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महिलाओं को आरक्षण नहीं दिया गया, तो सपा-कांग्रेस को 2027 में कोई वोट नहीं मिलेगा: केशव प्रसाद मौर्य

एंटी-वुमेन एलाइंस साबित हुआ इंडी एलाइंस सड़क पर निकलकर सपा व कांग्रेस का बैंड बजा रही हैं उत्तर प्रदेश की आक्रोशित बहनें: बृजेश पाठक महिलाओं को आरक्षण नहीं दिया गया, तो सपा-कांग्रेस को 2027 में कोई वोट नहीं मिलेगा: केशव प्रसाद मौर्य नारी अधिकारों का हनन करने के बाद खुशियां मनाना दर्शाता है कांग्रेस व सपा की मानसिकता: अरुण सिंह विपक्ष मोदी-विरोध में इतना अंधा हो गया कि हर अच्छी पहल का विरोध कर रहा है: पंकज चौधरी लखनऊ  नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर विपक्ष के षड्यंत्र के विरोध में मंगलवार को लखनऊ में ‘जन आक्रोश पदयात्रा’ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ ही उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक व केशव प्रसाद मौर्य, पंचायती राज्यमंत्री ओमप्रकाश राजभर, राज्यसभा सांसद अरुण सिंह और केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी समेत हजारों महिलाओं ने सड़कों पर उतरकर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। सभी ने एक सुर में कहा कि 17 अप्रैल को संसद में यह बिल पास होने वाला था, लेकिन कांग्रेस और सपा ने न सिर्फ इसका विरोध किया, बल्कि मतदान में इसे गिराने के बाद तालियां बजाकर खुशी मनाई। उन्होंने इसे महिलाओं के अधिकारों का हनन बताया और कहा कि 2027 के चुनाव में इन दलों को महिला आक्रोश का खामियाजा भुगतना पड़ेगा। केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी ने तो यहां तक कहा कि इंडी एलाइंस अब एंटी-वुमेन एलाइंस साबित हो चुका है। बिल के विरोध का खामियाजा चुनाव में भुगतना पड़ेगा उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने कहा कि आज प्रदेश की महिला शक्ति सड़कों पर है। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस की दुरभि संधि और संकीर्ण मानसिकता के कारण नारी शक्ति वंदन अधिनियम को संसद में रोकने का काम किया गया है। आज उत्तर प्रदेश की आक्रोशित बहनें सड़क पर निकलकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस का बैंड बजाने का काम कर रही हैं। इन पार्टियों को आने वाले चुनावों में इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। हम सब अच्छी तरह जानते हैं कि समाजवादी पार्टी की सरकार जब-जब प्रदेश में होती है, गुंडे-बदमाश खुलेआम बहन-बेटियों को परेशान करने का काम करते हैं। इसीलिए नारे लगते हैं, 'देख सपाई-बिटिया घबराई'। वक्त है कि सब एकजुट होकर सपा व कांग्रेस को महिला शक्ति का अहसास कराएं। मां दुर्गा, मां काली, मां सरस्वती बनकर विपक्षियों को सबक सिखाएं। महिलाओं को आरक्षण दिलाकर रहेंगे: केशव प्रसाद मौर्य उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि समाजवादी पार्टी का सूपड़ा साफ होना है। 2027 में बिना महिलाओं के कोई चुनाव जीत सकता है क्या? अगर महिलाओं को आरक्षण नहीं दिया गया, तो सपा-कांग्रेस को आने वाले चुनाव में कोई वोट नहीं मिलेगा। इसके लिए तैयार हो जाइए। प्रधानमंत्री मोदी जी ने कहा है कि हम हिम्मत नहीं हारेंगे। हम महिलाओं को आरक्षण दिलाकर रहेंगे। इसी संकल्प के साथ हमें यहां से जन आक्रोश मार्च निकालना है। सपा व कांग्रेस को कभी माफ नहीं करेंगे राज्यसभा सांसद अरुण सिंह ने कहा कि 17 अप्रैल के दिन देशभर की महिलाओं के मन में एक आकांक्षा थी कि आज जब नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर निर्णय होगा, तो वह हमारे पक्ष में होगा। वे उत्सव मनाएंगी, खुशियां मनाएंगी और यह दिन देश के इतिहास के पन्नों में स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा। लेकिन कांग्रेस व सपा ने संसद में नारी शक्ति वंदन अधिनियम के संशोधन का विरोध किया और उसके विरुद्ध मतदान किया। उन्होंने सिर्फ विरोध ही नहीं किया, बल्कि नारी अधिकारों का हनन करने के बाद तालियां भी बजाईं और खुशियां भी जाहिर कीं। यह कांग्रेस और समाजवादी पार्टी की मानसिकता को दर्शाता है। उसी के कारण पूरे देश में जन आक्रोश है। इसीलिए इतनी बड़ी संख्या में आप लोग यहां एकत्र हुए हैं, यह बताने के लिए कि सपा व कांग्रेस को हम कभी माफ नहीं करेंगे। 80 प्रतिशत बहुसंख्यक महिलाओं के हितों को ठेस पहुंचाई पंकज चौधरी ने कहा कि नारी का उत्थान व सम्मान, भाजपा की यही पहचान है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में नारी सशक्तीकरण के लिए हमारी सरकार लगातार काम कर रही है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम का मुख्य उद्देश्य देश की माताओं और बहनों को नेतृत्व का अधिकार देना था। ताकि लोकसभा और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत सीटों पर महिलाएं चुनाव लड़ सकें और नीति-निर्माण में उनकी भागीदारी सुनिश्चित हो सके। इसके बावजूद सपा और कांग्रेस सहित विपक्ष ने इसमें बाधा डाली। कुछ लोगों ने कहा कि इससे उत्तर और दक्षिण भारत में भेद पैदा हो जाएगा। कुछ लोगों ने यह भी कहा कि मुस्लिम महिलाओं का आरक्षण भी होना चाहिए। हमारे नेताओं ने सदन में इन सभी आपत्तियों का विस्तार से जवाब दिया। विपक्षी दल जहां एक तरफ महिलाओं का सम्मान और सशक्तीकरण की बात करते हैं, वहीं दूसरी तरफ नकाब और वोट बैंक के चक्कर में उन्होंने 20 प्रतिशत अल्पसंख्यक महिलाओं के नाम पर 80 प्रतिशत बहुसंख्यक महिलाओं के हितों को ठेस पहुंचाने का काम किया है।

124 साल में कई बार हुआ भोजशाला का सर्वे, हर बार मिलीं मूर्तियां-श्लोक, MP HC में अब होगी सुनवाई

धार   धार भोजशाला परिसर को लेकर हाईकोर्ट की युगलपीठ में पहले धार के हस्तक्षेपकर्ताओं की बहस पूरी हुई। इसके बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने सर्वे पर बात रखी। बताया, हाईकोर्ट ने 2024 में सर्वे आदेश दिए। इससे पहले 1902 के बाद से ही कई बार सर्वे हो चुका है। अन्य शोधकर्ताओं ने भी सर्वे किया। हर सर्वे में मूर्तियां और श्लोक मिले। यह कई रिपोर्ट में है। मुस्लिम पक्ष ने पेश किए मस्जिद के सबूत उधर, धार के जिब्रान अंसारी, फिरोज, अयाज की हस्तक्षेप याचिका पर वकील सैयद अशहार अली वारसी ने बात रखी। कहा, मंदिर (Bhojshala) के लिए जरूरी है शिखर, गोपुरम, मंडप, गर्भगृह, जो इस निर्माण में नहीं हैं। मस्जिद (Bhojshala) के लिए जरूरी किबला, जिसकी दीवार मक्का की ओर हो, वो यहां है। 1908 में ही पुरातत्व इमारत घोषित सुनील जैन ने बताया, इसे 1908 में पुरातत्व महत्व (Bhojshala) की इमारतों में, तो 1958 में संरक्षित इमारतों में शामिल किया गया। इसी दौरान कोर्ट ने इसे भोजशाला और कमाल मौला मस्जिद का नाम किस दस्तावेज में आया, उस पर जारी नोटिफिकेशन पर सवाल खड़ा किया था। भोजशाला में 100 साल से अधिक पुराने सर्वे और संस्कृत अवशेष मिले – एएसआई की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) वरिष्ठ अधिवक्ता सुनील जैन ने बताया कि भोजशाला का अध्ययन आज का नहीं है, बल्कि पिछले 100 से अधिक वर्षों से इसका लगातार सर्वे और शोध होता आ रहा है। उन्होंने कहा कि वर्ष 1902-03 में भी यहां विस्तृत सर्वे किया गया था, जिसमें कई ऐतिहासिक अवशेषों का रिकॉर्ड तैयार किया गया था। एएसआई ने यह भी बताया कि समय-समय पर हुए विभिन्न सर्वे में भोजशाला से मूर्तियां और पत्थरों पर संस्कृत में लिखे श्लोक मिले हैं। इन अवशेषों से यह संकेत मिलता है कि यह स्थान प्राचीन भारतीय शिक्षा और संस्कृति से जुड़ा रहा है। 2024 सर्वे रिपोर्ट और ऐतिहासिक दर्जे पर एएसआई का पक्ष – कोर्ट को यह भी जानकारी दी गई कि वर्ष 2024 में हाई कोर्ट के आदेश के बाद एएसआई ने आधुनिक तकनीकों की मदद से एक नया और विस्तृत सर्वे किया। इसकी रिपोर्ट पहले ही अदालत में जमा की जा चुकी है। इस रिपोर्ट में भी पहले जैसे ही तथ्य सामने आए हैं, जैसे संस्कृत श्लोक और प्राचीन मूर्तियां। एएसआई ने बताया कि भोजशाला को वर्ष 1908 में ही पुरातत्व महत्व की सूची में शामिल किया गया था और बाद में 1958 में इसे संरक्षित भवन घोषित किया गया। इससे यह साफ होता है कि सरकार भी इसके ऐतिहासिक महत्व को मानती है। सुनवाई के दौरान अदालत ने यह सवाल भी उठाया कि “भोजशाला” और “कमाल मौला मस्जिद” नाम सबसे पहले किस दस्तावेज में दर्ज हुए और क्या इस पर कोई आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी हुआ था। इस पर दोनों पक्षों की ओर से अलग-अलग दलीलें दी गईं। अब इस मामले में मंगलवार को एएसआई अपने 98 दिन चले हालिया सर्वे की पूरी रिपोर्ट पर विस्तार से तर्क रखेगा। इसके बाद मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसायटी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद अपना पक्ष अदालत में प्रस्तुत करेंगे। कई बार हो चुका है भोजशाला का सर्वे बता दें कि ऐतिहासिक धार भोजशाला (Bhojshala) का मुख्य और नवीनतम वैज्ञानिक सर्वे 22 मार्च 2024 से शुरू किया गया था। जो 98 दिन तक चला। इस सर्वे की रिपोर्ट 15 जुलाई 202 को AsI ने एमपी हाईकोर्ट (इंदौर) में पेश की थी। जबकि इससे पहले 1902 में भी भोजशाला का सर्वे किया गया था। इस सर्वे के अलावा 7 अप्रैल 2003 को भी एक व्यवस्था के तहत जांच की गई थी। बताते चलें कि ASI ने जीपीआर और जीपीएस के साथ ही कार्बन डेंटिंग तकनीक का इस्तेमाल करते हुए इसका सर्वे किया है। सर्वे का उद्देश्य पता लगाना है कि यह मंदिर है या मस्जिद सर्वे का उद्देश्य यह पता लगाना था कि धार भोजशाला (Bhojshala) स्थल एक सरस्वती मंदिर है या फिर कमाल मौला की मस्जिद। हिंदु इसे मंदिर का नाम देते हैं और मुस्लिम मस्जिद का। इसके अलावा जैन समाज भी अपनी याचिका दर्ज कर भोजशाला का तीसरा दावेदार बन चुका है। मामला हाईकोर्ट में है, जिसकी दोबारा सुनवाई शुरू हुई है। इस कड़ी में आज फिर सुनवाई होनी है।

यूपीनेडा ने लॉन्च किया ‘पीएम सूर्य घर’ पोर्टल, योजना की रफ्तार बढ़ाने के लिए रियल-टाइम मॉनिटरिंग

यूपीनेडा ने लॉन्च किया ‘पीएम सूर्य घर’ पोर्टल, रियल-टाइम मॉनिटरिंग से तेज होगी योजना की रफ्तार योगी सरकार की पारदर्शी शासन व्यवस्था को नई मजबूती, आवेदन से भुगतान तक हर चरण ऑनलाइन ट्रैक 4.80 लाख से अधिक रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित कर यूपी देश के अग्रणी राज्यों में शामिल लखनऊ उत्तर प्रदेश में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए योगी सरकार लगातार तकनीक का सहारा ले रही है। इसी कड़ी में यूपीनेडा के निदेशक इंद्रजीत सिंह ने सोमवार को ‘प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना’ की निगरानी के लिए www.pmsgy.upneda.co.in पोर्टल का शुभारंभ किया। यह पोर्टल योजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता, गति और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। आवेदन से भुगतान तक हर चरण पर रियल-टाइम निगरानी नया पोर्टल योजना के सभी प्रमुख चरणों, आवेदन, स्वीकृति, सोलर संयंत्र की स्थापना और भुगतान की रियल-टाइम मॉनिटरिंग की सुविधा प्रदान करता है। इससे न केवल अधिकारियों को कार्य प्रगति की सटीक जानकारी मिलेगी, बल्कि लाभार्थियों को भी अपने आवेदन की स्थिति जानने में आसानी होगी। योगी सरकार के ‘डिजिटल गवर्नेंस’ मॉडल के तहत यह पहल सरकारी योजनाओं को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने में सहायक होगी। केंद्र सरकार ने भी सराहा यूपी मॉडल गौरतलब है कि मिनिस्ट्री ऑफ न्यू एंड रिन्यूएबल एनर्जी (भारत सरकार) ने भी यूपीनेडा द्वारा विकसित इस मॉडल की सराहना की है। मंत्रालय ने केंद्रीय स्तर पर इसी प्रकार का पोर्टल विकसित करने के लिए यूपीनेडा से तकनीकी सहयोग का अनुरोध किया है। इसके लिए निदेशक इंद्रजीत सिंह द्वारा एक विशेष समिति का गठन किया गया है, जो केंद्र सरकार को तकनीकी सहायता प्रदान करेगी। यह पहल उत्तर प्रदेश को नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित करती है। सौर ऊर्जा में यूपी की बड़ी उपलब्धि योगी सरकार के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने ‘प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना’ के अंतर्गत उल्लेखनीय प्रगति की है। राज्य में अब तक 4.80 लाख से अधिक घरेलू रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं। यह उपलब्धि न केवल प्रदेश को देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करती है, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा के लक्ष्य की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है।सरकार का उद्देश्य ‘हर घर सोलर’ की परिकल्पना को साकार करना है, जिससे आम नागरिकों को सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा उपलब्ध हो सके। इससे बिजली बिल में कमी, पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा आत्मनिर्भरता जैसे कई लाभ सुनिश्चित हो रहे हैं।

Heatwave Alert: पंजाब और हरियाणा में 5 दिन लू का प्रकोप, बठिंडा बना हॉटस्पॉट

चंडीगढ़. अगले चार-पांच दिन लू की लपटें झुलसाएंगी। उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में तेज गर्म हवाएं चलेंगी। मौसम विभाग (आइएमडी) ने बताया कि हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, पंजाब, पूर्वी राजस्थान, विदर्भ, छत्तीसगढ़, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पश्चिमी राजस्थान, मध्य प्रदेश, गंगा-तटीय बंगाल, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और ओडिशा के कुछ इलाकों में 25 अप्रैल तक अलग-अलग तारीखों में लू की स्थिति रहेगी। कई क्षेत्रों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तक जा सकता है। सोमवार को पंजाब में अधिकतम तापमान सामान्य से 3.6 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा। बठिंडा राज्य में सबसे गर्म रहा। यहां का अधिकतम तापमान 41 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसके अलावा पटियाला का अधिकतम तापमान 39.8, लुधियाना का 39.4, चंडीगढ़ का 38.1, फरीदकोट का 38, अमृतसर का 37.1 तथा फिरोजपुर का 36.5 सेल्सियस रहा। प्रयागराज में अधिकतम तापमान 44.6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। वहीं वाराणसी में अधिकतम तापमान 44 डिग्री रहा। कानपुर, गोरखपुर, झांसी, आगरा समेत उत्तर प्रदेश के 25 से अधिक जिलों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस को पार कर गया। राजस्थान, हरियाणा के कई शहरों में भी अधिकतम तापमान 40 डिग्री से ज्यादा रहा। पहाड़ भी तप रहे हैं। उत्तराखंड के पंतनगर में अधिकतम तापमान 39 डिग्री तो देहरादून में 37 डिग्री दर्ज किया गया। कई राज्यों ने मौसम के तेवर से निपटने के लिए एहतियाती कदम उठाए हैं। विशेषज्ञों ने लू के दौरान दोपहर में घर से बाहर न निकलने, पर्याप्त पानी पीने और हल्के रंग के सूती कपड़े पहनने की सलाह दी है। साथ ही कहा है कि इस मौसम में बच्चे, बुजुर्ग और गर्भवती महिलाएं अतिरिक्त सावधानी बरतें। मौसम विभाग ने कहा कि गंगा-तटीय बंगाल यानी बंगाल के दक्षिण क्षेत्र के कुछ हिस्सों में 26 अप्रैल तक गर्म और आर्द्र मौसम रहने के आसार हैं। हरियाणा, चंडीगढ़, पश्चिम उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, विदर्भ में 21 अप्रैल को रात गर्म रहने के आसार हैं।

डिप्टी CM साव का एक्शन मोड: अवैध निर्माण पर कार्रवाई, इंजीनियर निलंबन और ठेकेदार पर जुर्माना

रायपुर. उप मुख्यमंत्री और नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री अरुण साव ने सोमवार को प्रदेश के सभी नगर निगमों और नगर पालिकाओं के कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने रायपुर के सिविल लाइन स्थित सर्किट हाउस में दिनभर चली बैठक में शहरों में पेयजल आपूर्ति की समस्याओं, अवैध प्लॉटिंग और अवैध निर्माण पर नाराजगी जाहिर करते हुए इनके निराकरण के लिए तत्काल कदम उठाने के निर्देश दिए। उन्होंने धमतरी में पेयजल योजना के काम में लेटलतीफी पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कार्यपालन अभियंता को निलंबित करने और ठेकेदार पर पेनाल्टी लगाने के निर्देश दिए। नगर निगमों और नगर पालिकाओं की आज दो अलग-अलग हुई समीक्षा बैठकों में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के सचिव डॉ. बसवराजु एस., संचालक आर. एक्का और राज्य शहरी विकास अभिकरण (SUDA) के सीईओ शशांक पाण्डेय सहित सभी नगर निगमों के आयुक्त, नगर पालिकाओं के मुख्य नगर पालिका अधिकारी, वरिष्ठ अभियंता एवं नगरीय प्रशासन विभाग के पांचों संभागीय क्षेत्रीय कार्यालयों के संयुक्त संचालक भी बैठक में मौजूद थे। कार्ययोजना बनाकर काम करने के निर्देश उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने समीक्षा बैठक में नगर निगमों और नगर पालिकाओं के अधिकारियों को शहरों की जरूरत के मुताबिक कार्ययोजना बनाकर काम करने के निर्देश दिए। उन्होंने निकायों की व्यवस्था और छवि सुधारने सक्रियता व गंभीरता से काम करने को कहा। उन्होंने कहा कि नगर निगम ऐसा काम करें जिससे राज्य की नगर पालिकाएं प्रेरणा ले सकें और नगर पालिका इस तरह से काम करें जिनसे नगर पंचायतें प्रेरित हो सकें। उन्होंने निकायों के अभियंताओं से कहा कि काम की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें नहीं आना चाहिए। सभी निर्माण कार्य समय-सीमा में पूर्ण हों, इस पर विशेष ध्यान दें। बजट खर्च करने के लिए नहीं, बल्कि समस्याओं का करें स्थायी समाधान- साव उप मुख्यमंत्री साव ने पेयजल आपूर्ति की लगातार आ रही शिकायतों पर नाखुशी और नाराजगी जाहिर करते हुए अगले वर्ष तक सभी नगर निगमों में इसके स्थाई समाधान के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शहरों में केवल बजट खर्च करने के उद्देश्य से काम न करें, बल्कि समस्याओं का स्थाई समाधान करें। पेयजल समस्या की शिकायतों पर जवाबदेही तय कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने आगामी 31 मई तक सभी नगर निगमों में बड़े नाला-नालियों और ड्रेनेज की सफाई के काम पूर्ण करने के साथ ही बरसात में जल भराव रोकने जरूरी उपाय करने को कहा। जून के पहले सप्ताह में राज्य स्तरीय टीम नगर निगमों में इसका भौतिक निरीक्षण करेंगी। कार्य संतोषजनक न मिलने पर स्वास्थ्य अधिकारी और इंजीनियर पर कार्रवाई की जाएगी। अपूर्ण आवासों को पूर्ण करने के निर्देश डिप्टी सीएम साव ने बैठक में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत अपूर्ण आवासों को सितम्बर-2026 तक पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने अप्रारंभ आवासों के निर्माण एक माह के भीतर हर हाल में शुरू करने के साथ ही मार्च-2026 में स्वीकृत सभी आवासों को वर्षा ऋतु के पहले प्रारंभ करने को कहा। उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 के तहत निर्धारित 18 माह की अवधि में निर्माण पूर्ण करने वाले हितग्राहियों के प्रस्ताव अविलंब विभाग को भेजने के निर्देश दिए, ताकि ऐसे हितग्राहियों को मुख्यमंत्री गृह प्रवेश सम्मान योजना की 32 हजार 850 रुपए की अतिरिक्त राशि प्रदान की जा सके। पीएम स्वनिधि योजना का लाभ दिलाने के निर्देश डिप्टी सीएम साव ने पीएम स्वनिधि योजना का लाभ ज्यादा से ज्यादा स्ट्रीट वेंडर्स को दिलाने बैंकों से बात कर ऋण स्वीकृत कराने के निर्देश दिए। उन्होंने शहरों में भूजल को रिचार्ज करने के लिए डीएमएफ, सीएसआर और जन सहयोग से अधिक से अधिक संख्या में रेन वाटर हार्वेस्टिंग के कार्य कराने को कहा। उन्होंने शहरों को सुंदर, स्वच्छ और सुविधापूर्ण बनाने के मिशन में वर्तमान समय की जरूरतों और तकनीकों के साथ नई कार्य पद्धति अपनाने के निर्देश निकायों के अधिकारियों को दिए। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के उप सचिव भागवत जायसवाल, अपर संचालक पुलक भट्टाचार्य और मुख्य अभियंता राजेश शर्मा भी समीक्षा बैठक में उपस्थित थे। इन कार्यों और योजनाओं की हुई समीक्षा डिप्टी सीएम अरुण साव ने आज दो सत्रों में मैराथन बैठकों में नगरीय निकायों में राजस्व वसूली, विद्युत देयकों के भुगतान, वेतन भुगतान, अधोसंरचना विकास व 15वें वित्त आयोग के कार्यों, नालंदा परिसरों, नगरोत्थान योजना, जलप्रदाय योजनाओं, आपदा प्रबंधन, गोधाम योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, अमृत मिशन, स्वच्छ भारत मिशन, पीएम स्वनिधि योजना, अटल मॉनिटरिंग पोर्टल, आई-गॉट (I-got) कर्मयोगी तथा रेन वाटर हार्वेस्टिंग के कार्यों की समीक्षा की। वे 21 अप्रैल को दिनभर नगर पंचायतों के कार्यों की समीक्षा करेंगे।

योगी ने बंगाल में तृकां को घेरा, बोले- राम के नाम और दुर्गा पूजा से ममता दीदी को नफरत, सड़कों पर कराती हैं इफ्तार पार्टी

गारबेटा में भी योगी-योगी, सड़कों-छतों पर खड़े होकर हजारों लोगों ने किया बुलडोजर बाबा का दीदार योगी ने बंगाल में तृकां को घेरा, बोले- राम के नाम और दुर्गा पूजा से ममता दीदी को नफरत, सड़कों पर कराती हैं इफ्तार पार्टी  सीएम योगी ने गिनाईं यूपी की विशेषताएं, कहा- यूपी की सड़कों से गुजरिए, फिर भी हाथ पर रखे कप से नहीं छलकेगा पानी  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पश्चिम बंगाल की गारबेटा विधानसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार प्रदीप लोढ़ा के पक्ष में की चुनावी रैली   पश्चिम मेदिनीपुर पश्चिम बंगाल चुनाव में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का जबर्दस्त क्रेज दिख रहा है। एक ओर चिलचिलाती धूप में योगी आदित्यनाथ भाजपा प्रत्याशियों के लिए खूब पसीना बहा रहे हैं तो वहीं दूसरी ओर उन्हें देखने-सुनने और एक झलक पाने को हजारों की भीड़ उमड़ रही है। सोमवार को गारबेटा विधानसभा क्षेत्र से भाजपा उम्मीदवार प्रदीप लोढ़ा के पक्ष में हुई चुनावी रैली में भी यही नजारा दिखा, जब दीवारों, वाहनों और घरों की छतों पर खड़े होकर लोगों ने योगी आदित्यनाथ का भाषण सुना और योगी-योगी की गूंज से उनका बंगाल की धरा पर स्वागत किया। योगी आदित्यनाथ ने भी नौजवानों, किसानों, महिलाओं से आह्वान किया कि जिस बंगाल को कांग्रेस, कम्युनिस्टों और तृणमूल कांग्रेस ने कंगाल किया है, उसे इन पार्टियों की अराजकता से मुक्त कराइए।  तृणमूल की अराजकता से मुक्त अब डबल इंजन सरकार लाने जा रहा पश्चिम बंगाल  सीएम ने बंगाल के राष्ट्रनायकों की धरा बताया, कहा कि जब तुष्टिकरण की पराकाष्ठा और टीएमसी सरकार की गुंडागर्दी चरम पर हो तो नेताजी सुभाष चंद्र बोस याद आते हैं। यहां के नौजवानों के सामने पहचान का संकट आया है। कभी लीडर की भूमिका में रहा बंगाल लूजर की भूमिका में हो गया है। भारत की आर्थिक उन्नति का आधार रहा बंगाल तृणमूल कांग्रेस, कांग्रेस व कम्युनिस्टों के लूटतंत्र का शिकार होकर कंगाल हो गया है। तृणमूल की अराजकता से मुक्त होकर बंगाल भी अब डबल इंजन सरकार का स्वाद चखने जा रहा है।  यूपी में हैं ऐसी सड़कें कि हाथ पर रखे कप से पानी भी नहीं छलकेगा सीएम योगी ने आरोप लगाया कि जयश्रीराम बोलने पर ममता दीदी को परेशानी होती है। सड़कों पर इफ्तार पार्टी कराने वाली ममता दीदी ने राम नाम, दुर्गा पूजा, मूर्ति विसर्जन, शोभायात्रा पर बैन लगा दिया है। 2017 के पहले उत्तर प्रदेश में भी अराजकता, गुंडागर्दी, सड़कों पर नमाज और इफ्तार पार्टी होती थी, लेकिन यूपी में 9 साल से डबल इंजन सरकार चल रही है, तबसे नो कर्फ्यू, नो दंगा है, यूपी में सब चंगा है। वहां किसी के हक पर कोई डकैती नहीं डाल सकता। यूपी में ऐसी सड़कें हैं कि हाथ पर रखे कप से पानी नहीं छलकेगा। यूपी हाईवे स्टेट, एक्सप्रेसवे स्टेट, सर्वाधिक एयरपोर्ट वाला स्टेट, सर्वाधिक रोजगार देने वाला राज्य यूपी बन गया। जहां पहले उपद्रव होता है, वहां अब उत्सव हो रहा है।  बंगाल में राम का नाम लेने से चिढ़ती हैं ममता दीदी और यूपी में बन गया भव्य राम मंदिर सीएम योगी ने कहा कि अब यूपी में सड़कों पर इफ्तारी और नमाज नहीं होती है। मस्जिद से अजान भी नहीं सुनाई देती। यूपी में हर तरफ खुशहाली है। ममता दीदी बंगाल में राम का नाम लेने पर चिढ़ती हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश के अयोध्या में आसमान को छूता भव्य राम मंदिर का निर्माण हो गया। हर भारतीय को सीना तानकर खड़े होने और मर्यादा की प्रेरणा देने वाला राम मंदिर बताता है कि आस्था झुकती, रुकती, टूटती नहीं है। बस चुनौती का सामना करने की इच्छाशक्ति हो। वहां विधर्मियों के हौसले पस्त हुए। यूपी में माफिया की हड्डी-पसली को चकनाचूर कर देता है बुलडोजर सीएम ने कहा कि यूपी में गोहत्या, लवजेहाद, लैंडजेहाद नहीं हो सकता। माफिया व गुंडों ने हिमाकत की तो बुलडोजर उसकी हड्डी-पसली को चकनाचूर कर देता है। टीएमसी का मतलब टेरर, माफियाराज व करप्शन है। इसे केवल भाजपा सरकार ही समाप्त कर सकती है। न गोहत्या होने देंगे और न ही हिंदू को बंटने देंगे। उन्नति के लिए बंगाल को भी डबल इंजन सरकार के नेतृत्व में कार्य करना है।

सम्राट सरकार का बड़ा फैसला: विजय सिन्हा के आदेश को पलटते हुए 224 राजस्वकर्मियों का निलंबन रद्द

पटना  बिहार सरकार ने राजस्व कर्मचारियों को बड़ी राहत दी है. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सरकार ने पूर्व में लिए गए सख्त फैसले को पलटते हुए 200 से अधिक राजस्व कर्मचारियों के निलंबन को खत्म करने का निर्देश दिया है. राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अपर सचिव डॉ महेंद्र पाल ने सभी जिलाधिकारियों को पत्र भेजकर 11 फरवरी से 19 अप्रैल के बीच निलंबित किए गए कर्मियों की बहाली की प्रक्रिया शुरू करने को कहा है. बताया जा रहा है कि इससे पहले यह कार्रवाई तत्कालीन फैसलों के तहत की गई थी, जिसे अब बदल दिया गया है।  विजय सिन्हा के समय हुई थी सख्त कार्रवाई सम्राट चौधरी सरकार ने हड़ताल के दौरान निलंबित 224 से ज्यादा कर्मियों का सस्पेंशन रद्द कर दिया है. यह फैसला पूर्व उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा के सख्त आदेश को पलटते हुए लिया गया है. बता दें कि बीते 11 फरवरी 2026 से राजस्व कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर थे. तब विजय कुमार सिन्हा राजस्व मंत्री और उपमुख्यमंत्री थे. उन्होंने हड़ताल को अनुशासनहीनता मानते हुए अलग-अलग आदेश जारी कर 224 कर्मियों को निलंबित कर दिया था. 9 मार्च से अंचलाधिकारी और राजस्व अधिकारी भी हड़ताल पर थे. उनके खिलाफ भी 45 से ज्यादा सस्पेंशन हुए. अब सम्राट सरकार ने इनमें से कर्मचारियों का निलंबन वापस ले लिया है।  जनगणना और जनता का काम अटका था दरअसल, ढाई महीने से हड़ताल और निलंबन के चलते अंचलों में जमीन संबंधी काम पूरी तरह ठप हो गए थे. दाखिल-खारिज, नामांतरण, जनगणना जैसे जरूरी कार्य प्रभावित हो रहे थे. विभाग ने इसे ध्यान में रखते हुए फिलहाल कर्मचारियों को काम पर वापस बुलाने का फैसला किया. पत्र में साफ कहा गया है कि 11 फरवरी से 19 अप्रैल तक निलंबित सभी कर्मियों का सस्पेंशन रद्द किया जाए।  कर्मचारियों की मांगें क्या थीं? यहां यह भी बता दें कि बिहार राज्य भूमि सुधार कर्मचारी संघ (संयुक्त संघर्ष मोर्चा) के बैनर तले कर्मचारी हड़ताल पर गए थे. उनकी मुख्य मांगें थीं- ग्रेड पे बढ़ाना, गृह जिले में तबादला, दाखिल-खारिज प्रक्रिया में सुधार और दफ्तरों में बुनियादी सुविधाएं. लेकिन काम काज में बाधा को आधार बनाते हुए तब सरकार नेसख्त कदम उठाते हुए कर्मचारियों को निलंबित कर दिया था. लेकिन, सरकार बदलने के साथ ही अब निलंबन रद्द कर उन्हें काम पर लौटने का रास्ता साफ कर दिया है. हालांकि सीओ और आरओ के सस्पेंशन पर अभी अलग से विचार चल रहा है।  सम्राट सरकार का संदेश दरअसल, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में नई सरकार ने प्रशासनिक कामकाज को तेज करने का संकल्प लिया है. विजय कुमार सिन्हा के समय लिए गए सख्त फैसले को पलटना इसी दिशा का पहला बड़ा कदम माना जा रहा है. सूत्रों के मुताबिक जनगणना के काम को समय पर पूरा करने और आम लोगों को सुविधा देने के लिए यह राहत जरूरी थी. कई कर्मचारी अब काम पर लौटने को तैयार हैं।  अभी भी कुछ पेंच बाकी हालांकि, हड़ताल पूरी तरह खत्म नहीं हुई है, क्योंकि कुछ सीओ और आरओ अभी भी डटे हुए हैं. विभाग ने पहले उन्हें कई बार चेतावनी दी थी, और अब कर्मचारियों की निलंबन वापसी के बाद अधिकारियों पर भी दबाव बढ़ गया है. सरकार का कहना है कि काम पर लौटने वालों को कोई दिक्कत नहीं होगी. लेकिन अनुशासन भंग करने वालों पर नजर रखी जाएगी।  जनता को मिलेगी सुविधा बहरहाल, राजस्व कर्मचारियों के निलंबन को रद्द करने का फैसला यह दिखाता है कि नई सरकार टकराव के बजाय समाधान के रास्ते पर चलना चाहती है. अब सरकार के इस फैसले से अंचल स्तर पर जमीन के काम फिर से शुरू हो सकेंगे. आम नागरिकों को दाखिल-खारिज, प्रमाण-पत्र और अन्य सेवाएं समय पर मिलने लगेंगी। 

बेसिक शिक्षा के 32 हजार से अधिक विद्यालय अब बने ‘निपुण’

बेसिक शिक्षा के 32 हजार से अधिक विद्यालय अब ‘निपुण योगी सरकार में बेसिक शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लगातार प्रयासों का ठोस परिणाम हर स्कूल को ₹50 हजार की सहायता, निपुण स्कूलों के शिक्षकों का सम्मान लखनऊ  योगी सरकार में बेसिक शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए किए जा रहे लगातार प्रयासों का बड़ा परिणाम सामने आया है। निपुण भारत मिशन के तहत किए गए ताजा आकलन में 32,480 प्राथमिक विद्यालय ‘निपुण’ घोषित किए गए हैं। इन विद्यालयों में कक्षा 1 और 2 के कम से कम 80 प्रतिशत बच्चों ने भाषा और गणित में अपेक्षित दक्षता हासिल की है। इन विद्यालयों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता और उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों को सम्मानित किया जाता है। डीएलएड (डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजुकेशन) प्रशिक्षुओं के माध्यम से कराए गए इस आकलन को पारदर्शी और जमीनी माना जा रहा है। शिक्षा विभाग का मानना है कि कड़े मानकों के बावजूद यह परिणाम गुणवत्ता सुधार की स्पष्ट तस्वीर पेश करता है। निपुण रैंकिंग वाले टॉप जिले निपुण रैंकिंग में प्रदेश के कई जिलों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। निपुण आकलन के आधार पर सबसे अधिक निपुण विद्यालयों वाले जिलों में हरदोई (1002 विद्यालय), अलीगढ़ (969 विद्यालय), शाहजहांपुर (916 विद्यालय), महाराजगंज (874 विद्यालय) और खीरी (830 विद्यालय) शीर्ष स्थान पर हैं। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि इन जिलों में बड़ी संख्या में विद्यालयों ने निपुण मानक हासिल किया है और शिक्षा की गुणवत्ता सुधार के प्रयासों का ठोस असर जमीनी स्तर पर दिखाई दे रहा है। पारदर्शी आकलन, डीएलएड प्रशिक्षुओं की भूमिका इस बार आकलन प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए डीएलएड प्रशिक्षुओं को जिम्मेदारी दी गई। उन्होंने विद्यालयों में जाकर कक्षा 1 और 2 के छात्रों की सीखने की क्षमता का वास्तविक परीक्षण किया। निपुण भारत मॉनिटरिंग सेंटर के माध्यम से यह रिपोर्ट सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों, खंड शिक्षा अधिकारियों और प्रधानाध्यापकों के पोर्टल पर उपलब्ध करा दी गई है। इससे न सिर्फ योगी सरकार की पारदर्शिता नीति को बल मिला है, बल्कि जवाबदेही भी तय हुई है। शिक्षकों का सम्मान और आर्थिक प्रोत्साहन निपुण घोषित विद्यालयों के लिए सरकार ने विशेष प्रोत्साहन योजना लागू की है। प्रत्येक विद्यालय को ₹50 हजार की धनराशि दी जाती है, जिसका उपयोग शैक्षणिक सामग्री और बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करना है। साथ ही उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले शिक्षकों को जिला और ब्लॉक स्तर पर सम्मानित किया जाता है। विद्यालय परिसरों में ‘निपुण विद्यालय’ का लोगो भी प्रदर्शित किया जाता है, जिससे उनकी अलग पहचान बनती है। गुणवत्ता सुधार का व्यापक अभियान निपुण परिणामों के पीछे व्यापक तैयारी की भूमिका है। बेसिक स्कूलों के शिक्षकों को फाउंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमेरसी (पढ़ने, लिखने और गणना) आधारित प्रशिक्षण दिया गया है। परिषदीय विद्यालयों में स्मार्ट क्लास व ICT लैब विकसित किए गए हैं। 2.61 लाख शिक्षकों को टैबलेट वितरण से डिजिटल शिक्षण को बढ़ावा मिला है। ऑपरेशन कायाकल्प के तहत 1.32 लाख विद्यालयों में बुनियादी सुविधाएं सुदृढ़ की गई हैं। स्कूल चलो अभियान के तहत 2024-25 में 13.22 लाख और 2025-26 में 15.84 लाख बच्चों का नामांकन कराया गया। 7.73 लाख आउट ऑफ स्कूल बच्चों की पहचान कर उन्हें मुख्यधारा से जोड़ा गया।  समग्र बदलाव का संकेत 2025-26 में करीब 1.07 लाख परिषदीय विद्यालयों का आकलन किया गया था। कड़े मानकों के बावजूद 32,480 विद्यालयों का निपुण घोषित होना इस बात का संकेत है कि प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता में वास्तविक सुधार हुआ है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि कम प्रदर्शन वाले विद्यालयों को चिन्हित कर उन्हें निपुण श्रेणी में लाने के लिए विशेष प्रयास किए जाएं। प्रदेश में बेसिक शिक्षा अब केवल नामांकन तक सीमित नहीं है, बल्कि सीखने के परिणामों पर फोकस है। निपुण भारत मिशन के तहत मिले ये परिणाम बताते हैं कि नीति, प्रशिक्षण और निगरानी का समन्वय असर दिखा रहा है। आने वाले समय में और अधिक विद्यालयों को निपुण श्रेणी में लाने की तैयारी है, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता को और ऊंचा उठाया जा सके।

लेंसकार्ट शोरूम पर बजरंग दल का विरोध प्रदर्शन, भोपाल और छिंदवाड़ा में कर्मचारियों को तिलक और कलावा बांधने की घटना

भोपाल /छिंदवाड़ा  भोपाल के न्यू मार्केट रोशनपुरा में ड्रेस कोड विवाद ने तूल पकड़ लिया है। लेंसकार्ट शोरूम के बाहर हिंदू उत्सव समिति के कार्यकर्ता प्रदर्शन कर रहे हैं। कार्यकर्ताओं ने यहां कर्मचारियों को तिलक लगाया और मंत्रोच्चार के साथ कलावा बांधा। कहा- सनातन का अपमान, नहीं सहेगा हिंदुस्तान। हिंदू उत्सव समिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने कहा कि संगठन लेंसकार्ट के बहिष्कार का आह्वान कर रहा है। यह हिंदुस्तान है, यहां तिलक, कलावा और बिंदी का सम्मान होना चाहिए। अगर कंपनी ने इन पर रोक लगाने की कोशिश की, तो इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कॉरपोरेट कंपनियों को कहा- सनातन धर्म के प्रतीकों का अपमान हुआ, तो आगे भी इसी तरह सख्त विरोध किया जाएगा। भले ही कंपनी के CEO पीयूष बंसल ने माफी मांगी हो, लेकिन संगठन इसे स्वीकार करने को तैयार नहीं है। अगर हमने कंपनी को ऊंचाइयों तक पहुंचाया है, तो जरूरत पड़ने पर उसे नीचे लाने का काम भी करेंगे। छिंदवाड़ा में लेंसकार्ट शोरूम पर बजरंग दल का प्रदर्शन छिंदवाड़ा में ड्रेस कोड पॉलिसी को लेकर चल रहे विवाद के बीच लेंसकार्ट के शोरूम पर बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान सोमवार को कार्यकर्ताओं ने शोरूम में मौजूद कर्मचारियों के माथे पर तिलक लगाया और उनके हाथों में कलावा बांधा।  बताया जा रहा है कि हाल ही में सोशल मीडिया पर कंपनी की कथित ड्रेस कोड पॉलिसी को लेकर विवाद खड़ा हुआ था। इसमें कर्मचारियों के धार्मिक प्रतीकों के उपयोग को लेकर सवाल उठाए गए थे। इसी मुद्दे को लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में विरोध के स्वर सामने आ रहे हैं। जिला संयोजक बोले: धार्मिक प्रतीकों पर रोक बर्दाश्त नहीं प्रदर्शन के दौरान बजरंग दल के जिला संयोजक नरेंद्र पटेल ने कहा कि वे किसी भी तरह की धार्मिक पाबंदी के खिलाफ हैं। उनका कहना है कि ऐसे मामलों में संगठन लगातार विरोध दर्ज कराता रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि भारत में व्यापार करने वालों को यहां की संस्कृति का सम्मान करना चाहिए। कंपनी ने दी सफाई: कोई प्रतिबंध नहीं विवाद के बीच लेंसकार्ट की ओर से पहले ही स्पष्ट किया जा चुका है कि उसकी मौजूदा गाइडलाइंस में बिंदी, तिलक या अन्य धार्मिक प्रतीकों पर कोई प्रतिबंध नहीं है। कंपनी ने वायरल हो रहे दस्तावेज को पुराना बताया है और कहा है कि वर्तमान नीति में ऐसा कोई नियम लागू नहीं है।  

स्वास्थ्य योजनाओं में गड़बड़ी पर सख्ती, आयुष्मान और चिरायु में होगा थर्ड पार्टी ऑडिट

चंडीगढ़. आयुष्मान भारत और चिरायु योजना के तहत किए जा रहे दावों (क्लेम) का थर्ड पार्टी आडिट कराया जाएगा। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डा. सुमिता मिश्रा ने हरियाणा मेडिकल सर्विसेज कारपोरेशन लिमिटेड को आडिट और क्लेम प्रक्रिया के लिए थर्ड पार्टी एडमिनिस्ट्रेटर को निर्देशित किया है। स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि योजना के कामकाज में थर्ड-पार्टी आडिट अनिवार्य किया जाएगा, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि आयुष्मान भारत प्रक्रिया में कोई धोखाधड़ी न हो। आयुष्मान भारत के तहत सरकारी कालेजों और मेडिकल संस्थानों से क्लेम को कैसे बढ़ाया जा सकता है, इसकी जांच के लिए रणनीति बनाई जाए। उन्होंने कहा कि किडनी मरीजों के लिए क्रोनिक हीमोडायलिसिस, जो एक जरूरी और बार-बार होने वाला इलाज है, उसके लिए आयुष्मान भारत स्कीम के तहत सक्रिय दावा किया जाना चाहिए, ताकि यह पक्का हो सके कि रेगुलर डायलिसिस की जरूरत वाले मरीजों को बिना किसी पैसे की परेशानी के पूरा कवरेज मिले। समीक्षा बैठक में बताया गया कि हरियाणा ने आयुष्मान भारत और चिरायु स्कीम के तहत लगभग 28 लाख क्लेम निपटाए हैं। लाभार्थियों को 3900 करोड़ रुपये से ज्यादा की आर्थिक सहायता दी गई है। राज्य में वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए क्लेम 1500 करोड़ रुपये से ज्यादा हो गए हैं, जो लोगों में स्कीम के बारे में बढ़ती जागरूकता और उपयोग को दिखाता है। राज्य में 1363 पैनल वाले अस्पतालों (प्राइवेट -777, पब्लिक -586) का नेटवर्क है, जिसमें सरकारी और प्राइवेट दोनों तरह के संस्थान शामिल हैं। डा. मिश्रा ने कहा कि हरियाणा ने चिरायु योजना और इसके एक्सटेंशन को लागू करके राष्ट्रीय आयुष्मान भारत पीएम-जेएवाई रूपरेखा से आगे बढ़कर काम किया है। इसमें तीन लाख रुपये तक की सालाना इनकम वाले परिवार शामिल हैं। इससे राष्ट्रीय पात्रता मानदंडों से परे स्वास्थ्य सेवा सुरक्षा नेट से भी ज्यादा बढ़ गया है और राज्य की आबादी का एक बड़ा हिस्सा सुनिश्चित स्वास्थ्य कवरेज के तहत आ गया है। पात्र लाभार्थियों के लगभग 1.38 करोड़ कार्ड बनाए गए हैं।