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महाकाल की भादौ सवारी आज होगी भव्य, 50 क्विंटल फूलों की होगी बारिश; 6 घंटे मिलेंगे दर्शन

उज्जैन  भादौ के दूसरे सोमवार पर आज उज्जैन में बाबा महाकाल की राजसी सवारी निकाली जाएगी। इसका मार्ग करीब साढ़े पांच किलोमीटर का होगा। सवारी में शामिल होने के लिए देशभर से श्रद्धालु आएंगे। इससे पहले सावन की चार और भादौ की एक सवारी निकल चुकी है। ये छठी और आखिरी सवारी है। इसमें केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादत्य सिंधिया पालकी का पूजन करेंगे। महाकाल की सवारी में 5 कलाकारों की एक ऐसी टोली भी शामिल होती है, जिनकी वेशभूषा और अंदाज श्रद्धालुओं का ध्यान खुद-ब-खुद खींच लेता है। खास तरह की पगड़ी, आभूषण और पारंपरिक हथियार वाले इस रूप में तैयार होने के लिए करीब दो घंटे तक मेकअप किया जाता है। इसके बाद 11 से 15 किलो तक की राजसी पोशाक पहनकर ये किरदार पूरी सवारी में पैदल चलते हैं। शिक्षक ने शुरू की परंपरा, 39 साल से निभा रहे किरदार महाकाल की सवारी में शामिल होने वाली इस टोली में स्वामी मुस्कुराके, स्वामी खिलखिलाके, स्वामी दिलमिलाके, स्वामी गुदगुदाके और पप्पू तलवार शामिल हैं। बाबा की पालकी के आगे चलने वाली यह टोली अलग-अलग राजसी किरदारों में नजर आती है। हर साल इनका लुक अलग होता है। इस टोली के मुखिया शैलेंद्र व्यास उर्फ ‘स्वामी मुस्कुराके’ 39 साल से लगातार महाकाल की सवारी में शामिल हो रहे हैं। वे उज्जैन के ही रहने वाले हैं। 1989 में शिक्षक की नौकरी के दौरान उन्हें पता चला कि पुराने समय में राजा अपनी राजसी वेशभूषा में महाकाल की सवारी में शामिल होते थे।इसी परंपरा से प्रभावित होकर उन्होंने पहली बार धोती-कुर्ता और साफा पहनकर सवारी में हिस्सा लिया। इसके बाद यह सिलसिला कभी नहीं टूटा। राणौजी सिंधिया ने परंपरा को दिया नया स्वरूप करीब सवा दो सौ वर्ष पहले मराठा शासनकाल में सिंधिया वंश के संस्थापक राणौजी सिंधिया ने महाकाल मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया और महाकाल की सवारी की परंपरा को नया स्वरूप दिया। उन्होंने सवारी में नए रथ, गजराज और लोक परंपराओं को शामिल किया, जिससे आयोजन और अधिक भव्य बन गया। राणौजी सिंधिया स्वयं भी सवारी में शामिल होते थे और पालकी के आगे चलकर भगवान महाकाल को राजाधिराज का सम्मान देते थे। इसके बाद स्वतंत्रता पूर्व काल तक सिंधिया और होलकर राजवंशों के प्रमुख भी महाकाल की सवारी में राजकीय रूप से शामिल होते रहे। पालकी के आगे चलना इस बात का प्रतीक माना जाता था कि राज्य के वास्तविक शासक स्वयं भगवान महाकालेश्वर हैं। सावन-भादौ में निकलती है महाकाल की सवारी विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर की सवारी हर वर्ष सावन और भादौ माह में सोमवार को निकलती है। सावन के सोमवारों के साथ भादौ माह के दो सोमवार भी भगवान महाकाल नगर भ्रमण पर निकलते हैं। भादौ माह के दूसरे सोमवार को निकलने वाली सवारी को अंतिम और राजसी सवारी के रूप में विशेष महत्व प्राप्त है। इस दौरान विभिन्न कलाकार, संगीतकार और लोक कलाकार शामिल होते हैं। भगवान महाकाल का आकर्षक श्रृंगार किया जाता है और सवारी के मार्ग पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। पूरी उज्जैन नगरी महाकाल के जयकारों से गूंज उठती है।  भक्तों की आस्था का प्रतीक है सवारी महाकाल की सवारी को भगवान महाकाल के प्रति श्रद्धा और आस्था का प्रतीक माना जाता है। यात्रा के दौरान श्रद्धालु भगवान को फल, मिठाई, दूध और अन्य भोग अर्पित करते हैं। दूर-दूर से श्रद्धालु सवारी में शामिल होने के लिए उज्जैन पहुंचते हैं और बाबा महाकाल के जयकारों के साथ नगर भ्रमण में सहभागी बनते हैं। करीब 1100 साल पुरानी इस परंपरा ने राजा भोज के राजकीय उत्सव से लेकर सिंधिया और होलकर राजवंशों के दौर तक कई बदलाव देखे हैं। हालांकि, समय के साथ स्वरूप बदलने के बावजूद भगवान महाकाल की सवारी आज भी उज्जैन की आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का सबसे भव्य आयोजन बनी हुई है।

बिहार बाढ़: 190 सामुदायिक रसोई में 2.51 लाख लोगों को मिल रहा भोजन, 1429 नावें तैनात

पटना राज्य में बाढ़ की वजह से 22 लाख से ज्यादा आबादी प्रभावित है। इस स्थिति से निपटने के लिए राहत और बचाव कार्यों का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है। नदियों के जलस्तर में हुई वृद्धि और बाढ़ की चुनौती से निपटने की दिशा में आपदा प्रबंधन विभाग पूरी तत्परता से जुटा हुआ है। व्यापक राहत अभियानों के तहत बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में 190 सामुदायिक रसोई केंद्रों का सफल संचालन किया जा रहा है। इनके माध्यम से अब तक लगभग 2.51 लाख लोगों को भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है कि इस आपदा की घड़ी में राज्य का कोई भी प्रभावित नागरिक भूखा न रहे और हर पीड़ित तक त्वरित सहायता पहुंचे। 12 जिलों में लोगों का जनजीवन अस्त-व्यस्त 12 जिलों पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय एवं अरवल के 70 प्रखंडों की 368 ग्राम पंचायतों में लगभग 22.42 लाख आबादी बाढ़ से प्रभावित हुई है। पांच सितंबर को संचालित 80 सामुदायिक रसोइयों की संख्या को बढ़ाकर रविवार को 190 कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त तीन राहत शिविरों का भी संचालन किया जा रहा है। यहां 1631 बाढ़ शरणार्थियों के लिए आवासन, भोजन एवं अन्य बुनियादी सुविधाएं दी गई हैं। विभाग की ओर से अब तक प्रभावित परिवारों के बीच लगभग 65,700 पालीथीन शीट तथा 12,712 ड्राई राशन पैकेट बांटे जा चुके हैं। इसी तरह ड्राई राशन पैकेट का वितरण भी 11,700 से बढ़कर 12,712 हो गया है। 1429 नावों का हो रहा परिचालन   प्रभावित क्षेत्रों में लोगों के सुरक्षित आवागमन के लिए 1,429 नावों का परिचालन कराया जा रहा है, जबकि प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल के लिए चलाए जा रहे चिकित्सा शिविरों की संख्या 118 से बढ़ाकर 171 कर दी गई है। राहत अभियानों को मजबूती देने के लिए एनडीआरएफ की 10 टीमों और एसडीआरएफ की 27 टीमों को विभिन्न जिलों में तैनात किया गया है। नदियों के जलस्तर की बात करें तो केंद्रीय जल आयोग के अनुसार गंडक, कोसी, बूढ़ी गंडक, गंगा, पुनपुन, बागमती और घाघरा नदियां विभिन्न स्थलों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। गंडक (वाल्मीकिनगर) और सोन (इंद्रपुरी) बराजों पर जलस्राव की प्रवृत्ति फिलहाल स्थिर बनी हुई है। बिहार मौसम सेवा केंद्र के अनुसार अगले दो दिनों में राज्य के अनेक स्थानों पर हल्की से मध्यम तथा कुछ स्थानों पर भारी वर्षा की संभावना जताई गई है।  

20 साल की सेवा के बाद नियमित होने की आस, हरियाणा के अतिथि अध्यापकों ने सरकार से लगाई गुहार

चंडीगढ़  हरियाणा के सरकारी स्कूलों में करीब दो दशक से सेवाएं दे रहे अतिथि अध्यापकों ने अपनी मांग को सरकार तक पहुंचाने के लिए गांधीगिरी का रास्ता अपनाया है। प्रदेशभर में अतिथि अध्यापकों ने एक साथ इंटरनेट मीडिया पर अभियान चलाकर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा की सकारात्मक सोच को लेकर हजारों पोस्ट साझा कीं। अभियान का मकसद सरकार का ध्यान अपनी उस मांग की ओर आकर्षित करना है, जिसके तहत अतिथि अध्यापक खुद को नियमित करने की मांग कर रहे हैं। प्रदेश में करीब 12 हजार अतिथि अध्यापक लंबे समय से सरकारी स्कूलों में सेवाएं दे रहे हैं। नियमित करने की उठी मांग उनका तर्क है कि जब वे लगभग 20 वर्षों से शिक्षा व्यवस्था का हिस्सा हैं और लगातार अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं, तो उन्हें भी हरियाणा के सरकारी कालेजों में कार्यरत अतिथि अध्यापकों की तर्ज पर नियमित किया जाना चाहिए। राज्य सरकार करीब चार हजार कालेज लेक्चरर्स को पक्का कर चुकी है। इसी निर्णय को आधार बनाकर स्कूलों के अतिथि अध्यापक भी अपने लिए समान नीति की उम्मीद लगाए हुए हैं। अतिथि अध्यापकों के प्रतिनिधिमंडल की मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के साथ मुलाकात हो चुकी है। इसके अलावा शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा भी अतिथि अध्यापकों की मांग के प्रति सकारात्मक रुख जाहिर कर चुके हैं। पिछले दिनों मुख्यमंत्री ने बैठक में इस विषय पर अधिकारियों के साथ चर्चा करने का भरोसा दिया था। ऐसे में अतिथि अध्यापकों को उम्मीद है कि सरकार उनकी करीब 20 साल पुरानी सेवा और अनुभव को देखते हुए कोई ठोस रास्ता निकालेगी। अतिथि शिक्षकों के भविष्य से जुड़ा विषय वहीं, विधानसभा में भी विपक्ष की ओर से अतिथि अध्यापकों को नियमित करने का मुद्दा उठाया जा चुका है। इससे यह मामला अब केवल कर्मचारी संगठनों की मांग तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था और लंबे समय से अस्थायी आधार पर काम कर रहे अतिथि शिक्षकों के भविष्य से जुड़ा विषय बन गया है। अतिथि अध्यापकों का ताजा इंटरनेट मीडिया अभियान इसी उम्मीद के साथ चलाया गया है कि सरकार के समक्ष अपनी बात आक्रामक आंदोलन की बजाय सकारात्मक तरीके से रखी जाए। हजारों पोस्ट के जरिए मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री के सकारात्मक रुख को सामने रखते हुए उनसे जल्द निर्णय लेने की अपील की गई है। अब निगाहें सरकार और शिक्षा विभाग की आगामी कार्रवाई पर हैं।

हिंदपीढ़ी के 34 मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश? फॉर्म-7 को लेकर SDM से शिकायत

रांची  विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाने को लेकर रांची में विवाद खड़ा हो गया है। हिंदपीढ़ी क्षेत्र के मतदाताओं ने आरोप लगाया है कि उनके नाम मतदाता सूची से हटाने की साजिश के तहत फार्म-7 के माध्यम से आवेदन दिया गया है। शिकायत के अनुसार, रांची विधानसभा क्षेत्र के भाग संख्या 226 में रहने वाले 34 मतदाताओं को फार्म-7 में अनुपस्थित या अस्थायी रूप से स्थानांतरित बताया गया है, जबकि संबंधित मतदाताओं का दावा है कि वे पिछले कई वर्षों से अपने स्थायी पते पर रह रहे हैं। मामले को लेकर मतदाताओं की ओर से रांची के एसडीएम को लिखित शिकायत दी गई है। शिकायतकर्ताओं ने पूरे मामले की जांच कर दोषी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है। उन्हें जांच का आश्वासन दिया गया है। स्थायी पते पर रह रहे, फिर कैसे बताया अनुपस्थित शिकायतकर्ताओं का कहना है कि SIR के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए फार्म-7 का इस्तेमाल किया गया। आरोप है कि बीएलए-2 मो. यासीन अली के माध्यम से 34 लोगों के नाम हटाने के लिए आवेदन दिया गया। फॉर्म-7 में इन मतदाताओं को अनुपस्थित अथवा अस्थायी रूप से स्थानांतरित बताया गया है। मतदाताओं का कहना है कि संबंधित सभी लोग हिंदपीढ़ी में अपने स्थायी पते पर रह रहे हैं। ऐसे में उन्हें अनुपस्थित या स्थानांतरित बताकर नाम हटाने की प्रक्रिया शुरू किए जाने पर सवाल उठ रहे हैं। शिकायतकर्ताओं ने कहा कि यदि वे उसी पते पर रह रहे हैं और नियमित रूप से क्षेत्र में मौजूद हैं, तो उनके नाम हटाने के लिए इस तरह का आवेदन किस आधार पर दिया गया, इसकी जांच होनी चाहिए। नियम के तहत कार्रवाई की मांग शिकायत में फार्म-7 से संबंधित प्रावधानों का हवाला देते हुए नियम 13(2) और 26 के तहत कार्रवाई की मांग की गई है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि मतदाता सूची में किसी व्यक्ति का नाम हटाना गंभीर मामला है। यदि गलत सूचना देकर या किसी साजिश के तहत नाम हटाने का प्रयास किया गया है तो इसकी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। हम यहीं रह रहे हैं, फिर नाम क्यों हटाया… शिकायतकर्ताओं का कहना है कि मतदाता सूची में नाम हटाने की प्रक्रिया से लोगों में चिंता है। उनका सवाल है कि जब वे जिंदा हैं और वर्षों से इसी पते पर रह रहे हैं, तो हमें अनुपस्थित या स्थानांतरित बताकर मतदाता सूची से नाम हटाने का प्रयास क्यों किया जा रहा है। प्रशासन की ओर से मामले की जांच कराने का आश्वासन दिया गया है। अब जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि फार्म-7 में दी गई जानकारी किस आधार पर दर्ज की गई और इसके पीछे कोई गलती है या जानबूझकर नाम हटाने का प्रयास।

सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसे का खौफनाक वीडियो आया सामने, पलभर में जमींदोज हुई 5 मंजिला इमारत

नई दिल्ली  दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में पांच मंजिला इमारत के ढहने से छह लोगों की मौत हो गई है, जबकि राहत एवं बचाव के लिए बड़े स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है। अब इस घटना का सीसीटीवी वीडियो भी सामने आया है, जिसमें इमारत अचानक भरभराकर गिरती हुई दिखाई दे रही है। जानकारी के मुताबिक, दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के पास स्थित इस इमारत में लड़कों के लिए पीजी था। रविवार दोपहर करीब 1 बजकर 30 मिनट के आसपास इमारत अचानक ढह गई, इस दौरान वहां पर मरम्मत और निर्माण कार्य चल रहा है। सीसीटीवी फुटेज में देखा जा सकता है कि कुछ ही पलों में पूरी इमारत अचानक जमींदोज हो जाती है और मलबा सड़क पर फैल जाता है। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। चारों ओर छाया धूल का गुबार वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि बिल्डिंग के गिरते ही चारों ओर धूल का गुबार छा गया था। साथ ही आसपास मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। हालांकि हादसे के तुरंत बाद ही स्थानीय लोगों और रेस्क्यू टीमों ने तुरंत बचाव अभियान शुरू किया और मलबे में फंसे लोगों की तलाश की। रेस्क्यू ऑपरेशन जारी सोमवार सुबह भी दिल्ली पुलिस, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ), दिल्ली अग्निशमन सेवा और दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की टीमें अभियान में जुटी हैं। मलबे उठाने का काम भी जारी है। अधिकारियों ने बताया कि मलबे में अभी भी कई लोगों, जिनमें अधिकतर छात्र हैं, के फंसे होने की आशंका है और उन्हें सुरक्षित निकालने के प्रयास जारी हैं। लगभग 40-50 साल पुरानी इस इमारत में एक तहखाना और पांच ऊपरी मंजिलें थीं। इसका इस्तेमाल छात्रों के लिए पीजी के तौर पर किया जा रहा था, जिनमें से कई छात्र दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस में पढ़ाई कर रहे थे। पुलिस ने बताया कि परिसर में लगभग 40 लोगों के ठहरने के कमरे थे। सीएम रेखा गुप्ता ने दिए मजिस्ट्रेट जांच के आदेश वहीं, रविवार को दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बहुमंजिला इमारत के ढहने की घटना की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए। घटनास्थल का मुआयना करने के बाद मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को इमारत गिरने के कारणों की विस्तृत जांच करने का निर्देश दिया और इमारत के मालिक के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि दोषियों के खिलाफ कानून के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। रेखा गुप्ता ने घटनास्थल पर स्थिति का जायजा लेने के बाद कहा, "इस गंभीर घटना के लिए जिम्मेदार पाए जाने वालों को पूरी तरह से जवाबदेह ठहराया जाएगा और कानून के कड़े प्रावधानों के तहत उनसे निपटा जाएगा।" पुलिस के अनुसार, कथित मालिक हरिराम और अन्य के खिलाफ साउथ कैंपस पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस उपायुक्त (दक्षिण-पश्चिम) अमित गोयल ने मामले के दर्ज होने की पुष्टि की।

जहरीली शराब कांड पर डिप्टी CM शुक्ल सख्त, बोले- माफियाओं पर होगी कार्रवाई और दोषियों को मिलेगी कड़ी सजा

माफियाओं के विरुद्ध होगी सख्त कारवाई, दोषियों को मिलेगी कड़ी से कड़ी सजा: उप मुख्यमंत्री शुक्ल जहरीली शराब प्रकरण के मृतकों एवं प्रभावितों के परिजनों से मिले, बंधाया ढांढस प्रभावित गांवों का दौरा कर जानी स्थिति  सागर उप मुख्यमंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने बंडा क्षेत्र में अवैध, जहरीली शराब हादसे से प्रभावित गांवों का सघन दौरा कर पीड़ित परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने शोकाकुल परिजनों के प्रति गहरी शोक संवेदना व्यक्त करते हुए उन्हें ढांढस बंधाया और आश्वस्त किया कि दुख की इस कठिन घड़ी में राज्य सरकार उनके साथ खड़ी है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने बंडा, शाहगढ़ तहसील के ग्राम बमूरा भेड़ा, नौराज, गूगरा खुर्द, धुरमार, चौका, हनौती एवं पापेट पहुंचकर पीड़ित तथा मृतक परिवारों के सदस्यों से व्यक्तिगत रूप से भेंट की। उन्होंने कहा कि यह अत्यंत हृदय विदारक घटना है और प्रभावित परिवार कठिन दौर से गुजर रहे हैं। उन्होंने परिजनों को सांत्वना देते हुए स्पष्ट किया कि शासन की ओर से नियमानुसार सभी प्रभावित परिवारों को हरसंभव राहत  उपलब्ध कराई जाएगी।   उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि अवैध शराब के कारोबार में लिप्त शराब माफियाओं और इसमें शामिल किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। परिजनों द्वारा की गई मांग पर उन्होंने जानकारी दी कि पुलिस एवं प्रशासन द्वारा अब तक 10 से अधिक आरोपियों को हिरासत में लिया जा चुका है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अवैध शराब के निर्माण, परिवहन और वितरण के मुख्य स्रोत  तक पहुंचकर जड़ों को पूरी तरह समाप्त किया जाए, ताकि दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जा सके। नशामुक्त समाज के लिए ग्रामीणों से की अपील उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने भ्रमण के दौरान ग्रामीणों एवं स्थानीय जनप्रतिनिधियों से संवाद करते हुए गांवों को पूर्णतः नशामुक्त बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि नशे की लत न केवल व्यक्ति को बल्कि पूरे परिवार और समाज को तबाह कर देती है। इसलिए सभी नागरिक अपनी सामाजिक जिम्मेदारी निभाते हुए नशे की लत से दूर रहें। उन्होंने रेखांकित किया कि क्षेत्र में पूर्व में भी नशामुक्ति के लिए जनसहयोग से प्रयास हुए हैं; भविष्य में भी अवैध नशे के कारोबार पर पूर्ण विराम लगाने और इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए शासन-प्रशासन पूरी कड़ाई और गंभीरता से कार्य कर रहा है। इस दौरान बंडा विधायक वीरेंद्र सिंह कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल, पुलिस अधीक्षक अनुराग सुजनिया, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी जगदीश गोमे  सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि, विभागीय अधिकारी अधिकारी मौजूद रहे।

शिक्षक ही शिक्षा के साथ संस्कार दे सकते है अंजय शुक्ला

शिक्षक ही शिक्षा के साथ संस्कार दे सकते है अंजय शुक्ला   शिक्षक दिवस पर सेवानिवृत्त शिक्षकों का सम्मान, अतिथियों ने शिक्षकों के योगदान को सराहा रायपुर  रेडियंट स्टार पब्लिक हायर सेकेंडरी स्कूल धरसींवा में शिक्षक दिवस के अवसर पर शिक्षक सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शिक्षा के क्षेत्र में लंबे समय तक सेवाएं देने वाले सेवानिवृत्त शिक्षकों का सम्मान किया गया। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में छत्तीसगढ़ आदिवासी स्वास्थ्य परम्परा एवं औषधीय पादप बोर्ड के उपाध्यक्ष एवं राज्यमंत्री दर्जा प्राप्त अंजय शुक्ला उपस्थित रहे। कार्यक्रम में जिला पंचायत रायपुर की सभापति सरोज चंद्रवंशी, नगर पंचायत कुंवरगढ़ (कुंरा) के अध्यक्ष गोविंद राम साहू, धरसींवा मंडल अध्यक्ष राकेश यादव, ओम श्री साईनाथ महाविद्यालय के अध्यक्ष भगवती शंकर साहू, जनपद पंचायत धरसींवा की सभापति पूजा अश्वनी वर्मा तथा ग्राम पंचायत धरसींवा के सरपंच साहिल खान सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अतिथि उपस्थित रहे। मुख्य अतिथि अजय शुक्ला ने सेवानिवृत्त शिक्षकों गायत्री पटेल (चरौदा), गुलाब सिंह साहू (परसतराई), भगवती प्रसाद देवांगन (कुंवरगढ़-कुरा), द्रौपती वर्मा (मोहदी), छगन लाल शर्मा (गोढ़ी) एवं रामपहल साहू (परसतराई) का सम्मान किया। अतिथियों ने शिक्षकों के शिक्षा एवं समाज निर्माण में योगदान को महत्वपूर्ण बताते हुए उनके कार्यों की सराहना की। समारोह में नोडल प्राचार्य हेमावती चिवानी, व्याख्याता पीलाराम साहू, संकुल समन्वयक हिमकर दास, एबीईओ धरसींवा प्रदीप शर्मा, शासकीय स्कूल कुंवरगढ़ के रोहित सर, सेवानिवृत्त शिक्षक केजुराम साहू (मनहोरा) तथा नगर पंचायत कुंवरगढ़ के एल्डरमैन मुकेश सिन्हा विशेष रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में रेडियंट स्टार पब्लिक हायर सेकेंडरी स्कूल के प्राचार्य प्रकाश वस्त्रकार, समस्त शिक्षकगण, स्कूल संचालक बलदाऊ राम साहू एवं एमडी मितेश साहू ने सभी अतिथियों और शिक्षकों के प्रति आभार व्यक्त किया। समारोह सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।

मिस क्लासिक इंडिया छत्तीसगढ़ में गीत सिंह फर्स्ट रनर-अप

मिस क्लासिक इंडिया छत्तीसगढ़ में गीत सिंह फर्स्ट रनर-अप पढ़ाई के साथ पेजेंट्री में भी गीत सिंह ने लहराया परचम आत्मविश्वास और शानदार प्रस्तुति से बनाई खास पहचान बिलासपुर  शहर की प्रतिभाशाली बेटी गीत सिंह ने पेजेंट्री के क्षेत्र में अपनी प्रतिभा और आत्मविश्वास का शानदार प्रदर्शन करते हुए ‘मिस क्लासिक इंडिया छत्तीसगढ़’ प्रतियोगिता में फर्स्ट रनर-अप का खिताब हासिल किया। 3 सितंबर को बिलासपुर में एनजी फाउंडेशन द्वारा आयोजित इस प्रतियोगिता में बड़ी संख्या में प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। विभिन्न चरणों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए गीत ने अंतिम चरण तक अपनी जगह बनाई और उपविजेता का खिताब अपने नाम किया। प्रतियोगिता के दौरान प्रतिभागियों को ट्रेडिशनल, वेस्टर्न सहित विभिन्न राउंड से गुजरना पड़ा। गीत ने प्रत्येक चरण में पूरे आत्मविश्वास, प्रभावशाली व्यक्तित्व और शानदार प्रस्तुति के साथ निर्णायकों और दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच फर्स्ट रनर-अप का खिताब हासिल करना उनकी मेहनत और निरंतर तैयारी का परिणाम माना जा रहा है। पढ़ाई और पेजेंट्री के बीच शानदार संतुलन गीत सिंह हेल्थ एंड मेडिसिन के क्षेत्र में अध्ययनरत हैं और कॉलेज में भी अच्छे अंक हासिल कर रही हैं। पढ़ाई को प्राथमिकता देते हुए वह अपने शौक और प्रतिभा के लिए भी समय निकाल रही हैं। उनका कहना है कि शिक्षा और प्रतिभा दोनों को साथ लेकर आगे बढ़ना ही उनके लक्ष्य का हिस्सा है। पेजेंट्री के क्षेत्र में यह गीत की पहली उपलब्धि नहीं है। इससे पहले भी वह कई प्रतियोगिताओं में टॉप फाइनलिस्ट रह चुकी हैं। इसके अलावा उन्होंने ‘मिस मॉनसून क्वीन छत्तीसगढ़’ और ‘मिस बेस्ट एटीट्यूड छत्तीसगढ़’ जैसे खिताब भी अपने नाम किए हैं। लगातार मिल रही उपलब्धियों के साथ गीत पेजेंट्री और मॉडलिंग के क्षेत्र में अपनी पहचान मजबूत कर रही हैं। सामाजिक सेवा से भी जुड़ी हैं गीत सतीश सिंह की सुपुत्री गीत सिंह अपनी उपलब्धियों का श्रेय परिवार के सहयोग, मेहनत और निरंतर प्रयासों को देती हैं। मॉडलिंग और पेजेंट्री के साथ गीत एनजीओ के माध्यम से सामाजिक सेवा गतिविधियों से भी जुड़ी हुई हैं। उनका मानना है कि बेटियों को शिक्षा के साथ-साथ अपनी प्रतिभा, रुचि और सपनों को आगे बढ़ाने का समान अवसर मिलना चाहिए। गीत की उपलब्धि शहर की उन बेटियों के लिए प्रेरणादायी संदेश है, जो पढ़ाई के साथ अपने सपनों को भी उड़ान देना चाहती हैं। उन्होंने साबित किया है कि मेहनत, आत्मविश्वास और परिवार के सहयोग से शिक्षा के साथ प्रतिभा के क्षेत्र में भी सफलता हासिल की जा सकती है।

भरतपुर-ब्यावर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे की तैयारी शुरू, 120 KM की रफ्तार से दौड़ेंगे वाहन

जयपुर  प्रदेश में पूर्व से पश्चिमी राजस्थान के बीच तेज और सुगम आवागमन के लिए भरतपुर-ब्यावर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे बनाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। 277 किलोमीटर लंबा 4 लेन एक्सप्रेस-वे जयपुर, टोंक, दौसा, सवाई माधोपुर, करौली और भरतपुर जिलों से होकर गुजरेगा। इसके लिए 210 गांवों के 10,890 खसरों की करीब 2,600 हेक्टेयर जमीन अवाप्त की जाएगी। जयपुर जिले के दूदू के ग्राम झाग से शुरू होकर एक्सप्रेस-वे एनएच-21 पर भरतपुर के ऊंचा नगला तक पहुंचेगा। फागी से राजस्थान-उत्तर प्रदेश सीमा के बीच यात्रा समय भी 7 घंटे से घटकर करीब 2.5 से 3 घंटे रहने का अनुमान है। भरतपुर-ब्यावर एक्सप्रेस-वे एक्सेस कंट्रोल्ड होगा और वाहनों की अधिकतम गति 120 किमी प्रति घंटा रखी जाएगी। निर्माण पर 8,656 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। इसमें 5,231 करोड़ रुपए सिविल कार्य और 2,640 करोड़ रुपए भूमि अवाप्ति पर खर्च होंगे। प्रति किलोमीटर लागत करीब 31.55 करोड़ रुपए होगी। 30 पुल, 4 आरओबी, 10 इंटरचेंज और 179 अंडरपास परियोजना में 30 छोटे-बड़े पुल, रेललाइन पर चार आरओबी, सात फ्लाईओवर, 10 इंटरचेंज तथा वाहनों के लिए 179 छोटे-बड़े अंडरपास बनाए जाएंगे। एक्सप्रेस-वे ब्यावर-किशनगढ़ क्षेत्र को भरतपुर से जोड़ते हुए अमृतसर-जामनगर एक्सप्रेस-वे, एनएच-448 और एनएच-21 के बीच आर्थिक गलियारा मजबूत करेगा। बढ़ती औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियों के बीच एनएच-48 और एनएच-21 पर यातायात का दबाव भी कम होने की उम्मीद है। करौली में 58.8 किमी लंबाई, 7,122 पेड़ कटेंगे करौली जिले में एक्सप्रेस-वे की लंबाई 58.8 किलोमीटर होगी। करौली, नादौती, हिंडौन, श्रीमहावीरजी और सूरौठ तहसीलों के 49 गांवों में 2,256 खसरों की 637.64 हेक्टेयर निजी और 35.42 हेक्टेयर सरकारी भूमि ली जाएगी। इससे 26,539 परिवारों के 1,06,156 लोग प्रभावित होंगे। करीब 7,122 पेड़ों की कटाई भी प्रस्तावित है। परियोजना को लेकर अंतिम सामाजिक समाघात निर्धारण रिपोर्ट जारी हो चुकी है। 90 मीटर चौड़ा होगा कॉरिडोर एक्सप्रेस-वे करीब 90 मीटर चौड़ा होगा और इसकी ऊंचाई 2.5 से 7 मीटर तक रहेगी। परियोजना से राजस्थान के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों के बीच माल एवं यात्री परिवहन को नया वैकल्पिक मार्ग मिलेगा। नया एक्सप्रेस-वे बनने से सफर होगा आसान भरतपुर-ब्यावर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे बनने से जयपुर, टोंक, दौसा, सवाई माधोपुर, करौली और भरतपुर जैसे जिलों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी। इससे यात्रा का समय और ईंधन खर्च कम होने की उम्मीद है। एक्सप्रेस-वे से मौजूदा सड़कों और हाईवे पर ट्रैफिक का दबाव भी घटेगा। किसानों को कृषि उपज बड़े बाजारों तक पहुंचाने में सुविधा मिलेगी। साथ ही लॉजिस्टिक्स, उद्योग, पर्यटन और व्यापार को बढ़ावा मिलने से नए रोजगार और निवेश के अवसर पैदा होंगे। पूर्वी राजस्थान के शहरों और गांवों का आर्थिक विकास भी तेज हो सकता है।

सोलर सेक्टर में रोजगार का बड़ा मौका, बिहार के 11 हजार युवाओं को मिली खास ट्रेनिंग

पटना बिहार और केंद्र सरकार की ओर से गैर परम्परागत ऊर्जा को बढ़ावा दिए जाने की नीति को देखते हुए राज्य के बेरोजगारों को सोलर प्लेट के रखरखाव का विशेष प्रशिक्षण दिया जाने लगा है। युवा रोजगार एवं कौशल विकास विभाग की ओर से अब तक 11 हजार से अधिक लोगों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इसमें से अधिकतर को काम मिल गया है और वे देश-प्रदेश के विभिन्न कंपनियों में 20-25 हजार तक मासिक की आमदनी कर रहे हैं। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत लोगों की छतों पर सोलर प्लेट लगाए जा रहे हैं। बिहार में एक-दो साल के भीतर लाखों लोगों के घरों की छतों पर सोलर प्लेट लगाने का लक्ष्य है। इन सोलर प्लेट के रखरखाव की जिम्मेवारी संबंधित एजेंसियों की पांच साल तक होगी। लेकिन एजेंसियों को इसके रखरखाव के लिए प्रशिक्षित मैनपावर की आवश्यकता होगी। इसी के मद्देनजर विभाग ने कुशल कार्यबल तैयार करने की रणनीति पर काम शुरू कर दिया। 104 प्रशिक्षण केंद्र बनाए गए युवाओं की ट्रेनिंग के लिए राज्य के औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) के 87 प्रशिक्षकों का चयन किया गया। कुल 104 प्रशिक्षण केंद्र बनाए गए हैं। इन केंद्रों में सोलर प्लेट के रखरखाव का बुनियादी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यहां से निकले युवाओं को आसानी से काम मिल रहा है। ऑन जॉब ट्रेनिंग के तहत ट्रेनिंग के साथ कमाई पिछले वर्ष यह प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया था। विभाग का लक्ष्य था कि कम से कम 10 हजार लोगों को प्रशिक्षित किया जाए। लेकिन लक्ष्य से कहीं अधिक 11 हजार से अधिक लोगों को सोलर प्लेट के रखरखाव का प्रशिक्षण दिया गया है। वहीं जो पहले से जो इस क्षेत्र में काम कर रहे थे यानी ऑन जॉब ट्रेनिंग के तहत भी 10 हजार से अधिक लोगों को प्रशिक्षण दिया गया है। इसके अलावा विभाग असंगठित क्षेत्र के कामगारों को प्रशिक्षण के बाद प्रमाण पत्र भी दे रहा है। प्रमाणीकरण के लिए ब्रिज कोर्स रिकोग्निशन ऑफ प्रायर लर्निंग (आरपीएल) के तहत असंगठित क्षेत्र में उपलब्ध कौशल के प्रमाणीकरण के लिए ब्रिज कोर्स चला रहा है। इसके तहत 12 घंटे का उन्मुखीकरण एवं तत्पश्चात अधिकतम 68 घंटे का प्रशिक्षण ब्रिज कोर्स के तहत दिया जा रहा है। 15 से 59 वर्ष के लोगों को यह प्रशिक्षण दिया जा रहा है। 46 हजार से अधिक लोगों ने नामांकन लिया जिसमें से 98 फीसदी लोगों को प्रशिक्षित कर दिया गया। जबकि 28 हजार से अधिक लोगों को प्रमाण पत्र भी दे दिया गया है।