samacharsecretary.com

विराट कोहली रच सकते हैं नया इतिहास, इस महान खिलाड़ी ने जताया शतकों के शतक का भरोसा

नई दिल्ली भारत के पूर्व महान बल्लेबाज सुनील गावस्कर ने रन मशीन विराट कोहली को लेकर एक बड़ी भविष्यवाणी की है। सुनील गावस्कर ने दावा किया है कि विराट कोहली भी सचिन तेंदुलकर के शतकों के शतक वाले विश्व रिकॉर्ड की बराबरी कर सकते हैं। सुनील गावस्कर का ये भी दावा है कि विराट कोहली वर्ल्ड कप 2027 के बाद भी खेल सकते हैं। विराट इस समय सिर्फ वनडे इंटरनेशनल क्रिकेट में एक्टिव हैं और हाल ही में समाप्त हुई साउथ अफ्रीका के खिलाफ 3 मैचों की वनडे सीरीज में प्लेयर ऑफ द सीरीज रहे, जिसमें उन्होंने दो शतक और एक नाबाद अर्धशतक जड़ा। विराट कोहली 84 शतक इंटरनेशनल क्रिकेट में जड़ चुके हैं। वे पहले से ही एक फॉर्मेट में सबसे ज्यादा शतक जड़ने वाले बल्लेबाज हैं और सुनील गावस्कर ने जियोहॉस्टार पर कहा, "क्यों नहीं? अगर वह तीन साल और खेलते हैं तो उसे यहां से 16 शतक और चाहिए।" कोहली ने साउथ अफ्रीका के खिलाफ वनडे सीरीज में 302 रन बनाए। 3 मैचों की वनडे सीरीज में पहली बार उन्होंने 300 या इससे ज्यादा रन बनाए। गावस्कर ने मुकाबले के बाद कहा, "जिस तरह से वह बैटिंग कर रहा है, उसने तीन मैचों की सीरीज में दो शतक बनाए हैं। आगे चलकर, अगर वह न्यूजीलैंड के खिलाफ तीन मैचों की सीरीज में दो और शतक बनाता है, तो वह 86 तक पहुंच जाएगा। इसलिए उसके 100 तक पहुंचने के चांस बहुत ज्यादा हैं, बहुत अच्छे हैं। जिस तरह से वह बैटिंग कर रहा है, वह खुद को एन्जॉय कर रहा है। जिस तरह से उन्होंने आज (शनिवार) बैटिंग की, यह जानते हुए कि मैच लगभग भारत की मुट्ठी में था—उन्हें पता था कि ओपनर्स ने अच्छी नींव रख दी है और उनके बाद अच्छे फॉर्म वाले बैट्समैन आने वाले हैं।" क्या वर्ल्ड कप तक हो जाएंगे 100 शतक? टीम इंडिया को वर्ल्ड कप 2027 तक करीब 35 वनडे मैच खेलने हैं। इस दौरान 16 शतक लगाना बहुत मुश्किल है। अगर वे वर्ल्ड कप के बाद खेलते हैं तो निश्चित तौर पर 100 शतकों तक पहुंच सकते हैं। हालांकि, एक बात तय है कि वे 90 से ज्यादा शतक आसानी से लगा सकते हैं। वे इस समय 36 साल के हैं और करियर के अंतिम पड़ाव पर भी दमदार बल्लेबाजी कर रहे हैं। पिछले 10 पारियों में 3 शतक वे जड़ चुके हैं।  

एशेज 2025 में कंगारुओं का दबदबा: डे-नाइट टेस्ट 8 विकेट से जीता, सीरीज पर मजबूत पकड़

ब्रिस्बेन पिंक बॉल डे-नाइट टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया के तेज गेंदबाज मिचेल स्टार्क और माइकल नेसर ने इंग्लैंड की बल्लेबाज़ी पूरी तरह तहस-नहस कर दी। स्टार्क ने मैच में कुल 8 विकेट झटके, जबकि नेसर ने 6 बड़े झटके देकर इंग्लैंड को दोनों पारियों में उभरने नहीं दिया। दोनों गेंदबाज़ों की सटीक लाइन, स्विंग और गति के आगे इंग्लैंड के बल्लेबाज टिक ही नहीं पाए और लगातार दबाव में जूझते रहे। रूट का शतक भी इंग्लैंड को नहीं बचा पाया इंग्लैंड की पहली पारी की जान रहे जो रूट ने 138 रन की बेहतरीन पारी खेली। 206 गेंदों में 15 चौकों और एक छक्के से सजी उनकी यह पारी इंग्लैंड को सम्मानजनक स्कोर तक ले गई। लेकिन रूट के अलावा कोई भी बल्लेबाज बड़ा योगदान नहीं दे सका। मिचेल स्टार्क ने 6 विकेट निकालकर इंग्लैंड को 334 रन पर रोक दिया और मैच पर ऑस्ट्रेलिया की पकड़ मजबूत कर दी। रूट का शतक शानदार था, लेकिन टीम को मुश्किल स्थिति से निकालने में नाकाम रहा। ऑस्ट्रेलिया की पहली पारी में बल्लेबाज़ों का जलवा ऑस्ट्रेलिया ने बल्लेबाज़ी में पूरी तरह दबदबा दिखाया और 511 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया। जेक वेदराल्ड ने 72, लाबुशेन ने 65, स्टीव स्मिथ ने 61 और एलेक्स कैरी ने 63 रन की शानदार पारियां खेलीं। इन सबके अलावा मिचेल स्टार्क ने भी 141 गेंदों में संघर्षपूर्ण 77 रन बनाकर इंग्लैंड को पूरी तरह मैच से बाहर कर दिया। इंग्लैंड की ओर से सिर्फ ब्राइडन कार्स ही थोड़ी सफलता हासिल कर पाए, जिन्होंने 4 विकेट लिए लेकिन 152 रन भी लुटाए। इंग्लैंड की दूसरी पारी फिर ताश के पत्तों की तरह बिखरी दूसरी पारी में इंग्लैंड एक बार फिर ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज़ों के सामने टिक नहीं पाया। टीम 241 रन पर सिमट गई। कप्तान बेन स्टोक्स ने 50 और विल जैक्स ने 41 रन बनाकर कुछ देर संघर्ष जरूर किया, लेकिन माइकल नेसर की घातक गेंदबाज़ी ने सारा खेल ख़त्म कर दिया। नेसर ने 5 विकेट लेकर इंग्लैंड की उम्मीदों पर पानी फेर दिया, और ऑस्ट्रेलिया के सामने सिर्फ 65 रन का बेहद आसान लक्ष्य छोड़ा। 65 रन का छोटा लक्ष्य — ऑस्ट्रेलिया की आसान जीत लक्ष्य का पीछा करते हुए ऑस्ट्रेलिया ने जीत हासिल करने में कोई देरी नहीं की। ट्रैविस हेड ने तेज 22 रन बनाए, जबकि स्टीव स्मिथ ने सिर्फ 9 गेंदों में 23 रन ठोककर मैच खत्म कर दिया। स्मिथ ने अपनी पारी में दो चौके और दो छक्के जमाए। जेक वेदराल्ड भी 17* पर नाबाद लौटे। ऑस्ट्रेलिया ने 69/2 बनाकर 8 विकेट से मैच जीत लिया और एशेज सीरीज में 2–0 की मजबूत बढ़त बना ली।  

सीरीज जीत के बाद गंभीर ने दिया स्पष्ट संदेश— ‘अनुभव जरूरी है, पर युवा जोश ही भविष्य है’

विशाखापट्टनम  साउथ अफ्रीका के खिलाफ टीम इंडिया ने 3 मैचों की वनडे सीरीज को 2-1 से अपने नाम किया। इसके बाद भारतीय टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर ने विराट कोहली और रोहित शर्मा की जमकर प्रशंसा की। गंभीर ने रोहित और विराट के बारे में बात करते हुए कहा कि इन दोनों सीनियर खिलाड़ियों का अनुभव टीम के लिए काफी मायने रखता है, लेकिन इसके साथ ही युवा खिलाड़ियों का प्रदर्शन भी इस सीरीज में अविश्वसनीय रहा है। कोहली ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ हाल में समाप्त हुई वनडे सीरीज में दो शतक और एक अर्धशतक लगाया, जबकि रोहित शर्मा ने दो अर्धशतक जमाकर भारत को जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई। विराट कोहली के बल्ले से 300 से ज्यादा रन निकले, जबकि 146 रन रोहित शर्मा ने भी बनाए। यशस्वी जायसवाल ने 3 मैचों में एक शतक के साथ कुल 156 रन बनाए। गंभीर ने उम्मीद जताई कि दोनों दिग्गज खिलाड़ी इसी तरह का प्रदर्शन जारी रखेंगे। उन्होंने तीसरे और अंतिम वनडे में भारत की नौ विकेट से जीत के बाद पत्रकारों से कहा, ‘‘वे बेहतरीन खिलाड़ी हैं। मैंने कई बार कहा है कि वे विश्वस्तरीय खिलाड़ी हैं। वे इस प्रारूप के बेहतरीन खिलाड़ी हैं और ड्रेसिंग रूम में उनका अनुभव वास्तव में बहुत मायने रखता है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘वे वही कर रहे हैं जो वे करते रहे हैं। वे भारतीय क्रिकेट के लिए इतने लंबे समय से ऐसा प्रदर्शन करते आ रहे हैं। उम्मीद है कि वे आगे भी इसी तरह का प्रदर्शन जारी रखेंगे।’’ सीनियर तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह और मोहम्मद सिराज को विश्राम दिए जाने तथा शुभमन गिल और हार्दिक पंड्या की चोट के कारण अनुपस्थिति ने भारत को कुछ युवा खिलाड़ियों के कौशल को परखने का मौका दिया। गंभीर हर्षित राणा के गेंदबाजी ऑलराउंडर के रूप में उभरने से विशेष रूप से प्रसन्न थे। उन्होंने कहा, ‘‘हम हर्षित जैसे खिलाड़ी को इस तरह से तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं जो वास्तव में नंबर आठ पर बल्लेबाजी करते हुए अपना योगदान दे सके। हमें इसी तरह संतुलन बनाना होगा, क्योंकि दो साल बाद (2027 वनडे विश्व कप के लिए) दक्षिण अफ्रीका दौरे पर हमें तीन अच्छे तेज गेंदबाजों की भी ज़रूरत होगी। अगर वह एक गेंदबाजी ऑलराउंडर के रूप में खुद को स्थापित करता है तो यह हमारे लिए अच्छा होगा।’’ गंभीर भी तेज गेंदबाज अर्शदीप सिंह और प्रसिद्ध कृष्णा के प्रदर्शन से प्रभावित दिखे। उन्होंने कहा, ‘‘इस श्रृंखला में अर्शदीप, प्रसिद्ध और हर्षित का प्रदर्शन अविश्वसनीय रहा। इन तीनों के पास विशेषकर 50 ओवर के प्रारूप में बहुत अनुभव नहीं है। उन्होंने मुश्किल से 15 से भी कम वनडे खेले हैं लेकिन उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया।’’  

क्या अब दिग्गजों के लिए बदलेगा नियम? रोहित और कोहली को लेकर पूर्व कोच का बड़ा बयान

विशाखापट्टनम भारतीय टीम के पूर्व बल्लेबाजी कोच संजय बांगर ने विराट कोहली और रोहित शर्मा को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। संजय बांगर का मानना ​​है कि विराट कोहली और रोहित शर्मा का पिछले कुछ वर्षों में प्रदर्शन को देखते हुए उनके साथ अलग तरह का व्यवहार किया जाना चाहिए। संजय बांगर ने ये भी कहा है कि रोहित और विराट के वनडे टीम में जगह को लेकर कभी भी बहस नहीं होनी चाहिए।   राष्ट्रीय चयन समिति के सदस्य और मुख्य कोच गौतम गंभीर इस सीनियर जोड़ी के 2027 विश्व कप तक फॉर्म और फिटनेस बरकरार रखने को लेकर भले ही संशय में हो सकते हैं, लेकिन दोनों बल्लेबाजों ने पिछले छह वनडे मैचों में तीन शतक (कोहली के दो) और पांच अर्धशतक (रोहित के तीन) लगाकर बतला दिया है कि उनका कोई सानी नहीं है। बांगर ने जिओस्टार से कहा, ‘‘मुझे नहीं लगता कि टीम में विराट कोहली और रोहित शर्मा की जगह को लेकर सवाल उठाए जाने चाहिए। उनके इतने वर्षों में टीम को दिए गए योगदान पर गौर करना चाहिए।’’ कोहली और रोहित अब केवल वनडे प्रारूप में ही खेलते हैं। भारत पिछले कुछ समय से इस प्रारूप में बहुत कम मैच खेल रहा है और बांगर का मानना है कि उन्हें लय हासिल करने में कुछ समय लग सकता है। उन्होंने कहा, ‘‘वे दो प्रारूपों से संन्यास ले चुके हैं, इसलिए ज़ाहिर है कि उन्हें लय हासिल करने में कुछ समय लग सकता है लेकिन वे ऐसा कई बार कर चुके हैं। उन्हें किसी युवा खिलाड़ी जितने मैच खेलने की जरूरत नहीं है। एक बार वे जब अपनी लय हासिल कर लेते हैं और पूरी तरह फिट तथा रन बनाने के लिए भूखे हैं तो आप इस तरह के खिलाड़ियों को टीम में चाहते हैं। आपको उनके साथ अलग तरह से व्यवहार करना होगा और उन्हें अपना नैसर्गिक खेल खेलने की छूट देनी होगी।’’ उन्होंने कहा, ‘‘‘जब वे लय में होते हैं तो आपको अंतर साफ नजर आता है। उनकी उपस्थिति मात्र से ड्रेसिंग रूम का माहौल बदल जाता है। टेस्ट श्रृंखला में हार के बाद उन्होंने निश्चित तौर पर युवा खिलाड़ियों से बात की होगी। उन्होंने खिलाड़ियों को पुरानी बातों को पीछे छोड़कर स्वच्छंद होकर खेलने के लिए प्रेरित किया होगा जिससे पूरी टीम का आत्मविश्वास बढ़ा।’’  

शादी को लेकर पहली बार खुलकर बोलीं मंधाना, पलाश संग रिश्ते पर किया अहम एलान

नई दिल्ली  भारतीय महिला टीम की उपकप्तान स्मृति मंधाना ने पलाश मुछाल के साथ शादी टलने के बाद चुप्पी तोड़ी है। मंधाना ने इंस्टाग्राम स्टोरी पर लंबा बयान जारी किया और इस बात की जानकारी दे दी है कि पलाश मुछाल के साथ उनकी शादी रद्द हो गई है। मालूम हो कि मंधाना और पलाश मुछाल की शादी 23 नवंबर को होने वाली थी, लेकिन उसी दिन इसे टाल दिया गया था। अब मंधाना ने बयान जारी कर स्पष्ट कर दिया है शादी रद्द कर दी गई है। मंधाना ने निजता का सम्मान करने का आग्रह किया मंधाना ने रविवार को इंस्टाग्राम स्टोरी पर लिखा, पिछले कुछ सप्ताह से मेरे जीवन को लेकर काफी अटकलें लगाई जा रही हैं और मुझे लगता है कि इस समय मेरे लिए खुलकर बोलना जरूरी है। मैं बहुत निजी इंसान हूं और मैं इसे इसी तरह रखना चाहती हूं, लेकिन मुझे यह स्पष्ट करना होगा कि शादी रद्द कर दी गई है। मैं इस मामले को यहीं समाप्त करना चाहती हूं और आप सभी से भी यही करने की विनती करती हूं। मैं आपसे अनुरोध करती हूं कि इस समय दोनों परिवारों की निजता का सम्मान करें और हमें अपनी गति से आगे बढ़ने का समय दें।   मंधाना बोलीं- भारत के लिए सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने पर ध्यान केंद्रित मंधाना ने लिखा, मेरा मानना है कि हम सभी के पीछे एक बड़ा उद्देश्य है और मेरे लिए वह उद्देश्य हमेशा अपने देश का सर्वोच्च स्तर पर प्रतिनिधित्व करना रहा है। मैं उम्मीद करती हूं कि मैं भारत के लिए यथासंभव लंबे समय तक खेलती रहूं और ट्रॉफियां जीतती रहूं और मेरा ध्यान हमेशा इसी पर रहेगा। आप सभी के समर्थन के लिए धन्यवाद। अब आगे बढ़ने का समय है। पलाश की भी आई प्रतिक्रिया मंधाना के बाद पलाश मुछाल ने भी इंस्टाग्राम स्टोरी पर लिखा कि उन्होंने निजी रिश्तों से दूर रहने का फैसला किया है। पलाश ने लिखा, मैंने अपनी जिंदगी में आगे बढ़ने और निजी रिश्तों से दूर रहने का फैसला किया है। मेरे लिए यह देखना बहुत मुश्किल रहा है कि लोग मेरे लिए सबसे पवित्र चीज के बारे में बेबुनियाद अफवाहों पर इतनी आसानी से प्रतिक्रिया देते हैं। यह मेरे जीवन का सबसे कठिन दौर है और मैं अपने विश्वासों पर अडिग रहकर इससे निपटूंगा। मैं सचमुच उम्मीद करता हूं कि हम एक समाज के रूप में, किसी के बारे में बिना पुष्टि की गई अफवाहों के आधार पर राय बनाने से पहले रुकना सीखें, जिनके स्रोत कभी पहचाने नहीं जाते। हमारे शब्द हमें ऐसे जख्म दे सकते हैं जिन्हें हम कभी समझ नहीं पाएंगे। पलाश ने आगे लिखा, जब हम इन बातों के बारे में सोचते हैं, तो दुनिया में कई लोग गंभीर परिणामों का सामना कर रहे होते हैं। मेरी टीम झूठी और अपमानजनक स्टोरी फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करेगी। इस कठिन समय में मेरे साथ खड़े रहने वाले सभी लोगों का धन्यवाद। अचानक टली थी शादी मंधाना और संगीतकार पलाश की शादी के दिन मंधाना के पिता श्रीनिवास मंधाना गंभीर रूप से बीमार पड़ गए थे और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। शादी से ठीक पहले मंधाना के मैनेजर ने इस बात की जानकारी दी थी कि मंधाना के पिता की तबीयत बिगड़ने के कारण शादी अनिश्चितकाल के लिए टाली गई है। इसके अगले ही दिन पलाश भी बीमार हो गए थे। इसके बाद से ही पलाश और मंधाना के रिश्तों को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही थी। अब मंधाना ने स्पष्ट किया है कि शादी रद्द हो गई है।  

फिटनेस पहले! केक ऑफर ठुकराते हुए बोले रोहित शर्मा – ‘फिर से मोटा नहीं होना’

विशाखापत्तनम  भारतीय टीम के पूर्व कप्तान रोहित शर्मा अपनी फिटनेस पर अधिक ध्यान दे रहे हैं। रोहित भारत के लिए अब सिर्फ वनडे प्रारूप में ही खेलते हैं क्योंकि उन्होंने टी20 अंतरराष्ट्रीय और टेस्ट से संन्यास ले लिया है। रोहित ने जब से टेस्ट क्रिकेट खेलना छोड़ा है, उन्होंने फिटनेस को लेकर सतर्कता बरती है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया था कि रोहित अब तक 10 किलो वजन घटा चुके हैं। रोहित अपनी फिटनेस को लेकर कितने गंभीर हैं इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ तीसरे वनडे में जीत के बाद उन्होंने केक खाने से भी मना कर दिया।    यशस्वी ने काटा केक  दरअसल, विशाखापत्तनम वनडे में भारत को मिली जीत के बाद जब टीम के सदस्य होटल पहुंचे तो वहां जीत का जश्न मनाने के लिए केक का इंतेजाम किया गया था। कोहली ने यशस्वी जायसवाल को केक काटने कहा। यशस्वी ने तीसरे वनडे में शानदार प्रदर्शन करते हुए अपने वनडे करियर का पहला शतक लगाया था। यशस्वी ने केक काटने के बाद कोहली को खिलाया जिसके बाद वह केक खिलाने रोहित की तरफ बढ़े। रोहित ने हंसकर मना किया और बोले- 'नहीं यार, वापस मोटा हो जाऊंगा।' इसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।     यशस्वी, रोहित-कोहली के दम पर भारत ने जीती सीरीज भारतीय टीम ने यशस्वी जायसवाल के शतक और रोहित शर्मा तथा विराट कोहली के अर्धशतकों की मदद से दक्षिण अफ्रीका को तीसरे वनडे मैच में नौ विकेट से हराया। भारत ने इसके साथ ही तीन मैचों की वनडे सीरीज 2-1 से अपने नाम कर ली। दक्षिण अफ्रीका ने पहले बल्लेबाजी करते हुए क्विंटन डिकॉक के 106 रनों की बदौलत 47.5 ओवर में 270 रन बनाए थे। भारत ने शीर्ष तीन बल्लेबाजों की शानदार बल्लेबाजी के दम पर 61 गेंद शेष रहते 39.5 ओवर में एक विकेट पर 271 रन बनाकर मैच तथा सीरीज अपने नाम की। रोहित के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 20000 रन पूरे  लक्ष्य का पीछा करते हुए यशस्वी और रोहित ने भारत को मजबूत शुरुआत दिलाई और दोनों बल्लेबाजों ने पहले विकेट के लिए 155 रनों की साझेदारी की। रोहित ने इस दौरान अपने वनडे करियर का 61वां अर्धशतक लगाया और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 20000 रन भी पूरे किए। रोहित 75 रन बनाकर आउट हुए। इसके बाद मैदान पर विराट कोहली उतरे, जिनका बल्ला इस सीरीज में जमकर चला। कोहली और यशस्वी ने गियर बदलते हुए आक्रमक अंदाज में बल्लेबाजी की। यशस्वी ने अपने वनडे करियर का पहला शतक लगाया और भारत को जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई। कोहली ने लगातार चौथे मैच में 50+ स्कोर बनाया। कोहली ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ तीन मैच से पहले ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सिडनी में खेले गए तीसरे वनडे में अर्धशतकीय पारी खेली थी। यशस्वी ने 121 गेंदों पर 12 चौकों और दो छक्कों की मदद से नाबाद 116 रन और कोहली ने 45 गेंदों पर छह चौकों और तीन छक्कों की मदद से नाबाद 65 रन बनाए। दक्षिण अफ्रीका की ओर से एकमात्र सफलता केशव महाराज को मिली।  

‘शांत, लेकिन घातक’ अवतार में यशस्वी जायसवाल, वनडे तरकश में फिट बैठा नया तीर

नई दिल्ली  सलामी बल्लेबाज यशस्वी जायसवाल ने साउथ अफ्रीका के खिलाफ यहां तीसरे और अंतिम वनडे मैच में संयम और आक्रमण की नई मिसाल पेश करके भारत की वनडे टीम के तरकश में एक और तीर जोड़ दिया। जायसवाल ने पहले ओवर में ही मार्को यानसन की ऑफ स्टंप के बाहर की गेंद को छोड़कर दिखाया कि वह किसी तरह का बेमतलब का जोखिम उठाना नहीं चाह रहे हैं। जायसवाल ने इस गेंद पर कट करने की कोशिश नहीं की और उसे क्विंटन डिकॉक के पास जाने दिया।   दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ तीसरे वनडे में यह एक महत्वपूर्ण क्षण था, जिसमें भारत ने नौ विकेट से जीत हासिल की। यह जायसवाल की बदली हुई मानसिकता का पहला संकेत था। उन्होंने स्पष्ट संकेत दिया कि वह अपने आक्रामक तेवरों पर लगाम लगाए रखेंगे मुख्य सलामी बल्लेबाज तथा टीम के नियमित कप्तान शुभमन गिल के चोटिल होने के कारण उन्हें जो मौका मिला है, उसका पूरा फायदा उठाएंगे। जायसवाल ने रांची और रायपुर में खेले गए पहले दो वनडे में शुरू से ही गेंदबाजों पर हावी होने की कोशिश की, लेकिन इसमें नाकाम रहे और जल्दी आउट हो गए। हालांकि, वाइजैग में उन्होंने गेंदबाजों पर हावी होने के लिए किसी तरह की जल्दबाजी नहीं दिखाई और धैर्य से काम लिया। ऐसा लग रहा था कि अब उन्हें वनडे क्रिकेट की लय बेहतर समझ आ गई है। भारतीय टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर ने भी इस पर बात की। गंभीर ने मैच के बाद कहा, ‘‘जब आप लाल गेंद वाले क्रिकेट से सफेद गेंद वाले क्रिकेट में आते हैं तो आपको लगता है कि आपको आक्रामक बल्लेबाजी करनी होगी, लेकिन आपको आक्रामक होकर खेलने की जरूरत नहीं है, क्योंकि अगर आप वनडे प्रारूप को 30 ओवर और 20 ओवर में बांट दें, तो काम बहुत आसान हो जाएगा।’’ उन्होंने आगे कहा, ‘‘अगर आप वनडे में पहले 30 ओवर धैर्य के साथ खेलते हैं और जायसवाल में जो क्षमता है उसे देखते हुए अगर वह 30 ओवर तक बल्लेबाजी करता है तो वह शतक लगा सकता है। इसके बाद भी आपके पास 20 ओवर बचे होते हैं जिन्हें आप टी20 मैच की तरह खेल सकते हैं। जायसवाल का वनडे में यह केवल चौथा मैच था और जैसे ही उन्हें समझ आ जाएगा कि वनडे क्रिकेट में उन्हें किस गति से बल्लेबाजी करनी है तो वह अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने में सफल रहेंगे।’’ जायसवाल के पहले वनडे शतक ने गंभीर के विचार को पुष्ट किया। इस 23 वर्षीय खिलाड़ी ने अपने पहले 50 रन 75 गेंद में बनाए, लेकिन अगले 50 रन उन्होंने केवल 35 गेंद में ठोक दिए थे। बाएं हाथ के इस बल्लेबाज ने इस दौरान अपना स्वाभाविक खेल खेला। अगले कुछ महीनों में जायसवाल के लिए धैर्य सबसे बड़ा सहयोगी होगा, क्योंकि उन्हें नहीं पता होगा कि वनडे में अगला मैच कब खेलेंगे। कप्तान गिल जनवरी में न्यूजीलैंड के खिलाफ होने वाली सीरीज के लिए फिट हैं। उसके बाद भारत जुलाई 2026 में इंग्लैंड के खिलाफ होने वाली सीरीज के दौरान वनडे मैच खेलेगा। गिल और केएल राहुल के चोटिल होने की स्थिति में ही जायसवाल इन मैच में खेल पाएंगे। कब खेलेंगे यशस्वी? गिल और संभवतः श्रेयस अय्यर भी अगले महीने न्यूजीलैंड के खिलाफ एकदिवसीय सीरीज के लिए वापसी करेंगे, जबकि जायसवाल वर्तमान में राष्ट्रीय टीम की टी20 से जुड़ी योजना में शामिल नहीं हैं। इसलिए उन्हें शायद इंतजार ही करना होगा, लेकिन गंभीर भविष्य में बड़े टूर्नामेंटों के लिए खिलाड़ियों का एक मजबूत पूल बनाने की व्यापक योजना पर विचार कर रहे हैं। गंभीर ने कहा, ‘‘हम जब भी संभव होगा हम उन्हें मौका देने की कोशिश करेंगे। हमें अब भी खिलाड़ियों का एक पूल तैयार करना है। हम 2027 में होने वाले विश्व कप से पहले लगभग 20 से 25 खिलाड़ियों को तैयार करना चाहते हैं। निश्चित तौर पर जब कप्तान और उप कप्तान की वापसी होगी तो उनको प्राथमिकता दी जाएगी।’’ उन्होंने कहा, ‘‘जायसवाल ने अच्छा प्रदर्शन किया लेकिन महत्वपूर्ण बात यह है कि उन्हें खुद को प्रेरित रखना होगा क्योंकि जब भी उन्हें मौका मिले, उसके लिए तैयार रहना होगा और उसका पूरा फायदा उठाना होगा। हम जानते हैं कि वह कितने बेजोड़ खिलाड़ी हैं और टेस्ट क्रिकेट में उनका प्रदर्शन शानदार रहा है।’’  

गंभीर की कड़ी चेतावनी: स्प्लिट कोचिंग की चर्चा करने वालों पर कसा तंज

 नई दिल्ली टीम इंडिया के हेड कोच गौतम गंभीर ने शनिवार को सोशल मीडिया पर चल रही स्पिलिट कोचिंग की थ्योरीज पर कड़ी आपत्ति जताई। कोच गंभीर ने उन बातों को 'हैरान करने वाला' बताया। यहां तक कि इस तरह की राय देने वालों से गौतम गंभीर ने 'अपने दायरे में रहने' को कहा। साउथ अफ्रीका के खिलाफ भारत की हालिया 0-2 टेस्ट सीरीज हार के बाद एक IPL टीम के मालिक सहित कुछ प्रभावशाली क्रिकेट हस्तियों ने BCCI से रेड-बॉल और व्हाइट-बॉल फॉर्मेट के लिए अलग-अलग कोच नियुक्त करने पर विचार करने को कहा था। तमाम लोगों द्वारा साझा किए गए स्पिलट कैप्टेंसी के विचार से गौतम गंभीर खफा दिखे। गौतम गंभीर ने तीन मैचों की वनडे सीरीज को 2-1 से जीतने के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "देखिए, बहुत सारी बातें हुईं, क्योंकि नतीजे हमारे फेवर में नहीं रहे (टेस्ट सीरीज में), लेकिन सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि किसी भी मीडिया या जर्नलिस्ट ने एक बार भी यह नहीं लिखा कि हमारा पहला टेस्ट मैच (कोलकाता में) कप्तान (शुभमन गिल) के बिना खेला गया था, जिसने दोनों पारियों में बैटिंग नहीं की (गर्दन की चोट की वजह से)।" गंभीर ने आगे कहा कि ऐसे ओपिनियन मेकर्स को ऐसी बातें कहने से बचना चाहिए जिनका ऑन-फील्ड क्रिकेट मामलों से कोई सीधा कनेक्शन न हो। गंभीर ने कहा, "कुछ लोगों ने ऐसी बातें भी कहीं, जिनका क्रिकेट से कोई लेना-देना नहीं था। एक IPL टीम के मालिक (दिल्ली कैपिटल्स के पार्थ जिंदल ने X पर) ने भी स्प्लिट कोचिंग के बारे में लिखा। तो यह हैरानी की बात है। लोगों का अपने दायरे में रहना बहुत जरूरी है, क्योंकि अगर हम किसी के दायरे में नहीं जाते, तो उन्हें भी हमारे दायरे में आने का कोई हक नहीं है।" गौतम गंभीर ने आगे पत्रकारों को भी नहीं बख्शा और कहा, "मैं प्रेस कॉन्फ्रेंस में बहाने नहीं बनाता। इसका मतलब यह नहीं है कि आप दुनिया या देश के सामने फैक्ट्स न दिखाएं। जब आप एक ट्रांजिशन से गुजरते हैं और जब आप अपने कप्तान को खो देते हैं, जो ऐसी टीम (SA) के खिलाफ रेड-बॉल क्रिकेट में आपका मेन बैट्समैन भी है।"  

फीफा वर्ल्ड कप 2026 का बड़ा ऐलान: अर्जेंटीना बनाम अल्जीरिया ओपनिंग मैच, एमबापे–हालैंड आमने-सामने

नई दिल्ली  फीफा विश्व कप 2026 की शुरुआत 11 जून से हो रही है। इस बार विश्व कप में 48 टीमें हिस्सा ले रही हैं। वॉशिंगटन डीसी के कैनेडी सेंटर में फीफा वर्ल्ड कप ड्रॉ का आयोजन हुआ। इस दौरान 12 ग्रुप में कौन-कौन सी टीमें होंगी और मैचों के शेड्यूल का निर्धारण किया गया। ड्रॉ के दौरान अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी उपस्थित थे। उन्हें फीफा पीस अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।  विश्व कप का पहला मुकाबला मेक्सिको और साउथ अफ्रीका के बीच ऐतिहासिक एस्टाडियो अज्टेका में खेला जाएगा। वहीं फीफा विश्व कप 2022 की विजेता अर्जेंटीना विश्व कप 2026 के अपने पहले मैच में अल्जीरिया से भिड़ेगी। बता दें कि दोनों टीमों को ऑस्ट्रिया और जॉर्डन के साथ ग्रुप 'जे' में रखा गया है। मौजूदा फुटबॉल वर्ल्ड चैंपियन अर्जेंटीना और प्रमुख दावेदार स्पेन और इंग्लैंड को 2026 वर्ल्ड कप के लिए आसान ग्रुप मिले। वहीं, फ्रांस को मुश्किल ग्रुप मिला। फुटबॉल के दो सबसे बड़े सुपरस्टार किलियन एमबापे (फ्रांस) और एर्लिंग हालैंड (नॉर्वे) की टीम एक ही ग्रुप का हिस्सा है। यूरोपीय चैंपियन स्पेन ग्रुप एच में केप वर्डे के खिलाफ अपने अभियान की शुरुआत करेगी। 2026 का टूर्नामेंट अमेरिका, मैक्सिको और कनाडा में 11 जून से 19 जुलाई तक खेला जाएगा। इस बार 16 नई टीमें जुड़ रही हैं, जिससे टीमों की कुल संख्या 48 हो गई है। कतर में खेले गए पिछले विश्व कप में टीमों की संख्या 32 थी। पिछली बार 64 मैच हुए थे। इस बार कुल 104 मैच खेले जाएंगे। ज्यादातर मैच अमेरिका में होंगे। फाइनल न्यूयॉर्क के मेटलाइफ स्टेडियम में होगा। विश्व कप के सभी 12 ग्रुप ग्रुप ए: मेक्सिको, साउथ अफ्रीका, साउथ कोरिया, यूईएफए प्लेऑफ डी ग्रुप बी: कनाडा, यूईएफए प्लेऑफ ए, कतर, स्विट्जरलैंड ग्रुप सी: ब्राजील, मोरक्को, हैती, स्कॉटलैंड ग्रुप डी: यूएसए, पैराग्वे, ऑस्ट्रेलिया, यूईएफए प्लेऑफ सी ग्रुप ई: जर्मनी, कुराओ, आइवरी कोस्ट, इक्वाडोर ग्रुप एफ: नीदरलैंड, जापान, यूईएफए प्लेऑफ बी, ट्यूनीशिया ग्रुप जी: बेल्जियम, मिस्र, ईरान, न्यूजीलैंड ग्रुप एच: स्पेन, केप वर्डे, सऊदी अरब, उरुग्वे ग्रुप आई: फ्रांस, सेनेगल, फीफा प्लेऑफ 2, नॉर्वे ग्रुप जे: अर्जेंटीना, अल्जीरिया, ऑस्ट्रिया, जॉर्डन ग्रुप के: पुर्तगाल, फीफा प्लेऑफ 1, उज्बेकिस्तान, कोलंबिया ग्रुप एल: इंग्लैंड, क्रोएशिया, घाना, पनामा

ताकत, संतुलन और सम्मान: सैनिकों के खेल से ओलंपिक तक वेटलिफ्टिंग की कहानी

नई दिल्ली। वेटलिफ्टिंग ताकत, सहनशक्ति और संतुलन का खेल है, जिसमें स्नैच के अलावा, क्लीन एंड जर्क दो मुख्य तकनीकों के रूप में शामिल हैं। इस खेल के लिए आत्मविश्वास और मानसिक दृढ़ता के साथ शरीर की मांसपेशियों को विकसित करना जरूरी है। ओलंपिक में वेटलिफ्टिंग बेहद लोकप्रिय खेल है। एक दौर था, जब मनुष्य किसी कार्य को अंजाम देने के लिए भार को उठाकर यहां से वहां जाता था, लेकिन बाद में इसे शख्स के बलवान होने से जोड़कर देखा जाने लगा। धीरे-धीरे लोग एक-दूसरे से अधिक वजन उठाकर खुद को ज्यादा बलशाली साबित करने की होड़ में लग गए। यहीं से इस खेल का इजाद भी हुआ। ग्रीस, चीन, मिस्र और मेसोपोटामिया में योद्धा और सैनिक अपनी ताकत परखने के लिए भारी पत्थर या वस्तुएं उठाते थे, जिसने इस खेल की नींव रखी। धीरे-धीरे अन्य देशों में पहलवान शौक के साथ वेटलिफ्टिंग के खेल में हिस्सा लेने लगे। आलम ये रहा कि 19वीं शताब्दी के अंत तक वेटलिफ्टिंग एक अंतरराष्ट्रीय खेल के रूप में अपनी पहचान बना चुका था। 1896 एथेंस ओलंपिक में इस खेल को शामिल किया गया। हालांकि, यह 1900, 1908 और 1912 के संस्करणों का हिस्सा नहीं रहा। इन तीन संस्करणों को छोड़कर, वेटलिफ्टिंग का खेल प्रत्येक ओलंपिक का हिस्सा रहा है। साल 1935 में भारतीय भारोत्तोलन महासंघ की स्थापना हुई, जिसके बाद भारत ने 1936 बर्लिन ओलंपिक में पहली बार इस इवेंट में हिस्सा लिया। 2000 सिडनी ओलंपिक में इस खेल में महिलाओं ने भी हिस्सा लेना शुरू किया। इसी ओलंपिक में कर्णम मल्लेश्वरी ने महिलाओं के 54 किलोग्राम भारवर्ग में ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया। इसके बाद मीराबाई चानू ने 2020 टोक्यो ओलंपिक में 49 किलोग्राम भार वर्ग में देश को सिल्वर मेडल दिलाया। वेटलिफ्टिंग के खेल में वेटलिफ्टर्स अलग-अलग बॉडीवेट कैटेगरी में प्रतिस्पर्धा करते हैं। ओलंपिक में इसके दो चरण होते हैं: 'स्नैच' और 'क्लीन एंड जर्क'। वेटलिफ्टर को दोनों कैटेगरी में तीन-तीन मौके दिए जाते हैं, जिसमें उसके सर्वश्रेष्ठ प्रयास को ही जोड़ा जाता है। दोनों कैटेगरी के वजन को जोड़कर विजेता घोषित किया जाता है। 'स्नैच' में वेटलिफ्टर बारबेल को उठाते हुए इसे अपने सिर के ऊपर सिंगुलर मोशन में लिफ्ट करता है, जबकि 'क्लीन एंड जर्क' में वेटलिफ्टर पहले बारबेल को उठाकर इसे अपनी छाती तक लेकर जाता है। उसे इसी पोजीशन पर कुछ देर रुकना होता है। इसके बाद वह अपनी बाहों और पैरों को फैलाकर बारबेल को सिर के ऊपर लेकर जाता है। इस दौरान उसकी कोहली बिल्कुल सीधी रहनी जरूरी है। बजर बजने तक वेटलिफ्टर को बारबेल सिर से ऊपर रखना होता है। भारत में सीनियर के साथ युवा और जूनियर स्तर पर वेटलिफ्टिंग तेजी से आगे बढ़ रही है। विश्व स्तर पर भारत के वेटलिफ्टर्स ने अपना नाम रोशन किया है। सीनियर्स के नक्शे कदम पर चलते हुए युवा खिलाड़ी और जूनियर स्तर के एथलीट इसमें शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं, जो भविष्य के लिए अच्छा आधार है। कड़ी ट्रेनिंग, बेहतरीन संसाधन, अच्छी कोचिंग और सपोर्ट के साथ ओलंपिक में भारत को इस खेल में और भी अधिक मेडल मिलने की संभावना है।