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नहिं दरिद्र कोउ दुखी न दीना’ की अवधारणा पर आगे बढ़ रहा यूपी, आंगनवाड़ी से रखी जा रही विकसित भारत की नींव: सीएम योगी

वाराणसी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्ववर्ती सरकारों पर तीखा हमला करते हुए कहा कि 2017 से पहले प्रदेश में बच्चों के पोषाहार की सप्लाई तक में शराब माफिया का दखल था। तीन-तीन महीने तक आंगनवाड़ी केंद्रों पर राशन नहीं पहुंचता था और बच्चे अपना टाट लेकर केंद्रों पर आते थे। न शुद्ध पेयजल की व्यवस्था थी, न शौचालय और न गर्म भोजन की सुविधा। पूर्ववर्ती सरकारों में गलती कोई और करता था, लेकिन उसकी गाली आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों को मिलती थी। 2017 के बाद सरकार ने पोषाहार वितरण व्यवस्था में बदलाव कर पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की। आज आंगनवाड़ी केंद्रों को आधुनिक सुविधाओं से लैस कर पोषण और प्रारंभिक शिक्षा का मजबूत आधार बनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को गर्भवती एवं धात्री महिलाओं, बच्चों, किशोरियों तथा उनके परिवारों के पोषण, स्वास्थ्य, देखभाल को समर्पित 9वें राष्ट्रीय पोषण माह (9 सितंबर से 8 अक्टूबर, 2026) का वाराणसी में शुभारंभ किया। सीएम ने कार्यक्रम स्थल पर लगी प्रदर्शनी का अवलोकन किया। इसके साथ ही उन्होंने नन्हें बच्चों को गोद में लेकर दुलारा और उनका अन्नप्राशन कराया। सीएम योगी ने इस मौके पर यूपी समेत देश विभिन्न राज्यों से आई आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों से संवाद किया और आंगनवाड़ी केंद्रों पर आधारित लघु फिल्म भी देखी। नहिं दरिद्र कोउ दुखी न दीना’ की अवधारणा पर आगे बढ़ रहा यूपी मुख्यमंत्री ने शासन की आदर्श व्यवस्था की शाश्वत अवधारणा को रामराज्य से जोड़ते हुए गोस्वामी तुलसीदास की पंक्तियों ‘नहिं दरिद्र कोउ दुखी न दीना। नहिं कोउ अबुध न लच्छन हीना॥’ का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इसका आशय ऐसी व्यवस्था से है, जहां कोई गरीब, दुखी, दीन-हीन या कमजोर न हो और हर व्यक्ति स्वस्थ एवं समर्थ समाज के निर्माण में योगदान दे सके। इसी सोच के साथ केंद्र और प्रदेश सरकार मातृ एवं शिशु पोषण, महिलाओं के स्वास्थ्य, प्रारंभिक शिक्षा और आंगनवाड़ी व्यवस्था को मजबूत करने में जुटी है। कुशल युवा ही भारत को नेतृत्व देगा सीएम ने कहा कि सक्षम विद्यार्थी आगे चलकर कुशल युवा बनेगा और यही कुशल युवा आत्मनिर्भर भारत की आधारशिला रखेगा। वही भारत को नेतृत्व देगा और विकसित भारत के संकल्पों को आगे बढ़ाएगा। इसलिए बच्चों के शुरुआती वर्षों में पोषण, स्वास्थ्य और शिक्षा पर निवेश देश के भविष्य में निवेश है। प्रधानमंत्री मोदी जी ने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में वर्ष 2001 से जिन योजनाओं और विजन को जमीन पर उतारा, वही मॉडल आज देश के अलग-अलग हिस्सों में दिखाई दे रहा है। उत्तर प्रदेश भी इसी दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। 70 हजार से अधिक आंगनवाड़ी केंद्रों का बदला स्वरूप सीएम योगी ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में आंगनवाड़ी केंद्रों की स्थिति बेहद खराब थी। बड़ी संख्या में केंद्र जर्जर अवस्था में थे। बच्चों के लिए पेयजल, शौचालय और हॉट मील जैसी मूलभूत सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं थीं। पोषाहार की आपूर्ति भी नियमित नहीं थी। सरकार बनने के बाद जब आंगनवाड़ी केंद्रों की समीक्षा की गई तो पोषाहार आपूर्ति व्यवस्था में भी गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। उस समय पोषाहार की आपूर्ति से जुड़ी व्यवस्था में एक शराब माफिया से जुड़े व्यक्ति के शामिल होने की जानकारी सामने आई थी। इसे देखते तत्काल इसकी गुणवत्ता की जांच के आदेश दिए गए और आपूर्ति व्यवस्था में बदलाव किया गया। पिछले साढ़े नौ वर्षों में 70 हजार से अधिक आंगनवाड़ी केंद्रों को नया स्वरूप दिया गया। नए मॉडल आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों के अनुकूल आधुनिक सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। एक केंद्र के निर्माण एवं रिनोवेशन पर करीब 30 लाख रुपये तक खर्च किए जा रहे हैं। बाउंड्रीवॉल, बच्चों के लिए शौचालय, शुद्ध पेयजल, पोषण वाटिका और एलईडी स्क्रीन जैसी सुविधाओं को प्राथमिकता दी जा रही है। ‘मेरी आंगनवाड़ी-मेरी जिम्मेदारी’ बने पोषण माह का आधार मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष राष्ट्रीय पोषण माह की थीम ‘मेरी आंगनवाड़ी, मेरी जिम्मेदारी’ रखी गई है। इसका उद्देश्य स्पष्ट है कि आंगनवाड़ी केंद्रों की जिम्मेदारी केवल सरकार की नहीं है। प्रत्येक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका, ग्राम पंचायत और गांव के नागरिकों को अपनी आंगनवाड़ी की जिम्मेदारी लेनी होगी। पोषण माह में पांच प्रमुख विषयों- आहार विविधता और पर्याप्त प्रोटीन, आंगनवाड़ी केंद्रों पर ताजा एवं हॉट-कुक्ड मील, सामुदायिक स्वामित्व एवं जवाबदेही, बाल शिक्षा यानी प्रारंभिक शिक्षा और प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना पर खास ध्यान देने की आवश्यकता है। बच्चों के शारीरिक व मानसिक विकास के लिए संतुलित एवं विविध आहार जरूरी है। भोजन में अत्यधिक नमक या मिठास से बचना चाहिए। केवल मूंग की दाल की खिचड़ी देने के बजाय उसमें गाजर व दूसरी सब्जियां शामिल करने से भोजन का स्वाद, रंग और पोषण तीनों बेहतर होते हैं। पोषण अभियान तभी सफल होगा, जब बच्चे खुशी से भोजन करें। 1.90 लाख आंगनवाड़ी केंद्रों से 1.56 करोड़ लाभार्थियों तक सेवाएं सीएम ने कहा कि प्रदेश में करीब 1.90 लाख आंगनवाड़ी केंद्र स्वीकृत हैं और 897 बाल विकास परियोजनाओं के माध्यम से सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। हर माह करीब 1.56 करोड़ लाभार्थियों तक पोषण सेवाएं पहुंच रही हैं। करीब 35.46 लाख बच्चों को हॉट-कुक्ड मील उपलब्ध कराया जा रहा है, जबकि करीब 46 लाख बच्चों के वजन, स्टंटिंग और स्वास्थ्य की नियमित निगरानी की जा रही है। गर्भावस्था से लेकर बच्चे के जीवन के शुरुआती 1,000 दिन बेहद महत्वपूर्ण होते हैं।  टेक-होम राशन में तकनीक और पारदर्शिता मुख्यमंत्री ने बताया कि भारत सरकार की नवीन पोषण गाइडलाइन के अनुरूप प्रदेश में रेसिपी आधारित अनुपूरक पोषाहार लागू किया गया है। टेक-होम राशन यानी टीएचआर व्यवस्था को तकनीक आधारित, पारदर्शी और जवाबदेह बनाया गया है। प्रदेश में 204 टीएचआर प्लांट स्थापित हो चुके हैं और इनके संचालन में महिला स्वयं सहायता समूहों की महत्वपूर्ण भूमिका है। इस व्यवस्था से 20 लाख से अधिक महिलाएं जुड़ी हैं। टीएचआर के परिवहन से लेकर आंगनवाड़ी केंद्र तक पहुंचने की प्रक्रिया में जीपीएस ट्रैकिंग और रियल टाइम मॉनिटरिंग की व्यवस्था की गई है। प्रत्येक पैकेट पर क्यूआर कोड लगाया गया है, जिससे उसकी डिजिटल ट्रेसिबिलिटी सुनिश्चित हो सके। पोषाहार की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए क्वालिटी कंट्रोल की जिम्मेदारी भारत सरकार की महत्वपूर्ण संस्था को दी गई है। आंगनवाड़ी प्रारंभिक शिक्षा की पहली पाठशाला योगी ने कहा कि आंगनवाड़ी केंद्रों को बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा, सीखने की क्षमता और सर्वांगीण … Read more

तकनीकी कॉलेजों के छात्रों को खेल मंच, CG में 15 विधाओं में दिखाएंगे अपनी प्रतिभा

भिलाई. इंजीनियरिंग और तकनीकी शिक्षा की व्यस्त पढ़ाई के बीच अब सीएसवीटीयू से जुड़े विद्यार्थियों को मैदान पर अपनी प्रतिभा साबित करने का बड़ा मौका मिलने जा रहा है। छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय की खेल समिति ने एकीकृत राज्य स्तरीय खेल प्रतियोगिता 2026-27 की तैयारी शुरू कर दी है। तकनीकी विश्वविद्यालय भिलाई ने महाविद्यालयों से खिलाड़ियों की जानकारी मांगी है। महिला और पुरुष दोनों वर्गों में कुल 15 खेल विधाओं को शामिल किया गया है। इनमें कबड्डी, टेबल टेनिस, वॉलीबॉल, क्रिकेट, फुटबॉल, बास्केटबॉल, बैडमिंटन, खो-खो, शतरंज, रस्साकशी, भारतोलन, गटका, बॉक्सिंग, एथलेटिक्स और कैरम शामिल हैं। तकनीकी विश्वविद्यालय ने संबद्ध महाविद्यालयों को प्रस्तावित प्रतियोगिता में भाग लेने वाले खिलाड़ियों की आवश्यक जानकारी निर्धारित प्रारूप में 10 सितंबर तक भेजने के निर्देश दिए हैं। प्रतियोगिता की खास बात यह है कि खेलों को केवल पुरुष विद्यार्थियों तक सीमित नहीं रखा गया है। महिला वर्ग को भी सभी निर्धारित खेल विधाओं में अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर दिया गया है। इससे तकनीकी संस्थानों में पढ़ने वाली छात्राओं की खेल प्रतिभा को मंच मिलने की उम्मीद है। तकनीकी संस्थानों के विद्यार्थियों के लिए यह प्रतियोगिता सिर्फ ट्रॉफी जीतने तक सीमित नहीं होगी। अलग-अलग कॉलेजों से निकलने वाले प्रतिभाशाली खिलाड़ी विश्वविद्यालय स्तर पर अपनी पहचान बनाने के बाद आगे की प्रतियोगिताओं के लिए भी तैयार हो सकते हैं।

पंजाब में मुफ्त बिजली का बढ़ता बोझ, पावरकॉम को सरकार से ₹9,650 करोड़ लेने हैं; अब लेगा ₹10 हजार करोड़ का लोन

पटियाला  पंजाब में उपभोक्ताओं को मुफ्त बिजली की सुविधा जारी है लेकिन इसकी कीमत पावरकाम की आर्थिक सेहत पर भारी पड़ रही है। पंजाब सरकार से बिजली सब्सिडी के 7550 करोड़ रुपये का भुगतान लंबित है, जबकि विभिन्न सरकारी विभागों पर बिजली बिलों के करीब 2100 करोड़ रुपये और बकाया हैं। यानी सरकार और उसके विभागों पर पावरकाम का कुल बकाया करीब 9650 करोड़ रुपये पहुंच गया है।  नकदी संकट के बीच पावरकाम को अपने जरूरी खर्च चलाने के लिए बाजार से कर्ज लेने की तैयारी करनी पड़ रही है। 7550 करोड़ रुपये की लंबित सब्सिडी में करीब 4000 करोड़ रुपये पिछले दो वित्तीय वर्षों का बकाया ब्याज समेत है।  इसके अलावा करीब 3550 करोड़ रुपये चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 की सब्सिडी के हैं। सरकारी विभागों में जलापूर्ति एवं स्वच्छता विभाग पर करीब 1000 करोड़, स्थानीय निकाय विभाग पर 850 करोड़, ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग पर 380 करोड़ और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग पर करीब 125 करोड़ रुपये के बिजली बिल लंबित हैं। आम उपभोक्ता का बिल बकाया होने पर पावरकाम कनेक्शन काट सकता है, लेकिन सरकारी विभागों और आवश्यक सेवाओं के कनेक्शनों पर ऐसी कार्रवाई व्यावहारिक रूप से आसान नहीं है। इसका सीधा असर निगम के कैश फ्लो पर पड़ रहा है। बिजली की बढ़ती मांग के बीच पावरकाम को बाहर से बिजली और कोयला खरीदने, मरम्मत के लिए स्पेयर पार्ट्स व अन्य सामग्री जुटाने तथा वेतन समेत नियमित खर्चों का भुगतान करने के लिए अतिरिक्त वित्तीय संसाधनों की जरूरत है। बिना सरकारी गारंटी 10 हजार करोड़ जुटाएगा पावरकाम आर्थिक दबाव के चलते पावरकाम अब बिना सरकारी गारंटी करीब 10 हजार करोड़ रुपये का बाजार ऋण लेने की तैयारी में है। इसके लिए गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर (एनसीडी) और बॉन्ड जारी करने की योजना बनाई गई है। प्रक्रिया के लिए मर्चेंट बैंकरों से ऑनलाइन बोलियां भी आमंत्रित की गई हैं। पावरकाम पर पहले से करीब 18 हजार करोड़ रुपये की देनदारियां हैं। ऐसे में नया कर्ज उसके ब्याज बोझ को और बढ़ाएगा। दरें घटाने से 7800 करोड़ के राजस्व घाटे का खतरा पीएसईबी इंजीनियर्स एसोसिएशन के महासचिव इंजीनियर अजयपाल सिंह अटवाल के मुताबिक, हाल के एआरआर में खर्च का वास्तविक आकलन कम करके बिजली दरें घटाई गईं। उनका दावा है कि इससे पावरकाम पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव पड़ा है और चालू वित्तीय वर्ष में वास्तविक खर्च की जरूरतों के मुकाबले करीब 7800 करोड़ रुपये के राजस्व घाटे का सामना करना पड़ सकता है। वहीं, बिजली दरों में कटौती के बाद सरकार का सालाना सब्सिडी बिल करीब 5300 करोड़ रुपये घटकर लगभग 15,200 करोड़ रुपये रह गया है, लेकिन मौजूदा सब्सिडी का भुगतान समय पर नहीं हो रहा। बिजली की रिकॉर्ड मांग के बीच 1584 मेगावाट उत्पादन ठप पंजाब में बिजली की रिकॉर्ड मांग के बीच मंगलवार को 1584 मेगावाट उत्पादन क्षमता ठप रही। राज्य में बिजली की मांग 16,505 मेगावाट तक पहुंच गई, जबकि पावरकाम के अपने स्रोतों से महज 4605 मेगावाट बिजली उपलब्ध रही। सरकारी क्षेत्र के गोइंदवाल थर्मल का 270 मेगावाट का एक यूनिट मंगलवार को बंद हो गया।  रोपड़ और लहरा मुहब्बत थर्मल का एक-एक यूनिट पहले से बंद है। कोयले की कमी के कारण निजी क्षेत्र के तलवंडी साबो और राजपुरा थर्मल भी पूरी क्षमता से नहीं चल सके। दोनों से 894 मेगावाट कम उत्पादन हुआ। 3380 मेगावाट क्षमता वाले इन दोनों प्लांटों से कुल 2486 मेगावाट बिजली ही मिली।  तलवंडी साबो में करीब पांच और राजपुरा में छह दिन का कोयला ही बचा है। रणजीत सागर बांध और यूबीडीसी के चार यूनिट बंद रहने से भी 195 मेगावाट उत्पादन प्रभावित रहा। मंगलवार की मांग पिछले साल के इसी दिन के मुकाबले 7344 मेगावाट अधिक रही। सुबह नौ बजे 16,505 मेगावाट की मांग के मुकाबले पावरकाम ने नार्दर्न ग्रिड से 11,171 मेगावाट बिजली ली, जबकि उसका शेड्यूल 11,150 मेगावाट का था।   

विदिशा में शुरू हुआ कैंसर डे-केयर सेंटर, अब इलाज के लिए दिल्ली-मुंबई जाने की नहीं पड़ेगी जरूरत

विदिशा   देश में पिछले साल 2025 में कुल 12 लाख नए कैंसर रोगी पाए गए. अनुमान है कि साल 2030 तक देश में हर साल 20 लाख कैंसर रोगी मिलेंगे. देश में बढ़ते कैंसर के खतरे पर केंद्रीय परमाणु ऊर्जा राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने ये बात कही. विदिशा मेडिकल कॉलेज में कैंसर डे-केयर सेंटर के शुभारंभ अवसर डॉ. जितेंद्र सिंह बोल रहे थे।  विदिशा में लगे कैंप से पता चला खतरा कितना बड़ा विदिशा स्थित अटल बिहारी वाजपेयी शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय में कैंसर रोगियों के सुलभ और आधुनिक इलाज के लिए कैंसर कीमोथेरेपी डे-केयर सेंटर का शुभारंभ हुआ. केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने बताया "मुझे पता चला है कि विदिशा में इसी साल जून में आयोजित कैंप में 3 हजार लोगों की जांच की गई. इसमें 600 लोगों में कैंसर कन्फर्म हुआ. इसके अलावा 250 लोग कैंसर के सस्पेक्ट मिले. ये आंकड़े बताते हैं कि कितना बड़ा खतरा हमारे सामने है. सरकार का प्रयास है कि आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं और उन्नत मेडिकल टेक्नोलॉजी का लाभ देश के अंतिम छोर पर बैठे हर नागरिक तक पहुंचे।  जीवनशैली में बदलाव लाने पर जोर केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा "विदिशा जैसे क्षेत्र में स्थानीय स्तर पर इस प्रकार के डे-केयर मॉडल की शुरुआत अत्यंत सराहनीय और क्रांतिकारी कदम है. कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए मरीजों और उनके परिवारों को बड़े शहरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं. अब इस डे-केयर सेंटर के शुरू होने से दूरदराज के क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को लाभ मिलेगा. देश में कैंसर के संदिग्ध मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है. इलाज के साथ लोगों को जीवनशैली में बदलाव करने और कैंसर के प्रति जागरूकता फैलाने की जरूरत है।  डे केयर सेंटर में बैठेंगे विशेषज्ञ डॉक्टर इस मौके पर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा "विदिशा में कैंसर डे-केयर सेंटर प्रारंभ होने से विदिशा, रायसेन, सीहोर और आसपास के ग्रामीण अंचलों के कैंसर पीड़ितों को कीमोथेरेपी और प्रारंभिक उपचार के लिए भोपाल, इंदौर, दिल्ली या मुंबई जैसे बड़े शहरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे. डे-केयर मॉडल के तहत मरीज सुबह अस्पताल आकर विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में कीमोथेरेपी व दवाइयां प्राप्त कर सकेंगे. कैंसर की अगर समय पर पहचान हो जाए तो इसका इलाज संभव है।  विदिशा में बनेगा कैंसर अस्पताल : शिवराज शिवराज सिंह चौहान ने घोषणा की "आने वाले समय में यहां रेडियोथेरेपी सहित अन्य उन्नत चिकित्सा सुविधाएं विकसित की जाएंगी. विदिशा में पूर्ण कैंसर अस्पताल स्थापित करने की दिशा में कार्य किया जाएगा. टाटा मेमोरियल सेंटर (मुंबई) के मार्गदर्शन और एम्स भोपाल के तकनीकी समन्वय से ये सेंटर संचालित किया जाएगा. भविष्य के पूर्ण अस्पताल के लिए भूमि चिह्नित करने की प्रक्रिया भी जारी है। 

दिव्यांगजनों के कल्याण और सशक्तीकरण के लिए योगी सरकार की योजनाओं को मिल रहा चरणबद्ध विस्तार

लखनऊ। दिव्यांगजनों को अधिक सक्षम, आत्मनिर्भर और समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए योगी सरकार लगातार कल्याणकारी योजनाओं को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ा रही है। इसी क्रम में दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग, उत्तर प्रदेश द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 में पात्र दिव्यांगजनों को विभिन्न प्रकार के गुणवत्तापूर्ण सहायक उपकरण एवं कृत्रिम अंग उपलब्ध कराने के लिए चरणबद्ध तरीके से वितरण शिविर आयोजित किए जाएंगे। पहले चरण में प्रदेश के सभी 75 जनपदों को दो समूहों में विभाजित किया गया है। 17 सितंबर को 41 जनपदों में तथा 2 अक्टूबर को 34 जनपदों में वितरण शिविर आयोजित होंगे। इसके बाद द्वितीय चरण 20 अक्टूबर से 15 नवंबर 2026 तथा तृतीय चरण 3 दिसंबर से 15 दिसंबर 2026 तक निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार प्रदेश के सभी जनपदों में शिविर लगाए जाएंगे।  17 सितंबर को आगरा, अलीगढ़, एटा, अयोध्या, सुलतानपुर, आजमगढ़, बरेली, बदायूं, बांदा, देवरिया, कुशीनगर, गोंडा, झांसी, कानपुर नगर, उन्नाव, मेरठ, मुरादाबाद, सहारनपुर, जौनपुर, गोरखपुर, कन्नौज, प्रयागराज, शामली, वाराणसी, मिर्जापुर, गाजीपुर, सिद्धार्थनगर, श्रावस्ती, फतेहपुर, प्रतापगढ़, संतकबीर नगर, बिजनौर, इटावा, हापुड़, ललितपुर, मथुरा, रामपुर, सीतापुर, कौशाम्बी, हरदोई और बुलन्दशहर वितरण शिविर अयोजित किये जाएंगे। इसी तरह 2 अक्टूबर को लखनऊ, गौतमबुद्धनगर, चन्दौली, बलरामपुर, चित्रकूट, अम्बेडकर नगर, अमरोहा, फिरोजाबाद, जालौन, कानपुर देहात, खीरी, महाराजगंज, मऊ, पीलीभीत, रायबरेली, सम्भल, शाहजहांपुर, सोनभद्र, अमेठी, औरैया, बागपत, बाराबंकी, भदोही, फर्रुखाबाद, गाजियाबाद, हमीरपुर, हाथरस, कासगंज, महोबा, मुजफ्फरनगर, बहराइच, बलिया, बस्ती एवं मैनपुरी में वितरण शिविर आयोजित होंगे। विभाग ने सभी जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारियों को निर्धारित समय-सारिणी के अनुसार शिविरों के सफल आयोजन के लिए कार्ययोजना तैयार कर शीघ्र क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। राज्य सरकार द्वारा दिव्यांगजनों के कल्याण, सशक्तीकरण, आत्मनिर्भर बनाने तथा उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए विभिन्न योजनाएं एवं कार्यक्रम संचालित किए जाते रहैं। सहायक उपकरण एवं कृत्रिम अंग वितरण योजना इसी श्रृंखला की एक कड़ी है। योजना का उद्देश्य पात्र दिव्यांगजनों तक शासन की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पारदर्शी, प्रभावी एवं समयबद्ध ढंग से पहुंचाना है। वितरण शिविरों के माध्यम से लाभार्थियों को उनकी आवश्यकता के अनुरूप सहायक उपकरण एवं कृत्रिम अंग उपलब्ध कराकर उन्हें अधिक सक्षम एवं आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जाना है। प्रदेश सरकार द्वारा दिव्यांगजनों की दैनिक गतिविधियों को सुगम बनाना तथा उनकी गतिशीलता, कार्यक्षमता एवं आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना है।

निवेश और रोजगार को मिलेगी रफ्तार, झारखंड में लॉन्च होगी नई टेक्सटाइल व औद्योगिक प्रोत्साहन नीति

 रांची झारखंड सरकार ने राज्य में निवेश और रोजगार को बढ़ावा देने के लिए झारखंड टेक्सटाइल, परिधान एवं फुटवियर नीति और झारखंड औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन नीति को फिर से लांच करने का निर्णय लिया है। इसके पीछे का मुख्य कारण है कि दोनों नीतियां लैप्स कर गई हैं इनके बदले नई नीति को लांच करना है। उद्योग विभाग इन नीतियों का ड्राफ्ट पहले ही जारी कर चुकी है और लोगों से इसके ऊपर हितधारकों के सुझाव प्राप्त किए गए हैं। इन सुझावों को भी नई नीति में समाहित करने का निर्णय लिया गया है।विभागीय अधिकारियों के अनुसार अगले पखवारे में इस नीति को मूर्त रूप दे दिया जाएगा। राज्य में एक लाख करोड़ रुपये के निवेश का लक्ष्य निवेशक अनुकूल नीतियों के माध्यम से राज्य में एक लाख करोड़ रुपये के निवेश का आकर्षित करने की योजना है। इसके माध्यम से राज्य में 25 हजार से अधिक लोगों को रोजगार से जोड़ना है। राज्य में औद्योगिक विकास को नई रफ्तार देने के लिए झारखंड औद्योगिक एवं निवेश प्रोत्साहन नीति (जेआइआइपीपी) 2026 का मसौदा जारी किया है। इसे जारी करते हुए राज्य सरकार ने हितधारकों से सुझाव मांगे हैं जिन्हें नीति में जगह दी जाएगी। एमएसएमई और बड़े उद्योगों को बड़ी सब्सिडी नई नीति में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को व्यापक परियोजना निवेश सब्सिडी के तहत स्थिर पूंजी निवेश का 20 प्रतिशत (अधिकतम 15 करोड़ रुपये) देने का प्रविधान है। वहीं गैर एमएसएमई इकाइयों को 25 प्रतिशत सब्सिडी (अधिकतम 30 करोड़ रुपये) देने का सुझाव दिया गया है। इसके अलावा एससी, एसटी, महिला एवं दिव्यांग उद्यमियों को पांच प्रतिशत अतिरिक्त लाभ देने का निर्णय लिया गया है। पिछली नीति के आधार पर नई पहल प्रस्तावित टेक्सटाइल नीति मूल रूप से यह 2016-2021 की वस्त्र नीति की अगली कड़ी है। पिछली पांच वर्षीय नीति के तहत राज्य में लगभग 500 से 1,000 करोड़ रुपये का निवेश आया था और 10,000 से 15,000 प्रत्यक्ष रोजगार सृजित हुए थे, जिसमें महिलाओं की भागीदारी महत्वपूर्ण रही। नई नीति की खास बातें – योग्य इकाइयों को स्थिर पूंजी निवेश का 20 प्रतिशत (अधिकतम 50 करोड़ रुपये) सब्सिडी मिलेगी – फुटवियर और तकनीकी वस्त्र क्षेत्रों में 5 प्रतिशत अतिरिक्त लाभ दिया जाएगा – एससी/एसटी, महिला एवं दिव्यांग उद्यमियों को 5 प्रतिशत अतिरिक्त सब्सिडी मिलेगी (झारखंड निवासी होने पर) – अधिकतम प्रभावी सब्सिडी 35 प्रतिशत तक हो सकती है – बैंक ऋण पर 7 प्रतिशत प्रति वर्ष या ब्याज दर का 50 प्रतिशत (अधिकतम 3 करोड़ रुपये) 5 वर्षों के लिए एसजीएसटी प्रतिपूर्ति मसौदे के अनुसार पहले सात वर्ष में सौ प्रतिशत एसजीएसटी प्रतिपूर्ति करने का लक्ष्य रखा गया है।     अगले तीन वर्षों के लिए 40 प्रतिशत प्रतिपूर्ति      50 प्रतिशत बिजली टैरिफ प्रतिपूर्ति 5 वर्षों के लिए     100 प्रतिशत विद्युत कर प्रतिपूर्ति 5 वर्षों के लिए (नवीकरणीय ऊर्जा अपनाने पर 7 वर्ष तक विस्तार)     स्टांप ड्यूटी और पंजीकरण शुल्क की 100 प्रतिशत प्रतिपूर्ति रोजगार और कौशल विकास पर विशेष जोर नीति में महिला कर्मचारियों के लिए पुरुषों की तुलना में 1,000 रुपये अधिक मासिक वेतन सब्सिडी का प्रविधान है। – पुरुष कर्मचारी: 5,000 रुपये प्रति माह – महिला कर्मचारी: 6,000 रुपये प्रति माह – एससी/एसटी/दिव्यांग कर्मचारियों को अतिरिक्त 1,000 रुपये प्रति माह – जोन-3 (पिछड़े जिलों) में कार्यरत कर्मचारियों को अतिरिक्त 1,000 रुपये – प्रति प्रशिक्षु 13,000 रुपये तक की एकमुश्त प्रशिक्षण सहायता सामाजिक सुरक्षा और बुनियादी ढांचा     ईपीएफ और ईएसआई में नियोक्ता के योगदान की प्रतिपूर्ति (1,000 रुपये प्रति व्यक्ति/माह)     टेक्सटाइल/अपैरल पार्कों के पास डॉर्मिटरी निर्माण के लिए भूमि सहायता     मंडी शुल्क में छूट     छात्रावासों के निर्माण के लिए 50 लाख रुपये तक सहायता पिछड़े क्षेत्रों पर विशेष ध्यान नीति विशेष रूप से संताल परगना क्षेत्र के औद्योगिक विकास पर केंद्रित है, जो अब तक औद्योगिक गतिविधियों से दूर रहा है। राज्य के जिलों को तीन जोन में विभाजित किया गया है। इसके तहत पहली बार पीएम मित्रा और केंद्रीय योजनाओं के साथ तालमेल उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन योजना, समर्थ और राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन जैसी प्रमुख केंद्रीय पहलों के साथ योजनाओं को समाहित किया गया है। 

लाल किला बम धमाके की पूरी साजिश बेनकाब, उमर उन नबी समेत 13 आरोपियों पर NIA की चार्जशीट में बड़े खुलासे

नई दिल्ली दिल्ली में लाल किला के पास पिछले साल 10 नवंबर को बम ब्लास्ट हुआ था. इस मामले में जांच कर रही NIA ने अब चार्जशीट दाखिल कर दी है. NDTV के पास इस चार्जशीट की कॉपी है. इसके मुताबिक, इस हमले का मास्टरमाइंड डॉ. उमर उन नबी ही था. डॉ. उमर ही वह आतंकी था जो सुसाइड बॉम्बर था।  NIA ने अपनी चार्जशीट में 13 लोगों को आरोपियों बनाया है. इस चार्जशीट में सभी 13 आतंकियों की तस्वीर भी सामने आ गई है. चार्जशीट में NIA ने दावा किया है कि जांच के दौरान जो सबूत हाथ लगे, उससे साबित होता है कि धमाके के वक्त उमर कार में ही मौजूद था। लाल किला के पास 10 नवंबर 2025 को ब्लास्ट हुआ था. इस धमाके में 11 लोगों की मौत हो गई थी और 29 लोग घायल हो गए थे।   राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 10 नवंबर 2025 को लाल किले के पास हुए धमाके की जांच को लेकर राष्ट्रीय जांच एजेंसी की चार्जशीट में अहम दावे सामने आए हैं। NIA की चार्जशीट RC-21/2025/NIA/DLI के मुताबिक, आरोपी उमर उन नबी ने कार के अंदर रहते हुए कथित तौर पर IED को सक्रिय किया था।एनआईए के मुताबिक, धमाके के समय आरोपी उमर उन नबी कार के अंदर मौजूद था और उसने कथित तौर पर एक कमांड मैकेनिज्म के जरिए IED को सक्रिय किया। एजेंसी ने अपनी चार्जशीट में इस पूरे घटनाक्रम को अंसार गजवत-उल-हिंद (AGuH) मॉड्यूल से जोड़ते हुए जांच के निष्कर्ष पेश किए हैं।NIA ने चार्जशीट में आरोप लगाया है कि आरोपियों पर चरमपंथी सामग्री का प्रभाव था। जांच एजेंसी के मुताबिक, आरोपियों के पास कथित तौर पर ‘लोन मुजाहिद पॉकेट बुक/हत्यारा कैसे बनें’ मिली थी, जिसे एजेंसी ने AQAP से जुड़ा मैनुअल बताया है। NIA का कहना है कि इस सामग्री में विस्फोटक, हथियार, गुप्त अभियानों और IED से संबंधित जानकारी के अलावा ऑपरेशनल सुरक्षा, निगरानी, बच निकलने और गुप्त गतिविधियों से जुड़ी सामग्री भी शामिल थी। एजेंसी के मुताबिक, बरामद दस्तावेज केवल वैचारिक प्रचार तक सीमित नहीं थे, बल्कि उनमें ऐसी जानकारियां भी थीं जिनका इस्तेमाल किसी आतंकी सेल की गतिविधियों में किया जा सकता था। कार के अंदर बैठकर खुद दबाया था बटन NIA की चार्जशीट में साफ लिखा है कि मुख्य आरोपी उमर उन नबी (A-1) धमाके के वक्त गाड़ी के अंदर ही मौजूद था. उसने कार के भीतर बैठकर कमांड मैकेनिज्म का इस्तेमाल किया और आईईडी (IED) को खुद एक्टिवेट कर दिया. यह हमला अंसार गजवात-उल-हिंद (AGuH) मॉड्यूल से जुड़ा हुआ था. आतंकी किसी भी कीमत पर लाल किले जैसी ऐतिहासिक और संवेदनशील जगह पर बड़ा नुकसान पहुंचाना चाहते थे।  ‘How to Become an Assassin’ मैनुअल से ली गई ट्रेनिंग जांच में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि आतंकी रेडिकलाइजेशन के लिए ऑनलाइन डार्क कंटेंट का सहारा ले रहे थे. आरोपी अल-कायदा (AQAP) से जुड़े एक डिजिटल मैनुअल फॉलो कर रहे थे, जिसका टाइटल था— ‘Lone Mujahid Pocket Book/How to Become an Assassin’. इस किताब में सिर्फ नफरत भरे भाषण ही नहीं थे बल्कि हथियारों, एक्सप्लोसिव्स, TATP के इस्तेमाल और रिमोट-कंट्रोल डेटोनेटर बनाने की पूरी ट्रेनिंग दी गई थी. इसके अलावा, पुलिस से बचने के लिए फर्जी पहचान बनाने, चोरी-छिपे मूवमेंट करने और अकेले हमला करने की स्ट्रैटेजी भी सिखाई गई थी।  ‘पैनिक अटैक’ के चक्कर में जल्दी कर दिया ब्लास्ट NIA के खुलासे के मुताबिक, आतंकी लाल किले की रेकी पिछले लगभग दो सालों से कर रहे थे. दिसंबर 2023 से ही उमर उन नबी अपने साथियों के साथ कई बार लाल किले के चक्कर काट चुका था. हालांकि हमले की तारीख पहले से 10 नवंबर तय नहीं थी. दरअसल, श्रीनगर में जब उसके साथी आतंकियों की धरपकड़ शुरू हुई तो उमर बुरी तरह घबरा गया. उसे लगा कि पुलिस उस तक कभी भी पहुंच सकती है. इसी डर और पकड़े जाने के खौफ में उसने आनन-फानन में लाल किले के पास जाकर खुद को उड़ा लिया।  लोकतंत्र के खिलाफ नफरत और शरिया का एजेंडा अल-फलाह स्थित ठिकाने से NIA को हाथ से लिखे कई नोट्स मिले हैं. इन नोट्स में भारत के लोकतांत्रिक ढांचे को खारिज करते हुए शरिया कानून लागू करने की बातें लिखी थीं. चार्जशीट के अनुसार, लाल किले को निशाना बनाने की वजह यही थी कि यह ‘भारतीय राज्य और सत्ता का सबसे बड़ा प्रतीक’ है।    हिंसक विचारधारा का आरोप अपनी चार्जशीट में एनआईए ने कुछ प्रचार सामग्री का भी उल्लेख किया है। एजेंसी के अनुसार, इन दस्तावेजों में मौजूदा राजनीतिक व्यवस्थाओं को कथित तौर पर ‘शैतानी और अत्याचारी व्यवस्था’ बताया गया था और उन्हें हिंसक तरीके से खत्म करने की विचारधारा को बढ़ावा दिया गया था। चार्जशीट के मुताबिक, इस सामग्री में यह विचार भी सामने रखा गया कि मुसलमान जिहाद के बिना सम्मान हासिल नहीं कर सकते। NIA का दावा है कि दस्तावेजों में इस्लाम के नाम पर हिंसा को बढ़ावा देने वाली सामग्री, गजवा-ए-हिंद के संदर्भ और इराक, अफगानिस्तान तथा अमेरिका में हुए विभिन्न विद्रोहों का उल्लेख भी था। जांच एजेंसी ने इन दस्तावेजों को कथित AGuH मॉड्यूल की वैचारिक पृष्ठभूमि से जोड़कर देखा है। फर्जी पहचान और गुप्त गतिविधियों की ट्रेनिंग का दावा चार्जशीट में NIA ने यह भी कहा है कि बरामद सामग्री में कथित आतंकी नेटवर्क के सदस्यों के लिए ऑपरेशनल निर्देश मौजूद थे। एजेंसी के मुताबिक, इनमें पहचान छिपाने, गुप्त तरीके से घुसपैठ करने और सुरक्षा एजेंसियों से बचने के लिए अलग-अलग फर्जी पहचान तैयार करने जैसे तरीकों का उल्लेख था। NIA का दावा है कि दस्तावेजों में हमले की रणनीतियों, लक्षित हमलों, अकेले किए जाने वाले हमलों और आत्मघाती हमलों से जुड़ी सामग्री भी मौजूद थी।  

हाईराइज इमारतों की आग पर लगेगी लगाम, हरियाणा फायर विभाग को मिलेंगे 104 मीटर ऊंचे प्लेटफॉर्म

चंडीगढ़. हरियाणा में ऊंची इमारतों में आग लगने की दुर्घटनाओं से निपटने के लिए एरियल लेडर प्लेटफॉर्म खरीदे जाएंगे। अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा निदेशालय आपातकालीन सेवाओं को और अधिक आधुनिक तथा मजबूत बनाने के उद्देश्य से 90 मीटर के दो और 104 मीटर के दो एरियल लेडर प्लेटफॉर्म की खरीद करेगा। प्रस्तावित खरीद के संबंध में तकनीकी मापदंडों, पात्रता मानदंड, वारंटी, डिलीवरी शेड्यूल और व्यावसायिक प्रविधानों पर भारतीय व विदेशी निर्माताओं, अधिकृत प्रतिनिधियों एवं हितधारकों से सुझाव प्राप्त करने के लिए निदेशालय एक प्री-एनआइटी और मार्केट कंसल्टेशन बैठक आयोजित करने जा रहा है। यह परामर्श बैठक शुक्रवार को दोपहर 12:30 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित की जाएगी। इसमें भाग लेने के लिए इच्छुक हितधारकों को वीरवार शाम 05:30 बजे तक अपना पंजीकरण कराना होगा। पंजीकरण और अपने सुझाव प्रस्तुत करने के लिए आवेदक संस्था के नाम, प्रतिनिधि का नाम व पद, ईमेल आईडी और संपर्क नंबर के साथ तकनीकी ईमेल technical-dfs@hry.gov.in पर संपर्क कर सकते हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह बैठक केवल आगामी टेंडर दस्तावेज को अंतिम रूप देने तथा उद्योग से सुझाव और जानकारी प्राप्त करने के उद्देश्य से की जा रही है। यह स्वयं में कोई टेंडर, ईओआइ या चयन प्रक्रिया नहीं है और न ही इसमें भाग लेने वाले किसी भी हितधारक को भविष्य की खरीद प्रक्रिया में कोई विशेष अधिकार प्रदान किया जाएगा।

ग्वालियर स्टेशन पर पैंट्री कारों का औचक निरीक्षण; लावारिस खानपान सामग्री जब्त, तीन ट्रेनों की पैंट्री की हुई सघन जांच

ग्वालियर/झाँसी। मंडल रेल प्रबंधक अनिरुद्ध कुमार के मार्गदर्शन एवं वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक अमन वर्मा के निर्देशन में यात्रियों को स्वच्छ और गुणवत्तापूर्ण खानपान सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से आज दिनांक 09.09.2026 को सहायक वाणिज्य प्रबंधक/ ग्वालियर आर के वर्मा के नेतृत्व में ग्वालियर स्टेशन से गुजरने वाली ट्रेनों की पैंट्री कारों का औचक निरीक्षण किया गया। इस सघन जांच अभियान के दौरान ट्रेन संख्या 18237 (संचालक: मेसर्स आर के एसोसिएट्स एंड होटलियर्स प्राइवेट लिमिटेड), ट्रेन संख्या 16787 (संचालक: मेसर्स चंद्र मौली मिश्रा) तथा ट्रेन संख्या 11077 (संचालक: मेसर्स आर के एसोसिएट्स एंड होटलियर्स प्राइवेट लिमिटेड) की पैंट्री कारों की गहनता से पड़ताल की गई। निरीक्षण के दौरान ग्वालियर स्टेशन के प्लेटफॉर्म संख्या 2/3 पर कुछ खानपान सामग्री (कैटरिंग मटेरियल) लावारिस हालत में रखी पाई गई। उपस्थित अधिकारियों ने तत्परता दिखाते हुए लावारिस सामग्री को तुरंत जब्त किया और उसे एलपीओ संख्या 88 (दिनांक 09/09/2026) के तहत विधिवत जमा करवा दिया।  

अमेठी की अर्चना त्रिपाठी ने 2.12 लाख रुपये के ऋण से शुरू किया ब्यूटी पार्लर, आज 30 से 40 हजार रुपये प्रतिमाह कमा रहीं

लखनऊ/अमेठी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार युवाओं और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए विभिन्न स्वरोजगार योजनाएं संचालित कर रही हैं। मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान ऐसी ही एक महत्वाकांक्षी योजना है, जो युवाओं और महिलाओं को अपना उद्यम स्थापित करने के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध करा रही है। अमेठी जनपद के मुसाफिरखाना नगर पंचायत क्षेत्र के वार्ड संख्या-08, पूरे भवानी बक्स की निवासी अर्चना त्रिपाठी इसकी प्रेरणादायक मिसाल हैं। कभी गृहिणी रहीं अर्चना ने योजना के तहत मिली आर्थिक सहायता से ‘अर्चना ब्यूटी पार्लर’ की स्थापना की और आज सफल उद्यमी के रूप में अपनी पहचान बना रही हैं। बैंक से मिली योजना की जानकारी अर्चना बताती हैं कि उन्हें मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान की जानकारी बैंक के माध्यम से मिली। उस समय वह गृहिणी थीं और अपना स्वयं का व्यवसाय शुरू करना चाहती थीं, लेकिन आर्थिक संसाधनों की कमी उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती थी। परिवार की सीमित आय के कारण व्यवसाय के लिए आवश्यक पूंजी जुटाना आसान नहीं था। ऐसे में उन्होंने योजना के बारे में जानकारी प्राप्त की और आवेदन करने का निर्णय लिया। 2.12 लाख रुपये के ऋण से शुरू हुआ व्यवसाय अर्चना को जनवरी 2025 में बैंक के माध्यम से 2.12 लाख रुपये का ऋण प्राप्त हुआ। इस वित्तीय सहायता से उन्होंने ‘अर्चना ब्यूटी पार्लर’ की शुरुआत की। वह बताती हैं कि योजना से मिली सहायता ने उनके आत्मविश्वास को बढ़ाया और उन्हें अपने सपनों को साकार करने का अवसर दिया। पहले जो सपना केवल एक इच्छा था, वह आज एक सफल व्यवसाय के रूप में सामने है। आत्मनिर्भरता की ओर बढ़े कदम आज अर्चना का ब्यूटी पार्लर क्षेत्र में अपनी पहचान बना चुका है। इस व्यवसाय से उन्हें 30 से 40 हजार रुपये प्रतिमाह आय प्राप्त हो रही है। अर्चना बताती हैं कि उनके परिवार में 6 सदस्य हैं और व्यवसाय शुरू होने के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति पहले की तुलना में अधिक मजबूत हुई है। अब वह परिवार की जिम्मेदारियों में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं और आत्मनिर्भर जीवन जी रही हैं। भविष्य में और आगे बढ़ने का लक्ष्य अर्चना का कहना है कि वह भविष्य में अपने व्यवसाय का और विस्तार करना चाहती हैं, ताकि अधिक लोगों तक बेहतर सेवाएं पहुंचा सकें। उनका मानना है कि यदि महिलाओं को सही अवसर, मार्गदर्शन और आर्थिक सहायता मिले तो वे भी सफल उद्यमी बन सकती हैं। वह अन्य महिलाओं को भी स्वरोजगार अपनाने और आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करती हैं। अर्चना त्रिपाठी की सफलता इस बात का प्रमाण है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में संचालित मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाते हुए आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश के संकल्प को मजबूती प्रदान कर रहा है। आज अर्चना की सफलता क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन रही है।