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दूसरे वनडे में सिराज की वापसी तय? भारत सीरीज कब्जाने उतरेगा

गुवाहाटी भारत और वेस्टइंडीज के बीच वनडे सीरीज का दूसरा मुकाबला आज खेला जाएगा। दोनों टीमों की टक्कर गुवाहाटी के बरसापारा क्रिकेट स्टेडियम में होगी। तिरुवनंतपुरम के ग्रीनफील्ड स्टेडियम में हुए सीरीज के पहले मैच को भारत ने आसानी से 8 विकेट से अपने नाम किया था। अब इस मैच को जीतकर टीम सीरीज पर कब्जा जमाना चाहेगी। मोहम्मद सिराज की वापसी होगी? भारतीय टीम की प्लेइंग इलेवन में मोहम्मद सिराज की वापसी होती दिख रही है। सीरीज के पहले मैच में शुरुआती पावरप्ले में भारतीय गेंदबाज काफी जूझ रहे थे। प्रसिद्ध कृष्णा और गुरनूर बरार दोनों ही हिट द डेक गेंदबाज हैं। टीम को सीम और स्विंग करवाने वाले गेंदबाज की कमी खली। शुरुआती 10 ओवरों में वेस्टइंडीज के बल्लेबाजों ने 85 रन ठोक दिए थे और भारत को विकेट भी नहीं मिला था। ऐसे में दूसरे वनडे में तेज गेंदबाज मोहम्मद सिराज की वापसी हो सकती है। हालांकि उनके आने पर कौन बाहर जाएगा, यह बड़ा सवाल है। गुरनूर बरार अभी तक इंटरनेशनल क्रिकेट में प्रभाव नहीं छोड़ पाए हैं। 7 मैचों में उनके 11 विकेट तो हैं लेकिन उन्होंने करीब 7 की इकोनॉमी से रन दिए हैं। बरार को प्लेइंग इलेवन में रखा जाता है तो नमन धीर या नीतीश कुमार रेड्डी में से किसी एक को बाहर जाना पड़ सकता है। बल्लेबाजी में बदलाव के कोई चांस नहीं भारतीय टीम की प्लेइंग इलेवन में इसके अलावा और कोई बदलाव की उम्मीद नहीं है। यशस्वी जायसवाल और ध्रुव जुरेल का बेंच पर बैठना तय दिख रहा है। वहीं आकिब नबी को मौका मिलने की उम्मीद भी नहीं दिख रही है। पहले वनडे में विराट कोहली और शुभमन गिल के शतक के भारत ने आसानी से लक्ष्य हासिल कर लिया था। इस मैच में टीम चाहेगी कि मध्यक्रम को भी मौका मिले जिससे उनके टेस्ट हो सके। भारत की संभावित प्लेइंग इलेवन: रोहित शर्मा, शुभमन गिल (कप्तान), विराट कोहली, रुतुराज गायकवाड़, केएल राहुल (विकेटकीपर), नमन धीर, रविंद्र जडेजा, नीतीश कुमार रेड्डी, मोहम्मद सिराज, कुलदीप यादव, प्रसिद्ध कृष्णा।  

नीरू ढांडा ने 24 घंटे में जीते दो गोल्ड, काइनान के साथ बनाया एशियन रिकॉर्ड

नई दिल्ली नागोया में चल रहे एशियन गेम्स 2026 के 12वें दिन भारतीय निशानेबाजों ने अपनी सटीकता का लोहा मनवाते हुए इतिहास रच दिया है। भारत के काइनान डेरियस चेनाई और नीरू ढांडा की मिक्स्ड जोड़ी ने ट्रैप मिक्स्ड टीम स्पर्धा के फाइनल में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया। क्वालिफिकेशन राउंड में चौथे स्थान पर रहने के बाद भारतीय निशानेबाजों ने फाइनल में जबरदस्त वापसी की और कतर की मोहम्मद अल-रुमैही तथा रे बासिल की मजबूत जोड़ी को मात देकर पोडियम का शीर्ष स्थान हासिल किया। 34 का स्कोर बनाकर कतर का ही रिकॉर्ड किया चकनाचूर भारतीय जोड़ी ने न केवल गोल्ड मेडल जीता, बल्कि निशानेबाजी का नया महाद्वीपीय मानदंड भी स्थापित किया। काइनान और नीरू ने फाइनल में 34 का स्कोर दर्ज कर एशियाई रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिया। खास बात यह है कि पिछला एशियाई रिकॉर्ड 30 अंकों का था, जो इसी साल जनवरी में कतर की टीम ने ही बनाया था। फाइनल मुकाबले में कतर की टीम 32 अंकों के स्कोर के साथ दूसरे स्थान पर रही और उसे सिल्वर मेडल से संतोष करना पड़ा। वहीं चीन के क्यूई यिंग और सुन यूनोंग की जोड़ी ने 23 का स्कोर बनाकर ब्रॉन्ज मेडल जीता। नीरू ढांडा का 24 घंटे में दूसरा गोल्ड और ऐतिहासिक सफर 26 वर्षीय नीरू ढांडा के लिए यह एशियन गेम्स का अभियान किसी सपने जैसा रहा है। मंगलवार को महिला ट्रैप इंडिविजुअल स्पर्धा में एशियाई रिकॉर्ड के साथ गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रचने वाली नीरू, एशियाई खेलों के इस बड़े मंच पर व्यक्तिगत ट्रैप मेडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला शूटर बनी थीं। इसके बाद मिक्स्ड टीम में काइनान चेनाई के साथ मिलकर एक और एशियन रिकॉर्ड बनाते हुए उन्होंने 24 घंटे के भीतर भारत की झोली में दूसरा स्वर्णिम पदक डाल दिया। इस सफलता के साथ भारत के पदकों की कुल संख्या बढ़कर 54 (8 गोल्ड) हो गई है।  

चीन को हराकर भारत ने जीता गोल्ड, महिला कंपाउंड तीरंदाजों ने रचा इतिहास

नई दिल्ली नागोया में चल रहे एशियन गेम्स 2026 में भारत की महिला कंपाउंड तीरंदाजी टीम ने देश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। तनिपार्थी चिकिता, प्रदीप प्रीतिका और वेन्नम ज्योति सुरेखा की तिकड़ी ने फाइनल में चीन को 238-234 से हराकर ऐतिहासिक गोल्ड मेडल अपने नाम किया। 240 में से 238 का स्कोर बनाना गजब की सटीकता को दर्शाता है। इस शानदार स्कोर के साथ ही भारतीय चौकड़ी ने दक्षिण कोरिया के 238 अंकों के विश्व रिकॉर्ड की बराबरी भी कर ली। क्वालिफिकेशन से लेकर गोल्ड तक का सफर भारतीय टीम ने क्वालिफिकेशन राउंड में चीन के बाद दूसरा स्थान हासिल किया था। इस राउंड में चिकिता ने इंडिविजुअल स्टैंडिंग्स में 705 अंकों के साथ टॉप किया और प्रीतिका ने 695 अंक जोड़े। इसके बाद सेमीफाइनल मुकाबले में भारत का सामना चिर-प्रतिद्वंद्वी दक्षिण कोरिया से हुआ। कोरिया ने दूसरी पारी में 175-175 से बराबरी कर ली थी, लेकिन भारत ने दबाव के पलों में बेहतरीन खेल दिखाते हुए 235-233 से मुकाबला जीतकर फाइनल का टिकट हासिल किया था। प्रदीप प्रीतिका महाराष्ट्र की रहने वाली प्रीतिका ने 27 सितंबर को ही अपना 18वां जन्मदिन मनाया है और ठीक तीन दिन बाद देश को एशियाड का गोल्ड मेडल दिलाया। पांचवीं कक्षा में एक शौक के तौर पर तीरंदाजी शुरू करने वाली प्रीतिका को उनके माता-पिता ने छठी कक्षा से पेशेवर कोचिंग दिलाई। वह पुणे की स्वराज्य आर्चरी एकेडमी में प्रैक्टिस करती हैं। 2025 में ब्रेकथ्रू के बाद से वह अब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 7 मेडल जीत चुकी हैं, जिनमें 2025 वर्ल्ड यूथ चैंपियनशिप का सिल्वर और एशियन चैंपियनशिप का टीम गोल्ड शामिल है। तनिपार्थी चिकिता तेलंगाना के एक किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाली 21 साल की चिकिता की कहानी बेहद प्रेरणादायक है। जब वह दूसरी कक्षा में थीं, तब उनके पिता ने अखबार में तीरंदाजी के बारे में पढ़ा और उन्हें इस खेल में डाला। 2018 से औपचारिक ट्रेनिंग शुरू करने के बाद वह 2021 में पेशेवर तीरंदाज बनीं। 2025 में विन्निपेग में आयोजित वर्ल्ड आर्चरी यूथ चैंपियनशिप में अंडर-21 महिला व्यक्तिगत इवेंट का गोल्ड जीतकर वह ऐसा करने वाली पहली भारतीय महिला बनी थीं। इसके बाद उन्होंने 2025 और 2026 में वर्ल्ड कप टीम सिल्वर और 2026 एशियन ग्रैंड प्रिक्स टीम गोल्ड जीता है। वह भी साई सोनिपत में ही अभ्यास करती हैं।

तीरंदाजी में भारत का धमाल, चिकिता-साहिल ने जीता गोल्ड

आईची-नागोया Asian Games 2026 के तीरंदाजी इवेंट में एक और गोल्ड भारत को मिल चुका है। 30 सितंबर की सुबह वुमेंस टीम ने गोल्ड पर निशाना लगाया था, जबकि मिक्स्ड टीम इवेंट में भी भारत को गोल्ड मेडल मिला है। वुमेंस टीम में दमदार खेल दिखाने वाली चिकिता तनिपार्थी ने मिक्स्ड टीम में हिस्सा लिया, जहां उनका साथ साहिल राजेश जाधव ने दिया। दोनों ने साथ मिलकर धमाल मचाया और देश को गोल्ड मेडल दिलाया। इस जोड़ी को ओलंपिक का टिकट भी मिल गया है। साउथ कोरिया के खिलाफ कांटे की टक्कर वाले शूट-ऑफ में चिकिता और साहिल ने जीत हासिल की और LA ओलंपिक्स के लिए भारत की जगह पक्की की। भारतीय जोड़ी हाफवे तक 80-78 से आगे थी, लेकिन साउथ कोरिया ने वापसी करते हुए मुकाबला 157-157 से बराबर कर दिया। इसके बाद मुकाबला शूट-ऑफ में पहुंचा, जहां चिकिता और साहिल दोनों ने 10 पॉइंट हासिल किए, जबकि साउथ कोरिया का आखिरी तीर 9 पॉइंट पर लगा। इस तरह भारत को इस रोमांचक मुकाबले में जीत मिली। इस जीत का मतलब यह भी है कि भारत ने हांग्जो 2023 एशियन गेम्स में कंपाउंड मिक्स्ड टीम के तौर पर गोल्ड जीता था, जिसे अपने पास बरकरार रखा है। चिकिता और साहिल का धमाल चिकिता तनिपार्थी और साहिल जाधव ने एक मुश्किल कंपाउंड मिक्स्ड टीम सेमीफाइनल में थाईलैंड को 156-155 से हराया था और गोल्ड मेडल मैच में अपनी जगह पक्की की। भारत ने शुरुआती एंड के बाद बढ़त बनाई थी और फिर पूरे मैच में थोड़ी सी बढ़त बनाए रखी। चिकिथा और साहिल ने फाइनल रोटेशन में लगातार 10-10 पॉइंट का स्कोर करके अपना धैर्य बनाए रखा था और बाद में सिर्फ एक पॉइंट से उन्हें जीत मिली। बनाकर अपना धैर्य बनाए रखा और एक पॉइंट से जीत पक्की कर ली। यही काम इस जोड़ी ने फाइनल में भी किया और परफेक्ट 10 लगाकर खिताब जीता। आपको बता दें, इससे पहले वुमेंस कमाउंड टीम इवेंट में भी भारत ने तीरंदाजी में गोल्ड मेडल जीता था। कंपाउंड टीम में ज्योति सुरेखा वेन्नम, पृथिका प्रदीप, चिकिता तनिपार्थी सुबह करीब 6 बजे साउथ कोरिया के खिलाफ सेमीफाइनल में उतरीं थीं। इसके कुछ ही देर बाद उन्होंने गोल्ड मेडल मैच खेला था। फाइनल में उनके सामने चीनी खिलाड़ियो की चुनौती थी, जिससे उन्होंने पार पाया और देश को इन खेलों का सातवां गोल्ड मेडल दिलाया था। विश्व रिकॉर्ड की बराबरी भी इस टीम ने की थी। 238-234 के अंतर से चीन को हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया था। मिसाल से कम नहीं चिकिता और साहिल की कहानी रोमांचक शूट ऑफ में साउथ कोरिया कोरिया को हराकर स्वर्ण पदक जीतने वाले साहिल जाधव और चिकिता परितार्थी की कहानी नए तीरंदाजों के लिए किसी मिसाल से कम नहीं है. दोनों ने गोल्ड मेडल के साथ-साथ भारत के लिए 2028 ओलंपिक कोटा भी हासिल कर लिया. 18 साल की चिकिता जहां तेलंगाना के किसान परिवार से आतीं हैं तो महाराष्ट्र के साहिल जाधव ने अपने पड़ोसी को देखकर धनुष-बाण उठाया था।  हार्वेस्टर मशीन बेचकर हुई चिकिता की ट्रेनिंग चिकिता तनिपार्थी के पिता ने अपनी बेटी के लिए धनुष खरीदने और ट्रेनिंग का खर्च उठाने के लिए परिवार की राइस हार्वेस्टर मशीन बेच दी थी और कर्ज भी लिया था. तेलंगाना के पेड्डापल्ली जिले के सुल्तानपुर गांव में रहने वाले 51 साल के किसान श्रीनिवास राव और उनकी पत्नी श्रीलता राव ने अपने संघर्षों को याद करते हुए बताया। 

प्रैक्टिस के दौरान गायब हुए दीपक चाहर के महंगे बल्ले, बोले- वापस कर दो

नई दिल्ली भारतीय टीम के तेज गेंदबाज दीपक चाहर एक अजीब समस्या से जूझ रहे हैं। आगरा के एक प्रैक्टिस ग्राउंड में अभ्यास के दौरान उनके तीन बेहद महंगे बल्ले चोरी हो गए। इन तीनों बैट्स की कुल कीमत लगभग 1.5 लाख रुपये बताई जा रही है। इस घटना के बाद दीपक चाहर ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर कर प्रशंसकों से सलाह मांगी है। वीडियो में चाहर ने बताया कि पिछले दिन शाम को मैदान से उनके बल्ले चोरी हुए हैं। उन्होंने मजाकिया अंदाज में यह भी कहा कि बल्ले चुराने वाले व्यक्ति को शायद यह अंदाजा भी नहीं होगा कि ये कितने महंगे हैं। 'योगी जी के पास जाऊं या मोदी जी के पास?' अनोखे और मजाकिया अंदाज में अपनी बात रखते हुए दीपक चाहर ने कहा कि उनके पास बल्ले वापस पाने के कई रास्ते हैं। उन्होंने कहा कि वे पुलिस में शिकायत दर्ज करा सकते हैं, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास जा सकते हैं, या फिर सिर्फ भगवान से प्रार्थना कर सकते हैं कि चोर उनके बल्ले लौटा दे। चाहर ने चुटकी लेते हुए कहा कि चोर शायद इन बल्लों को बेच देगा या फिर इनसे टेनिस-बॉल क्रिकेट खेलेगा। उन्होंने चोर से अपील की कि वह बल्ले वापस कर दे। चाहर ने यहां तक ऑफर दिया कि अगर उस व्यक्ति को पैसे चाहिए, तो वे बल्ले के बदले उसे पैसे देने को भी तैयार हैं। गेंदबाजी का अभ्यास करते वक्त गायब हुए बल्ले दीपक चाहर के पिता और उनके कोच लोकेंद्र चाहर के अनुसार, यह घटना आगरा के अरतौनी स्थित चाहर-डावर ग्राउंड पर प्रैक्टिस के दौरान हुई। चाहर जब मैदान पर गेंदबाजी का अभ्यास करने गए, तो उन्होंने अपना किट बैग वहीं रख दिया था। लगभग एक घंटे बाद जब वे बल्लेबाजी के लिए लौटे, तो उनके तीनों प्लेयर-एडिशन बल्ले गायब थे। सोशल मीडिया पर वायरल हुआ अनोखा वीडियो दीपक चाहर का यह वीडियो इंटरनेट पर काफी तेजी से वायरल हो रहा है। आमतौर पर चोरी होने पर खिलाड़ी पुलिस का रुख करते हैं, लेकिन चाहर की ओर से मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री का जिक्र करते हुए बनाई गई यह वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई है। दीपक चाहर सोशल मीडिया पर काफी ज्यादा एक्टिव हैं। भारतीय क्रिकेटर दीपक चाहर ने भारत के लिए 13 वनडे और 25 टी20 मैच खेले हैं, जिनमें उनके नाम क्रमशः 16 और 31 विकेट दर्ज हैं। वे लंबे समय से भारतीय टीम में वापसी की राह देख रहे हैं।

मेगन शुट्ट का 8 साल पुराना रिकॉर्ड टूटा, श्री चरणी ने रचा इतिहास

नई दिल्ली इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) ने मंगलवार को महिला खिलाड़ियों की ताजा रैंकिंग जारी की है। भारत की श्री चरणी ने महिला T20I बॉलिंग रैंकिंग में 817 रेटिंग तक पहुंचकर इतिहास पलट दिया है। वह इस फॉर्मेट में सबसे ज्यादा रेटिंग हासिल करने वाली गेंदबाज बन गई हैं। 22 वर्षीय स्पिनर चरणी ने ऑस्ट्रेलिया की मेगन शुट्ट का 8 आठ साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ा है। मेगन ने 2018 में 806 रेटिंग पॉइंट्स हासिल किए थे। चरणी ने हाल ही में टीम को आठवीं बार महिला एशिया कप का खिताब जिताने और एशियन गेम्स 2026 में गोल्ड मेडल दिलाने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने एशिया कप में 12 विकेट चटकाए। उन्होंने श्रीलंका के खिलाफ फाइनल में 20 रन देकर चार शिकार किए थे। उन्होंने एशियन गेम्स में जापान के खिलाफ अपने करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 10 रन खर्च करने के बाद चार विकेट झटके थे और भारत को सेमीफाइनल में पहुंचाया। चरणी ने 22 सितंबर को गोल्ड मेडल मैच में श्रीलंका के खिलाफ दो विकेट लिए। स्मृति मंधाना की टॉप 5 में एंट्री दीप्ति शर्मा ने श्रीलंका के खिलाफ फानल में तीन विकेट चटकाए थे। वह T20I बॉलिंग रैंकिंग में दूसरे पायदान पर कायम हैं। हालांकि, उनके 754 पॉइंट्स हो गए हैं। इंग्लैंड की सोफी एक्लेस्टोन (723) तीसरे स्थान पर हैं। वहीं, T20I बल्लेबाजों की सूची में स्मृति मंधाना टॉप 5 में वापस आ गई हैं। वह 754 अकों के साथ पांचवें नंबर पर हैं। बाएं हाथ की ओपनर ने गोल्ड मेडल मैच में 45 गेंदों में 79 रन बनाए थे, जिसमें पांच चौके और सात छक्के हैं। मंधाना की सलामी जोड़ीदार शेफाली वर्मा (शेफाली वर्मा) चौथे नंबर पर बरकरार हैं। उन्होंने फाइनल में 29 गेंदों में 48 रनों का योगदान दिया था। ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज बेथ मूनी (785) शीर्ष पर काबिज हैं। उनके बाद ऑस्ट्रेलिया की जॉर्जिया वोल (779) और साउथ अफ्रीका की लॉरा वोल्वार्ड्ट (766) हैं। महिला T20I गेंदबाजों की रैंकिंग में सबसे ज्यादा रेटिंग प्लेयर                    देश                     रेटिंग श्री चरणी                 भारत                  817 मेगन शुट्ट              ऑस्ट्रेलिया           806 सोफी एक्लेस्टोन      इंग्लैंड                  802 शबनीम इस्माइल    साउथ अफ्रीका        781 शेली नित्शके            ऑस्ट्रेलिया           780 महिला वनडे रैंकिंग में भी हुए बदलाव तीन मैचों की सीरीज अभी 1-1 से बराबरी पर है। वेस्टइंडीज की कप्तान हेली मैथ्यूज 711 पॉइंट्स के साथ वनडे बल्लेबाजों की रैंकिंग में तीन पायदान चढ़कर चौथे स्थान पर पहुंच गईं। उन्होंने पहले वनडे में 182 रनों की रिकॉर्ड पारी खेली थी। उनकी टीम की साथी रियालेना ग्रिमंड (270 पॉइंट्स) 34 स्थान ऊपर संयुक्त रूप से 102वें स्थान पर आ गईं। सीरीज के दूसरे मैच में वेस्टइंडीज के खिलाफ़ शानदार जीत दिलाने में जिम्बाब्वे की न्याशा ग्वांजुरा वनडे महिला बॉलिंग रैंकिंग में 52 स्थान चढ़कर 156वें ​​स्थान पर पहुंच गईं। उन्होंने नाबाद 18 रन बनाए और करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 33 रन देकर 4 विकेट लिए। जिम्बाब्वे की मोडेस्टर मुपाचिकवा ने बैटिंग रैंकिंग में बड़ी छलांग लगाई। वह 86 और 38 रन की पारी के बाद बनाने के बाद 16 स्थान ऊपर करियर के सर्वश्रेष्ठ 40वें स्थान पर पहुंच गईं। फ्रांसिस्का चिपारे 26 स्थान ऊपर चढ़कर संयुक्त रूप से 123वें स्थान पर आईं। वेस्ट इंडीज की अश्विनी मुनिसार (23 स्थान ऊपर संयुक्त रूप से 84वें पर) और आलिया एलेन (8 स्थान ऊपर चढ़कर 58वें पर) ने भी सुधार किया।

विराट कोहली को लेकर रोहित शर्मा का बड़ा बयान, ‘वह वही विराट रहेंगे’

नई दिल्ली भारत के दिग्गज क्रिकेटर्स रोहित शर्मा और विराट कोहली की दोस्ती सिर्फ मैदान तक सीमित नहीं रही है. करीब दो दशक से दोनों ने एक साथ क्रिकेट खेला है, मुश्किल दौर देखे हैं, बड़ी जीत का हिस्सा रहे हैं और कई यादगार मुकाबलों में भारत की उम्मीदों को संभाला है. अब रोहित शर्मा ने विराट कोहली के साथ अपनी दोस्ती, उनकी सोच और भारतीय क्रिकेट के लिए उनके योगदान पर खुलकर बात की है. रोहित शर्मा और विराट कोहली के इंटरनेशनल करियर की शुरुआत करीब एक साल के अंतर के साथ हुई थी. रोहित ने 2007 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखा, जबकि विराट ने 2008 में इंटरनेशनल डेब्यू किया. इसके बाद दोनों लंबे समय तक भारतीय टीम के अहम सदस्य रहे. अलग-अलग कप्तानों के साथ खेले, खुद कप्तानी की और फिर एक-दूसरे की कप्तानी में भी टीम के लिए योगदान दिया. रोहित शर्मा के मुताबिक इतने लंबे समय तक साथ खेलने के कारण दोनों के बीच एक ऐसी समझ विकसित हो गई है, जिसके लिए ज्यादा शब्दों की जरूरत नहीं पड़ती. रोहित ने जियोहॉटस्टार से कहा, 'हम दोनों के बीच मजबूत दोस्ती है. हम समझते हैं कि इस स्तर पर खेलने के लिए क्या चाहिए. हमारे तरीके अलग हैं, लेकिन ऐसा ही होना चाहिए, क्योंकि हर व्यक्ति अलग होता है.' रोहित शर्मा ने बताया कि दोनों की दोस्ती की शुरुआत ऑस्ट्रेलिया दौरे के आसपास हुई थी. उस दौर की कुछ पुरानी यादें आज भी दोनों के लिए खास हैं. उन्होंने कहा कि जब कभी टीवी पर उस समय से जुड़ा कोई वीडियो या पल सामने आता है, तो दोनों एक-दूसरे को देखकर हंसने लगते हैं. यानी सालों पुराने इस रिश्ते में क्रिकेट की गंभीरता के साथ दोस्ती और हल्के-फुल्के पलों की भी अपनी जगह रही है. कोहली बदलने वाले नहीं: रोहित शर्मा विराट कोहली के भारतीय क्रिकेट में योगदान को लेकर रोहित शर्मा ने किसी तरह के संदेह की गुंजाइश नहीं छोड़ी. उन्होंने कहा कि कोहली ने टीम के लिए जो हासिल किया है, वह सभी के सामने है और आगे भी उनके रवैये में कोई बड़ा बदलाव देखने को नहीं मिलेगा. रोहित ने कहा, 'उन्होंने टीम के लिए जो किया है, उसके बारे में सवाल करने की जरूरत नहीं है. यह सबके सामने है. आगे भी मुझे नहीं लगता कि कुछ बदलेगा. वह वही विराट कोहली रहेंगे, जिन्हें हम जानते हैं. वह आएंगे, अच्छी तैयारी करेंगे, रन बनाएंगे और टीम इंडिया को मैच जिताने की कोशिश करेंगे.' विराट कोहली ने तीनों फॉर्मेट में भारतीय टीम की कप्तानी की, जबकि रोहित शर्मा के नेतृत्व में भी वह लंबे समय तक टीम के प्रमुख बल्लेबाज रहे. रोहित का कहना है कि कप्तानी की जिम्मेदारी बदलने के बावजूद कोहली के काम करने के तरीके में कोई खास बदलाव नहीं आया. उन्होंने कहा, 'जब वह कप्तान थे, तब भी उनका रवैया लगभग ऐसा ही था. जब मैं कप्तान था, तब भी वह वैसे ही रहे. मुझे नहीं लगता कि इसमें कुछ बदलने की जरूरत है.' कोहली-रोहित की नजरें 2027 वर्ल्ड कप पर विराट कोहली पहले ही इसकी पुष्टि कर चुके हैं कि वो 2027 का वर्ल्ड कप उनके लिए आखिरी मेगा टूर्नामेंट होगा. कोहली के अनुभव को देखते हुए रोहित शर्मा का मानना है कि उन्हें विश्व कप को लेकर कुछ समझाने की जरूरत नहीं है. रोहित ने कहा, 'वह इतने सालों से खेल रहे हैं. चाहे 2027 का विश्व कप हो या 2023 का, उन्हें कुछ समझाने की जरूरत नहीं है. विश्व कप, विश्व कप होता है.' रोहित शर्मा और विराट कोहली की बल्लेबाजी शैली अलग है. मैदान पर उनका व्यवहार भी एक जैसा नहीं है. लेकिन जब बात भारतीय टीम के लक्ष्य की आती है, तो दोनों की सोच एक ही दिशा में जाती है. रोहित शर्मा ने कहा, 'हम दोनों अलग-अलग व्यक्ति हैं और मैदान पर खुद को अलग तरीके से पेश करते हैं. लेकिन टीम के लिए हमारा लक्ष्य और सोच लगभग एक जैसी है. हमें मैच जीतना है, विश्व कप जीतना है, टूर्नामेंट जीतना है, सीरीज जीतनी है और टीम के लिए अच्छा करना है.' रोहित शर्मा ने बदलते क्रिकेट कैलेंडर का एक दूसरा पहलू भी बताया. पहले भारतीय क्रिकेटरों को लगातार दौरे करने पड़ते थे. कई बार पांच-सात दिन के अंतराल में ही अगली सीरीज के लिए रवाना होना पड़ता था. इसका असर निजी जिंदगी और परिवार के साथ बिताए जाने वाले समय पर भी पड़ता था. अब दोनों को पहले की तुलना में घर पर ज्यादा समय मिल रहा है. रोहित ने बताया, 'करीब एक साल पहले तक हर पांच-सात दिन में हम दौरे पर होते थे. इसलिए घर पर ज्यादा समय नहीं मिल पाता था. अब हम दोनों घर पर ज्यादा समय बिता रहे हैं, जो हमेशा अच्छा लगता है." करीब दो दशक के इस सफर में रोहित शर्मा और विराट कोहली ने भारतीय क्रिकेट के कई दौर देखे हैं. टीम बदली, कप्तान बदले, भूमिकाएं बदलीं, लेकिन दोनों के बीच आपसी समझ और भारत के लिए जीत हासिल करने की इच्छा कायम रही. 2027 विश्व कप की तैयारी के बीच रोहित की बातें इस लंबे रिश्ते की उस तस्वीर को सामने लाती हैं, जिसमें प्रतिस्पर्धा से ज्यादा सम्मान, अनुभव से ज्यादा समझ और व्यक्तिगत उपलब्धियों से ऊपर टीम की जीत दिखाई देती है.

बारिश-ठंड में 28 का सटीक निशाना, नीरू ने रचा एशियन गेम्स इतिहास

नई दिल्ली भारतीय सेना में नायब सूबेदार नीरू ने बारिश से भीगे शूटिंग रेंज और गिरते तापमान के बीच कमाल का संयम दिखाया. फाइनल में चीन की सुन युनोंग ने 26 निशाने साधे, जबकि कुवैत की अब्दुलमलिक हाजर 21 के स्कोर के साथ पीछे रहीं. नीरू ने 28 का स्कोर बनाकर मुकाबला अपने नाम कर लिया.     10 दिन पहले फ्लू हुआ था… भोपाल में थीं भर्ती भोपाल में एशियन गेम्स से करीब 10 दिन पहले नीरू को तेज फ्लू हुआ था. बीमारी इतनी गंभीर थी कि उन्हें अस्पताल में भर्ती होना पड़ा. वह पांच दिन तक खाना तक नहीं खा सकीं. बीमारी को लेकर H1N1 की आशंका भी जताई गई थी. ऐसे वक्त में एशियन गेम्स में उतरना भी सवाल था और फॉर्म को लेकर भी संशय था… लेकिन नीरू के निजी कोच और पूर्व अंतरराष्ट्रीय निशानेबाज मंशेर सिंह ने उन्हें बीमारी को पीछे छोड़कर सिर्फ टारगेट पर ध्यान देने को कहा. नीरू ने वही किया. उन्होंने जीत के बाद कहा, 'मंशेर सर ने सिर्फ इतना कहा कि जो हुआ उसे भूल जाओ और टारगेट पर ध्यान दो. मैंने वही किया.' … बारिश और ठंड भी नहीं रोक सकी मंगलवार को शूटिंग रेंज का मौसम भी आसान नहीं था. लगातार बारिश और खराब विजिबिलिटी ने उड़ते हुए क्ले टारगेट को देखना मुश्किल कर दिया था. तापमान भी नीचे जा रहा था. लेकिन नीरू का निशाना नहीं डगमगाया. क्वालिफिकेशन के शुरुआती चार राउंड में उन्होंने 100 में 95 निशाने साधे और बढ़त बना ली. पांचवें राउंड में उन्होंने 23 का स्कोर किया. कुल 118 के स्कोर के साथ वह कतर की बासिल रे के बराबर रहीं और आठ निशानेबाजों वाले फाइनल में पहुंच गईं. इसके बाद शुरू हुआ असली इम्तिहान. आखिरी पांच निशाने और गोल्ड फाइनल में जैसे-जैसे मुकाबला आगे बढ़ा, मुश्किल मौसम का असर दूसरे निशानेबाजों पर दिखने लगा. लेकिन नीरू अपनी लय में बनी रहीं. आखिरी पांच निशानों से पहले उनके पास चीन की सुन युनोंग पर दो अंक की बढ़त थी. इसी दौरान नीरू को येलो कार्ड भी दिखाया गया. कुछ देर के लिए फैसला विवादित रहा और फिर उन्हें इसका लाभ मिला. वापसी के बाद नीरू ने एक बार फिर अपना फोकस दिखाया. आखिरी पांचों टारगेट पर निशाना सटीक लगा. 28/30…गोल्ड पक्का आखिरी टारगेट टूटते ही भारतीय खेमे में जश्न शुरू हो गया. भारत के ब्रिटिश कोच और ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट पीटर विल्सन ने नीरू को तिरंगे में लपेट लिया. नीरू हालांकि बेहद शांत नजर आईं. जैसे उन्हें पता हो कि अभी कहानी पूरी नहीं हुई है. पहले टीम सिल्वर, फिर व्यक्तिगत गोल्ड नीरू ने इसी दिन पहले टीम स्पर्धा में भी भारत को सिल्वर दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी. नीरू के 118, आशीमा अहलावत के 106 और मनीषा कीर के 104 के स्कोर से भारत का कुल स्कोर 328 रहा. चीन ने 346 के स्कोर के साथ गोल्ड जीता, जबकि कुवैत को 325 के साथ ब्रॉन्ज मिला. लेकिन दिन का सबसे बड़ा पल नीरू के लिए व्यक्तिगत फाइनल में आया. वह महिलाओं की ट्रैप स्पर्धा में एशियन गेम्स का व्यक्तिगत मेडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला बन गईं और भारत के लिए मौजूदा गेम्स में व्यक्तिगत शूटिंग गोल्ड जीतने वाली पहली निशानेबाज भी बनीं. 2017 में शुरू हुआ सफर नीरू का शूटिंग सफर 2017 में मध्य प्रदेश शूटिंग अकादमी पहुंचने के बाद तेजी से आगे बढ़ा. उन्हें उनके चचेरे भाई और 2018 एशियन गेम्स में पुरुषों की ट्रैप स्पर्धा के सिल्वर मेडलिस्ट लक्ष्य श्योराण ने इस खेल को अपनाने के लिए प्रेरित किया था. इसके बाद नीरू ने पीछे मुड़कर नहीं देखा. हाल ही में उन्होंने इटली के लोनाटो में ISSF वर्ल्ड कप में ट्रैप का गोल्ड जीतकर इतिहास रचा था. वह इस स्पर्धा में ISSF वर्ल्ड कप का व्यक्तिगत गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनी थीं. अब एशियन गेम्स का गोल्ड भी उनके नाम है. गोल्ड जवानों को समर्पित नीरू ने अपनी इस ऐतिहासिक जीत को भारतीय सेना के जवानों को समर्पित किया. उन्होंने कहा कि सीमा पर देश की रक्षा करने वाले जवानों के सामने उनकी उपलब्धि कुछ भी नहीं है. उन्होंने 1978 के बैंकॉक एशियन गेम्स में भारत को ट्रैप का पहला गोल्ड दिलाने वाले रणधीर सिंह को भी याद किया. नीरू ने बताया कि रणधीर सिंह हमेशा उन्हें गर्मजोशी से मिलते थे और सलाह देते थे. अब नीरू ने उसी विरासत में अपना नाम जोड़ दिया है. लेकिन नीरू की नजर सिर्फ एशियन गेम्स के गोल्ड पर नहीं रुकी है. उनके लिए यह सफर आगे भी जारी है. उनका अगला बड़ा निशाना ओलंपिक है.

8:21.67 का सीजन बेस्ट भी नहीं दिला सका मेडल, अविनाश साबले चौथे स्थान पर

नई दिल्ली  एशियन गेम्स में भारत के स्टार एथलीट अविनाश साबले के फैंस को इस बार निराशा का सामना करना पड़ा है। पुरुषों की 3000 मीटर स्टीपलचेज के फाइनल मुकाबले में अविनाश साबले पदक हासिल करने से चूक गए और चौथे स्थान पर रहे। साबले ने इस रेस में 8:21.67 का अपना इस सीजन का सर्वश्रेष्ठ समय निकाला लेकिन यह उन्हें पोडियम तक पहुंचाने के लिए काफी नहीं था। जापान के खिलाड़ियों का कमाल इस स्पर्धा में जापानी एथलीटों का पूरी तरह से दबदबा देखने को मिला। जापान के रयुजी मियुरा ने 8:17.36 का नया गेम्स रिकॉर्ड बनाते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया। वहीं उनके ही देश के रयोमा आओकी ने 8:17.60 का अपना व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ समय निकालकर सिल्वर मेडल जीता। कतर के जकारिया एलाहलामी ने 8:18.13 के समय के साथ ब्रॉन्ज मेडल पर कब्जा जमाया। पिछली बार जीता था गोल्ड पिछली बार एशियन गेम्स में भारत को गोल्ड मेडल दिलाने वाले अविनाश साबले इस बार अपने खिताब का बचाव नहीं कर सके। अविनाश भारतीय एथलेटिक्स के सबसे बड़े नामों में से एक हैं और पुरुषों की 3000 मीटर स्टीपलचेज स्पर्धा में नेशनल रिकॉर्ड उनके ही नाम दर्ज है। उन्होंने 2022 के बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों में ऐतिहासिक सिल्वर मेडल जीतकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई थी जहां उन्होंने केन्याई एथलीटों के वर्चस्व को तोड़ा था। भारतीय सेना में शामिल महाराष्ट्र के बीड़ जिले के एक छोटे से गांव मांडवा से ताल्लुक रखने वाले अविनाश साबले का जीवन संघर्षों से भरा रहा है। एक साधारण किसान परिवार में जन्मे साबले बचपन में स्कूल जाने के लिए रोजाना कई किलोमीटर पैदल या दौड़कर जाया करते थे, जिसने अनजाने में ही उनकी रनिंग की नींव रखी। 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद वह भारतीय सेना में शामिल हो गए और महार रेजीमेंट का हिस्सा बने। सेना में रहते हुए ही उनकी प्रतिभा को पहचाना गया और उन्होंने प्रोफेशनल रनिंग की शुरुआत की, जिसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

7,934 अंक के साथ तेजस्विन शंकर को कांस्य, 1500 मीटर में दर्ज की शानदार जीत

नागोया  तेजस्विन शंकर ने एशियाई खेलों की डेकाथलॉन स्पर्धा में कांस्य पदक जीता है। अब वह अमेरिका जाकर छात्रों की कॉपियां चेक करेंगे। हालांकि, उन्हें सिल्वर मेडल न जीत पाने का मलाल रहेगा। पिछले एशियाई खेलों में रजत पदक जीतने वाले तेजस्विन ने रविवार को 7,934 अंक के साथ कांस्य पदक जीता। जापान के युमा मुरुयामा ने 8,123 अंक के साथ स्वर्ण पदक जीता, जबकि चीन के चेन एक्स ने 8,012 अंक जुटाकर रजत पदक अपने नाम किया। मुरुयामा ने पिछले एशियाई खेलों में कांस्य पदक जीता था। तेजस्विन ने निराशा भरे अंदाज में कहा, 'कांस्य वह पदक नहीं था, जिसे मैं जीतना चाहता था। मुझे इस कांस्य के सिलसिले को खत्म करना होगा। इस समय मैं काफी निराश हूं। मुझे नहीं लगता कि मैंने कांस्य जीता है, बल्कि मैंने रजत गंवाया है।' दिल्ली के 27 वर्षीय एथलीट ने 10 स्पर्धाओं वाली डेकाथलॉन की आखिरी स्पर्धा 1500 मीटर दौड़ 4:33.09 के समय के साथ जीती। उन्होंने मुरुयामा (4:33.92) को पीछे छोड़ा। हालांकि, 1500 मीटर के नतीजे का पदकों पर खास असर नहीं पड़ा, क्योंकि इससे पहले ही मुरुयामा स्वर्ण पदक के लिए पर्याप्त अंक हासिल कर चुके थे। स्वर्ण का लक्ष्य नहीं था तेजस्विन जानते थे कि स्वर्ण पदक उनकी पहुंच से बाहर है, लेकिन 1500 मीटर दौड़ के दौरान उनके दिमाग में फरवरी में चीन में हुई एशियाई इंडोर चैंपियनशिप की हेप्टाथलॉन स्पर्धा के दौरान मुरुयामा से 1000 मीटर दौड़ में मिली हार चल रही थी। इंडोर चैंपियनशिप में सात स्पर्धाएं होती है। तेजस्विन ने कहा, 'उस समय बात पदक की नहीं थी, बल्कि इस बात की थी कि युमा ने एशियाई इंडोर चैंपियनशिप में आखिरी एक किलोमीटर में मुझे हरा दिया था। सोशल मीडिया पर उस दौड़ की रील काफी चलती है। जब भी मैं वह रील देखता हूं, मुझे लगता है कि स्वर्ण जीतने के बावजूद मैं उस एक किलोमीटर में उसे नहीं हरा सका। इसलिए 1500 मीटर की पूरी दौड़ के दौरान जब वह मुझसे आगे था, मेरे दिमाग में यही चल रहा था कि मुझे उसे पकड़ना है। आखिर में मैं उसे वही जवाब दूंगा, जो उसने उस दिन मुझे दिया था।' रेस जीतने से खुश तेजस्विन ने 1500 मीटर दौड़ जीतने पर संतोष जताया। उन्होंने लंबी कूद और ऊंची कूद में भी जीत हासिल की। उन्होंने कहा, 'वह पूरी दौड़ में आगे था। उसने एशियाई इंडोर चैंपियनशिप में भी ऐसा ही किया था। मुझे पता था कि कब बढ़त लेनी है और मैंने बिल्कुल वही किया। 1500 मीटर में अपने प्रदर्शन से मैं काफी संतुष्ट था।' एशियाई खेलों से पहले तेजस्विन ने तीन डेकाथलॉन प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया था। इनमें ग्लास्गो में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स भी शामिल थे, जहां उन्होंने कांस्य पदक जीता था। इसके अलावा उन्होंने एशियाई इंडोर चैंपियनशिप में हेप्टाथलॉन में भी हिस्सा लिया था। उनका मानना है कि इस साल एक प्रतियोगिता ज्यादा हो गई। उन्होंने कहा, 'मुरुयामा ने अप्रैल में एक डेकाथलॉन में हिस्सा लिया और फिर मई में एक और प्रतियोगिता में उतरे, हालांकि वह उसे पूरा नहीं कर सके। यह उनका दूसरा डेकाथलॉन था। ये चीजें मायने रखती हैं। मैं 30 जनवरी से लगातार प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले रहा हूं। मैं किसी को दोष नहीं दे रहा। इस साल मैंने चार प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया। मैं खुश हूं कि भारतीय एथलेटिक्स महासंघ (एएफआई) ने मुझे राष्ट्रीय अंतरराज्यीय चैंपियनशिप से हटने की अनुमति दी।' तेजस्विन ने लगातार अच्छा प्रदर्शन किया मई में फेडरेशन कप के दौरान 8,057 अंक का राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाने वाले तेजस्विन इस बार उस आंकड़े के करीब नहीं पहुंच सके, लेकिन पूरे सत्र में उनका प्रदर्शन लगातार अच्छा रहा। उन्होंने कहा, 'इस साल मेरी हर डेकाथलॉन में 7,900 से अधिक अंक रहे हैं। यह अपने आप में मेरे सुधार को दर्शाता है। एक बड़े प्रदर्शन से ज्यादा महत्वपूर्ण निरंतरता है। अब मुझे 8,300 अंक तक पहुंचने के लिए 300 और अंक जुटाने होंगे और अगले साल विश्व चैंपियनशिप के लिए क्वालीफाई करना होगा। यही मेरी अगली चुनौती है।' अमेरिका में कॉपी चेक करेंगे तेजस्विन प्रतियोगिता खत्म होने के बाद तेजस्विन अब अमेरिका लौटकर अपनी पढ़ाई और शिक्षण संबंधी जिम्मेदारियां संभालेंगे। वह अमेरिका की कंसास स्टेट यूनिवर्सिटी के काइन्सियोलॉजी विभाग में स्नातक शिक्षण सहायक हैं। साल के बाकी महीनों में कुछ आराम करने के बाद वह अपनी यह जिम्मेदारी निभाएंगे। उन्होंने कहा, 'मैं मंगलवार को अमेरिका वापस जा रहा हूं। मेरी विश्वविद्यालय की जिम्मेदारियां हैं। मैं ‘टीचिंग असिस्टेंट’ हूं और मुझे विद्यार्थियों के ‘असाइनमेंट’ जांचने हैं। मैं एक सप्ताह से अपने छात्रों से नहीं मिला हूं, इसलिए मुझे वापस जाकर काम शुरू करना होगा।' जब उनसे पूछा गया कि क्या वह कंसास के अपने छात्रों के लिए आदर्श बन सकते हैं, तो तेजस्विन ने कहा, 'बिल्कुल नहीं। मुझे किसी के लिए आदर्श बनने की परवाह नहीं है। अगर कोई मेरी प्रशंसा करना चाहता है तो यह ठीक है।'