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चंडीगढ़ में आज शुरू होगी ‘भारत टैक्सी’ सेवा, ड्राइवरों से नहीं लिया जाएगा कमीशन; जानें फायदे

 चंडीगढ़  Bharat Taxi News: चंडीगढ़ में आज से भारत टैक्सी सेवा की शुरुआत हो रही है। आज सेक्टर 9 में मौजूद नई यूटी सचिवालय इमारत में आयोजित कार्यक्रम में इसका शुभारंभ होगा। कार्यक्रम में केंद्रीय सहकारिता एवं नागर विमानन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल तथा केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। डिजिटल शुभारंभ के बाद भारत टैक्सी (Bharat Taxi App Launched) वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया जाएगा। भारत टैक्सी से लोगों को क्या फायदा होगा, ड्राइवरों को यह कैसे फायदा पहुंचाएगी, ओला-उबर जैसी टैक्सी सेवाओं से यह सर्विस कैसे अलग है, क्या यह सरकार द्वारा जारी एक नई पहल है? आइए, इन सभी सवालों के जवाब यहां जानते हैं। लेकिन इससे पहले जानना जरूरी है कि हाल ही में चंडीगढ़ में कई नामी टैक्सी सेवाओं के लाइसेंस छह महीने के लिए रद किए गए हैं। इसके कुछ दिनों बाद ही प्रशासन केंद्रशासित प्रदेश में भारत टैक्सी की शुरुआत कर रहा है। ओला-उबर जैसी सेवाओं पर लगी रोक पिछले सप्ताह चंडीगढ़ प्रशासन ने एक अहम फैसला लिया। इसके अनुसार, केंद्रशासित प्रदेश में एप आधारित कैब-बाइक टैक्सी सेवाओं वाली कंपनियों पर छह महीने की रोक लगा दी गई। ओला, इन-ड्राइव, उबर, रैपिडो का एग्रीगेटर लाइसेंस छह महीने के लिए सस्पेंड किया गया है। क्यों लिया यह फैसला? कैब और टैक्सी ड्राइवरों के करीब 100 दिन से चल रहे धरने और 15 दिन की भूख हड़ताल के बीच स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (एसटीए) ने यह फैसला लिया है। अब जानिए क्या है भारत टैक्सी सेवा भारत टैक्सी सेवा सरकार की एक नई पहल है, जिसकी शुरुआत 2 दिसंबर, 2025 को नई दिल्ली से हुई थी । इसका उद्देश्य कॉ-ओपरेटिव टैक्सी प्लेटफॉर्म पर प्राइवेट कंपनियों की मनमानी पर रोक लगाना है। सरकार इस एप के जरिए यात्रियों और ड्राइवर दोनों के हितों का ध्यान रख रही है। सरकार के इस एप के जरिए टैक्सी चालकों को केवल सेवा प्रदाता के रूप में नहीं, बल्कि सहकारी व्यवस्था के हिस्सेदार के रूप में जोड़ा जाएगा। ड्राइवरों को क्या होगा फायदा? भारत टैक्सी सेवा का उद्देश्य तकनीक आधारित परिवहन सेवा में सहकारिता की भावना को लागू करना और ड्राइवरों की भागीदारी बढ़ाना है। प्रशासन के अनुसार, इस पहल से सहकारी मॉडल का विस्तार परिवहन क्षेत्र में होगा, जिससे चालकों को एक ऐसा मंच उपलब्ध कराया जाएगा, जिसमें उनकी भागीदारी और हिस्सेदारी सुनिश्चित हो सकेगी। यानी ड्राइवर खुद इस प्लेटफॉर्म के हिस्सेदार होंगे। खास बात है कि इसमें ड्राइवरों को कोई कमीशन नहीं देना होगा। इसके साथ ही राइडर को एक्सीडेंट और इंश्योरेंस कवरेज जैसी सुविधाएं भी दी जाती हैं। भारत टैक्सी एप से ड्राइवर को फायदे     किराया ड्राइवर के बैक अकाउंट में जाएगा।     एप में कंपनी का कोई वॉलेट नहीं है।     ड्राइवर कर्मचारी नहीं , बल्कि हिस्सेदार होंगे।     एप में कोई सर्ज प्राइसिंग नहीं है।     किराए में कोई फेरबदल नहीं होता। यात्रियों को क्या होगा फायदा? भारत टैक्सी एप का किराया अन्य टैक्सी सेवाओं की तुलना में 30 फीसदी (Bharat Taxi fare) तक कम है। वहीं, इस एप के जरिए यात्रियों की सुरक्षा, विशेषतौर पर महिलाओं की सुरक्षा पर फोकस किया गया है। गलत व्यवहार पर यात्री भारत टैक्सी एप के हेल्प-सपोर्ट सेक्शन में जाकर राइड से संबंधित कोई भी शिकायत दर्ज करवा सकता है। खास बात है कि 150 से ज्‍यादा महिला ड्राइवर ‘बाइक दीदी’ योजना के तहत प्लेटफॉर्म से जुड़ी हैं, इससे महिलाएं महिला कैप्टन या ड्राइवर का भी चुनाव कर सकती हैं।     कोई एक्स्ट्रा चार्ज नहीं।     महिलाओं की सुरक्षा पर विशेष फोकस।     अन्य टैक्सी सेवाओं से 30 फीसदी तक सस्ता।     राइड बुक करना काफी आसान।     कोई सर्ज प्राइसिंग नहीं।     वाहन को ट्रैक करना काफी आसान। किन शहरों में जारी है भारत टैक्सी एप की सेवाएं? भारत टैक्सी एप की शुरुआत दिल्ली में  हुई। आज इसे चंडीगढ़ में लॉन्च किया जा रहा है। इसके साथ ही जयपुर और राजकोट जैसे शहरों में भी इसका संचालन किया जाएगा। जानकारी के अनुसार, इस सहकारी मॉडल को उत्तर प्रदेश के 75 जिलों में भी चलाए जाने की प्रक्रिया जारी है। कैसे करें डाउनलोड? भारत टैक्सी एप (Bharat Taxi booking) को गुगल प्ले स्टोर या आईओएस से आसानी से डाउनलोड किया जा सकता है। जिसके बाद यूजर अपनी ई-मेल आईडी या फिर मोबाइल नंबर से लॉग-इन कर सकता है। वहीं, राइडर्स भारत टैक्सी ड्राइवर एप डाउनलोड कर अपना आधार कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस व वाहन से जुड़े अन्य डॉक्यूमेंट अपलोड कर वेरिफाई के बाद सर्विस शुरू कर सकते हैं।

मेस के खाने को लेकर भड़के 200 छात्र, देर रात सड़क पर उतरे; अधिकारियों ने पहुंचकर संभाला मामला

पलामू लेस्लीगंज थाना क्षेत्र के बसौरा स्थित इंजीनियरिंग कॉलेज में गुरुवार की देर रात खराब खाना मिलने की शिकायत को लेकर छात्रों ने हंगामा किया। छात्र कॉलेज के सामने डालटनगंज-पांकी रोड के समीप जुट गए और मेस संचालक के खिलाफ कार्रवाई की मांग करने लगे। छात्रों का आरोप था कि मेस में गुणवत्तापूर्ण भोजन नहीं दिया जा रहा है। मामले की जानकारी मिलने पर सदर एसडीएम संजय पांडेय, लेस्लीगंज के अंचल अधिकारी जागो महतो और फूड सेफ्टी टीम मौके पर पहुंची। एसडीएम ने छात्रों से बातचीत कर उनकी शिकायत सुनी। इसके बाद फूड सेफ्टी टीम ने मेस में तैयार भोजन समेत खाद्य सामग्री के कई सैंपल जब्त किए। कार्रवाई के आश्वासन पर शांत हुए छात्र सदर एसडीएम संजय पांडेय ने बताया कि छात्रों की शिकायत को गंभीरता से लिया गया है। फूड सेफ्टी टीम ने भोजन के सैंपल जब्त किए हैं और पूरे मामले में नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। सैंपल जब्त किए जाने और कार्रवाई के आश्वासन के बाद छात्रों ने हंगामा समाप्त किया और वापस हॉस्टल लौट गए। छात्रों ने मेस संचालक पर गुणवत्ताहीन भोजन उपलब्ध कराने और खाने में मिलावट किए जाने समेत कई आरोप लगाए हैं। जिस मेस को लेकर छात्रों ने शिकायत की है, वहां करीब 200 छात्रों के लिए भोजन तैयार किया जाता है।  

गर्मी में बिजली कटौती से मचा था हंगामा, अब लखनऊ में 232 करोड़ से होंगे 1000 से ज्यादा काम

लखनऊ  इस गर्मी जिन बिजली उपकेंद्रों में उपभोक्ताओं ने बिजली संकट को लेकर नाराजगी जताई, घेराव किया और सड़क जाम की। वहां बिजली विभाग ने हकीकत जानने का प्रयास कि आखिर बिजली ने परेशान क्यों किया? इसकी रिपोर्ट तैयार की गई, जिसमें स्थानीय अवर अभियंता व सहायक अभियंता ने स्थलीय रिपोर्ट तैयार की और ट्रांसफार्मर क्षमता वृद्धि, नई 33 केवी लाइन, एक बिजली उपकेंद्र से दूसरी बिजली उपकेंद्र को इंटरलिंकिंग, पावर ट्रांसफार्मर क्षमता वृद्धि, 11 केवी लाइन निर्माण, रिले, कंट्रोल पैनल, आइसोलेटर सहित तीन नए बिजली उपकेंद्रों को शामिल करते हुए दर्जनों कामों के सुधार की सिफारिश की गई। मुख्यालय स्तर पर चर्चा हुई और लेसा के सभी चारों जोन से कुल 232 करोड़ का प्रस्ताव तैयार करके 26 सितंबर 2026 को प्रस्तावित बोर्ड आफ डायरेक्टर की बैठक में रखा जाएगा। इस एडिशन बिजनेस प्लान को स्वीकृति भी मिलने की सौ प्रतिशत संभावनाएं अफसरों ने जताई है। क्योंकि अगर यह व्यवस्था अभी से आगामी गर्मी के लिए नहीं की गई तो वर्ष 2027 में बिजली का सबसे ज्यादा बुरा हाल होगा और उपभोक्ता सड़कों पर उतरने को विवश होंगे। बनाए जाएंगे तीन उपकेंद्र अमौसी जोन के उतरेटिया, निलमथा, कल्ली पश्चिम, एकता नगर, पारा के लोगों ने बिजली संकट को लेकर गर्मी में खूब नाराजगी जताई। इसलिए यहां कल्ली पश्चिम, पारा और गोसाईगंज, मोहनलालगंज व पूरनपुर के बीच पड़ने वाले बेलीराम में बिजली संकट से उबरने के लिए तीन नए उपकेंद्र बनाए जाएंगे। इससे आगामी कई सालों तक बिजली संकट खत्म जाएगा। उतरेठिया में दस एमवी का पावर ट्रांसफार्मर रखे जाने से यहां भी संकट पूरी तरह से खत्म होगा। इसके लिए 90 कराेड़ रुपये का प्रस्ताव बनाया गया है। इसमें 63 से 250 केवीए तक 233 ट्रांसफार्मर लगाए जाएंगे, इनमें कइयों की क्षमतावृ़द्धि की जाएगी। लखनऊ मध्य जोन में 46 करोड़ का काम होगा। ऐशबाग बिजली उपकेंद्र में इस साल उपभोक्ताओं ने घेराव, तोड़फोड़ की थी, बिजली संकट से निजात दिलाने के लिए यहां दस एमवीए का पावर ट्रांसफार्मर लगाया जाएगा। इसके अलावा पुराने लखनऊ सहित कई बिजली उपकेंद्रों में छोटे व बड़े मिलाकर 564 काम कराए जाएंगे। यहां भी सौ से अधिक ट्रांसफार्मरों की क्षमता वृद्धि का काम किया जाएगा। जानकीपुरम जोन में प्रियदर्शनी, इंटिग्रल, सृष्टि सहित पांच बिजली उपकेंद्रों में पावर ट्रांसफार्मर पांच व दस एमवीए के लगाए जाएंगे। इसके अलावा 63 से 250 केवीए के 150 ट्रांसफार्मर अतिरिक्त लगेंगे और उनकी क्षमता बढ़ाई जाएगी। ऐसे तीन सौ से अधिक काम होंगे और उस पर 40 करोड़ खर्च होंगे। गोमती नगर जोन में चिनहट के शिवपुरी बिजली उपकेंद्र के लिए नई 33 केवी लाइन बनाने के साथ ही पावर ट्रासंफार्मर यहां लगाया जाएगा। इसके अलावा इंदिरा नगर, गोमती नगर, चिनहट सहित आसपास क्षेत्र में 74 नए ट्रांसफार्मर लगाए जाएंगे। इन कामों के लिए 56 करोड़ का प्रस्ताव तैयार किया गया है।  

जमाबंदी में 99% आवेदन रिजेक्ट करने पर 3 CO पर गिरी गाज, निलंबन की कार्रवाई के निर्देश

पटना राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव जय सिंह ने कहा है कि जमाबंदी में सुधार के लिए चल रहे अभियान की जवाबदेही अंचलाधिकारियाें की होगी। गुरुवार को हुई समीक्षा बैठक में उन्होंने अंचलाधिकारियों से कहा कि जमाबंदी में किसी भी तरह के सुधार के लिए वे आवेदन की प्रतीक्षा न करें। स्वयं देखें कि क्या गड़बड़ी है। उसमें अपनी पहल पर सुधार करें। बैठक में सारण, सुपौल और पश्चिम चंपारण के अंचल अधिकारियों के कार्यों की हुई समीक्षा की गई। सचिव ने कहा कि जिन मामलों को जमाबंदी में त्रुटि के कारण पूर्व में रिजेक्ट किया गया है, उनमें आवश्यक सुधार के बाद निष्पादन की जिम्मेदारी अंचल अधिकारियों की है। राजस्व महाअभियान के 99 प्रतिशत आवेदनों को रिजेक्ट कर देने के कारण सारण जिले के परसा, अमनौर एवं दरियापुर के अंचलाधिकारी के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई के निर्देश दिए। सीओ को कहा गया कि वे मृत रैयतों के उत्तराधिकार नामांतरण के मामलों में भी अपने स्तर से पहल करें। अंचल में संचालित सभी राजस्व कार्यों की जिम्मेदारी सीओ की है। मुख्यालय आने की जरूरत नहीं सचिव ने कहा कि अभियान बसेरा के तहत पात्र भूमिहीन लाभुकों को आवेदन जमा करने के लिए राज्य मुख्यालय आने की आवश्यकता नहीं है। वे अपने संबंधित अंचल कार्यालय में ही आवेदन जमा कर सकते हैं। उन्होंने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि लाभुकों को आवेदन प्रक्रिया के संबंध में सही जानकारी उपलब्ध कराई जाए। किसी व्यक्ति द्वारा लाभुकों को भ्रमित किए जाने या गलत जानकारी देने का मामला सामने आने पर नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी। बैठक में विभाग के अधिकारी मोना झा, संयुक्त गिरधारी लाल, डॉ. सुनील कुमार, संजय कुमार सिंह, मणिभूषण किशोर, नवाजिश अख्तर, अनुपम प्रकाश, अविनाश कुमार, जूही कुमारी तथा आनंद शंकर सहित तीनों जिलों के सभी अंचल अधिकारी उपस्थित थे।

‘फूलन देवी की हत्या करवाकर मछुआरा समाज की राजनीति रोकी’… संजय निषाद का परोक्ष रूप से सपा पर तीखा हमला

‘साढ़े चार साल सुख-दुख में नहीं आए, अब पंचायत के बहाने कूद रहे बरसाती मेंढक’… संजय निषाद का तीखा हमला ‘फूलन देवी की हत्या करवाकर मछुआरा समाज की राजनीति रोकी’… संजय निषाद का परोक्ष रूप से सपा पर तीखा हमला  ‘मछुआरे दरी बिछाने वाली कौम नहीं, हक के लिए लड़ने वाली कौम हैं’… संजय निषाद का दो टूक संदेश ‘भेष बदल-बदलकर आएंगे बरसाती मेंढक, उनसे सावधान रहना है’… संजय निषाद ने मछुआरा समाज को चेताया लखनऊ  उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री संजय निषाद ने आगामी चुनाव को देखते हुए शुक्रवार को मछुआरा समाज को सावधान करते हुए तीखा सोशल मीडिया पोस्ट किया है। उन्होंने कहा कि जो लोग साढ़े चार साल तक समाज के सुख-दुख में दिखाई नहीं दिए, वही अब पंचायत के बहाने मछुआरा समाज के आसपास नजर आने लगे हैं। संजय निषाद ने परोक्ष रूप से समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए ऐसे लोगों को ‘बरसाती मेंढक’ और ‘दरी बिछाने वाले सौदागर’ बताते हुए समाज से सतर्क रहने की अपील की।  ‘साढ़े चार साल नहीं आए, अब पंचायत के बहाने कूदने लगे’ संजय निषाद ने मल्लाह, निषाद, केवट, कश्यप, बिंद, धीवर, कहार, बाथम, रायकवार और माझी समेत पूरे मछुआरा समुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि चुनावी मौसम में ऐसे लोगों से सावधान रहना होगा, जो लंबे समय तक समाज के बीच नहीं रहे और अब पंचायत के बहाने उसके आसपास सक्रिय होने लगे हैं। उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा कि 'जो साढ़े चार साल आपके सुख-दुख में नहीं आए- अब दरी बिछाने वाले वही सौदागर पंचायत के बहाने आपके आसपास बरसाती मेंढक की तरह कूदने लगे हैं।' फूलन देवी की हत्या और राजनीतिक विरासत का मुद्दा संजय निषाद ने अपने पोस्ट में वीरांगना फूलन देवी का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन लोगों ने फूलन देवी की हत्या करवाकर मछुआरा समाज की अलग राजनीति को खड़ा होने से रोकने का काम किया, उनसे और उनकी मदद करने वालों से समाज को सावधान रहना होगा। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि जिस पार्टी ने फूलन देवी की हत्या की सुपारी दी, उनकी संपत्ति पर कब्जा कर लिया और उनकी राजनीतिक विरासत को मछुआरा समुदाय से छीनने का प्रयास किया, ऐसे लोग मछुआरा समाज का भला चाहने वाले नहीं हो सकते। दरअसल, फूलन देवी की हत्या को लेकर संजय निषाद सपा पर निशाना साधते रहे हैं। उनका दावा है कि फूलन देवी की बढ़ती लोकप्रियता देखकर सपा ने उनके खिलाफ साजिश की थी। ‘मछुआरे दरी बिछाने वाली कौम नहीं’ संजय निषाद ने अपने पोस्ट में मछुआरा समाज की राजनीतिक पहचान को लेकर भी दो टूक संदेश दिया। उन्होंने कहा कि 'मछुआरों की अब स्वतंत्र पहचान निषाद पार्टी हैं।' उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि मछुआरे दरी बिछाने वाली कौम नहीं हैं, बल्कि ओबीसी समाज के हक के लिए लड़ने वाली कौम हैं। उनका संदेश था कि समाज को चुनावी मौसम में आने वाले ऐसे चेहरों को पहचानना होगा, जो अलग-अलग रूप और भेष में उसके बीच पहुंचेंगे। संजय निषाद ने लिखा, 'बरसाती मेंढक भेष बदल-बदल के आएंगे। उनसे सावधान रहना है।' ‘समाज को अपने हक के लिए खड़ा होना होगा’ संजय निषाद के इस पूरे पोस्ट में मछुआरा समाज की राजनीतिक पहचान, उसके अधिकार और अलग राजनीतिक ताकत के तौर पर खड़े होने का संदेश प्रमुखता से सामने आया। उन्होंने समाज को आगाह किया कि चुनावी मौसम में आने वाले राजनीतिक सौदागरों के बहकावे में आने के बजाय अपने हित और अधिकारों को प्राथमिकता देनी होगी।

Bhopal Ring Road की रिपोर्ट में बड़ी गड़बड़ी? सागर जिले के जिक्र और बजट आंकड़ों में विसंगतियां

भोपाल  भोपाल रिंग रोड को पूरा करने वाला करीब 3000 करोड़ के प्रोजेक्ट में भी इंजीनियरों का हैरतअंगेज खेल सामने आया है। भोपाल, नर्मदापुर, नागपुर, जबलपुर और इंदौर जाने वालों के लिए 25 किमी तक की दूरी कम करने वाले पश्चिमी बायपास की पर्यावरणीय रिपोर्ट बनाने में ही जिम्मेदारों ने बड़ी लापरवाही कर दी। रतनपुर से फंदा तक 36 किमी लंबे पश्चिमी बायपास के प्रोजेक्ट की पर्यावरणीय रिपोर्ट में सागर के बायपास की पर्यावरणीय रिपोर्ट को कॉपी पेस्ट कर पश्चिमी बायपास की पर्यावरणीय रिपोर्ट तैयार कर दी गई। हिन्दी और अंग्रेजी दोनों ही रिपोर्ट्स में ऐसी ही गलतियां हैं। इस रिपोर्ट के ड्राफ्ट पर आपत्तियां ली जा रही हैं। 25 सितंबर को इस पर आमला गांव में सुनवाई होगी। इसके बाद जमीनी काम शुरू होगा। सामने आ रही अफसरों की लापरवाही बता दें, पर्यावरणीय कारणों से ही प्रोजेक्ट का अलाइनमेंट एक बार बदला गया था। 4 किमी की लंबाई घटाकर 40 किमी से 36 किमी का किया। इसमें भी पर्यावरणीय रिपोर्ट की गड़बड़ी और सागर जिले के उल्लेख से अफसरों की लापरवाही सामने आ रही है। अब प्रोजेक्ट पर काम कर रहे एमपीआरडीसी के एजीएम एसपी दुबे का कहना है कि गड़बड़ी दिखवा लेंगे। भोपाल रिंग रोड प्रोजेक्ट, जिसे मुख्य रूप से भोपाल पश्चिमी बायपास (Bhopal Western Bypass) के रूप में जाना जाता है। भोपाल के ट्रैफिक को शहर के बाहर से ही डायवर्ट करने के लिए बनाई जा रही एक महत्वपूर्ण सड़क परियोजना है। ऐसे समझें प्रोजेक्ट रिपोर्ट में गड़बड़ियां -हिन्दी की रिपोर्ट के अनुभाग 1.7 में पर्यावरण प्रबंधन योजना में पर्यावरण संरक्षण के उपाय के लिए अंकों में बजट 05 करोड़ 12 हजार 722 रुपए लिखे हैं। जबकि शब्दों में चौबीस करोड़ छह लाख दो हजार आठ सौ नब्बे रुपए लिखा गया है। -हिन्दी की रिपोर्ट के अनुभाग 15 में पर्यावरण निगरानी कार्यों के लिए अंकों में 10,64,000 रुपए लिखे हैं। शब्दों इसे सात लाख छप्पन हजार रुपए लिखा। -अंग्रेजी की रिपोर्ट में टेबल 1.2 की एन्वायरमेंटल लेजिसलेशंस में 3 नंबर पर लिखा है, प्रोजेक्ट अलाइनमेंट इज पासिंग थू रिजर्ल्ड एंड प्रोटेक्टेड फॉरेस्ट ऑफ एबाउट 47 हेक्टेयर लेंथ 6058 मीटर डिस्ट्रिक्ट सागर इन स्टेट ऑफ एमपी। जाहिर है, ये सागर जिले की सड़क की बात है।

राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद पहली बार उज्जैन पहुंचे नितिन नबीन, धोती पहन महाकाल के किए दर्शन

 उज्जैन विश्व प्रसिद्ध द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक भगवान श्री महाकालेश्वर के आंगन में शुक्रवार तड़के भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने महाकाल मंदिर में आयोजित भस्म आरती में शामिल होकर बाबा महाकाल के दिव्य स्वरूप के दर्शन किए। नंदी हॉल में बैठ शिव भक्ति में लीन नितिन नबीन भाजपा राष्ट्रीय नितिन नबीन, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल व अन्य बाबा महाकाल के दरबार में अल सुबह 04 बजे पहुंचे. जहां उन्होंने नंदी हॉल में बैठकर 2 घण्टे तक भस्म आरती के दर्शन लाभ लिए. भगवान का आशीर्वाद लिया और पूजन अर्चन आरती की. वे नंदी हॉल में बैठ शिव भक्ति में लीन नजर आए. बाबा का भी इस दौरान राजा स्वरूप में श्रृंगार हुआ. नितिन नबीन मंदिर के ही पास सम्राट विक्रमादित्य हेरीटेज होटल में ही रात रुके. अब इंदौर एयरपोर्ट और वहां से पंजाब निकलने का कार्यकम है।  भस्म आरती में लीन दिखे भाजपा अध्यक्ष बाबा महाकाल की भस्म आरती के दौरान भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन शिवभक्ति में लीन नजर आए। नंदी हॉल में बैठकर उन्होंने पूरे समय हाथ जोड़कर भगवान शिव का ध्यान किया और महाकाल के जाप में डूबे रहे। आरती के दौरान उन्होंने श्रद्धालुओं के साथ तालियां बजाकर शिवभक्ति की लय में सहभागिता की। उज्जैन आगमन पर भस्म आरती में शामिल होने का यह अनुभव उनके लिए खास रहा। महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती के दौरान नितिन नबीन पारंपरिक सोला-पारिधान में नजर आए। उन्होंने पीले रंग की धोती पहनी हुई थी। मंदिर की परंपरा के अनुसार भस्म आरती में शामिल होने के दौरान निर्धारित पारंपरिक परिधान धारण किया जाता है। देश की यश-कीर्ति और प्रधानमंत्री के लिए की प्रार्थना भस्म आरती के बाद मीडिया से चर्चा करते हुए नितिन नबीन ने कहा कि यह बाबा महाकाल की पवित्र नगरी है और यहां पहली बार आने का सौभाग्य पाकर वे अभिभूत हैं। उन्होंने कहा कि बाबा महाकाल पूरे विश्व का ध्यान रखते हैं।  अध्यक्ष बनने के बाद पहली बार पहुंचे उज्जैन नितिन नबीन ने कहा, ''बाबा महाकाल की भूमि पर आकर जो खुशी हो रही है उसे शब्दों में बयान नहीं कर सकता. मैंने बाबा महाकाल से देश की सुख समृद्धि की मनोकामना की है.'' उन्होंने बताया कि, ''अध्यक्ष बनने के बाद पहली बार उज्जैन आया हूं. आज जो कुछ हूं बाबा के आशीर्वाद से हूं. इसलिए तय कर रखा था बाबा का आशीर्वाद लेना है. बाबा का बुलावा आया और मैं चला आया. कल हमने पीएम मोदी का जन्मदिवस मनाया है. बाबा से प्रार्थना की है कि पीएम नरेंद्र मोदी की आयु लंबी हो और वे ऐसे ही विकास कार्य करते रहे. बाबा का आशीर्वाद प्रधानमंत्री पर बना रहे. यश कीर्ति वैभव उन्हें मिले।  पारंपरिक सोला-पारिधान में दिखा राष्ट्रीय अध्यक्ष सबसे खास बात यह रही ही महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती के दौरान नितिन नबीन पारंपरिक सोला-पारिधान में नजर आए. उन्होंने पीले रंग की धोती पहनी हुई थी. दर्शन के बाद मंदिर में कलेक्टर एवं मंदिर समिति अध्यक्ष रोशन कुमार सिंह, प्रशासक प्रथम कौशिक द्वारा नितिन नबीन एवं हेमंत खंडेलवाल को बाबा महाकाल का स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत किया गया. उन्हें लड्डू प्रासद दिया गया. साथ ही प्रभारी मंत्री, सांसद व अन्य नेताओं ने भी दोनों पार्टी अध्यक्षों का स्वागत सम्मान किया।  'आशीर्वाद दीप' प्रोग्राम में शामिल हुए नितिन नबीन इससे पहले नितिन नबीन बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन के मशहूर राम घाट पर महाकाल के भक्तों के साथ 'आशीर्वाद दीप' प्रोग्राम में शामिल हुए. इस पावन अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अच्छे स्वास्थ्य और लंबी उम्र की प्रार्थना की. नितिन नबीन ने अपने X हैंडल पर ट्वीट करते हुए लिखा कि, ''प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश 'विकसित भारत' के संकल्प को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ता रहे यही कामना है। 

रेलवे की सफाई व्यवस्था पर अब यात्रियों की नजर, ट्रेन में होगी औचक जांच; सीधे लिया जाएगा फीडबैक

 अंबाला  ट्रेन में कंबल-तकिया साफ मिला या नहीं, टॉयलेट की हालत कैसी थी और डिब्बे में सफाई हुई या नहीं अब रेलवे की स्वच्छता व्यवस्था का फीडबैक सीधे यात्री देंगे। ‘स्वच्छता ही सेवा 2026’ के तहत रेलवे ने ट्रेनों में सफाई व्यवस्था की औचक जांच से लेकर यात्रियों की प्रतिक्रिया लेने तक की पूरी व्यवस्था तैयार की है। देश में रोजाना दो करोड़ से अधिक यात्रियों के रेल से सफर करने के बीच रेलवे का जोर अब सफाई को सिर्फ कर्मचारी की जिम्मेदारी रखने के बजाय यात्री को भी अभियान का हिस्सा बनाने पर है चलती ट्रेनों में ऑन बोर्ड हाउसकीपिंग सेवा (ओबीएचएस) के पर्यवेक्षक और संबंधित ठेकेदार शौचालय, यात्री डिब्बों, लिनेन और पेंट्री कार की औचक जांच करेंगे। एसी कोच में यात्रियों को दिए जाने वाले चादर, कंबल और तकिये की सफाई पर भी नजर रहेगी। यात्रियों से सफाई व्यवस्था और उपलब्ध कराए गए लिनेन को लेकर फीडबैक लिया जाएगा रेलवे ने अभियान को ट्रेनों और स्टेशनों तक सीमित न रखकर स्वच्छता शपथ को जनभागीदारी का आधार बनाने की तैयारी की है। दो अक्टूबर को स्वच्छ भारत दिवस के अवसर पर शपथ दिलाई जाएगी। शपथ में हर व्यक्ति ‘न गंदगी करूंगा, न करने दूंगा’ के संकल्प के साथ स्वच्छता की शुरुआत खुद से, परिवार, मोहल्ले, गांव-शहर और कार्यस्थल से करने का वचन लेगा। अफसरों की भी तय होगी जिम्मेदारी रेलवे बोर्ड से लेकर जोन, मंडल और स्टेशन स्तर तक अधिकारियों की भूमिका तय की गई है। डीआरएम स्तर पर अभियान की निगरानी, ट्रैक-यार्ड की सफाई, स्टेशन प्रबंधन और ट्रेनों में ओबीएचएस व्यवस्था की जांच के लिए अलग-अलग जिम्मेदारियां निर्धारित की गई हैं। एक अक्टूबर को बड़े स्तर पर श्रमदान और दो अक्टूबर को स्वच्छ भारत दिवस के कार्यक्रम होंगे। यानी इस बार रेलवे की स्वच्छता मुहिम में झाड़ू भी चलेगी, शपथ भी होगी और यात्री की जुबान से सफाई की असली रिपोर्ट भी सामने आएगी। हर व्यक्ति 100 लोगों को जोड़ेगा स्वच्छता शपथ में प्रत्येक व्यक्ति से साल में 100 घंटे यानी हर सप्ताह कम से कम दो घंटे स्वच्छता के लिए देने का संकल्प कराया जाएगा। शपथ लेने वाला प्रत्येक व्यक्ति 100 अन्य लोगों को स्वच्छता से जोड़ने और उन्हें भी शपथ दिलाने का प्रयास करेगा। स्टेशनों पर उद्घोषणा प्रणाली से ‘मेरी सीट, मेरा डिब्बा’ थीम पर लगातार स्वच्छता संदेश प्रसारित किए जाएंगे। यात्रियों को पंपलेट बांटे जाएंगे और डिजिटल डिस्प्ले बोर्ड पर भी स्वच्छता शपथ एवं जागरूकता संदेश दिखाए जाएंगे। यानी प्लेटफार्म से ट्रेन की सीट तक यात्री को यह याद दिलाया जाएगा कि सफाई केवल रेलवे की नहीं, उसकी भी जिम्मेदारी है

₹100 की रिश्वत लेते पकड़े गए थे रेलवे क्लर्क, 31 साल बाद हाईकोर्ट ने सुनाया फैसला; अब 1 साल की जेल

 रांची झारखंड उच्च न्यायालय ने वर्ष 1995 के एक पुराने रिश्वतखोरी मामले में बड़ा निर्णय सुनाते हुए हटिया रेलवे स्टेशन के पूर्व पार्सल क्लर्क काली शंकर धोबी की दोषसिद्धि को सही ठहराया है। अदालत ने आरोपी की 75 वर्ष की अवस्था, स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं और 31 वर्षों तक चली लंबी न्यायिक प्रक्रिया का संज्ञान लेते हुए उनकी कारावास की अवधि को घटा दिया है। अब आरोपी को एक वर्ष की जेल की सजा भुगतनी होगी। क्या था पूरा मामला? घटना 27 अप्रैल 1995 की है, जब आरोपी काली शंकर धोबी हटिया रेलवे स्टेशन पर बतौर पार्सल क्लर्क कार्यरत थे। शिकायतकर्ता निर्मल कुमार बेगानी को अपनी मोटरसाइकिल बिहार के समस्तीपुर भेजनी थी, जिसके एवज में आरोपी ने उनसे ₹100 की रिश्वत मांगी थी। पीड़ित ने इसकी शिकायत केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से की। जांच के बाद CBI ने जाल बिछाकर आरोपी क्लर्क को ₹100 की घूस लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया था। निचली अदालत से हाई कोर्ट तक का सफर CBI कोर्ट का फैसला (2004): भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत चले इस मुकदमे में वर्ष 2004 में निचली अदालत ने आरोपी को दोषी माना था। तब उन्हें धारा 7 के तहत 1 वर्ष और धारा 13(2) के तहत 1.5 वर्ष की सजा तथा कुल ₹10,000 जुर्माने का आदेश सुनाया गया था। 22 साल हाई कोर्ट में सुनवाई: ट्रायल कोर्ट के फैसले को आरोपी ने झारखंड उच्च न्यायालय में चुनौती दी। जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की एकलपीठ के समक्ष दो दशकों से अधिक समय तक इस अपील पर सुनवाई चली। सजा में राहत अदालत ने अपराध में दोषसिद्धि को कायम रखा, लेकिन आरोपी की ढलती उम्र और बीमारियों को देखते हुए धारा 7 के तहत सजा 6 महीने और धारा 13(2) के तहत सजा 1 वर्ष कर दी। दोनों सजाएं एक साथ चलेंगी, जिससे उन्हें कुल 1 साल जेल में व्यतीत करने होंगे। सरेंडर का आदेश कोर्ट ने आरोपी की जमानत याचिका रद करते हुए उन्हें अगले 2 महीनों के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है।

‘घांची-तेली समाज के PM मोदी का जन्मदिन मनाएंगे’, आशीर्वाद का दीया जलाने पर राजभर का बयान

घांची-तेली समाज से आने वाले प्रधानमंत्री मोदी का जन्मदिन मनाने और आशीर्वाद का दीया जलाने पर मचेगा हल्ला: ओम प्रकाश राजभर कैबिनेट मंत्री बोले- तेल जल गया, बाती जल गई और दीया बर्बाद हो गया का शोर मचाने का टूलकिट तैयार कांग्रेस, सपा और वामपंथी सवर्णों पर साधा निशाना, कहा- सबसे ज्यादा यही लोग मचाएंगे हल्ला वामपंथी नेतृत्व की सामाजिक पृष्ठभूमि पर उठाए सवाल, बोले- ऊंची कुर्सियों पर कौन बैठा था, कौन बैठा है और कौन बैठेगा, यह भी देखिए मार्क्स-लेनिन से अंबेडकर और लोहिया-जेपी से जय भीम तक की राजनीति पर कसा तंज कहा- पिछड़ा-दलित समाज अब जाग गया, जितना बांटने की कोशिश करेंगे उतना ही जुड़ता जाएगा  लखनऊ  प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर सेवा संकल्प अभियान के तहत आशीर्वाद का दीया जलाए जाने को लेकर कांग्रेस, सपा और वामपंथियों पर तीखा हमला बोला है। सोशल मीडिया पर किए गए पोस्ट में उन्होंने कहा कि एक-दो दिन रुकिए, हो-हल्ला होने वाला है। हल्ला होगा कि तेल जल गया, त्राहि-त्राहि हो गई। इसका टूलकिट भी तैयार है, बस हल्ले का इंतजार कीजिए। राजभर ने कहा कि पूरे देश ने घांची-तेली समाज से आने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन मनाया। अति पिछड़े और दलित समाज के लोगों ने सेवा संकल्प अभियान से खुद को खुशी-खुशी जोड़ा। जनता से आशीर्वाद मांगा और हर्षोल्लास के साथ आशीर्वाद का दीया जलाया। सबसे ज्यादा हल्ला कांग्रेस के टूलकिट वामपंथी और सपाई मचाएंगे राजभर ने सवाल किया कि इससे बुरा किसे लगा? उन्होंने कांग्रेस, सपा और वामपंथी सवर्णों का नाम लेते हुए कहा कि अब यही लोग चिल्लाएंगे कि इतना तेल जल गया, बाती जल गई और दीया बर्बाद हो गया। उन्होंने कहा कि देख लीजिएगा, सबसे ज्यादा हल्ला कांग्रेस के टूलकिट वामपंथी सवर्ण और सपाई मचाएंगे। उन्होंने कहा कि वामपंथी सवर्णों को छोड़ दिया जाए तो पूरा सवर्ण समाज उनके साथ है। सबसे ज्यादा दिक्कत उस खास जमात को है, जो वर्षों से समाज में अपना वैचारिक जहर बो रही है। वामपंथ की ऊंची कुर्सियों पर कौन बैठा था, यह भी देखिए कैबिनेट मंत्री ने कहा कि अति पिछड़ों, दलितों और बहुजनों को एक बार उन वामपंथी नेताओं की जाति भी देखनी चाहिए, जो दिन-रात उन्हें जाति और ब्राह्मणवाद समझाते हैं। वामपंथी विचार की ऊंची कुर्सियों पर कौन बैठा था, कौन बैठा है और कौन बैठेगा, यह भी देखना चाहिए। राजभर ने दावा किया कि सभी वामपंथी अगड़े मिलेंगे। उन्होंने कहा कि ब्राह्मणवाद के नाम पर गाली किसे दिलाई जाती है और विचार की दुकान किसके हाथ में है, तस्वीर अपने आप साफ हो जाएगी। गरीब और सामान्य परिवार से निकला व्यक्ति पसंद नहीं राजभर ने कहा कि वास्तव में ये राजा और राज परिवारों के इर्द-गिर्द जीने वाले लोग हैं। गरीब और सामान्य परिवार से निकलकर कोई व्यक्ति अपने दम पर ऊपर पहुंचे, यह इन्हें कतई पसंद नहीं आता। चाहे वह मोदी हों, राजभर हों, निषाद हों या किसी अन्य दलित या अति पिछड़े समाज से निकला कोई व्यक्ति। मार्क्स-लेनिन को मानने वाले अचानक अंबेडकरवादी हो गए राजभर ने वामपंथी और समाजवादी राजनीति पर तंज कसते हुए कहा कि कल तक मार्क्स और लेनिन को मानने वाले अचानक अंबेडकरवादी हो गए। लोहिया और जेपी के नाम पर पार्टी चलाने वाले अचानक रंग बदलकर जय भीम करने लगे। इतनी जल्दी विचार, नारे और महापुरुष बदल जाएं तो यह सोचने वाली बात है। उन्होंने कहा कि अति पिछड़ों और दलितों को वर्षों से अपने विचारों के जाल में फंसाने की कोशिश एक खास जमात ने की। उन्होंने इसे आइडेंटिटी क्राइसिस से जूझ रही जमात बताते हुए कहा कि इसे सबसे ज्यादा परेशानी तब होती है, जब अति पिछड़ा, दलित और बहुजन इनके बताए रास्ते के बजाय अपना रास्ता खुद चुनने लगता है। घांची-तेली समाज से आने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी इन्हें यही परेशानी है। भारतीय वामपंथ कांग्रेस की प्रयोगशाला राजभर ने कहा कि वास्तव में भारतीय वामपंथ कांग्रेस की प्रयोगशाला है, जहां देश और समाज को बांटकर कुछ परिवारों की गुलामी करने की ट्रेनिंग मिलती है। उन्होंने कहा कि सारे वामपंथी अंत में वहीं नौकरी करते हैं। पिछड़ा-दलित समाज अब जाग गया पोस्ट के आखिर में राजभर ने कहा कि पिछड़ा-दलित समाज अब जाग गया है। आपके चेहरे पर लगा नकाब उतर चुका है। आप जितना पिछड़ों-दलितों को बांटने की कोशिश करेंगे, वे उतना ही जुड़ते जाएंगे। उन्होंने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव को टैग करते हुए लिखा, बस देखते जाइए।