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आईपीएस अधिकारियों के थोकबंद तबादले, कई जिलों में एसपी की बदली जिम्मेदारी

भोपाल मध्य प्रदेश पुलिस विभाग में थोकबंद तबादले करते हुए 23 जिलों के पुलिस अधीक्षकों को बदल दिया गया है. इसके अलावा पुलिस मुख्यालय में भी सीनियर पुलिस अधिकारियों को भी नई जिम्मेदारी सौंपी गई है. प्रदेश के भिंड, शिवपुरी, रीवा, सागर, धार, मुरैना, छतरपुर, खंडवा, झाबुआ, नीमच सहित 21 जिलों के एसपी को बदला गया है. इसके अलावा भोपाल देहात और इंदौर देहात के पुलिस अधीक्षकों को भी बदला गया है. उधर पुलिस ट्रेनिंग में नए-नए प्रयोगों के लिए चर्चा में रहने वाले एडीजी राजाबाबू सिंह को एडीजी रेल बनाया गया है. इसके अलावा कई रेंज के आईजी को भी बदल दिया गया है. इन जिलों के पुलिस अधीक्षक बदले प्रदेश के 21 जिलों में नए पुलिस अधीक्षक बनाए गए हैं. इसमें भिंड, शिवपुरी, रीवा, सागर, धार, मुरैना, छतरपुर, खंडवा, झाबुआ, नीमच, पांढुर्णा, आगर मालवा, अनूपपुर, मऊगंज, डिंडौरी, मंडला, दतिया, सीहोर, सिंगरौली, दमोह, सिवनी जिले शामिल हैं. इसके अलावा भोपाल और इंदौर देहात के दो और पुलिस अधीक्षकों को भी बदला गया है. इस तरह कुल 23 एसपी को बदला गया है. यह पुलिस अधीक्षक बदले गए मनोज कुमार राय– पुलिस अधीक्षक (जिला-खण्डवा) को उप पुलिस महानिदेशक (पुलिस मुख्यालय, भोपाल) बनाया गया. राहुल कुमार लोढ़ा – पुलिस अधीक्षक (रेल, भोपाल) को उप पुलिस महानिदेशक (पुलिस मुख्यालय, भोपाल) बनाया गया. सिमाला प्रसाद – पुलिस अधीक्षक (रेल, जबलपुर) को उप पुलिस महानिदेशक (पुलिस मुख्यालय, भोपाल) बनाया गया. असित यादव – पुलिस अधीक्षक (जिला-भिण्ड) को उप पुलिस महानिदेशक (ग्वालियर रेंज, ग्वालियर) बनाया गया. विवेक सिंह – पुलिस उपायुक्त (जोन-2, भोपाल) को उप पुलिस महानिदेशक (शहडोल रेंज, शहडोल) बनाया गया. शैलेन्द्र सिंह चौहान – पुलिस अधीक्षक (जिला-रीवा) को अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (कानून और व्यवस्था, भोपाल) बनाया गया.   कुमार प्रतीक – पुलिस उपायुक्त (जोन-2, इन्दौर) को उप पुलिस महानिदेशक (नारकोटिक्स, इन्दौर) बनाया गया.   शिव दयाल – पुलिस अधीक्षक (जिला-झाबुआ) को उप पुलिस महानिदेशक (पुलिस मुख्यालय, भोपाल) बनाया गया. मयंक अवस्थी – पुलिस अधीक्षक (जिला-धार) को अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (कानून और व्यवस्था, इन्दौर) बनाया गया. अरविन्द तिवारी – सहायक पुलिस महानिदेशक (भोपाल) को सेनानी (34वीं वाहिनी, विसबल, धार) बनाया गया. सूरज कुमार वर्मा – पुलिस अधीक्षक (जिला-दतिया) को पुलिस अधीक्षक (जिला-भिण्ड) बनाया गया. यांगचेन डोलकर भुटिया – पुलिस अधीक्षक (देहात, इन्दौर) को पुलिस अधीक्षक (जिला-शिवपुरी) बनाया गया. गुरूकरण सिंह – सेनानी (24वीं वाहिनी, विसबल, रतलाम) को पुलिस अधीक्षक (जिला-रीवा) बनाया गया. दीपक कुमार शुक्ला – पुलिस अधीक्षक (जिला-सीहोर) को सेनानी (32वीं वाहिनी, विसबल, उज्जैन) बनाया गया. अमन सिंह राठौड़ – पुलिस अधीक्षक (जिला-शिवपुरी) को पुलिस उपायुक्त (जोन-2, इन्दौर) बनाया गया. अनुराग सुजानिया – सहायक पुलिस महानिदेशक (भोपाल) को पुलिस अधीक्षक (जिला-सागर) बनाया गया. सचिन शर्मा – संयुक्त आवासीय आयुक्त (नई दिल्ली) को पुलिस अधीक्षक (जिला-धार) बनाया गया. वाहनी सिंह – पुलिस अधीक्षक (जिला-डिंडौरी) को पुलिस अधीक्षक (पीटीसी, इन्दौर) बनाया गया. विकास कुमार सहवाल – पुलिस अधीक्षक (जिला-सागर) को पुलिस उपायुक्त (जोन-2, भोपाल) बनाया गया. धर्मराज मीना – सेनानी (32वीं वाहिनी, विसबल, उज्जैन) को पुलिस अधीक्षक (जिला-मुरैना) बनाया गया. समीर सौरभ – पुलिस अधीक्षक (जिला-मुरैना) को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (रेडियो, भोपाल) बनाया गया. रजत सकलेचा – पुलिस अधीक्षक (जिला-मण्डला) को पुलिस अधीक्षक (जिला-छतरपुर) बनाया गया. अगम जैन – पुलिस अधीक्षक (जिला-छतरपुर) को पुलिस अधीक्षक (जिला-खण्डवा) बनाया गया. मनीष खत्री – पुलिस अधीक्षक (जिला-सिंगरौली) को सहायक पुलिस महानिदेशक (पुलिस मुख्यालय, भोपाल) बनाया गया. सुनील कुमार मेहता – पुलिस अधीक्षक (जिला-सिवनी) को पुलिस उपायुक्त (जोन-4, इन्दौर) बनाया गया. देवेन्द्र कुमार पाटीदार – पुलिस अधीक्षक (जिला-बुरहानपुर) को पुलिस अधीक्षक (जिला-झाबुआ) बनाया गया. रामशरण प्रजापति – पुलिस अधीक्षक (देहात, भोपाल) को सहायक पुलिस महानिदेशक (पुलिस मुख्यालय, भोपाल) बनाया गया. सुन्दर सिंह कनेश – पुलिस अधीक्षक (जिला-पांढुर्ना) को पुलिस अधीक्षक (रेल, जबलपुर) बनाया गया. राजेश व्यास – पुलिस उपायुक्त (आसूचना एवं सुरक्षा, इन्दौर) को पुलिस अधीक्षक (जिला-नीमच) बनाया गया. विनोद कुमार सिंह – पुलिस अधीक्षक (जिला-आगर मालवा) को सेनानी (24वीं वाहिनी, विसबल, रतलाम) बनाया गया. पंकज कुमार पाण्डे – सहायक पुलिस महानिदेशक (भोपाल) को पुलिस अधीक्षक (देहात, भोपाल) बनाया गया. प्रकाश चन्द्र परिहार – पुलिस उपायुक्त (मुख्यालय, इन्दौर) को पुलिस अधीक्षक (जिला-पांढुर्ना) बनाया गया. दिलीप कुमार सोनी – पुलिस अधीक्षक (जिला-मऊगंज) को पुलिस अधीक्षक (जिला-आगर मालवा) बनाया गया. राजेन्द्र कुमार वर्मा – पुलिस अधीक्षक (पीटीसी, इंदौर) को पुलिस अधीक्षक (देहात, इन्दौर) बनाया गया. विक्रांत मुराब – सहायक पुलिस महानिदेशक (अ.वि., पुलिस मुख्यालय, भोपाल) को पुलिस अधीक्षक (जिला-अनूपपुर) बनाया गया. सुरेन्द्र कुमार जैन – पुलिस अधीक्षक (पीटीएस, रीवा) को पुलिस अधीक्षक (जिला-मऊगंज) बनाया गया. आशीष खरे – जोनल पुलिस अधीक्षक (विशेष शाखा, जबलपुर) को पुलिस अधीक्षक (जिला-डिंडौरी) बनाया गया. अंकित जायसवाल – पुलिस अधीक्षक (जिला-नीमच) को पुलिस अधीक्षक (रेल, भोपाल) बनाया गया. राजेश रघुवंशी – अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (जिला-खण्डवा) को पुलिस अधीक्षक (जिला-मण्डला) बनाया गया. मोती उर्र रहमान – पुलिस अधीक्षक (जिला-अनूपपुर) को सेनानी (9वीं वाहिनी, विसबल, रीवा) बनाया गया. श्रुतकीर्ति सोमवंशी – पुलिस अधीक्षक (जिला-दमोह) को सेनानी (13वीं वाहिनी, विसबल, ग्वालियर) बनाया गया. मयूर खण्डेलवाल – पुलिस उपायुक्त (जोन-4, भोपाल) को पुलिस अधीक्षक (जिला-दतिया) बनाया गया. सोनाक्षी सक्सेना – पुलिस उपायुक्त (आसूचना व सुरक्षा, भोपाल) को पुलिस अधीक्षक (जिला-सीहोर) बनाया गया. शियाज, के.एम. – सेनानी (हॉकफोर्स, बालाघाट) को पुलिस अधीक्षक (जिला-सिंगरौली) बनाया गया. आनंद कलादगी – पुलिस उपायुक्त (जोन-4, इन्दौर) को पुलिस अधीक्षक (जिला-दमोह) बनाया गया. कृष्ण लालचंदानी – पुलिस उपायुक्त (जोन-1, इन्दौर) को पुलिस अधीक्षक (जिला-सिवनी) बनाया गया. आयुष गुप्ता – अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (जिला-जबलपुर) को पुलिस उपायुक्त (जोन-3, भोपाल) बनाया गया. आदर्शकांत शुक्ला – प्रभारी अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एन्टी नक्सल आपरेशन, बालाघाट) को पुलिस उपायुक्त (जोन-4, भोपाल) बनाया गया. नरेन्द्र रावत – माननीय राज्यपाल के परिसहाय को पुलिस उपायुक्त (जोन-1, इन्दौर) बनाया गया. अभिषेक रंजन – अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (जिला-उज्जैन) को पुलिस उपायुक्त (जोन-3, इन्दौर) बनाया गया. राहुल देशमुख – सीएसपी (कोतवाली, उज्जैन) को माननीय राज्यपाल का परिसहाय बनाया गया. सीनियर पुलिस अधिकारियों को मिली नई जिम्मेदारी रवि कुमार गुप्ता – विशेष पुलिस महानिदेशक (रेल, भोपाल) को विशेष पुलिस महानिदेशक (प्रशिक्षण एवं निदेशक, पुलिस अकादमी, भौरी भोपाल) का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया. राजाबाबू सिंह – अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (प्रशिक्षण, पुलिस मुख्यालय, भोपाल) को अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (रेल, भोपाल) बनाया गया. डी.पी. गुप्ता – अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (शिकायत एवं मानव अधिकार, भोपाल) को अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (सामुदायिक पुलिसिंग, आरटीआई, लोक सेवा गारंटी आदि) बनाया गया. सोलोमन यश कुमार मिंज – अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (पुलिस मुख्यालय, भोपाल) को … Read more

विवेक विहार में आग के कहर ने ली 9 जानें, चार मंजिला इमारत में लगी आग

 नई दिल्ली  पूर्वी दिल्ली के विवेक विहार में रविवार तड़के एक आवासीय इमारत में आग लगने से कम से कम नौ लोगों की मौत हो गई। अधिकारियों ने बताया कि विवेक विहार फेज-1 में चार मंजिला इमारत में आग लगने की सूचना तड़के करीब तीन बजकर 48 मिनट पर मिली, जिसके बाद पुलिस, दमकल और आपदा प्रबंधन दल मौके पर पहुंचे। तुरंत ही बड़े पैमाने पर बचाव अभियान शुरू किया गया। विवेक विहार की बिल्डिंग में कैसे लगी आग? दिल्ली पुलिस के मुताबिक, शुरुआती जांच में पता चला है कि इस आग की घटना में 9 लोगों की मौत हो गई है। आग दूसरी, तीसरी और चौथी मंजिल पर बने फ्लैटों में लगी थी। बचाव और आग बुझाने के काम के दौरान, बिल्डिंग से 10-15 लोगों को बचाया गया, जिनमें से दो लोगों को मामूली चोटें आईं, जिन्हें इलाज के लिए गुरु तेग बहादुर हॉस्पिटल ले जाया गया। भीषण अग्निकांड में 9 लोगों की मौत पुलिस अधिकारी के मुताबिक, आग बुझाने के लिए दमकल की कुल 12 गाड़ियां भेजी गईं। दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए), यातायात पुलिस और स्थानीय पुलिस के दलों ने बचाव और निकासी प्रयासों में सहायता की। कई घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया गया। पुलिस के अनुसार, मृतकों की पहचान हो गई है। जान गंवाने वालों में एक डेढ़ साल का मासूम भी है। भीषण अग्निकांड में इन लोगों ने गंवाई जान चार मंजिला इमारत में लगी आग पर काबू पा लिया गया है। हालांकि, रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान अलग-अलग मंजिल पर शव मिले हैं। पुलिस ने मृतकों के बारे में जानकारी दी है। जानिए भीषण अग्निकांड किन-किन लोगों ने गंवाई जान। दूसरी मंजिल (पीछे की तरफ) पर मृतक: 1. अरविंद, पिता – छोटे लाल, निवासी – B-13, दूसरी मंज़िल, विवेक विहार; उम्र – 60 वर्ष 2. अनीता जैन, पत्नी – अरविंद जैन; उम्र – 58 वर्ष 3. निशांत जैन, पिता – अरविंद जैन; उम्र – 35 वर्ष 4. आँचल जैन, पत्नी – निशांत जैन; उम्र – 33 वर्ष 5. मास्टर आकाश जैन, पिता – निशांत जैन; उम्र – 1.5 वर्ष पहली मंजिल पर मृतक: 1. शिखा जैन, पत्नी – नवीन; उम्र – 45 वर्ष तीसरी मंजिल पर मृतक – एक ही परिवार के सदस्य: 1. पति – नितिन जैन; उम्र – लगभग 50 वर्ष 2. पत्नी – शैले जैन; उम्र – लगभग 48 वर्ष 3. बेटा – सम्यक जैन; उम्र – लगभग 25 वर्ष घायल: नवीन जैन; उम्र – 48 वर्ष एसी ब्लास्ट से आग लगने की आशंका ऐसी आशंका जताई जा रही की एसी ब्लास्ट से घर में आग लगी है। हालांकि, अभी मामले की जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि आग लगने की असल वजह क्या है। मामले की जांच जारी है और आगे की कार्रवाई की जा रही है। फायर कंट्रोल रूम को इस हादसे की सूचना तड़के 3:48 बजे मिली थी, करीब दो घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद सुबह 6:25 बजे आग पर काबू पा लिया गया। चार मंजिला बिल्डिंग में कैसे फैली आग? अधिकारियों ने बताया कि आग बुझाने के बाद भी काफी देर तक सर्च ऑपरेशन जारी रहा। खासकर ऊपरी मंजिलों पर, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई अंदर फंसा न रह जाए। पुलिस के अनुसार, आग ने इमारत की दूसरी, तीसरी और चौथी मंजिल पर स्थित कई फ्लैट को अपनी चपेट में ले लिया। कई लोगों को सुरक्षित निकाला गया फायर ब्रिगेड और पुलिस की टीमों ने मिलकर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया और करीब 14 से 20 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला. स्थानीय लोगों के मुताबिक, कुछ लोग पीछे के फ्लैट में फंसे होने की आशंका थी, हालांकि पुलिस ने फिलहाल किसी के अंदर फंसे होने से इनकार किया है।  AC ब्लास्ट से लगी आग की आशंका इस घटना के चश्मदीदों के अनुसार, आग लगने की वजह एसी में ब्लास्ट हो सकता है. हालांकि, आग लगने के सही कारणों का अभी आधिकारिक तौर पर पता नहीं चल पाया है और जांच जारी है।  बताया जा रहा है कि यह चार मंजिला इमारत थी, जिसमें कुल 8 फ्लैट बने हुए थे. आग लगने के समय ज्यादातर लोग सो रहे थे, जिससे कई लोग समय रहते बाहर नहीं निकल सके।  कूलिंग ऑपरेशन जारी दिल्ली फायर सर्विस और पुलिस के मुताबिक, फिलहाल आग पूरी तरह से काबू में है और कूलिंग ऑपरेशन जारी है. साथ ही, इमारत में सर्च ऑपरेशन चलाकर यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि कोई और अंदर फंसा न हो।  इस दर्दनाक हादसे ने इलाके में दहशत फैला दी है. पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और आग लगने के कारणों का पता लगाने की कोशिश की जा रही है। 

22 हजार के बदले कमाए 3 लाख रुपए

रायपुर   छत्तीसगढ़ में किसान अब पारंपरिक धान की खेती छोड़कर फूलों की खेती अपनाकर अपनी तकदीर बदल रहे हैं। उद्यानिकी विभाग और सरकारी योजनाओं की मदद से गेंदा, गुलाब जैसे फूलों की वैज्ञानिक खेती कर किसान कम लागत में लाखों रुपये का शुद्ध मुनाफा कमा रहे हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में बड़ा सुधार आया है। राष्ट्रीय बागवानी मिशन और उद्यानिकी विभाग से मार्गदर्शन मिलने के कारण किसान वैज्ञानिक पद्धति से अधिक उत्पादन ले रहे हैं। एक किसान आनंदराम सिदार की सफलता देखकर अब अन्य ग्रामीण भी परंपरागत खेती से आगे बढ़कर उद्यानिकी फसलों की ओर कदम बढ़ा रहे हैं।                परंपरागत खेती के दौर में जहाँ किसान अक्सर कम मुनाफे से परेशान रहते हैं, वहीं रायगढ़ जिले के लैलूंगा विकासखण्ड के एक छोटे से गाँव कोड़केल के किसान  आनंदराम सिदार ने नवाचार से समृद्धि की नई इबारत लिखी है। राष्ट्रीय बागवानी मिशन की श्गेंदा क्षेत्र विस्तार योजनाश् का लाभ उठाकर आनंदराम ने अपनी आय में कई गुना वृद्धि की है। धान बनाम गेंदा- मुनाफे का बड़ा अंतर            आनंदराम सिदार पहले पारंपरिक धान की खेती पर निर्भर थे। वे 10 क्विंटल धान का उत्पादन कर मुश्किल से 31 हजार रुपए की कुल आय प्राप्त कर पाते थे, जिसमें से लागत काटकर उनके हाथ मात्र 22 हजार रुपए का लाभ आता था। लेकिन उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन में उन्होंने 0.400 हेक्टेयर क्षेत्र में गेंदा फूल की खेती शुरू की, जिससे उनकी आय का ग्राफ अचानक बदल गया। तकनीकी सहयोग और बंपर उत्पादन           वर्ष 2025-26 के दौरान उद्यानिकी विभाग ने उन्हें उन्नत बीज, संतुलित उर्वरक प्रबंधन और आधुनिक कृषि तकनीकों का प्रशिक्षण दिया। आनंदराम की मेहनत और विभागीय सहयोग का नतीजा यह रहा कि उन्होंने कुल उत्पादन लगभग 44 क्विंटल गेंदा फूल बेचकर   3 लाख रुपए से अधिक की कुल आमदनी हासिल की। धान की तुलना में बेहतर रिटर्न और कम समय में अधिक आय प्राप्त किया। क्षेत्र के किसानों के लिए बने रोल मॉडल           सिदार की इस सफलता ने पूरे रायगढ़ जिले में गेंदा जैसी नगदी फसलों के प्रति अन्य किसानों का रुझान बढ़ा दिया है। अब क्षेत्र के कई किसान धान के स्थान पर फूलों की खेती को एक लाभकारी विकल्प के रूप में अपना रहे हैं। आनंदराम सिदार का कहना है कि शुरुआत में जोखिम लग रहा था, लेकिन उद्यानिकी विभाग के तकनीकी सहयोग और सही समय पर की गई देखरेख ने मेरी तकदीर बदल दी। आज मैं आत्मनिर्भर हूँ और अपने परिवार को बेहतर जीवन दे पा रहा हूँ। विभाग की सक्रिय पहल        रायगढ़ जिले में राष्ट्रीय बागवानी मिशन की गेंदा क्षेत्र विस्तार योजना से जुड़ने के बाद आनंदराम सिदार का जीवन की दिशा ही बदल गई। उद्यानिकी विभाग की सक्रियता से फूलों की खेती अब एक टिकाऊ और मुनाफे वाले व्यवसाय के रूप में उभर रही है। विभाग द्वारा लगातार किसानों को प्रशिक्षण और प्रोत्साहन दिया जा रहा है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिल रही है।

हर दो दिन में मौसम का मिजाज बदलेगा, आंधी और बारिश से आम की फसलें होंगी प्रभावित, पैदावार में गिरावट

शहडोल   मध्य प्रदेश में पिछले दो तीन दिनों से मौसम का मिजाज बदला हुआ है. प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में भीषण गर्मी के बाद तेज आंधी व बूंदाबांदी से मौसम तेजी से बदला है. शहडोल में भी पिछले दो दिनों से मौसम इसी तरह बदल रहा है, जिसने आम की फसलों पर बड़ा संकट पैदा कर दिया है।  शहडोल में दो दिन से आंधी बारिश शहडोल जिले के किसान भोलू गुप्ता बताते हैं, '' पिछले दो दिन से तेज गर्मी से राहत मिली हुई है, जिस तरह से सूर्य देव का पारा चढ़ा हुआ था, उससे हालत खराब थी लेकिन पिछले दो दिन से मौसम ऐसा बदला है, कि शाम को ठंडक महसूस हो रही है. आंधी और बारिश से मौसम ठंडा हो गया है पर कई फसलों पर इसका असर पड़ सकता है।  बदलते मौसम से आम को बड़ा नुकसान मौसम के इस बदलते मिजाज से किस तरह का नुकसान हो सकता है? इसे लेकर कृषि वैज्ञानिक डॉ. बीके प्रजापति बताते हैं, '' जो आंधी तूफान आया है इससे जो पेड़ वर्गीय फसल है जैसे आम, केला आदि तो इनके गिरने से तो निश्चित ही नुकसान होता है लेकिन अन्य कई वजहों से भी फल प्रभावित होते हैं. तूफान में आम की कमजोर डगालें व फूल टूटने से आने वाले आमों की संख्या कम हो जाती है, इससे सबसे ज्यागदा नुकसान होता है।  सब्जी व अन्य फसलों का क्या होगा? कृषि वैज्ञानिक डॉ. बीके प्रजापति बताते हैं, '' इसके अलावा सब्जी वर्गीय फसलों की बात करें या गर्मी की फसल मूंग-उड़द की बात करें तो जब तक ओले नहीं गिरेंगे तब तक ज्यादा नुकसान नहीं है. बारिश हो रही है, मौसम ठंडा है तो इसका फायदा ही इन फसलों को मिलेगा. बस जिस तरह से तेज आंधी चल रही है उसका असर आम की फसल पर जरुर पड़ सकता है क्योंकि आम की फसल वक्त से पहले ही झड़ रही है।  तूफानी आंधी न मचाई तबाही  तेज आंधी ने शहडोल में कई स्थानों पर जमकर नुकसान किया, कहीं शादी का टैंट उड़ा दिया, तो कहीं बिजली के खंबे और पेड़. बिजली की तारों पर पेड़ गिरने से कई इलाकों में ब्लैक आउट हो गया और बिजली कर्मचारी बिजली दुरुस्त करने में लगे रहे. इसके अलावा कई गांव में कई घंटे तक ब्लैकआउट रहा, शुक्रवार को पूरे दिन लाइट अप एंड डाउन चलती रही, क्योंकि लगातार मेंटेनेंस का कार्य चलता रहा। 

आम आदमी पार्टी से जुड़े पूर्व मंत्रियों व कुमार विश्वास को कोर्ट का समन, 15 मई तय

सुल्तानपुर उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर की स्पेशल एमपी-एमएलए कोर्ट ने आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व नेता और जाने-माने कवि कुमार विश्वास के साथ- साथ दिल्ली सरकार के दो पूर्व मंत्रियों सत्येंद्र जैन और सोमनाथ भारती को समन भेजा है। यह मामला 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन से जुड़ा हुआ है। कोर्ट ने इन सभी नेताओं को 15 मई को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होने के निर्देश दिए हैं। क्या है 12 साल पुराना मामला? सरकारी वकील कालिका प्रसाद मिश्र के अनुसार, यह घटना 6 मई 2014 की है, जब देश में लोकसभा चुनाव हो रहे थे। उस समय कुमार विश्वास अमेठी से आम आदमी पार्टी (AAP) के टिकट पर चुनाव लड़ रहे थे। चुनाव आयोग के नियमानुसार, वोटिंग शुरू होने से 48 घंटे पहले जो लोग उस क्षेत्र के वोटर नहीं होते हैं, उन्हें वहां से जाना होता है। उस समय पुलिस ने कुमार विश्वास और उनके साथियों को अमेठी छोड़ने को कहा था, क्योंकि वे वहां के वोटर नहीं थे। आरोप है कि प्रशासन द्वारा बार-बार चेतावनी देने के बावजूद कुमार विश्वास, तत्कालीन मंत्री सत्येंद्र जैन और सोमनाथ भारती ने अपने समर्थकों के साथ क्षेत्र नहीं छोड़ा। इसके बाद पुलिस ने उनके खिलाफ आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन का मामला दर्ज कर लिया था।   कोर्ट का सख्त रुख और आगे की प्रक्रिया यह मामला पहले एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट की अदालत में चल रहा था। लेकिन हाल ही में इसे स्पेशल एमपी-एमएलए कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया गया है। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सख्त रुख अपनाया है और सभी आरोपियों को समन भेजा है। वहीं अगली सुनवाई 15 मई को होगी, जिसमें सभी को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होना होगा। काफी चर्चा में था 2014 का अमेठी चुनाव साल 2014 का अमेठी लोकसभा चुनाव भारतीय राजनीति के सबसे चर्चित मुकाबलों में से एक था। इस सीट पर आम आदमी पार्टी ने पूरी ताकत झोंक दी थी और वहीं कुमार विश्वास का सीधा- सीधा मुकाबला कांग्रेस मंत्री राहुल गांधी और बीजेपी मंत्री स्मृति ईरानी से था। अब इतने साल बाद, कोर्ट के इस कदम से यह पुराना राजनीतिक विवाद एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है।

जबलपुर-इटारसी के बीच रेलवे की तीसरी लाइन पूरी, दिल्ली तक तेज़ी से दौड़ेंगी ट्रेनें

नर्मदापुरम   जबलपुर-इटारसी रेल सेक्शन पर तीसरी रेल लाइन की तैयारी तेज हो गई है. इसके लिए विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (DPR) तैयार कर लिया गया है. अब विभिन्न स्तरों पर इसकी परीक्षण प्रक्रिया जारी है. परीक्षण पूरा होने के बाद काम शुरू होगा. तीसरी लाइन बनने से जबलपुर-नर्मदापुरम के बीच ट्रेनों का आवागमन तेज हो जाएगा. इसका असर ये होगा कि राजधानी और वंदे भारत जैसी ट्रेनों सहित सभी ट्रेनों की रफ्तार तेज हो जाएगी. क्रॉसिंग के लिए हॉल्ट की समस्या भी खत्म होगी।  रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दी जानकारी जबलपुर-इटारसी रेल सेक्शन के बीच तीसरी लाइन की योजना के बारे में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने नर्मदापुरम सांसद दर्शन सिंह चौधरी को जानकारी दी. सांसद दर्शन सिंह चौधरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रेल मंत्री का इसके लिए आभार जताते हुए कहा "यह परियोजना लंबे समय से क्षेत्र की प्रमुख मांग रही है. तीसरी लाइन बनने से ट्रेनों की आवाजाही सुचारू होगी. समयबद्धता में सुधार आएगा और क्षेत्रीय विकास को गति मिलेगी. नर्मदापुरम, नरसिंहपुर समेत आसपास के जिलों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।  ट्रेनों के साथ ही मालगाड़ियों की स्पीड बढ़ेगी तीसरा ट्रैक बिछने से इस बिजी रूट पर ट्रेनें सनसनाती हुई निकलेंगी. अभी इस रेल लाइन पर ट्रैफिक का प्रेशर रहता है. इस कारण क्रॉसिंग कर सुपरफास्ट ट्रेनों को पहले निकाला जाता है. अब एक और ट्रैक बनने से ये समस्या खत्म हो दाएगी. जाहिर है इससे यात्रियों के समय की बचत होगी और मालगाड़ियों का परिचालन भी बिना किसी बाधा के संभव हो सकेगा. तीसरा ट्रैक बनने से जबलपुर और इटारसी के बीच आर्थिक और औद्योगिक गतिविधियां बढ़ेंगी. माना जा रहा है कि डीपीआर की परीक्षण प्रक्रिया पूरी होने के बाद रेलवे बजट आवंटित करेगा. इसके बाद टेंडर होगा।  इटारसी से मानिकपुर तक प्लानिंग भी शामिल इसके अलावा पश्चिम मध्य रेलवे की प्लानिंग के अनुसार इटारसी रेलवे जंक्शन से जबलपुर होकर मानिकपुर तक जाने वाले रेलवे लाइन का विस्तार करने की है. यहां पर तीसरा ट्रैक बिछाने की तैयारी की जा रही है. इस लाइन की भी स्वीकृति की मांग रेलवे बोर्ड की गई है. ये तीसरी लाइन डलने के बाद इटारसी-जबलपुर-मानिकपुर रेल लाइन पर ट्रेनों की स्पीड बढ़ जाएगी। 

बीजेपी का नया कदम, जिला प्रशिक्षण वर्गों में नेताओं के लिए मोबाइल प्रतिबंधित, नीट-यूपीएससी जैसी परीक्षा

भोपाल  मध्य प्रदेश में भाजपा लगातार अपने संगठन को मजबूत करने में जुटी है. इस बीच पार्टी ने नेताओं के लिए एक और टास्क की शुरुआत कर दी है. भाजपा अपने नेताओं की परीक्षा लेगी. जिसका आयोजन जिला स्तर पर किया जाएगा. खास बात यह है कि यह परीक्षा नीट-यूपीएससी एग्जाम की तरह होगी. जिसमें मोबाइल फोन पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेगा. इसके अलावा उन्हें प्रशिक्षण भी दिया जाएगा. जिसमें पार्टी की नीति रीति से नेताओं और कार्यकर्ताओं को अवगत कराया जाएगा. निकाय और पंचायत चुनाव से पहले भाजपा इसी तैयारी में लगी है।  बीजेपी लेगी परीक्षा दरअसल, एमपी में भाजपा अपने संगठन को और मजबूत करने में जुटी है. जिसके लिए सभी जिलों में जिला प्रशिक्षण वर्गों का आयोजन किया जाना है.  इस दौरान नेताओं का टेस्ट लिया जाएगा. जिसमें नीट-यूपीएससी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तरह मोबाइल फोन पहले ही जमा करा लिए जाएंगे. परीक्षा कक्ष के अंदर किसी तरह की जानकारी नेताओं को लेना बंद रहेगी. इसके लिए एक मोबाइल काउंटर बनाया जाएगा, जहां सभी के मोबाइल जमा होंगे और उसके बाद ही उन्हें टेस्ट देना होगा. इस टेस्ट के जरिए भाजपा अपने कार्यकर्ताओं और नेताओं की क्षमता को समझना चाहती है।  नीट-यूपीएससी की तरह मोबाइल रहेगा बैन जिला प्रशिक्षण वर्गों में शामिल होने वाले नेताओं के मोबाइल नीट-यूपीएससी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तरह पहले ही जमा करा लिए जाएंगे। इसके लिए प्रशिक्षण स्थल पर एक मोबाइल काउंटर बना होगा। जहां एक टोकन नंबर देकर मोबाइल जमा करा लिया जाएगा। ट्रेनिंग के बाद होगी परीक्षा प्रशिक्षण वर्ग के बाद नेताओं को पोस्ट टेस्ट देना होगा। यानी प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने क्या सीखा, उनको क्या जानकारी मिली, उन्हें किस सत्र में बताई गई कौन सी बात याद रही। प्रशिक्षण के बाद होने वाली परीक्षा में प्रशिक्षण में बताई गई जानकारी से जुड़े सवाल पूछे जाएंगे। बीजेपी नेताओं को देगी ट्रेनिंग बीजेपी नेताओं की परीक्षा के बाद उन्हें ट्रेनिंग भी देगी. क्योंकि पहले जिला प्रशिक्षण वर्ग होगा, उसके बाद नेताओं को पोस्ट देस्ट देना होगा. प्रशिक्षण में नेताओं और कार्यकर्ताओं ने क्या सीखा, उन्हें पार्टी से संबंधित क्या जानकारी मिली. किस सत्र में कौन सी बात बताई गई. इससे जुड़े सवाल पूछा जाएंगे. खास बात यह है कि परीक्षा के बाद भी भाजपा अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं को ट्रेनिंग भी दिलाएगी. ताकि भविष्य के हिसाब से नेताओं को तैयार किया जा सके. माना जा रहा है कि बीजेपी इस प्रयोग के जरिए संगठन को मजबूत करने में जुटी है।  मध्य प्रदेश में अगले साल पंचायत और निकाय चुनाव की प्रक्रिया होने वाली है. ऐसे में भाजपा ने अभी से तैयारियां शुरू कर दी हैं. इसलिए एमपी के अलग-अलग जिलों में भाजपा जल्द ही अपने प्रशिक्षण शिविर की तैयारियां शुरू करने वाली है। 

प्रदेश में जनगणना 2027 की शुरुआत, 33 सवालों का जवाब देना होगा घर आए कर्मचारियों को

भोपाल  मध्य प्रदेश में 1 मई से जनगणना-2027 के 'हाउस लिस्टिंग' यानी मकानों की सूची बनाने का काम शुरू हो गया है। इस बार की जनगणना खास है क्योंकि यह पूरी तरह डिजिटल है। आपके घर पहुंचने वाले प्रगणक आपसे 33 मुख्य सवाल पूछेंगे। इसमें आपके मकान की स्थिति, दीवारों में इस्तेमाल सामग्री से लेकर घर में कौन सा अनाज खाया जाता है, इसकी जानकारी भी ली जाएगी। इन चीजों का देना होगा ब्यौरा पहले फेज में मुख्य रूप से सुविधाओं और संपत्तियों पर फोकस रहेगा: घर की संपत्ति: गाड़ी, लैपटॉप, कंप्यूटर और इंटरनेट कनेक्शन। मकान की बनावट: दीवार और छत की सामग्री। खान-पान: परिवार में इस्तेमाल होने वाला मुख्य अनाज। जातिगत गणना: ध्यान रहे कि जाति से जुड़े सवाल इस बार नहीं, बल्कि फरवरी 2027 में होने वाले दूसरे चरण में पूछे जाएंगे। पूरी तरह गुप्त रहेगी जानकारी मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के जनगणना निदेशक कार्तिकेय गोयल ने स्पष्ट किया है कि लोगों को अपनी संपत्ति बताने में हिचकिचाना नहीं चाहिए। गोपनीयता: आपकी दी गई जानकारी पूरी तरह गुप्त रहेगी और किसी भी एजेंसी के साथ साझा नहीं की जाएगी। सरकारी लाभ: जनगणना का मकसद केवल विकास की योजनाएं बनाना है। इससे किसी के सरकारी लाभ या पात्रता पर कोई असर नहीं पड़ेगा। सुरक्षा: डेटा पूरी तरह 'एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड' है, यानी सर्वर तक पहुंचने के दौरान इसे कोई नहीं देख सकता। यह देश की पहली डिजिटल जनगणना है और डेटा प्रोटेक्शन हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता है। लोग बेझिझक और सही जानकारी साझा करें। आपके सहयोग से ही बेहतर सरकारी नीतियां बन सकेंगी। कार्तिकेय गोयल, निदेशक (जनगणना-2027, MP & CG) 1.5 लाख कर्मचारियों की फौज तैनात इस महा-अभियान के लिए मध्य प्रदेश में करीब 1.5 लाख कर्मचारियों को लगाया गया है, जिनमें से ज्यादातर स्कूल शिक्षक हैं। हाउस लिस्टिंग का यह काम एक महीने के भीतर पूरा कर लिया जाएगा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के किसान हितेषी फैसले से इंदौर-पीथमपुर कॉरिडोर को मिली नई रफ्तार

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के किसान हितेषी फैसले से इंदौर-पीथमपुर कॉरिडोर को मिली रफ्तार मुख्यमंत्री डॉ. यादव 3 मई को प्रथम चरण का करेंगे भूमिपूजन भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर प्रोजेक्ट को गति देने के लिए किसानों के हित में महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। उन्होंने जमीन देने वाले भू-स्वामियों को मिलने वाली विकसित जमीन का हिस्सा 50 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत कर दिया है। इस फैसले से किसानों का भरोसा बढ़ा है और वे प्रोजेक्ट में स्वेच्छा से जुड़ रहे हैं। इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर क्षेत्र के औद्योगिक विकास को नई दिशा देने वाली प्रमुख परियोजना है। इस परियोजना में 75 मीटर चौड़ी और 20 किलोमीटर लंबी सड़क के दोनों ओर 300-300 मीटर क्षेत्र में सुनियोजित विकास किया जाएगा। परियोजना में 1300 हैक्टेयर से अधिक भूमि शामिल है और इसकी कुल लागत 2360 करोड़ रु. निर्धारित की गई है। इसके माध्यम से उद्योग, व्यापार और सेवा क्षेत्र के लिए आधुनिक सुविधाएं विकसित होंगी, जिससे बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित होगा और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। परियोजना की सबसे बड़ी चुनौती भू-स्वामियों से सहमति के साथ जमीन प्राप्त करना थी, क्योंकि शहर के समीप होने के कारण भूमि का बाजार मूल्य अधिक है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस स्थिति को समझते हुए किसानों के हित में बेहतर निर्णय लिया। इससे विकास और किसानों के हितों के बीच बेहतर सामंजस्य स्थापित हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के इस निर्णय के बाद किसानों की भागीदारी में तेजी आई है। योजना में किसानों को उनकी जमीन के बदले विकसित जमीन दी जाती है, यानी ऐसी जमीन जिसमें सड़क, बिजली, पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं पहले से उपलब्ध हों। अब 60 प्रतिशत विकसित जमीन मिलने से किसानों को भविष्य में अधिक मूल्य प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। साथ ही वे इस जमीन का उपयोग आवासीय, वाणिज्यिक या अन्य आर्थिक गतिविधियों के लिए कर सकेंगे, जिससे उनकी आय के स्थायी स्रोत बनेंगे। परियोजना के प्रथम चरण का भूमि-पूजन मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा 3 मई को सेक्टर-ए, ग्राम नैनोद, इंदौर में किया जाएगा। प्रथम चरण की लागत 326.51 करोड़ रु. है, जिसके तहत प्रारंभिक अधोसंरचना विकास कार्य शुरू किए जाएंगे। परियोजना से क्षेत्र में आधुनिक अधोसंरचना विकसित होगी, कनेक्टिविटी मजबूत होगी और उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार होगा। इसके साथ ही स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे, जिससे क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी। जिला प्रशासन और एमपीआईडीसी द्वारा भू-स्वामियों से लगातार संवाद स्थापित किया जा रहा है और उन्हें योजना के लाभों की जानकारी दी जा रही है। इसके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं और किसान इस महत्वाकांक्षी परियोजना में सक्रिय भागीदारी कर रहे हैं।  

आरक्षण मामले में हाईकोर्ट सख्त: विवाह के बाद भी नहीं बदलेगी जाति, पंजाब-हरियाणा HC का अहम निर्णय

चंडीगढ़. विवाह के बाद दूसरे राज्य में बस जाने भर से किसी महिला को पति के राज्य की पिछड़ा वर्ग श्रेणी का लाभ नहीं मिल सकता। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने इसी महत्वपूर्ण संवैधानिक सिद्धांत को दोहराते हुए राजस्थान मूल की एक महिला की हरियाणा में बीसी-बी प्रमाणपत्र के नवीनीकरण की मांग खारिज कर दी। जस्टिस जगमोहन बंसल ने स्पष्ट किया कि आरक्षण से जुड़ी जातीय स्थिति जन्म आधारित होती है और केवल विवाह के आधार पर राज्य बदलने से संबंधित सामाजिक श्रेणी का कानूनी लाभ स्वत प्राप्त नहीं किया जा सकता। यह फैसला एकता यादव की याचिका पर सुनाया गया। याचिकाकर्ता रेवाड़ी निवासी एकता यादव ने हाई कोर्ट में मांग की थी कि हरियाणा सरकार को उनका बीसी-बी प्रमाणपत्र नवीनीकृत करने और 10 अगस्त 2025 के कानूनी नोटिस पर निर्णय लेने का निर्देश दिया जाए। याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि उनका दावा गलत तरीके से अस्वीकार किया गया। हालांकि, हरियाणा सरकार ने कोर्ट को बताया कि 22 मार्च 2022 की राज्य सरकार की अधिसूचना के अनुसार यदि कोई व्यक्ति एक राज्य से दूसरे राज्य में स्थानांतरित होता है, तो वह केवल अपने मूल राज्य में मान्य जाति श्रेणी का लाभ ले सकता है, न कि विवाह या प्रवास के आधार पर नए राज्य में उसी श्रेणी का दावा कर सकता है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि अधिसूचना के पैरा 3(4) के अनुसार किसी अन्य जाति या वर्ग के व्यक्ति से विवाह कर लेने मात्र से किसी महिला की जातीय श्रेणी परिवर्तित नहीं होती। अदालत ने माना कि याचिकाकर्ता जन्म से राजस्थान की ओबीसी श्रेणी से संबंधित हैं, लेकिन हरियाणा में प्रवास के बाद वह वहां की बीसी-बी श्रेणी का लाभ नहीं ले सकतीं। हाई कोर्ट ने अपने पूर्व डिवीजन बेंच फैसले हरियाणा लोक सेवा आयोग बनाम श्वेता कश्यप का हवाला देते हुए कहा कि जाति व्यक्ति को जन्म से प्राप्त होती है और विवाह के कारण उसमें परिवर्तन नहीं होता। यदि एक राज्य की महिला दूसरे राज्य के पुरुष से विवाह करती है, तो उसे पति के राज्य की आरक्षण नीति का लाभ नहीं मिल सकता। इसी आधार पर कोर्ट ने एकता यादव की याचिका को खारिज कर दिया।