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ऊर्जा संकट में बड़ी राहत: भारतीय LPG टैंकर ने होर्मुज किया पार, सप्लाई होगी मजबूत

नई दिल्ली. मध्य पूर्व में तनाव के बीच भारत के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। रसोई गैस की सप्लाई को लेकर जो चिंता पिछले कुछ हफ्तों से बढ़ रही थी, वह अब कुछ हद तक कम होती दिख रही है। केंद्र सरकार में मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने बताया कि एलपीजी लेकर एक और टैंकर सुरक्षित रूप से होर्मुज स्ट्रेट पार कर गया है। केंद्रीय मंत्री ने इस उपलब्धि की जानकारी देते हुए एक्स पोस्ट में बताया, "भारतीय शिपिंग ऑपरेशंस पर अपडेट। भारतीय ध्वज वाला जहाज JAG VIKRAM, जिसमें 24 भारतीय क्रू मेंबर हैं, 11 अप्रैल को पर्शियन गल्फ क्षेत्र से सफलतापूर्वक बाहर निकल गया है।" अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते का सीजफायर लागू है और होर्मुज स्ट्रेट को आंशिक रूप से जहाजों के लिए खोला गया है। इसी बीच 'जग विक्रम' नाम का यह टैंकर शुक्रवार रात से शनिवार सुबह के बीच इस अहम समुद्री रास्ते को पार कर गया। ओमान की खाड़ी में पहुंचा LPG टैंकर जहाज फिलहाल ओमान की खाड़ी में पहुंच चुका है और आगे पूर्व दिशा में बढ़ रहा है। यह एक मिड-साइज गैस कैरियर है, जिसकी क्षमता करीब 26,000 टन है। अनुमान है कि इसमें लगभग 20,000 टन LPG लदा हुआ है, जो भारत के लिए बेहद अहम सप्लाई है। दरअसल, जब पश्चिम एशिया में जंग शुरू हुई थी, तब होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह प्रभावित हो गया था। यह वही समुद्री रास्ता है, जहां से दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल और बड़ी मात्रा में गैस की सप्लाई गुजरती है। इस रास्ते के बंद होने से वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी उथल-पुथल मच गई थी। सप्लाई के लिए होर्मुज पर निर्भर भारत भारत पर इसका असर और भी ज्यादा पड़ा, क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है। भारत करीब 90 प्रतिशत कच्चा तेल, लगभग आधा प्राकृतिक गैस और करीब 60 प्रतिशत LPG बाहर से मंगाता है। इसमें भी सबसे ज्यादा सप्लाई खाड़ी देशों से आती है, जो होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरती है। यही वजह थी कि जब यह रास्ता बंद हुआ, तो भारत में गैस सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई। सरकार ने एहतियात के तौर पर होटल, रेस्टोरेंट और अन्य कमर्शियल यूजर्स के लिए LPG सप्लाई घटा दी थी, ताकि घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता दी जा सके। भारत में गैस सप्लाई प्रभावित साथ ही, गैस की सप्लाई भी उद्योगों के लिए कम कर दी गई थी, ताकि CNG और घरों में पाइप्ड गैस की सप्लाई बनी रहे। उर्वरक उद्योगों को भी सीमित मात्रा में गैस दी जा रही थी। हालांकि अब धीरे-धीरे स्थिति सामान्य होने लगी है। 'जग विक्रम' का सुरक्षित निकलना इस दिशा में एक बड़ा संकेत है। यह मार्च की शुरुआत के बाद से पर्शियन गल्फ से बाहर निकलने वाला नौवां भारतीय जहाज है। अभी भी करीब 15 भारतीय जहाज इस क्षेत्र में फंसे हुए हैं, जो सही मौके का इंतजार कर रहे हैं। विदेशी जहाज भी होर्मुज स्ट्रेट में फंसे सैकड़ों विदेशी जहाज भी इस इलाके में फंसे हुए हैं। आंकड़ों के मुताबिक, इस क्षेत्र में अभी भी 400 से ज्यादा टैंकर, दर्जनों LPG और LNG जहाज मौजूद हैं, जो जंग के कारण प्रभावित हुए थे। हालांकि अब सीजफायर के बाद हालात धीरे-धीरे सुधर रहे हैं। भारत ने भी वैकल्पिक स्रोतों से गैस की व्यवस्था कर ली है, जिससे सप्लाई का दबाव कम हुआ है। उर्वरक संयंत्रों को अब पहले से ज्यादा गैस मिलने लगी है और अन्य उद्योगों को भी धीरे-धीरे सप्लाई बढ़ाई जा रही है। सरकार ने शहरों में गैस वितरण कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे कमर्शियल संस्थानों को पाइप्ड गैस कनेक्शन देने पर जोर दें, ताकि LPG पर निर्भरता कम की जा सके। आने वाले दिनों में अगर और जहाज सुरक्षित बाहर निकलते हैं, तो देश में गैस सप्लाई पूरी तरह स्थिर हो सकती है। फिलहाल, इस खबर ने करोड़ों लोगों को यह भरोसा जरूर दिलाया है कि रसोई गैस की किल्लत का खतरा टलता नजर आ रहा है।  

गहराता संकट: US-ईरान टकराव पर विश्व बैंक बोला—अभी तो और बुरा बाकी

नई दिल्‍ली. अमेरिका और ईरान के बीच जंग ने दुनिया भर की हेडक बढ़ा दी है, क्‍योंकि तेल के दाम रिकॉर्ड उछले हैं और 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब बने हुए हैं। साथ ही दुनिया भर के शेयर बाजारों में भारी गिरावट भी देखने को मिली है। भारत समेत कई देशों का आयात-निर्यात भी प्रभावित हो गया है। ऐसे में विश्‍व बैंक की ओर से एक बड़ी चेतावनी आई है।  विश्व बैंक के प्रमुख अजय बंगा ने चेतावनी देते हुए कहा कि अभी तो कुछ नहीं, युद्ध खत्‍म होने के बाद और बुरे हालात होने वाले हैं। जंग खत्‍म होने के बाद भी  नुकसान लंबे समय तक बना रह सकता है। उनका कहना है कि तत्‍काल और स्थायी युद्धविराम भी अर्थव्यवस्थाओं में व्यापक मंदी को नहीं रोक पाएगा।  अगर युद्धविराम कायम रहता है, तो भी वैश्विक विकास में 0.3 से 0.4 प्रतिशत अंकों की गिरावट आ सकती है। अगर सीजफार फिर से टूट जाता है, तो गिरावट 1 प्रतिशत अंक तक बढ़ सकती है, जिसका व्यापक प्रभाव व्यापार, ऊर्जा बाजारों और फाइनेंस सिस्‍टम पर पड़ेगा।  उन्‍होंने कहा कि महंगाई का दबाव भी साथ-साथ बढ़ने की आशंका है। बंगा ने संकेत दिया कि युद्धविराम की स्थिति में ग्‍लोबल महंगाई 200 से 300 आधार अंकों तक बढ़ सकती है और अगर संघर्ष लंबा खिंचता है तो इसमें 0.9 फीसदी अंकों तक की और बढ़ोतरी हो सकती है। विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के लिए स्थिति और भी गंभीर दिखती है, जहां सबसे खराब स्थिति में महंगाई 6.7% तक पहुंच सकती है।  खतरे की चपेट में विकासशील देश विश्व बैंक ने ऊर्जा आयात पर निर्भर द्वीप अर्थव्यवस्थाओं समेत संवेदनशील देशों के साथ संकटकालीन सहायता के माध्यम से इमरजेंसी फंड उपलब्ध कराने के लिए बातचीत शुरू कर दी है। हालांकि, बंगा ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि सरकारों को ऐसी अस्थिर ऊर्जा सब्सिडी में नहीं फंसना चाहिए जो बाद में राजकोषीय अस्थिरता को पैदा कर दे।  इसके विपरीत, उनका कहना है कि ऊर्जा में विविधता लाने में विफल रहने वाले देशों को लॉन्‍गटर्म आर्थिक अस्थिरता का खतरा रहता है। बंगा ने नाइजीरिया का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां 20 अरब डॉलर की रिफाइनरी परियोजना ने घरेलू ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत किया है और यहां तक ​​कि पड़ोसी देशों को जेट ईंधन जैसे निर्यात को भी संभव बनाया है।  बंगा ने इस बात पर जोर दिया कि लंबे समय समाधान वैकल्पिक ऊर्जा- परमाणु, जल, भूतापीय, पवन और सौर ऊर्जा – को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देने में निहित है। इस बदलाव के बिना, देश पारंपरिक जीवाश्म ईंधनों पर वापस लौट सकते हैं, जिससे आर्थिक और पर्यावरणीय जोखिम दोनों बढ़ जाएंगे।   

महंगाई का असर: डीजल पर ₹36 तक बढ़े चार्ज, सरकार का बड़ा फैसला

नई दिल्ली. अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जंग की वजह से भारत समेत दुनियाभर में फ्यूल संकट है। इस माहौल से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। केंद्र सरकार ने हाई-स्पीड डीजल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी ₹24 प्रति लीटर और इंफ्रा सेस ₹36 प्रति लीटर बढ़ाए हैं। वित्त मंत्रालय ने एक अधिसूचना में कहा कि शुल्क में यह बढ़ोतरी तत्काल प्रभाव से लागू होगी। बता दें कि इससे पहले 26 मार्च को सरकार ने डीजल पर 21.50 रुपये प्रति लीटर और एटीएफ पर 29.5 रुपये प्रति लीटर का एक्सपोर्ट ड्यूटी लगाया था। क्या कहा सरकार ने? सरकार ने शनिवार को घोषणा की कि उसने डीजल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी 21.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 55.5 रुपये प्रति लीटर कर दी है। वहीं, हाई-स्पीड डीजल पर एडिशनल एक्साइज ड्यूटी और सेस भी बढ़ा दिए गए हैं। नई व्यवस्था के तहत, हाई-स्पीड डीजल पर स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी बढ़ाकर 24 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है, जबकि रोड और इंफ्रास्ट्रक्चर सेस अब 36 रुपये प्रति लीटर हो गया है। इस बीच, एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर भी ड्यूटी 29.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 42 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है। वहीं, पेट्रोल की बात करें तो इ पर एक्सपोर्ट ड्यूटी अभी भी शून्य बनी हुई है। क्या है फैसले की वजह? पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता बढ़ाने के लिए ये शुल्क लगाए गए थे। इन शुल्कों का उद्देश्य निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कीमतों के अंतर का अनुचित लाभ उठाने से रोकना है, क्योंकि युद्ध शुरू होने के बाद से वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। बता दें कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ सैन्य हमले शुरू करने के बाद तेहरान की ओर से व्यापक जवाबी कार्रवाई की गई थी। हालांकि, आठ अप्रैल को ईरान, अमेरिका और इजरायल दो सप्ताह के संघर्ष विराम पर सहमत हुए, जिससे पूरे पश्चिम एशिया और वैश्विक ऊर्जा बाजार में पैदा हुआ व्यवधान फिलहाल थमा है। हाल ही में ऐसी खबरें आई थीं कि सरकार भारत ने घरेलू ईंधन बिक्री में नुकसान की भरपाई के लिए रिफाइनरी मार्जिन पर सीमा तय की है। अब रिफाइनरी के मार्जिन को 15 डॉलर प्रति बैरल तक सीमित कर दिया गया है। इस सीमा से ऊपर की किसी भी कमाई को सरकारी विपणन कंपनियों को बेचे गए ईंधन पर छूट के रूप में माना जाएगा। अतिरिक्त लाभ को खुदरा नुकसान की भरपाई के लिए इस्तेमाल किया जा सकेगा।  

रणवीर सिंह ने ‘धुरंधर 2’ की सफलता के बाद नागपुर में RSS प्रमुख से की मुलाकात

नागपुर बॉलीवुड सुपरस्टार रणवीर सिंह इन दिनों अपनी फिल्म 'धुरंधर 2: द रिवेंज' की सक्सेस को एंजॉय कर रहे हैं. फिल्म ने बॉक्स ऑफिस के हर बड़े रिकॉर्ड को तोड़कर रख दिया. अब इस बड़ी जीत के बीच रणवीर सिंह शुक्रवार को महाराष्ट्र के नागपुर पहुंचे, जहां उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत से मुलाकात की।  रणवीर सिंह इस दौरान सफेद कुर्ता-पायजामा पहने नजर आए. उनकी इस यात्रा और आरएसएस ऑफिस की तस्वीरें अब सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही हैं, जिसे लेकर गलियारों में काफी चर्चा है।  RSS दफ्तर में रणवीर ETimes की रिपोर्ट के अनुसार, रणवीर सिंह शुक्रवार शाम करीब 4 बजे नागपुर के डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरे. वहां से वह सीधे महल इलाके में स्थित संघ के मुख्यालय पहुंचे. रणवीर ने वहां लगभग डेढ़ घंटा बिताया. इस दौरान उन्होंने मोहन भागवत से मुलाकात की और अपनी फिल्म 'धुरंधर 2' के बारे में भी विस्तार से चर्चा की. मुलाकात के साथ-साथ रणवीर ने संघ के कामकाज, उनकी सेवा योजनाओं और जमीनी स्तर पर किए जा रहे काम को भी जाना।  मुख्यालय के बाद रणवीर सिंह रेशिमबाग स्थित डॉ. हेडगेवार स्मृति मंदिर भी गए. वहां उन्होंने आरएसएस के संस्थापक डॉ. के.बी. हेडगेवार और सरसंघचालक एम.एस. गोलवलकर को श्रद्धांजलि अर्पित की।  प्रोपेगेंडा के भी लगे आरोप वहीं इस बीच जहां एक तरफ फिल्म सफलता के झंडे गाड़ रही है, वहीं दूसरी तरफ कुछ लोग इसे 'प्रोपेगेंडा' बताकर इसकी आलोचना भी कर रहे हैं. बीते दिनों फिल्ममेकर संदीप रेड्डी वांगा ने कड़ा जवाब दिया था. वांगा ने सोशल मीडिया पर फिल्म का बचाव करते हुए लिखा कि कुछ लोग जानबूझकर सच को प्रोपेगैंडा का नाम दे रहे हैं. उन्होंने आदित्य धर और रणवीर सिंह की जमकर तारीफ करते हुए कहा कि यह फिल्म जबरदस्त है और आलोचना करने वाले लोग असल में डरे हुए हैं।  धुरंधर 2 का कोहराम रणवीर सिंह की फिल्म धुरंधर और 'धुरंधर 2' ने बॉक्स ऑफिस पर जो कर दिखाया है, उसकी उम्मीद किसी को नहीं थी.  आदित्य धर के डायरेक्शन में बनी इस फिल्म के पहले पार्ट ने करीब 1300 करोड़ और धुरंधर 2 जो  19 मार्च को सिनेमाघरों में आई थी ने देखते ही देखते इसने दुनिया भर में 1600 करोड़ से ज्यादा की कमाई कर ली है. फिल्म की इस जबरदस्त सफलता ने रणवीर के करियर को एक नई दिशा दे दी है। 

ED ने की पार्थ चटर्जी के घर छापेमारी, SSC घोटाले में कड़ा एक्शन

कलकत्ता पश्चिम बंगाल में चल रहे विधानसभा के बीच प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी का एक्शन जारी है. ईडी ने शनिवार को पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में दो जगह छापेमारी की है. ईडी की टीम ने पश्चिम बंगाल के पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी के घर और प्रसन्न कुमार रॉय के कार्यालय पर रेड की है. ईडी की टीम ने यह कार्रवाई एसएससी स्कैम से जुड़े मामले में की है।  जानकारी के मुताबिक ईडी प्राथमिक शिक्षकों की भर्ती के साथ एसएससी सहायक शिक्षकों की नियुक्ति, एसएससी ग्रुप सी और डी कर्मचारियों से जुड़े भर्ती घोटालों की जांच कर रही है. इन मामलों में तत्कालीन शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी भी आरोपी हैं. ईडी ने पार्थ चटर्जी को जांच अधिकारी के सामने पेश होने के लिए तीन बार समन जारी किए थे. बताया जाता है कि पार्थ चटर्जी ने इन समन की अवहेलना की।  पार्थ चटर्जी एक बार भी ईडी के सामने पेश नहीं हुए. इसके बाद अब ईडी ने उनके घर पर छापेमारी की कार्रवाई की है. ईडी की रेड प्रसन्न कुमार रॉय के कार्यालय पर भी चल रही है. प्रसन्न कुमार रॉय फिलहाल जेल में बंद हैं. ईडी ने पार्थ को भी गिरफ्तार किया था. पार्थ की गिरफ्तारी जुलाई 2022 में हुई थी और इस मामले में उन्हें पिछले साल (2025 में) फरवरी-मार्च में जमानत मिल गई थी।  ईडी की टीम ने पूर्व मंत्री के नाकतला स्थित घर पर रेड कर उनसे पूछताछ भी की. ईडी ने इस दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और उपकरण जब्त किए हैं. प्रसन्न कुमार के न्यूटाउन स्थित दफ्तर पर भी रेड हुई. प्रसन्न कुमार की गिनती पार्थ के करीबियों में होती है और इस स्कैम में प्रसन्न की भूमिका भी जांच के दायरे में है। 

PM मोदी का मतुआ-नामशूद्र को संदेश: ‘आप यहां किसी TMC नेता की कृपा से नहीं

बर्धमान  पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार जोरों पर है. भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने अपने सबसे बड़े चेहरे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चुनाव प्रचार के मैदान में उतार दिया है. पीएम मोदी ने शनिवार को पश्चिम बंगाल के बर्धमान जिले के कटवा में चुनावी जनसभा को संबोधित किया और सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) पर जमकर निशाना साधा।  उन्होंने  कहा कि टीएमसी सरकार ने केंद्र की तमाम योजनाओं पर ब्रेक लगा रखा है. बीजेपी की सरकार बनते ही योजनाएं लागू की जाएंगी. पीएम मोदी ने दावा किया कि बर्धमान में हजारों-हजार लोगों का ये रैला बंगाल में खेला करने वाला है. यह दृश्य 4 मई के नतीजे का ट्रेलर है. उन्होंने कहा कि चुनाव में आपका उमंग, आपका उत्साह, आपकी ऊर्जा, आपका संकल्प देख रहा हूं. यह भय पर भरोसे की विजय का उद्घोष है. बंगाल परिवर्तन के लिए तैयार है।  पीएम मोदी ने कहा कि बीजेपी ने संकल्प लिया है कि बंगाल को विकास की नई ऊंचाई पर ले जाएंगे. उन्होंने कहा कि कल ही बंगाल बीजेपी ने अपना घोषणापत्र जारी किया है. इसमें मैंने जो आपको 6 गारंटियां दी हैं, उन्हें लागू करने का रोडमैप है. पीएम मोदी ने कहा कि बंगाल बीजेपी के सभी साथियों को इस शानदार घोषणापत्र के लिए बधाई देता हूं।  उन्होंने कहा कि मोदी की गारंटी, टीएमसी की निर्मम सरकार के भय को हटाकर भरोसे में बदलने की है. ये गारंटी पूरी कैसे होगी यह पूरा खाका बीजेपी के घोषणापत्र में है. पीएम मोदी ने कहा कि असम, केरल और पुडुचेरी में वोट पड़ चुके हैं. वहां भारी मतदान हुआ है. बहुत बड़ी संख्या में लोग मतदान के लिए निकले हैं. उन्होंने कहा कि महिलाओं ने बड़ी संख्या में वोट डाला है. चुनाव आयोग को बधाई देता हूं कि बिना किसी अप्रिय घटना के तीनों राज्यों में मतदान हुआ है।  पीएम मोदी ने कहा कि बीजेपी की सरकार बनने पर पहली कैबिनेट मीटिंग में आयुष्मान भारत योजना लागू की जाएगी. उन्होंने कहा कि मतुआ समुदाय, नामशूद्र और सभी शरणार्थियों को गारंटी देने आया हूं कि आप यहां किसी टीएमसी नेता की कृपा से नहीं हैं. पीएम ने कहा कि मोदी ने सीएए का कानून बनाकर यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया है कि आप सभी यहां भारत के संविधान के संरक्षण में हैं।  उन्होंने कहा कि सीएए के तहत नागरिकता देने का काम और तेज किया जाएगा. पीएम मोदी ने कहा कि जो भारत में घुसपैठ कर आया है, वह भारत से खदेड़ा जाएगा. हर घुसपैठिए से कहूंगा कि वो अपना बोरिया बिस्तर बांध ले. जिन लोगों ने कागज बनाए, उनका भी हिसाब होगा. उन्होंने कहा कि सबका साथ, सबका विकास बीजेपी का मंत्र है ही, लूटेरे और अत्याचारियों का भी पूरा हिसाब होगा।  पीएम मोदी ने कहा कि किसी घुसपैठिए को फर्जी राशन कार्ड दिया जाएगा, तो वह आपके हक का चावल लूटेगा. वह किसान के हक का पैसा भी लूट लेगा. अब टीएमसी को हरगिज मौका नहीं देना है. उन्होंने मतदान के दिन बीजेपी उम्मीदवारों को विजयी बनाने की अपील की. पीएम मोदी ने कहा कि आप यहां से जब जाएंगे, आप लोगों के पास जब जाएंगे, तब कहना कि मोदी जी आए थे और मोदी जी ने सबको पोइला बैसाख की शुभकामना दी है. उन्होंने यह भी कहा कि बीजेपी सत्ता में आई तो कोई भी योजना बंद नहीं की जाएगी, जो चल रही है. टीएमसी की भ्रष्टाचार की दुकान बंद हो जाएगी। 

ईरान शांति वार्ता के लिए है, होर्मुज खुलेगा ही – ट्रंप की चेतावनी शांति प्रयासों से पहले

वाशिंगटन अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान में आज शांति वार्ता होने वाली है. दूसरी तरफ, वार्ता से कुछ घंटे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ईरान को धमकी दी है. ट्रंप ने दावा किया है कि 'ईरान के पास कोई ऑप्शन नहीं है और वो सिर्फ बातचीत के लिए जिंदा है.' उन्होंने होर्मुज खोलने को लेकर भी बड़ा बयान दिया।  ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर एक पोस्ट शेयर किया है. इसमें उन्होंने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर कहा कि ईरान अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों पर कंट्रोल करके दुनिया को जबरन वसूली का शिकार बना रहा है।  अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने पोस्ट में लिखा, 'ईरानियों को शायद ये अहसास नहीं है कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों का इस्तेमाल करके दुनिया को डराने के अलावा उनके पास कोई कार्ड नहीं है. वो आज अगर जिंदा हैं, तो सिर्फ बातचीत करने के लिए।  शांति वार्ता नाकाम होने पर फिर शुरू हो सकती है जंग बता दें कि एक अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस शांति वार्ता के लिए अपनी टीम के साथ इस्लामाबाद पहुंचे हैं. ट्रंप ने 'न्यूयॉर्क पोस्ट' को दिए इंटरव्यू में ये इशारा किया है कि अगर ये शांति वार्ता नाकाम साबित होती है, तो ईरान पर फिर से हमले शुरू हो सकते हैं. उन्होंने बताया कि अमेरिकी युद्धपोतों को बेहतरीन गोला-बारूद से लैस कर दिया गया है और वो हमलों के लिए तैयार हैं।  अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया कि ईरान की सहमति हो या न हो, वाशिंगटन जल्द ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोल देगा. उन्होंने कहा, 'ये आसान नहीं होगा. मैं बस इतना कहूंगा कि हम इसे जल्द ही खोल देंगे।  ट्रंप ने इस दौरान ईरान को लेकर कहा, 'हम ऐसे लोगों से निपट रहे हैं जिनके बारे में हमें नहीं पता कि वे सच बोलते हैं या नहीं. हमारे सामने वो कहते हैं कि वो परमाणु हथियार खत्म कर रहे हैं और फिर प्रेस में जाकर कहते हैं कि वो यूरेनियम संवर्धन करना चाहते हैं।  ट्रंप के मुताबिक, ईरान के लोग लड़ने से बेहतर फेक न्यूज मीडिया और पब्लिक रिलेशंस संभालने में माहिर हैं।  बता दें कि ईरान-अमेरिका के बीच होने वाली शांति वार्ता में पाकिस्तान मध्यस्थता कर रहा है. इस्लामाबाद में आज ईरानी-अमेरिकी अधिकारी आमने-सामने होंगे और अपना-अपना पक्ष रखेंगे। 

चुनाव के दौरान पार्टियों की बढ़ी चिंता, ECI ने चुनावी खर्च का विवरण तय समय में जमा करने का दिया आदेश

नई दिल्ली  विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विधानसभा चुनावों और उपचुनावों के बीच, भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने सभी राष्ट्रीय और क्षेत्रीय राजनीतिक दलों के प्रमुखों को एक जरूरी याद दिलाई है. आयोग ने दलों को निर्देश दिया है कि वे चुनाव खत्म होने की तय समय-सीमा के भीतर अपने चुनावी खर्च और उम्मीदवारों को दी गई एकमुश्त राशि का विवरण जमा कर दें।  चुनाव आयोग ने कहा है कि पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखने के लिए, सभी राजनीतिक दलों के लिए चंदे की सटीक जानकारी देना अनिवार्य है. इसमें उम्मीदवारों को दी गई एकमुश्त राशि का विवरण भी शामिल होना चाहिए. आयोग ने यह चेतावनी भी दी है कि यदि दलों द्वारा दी गई जानकारी में कोई गड़बड़ी पाई जाती है, तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।  सभी पंजीकृत राष्ट्रीय दलों, राज्य मान्यता प्राप्त दलों और पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों (RUPPs) के अध्यक्षों और महासचिवों को जारी किए गए एक हालिया पत्र में, चुनाव आयोग ने कुछ महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं. चुनाव आयोग ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए, उसने 2001 में एक प्रारूप तय किया था. इस प्रारूप को समय-समय पर (27 दिसंबर 2001, 22 मार्च 2004, 13 जनवरी 2009, 21 जनवरी 2013 और 15 जनवरी 2022 को) संशोधित किया गया है।  इस प्रारूप के अनुसार, सभी राजनीतिक दलों के लिए प्रत्येक विधानसभा या लोकसभा चुनाव के बाद अपने चुनाव खर्च का विवरण जमा करना अनिवार्य है. यह विवरण चुनाव पूरा होने के 75 से 90 दिनों के भीतर जमा करना होगा।  चुनाव आयोग (ECI) ने कहा है कि मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय पार्टियों को अपने चुनाव खर्च का विवरण सीधे चुनाव आयोग को सौंपना होगा. वहीं, गैर-मान्यता प्राप्त पंजीकृत पार्टियों (RUPPs) को यह विवरण उस राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) को देना होगा जहां पार्टी का मुख्यालय स्थित है।  आयोग ने आगे बताया कि राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों के खातों में अधिक पारदर्शिता लाने के लिए, संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत अपनी शक्तियों का उपयोग करते हुए यह निर्देश दिया गया है. इसके अनुसार, पार्टियों को चुनाव खत्म होने के 30 दिनों के भीतर एक 'आंशिक चुनाव खर्च विवरण' जमा करना होगा. इसमें उन सभी दान, चंदे या एकमुश्त भुगतान की जानकारी देनी होगी जो पार्टी ने चुनाव के दौरान अपने उम्मीदवारों को दिए हैं. यह नियम 8 सितंबर, 2015 से प्रभावी है।  चुनाव आयोग ने कहा कि उनके सामने ऐसे कई मामले आए हैं जहां जमा किए गए खातों या बयानों में सही ढंग से मिलान नहीं किया गया था. आयोग ने यह भी नोट किया कि ऐसा लगता है कि उसके निर्देशों का पूरी तरह से पालन नहीं किया गया है।  चुनाव आयोग (ECI) द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखने के लिए, सभी राजनीतिक दलों को उम्मीदवारों को दिए गए दान या एकमुश्त राशि का सही-सही विवरण देना अनिवार्य है. यदि राजनीतिक दलों द्वारा चुनाव आयोग/मुख्य निर्वाचन अधिकारी को दी गई जानकारी और उम्मीदवारों द्वारा जिला निर्वाचन अधिकारी के पास जमा किए गए चुनावी खर्च के विवरण (जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 78 के तहत) में कोई भी अंतर पाया जाता है, तो चुनाव आयोग 'चुनाव संचालन नियम, 1961' के नियम 89(5) के तहत उचित कार्रवाई करेगा।  चुनाव आयोग ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य चुनाव अधिकारियों (CEO) को यह निर्देश भी जारी किया है कि वे अपने-अपने क्षेत्र के सभी राजनीतिक दलों को इस बारे में सूचित करें।  गौरतलब है कि असम, केरल और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव 9 अप्रैल को एक ही चरण में संपन्न हुए. चुनाव आयोग के अनुसार, असम में अनुमानित 85.38 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जबकि केरल में 78.03 प्रतिशत और पुडुचेरी में 89.83 प्रतिशत मतदान हुआ।  पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव दो चरणों में और तमिलनाडु में एक ही चरण में होंगे. पश्चिम बंगाल में पहले चरण के लिए मतदान 23 अप्रैल को और दूसरे व अंतिम चरण के लिए 29 अप्रैल को होगा. तमिलनाडु में 23 अप्रैल को एक चरण में मतदान होगा. चुनाव नतीजे एक साथ 4 मई को जारी होंगे. असम विधानसभा का कार्यकाल 20 मई को और केरल का 23 मई को समाप्त होगा। वहीं, तमिलनाडु विधानसभा का कार्यकाल 10 मई को और पश्चिम बंगाल विधानसभा का कार्यकाल 7 मई को पूरा होगा। 

7th Pay Commission: DA का इंतजार क्यों बढ़ा, अप्रैल के 10 दिन भी हो गए, किस वजह से फंसा मामला?

नई दिल्ली अप्रैल 2026 आधा बीतने को है लेकिन अभी तक केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए डीए बढ़ोतरी का ऐलान नहीं हुआ है. आमतौर पर हर साल मार्च के अंत या अप्रैल की शुरुआत में यह फैसला सामने आ जाता है, लेकिन इस बार देरी ने कर्मचारियों के बीच चिंता बढ़ा दी है. खासकर इसलिए क्योंकि 31 दिसंबर 2025 के बाद 7वां वेतन आयोग खत्म हो चुका है और 8वां वेतन आयोग अभी लागू नहीं हुआ है।  पिछले वर्षों के ट्रेंड को देखें तो 2025 में डीए बढ़ोतरी का ऐलान 28 मार्च को हुआ था और आदेश 2 अप्रैल को जारी हुआ था. वहीं 2024 में भी 3 अप्रैल तक आदेश जारी हो गया था. यहां तक कि कोविड के समय 2020 में भी अप्रैल में औपचारिक आदेश जारी किया गया था. ऐसे में 2026 में यह देरी असामान्य मानी जा रही है।  क्या इस बार डीए बढ़ोतरी नहीं होगी विशेषज्ञों का कहना है कि डीए बढ़ोतरी रुकने की संभावना बेहद कम है. डीए का निर्धारण महंगाई के आंकड़ों के आधार पर होता है और यह प्रक्रिया 7वें वेतन आयोग की अवधि खत्म होने के बाद भी जारी रहती है. यानी कर्मचारियों को उनका हक मिलना तय माना जा रहा है।  कितनी बढ़ सकती है डीए एआईसीपीआई इंडेक्स के आंकड़ों के आधार पर अनुमान लगाया जा रहा है कि इस बार करीब 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो सकती है. इससे डीए 58 प्रतिशत से बढ़कर करीब 60 प्रतिशत तक पहुंच सकता है. हालांकि अंतिम फैसला सरकार की मंजूरी के बाद ही सामने आएगा।  देरी की वजह क्या है एक्सपर्ट्स के मुताबिक, देरी की सबसे बड़ी वजह प्रशासनिक प्रक्रिया हो सकती है. फाइल अप्रूवल, आंतरिक मंजूरी और फैसलों की टाइमिंग इस बार थोड़ा आगे खिसक गई है. बैंक बाजार के सीईओ अधिल शेट्टी का कहना है कि यह देरी इंटरनल प्रोसेस के कारण हो सकती है. वहीं, आईएसएफ की सुचिता दत्ता का कहना है कि संभवत: सरकार डीए बढ़ाने से पहले मंहगाई के आंकड़ों की बारीकी से समीक्षा कर रही है. कर्मा मैनेजमेंट के प्रतीक वैद्या का कहना है कि इस देरी की तुलना कोविड-19 के समय से करना ठीक नहीं है।  8वें वेतन आयोग से जुड़ी टाइमिंग सरकार फिलहाल अगले वेतन आयोग की दिशा में काम कर रही है. माना जा रहा है कि डीए बढ़ोतरी के ऐलान को इस बड़े बदलाव के साथ जोड़कर देखा जा रहा है, ताकि एक साथ व्यापक नीति का संकेत दिया जा सके।  सरकार का फिस्कल बैलेंस भी अहम महंगाई, सरकारी खर्च और बजट संतुलन को ध्यान में रखते हुए भी सरकार फैसला ले रही है. डीए बढ़ोतरी का सीधा असर लाखों कर्मचारियों और पेंशनर्स पर पड़ता है, इसलिए इसे सोच-समझकर तय किया जाता है।  कब तक आ सकता है ऐलान रिपोर्ट्स के मुताबिक अप्रैल के दूसरे हफ्ते से लेकर मिड अप्रैल के बीच कभी भी डीए बढ़ोतरी का ऐलान हो सकता है. यानी कर्मचारियों को ज्यादा लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।  देरी से होगा क्या नुकसान सबसे अहम बात यह है कि देरी से कर्मचारियों को कोई नुकसान नहीं होगा. डीए 1 जनवरी 2026 से लागू माना जाएगा और बीच के समय का पैसा एरियर के रूप में दिया जाएगा. यानी घोषणा चाहे देर से हो, लेकिन फायदा पूरा मिलेगा। 

भारत का सूरज बनने की राह, यूरेनियम के लिए अब नहीं होगी विदेशों पर निर्भरता; अमेरिका-चीन की चिंता बढ़ी

बेंगलुरु  सौ बात की एक बात ये कि ईरान युद्ध और चुनाव की ख़बरों में ज़्यादातर लोगों का ऐसी ख़बर पर ध्यान नहीं गया जो शायद देश की कई सालों की सबसे बड़ी ख़बर है. कल्पक्कम रिएक्टर में क्या हुआ? बहुत आसान हिंदी में समझाते हैं. भारत का अपना परमाणु बिजली बनाने वाला फ़ास्ट ब्रीडर रीऐक्टर क्रिटिकल हो गया. पब्लिक को ये साइंस का इतना जटिल मामला लगता है कि उससे हुआ क्या है वो पता ही नहीं चलता. तो ज़्यादा कॉम्प्लेक्स चीज़ों में ना भी जाएं तो मोटे तौर पर ख़बर ये हैं कि ये समझ लो कि एक तरह से भारतीय वैज्ञानिकों ने ऐसा रास्ता खोल दिया कि आगे चल कर हम सालों-साल तक अपनी बिजली बना सकते हैं जितनी भी देश को चाहिए. ये ऐसा कमाल है जो दुनिया की बड़ी-बड़ी महाशक्तियां नहीं कर पा रही हैं।  तो ज़्यादा साइंस में ना जाते हुए इसकी बेसिक चीज़ को समझें तो ये समझिये कि परमाणु रिएक्टर को समझ लीजिए कि एक तरह की परमाणु भट्टी है जिसमें बिजली बनाई जाती है. भट्टी वैसी नहीं जैसी दूसरी भट्टियां होती हैं, सिर्फ़ समझने के लिए उसको हम भट्टी कह रहे हैं. ये तो पब्लिक अब काफ़ी समझ ही गई है कि परमाणु कार्यक्रम पर दुनिया भर में इतना कंट्रोल इसलिए रहता है क्योंकि परमाणु तकनीक से बेतहाशा ऊर्जा बनती है. उससे परमाणु बम भी बना सकते हैं और बिजली भी बना सकते हैं. ईरान यही तो कह रहा है कि वो तो परमाणु कार्यक्रम चलाएगा क्योंकि उसको उससे बिजली बनानी है. अमेरिका और इज़रायल कह रहे हैं कि वो परमाणु कार्यक्रम से बिजली बनाने की आड़ में असल में परमाणु बम बनाना चाहता है. तो वो तो ख़ैर वहां की बात रही ।  हम बात कर रहे हैं अपने परमाणु कार्यक्रम की. तो परमाणु रिएक्टर में क्या होता है कि ईंधन डालते हैं और ईंधन से बिजली बनती है. ईंधन क्या होता है परमाणु रिएक्टर में? ईंधन होता है यूरेनियम नाम का तत्व. यूरेनियम डालते हैं तो अंदर बिजली बनती है और प्लूटोनियम नाम का कचरा निकलता है. दिक़्क़त क्या है कि भारत में यूरेनियम है नहीं. बहुत थोड़ा है. तो यूरेनियम दूसरे देशों से लेना पड़ता है. और वो कोई आसान काम नहीं क्योंकि परमाणु कार्यक्रमों पर कई कंट्रोल वैसे ही लगे हुए हैं. भारत ने अमेरिका के साथ नयूक्लियर डील भी की थी कि उससे कुछ आसानी हो यूरेनियम मिलने में. क्योंकि देश को अगर विकसित बनाना है तो जो सबसे ज़रूरी चीज़ चाहिए वो है बिजली. हम पानी से बिजली बना रहे हैं, कोयले से बनाते हैं, अब सोलर बिजली भी बन रही है, हवा से भी बनती है पवनचक्कियों से ।  सारा खेल यूरेनियम का लेकिन परमाणु बिजली भी चाहिए. उसमें यूरेनियम का चक्कर है. यूरेनियम हमारे पास है नहीं. लेकिन भारत के एक और रेडियोऐक्टिव तत्व है जिसको परमाणु रिएक्टर में इस्तेमाल कर सकते हैं, वो तत्व है थोरियम. लेकिन थोरियम से चलने वाले रिएक्टर पर दुनिया में ज़्यादा रिसर्च ही नहीं हो पाई. मतलब तकनीक परफ़ेक्ट नहीं हो पाई है थोरियम से बिजली बनाने की. तो अभी की स्थिति ये हैं कि यूरेनियम से बिजली बनती है और कचरे में प्लूटोनियम निकलता है. प्लूटोनियम भी रेडियोऐक्टिव कचरा होता है इसलिए उसको बहुत ही एहतियात से नष्ट करना पड़ता है. लेकिन एक तकनीक ये होती है कि प्लूटोनियम से ही बिजली बना दें तो? यानी यूरेनियम से जो कचरा निकला फिर उस कचरे से ही बिजली बना दें. यानी कचरे को ही ईंधन बना दें. और फिर जो बिजली बने और फिर उससे जो कचरा निकले उससे फिर बिजली बना दे. फिर जो कचरा निकले उस कचरे से बिजली बना दें. फिर कचरा निकले तो उससे बिजली बना दें. मतलब एक चेन ही बन जाए. जब तक कचरा पूरा इस्तेमाल नहीं हो जाता तब तक ईंधन डालना ही ना पड़े. थ्योरी में तो ये कर सकते हैं. लेकिन कई देश लगे हुए थे कोई उस तरह से कर नहीं पा रहा था. कुछ देश सफल हुए भी लेकिन भारत अपनी तकनीक से लगा हुआ था कि ये कर लें तो फिर तो थोड़े से ही ईंधन से काम चल जाएगा ।  कल्पक्कम भारत का सबसे आधुनिक न्यूक्लियर रिएक्टर है. कल्पक्कम है तमिलनाडु में चेन्नई के पास. वहाँ भारत का सबसे आधुनिक न्यूक्लियर रिएक्टर है, जिसका नाम है PFBR, प्रोटोटाइप फ़ास्ट ब्रीडर रिएक्टर. ये 500 MW बिजली बनाने वाला रिएक्टर है. इसे भारतीय वैज्ञानिकों ने पूरी तरह खुद डिजाइन किया और बनाया है. 6 अप्रैल 2026 को रात 8:25 बजे ये रिएक्टर ‘क्रिटिकल’ हो गया. क्रिटिकल मतलब क्या? मतलब वही कमाल कर दिखाया वैज्ञानिकों ने जिसकी हम बात कर रहे थे. कि ईंधन के कचरे को ही ईंधन बनाने में सफल हो गए. क्रिटिकल होने का मतलब है कि अब न्यूक्लियर रिऐक्शन खुद-ब-खुद चलने लगा है. यानी अब रिएक्टर ऐसे ख़ुद-ब-ख़ुद बिजली बनाने की तरफ एक क़दम और करीब पहुंच गया है. अब समझिए ये क्यों इतना बड़ा काम है।  भारत का न्यूक्लियर कार्यक्रम तीन चरणों का भारत का न्यूक्लियर कार्यक्रम तीन चरणों का है. इसे डॉ. होमी भाभा ने बनाया था. पहले चरण में हमारे पुराने रिएक्टर यूरेनियम से बिजली बनाते हैं. इसमें कुछ प्लूटोनियम नाम का पदार्थ बन जाता है, जो कचरा है उनका. दूसरा चरण अब शुरू हो रहा है और ये कल्पक्कम वाला रिऐक्टर उसका हिस्सा है. ये रिऐक्टर उसी प्लूटोनियम वेस्ट को ईंधन की तरह इस्तेमाल करता है. इसलिए ऐसे रिऐक्टर को ‘ब्रीडर’ कहते हैं. क्योंकि ये बिजली भी बनाता है और बिजली बनाने वाला और ईंधन भी बनाता है. और सबसे बड़ी बात ये कि ये जो कचरे से ईंधन बनाता है वो जितना ईंधन डालो उससे ज़्यादा ईंधन बना कर देता है. और साथ में बिजली भी बनाता है. मतलब इसका परीक्षाण सफल तो हो गया अब जब इसको पूरी तैयार कर लिया जाएगा तो एक बार ईंधन डालो, फिर ये खुद अपना ईंधन बढ़ाता रहेगा. इससे देश का कुल ईंधन स्टॉक बढ़ता ही चला जाएगा. ये दूसरा चरण है. इसके बाद आएगा तीसरा चरण. भविष्य में।  भारत में थोरियम समुद्र के किनारे ढेर सारा पड़ा उसमें क्या है कि भारत में थोरियम नाम का पदार्थ समुद्र के किनारे ढेर सारा … Read more