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बिहार में बाढ़ से बिगड़े हालात, 22.42 लाख लोग पानी से घिरे; गंगा ने तोड़ा पुराना रिकॉर्ड

पटना  बिहार में बाढ़ से हाहाकार मचा है. राज्य के 12 जिलों के 22 लाख से अधिक लोग इससे प्रभावित है. राजधानी पटना, छपरा, भागलपुर, मुंगेर, खगड़िया, कटिहार सहित कई जिलों में गांव के गांव पानी में घिरा है. पटना में रविवार को गंगा नदी का जलस्तर बाढ़ के उच्चतम स्तर को पार कर गया, जिसके बाद अधिकारियों ने अलर्ट जारी किया है. गंगा के अलावा कोसी, गंडक, बूढ़ी गंडक, पुनपुन और बागमती भी उफान पर है. जिससे प्रभावित इलाकों में बाढ़ की स्थिति विकराल हो गई है. राज्य के 12 जिलों के 70 प्रखंडों की 368 पंचायतों में 22.42 लाख आबादी इस समय पानी के जद में है।  हाथीदह में लगातार खतरे के निशान के ऊपर गंगा इधर सेंट्रल वॉटर कमीशन ने बिहार के 3 फ्लड फोरकास्टिंग स्टेशनों पर अत्यधिक बाढ़ की चेतावनी जारी की है. CWC नेटवर्क के 3 फ्लड फोरकास्टिंग स्टेशनों – पटना जिले के गांधीघाट, हाथीदह और पंडारक – पर गंगा नदी में बाढ़ की स्थिति बहुत गंभीर है. हाथीदह में गंगा खतरे के निशान 41.76 मीटर से लगातार ऊपर बह रही है।  हाथीदह में आज सुबह गंगा का जलस्तर 43.52 मीटर दर्ज की गई CWC ने 8 अगस्त तक के लिए जारी की चेतावनी CWC का कहना है कि चूंकि बिहार में गंगा की मुख्य धारा को मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की नदियों के साथ-साथ बिहार के भीतर अपनी उत्तरी सहायक नदियों से भी काफी पानी मिलता है, इसलिए 8 अगस्त तक बिहार के बक्सर, सारण, वैशाली, खगड़िया, मुंगेर और भागलपुर जिलों में नदी के जलस्तर में स्थिरता या बढ़ोतरी के साथ सामान्य से अधिक या गंभीर बाढ़ की स्थिति बने रहने की संभावना है।    गांधी घाट पर गंगा के जलस्तर ने तोड़ा 6 साल पुराना रिकॉर्ड इधर पटना के गांधी घाट पर गंगा का जलस्तर रिकॉर्ड 50.57 मीटर पर पहुंच गया है, जिसने 2016 का 50.52 मीटर का रिकॉर्ड तोड़ दिया. इससे पटना सिटी के कई मोहल्लों में पानी घुस गया है. पुनपुन के इलाकों में भी कई गांव बाढ़ की चपेट आ गए हैं. हथिदह में गंगा 2021 के रिकॉर्ड स्तर पर रात 11 बजे पहुंच गई। तब गंगा 43.52 मीटर पर पहुंची थी।  छपरा में माही नदी का तटबंध टूटने से कई गांव जलमग्न छपरा के दरियापुर में माही नदी का तटबंध 20 फीट टूटने से कई गांव जलमग्न हो गए. भागलपुर के अकबरनगर में रिंग बांध ओवरफ्लो होने से सुल्तानगंज की 9 पंचायतों के 4 हजार घर डूब गए. मध्य पूर्व रेलवे ने एक अधिसूचना जारी कर कहा कि पटना-गया खंड पर पुनपुन और परसा बाजार स्टेशनों को जोड़ने वाली पुल संख्या 21 पर जलस्तर खतरनाक रूप से बढ़ जाने के कारण कुछ रेलगाड़ियों को रद्द कर दिया गया है या फिर उनका मार्ग बदला गया है।  अधिकारियों ने बताया कि बाढ़ से प्रभावित लोगों के लिए अभी अलग-अलग जिलों में कुल 190 सामुदायिक रसोई संचालित की जा रही है और प्रभावित इलाकों से लोगों को निकालने और आवाजाही में मदद के लिए 1,429 नावों की सेवा ली जा रही है।  SDRF की 47 और NDRF की 10 टीम तैनात अधिकारियों ने बताया कि इसके अलावा, अलग-अलग जिलों में राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) की 27 और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की 10 टीम तैनात की गई हैं. अधिकारियों ने बताया कि भारी बारिश के बाद पटना के गांधी घाट पर गंगा का जलस्तर ‘बाढ़ के उच्चतम स्तर' (एचएफएल) से ऊपर चला गया है।  किस जिले में कौन सी नदी उफान पर अधिकारियों ने बताया कि राज्य में गंडक नदी डुमरियाघाट और हाजीपुर में, कोसी नदी बलतारा और कुरसेला में, बूढ़ी गंडक नदी खगड़िया में, गंगा नदी बक्सर, हाथीदह, भागलपुर, कहलगांव एवं मुंगेर में, पुनपुन नदी श्रीपालपुर में, घाघरा नदी दरौली में और बागमती नदी बेनीबाद में खतरे के निशान के ऊपर बह रही है।  हाथीदह स्टेशन तक पहुंच सकता है पानी अधिकारियों ने बताया कि भारी बारिश के बाद पटना के गांधी घाट पर गंगा का जलस्तर उच्च बाढ़ स्तर से ऊपर चला गया है, जिससे अगले एक से तीन दिनों में राज्य की राजधानी में हाथीदह और अन्य स्टेशनों पर असर पड़ने की आशंका है. उन्होंने बताया कि कई नदियों का जलस्तर बढ़ने के कारण पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय और अरवल में लगभग 22.42 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं।  विभाग की नई एडवाइजरी में क्या कहा गया? जल संसाधन विभाग (डब्ल्यूआरडी) की ओर से जारी नई एडवाइजरी के मुताबिक, हाथीदह में गंगा का जलस्तर अपने पिछले एचएफएल को पार कर सकता है. इसके मद्देनजर बेगूसराय, लखीसराय, मुंगेर, भागलपुर और कटिहार जिलों में सतर्कता बढ़ा दी गई है. परामर्श में कहा गया, ‘‘अधिकारियों और जमीनी स्तर के कर्मचारियों को निर्देश दिया गया है कि वे सतर्क रहें और जरूरत के हिसाब से सावधानी बरतते हुए जलस्तर, तटबंधों, संवेदनशील जगहों और निचले इलाकों पर नियमित नजर रखें।  इसमें कहा गया, ‘‘अभियंताओं से बाढ़ से निपटने से संबंधित संसाधन और मशीनरी तैयार रखने को कहा गया है. प्रभावित इलाकों के लोगों को सलाह दी गई है कि वे नदी के पास न जाएं और सतर्क रहें.'' स्थानीय प्रशासन से कहा गया है कि वे नावों के संचालन पर नजर रखें, क्षमता से अधिक लोगों को नावों पर सवार नहीं होने दें और लोगों को हालात के बारे में जानकारी देते रहें।  अगले दो दिन कई जिलों में बारिश के भी आसार स्थानीय मौसम विज्ञान कार्यालय के अधिकारी ने अगले दो दिनों के दौरान राज्य में कई जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश और कुछ जगहों पर भारी बारिश की संभावना जताई है. इस बीच, विपक्ष ने बिहार में आई बाढ़ को ‘राष्ट्रीय आपदा' घोषित करने की मांग की है।  राजद नेता तेजस्वी बोले- यह राष्ट्रीय आपदा, केंद्र करे मदद बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने दावा किया कि बिहार का 76 प्रतिशत इलाका बाढ़ से प्रभावित है और 19 जिलों के 20 लाख लोग इसकी चपेट में हैं. उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स' पर की गई पोस्ट में कहा, “बीस लाख से अधिक लोग इस आपदा में फंसे हुए हैं, पशुपालकों के मवेशी पानी में डूबकर बह गए हैं. … Read more

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट को मिला नया चीफ जस्टिस! न्यायाधिपति कृष्न राम महापात्र ने ली पद की शपथ

राज्यपाल डेका ने न्यायाधिपति कृष्न राम महापात्र को छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश पद की दिलाई शपथ रायपुर  राज्यपाल रमेन डेका ने न्यायाधिपति कृष्न राम महापात्र  (Krushna Ram Mohapatra) को आज लोकभवन के छत्तीसगढ़ मण्डपम् में उच्च न्यायालय, छत्तीसगढ़ के मुख्य न्यायाधीश पद की शपथ दिलाई। इसके पूर्व कृष्न राम महापात्र उड़ीसा हाईकोर्ट के वरिष्ठ जज के पद पर कार्यरत थे। राज्यपाल डेका ने मुख्य न्यायाधीश कृष्न राम महापात्र को राष्ट्रपति द्वारा जारी मूल वारंट की प्रति सौंपी। राज्यपाल ने मुख्य न्यायाधीश महापात्र को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।      इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, केन्द्रीय कृषि राज्य मंत्री तोखन साहू, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, पूर्व राज्यपाल रमेश बैस, राज्य सभा सांसद श्रीमती लक्ष्मी वर्मा, विधायक सुनील सोनी, अनुज शर्मा एवं अन्य जनप्रतिनिधि भी उपस्थित थे।     समारोह में मुख्य न्यायाधीश महापात्र की धर्मपत्नी श्रीमती अनिता महापात्र सहित छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के न्यायाधीशगण उपस्थित थे। शपथ ग्रहण समारोह का संचालन प्रदेश के मुख्य सचिव विकास शील द्वारा किया गया तथा उन्होंने राष्ट्रपति द्वारा जारी वारंट का वाचन किया। इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू, प्रमुख सचिव गृह विभाग श्रीमती निहारिका बारिक, पुलिस महानिदेशक अरूण देव गौतम, राज्यपाल के सचिव डॉ. सी.आर. प्रसन्ना, महाधिवक्ता विवेक शर्मा, उच्च न्यायालय बिलासपुर के रजिस्ट्रार जनरल रजनीश श्रीवास्तव सहित राज्य शासन के वरिष्ठ अधिकारीगण एवं हाईकोर्ट के अधिवक्तागण उपस्थित थे।      उल्लेखनीय है कि महापात्र छत्तीसगढ़ के 16 वें मुख्य न्यायाधीश होंगे।

छत्तीसगढ़ ने नमस्ते योजना में रचा कीर्तिमान, देश में पांच राज्यों के साथ साझा किया पहला स्थान

रायपुर  केंद्र सरकार की नमस्ते (नेशनल एक्शन फार मैकेनाइज्ड सैनिटेशन इकोसिस्टम) योजना के क्रियान्वयन में छत्तीसगढ़ ने देश में संयुक्त रूप से पहला स्थान हासिल किया है। प्रदेश ने आंध्रप्रदेश, ओडिशा, त्रिपुरा, उत्तरप्रदेश और पुदुचेरी के साथ यह उपलब्धि हासिल की है। 100 अंकों के मूल्यांकन में सत्यापन, मशीनीकरण, हेल्पलाइन, सामाजिक सुरक्षा और जीरो फेटलिटी के मानकों पर प्रदेश का प्रदर्शन अव्वल रहा। सफाई व्यवस्था को सुरक्षित बनाने पर फोकस केंद्र सरकार ने वर्ष 2023 में नमस्ते योजना शुरू की थी। इसका उद्देश्य स्वच्छता कार्यों में मशीनीकरण को बढ़ावा देना, असुरक्षित और खतरनाक तरीके से हाथ से सफाई की प्रथा को खत्म करना और स्वच्छता कार्यों के दौरान होने वाली मौतों को शून्य करना है। छत्तीसगढ़ में 1,487 सीवर और सेप्टिक टैंक कर्मियों का सर्वे किया गया। इनमें से 1,465 कर्मियों का सत्यापन पूरा किया गया है। प्रदेश के 169 नगरीय निकायों में 1,428 कर्मियों को पीपीई किट दी गई, जबकि 1,374 को आयुष्मान कार्ड उपलब्ध कराए गए। इसके अलावा 139 कर्मियों को सुरक्षा प्रशिक्षण दिया गया है। 8,527 वेस्ट पिकर्स की प्रोफाइलिंग कचरा बीनने वाले यानी वेस्ट पिकर्स को भी योजना के दायरे में शामिल किया गया है। प्रदेश में 8,527 वेस्ट पिकर्स की प्रोफाइलिंग की गई, जिसमें से 6,799 का सत्यापन पूरा हो चुका है। वहीं 991 वेस्ट पिकर्स को पीपीई किट वितरित की गई है। इसके अलावा 512 वेस्ट पिकर्स को व्यावसायिक सुरक्षा प्रशिक्षण दिया गया है। अब 6,287 वेस्ट पिकर्स को प्रशिक्षण देने की तैयारी चल रही है। आपातकालीन सेवा के लिए 14420 हेल्पलाइन स्वच्छता से जुड़ी आपात स्थिति में मदद के लिए प्रदेश में 47 ईआरएसयू (इमरजेंसी रिस्पांस सैनिटेशन यूनिट्स) शुरू की गई हैं। इसके साथ ही 14420 हेल्पलाइन भी शुरू की गई है। इसका उद्देश्य जरूरत के समय स्वच्छता से जुड़ी आपात सेवाएं उपलब्ध कराना है। अरुण साव ने दी बधाई उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने इस उपलब्धि पर नगरीय निकायों और संबंधित अमले को बधाई दी। उन्होंने कहा कि स्वच्छता कर्मियों की सुरक्षा और सम्मान सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। नमस्ते योजना के तहत किए जा रहे कामों से स्वच्छता कर्मियों को सुरक्षित माहौल देने और खतरनाक तरीके से हाथ से सफाई की प्रथा को खत्म करने की दिशा में प्रदेश आगे बढ़ रहा है। 

बिहान से बदली राह 35 महिला किसानों ने 600 क्विंटल सब्जी उगाकर लिखी सफलता की नई कहानी

सफलता की कहानी  बिहान से बदली राह 35 महिला किसानों ने 600 क्विंटल सब्जी उगाकर लिखी सफलता की नई कहानी उजाला उत्पादक समूह की दीदियों ने सामूहिक खेती से हासिल की नई पहचान, सीधे थोक बिक्री से 6 लाख रूपए की आय रायपुर पारंपरिक खेती से हटकर हरी सब्जियों की आधुनिक और वैज्ञानिक खेती अपनाने वाले कई किसानों ने अपनी मेहनत और सूझबूझ से सफलता की नई कहानियां लिखी हैं, जिनमें  ग्राम पंचायत रिसोरा में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से जुड़ी महिलाओं ने सामूहिक खेती जैसी प्रेरणादायक मिसालें शामिल हैं, जो कभी दो वक्त की रोटी के लिए संघर्ष करती थी और आज लाखों की कमाई कर रही हैं।          छत्तीसगढ़ के सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के बरमकेला विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत रिसोरा में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से जुड़ी महिलाओं ने सामूहिक खेती के जरिए आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश की है। छोटे से भूखंड पर भी टमाटर, बैंगन, लौकी या करेला, खीरा जैसी सब्जियां उगाकर किसान प्रति बीघा या एकड़ कई गुना अधिक मुनाफा कमा रहे हैं। उजाला उत्पादक समूह से जुड़ी 35 महिला किसानों ने एकजुट होकर न केवल लागत घटाई, बल्कि 600 क्विंटल सब्जियों का रिकॉर्ड उत्पादन कर करीब 6 लाख रूपए की आय अर्जित की है। 2 लाख रूपए की शुरुआती पूंजी से मिली नई उड़ान           वर्ष 2025 में गठित इस समूह का उद्देश्य सामूहिक प्रयास के ज़रिए उत्पादन बढ़ाना और बेहतर बाज़ार तलाशना था। आजीविका गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए समूह को क्लस्टर से स्टार्टअप राशि 50 हजार रूपए, सखी क्लस्टर संगठन, बुदेली से ऋण 1 लाख 50 हजार रूपए, कुल शुरुआती पूंजी 2 लाख रूपए। इस पूंजी की मदद से महिलाओं ने अपने खेतों में वैज्ञानिक तकनीक अपनाते हुए लौकी, करेला और खीरा की खेती शुरू की। 600 क्विंटल सब्जियों की बंपर पैदावार          महिलाओं की कड़ी मेहनत और आधुनिक कृषि तकनीकों के प्रयोग से खेतों में शानदार उत्पादन हुआ। सब्जी की फसल से बचत बढने लगी तो महिलाओं का हौसला बढ़़ा। इसके साथ ही फसल का दायरा बढ़ाने लगी, जिससे पैदावार में बढ़ोत्तरी होने लगी। महिलाओं ने सामूहिक खेती कर लौकी 250 क्विंटल, करेला 250 क्विंटल, खीरा 100 क्विंटल का उत्पादन की। कुल सब्जी उत्पादन 600 क्विंटल होने लगा।  बिचौलियों से मुक्ति, सीधे थोक बाजार से जुड़ाव       सफलता की सबसे बड़ी कड़ी महिलाओं की विपणन (मार्केटिंग) रणनीति रही। बिचौलियों पर निर्भर रहने के बजाय समूह की दीदियों ने अपनी उपज को सीधे थोक बाजार तक पहुंचाया। इससे फसल का उचित दाम मिला और कुल आय 6 लाख रूपए तक पहुंच गई। सुशासन और जमीनी मॉनिटरिंग का असर       मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार बिहान योजना के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर निरंतर कार्य कर रही है। जिला प्रशासन द्वारा बेहतर क्रियान्वयन, मैदानी मार्गदर्शन और सतत् मॉनिटरिंग से योजनाओं का सीधा लाभ हितग्राहियों तक पहुंच रहा है, जिससे ग्रामीण महिलाएं स्वरोजगार के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित कर रही हैं।

जस्टिस संजय के. अग्रवाल बने राजस्थान हाईकोर्ट के 44वें मुख्य न्यायाधीश, राज्यपाल ने दिलाई शपथ

जयपुर राजस्थान उच्च न्यायालय को नया प्रशासनिक और न्यायिक प्रमुख मिल गया है। जयपुर स्थित लोकभवन में आयोजित एक गरिमामय समारोह में जस्टिस संजय कुमार अग्रवाल ने राजस्थान हाईकोर्ट के 44वें नियमित मुख्य न्यायाधीश के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ ली। राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने उन्हें अंग्रेजी भाषा में शपथ दिलाई। समारोह की शुरुआत में मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा जारी नियुक्ति का आधिकारिक वारंट पढ़कर सुनाया। इस अवसर पर राज्य के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी, उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा, मंत्रिमंडल के कई सदस्य, राजस्थान हाईकोर्ट के वर्तमान व पूर्व न्यायाधीश, वरिष्ठ अधिकारी और नए चीफ जस्टिस के परिजन विशेष रूप से मौजूद रहे। शपथ ग्रहण समारोह संपन्न होने के तुरंत बाद नए मुख्य न्यायाधीश संजय के. अग्रवाल ने राज्यपाल और मुख्यमंत्री से मुलाकात की। इसके बाद वे बिना किसी देरी के जयपुर से सड़क मार्ग द्वारा जोधपुर स्थित हाईकोर्ट की मुख्य पीठ के लिए रवाना हो गए। उनके साथ जस्टिस विनीत माथुर भी मौजूद रहे। राजस्थान में न्याय व्यवस्था को सुचारू बनाने और लंबित मुकदमों के त्वरित निस्तारण के लिहाज से उनकी यह नियुक्ति बेहद अहम मानी जा रही है। 1. राजस्थान के 44वें नियमित मुख्य न्यायाधीश के रूप में संभाला पदभार जस्टिस संजय के. अग्रवाल ने राज्य के 44वें नियमित मुख्य न्यायाधीश के तौर पर कमान संभाली है। इस पद पर आसीन होते ही वे राजस्थान की पूरी अधीनस्थ अदालतों और हाईकोर्ट के प्रशासनिक प्रमुख बन गए हैं। 2. छत्तीसगढ़ से जन्म और न्यायिक करियर का गहरा नाता जस्टिस संजय के. अग्रवाल का जन्म 15 जुलाई 1965 को हुआ था। राजस्थान हाईकोर्ट की जिम्मेदारी मिलने से ठीक पहले तक वे छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में वरिष्ठतम न्यायाधीश के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे। 3. 1989 में वकालत से शुरू हुआ न्यायिक सफर उन्होंने साल 1989 में बिलासपुर में एक वकील के रूप में अपने कानूनी करियर की शुरुआत की थी। लगभग दो दशकों तक वकालत में अपनी कानूनी समझ का लोहा मनवाने के बाद उन्होंने न्यायपालिका के उच्च पदों की ओर कदम बढ़ाया। 4. मार्च 2016 में बने थे छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के स्थायी जज वे सितंबर 2013 में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में एडिशनल जज (अतिरिक्त न्यायाधीश) नियुक्त किए गए थे। अदालत में उनके बेहतरीन प्रदर्शन और निष्पक्ष कार्यशैली को देखते हुए मार्च 2016 में उन्हें स्थायी जज बना दिया गया था। 5. सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की विशेष सिफारिश पर हुई नियुक्ति भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत की अध्यक्षता वाले सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 31 अगस्त 2026 को हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में जस्टिस अग्रवाल को राजस्थान हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाने की आधिकारिक सिफारिश केंद्र सरकार को भेजी थी, जिसे राष्ट्रपति ने मंजूरी दी। 6. विवादों के बीच एक निष्पक्ष चेहरे के तौर पर हुई एंट्री राजस्थान हाईकोर्ट में पिछले 11 महीनों से कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के प्रशासनिक फैसलों और केस लिस्टिंग को लेकर वकीलों के बीच कुछ असंतोष देखा जा रहा था। ऐसे माहौल में न्यायपालिका की साख और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए छत्तीसगढ़ से जस्टिस अग्रवाल को इस शीर्ष पद पर तैनात किया गया है। 7. 'सड़क मार्ग' से सफर तय करने वाली सादगी मुख्य न्यायाधीश के रूप में चयन के बाद उनकी सादगी भी चर्चा का विषय बनी रही। वे 6 सितंबर 2026 को बिलासपुर से फ्लाइट लेकर दिल्ली पहुंचे और फिर वहां से बिना किसी विशेष तामझाम के साधारण तरीके से कार द्वारा सड़क मार्ग से जयपुर पहुंचे, जहां हाईकोर्ट गेस्ट हाउस में उनका स्वागत किया गया था। 8. प्रशासनिक सुधारों और कोर्ट मैनेजमेंट का लंबा अनुभव जस्टिस अग्रवाल को न केवल जटिल मुकदमों की सुनवाई करने, बल्कि अदालती इंफ्रास्ट्रक्चर, जजों की कार्यप्रणाली और केस रोस्टर मैनेजमेंट जैसे प्रशासनिक मामलों को कुशलता से संभालने का व्यापक अनुभव प्राप्त है। 9. त्वरित और तार्किक फैसलों के लिए जाने जाते हैं नए सीजे छत्तीसगढ़ में अपने कार्यकाल के दौरान जस्टिस संजय के. अग्रवाल को बड़े कानूनी मामलों में त्वरित, तार्किक और निष्पक्ष फैसले सुनाने के लिए जाना जाता था। वे अदालती कार्यवाहियों के दौरान अधिवक्ताओं की दलीलों को बेहद धैर्यपूर्वक सुनने के लिए भी लोकप्रिय हैं। 10. लगभग 11 महीने का रहेगा राजस्थान में कार्यकाल 15 जुलाई 1965 को जन्मे जस्टिस अग्रवाल 62 वर्ष की आयु पूरी होने पर जून 2027 में सेवानिवृत्त होंगे। इस लिहाज से राजस्थान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के तौर पर उन्हें करीब 10 से 11 महीने का समय मिलेगा, जिसमें वे राज्य में पेंडिंग मामलों के निपटारे पर ध्यान केंद्रित करेंगे।

बिहार में एक रात में गोलीकांड और हत्या की 3 वारदात, मां-बेटी पर फायरिंग से मासूम की हत्या तक

दानापुर पटना के दानापुर में ऑनलाइन लूडो खेलने के दौरान दोस्त के साथ हुए विवाद में उसे गोली मार दी गई। घटना शनिवार देर रात दानापुर थाना क्षेत्र के मैनपुरा की है। किशोर को पेट में गोली लगी है। गोली मारने का आरोप नाबालिग दोस्त पर है। मैनपुरा निवासी विजय राय के पुत्र दुर्गेश कुमार व उसका दोस्त ऑनलाइन लूडो खेल रहे थे। इसी दौरान दोनों के बीच विवाद हो गया। विवाद इतना बढ़ गया कि किशोर ने दुर्गेश को गोली मार दी, जो उसके पेट में लगी। घटना के बाद से किशोर फरार है। उधर, गोली की आवाज सुनकर लोग दौड़े और पुलिस को सूचना दी। परिजन दुर्गेश को लेकर पीएमसीएच पहुंचे, जहां उसकी स्थिति गंभीर बताई जा रही है। थानाध्यक्ष प्रने बताया कि दोनों दोस्त नाबालिग बताए जा रहे हैं। शिवहर: घर में घुसकर मां-बेटी को मारी गोली,गंभीर शिवहर जिले के श्यामपुर भटहां थाना क्षेत्र के लालगढ़ जोगिया गांव में शनिवार की आधी रात घर में घुसकर अपराधियों ने सो रही मां-बेटी पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। घटना में मां को तीन और बेटी को दो गोलियां लगीं। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों को मुजफ्फरपुर स्थित एसकेएमसीएच ले जाया गया, जहां उनकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। पुलिस ने मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। एसपी शैलेंद्र सिंह ने बताया कि प्रथमदृष्टया घटना के पीछे प्रेम प्रसंग का मामला सामने आया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी प्रिंस कुमार का घायल किशोरी के साथ प्रेम प्रसंग था। वह किशोरी पर घर से भागने के लिए दबाव बना रहा था। पुलिस ने दोनों घायलों को अस्पताल पहुंचाया। प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए दोनों को एसकेएमसीएच रेफर किया गया। बाढ़: विवाद में मां के सामने मासूम बेटे को लोहे के हुक से मार डाला पटना से सटे बाढ़ में आपसी विवाद में मां के सामने उसके तीन वर्षीय मासूम बेटे चिंटू कुमार की लोहे के हुक से मारकर हत्या कर दी गई। घटना भदौर थाना क्षेत्र के लालपुरा गांव में रविवार की है। हत्या का आरोप पड़ोसी श्याम सुंदर है। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए बाढ़ भेज दिया। वहीं मासूम की हत्या में आरोपित श्याम सुंदर को गिरफ्तार कर पूछताछ कर रही है। चिंटू कुमार के मामा शिवजी कुमार ने पुलिस को बताया कि घर से बाहर जाने के लिए उसकी मां जूता पहना रही थी। तभी आपस में लड़ते हुए श्याम सुंदर आया और बोरा उठाने वाले लोहे के हुक को बच्चे की गर्दन में भोंक दिया, जिससे वह गंभीर रूप से जख्मी हो गया। परिजनों ने पास के एक निजी क्लीनिक में बच्चे को लेकर पहुंचे, लेकिन गंभीर स्थिति होने के कारण उसे रेफर कर दिया गया। इसके बाद परिजन शेखपुरा जिले के बरबीघा स्थित एक अस्पताल में ले जा रहे थे, पर रास्ते में ही मासूम ने मां की गोद में ही दम तोड़ दिया। घर में मचा कोहराम मासूम की मौत से घर में कोहराम मच गया। हंसते खेलते चिंटू की मौत ने हर किसी को दुखी कर दिया। चिंटू की मौत से मां लगातार बेहोश हो जा रही थी। होश में आने के बाद वह अपने बेटे का नाम पुकार रही थी। वहीं अन्य लोग उसे ढाढस बंधाने में लगे थे ।  

आत्मनिर्भरता की नई मिसाल- खेतों से मशरूम उत्पादन तक मिथिला दीदी ने लिखी सफलता की नई कहानी

सफलता की कहानी  आत्मनिर्भरता की नई मिसाल- खेतों से मशरूम उत्पादन तक मिथिला दीदी ने लिखी सफलता की नई कहानी स्व-सहायता समूह के सहयोग से 1.5 लाख की पूंजी से शुरू किया काम, अब हर महीने कमा रही हैं 50 हजार रुपये रायपुर पारंपरिक कृषि पर निर्भरता से निकलकर आत्मनिर्भरता की राह पकड़ने वाली ग्रामीण महिलाओं की सूची में अब सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के बरमकेला विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत खोरीगांव की मिथिला नायक दीदी का नाम भी जुड़ गया है। अपनी कड़ी मेहनत, सूझबूझ और शासकीय योजनाओं के सही क्रियान्वयन के बदौलत मिथिला दीदी ने अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को पूरी तरह बदल दिया है। सीमित आय से आर्थिक मजबूती की ओर         महिलाओं में आत्मनिर्भरता की जो लहर उठ रही हैए उसका एक प्रेरणादायक उदाहरण बरमकेला विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत खोरीगांव की मिथिला नायक दीदी हैए जिनके लिए मशरूम उत्पादन की खेती वरदान साबित हुई है। शुरुआत में परिवार की वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए केवल पारंपरिक खेती पर निर्भर रहना पड़ता था, जिससे घर का खर्च चलाना कठिन हो रहा था। इस चुनौती से निपटने के लिए मिथिला दीदी ने अन्नपूर्णा स्व-सहायता समूह से जुड़ने का फैसला किया। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें सखी क्लस्टर संगठन, बुदेली के माध्यम से वित्तीय सहयोग प्राप्त हुआ। 1 लाख 50 हजार रूपए की शुरुआती पूंजी से सफर का आगाज         मशरूम उत्पादन का व्यवसाय शुरू करने के लिए उन्होंने सखी क्लस्टर संगठन से ऋण 1 लाख 20 हजार रूपए, अपनी व्यक्तिगत बचत से 30 हजार रूपए इस प्रकार कुल शुरुआती लागतरू 1 लाख 20 हजार रूपए से मशरूम उत्पादन का कार्य शुरू की। शुरुआती दौर में यह कार्य नया था, लेकिन सीखने की ललक और निरंतर प्रयासों से जल्द ही मशरूम उत्पादन एक सफल आजीविका गतिविधि में बदल गया। शुरुआती दौर में तापमान नियंत्रण, मार्केटिंग और तकनीकी जानकारी की कमी जैसी कई समस्याएं सामने आईं। लेकिन मिथिला दीदी ने प्रशिक्षण लेकर और आपसी सहयोग से इन सभी चुनौतियों को अवसर में बदल दिया। हर माह 50 हजार रूपए की आय और प्रेरणादायक पहल         बेहतर गुणवत्ता और उत्पादन के चलते स्थानीय बाजारों में मशरूम की मांग तेजी से बढ़ी। वर्तमान में मिथिला दीदी अपने घर से ही मशरूम उत्पादन कर स्थानीय बाजार में बेचती हैं और प्रतिमाह लगभग 50 हजार रूपए की आमदनी अर्जित कर रही हैं। उनकी यह सफलता आज क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बन गई है। सुशासन नीति और बेहतर मॉनिटरिंग का परिणाम          मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। जिला प्रशासन की सतत् मॉनिटरिंग और जमीनी स्तर पर मार्गदर्शन से सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ वास्तविक हितग्राहियों तक पहुँच रहा है, जिससे ग्रामीण महिलाएं स्वरोजगार के नए अवसर गढ़ रही हैं। आज आत्मनिर्भर भारत की सोच को जमीन पर उतारते हुए यह संदेश दे रही है कि छोटे कदम भी बड़े बदलाव ला सकते हैं।

जेलों में मोबाइल नेटवर्क पर लगेगी लगाम, हरियाणा में टावर हार्मोनिक्स सिस्टम का होगा विस्तार

चंडीगढ़  हरियाणा की जेलों में अवैध मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए तकनीक आधारित नई व्यवस्था को आगे बढ़ाया जा रहा है। अंबाला जेल में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू की गई टावर हार्मोनिक्स काल ब्लाकिंग प्रणाली के सकारात्मक परिणाम सामने आने के बाद अब इसे प्रदेश की अन्य जेलों में लागू करने की दिशा में काम किया जा रहा है। यह जानकारी कांग्रेस विधायक पूजा चौधरी द्वारा विधानसभा में पूछे गए सवाल के जवाब में कारागार मंत्री डा. अरविंद शर्मा ने दी। मंत्री ने बताया कि जेलों को सुरक्षित और आधुनिक बनाने के लिए तकनीक का अधिकतम इस्तेमाल किया जा रहा है। जेल विभाग की प्राथमिकता केवल जेलों से अवैध मोबाइल फोन बरामद करना ही नहीं, बल्कि उनके इस्तेमाल की संभावना को ही खत्म करना है। इसी सोच के तहत अंबाला जेल में टावर आधारित प्रणाली का प्रयोग किया गया, जिसने अवैध मोबाइल के जरिए होने वाली काल और इंटरनेट के इस्तेमाल पर प्रभावी रोक लगाने में सफलता हासिल की। जेल परिसर में मोबाइल नेटवर्क बाधित इस व्यवस्था की सबसे बड़ी खासियत पारंपरिक मोबाइल जैमर का विकल्प होना है। जेल परिसर में विशेष टावर लगाए जाते हैं, जो वहां मौजूद मोबाइल फोन को लक्षित तरीके से नियंत्रित करते हैं। इससे पूरे जेल परिसर में मोबाइल नेटवर्क को पूरी तरह बाधित किए बिना अवैध फोन की काल और इंटरनेट सेवाओं पर अंकुश लगाया जा सकता है। यह व्यवस्था जेल प्रशासन को अनधिकृत बाहरी संपर्क रोकने में अधिक प्रभावी तरीके से मदद कर सकती है। अंबाला जेल को इस तकनीक के पायलट प्रोजेक्ट के लिए चुना गया था। यहां प्रणाली की कार्यप्रणाली, नेटवर्क कवरेज और अवैध मोबाइल के इस्तेमाल को रोकने की क्षमता का परीक्षण किया गया। संतोषजनक परिणाम मिलने के बाद अन्य जेलों में भी इसके विस्तार की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं।  

IAS नेहा का 50 दिन में दोबारा तबादला, बोलीं- ‘ट्रांसफर की धमकी देने वालों पर शिकायत के बाद मुझे ही हटा दिया’

 भोपाल एमपी में एक IAS अधिकारी के लगातार ट्रांसफर का मामला चर्चा में है. IAS अधिकारी नेहा मारव्या सिंह ने एक साल के भीतर चौथी बार अपना नाम ट्रांसफर लिस्ट में आने पर नाराजगी जताई है. उन्होंने IAS अधिकारियों के ग्रुप में अपना दर्द साझा करते हुए सिस्टम पर गंभीर सवाल उठाए हैं।  5 सितंबर 2026 की ट्रांसफर लिस्ट का जिक्र करते हुए नेहा मारव्या सिंह ने लिखा कि वह बेहद परेशान हैं. उन्होंने कहा कि मौजूदा पद पर ज्वाइन करने के महज 50 दिन के भीतर ही उनका ट्रांसफर कर दिया गया. उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर एक IAS अधिकारी इतना कमजोर कैसे हो सकता है कि उसके साथ काम करने वाले कर्मचारी ही उसे ट्रांसफर कराने में सफल हो जाएं? नेहा मारव्या सिंह का यह संदेश IAS अधिकारियों के ग्रुप में साझा किया गया है. इसमें उन्होंने अपने साथ हुए घटनाक्रम का सिलसिलेवार जिक्र करते हुए कहा कि वह लंबे समय से चुप्पी और धैर्य बनाए हुए थीं, लेकिन अब स्थिति इस स्तर तक पहुंच गई है कि उनके मातहत उन्हें ट्रांसफर कराने की धमकी देने लगे हैं।  एक साल में चौथी बार मेरा नाम ट्रांसफर लिस्ट में IAS अधिकारी ने अपने संदेश की शुरुआत सीनियर अधिकारियों और सहयोगियों को संबोधित करते हुए की. उन्होंने कहा कि वह समझती हैं कि IAS अधिकारी होने के नाते राज्य सरकार उन्हें जहां चाहे वहां ड्यूटी करने के लिए कह सकती है और उन्होंने हमेशा सरकारी आदेशों को सम्मानपूर्वक स्वीकार किया है. लेकिन इस बार उन्हें यह ट्रांसफर बेहद निराशाजनक लग रहा है. अपने संदेश में नेहा मारव्या सिंह ने ट्रांसफर की वजह को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने दावा किया कि उनके साथ काम करने वाले कुछ कर्मचारियों ने उनके खिलाफ ‘mutiny’ यानी विद्रोह जैसा माहौल बनाया. उनका कहना है कि इन कर्मचारियों का प्रशासनिक नियंत्रण सीधे उनके पास नहीं था, बल्कि उनका स्थापना संबंधी नियंत्रण विभाग के पास था।  नेहा के मुताबिक, इन कर्मचारियों ने उनकी टेबल पर आकर कथित तौर पर धमकी दी कि उनका ट्रांसफर करा दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि उन्होंने मातहतों की कथित अनुशासनहीनता, फाइलें रोककर रखने और विभाग में उनके साथ किए गए कथित दुर्व्यवहार की जानकारी उचित माध्यम से वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाई थी. उन्हें उम्मीद थी कि इस पर जरूरी कार्रवाई होगी. लेकिन उनके मुताबिक, कार्रवाई होने के बजाय उनका ही ट्रांसफर कर दिया गया।  क्या IAS अधिकारी इतना कमजोर है  अपने संदेश में नेहा मारव्या सिंह ने सबसे बड़ा सवाल इसी बात को लेकर उठाया. उन्होंने पूछा कि इस तरह के फैसले से नीचे तक क्या संदेश जाएगा? उनके शब्दों में, क्या एक IAS अधिकारी इतना कमजोर है कि उसके मातहत कर्मचारी भी उसके खिलाफ विद्रोह कर उसे ट्रांसफर कराने में सफल हो सकते हैं? उन्होंने यह भी कहा कि किसी अधिकारी के ज्वाइन करने के एक महीने के भीतर ही उसके खिलाफ इस तरह का माहौल बन जाना सामान्य बात नहीं है. उनके मुताबिक, किसी अधिकारी को नई जगह के कामकाज को समझने में ही समय लगता है।  उन्होंने अपने साथ हुए घटनाक्रम को अपमानजनक बताते हुए कहा कि मातहतों के कथित विद्रोह के कारण उनका ट्रांसफर किया गया. नेहा ने अपने संदेश में अपने छोटे कार्यकाल को लेकर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि उनकी पोस्टिंग का कार्यकाल कई बार सिर्फ 2-3 महीने का रह जाता है. ऐसे में जब तक वह किसी पद की जिम्मेदारी और कामकाज को समझ पाती हैं, तब तक उन्हें हटा दिया जाता है. उन्होंने लिखा कि ऐसी स्थिति में वह प्रभावी तरीके से काम कैसे कर सकती हैं  उन्होंने दावा किया कि उनके मातहतों को भी यह महसूस होने लगा है कि अगर वह उनके हिसाब से काम नहीं करेंगी तो वे उनका ट्रांसफर करा सकते हैं. यही बात उन्हें सबसे ज्यादा परेशान कर रही है।  बनाए रखी चुप्पी और धैर्य  IAS अधिकारी ने अपने संदेश में कहा कि उन्होंने लंबे समय तक चुप्पी और धैर्य बनाए रखा. उन्होंने दावा किया कि उन्हें लंबे समय तक किनारे रखा गया और पर्याप्त काम नहीं दिया गया. उन्हें उम्मीद थी कि समय के साथ परिस्थितियां बेहतर होंगी. लेकिन उनके मुताबिक, स्थिति सुधरने के बजाय और खराब होती चली गई. अब स्थिति यह हो गई है कि उनके मातहत कर्मचारी ही उन्हें ट्रांसफर कराने की धमकी देने लगे हैं. अपने संदेश के अंत में नेहा मारव्या सिंह ने बेहद तल्ख टिप्पणी की. उन्होंने लिखा कि ‘Always conspirators win and I fail’, यानी उनके मुताबिक हर बार साजिश करने वाले जीत जाते हैं और वह असफल हो जाती हैं. उन्होंने कहा कि सिस्टम उन्हें विफल कर चुका है. उन्होंने यह भी लिखा कि आज वह निशाने पर हैं और कल कोई दूसरा IAS अधिकारी भी इसी तरह निशाना बन सकता है. उनका यह संदेश अब प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। 

जहरीली शराब कांड में MP में 18 मौतें, 109 मरीज भर्ती; 30 आरोपी नामजद, CM ने दिए सख्त कार्रवाई के निर्देश

सागर  सागर में जहरीली शराब पीने से मौतों का आंकड़ा 18 पहुंच गया है। सोमवार सुबह महेश रावत (55) निवासी धुरमार ने बंडा अस्पताल, छापरी गांव की रहने वाली श्याम बाई अहिरवार (50) ने जिला अस्पताल और पापेट गांव निवासी कृष्ण कुमार लोधी ने मेडिकल कॉलेज में दम तोड़ा। फिलहाल, 109 लोग अस्पताल में भर्ती हैं। पुलिस ने मामले में 30 नामजद आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। इनमें से 10 को गिरफ्तार कर लिया गया है। उनसे शराब के नेटवर्क के संबंध में पूछताछ की जा रही है। लाइसेंसी ठेकेदार सिद्धार्थ कुशवाहा और यशवंत ठाकुर को भी आरोपी बनाया गया है। पुलिस टीमें फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दे रही हैं।  सीएम मोहन यादव ने कहा-कड़ी कार्रवाई करेंगे सागर में मिलावटी शराब से मृतकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। अब तक 18  लोगों की मौतों की सूचना है। कई प्रभावित अस्पताल में भर्ती ​हैं जिनमें से कुछ की हालत गंभीर बनी हुई है। ऐसे में मृतकों की संख्या और बढ़ने की आशंका है। सागर की कलेक्टर प्रतिभा पाल ने अस्पताल पहुंचकर प्रभावितों का हाल जाना और स्वास्थ्य सुविधाओं का जायजा लिया। इस बीच मिलावटी शराब मामले में कई प्रतिष्ठित लोगों के शामिल होने की आशंका है। हालांकि सीएम मोहन यादव ने मामले में कड़ी कार्रवाई की बात कही है। सागर में शराब पीनेवालों की स्क्रीनिंग भी कराने की अपील की जा रही है। सागर में हुए शराब कांड पर बीजेपी सरकार पर विपक्षी हमलावर हैं। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि राज्य में सरकार के संरक्षण में अवैध शराब का कारोबार खुलेआम चल रहा है। परिजन बोले- शराब पीने के बाद बिगड़ी तबीयत महेश के भतीजे श्रवण कुमार रावत ने बताया कि चाचा ने कल शाम को शराब पी थी‌‌, जिसके बाद उनकी तबीयत बिगड़ी थी। वहीं, श्याम बाई के बेटे विट्ठल अहिरवार ने कहा- हम मामा के घर गमी में गए थे। मां घर में अकेली थी। उन्होंने गांव में किसी से मंगवाकर शराब पी ली। देर रात उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। सुबह उन्हें जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां उपचार के दौरान मौत हो गई। राजेंद्र ने पूछा था- जहरीली शराब तो नहीं है बंडा थाने में दर्ज FIR के अनुसार, फरियादी अनूप सिंह लोधी ने बताया कि उसके गांव में करीब 8 लोग अवैध रूप से शराब बेचते हैं। 4 सितंबर को वह अपने भतीजे राजेंद्र लोधी के साथ जुझार लोधी की दुकान पर गया था। जुझार ने बताया कि बरेठी के लाइसेंसी शराब ठेकेदार यशवंत सिंह, मनीष लोधी और बंडा निवासी आशीष साहू ने आकाश राय, रहीम खान, सत्यम, आशाराम, अरविंद, रविंद्र, रोहित, अनिकेत गंधर्व और माखन के माध्यम से अपनी गाड़ी से नया सस्ता ब्रांड भेजा है। उसने कहा कि यह शराब दुकान से 20 रुपए सस्ती मिलेगी। अनूप ने कहा कि उसे आज शराब नहीं पीनी है। राजेंद्र ने पूछा कि नकली जहरीली शराब तो नहीं है। प्रभारी मंत्री की अध्यक्षता में जांच कमेटी गठित अभी तक की जांच में यह स्पष्ट हो गया है कि सागर में यूपी का रैकेट मिलावटी शराब की सप्लाई कर रहा था। सीएम मोहन यादव ने सागर जिले के प्रभारी मंत्री को तुरंत मौके पर पहुंचने को कहा है। प्रभारी मंत्री की अध्यक्षता में जांच कमेटी भी गठित कर दी गई है। जुझार ने कहा- 20 रुपए सस्ती मिलेगी जुझार लोधी ने कहा- ब्रांड वही है और इसे मनीष व आशीष ने शराब के फार्मूले से बनाया है। उसने कहा कि यह बाजार से 20 रुपए सस्ती मिलेगी। राजेंद्र ने जुझार की दुकान से 70 रुपए में एक क्वार्टर देशी शराब खरीदी और पी। रात में घर लौटने के बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई। उसे बंडा अस्पताल ले जाया गया, जहां से सागर रेफर किया गया। इलाज के दौरान राजेंद्र की मौत हो गई। करतार सिंह लोधी और दिग्विजय सिंह लोधी की भी शराब पीने से मौत हुई। पुलिस ने इन लोगों पर दर्ज की एफआईआर पुलिस ने जुझार लोधी, दिनेश सिंह, सौरभ लोधी, गोविंद लोधी, मनोहर लोधी, लाइसेंसी यशवंत ठाकुर, मनीष लोधी, आशीष साहू, आकाश राय, रहीम खान, सत्यम, आशाराम, अरविंद, रोहित, माखन, अनिकेत गंधर्व, विशाल लोधी, मंगल रजक, विशाल लोधी और राजा सिंह के खिलाफ मामला दर्ज किया है। लाइसेंसी ठेकेदार सिद्धार्थ कुशवाहा, राम सिंह लोधी, चंद्रभान राजपूत, अरविंद यादव, भगवान सिंह और मान सिंह अहिरवार समेत अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की है। ग्रामीण बोले- ततरवारा गांव से होती थी शराब की सप्लाई नाम न छापने की शर्त पर ग्रामीणों ने बताया कि नौराज ग्राम पंचायत के ततरवारा गांव में लंबे समय से अवैध शराब बनाई जा रही है। यहां से आसपास के गांवों में शराब की सप्लाई होती है। ग्रामीणों के मुताबिक, शराब बनाने के काम में कई प्रभावशाली और आपराधिक प्रवृत्ति के लोग जुड़े हैं। उनकी दहशत के कारण ग्रामीण खुलकर नाम लेने से डरते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि स्थानीय पुलिस भी ततरवारा गांव में शराब के खिलाफ कार्रवाई करने से कतराती है। 10 आरोपियों को गिरफ्तार कर पूछताछ कर रहे एसपी अनुराग सुजानिया ने बताया कि शराब मामले में बंडा और विनायका थाने में 25 से अधिक नामजद लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। उन्हें थाने लाकर पूछताछ की जा रही है। उनसे शराब के नेटवर्क के संबंध में जानकारी जुटाई जा रही है। फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमें अलग-अलग स्थानों पर लगातार दबिश दे रही हैं। मामले के सभी बिंदुओं की बारीकी से जांच की जा रही है।