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रायपुर: मंत्री जायसवाल ने कमलेश्वरपुर अस्पताल का दौरा कर स्वास्थ्य सेवाओं का लिया जायजा

रायपुर : स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने मैनपाट के कमलेश्वरपुर अस्पताल का किया निरीक्षण स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने किया मैनपाट के कमलेश्वरपुर अस्पताल का निरीक्षण रायपुर: मंत्री जायसवाल ने कमलेश्वरपुर अस्पताल का दौरा कर स्वास्थ्य सेवाओं का लिया जायजा कमलेश्वरपुर अस्पताल पहुंचे स्वास्थ्य मंत्री, व्यवस्थाओं को लेकर अधिकारियों को दिए निर्देश रायपुर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने सरगुजा जिले के मैनपाट स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कमलेश्वरपुर का निरीक्षण कर वहां की स्वास्थ्य सेवाओं का जायजा लिया। प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने आज सरगुजा जिले के मैनपाट स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कमलेश्वरपुर का निरीक्षण कर वहां की स्वास्थ्य सेवाओं का जायजा लिया। इस अवसर पर उन्होंने आम नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने हेतु अस्पताल प्रबंधन एवं संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने अस्पताल की साफ-सफाई, दवाओं की उपलब्धता, चिकित्सकों की उपस्थिति एवं मरीजों को मिलने वाली सेवाओं की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य है कि ग्रामीण अंचलों तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुँचें और हर नागरिक को समय पर उपचार मिल सके। इस निरीक्षण के अवसर पर स्थानीय जनप्रतिनिधि, वरिष्ठ अधिकारी, डॉक्टर एवं स्वास्थ्य केंद्र के कर्मचारीगण उपस्थित रहे। स्वास्थ्य मंत्री ने सभी को समर्पण भाव से सेवा देने के लिए प्रोत्साहित किया।

यूपी में मानसून दक्षिण और बुंदेलखंड की तरफ शिफ्ट, आज इन 14 जिलों में होगी बारिश

लखनऊ उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड, विंध्य क्षेत्र और मध्य प्रदेश से सटे जिलों में आज भारी बारिश की संभावना है। मौसम विभाग ने 14 जिलों में भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है। साथ ही 40 जिलों में गरज चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरने की संभावना जताई गई है। बुधवार को प्रदेश के तराई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश हुई। बुधवार और बृहस्पतिवार के दौरान बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच, लखीमपुर खीरी, सहारनपुर, शामली, मुजफ्फरनगर और बिजनौर के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश देखने को मिली। आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र लखनऊ के वरिष्ठ वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह के मुताबिक बुधवार को पश्चिम तराई, विंध्य क्षेत्र और बुंदेलखंड में अच्छी बारिश के आसार हैं। यहां है भारी वर्षा की चेतावनी बांदा, चित्रकूट, प्रयागराज, सोनभद्र, मिर्जापुर, चंदौली, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, जालौन, हमीरपुर, महोबा, झांसी, ललितपुर व आसपास के इलाकों में ।  यहां है मेघगर्जन और वज्रपात होने की संभावना बांदा, चित्रकूट, प्रयागराज, सोनभद्र, मिर्जापुर, चंदौली, वाराणसी, भदोही , कानपुर देहात, सहारनपुर, शामली, मुजफ्फरनगर, बागपत, मेरठ, गाजियाबाद, हापुड़, गौतम बुद्ध नगर, बुलंदशहर, अलीगढ़, मथुरा, हाथरस, कासगंज, एटा, आगरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, इटावा, औरैया, बिजनौर, अमरोहा, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, संभल, बदायूं, जालौन, हमीरपुर, महोबा, झांसी, ललितपुर एवं आसपास के इलाकों में।  

सड़क निर्माण में अब नहीं चलेगा समझौता, गुणवत्ता के लिए कड़े कदम : मंत्री सिंह

सड़कों की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए ठोस प्रयास : लोक निर्माण मंत्री सिंह भोपाल  लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने विभागीय कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने हेतु उठाए जा रहे प्रभावी कदमों की जानकारी देते हुए कहा कि “लोक निर्माण से लोक कल्याण” की अवधारणा को मूर्त रूप देने के लिए विभाग तकनीकी नवाचार, पारदर्शी निरीक्षण प्रणाली और सख्त गुणवत्ता मानकों को अपनाते हुए कार्य कर रहा है। मंत्री सिंह ने कहा कि इंदौर के पोलोग्राउंड क्षेत्र में निर्माणाधीन रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) का कार्य पूर्णतः स्वीकृत तकनीकी डिज़ाइन और मानकों के अनुरूप प्रगति पर है। यह ओवरब्रिज रेलवे और लोक निर्माण विभाग द्वारा संयुक्त सर्वेक्षण और डिज़ाइन प्रक्रिया के माध्यम से तैयार किया गया है। वर्तमान में निर्माणाधीन इस आरओबी की लंबाई 1027.60 मीटर और चौड़ाई 12.00 मीटर निर्धारित की गई है। इसका डिज़ाइन तीन दिशाओं में यातायात सुविधा प्रदान करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। पोलोग्राउंड, लक्ष्मीबाई स्टेशन और भागीरथपुरा की ओर जाने वाली तीन भुजाएँ इसमें सम्मिलित हैं। मंत्री सिंह ने बताया कि ओवरब्रिज में कुल पाँच टर्न (वक्र) हैं, जिनका निर्माण भारतीय सड़क कांग्रेस (IRC) के दिशा-निर्देशों के अनुसार किया जा रहा है। आईआरसी मानकों के अनुसार कर्व का न्यूनतम रेडियस 15 मीटर होता है, जबकि इस आरओबी के सभी टर्न का रेडियस लगभग 20 मीटर है, जिससे यह डिज़ाइन और संरचनात्मक दृष्टि से पूरी तरह संतुलित और सुरक्षित है। निर्माण कार्य के सभी आयाम — जैसे कि रेडियस ऑफ कर्वेचर, डिज़ाइन स्पीड और सुपर एलीवेशन — को मानकों के अनुरूप सुनिश्चित किया गया है। यह आरओबी इंदौर शहर के तीन प्रमुख क्षेत्रों को यातायात की निर्बाधता और सुविधा के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। निर्माण स्थल की स्थिति और डिज़ाइन ड्रॉइंग का तुलनात्मक अवलोकन इस बात की पुष्टि करता है कि कार्य स्वीकृत तकनीकी योजनाओं के अनुसार ही किया जा रहा है। लोक निर्माण विभाग नागरिकों की सुविधा और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए कार्यों को पारदर्शिता और गुणवत्ता के साथ पूरा कर रहा है। मंत्री सिंह ने कहा कि गड्ढे रहित सड़कें संधारण विभाग की प्राथमिकता हैं, परंतु अत्यधिक वर्षा और ट्रैफिक लोड के कारण कभी-कभी सड़कों की क्षति होती है। इनके सुधार कार्य के लिये विभाग तकनीकी प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार कर रहा है, जिससे अभियंता नवाचारों और आधुनिक तकनीकों से अपडेट रह सकें। लोकपथ मोबाईल ऐप पर प्राप्त होने वाली शिकायतों के निराकरण हेतु 7 दिवस की समय-सीमा को कम करने पर भी विचार किया जा रहा है। मानसून के दौरान सड्कों की मरम्मत के लिये आधुनिक मशीनों से पेच रिपेयर की व्यवस्था प्रारंभ की गई है। उन्होने बताया कि अभी हाल ही मे 8 से 10 जून के बीच विभाग के 1500 से अधिक इंजीनियरों को एक अभियान के रूप में सड्कों के निरीक्षण के लिये भेजा गया था और 20 जून तक सभी मरम्मत कार्य पूर्ण करने के लिये निर्देशित किया गया था। मंत्री सिंह ने यह कहा कि सड़कों की एक उम्र होती है, यदि इससे पहले सड़क खराब होती है तो यह जाँच का विषय है और दोषियों पर कार्यवाही होगी। कई मामलों में सडकों पर यातायात दवाब और वाहनों के बोझ पर भी क्षति का होना निर्भर करता है। मंत्री सिंह ने बताया कि प्रदेश की सभी 13 मण्डल स्तरीय प्रयोगशालाओं को अत्याधुनिक उपकरणों से सुसज्जित कर दिया गया है, जिससे निर्माण सामग्री की जांच अब और अधिक सटीक और प्रभावी हो सकेगी। प्रत्येक जिले में मोबाइल प्रयोगशालाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। प्रथम चरण में 13 मण्डलों के लिए निविदा जारी कर दी गई है, जिससे निर्माण स्थलों पर त्वरित जांच और सुधार की प्रक्रिया सुनिश्चित हो सकेगी। उन्होंने बताया कि गुणवत्ता नियंत्रण को और अधिक सुदृढ़ करने के लिए तेलंगाना और गुजरात की तर्ज पर एक स्वतंत्र गुणवत्ता नियंत्रण इकाई की स्थापना कर दी गई है, जो केवल गुणवत्ता निगरानी के लिए समर्पित होगी। सड़क निर्माण में प्रयुक्त डामर की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए भी एक नई व्यवस्था लागू की है, जिसके अंतर्गत डामर केवल सार्वजनिक उपक्रम रिफाइनरियों – इंडियन ऑयल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम से ही खरीदा जाएगा। इसके परिवहन हेतु जीपीएस आधारित ई-लॉकिंग सिस्टम से युक्त टैंकरों का उपयोग किया जाएगा, जिन्हें निर्माण स्थल पर केवल विभागीय अभियंता ओटीपी के माध्यम से खोल सकेंगे। औचक निरीक्षण की पारदर्शी और तकनीकी प्रणाली के बारे में जानकारी देते हुए मंत्री सिंह ने बताया कि विभाग ने एक सॉफ्टवेयर आधारित प्रणाली विकसित की है, जिसमें निरीक्षण स्थल, दल और सैंपल का चयन पूरी तरह रैंडम तरीके से होता है। संग्रहीत सैंपल को गोपनीय कोड के साथ प्रयोगशालाओं में भेजा जाता है और रिपोर्ट सीधे सॉफ्टवेयर पर अपलोड की जाती है। इसके बाद अगले ही दिन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से समीक्षा कर आवश्यक होने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाती है। उन्होंने बताया कि प्रत्येक माह की 5 और 20 तारीख को नियमित रूप से यह औचक निरीक्षण किया जा रहा है। विगत 5 माह में 70 चरणों में 348 निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया गया है, जिनमें गुणवत्ता में कमी पाए जाने पर 21 ठेकेदारों, 14 अधिकारियों और 4 कंसल्टेंट्स पर कार्यवाही की गई है। मंत्री सिंह ने बताया कि विभाग द्वारा विकसित ‘लोकपथ ऐप’ की सफलता इसकी जनभागीदारी और पारदर्शी शिकायत निवारण प्रणाली का प्रमाण है। ऐप पर प्राप्त शिकायतों की मॉनिटरिंग और श्रेणीकरण प्रणाली को और अधिक सटीक और जिम्मेदार बनाया जा रहा है, जिससे वास्तविक शिकायतों का शीघ्र समाधान सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने कहा कि जहां एक ओर गुणवत्ता में कमी पर सख्त कार्रवाई की जा रही है, वहीं दूसरी ओर उत्कृष्ट कार्य करने वाले ठेकेदारों और अभियंताओं को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित भी किया जा रहा है, जिससे विभाग में गुणवत्तापूर्ण कार्य हेतु सकारात्मक प्रतिस्पर्धा का वातावरण तैयार हो रहा है। मंत्री सिंह ने कहा कि पर्यावरण-संरक्षण की दिशा में विभाग द्वारा ‘लोक कल्याण सरोवर’ और रिचार्ज बोर जैसी योजनाएं प्रारंभ की गई हैं। सड़क निर्माण से निकलने वाली मिट्टी से 500 स्थायी जल स्रोतों का निर्माण अंतिम चरण में है, जिन्हें जियो टैग और सूचना पटल के माध्यम से चिन्हित किया जाएगा। इनकी निगरानी भी रैंडम निरीक्षण प्रणाली से की जाएगी। मंत्री सिंह ने कहा, “लोक निर्माण विभाग केवल सड़क और भवन नहीं बनाता, … Read more

गुरु पूर्णिमा महोत्सव की शोभा बढ़ाएंगे मुख्यमंत्री डॉ. यादव, 10 जुलाई को भोपाल में रहेंगे मौजूद

मुख्यमंत्री डॉ. यादव 10 जुलाई को भोपाल में गुरु पूर्णिमा महोत्सव में होंगे शामिल डॉ. यादव आज 10 जुलाई को भोपाल में मनाएंगे गुरु पूर्णिमा, महोत्सव में लेंगे भाग गुरु पूर्णिमा महोत्सव की शोभा बढ़ाएंगे मुख्यमंत्री डॉ. यादव, 10 जुलाई को भोपाल में रहेंगे मौजूद कमला नेहरू सांदीपनि कन्या विद्यालय में होगा कार्यक्रम भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 10 जुलाई को भोपाल में गुरु पूर्णिमा महोत्सव में शामिल होंगे। यह कार्यक्रम तात्या टोपे नगर के कमला नेहरू सांदीपनि कन्या विद्यालय में दोपहर 12:30 बजे से होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव इस मौके पर कमला नेहरू सांदीपनि कन्या विद्यालय के नवीन भवन का लोकार्पण करेंगे और विद्यार्थियों को नि:शुल्क साइकिल वितरण का शुभारंभ करेंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह करेंगे। इस मौके पर खेल एवं युवा कल्याण, सहकारिता मंत्री विश्वास कैलाश सारंग, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चेतन्य कुमार काश्यप, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री श्रीमती कृष्णा गौर, सांसद आलोक शर्मा, महापौर श्रीमती मालती राय, विधायक सर्वरामेश्वर शर्मा, विष्णु खत्री और भगवान दास सबनानी उपस्थित रहेंगे। नि:शुल्क साइकिल वितरण प्रदेश में इस वर्ष 2025-26 में नि:शुल्क साइकिल वितरण योजना में करीब 4 लाख 30 हजार पात्र विद्यार्थियों को नि:शुल्क साइकिल वितरित की जायेंगी। इस योजना में 195 करोड़ रुपये की राशि व्यय होगी। सांदीपनि विद्यालय के नव-निर्मित भवन का लोकार्पण मुख्यमंत्री डॉ. यादव शासकीय कमला नेहरू सांदीपनि विद्यालय के सर्व-सुविधायुक्त भवन का लोकार्पण करेंगे। यह भवन 36 करोड़ रुपये की लागत से बनकर तैयार हुआ है। भवन में सर्व-सुविधायुक्त प्रयोगशालाएँ, लायब्रेरी तथा ऑडिटोरियम निर्मित हैं। इसके अलावा उत्कृष्ट शिक्षा के लिये स्माल डिजिटल कक्षाएँ, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिये नि:शुल्क कोचिंग, कॅरियर काउंसिलिंग और इण्डोर-आउटडोर खेल की सुविधाएँ उपलब्ध हैं। विद्यालय के आसपास के 10 किलोमीटर दूरी से आने वाले बच्चों के लिये नि:शुल्क परिवहन की सुविधा भी उपलब्ध करायी गयी है। प्रदेश में दो दिवसीय गुरु पूर्णिमा उत्सव स्कूल शिक्षा विभाग प्रदेश के समस्त विद्यालयों में गुरु पूर्णिमा के अवसर पर दो दिवसीय कार्यक्रम आयोजित कर रहा है। कार्यक्रम के दौरान छात्रों को प्रार्थना सभा के दौरान गुरु पूर्णिमा के महत्व एवं पारम्परिक गुरु-शिष्य संस्कृति पर जानकारी दी जा रही है। विद्यार्थियों को प्राचीन काल में प्रचलित गुरुकुल व्यवस्था एवं उसका भारतीय संस्कृति में प्रभाव विषय पर निबंध लेखन प्रतियोगिता भी आयोजित की गयी हैं। गुरु पूर्णिमा के दूसरे दिन माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों द्वारा गुरुओं के महत्व पर व्याख्यान और गुरुजनों एवं शिक्षकों के सम्मान के कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं।  

दिल्ली-NCR में तेज भूकंप के झटके, मेट्रो पर भी लग गया था ब्रेक, घरों से बाहर निकले लोग

झज्जर/नई दिल्ली दिल्ली-एनसीआर में गुरुवार सुबह बारिश के बीच भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए. भूकंप के झटके करीब 10 सेकंड तक महसूस किए गए. भूकंप के झटके सुबह 9.04 बजे महसूस किए गए. ये झटके दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम, फरीदाबाद, रोहतक, हिसार और सोनीपत में भी महसूस किए गए. भूकंप का केंद्र हरियाणा का झज्जर बताया जा रहा है. रिक्टर पैमाने पर इसकी तीव्रता 4.4 रही. भूकंप के झटकों से डरकर लोग घरों और दफ्तरों से निकलकर बाहर भागे. दिल्ली पुलिस ने बताया कि आज सुबह दिल्ली-एनसीआर में आए भूकंप में अभी तक किसी प्रकार के नुकसान की सूचना नहीं है. हम सभी दिल्लीवासियों की कुशलता की कामना करते हैं. दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया पोस्ट कर सभी के सुरक्षित होने की उम्मीद की. उन्होंने कहा कि उम्मीद है कि भूकंप के बाद सभी सुरक्षित होंगे. सभी के लिए प्रार्थना कर रहा हूं. बता दें कि धरती के अंदर सात टेक्टोनिक प्लेट्स हैं. ये प्लेट्स लगातार घूमती रहती हैं. जब ये प्लेट आपस में टकराती हैं, रगड़ती हैं. एक-दूसरे के ऊपर चढ़ती या उनसे दूर जाती हैं, तब जमीन हिलने लगती है. इसे ही भूकंप कहते हैं. भूकंप को नापने के लिए रिक्टर पैमाने का इस्तेमाल करते हैं. जिसे रिक्टर मैग्नीट्यूड स्केल कहते हैं. रिक्टर मैग्नीट्यूड स्केल 1 से 9 तक होती है. भूकंप की तीव्रता को उसके केंद्र यानी एपिसेंटर से नापा जाता है. यानी उस केंद्र से निकलने वाली ऊर्जा को इसी स्केल पर मापा जाता है. 1 यानी कम तीव्रता की ऊर्जा निकल रही है. 9 यानी सबसे ज्यादा. बेहद भयावह और तबाही वाली लहर. ये दूर जाते-जाते कमजोर होती जाती हैं. अगर रिक्टर पैमाने पर तीव्रता 7 दिखती है तो उसके आसपास के 40 किलोमीटर के दायरे में तेज झटका होता है. झज्जर था भूकंप का केंद्र, 4.4 दर्ज की गई तीव्रता दिल्ली-NCR में सुबह-सुबह तेज भूकंप के झटके महसूस हुए हैं, जिसके बाद लोग अपने घरों और ऑफिस से बाहर निकल आए. बताया जा रहा है कि भूकंप के झटके दिल्ली, यूपी और हरियाणा के कई इलाकों में महसूस हुए हैं. बताया जा रहा है कि हरियाणा का झज्जर इस भूकंप का एपिक सेंटर था. वहीं, रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 4.4 मापी गई है.  नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी (NCS) के अनुसार, भूकंप के झटके सुबह 9:04 पर महसूस किए गए. ये झटके दिल्ली-एनसीआर, गाजियाबाद, नोएडा, जयपुर समेत हरियाणा के कई इलाकों में महसूस किए गए. भूकंप का केंद्र झज्जर में था और लगभग 10 सेकंड के भूकंप से धरती हिलती रही. 4.4 रही तीव्रता रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 4.4 रही. भूकंप के झटकों से डरकर लोग घरों और दफ्तरों से निकलकर बाहर भागे. ये भूकंप के झटके हरियाणा के फरीदाबाद, जींद और गुरुग्राम समेत कई शहरों में महसूस हुए.  सिस्मिक जोन 4 में आता है दिल्ली-NCR दिल्ली-NCR सिस्मिक जोन 4 में आता है जो भूकंप की दृष्टि से अत्यधिक संवेदनशील है. हाल के सालों में इस क्षेत्र में कई बार 4.0 से अधिक तीव्रता के भूकंप दर्ज किए गए हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में टेक्टोनिक प्लेट्स की हलचल, विशेष रूप से इंडो-ऑस्ट्रेलियन और यूरेशियन प्लेट्स के टकराव के कारण भूकंप आते हैं. NDRF ने जारी किए दिशा-निर्देश वहीं, भूकंप के बाद राष्ट्रीय आपदा राहत बल (NDRF) ने भूकंप के दौरान अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उपयोगी दिशा-निर्देश जारी किए हैं. इन दिशा-निर्देशों को तीन चरणों में बांटा गया है, जिसमें भूकंप से पहले, भूकंप के दौरान और भूकंप के बाद क्या-क्या करना चाहिए. मेट्रो ट्रेन में क्यों लग गया था ब्रेक रिक्टर स्केल पर 4.4 की तीव्रता वाले इस भूकंप का असर इतना था कि दिल्ली-एनसीआर में मेट्रो की रफ्तार पर भी ब्रेक लग गया। एहतियात के तौर पर मेट्रो ट्रेनों को कुछ मिनटों के लिए रोक दिया गया। भूकंप की वजह से ऊंची इमारतों में रहने वाले लोग काफी दहशत में आ गए। हरियाणा में झज्जर के के पास सुबह 9 बजकर 4 मिनट पर 4.4 तीव्रता का भूकंप आया। इसके झटके दिल्ली-एनसीआर में भी महसूस किए गए। न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक पहले से निर्धारित एसओपी के तहत भूकंप की वजह से दिल्ली मेट्रो के पहिये भी थम गए। मेट्रो ट्रेनों को 2-3 मिनट के लिए रोक दिया गया। हालांकि कुछ मिनटों बाद ही स्थिति पूरी तरह सामान्य हो गई। अरशद नाम के एक यात्री ने कहा कि मेट्रो ट्रेन में होने की वजह से उन्हें भूकंप का अहसास नहीं हुआ। लेकिन मेट्रो को कुछ मिनटों के लिए रोक दिया गया था। 9 बजकर 4-5 मिनट पर ट्रेन को रोक दिया गया था। यात्रियों को बाद में पता चला कि भूकंप आने की वजह से ट्रेनों को रोका गया था। दिल्ली-एनसीआर की ऊंची इमारतों में लोगों ने भूकंप के झटके को अधिक महसूस किया। गुरुग्राम की अधिकतर ऊंची इमारतों से लोग बाहर निकल आए। कई लोग दफ्तरों में पहुंच चुके थे तो कई पहुंचने ही वाले थे। रात में तेज बारिश और सुबह आए भूकंप ने लोगों को डरा दिया। गुरुग्राम के अलावा फरीदाबाद, पूरी दिल्ली, गाजियाबाद, नोएडा आदि में भी भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। गनीमत है कि कहीं से किसी तरह के नुकसान की सूचना नहीं है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री मोदी को नामीबिया का सर्वोच्च नागरिक सम्मान मिलने पर दी बधाई

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को नामीबिया के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'द ऑर्डर ऑफ द मोस्ट एन्सेंट बिल्विट्सचिआ मिराबिल्स"(The Order of the Most Ancient Welwitschia Mirabilis') मिलने पर हार्दिक बधाई दी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह प्रतिष्ठित सम्मान भारत-नामीबिया के मध्य सशक्त होते संबंधों की अद्वितीय अभिव्यक्ति है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री मोदी का अभिनंदन करते हुए कहा कि समस्त राष्ट्रवासियों को भारत की इस उपलब्धि पर अत्यंत गर्व हो रहा है।  

स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम, बच्चों की जांच के लिए शुरू हुआ विशेष अभियान

इंदौर  स्वास्थ्य विभाग इंदौर में हाल ही में जन्मे नवजातों से लेकर पिछले 5 साल में पैदा हुए बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण हेतु दस्तक अभियान प्रारंभ करने जा रहा है। यह अभियान 22 जुलाई से शुरू होकर 16 सितंबर तक जिलेभर में चलेगा। टीकाकरण अधिकारी के अनुसार, इंदौर जिले में ऐसे बच्चों की संख्या 4 लाख से अधिक है, जिनका इस अभियान के तहत स्वास्थ्य परीक्षण किया जाएगा। मंगलवार और शुक्रवार को विशेष जांच व्यवस्था जिला टीकाकरण अधिकारी तरुण गुप्ता ने जानकारी दी कि यह अभियान न सिर्फ इंदौर बल्कि पूरे मध्यप्रदेश में संचालित किया जाएगा। सप्ताह में दो दिन मंगलवार और शुक्रवार को नवजात एवं 5 वर्ष तक के कुपोषित बच्चों की विशेष रूप से हिमोग्लोबिन सहित कई तरह की बाल रोगों से संबंधित जांच की जाएगी। साथ ही बच्चों की माताओं को डायरिया और अन्य बीमारियों के लक्षणों की पहचान और बचाव के उपायों की जानकारी दी जाएगी। घर-घर जाकर होगी जांच टीकाकरण अधिकारी के अनुसार, जो बच्चे किसी कारणवश टीकाकरण केंद्र या आंगनवाड़ी तक नहीं पहुंच पाते, उनके लिए स्वास्थ्य कार्यकर्ता घर-घर जाकर जांच करती हैं। यह व्यवस्था सुनिश्चित करती है कि कोई भी बच्चा जांच और उपचार से वंचित न रह जाए। अभियान के अंतर्गत 5 साल तक की उम्र के सभी बच्चों को शामिल किया जाएगा। बाल मृत्यु दर कम करने की दिशा में प्रयास यह दस्तक अभियान स्वास्थ्य विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त प्रयासों से संचालित किया जा रहा है। इसमें एएनएम, आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता भी सक्रिय रूप से भाग लेती हैं। अभियान का मुख्य उद्देश्य बच्चों में बीमारियों की समय पर पहचान कर उनका इलाज करना और बाल मृत्यु दर को प्रभावी रूप से कम करना है। 

सड़क सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम, जिलों में चलाया जाएगा जीरो फेटेलिटी प्रोग्राम

सड़क हादसों पर लगेगा ब्रेक, जिलों में शुरू होगा जीरो फेटेलिटी डिस्ट्रिक्ट प्रोग्राम दुर्घटना मुक्त जिले बनाने की पहल, शुरू होगा जीरो फेटेलिटी डिस्ट्रिक्ट अभियान सड़क सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम, जिलों में चलाया जाएगा जीरो फेटेलिटी प्रोग्राम परिवहन विभाग ने सभी कमिश्नर्स एवं जिला कलेक्टर्स को जारी किये निर्देश भोपाल केन्द्र सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने देश के 100 ऐसे जिले जहां अधिक संख्या में घातक सड़क दुर्घटनाएं हो रही हैं, उन्हें "सेफ लाईफ फाउण्डेशन" के सर्वे के माध्यम से चिन्हित किया है। देश के चिन्हित इन 100 जिलों में मध्यप्रदेश के 6 जिले चिन्हित किये गये हैं। ये जिले धार, सागर, सतना, रीवा, जबलपुर एवं खरगोन हैं। धार जिले में वर्ष 2023 के आकलन अनुसार सबसे अधिक घातक सड़क दुर्घटनाएं हुई है। इन सड़क दुर्घटनाओं की गंभीरता को देखते हुए केन्द्र सरकार द्वारा "जीरो फेटेलिटी डिस्ट्रिक्ट प्रोग्राम" के तहत सभी जिला प्रशासन से अनुरोध किया है कि इन सड़क दुर्घटनाओं के कारणों को चिन्हित करते हुए योजना तैयार की जाये। इसके बाद आवश्यक कार्य किए जाएं जिससे इन सड़क दुर्घटनाओं पर रोक लग सके। आईआईटी मद्रास के "Center of Exellence for Road Safety" द्वारा ऐसी रणनीति पर कार्य किया गया है, जिसके तहत प्रत्येक स्थल एवं सड़क कॉरिडोर जहाँ दुर्घटनाएं अधिक संख्या में हो रही हैं, वहां कम लागत वाले अति स्थानीय कार्यों को चिन्हित किया गया है। उन कार्यों के लिये जिला प्रशासन को सहयोग दिया जाएगा। इस संबंध में राज्य शासन के परिवहन विभाग की ओर से सभी कमिश्नर एवं जिला कलेक्टर्स को विस्तृत निर्देश जारी किये गये हैं। मुख्य सचिव द्वारा भी इस कार्य की लगातार समीक्षा की जा रही है। कार्य योजना के तहत सभी जिला कलेक्टर्स को निर्देशित किया गया है कि वे जिले में एडीएम अथवा एसडीएम स्तर के अधिकारी को नोडल अधिकारी नियुक्त करें तथा यह नोडल अधिकारी जिले की सड़क एजेन्सियों के अधिकारियों के साथ बैठक करके संभावित दुर्घटना स्थलों और सड़क कॉरिडोर की जानकारी संकलित करें। ऐसे स्थल अथवा सड़क कॉरिडोर जहां लगातार दुर्घटनाएं हो रही हैं उन्हें एनआईसी e-DAR पोर्टल से चिन्हित किया जा सकेगा। कुछ ऐसे स्थल, जहां संभावित घातक दुर्घटना हो सकती हैं तथा वर्तमान में छुटपुट दुर्घटनाएं निरंतर हो रही हैं, ऐसे स्थलों की जानकारी जैसे स्थानीय पुलिस, स्थानीय निकायों, आमजन आदि से एकत्रित करने के निर्देश कलेक्टर्स को दिये गये हैं। जिले के ऐसे चिन्हित सड़क दुर्घटनाओं के स्थल एवं सड़क कॉरिडोर का निरीक्षण सभी संबंधित सड़क एजेंसी के जिला अधिकारियों द्वारा व्यक्तिगत रूप से किया जायेगा तथा दुर्घटना के तकनीकी और इंजीनियरिंग कारणों को आंकलित कर लेखबध्द किया जाएगा। मौका निरीक्षण के बाद तकनीकी कारण जिनकी वजह से दुर्घटनाएं हो रही हैं उनकी जानकारी लेने के बाद निराकरण के लिये अतिस्थानीय एवं कम लागत के उपाय भी संबंधित सड़क एजेन्सी के इंजीनियर करेंगे। जिला कलेक्टर, नोडल अधिकारी एवं सड़क एजेन्सी के इंजीनियर के माध्यम से जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में इनकी प्रस्तुतीकरण की जायेगी। इन कम लागत से होने वाले व्यय के लिये लोक निर्माण विभाग को निर्देशित किया गया है कि प्रत्येक जिले में समुचित बजट प्रावधान सुनिश्चित किया जाये। इस पर होने वाले व्यय के लिये राशि जिला खनिज प्रतिष्ठान निधि, सांसद एवं विधायक निधि से प्राप्त करने के प्रयास किये जायेंगे।

16 जिलों में मां नर्मदा परिक्रमा पथ के 233 स्थानों की 1000 एकड़ भूमि पर होगा पौधरोपण

मुख्यमंत्री डॉ. यादव की पर्यावरण और जल संरक्षण अवधारणा पर अमल हरियाली की चादर ओढ़ेंगे मां नर्मदा परिक्रमा पथ के आश्रय स्थल 16 जिलों में मां नर्मदा परिक्रमा पथ के 233 स्थानों की 1000 एकड़ भूमि पर होगा पौधरोपण 43 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से लगभग 7.50 लाख पौधे लगाए जाएंगे भोपाल  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जल, प्रकृति, पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन के लिए पूरे देश में चलाए जा रहे एक पेड़ मां के नाम 2.0 अभियान को प्रदेश सरकार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मिशन के रूप में चला रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार प्रकृति, पर्यावरण और जल संरक्षण एवं संवर्धन के लिए प्रदेश के 16 जिलों में मां नर्मदा परिक्रमा पथ के आश्रय स्‍थलों की भूमि पर पौधरोपण करेगी और मनरेगा परिषद ने तैयारी भी शुरू कर दी है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने पौधरोपण के संबंध में निर्देश भी जारी किए हैं। 233 स्‍थानों की लगभग 1000 एकड़ भूमि पर किया जाएगा पौधरोपण मां नर्मदा परिक्रमा पथ पर स्थित आश्रय स्‍थलों के लगभग 233 स्‍थानों की लगभग 1000 एकड़ भूमि पर 43 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से लगभग 7.50 लाख पौधों का रोपण किया जाएगा। पौधरोपण का कार्य 15 जुलाई से शुरू होगा जो 15 अगस्त तक चलेगा। इन क्षेत्रों में पौध-रोपण के लिए बकायदा अभियान चलाया जाएगा। 16 जिलों में मां नर्मदा आश्रय स्थलों पर होगा पौधरोपण मां नर्मदा आश्रय स्थलों पर जिन जिलों में पौधरोपण किया जाएगा, उन 16 जिलों में अनूपपुर, डिंडोरी, मण्‍डला, जबलपुर, नरसिंहपुर, सिवनी, बड़वानी, अलीराजपुर, धार, नर्मदापुरम, रायसेन, सीहोर, हरदा, देवास, खंडवा एवं खरगोन शामिल हैं। ड्रोन-सैटेलाइट इमेज से की जाएगी निगरानी मां नर्मदा परिक्रमा पथ के आश्रय स्थलों की भूमि पर पौधरोपण का कार्य सही ढ़ग से हो रहा है या नहीं पौधे कहां पर लगे हैं या नहीं। मनरेगा परिषद द्वारा संपूर्ण पौध-रोपण कार्य की ड्रोन-सैटेलाइट इमेज से बकायदा निगरानी भी की जाएगी। आश्रय स्थलों पर भूमि की उपलब्धता के अनुसार दो श्रेणियों में पौधरोपण का कार्य किया जाएगा। प्रदेश में 136 ऐसे स्थान हैं जहां पर 2 एकड़ से अधिक भूमि है। यहां पर 2.15 लाख पौधे लगाए जाएंगे। इसी तरह 97 ऐसे स्थान हैं जहां पर 1 एकड़ से अधिक और 2 एकड़ से कम भूमि है वहां पर 5.50 लाख पौधों का रोपण किया जाएगा। पौधरोपण की खासियत पौधरोपण के आश्रय स्थलों का चयन सिपरी सॉफ्टवेयर से किया जाएगा। साथ ही यदि सिपरी सॉफ्टवेयर पौधरोपण के लिए जगह को उपयुक्‍त नहीं बताता है तो उस स्थान पर पौधरोपण नहीं किया जाएगा। सॉफ्टवेयर से यह भी देखा जाएगा कि जिस जगह पर पौधरोपण किया जा रहा है उस जगह पर पानी का स्‍थायी स्रोत हो।     ऐसे स्‍थल जहां पर 2 एकड़ या अधिक भूमि उपलब्‍ध है, वहां पर सामान्य पद्धति से पौधरोपण का कार्य किया जाएगा।     2 एकड़ से कम एवं 1 एकड से अधिक भूमि उपलब्‍ध है वहां मियावाकी पद्धति से पौधरोपण किया जाएगा।     जहां पौधरोपण किया जाना है, वहां पौधों की सुरक्षा के लिए तार फेंसिंग की जाएगी।     14 जुलाई तक पूरा कर लिया जाएगा गड्ढे की खुदाई और तार की फेंसिंग का कार्य मां नर्मदा परिक्रमा पथ के आश्रय स्‍थलों की भूमि पर पौधरोपण का कार्य शुरू होने से पहले गड्‌ढे की खुदाई, तार की फेंसिंग, सिपरी सॉफ्टवेयर द्वारा प्रस्तावित भूमि का स्थल निरीक्षण, भौतिक सत्यापन, तकनीकी व प्रशासकीय स्वीकृति जैसे कार्य पूरे कर लिए जाएंगे। 15 जुलाई से पौधरोपण का कार्य शुरू होगा।  

एबी रोड को मिलेगा नया लुक, इंदौर में 90 करोड़ की लागत से होगा सौंदर्यीकरण

 इंदौर  इंदौर शहर से गुजरने वाला एबी रोड जल्द ही 60 मीटर चौड़ा होगा। नगर निगम ने इसकी डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर ली है। चौड़ीकरण पर 90 करोड़ रुपये खर्च आने का अनुमान है। सब कुछ योजनानुसार हुआ तो एक वर्ष में इंदौरियों को एबी रोड नए स्वरूप में नजर आने लगेगा। चौड़ीकरण में साइकिल ट्रेक और सर्विस लेन को शामिल किया जाएगा। बिजली के खंभों और स्टार्म वाटर लाइन को एक लाइन में लाया जाएगा। नगर निगम जल्द ही इस काम के लिए निविदाएं आमंत्रित करेगा। यातायात के बढ़ते दबाव के चलते एबी रोड चौड़ीकरण की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही है। पिछले दिनों कलेक्टर की अध्यक्षता में हुई सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में एबी रोड को 60 मीटर चौड़ा करने पर सहमति बनी थी। इसके बाद नगर निगम ने इस संबंध में सर्वे करवाने के बाद डीपीआर तैयार कर ली है। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि अनुमान है कि एबी रोड चौड़ीकरण पर 90 करोड़ रुपये खर्च होंगे। एबी रोड चौड़ीकरण की डीटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट के अनुसार सर्विस लेन और साइकिल ट्रेक को एबी रोड में शामिल करने की बात कही है। चौड़ीकरण के तहत बिजली के पोल, स्टार्म वाटर लाइन को एक लाइन में लाया जाएगा। स्मार्ट सिटी मद से होगा खर्च निगमायुक्त शिवम वर्मा के मुताबिक एबी रोड चौड़ीकरण पर आने वाला 90 करोड़ रुपये का खर्चा स्मार्ट सिटी मद से किया जाएगा। एबी रोड चौड़ीकरण के बाद यातायात में सुगमता होगी। जाम से मुक्ति मिलेगी। बीआरटीएस हटाने के बाद शुरू होगा काम कोर्ट के आदेश के बाद नगर निगम को बीआरटीएस भी हटाना है। इसके अलावा एबी रोड पर डिवाइडर बनाने और एबी रोड के चौड़ीकरण का काम भी होना है। इस काम को पूरा करने के लिए नगर निगम ने एक वर्ष का लक्ष्य निर्धारित किया है। जनकार्य समिति प्रभारी राजेंद्र राठौर ने बताया कि बीआरटीएस तोड़ने वाली एजेंसी 14 जुलाई को तय हो जाएगी। अन्य मार्गों के मुकाबले आसान होगा एबी रोड का चौड़ीकरण शहर के अन्य मार्गों के मुकाबले नगर निगम के लिए एबी रोड का चौड़ीकरण आसान होगा, ऐसा इसलिए क्योंकि इस चौड़ीकरण के लिए नगर निगम को बीआरटीएस के अतिरिक्त दोनों ओर करीब 15-15 मीटर का हिस्सा लेना है। एलआईजी से नौलखा के बीच पुलिस अधिकारियों के बंगले, एमजीएम मेडिकल कॉलेज, डेंटल कॉलेज, पीसी सेठी अस्पताल सहित ज्यादातर शासकीय इमारतें हैं। जो निजी भवन इस चौड़ीकरण की जद में आएंगे, वे भी पीछे हटकर बने हैं। ऐसी स्थिति में अधिकारियों का अनुमान है कि चौड़ीकरण के लिए बाधाएं हटाने में ज्यादा परेशानी नहीं आएगी।