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‘हक मांगने पर गोलियां चलवाईं, अब हितैषी बनने का ढोंग’- सपा पर संजय निषाद का वार

सपा पर हमलावर हुए संजय निषाद, बोले- कांग्रेस की बैसाखी भी नहीं जुटा पा रही पार्टी, निषाद समाज भूला नहीं कसरवल कांड 'हक मांगने पर गोलियां चलवाईं, अब हितैषी बनने का ढोंग'- सपा पर संजय निषाद का वार 'सपा के अपने लोग टूटने की कगार पर', संजय निषाद का बड़ा राजनीतिक दावा लखनऊ उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री और निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय निषाद ने समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोला है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किए गए एक पोस्ट में उन्होंने सपा नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग दूसरों पर टिप्पणी कर रहे हैं, उन्हें पहले अपने गिरेबान में झांकना चाहिए। संजय निषाद ने कहा कि जिनके घर शीशे के बने होते हैं वे दूसरों के घरों पर पत्थर नहीं फेंकते। उन्होंने सपा नेताओं को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि निषाद पार्टी के भविष्य पर अनर्गल टिप्पणी और अफवाह फैलाने के बजाय सपा को अपनी स्थिति पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि निषाद पार्टी को मिलने वाली सीटों की चिंता करने के बजाय सपा पहले कांग्रेस के साथ अपने सीट बंटवारे का फैसला कर ले। कांग्रेस की बैसाखी का जुगाड़ नहीं कर पाई सपा कैबिनेट मंत्री ने दावा किया कि समाजवादी पार्टी के अपने लोग टूटने की कगार पर हैं। उन्होंने कहा कि निषाद पार्टी को सपा की किसी बैसाखी की जरूरत नहीं है, जबकि सपा अब तक कांग्रेस की बैसाखी का भी जुगाड़ नहीं कर पाई है। उन्होंने कहा कि एनडीए में निषाद पार्टी का गठबंधन बराबरी और हिस्सेदारी का गठबंधन है। कसरवल कांड पर सपा को घेरा संजय निषाद ने कसरवल कांड का जिक्र करते हुए सपा पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि कसरवल कांड में निषाद समाज के निर्दोष लोगों पर गोलियां चलवाई गई थीं। उन्होंने कहा कि निषाद समाज अपने शहीदों का बलिदान और उन पर हुए अत्याचार को कभी नहीं भूला है। उन्होंने आरोप लगाया कि हक मांगने पर गोलियां चलवाने वाले लोग आज समाज के हितैषी बनने का ढोंग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मछुआरा समाज के खून में राजनीति और स्वाभिमान है। यह समाज केवल बराबरी की भागीदारी में विश्वास रखता है। संजय निषाद ने कहा कि मुगलों और अंग्रेजों से लोहा लेने वाले इस वीर समाज ने कभी किसी के लिए केवल दरी बिछाने की राजनीति नहीं की। राजनीतिक भविष्य के सवालों का दिया जवाब संजय निषाद ने अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर उठ रहे सवालों पर भी जवाब दिया। उन्होंने कहा कि निषाद पार्टी या उनके राजनीतिक भविष्य की चिंता करने के बजाय समाजवादी पार्टी को अपना वजूद बचाने पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि मुद्दा यह नहीं है कि संजय निषाद कहां जाएंगे, बल्कि यह है कि खुद शिवपाल यादव और रामगोपाल यादव कहां जाएंगे। उन्होंने दावा किया कि समाजवादी पार्टी लगातार सिकुड़ रही है, जबकि निषाद पार्टी का जनाधार लगातार बढ़ रहा है। अपने पोस्ट के अंत में उन्होंने “जय निषाद राज” का नारा भी दिया।

बीते 15 सालों से शहडोल की बास्केटबॉल टीम ने बेहतरीन प्रदर्शन किया है : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

शहडोल है खेल की दुनिया उभरता सितारा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव बीते 15 सालों से शहडोल की बास्केटबॉल टीम ने बेहतरीन प्रदर्शन किया है  : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 70वीं शालेय राज्यस्तरीय बास्केटबॉल प्रतियोगिता के शुभारंभ को वीसी से संबोधित कर खिलाड़ियों की दीं शुभकामनाएं शहडोल में हो रही है बास्केटबॉल प्रतियोगिता, 10 टीमों के 240 खिलाड़ी ले रहे हैं हिस्सा भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि हमारे प्रदेश के जनजातीय अंचल यह साबित कर रहे हैं कि प्रतिभा शहरों की ही मोहताज नहीं होती। शहडोल, जिसकी पहचान मिनी ब्राजील के रूप में है, आज उसी शहडोल में बास्टकेटबॉल का कुंभ सजा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शहडोल खेल की दुनिया का उभरता हुआ सितारा है। यहां का विचारपुर गांव आज फुटबॉल की नर्सरी और 'मिनी ब्राजील' के रूप में देश-दुनिया में अपनी पहचान बना चुका है। फुटबॉल, क्रिकेट, एथलेटिक्स, कबड्डी और वॉलीबॉल के साथ बास्केटबॉल भी जिले के युवाओं के बीच लोकप्रिय हो रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि विचारपुर जैसे आदिवासी अंचल से खिलाड़ियों का प्रशिक्षण लेकर राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचना यह साबित करता है कि प्रतिभा गांवों और छोटे क्षेत्र में भी मौजूद है। शहडोल ने खेलो एमपी और यूथ गेम्स जैसी राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में अपनी मजबूत भागीदारी दर्ज कराई है। शहडोल ने प्रदेश को अनेक प्रतिभाशाली खिलाड़ी दिए हैं, जिन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई और भावी खिलाड़ियों को प्रेरणा देने का काम किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन से शहडोल जिले में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा कराई जा रही 70वीं शालेय राज्यस्तरीय बास्केटबॉल प्रतियोगिता के शुभारंभ समारोह को वीसी से संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शहडोल संभाग का बास्केटबॉल से पुराना और गौरवशाली रिश्ता रहा है, यहां के अनेक खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर प्रदेश का नाम रौशन किया है। खिलाड़ियों के पास संसाधन भले सीमित थे, लेकिन उनका बास्केटबॉल के प्रति उत्साह कम नहीं था। इसी जुनून का परिणाम है कि आज शहडोल में तीन बास्केटबॉल कोर्ट उपलब्ध हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले 15 वर्षों में शहडोल की बास्केटबॉल टीम ने राज्य स्तर पर बेहतरीन प्रदर्शन किया है। राष्ट्रीय स्कूली बास्केटबॉल प्रतियोगिताओं में भी शहडोल के खिलाड़ियों ने पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि शालेय खेल प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों में बाल्यकाल से ही स्वस्थ प्रतिस्पर्धा, अनुशासन और टीम भावना विकसित करने का एक सशक्त माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि खेल शारीरिक क्षमता का प्रदर्शन मात्र न होकर बच्चों के व्यक्तित्व, आत्मविश्वास और निर्णय क्षमता को निखारने का महत्वपूर्ण साधन भी हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जब कोई युवा खिलाड़ी मैदान में पसीना बहाता है, तो वह आगे चलकर सिर्फ़ अपना नहीं, पूरे देश-प्रदेश-जिले का नाम रौशन करता है। मुख्यमंत्री ने प्रदेश के सभी संभागों से प्रतियोगिता में भाग लेने पहुंचे शालेय बास्केटबॉल खिलाड़ियों को शुभकामनाएं दीं। उल्लेखनीय है कि इस प्रतियोगिता में प्रदेश के 10 संभागों के 17 वर्ष तक की आयु के कुल 240 खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्ष 2023-24 में उत्कृष्ट प्रदर्शन के बाद वर्ष 2024-25 में शहडोल को राष्ट्रीय स्तर की बास्केटबॉल प्रतियोगिता की मेजबानी मिली थी। यह पूरे जिले के लिए अत्यंत गौरव की बात है। मुख्यमंत्री ने युवा खिलाड़ियों से कहा कि मैदान में उतरना ही जीत की पहली सीढ़ी है। इसलिए हारने-जीतने की भावना से कम खेलने और सीखने की भावना से ज्यादा खेले। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पिछले वर्षों में देश में खेलों को लेकर एक नया उत्साह आया है। आज भारत खेलों में जीतने के लिए मैदान में उतरने वाला देश बन चुका है। ओलंपिक, एशियन गेम्स और विश्व चैंपियनशिप जैसे बड़े मंचों पर हमारे खिलाड़ी लगातार देश का गौरव बढ़ा रहे हैं। खेलो इंडिया और फिट इंडिया अभियानों से गांव और छोटे शहरों की प्रतिभाएं भी आगे आ रही हैं। उन्होंने कहा कि भारत 2030 में कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी करेगा और 2036 ओलंपिक की मेजबानी की दिशा में भी प्रयासरत है। मध्यप्रदेश के खिलाड़ी भी भारत का प्रतिनिधित्व करें। उन्होंने कहा कि प्रदेश में पहली बार 'खेलो एम.पी. यूथ गेम्स' का सफल आयोजन हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आने वाले वर्ष 2027 को मध्यप्रदेश में 'युवा वर्ष' के रूप में मनाया जाएगा, जिसमें शिक्षा, कौशल, रोजगार, स्टार्टअप, खेल और नेतृत्व विकास पर विशेष ध्यान रहेगा। उन्होंने सभी खिलाड़ियों से आहवान किया कि मिल-जुलकर खेलिए और एक-दूसरे का हौसला बढ़ाइए। स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह ने भी वीसी के जरिए खिलाड़ियों को संबोधित कर शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्रीमती संपत्तिया उइके, अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय नीरज मंडलोई, सचिव स्कूल शिक्षा डॉ. संजय गोयल एवं अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित थे। शहडोल में हो रही स्पर्धा के मुख्य कार्यक्रम स्थल में विधायक जैतपुर जयसिंह मरावी, जिला पंचायत अध्यक्ष सुप्रभा मिश्रा, जनपद अध्यक्ष सोहागपुर सुहीरावती कोल, नगर पालिका अध्यक्ष घनश्याम जायसवाल, सुअमिता छपरा सहित अन्य जनप्रतिनिधि स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारी तथा बड़ी संख्या में खिलाड़ी एवं खेलप्रेमी उपस्थित थे।  

‘डॉक्टर बनना मंजिल नहीं, समाज की सेवा करना असली लक्ष्य’: डिप्टी सीएम विजय शर्मा

डॉक्टर बनना मंजिल नहीं, समाज की सेवा करना असली लक्ष्य – उप मुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक विजय शर्मा मेडिकल कॉलेज कवर्धा में नए शैक्षणिक सत्र का हुआ शुभारंभ उप मुख्यमंत्री और सांसद ने विद्यार्थियों का किया स्वागत, विद्यार्थियों से जानी तैयारी और सफलता की कहानी पहले दिन गले में स्टेथोस्कोप, कंधे पर एप्रॉन… आंखों में डॉक्टर बनने का सपना, प्रथम बैच की शुरू हुई पढ़ाई रायपुर,    उप मुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक विजय शर्मा ने विद्यार्थियों को नए शैक्षणिक जीवन की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आपने बड़ा लक्ष्य रखा और डॉक्टर बनने का सपना देखा, लेकिन डॉक्टर बनना ही अंतिम लक्ष्य नहीं होना चाहिए। लक्ष्य केवल एक पड़ाव नहीं, बल्कि निरंतर आगे बढ़ने की यात्रा है। हमारा उद्देश्य केवल डॉक्टर बनना नहीं, बल्कि डॉक्टर बनकर समाज के लिए अच्छा कार्य करना होना चाहिए।          कबीरधाम जिले की चिकित्सा शिक्षा के इतिहास में आज का दिन ऐतिहासिक बन गया। शासकीय मेडिकल कॉलेज कवर्धा में प्रथम शैक्षणिक सत्र और प्रथम बैच की पढ़ाई का शुभारंभ हुआ। इस ऐतिहासिक अवसर पर उप मुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक विजय शर्मा और सांसद संतोष पाण्डेय ने नवप्रवेशी छात्र-छात्राओं का एप्रॉन, स्टेथोस्कोप, पेन और गुलाब का फुल देकर स्वागत किया। विद्यार्थियों ने उत्साह के साथ अपने नए शैक्षणिक जीवन की शुरुआत की। मेडिकल कॉलेज के इतिहास के इस पहले दिन विद्यार्थियों ने अतिथियों के साथ अपने संघर्ष, तैयारी और सपनों को साझा किया।         उप मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि जिस परिवार और समाज ने विद्यार्थियों को आगे बढ़ने का अवसर दिया है, उसके प्रति सेवा का भाव हमेशा बनाए रखना चाहिए। उप मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से कहा कि वे मन लगाकर पढ़ाई करें और अपने लक्ष्य की तैयारी निरंतर जारी रखें। उन्होंने कहा कि पढ़ाई के दौरान अनावश्यक तनाव नहीं होना चाहिए। सफलता किसी एक व्यक्ति का परिणाम नहीं होती, बल्कि परिवार और सभी के संयुक्त प्रयासों से प्राप्त होती है। उन्होंने विद्यार्थियों को अच्छे डॉक्टर बनने और समाज की सेवा करने के लिए प्रेरित किया।                 सांसद संतोष पाण्डेय ने विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सभी के संयुक्त प्रयासों से कवर्धा में मेडिकल कॉलेज के प्रथम बैच का शुभारंभ हुआ है। उन्होंने कहा कि देश में चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में सुविधाओं के विस्तार पर कार्य किया जा रहा है।         कलेक्टर श्रीमती तुलिका प्रजापति ने कहा कि विद्यार्थियों ने कठिन मेहनत के बाद यहां तक पहुंचने में सफलता प्राप्त की है, लेकिन यह अंत नहीं, बल्कि शुभारंभ है। उन्होंने कहा कि जब कोई व्यक्ति डॉक्टर के पास आता है, तो उसके मन में स्वस्थ होने की उम्मीद होती है। इसलिए चिकित्सा के क्षेत्र में सेवा भाव और संवेदनशीलता सबसे महत्वपूर्ण होना चाहिए।  उप मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से किया संवाद, जानी तैयारी और सफलता की कहानी         प्रथम बैच के विद्यार्थियों के शुभारंभ अवसर पर उप मुख्यमंत्री शर्मा ने उनसे आत्मीय संवाद किया। उन्होंने विद्यार्थियों से उनकी तैयारी, पढ़ाई की दिनचर्या, कोचिंग के अनुभव और प्रवेश परीक्षा के बारे में जानकारी ली। विद्यार्थियों ने भी खुलकर अपनी तैयारी और सफलता की कहानी साझा की। किसी ने ऑनलाइन कोचिंग के माध्यम से तैयारी की, तो किसी ने लाइब्रेरी में स्व-अध्ययन को आधार बनाया। पिता ने कभी निराश नहीं होने दिया         संवाद के दौरान राजनांदगांव निवासी अतिथि देवांगन दूसरे प्रयास में सफल हुईं। उन्होंने बताया कि पिता ने कभी निराश नहीं होने दिया, बल्कि गलतियों को पहचानकर सुधार करने और लगातार प्रयास करते रहने के लिए प्रेरित किया। वहीं भूपेंद्र सिंह ने ऑनलाइन कोचिंग से तैयारी की, जबकि कवर्धा के धरमपुरा निवासी आकाश धुर्वे ने लाइब्रेरी में स्व-अध्ययन कर सफलता हासिल की। भिलाई निवासी हर्षिता तीसरे प्रयास में सफल हुईं। भिलाई निवासी अंशिता सिंह के पिता ने बताया कि बेटी की तैयारी में उन्होंने मार्गदर्शन के साथ मॉक टेस्ट में सहयोग किया। उन्होंने कहा कि भिलाई का पढ़ाई के लिए अच्छा माहौल भी तैयारी में सहायक रहा।          उप मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से यह भी जाना कि वे प्रतिदिन कितने घंटे पढ़ाई करते थे और किताबों तथा डिजिटल स्क्रीन का कितना उपयोग करते थे। विद्यार्थियों ने बताया कि वे करीब 8 घंटे पुस्तकों से और 3 से 4 घंटे डिजिटल स्क्रीन के माध्यम से पढ़ाई करते थे। एक विद्यार्थी ने किताब और स्क्रीन के उपयोग का अनुपात 50-50 प्रतिशत बताया। ऑनलाइन कक्षाओं के कारण कुछ विद्यार्थियों को रोज 7 से 8 घंटे तक स्क्रीन पर पढ़ाई करनी पड़ती थी। संवाद के दौरान उप मुख्यमंत्री ने प्रवेश परीक्षा के अनुभव भी पूछे। विद्यार्थियों ने परीक्षा के स्तर, तैयारी के दौरान आई चुनौतियों और सफलता तक पहुंचने के अपने अनुभव साझा किए।         इस अवसर पर राजेन्द्र चंद्रवंशी, जिला पंचायत उपाध्यक्ष कैलाश चंद्रवंशी, अधिष्ठाता डॉ प्रतिभा जैन शाह, सीएमएचओ डॉ देवेन्द्र तूरे सहित जनप्रतिनिधि और डॉक्टर उपस्थित रहे।

मध्यप्रदेश के 5 जिलों में फर्जी पासपोर्ट का खेल, 70 बांग्लादेशी नागरिकों के दस्तावेज जांच के घेरे में

ग्वालियर/ भोपाल धर्म की आड़ में फर्जी पासपोर्ट (MP fake passport racket) बनवाने का खेल ठेके पर चल रहा था। एसटीएफ की गिरफ्त में आए रियाल चौधरी सहित चार आरोपियों से पूछताछ में खुलासा हुआ है कि पांच जिलों ग्वालियर, भोपाल, पांढुर्ना, छिंदवाड़ा और बैतूल- से 70 बांग्लादेशियों के फर्जी पासपोर्ट बनवाने करीब 17.50 लाख रुपए दलालों और सरकारी अमले को घूस दी गई। चोरी-छिपे बॉर्डर पार कराने से लेकर फर्जी दस्तावेज तैयार कराने और सरकारी मुहर लगवाने हर कदम पर रुपए दिए गए। 25-30 हजार में बन रहे थे फर्जी पासपोर्ट जांच में पता चला है कि अवैध बांग्लादेशी नागरिकों के लिए आधार कार्ड, पैन कार्ड, शैक्षणिक अंकसूचियां और मूल निवास प्रमाण-पत्र जैसे दस्तावेज तैयार करने के बदले दलालों ने प्रति व्यक्ति 15 हजार रुपए वसूले। इसके अलावा इन जाली दस्तावेजों के पुलिस सत्यापन और सरकारी कार्यालयों से मुहर लगवाने के नाम पर 5-5 हजार रुपए अलग से खर्च किए गए। शेष पांच से दस हजार रुपए रकम दलालों और सिंडिकेट में शामिल अन्य लोगों के कमीशन के रूप में बंटी। कुल मिलाकर प्रत्येक घुसपैठिए ने 25-30 हजार रुपए खर्च कर भारतीय पासपोर्ट हासिल किए। अकेले डबरा क्षेत्र में एक ही पते पर 17 बांग्लादेशियों के पासपोर्ट बनने की बात सामने आई है। हर सरकारी मुहर के लिए 3-3 हजार रुपए की घूस दी गई। अब तक मिल चुके हैं 70 फर्जी पासपोर्ट बता दें कि अभी तक भोपाल के अन्नानगर बौद्ध मठ से बने 40 सहित पांच जिलों से बने 70 फर्जी पासपोर्ट मिल चुके हैं। इनकी संख्या 200 तक हो सकती है। अन्नानगर मठ के आसपास रहने वाले लोगों ने एसटीएफ को बताया है कि रियाल चौधरी लगभग डेढ़ वर्ष से यहां रह रहा था। ऐसे रची गई थी साजिश इस नेटवर्क का मास्टरमाइंड रियाल चौधरी (Riyal Chaudhary) खुद एक अवैध बांग्लादेशी नागरिक है। उसने वर्षों पहले चोरी-छिपे भारतीय सीमा में प्रवेश किया था। लंबे समय तक असम में छिपा रहा। इसके बाद बौद्ध धर्म के अनुयायियों के संपर्क में आकर मध्यप्रदेश में अपना जाल फैलाया। खुद का फर्जी पासपोर्ट बनवाया। इसी ट्रैक का इस्तेमाल कर अन्य घुसपैठियों को भी बॉर्डर पार कराई। फर्जी दस्तावेजों से भारतीय पासपोर्ट दिलवाए। सरकारी तंत्र और स्थानीय मददगारों पर शिकंजा इस देशविरोधी साजिश में लिप्त स्थानीय मददगारों, नगर निगम, नगर पालिका, राजस्व विभाग, सरपंच, पार्षदों के साथ ही कई पुलिस अधिकारियों-कर्मचारियों को भी चिह्नित किया गया है। एसटीएफ इन संदेहियों की भूमिका की गहन जांच कर रही है। नोटिस जारी किए जा रहे हैं। भोपाल एसटीएफ एसपी राजेश सिंह भदौरिया के अनुसार फर्जीवाड़े में संलिप्त हर एक चेहरा बेनकाब कर सख्त वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। बच्चों को लाने की थी तैयारी रियाल की साजिश बांग्लादेश से बच्चों को भोपाल लाकर पढ़ाने, जाली दस्तावेज तैयार कर थाईलैंड, म्यांमार, जापान और कंबोडिया भेजने की थी। मठ के पीछे 40 बच्चों की क्षमता वाला हॉस्टल भी तैयार कराया जा रहा था। वह बच्चों की मदद और विभिन्न कामों के नाम पर स्थानीय लोगों से 5 हजार से लेकर 1 लाख रुपए तक डोनेशन वसूलता था। विदेशी फंडिंग की भी जांच की जा रही है। उसने पासपोर्ट गुम होने का बहाना बनाकर अलग-अलग समय में चार बार पासपोर्ट बनवाए थे। जानिए…. किस स्तर पर कितने रुपए दिए गए एसटीएफ की जांच में यह भी पता चला है कि बांग्लादेशी घुसपैठियों के लिए दस्तावेज बनवाने के बदले 10 से 15 हजार रुपए प्रति व्यक्ति वसूले गए। पुलिस सत्यापन और सरकारी मुहर लगवाने के नाम पर पांच हजार रुपए अलग से खर्च किए गए। दलालों और सिंडिकेट के कमीशन को मिलाकर हर घुसपैठिए ने 25 हजार से 30 हजार रुपए खर्च कर भारतीय पासपोर्ट हासिल किए। अकेले डबरा (ग्वालियर) क्षेत्र में एक ही पते पर 17 बांग्लादेशियों के पासपोर्ट बनने की बात सामने आ चुकी है। हर सरकारी मुहर के लिए रिश्वत दी गई। इनसे भी पूछताछ एसटीएफ ने भोपाल में रियाल के साथ रहने वाले सेवक सुभाष और दस्तावेज तैयार करने वाले कैफे संचालक विजय को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। मठ की छानबीन के दौरान राजस्थान के दो भंते भी मिले। उनसे भी पूछताछ की है। सरकारी तंत्र और मददगारों पर कसा शिकंजा इस देशविरोधी साजिश में लिप्त स्थानीय मददगारों, नगर निगम, राजस्व विभाग, सरपंच, पार्षदों के साथ ही पुलिस सत्यापन से जुड़े 2021 और वर्ष 2022-23 में पदस्थ रहे 15 अधिकारियों की भूमिका संदेह के दायरे में है। एसटीएफ इस पूरे नेटवर्क की गहराई से छानबीन कर रही है। 100 से ज्यादा संदिग्ध पासपोर्ट्स की जांच जारी है।

गन्ना किसानों के लिए बड़ी राहत, 102 चीनी मिलों ने किया 100% भुगतान

गन्ना किसानों को 102 चीनी मिलों ने किया शत-प्रतिशत भुगतान पेराई सत्र (2025-26)  23 सहकारी चीनी मिलों ने 2820 करोड़ का किया भुगतान, निजी चीनी मिलों ने भी किया शत-प्रतिशत भुगतान  योगी सरकार ने गन्ना किसानों को किया 3.25 लाख करोड़ रुपये का भुगतान  निरंतर सर्वाधिक गन्ना मूल्य भुगतान करने वाला राज्य बना है उत्तर प्रदेश  पेराई सत्र (2025-26) में 94.86 प्रतिशत से अधिक गन्ना मूल्य का किया जा चुका भुगतान  लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निरंतर मॉनीटरिंग की बदौलत पेराई सत्र 2025-26 में 102 चीनी मिलों ने गन्ना किसानों को शत-प्रतिशत भुगतान कर दिया। वहीं 23 सहकारी चीनी मिलों ने 2820 करोड़ का भुगतान किया। प्रदेश में संचालित राज्य चीनी निगम की तीन मिलों ने पेराई सत्र 2025-26 में 543.51 करोड़ का भुगतान किया है। निजी चीनी मिलों की ओर से भी किसानों को शत-प्रतिशत भुगतान कर दिया गया है। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश निरंतर सर्वाधिक गन्ना मूल्य भुगतान करने वाला राज्य बना हुआ है। योगी सरकार ने अब तक गन्ना किसानों को 3.25 लाख करोड़ का भुगतान किया। उत्तर प्रदेश गन्ना उत्पादन, शीरा उत्पादन और एथेनॉल उत्पादन में देश में शीर्ष स्थान पर बना हुआ है। पेराई सत्र 2025-26 में 94.86 प्रतिशत से अधिक गन्ना मूल्य का भुगतान पूरा हो चुका है। गन्ना, शीरा और एथेनॉल उत्पादन में शीर्ष पर बना है यूपी  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग ने किसान कल्याण, चीनी उत्पादन और एथेनॉल में नए आयाम स्थापित किए हैं। योगी सरकार की दूरदर्शी नीतियों के कारण उत्तर प्रदेश गन्ना उत्पादन, शीरा उत्पादन और एथेनॉल उत्पादन में देश में शीर्ष स्थान पर बना हुआ है। सरकार ने न केवल गन्ना किसानों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य दिलाना प्राथमिकता माना, बल्कि ऐतिहासिक कदम उठाते हुए अब तक रिकॉर्ड ₹3.25 लाख करोड़ का गन्ना मूल्य भुगतान सीधे किसानों के खातों में हस्तांतरित भी किया।  94.86 प्रतिशत से अधिक का भुगतान सुनिश्चित वर्तमान पेराई सत्र में भी 94.86 प्रतिशत से अधिक गन्ना मूल्य का भुगतान पूरा हो चुका है, जबकि प्रदेश की 102 चीनी मिलों ने गन्ना मूल्य का शत- प्रतिशत भुगतान कर दिया है। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप प्रदेश के गन्ना किसानों की औसत आय में ₹40,720 प्रति हेक्टेयर की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। 9 वर्ष में चीनी मिलों ने की 9220 लाख टन गन्ने की पेराई गन्ना विकास विभाग ने बताया कि विगत नौ वर्ष में प्रदेश की चीनी मिलों ने रिकॉर्ड 9,220 लाख टन गन्ने की पेराई की गई है। जो इससे पहले के 9 वर्ष की कुल गन्ना पेराई 6168 लाख टन से 3052 लाख टन अधिक है। 9 वर्ष में 879.06 लाख टन चीनी का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ है।  सहकारी चीनी मिलों ने किया 100 प्रतिशत भुगतान  उत्तर प्रदेश में पेराई सत्र 2025-26 में सहकारी चीनी मिलों ने गन्ना मूल्य के रूप में 100 प्रतिशत भुगतान कर दिया है। अनूपशहर, बदायूं, बागपत, बेलरायां, बिलासपुर, बीसलपुर, गजरौला, घोसी, कायमगंज, महमूदाबाद, मोरना, नानपारा, नानौता, पूरनपुर, पुवायां, रमाला, सहारनपुर, सरसावां, सठियांव, सेमीखेड़ा, स्नेह रोड, सुल्तानपुर, तिलहर समेत कुल कुल 23 सहकारी चीनी मिलों ने 2820.89 करोड़ रुपये का भुगतान किसानों को किया है। 23 सहकारी चीनी मिलों की पेराई क्षमता 65375 टीसीडी है।  निजी चीनी मिलों द्वारा किया गया भुगतान  पेराई सत्र 2025-26 में निजी चीनों मिलों ने किसानों को शत-प्रतिशत भुगतान कर दिया है। लखनऊ संभाग की मिलों ने सर्वाधिक 6462.19 करोड़ का भुगतान किया। वहीं मुरादाबाद संभाग की मिलों द्वारा 6398.36 करोड़, सहारनपुर संभाग की चीनी मिलों ने 4799.25 करोड़ का भुगतान किया।    संभाग   भुगतान प्रतिशत          भुगतान  अयोध्या   100 फीसदी             1212.35 करोड़  बरेली    89.25 फीसदी             2315.74 करोड़  देवरिया 97.86 फीसदी              1016.95 करोड़  देवीपाटन   91.63 फीसदी           2249.01 करोड़  गोरखपुर    93.46 फीसदी            749.97 करोड़  लखनऊ    91.34 फीसदी             6462.19 करोड़  मेरठ     94.09 फीसदी              4227.24 करोड़  मुरादाबाद   98.96 फीसदी          6398.36 करोड़  सहारनपुर   94.64 फीसदी       4799.25 करोड़

गोरखपुर में आईएमए के चैरिटेबल ब्लड सेंटर का मुख्यमंत्री ने किया लोकार्पण

माफिया और मच्छर की तरह समाप्त हो गया इंसेफेलाइटिस : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ   गोरखपुर में आईएमए के चैरिटेबल ब्लड सेंटर का मुख्यमंत्री ने किया लोकार्पण   खून बनाया नहीं जा सकता, रक्तदान से जरूरतमंद को मिलता है नया जीवन : मुख्यमंत्री योगी    साढ़े नौ वर्ष पहले खुद बीमार था बीआरडी, आज स्वास्थ्य सुविधाओं का प्रमुख केंद्र   75 जिलों में 85 मेडिकल कॉलेज, एमबीबीएस की सीटें 13,500 के पार   पहले डॉक्टरों के अपहरण और रंगदारी के खिलाफ करना पड़ता था आंदोलन   पेशेवर रक्तदाताओं पर प्रभावी अंकुश लगाएं, स्वैच्छिक रक्तदान को दें बढ़ावा    गोरखपुर  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने  कहा कि साढ़े नौ वर्ष पहले पूर्वी उत्तर प्रदेश में इंसेफेलाइटिस से तड़पते बच्चों और दम तोड़ते बचपन को देखकर हर जागरूक माता-पिता चिंतित रहता था। अब इंसेफेलाइटिस समाप्त हो गया है। उन्होंने कहा, माफिया और मच्छर की तरह इंसेफेलाइटिस भी समाप्त हो गया है। अब हम नए युग में नए उत्तर प्रदेश का दर्शन कर रहे हैं।   मुख्यमंत्री योगी  तारामंडल स्थित सेठ बद्री प्रसाद जायसवाल मेमोरियल हॉल में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) गोरखपुर के चैरिटेबल ब्लड सेंटर के लोकार्पण समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि अत्याधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, तकनीक, दवाएं और संसाधन उपलब्ध कराए जा सकते हैं, लेकिन खून बनाया नहीं जा सकता। रक्तदान उस संवेदना का प्रतीक है, जिसके माध्यम से एक व्यक्ति किसी जरूरतमंद को नया जीवन देता है।   मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि आईएमए केवल प्रैक्टिस करने वाले चिकित्सकों की संस्था नहीं है। गोरखपुर में निशुल्क ओपीडी के बाद चैरिटेबल ब्लड सेंटर शुरू करके उसने सामाजिक उत्तरदायित्व का उदाहरण प्रस्तुत किया है। किसी भी संस्था की वास्तविक पहचान इससे होती है कि वह अपनी विशेषज्ञता का लाभ समाज के अंतिम पायदान पर बैठे व्यक्ति तक पहुंचाने में कितना योगदान देती है।   उन्होंने कहा कि 2017-18 में गोरखपुर के सीतापुर आई हॉस्पिटल में आईएमए ने निशुल्क ओपीडी शुरू की थी। इसके बाद आईएमए ने अपने कार्यालय के लिए भूमि मांगी तो गोरखपुर विकास प्राधिकरण के माध्यम से भूखंड उपलब्ध कराने में मदद की गई। आईएमए ने इस भूखंड का बेहतर उपयोग करते हुए चैरिटेबल ब्लड सेंटर स्थापित किया है, जो पूर्वी उत्तर प्रदेश के जरूरतमंद मरीजों को रक्त उपलब्ध कराने में योगदान देगा। गोरखपुर में आईएमए से 1400 से अधिक चिकित्सक जुड़े हैं।   एक बेड पर भर्ती रहते थे चार-चार मरीज मुख्यमंत्री योगी ने पूर्वी उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं में आए बदलाव का उल्लेख करते हुए कहा कि कुछ वर्ष पहले बीआरडी मेडिकल कॉलेज ही इस क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं का प्रमुख केंद्र था। स्थिति यह थी कि एक ही बेड पर चार-चार मरीज तक भर्ती रहते थे। तीसरी मंजिल पर पंखे, शौचालय और दूसरी जरूरी सुविधाओं तक का अभाव था। नौ वर्ष पहले जो बीआरडी मेडिकल कॉलेज स्वयं अस्वस्थ था, आज वही सुपर स्पेशियलिटी और इंसेफेलाइटिस समेत विभिन्न बीमारियों के उपचार का प्रमुख केंद्र बन गया है।   उन्होंने कहा कि गोरखपुर में एम्स स्थापित हो चुका है। महाराजगंज, कुशीनगर, देवरिया, सिद्धार्थनगर, बस्ती, बलरामपुर, बहराइच, गोंडा, अयोध्या और अंबेडकरनगर समेत विभिन्न जिलों में मेडिकल कॉलेज शुरू हो चुके हैं। प्रदेश में 75 जिले हैं, जबकि मेडिकल कॉलेजों की संख्या 85 हो गई है। दो एम्स भी संचालित हैं। एमबीबीएस की सीटें 4600 से बढ़कर 13,500 से अधिक हो चुकी हैं और पीजी की सीटें दोगुनी हुई हैं। नर्सिंग और पैरामेडिकल शिक्षा का भी विस्तार किया जा रहा है।   डॉक्टरों के लिए सड़कों पर करना पड़ता था आंदोलन मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि एक समय प्रदेश के प्रत्येक जिले की पहचान किसी न किसी दुर्दांत माफिया से जुड़ गई थी। गोरखपुर में डॉक्टरों का अपहरण होता था, उनसे रंगदारी मांगी जाती थी, धमकी भरे फोन आते थे और उनके चेंबर में घुसकर मारपीट की जाती थी। इन घटनाओं के खिलाफ उन्हें चिकित्सकों के साथ सड़कों पर आंदोलन करना पड़ता था। आज गोरखपुर के साथ पूरे प्रदेश में चिकित्सक, व्यापारी और नागरिक स्वयं को सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। अब प्रदेश की पहचान माफिया से नहीं बल्कि 'वन डिस्ट्रिक्ट, वन मेडिकल कॉलेज' के लक्ष्य से बन रही है।   गुरु गोरखनाथ चिकित्सालय का किया जिक्र मुख्यमंत्री योगी ने गुरु गोरखनाथ चिकित्सालय की शुरुआत का जिक्र करते हुए कहा कि पहले 10 बेड से अस्पताल शुरू करने की चर्चा हुई थी, लेकिन गोरखपुर के चिकित्सकों के सहयोग से शुरुआत में ही इसे 100 बेड का अस्पताल बनाया गया। इस चिकित्सालय ने दिखाया कि चैरिटी में भी अस्पताल और ब्लड बैंक सफलतापूर्वक संचालित हो सकते हैं। यहां ब्लड सेपरेटर, एफेरेसिस और डायलिसिस जैसी सुविधाएं विकसित हुईं। उन्होंने कहा कि जिस डायलिसिस के लिए कभी लोगों को लखनऊ या बीएचयू जाना पड़ता था, आज गोरखपुर में गुणवत्तापूर्ण सुविधा उपलब्ध है। सरकार ने जिला अस्पतालों में भी निशुल्क डायलिसिस की व्यवस्था शुरू की है।   मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। आईआईटी कानपुर के सहयोग से मेडटेक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस विकसित किया जा रहा है और एसजीपीजीआई में भी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस पर काम हो रहा है।   स्वैच्छिक रक्तदान के लिए आगे आएं लोग मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि रक्त की मांग के अनुरूप आपूर्ति नहीं हो पाती है। इसके लिए चिकित्सकों को स्वैच्छिक रक्तदान के प्रति लोगों को प्रेरित करना चाहिए। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर समय-समय पर रक्तदान की अपील और जागरूकता अभियान चलाए जाने चाहिए।   उन्होंने पेशेवर रक्तदाताओं को लेकर भी आगाह किया। कहा कि विभिन्न बीमारियों से ग्रसित पेशेवर रक्तदाताओं पर प्रभावी अंकुश नहीं लगाया गया तो संक्रमण का गंभीर संकट पैदा हो सकता है। ऐसी गतिविधियों को शासन-प्रशासन के संज्ञान में लाने के साथ चिकित्सकों को जागरूकता कार्यक्रमों से भी जुड़ना चाहिए।   मशीनों का निरीक्षण कर जानी कार्यप्रणाली इससे पहले मुख्यमंत्री योगी ने चैरिटेबल ब्लड सेंटर में स्थापित अत्याधुनिक मशीनों का निरीक्षण किया। चिकित्सकों से मशीनों के संचालन, रक्त संग्रह, जांच और अन्य व्यवस्थाओं की जानकारी ली। इसके बाद शिलापट्ट का अनावरण कर ब्लड सेंटर का विधिवत लोकार्पण किया।   नन्ही बच्ची को दुलारा, दिया आशीर्वाद निरीक्षण के दौरान परिसर में मौजूद एक नन्ही बच्ची पर मुख्यमंत्री योगी की नजर पड़ी। उन्होंने बच्ची … Read more

सात अक्तूबर से एक सप्ताह लगेंगे कैंप, विभिन्न सरकारी योजनाओं से छूटे पात्र लोगों को किया जाएगा संतृप्त

 गोरखपुर  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश में वृद्धजन, निराश्रित महिलाओं और दिव्यांगजन को दी जा रही पेंशन की संख्या भी बढ़ेगी और राशि भी। अभी प्रदेश में 1.10 करोड़ वृद्धजन, निराश्रित महिलाओं और दिव्यांगजन को सालाना 12 हजार रुपये पेंशन की सुविधा दी जा रही है। उन्होंने कहा, “बहुत शीघ्र इसकी संख्या भी बढ़ेगी और इसकी राशि भी बढ़ेगी।” इसके साथ ही अगले छह महीने में एक लाख नौजवानों को सरकारी नौकरी उपलब्ध कराई जाएगी। इसकी शुरुआत 19 सितंबर से होगी।   मुख्यमंत्री योगी बुधवार को उर्वरक नगर में आयोजित समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने गोरखपुर में करीब 40 करोड़ रुपये की 119 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। उर्वरक नगर में नवनिर्मित कल्याण मंडपम का फीता काटकर लोकार्पण किया और पौधरोपण कर मंत्रोच्चार के बीच जल अर्पित किया।   सात अक्तूबर से एक सप्ताह लगेंगे कैंप मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि कोई निराश्रित बुजुर्ग, निराश्रित महिला या दिव्यांगजन हो, उसे इस बात की चिंता नहीं करनी चाहिए कि आगे उसका गुजर-बसर कैसे होगा। सरकार की पेंशन सुविधा उसका संबल बनेगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शासन प्रमुख के रूप में 25 वर्ष का कार्यकाल सात अक्तूबर को पूरा हो रहा है। सात अक्तूबर से एक सप्ताह तक कैंप लगाए जाएंगे। इनमें सरकार की विभिन्न योजनाओं से छूटे पात्र लोगों को योजनाओं से संतृप्त किया जाएगा।   मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि गरीब को राशन, आवास, शौचालय और उज्ज्वला योजना के कनेक्शन का लाभ मिल रहा है। गरीब परिवार को प्रधानमंत्री मुफ्त अन्न योजना के माध्यम से राशन की गारंटी है। बेटियों के लिए मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना और मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना उपलब्ध है। सरकार का उद्देश्य गरीबी समाप्त कर गरीब व्यक्ति को सामान्य जीवनयापन के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना है।   छह महीने में एक लाख नौजवानों को सरकारी नौकरी मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि अगले छह महीने के अंदर विधानसभा चुनाव की घोषणा होने से पहले प्रदेश में एक लाख नौजवानों को सरकारी नौकरी उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि इसकी शुरुआत 19 सितंबर से की जा रही है। इनमें 77 हजार भर्तियां यूपी पुलिस और होमगार्ड में होंगी। इससे पहले साढ़े नौ लाख नौजवानों को नौकरी दी जा चुकी है।   उन्होंने कहा कि माध्यमिक, बेसिक और अन्य विद्यालयों में टीजीटी, पीजीटी और बेसिक शिक्षा परिषद के शहरी क्षेत्रों में हजारों शिक्षकों की नियुक्ति के विज्ञापन जारी हो गए हैं और आवेदन मांगे जाने शुरू हो गए हैं।   मुख्यमंत्री योगी ने आरोप लगाया कि 2017 से पहले नौकरी निकलती थी तो ‘सैफई सिंडिकेट’ वसूली के लिए निकल पड़ता था। नौकरियों में सौदेबाजी होती थी, न्यायालय से रोक लगती थी और नौजवानों का जीवन और भविष्य प्रभावित होता था।   करीब 40 करोड़ की 119 परियोजनाओं की सौगात मुख्यमंत्री योगी ने समारोह में गोरखपुर के विकास से जुड़ी करीब 40 करोड़ रुपये की 119 परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। कार्यक्रम में वीडियो प्रस्तुति के माध्यम से गोरखपुर में हुए विकास कार्यों को भी दिखाया गया।   मुख्यमंत्री योगी ने नकहा पुल, रेलवे ओवरब्रिज, फोरलेन सड़कों, स्पोर्ट्स कॉलेज और सैनिक स्कूल समेत शहर में उपलब्ध हुई सुविधाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बरगदवा से नकहा, स्पोर्ट्स कॉलेज और पादरी बाजार होते हुए मोहद्दीपुर तक फोरलेन की सुविधा मिली है। गोरखनाथ से स्पोर्ट्स कॉलेज, फर्टिलाइजर से झुंगिया गेट और असुरन से मेडिकल कॉलेज होते हुए भटहट तक मार्ग फोरलेन हुए हैं।   उन्होंने रुस्तमपुर, आजाद चौक और ट्रांसपोर्ट नगर क्षेत्र में बने लंबे फ्लाईओवर का भी जिक्र किया। रामगढ़ताल के विकास का उल्लेख करते हुए कहा कि आज यह देश-दुनिया के लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है।   गरीब बेटी की शादी से सम्मेलन तक के काम आएगा मंडपम मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि कुछ महीने पहले उर्वरक नगर में जिस स्थान पर डेढ़ से दो मीटर का गड्ढा और कूड़ा-गंदगी थी, वहां अब शानदार कल्याण मंडपम बन गया है। इसमें गरीब परिवार की बेटी की शादी, बच्चे का मुंडन संस्कार, प्रवचन, सम्मेलन और गोरखपुर के विकास से जुड़ी बैठकें भी हो सकेंगी।   उन्होंने कहा कि महानगर में ऐसे स्थान चिह्नित किए गए जहां महंगे होटल नहीं हैं और लोग बड़े बारात घरों का खर्च नहीं उठा सकते। इसके बाद तय किया गया कि कुछ कल्याण मंडपम विधायक निधि, कुछ नगर निगम और कुछ गोरखपुर विकास प्राधिकरण बनाएगा।   उन्होंने बताया कि बाबा गंभीरनाथ वार्ड मानबेला, जंगल तुलसीराम बिछिया, जंगल बेनी माधव और बशारतपुर में बने कल्याण मंडपम का उपयोग शुरू हो चुका है। उर्वरक नगर का मंडपम अब जनता को समर्पित कर दिया गया है। दो अन्य मंडपम निर्माणाधीन हैं और विधायक निधि से एक और स्वीकृत किया गया है। इस तरह महानगर के अलग-अलग हिस्सों में कुल 10 कल्याण मंडपम की सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया गया है।   उर्वरक नगर का कल्याण मंडपम करीब 3.09 करोड़ रुपये की लागत से 2461 वर्गमीटर में बनाया गया है। इसमें बड़ा हॉल, मिनी हॉल, चार कमरे, मांगलिक कार्यक्रमों के लिए मंडप, भोजनालय और पार्किंग की व्यवस्था है।   गोरखपुर में 500 से अधिक उद्योग, 50 हजार को नौकरी मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि अकेले गोरखपुर में 500 से अधिक उद्योग लगे हैं। इनमें करीब 50 हजार नौजवानों को नौकरी मिली है। पहले यहां के युवाओं को रोजगार के लिए पंजाब, मुंबई, कोलकाता, हैदराबाद, बेंगलुरु और चेन्नई जाना पड़ता था।   उन्होंने कहा कि अब गीडा में गोरखपुर, देवरिया, महाराजगंज, कुशीनगर, मऊ, संतकबीरनगर, बस्ती और सिद्धार्थनगर समेत आसपास के जिलों के नौजवानों को नौकरी मिल रही है। दूसरे राज्यों और देशों से भी युवा यहां आकर रोजगार प्राप्त कर रहे हैं।   यूपी अब बीमारू नहीं, ग्रोथ इंजन की निभा रहा भूमिका मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि 2017 से पहले प्रदेश के सामने पहचान का संकट था। अब उत्तर प्रदेश बीमारू नहीं है और भारत की अर्थव्यवस्था के ग्रोथ इंजन के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, एक्सप्रेसवे, रेलवे, मेट्रो, एयर कनेक्टिविटी, नए एयरपोर्ट और नए कल-कारखाने प्रदेश की नई पहचान बन रहे हैं।   जाति, क्षेत्र और भाषा के नाम पर न बंटें मुख्यमंत्री योगी ने लोगों से जाति, क्षेत्र और भाषा के नाम पर बंटने … Read more

BPSC, DGP और BPSSC के शीर्ष पदों पर अस्थायी बदलाव, अतिरिक्त प्रभार की व्यवस्था

पटना  बिहार के प्रशासनिक और पुलिस महकमे में 15 सितंबर 2026 से कई अहम पदों की जिम्मेदारियों में अस्थायी बदलाव हुआ है. बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) के अध्यक्ष परमार रवि मनुभाई, बिहार के डीजीपी विनय कुमार और बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग (BPSSC) के अध्यक्ष केएस द्विवेदी अलग-अलग अवधि के लिए अवकाश पर हैं. इन अधिकारियों की अनुपस्थिति में संबंधित पदों पर अतिरिक्त प्रभार की व्यवस्था की गयी है. BPSC अध्यक्ष रवि परमार 9 अक्टूबर तक छुट्टी पर BPSC अध्यक्ष परमार रवि मनुभाई 15 सितंबर से 9 अक्टूबर 2026 तक अवकाश पर रहेंगे. उनकी अनुपस्थिति में राजस्व पर्षद की अध्यक्ष-सह-सदस्य हरजोत कौर बम्हरा को BPSC अध्यक्ष पद का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है. हरजोत कौर 1992 बैच की IAS अधिकारी हैं और वर्तमान में राजस्व पर्षद की अध्यक्ष-सह-सदस्य के रूप में जिम्मेदारी संभाल रही हैं. BPSC की जिम्मेदारी संभालने के दौरान उनके सामने आयोग के नियमित प्रशासनिक कामकाज के साथ भर्ती परीक्षाओं से जुड़ी प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी होगी. पहले क्या जिम्मेदारी संभाल रहे थे रवि परमार परमार रवि मनुभाई वर्तमान में बिहार लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष हैं. BPSC अध्यक्ष के रूप में आयोग की भर्ती परीक्षाओं, परीक्षा प्रक्रिया और आयोग के प्रशासनिक कामकाज से जुड़े प्रमुख निर्णयों की जिम्मेदारी उनके पास रही है. उनके अवकाश के दौरान यह जिम्मेदारी हरजोत कौर बम्हरा संभालेंगी. DGP विनय कुमार भी अवकाश पर बिहार के DGP विनय कुमार भी 15 सितंबर से 21 दिनों के अवकाश पर गये हैं. उनकी अनुपस्थिति में प्रीता वर्मा को पुलिस महानिदेशक पद का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है. प्रीता वर्मा वर्तमान में होमगार्ड एवं अग्निशमन सेवा से जुड़ी वरिष्ठ जिम्मेदारी संभाल रही हैं. अतिरिक्त प्रभार के दौरान प्रीता वर्मा पुलिस मुख्यालय से जुड़े नियमित प्रशासनिक और विभागीय कामकाज की निगरानी करेंगी. यह व्यवस्था विनय कुमार के अवकाश से लौटने तक रहेगी. BPSSC अध्यक्ष केएस द्विवेदी भी छुट्टी पर बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग (BPSSC) के अध्यक्ष केएस द्विवेदी भी करीब एक महीने के अवकाश पर हैं. ताजा रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने पारिवारिक कारणों से छुट्टी ली है. उनकी अनुपस्थिति भी ऐसे समय हुई है, जब पुलिस भर्ती से जुड़ी प्रक्रियाएं आयोग के स्तर पर चल रही हैं. भर्ती परीक्षाओं के बीच बदली जिम्मेदारियां BPSC और BPSSC दोनों आयोग राज्य में विभिन्न सरकारी पदों पर भर्ती के लिए परीक्षाओं का आयोजन करते हैं. ऐसे समय में शीर्ष पदों पर अस्थायी जिम्मेदारी में बदलाव हुआ है. BPSC अध्यक्ष के अवकाश के दौरान हरजोत कौर बम्हरा आयोग का कामकाज देखेंगी, जबकि DGP के अवकाश के दौरान प्रीता वर्मा पुलिस विभाग की कमान संभालेंगी. अधिकारियों का अवकाश निर्धारित अवधि के लिए है. उपलब्ध रिपोर्टों में इन छुट्टियों को नियमित अवकाश के तौर पर बताया गया है; इसलिए इसे अधिकारियों के पद से हटाये जाने या किसी प्रशासनिक कार्रवाई के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा.  

रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना: यूपी की 40 हजार छात्राओं को फ्री स्कूटी, टेंडर जारी

लखनऊ यूपी में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले 40 हजार मेधावी छात्राओं के हाथ में स्कूटी की चाबी सौंपी जाएगी। उच्च शिक्षा विभाग की ओर से स्कूटी की खरीद के लिए टेंडर जारी कर दिया गया है। जनवरी में स्नातक की मेधावी छात्राओं को मुफ्त स्कूटी वितरित की जाएगी। मेधावी छात्राओं को मुफ्त स्कूटी वितरण के लिए विश्वविद्यालयों के स्तर पर भी तैयारियां तेज कर दी गई है। शैक्षिक सत्र 2025-26 में स्नातक उत्तीर्ण करने वाली छात्राओं में से टॉप पांच प्रतिशत की मेरिट जारी कर उनसे डाक्युमेंट लिए जा रहे हैं। रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना के तहत शैक्षिक सत्र 2025-26 में यूपी की मूल निवासी उन मेधावी छात्राओं को लाभ मिलेगा, जिन्होंने प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों, निजी विश्वविद्यालयों तथा राज्य विश्वविद्यालयों से संबद्ध राजकीय, एडेड व निजी डिग्री कॉलेजों से स्नातक की पढ़ाई पूरी की है। यही नहीं उनके परिवार की सालाना आय 12 लाख रुपये तक होगी। उच्च शिक्षा विभाग की ओर से योजना के तहत पात्र छात्राओं को स्कूटी उपलब्ध कराने की बिड प्रकाशित की गई है। जिसका मूल्य करीब 320 करोड़ रुपये है। उच्च शिक्षा निदेशालय की ओर से 21 सितंबर को ऑनलाइन प्री बिड बैठक भी होगी। फिर आगे की प्रक्रिया पूरी कर जनवरी तक स्कूटी वितरण करेगा। दूसरी ओर विश्वविद्यालयों में अपने व संबद्ध महाविद्यालयों के डाटा एकत्र कर मेरिट के आधार पर स्नातक उत्तीर्ण टॉप पांच प्रतिशत छात्राओं की सूची तैयार की गई है। इसके अनुसार छात्राओं का आधार, निवास व आय प्रमाण पत्र महत्वपूर्ण दस्तावेज भी लेकर पोर्टल पर अपलोड किया जा रहा है। उच्च शिक्षा निदेशालय, जिला प्रशासन के सहयोग से इनका सत्यापन कराएगा। इन छात्राओं को मिलेगी स्कूटी योजना के अंतर्गत सरकारी विश्वविद्यलयों, निजी विश्वविद्यालयों, इन विश्वविद्यलयों से जुड़े कॉलेज, एडेड कॉलेज, स्ववित्त पोषित कॉलेज सभी को रखा गया है। इन संस्थान से पिछले साल यानी 2025-26 में ग्रेजुएशन करने वाली टॉप पांच प्रतिशत छात्राओं को स्कूटी मिलेगी। छात्राओं को यूपी का निवासी होना भी जरूरी किया गया है। छात्राओं की पारिवारिक आय 12 लाख रुपए तक होनी चाहिए। केवल निराश्रित, दिव्यांग और शहीद परिवारों की बेटियों की मेरिट नहीं देखी जाएगी। उन्हें प्राथमिकता के आधार पर स्कूटी दी जाएगी। रजिस्ट्रेशन और बीमा भी सरकार कराकर देगी सरकार की तरफ से स्कूटी के साथ ही आईएसआई मार्का वाला हेलमेट, एसेसरीज, पांच लीटर पेट्रोल भी मिलेगा। आरटीओ में रजिस्ट्रेशन और बीमा भी सरकार ही कराकर देगी। यानी स्कूटी हासिल करने वाली किसी छात्रा को कोई खर्च नहीं करना होगा।

अनुदान प्रक्रिया में डिजिटल पारदर्शिता की नई पहल, 230 प्रतिनिधियों को पोर्टल संचालन की ट्रेनिंग

अनुदान प्रक्रिया में डिजिटल पारदर्शिता की नई पहल 230 प्रतिनिधियों को दिया गया पोर्टल संचालन का प्रशिक्षण महिलाओं और बच्चों का सर्वोत्तम हित सर्वोच्च प्राथमिकता : आयुक्त संदीप भोपाल  महिला एवं बाल विकास विभाग ने मिशन शक्ति और मिशन वात्सल्य से जुड़ी अशासकीय संस्थाओं को दिए जाने वाले अनुदान की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सरल, जवाबदेह और समयबद्ध बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। विभाग द्वारा विकसित ‘अनुदान पोर्टल’ का ऑनलाइन शुभारंभ महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती निर्मला भूरिया ने 15 सितम्बर को किया था। पोर्टल के प्रभावी संचालन के लिए बुधवार को भोपाल के राष्ट्रीय होटल प्रबंधन संस्थान, शाहपुरा में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें करीब 230 प्रतिनिधियों और अधिकारियों ने सहभागिता की। नए डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से अशासकीय संस्थाएं अनुदान के लिए ऑनलाइन आवेदन से लेकर दस्तावेज अपलोड करने, प्रस्ताव परीक्षण, स्वीकृति, अनुदान वितरण और प्रगति की निगरानी तक की प्रक्रिया ऑनलाइन पूरी कर सकेंगी। इससे अनुदान प्रक्रिया में मानवीय हस्तक्षेप कम होने के साथ पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा मिलेगा तथा भुगतान एवं स्वीकृति की प्रक्रिया को अधिक समयबद्ध बनाने में सहायता मिलेगी। महिलाओं और बच्चों के हित में संवेदनशीलता के साथ काम करें संस्थाएं आयुक्त महिला एवं बाल विकास संदीप जी.आर. ने कहा कि विभागीय योजनाओं की सफलता का वास्तविक आकलन उनके फील्ड स्तर पर दिखाई देने वाले प्रभाव से होता है। उन्होंने सभी अशासकीय संस्थाओं और विभागीय अधिकारियों से महिलाओं एवं बच्चों की सुरक्षा, संरक्षण, परामर्श और पुनर्वास को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए संवेदनशीलता और प्रभावशीलता के साथ दायित्वों का निर्वहन करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय घटनाओं और उनके बदलते ट्रेंड का चिन्हांकन कर संवेदनशील क्षेत्रों की वास्तविक आवश्यकताओं के अनुरूप योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन किया जाना चाहिए। उन्होंने प्रतिभागियों से अनुदान पोर्टल का गंभीरता से अध्ययन कर उसका अधिकतम और सार्थक उपयोग करने तथा पोर्टल को और अधिक उपयोगी बनाने के लिए व्यावहारिक सुझाव देने को कहा। ऑनलाइन होगी अनुदान की पूरी प्रक्रिया प्रशिक्षण के दौरान मिशन वात्सल्य के राज्य नोडल अधिकारी डॉ. अमिताभ अवस्थी ने पोर्टल की उपयोगिता, विभिन्न मॉड्यूल और अशासकीय संस्थाओं द्वारा इसके उपयोग की प्रक्रिया की विस्तार से जानकारी दी। मिशन शक्ति की प्रभारी डॉ. प्रज्ञा अवस्थी ने पोर्टल के माध्यम से विभिन्न रिपोर्ट तैयार करने तथा आवश्यक सूचनाओं को अद्यतन रखने की प्रक्रिया समझाई। तकनीकी सत्र में पोर्टल संचालन, ऑनलाइन आवेदन, दस्तावेज अपलोड सहित विभिन्न तकनीकी प्रक्रियाओं का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। मिशन शक्ति में 14 शक्ति सदन, मिशन वात्सल्य में 130 बाल देखरेख संस्थाएं प्रदेश में मिशन शक्ति अंतर्गत 13 जिलों में 14 शक्ति सदन संचालित हैं, जहां कठिन परिस्थितियों में जीवनयापन करने वाली महिलाओं को आश्रय, संरक्षण और पुनर्वास सहित विभिन्न सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। विगत वर्ष 2,386 महिलाएं इन सेवाओं से लाभान्वित हुई हैं। मिशन वात्सल्य के अंतर्गत प्रदेश में 130 बाल देखरेख संस्थाएं संचालित हैं, जिनमें वर्तमान में 2,377 बच्चे निवासरत हैं। इनमें 79 अशासकीय बाल देखरेख संस्थाओं को वर्तमान में अनुदान प्रदान किया जा रहा है। प्रशिक्षण में मिशन शक्ति की 11 और मिशन वात्सल्य की लगभग 68 अशासकीय संस्थाओं के प्रतिनिधियों के साथ विभागीय अधिकारियों एवं डेवलपमेंट पार्टनर्स सहित लगभग 230 प्रतिभागियों ने सहभागिता की।