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अपराधियों पर शिकंजा: फरीदाबाद में 10 क्राइम ब्रांच टीमों की एक साथ दबिश

फरीदाबाद. एनआईटी-तीन स्थित नेहरू कॉलोनी शनिवार सुबह अचानक पुलिस छावनी में तब्दील हो गई, जब क्राइम ब्रांच की 10 टीमों ने एक साथ नशा तस्करों के खिलाफ बड़ा सर्च अभियान शुरू कर दिया। अभियान में 100 से अधिक पुलिसकर्मी शामिल हैं, जो गली-गली और घर-घर जाकर नशीले पदार्थों की तलाश कर रहे हैं। शुरुआती कार्रवाई में 4 से 5 लोगों को हिरासत में लिए जाने की सूचना है, जबकि मौके से बड़े स्तर पर नशीले पदार्थ बरामद होने की भी चर्चा है। सूत्रों के अनुसार क्राइम ब्रांच को लंबे समय से सूचना मिल रही थी कि नेहरू कॉलोनी में संगठित तरीके से नशे का कारोबार चल रहा है। बताया जा रहा है कि कुछ मकानों को नशा सप्लाई के अड्डों के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था। इसी इनपुट के आधार पर शनिवार सुबह अचानक कार्रवाई की गई ताकि किसी आरोपित को भागने का मौका न मिले। संदिग्ध मकानों को घेरकर तलाशी शुरू की पुलिस टीमों ने कालोनी के कई संदिग्ध मकानों को घेरकर तलाशी शुरू की। कई स्थानों पर महिलाओं की मौजूदगी में महिला पुलिसकर्मियों ने भी जांच की। कार्रवाई के दौरान कालोनी में अफरा-तफरी का माहौल बना रहा और बड़ी संख्या में लोग घरों के बाहर जमा हो गए। फरीदाबाद पुलिस इससे पहले भी शहर में नशा तस्करों के खिलाफ बड़े अभियान चला चुकी है। वर्ष 2024 में “ऑपरेशन आक्रमण” के दौरान भी पुलिस ने जिलेभर में एक साथ छापेमारी कर नशा तस्करी, अवैध शराब और अन्य आपराधिक गतिविधियों में शामिल दर्जनों लोगों को पकड़ा था। शहर में नशा तस्करों के खिलाफ लगातार सख्त कार्रवाई की जा रही है। इससे पहले अवैध कमाई से बनाई गई संपत्तियों पर भी बुलडोजर कार्रवाई हो चुकी है। नेहरू कॉलोनी में पहले भी कई बार अभियान चला चुकी  क्राइम ब्रांच की टीम नेहरू कॉलोनी में पहले भी कई बार अभियान चला चुकी है, लेकिन पुलिस को आशंका है कि कुछ गिरोह दोबारा सक्रिय हो गए हैं। इसी वजह से इस बार बड़ी संख्या में पुलिस बल उतारा गया है। अधिकारियों का कहना है कि अभियान पूरा होने के बाद बरामदगी और गिरफ्तार किए गए आरोपितों को लेकर विस्तृत जानकारी साझा की जाएगी।

योगी सरकार का बड़ा फैसला, भवन निर्माण उपविधि 2025 में संशोधन से व्यापारिक निर्माण होंगे आसान

 लखनऊ विकास के साथ अन्य निर्माण कार्य में आने वाली विसंगति को योगी आदित्यनाथ सरकार ने दूर करके बड़े वर्ग को राहत प्रदान की है। उत्तर प्रदेश भवन निर्माण उपविधि तथा जोनिंग रेगुलेशन्स-2025 के संशोधन से अब तमाम निर्माण कार्य की राह आसान हो गई है। आवास विभाग से जारी अधिसूचना के मुताबिक प्रदेश में अब सात मीटर चौड़ी सड़क पर वेयरहाउस व लाजिस्टिक पार्क का निर्माण कराया जा सकेगा। इसी तरह सात मीटर चौड़ी सड़क पर राजमार्ग सुविधा जोन विकसित किए जा सकेंगे। इसके लिए राज्य सरकार ने उत्तर प्रदेश विकास प्राधिकरण भवन निर्माण एवं विकास उपविधि तथा आदर्श जोनिंग रेगुलेशन्स-2025 में संशोधन किया है। विसंगतियां दूर करने के लिए किए संशोधन के तहत अब शापिंग माल के अलावा दुकानों अन्य व्यावसायिक निर्माण भी 18 मीटर चौड़ी सड़क पर किए जा सकेंगे। प्रमुख सचिव आवास पी गुरू प्रसाद के कार्यालय से जारी अधिसूचना के मुताबिक सात मीटर चौड़ी सड़क पर औद्योगिक गतिविधियों की अनुमति दिए जाने के बावजूद अब तक वेयरहाउसिंग व लाजिस्टिक पार्क का निर्माण 18 मीटर चौड़ी सड़क पर ही करने अनुमति थी जिसे अब संधोशन के जरिए सात मीटर किया गया है। इसी तरह अब तक शापिंग माल तो 18 मीटर चौड़ी सड़क पर बनाया जा सकता था लेकिन दुकान व अन्य व्यावसायिक निर्माण केवल 24 मीटर चौड़ी सड़क पर ही करने की अनुमति थी। संशोधन के जरिए अब 18 मीटर पर दुकान आदि का भी निर्माण किया जा सकेगा। अभी तक राजमार्ग सुविधा जोन (हाईवे फैसिलिटी जोन) के लिए सड़क की चौड़ाई से लेकर एफएआर के प्रविधान स्पष्ट नहीं थे इसलिए अब संशोधन कर सरकार ने कृषि उपयोग क्षेत्र के समकक्ष राजमार्ग सुविधा जोन को माना है। ऐसे में अब राजमार्ग सुविधा जोन की सड़क की चौड़ाई न्यूनतम सात मीटर रहेगी। विदित हो कि चार जुलाई 2025 से लागू उत्तर प्रदेश विकास प्राधिकरण भवन निर्माण एवं विकास उपविधियों-2025 और जोनिंग रेगुलेशन्स को लेकर हो रही दिक्कतों को दूर करने के लिए कठिनाई निवारण समिति बनी हुई है। समिति, सुझाव के आधार पर उपविधि को संशोधन करती रहती है। नियमों और सुविधाओं से जुड़ी मुख्य बातें सड़क की चौड़ाई: वेयरहाउस व लॉजिस्टिक्स पार्क के लिए 7 मीटर चौड़ी सड़क (ब्लैक टॉप रोड) और कम से कम 1.5 मीटर फुटपाथ की अनिवार्यता तय की गई है। प्लेज पार्क पॉलिसी: औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने के लिए प्लेज पार्क को भी 7 मीटर चौड़ी सड़क पर बनाने की अनुमति दी गई है, जबकि पहले 12 मीटर की सड़क अनिवार्य थी श्रेणी (Category): सात मीटर चौड़े संपर्क मार्ग पर केवल ग्रीन व ऑरेंज (गैर-प्रदूषणकारी और कम प्रदूषणकारी) श्रेणी के उद्योगों/गोदामों की ही अनुमति होगी। व्यावसायिक निर्माण: वेयरहाउस या प्लेज पार्क के कुल क्षेत्रफल में अधिकतम 10 प्रतिशत हिस्से पर व्यापारिक व वाणिज्यिक सुविधाएं (शॉपिंग, दुकानें आदि) बनाई जा सकती हैं।  

आंधी-बारिश के बाद आम किसानों की उम्मीद बैगिंग तकनीक पर टिकी, उद्यान विभाग कर रहा मदद

लखनऊ प्रदेश में आंधी- बारिश और कीटों की मार के बाद बागों में बची 40 से 50 फीसदी आम की फसल को सुरिक्षत करने की कोशिशें तेज हो गई हैं। इसके लिए बैगिंग प्रणाली पर जोर दिया जा रहा है, ताकि आम की भरपूर कीमत मिल सके। किसानों को बेहतर फायदा देने के लिए उद्यान विभाग के कर्मचारी उन्हें बैग बांधने के तरीके बता रहे हैं। आम की स्थिति जानने के लिए हम शुक्रवार सुबह काकोरी के रास्ते सहिलामऊ पहुंचे। यहां एक बाग में मिले शंकर सिंह आसमान की तरफ देखकर कहते हैं कि ये बादल और टिप टिप गिरती बूंदें आम के लिए जहर जैसी हैं। बैग ( कागज, पालीथीन थैला) को दिखाकर कहते हैं कि इससे कुछ उम्मीद है। वह थैला बांधने में लगे मजदूरों को समझाते हैं कि सिर्फ लंगड़ा और चौसा में ही बांधना है। दशहरी को उसके हाल पर छोड़ दो। ताकीद भी करते हैं कि जो फल मजबूत दिख रहा है सिर्फ उसी में बांधना है। यहां से आगे बढ़े तो कनार गांव की बाग में उद्यान विभाग के कर्मचारी मिले। वे किसानों को बैग बांधने का तरीका सिखा रहे थे। बस्ती के बागवान संदीप मौर्य बताते हैं कि पिछले वर्ष तीन हजार फलों में बैग बंधवाया था। सामान्य आम 20 से 25 रुपये प्रति किलो तो बैग वाला 35 से 45 रुपये किलो बिका था। यह आम ज्यादा बड़ा, चमकदार और टिकाऊ था। फलों को तोड़ने के बाद सुरक्षित रखे गए बैग इस बार भी इस्तेमाल कर रहे हैं। आम्रपाली और चौसा के लिए पांच हजार नए बैग मंगवाये हैं। बाराबंकी, उन्नाव, बुलंदशहर और अमरोहा के हसनगंज के बागवान भी इस प्रणाली से आम को निर्यात लायकबनाने में जुटे हैं।

हाईवे भूमि अधिग्रहण घोटाले पर शिकंजा, SDM अनुप्रीत कौर रंधावा को लिया गया हिरासत में

 गुरदासपुर  पंजाब में गुरदासपुर की एसडीएम और PCS अधिकारी अनुप्रीत कौर रंधावा को शनिवार सुबह तरनतारन जिले की पटी पुलिस ने हिरासत में ले लिया। मामला जम्मू-कश्मीर-राजस्थान हाईवे के लिए अधिग्रहित जमीन में कथित गबन से जुड़ा बताया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, अनुप्रीत कौर रंधावा के खिलाफ करीब 1 करोड़ 63 लाख रुपये के कथित गबन का मामला चल रहा था। इसी मामले में पुलिस ने सुबह करीब 7 बजे उनके घर पहुंचकर उन्हें हिरासत में लिया। बताया जा रहा है कि यह मामला हाईवे परियोजना के लिए अधिग्रहित जमीन से जुड़े वित्तीय अनियमितताओं और धन के कथित दुरुपयोग से संबंधित है। हालांकि पुलिस की ओर से फिलहाल विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है और आने वाले समय में इस मामले में और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

रसूखदारों पर सख्ती: पंजाब में नेताओं की सिक्योरिटी घटाने पर मंथन तेज

चंडीगढ़. पंजाब पुलिस ने राज्यभर में उन राजनीतिक नेताओं, लोगों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा शुरू कर दी है, जिनको सुरक्षा मुहैया है। पुलिस विभाग का मानना है कि कुछ ऐसे नेता, जो सक्रिय राजनीति नेता और लोग प्रभाव और रसूख दिखाने के लिए सुरक्षा का इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे मामलों में अब जांच की जा रही है कि सुरक्षा वास्तव में खतरे के आधार पर दी गई थी या सिफारिश और प्रभाव के जरिए हासिल की गई। हाल ही में सेंट्रल ब्यूरो आफ इंवेस्टिगेशन (सीबीआई) ने एक भाजपा नेता राघव गोयल को पंजाब विजिलेंस ब्यूरो से जुड़े रिश्वत मामले में गिरफ्तार किया था। आरोप है कि इस मामले में निजी व्यक्ति को पंजाब पुलिस के दो गनमैन उपलब्ध कराए गए थे, जो एके-47 से लैस थे। जांच एजेंसियों को संदेह है कि सुरक्षा कवर का दुरुपयोग निजी प्रभाव बढ़ाने और सरकारी अधिकारियों पर दबाव बनाने के लिए किया जा रहा था। रिपोर्ट के लिए सीआईडी हुई सक्रिय पंजाब पुलिस की खुफिया शाखा और सीआईडी ने ऐसे नेताओं की सूची तैयार करनी शुरू कर दी है, जिन्हें सुरक्षा तो दी गई है, लेकिन वे किसी सक्रिय भूमिका नहीं निभा रहे। कई मामलों में यह भी सामने आया है कि स्थानीय स्तर के नेता वरिष्ठ नेताओं के साथ नजदीकियां दिखाकर सुरक्षा हासिल कर लेते हैं। बाद में वे इसी सुरक्षा के सहारे सरकारी दफ्तरों और पुलिस महकमे में दबदबा बनाते हैं।अधिकारियों का कहना है कि कुछ लोग मंत्रियों और बड़े नेताओं के साथ तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा कर खुद को प्रभावशाली दिखाते हैं। इसके बाद सुरक्षा कर्मियों की मौजूदगी से लोगों और अधिकारियों में यह संदेश जाता है कि संबंधित व्यक्ति सत्ता के करीब है। इससे कई बार प्रशासनिक कामकाज प्रभावित होता है। सुरक्षा वापस लेने पर मामले पहुंचे हाई-कोर्ट इधर, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में पूर्व क्रिकेटर और सांसद हरभजन सिंह को मिली सुरक्षा को लेकर उठे सवालों के बाद भी सुरक्षा आवंटन प्रक्रिया चर्चा में है। अदालत ने पूछा था कि आखिर कितने पुलिस कर्मी आधिकारिक तौर पर सुरक्षा ड्यूटी पर हैं और कितने अनौपचारिक रूप से तैनात किए गए हैं। विपक्ष ने सरकार पर आरोप लगाया है कि सुरक्षा व्यवस्था को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल किया गया। शिरोमणि अकाली दल और कांग्रेस नेताओं ने कहा कि जिन लोगों पर भ्रष्टाचार या अन्य मामलों के आरोप हैं, उन्हें भी सुरक्षा मुहैया कराई गई। अब पंजाब पुलिस की समीक्षा से कई नेताओं की सुरक्षा वापस लिए जाने की संभावना जताई जा रही है।

चुनाव आयोग की बड़ी तैयारी! मुक्तसर में हर वोटर तक पहुंचेगा अमला, शुरू होगा विशेष पुनरीक्षण अभियान

 श्री मुक्तसर साहिब  भारत चुनाव आयोग के निर्देशों के तहत जिले में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान (SIR) को पूरी पारदर्शिता के साथ पूरा किया जाएगा। जिला चुनाव अधिकारी सह उपायुक्त अमित कुमार पंचाल ने बताया कि जिले में 25 जून से 24 जुलाई तक विशेष अभियान चलाकर घर-घर जाकर मतदाताओं से फार्म भरवाए जाएंगे। जिला चुनाव अधिकारी ने बताया कि इस अभियान के लिए पूरे चुनावी अमले की ड्यूटी लगा दी गई है। जिले में 753 बूथ स्तरीय अधिकारी, 81 सुपरवाइजर, चार निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी और आठ सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बूथ स्तरीय अधिकारी को औसतन 300 घर और लगभग 1200 मतदाताओं की जिम्मेदारी दी गई है ताकि काम सुचारु रूप से पूरा किया जा सके। उन्होंने बताया कि 15 जून से 24 जून तक बूथ स्तरीय अधिकारियों को प्रशिक्षण देने और अन्य प्रशासनिक तैयारियों का कार्य किया जाएगा। इसके बाद 25 जून से घर-घर जाकर विशेष पुनरीक्षण अभियान शुरू होगा। दोहरी वोट रखना अपराध जिला चुनाव अधिकारी ने स्पष्ट किया कि दोहरी वोट रखना भारतीय संविधान के अनुसार अपराध है, जिसके लिए एक वर्ष तक की कैद का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि जिले के सभी मतदाताओं को इस विशेष पुनरीक्षण प्रक्रिया के तहत फार्म भरना अनिवार्य होगा। उपायुक्त ने बताया कि जिला चुनाव कार्यालय द्वारा की गई प्रारंभिक मैपिंग के तहत जिले के कुल 6 लाख 91 हजार 402 मतदाताओं में से 6 लाख 38 हजार 878 मतदाताओं की मैपिंग पूरी की जा चुकी है। यह कुल मतदाताओं का 92.40 प्रतिशत है। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में यह कार्य लगभग पूरा हो चुका है। जानें SIR के लिए जरूरी बातें उन्होंने बताया कि मतदाता सूची पुनरीक्षण के लिए 1 जनवरी 2003 को योग्यता तिथि निर्धारित की गई है। इसके अलावा मतदान केंद्रों को तर्कसंगत बनाने का कार्य 24 जुलाई 2026 तक पूरा किया जाएगा। मतदाता सूची का प्रारूप 31 जुलाई 2026 को प्रकाशित होगा। उन्होंने जानकारी दी कि मतदाता सूचियों से संबंधित दावे और आपत्तियां 31 जुलाई से 30 अगस्त 2026 तक जमा करवाई जा सकेंगी, जबकि इनका निपटारा 28 सितंबर 2026 तक किया जाएगा। अंतिम मतदाता सूची 1 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित की जाएगी। जिला चुनाव अधिकारी ने जिले के सभी मतदाताओं से अपील की कि वे इस अभियान में चुनाव अमले का पूरा सहयोग करें ताकि मतदाता सूचियों को पूरी तरह सही और पारदर्शी बनाया जा सके।

फलोदी-चित्तौड़गढ़ में पारा 44 डिग्री पार, मौसम विभाग ने जारी किया येलो अलर्ट

जयपुर प्रदेश में हीटवेव के साथ आंधी बारिश का दौर भी लगातार जारी है. बीते कुछ दिनों में प्रदेश के कुछ इलाकों में लू का कहर रहा तो वहीं कुछ इलाकों में तेज हवाएं चली. गुरुवार (14 मई) शाम से मौसम बदलने के बाद से फिलहाल राहत बनी हुई है. शुक्रवार (15 मई) को तापमान में भी करीब 2 डिग्री तक की गिरावट दर्ज की गई है. मौसम विभाग के मुताबिक, आज (16 मई) से दिन के तापमान में बढ़ोतरी होगी और पश्चिमी राजस्थान में भीषण गर्मी पड़ेगी. हालांकि, पूर्वी राजस्थान के कुछ इलाकों में बारिश के चलते तापमान में जरूर गिरावट रह सकती है. इन जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट झालावाड़, चित्तौड़गढ़, कोटा, बाड़मेर, जैसलमेर, जोधपुर और फलौदी जिले के लिए हीटवेव का अलर्ट जारी किया गया है. इसके अलावा अलवर, भरतपुर, दौसा, डीग, धौलपुर, करौली, खैरथल-तिजारा और कोटपुतली-बहरोड़ में आंधी-बारिश का येलो अलर्ट है. फलोदी-चित्तौड़गढ़ में तापमान 44 डिग्री के पार प्रदेश में सर्वाधिक तापमान फलोदी में 44.8 डिग्री दर्ज किया गया. चित्तौड़गढ़ में भी तापमान 44.2 डिग्री तक पहुंच गया है. इसके अलावा जैसलमेर, अजमेर, भीलवाड़ा, अलवर, उदयपुर, कोटा, बीकानेर, जोधपुर, नागौर, करौली, दौसा, लूणकरणसर और पाली जिलों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक रहा. इस बार जल्दी आएगा मानसून   राजस्थान में मानसून समय से पहले पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है. इस बार 25 जून की जगह मानसून प्रदेश में 20 जून तक एंट्री ले सकता है. पिछले साल भी मानसून ने समय से पहले दस्तक दी थी. पिछले 6 साल की बात करें तो केवल 2022 में मानसून देरी से पहुंचा था.

सुशासन तिहार के तहत मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का कोसला धाम दौरा, माता कौशल्या मंदिर में की पूजा-अर्चना

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सुशासन तिहार के तहत आज अचानक जांजगीर-चांपा जिले के पामगढ़ विकासखंड अंतर्गत ग्राम कोसला पहुंचे। यहां उन्होंने प्रसिद्ध माता कौशल्या मंदिर में पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि एवं छत्तीसगढ़ की खुशहाली के लिए प्रार्थना की। मुख्यमंत्री के मंदिर परिसर पहुंचने पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों, मंदिर सेवा समिति एवं ग्रामीणों द्वारा पारंपरिक लोकनृत्य और उत्साहपूर्ण स्वागत किया गया। इस अवसर पर वित्त मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री ओ. पी. चौधरी भी उनके साथ उपस्थित रहे। मंदिर सेवा समिति की ओर से मुख्यमंत्री साय को माता कौशल्या मंदिर का आकर्षक छायाचित्र स्मृति स्वरूप भेंट किया गया। साथ ही समिति के सदस्यों ने केंद्र सरकार की प्रसाद योजना में कोसला धाम को शामिल करने की मांग को लेकर ज्ञापन भी सौंपा। मुख्यमंत्री ने मंदिर परिसर का अवलोकन किया और स्थानीय श्रद्धालुओं से भी आत्मीय संवाद किया। उनके अचानक आगमन से क्षेत्र में उत्साह का माहौल रहा। इस अवसर पर श्रद्धालु, ग्रामीणजन उपस्थित थे।

हरियाणा सरकार का बड़ा कदम, कार-पूलिंग और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने की पहल

 चंडीगढ़  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का देश हित में ईंधन बचाने का आह्वान कारगर साबित हो रहा है। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से लेकर राज्य सरकार के मंत्री जहां अपने काफिले में गाड़ियों की संख्या कम कर चुके हैं, वहीं मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने अधिकारियों व कर्मचारियों से भी ईंधन की बचत करने के महायज्ञ में अपना आहुति डालने का आह्वान किया है। हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों तथा कर्मचारियों से आग्रह किया है कि वे अपने दैनिक सरकारी कार्यों में पेट्रोल और डीजल की खपत कम करने के लिए हरसंभव प्रयास करें। कार-पूलिंग करने के दिए निर्देश प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हाल ही में वैश्विक परिस्थितियों और ऊर्जा संरक्षण की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए देशवासियों से ईंधन बचत के उपाय अपनाने की अपील की है। सरकारी विभागों के अधिकारी और कर्मचारी अपने कार्यालयों में आने-जाने, बैठकों में भागीदारी तथा आधिकारिक कार्यक्रमों में आने-जाने के लिए ज्यादा से ज्यादा कार-पूलिंग करें। मुख्य सचिव ने सुझाव दिया कि जहां तक संभव हो, पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता कम करने और स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग किया जाए। विभागाध्यक्षों का भी दायित्व है कि वे अपने अधिकारियों और कर्मचारियों को सार्वजनिक परिवहन तथा अन्य विकल्पों के उपयोग के लिए प्रेरित करें। अनुराग रस्तोगी ने अधिकारियों से अनुरोध किया कि वे बैठकों और आधिकारिक संवाद के लिए वीडियो कान्फ्रेंसिंग वर्चुअल प्लेटफॉर्म का अधिक से अधिक उपयोग करें। सामूहिक रूप से किए गए हमारे छोटे-छोटे प्रयास ईंधन की बचत कर व्यापक राष्ट्रीय हित में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।

धनबाद और जमशेदपुर मेडिकल कॉलेजों को बड़ा तोहफा, सीट बढ़ाने की योजना को मिली स्वीकृति

रांची  राज्य के दो मेडिकल कालेजों में एमबीबीएस के साथ-साथ पीजी की सीटें बढ़ेंगी। इनमें एसएनएमएमसीएच (शहीद निर्मल महतो मेडिकल कालेज), धनबाद एवं एमजीएम, जमशेदपुर सम्मिलित हैं। इसे लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने 889.50 करोड़ की योजना की मंजूरी प्रदान की है। इनमें 526.50 करोड़ रुपये केंद्र से मिलेंगे, जबकि शेष राशि का वहन राज्य सरकार को करना होगा। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय का इस आशय का पत्र राज्य सरकार को मिल गया है। साथ ही केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने एमओयू का प्रारुप भेज दिया है, जिसपर राज्य सरकार के स्वास्थ्य विभाग को हस्ताक्षर करना है। केंद्र से स्वीकृत योजना के तहत एसएनएमएमसीएच, धनबाद की सीटें 100 से बढ़ाकर 250 की जाएंगी, जिसपर 225 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसी तरह, एमजीएम, जमशेदपुर की सीटें 150 से बढ़ाकर 250 की जाएंगी, जिसपर 150 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसी तरह, एसएनएमएमसीएच, धनबाद में पीजी की वर्तमान सीटें 19 हैं। यहां विभिन्न विभागों में 186 सीटें बढ़ाई जानी हैं। एमजीएम, जमशेदपुर में पीजी की वर्तमान सीटें 49 हैं। यहां 149 सीटें बढ़ाई जानी हैं। दोनों कालेजों में पीजी की सीटें बढ़ाने के लिए क्रमश: 279 करोड़ रुपये तथा 235.5 करोड़ रुपये की योजना स्वीकृत हुई है। इनमें क्रमश: 167.40 करोड़ तथा 134.10 करोड़ रुपये केंद्र सरकार देगी। इधर, स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने कहा है कि यह निर्णय न केवल राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करेगा, बल्कि आनेवाले वर्षों में चिकित्सकों की कमी भी दूर होगी। झारखंड के मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस व पीजी की सीटें काफी कम थीं सीटों में वृद्धि का सबसे बड़ा लाभ ग्रामीण और पिछड़े इलाकों को मिलेगा, क्योंकि वहां चिकित्सक उपलब्ध हो सकेंगे। स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव ने अजय कुमार सिंह ने केंद्र की मंजूरी को बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि अन्य मेडिकल कलेजों में भी जल्द सीटें बढ़ाने की दिशा में कार्य किया जाएगा। भविष्य में सुपर स्पेशियलिटी सीटों में भी वृद्धि की जाएगी। उन्होंने कहा कि इससे एक ओर जहां झारखंड के छात्रों को चिकित्सा शिक्षा में अधिक अवसर मिलेगा, वहीं दूसरी ओर राज्य में चिकित्सकों की संख्या भी बढ़ेगी। अब इस प्रस्ताव को आगे कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।