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हमने सीवर सफाई के काम को चुनौती के रुप में स्वीकार किया है और हम बदलाव लाकर दिखाएंगे : ऊर्जा मंत्री तोमर

ग्वालियर में 3.15 करोड़ की सीवर सकर मशीन का किया लोकार्पण भोपाल ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर के आहवान पर 15 ग्वालियर विधानसभा क्षेत्र में शनिवार से सीवर स्वच्छता अभियान शुरू किया गया है। क्षेत्र में सीवर समस्या को लेकर विधानसभा क्षेत्र में लंबे समय से परेशानी बनी हुई थी। सीवर समस्या को दूर करने के लिए  ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने खुद पहल करते हुए 3 करोड़ 15 लाख रुपए कीमत की सीवर सकर मशीन विधानसभा क्षेत्र के लिए उपलब्ध कराई है। उप नगर ग्वालियर के कांच मिल क्षेत्र से इस मशीन ने शनिवार से सीवर लाइनों की सफाई करना शुरू कर दिया। मंत्री तोमर ने सीवर सफाई का पूरा शेड्यूल बताते हुए कहा कि 18 अप्रैल से 30 अप्रैल तक किस-किस तारीख को कहां-कहां सफाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि आज ग्वालियर की स्वच्छता को नई ऊर्जा प्रदान करते हुए सीवर समस्या के समाधान के लिए “सुपर सकर” मशीन का शुभारंभ कर इसे नगर निगम को समर्पित किया है। अब आधुनिक तकनीक के माध्यम से सफाई व्यवस्था और अधिक तेज, प्रभावी व सुदृढ़ बनेगी। उन्होंने जन कल्याण समिति को अहम जिम्मेदारी सौंपते हुए कहा कि जहां-जहां सीवर सफाई का काम चले, जन कल्याण समिति के लोग इस कार्य की न केवल निगरानी रखें, बल्कि यह सुनिश्चित करें की सीवर सफाई का कार्य सुव्यवस्थित तरीके से हो। उन्होंने कहा कि यह नगर निगम के लिए चुनौती है। हमने सीवर सफाई के कार्य को अपने हाथ में लिया है और हम इसमें बदलाव लाकर दिखाएंगे। ऊर्जा मंत्री ने सिविल अस्पताल हजीरा का जिक्र करते हुए कहा कि यह हमारी और आपकी जिद का ही परिणाम है कि सिविल अस्पताल हजीरा उन मरीजों को सुविधा दे रहा है, जिन्हें इलाज के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता था। उन्होंने विधानसभा क्षेत्र में सड़क के किनारे बने अस्थाई अतिक्रमण को स्वयं हटाए जाने का भी आहवान किया, जिससे आवागमन में किसी तरह की परेशानी ना हो। ऊर्जा मंत्री ने 15 ग्वालियर विधानसभा में आ रहे बदलाव का जिक्र करते हुए कहा, आज स्वास्थ्य, सड़क, खेलकूद, शिक्षा हर क्षेत्र में बदलाव हो रहा है। पहले लोग हमारे पास आकर निजी स्कूलों में अपने बच्चों का एडमिशन कराने की बात कहते थे, लेकिन अब यहां के लोग अपने बच्चों को सांदीपनी स्कूल में भर्ती कराने की बात कहते हैं। यही बदलाव है। जो हमने और आपने साथ मिलकर किया है। ऊर्जा मंत्री ने कहा कि हमने बदलाव लाने की ठान ली है और जल्दी ही ग्वालियर स्वच्छता के मामले में नंबर एक पर होगा। उन्होंने कहा कि स्वच्छता, सुविधा और बेहतर जीवन स्तर बनाना हमारा संकल्प है। इस अवसर पर वरिष्ठ पार्षद, प्रशासन, नगर निगम, विद्युत वितरण कंपनी, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।  

अभी तक 4.61 लाख किसानों द्वारा 1 करोड़ 96 लाख 92 हजार क्विंटल गेहूँ के विक्रय के लिये स्लॉट बुक : मंत्री राजपूत

136237 किसानों से 59 लाख 48 हजार 980 क्विंटल गेहूँ उपार्जित भोपाल खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य पर अभी तक एक लाख 36 हज़ार 237 किसानों से 59 लाख 48 हजार 980 क्विंटल गेहूँ की खरीदी की जा चुकी है। किसानों को 575 करोड़ 86 लाख रुपए का भुगतान उनके बैंक खाते में किया जा चुका है। अभी तक 4 लाख 61 हजार 271 किसानों द्वारा 1 करोड़ 96 लाख 92 हजार 550 क्विंटल गेहूँ के विक्रय के लिये स्लॉट बुक किये जा चुके हैं। किसान गेहूँ बिक्रय के लिये 30 अप्रैल 2026 तक स्लॉट बुक कर सकते हैं। खरीदी के लिये 3171 उपार्जन केन्द्र बनाये गये हैं। गेहूँ की खरीदी कार्यालयीन दिवसों में होती है। सेटेलाइट ई-मेल में मिलान नहीं पाए गए खसरों को छोड़कर उसी किसान के शेष खसरों पर गेहूँ की फसल विक्रय के लिये स्लॉट बुकिंग की सुविधा दी गई है। उपार्जन केन्द्र की क्षमता अनुसार उपज की तौल की जा सके एवं अधिक से अधिक किसानों से उपार्जन किया जा सके, इसके लिये प्रतिदिन प्रति उपार्जन केन्द्र पर गेहूँ विक्रय के लिये स्लॉट बुकिंग की क्षमता 1000 क्विंटल से बढ़ाकर 1500 क्विंटल की गई है। उपार्जन केंद्र में किसानों के लिये गेहूँ बिक्री की सभी सुविधाएं मंत्री राजपूत ने बताया है कि जिन जिलों में गेहूँ उपार्जन की प्रक्रिया शुरू हो गई है, वहाँ गेहूँ विक्रय की सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। उपार्जन केन्द्रों में छायादार स्थान में बैठने और पेय जल की समुचित सुविधा उपलब्ध कराई गई है। केंद्र में बारदाने, तौल कांटे सिलाई मशीन, कंप्यूटर, इंटरनेट, गुणवत्ता परीक्षण उपकरण और उपज की साफ सफाई के लिए पंखा, छनना आदि की व्यवस्थाएं भी सुनिश्चित की गई हैं। मंत्री राजपूत ने बताया है कि रबी विपणन वर्ष 2026-27 में किसानों से 2585 रूपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य एवं राज्य सरकार द्वारा घोषित 40 रूपये प्रति क्विंटल बोनस राशि सहित 2625 रूपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूँ का उपार्जन किया जा रहा है। गेहूँ के उपार्जन के लिये आवश्यक बारदानों की व्यवस्था की जा चुकी है। उपार्जित गेहूँ को रखने के लिये जूट बारदानों के साथ ही पीपी/एचडीपी बैग एवं जूट के भर्ती बारदाने का उपयोग किया जा रहा है। समर्थन मूल्य पर उपार्जित गेहूँ के सुरक्षित भंडारण की पर्याप्त व्यवस्था की गई है। उपार्जित गेहूँ में से 45 लाख 92 हजार 610 क्विंटल गेहूँ का परिवहन किया जा चुका है। प्रदेश में गेहूँ उपार्जन के लिये इस वर्ष रिकार्ड 19 लाख 4 हजार किसानों ने पंजीयन कराया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 3 लाख 60 हजार अधिक है। विगत वर्ष समर्थन मूल्य पर लगभग 77 लाख मीट्रिक टन गेहूँ का उपार्जन किया गया था। इस वर्ष युद्ध की विपरीत परिस्थितियों के बावजूद किसानों के हित में सरकार द्वारा 78 लाख मीट्रिक टन गेहूँ के उपार्जन का लक्ष्य रखा गया है, जो कि पिछले वर्ष से एक लाख मीट्रिक टन अधिक है।  

अनूपपुर में ट्रांसमिशन लाइनों के समीप निर्माण बना जानलेवा खतरा

ट्रांसको ने चलाया विशेष जागरूकता एवं कार्रवाई अभियान भोपाल मध्यप्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी (एम.पी. ट्रांसको) द्वारा अनूपपुर जिले में एक्स्ट्रा हाईटेंशन ट्रांसमिशन लाइनों के आसपास हो रहे खतरनाक एवं अवैध निर्माणों के विरुद्ध सख्त अभियान शुरू किया गया है। इस अभियान का उद्देश्य न केवल ऐसे निर्माणों को हटाना है, बल्कि नागरिकों को यह स्पष्ट रूप से समझाना भी है कि ट्रांसमिशन लाइनों के समीप किया गया निर्माण सीधे जीवन के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। कम से कम 27 मीटर का सुरक्षित कारीडोर जरूरी नियमानुसार 132 के.वी. ट्रांसमिशन लाइन के दोनों ओर 27 मीटर का क्षेत्र और 220 के वी लाइन में 35 मीटर सुरक्षा कॉरीडोर के रूप में प्रतिबंधित है। इसके भीतर किसी भी प्रकार का निर्माण पूर्णतः वर्जित है। इस क्षेत्र में बने मकान, दुकान या अन्य संरचनाएं इसलिए अत्यंत जोखिमपूर्ण हैं क्योंकि तेज हवा या अन्य कारणों से तारों के झूलने (स्विंग) की स्थिति में कभी भी जानलेवा हादसा हो सकता है। घरेलू बिजली से 600 से 950 गुना घातक विद्युत प्रभाव होती है इन ट्रांसमिशन लाइनों में ट्रांसमिशन लाइनों में प्रवाहित विद्युत धारा घरेलू बिजली की तुलना में लगभग 600 से 950 गुना अधिक घातक होती है। ऐसे में इन लाइनों के पास रहना या निर्माण करना, हर समय एक अदृश्य खतरे के साए में रहने जैसा है। अनूपपुर क्षेत्र में दो दर्जन निर्माण खतरनाक जद में अनूपपुर और कोतमा क्षेत्र में अब तक 23 ऐसे निर्माण चिन्हित किए गए हैं, जो इस प्रतिबंधित क्षेत्र के भीतर आते हैं। इन सभी मामलों में संबंधित लोगों को नोटिस जारी कर स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि वे स्वयं निर्माण हटाएं, अन्यथा प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। इन निर्माणों से न केवल रहने वालों की जान जोखिम में है, बल्कि किसी भी दुर्घटना की स्थिति में पूरे क्षेत्र की बिजली आपूर्ति भी बाधित हो सकती है। अभी हटाए जा चुके हैं चार निर्माण एम.पी. ट्रांसको के अधीक्षण अभियंता आर.एस. पांडे एवं कार्यपालन अभियंता ए.पी.एस. चौहान के निर्देशन में शहडोल टीएलएम टीम द्वारा लगातार जनजागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। क्षेत्र में रेलवे को आपूर्ति करने वाली 220 केवी ट्रैक्शन -ट्रांसमिशन लाइन के नजदीक बने निर्माण सहित चार ऐसे निर्माणों को हटाया जा चुका है जो मानव जीवन के लिए खतरा हो सकते थे। सहायक अभियंता जगदीश असाटी द्वारा स्थानीय प्रशासन की मदद से पब्लिक एड्रेस सिस्टम, व्यक्तिगत संपर्क और नोटिस के माध्यम से लोगों को समझाया जा रहा है कि थोड़ी सी लापरवाही, बड़े हादसे का कारण बन सकती है। ऊर्जा मंत्री की अपील ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने भी नागरिकों से अपील की है कि वे अपने और अपने परिवार की सुरक्षा को प्राथमिकता दें। ट्रांसमिशन लाइनों के समीप किसी भी प्रकार का निर्माण न करें और निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन करें। सुरक्षित दूरी बनाए रखना ही जीवन की सुरक्षा की सबसे बड़ी गारंटी है।  

विश्वास सारंग का सख्त रुख: लापरवाही पर एजेंसी को ब्लैकलिस्ट करने के निर्देश

वार्ड 68 में 1 करोड़ 37 लाख रुपये के विकास कार्यों का भूमिपूजन और लोकार्पण किया भोपाल गोविंदपुरा क्षेत्र के विकास कार्यों की गुणवत्ता और समयबद्धता को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कृष्णा गौर ने कहा है कि लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। वार्ड 68 में 1.37 करोड़ रुपये के विकास कार्यों के भूमिपूजन एवं लोकार्पण के दौरान मंत्री ने निर्माण कार्य में देरी और अनियमितताओं पर नाराजगी जताते हुए संबंधित एजेंसी को ब्लैकलिस्ट करने और टेंडर निरस्त करने के निर्देश दिए। राज्यमंत्री गौर ने वार्ड 68 अयोध्या नगर में परशुराम चौराहे से जोन कार्यालय मंगल भवन तक पेवर ब्लॉक लगाने के कार्य का भूमिपूजन किया , जिसकी लागत 26 लाख रुपए है। इस दौरान उन्होंने स्थानीय रहवासियों और जनप्रतिनिधियों की शिकायतों पर जीरो टॉलरेंस अपनाते हुए ठेकेदार मेसर्स वैभव सक्सेना को निर्माण कार्य में लापरवाही पर कमिश्नर से शिकायत और टेंडर रद्द करने के आदेश मौजूद अधिकारियों को दिए। वार्ड 68 में 4 लाख रुपए की लागत से एल सेक्टर पार्क में पेवर ब्लॉक लगाने का कार्य, प्लेग्राउंड इक्यूपमेंट्स एवं ओपन जीप इक्विपमेंट लगाने के निर्माण कार्य और 10 लाख की लागत से जी सेक्टर में बाबूलाल गौर पार्क में बाउंड्री वॉल व पाथवे निर्माण कार्य का भूमिपूजन किया। उन्होंने गीत बंगलो फेस 4 में लगभग 7 लाख की लागत से बनने वाली आरसीसी नाली निर्माण कार्य का भूमिपूजन किया और एम सेक्टर में कम्युनिटी हॉल के निर्माण कार्य का भी भूमिपूजन किया, जिसकी लागत 4 लाख रुपए है। राज्यमंत्री ने अयोध्या नगर मारुति विहार के पास आरसीसी नाली निर्माण कार्य का भूमिपूजन किया, जिसकी लागत 3 लाख रुपए आएगी। अयोध्या नगर फेस-5 पार्ट 1 में कम्यूनिटी हाल की बाउंड्री वाल का काम 10 लाख की लागत से किया जाएगा। अयोध्या नगर फेस-5 पार्ट 2 में सीवेज कार्य का भूमिपूजन भी किया गया, जिसकी लागत 31 लाख रुपए है। सुख सागर फेस-1 में 4 लाख रुपये की लागत से कम्यूनिटी हाल का निर्माण कार्य भी किया जाएगा और भवानी केम्पस में शेड लगाने का कार्य लगभग 2 लाख रुपए की लागत से किया जाएगा। उन्होंने अयोध्या नगर फेस-5 पार्ट 1 के रहवासियों के लिए लोकार्पण कर सामुदायिक भवन की सौगात दी। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने भूमिपूजन कार्यक्रम के दौरान स्थानीय लोगों से चर्चा की और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए भी निर्देशित किया। कार्यक्रम के दौरान श्रीमती उर्मिला मौर्य, श्रीमती शिरोमणी शर्मा, श्री लवकुश यादव, श्री भीकम सिंह बघेल समेत बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक मौजूद रहे।  

ED छापेमारी के बाद सियासी घमासान: CM भगवंत मान ने केंद्र सरकार को घेरा

लुधियाना. पंजाब के कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा के आवास पर प्रवर्तन निदेशालय द्वारा की गई छापेमारी की कार्रवाई समाप्त हो गई है। इस कार्रवाई के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और विभिन्न दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। जानकारी के अनुसार, प्रवर्तन निदेशालय की टीम शुक्रवार सुबह अचानक लुधियाना स्थित मंत्री के आवास पर पहुंची। टीम ने पहुंचते ही पूरे क्षेत्र को सुरक्षा घेरे में ले लिया और बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई। इसके बाद अधिकारियों ने घर के भीतर मौजूद दस्तावेजों और अन्य सामग्री की गहन जांच शुरू की। ईडी की तरफ से बयान नहीं हुआ जारी सूत्रों के मुताबिक, यह कार्रवाई कथित वित्तीय अनियमितताओं और लेन-देन से जुड़े मामलों की जांच के तहत की जा रही है। छापेमारी के दौरान कई अहम दस्तावेजों के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की भी जांच की गई। हालांकि, अभी तक प्रवर्तन निदेशालय की ओर से इस मामले में कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, जिससे जांच को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाई है। दूसरी ओर, मंत्री संजीव अरोड़ा या उनके कार्यालय की तरफ से भी इस पूरे घटनाक्रम पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं, इस कार्रवाई को लेकर पंजाब सरकार ने कड़ा विरोध जताया है। सीए मान लगा चुके केंद्र पर आरोप  मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार जांच एजेंसियों का इस्तेमाल कर विपक्षी नेताओं को डराने और दबाव बनाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए खतरा बताते हुए कहा कि उनकी पार्टी इस तरह की कार्रवाई से डरने वाली नहीं है। इस घटना के बाद राज्य की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। जहां एक ओर सत्तारूढ़ दल इसे राजनीतिक दबाव की कार्रवाई बता रहा है, वहीं विपक्ष इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है। फिलहाल, छापेमारी समाप्त होने के बाद भी इस मामले को लेकर कई सवाल बने हुए हैं। आने वाले दिनों में जांच एजेंसियों और संबंधित पक्षों की ओर से स्थिति और स्पष्ट होने की संभावना है।

भिंड में तापमान 43.1 डिग्री के पार, लू से हड़कंप—स्वास्थ्य विभाग ने दी चेतावनी

भिंड अप्रैल माह में पहली बार शनिवार को गर्मी ने अपने तीखे तेवर दिखाए। अधिकतम तापमान 43.1 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जबकि न्यूनतम तापमान भी 27.2 डिग्री दर्ज किया गया। तेज धूप और गर्म हवाओं ने शहरवासियों को दिनभर परेशान किया। हालात यह रहे कि दोपहर के समय सड़कों पर सन्नाटा छा गया और लोग जरूरी काम होने पर ही घरों से बाहर निकले। लू के थपेड़ों से सड़कें सूनी रहीं और दोपहर में लोग घरों में कैद रहे। गर्म हवाओं का बढ़ा असर मौसम विभाग के अनुसार शनिवार को आर्द्रता 27 प्रतिशत रही, जबकि हवाएं करीब 4 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलीं। इससे पहले गुरुवार को अधिकतम तापमान 42 डिग्री दर्ज किया गया था, लेकिन शनिवार को पारा और चढ़ गया। सुबह 9 बजे के बाद ही गर्म हवाओं का असर शुरू हो गया, जो दोपहर 2 बजे के बाद और तेज हो गया। गर्मी के कारण सबसे ज्यादा परेशानी दोपहिया वाहन चालकों को हुई। बिना मुंह ढके बाहर निकलना मुश्किल हो गया। लोग सिर और चेहरे को कपड़े से ढककर ही बाहर निकले। बाजारों में भी दोपहर के समय भीड़ काफी कम दिखाई दी। वायरल और मलेरिया का बढ़ा खतरा मौसम में बदलाव के साथ ही बीमारियों का खतरा भी बढ़ने लगा है। इन दिनों अस्पतालों में वायरल फीवर के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। विशेषज्ञों के अनुसार गर्मियों में मलेरिया का खतरा भी अधिक रहता है, जो अन्य संक्रमणों के कारण शरीर को प्रभावित कर सकता है। डाक्टरों ने सलाह दी है कि तेज धूप और गर्म हवाओं से बचाव बेहद जरूरी है। घर से बाहर निकलते समय मुंह और कान ढककर रखें तथा दोपहर के समय बाहर निकलने से बचें। पर्याप्त पानी पिएं और स्वच्छता का ध्यान रखें। मच्छरों से बचाव के लिए मच्छरदानी का उपयोग करें और तबीयत बिगड़ने पर तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें। डॉक्टर की सलाह तापमान बढ़ने से वायरल और अन्य बीमारियों के मामले बढ़ रहे हैं। लोगों को धूप से बचाव करना चाहिए और स्वास्थ्य संबंधी समस्या होने पर तुरंत जांच करानी चाहिए। – डा. आरएन राजौरिया, सिविल सर्जन, जिला अस्पताल भिंड

एमपी ई-सेवा’ से डिजिटल गवर्नेंस को मिला सशक्त आधार: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

56 विभागों की 1700 सेवाएँ एक ही पोर्टल पर उपलब्ध सेवा वितरण प्रणाली हुई अधिक जवाबदेह एवं सुव्यवस्थित भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि ‘एमपी ई-सेवा पोर्टल और मोबाइल ऐप’ के माध्यम से प्रदेश में डिजिटल गवर्नेंस को सशक्त आधार मिला है। इससे नागरिक सेवाएँ अब अधिक सरल, सुगम और सुलभ हुई हैं। डिजिटल तकनीक आज सुशासन की आधारशिला बन चुकी है और प्रदेश इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ते हुए देश में नई पहचान स्थापित कर रहा है। अब प्रदेशवासियों को विभिन्न विभागों की सेवाओं के लिए अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर जाने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि एक ही मंच पर सभी सुविधाएँ सहज, त्वरित और पारदर्शी रूप में उपलब्ध कराई जा रही हैं। इस पहल से सेवा वितरण प्रणाली अधिक जवाबदेह और सुव्यवस्थित बनी है। साथ ही नागरिकों के समय एवं संसाधनों की बचत सुनिश्चित हुई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह एकीकृत नागरिक सेवा मंच 56 विभागों की 1700 से अधिक सरकारी सेवाओं और योजनाओं को एक ही डिजिटल विंडो पर उपलब्ध करा रहा है। वर्ष 2026 तक 100 प्रतिशत ई-सेवा डिलीवरी का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जो प्रदेश को डिजिटल गवर्नेंस के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत मध्यप्रदेश राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम (एमपीएसईडीसी) के सेंटर फॉर एक्सीलेंस द्वारा विकसित यह प्लेटफॉर्म नागरिकों, विभागों एवं सेवाओं को एकीकृत डिजिटल इको-सिस्टम में जोड़ते हुए सुशासन को और अधिक प्रभावी तथा परिणामोन्मुख बनाने में सहायक सिद्ध होगा। एकीकृत पोर्टल पर सभी सेवाएँ: प्रक्रिया हुई सरल एमपी ई-सेवा पोर्टल पर विभिन्न विभागों की 1700 सेवाओं को एकीकृत कर नागरिकों को बार-बार अलग-अलग पोर्टल पर जाने और दस्तावेज़ जमा करने की आवश्यकता समाप्त की गई है। नागरिक अब eseva.mp.gov.in और मोबाइल ऐप के माध्यम से पात्रता जांच, आवेदन, स्टेटस ट्रैकिंग और अनुमोदन जैसी सभी सुविधाएँ एक ही स्थान पर प्राप्त कर सकते हैं। पोर्टल पर आधार आधारित प्रमाणीकरण, ई-साइन और डिजिटल प्रमाणपत्र की व्यवस्था से पूरी प्रक्रिया पेपरलेस और फेसलेस बनाई गई है, जिससे पारदर्शिता और दक्षता दोनों में वृद्धि हुई है। समग्र पोर्टल से एकीकरण: ऑटो-वेरिफिकेशन की सुविधा ‘एमपी ई-सेवा’ को समग्र सामाजिक सुरक्षा मिशन के समग्र पोर्टल से जोड़ा गया है। प्रत्येक परिवार को 8 अंकीय परिवार आईडी और हर सदस्य को 9 अंकीय सदस्य आईडी दी गई है। इससे ऑटो-वेरिफिकेशन की प्रक्रिया को सक्षम बनाया गया है। इससे पात्रता निर्धारण स्वतः हो जाता है और अनावश्यक देरी व दोहराव समाप्त होता है। पोर्टल की प्रमुख विशेषता ‘ऑटो-फेचिंग डॉक्युमेंट्स’ है, जिससे नागरिकों को बार-बार दस्तावेज़ अपलोड करने की आवश्यकता नहीं रहती।एक बार अपलोड किए गए दस्तावेज आगे की सेवाओं में स्वतः उपलब्ध हो जाते हैं। सुगम, सुरक्षित एवं नागरिक केंद्रित ‘ऐप-डिज़ाइन’ एमपी ई-सेवा पोर्टल को मोबाइल-फर्स्ट दृष्टिकोण के साथ विकसित किया गया है। इसमें बहुभाषीय सुविधा के साथ दिव्यांगजनों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विशेष डिज़ाइन किया गया है, जिससे शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के नागरिक आसानी से इसका उपयोग कर सकें। प्लेटफ़ॉर्म पर अब तक 2 लाख 14 हजार से अधिक ट्रांसेक्शन दर्ज किए जा चुके हैं। इनमें 3 हजार 446 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जबकि 1 लाख 64 हजार 600 से अधिक ट्रैक/डाउनलोड गतिविधियाँ और 45 हजार 954 समग्र पात्रता जांचें की गई हैं। डिजिटल गवर्नेंस में प्रदेश की सशक्त उपस्थिति राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सेवा वितरण आकलन (एनईएसडीए) 2025 रिपोर्ट में मध्यप्रदेश ने 1752 ई-सेवाओं को मैप कर सभी 56 अनिवार्य विभागीय सेवाओं को 100 प्रतिशत एकीकृत करते हुए देश में दूसरा स्थान प्राप्त किया।प्रदेश को ‘सायबर तहसील’ के लिए प्रधानमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार तथा ‘संपदा 2.0’ के लिए राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस स्वर्ण पुरस्कार भी प्राप्त हुए हैं, जो डिजिटल गवर्नेंस के क्षेत्र में राज्य की उपलब्धियों को दर्शाते हैं।  

योगी सरकार ने खोले दरवाजे, हर अपवंचित बच्चे को मिल रहा शिक्षा का अधिकार

लखनऊ.  जिन घरों में कभी अच्छी शिक्षा एक सपना थी, वहां अब उम्मीद ने दस्तक दे दी है। शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के अंतर्गत योगी सरकार ने एक बार फिर यह साबित किया है कि नीतियां कागजों तक सीमित न रहकर जमीन पर बदलाव का माध्यम बन रहीं हैं। वर्ष 2026-27 के लिए प्रदेश में अब तक 1,03,439 बच्चों का नामांकन सुनिश्चित किया जा चुका है, जिससे हजारों गरीब और वंचित परिवारों के सपनों को नई दिशा मिली है। आंकड़ों का यह शुरुआती रुझान संकेत दे रहा है कि आने वाले चरणों में यह संख्या और तेजी से बढ़ेगी, क्योंकि नामांकन प्रक्रिया अभी जारी रहेगी। राज्य के लखनऊ, वाराणसी, बुलंदशहर और बंदायू जनपद नामांकन में आगे हैं। आंकड़ों के अनुसार लखनऊ में 7,952, वाराणसी में 4,957, बुलंदशहर 4154 और बदायूं में 3599 बच्चों का नामांकन हुआ है। अभिभावकों का भरोसा लगातार मजबूत हो रहा है और वे अपने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए आगे बढ़ रहे हैं। सरकार की इस पहल का सबसे बड़ा प्रभाव समाज के अंतिम पायदान पर खड़े परिवारों पर पड़ा है। अब आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को भी निजी विद्यालयों में पढ़ाई के अवसर मिलने लगे हैं, जिससे शिक्षा के क्षेत्र में समान अवसर की मजबूत नींव रखी जा रही है। यह कदम शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक न्याय और समावेशी विकास की दिशा में भी एक परिवर्तनकारी पहल साबित हो रहा है। सरकार की पारदर्शी नीति से हो रहा संभव अपने अधिकारों, सुविधाओं या अवसरों से वंचित बच्चों की शिक्षा को लेकर गंभीर योगी सरकार ने इस पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और सरल बनाया है। ऑनलाइन आवेदन और चयन प्रणाली के माध्यम से पात्र बच्चों को बिना किसी भेदभाव के लाभ मिल रहा है। यही कारण है कि योजना के प्रति आमजन में विश्वास और सहभागिता लगातार बढ़ रही है। बेसिक शिक्षा विभाग का मानना है कि जुलाई तक चलने वाली नामांकन प्रक्रिया के दौरान और अधिक पात्र बच्चों को इस योजना से जोड़ा जा सकेगा। आरटीई नामांकन में टॉप 10 जनपद जनपद                        नामांकन लखनऊ                 7952 वाराणसी                4957 बुलंदशहर                4154 बदायूं                      3599 मुरादाबाद                3246 आगरा                     3086 कानपुर नगर            2476 गोरखपुर                  2352 अलीगढ़                  2320 गाजियाबाद             2209

फर्जी आरोप साबित: दुष्कर्म व एससी-एसटी एक्ट मामले में महिला को 10 साल की जेल

दतिया दुष्कर्म व एससी-एसटी एक्ट में झूठा मामला दर्ज कराने पर महिला को 10 वर्ष के कठोर कारावास और 10 हजार 500 रुपये के अर्थदंड की सजा न्यायालय ने सुनाई है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश राजेश भंडारी ने वैभवी सनोरिया प्रकरण में शुक्रवार को यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा कि हाल के समय में झूठे प्रकरण दर्ज कराने की प्रवृत्ति बढ़ रही है, जो न्याय प्रणाली के लिए गंभीर चिंता का विषय है। ऐसे मामलों से न केवल न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित होती है, बल्कि आम लोगों के बीच न्याय व्यवस्था के प्रति अविश्वास भी बढ़ता है।   मामले के अनुसार, वैभवी सनोरिया ने थाना बड़ौनी में शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि 22 सितंबर 2021 की रात उसका पड़ोसी कालीचरण घर में घुस आया और उसके साथ दुष्कर्म किया। साथ ही आरोपित पर जान से मारने की धमकी देने का आरोप भी लगाया गया था। शिकायत के आधार पर पुलिस ने आरोपित के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच पूरी की और चालान अदालत में पेश किया। विचारण के दौरान मामला पूरी तरह पलट गया, जब फरियादिया अपने ही बयान से मुकर गई। उसने अदालत में स्वीकार किया कि रुपये के लेनदेन के विवाद के चलते उसने कालीचरण के खिलाफ झूठा मामला दर्ज कराया था। इस खुलासे के बाद विशेष न्यायाधीश ने आरोपित कालीचरण को दोषमुक्त कर दिया। साथ ही फरियादिया के खिलाफ झूठा मामला दर्ज कराने के संबंध में कार्रवाई के आदेश दिए गए। अदालत के निर्देश के बाद वैभवी सनोरिया के खिलाफ नया प्रकरण दर्ज किया गया। प्रकरण में शासन की ओर से अतिरिक्त लोक अभियोजक अरुण कुमार लिटोरिया ने पैरवी की। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने पांच गवाहों के बयान प्रस्तुत किए। अदालत ने वैभवी सनोरिया को धारा 182, 195 एवं 211 के तहत दोषी ठहराया। सभी साक्ष्यों और तर्कों के आधार पर अदालत ने आरोपों को प्रमाणित माना और दोष सिद्ध होने पर सजा सुनाई।

बिहार में सियासी हलचल: सम्राट चौधरी कब लाएंगे विश्वास मत? बिहार विधानसभा सत्र का ऐलान

पटना बिहार में नवनियुक्त मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में गठित एनडीए की नई सरकार के विश्वास मत पेश करने की तारीख आ गई है। बिहार विधानसभा के एक दिवसीय विशेष सत्र की तिथि का ऐलान हो गया है। विधानसभा सचिवालय ने शनिवार को इसकी अधिसूचना जारी कर दी। यह विशेष सत्र आगामी शुक्रवार, 24 अप्रैल को बुलाया गया है। मंत्रिमंडल विस्तार से पहले सीएम सम्राट चौधरी विधानसभा में अपनी सरकार का विश्वास मत पेश करेंगे। बिहार विधानसभा सचिवालय ने सभी सदस्यों को 24 अप्रैल सुबह 11 बजे सदन में उपस्थित होने के लिए अनुरोध किया है। विधानसभा के निदेशक राजीव कुमार ने शनिवार को इस संबंध में आह्वान पत्र जारी किया। यह विशेष सत्र एक दिन का ही रहेगा। एनडीए के पास सदन में भारी बहुमत है। ऐसे में सरकार के सामने बहुमत परीक्षण का कोई संकट नहीं आएगा। सम्राट चौधरी आसानी से सदन में अपना विश्वास मत पेश कर देंगे। नई सरकार के कैबिनेट विस्तार का इंतजार सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली एनडीए की नई सरकार के कैबिनेट का विस्तार अभी नहीं हुआ है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद 15 अप्रैल को नई सरकार का शपथ ग्रहण हुआ था। इसमें सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री पद और जदयू के दो वरीय नेताओं विजय चौधरी एवं बिजेंद्र प्रसाद यादव ने डिप्टी सीएम पद की शपथ ली थी। माना जा रहा है कि सदन में विश्वास मत पेश करने के बाद ही सम्राट कैबिनेट का विस्तार किया जाएगा। मंत्रिमंडल विस्तार अगले महीने होने की संभावना है। बताया जा रहा है कि पश्चिम बंगाल समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने के बाद बिहार में नए मंत्रियों का शपथ ग्रहण होगा। तब तक मुख्यमंत्री और दोनों डिप्टी सीएम मिलकर ही सरकार चलाएंगे। एनडीए के पास सदन में भारी बहुमत 243 सदस्यों वाली बिहार विधानसभा में सत्ताधारी गठबंधन के पास भारी बहुमत है। पिछले साल हुए बिहार विधानसभा चुनाव में भाजपा, जदयू समेत पांचों सहयोगी दलों ने मिलकर 202 सीटों पर जीत दर्ज की थी। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के राज्यसभा सांसद बनने के बाद उन्होंने विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। वह पटना की बांकीपुर सीट से विधायक थे, जो अभी खाली है। इस तरह, एनडीए के पास अभी विधानसभा में 201 विधायक हैं। इनमें भाजपा के 88, जदयू के 85, लोजपा (रामविलास) के 19, हम के 5 और रालोमो के 4 विधायक शामिल हैं। जबकि सरकार बनाने के लिए 122 विधायकों का समर्थन ही चाहिए होता है। वहीं, विपक्षी दलों के महागठबंधन के 35 विधायक ही हैं। पिछले महीने हुए राज्यसभा चुनाव में इनमें से कांग्रेस के 3 विधायकों ने वोटिंग से दूरी बनाई थी, जिसके बाद महागठबंधन में भी टूट की चर्चा होने लगी थी। क्या है विश्वास मत की प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 163, 164 और 175 के तहत नई सरकार के गठन के बाद राज्यपाल बहुमत परीक्षण के लिए विधानसभा सत्र बुलाने का निर्देश देते हैं। नई सरकार को सदन में विश्वास मत के जरिए यह साबित करना होता है कि उसे विधानसभा के कुल सदस्य संख्या का बहुमत हासिल है। मुख्यमंत्री खुद सदन में विश्वास मत का प्रस्ताव पेश करते हैं। फिर इस पर सदन में चर्चा होती है। इसके बाद ध्वनि मत या वोटिंग से इस प्रस्ताव को पारित या खारिज करने का फैसला होता है।