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इंदौर प्रदेश में संपत्ति रजिस्ट्री में अव्वल, 21% राजस्व का योगदान अकेले इंदौर का

इंदौर  पंजीयन विभाग के 2025-26 के राजस्व आंकड़ों के अनुसार इंदौर जिले ने एक बार फिर पूरे प्रदेश में सबसे अधिक कमाई कर अपना दबदबा कायम रखा है। इंदौर ने पूरे प्रदेश में सबसे ज्यादा राजस्व अर्जित किया है। यहां कुल 2673.44 करोड़ की आय हुई है। वहीं भोपाल दूसरे, ग्वालियर तीसरे, जबलपुर चौथे और उज्जैन पांचवें स्थान पर रहा। भोपाल 1903.67, ग्वालियर 852.92 करोड़, जबलपुर 772.25 करोड़, उज्जैन 440.50 करोड़ की आय दे पाए हैं, जबकि इंदौर के महू नाका कार्यालय ने प्रदेश में चौथे नंबर पर कमाई दर्ज कराई है। इंदौर जिले के चारों कार्यालय इस बार भी प्रदेश में शीर्ष पर रहे। मोती तबेला स्थित पंजीयन कार्यालय ने 614.69 करोड़, ढक्कनवाला कुआं स्थित पंजीयन कार्यालय ने 674.06 करोड़, विजयनगर स्थित पंजीयन कार्यालय ने 756.98 करोड़, जबकि महू नाका स्थित पंजीयन कार्यालय ने 627.71 करोड़ रुपए की कमाई की। कुल मिलाकर इंदौर जिले का संयुक्त राजस्व 2673.44 करोड़ रुपए रहा, जो प्रदेश में सर्वाधिक है। उधर, भोपाल-1 कार्यालय की 481.37 करोड़ रुपए, भोपाल-2 की 997.22 करोड़ रुपए, भोपाल-3 कार्यालय की कमाई 425.08 करोड़ रुपए दर्ज की गई। जबकि ग्वालियर जिले के दोनों कार्यालयों ने क्रमश: 396.58 करोड़ और 456.34 करोड़ रुपए का राजस्व जुटाया। जबलपुर जिले में जबलपुर के दोनों कार्यालयों ने क्रमश: 371.36 करोड़ और 400.89 करोड़ रुपए का राजस्व अर्जित किया, जबकि सिंहस्थ के कारण उज्जैन से जो उम्मीद की जा रही थी वह पूरी नहीं हो सकी। इस वर्ष उज्जैन जिले ने मात्र 440.50 करोड़ रुपए की कमाई की। इंदौर ने रिकॉर्ड बनाया दरअसल, इंदौर ने पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में 215.7 करोड़ रुपये अधिक राजस्व जुटाया है। वर्ष 2024-25 में जहां यह आंकड़ा 2528 करोड़ रुपये था, वहीं इस बार यह बढ़कर 2743.7 करोड़ रुपये पहुंच गया। यह वृद्धि शहर में तेजी से बढ़ते रियल एस्टेट कारोबार और निवेशकों के बढ़ते विश्वास को दर्शाती है। दस्तावेज पंजीयन के मामले में भी इंदौर ने रिकॉर्ड बनाया है। वर्ष 2025-26 में जिले में एक लाख 91 हजार 400 दस्तावेज पंजीकृत हुए, जो पिछले वर्ष के मुकाबले 5124 अधिक हैं। वरिष्ठ जिला पंजीयक अमरेश नायडू के अनुसार इंदौर में संपत्ति बाजार लगातार विस्तार कर रहा है और आने वाले समय में यह आंकड़े और भी ऊंचाई छू सकते हैं। प्रदेश के प्रमुख चार शहरों का राजस्व     इंदौर – 2743.7 करोड     भोपाल – 1943.64 करोड़     ग्वालियर – 870.9 करोड़     जबलपुर – 789.7 करोड़ मार्च में सर्वाधिक राजस्व इंदौर जिले में वित्तीय वर्ष 2025-26 में सर्वाधिक राजस्व मार्च माह में 537.09 करोड़ रुपये जुटाया गया। इसी माह में सर्वाधिक 29086 दस्तावेज पंजीकृत हुए थे। दिसंबर माह में भी पंजीयन कार्यालय द्वारा 17441 दस्तावेज पंजीकृत किए गए और 238.28 करोड़ रुपये राजस्व जुटाया गया। सबसे कम राजस्व अप्रैल माह में 114.48 करोड़ रुपये राजस्व जमा हुआ और 7944 दस्तावेज पंजीकृत हुए थे। विजयनगर क्षेत्र का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन इंदौर जिले में सबसे प्रभावशाली प्रदर्शन विजयनगर स्थित पंजीयन कार्यालय ने किया। आंकड़ों के अनुसार इस क्षेत्र ने लक्ष्य के विरुद्ध 90.83 प्रतिशत उपलब्धि दर्ज की। यह प्रदर्शन न केवल जिले के भीतर सर्वोच्च रहा, बल्कि प्रदेशभर के कई बड़े कार्यालयों से भी बेहतर साबित हुआ। वर्ष-दर-वर्ष तुलना में भी इस कार्यालय की वृद्धि दर 11.63 प्रतिशत रही। यह आकड़े दर्शाते हैं कि जिले में संपत्ति पंजीयन की गतिविधियां तेज हुई हैं और बाजार की स्थिति में भी सुधार हुआ है। वर्ष 2024-25 में कार्यालय ने 677.75 करोड़ रुपए का राजस्व अर्जित किया था, जबकि वर्ष 2025-26 में यह बढक़र 756.98 करोड़ रुपए पहुंच गया। क्षेत्र में संपत्ति के पंजीयन, क्रय-विक्रय और वाणिज्यिक गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। इंदौर-महूनाका ने भी दिखाया दम महू नाका स्थित पंजीयन कार्यालय ने लक्ष्य के 81.85 प्रतिशत के टारगेट को पूरा किया है। महू नाका क्षेत्र ने सबसे अधिक राजस्व में बढ़ोतरी करते हुए इंदौर को पहले पायदान पर खड़ा करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। 22.59 प्रतिशत की बढ़ोतरी से इस क्षेत्र ने पिछले वर्ष की तुलना में उल्लेखनीय बढ़त हासिल की, जिसने जिले की रैंकिंग को ऊपर बनाए रखने में भूमिका निभाई। मोती तबेला स्थित कार्यालय लक्ष्य का केवल 61.41 प्रतिशत ही हासिल कर पाया। इंदौर-2 कार्यालय मार्च में 79.85 प्रतिशत का लक्ष्य पूरा कर पाया। पिछले वर्ष की तुलना में 2.13 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। वहीं ढक्कनवाला कुआं स्थित पंजीयन कार्यालय ने धीमी, लेकिन संतुलित प्रगति हासिल की। किसने पिछले वर्ष के मुकाबले कम कमाई की आंकड़ों के अनुसार कुल 4 कार्यालयों में पिछले वर्ष की तुलना में राजस्व में गिरावट दर्ज हुई। इन कार्यालयों ने कम कमाई की- ग्वालियर-1 ने माइनस 1.96% ,ग्वालियर-2 ने माइनस 2.17% इंदौर-1 में माइनस 6.10% व उज्जैन भी 9.69 प्रतिशत कमी की सूची में सबसे निचले पायदान पर है। यहां सबसे ज्यादा गिरावट देखी गई है। उज्जैन ने 102 करोड़ के लक्ष्य के विरुद्ध केवल 61.85त्न प्राप्त किया और सबसे अधिक 9.69 प्रतिशत की कमी दर्ज की।

टाटा मोटर्स का ऐतिहासिक पड़ाव,10 लाखवीं बस फ्लैग ऑफ, यूपी में विस्तार का संकेत

 लखनऊ उत्तर प्रदेश की औद्योगिक संभावनाओं पर मुहर लगाते हुए टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने राज्य को देश का प्रमुख 'ग्रोथ इंजन' बताया है। लखनऊ में टाटा मोटर्स की 10 लाखवीं बस को फ्लैग ऑफ करने के ऐतिहासिक अवसर पर उन्होंने घोषणा की कि आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश में टाटा समूह की उपस्थिति दोगुनी से भी अधिक होने वाली है। चंद्रशेखरन ने बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और निवेश अनुकूल माहौल के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि राज्य अब उद्योगों के विस्तार के लिए सबसे सुरक्षित और संभावनाशील गंतव्य बन चुका है। 34 साल में 10 लाख, अब 5 साल में 20 लाख का लक्ष्य टाटा मोटर्स के लखनऊ प्लांट ने 34 वर्षों की अपनी गौरवशाली यात्रा में 10 लाख वाहनों के उत्पादन का मील का पत्थर पार कर लिया है। चेयरमैन चंद्रशेखरन ने विश्वास जताया कि जिस गति से प्रदेश की आर्थिक गतिविधियां बढ़ रही हैं, अगले 5 वर्षों में 20 लाख वाहनों के उत्पादन का लक्ष्य भी आसानी से हासिल कर लिया जाएगा। यह प्लांट केवल एक इकाई नहीं, बल्कि स्थानीय सप्लायर्स और पार्टनर्स के साथ विकसित एक ऐसा इकोसिस्टम है, जो उत्तर प्रदेश और टाटा समूह के अटूट विश्वास का प्रतीक है। TCS और तकनीकी क्षेत्र में नौकरियों की धूम आईटी और सर्विस सेक्टर में भी टाटा समूह यूपी में बड़ी छलांग लगाने को तैयार है। चंद्रशेखरन के अनुसार, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) वर्तमान में लखनऊ, नोएडा और वाराणसी में लगभग 20,000 प्रोफेशनल्स के साथ काम कर रही है। अगले पांच वर्षों में इस संख्या को बढ़ाकर 40,000 करने की योजना है। इसके अतिरिक्त, पावर, डिफेंस, रिटेल और हॉस्पिटैलिटी जैसे क्षेत्रों में भी समूह का विस्तार होगा, जिससे प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार के हजारों नए द्वार खुलेंगे। भविष्य की तकनीक: इलेक्ट्रिक, सीएनजी और हाइड्रोजन वाहन उत्तर प्रदेश अब केवल पारंपरिक डीजल वाहनों तक सीमित नहीं रहेगा। टाटा मोटर्स ने अपनी रणनीति स्पष्ट करते हुए कहा कि वह यूपी को इलेक्ट्रिक, सीएनजी और भविष्य के हाइड्रोजन आधारित वाहनों के लिए एक महत्वपूर्ण मैन्युफैक्चरिंग और निर्यात केंद्र के रूप में विकसित करेगा। यह कदम यूपी को ग्लोबल सप्लाई चेन का हिस्सा बनाने की दिशा में निर्णायक साबित होगा। सामाजिक सरोकार: जल संरक्षण और AI पर जोर औद्योगिक विकास के साथ-साथ टाटा समूह सामाजिक उत्तरदायित्वों में भी सक्रिय है। समूह मथुरा में जल स्रोतों के पुनर्जीवन और गोरखपुर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर काम कर रहा है। एन चंद्रशेखरन ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दूरदर्शी नीतियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार के सक्रिय सहयोग के कारण ही टाटा समूह आज यूपी के विकास में इतनी बड़ी भूमिका निभा पा रहा है।  

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने रीवा में सांदीपनि विद्यालयों के विकास कार्यों एवं प्रस्तावों की समीक्षा की

भोपाल.  उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय में रीवा जिले में संचालित एवं प्रस्तावित सांदीपनि विद्यालयों के विकास कार्यों एवं प्रस्तावों की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने सांदीपनि विद्यालय (पीके कन्या) रीवा में प्रस्तावित विकास कार्यों को प्राथमिकता के साथ शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक एवं तकनीकी समस्याओं का त्वरित निराकरण सुनिश्चित किया जाए, जिससे विकास कार्यों में किसी प्रकार की बाधा न आए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने वित्त सचिव लोकेश जाटव से चर्चा कर प्रस्ताव पर आवश्यक वित्तीय स्वीकृति के निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने रीवा के सगरा एवं पांडे टोला में प्रस्तावित सांदीपनि विद्यालयों की स्वीकृति के लिए की जा रही कार्यवाही की अद्यतन स्थिति की जानकारी प्राप्त की। अधिकारियों द्वारा बताया गया कि दोनों स्थलों के लिए निर्धारित मानकों के अनुरूप प्रस्ताव तैयार कर स्वीकृति के लिए भेज दिए गए हैं। उन्होंने निर्देश दिए कि स्वीकृति मिलते ही आवश्यक अधोसंरचना विकास कार्य शीघ्र प्रारंभ किए जाएं, जिससे विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें। बैठक में प्रमुख सचिव, स्कूल शिक्षा संजय गोयल सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।  

सरकारी ड्यूटी के दौरान कर्मचारियों पर हमला, विभाग ने की सख्त कार्रवाई की मांग

 फतेहाबाद गांव खुम्बर में अवैध जल कनेक्शन काटने गई जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग की टीम पर ग्रामीणों द्वारा हमला करने और जान से मारने की धमकी देने का मामला सामने आया है। इस घटना से विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों में गहरा रोष है। मामले की गंभीरता को देखते हुए उपमंडल अभियंता आंचल जैन की अध्यक्षता में एक विशेष बैठक आयोजित की गई, जिसमें दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग उठाई गई। उपमंडल अभियंता आंचल जैन ने बताया कि विभाग को पोर्टल पर शिकायत मिली थी कि गांव खुम्बर स्थित एक खाली प्लॉट में अवैध कनेक्शन लिया गया है। विभागीय आदेशानुसार, पृथ्वीपाल खंड संयोजक के नेतृत्व में एक टीम कार्रवाई के लिए मौके पर पहुंची थी। जब टीम अपना कार्य पूरा कर बूस्टिंग स्टेशन पर वाल्व खोलने पहुंची, तो वहां गांव के निवासी रविन्द्र उर्फ घोलू ने कुछ महिलाओं के साथ मिलकर कर्मचारियों को घेर लिया। आरोप है कि उक्त व्यक्ति ने कर्मचारियों के साथ न केवल गाली-गलौज की, बल्कि हाथापाई पर उतारू हो गया और उन्हें जान से मारने की धमकी दी। जिला सलाहकार शर्मा चंद लाली ने कड़े शब्दों में घटना की निंदा करते हुए कहा की सरकारी ड्यूटी कर रहे कर्मचारियों के साथ इस तरह का हिंसक व्यवहार कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हमने सदर थाना प्रभारी, फतेहाबाद को लिखित शिकायत भेजकर सरकारी कार्य में बाधा डालने और धमकी देने के आरोप में सख्त कार्रवाई की मांग की है। कर्मचारी यूनियन के जिला अध्यक्ष शमशेर सिंह कुंडू ने चेतावनी दी है कि यदि दोषियों के खिलाफ तुरंत उचित कार्रवाई नहीं की गई, तो जल्द ही जिला स्तरीय बैठक बुलाकर आगामी रणनीति बनाई जाएगी। कर्मचारियों ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा सुनिश्चित न होने की स्थिति में फील्ड में काम करना असंभव हो रहा है। उन्होंने कहा कि दोषियों के खिलाफ तुरंत एफआईआर दर्ज हो और फील्ड कर्मचारियों को सुरक्षा प्रदान की जाए ताकि पेयजल आपूर्ति बाधित न हो। इस बैठक में शर्मा चंद लाली (जिला सलाहकार), सुभाष चन्द्र (उपमंडल अभियंता), शमशेर सिंह कुंडू (जिला अध्यक्ष), अमनदीप सिंह, छोटू राम, दुर्गेश कुमार (कनिष्ठ अभियंता), दलबीर सिंह, राम मेहर सिंह सहित कई कर्मचारी व पदाधिकारी मौजूद रहे।  

दशकों के अंधेरे से उजियारे में आया गारपा, नियद नेल्लानार योजना से पहली बार घर-घर पहुँची बिजली

रायपुर.  छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षी "नियद नेल्लानार योजना" के तहत जिले के सुदूर वनांचल क्षेत्र में विकास की मजबूत दस्तक सुनाई दे रही है। नारायणपुर मुख्यालय से लगभग 40 किलोमीटर दूर स्थित अत्यंत दुर्गम ग्राम गारपा में अब पहली बार बिजली की रोशनी पहुँची है, जिससे वर्षों से अंधेरे में जीवन बिता रहे ग्रामीणों के जीवन में नया उजाला आया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में नक्सलवाद के खात्मे के बाद अब इन दूरस्थ क्षेत्रों में विकास कार्य तेजी से पहुँच रहे हैं। पहले जहाँ सुरक्षा कारणों और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के चलते मूलभूत सुविधाएँ भी नहीं पहुँच पाती थीं, वहीं अब शासन की प्राथमिकता में इन क्षेत्रों को शामिल कर तेजी से काम किया जा रहा है। कलेक्टर नम्रता जैन के सतत मार्गदर्शन में प्रशासनिक और तकनीकी टीमों ने मिलकर इस चुनौतीपूर्ण कार्य को सफलतापूर्वक पूरा किया। बिजली विभाग द्वारा संचालित इस परियोजना में लगभग 55 लाख रुपये की लागत से 48 उपभोक्ताओं को पहली बार बिजली कनेक्शन प्रदान किया गया। कार्यपालन अभियंता कुमार लाल उइके ने बताया कि घने जंगल, कठिन रास्ते और सीमित संसाधनों के बावजूद टीम ने अदम्य साहस और कार्यकुशलता का परिचय देते हुए निर्धारित समय में लाइन विस्तार का कार्य पूर्ण किया। बिजली पहुँचने से अब गारपा के बच्चों को पढ़ाई के बेहतर अवसर मिलेंगे, स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच आसान होगी और ग्रामीणों के आर्थिक उत्थान के नए रास्ते खुलेंगे। दशकों बाद अपने घरों को रोशन देख ग्रामीणों में उत्साह और खुशी का माहौल है। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि ‘नियद नेल्लानार’ योजना के तहत जिले के अन्य दूरस्थ गांवों में भी इसी तरह प्राथमिकता के आधार पर विद्युतीकरण कार्य तेजी से जारी रहेगा, जिससे विकास की रोशनी हर अंतिम छोर तक पहुँच सके।

बांसवाड़ा के वीर जवान मानसिंह को मिलेगा सम्मान, बहादुरी की मिसाल फिर याद

 बांसवाड़ा राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में एक भावुक और गर्व से भरी पहल सामने आई है. वर्ष 1982 में डकैती के दौरान शहीद हुए पुलिस जवान मानसिंह को इस बार पुलिस स्थापना दिवस पर सम्मानित किया जाएगा. यह निर्णय पुलिस अधीक्षक सुधीर जोशी की पहल पर लिया गया है. डकैती के दौरान दिखाई थी बहादुरी मानसिंह उस समय घाटोल पुलिस चौकी में कांस्टेबल के पद पर तैनात थे. 2 और 3 मार्च 1982 की रात गश्त के दौरान Bank of Baroda की घाटोल शाखा में 8 से 10 इस दौरान मानसिंह ने बिना डरे एक डकैत को पकड़ लिया. बाकी डकैतों ने उन पर जानलेवा हमला किया और तलवार से उनके दोनों हाथ काट दिए. इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अंत तक मुकाबला करते रहे और वीरगति को प्राप्त हुए. मरणोपरांत मिला था वीरता पदक उनके इस अदम्य साहस के लिए उन्हें मरणोपरांत पुलिस पदक फॉर गैलेंट्री से सम्मानित किया गया था. उनका बलिदान आज भी पुलिस विभाग के लिए गर्व का विषय है. एसपी सुधीर जोशी ने बताया कि शहीद मानसिंह की याद को जीवित रखने के लिए पुलिस लाइन में उनकी तस्वीर लगाई जाएगी. इससे पुलिसकर्मी और आम लोग उनके साहस से प्रेरणा ले सकेंगे. पार्क का नाम रखा गया ‘शहीद मानसिंह बालोद्यान' पुलिस लाइन में बने चिल्ड्रन्स पार्क का नाम बदलकर “शहीद मानसिंह बालोद्यान” कर दिया गया है. यह कदम उनकी स्मृति को स्थायी रूप देने की दिशा में उठाया गया है. राजस्थान पुलिस स्थापना दिवस के मौके पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा. इस दौरान शहीद को श्रद्धांजलि दी जाएगी और उनके साहसिक बलिदान को याद किया जाएगा. एसपी की पहल की हो रही सराहना एसपी सुधीर जोशी ने पुराने दस्तावेज मंगवाकर पूरे मामले का अध्ययन किया और शहीद को सम्मान दिलाने की पहल की. उनकी इस सोच की पुलिस विभाग में व्यापक सराहना हो रही है. 44 साल बाद मिल रहा यह सम्मान आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा का मजबूत संदेश देगा.

झाबुआ के बोर्ड परिणामों में शानदार प्रदर्शन पर महिला बाल विकास मंत्री भूरिया ने दी बधाई

भोपाल.  मध्यप्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा घोषित कक्षा 10वीं एवं 12वीं के परीक्षा परिणामों में झाबुआ जिले ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए पूरे प्रदेश में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। हायर सेकेंडरी परीक्षा में प्रदेश में प्रथम स्थान हासिल करने के साथ ही हाई स्कूल में शीर्ष 10 जिलों में स्थान बनाकर जिले ने सफलता का नया कीर्तिमान स्थापित किया है। इस उपलब्धि पर महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए जिले के विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं अभिभावकों को हार्दिक बधाई दी है। उन्होंने इसे “झाबुआ के बदलाव की नई इबारत” बताते हुए कहा कि यह सफलता आदिवासी अंचल में शिक्षा के प्रति बढ़ती जागरूकता और कड़ी मेहनत का परिणाम है। मंत्री भूरिया ने अपने संदेश में कहा कि झाबुआ के विद्यार्थियों ने यह सिद्ध कर दिया है कि प्रतिभा किसी संसाधन की मोहताज नहीं होती। सीमित साधनों के बावजूद विद्यार्थियों ने जिस समर्पण और परिश्रम से यह मुकाम हासिल किया है, वह सराहनीय है। उन्होंने शिक्षकों के योगदान की भी प्रशंसा करते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन और प्रतिबद्धता ने बच्चों को सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा की गुणवत्ता को निरंतर बेहतर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। भविष्य में शिक्षा के बुनियादी ढांचे को और सुदृढ़ किया जाएगा, जिससे जिले के विद्यार्थी राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी प्रतिभा का परचम लहरा सकें। मंत्री भूरिया ने उन विद्यार्थियों का भी हौसला बढ़ाया जो इस बार सफलता प्राप्त नहीं कर सके। उन्होंने कहा कि परीक्षा के अंक जीवन का अंतिम पैमाना नहीं होते। असफलता से निराश होने के बजाय उससे सीख लेकर आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से सकारात्मक सोच के साथ पुनः प्रयास करने का आह्वान किया।  

शहरी निकायों के विकास की गति देने के लिए दो दिवसीय कार्यशाला कल से

भोपाल.  प्रदेश के शहरी निकायों के विकास की गति को तेज करना और उन्हें वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय 16 अप्रैल, गुरुवार को भौरी स्थित सुंदरलाल पटवा नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ अर्बन मैनेजमेंट (SPNIUM) में दो दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला का औपचारिक शुभारंभ करेंगे। इस कार्यशाला का प्राथमिक लक्ष्य नगरीय निकायों में राजस्व संवर्धन, शहरी सुधारों और सतत् वित्तीय प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं पर गंभीर विचार-विमर्श करना है। अपर मुख्य सचिव संजय दुबे कार्यशाला में विभागीय सुधारों पर अपना मार्गदर्शन  प्रदान करेंगे। नगरीय प्रशासन एवं विकास आयुक्त संकेत भोंडवे ने कार्यक्रम की रूपरेखा के संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि 16 और 17 अप्रैल को आयोजित होने वाली कार्यशाला के दौरान मध्यप्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों से आए विषय विशेषज्ञ, अनुभवी अधिकारी और शहरी नियोजन के जानकार अपने नवाचारों और अनुभवों को साझा करेंगे। यह आयोजन प्रदेश के नगरीय निकायों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने की दिशा में एक प्रभावी मंच सिद्ध होगा। कार्यशाला के विभिन्न तकनीकी सत्रों में शहरी सुधार से जुड़े अत्यंत महत्वपूर्ण विषयों पर केंद्रित प्रस्तुतियां दी जाएंगी। इसमें मुख्य रूप से निकायों की खाली भूमि के आर्थिक उपयोग (लैंड मोनेटाइजेशन), शोधित जल (ट्रीटेड वाटर) के पुन: उपयोग की संभावनाओं, संपत्ति कर (प्रॉपर्टी टैक्स) संग्रहण में सुधार और लीज रेंट जैसे विषयों को शामिल किया गया है। साथ ही, कार्यप्रणाली में आधुनिकता और पारदर्शिता लाने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी (IT) आधारित टूल्स, जैसे यूसीएफ, एईबीएएस और स्पैरो के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी विशेषज्ञों द्वारा विस्तृत जानकारी दी जाएगी, ताकि प्रशासनिक कार्यों को और अधिक सुगम और उत्तरदायी बनाया जा सके। कार्यशाला का प्रमुख आकर्षण विभिन्न नगर निकायों द्वारा सफलतापूर्वक अपनाई जा रही सर्वश्रेष्ठ कार्यप्रणालियों (Best Practices) का आदान-प्रदान होगा। इसके माध्यम से अन्य निकायों को सफल आर्थिक और प्रशासनिक मॉडलों को समझने और उन्हें अपने स्थानीय स्तर पर लागू करने में मदद मिलेगी। इससे न केवल निकायों की वित्तीय स्थिति सुदृढ़ होगी, बल्कि शहरी विकास की परियोजनाओं को भी नई ऊर्जा मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के संवाद से स्थानीय निकायों के राजस्व में वृद्धि के साथ-साथ नागरिक सेवाओं की गुणवत्ता में भी सुधार आएगा। इस महत्वपूर्ण कार्यशाला में मध्यप्रदेश के उन सभी नगरीय निकायों के वरिष्ठ अधिकारी भाग लेंगे जिनकी जनसंख्या एक लाख से अधिक है। इसके साथ ही, विभाग के नवनियुक्त मुख्य नगर पालिका अधिकारियों (CMOs) को भी इस आयोजन का हिस्सा बनाया गया है, ताकि वे अपने सेवा काल के शुरुआती दौर में ही शहरी प्रबंधन की आधुनिक बारीकियों और वित्तीय अनुशासन से परिचित हो सकें। यह कार्यशाला प्रदेश के शहरी नियोजन को एक नई ऊंचाई पर ले जाने और 'आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश' के संकल्प को पूरा करने की दिशा में एक सार्थक कदम साबित होगी।

बिल्डरों पर शिकंज,CBI की 77 ठिकानों पर देशभर में छापेमारी

फरीदाबाद फरीदाबाद में एक मशहूर रियल एस्टेट कंपनी समेत कई रियल एस्टेट कंपनियों के दफ्तरों पर मंगलवार को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो की टीम ने जांच की. सूत्रों के अनुसार, दिल्ली से आई CBI की 4 सदस्यीय टीम सुबह करीब 7 बजे दफ्तर पहुंची, और करीब 10 घंटे तक वहां मौजूद बैंक से जुड़े दस्तावेजों की जांच करती रही. जांच के दौरान CBI अधिकारियों ने बिल्डर द्वारा खरीदारों को बेचे गए घरों से जुड़े दस्तावेजों और कागजातों की भी पड़ताल की. वित्तीय लेनदेन में अनियमितता की जांच अधिकारियों ने इन कागजों के माध्यम से यह समझने की कोशिश की कि घरों की बिक्री और उनसे जुड़े वित्तीय लेनदेन में किसी प्रकार की अनियमितता तो नहीं हुई है.  बताया जा रहा है कि जांच के दौरान कंपनी के कर्मचारियों ने अधिकारियों के साथ पूरा सहयोग किया, और मांगे गए दस्तावेज उपलब्ध कराए.  शाम करीब 4 से 5 बजे के बीच जांच की प्रक्रिया समाप्त हुई, जिसके बाद CBI की टीम जरूरी दस्तावेज लेकर दिल्ली लौट गई. 77 ठिकानों पर छापेमारी दरअसल यह कार्रवाई देशभर में चल रही एक बड़ी जांच का हिस्सा है.  CBI ने बिल्डरों और वित्तीय संस्थानों के अधिकारियों की कथित मिलीभगत से जुड़े मामलों में 8 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 77 स्थानों पर एक साथ छापेमारी की है.  CBI ने मंगलवार को एक प्रेस नोट जारी कर इस पूरी कार्रवाई की जानकारी दी है. सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर कार्रवाई CBI की यह कार्रवाई भारत के सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर की जा रही जांच के तहत की गई है. एजेंसी ने विभिन्न बिल्डरों के खिलाफ 22 नए मामले दर्ज किए हैं. आरोप है कि कुछ बिल्डरों और वित्तीय संस्थानों के अधिकारियों ने मिलीभगत कर घर खरीदने वाले लोगों के साथ धोखाधड़ी की और उन्हें आर्थिक नुकसान पहुंचाया. CBI ने बताया कि इससे पहले सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर 28 मामले दर्ज किए गए थे, जिनकी जांच लगभग पूरी होने वाली है. इन 22 नए मामलों के साथ अब तक कुल 50 मामले दर्ज हो चुके हैं.

प्रधानमंत्री के दृढ़इच्छाशक्ति और साहसिक निर्णय से पूरा होगा महिलाओं का सपना : मुख्यमंत्री साय

रायपुर.  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित नारी शक्ति वंदन महासम्मेलन में शामिल हुए और कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने इस दौरान महिलाओं के सशक्तिकरण को लेकर केंद्र और राज्य सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 का पारित होना देश की महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए एक ऐतिहासिक कदम है, जिससे निर्णय प्रक्रिया में उनकी प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित होगी। मुख्यमंत्री ने मातृशक्ति का अभिनंदन करते हुए कहा कि भारतीय सनातन परंपरा में नारी का स्थान सर्वोच्च है। हम भगवान से पहले भगवती की पूजा करते हैं और ऐश्वर्य के लिए माता लक्ष्मी, बुद्धि के लिए सरस्वती और बल के लिए दुर्गा की आराधना की जाती हैं। साय ने कहा कि महिलाओं को आरक्षण देने के प्रयास पहले भी हुए, लेकिन इसे प्रभावी रूप से लागू करने का साहसिक निर्णय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ही संभव हो पाया। उन्होंने प्रधानमंत्री के कार्यकाल में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णयों का उल्लेख करते हुए कहा कि बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, सुकन्या समृद्धि योजना और महतारी वंदन योजना जैसी पहलों ने महिलाओं के सशक्तिकरण का मार्ग प्रशस्त किया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि हम इस वर्ष को प्रदेश में ‘महतारी गौरव वर्ष’ के रूप में मना रहे हैं और महतारी वंदन योजना के माध्यम से 70 लाख महिलाओं को प्रतिमाह एक हजार रुपये की सहायता दी जा रही है, जिससे वे शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका के क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि बस्तर क्षेत्र में नक्सलवाद समाप्त हुआ है और प्रदेश विकास के नए मार्ग पर अग्रसर है। उन्होंने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को 21वीं सदी के सबसे महत्वपूर्ण निर्णयों में से एक बताते हुए कहा कि इसके माध्यम से महिलाओं की भागीदारी और सशक्तिकरण को नया संबल मिलेगा। कार्यक्रम में “पंचायत से पार्लियामेंट तक निर्णय में नारी—नए भारत की तैयारी” के संकल्प को दोहराया गया। मुख्यमंत्री ने बताया कि पंचायती राज संस्थाओं में पहले से ही 14 लाख से अधिक महिलाएं सक्रिय भूमिका निभा रही हैं, जो उनके बढ़ते आत्मविश्वास का प्रमाण है। उन्होंने इस दौरान पुष्प के साथ महिलाओं का अभिनंदन कर बधाई और शुभकामनाएं दी। इस अवसर पर महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि महिलाओं की इच्छाशक्ति और संकल्प उन्हें बड़े निर्णय लेने में सक्षम बना रहे हैं। महिलाओं को जिम्मेदारी मिले तो वे देश की तस्वीर बदल सकती हैं। वहीं पूर्व राज्यसभा सांसद सरोज पाण्डेय ने बताया कि यह अधिनियम वर्ष 2029 तक लागू होगा, जिसके तहत लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा। कार्यक्रम में सांसद श्रीमती रूपकुमारी चौधरी, सांसद बृजमोहन अग्रवाल, पद्मऊषा बारले, विधायक पुरंदर मिश्रा, बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष श्रीमती वर्णिका शर्मा, पद्मऊषा बारले, प्रसिद्ध हॉकी खिलाड़ी नीता डोंगरे सहित अनेक जनप्रतिनिधि और गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।