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न्यायालय परिसर बना रणक्षेत्र, सुनवाई के बीच भिड़े दोनों पक्ष; प्रशासन ने लिया एक्शन

बलरामपुर. जमीन से जुड़े मामले में सुनवाई के लिए तहसील कार्यालय पहुंचे पक्षकार आपस में भिड़ गए. तहसील कार्यालय के पुलिस के निकाले जाने के बाद दोनों पक्ष तहसील परिसर में एक-दूसरे से मारपीट करने लगे. घटना पर वाड्रफनगर तहसीलदार गुरुदत्त पंचभावे की रिपोर्ट पर वाड्रफनगर चौकी पुलिस ने 18 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर धरपकड़ में जुटी है. दरअसल, वाड्रफनगर तहसीलदार के समक्ष मंगलवार को आवेदक इलियासुदीन पिता जलालूदीन विरूद्ध अनावेदकगण रसीद पिता इलियास, अफजल पिता इलियास और इलियास पिता इस्ताज के प्रकरण की सुनवाई हो रही थी. इसी दरम्यान अनावेदक पक्ष के पक्षकार एवं उनके साथ साक्ष्य के लिए उपस्थित गवाहों ने दूसरे पक्ष के अधिवक्ता सिद्वदकी के साथ गाली-गलौच करते हुए वाद-विवाद और मारपीट करने लगे. कोर्ट से निकाले जाने बाद तहसील एवं सिविल कोर्ट परिसर में दोनो पक्षों ने आपस में मारपीट की. घटना के मद्देनजर तहसीलदार पंचभोई ने न्यायालय की गरिमा को क्षति पहुंचाने के साथ शासकीय कार्य में बाधा डालने पर दोनो पक्षों के विरुद्ध शांति भंग करने पर बीएनएस की धारा 170 के तहत कार्रवाई करने पुलिस में नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई है. इसके साथ वीडियो भी संलग्न किया गया, जिससे पुलिस पूरे साक्ष्य के साथ मामले में कार्रवाई कर सके. मामले में पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज करने के बाद गिरफ्तारी की कार्रवाई शुरू कर दी है.

दवा दुकानों की बंदी से बुजुर्गों की चिंता बढ़ी, बोले- पत्नी को दवा नहीं मिली तो तबीयत बिगड़ जाएगी

भोपाल  मध्य प्रदेश में 41  हजार से ज्यादा मेडिकल स्टोर बंद, दवा व्यापार पर बड़ा असर Bhopal में देशभर के केमिस्टों की ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में हड़ताल का असर देखने को मिला है. ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट के आह्वान पर देशभर में मेडिकल स्टोर बंद रहे, जिसमें लाखों केमिस्ट, फार्मासिस्ट और दवा वितरक शामिल हुए. मध्य प्रदेश में भी लगभग 41 हजार से ज्यादा मेडिकल स्टोर बंद रहे. भोपाल केमिस्ट एसोसिएशन के अनुसार ऑनलाइन दवा व्यापार ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट का उल्लंघन है और इससे आम जनता के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा पैदा हो सकता है. केमिस्टों ने आरोप लगाया कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म बिना फार्मासिस्ट निगरानी के दवाओं की सप्लाई कर रहे हैं, जिससे नकली और गलत दवाओं के वितरण की आशंका बढ़ जाती है. साथ ही भारी छूट और कम कीमत की वजह से छोटे और मध्यम मेडिकल स्टोर्स आर्थिक संकट में हैं. दवा विक्रेताओं ने GSR 220(E) और GSR 817(E)/870(E) जैसे प्रावधानों का विरोध करते हुए ऑनलाइन दवा व्यापार को तुरंत नियंत्रित करने की मांग की है।  अकेले भोपाल में 3 हजार से ज्यादा मेडिकल स्टोर्स इस बंद में शामिल हैं। सिर्फ अस्पतालों के अंदर संचालित मेडिकल स्टोर्स को ही खुला रखा गया है। यह बंद ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) की ओर से ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में बुलाया गया है। आईओएसीएडी को जनरल सेक्रेटरी राजीव सिंघल ने बताया कि प्रदेश के सभी रिटेल और थोक दवा व्यवसायियों ने इस बंद का समर्थन किया है। यह मुद्दा सीधे आम लोगों की सेहत से जुड़ा है। घर-घर पहुंच रही ऑनलाइन दवाओं की गुणवत्ता और निगरानी को लेकर अभी स्पष्ट सिस्टम नहीं है, जो गंभीर चिंता का विषय है। हड़ताल से मरीज परेशान, दवा नहीं मिलने पर बुजुर्ग भटकते रहे ग्वालियर के दवा बाजार में दवा लेने पहुंचे बुजुर्ग हरिओम कश्यप ने बताया कि वह अपनी 75 साल की पत्नी के लिए दवा लेने आए थे, लेकिन बाजार बंद होने के कारण उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। काफी देर भटकने पर भी उन्हें दवा नहीं मिलीं। उन्होंने कहा कि जिस दवा के लिए वह आए हैं, वह उनकी पत्नी के लिए बेहद जरूरी है। समय पर दवा नहीं मिलने से उनकी तबीयत और बिगड़ सकती है। अस्पतालों के मेडिकल स्टोर्स बंद से मुक्त     अस्पतालों के अंदर संचालित मेडिकल स्टोर्स को बंद से मुक्त रखा गया है, ताकि मरीजों को कोई परेशानी न हो।     इमरजेंसी मरीजों के लिए जिला स्तर पर टास्क फोर्स बनाई गई है। संपर्क के लिए नंबर जारी किए गए हैं, जिन पर कॉल कर मरीज दवा की मांग कर सकते हैं। टास्क फोर्स जरूरतमंदों तक दवाएं पहुंचाने का काम करेगी कोविड-19 के दौरान सरकार ने ई-फार्मा को छूट दी कोविड-19 महामारी के दौरान, भारत सरकार ने लॉकडाउन में लोगों तक जरूरी दवाइयां पहुंचाने के लिए ई-फार्मा स्टोर्स (ऑनलाइन मेडिकल स्टोर्स) को कई बड़ी रियायतें दी थीं। सरकार ने ई-फार्मा को आवश्यक सेवा का दर्जा दिया, जिससे लॉकडाउन में भी उनकी डिलीवरी बिना रोक-टोक जारी रही। इसके अलावा, नियमों में ढील देते हुए डॉक्टरों के डिजिटल प्रिसक्रिप्शन (व्हाट्सएप या ईमेल पर भेजी गई पर्ची) के आधार पर दवाइयां बेचने की मंजूरी दी गई। घर-घर जाकर दवाइयां पहुंचाने की प्रक्रियाओं को आसान बनाया गया ताकि लोग अस्पतालों या मेडिकल स्टोर पर भीड़ लगाने के बजाय सुरक्षित तरीके से घर बैठे ही अपनी रेगुलर और जरूरी दवाइयां मंगा सकें।

लुधियाना सहित पूरे पंजाब में मेडिकल स्टोर बंद, मरीजों को अस्पतालों का सहारा

लुधियाना. लुधियाना में बुधवार को केमिस्टों की हड़ताल का व्यापक असर देखने को मिला। शहर के अधिकांश मेडिकल स्टोर बंद रहे, जिससे आम लोगों और मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। सुबह से ही शहर के विभिन्न इलाकों में दवा दुकानों के शटर गिरे दिखाई दिए और दवाइयां खरीदने पहुंचे लोगों को निराश होकर लौटना पड़ा। सबसे अधिक परेशानी उन मरीजों को हुई जिन्हें रोजाना नियमित दवाइयों की आवश्यकता रहती है। कई बुजुर्ग मरीज और उनके परिजन एक मेडिकल स्टोर से दूसरे मेडिकल स्टोर तक भटकते दिखाई दिए। कुछ लोगों ने बताया कि उन्हें काफी दूर तक जाकर खुली दवा दुकानों की तलाश करनी पड़ी। केमिस्ट संगठनों का कहना है कि उनकी कई मांगें लंबे समय से लंबित हैं और संबंधित विभागों द्वारा समस्याओं का समाधान नहीं किया जा रहा। इसी के विरोध में यह हड़ताल की गई। संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि यदि उनकी मांगों पर जल्द ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और तेज किया जा सकता है। सिविल अस्पताल के अंदर खुली दुकानें हालांकि राहत की बात यह रही कि सिविल अस्पताल और सीएमसी अस्पताल के भीतर संचालित फार्मेसियां खुली रहीं। वहां मरीजों को आवश्यक दवाइयां उपलब्ध करवाई जाती रहीं। अस्पतालों में भर्ती मरीजों और बाह्य रोगी विभाग में आने वाले लोगों को इससे काफी राहत मिली। अस्पताल प्रशासन की ओर से भी दवाइयों की उपलब्धता बनाए रखने के प्रयास किए गए, ताकि मरीजों को ज्यादा परेशानी न हो। मोगा में ऑनलाइन दवा नीति के खिलाफ केमिस्टों का हल्लाबोल – ऑल इंडिया आर्गेनाइजेशन ऑफ कैमिस्ट एंड ड्रगिस्ट की ओर से घोषित देशव्यापी हड़ताल के दौरान बुधवार को मोगा डिस्टिक केमिस्ट एसोसिएशन के बैनर तले जिले की करीब 800 होलसेल व रिटेल दवा दुकानें बंद रखी गई। हड़ताल को लेकर जिले भर के केमिस्ट मोगा के सिविल अस्पताल के बाहर एकत्रित हुए इस दौरान सभी ने केंद्र सरकार की गलत पॉलिसी और पंजाब सरकार के नियमों में बदलाव न करने के चलते रोष जताया। इस दौरान सिविल अस्पताल में दवाई लेने वाले आए मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। इस दौरान मोगा डिस्ट्रिक्ट कैमिस्ट एसोसिएशन के प्रधान राजीव गर्ग ,दीपक कुमार दीपू सचिव नवीन सूद व संजीव कुमार मिन्ना ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से चलाई गई ऑनलाइन स्कीम योजना उनके कारोबार के लिए एक बहुत बड़ी समस्या बनी हुई है, क्योंकि कोविड़ काल के दौरान केंद्र सरकार ने ऑनलाइन दवाई सप्लाई करने को लेकर प्रस्ताव पारित किया था। कारोबार बहुत हद तक प्रभावित हो रहा लेकिन कोविड़ खत्म होने के बाद उस प्रस्ताव को रद नहीं किया गया। जिसके कारण उनका कारोबार बहुत हद तक प्रभावित हो रहा है। उन्होंने बताया कि बड़ी कंपनियां ऑनलाइन माध्यम से दवाइयां 40 प्रतिशत तक कम कीमत पर बेच रही हैं, जिससे स्थानीय मेडिकल स्टोर और दवा सप्लायरों का कारोबार प्रभावित हो रहा है। हड़ताल के दौरान एसोसिएशन के प्रधान राजीव गर्ग ,दीपक कुमार दीपू सचिव नवीन सूद बताया कि ऑनलाइन कंपनियों को ज्यादा कमीशन दिया जाता है। इससे छोटे दुकानदार आर्थिक दबाव में आ गए हैं। यही नही ड्रग विभाग की गाइडलाइन बहुत सख्त है ऑनलाइन की आड़ में प्रतिबंधित दवाइया सप्लाई की जा रही हैं। लेकिन ऑनलाइन सप्लाई करने वाले कारोबारी पर कोई भी कार्रवाई नहीं होती है। अगर लोकल केमिस्ट कोई प्रतिबंधित दवाई बेचता है तो उसके खिलाफ ड्रग विभाग कार्रवाई कर देता है। इस मौके पर समस्त एग्जीक्यूटिव के सदस्य मौजूद थे।

पंजाब नगर निकाय चुनाव का बिगुल तेज, 7623 उम्मीदवारों की दावेदारी; 29 मई को होगा फैसला

चंडीगढ़. पंजाब में आठ नगर निगम, नगर कौंसिल और नगर पंचायत की 105 सीटों के लिए होने वाले चुनाव में प्रत्याशियों का फाइनल लिस्ट सामने आ चुकी है। पंजाब राज्य चुनाव आयोग की ओर से बुधवार को नामांकन वापिस के बाद उम्मीदवारों की फाइनल लिस्ट जारी कर दी है। जानकारी अनुसार अब चुनावी मैदान में 7623 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला होगा। निकाय चुनाव के लिए 26 मई को पंजाब के जिलों में मतदान होगा। चुनाव आयोग की ओर से जारी प्रत्याशियों की फाइनल लिस्ट के तहत नगर निगम के लिए 386 लोगों ने नाम वापिस ले लिया साथ ही चार प्रत्याशी निर्विरोध चुन लिए गए हैं। अब नगर निगम में 1613 प्रत्याशियों के बीच मुकाबला होगा। उधर नगर कौंसिल चुनाव के लिए 1695 प्रत्याशियों ने पर्चा वापस ले लिया है। कौंसिल चुनाव में 47 उम्मीदवार निर्विरोध चुन लिए गए हैं। ऐसे में अब चुनावी मैदान में 5144 उम्मीदवारों के बीच ही मुकाबला होगा। नगर पंचायत की सीटों के लिए 312 प्रत्याशियों ने नाम वापस ले लिया है। 28 उम्मीदवार निर्विरोध चुन लिए गए हैं। नगर पंचायत की सीटों के लिए अब 866 प्रत्याशियों के बीच मुकाबला होगा। जानकारी अनुसार नगर निगम नगर कौंसिल और नगर पंचायत की 105 सीटों के लिए कुल 10809 आवेदन जमा हुए थे। स्क्रूटनी के बाद 10096 उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने के योग्य पाया गया। मंगलवार को नामांकन वापसी की अंतिम दििन था। चुनाव से जुड़ी खास बातें – 26 मई को सभी 105 सीटों के लिए मतदान होगा। 29 मई को मतगणना और रिजल्ट घोषित कर दिया जाएगा। नगर निगम की सीटों के लिए अब 1695 उम्मीदवार ही मैदान में नगर कौंसिल की सीटों के लिए 5144 उम्मीदवार ही बचे मैदान में नगर पंचायत के लिए अब 866 उम्मीदवार मैदान में हैं।

7.5 करोड़ खर्च फिर भी घटिया निर्माण, निरीक्षण में खुली नहर घोटाले की परतें

डोंगरगढ़. डोंगरगढ़ क्षेत्र में देवकट्टा जलाशय से बेलगांव तक बनाई गई करीब 7.5 करोड़ रुपए की नहर परियोजना में गंभीर तकनीकी गड़बड़ियां सामने आने से हड़कंप मच गया है. ताजा निरीक्षण में नहर लाइनिंग की गुणवत्ता पर बड़े सवाल खड़े हुए हैं. जांच के दौरान कई स्थानों पर लाइनिंग की मोटाई निर्धारित मानक से बेहद कम पाई गई, जिससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता और विभागीय निगरानी दोनों संदेह के घेरे में आ गई हैं. जानकारी के मुताबिक नहर लाइनिंग की मोटाई 4 इंच तय थी, लेकिन मौके पर कई हिस्सों में यह 2 इंच से भी कम मिली. कमजोर कंक्रीट और घटिया निर्माण के कारण डेढ़ साल के भीतर ही लाइनिंग उखड़ने लगी है. कई स्थानों पर बेस लेयर खुल चुकी है और नहर की स्थिति किसी टूटी नाली जैसी दिखाई दे रही है. नहर में जगह-जगह सिल्ट और कचरा जमा होने से जल प्रवाह भी प्रभावित हो रहा है. सिर्फ मुख्य नहर ही नहीं, उससे जुड़ी माइनर नहरों में भी भारी लापरवाही सामने आई है. किनारों की फिलिंग अधूरी बताई जा रही है और पर्याप्त कंपैक्शन नहीं होने से बरसात में कटाव का खतरा बढ़ गया है. कई हिस्सों में कंक्रीट की पतली परत उखड़ रही है, जिससे निर्माण में भ्रष्टाचार के आरोप और तेज हो गए हैं. बुधवार को विभागीय अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया. निरीक्षण के दौरान खामियों को गंभीर मानते हुए ठेकेदार को कड़ी फटकार लगाई गई और दोषपूर्ण हिस्सों में तत्काल सुधार के निर्देश दिए गए. जानकारी यह भी सामने आई है कि मरम्मत कार्य शुरू करा दिया गया है. किसानों का बड़ा आरोप किसानों का कहना है कि निर्माण कार्य अधूरा और मानक से कम होने के बावजूद पूरा भुगतान कर दिया गया. उनका दावा है कि यदि माप पुस्तिका और भुगतान रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच हो जाए तो पूरी गड़बड़ी सामने आ सकती है. ग्रामीणों और किसानों ने चेतावनी दी है कि समय रहते गुणवत्ता सुधार नहीं किया गया तो आगामी बारिश में नहर की लाइनिंग बह सकती है, जिससे सिंचाई व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित होने का खतरा है.

पेट्रोल-डीजल बचाने की पहल, समर वेकेशन में ऑनलाइन होगी छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की सुनवाई

बिलासपुर. सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने संसाधन बचाने और अदालती कामकाज को सुचारू रखने के लिए कई बड़े बदलाव किए हैं. चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा के निर्देश पर हाई कोर्ट प्रशासन ने समर वेकेशन के लिए एक विशेष सर्कुलर जारी किया है. अब छुट्टियों के दौरान मामलों की सुनवाई मुख्य रूप से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए होगी, ताकि भीषण गर्मी में अधिवक्ताओं और याचिकाकर्ताओं को बेवजह कोर्ट न आना पड़े. मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा के मार्गदर्शन में जारी परिपत्र के अनुसार, अवकाश अवधि में मामलों की सुनवाई सामान्यतः वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से की जा सकेगी. इसका उद्देश्य अनावश्यक आवागमन कम करना और संसाधनों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना बताया गया है. परिपत्र में हाईकोर्ट और जिला न्यायपालिका के कर्मचारियों को सप्ताह में अधिकतम दो दिन “वर्क फ्रॉम होम” सुविधा देने का भी प्रस्ताव रखा गया है. इसके लिए यह शर्त रखी गई है कि कार्यालय में कम से कम 50 प्रतिशत कर्मचारियों की उपस्थिति बनी रहे ताकि कामकाज प्रभावित न हो. घर से कार्य करने वाले कर्मचारियों को फोन और अन्य आधिकारिक माध्यमों से उपलब्ध रहना होगा. ईंधन बचत और सरकारी संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए न्यायिक अधिकारियों, रजिस्ट्री अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच कार-पूलिंग व्यवस्था अपनाने का सुझाव भी दिया गया है. साथ ही न्यायाधीशों को भी आवश्यकतानुसार कार-पूलिंग के लिए प्रोत्साहित किया गया है. हाईकोर्ट प्रशासन ने कहा है कि, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और अन्य तकनीकी व्यवस्थाओं को सुचारु बनाने के लिए संबंधित रजिस्ट्री अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए जाएंगे.

स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर एक्शन मोड में उप मुख्यमंत्री शुक्ल, विकास कार्यों की की बड़ी समीक्षा

स्वास्थ्य अधोसंरचना विकास कार्यों की उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने की वृहद समीक्षा निर्माण कार्य तय समय-सीमा में गुणवत्ता के साथ पूर्ण करने के निर्देश भोपाल  उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय में मध्यप्रदेश भवन विकास निगम (एमपी बीडीसी) द्वारा निर्माणाधीन स्वास्थ्य अधोसंरचना विकास कार्यों की वृहद समीक्षा की। उन्होंने मेडिकल कॉलेज सहित अन्य स्वास्थ्य संस्थाओं के उन्नयन, सुदृढ़ीकरण एवं नवनिर्माण कार्यों की विस्तार से समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि सभी निर्माण कार्य निर्धारित समय-सीमा में गुणवत्ता के साथ पूर्ण किए जाएं। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक, तकनीकी एवं आर्थिक विषयों को तत्काल अग्रेषित किया जाए, ताकि उनका शीघ्र निराकरण कर आमजन को स्वास्थ्य सेवाओं का त्वरित लाभ उपलब्ध कराया जा सके। स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा अधोसंरचना को सुदृढ़ बनाने के लिए स्वीकृत परियोजनाओं में तेजी से कार्य किया जा रहा है। विभिन्न योजनाओं अंतर्गत परियोजनाओं की प्रगति, तकनीकी स्वीकृति, निविदा, कार्यादेश एवं निर्माण कार्यों की उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने वृहद समीक्षा की। राज्य एवं केंद्र मद की राशि ₹446 करोड़ 50 लाख लागत की कुल 24 में तकनीकी स्वीकृति, प्रशासकीय स्वीकृति, निविदा, कार्यादेश एवं निर्माण कार्य प्रारंभ हो चुके हैं। कार्य में 32.2 प्रतिशत वित्तीय प्रगति दर्ज की गई है। 4 परियोजनाएं पूर्ण हो चुकी हैं। 8 परियोजनाएं मई, 7 जुलाई एवं 2 परियोजनाएं अगस्त-अक्टूबर तक पूर्ण होने की संभावना है। एनएचएम/ईसीआरपी/पीएम-अभिम योजना अंतर्गत कुल 51 परियोजनाएं स्वीकृत हैं। इनमें 49 परियोजनाओं में तकनीकी स्वीकृति, निविदा एवं कार्यादेश जारी किए जा चुके हैं तथा 49 परियोजनाओं में कार्य प्रारंभ हो चुका है। 15 परियोजनाएं नवंबर-दिसंबर तक पूर्ण होने की संभावना है। समीक्षा के दौरान बताया गया कि धार स्थित सीसीएचबी परियोजना भूमि आवंटन, मैहर जिला अस्पताल हेतु भूमि अभी अंतिम रूप से निर्धारित नहीं हुई है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने स्थानीय प्रशासन से संपर्क में रहकर शीघ्र कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। चिकित्सा शिक्षा अंतर्गत राज्य मद की कुल 17 परियोजनाएं स्वीकृत हैं, जिनकी प्रशासकीय स्वीकृति राशि ₹2 हजार 780 करोड़ 2 लाख है। इनमें 15 परियोजनाओं में तकनीकी स्वीकृति, निविदा एवं कार्यादेश जारी किए जा चुके हैं तथा 15 परियोजनाओं में कार्य प्रारंभ हो चुका है। कार्य में 76.28 प्रतिशत वित्तीय प्रगति दर्ज की गई है।सिंगरौली नर्सिंग कॉलेज के लिए भूमि आवंटन, मंडला नर्सिंग कॉलेज के शीघ्र डीपीआर तैयार करने के उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने निर्देश दिए। कुल ₹4 हजार 293 करोड़ लागत की 92 परियोजनाओं में अब तक कुल 67.59 प्रतिशत वित्तीय प्रगति दर्ज की गई है। बुधनी, जिला सीहोर में नवीन मेडिकल कॉलेज एवं 500 बिस्तरीय अस्पताल निर्माण परियोजना ₹714.91 करोड़ की लागत से निर्माणाधीन है। परियोजना में 88.44 प्रतिशत भौतिक प्रगति दर्ज की गई है। उज्जैन में मेडिकल कॉलेज निर्माण एवं विकास कार्य ₹592.30 करोड़ की लागत से संचालित किया जा रहा है। परियोजना में 42.86 प्रतिशत कार्य किया जा चुका है। इंदौर में महाराजा यशवंतराव चिकित्सालय में उन्नयन एवं नवीनीकरण कार्य ₹773.07 करोड़ की लागत से किए जा रहे हैं। रीवा स्थित श्यामशाह मेडिकल कॉलेज में ओपीडी ब्लॉक, मैटरनिटी ब्लॉक, स्टाफ क्वार्टर, नर्सिंग कॉलेज एवं हॉस्टल सहित संबद्ध निर्माण एवं नवीनीकरण कार्य ₹321.94 करोड़ की लागत से प्रगति पर हैं।मंडला में नवीन मेडिकल कॉलेज निर्माण परियोजना ₹249.63 करोड़ की लागत से संचालित की जा रही है। परियोजना में 42 प्रतिशत भौतिक प्रगति दर्ज की गई है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने समीक्षा के दौरान निर्माण कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रशासन एवं विभागीय अधिकारियों को निर्माण एजेंसियों को आवश्यक सहयोग प्रदान करने तथा सभी परियोजनाओं को निर्धारित समय-सीमा में गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूर्ण कराने के निर्देश दिए। बैठक में आयुक्त लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा धनराजू एस, एमडी एमपीबीडीसी सिबी चक्रवर्ती, एमडी एमपीपीएचएससीएल मयंक अग्रवाल सहित विभागीय अधिकारी एवं निर्माण एजेंसी के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।  

छात्रावास व्यवस्था में होगा बदलाव, मंत्री डॉ. शाह बोले- ब्लॉक स्तर पर किया जाए युक्तियुक्तकरण

बिखरे हुए गांवों के स्थान पर ब्लॉक मुख्यालय में छात्रावासों का किया जाये युक्तियुक्तकरण : मंत्री डॉ. शाह परामर्श समिति ने मंत्री डॉ. शाह के द्वारा क्षेत्र में किए नवाचारों को सराहा जनजातीय कार्य विभाग की परामर्श समिति की बैठक हुई भोपाल  जनजातीय कार्य विभाग की विभागीय परामर्श समिति की बैठक मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह की अध्यक्षता में वल्लभ भवन में हुई। बैठक में विभागीय योजनाओं पर चर्चा की गई और महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए। मंत्री डॉ. शाह ने कहा कि बिखरे हुए गांवों के स्थान पर ब्लॉक मुख्यालय में छात्रावासों का युक्तियुक्तकरण किया जाए। ब्लॉक मुख्यालय में जो कॉलेज बने हैं वहाँ जनजातीय क्षेत्र के ग्रामों से विद्यार्थियों को आने के लिये बस सुविधा प्रारंभ की जाए। बैठक में परामर्श समिति के सदस्यों ने मंत्री डॉ. शाह द्वारा अपने क्षेत्र में जनजातीय समाज की कॉलेज जाने वाली छात्राओं के लिए प्रारंभ की गई बस सुविधा और विभिन्न कन्‍या छात्रावासों का नामकरण रानी दुर्गावती और शबरी माता के नाम पर किए जाने की सराहना की गई। बैठक में विधायक कुंवर सिंह टेकाम, जयसिंह मरावी, फुंदेलाल सिंह मार्को, सुगंगा सज्‍जन सिंह उइके, राजन मंडलोई तथा प्रमुख सचिव गुलशन बामरा एवं आयुक्त तरुण राठी उपस्थित थे। मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह ने कहा कि समिति की बैठक नियमित रूप से होनी चाहिए। जब भी विधानसभा की बैठक हो तब परामर्श समिति की बैठक भी आयोजित की जाए। मंत्री डॉ. शाह ने कहा कि विशेष पिछड़ी जनजाति भारिया में जन्म दर की कमी पर विभाग द्वारा विशेषज्ञों से अध्‍ययन कराकर शोध रिपोर्ट बनवाएं। बैठक में यह निर्णय किया गया कि मध्यप्रदेश की विशेष पिछड़ी जनजातियों सहारिया, बैगा और भारिया के समग्र कल्याण के लिए विशेष प्रयास किए जाँए। बैगा जनजाति के लिए उमरिया, सहारिया के लिए शिवपुरी और भारिया जनजाति के लिए छिंदवाड़ा में विशेष विद्यालय प्रारंभ किए जाएं। मंत्री डॉ. शाह ने कहा कि इन विशेष पिछड़ी जनजातियों को हर तरीक़े से प्रोत्साहन दिए जाने की ज़रूरत है। पातालकोट के भारिया बहुल ग्रामों के समग्र विकास के लिए ठोस कार्य करें। उन्होंने कहा कि विभागीय परामर्श समिति के सदस्यों और विधायकगणों के सहयोग से तीनों विशेष पिछड़ी जनजातियों के एक-एक गाँव को आदर्श बनाया जाएगा और यहाँ शासन की हर योजना का लाभ दिया जाना सुनिश्चित किया जाएगा। वनवासियों को भूमि पट्टे देने में सैटेलाइट इमेज को प्रूफ़ के तौर पर किया जाये मान्य बैठक में सुझाव दिया गया है कि छात्रावासों में विद्यार्थियों के लिए चादर एवं अन्य सामग्री की राशि DBT के माध्यम से न देकर सामग्री प्रदान की जाए। वहीं विभिन्न छात्रावासों और आश्रमों में अधीक्षकों की पृथक से भर्ती कर शिक्षकों को अध्यापन कार्य में संलग्न किए जाने की आवश्यकता है। वनवासियों को भूमि पट्टे देने में सैटेलाइट इमेज को प्रूफ़ के तौर पर मान्य किए जाने के लिए भी जनजातीय कार्य विभाग के मंत्री डॉ. विजय शाह की पहल को सराहा गया। मंत्री डॉ. शाह ने कहा कि विभाग के सभी संभागीय अधिकारियों एवं कलेक्टर और विधायकगणों और कलेक्टर के साथ संयुक्त बैठक कर जनजातीय कार्य विभाग से संबंधित विभिन्न योजनाओं का लाभ जनजाति वर्ग को मिले यह सुनिश्चित किया जाए।  

निर्माणाधीन परियोजनाओं में देरी बर्दाश्त नहीं, मंत्री सिलावट ने दिए समय-सीमा में काम पूरे करने के निर्देश

समय-सीमा में पूर्ण करें निर्माणाधीन परियोजनाओं के कार्य: जल संसाधन मंत्री सिलावट सिंचाई परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की भोपाल  जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने कहा है कि जल संसाधन विभाग की विभिन्न निर्माणाधीन परियोजनाओं का कार्य समय-सीमा में पूर्ण ‍किया जाए। कार्यों में गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाए। वरिष्ठ अधिकारी समय-समय पर कार्यो का निरीक्षण करें एवं निरीक्षण प्रतिवेदन भिजवाएं। आगामी सिंहस्थ के मद्देनजर उज्जैन में कराए जा रहे कार्यों पर विशेष ध्यान दिया जाए एवं उनकी प्रगति की निरंतर समीक्षा की जाए। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का लक्ष्य है कि आगामी सिंहस्थ में श्रद्धालुओं को शिप्रा के निर्मल जल में स्नान कराया जाए और उनकी यात्रा सहज और सुगम हो। मंत्री सिलावट ने मंगलवार को मंत्रालय में जलसंसाधन विभाग की विभिन्न निर्माणाधीन योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। बैठक में अपर मुख्य सचिव राजेश राजौरा सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। मंत्री सिलावट ने विभाग की तीन प्रमुख राष्ट्रीय परियोजनाओं केन-बेतवा लिंक राष्ट्रीय परियोजना, संशोधित पार्वती-कालीसिंध चंबल लिंक परियोजना एवं तापी मेगा रिचार्ज परियोजना में कराये जा रहे कार्यों की विस्तृत जानकारी प्राप्त की और अधिकारियों को कार्य के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। सिलावट ने उज्जैन में कराए जा रहे सिंहस्थ सबंधी कार्यों कान्ह डक्ट परियोजना, सेवरखेडी-सिलारखेडी परियोजना और क्षिप्रा नदी पर घाट निर्माण कार्य की समीक्षा की। इसके साथ ही उज्जैन, इंदौर और देवास जिलों में निर्माणाधीन बैराजों की अद्यतन जानकारी भी प्राप्त की गई। उन्होंने विभागांतर्गत निर्माणाधीन वृहद, मध्यम एवं लघु सिंचाई परियोजनाओं की वर्तमान प्रगति की जानकारी ली। मंत्री सिलावट द्वारा भोपाल में केरवा बांध के क्षतिग्रस्त वेस्ट वियर निर्माण कार्य के अंतर्गत बिजली लाइन शिफ्टिंग एवं सुधार कार्य समय-सीमा में पूर्ण किये जाने के निर्देश दिये। मंत्री सिलावट ने सीएम मॉनिटरिंग से संबंधित प्रकरणों एवं मुख्यमंत्री की विभागीय घोषणाओं से संबंधित सभी बिन्दुओं पर जानकारी प्राप्त की और प्रकरणों के त्वरित निराकरण के निर्देश दिए। साथ ही इन प्रकरणों की सतत निगरानी करते हुए, इनकी प्रगति से संबंधित रिपोर्ट आगामी पन्द्रह दिवस में दिये जाने के निर्देश दिये।  

मध्यप्रदेश में गेहूं खरीद ने तोड़ा रिकॉर्ड, 90 लाख मीट्रिक टन के पार पहुंचा उपार्जन

भोपाल  खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत ने बताया है कि अभी तक 12 लाख 30 हजार 426 किसानों से 90 लाख 8 हजार 469 मीट्रिक टन गेहूँ की खरीदी की जा चुकी है। उन्होंने बताया है की तौल पर्ची बनाने का समय शाम 6 बजे से बढ़ाकर रात 10 बजे तक तथा देयक जारी करने का समय रात 12 तक कर दिया गया है। गेहूँ का उपार्जन सप्ताह में 6 दिन सोमवार से शनिवार तक किया जा रहा है। मंत्री राजपूत ने बताया कि किसानों को 18 हजार 707 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। उपार्जित गेहूँ में से 78 लाख 52 हजार 546 मीट्रिक टन का परिवहन किया जा चुका है। किसानों से 2585 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य एवं राज्य सरकार द्वारा 40 रुपये प्रति क्विंटल बोनस राशि सहित 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूँ का उपार्जन किया जा रहा है। मंत्री राजपूत ने बताया है कि गेहूँ उपार्जन 23 मई 2026 तक किया जायेगा। प्रत्येक उपार्जन केन्द्र पर तौल कांटों की संख्या 4 से बढ़ाकर 6 की गई तथा तौल कांटों की संख्या में वृद्धि का अधिकार जिलों को दिए जाने का निर्णय लिया गया। खाद्य विभाग द्वारा प्रति घंटा उपार्जन की मॉनिटरिंग की जा रही है।