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ताजपोशी के दिन सवाल तय: तारिक रहमान की संपत्ति कितनी है — पत्नी जुबैदा की आमदनी से तुलना

ढाका  तारिक रहमान की ताजपोशी होने वाली है. दुनियाभर से करीब 1200 मेहमान शपथ ग्रहण समारोह में पहुंचने वाले हैं. दरअसल, तारिक रहमान बांग्लादेशी के अगले प्रधानमंत्री बनने वाले हैं. ये पूर्व राष्ट्रपति जिया उर रहमान और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बड़े बेटे हैं, और 17 साल के निर्वासन के बाद 2025 में लंदन से बांग्लादेश लौटकर आए हैं.  बंपर जीत के बाद तारिक रहमान की खूब चर्चा हो रही है. लोग जानना चाहते हैं कि बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के कार्यकारी प्रमुख तारिक रहमान की कुल संपत्ति कितनी है, उनकी कमाई का जरिया क्या है?  पति से ज्यादा पत्नी अमीर चुनावी हलफनामे के मुताबिक तारिक रहमान की कुल नेटवर्थ करीब 1.97 करोड़ बांग्लादेशी टका है, जो भारतीय करेंसी में करीब 1.48 करोड़ रुपये के बराबर है. उनकी यह नेटवर्थ मुख्य रूप से बैंक बैलेंस, फिक्स्ड डिपॉजिट, शेयर और अचल संपत्ति मिलाकर है. चुनाव आयोग के सामने जमा किए गए हलफनामे में यह विवरण साफ दर्ज किया गया है.  बता दें, तारिक रहमान ने ढाका-17 और बोगुरा-6 दोनों सीटों से भारी मतों से जीत हासिल की है. Election Affidavit के अनुसार तारिक रहमान की सालाना आय करीब 6.76 लाख टका (लगभग 5 लाख रुपये) है, जो उन्होंने शेयर, बॉन्ड और बैंक जमा पर अर्जित किया है.  उनके बैंक खातों में कुल जमा लगभग 1.23 करोड़ टका (यानी करीब 92.25 लाख रुपये) हैं, जिनमें से लगभग 31.6 लाख टका नकद या चालू बचत में रखे हुए हैं. Fixed Deposits में कुछ उनके बेटी के नाम पर भी हैं, तारिक रहमान द्वारा घोषित चल संपत्ति (movable assets) में फर्नीचर लगभग 2 लाख टका का है. इसके अलावा उनके पास बोगुरा में 2 एकड़ से अधिक जमीन है.  तारिक रहमान की पत्नी डॉक्टर तारिक की पत्नी डॉ. जुबैदा रहमान ने अपने हलफनामे में काफी अधिक आय और संपत्ति घोषित की है. वे एक डॉक्टर हैं और उनकी वर्षीय आय लगभग 35.6 लाख टका (लगभग 26.7 लाख रुपये) है, यह उनकी पति की आय से लगभग 5 गुना अधिक है. उनके बैंक जमा लगभग 1 करोड़ बांग्लादेशी टका हैं, जिसमें से 66.5 लाख टका बचत खाते में हैं, वे 111.25 डिसिटल भूमि और 800-स्क्वायर-फुट के डुप्लेक्स घर की भी मालकिन हैं. टैक्स रिकॉर्ड्स से पता चलता है कि तारिक ने पिछले साल करीब 1 लाख टका टैक्स दिया, हलफनामे के अनुसार, उनके पास कोई भी कर्ज या सरकारी बकाया नहीं है. जबकि उनकी पत्नी ने लगभग 5.6 लाख टका टैक्स दिया. शेयरों में भी दोनों का मिलकर कुछ निवेश है, जिसमें लगभग 5 लाख रुपये से अधिक का शेयर और अन्य कंपनियों में 18.5 लाख रुपये का निवेश शामिल है. हलफनामे में यह भी उल्लेख है कि 2004 से अब तक दर्ज 77 कानूनी मामलों में उन्हें पूरी तरह से बरी कर दिया गया है.

AI के दौर में इंसानों का भविष्य क्या? 800 करोड़ आबादी के सामने रोजगार का बड़ा सवाल

मुंबई  आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) लगातार एडवांस होता जा रहा है और हर फील्ड में इसकी धमक देखने को मिल रही है. आज AI दुनिया की सबसे बड़ी तकनीकी क्रांति बन चुका है. चैटबॉट से लेकर सेल्फ-ड्राइविंग कार, मेडिकल डायग्नोसिस से लेकर कंटेंट राइटिंग तक हर क्षेत्र में AI तेजी से अपनी जगह बना रहा है. ऐसे में एक बड़ा सवाल लोगों के मन में उठता है कि अगर सभी काम AI ही कर देगा, तो दुनिया के 800 करोड़ लोग क्या करेंगे? क्या नौकरियां खत्म हो जाएंगी? क्या इंसान बेकार हो जाएगा? आइए इस सवाल का जवाब ChatGPT से जान लेते हैं. ChatGPT के मुताबिक सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि AI का उद्देश्य इंसानों को पूरी तरह रिप्लेस करना नहीं, बल्कि उनके काम को आसान और तेज बनाना है. इतिहास गवाह है कि जब भी नई तकनीक आई जैसे औद्योगिक क्रांति, कंप्यूटर या इंटरनेट आया, तब शुरुआत में नौकरियों को लेकर डर पैदा हुआ. हालांकि समय के साथ नई तकनीक ने पुराने कामों को बदला और नई नौकरियां भी पैदा कीं. AI भी कुछ दोहराए जाने वाले और डेटा आधारित कामों को संभालेगा, लेकिन रचनात्मकता, भावनात्मक समझ और नैतिक निर्णय जैसे क्षेत्रों में इंसान की भूमिका अभी भी अहम रहेगी. दूसरा पहलू है नौकरियों का बदलाव. कई पारंपरिक नौकरियां कम हो सकती हैं, लेकिन AI से जुड़े नए क्षेत्र तेजी से उभर रहे हैं- जैसे डेटा साइंस, मशीन लर्निंग, साइबर सिक्योरिटी, AI ट्रेनिंग, रोबोटिक्स और डिजिटल मैनेजमेंट. इसके अलावा हेल्थकेयर, शिक्षा, मानसिक स्वास्थ्य, कला और मनोरंजन जैसे क्षेत्रों में इंसानी स्पर्श की जरूरत हमेशा बनी रहेगी. यानी भविष्य में नौकरियां खत्म नहीं होंगी, बल्कि उनका स्वरूप बदलेगा. तीसरा महत्वपूर्ण मुद्दा है स्किल्स का. आने वाले समय में वही लोग सफल होंगे जो नई तकनीक के साथ खुद को अपडेट करेंगे. डिजिटल लिटरेसी, क्रिटिकल थिंकिंग, क्रिएटिविटी और समस्या सुलझाने की क्षमता बेहद जरूरी होगी. सरकारों और संस्थानों को भी शिक्षा प्रणाली में बदलाव लाकर लोगों को भविष्य की जरूरतों के हिसाब से प्रशिक्षित करना होगा. AI को दुश्मन नहीं, बल्कि एक टूल के रूप में देखने की जरूरत है. हालांकि यह भी सच है कि AI से असमानता बढ़ने का खतरा हो सकता है. अगर तकनीक का लाभ केवल कुछ कंपनियों या देशों तक सीमित रह गया, तो बेरोजगारी और आर्थिक अंतर बढ़ सकता है. इसलिए नीति-निर्माताओं के लिए जरूरी है कि वे AI के विकास के साथ-साथ सामाजिक सुरक्षा, नई नौकरियों के अवसर और रिस्किलिंग प्रोग्राम पर भी ध्यान दें. कुछ विशेषज्ञ यूनिवर्सल बेसिक इनकम जैसे विकल्पों पर भी चर्चा कर रहे हैं, ताकि तकनीकी बदलाव का असर संतुलित रहे. यह कहना गलत होगा कि AI सब कुछ कर देगा और इंसान के पास कोई काम नहीं बचेगा. AI एक शक्तिशाली असिस्टेंस है, लेकिन मानव बुद्धि, भावनाएं और नैतिकता की बराबरी अभी नहीं कर सकता. भविष्य इंसान और मशीन के सहयोग का होगा, प्रतिस्पर्धा का नहीं. अगर हम बदलाव को अपनाएं और खुद को तैयार रखें, तो AI 800 करोड़ लोगों के लिए खतरा नहीं, बल्कि नए अवसरों का दरवाजा साबित हो सकता है.

केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए बड़ा फायदा, 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों से मिलेगी राहत

नई दिल्ली   केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए बड़ी खबर। सरकार ने 8वें केंद्रीय वेतन आयोग को आधिकारिक रूप से अधिसूचित कर दिया है। अगर इसे जनवरी 2026 से प्रभावी मानकर 2027 में लागू किया जाता है, तो कर्मचारियों को लाखों रुपये का एरियर एकमुश्त मिल सकता है। कब से लागू होगा नया वेतन? सरकार की ओर से संकेत हैं कि आयोग की सिफारिशें 1 जनवरी 2026 से प्रभावी मानी जा सकती हैं। व्यावहारिक रूप से इसे 2027 में लागू किया जा सकता है। इसके बाद कर्मचारियों को 12–20 महीने तक का एरियर एक साथ मिलेगा। फिटमेंट फैक्टर और संभावित बढ़ोतरी फिटमेंट फैक्टर लगभग 2.57 माना जा रहा है। इससे सैलरी में 30% से 50% तक बढ़ोतरी संभव है। अनुमानित एरियर राशि लेवल    संभावित एरियर (₹) लेवल-1     3.60 लाख – 5.65 लाख   लेवल-2      3.98 लाख – 6.25 लाख लेवल-4     5.10 लाख – 8.01 लाख एरियर की गणना कैसे होगी? पुरानी और नई बेसिक सैलरी का अंतर निकाला जाएगा। अंतर को लागू होने तक के महीनों से गुणा किया जाएगा। महंगाई भत्ता (DA) भी बढ़ेगा, जिससे एरियर में अतिरिक्त लाभ जुड़ जाएगा। भेदभाव का कोई प्रावधान नहीं पेंशनर्स के लिए सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि नियम कहते हैं कि सिर्फ इस आधार पर कि कोई व्यक्ति 31 दिसंबर 2025 से पहले रिटायर हुआ है या उसके बाद, उनके साथ अलग तरह का व्यवहार नहीं किया जाएगा. 8वें वेतन आयोग से क्या बदलेगा? अगर 8वां वेतन आयोग 1 जनवरी 2026 से लागू होता है, तो इसका असर दो तरह से पड़ेगा. पहले यहा कि जो 1 जनवरी 2026 के बाद रिटायर होंगे, उनकी पेंशन की कैलकुलेशन सीधे नए बेसिक पे के आधार पर होगी. साथ ही पुराने पेंशनर्स, जो 31 दिसंबर 2025 तक रिटायर हो चुके होंगे, उनकी पेंशन को एक फिक्स फिटमेंट फैक्टर के जरिए रिवाइज किया जाएगा. सरकार के जवाब से यह साफ है कि 31 दिसंबर 2025 की तारीख कोई डेडलाइन नहीं है जो आपको बढ़ी हुई पेंशन के फायदे से बाहर कर दे. पिछले समय की तरह हर वेतन आयोग ने पुराने पेंशनभोगियों की पेंशन को भी रिवाइज किया है, जिससे वह महंगाई के दौर में पीछे न छूटें. किन्हें मिलेगा फायदा? केंद्रीय कर्मचारी रक्षा कर्मी ऑल इंडिया सर्विसेज अधिकारी पेंशनर कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए राहत लंबे समय से वेतन संशोधन की मांग कर रहे कर्मचारियों के लिए यह एक बड़ी राहत है। बढ़ती महंगाई और जीवनयापन की लागत को देखते हुए यह कदम जरूरी माना जा रहा है।

AI Impact Summit 2026 से भारत की वैश्विक एंट्री, राघव चड्ढा ने गिनाईं बड़ी उपलब्धियां

नई दिल्ली आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा ने सोमवार को कहा कि एआई इम्पैक्ट समिट 2026 ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और प्रौद्योगिकी शासन से संबंधित चर्चाओं को आकार देने में भारत को वैश्विक मानचित्र पर मजबूती से स्थापित कर दिया है। यहां शिखर सम्मेलन में अपने संबोधन में चड्ढा ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के शासन, विकास और जनहित में इसके उपयोग को लेकर वैश्विक बहसों में भारत की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। उन्होंने रेखांकित किया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) अब केवल एक तकनीकी मुद्दा नहीं बल्कि एक रणनीतिक मुद्दा है। उन्होंने कहा कि मजबूत कंप्यूटिंग क्षमता और बुनियादी ढांचे वाले देश आने वाले वर्षों में विश्व पर हावी होने की संभावना रखते हैं। चड्ढा ने कहा कि प्रसंस्करण क्षमता और डिजिटल बुनियादी ढांचा यह तय करेगा कि एआई युग में कौन से देश नेतृत्व करेंगे। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में तीन वैश्विक एकाधिकारों की ओर भी इशारा किया। चड्ढा ने कहा कि एआई डिजाइन पर नियंत्रण कुछ ही कंपनियों के हाथों में है, उत्पादन सीमित क्षेत्रों में केंद्रित है, और अमेरिका जैसी नीतियों के कारण निर्यात प्रतिबंधित है। उन्होंने आगे कहा कि भारत अभी तक इन तीनों स्तंभों पर नियंत्रण नहीं कर पाया है, लेकिन मानव संसाधन के मामले में देश की एक बड़ी ताकत है। भारत की प्रतिभाओं की प्रचुरता पर जोर देते हुए, चड्ढा ने कहा कि विश्व एआई पेशेवरों और कुशल मानव संसाधन के लिए भारत की ओर तेजी से देख रहा है। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि केवल प्रतिभा ही पर्याप्त नहीं है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए भारत को उच्च स्तरीय कंप्यूटिंग संसाधनों तक पहुंच सुनिश्चित करनी होगी, आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लानी होगी और मजबूत घरेलू बुनियादी ढांचा तैयार करना होगा। ऐतिहासिक तुलना करते हुए चड्ढा ने कहा कि जिस प्रकार 20वीं शताब्दी में तेल, गैस और इस्पात ने वैश्विक शक्ति को परिभाषित किया, उसी प्रकार कृत्रिम बुद्धिमत्ता और सेमीकंडक्टर निर्माण 21वीं शताब्दी में भू-राजनीतिक प्रभाव को आकार देंगे। उन्होंने आगे कहा कि इस नई वैश्विक व्यवस्था में अपना स्थान सुरक्षित करने के लिए भारत को निर्णायक कदम उठाने होंगे।

UGC एक्ट को लेकर बढ़ा समर्थन, जिले में प्रदर्शन तेज, लोगों ने खोला मोर्चा

महाराजगंज आज महाराजगंज में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुआ। अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़ा वर्ग के शिक्षकों-छात्रों से जुड़े भेदभाव निरोधक प्रावधानों पर लगी रोक के विरोध में भारतीय बौद्ध महासभा व एससी, एसटी, ओबीसी संयुक्त मोर्चा के बैनर तले लोगों ने जवाहरलाल नेहरू स्मारक पीजी कॉलेज से प्रदर्शन शुरू किया। यूजीसी एक्ट के समर्थन और विरोध में प्रदर्शनों का दौर थम नहीं रहा है। एक्ट के समर्थन और उच्च शिक्षा में समान अवसर और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने की मांग को लेकर सोमवार को यूपी के महाराजगंज की सड़कों पर बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुआ। अनुसूचित जाति, जनजाति व पिछड़ा वर्ग के शिक्षकों-छात्रों से जुड़े भेदभाव निरोधक प्रावधानों पर लगी रोक के विरोध में भारतीय बौद्ध महासभा व एससी, एसटी, ओबीसी संयुक्त मोर्चा के बैनर तले सैकड़ों लोगों ने जवाहरलाल नेहरू स्मारक पीजी कॉलेज के खेल मैदान से नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन शुरू किया। जुलूस की शक्ल में जिला मुख्यालय पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति को संबोधित छह सूत्रीय मांग पत्र प्रशासनिक अधिकारी को सौंपा और तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। इसका नेतृत्व भारतीय बौद्ध महासभा के जिलाध्यक्ष महेंद्र प्रताप सिंह व प्रांतीय महासचिव श्रवण कुमार पटेल ने किया। जिलाध्यक्ष महेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि यूजीसी एक्ट का उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति, धर्म, लिंग, जन्मस्थान व दिव्यांगता के आधार पर होने वाले भेदभाव पर सख्त रोक लगाना था। उनका आरोप था कि संबंधित प्रावधानों के खिलाफ दायर याचिकाओं की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया में प्रभावी पैरवी नहीं की, जिसके चलते आदेश पर स्थगन लग गया। प्रांतीय महासचिव श्रवण पटेल ने कहा कि यूजीसी की रिपोर्टों में दलित-पिछड़े वर्ग के छात्रों के साथ भेदभाव की घटनाओं में वृद्धि दर्ज है और उन्होंने आरोप लगाया कि उत्पीड़न व मानसिक दबाव के कारण कई छात्र आत्महत्या जैसे कदम उठाने को मजबूर हुए हैं। संयुक्त मोर्चा ने मांग की कि सरकार तत्काल हस्तक्षेप कर स्थगन हटवाए और पूर्व व्यवस्था बहाल कराए, जिससे विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों में पारदर्शी, जवाबदेह व भेदभाव-मुक्त शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित किया जा सके। इस दौरान शिवमंगल गौतम, अरविन्द प्रताप निषाद, रामचंद्र बौद्ध, वकील प्रजापति, रामसमुझ मौर्या, डॉ. एलबी प्रसाद, हरिश्चन्द्र बौद्ध, बाल गोपाल, बैजनाथ बौद्ध, पदमाकर बौद्ध, प्रदीप कुमार गौतम, सुधाकर भारती, सतीश चन्द, नागेंद्र बौद्ध, सूर्यमनि प्रसाद, चन्द्रबली, अतुल, अमरनाथ यादव, मदन मोहन साहनी, शैलेश मौर्या सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।  

8वें वेतन आयोग को लेकर सरकार की चेतावनी, कर्मचारियों के लिए अहम अपडेट

नई दिल्ली केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारी और पेंशनभोगी जहां 8वां वेतन आयोग के तहत संभावित वेतन बढ़ोतरी का इंतजार कर रहे हैं, वहीं साइबर ठग उनकी इसी उत्सुकता का फायदा उठा रहे हैं। हाल ही में “8th पे कमीशन सैलरी कैलकुलटर” नाम का एक फर्जी ऐप तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे डाउनलोड करने के लिए लोगों को मैसेज और व्हाट्सएप के जरिए लिंक भेजे जा रहे हैं। दावा किया जाता है कि इस ऐप से कर्मचारी अपनी संशोधित सैलरी का हिसाब लगा सकते हैं, लेकिन असल में यह एक बड़ा साइबर फ्रॉड है। कई लोगों के साथ ठगी की घटनाएं सामने आने के बाद एजेंसियों ने चेतावनी जारी की है। सरकार की चेतावनी गृह मंत्रालय की साइबर सुरक्षा पहल Cyber Dost ने इस मामले को लेकर अलर्ट जारी किया है। बताया गया है कि यह ऐप किसी भी आधिकारिक प्लेटफॉर्म जैसे गुगल प्ले पर उपलब्ध नहीं है। ठग इसे APK फाइल के रूप में भेजते हैं और लोगों से कहते हैं कि इसे सीधे फोन में इंस्टॉल कर लें। आमतौर पर अनजान लोग यह समझ नहीं पाते कि APK फाइल को साइडलोड करना कितना खतरनाक हो सकता है। सरकार ने साफ कहा है कि वह कभी भी व्हाट्सएप या किसी मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए APK फाइल नहीं भेजती। जानकारों की राय विशेषज्ञों के अनुसार, जैसे ही यह फर्जी ऐप फोन में इंस्टॉल होता है, यह बैकग्राउंड में काम करना शुरू कर देता है। इसके जरिए ठग मोबाइल के मैसेज, बैंक डिटेल और यहां तक कि OTP तक एक्सेस कर लेते हैं। कई मामलों में देखा गया है कि यूजर को भनक भी नहीं लगती और कुछ ही मिनटों में उनके बैंक खाते खाली हो जाते हैं। साइबर अपराधी इसी तरीके से लोगों की मेहनत की कमाई पर हाथ साफ कर रहे हैं। इसलिए किसी भी अनजान लिंक या फाइल को डाउनलोड करने से पहले पूरी जांच-पड़ताल जरूरी है। क्या करें कर्मचारी अगर गलती से ऐसा कोई संदिग्ध ऐप डाउनलोड हो जाए तो उसे तुरंत अनइंस्टॉल करें और जरूरत पड़े तो फोन को फैक्ट्री रीसेट कर दें। किसी भी सूरत में OTP या बैंक से जुड़ी जानकारी साझा न करें। 8th पे कमीशन से जुड़ी जानकारी केवल आधिकारिक सरकारी वेबसाइट से ही प्राप्त करें। किसी भी तरह की साइबर ठगी की शिकायत राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर या आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से तुरंत दर्ज कराएं। सतर्क रहें, सुरक्षित रहें—क्योंकि एक छोटी सी लापरवाही भारी नुकसान का कारण बन सकती है।

फोटोशूट में व्यस्त थी मां, इधर पूल में डूब गया बेटा—हादसे ने झकझोरा

कर्नाटक बेंगलुरु में एक दुखद घटना सामने आई है, जहां तीन साल के बच्चे की मौत वाटर पूल में गिरने से हो गई। मां की मैटरनिटी फोटोशूट में बिजी थी। बच्चे का नाम लक्ष्मी था, जो चरण और स्वाति का बेटा था। स्वाति 8 महीने की गर्भवती थी और वह अपने दूसरे बच्चे के आने की तैयारी में मैटरनिटी फोटोशूट करवा रही थी। यह घटना शनिवार को बेंगलुरु के गिद्दनहल्ली इलाके में एक प्राइवेट स्टूडियो में हुई, जहां फोटोशूट के लिए छोटा सा आर्टिफिशियल वाटर पूल बनाया गया था। बच्चा मां के साथ स्टूडियो में मौजूद था और खेलते-खेलते वह इस पूल में फिसलकर गिर गया। घटना के समय स्वाति फोटोशूट में व्यस्त थी, जबकि लक्ष्मी आसपास खेल रहा था। अचानक वह पूल में गिर गया, लेकिन मौके पर मौजूद लोगों को इसकी सूचना तुरंत नहीं मिल सकी।जब बच्चे को बाहर निकाला गया, तब तक वह बेहोश हो चुका था और डूबने के कारण उसकी सांसें रुक गई थीं। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पोस्टमॉर्टम जांच के लिए शव को सरकारी अस्पताल भेजा गया। पुलिस के अनुसार, बच्चे के पिता चरण उस समय काम के सिलसिले में विदेश में थे और उन्हें सूचना मिलते ही वे बेंगलुरु लौट रहे हैं। सुरक्षा के लिए उचित इंतजाम नहीं यह हादसा एक छोटी सी लापरवाही का नतीजा माना जा रहा है। स्टूडियो में मौजूद पूल फोटोशूट के लिए सजावट के तौर पर बनाया गया था, लेकिन बच्चे की सुरक्षा के लिए उचित इंतजाम नहीं किए गए थे। पुलिस ने मामले में लापरवाही की जांच शुरू कर दी है और यह देखा जा रहा है कि फोटोशूट के दौरान पर्याप्त सावधानियां बरती गई थीं या नहीं। कई रिपोर्ट्स में बताया गया है कि बच्चा मां की दोस्त की मैटरनिटी शूट के लिए भी साथ गया था, लेकिन मुख्य रूप से यह स्वाति की ही फोटोशूट से जुड़ा मामला है। इस घटना ने माता-पिता और स्टूडियो मालिकों के लिए बच्चों की सुरक्षा को लेकर बड़ा सबक दिया है। लापरवाही के चलते मौत का मामला यह दर्दनाक घटना परिवार के लिए बेहद झटका लेकर आई है। एक तरफ स्वाति दूसरी संतान के स्वागत की खुशी में थीं, वहीं दूसरी तरफ उनके बड़े बेटे की अचानक मौत ने सब कुछ उजाड़ दिया। पुलिस जांच जारी है और आगे की कार्रवाई की जा रही है। ऐसी घटनाएं हमें याद दिलाती हैं कि बच्चों के साथ हर जगह सतर्क रहना कितना जरूरी है, खासकर ऐसी जगहों पर जहां पानी या खतरनाक चीजें मौजूद हों। लोगों ने परिवार के प्रति गहरी संवेदना जताई है और उम्मीद है कि जांच से सच्चाई सामने आएगी।  

क्या है AI-पावर्ड भारत-विस्तार? जानिए कैसे बदल देगा खेती का भविष्य और बढ़ाएगा किसानों की आमदनी

नई दिल्ली कृषि क्षेत्र में डिजिटल क्रांति लाकर भारत मंगलवार (17 फरवरी) को एक इतिहास रचने जा रहा है क्योंकि उस दिन केंद्र सरकार भारत-विस्तार (Bharat-VISTAAR) नाम का एक क्रांतिकारी AI-पावर्ड मल्टीलिंगुअल टूल लॉन्च करने जा रही है। यह किसानों को डिजिटल तकनीक से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने हालिया बजट में आर्टिफिशियल इंटेलिसजेंस (AI) पर आधारित कृषि प्लेटफॉर्म भारत-विस्तार (Bharat-VISTAAR) को जल्द लॉन्च करने का ऐलान किया था। इस प्लेटफॉर्म का शुभारंभ केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा द्वारा जयपुर में किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य किसानों तक तकनीक को सरल तरीके से और सरल भाषा में पहुंचाना है, ताकि वे सही समय पर सही खेती संबंधी निर्णय ले सकें। यह टूल किसानों को उनकी अपनी भाषा में खेती से जुड़ी जरूरी जानकारी मोबाइल ऐप या फोन कॉल के जरिए उपलब्ध कराएगा। क्या है Bharat-VISTAAR यह AI आधारित एक मल्टीलिंगुअल अत्याधुनिक टूल है, जो देश के करोड़ों किसानों के लिए ‘डिजिटल कृषि विशेषज्ञ’ की भूमिका निभाएगा। इसका पूरा नाम 'वर्चुअली इंटीग्रेटेड सिस्टम टू एक्सेस एग्रीकल्चरल रिसोर्सेज' (Virtually Integrated System to Access Agricultural Resources _VISTAAR) है। यह डिजिटल सिस्टम किसानों के लिए 24 घंटे उपलब्ध रहेगा और इसमें ‘भारती’ नाम का AI वॉइस असिस्टेंट होगा। किसान इसे मोबाइल ऐप या साधारण वॉइस कॉल यानी हेल्पलाइन नंबर 155261 नंबर डायल करके सीधे जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। शुरुआत में यह सेवा हिंदी और अंग्रेजी में उपलब्ध होगी, बाद में इसे क्षेत्रीय भाषाओं में भी शुरू किया जाएगा। ओला-बारिश, बाढ़-सुखाड़ का पूर्वानुमान इस टूल के माध्यम से किसानों को फसल योजना, खेती की तकनीक, कीट नियंत्रण, मौसम पूर्वानुमान, बाजार कीमत और सरकारी योजनाओं की जानकारी मिलेगी। इसके जरिए किसान प्रधानमंत्री किसान योजना, फसल बीमा योजना, सॉइल हेल्थ कार्ड, किसान क्रेडिट कार्ड और अन्य कई सरकारी योजनाओं के बारे में जानकारी लेकर आवेदन भी कर सकेंगे। सरकार के अनुसार यह सिस्टम देश के कृषि डेटा और रिसर्च को एक प्लेटफॉर्म पर जोड़ने का काम करेगा। इसमें कृषि अनुसंधान संस्थान भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की जानकारी और राष्ट्रीय AI ढांचे जैसे India AI Mission और BHASHINI का सहयोग लिया जाएगा। परियोजना पर इस वर्ष 150 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 में इस परियोजना पर लगभग 150 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इस राशि का हालिया बजट में आवंटन किया गया है। सरकार का मानना है कि यह सिर्फ एक ऐप नहीं बल्कि देश का डिजिटल कृषि ढांचा बनेगा, जिससे किसानों की आय बढ़ाने, खेती का जोखिम कम करने और कृषि नीति को डेटा के आधार पर बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह योजना सही तरीके से लागू होती है, तो यह भारत के कृषि क्षेत्र में डिजिटल क्रांति साबित हो सकती है और छोटे किसानों को भी तकनीक का पूरा लाभ मिल सकेगा। बजट में सीतारमण ने किया था ऐलान बता दें कि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी, 2026 को अपना लगातार 9वां बजट पेश करते हुए इस स्कीम की घोषणा की थी और कहा था, “मैं भारत-विस्तार लॉन्च करने का प्रस्ताव करती हूं—एक मल्टीलिंगुअल AI टूल जो एग्रीस्टैक पोर्टल्स और खेती के तरीकों पर ICAR पैकेज को AI सिस्टम के साथ इंटीग्रेट करेगा। इससे खेती की प्रोडक्टिविटी बढ़ेगी, किसानों को बेहतर फैसले लेने में मदद मिलेगी और कस्टमाइज्ड एडवाइजरी सपोर्ट देकर रिस्क कम होगा।” विशेषज्ञों के मुताबिक, “भारत विस्तार इंटरैक्टिव है। इसके जरिए किसानों का फीडबैक सरकारी सिस्टम में वापस आएगा। इसके सबूतों के आधार पर पॉलिसी बनाने और रिसर्च को प्राथमिकता देने में मदद मिलेगी।”  

‘20 साल का काम 5 साल में’—एयरो इंजन पर रक्षामंत्री का मिशन मोड बयान

नई दिल्ली रक्षामंत्री राजनाथ सिंह का कहना है कि देश एडवांस्ड मीडियम कॉम्बेट एयरक्राफ्ट यानी एमका के डिजाइन और डेवलपमेंट की ओर तेजी से बढ़ रहा है। पूर्व में भी एयरो इंजन के क्षेत्र में महारथ हासिल करने के कई प्रयास किए हैं। अब समय आ गया है कि हमारे जो प्रयास अधूरे रह गए थें, उनको हम पूरा करें। रक्षा मंत्री सोमवार को गैस टरबाइन रिसर्च स्टेब्लिशमेंट बेंगलुरु में विशेषज्ञों के बीच बोल रहे थे। रक्षामंत्री ने विशेषज्ञों व शोधकर्ताओं से कहा, “अगर किसी इंजन को विकसित करने में 25 साल लग रहे हैं, तो भारत की मौजूदा स्थिति , हमारी रणनीतिक जरूरत और हमारी महत्वाकांक्षा ऐसी हैं कि आप मानकर चलिए कि आपके 20 साल पहले ही खत्म हो चुके हैं और अब सिर्फ 5 साल ही आपके पास बचे हैं। यह कोई अचरज वाली बात नहीं है, यह एक चुनौती है। हमें 5 साल में वो कर दिखाना है, जो दूसरे देश 20 साल में करते हैं। इसी में हमें अपना सर्वश्रेष्ठ देना है।” उन्होंने कहा कि हमें भविष्य की तरफ भी देखना होगा। हम सिर्फ 5वीं पीढ़ी के इंजन तक सीमित नहीं रह सकते। छठी पीढ़ी की एडवांस टेक्नोलॉजी का विकास भी हमें जल्द से जल्द शुरू करना होगा। उस पर रिसर्च , समय की मांग है। जैसे-जैसे दुनिया में टेक्नोलॉजी बदल रही है, आर्टिफिशियल मशीन लर्निंग और न्यू मटीरियल का प्रयोग बढ़ रहा है, हमें उनमें आगे रहना होगा। उन्होंने यहां मौजूद वैज्ञानिकों एवं शोधकर्ताओं से कहा कि आप इंग्लैंड के साथ एयरो इंजन विकसित करने के लिए संयुक्त अध्ययन कर रहे हैं। यह बहुत अच्छी पहल है। इसके अलावा, फ्रांस के साथ भी, एयरो इंजन के लिए, हम नेशनल एयरो इंजन मिशन के तहत प्रक्रिया शुरू कर चुके हैं। फ्रांस और यूके, दोनों ही देश एयरो इंजन टेक्नोलॉजी में बहुत आगे रहे हैं। उनके साथ यह समझौता हमें न सिर्फ नई टेक्नोलॉजी सीखने का मौका देगा बल्कि उन चुनौतियों को भी समझने में सहायता करेगा, जिनका हमने पिछले दशकों में सामना किया है। रक्षामंत्री ने कहा कि जब हम सरकार में आए, तो हमने आत्मनिर्भरता की ओर अपने कदम बढ़ाए। रक्षा क्षेत्र में भी,आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के हमने कई प्रयास किए। उन्होंने कहा, “मैंने अपने लगभग 7 साल के कार्यकाल में, अपना पूरा प्रयास किया कि हम एयरो इंजन के डेवलपमेंट को प्राथमिकता पर रखें और ऐसा हमने किया भी। आज की वैश्विक राजनीतिक स्थिति को देखते हुए, इस तरह की महत्वपूर्ण टेक्नोलॉजी में आत्मनिर्भरता कितनी जरूरी है, यह मैं समझता हूँ कि बताने की जरूरत नहीं है। ऑपरेशन सिंदूर में हमने साफ देखा, कि हमारी अपनी टेक्नोलॉजी ने, हमारे देश में बने हथियारों ने, हमारी फोर्स का कितना सहयोग किया। चाहे संचार सिस्टम हो, सर्विलांस के साधन हों, या फिर अटैक करने वाले हथियार, सबमें स्वदेशी टेक्नोलॉजी की झलक साफ दिखी।” उन्होंने कहा कि इससे सेना का मनोबल और बढ़ा व देश के लोगों को भी गर्व हुआ। अब जैसे-जैसे समय बदल रहा है, चुनौतियां बदल रही हैं, हमारे लिए बहुत जरूरी हो गया है कि हम स्वदेशी तौर-तरीकों पर और ज्यादा फोकस करें, और हमारी फोर्स को विश्व स्तरीय प्रणालियां और उपकरण उपलब्ध कराएं। रक्षामंत्री ने कहा कि आज भारत के सामने बहुत सारे अवसर हैं। हमें उन अवसरों को भुनाने की जरूरत है। उन्होंने भारत और यूरोपीय यूनियन के फ्री ट्रेड समझौते का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि यह समझौता 18 सालों से नहीं हो पा रहा था, वह अब पूरा हो गया। यह ट्रेड एग्रीमेंट भारत की बढ़ती आर्थिक और राजनीतिक शक्ति की स्वीकार्यता भी है। रक्षामंत्री ने कहा कि अभी कुछ दिन पहले ही, वह ग्रीक के रक्षामंत्री से मिले थे। उस बातचीत के दौरान, उन्हें एक बहुत सुखद सरप्राइज मिला। दरअसल इस मुलाकात में ग्रीक के रक्षामंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि वह भारत को एक उभरती हुई ताकत के तौर पर नहीं, बल्कि एक सुपर पावर की तरह देख रहे हैं। उनकी नजर में भारत अब कोई साधारण राष्ट्र नहीं, बल्कि एक ग्लोबल लीडर है।

पहले इस्तीफा फिर पलटी: असम कांग्रेस में घमासान, भूपेन बोरा ने क्या कहा?

गुवाहाटी असम कांग्रेस में सोमवार को खूब ड्रामा देखने को मिला। पहले तो असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष भूपेन बोरा ने इस्तीफा दे दिया। लेकिन कुछ ही घंटों बाद यू-टर्न लेते हुए उन्होंने इस्तीफा वापस भी ले लिया। बताया जा रहा है कि इसके पीछे कांग्रेस आलाकमान की भूमिका भी है। असम कांग्रेस में सोमवार को खूब ड्रामा देखने को मिला। पहले तो असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष भूपेन बोरा ने इस्तीफा दे दिया। लेकिन कुछ ही घंटों बाद यू-टर्न लेते हुए उन्होंने इस्तीफा वापस भी ले लिया। बताया जा रहा है कि इसके पीछे कांग्रेस आलाकमान की भूमिका भी है। कांग्रेस के असम प्रभारी जितेंद्र सिंह ने भी यही दावा किया। बोरा के इस्तीफा देने के बाद सिंह और पार्टी की असम इकाई के अध्यक्ष गौरव गोगोई सहित कई वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं ने बोरा से उनके आवास पर मुलाकात की। इस बीच, बोरा ने अपने आवास के बाहर मीडिया से कहा कि उन्होंने अपने फैसले पर पुनर्विचार करने के लिए कांग्रेस आलाकमान से समय मांगा है। गोगोई ने कहा कि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने बोरा से बात की है और उनका इस्तीफा आलाकमान ने स्वीकार नहीं किया है। गोगोई ने कहाकि अगर पार्टी में कुछ मुद्दों के कारण भूपेन बोरा को ठेस पहुंची है तो हम उनसे माफी मांगते हैं। किस तरफ बोरा का इशारा मीडिया से बातचीत में भूपेन बोरा ने विस्तार से जानकारी देने से मना कर दिया। उन्होंने कहाकि मैं अभी इस पर बोलना ठीक नहीं समझता कि मैंने इस्तीफा क्यों दिया। हां, मैंने इस्तीफा दिया था। इसे आलाकमान को भी भेजा था। जब भी मुझे जरूरी लगेगा, मैं आप लोगों को बुलाऊंगा और विस्तार से बात करूंगा। हालांकि उन्होंने इशारों-इशारों में इस्तीफे की वजह का भी जिक्र कर दिया। बोरा ने कहाकि थोड़ा-बहुत तो आप लोग भी जानते ही हैं कि मैंने इस्तीफा क्यों दिया। इस सबकी शुरुआत बेहाली से हुई थी। इसके अलावा उन्होंने पार्टी में निर्णय लेने की अंदरूनी प्रक्रिया को लेकर भी असहमति जताई। खासतौर पर मजुली यात्रा में भाग लेने को लेकर। उन्होंने कहाकि मैंने पीसीसी चीफ से कहाकि अगर कांग्रेस पार्टी यह भी तय नहीं कर पा रही है कि मजुली यात्रा में कौन जाएगा तो मुझे लगता है कि फिर भविष्य की तरफ ध्यान देना चाहिए। इससे पहले असम के मुख्यमंत्री हिमंता सरमा ने भूपेन बोरा के इस्तीफे पर कहाकि भाजपा के दरवाजे उनके लिए खुले हैं। सरमा ने यह भी कहा कि अगर बोरा भाजपा में शामिल होते हैं तो वह उन्हें किसी सेफ सीट से चुनाव जितवाने की कोशिश करेंगे। कांग्रेस अध्यक्ष को भेजे अपने त्यागपत्र में बोरा ने दावा किया कि पार्टी नेतृत्व द्वारा उन्हें उपेक्षित किया जा रहा है और राज्य इकाई में उन्हें उनका हक नहीं दिया जा रहा है। बोरा 2021 से 2025 तक असम कांग्रेस इकाई के अध्यक्ष थे और पिछले साल उनकी जगह गौरव गोगोई को असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कमान सौंप दी गई। वह असम में दो बार विधायक रह चुके हैं।