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इनको पहले किया था निलंबित उप निरीक्षक अर्पित भैरम, थाना प्रभारी बण्डोल, सिवनी, प्रधान आरक्षक 203 माखन, एसडीओपी कार्यालय सिवनी, प्रधान आरक्षक 447 रविन्द्र उईके, रीडर-एसडीओपी कार्यालय सिवनी, आरक्षक 803 जगदीश यादव, एसडीओपी कार्यालय सिवनी, आरक्षक 306 योगेन्द्र चौरसिया, एसडीओपी कार्यालय सिवनी, आरक्षक चालक 582 रितेश, ड्राइवर एसडीओपी कार्यालय सिवनी, आरक्षक 750 नीरज राजपूत, थाना बण्डोल, सिवनी, आरक्षक 610 केदार, गनमैन-एसडीओपी सिवनी, 8वीं वाहिनी विसबल छिन्दवाड़ा, आरक्षक 85 सदाफल, गनमैन-एसडीओपी सिवनी, 8वीं वाहिनी विसबल छिन्दवाड़ा।  

आदिवासी बच्चे घायल, बीजापुर में आईईडी ब्लास्ट के बाद ग्रामीणों में माओवादियों के खिलाफ आक्रोश

बीजापुर/रायपुर जिले के गंगालूर थाना क्षेत्र के ग्राम पीड़िया से एक दर्दनाक घटना सामने आई, जहां नक्सलियों द्वारा बिछाए गए प्रेशर आईईडी की चपेट में आकर एक मासूम आदिवासी बालक गंभीर रूप से घायल हो गया। मिली जानकारी के मुताबिक गुरुवार की दोपहर बालक जैसे ही क्षेत्र से गुजर रहा था, तभी वह विस्फोट की चपेट में आ गया। यह घटना नक्सल हिंसा की अमानवीयता  को दर्शाती है, जिसमें निर्दोष ग्रामीणों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। पिछले कुछ महीनों में जिले के अंदुरुनी इलाको में नक्सलियों के द्वारा लगाए गए आईईडी विस्फोटों की घटना में कई आम नागरिकों को क्षति उठानी पड़ी है। इधर घटना के तुरंत बाद सीआरपीएफ 199 और 85 वाहिनी के सुरक्षा बलों ने तत्परता दिखाते हुए घायल बालक को प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराया तथा उसे बेहतर चिकित्सा के लिए जिला अस्पताल बीजापुर लाया गया, जहां उसका उपचार जारी है। इस घटना के बाद स्थानीय आदिवासी समुदाय में नक्सलियों के विरुद्ध गहरा आक्रोश व्याप्त है। वहीं, सुरक्षा बलों के द्वारा आसपास सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है ताकि क्षेत्र को  सुरक्षित किया जा सके।

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: दिवाली पर अब ग्रीन क्रैकर्स हो सकते हैं वैध?

नई दिल्ली  सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली-एनसीआर में दिवाली पर ग्रीन पटाखों के इस्तेमाल पर लगी रोक हटाने की गुहार लगाई गई है. मामले पर सुनवाई पूरी हो गई है और कोर्ट ने आदेश सुरक्षित रख लिया है. इससे पहले सॉलिसिटर जनरल (एसजी) तुषार मेहता ने कोर्ट से कहा, “आपसे गुजारिश है कि इस पर संतुलित रवैया अपनाया जाए. साथ ही एनसीआर में आने वाले राज्यों ने सुप्रीम कोर्ट को सुझाव दिया कि दिवाली पर ग्रीन पटाखे छोड़ने की अनुमति दी जाए. साथ ही कहा कि लोगों को 2 घंटे के लिए ग्रीन पटाखे फोड़ने की सख्त अनुमति दी जाए. एनसीआर राज्यों ने सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस के विनोद चंद्रन की बेंच से कहा, “पटाखे फोड़ने की अनुमति कुछ शर्तों के साथ दी जा सकती है, जिनमें यह भी शामिल हो कि सिर्फ NEERI की ओर से अनुमोदित ग्रीन पटाखे ही बेचे जाएंगे.” राज्यों का कहना है कि दिवाली पर पटाखे फोड़ने की 2 घंटे (रात 8 बजे से 10 बजे तक) की सख्त अनुमति दी जानी चाहिए. कोर्ट इस पर संतुलित रवैया अपनाएः SG मेहता दिल्ली-एनसीआर में ग्रीन पटाखों को मंजूरी देने की मांग पर कोर्ट में आज शुक्रवार सुनवाई शुरू हुई. एसजी तुषार मेहता ने कहा कि कोर्ट इस मामले में संतुलित रवैया अपनाए. उन्होंने कहा कि पटाखे और लड़ियां जैसी चीजें एनसीआर में नहीं बन रही हैं और ना ही ई-कॉमर्स के जरिए बिक रही हैं. दिल्ली के अलावा एनसीआर क्षेत्र में आने वाले राज्यों ने भी बैन लगा रखा है. उन्होंने सुझाव दिया कि पटाखों की बिक्री केवल लाइसेंस प्राप्त व्यापारियों के जरिए ही होनी चाहिए और यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि वे केवल अनुमति प्राप्त पटाखे ही बेच रहे हों. उन्होंने कहा, “एनसीआर की राज्य सरकारों, जीएनसीटीडी और पीईएसओ द्वारा यह तय किया जाना चाहिए कि फ्लिपकार्ट, अमेजन आदि सहित कोई भी ई-कॉमर्स वेबसाइट कोई भी ऑनलाइन ऑर्डर स्वीकार न करे और न ही कोई ऑनलाइन बिक्री करे.” पटाखे छोड़ने का समय तय किया जाएः SG मेहता मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बीआर गवई ने कहा कि दिवाली में कुछ लोग सुबह पूजा करते हैं और पटाखे भी जलाते हैं. इस पर कोर्ट के सामने दलील रखते हुए एसजी मेहता ने कहा कि लोगों का अधिकार है कि वे अपना त्योहार मनाएं. यह नियम दिवाली, क्रिसमस और गुरु पर्व सभी के लिए रहेंगे. लोगों के जश्न मनाने के अधिकार को भी संतुलित किया जाएगा, जो शुद्ध हवा के अधिकार के लिए होंगे. मेहता ने यह भी सुझाव दिया कि क्रिसमस और नए साल की पूर्व संध्या पर, पटाखे फोड़ने की अनुमति सिर्फ रात 11.55 बजे से 12.30 बजे तक ही दी जानी चाहिए. इसी तरह गुरुपर्व पर, सुबह 4 बजे से 5 बजे तक और रात 9 बजे से 10 बजे तक पटाखे फोड़ने की अनुमति दी जानी चाहिए. उन्होंने कहा कि विवाह और अन्य अवसरों पर, ग्रीन पटाखों की बिक्री और उपयोग की अनुमति दी जा सकती है. उनका कहना है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले पटाखा निर्माण स्थलों को तुरंत सील कर दिया जाएगा. सिर्फ पटाखों से हवा प्रदूषित नहीं होतीः याचिकाकर्ता सुनवाई के दौरान एक याचिकाकर्ता ने कहा कि सिर्फ पटाखों से ही हवा प्रदूषित नहीं होती, बल्कि पराली और गाड़ियों के प्रदूषण को लेकर भी कोर्ट ने कई आदेश जारी किए हैं. पिछले आदेशों के अनुपालन की अवहेलना पर गौर किया जाना चाहिए. याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि ग्रीन पटाखों और उद्योगों के लिए फॉर्मूलेशन स्थापित करने में भारी मात्रा में धनराशि खर्च की गई है. शीर्ष अदालत ने पिछले महीने 26 सितंबर को प्रमाणित निर्माताओं को इस शर्त के साथ ‘ग्रीन’ पटाखे बनाने की अनुमति दे दी थी कि वे बिना उसकी अनुमति के प्रतिबंधित दिल्ली-एनसीआर में इन्हें नहीं बेचेंगे. उसने केंद्र से दिल्ली-एनसीआर में पटाखों के निर्माण पर पूर्ण प्रतिबंध पर नए सिरे से विचार करने को कहा. दिल्ली के साथ-साथ उत्तर प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा सहित कुल 16 जिले एनसीआर में आते हैं.  

लोग हैरान, जोड़े खुश: 70 साल के शख्स की 30 साल की लड़की से रोमांटिक शादी

बिलासपुर छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में एक अनोखी प्रेम कहानी ने शादी के पवित्र बंधन में परिणत होकर सबको चौंका दिया। 70 वर्षीय दादू राम गंधर्व ने अपने मोहल्ले की 30 वर्षीय युवती से प्रेम विवाह किया। दोनों ने शिव मंदिर में सात फेरे लिए और वरमाला के बाद दादू राम अपनी मूंछों पर ताव देते नजर आए।  कैसे शुरू हुई यह प्रेम कहानी बिलासपुर के सरकंडा इलाके के चिंगराजपारा अटल आवास क्षेत्र में रहने वाले दादू राम मजदूरी करते हैं। उनकी पहली पत्नी का निधन कई साल पहले हो चुका था। मोहल्ले की 30 वर्षीय युवती से उनका परिचय हुआ, जो धीरे-धीरे प्यार में बदल गया। समाज की परवाह किए बिना दोनों ने साथ जीवन बिताने का निर्णय लिया। भगवान शिव को बनाया साक्षी शुक्रवार की रात दोनों ने मोहल्ले के शिव मंदिर में भगवान शिव को साक्षी मानकर सात फेरे लिए। विवाह में सभी परंपरागत रस्में, वरमाला, सिंदूरदान, मांग भरना पूरा किया गया। शादी में पूरे मोहल्ले ने बाराती बनकर ढोल-नगाड़ों के साथ नाच-गाना किया और दूल्हा-दुल्हन को नवजीवन की शुभकामनाएं दीं। उम्र के इस बड़े अंतर को देखकर कुछ लोग अचंभित हुए, लेकिन दूल्हा-दुल्हन की खुशी देखकर सभी ने उनके फैसले का सम्मान किया। मोहल्ले के लोगों का कहना है कि ‘प्यार उम्र नहीं देखता, सच्चे रिश्ते का सम्मान होना चाहिए।’  ‘मूंछों पर ताव’ देकर जताई खुशी शादी के बाद दादू राम ने अपनी मूंछों पर ताव देते हुए कहा अब जिंदगी फिर से नई शुरुआत कर रही है। उनकी खुशी मोहल्ले में चर्चा का विषय बनी हुई है।

पटाखा व्यापारियों की याचिका: जालंधर में हाईकोर्ट से राहत की उम्मीद

जालंधर  हालांकि दिवाली में अब मात्र 10 दिन का समय शेष रह गया है, लेकिन शहर में पटाखा मार्कीट लगाने को लेकर अब सकारात्मक संकेत मिलते दिखाई दे रहे हैं। सूत्रों के अनुसार इस बार पटाखा मार्कीट पठानकोट चौक के कॉर्नर में पड़ी खाली जमीन पर लग सकती है। यही नहीं, इस प्रस्तावित जमीन के पीछे स्थित करीब दो एकड़ के प्लॉट को भी शामिल कर मार्केट को और बड़ा रूप देने की तैयारी की जा रही है। अगर सब कुछ ठीक रहा, तो शुक्रवार, 10 अक्टूबर यानी करवाचौथ वाले दिन इस स्थान पर पटाखा मार्केट की दुकानों का निर्माण कार्य शुरू करवा दिया जाएगा। पिछले करीब दो तीन महीनों से जिला प्रशासन पटाखा मार्केट के लिए नई जगह तलाशने में जुटा हुआ था, लेकिन हर बार किसी न किसी कारण से असफलता हाथ लगी। पटाखा मार्कीट के लिए गांव चोहकां, बेअंत सिंह पार्क, खालसा स्कूल की ग्राऊंड, चारा मंडी वाली जगह, निरंकारी भवन सहित कई स्थानों पर विचार किया गया, परंतु हर जगह कोई न कोई अड़चन आ गई, जिससे प्रशासन कोई ठोस निर्णय नहीं ले सका। इस अनिश्चितता से परेशान होकर पटाखा कारोबारी दो गुटों में बंट गए। एक ग्रुप जिसमें विकास भंडारी, रवि महाजन और बल्लू/बाहरी शामिल हैं, जबकि दूसरे ग्रुप में राणा हर्ष वर्मा और विकास तलवार का नाम लिया जा रहा है। वीरवार को हुई नई डेवलपमेंट के अनुसार अब विकास तलवार ग्रुप भी भंडारी, बल्लू/बाहरी और महाजन ग्रुप के साथ तालमेल बैठाने को राजी हो गया है। इसी बीच जानकारी मिली है कि पटाखा मार्केट के लिए निकाले जाने वाले 20 ड्रॉ की संख्या बढ़ाने और कुछ अन्य मुद्दों पर भंडारी, महाजन, बल्लू/बाहरी ग्रुप ने पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट का रुख किया। वहां इस मामले में एक याचिका दायर की गई, जिस पर अदालत में सुनवाई भी हुई। अदालत ने अब इस याचिका की अगली सुनवाई 13 अक्तूबर के लिए निर्धारित की है। इस याचिका की सुनवाई जस्टिस ए.एस. ग्रेवाल और जस्टिस दीपक मनचंदा की खंडपीठ ने की थी, जबकि अगली सुनवाई अब मुख्य न्यायाधीश की डबल बेंच में होगी।   वहीं, पिछले कुछ दिनों से चल रही खींचतान के बीच राणा हर्ष वर्मा ग्रुप इस बात पर अड़ा हुआ था कि पटाखा मार्कीट की कुछ दुकानें नकोदर रोड स्थित लायलपुर स्कूल की ग्राऊंड में लगाई जाएं। इसको लेकर राणा ग्रुप ने भी पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट में एक अलग याचिका दायर कर दी, जिसमें पठानकोट चौक वाली प्रस्तावित जगह का भी हवाला दिया गया। पता चला है कि गत दिन हुई सुनवाई के दौरान राणा हर्ष वर्मा की याचिका को अदालत ने निरस्त (डिसमिस) कर दिया। अदालत में इस दौरान जालंधर पुलिस की ओर से एसपी रैंक के अधिकारी भी मौजूद थे, जिन्होंने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए इस स्थान को असुरक्षित बताया। चूंकि अभी अदालत का आदेश अपलोड नहीं हुआ है, इसलिए आगे की विस्तृत जानकारी का इंतजार किया जा रहा है। अब देखना यह होगा कि आगामी 10 दिन पटाखा कारोबारियों के लिए राहत लाते हैं या आफत, और क्या कारोबारी दीवाली से पहले अपने खरीदे गए माल को बेचकर नुकसान से बच पाते हैं या नहीं।