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राइस मिल के गोदाम में आग से बड़ा नुकसान, कांकेर में धान-बारदाना राख

कांकेर. कांकेर जिले के कुलगांव में मंगलवार को अजीबी एग्रो राइस मिल में भीषण आग लग गई. घटना से क्षेत्र में हड़कंप मच गया. फिलहाल आग लगने का कारण स्पष्ट नहीं हो पाया है. घटना में बड़ी मात्रा में बारदाना और धान को नुकसान पहुंचा है. पूरी घटना कोतवाली थाना इलाके की है. जानकारी के मुतबाकि, सूचना के बाद दमकल विभाग की टीम मौके पर पहुंची है. वहीं मालिक मोहम्मद आवेश भी राइस मिल पहुंचे हैं. आग पर काबू पाने के लिए जद्दोजहद जारी है. घटना से जुड़ा वीडियो भी सामने आया है, जिसमें धान के बोरों में लगी भ्यावह आग का मंजर नजर आ रहा है. शॉर्ट सर्किट से आग लगने की आशंका राइस मिल मालिक मोहम्मद आवेश ने बताया कि शॉर्ट सर्किट की वजह से आग लगी है. चांवल, धान और खाली बोरे सभी कुछ जल गया है. नुकसान का अभी आकलन नहीं किया जा सकता है. 

नारी शक्ति वंदन अधिनियम में बाधा डालकर विपक्ष ने उजागर किया अपना महिला-विरोधी चेहरा: मुख्यमंत्री

fमहिला अधिकार के लिए सड़क पर उतरे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ महिला आरक्षण पर विपक्ष के विश्वासघात के खिलाफ जन आक्रोश पदयात्रा में प्रदेश अध्यक्ष, दोनों उपमुख्यमंत्री, सहयोगी दलों के नेता समेत पूरी सरकार के साथ शामिल हुए सीएम योगी नारी शक्ति वंदन अधिनियम में बाधा डालकर विपक्ष ने उजागर किया अपना महिला-विरोधी चेहरा: मुख्यमंत्री  विपक्ष का आचरण नारी गरिमा के प्रतिकूल, आक्रोशित महिलाएं दे रहीं सड़कों पर जवाब: सीएम योगी नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर विपक्ष के दोहरे चरित्र के विरुद्ध महिलाओं के जनाक्रोश को सीएम योगी ने दी आवाज तेज धूप भी नहीं रोक सकी आधी आबादी का आक्रोश, जनाक्रोश पदयात्रा में शामिल हुईं हजारों महिलाएं सपा-कांग्रेस की महिला-विरोधी राजनीति के खिलाफ राजधानी में सीएम योगी के नेतृत्व में उमड़ा जन-सैलाब आक्रोशित महिलाएं बोलीं, ‘सपा की पुरानी बीमारी-आधी आबादी से गद्दारी’ लखनऊ  नारी शक्ति वंदन संशोधन विधेयक को लोकसभा में विपक्ष द्वारा पारित नहीं होने देने के विरोध में मंगलवार को राजधानी लखनऊ ऐतिहासिक जनाक्रोश का साक्षी बना, जब महिला अधिकार के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं सड़क पर उतरे। उनके नेतृत्व में हजारों महिलाओं का हुजूम मुख्यमंत्री आवास से सिविल हॉस्पिटल होते हुए विधान भवन तक उमड़ पड़ा। इस जनाक्रोश पदयात्रा में सीएम योगी के साथ पूरा मंत्रिमंडल सड़क पर उतरा दिखाई दिया। यह कोई साधारण पदयात्रा या रैली नहीं थी, यह नारी सम्मान और उसके संवैधानिक अधिकारों पर हुए हमले का सीधा और बेहद तीखा जवाब था। विधान भवन के सामने महिलाओं को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम महिलाओं को विधानसभाओं एवं लोकसभा में 33 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है, किंतु कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, डीएमके सहित इंडी गठबंधन के दलों द्वारा इसे बाधित करने का प्रयास उनके अलोकतांत्रिक और महिला-विरोधी चेहरे  को उजागर करता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा इन दलों को अपनी नकारात्मक छवि सुधारने का अवसर दिया गया था, किंतु इन्होंने उसका दुरुपयोग करते हुए महिलाओं के अधिकारों के साथ अन्याय किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इसी अन्याय के विरोध में देशभर में आधी आबादी सड़कों पर उतरकर लोकतांत्रिक ढंग से अपना आक्रोश प्रकट कर रही है। लखनऊ में प्रचंड गर्मी के बावजूद हजारों की संख्या में मातृशक्ति की सहभागिता प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों के प्रति व्यापक जनसमर्थन और आशीर्वाद का प्रतीक है। उन्होंने उपस्थित महिलाओं को आश्वस्त करते हुए कहा कि प्रदेश का एक-एक नागरिक आधी आबादी की इस न्यायोचित मांग के साथ मजबूती से खड़ा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में बीते वर्षों में देश ने व्यापक परिवर्तन देखा है, जिसमें ‘महिला, गरीब, युवा और किसान’ इन चार जातियों को केंद्र में रखकर नीतियों का निर्माण किया गया है। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप देश ने विकास और आत्मनिर्भरता के नए मानक स्थापित किए हैं। ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, उज्ज्वला योजना, स्वच्छ भारत मिशन, प्रधानमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत योजना सहित अनेक योजनाओं ने महिलाओं के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाया है। स्वच्छ भारत मिशन केवल स्वच्छता का अभियान नहीं, बल्कि नारी गरिमा की रक्षा का सशक्त माध्यम है, वहीं उज्ज्वला योजना केवल ईंधन उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं, बल्कि महिलाओं के स्वास्थ्य, सम्मान और स्वावलंबन को सुदृढ़ करने का माध्यम है। केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाएं केवल लाभ वितरण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि परिवारों को स्वावलंबन की दिशा में अग्रसर करने का सशक्त आधार बन रही हैं। प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना, घरौनी वितरण जैसे प्रयासों ने समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को भी आर्थिक सशक्तीकरण से जोड़ने का कार्य किया है। डबल इंजन की सरकार लगातार कार्य कर रही है, लेकिन कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और इंडी गठबंधन के दल हर योजना का विरोध करते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम विधानसभाओं और लोकसभा में महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण सुनिश्चित करने वाला है और यह व्यवस्था वर्ष 2029 तक लागू हो जाए, इसको लेकर प्रधानमंत्री जी और गृह मंत्री जी ने सभी को आश्वस्त भी किया, इसके बावजूद इन विपक्षी दलों का जो आचरण रहा है, वह नारी गरिमा के प्रतिकूल रहा है। इसी कारण आज देशभर की महिलाएं इन दलों के विरोध में एकजुट होकर आंदोलन कर रही हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में ‘डबल इंजन’ सरकार महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना, मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना, मुख्यमंत्री आवास योजना तथा युवा संबंधी अन्य योजनाएं इस दिशा में प्रभावी माध्यम बन रही हैं। मुख्यमंत्री ने आक्रोश पदयात्रा में बड़ी संख्या में सहभागिता के लिए सभी महिलाओं का हृदय से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए निरंतर कार्य करती रहेगी और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। तेज धूप भी नहीं रोक सकी संकल्प, हाथों में तख्तियां-होंठों पर प्रतिकार पूर्वाह्न लगभग 10 बजे मुख्यमंत्री आवास से प्रारंभ हुई इस पदयात्रा के समय भी चुभने वाली तेज धूप थी,  लेकिन महिलाओं का आक्रोश उससे कहीं अधिक धधक रहा था। हाथों में विपक्ष की कुत्सित राजनीति की निंदा करते हुए स्लोगन लिखी हुईं तख्तियां और ‘बहन- बेटियों का अपमान-नहीं सहेगा हिन्दुस्तान, महिला अधिकारों पर वार-सपा-कांग्रेस जिम्मेदार, कांग्रेस का हाथ-नारी शक्ति के खिलाफ, नारी के सम्मान में-एनडीए मैदान में’ जैसे गूंजते नारों के साथ यह रैली विपक्ष की कायरता और राजनीतिक स्वार्थ को बेनकाब करती हुई आगे बढ़ी। हर कदम पर महिलाओं का हुजूम साफ संदेश दे रहा था- आधी आबादी के सम्मान और अधिकारों पर कोई समझौता नहीं, कोई चुप्पी नहीं, कोई माफी नहीं। जनाक्रोश पदयात्रा में हजारों महिलाओं की सहभागिता ने साबित किया कि आधी आबादी इस मुद्दे पर खामोश नहीं रहेगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस पदयात्रा में केन्द्रीय मंत्री एवं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य व ब्रजेश पाठक और सहयोगी दलों के नेता सहित मंत्रिमंडल के सदस्यों तथा भाजपा की विभिन्न इकाइयों के पदाधिकारियों के साथ अग्रिम पंक्ति में चल रहे थे। राजधानी लखनऊ के लिए यह एक अभूतपूर्व दृश्य था। रैली के दौरान पूरे मार्ग पर अनुशासन और उत्साह का अद्वितीय संगम देखने को मिला। युवा, वृद्ध, छात्राएं और कामकाजी महिलाएं, हर वर्ग की सक्रिय भागीदारी ने इस आयोजन को व्यापक सामाजिक … Read more

चीता संरक्षण के लिए मंदसौर में ऐतिहासिक कदम, प्रभास और पावक ने हासिल किया बड़ा मील का पत्थर

मंदसौर भारत के महत्त्वाकांक्षी 'प्रोजेक्ट चीता' की सफलता की कहानी में एक और ऐतिहासिक पन्ना जुड़ गया है। दक्षिण अफ्रीका की धरती से आए दो चीता भाई प्रभास और पावक ने मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले में स्थित गांधीसागर वन्यजीव अभयारण्य में अपना एक साल यानी 365 दिन सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। तारीखों की नजर से देखें 3 साल का गौरवशाली सफर ​इन दोनों भाइयों का भारत में अब तक का सफर किसी रोमांचक फिल्म से कम नहीं रहा है: -​18 फरवरी 2023: दक्षिण अफ्रीका से उड़ान भरकर भारत की मिट्टी पर कदम रखा। -​2 साल (कूनो नेशनल पार्क): भारत की जलवायु, शिकार और वातावरण को समझने के लिए कूनो में लंबा समय बिताया। -​1 साल (गांधीसागर): आज गांधीसागर में इनका एक साल पूरा होना इस बात पर मुहर लगाता है कि यह अभयारण्य चीतों के लिए एक आदर्श और सुरक्षित घर है। भाईचारे और शिकार का अनूठा तालमेल ​​इनकी साझेदारी ही गांधीसागर में इनकी सफलता का सबसे बड़ा राज है। फील्ड टीम की निगरानी में इनके गठबंधन की कुछ ऐसी बारीकियाँ सामने आई हैं जो हैरान कर देने वाली हैं। -​शिकार की रणनीति: जब ये शिकार पर निकलते हैं तो दोनों के बीच एक मूक संवाद होता है। एक भाई शिकार का पीछा कर उसे थकाता है तो दूसरा सटीक घात लगाकर उसे दबोच लेता है। -​सुरक्षा का पहरा: भोजन करते समय ये कभी लापरवाह नहीं होते। जब एक शिकार खाता है, तो दूसरा मुस्तैद होकर चारों तरफ पहरा देता है। आराम करते समय भी दोनों अपनी पीठ जोड़कर विपरीत दिशाओं में मुँह करके बैठते हैं, ताकि 360-डिग्री सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। -संकट में साथ: टीम ने देखा है कि अगर एक भाई सुस्त महसूस करता है, तो दूसरा उसे छोड़कर ओझल नहीं होता। वह उसके इर्द-गिर्द ही रहता है, मानो उसे हिम्मत दे रहा हो। एलोग्रूमिंग (सामाजिक साफ़-सफ़ाई) उद्देश्य: यह सामाजिक संबंधों को मज़बूत करता है, विशेष रूप से नर चीतों के समूहों (भाई या करीबी नर साथी) और कभी-कभी माँ और शावकों के बीच। संदर्भ: यह अक्सर भोजन के बाद देखा जाता है, जिससे चेहरे जैसे कठिन स्थानों से खून और गंदगी को हटाने में मदद मिलती है। व्यवहार: इसमें दूसरे चीते को चाटना, कुतरना और रगड़ना शामिल है, जो एक आरामदायक और जुड़ाव भरा अनुभव हो सकता है। जुड़ी हुई आवाज़े: इन ग्रूमिंग सत्रों के दौरान अक्सर उनके 'पुर्राने' (Purring) की आवाज़ सुनी जा सकती है। ऑटोग्रूमिंग (स्वयं की साफ़-सफ़ाई) उद्देश्य: चीते अपने शरीर को साफ़ करने के लिए अपनी जीभ का उपयोग करते हैं, जो गंदगी और परजीवियों को हटाने और उनके फर (रौएं) के रखरखाव के लिए महत्वपूर्ण है। प्रक्रिया: उनकी जीभ पर विशेष 'केराटिनाइज्ड पैपिला' (छोटी, खुरदरी, कंघी जैसी संरचनाएं) होती हैं, जो एक स्क्रबर की तरह काम करती हैं और गंदगी व ढीले बालों को हटाने में मदद करती हैं। बेहद जरूरी: यह ग्रूमिंग व्यवहार चीतों के स्वास्थ्य, स्वच्छता और उनके समूहों में आपसी एकता बनाए रखने के लिए बहुत आवश्यक हैं।

हाईकोर्ट का कड़ा रुख: दिव्यांग बच्चों को स्कूल से निकालने पर चीफ जस्टिस ने DEO से रिपोर्ट मांगी

जबलपुर जबलपुर के जबलपुर में दिव्यांग बच्चों को स्कूल से बाहर किए जाने के मामले में हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने साफ कहा कि बच्चों के साथ किसी भी तरह का भेदभाव न सिर्फ गलत है, बल्कि किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं किया जाएगा। मामला शहर के विजडम वैली स्कूल और जीडी गोयनका स्कूल से जुड़ा है। इन पर आरोप है कि स्पेशल (दिव्यांग) बच्चों को स्कूल से बाहर किया जा रहा था। शिकायत सामने आने के बाद इस मुद्दे पर जनहित याचिका दायर की गई। सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा की डिवीजन बेंच ने तत्काल प्रभाव से दिव्यांग बच्चों को निकाले जाने पर रोक लगा दी। साथ ही जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) को आदेश दिया कि जबलपुर के सभी स्कूलों में पढ़ रहे विशेष बच्चों को लेकर विस्तृत रिपोर्ट पेश की जाए। मामले की अगली सुनवाई 29 अप्रैल तय की गई है। कानून होने के बावजूद जमीनी हकीकत कमजोर याचिकाकर्ता सौरभ सुबैया की ओर से दायर याचिका में बताया गया कि जबलपुर में करीब 50 सरकारी और 200 निजी स्कूल संचालित हो रहे हैं, जहां बड़ी संख्या में दिव्यांग छात्र पढ़ते हैं। इनमें कई बच्चे ऐसे हैं जो न बोल सकते हैं और न ही सुन सकते हैं। ‘स्पेशल एजुकेटर’ नहीं, कानूनों का पालन अधूरा याचिका में यह भी बताया गया कि स्कूलों में आज भी विशेष शिक्षक नियुक्त नहीं हैं। जबकि दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 और शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के तहत यह अनिवार्य है। इन कानूनों का पालन न होना पूरी तरह अवैधानिक है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता शिवेंद्र पाण्डेय ने कोर्ट को बताया कि निजी स्कूलों द्वारा स्पेशल बच्चों को बाहर करना सीधे उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। इस पर कोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए तुरंत हस्तक्षेप किया। समावेशी शिक्षा पर बड़ा संदेश याचिकाकर्ता के वकील ने बताया कि हाईकोर्ट का यह अंतरिम आदेश कई मायनों में अहम माना जा रहा है। इससे न सिर्फ समावेशी शिक्षा को मजबूती मिलेगी, बल्कि निजी स्कूलों की मनमानी पर भी लगाम लगेगी। साथ ही दिव्यांग बच्चों के अधिकारों की न्यायिक सुरक्षा को लेकर एक मजबूत संदेश गया है।  

बोरवेल से बचा ‘प्रिंस’ अब जवान: पोलो मैच देखने पहुंचा, सांसद नवीन जिंदल ने साझा किया वीडियो

कुरुक्षेत्र. सांसद नवीन जिंदल के सांवला फार्म हाउस पर रविवार को कुरुक्षेत्र-कैथल की टीमों के बीच पोलो मैच खेला गया। इस मैच से पहले सांसद ने एक वीडियाे बनाई और उसे अपने फेसबुक अकाउंट पर साझा किया। इस वीडियो में सांसद प्रिंस से परिचय करा रहे हैं। प्रिंस जो हल्देहेड़ी गांव का रहने वाला है और वर्ष 2006 में चार साल की उम्र में 50 फुट गहरे बोलवेल में गिर गया था। सांसद वीडियो में बता रहे हैं कि 20 साल पहले प्रिंस नाम का छोटा बच्चा बोरवेल में गिर गया था, जिसे तीन दिन के सेना के अथक प्रयासों से सुरक्षित बाहर निकाला गया था। वे आगे बता रहे हैं कि प्रिंस अब आईटीआई करके अप्रेंटिस कर रहा है। वे उसकी मसल्स भी दिखाते हैं और युवाओं को संदेश देते हैं कि नशे से दूर रहें तो प्रिंस जैसी मसल्स हासिल कर सकते हैं। फिर प्रिंस से बात करते हैं कि जब वह बोरवेल के अंदर था तो पूरा देश उसके लिए चिंतित था और दुआ कर रहा था तुम ठीक-ठाक बाहर निकल आओ। साथ ही कहते हैं कि हमने बिस्कुट भी भिजवाए थे और कुछ खाने-पीने का सामान भिजवाया था। फिर प्रिंस बीच में बोलता है कि चाकलेट भी भिजवाई थी। वीडियो में सांसद के पूछने पर प्रिंस ने बताया कि वह अंबाला से आईटीआई करके अब अप्रेंटिस कर रहा है। वह पोलो मैच पहली बार देखेगा। 3 मिनट 7 सेकंड की वीडियो में सांसद कहते हैं – उस समय छोटा था और कमजोर था और हमने गोदी में भी लिया था। युवाओं को नशे से दूर रहने का दिया संदेश दरअसल सांसद नवीन जिंदल इस वीडियो के जरिए वह युवाओं को नशे से दूर रहने का संदेश देना चाहते थे और पोलो मैच खेलने का भी उनका यही उद्देश्य था कि युवा खेलों को अपनाएं ताकि वे नशे से दूर रहें और खेलों में अपना भविष्य बना सकें। वीडियो के अंत में सांसद पोलो मैच के बारे में बताते हुए कहते हैं कि कुरुक्षेत्र की धरती पर आज पोलो की छोटी सी महाभारत होगी। 21 जुलाई 2006 में कुरुक्षेत्र जिले के शाहाबाद कस्बे के गांव हल्देहेड़ी में रहने वाला चार वर्ष का प्रिंस खेलते-खेलते 50 फीट गहरे बोरवेल में गिर गया था। उसी दिन उसका 5वां जन्मदिन भी था। तीन दिन तक दिन-रात चले अभियान में सेना ने बोरवेल के साथ सुरंग बनाकर 23 जुलाई को प्रिंस को सुरक्षित निकाल लिया था। ""हरियाणा के कुरुक्षेत्र के हल्दाहेड़ी गांव में प्रिंस नाम का 5 वर्षीय बच्चा 21 जुलाई 2006 को खेलते समय 50-60 फीट गहरे बोरवेल में गिर गया था। 50 घंटे से अधिक चले भारतीय सेना के व्यापक रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद उसे 23 जुलाई 2006 को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया था, जिसे देश में काफी…"" – Anku Chahar (@anku_chahar) April 19, 2026 

ईंधन सप्लाई पर बड़ा प्लान: CM साय और IOCL CGM के बीच अहम बैठक

रायपुर. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में इंडियन आयल कार्पोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) छत्तीसगढ़ एवं मध्य प्रदेश के मुख्य महाप्रबंधक (सीजीएम) अजय कुमार श्रीवास्तव ने सौजन्य मुलाकात की. मुलाकात के दौरान राज्य में पेट्रोलियम क्षेत्र के विस्तार, ईंधन आपूर्ति की सुदृढ़ व्यवस्था और जनसुविधाओं को और अधिक सुलभ बनाने जैसे विषयों पर चर्चा हुई. इस अवसर पर आईओसीएल के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे. मुख्यमंत्री से गत दिवसमुख्यमंत्री निवास में ऑस्ट्रेलिया के महावाणिज्य दूत बर्नार्ड लिंच ने सौजन्य मुलाकात की थी। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने राज्य में चल रही विकास योजनाओं, विशेष रूप से आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य, पेयजल एवं पोषण सुधार के प्रयासों की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ सरकार इन क्षेत्रों में तेजी से काम कर रही है और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से इन योजनाओं को और प्रभावी बनाया जा सकता है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने बर्नार्ड लिंच को बेल मेटल निर्मित धातु की प्रतिमा भेंट की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के सचिव पी. दयानंद, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, मुख्यमत्री के विशेष सचिव रजत बंसल, सीनियर इकोनॉमिक रिसर्च अफसर अनघा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

महिलाओं को आरक्षण नहीं दिया गया, तो सपा-कांग्रेस को 2027 में कोई वोट नहीं मिलेगा: केशव प्रसाद मौर्य

एंटी-वुमेन एलाइंस साबित हुआ इंडी एलाइंस सड़क पर निकलकर सपा व कांग्रेस का बैंड बजा रही हैं उत्तर प्रदेश की आक्रोशित बहनें: बृजेश पाठक महिलाओं को आरक्षण नहीं दिया गया, तो सपा-कांग्रेस को 2027 में कोई वोट नहीं मिलेगा: केशव प्रसाद मौर्य नारी अधिकारों का हनन करने के बाद खुशियां मनाना दर्शाता है कांग्रेस व सपा की मानसिकता: अरुण सिंह विपक्ष मोदी-विरोध में इतना अंधा हो गया कि हर अच्छी पहल का विरोध कर रहा है: पंकज चौधरी लखनऊ  नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर विपक्ष के षड्यंत्र के विरोध में मंगलवार को लखनऊ में ‘जन आक्रोश पदयात्रा’ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ ही उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक व केशव प्रसाद मौर्य, पंचायती राज्यमंत्री ओमप्रकाश राजभर, राज्यसभा सांसद अरुण सिंह और केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी समेत हजारों महिलाओं ने सड़कों पर उतरकर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। सभी ने एक सुर में कहा कि 17 अप्रैल को संसद में यह बिल पास होने वाला था, लेकिन कांग्रेस और सपा ने न सिर्फ इसका विरोध किया, बल्कि मतदान में इसे गिराने के बाद तालियां बजाकर खुशी मनाई। उन्होंने इसे महिलाओं के अधिकारों का हनन बताया और कहा कि 2027 के चुनाव में इन दलों को महिला आक्रोश का खामियाजा भुगतना पड़ेगा। केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी ने तो यहां तक कहा कि इंडी एलाइंस अब एंटी-वुमेन एलाइंस साबित हो चुका है। बिल के विरोध का खामियाजा चुनाव में भुगतना पड़ेगा उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने कहा कि आज प्रदेश की महिला शक्ति सड़कों पर है। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस की दुरभि संधि और संकीर्ण मानसिकता के कारण नारी शक्ति वंदन अधिनियम को संसद में रोकने का काम किया गया है। आज उत्तर प्रदेश की आक्रोशित बहनें सड़क पर निकलकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस का बैंड बजाने का काम कर रही हैं। इन पार्टियों को आने वाले चुनावों में इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। हम सब अच्छी तरह जानते हैं कि समाजवादी पार्टी की सरकार जब-जब प्रदेश में होती है, गुंडे-बदमाश खुलेआम बहन-बेटियों को परेशान करने का काम करते हैं। इसीलिए नारे लगते हैं, 'देख सपाई-बिटिया घबराई'। वक्त है कि सब एकजुट होकर सपा व कांग्रेस को महिला शक्ति का अहसास कराएं। मां दुर्गा, मां काली, मां सरस्वती बनकर विपक्षियों को सबक सिखाएं। महिलाओं को आरक्षण दिलाकर रहेंगे: केशव प्रसाद मौर्य उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि समाजवादी पार्टी का सूपड़ा साफ होना है। 2027 में बिना महिलाओं के कोई चुनाव जीत सकता है क्या? अगर महिलाओं को आरक्षण नहीं दिया गया, तो सपा-कांग्रेस को आने वाले चुनाव में कोई वोट नहीं मिलेगा। इसके लिए तैयार हो जाइए। प्रधानमंत्री मोदी जी ने कहा है कि हम हिम्मत नहीं हारेंगे। हम महिलाओं को आरक्षण दिलाकर रहेंगे। इसी संकल्प के साथ हमें यहां से जन आक्रोश मार्च निकालना है। सपा व कांग्रेस को कभी माफ नहीं करेंगे राज्यसभा सांसद अरुण सिंह ने कहा कि 17 अप्रैल के दिन देशभर की महिलाओं के मन में एक आकांक्षा थी कि आज जब नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर निर्णय होगा, तो वह हमारे पक्ष में होगा। वे उत्सव मनाएंगी, खुशियां मनाएंगी और यह दिन देश के इतिहास के पन्नों में स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा। लेकिन कांग्रेस व सपा ने संसद में नारी शक्ति वंदन अधिनियम के संशोधन का विरोध किया और उसके विरुद्ध मतदान किया। उन्होंने सिर्फ विरोध ही नहीं किया, बल्कि नारी अधिकारों का हनन करने के बाद तालियां भी बजाईं और खुशियां भी जाहिर कीं। यह कांग्रेस और समाजवादी पार्टी की मानसिकता को दर्शाता है। उसी के कारण पूरे देश में जन आक्रोश है। इसीलिए इतनी बड़ी संख्या में आप लोग यहां एकत्र हुए हैं, यह बताने के लिए कि सपा व कांग्रेस को हम कभी माफ नहीं करेंगे। 80 प्रतिशत बहुसंख्यक महिलाओं के हितों को ठेस पहुंचाई पंकज चौधरी ने कहा कि नारी का उत्थान व सम्मान, भाजपा की यही पहचान है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में नारी सशक्तीकरण के लिए हमारी सरकार लगातार काम कर रही है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम का मुख्य उद्देश्य देश की माताओं और बहनों को नेतृत्व का अधिकार देना था। ताकि लोकसभा और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत सीटों पर महिलाएं चुनाव लड़ सकें और नीति-निर्माण में उनकी भागीदारी सुनिश्चित हो सके। इसके बावजूद सपा और कांग्रेस सहित विपक्ष ने इसमें बाधा डाली। कुछ लोगों ने कहा कि इससे उत्तर और दक्षिण भारत में भेद पैदा हो जाएगा। कुछ लोगों ने यह भी कहा कि मुस्लिम महिलाओं का आरक्षण भी होना चाहिए। हमारे नेताओं ने सदन में इन सभी आपत्तियों का विस्तार से जवाब दिया। विपक्षी दल जहां एक तरफ महिलाओं का सम्मान और सशक्तीकरण की बात करते हैं, वहीं दूसरी तरफ नकाब और वोट बैंक के चक्कर में उन्होंने 20 प्रतिशत अल्पसंख्यक महिलाओं के नाम पर 80 प्रतिशत बहुसंख्यक महिलाओं के हितों को ठेस पहुंचाने का काम किया है।

124 साल में कई बार हुआ भोजशाला का सर्वे, हर बार मिलीं मूर्तियां-श्लोक, MP HC में अब होगी सुनवाई

धार   धार भोजशाला परिसर को लेकर हाईकोर्ट की युगलपीठ में पहले धार के हस्तक्षेपकर्ताओं की बहस पूरी हुई। इसके बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने सर्वे पर बात रखी। बताया, हाईकोर्ट ने 2024 में सर्वे आदेश दिए। इससे पहले 1902 के बाद से ही कई बार सर्वे हो चुका है। अन्य शोधकर्ताओं ने भी सर्वे किया। हर सर्वे में मूर्तियां और श्लोक मिले। यह कई रिपोर्ट में है। मुस्लिम पक्ष ने पेश किए मस्जिद के सबूत उधर, धार के जिब्रान अंसारी, फिरोज, अयाज की हस्तक्षेप याचिका पर वकील सैयद अशहार अली वारसी ने बात रखी। कहा, मंदिर (Bhojshala) के लिए जरूरी है शिखर, गोपुरम, मंडप, गर्भगृह, जो इस निर्माण में नहीं हैं। मस्जिद (Bhojshala) के लिए जरूरी किबला, जिसकी दीवार मक्का की ओर हो, वो यहां है। 1908 में ही पुरातत्व इमारत घोषित सुनील जैन ने बताया, इसे 1908 में पुरातत्व महत्व (Bhojshala) की इमारतों में, तो 1958 में संरक्षित इमारतों में शामिल किया गया। इसी दौरान कोर्ट ने इसे भोजशाला और कमाल मौला मस्जिद का नाम किस दस्तावेज में आया, उस पर जारी नोटिफिकेशन पर सवाल खड़ा किया था। भोजशाला में 100 साल से अधिक पुराने सर्वे और संस्कृत अवशेष मिले – एएसआई की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) वरिष्ठ अधिवक्ता सुनील जैन ने बताया कि भोजशाला का अध्ययन आज का नहीं है, बल्कि पिछले 100 से अधिक वर्षों से इसका लगातार सर्वे और शोध होता आ रहा है। उन्होंने कहा कि वर्ष 1902-03 में भी यहां विस्तृत सर्वे किया गया था, जिसमें कई ऐतिहासिक अवशेषों का रिकॉर्ड तैयार किया गया था। एएसआई ने यह भी बताया कि समय-समय पर हुए विभिन्न सर्वे में भोजशाला से मूर्तियां और पत्थरों पर संस्कृत में लिखे श्लोक मिले हैं। इन अवशेषों से यह संकेत मिलता है कि यह स्थान प्राचीन भारतीय शिक्षा और संस्कृति से जुड़ा रहा है। 2024 सर्वे रिपोर्ट और ऐतिहासिक दर्जे पर एएसआई का पक्ष – कोर्ट को यह भी जानकारी दी गई कि वर्ष 2024 में हाई कोर्ट के आदेश के बाद एएसआई ने आधुनिक तकनीकों की मदद से एक नया और विस्तृत सर्वे किया। इसकी रिपोर्ट पहले ही अदालत में जमा की जा चुकी है। इस रिपोर्ट में भी पहले जैसे ही तथ्य सामने आए हैं, जैसे संस्कृत श्लोक और प्राचीन मूर्तियां। एएसआई ने बताया कि भोजशाला को वर्ष 1908 में ही पुरातत्व महत्व की सूची में शामिल किया गया था और बाद में 1958 में इसे संरक्षित भवन घोषित किया गया। इससे यह साफ होता है कि सरकार भी इसके ऐतिहासिक महत्व को मानती है। सुनवाई के दौरान अदालत ने यह सवाल भी उठाया कि “भोजशाला” और “कमाल मौला मस्जिद” नाम सबसे पहले किस दस्तावेज में दर्ज हुए और क्या इस पर कोई आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी हुआ था। इस पर दोनों पक्षों की ओर से अलग-अलग दलीलें दी गईं। अब इस मामले में मंगलवार को एएसआई अपने 98 दिन चले हालिया सर्वे की पूरी रिपोर्ट पर विस्तार से तर्क रखेगा। इसके बाद मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसायटी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद अपना पक्ष अदालत में प्रस्तुत करेंगे। कई बार हो चुका है भोजशाला का सर्वे बता दें कि ऐतिहासिक धार भोजशाला (Bhojshala) का मुख्य और नवीनतम वैज्ञानिक सर्वे 22 मार्च 2024 से शुरू किया गया था। जो 98 दिन तक चला। इस सर्वे की रिपोर्ट 15 जुलाई 202 को AsI ने एमपी हाईकोर्ट (इंदौर) में पेश की थी। जबकि इससे पहले 1902 में भी भोजशाला का सर्वे किया गया था। इस सर्वे के अलावा 7 अप्रैल 2003 को भी एक व्यवस्था के तहत जांच की गई थी। बताते चलें कि ASI ने जीपीआर और जीपीएस के साथ ही कार्बन डेंटिंग तकनीक का इस्तेमाल करते हुए इसका सर्वे किया है। सर्वे का उद्देश्य पता लगाना है कि यह मंदिर है या मस्जिद सर्वे का उद्देश्य यह पता लगाना था कि धार भोजशाला (Bhojshala) स्थल एक सरस्वती मंदिर है या फिर कमाल मौला की मस्जिद। हिंदु इसे मंदिर का नाम देते हैं और मुस्लिम मस्जिद का। इसके अलावा जैन समाज भी अपनी याचिका दर्ज कर भोजशाला का तीसरा दावेदार बन चुका है। मामला हाईकोर्ट में है, जिसकी दोबारा सुनवाई शुरू हुई है। इस कड़ी में आज फिर सुनवाई होनी है।

यूपीनेडा ने लॉन्च किया ‘पीएम सूर्य घर’ पोर्टल, योजना की रफ्तार बढ़ाने के लिए रियल-टाइम मॉनिटरिंग

यूपीनेडा ने लॉन्च किया ‘पीएम सूर्य घर’ पोर्टल, रियल-टाइम मॉनिटरिंग से तेज होगी योजना की रफ्तार योगी सरकार की पारदर्शी शासन व्यवस्था को नई मजबूती, आवेदन से भुगतान तक हर चरण ऑनलाइन ट्रैक 4.80 लाख से अधिक रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित कर यूपी देश के अग्रणी राज्यों में शामिल लखनऊ उत्तर प्रदेश में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए योगी सरकार लगातार तकनीक का सहारा ले रही है। इसी कड़ी में यूपीनेडा के निदेशक इंद्रजीत सिंह ने सोमवार को ‘प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना’ की निगरानी के लिए www.pmsgy.upneda.co.in पोर्टल का शुभारंभ किया। यह पोर्टल योजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता, गति और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। आवेदन से भुगतान तक हर चरण पर रियल-टाइम निगरानी नया पोर्टल योजना के सभी प्रमुख चरणों, आवेदन, स्वीकृति, सोलर संयंत्र की स्थापना और भुगतान की रियल-टाइम मॉनिटरिंग की सुविधा प्रदान करता है। इससे न केवल अधिकारियों को कार्य प्रगति की सटीक जानकारी मिलेगी, बल्कि लाभार्थियों को भी अपने आवेदन की स्थिति जानने में आसानी होगी। योगी सरकार के ‘डिजिटल गवर्नेंस’ मॉडल के तहत यह पहल सरकारी योजनाओं को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने में सहायक होगी। केंद्र सरकार ने भी सराहा यूपी मॉडल गौरतलब है कि मिनिस्ट्री ऑफ न्यू एंड रिन्यूएबल एनर्जी (भारत सरकार) ने भी यूपीनेडा द्वारा विकसित इस मॉडल की सराहना की है। मंत्रालय ने केंद्रीय स्तर पर इसी प्रकार का पोर्टल विकसित करने के लिए यूपीनेडा से तकनीकी सहयोग का अनुरोध किया है। इसके लिए निदेशक इंद्रजीत सिंह द्वारा एक विशेष समिति का गठन किया गया है, जो केंद्र सरकार को तकनीकी सहायता प्रदान करेगी। यह पहल उत्तर प्रदेश को नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित करती है। सौर ऊर्जा में यूपी की बड़ी उपलब्धि योगी सरकार के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने ‘प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना’ के अंतर्गत उल्लेखनीय प्रगति की है। राज्य में अब तक 4.80 लाख से अधिक घरेलू रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं। यह उपलब्धि न केवल प्रदेश को देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करती है, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा के लक्ष्य की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है।सरकार का उद्देश्य ‘हर घर सोलर’ की परिकल्पना को साकार करना है, जिससे आम नागरिकों को सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा उपलब्ध हो सके। इससे बिजली बिल में कमी, पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा आत्मनिर्भरता जैसे कई लाभ सुनिश्चित हो रहे हैं।

Heatwave Alert: पंजाब और हरियाणा में 5 दिन लू का प्रकोप, बठिंडा बना हॉटस्पॉट

चंडीगढ़. अगले चार-पांच दिन लू की लपटें झुलसाएंगी। उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में तेज गर्म हवाएं चलेंगी। मौसम विभाग (आइएमडी) ने बताया कि हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, पंजाब, पूर्वी राजस्थान, विदर्भ, छत्तीसगढ़, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पश्चिमी राजस्थान, मध्य प्रदेश, गंगा-तटीय बंगाल, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और ओडिशा के कुछ इलाकों में 25 अप्रैल तक अलग-अलग तारीखों में लू की स्थिति रहेगी। कई क्षेत्रों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तक जा सकता है। सोमवार को पंजाब में अधिकतम तापमान सामान्य से 3.6 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा। बठिंडा राज्य में सबसे गर्म रहा। यहां का अधिकतम तापमान 41 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसके अलावा पटियाला का अधिकतम तापमान 39.8, लुधियाना का 39.4, चंडीगढ़ का 38.1, फरीदकोट का 38, अमृतसर का 37.1 तथा फिरोजपुर का 36.5 सेल्सियस रहा। प्रयागराज में अधिकतम तापमान 44.6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। वहीं वाराणसी में अधिकतम तापमान 44 डिग्री रहा। कानपुर, गोरखपुर, झांसी, आगरा समेत उत्तर प्रदेश के 25 से अधिक जिलों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस को पार कर गया। राजस्थान, हरियाणा के कई शहरों में भी अधिकतम तापमान 40 डिग्री से ज्यादा रहा। पहाड़ भी तप रहे हैं। उत्तराखंड के पंतनगर में अधिकतम तापमान 39 डिग्री तो देहरादून में 37 डिग्री दर्ज किया गया। कई राज्यों ने मौसम के तेवर से निपटने के लिए एहतियाती कदम उठाए हैं। विशेषज्ञों ने लू के दौरान दोपहर में घर से बाहर न निकलने, पर्याप्त पानी पीने और हल्के रंग के सूती कपड़े पहनने की सलाह दी है। साथ ही कहा है कि इस मौसम में बच्चे, बुजुर्ग और गर्भवती महिलाएं अतिरिक्त सावधानी बरतें। मौसम विभाग ने कहा कि गंगा-तटीय बंगाल यानी बंगाल के दक्षिण क्षेत्र के कुछ हिस्सों में 26 अप्रैल तक गर्म और आर्द्र मौसम रहने के आसार हैं। हरियाणा, चंडीगढ़, पश्चिम उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, विदर्भ में 21 अप्रैल को रात गर्म रहने के आसार हैं।