samacharsecretary.com

मालदा हिंसा के प्रमुख आरोपी को बागडोगरा एयरपोर्ट से गिरफ्तार, भागने की थी योजना

कोलकाता पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के कालियाचक में हुई हालिया हिंसा और तनाव के मामले में पुलिस को एक बड़ी कामयाबी मिली है. बंगाल पुलिस ने इस पूरे घटनाक्रम के मास्टरमाइंड माने जा रहे अधिवक्ता और एआईएमआईएम (AIMIM) नेता मोफक्करुल इस्लाम को गिरफ्तार कर लिया है. गिरफ्तारी उस समय हुई जब इस्लाम बागडोगरा एयरपोर्ट से राज्य छोड़कर भागने की कोशिश कर रहा था।  पुलिस सूत्रों के अनुसार, मोफक्करुल इस्लाम के खिलाफ पुख्ता सबूत मिलने के बाद से ही उसकी तलाश जारी थी. खुफिया जानकारी मिली थी कि वह गिरफ्तारी से बचने के लिए सिलीगुड़ी के पास बागडोगरा हवाई अड्डे से उड़ान भरने वाला है. पुलिस की एक विशेष टीम ने जाल बिछाकर उसे टर्मिनल के पास से धर दबोचा।  इस्लाम पेशे से वकील है, जिसे कानून की अच्छी समझ है, फिर भी वह पुलिस की नजरों से बच नहीं सका. मोफक्करुल इस्लाम का राजनीतिक प्रोफाइल काफी सक्रिय रहा है।  वह असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM का एक प्रमुख चेहरा है. उसने साल 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में उत्तर दिनाजपुर जिले की इटाहार (Itahar) सीट से AIMIM के टिकट पर चुनाव भी लड़ा था. जांच में सामने आया है कि पिछले दिनों सुजापुर और कालियाचक के आसपास हुए विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व भी इस्लाम ही कर रहा था।  पुलिस-प्रशासन को दी थी चुनौती हाल ही में सामने आए एक वीडियो में इस्लाम बेहद आक्रामक तेवर में जिले के आला अधिकारियों को ललकारता नजर आ रहा है. वीडियो में उसे कैमरे के सामने चिल्लाते हुए सुना जा सकता है, 'ओए डीएम , एसपी .. सीआईडी कहां हो? आईबी कहां है? तुम सब कहां हो? यहां आओ…" प्रशासन के खिलाफ इस तरह की बयानबाजी और भीड़ को उकसाने के बाद से ही वह पुलिस के राडार पर था।  पुलिस सूत्रों के अनुसार, इस्लाम की भूमिका की गहनता से जांच की जा रही है. आरोप है कि सुजापुर में हुए विरोध प्रदर्शनों को सुनियोजित तरीके से उसी ने लीड किया था. पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इस हिंसा के पीछे कोई गहरी साजिश थी या यह अचानक भड़का हुआ आक्रोश था. फिलहाल वह पुलिस की हिरासत में है और उससे पूछताछ जारी है। 

उत्तराखंड सरकार का बड़ा कदम: 250 मदरसों को स्कूल में बदला जाएगा

देहरादून  उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड भंग किए जाने पर विवाद बढ़ गया है। आल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने कहा कि मदरसों पर बेवजह आरोप लगाना गलत है। उन्होंने कहा कि मदरसा बोर्ड को खत्म करना एक ऐतिहासिक गलती है।  मौलाना ने दावा किया कि मदरसों से जुड़े करीब 55 हजार उलमा और छात्र अंग्रेजों से लड़ते हुए शहीद हुए। 1857 से लेकर 1947 तक और उसके बाद भी मदरसों के उलमा देश की एकता के लिए खड़े रहे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री धामी बिना इतिहास पढ़े ‘जिहाद की शिक्षा’ की बात कर रहे हैं, जो असंवैधानिक और अनैतिक है। उनके मुताबिक संवैधानिक पद पर बैठे लोगों को शिक्षण संस्थाओं में सुधार की बात करनी चाहिए, न कि उन्हें बदनाम करना चाहिए। मौलाना ने आरोप लगाया कि उत्तराखंड सरकार ने 250 मदरसों पर ताले लगा दिए और 125 सूफी मजारों पर बुलडोजर चलाया। उन्होंने कहा कि ऐसा कदम उत्तर प्रदेश में भी नहीं उठाया गया और राज्य सरकार इस्लामी धार्मिक शिक्षा खत्म करने पर उतारू है। वहीं मुख्यमंत्री ने कहा था कि राज्य में विभाजनकारी सोच को रोकने के लिए मदरसा बोर्ड समाप्त किया गया है। उनका कहना था कि मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों को भी वही पाठ्यक्रम पढ़ाया जाएगा, जो शिक्षा बोर्ड तय करता है, ताकि वे देश और समाज की प्रगति में योगदान दे सकें। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि 1 जुलाई 2026 से इन संस्थानों में समान पाठ्यक्रम लागू होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ जगहों पर ‘जिहादी’ सोच पनप रही थी, इसलिए कार्रवाई जरूरी थी। सरकार ने 250 से ज्यादा अवैध मदरसों पर भी कार्रवाई की, क्योंकि उनके रिकॉर्ड और पढ़ाई का विवरण स्पष्ट नहीं था।  

ट्रंप का धमकी भरा कदम: फार्मा सेक्टर पर 100% टैरिफ, भारत पर भी पड़ सकता है असर

नई दिल्ली ईरान-अमेरिका जंग के बीच ट्रंप सरकार कुछ दवा कंपनियों पर टैरिफ लगाने के बारे में सोच रही है. अगर ये कंपन‍िया ट्रंप सरकार की शर्त नहीं मानती हैं, तो उन्‍हें 100 फीसदी तक टैरिफ का सामना करना पड़ सकता है. खासकर उन कंपनियों पर, जो अमेरिका में अपनी दवाएं इम्‍पोर्ट करती हैं. इसका मतलब है कि भारत से भी अमेरिका भेजे जाने वाले दवाओं पर इसका असर पड़ सकता है।  ब्‍लूमबर्ग के मुताबिक, अगर दवा निर्माता कंपनियां अमेरिका में कम कीमतों की गारंटी देने वाले समझौतों पर नहीं पहुंच पाती हैं, तो ट्रंप प्रशासन गुरुवार को ही उन पर टैरिफ लगाने का ऐलान कर सकता है. ब्लूमबर्ग ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि आयातित ब्रांडेड और पेटेंट दवाओं पर ये शुल्क 100 प्रतिशत तक लागू हो सकता है. यह पहल व्यापार विस्तार अधिनियम की धारा 232 के तहत की गई जांच के बाद की गई है।  अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के एक बयान ने भारतीय शेयर बाजार के फार्मा सेक्टर में हलचल मचा दी. ट्रंप ने संकेत दिया है कि अमेरिका में आने वाली ब्रांडेड और पेटेंट वाली दवाओं पर 100% तक टैरिफ लगाया जा सकता है. इस खबर के सामने आते ही निवेशकों में घबराहट दिखी और कई दवा कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट दर्ज की गई. सबसे ज्यादा असर Sun Pharmaceutical Industries पर देखा गया, जिसके शेयर करीब 4-5% तक टूटकर 52 हफ्तों के निचले स्तर के करीब पहुंच गए. वहीं, Divi’s Laboratories, Biocon, Lupin, Dr. Reddy’s Laboratories, Cipla और Zydus Lifesciences जैसे बड़े नामों में भी 2 से 4% तक की गिरावट देखने को मिली. निफ्टी फार्मा इंडेक्स भी करीब 2.5% नीचे फिसल गया।  Bloomberg की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप का कहना है कि अगर विदेशी दवा कंपनियां अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग नहीं करतीं, तो उनकी दवाओं पर भारी टैक्स लगाया जाएगा. उनका फोकस “मेड इन अमेरिका” को बढ़ावा देना और घरेलू रोजगार बढ़ाना है. यही वजह है कि इस तरह के टैरिफ को ट्रंप लगाने की तैयारी कर रहे है. हालांकि, एक्सपर्ट्स मानते हैं कि फिलहाल बाजार में जो गिरावट दिखी है, वह ज्यादा सेंटिमेंट आधारित है. भारत से अमेरिका को जो दवाएं भेजी जाती हैं, उनमें ज्यादातर हिस्सा जेनरिक दवाओं का होती है. ये सस्ती दवाएं होती हैं और अभी तक टैरिफ का फोकस ब्रांडेड और पेटेंट दवाओं पर ही है. इसलिए सीधे तौर पर सभी कंपनियों पर बड़ा असर पड़ने की संभावना कम मानी जा रही है।  किन फार्मा कंपनियों पर सबसे ज्यादा असर? फिर भी कुछ कंपनियां ज्यादा प्रभावित दिखीं. जैसे सन फार्मा अमेरिका में कुछ स्पेशलिटी और ब्रांडेड दवाएं भी बेचती है. इसी वजह से उसके शेयरों पर दबाव ज्यादा रहा. वहीं Divi’s Laboratories और Laurus Labs जैसी कंपनियां API (एक्टिव फार्मास्यूटिकल इंग्रीडिएंट्स) बनाती हैं, जिनका निर्यात अमेरिका और यूरोप में होता है, इसलिए उनमें भी हल्की कमजोरी दिखी।  जेनरिक दवाओं का हिस्सा 90% से ज्यादा हालांकि, एक पॉजिटिव पहलू यह भी है कि कई भारतीय कंपनियां पहले से ही अमेरिका में निवेश कर रही हैं. Biocon ने हाल ही में न्यू जर्सी में अपनी यूनिट शुरू की है. ऐसे में जिन कंपनियों का लोकल प्रेजेंस है, उन पर टैरिफ का असर सीमित रह सकता है. भारत हर साल अमेरिका को करीब 10.5 अरब डॉलर की दवाएं निर्यात करता है, जिसमें 90% से ज्यादा हिस्सा जेनरिक दवाओं का होता है. बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अभी निवेशकों को घबराने की जरूरत नहीं है. यह गिरावट कम समय के लिए भी हो सकती है. अगर कंपनियां अमेरिका में अपनी मौजूदगी बढ़ाती हैं और स्ट्रैटजी में बदलाव करती हैं, तो भविष्य में इसका फायदा भी मिल सकता है।  ट्रंप का यह बयान बाजार के लिए एक झटका जरूर है, लेकिन भारतीय फार्मा सेक्टर की बुनियादी मजबूती अभी भी बरकरार है. आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि टैरिफ नीति किस हद तक लागू होती है और कंपनियां इसके अनुसार खुद को कैसे ढालती हैं। 

नारी शक्ति वंदन अधिनियम लागू करने को सरकार तैयार, बजट सत्र के विस्तार में होगा संविधान संशोधन

नई दिल्ली संसद की 16 अप्रैल से 18 अप्रैल तक फिर से तीन बैठकें होंगी. संसद की इन तीन सीटिंग सरकार महिला आरक्षण बिल लागू करने के लिए जरूरी संशोधन लेकर आएगी और पारित कराएगी. संसद के बजट सत्र का एक्सटेंशन होगा, यह अब औपचारिक रूप से तय हो गया है. राज्यसभा में संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा था कि संसद की कार्यवाही को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित नहीं किया जाएगा. हम निश्चित उद्देश्य के लिए दो या तीन हफ्ते बाद फिर से बैठक बुलाएंगे. अब संसद की अगली बैठक की तारीख भी सामने आ गई है. संसद के दोनों सदनों, लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही आज अनिश्चितकाल के लिए स्थगित नहीं होगी. संसद के दोनों सदनों की बैठक 16 अप्रैल से फिर शुरू होगी. दोनों सदनों में 17 और अप्रैल को भी कार्यवाही चलेगी. संसद की इन तीन बैठकों के दौरान सरकार महिला आरक्षण लागू करने के लिए संविधान संशोधन बिल पारित कराएगी. यह एक तरह से बजट सत्र का ही एक्सटेंशन है. गौरतलब है कि सरकार ने 2029 के आम चुनाव में महिलाओं के लिए आरक्षण की मंशा जताते हुए इसके संकेत दे दिए थे. विपक्षी दलों ने पांच राज्यों में चल रहे चुनाव के बाद इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाने और इसके बाद संसद की बैठक बुलाकर इसे लागू करने की मांग सरकार से की थी. सुबह राज्यसभा में इसे लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के सदस्यों के बीच तल्ख और गर्मा-गर्म तकरार भी देखने को मिली थी. कांग्रेस के चीफ व्हिप जयराम रमेश ने चुनाव के बीच ऐसा करने को आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन बताया था. उन्होंने चुनाव बाद यह बिल लाने की अपील करते हुए कहा था कि जब यह बिल संसद से पारित हुआ था, विपक्ष ने तभी इसे तत्काल लागू करने की मांग की थी. तब सरकार ने जनगणना से परिसीमन तक बाध्यताएं गिना इसे तुरंत लागू करने से इनकार कर दिया था. अब तमिलनाडु और बंगाल में चुनाव हैं, तब इनको इस बिल की याद आई है.  

ट्रंप ने किया मैक्रों का मजाक, कहा- उनकी पत्नी बहुत बुरा बर्ताव करती हैं

वाशिंगटन  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों का मजाक उड़ाया है। एक लंच के दौरान ट्रंप ने कहा, "मैंने फ्रांस के मैक्रों को फोन किया, जिनकी पत्नी उनके साथ बेहद बुरा बर्ताव करती हैं। अब भी उस मुक्के से उबर रहे हैं, जो उन्होंने मुंह पर मारा था।" ट्रंप का यह कमेंट एक वीडियो में रिकॉर्ड हो गया और यह व्हाइट हाउस के यूट्यूब चैनल पर भी अपलोड कर दिया गया। हालांकि, बाद में विवाद बढ़ने पर वीडियो को ब्लॉक कर दिया गया। ट्रंप ने यह कमेंट पिछले साल मई के उस वीडियो को लेकर की थी, जिसमें मैक्रों की पत्नी ब्रिगिट वियतनाम यात्रा के दौरान फ्रांसीसी राष्ट्रपति को धक्का देते हुए कैमरे में कैद हो गई थीं। हालांकि, बाद में मैक्रों ने दुष्प्रचार बताते हुए खारिज कर दिया था। बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध के बीच उन्होंने खुद फ्रांस से सैन्य मदद मांगी थी, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, "हमें उनकी जरूरत नहीं थी, लेकिन फिर भी मैंने उनसे मदद मांगी।" ट्रंप ने कहा, "और मैंने कहा, इमैनुएल, हम खाड़ी में थोड़ी मदद पाकर खुश होंगे, भले ही हम बुरे लोगों और बैलिस्टिक मिसाइलों को खत्म करने के मामले में नए रिकॉर्ड बना रहे हैं। हमें थोड़ी मदद मिल जाए तो अच्छा रहेगा। अगर आप ऐसा कर सकें, तो क्या आप कृपया तुरंत कुछ जहाज भेज सकते हैं?'' इसके बाद ट्रंप ने मैक्रों के फ्रेंच लहजे में नकल करते हुए कहा, ''नहीं नहीं, हम ऐसा नहीं कर सकते डोनाल्ड, हम यह युद्ध जीतने के बाद कर सकते हैं।'' ट्रंप ने इसे खारिज कर दिया और कहा कि नहीं हमें युद्ध जीतने के बाद कोई मदद की जरूरत नहीं है। पत्नी संग वायरल हुआ था मैक्रों का वीडियो पिछले साल मैक्रों और उनकी पत्नी का वीडियो सामने आया था, जो चर्चा का विषय बन गया। इसमें दिखाया गया कि दक्षिण-पूर्व एशिया की अपनी आधिकारिक यात्रा शुरू करने के लिए वियतनाम पहुंचने पर, राष्ट्रपति की पत्नी ने अचानक एक झटके के साथ उनका चेहरा एक तरफ हटा दिया। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही प्लेन का दरवाजा खुलता है, तुरंत सामने मैक्रों दिखाई देते हैं। उसी दौरान उनकी पत्नी का हाथ सामने आता है और मैक्रों के चेहरे को दूसरी ओर धक्का देती हैं। यह घटना वहां मौजूद क्रू भी देखती है और सामने लगे कैमरे में भी कैद होती है। जब मैक्रों को पता चलता है कि वीडियो बनाया जा चुका है, तो वह झेंपते हुए एक हल्की सी स्माइल पास करते हैं और कैमरे के सामने हाथ हिलाते हैं। बता दें कि मैक्रों ने ब्रिगिट मैक्रों से शादी की थी, जोकि उनकी हाईस्कूल में टीचर थीं। दोनों का रिश्ता तब शुरू हुआ था, जब मैक्रों की उम्र महज 15 साल थी। उस समय ब्रिगिट एमियंस के ला प्रोविडेंस स्कूल में 39 साल की टीचर थीं। दोनों के बीच लगभग 25 साल का गैप होने के बाद भी, साल 2007 में शादी कर ली थी।

पाकिस्तान को रक्षा मंत्री का दो टूक संदेश, किसी भी उकसावे पर करारा जवाब

तिरुवनंतपुरम रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पड़ोसी देश पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय सीमा पर किसी भी दुस्साहस के खिलाफ सख्त चेतावनी दी है और कहा है कि अगर वह भारत के खिलाफ कार्रवाई करने की कोई योजना बनाता है, तो अबकी बार भारत का जवाब न सिर्फ अभूतपूर्व होगा बल्कि निर्णायक होगा। रक्षा मंत्री ने कहा, "मौजूदा हालात में हमारा पड़ोसी कोई भी दुस्साहस कर सकता है। अगर वह ऐसा करता है, तो भारत की कार्रवाई अभूतपूर्व और निर्णायक होगी।" तिरुवनंतपुरम में 'वीर सैनिक सम्मान' समारोह को संबोधित करते हुए भाजपा नेता और रक्षा मंत्री ने बताया कि पहलगाम में हुई आतंकवादी घटना के बाद, भारतीय सैनिकों ने "ऑपरेशन सिंदूर" के दौरान सिर्फ 22 मिनट में ही पाकिस्तान को घुटनों पर ला दिया था। उन्होंने घोषणा की कि भारतीय सैन्य इतिहास में आतंकवाद के खिलाफ 'ऑपरेशन सिंदूर' अब तक का सबसे महत्वपूर्ण ऑपरेशन था। सिंह ने कहा, "पहलगाम में हुई आतंकवादी घटना के बाद, भारतीय सैनिकों ने 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान सिर्फ 22 मिनट में ही पाकिस्तान को घुटनों पर ला दिया था। भारतीय सैन्य इतिहास में आतंकवाद के खिलाफ यह अब तक का सबसे बड़ा ऑपरेशन था।" ऑपरेशन सिंदूर अभी समाप्त नहीं हुआ उन्होंने घोषणा की कि 'ऑपरेशन सिंदूर' अभी समाप्त नहीं हुआ है। सिंह ने कहा, "यह ऑपरेशन अभी बंद नहीं हुआ है। अगर सीमा पार से कोई भी शरारत की जाती है, तो न केवल उसका मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा, बल्कि अभूतपूर्व कार्रवाई भी की जाएगी।" रक्षा मंत्री ने आगे कांग्रेस के नेतृत्व वाली UPA सरकार पर भारत को निशाना बनाने वाली आतंकवादी घटनाओं के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करने में विफल रहने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि उस सरकार की प्रतिक्रिया केवल दोषियों को "मोटी-मोटी फाइलें" भेजने तक ही सीमित थी, न कि उन्हें कोई ठोस जवाब देने तक। तब सिर्फ मोटी-मोटी फाइलें सौंपी गई थीं सिंह ने कहा, "अगर मैं यहां सिर्फ आतंकवाद की बात करूं, तो आपको याद होगा कि जब कांग्रेस के नेतृत्व वाली UPA सरकार सत्ता में थी, तब हालात कैसे थे? आए दिन देश के किसी न किसी हिस्से में कोई न कोई आतंकवादी घटना होती रहती थी, या फिर शहरों में बम धमाकों की खबरें आती रहती थीं। उस समय सरकार की प्रतिक्रिया क्या होती थी?" सिंह ने कहा, "तब सिर्फ मोटी-मोटी फाइलें सौंपी गई थीं, जिन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।" आतंकवाद के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' उरी हमले के बाद 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक और हाल ही में हुए 'ऑपरेशन सिंदूर' का ज़िक्र करते हुए, रक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार ने आतंकवाद को करारा झटका दिया है। उन्होंने कहा, "चाहे वह 'उरी हमले' के बाद की सर्जिकल स्ट्राइक हो, 'पुलवामा' के बाद की एयर स्ट्राइक हो, या हाल ही में 'पहलगाम' की घटना के बाद किया गया 'ऑपरेशन सिंदूर' हो, हमने आतंकवाद के खिलाफ एक ज़ोरदार प्रहार किया है।" उन्होंने कहा कि केंद्र में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की सरकार के आने के बाद से आतंकवाद के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाई गई है। पेट्रोल या डीज़ल की बिल्कुल भी कमी नहीं उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत हुई है और सरकार के रवैये तथा कार्रवाई के तरीके में बदलाव आया है। उन्होंने कहा कि यह बात अप्रैल 2025 में हुए पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में चलाए गए 'ऑपरेशन' सिंदूर से स्पष्ट होती है। पश्चिम एशिया संकट पर बात करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार मध्य पूर्व में चल रही स्थिति को संभालने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने जनता को भरोसा दिलाया कि देश में पेट्रोल या डीज़ल की बिल्कुल भी कमी नहीं है और पुष्टि की कि भारतीय नौसेना इस क्षेत्र की निगरानी करने और वहां मौजूद लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में सक्रिय रूप से लगी हुई है।

हाईकोर्ट की फटकार: ‘इतना अश्लील गाना’ पर हनी सिंह और बादशाह को आदेश, विवादित गाने को हटाने का निर्देश

नई दिल्ली  दिल्ली हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक और कड़ा रुख अपनाते हुए मशहूर रैपर हनी सिंह और बादशाह के पुराने विवादित गाने ‘माफिया मुंडीर’ (वॉल्यूम 1) को लेकर बड़ा आदेश दिया है. अदालत ने साफ कहा है कि इस गाने को यूट्यूब और स्पॉटिफाई जैसे तमाम डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से तुरंत हटा दिया जाए. 2000 के दशक का यह गाना लंबे समय से अपने लीरिक्स और कॉन्टेंट को लेकर विवादों में रहा है, लेकिन अब कोर्ट ने इस पर कानूनी हथौड़ा चला दिया है।  हाईकोर्ट के जज ने मामले की सुनवाई के दौरान इस गाने की कॉन्टेंट पर गहरी नाराजगी और चिंता जताई. जज ने हनी सिंह और बादशाह को फटकार लगाते हुए कहा कि इस गाने के बोल बेहद अश्लील, अभद्र और महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाले हैं. जज ने कड़े शब्दों में कहा कि इस गाने ने अदालत की अंतरात्मा को झकझोर दिया है. कोर्ट का कहना है कि कोई भी सभ्य समाज ऐसे कंटेंट को इंटरनेट पर मौजूद रहने की अनुमति नहीं दे सकता जो महिलाओं के प्रति इतना अपमानजनक और भद्दा हो।  नए कलाकारों के लिए सीख यह फैसला डिजिटल स्पेस में मौजूद कॉन्टेंट की जवाबदेही तय करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है. सालों पहले रिलीज हुए इस गाने पर कोर्ट का यह कमेंट उन कलाकारों के लिए भी एक मैसेज है जो अपने काम में अभद्रता परोसते हैं. अब देखना यह है कि सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स इस आदेश का कितनी जल्दी पालन करते हैं और क्या आने वाले समय में ऐसे अन्य गानों पर भी इसी तरह की कार्रवाई होगी. अपने आदेश में कोर्ट ने यह भी दर्ज किया कि गायक हनी सिंह और बादशाह दोनों ने इस गाने को गाने से इनकार किया है, लेकिन एक कॉन्सर्ट के दौरान इस गाने के बोल प्रस्तुत किए गए थे. मामले को लेकर अदालत ने गंभीर चिंता जताई है और इस तरह के कंटेंट पर सख्त रुख अपनाने के संकेत दिए हैं. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ‘माफिया मुंडीर’ हनी सिंह, रफ्तार और बादशाह जैसे कलाकारों का एक ग्रुप था, जो रैप की दुनिया में बेहद पॉपुलर हुआ, लेकिन आपसी मतभेदों की वजह से टूट गया. हनी सिंह ने अब जनवरी 2026 में ‘माफिया मुंडीर 2.0’ (इंटरनेशनल सीजन 1) के साथ कमबैक का ऐलान किया था। 

वैश्विक तनाव के बीच होर्मुज पर मंथन, UK ने बुलाई 35 देशों की अहम बैठक

नई दिल्ली  पश्चिम एशिया में ईरान-इजरायल-अमेरिका संघर्ष के बीच भारत सरकार ने ईरान से अपने नागरिकों की बड़े पैमाने पर सुरक्षित निकालना शुरू कर दी है। वही, यूनाइटेड किंगडम ने भारत को होर्मुज पर 35 देशों की बातचीत में शामिल का निमंत्रण भेजा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने राष्ट्रीय राजधानी में अंतर-मंत्रालयीय ब्रिफिंग के दौरान बताया कि अब तक 1,200 से अधिक भारतीय नागरिकों को ईरान से सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। इनमें से 845 छात्र हैं। जायसवाल ने कहा कि कुल 1,200 भारतीयों में से 996 को आर्मेनिया और 204 को अजरबैजान भेजा गया है। दोनों देशों में भारतीय मिशनों और स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर MEA इन नागरिकों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित कर रहा है। ट्रांजिट में इनकी सहायता के लिए पूर्ण व्यवस्था की गई है। भारत को होर्मुज पर बातचीत के लिए मिला निमंत्रण इस बीच, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि यूनाइटेड किंगडम ने भारत को होर्मुज पर 35 देशों की बातचीत में शामिल का निमंत्रण भेजा है। भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिसरी इस बैठक में वर्चुअली शामिल होंगे। छात्रों की संख्या सबसे अधिक निकाले गए भारतीयों में छात्रों की संख्या सबसे ज्यादा है। सरकार ने आर्मेनिया और अजरबैजान के रास्ते इनकी निकासी का प्लान बनाया था क्योंकि सीधे ईरान से भारत आने वाले हवाई मार्ग प्रभावित थे। विदेश मंत्रालय ने दोनों पड़ोसी देशों में भारतीय दूतावासों को सक्रिय कर दिया था ताकि निकाले गए नागरिकों को तुरंत मदद मिल सके और उन्हें भारत लाया जा सके। इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक नेताओं से लगातार बातचीत की है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि 28 मार्च को पीएम मोदी ने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से टेलीफोन पर चर्चा की। इस बातचीत में पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष पर गहन चर्चा हुई। प्रधानमंत्री ने क्षेत्र में ऊर्जा ढांचे पर हुए हमलों की निंदा की और दोनों नेताओं ने फ्री नेविगेशन तथा शिपिंग लेन को खुला और सुरक्षित रखने पर जोर दिया। 6 लाख से अधिक यात्री लौटे संघर्ष अब दूसरे महीने में प्रवेश कर चुका है। सुरक्षा स्थिति को देखते हुए पश्चिम एशिया से भारत वापस आने वाले यात्रियों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है। आंकड़ों के अनुसार, अब तक 6 लाख से अधिक भारतीय यात्री इस क्षेत्र से स्वदेश लौट चुके हैं। सरकार ने सभी संबंधित मंत्रालयों के साथ समन्वय बनाकर स्थिति पर सतर्क नजर रखी हुई है।  

Oracle की छंटनी के बीच AI ने 12 हजार नौकरियां खत्म कीं, परप्लेक्सिटी CEO का बयान सामने आया

 नई दिल्ली ओरैकल (Oracle) ने भारत में करीब 12 हजार कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया है. यहां नौकरी से निकालने की पीछे की वजह AI को बताया गया है. इसी बीच परप्लेक्सिटी के सीईओ अरविंद श्रीनिवास का एक बयान चर्चा में है।  अरविंद श्रीनिवास ने हाल ही में जारी ऑल इन पॉडकास्ट पर कहा है कि AI की वजह से नौकरी गंवाने वालों को इसे एक मौके की तरह देखना चाहिए और अपना खुद का काम शुरू करना चाहिए।  पॉडकास्ट के दौरान कहा कि कुछ समय के लिए नौकरी का नुकसान होगा लेकिन AI टूल्स लोगों को मिनी बिजनेस शुरू करने का मौका देता है. साथ ही कमाई के नए रास्ते बनाने की सुविधा देता है।  अरविंद श्रीनिवास ने डिटेल्स में बताते हुए कहा है कि असल बात यह है कि बहुत से लोग अपनी नौकरी से खुश नहीं हैं. अब एक नई संभावना और नया मौका सामने आया है कि इन टूल्स को सीखें और अपना छोटा बिजनेस शुरू करें।  सीईओ के इस बयान पर सोशल मीडिया पर काफी आलोचना भी हुई है. कई लोगों ने कहा कि अपना बिजनेस शुरू करना आसान नहीं होता है. हालांकि कुछ लोगों ने इस सोच का समर्थन भी किया है।  एक्सपर्ट ने बताया 5 साल में इतनी नौकरी जाने की आशंका  कई एक्सपर्ट का मानना है कि आने वाले 5 साल में सिर्फ अमेरिका में ही AI करीब 90 लाख नौकरियों पर असर डालेगा. इनमें प्रोग्रामिंग, वेब डिजाइन और डेटा साइंस जैसी नौकरी पर असर पड़ेगा. वहीं, इंडस्ट्री लीडर्स ने भी यह वॉर्निंग दी है कि बेरोजगारी का स्तर 30% से भी ज्यादा तक पहुंच सकता है।  आने वाले दिनों में और लोगों को निकालेगा Oracle  ओरैकल ने अभी करीब 12,000 कर्मचारियों से निकाला है. आने वाले दिनों यह संख्या और बढ़ेगी. असल में यह कंपनी की बड़ी छंटनी का हिस्सा है और कंपनी ग्लोबली 30 हजार कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाएगी।  ओरेकल कंपनी क्या है?  ओरैकल, असल में एक अमेरिकी मल्टीनेशनल कंपनी है. ये कंपनी मुख्य रूप से डेटाबेस मैनेजमेंट सिस्टम, क्लाउंड कंप्यूटर और एंटरप्राज सॉफ्टवेयर प्रोवाइड कराती है. इसकी शुरुआत साल 1977 में हुई थी, जिसको लैरी एलिसन ने अपने साथियों के साथ मिलकर शुरू किया था। 

इंडोनेशिया में भूकंप का कहर: 7.4 तीव्रता, सुनामी और भारी तबाही

जकार्ता इंडोनेशिया में भयंकर भूकंप आया है. इंडोनेशिया में भूकंप के बाद एक और खतरा मंडरा रहा है. वह खतरा है सुनामी का. जी हां इंडोनेशिया में जलजले के बाद अब सुनामी ने कहर बरपाना शुरू कर दिया है. इंडोनेशिया के जलक्षेत्र में आज यानी गुरुवार की सुबह जोरदार भूकंप आया. रिक्टर स्केल पर इस भूकंप की तीव्रता 7.4 मापी गई. इसके बाद भूकंप से सुनामी की छोटी लहरें उठीं. इस भूकंप-सुनामी के डेडली कॉम्बिनेशन में एक व्यक्ति की मौत हो गई और घरों एवं इमारतों को नुकसान पहुंचा।  दरअसल, यूएसजीएस यानी संयुक्त राज्य अमेरिका के भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने बताया कि गुरुवार तड़के पूर्वी इंडोनेशिया के तट से दूर समुद्र में शक्तिशाली भूकंप आया. इसके बाद एक अमेरिकी निगरानी एजेंसी ने भूकंप के केंद्र से 1,000 किलोमीटर के दायरे में सुनामी की संभावना को लेकर चेतावनी जारी की. अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के अनुसार भूकंप की तीव्रता 7.4 थी और इसका केंद्र मोलूका सागर में 35 किलोमीटर की गहराई पर था. भूकंप के केंद्र से 1,000 किलोमीटर के दायरे में खतरनाक सुनामी लहरें उठ सकती हैं, खासकर इंडोनेशिया, फिलीपींस और मलेशिया के तटीय इलाकों में. यूएसजीएस ने भी भूकंप के केंद्र से उतनी ही दूरी पर स्थित क्षेत्रों में खतरनाक सुनामी लहरों की संभावना के संबंध में चेतावनी दी।  इंडोनेशिया में भूंकप इंडोनेशिया की मौसम विज्ञान, जलवायु विज्ञान एवं भूभौतिकी एजेंसी के अनुसार, भूकंप के आधे घंटे से भी कम समय में कई निगरानी केंद्रों में सुनामी की लहरें दर्ज की गईं. इनमें बिटुंग में आंठ इंच और पश्चिम हलमाहेरा में एक फुट ऊंची लहरें शामिल हैं. होनोलुलु स्थित प्रशांत सुनामी चेतावनी केंद्र ने कहा कि दक्षिणी फिलीपीन के दावाओ में दो इंच ऊंची लहरें उठीं लेकिन दूरदराज के क्षेत्रों के लिए सुनामी का कोई खतरा नहीं है।  इंडोनेशिया की आपदा प्रबंधन एजेंसी के अनुसार उत्तरी सुलावेसी प्रांत के तटीय शहर बिटुंग और आसपास के इलाकों के साथ-साथ पड़ोसी प्रांत उत्तर मलुकु के टेरनेट शहर में 10 से 20 सेकंड तक भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए।  भूकंप-सुनामी से कितनी तबाही प्रारंभिक आकलन से पता चला है कि टेरनेट के कुछ हिस्सों में थोड़ा नुकसान हुआ है. स्थानीय आपदा प्रबंधन अधिकारियों ने बताया कि बटांग दुआ द्वीप जिले में एक गिरजाघर प्रभावित हुआ है और दक्षिण टेरनेट में दो घर क्षतिग्रस्त हुए हैं. बिटुंग में नुकसान का आकलन अभी जारी है. इंडोनेशिया की खोज और बचाव एजेंसी ने बताया कि उत्तरी सुलावेसी के मिनाहासा जिले में 70 वर्षीय महिला की मौत हो गई और एक अन्य निवासी घायल हो गया।  तटीय इलाके में खतरा बरकरार आपदा प्रबंधन एजेंसी के प्रवक्ता अब्दुल मुहरी ने एक बयान में कहा, ‘‘इस समय सावधानी बरतने की जरूरत है, खासकर तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों को. उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि जब तक अधिकारी अनुमति न दें तब तक वे जलक्षेत्र में नहीं जाएं. भूकंप के बाद समुद्र तट से दूर कम से कम दो झटके और महसूस किए गए. अधिकारियों ने बताया कि दोनों झटकों से सुनामी का खतरा नहीं है।  क्यों खतरा मंडरा रहा इंडोनेशिया दुनिया के सबसे अधिक भूकंपीय रूप से सक्रिय क्षेत्रों में से एक है, क्योंकि यह ‘प्रशांत अग्नि वलय’ पर स्थित है. यह ज्वालामुखियों और भ्रंश रेखाओं का एक विशाल 40,000 किलोमीटर लंबा चाप है, जो टेक्टोनिक प्लेटों की आपसी हलचल से बना है. प्रशांत महासागर को घेरने वाली यह घोड़े की नाल के आकार की बेल्ट दुनिया के लगभग 90 प्रतिशत भूकंपों का कारण बनती है और यह अपनी लगातार होने वाली भूकंपीय और ज्वालामुखी गतिविधियों के लिए जानी जाती है।  यहां पिछले महीने में भी आया था भूकंप यूएसजीएस के अनुसार, अभी पिछले महीने ही 3 मार्च को सुमात्रा के तट से दूर समुद्र में 6.1 तीव्रता का भूकंप आया था. इससे वहां के लोग सहम गए थे, लेकिन कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ था. वह भूकंप सुमात्रा के उत्तर-पूर्वी सिरे के पास समुद्र में उत्पन्न हुआ था, जिसके कारण उस क्षेत्र में, जहां अक्सर भूकंप के झटके आते रहते हैं, कई लोग घबराकर अपने घरों से बाहर भाग निकले थे. इसी बीच, इंडोनेशिया की मौसम विज्ञान, जलवायु विज्ञान और भूभौतिकी एजेंसी ने इस भूकंप की तीव्रता 6.4 दर्ज की और बताया कि यह 13 किलोमीटर की गहराई पर आया था।