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आम बजट को खास बनाने लोगों को खूबियां बताएगी BJP

नई दिल्ली. वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण जब रविवार को बजट पेश कर रही हैं. तो यूपी में 2017 स्थानों पर बड़े स्क्रीन पर उसका सीधा प्रसारण हो रहा है। इसके लिए भाजपा के उत्तर प्रदेश मुख्यालय से लेकर पार्टी के 98 संगठनात्मक जिलों और 1918 मंडलों में एलईडी स्क्रीन लगेंगे। पार्टी ने देश के आम बजट को खास बनाने की रणनीति तय की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी सहित प्रदेश सरकार के सभी मंत्री और भाजपा के पदाधिकारी बजट की खूबियां गिनाएंगे। यह मुहिम 10 फरवरी तक चलेगी। अगले 10 दिनों तक भाजपा की सरकार और संगठन केंद्रीय बजट की खासियतें अलग-अलग समूहों के बीच बताते नजर आएंगे। इस काम में केंद्र व प्रदेश के मंत्रियों के अलावा भाजपा और उसके सभी छह मोर्चे जुटेंगे। रविवार को केंद्रीय बजट का सीधा प्रसारण दिखाने के लिए प्रदेश भाजपा मुख्यालय पर एलईडी स्क्रीन लगाई गई है। इस मौके पर उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, प्रदेश महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह, मुख्यालय प्रभारी गोविंद नारायण शुक्ला, बजट जागरूकता अभियान के लिए बनीं टोली के संयोजक सुभाष यदुवंश, डॉ. समीर सिंह सहित अन्य मौजूद रहेंगे। यह एलईडी सभी जिला व मंडल कार्यालयों पर भी लगेंगे। व्यापारी-किसान, महिला व युवाओं पर फोकस पार्टी सोमवार से इसकी खूबियां गिनाने की मुहिम शुरू करेगी। खासतौर से व्यापारियों, किसानों, महिलाओं, युवाओं व श्रमिकों पर फोकस रहेगा। प्रदेश स्तर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उपमुख्यमंत्री द्वय केशव मौर्य व ब्रजेश पाठक, प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी प्रेसवार्ता के जरिए हर वर्ग के लिए बजट में की गई व्यवस्था को बताएंगे। यह सिलसिला प्रदेशभर में तीन दिन चलेगा। इस दौरान प्रदेश के 13 मीडिया सेंटरों पर बजट से लाभ गिनाए जाएंगे। इसके अलावा प्रदेश के छह संगठनात्मक क्षेत्रों में भाजपा का हर मोर्चा एक-एक कार्यक्रम करेगा। सभी मोर्चों को खुद से जुड़े समूहों से संवाद के छह-छह कार्यक्रम करने हैं। व्यापारियों, चार्टर्ड एकाउंटेंट, किसान, महिलाओं, युवाओं, श्रमिकों के हर विधानसभा में सम्मेलन होंगे। यह सिलसिला 10 फरवरी तक चलेगा।

वित्त मंत्री सीतारमण ने भारत के आर्थिक विकास के लिए बताया 6 सूत्रीय फॉर्मूला

नई दिल्ली. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण रविवार को भारत का आम बजट (Aam Budget 2026) पेश कर रही हैं। केंद्रीय कैबिनेट ने बजट पर मुहर लगा दी है। इससे पहले उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की थी। खास बात है कि इसके साथ ही वह 9वीं बार बजट पेश करने का नया रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लेंगी, जिसमें एक अंतरिम बजट भी शामिल है। एक ओर जहां मध्यम वर्गीय को महंगाई से राहत की उम्मीद है। वहीं, व्यापारी वर्ग टैक्स कम होने की आस लगाए है। पिछले चार वर्षों की तरह इस साल का बजट भी कागज रहित रूप में पेश किया जाएगा। खास बात है कि साल 2019 में जब सीतारमण ने पहला बजट पेश किया था, तब वह चमड़े के ब्रीफकेस की जगह लाल कपड़े में लिपटा पारंपरिक बही खाता लेकर पहुंचीं थीं। साल 2017 से बजट एक फरवरी को ही पेश किया जाता है। बजट 2026 स्पीच टाइम सुबह 10.15 बजे केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक होगी जिसमें आम बजट को मंजूरी प्रदान की जाएगी। इसके बाद वित्त मंत्री राष्ट्रपति भवन जाकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को बजट पेश किए जाने की जानकारी देंगी। सीतारमण सुबह करीब 11 बजे संसद में बजट पेश करेंगी। लोकसभा में पूरा बजट भाषण पढ़ने के कुछ देर बाद बजट को राज्यसभा के पटल पर रखा जाएगा। संसद का मौजूदा बजट सत्र 28 जनवरी से शुरू हुआ है। इसका पहला चरण 13 फरवरी तक चलेगा। उसके बाद नौ मार्च से दूसरे चरण की बैठक शुरू होगी। तय कार्यक्रम के अनुसार बजट सत्र दो अप्रैल को समाप्त होगा। बजट 2026 से अपेक्षाएं आर्थिक समीक्षा के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की वृद्धि संभावनाएं अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के अनुमानों से बेहतर हैं। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने 6.4 प्रतिशत जबकि विश्व बैंक एवं एशियाई विकास बैंक (ADB) ने 6.5 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान जताया है। संसद में पेश की गई आर्थिक समीक्षा 2025-26 में देश की संभावित वृद्धि दर के अनुमान को तीन साल पहले अनुमानित 6.5 प्रतिशत से बढ़ाकर सात प्रतिशत कर दिया गया है।

बजट से पहले 50 रुपये महंगा हुआ एलपीजी सिलेंडर

नई दिल्ली. आज बजट से पहले ही LPG सिलेंडर के उपभोक्ताओं को झटका लगा है। कॉमर्शियल एलपीजी (लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस) सिलेंडर और घरेलू सिलेंडर के रेट आज 1 फरवरी 2026 अपडेट हुए हैं। कॉमर्शियल सिलेंडर के उपभोक्ताओं को दिल्ली से पटना तक करीब 50 रुपये का तेज झटका लगा है। जबकि, घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम में कोई बदलाव नहीं हुआ है। दिल्ली में 19 किलो वाला एलपीजी सिलेंडर आज से 1691.50 रुपये की जगह 1740.50 में मिलेगा। कोलकाता में पहले 1795 रुपये का था और अब 1844.50 रुपये का हो गया है। मुंबई में कॉमर्शियल सिलेंडर अब 1642.50 की जगह 1692 रुपये में मिलेगा। चेन्नई में अब आज से कॉमर्शियल सिलेंडर 1899.50 रुपये में मिलेगा पहले यह 1849.50 रुपये का था। घरेलू एलपीजी के रेट भारत में इंडियन ऑयल के डेटा के आधार पर एलपीजी (लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस) की कीमतों की बात करें तो आज 14.2 किग्रा वाला घरेलू सिलेंडर दिल्ली में ₹853 में मिल रहा है। जबकि, पटना में इसकी कीमत ₹951 है। मुंबई में ₹852.50 और लखनऊ में ₹890.50 में मिल रहा है। कारगिल में ₹985.5, पुलवामा में ₹969, बागेश्वर में ₹890.5 का है। बजट डे पर कैसे रहा है ट्रेंड इंडियन ऑयल की वेबसाइट पर दिए गए आंकड़ों के मुताबिक पिछले 5 साल में बजट के दिन घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम में कोई बदलाव नहीं हुआ। जबकि, कॉमर्शियल सिलेंडर के दाम बढ़े और घटे भी हैं। 2022 में बजट डे के दिन 1 फरवरी को कॉमर्शियल सिलेंडर के उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली थी। इस दिन दिल्ली में 19 किलो वाला नीला सिलेंडर 91.50 रुपये, कोलकाता में 89 रुपये, मुंबई में 91.50 रुपये और चेन्नई में 91 रुपये सस्ता हुआ था। 2023 में न तो घरेलू एलपीजी सिलेंडर के रेट बदले और न ही कॉमर्शियल के। 2024 में बजट डे के दिन घरेलू एलपीजी सिलेंडर के उपभोक्ताओं की जेब पर तो कोई असर नहीं पड़ा, लेकिन कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के उपभोक्ताओं को 18 रुपये तक झटका लगा था। 2025 में बजट डे के दिन कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर उपभोक्ताओं को ऊंट के मुंह में जीरा जितनी राहत मिली। सिलेंडर के दाम महज 6.50 रुपये कम हुए।

भारतीय वायुसेना अपडेट: सुपरजेट डील डन, Su-57 फाइटर जेट भारत में आ सकता है

नई दिल्ली हाल ही में HAL (हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड) और रूस की UAC (यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन) के बीच SJ-100 (सुखोई सुपरजेट 100) विमानों के भारत में उत्पादन को लेकर हुए समझौते ने रक्षा गलियारों में हलचल तेज कर दी है। अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या नागरिक विमानों के बाद अब 'खतरनाक' सुखोई Su-57 लड़ाकू विमान भारतीय वायु सेना (IAF) के बेड़े का हिस्सा बनेंगे? SJ-100 समझौता: एक नया मोड़ भारत और रूस के बीच नागरिक विमानन के क्षेत्र में हुआ यह समझौता 'मेक इन इंडिया' की दिशा में एक बड़ा कदम है। SJ-100 एक क्षेत्रीय जेट है, और इसके स्थानीय उत्पादन से भारत में एयरोस्पेस ईकोसिस्टम मजबूत होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह साझेदारी भविष्य के सैन्य समझौतों के लिए एक 'टेस्ट केस' साबित हो सकती है। क्या बोले रूसी अधिकारी? खुद रूसी एरोस्पेस कंपनी के एक शीर्ष अधिकारी ने यह दावा किया कि भारत और रूस पांचवीं पीढ़ी के सुखोई एसयू-57ई लड़ाकू विमान के भारत में संयुक्त उत्पादन की संभावना तलाशने के लिए तकनीकी पहलुओं पर चर्चा कर रहे हैं। हालांकि, भारत की ओर से अधिकारी के दावे पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। रूस के यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन (यूएसी) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) वादिम बदेखा ने हैदराबाद के बेगमपेट हवाई अड्डे पर विंग्स इंडिया एयर शो से इतर रूसी संवाददाताओं से कहा- हम इस कॉन्ट्रैक्ट पर तकनीकी बातचीत के उन्नत चरण में हैं। हमारे अनुभव को देखते हुए, ऐसे कॉन्ट्रैक्ट होने वाले हैं जो कई दशकों तक हमारे सहयोग की दिशा तय करेंगे हैं।’ रूस ने इस प्रदर्शनी के दौरान अपने नवीनतम क्षेत्रीय परिवहन विमान – इल्यूशिन आईएल-114-300 और सुखोई एसजे-100 – को प्रदर्शित किया था। बदेखा ने दावा किया कि दोनों पक्ष वर्तमान में भारत में एसयू-30 विमानों के उत्पादन के लिए उपयोग की जाने वाली सुविधाओं में एसयू-57 लड़ाकू विमानों के लाइसेंस प्राप्त उत्पादन और इसके लिए भारतीय उद्योग और भारतीय प्रणालियों के अधिकतम उपयोग पर भी चर्चा कर रहे हैं। Su-57 'Felon': रूस का सबसे घातक योद्धा Su-57 रूस का पहला 5वीं पीढ़ी का सटील्थ लड़ाकू विमान है। इसकी कुछ प्रमुख विशेषताएं इसे खास बनाती हैं। जैसे- स्टेल्थ तकनीक: यह रडार की नजरों से बचने में सक्षम है। सुपरक्रूज: बिना आफ्टरबर्नर के ध्वनि की गति से तेज उड़ने की क्षमता। हथियार: इसके इंटरनल वेपन बे में आधुनिक मिसाइलें छिपी होती हैं, जो इसके स्टेल्थ को बरकरार रखती हैं। भारत और Su-57 का इतिहास (FGFA प्रोग्राम) आपको याद होगा कि भारत पहले रूस के साथ FGFA (Fifth Generation Fighter Aircraft) प्रोग्राम का हिस्सा था, जो Su-57 पर ही आधारित था। लेकिन 2018 में भारत इस प्रोजेक्ट से पीछे हट गया था। इसके मुख्य कारण थे:     इंजन की तकनीक में कमी।     स्टेल्थ फीचर्स पर असंतोष।     लागत और तकनीक हस्तांतरण (ToT) के मुद्दे। क्या अब पासा पलट रहा है? SJ-100 समझौते के बाद Su-57 की चर्चा फिर से शुरू होने के तीन मुख्य कारण हैं-     नया इंजन (AL-51F1)- रूस ने अब Su-57 के लिए नया 'स्टेज 2' इंजन विकसित कर लिया है, जो भारत की पुरानी शिकायतों को दूर कर सकता है।     युद्ध का अनुभव- यूक्रेन युद्ध में रूस ने Su-57 का सीमित उपयोग किया है, जिससे इसकी परिचालन क्षमता के वास्तविक आंकड़े सामने आए हैं।     चीन की चुनौती- चीन के पास J-20 जैसे 5वीं पीढ़ी के विमानों की बढ़ती संख्या को देखते हुए भारतीय वायुसेना को जल्द ही एक सटील्थ फाइटर की जरूरत है। चुनौतियां और 'आत्मनिर्भर भारत' भले ही रूस भारत को Su-57 ऑफर कर रहा हो, लेकिन भारत के सामने कुछ कठिन विकल्प हैं। दरअसल भारत अपना स्वदेशी 5वीं पीढ़ी का विमान AMCA विकसित कर रहा है। Su-57 खरीदने से इस स्वदेशी प्रोजेक्ट के बजट और प्राथमिकता पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा, रूस से बड़े रक्षा सौदे करने पर अमेरिका के CAATSA प्रतिबंधों का खतरा हमेशा बना रहता है। भारत अब केवल 'खरीदने' में नहीं, बल्कि 'भारत में बनाने' और 'पूर्ण तकनीक' प्राप्त करने में रुचि रखता है। रूस की सरकारी समाचार एजेंसी आरआईए नोवोस्ती के मुताबिक इससे पहले, सरकारी हथियार निर्यातक कंपनी रोसोबोरोनएक्सपोर्ट के सीईओ अलेक्जेंडर मिखीव ने घोषणा की थी कि कंपनी नई दिल्ली को नवीनतम पांचवीं पीढ़ी के एसयू-57ई लड़ाकू विमानों की आपूर्ति के साथ-साथ भारत में उनके उत्पादन और स्वदेशी एएमसीए स्टील्थ लड़ाकू विमान के विकास में सहायता की पेशकश कर रही है। कुल मिलाकर SJ-100 समझौता यह दर्शाता है कि भारत और रूस के बीच औद्योगिक संबंध अभी भी गहरे हैं। यदि रूस Su-57 के लिए पूर्ण तकनीक हस्तांतरण (ToT) और स्वदेशी AMCA में सहयोग का प्रस्ताव देता है, तो 'Felon' भारत के आकाश की सुरक्षा करते हुए दिखाई दे सकते हैं। हालांकि, अभी वायु सेना का मुख्य ध्यान राफेल के अगले बैच और स्वदेशी विमानों पर है।

Google की हाई-फाई जॉब छोड़ दी बीमारी की वजह से, इंजीनियर की प्रेरक कहानी वायरल

 नई दिल्ली जिंदगी में हर इंसान की तलाश क्या होती है. जल्द से जल्द पैसा कमाना, खुद को एक इनसेक्योर जोन से सेक्योर जोन में ले जाना, लेकिन असल जिंदगी की प्राथमिकता क्या है. रेस में सबसे आगे जाना या फिर जिंदगी की बुनियादी जरूरत वो सेहत है,जिसे दरकिनार कर दिया जाता है. अमेरिका में रहने वाली टिया ली की कहानी भी इन्हीं दो चीजों के इर्द-गिर्द घूमती है. अमेरिका में रहने वाली टिया ली (Tia Lee) ने 2020 में मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी (Michigan State University) से ग्रेजुएशन किया और तभी तय कर लिया था कि उन्हें सिर्फ एक चीज चाहिए जितना हो सके उतना पैसा कमाना. इसी सोच के साथ उन्होंने अपनी करियर जर्नी शुरू की, लेकिन तीन साल बाद यही रेस उनकी सेहत पर इतना भारी पड़ी कि आज वह सफलता को पूरी तरह नए नजरिए से देखती हैं. पैसा या सेहत-जिंदगी में क्या है अहमियत 2023 के अंत तक टिया एक साथ तीन भूमिकाएं निभा रही थीं.कैलिफोर्निया में Google की Technical Program Manager, फ्रीलांस वेबसाइट डिजाइनर और अपनी क्लोदिंग लाइन की मालिक. लगातार काम और अलग-अलग शहरों की यात्राओं ने उनकी सेहत पर असर डालना शुरू कर दिया. उन्होंने CNBC Make It को बताया कि वह लगभग हर दूसरे महीने बीमार पड़ने लगी थीं. कैलिफोर्निया, मिशिगन और टेक्सास के बीच लगातार यात्रा करते-करते उन्हें लगने लगा कि बीमारी सिर्फ ट्रैवल की वजह से होती है. लेकिन कई महीनों तक यूं ही बीमार रहने के बाद डॉक्टर ने इशारा किया कि असली वजह तनाव हो सकता है. इसी बात ने टिया को सोचने पर मजबूर किया कि शायद बहुत सारी जिम्मेदारियां ही उनकी सेहत को खराब कर रही हैं. तभी उन्होंने अपने करियर को रोकने का फैसला किया. भागदौड़ में खो गई थीं… टिया ने जीवन को आसान बनाने के लिए कई बदलाव किए. फ्रीलांस काम कम किया, खर्चों में कटौती की और इतना पैसा बचाया कि वे सालों तक बिना नौकरी के रह सकें. वह मिशिगन में अपने माता-पिता के घर वापस आ गईं. उन्होंने अपनी Tesla कार बेचकर एक सस्ती Chevrolet ले ली ताकि खर्च और कम हो सके. यहां तक कि उन्होंने एक निजी शेफ से यह समझौता किया कि वह उसका वेबसाइट बना दें और इसके बदले शेफ हफ्तेभर का मील प्रेप दे दे.इससे उनका किराना खर्च भी खत्म हो गया. इन बदलावों ने टिया के लिए सफलता की परिभाषा बदल दी. उन्होंने बताया कि पहले उनके लिए कामयाबी का मतलब था पैसा, प्रमोशन और काम में पहचान, लेकिन अब सफलता का मतलब है अपनी सेहत और समय पर पूरा नियंत्रण. Google छोड़ने के बाद उन्होंने जून में नौकरी से इस्तीफा दिया और ब्रूक्लिन, न्यूयॉर्क में शिफ्ट होकर एक धीमी, संतुलित जीवनशैली अपनाई, जिसमें अच्छा खाना और खुद के साथ समय बिताना शामिल है. फिलहाल उनका कॉर्पोरेट दुनिया में वापस लौटने का कोई प्लान नहीं है.

मिडिल ईस्ट में रणनीति का कमाल: नेटन्याहू के आने से पहले जयशंकर ने बुलाए अरब देश

नई दिल्ली इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अगले हफ्ते भारत दौरे पर आ रहे हैं. इससे पहले भारत के EAM एस जयशंकर ने मिडिल ईस्ट को टारगेट करते हुए डबल मास्टरस्ट्रोक चला है. उन्होंने नेतन्याहू के दौरे से पहले अरब देशों को पहले ही दिल्ली बुलाकर एक बड़ा मैसेज दिया है. जयशंकर की गजब की कूटनीति का नतीजा है कि अरब देशों ने भारत को फिलिस्तीन का ‘मसीहा’ मानना शुरू कर दिया है. आगे जानें जयशंकर के बेहतरीन बैलेंसिंग एक्ट की वजह से जियो पॉलिटिक्स में भारत का कद किस तरह बढ़ रहा है? भारत ने आज यानी 31 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में ‘दूसरी भारत-अरब विदेश मंत्री बैठक’ (IAFMM) की मेजबानी की है. यह बैठक पूरे 10 साल के लंबे इंतजार के बाद हुई है. इसमें अरब लीग के सभी 22 देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए. दिलचस्प बात यह है कि यह बैठक जयशंकर की दिसंबर 2025 की इजरायल यात्रा और प्रधानमंत्री नेतन्याहू की प्रस्तावित भारत यात्रा के ठीक बीच में हो रही है. इस बैठक के दौरान भारतीय EAM का एक ऐसा बेहतरीन बैलेंसिंग एक्ट देखने को मिला, जिसकी वजह से जियो पॉलिटिक्स में भारत का कद और भी बढ़ गया है. फिलिस्तीन का ‘मसीहा’ भारत दिल्ली पहुंची फिलिस्तीनी विदेश मंत्री वारसेन अगाबेकियन शाहीन ने सीधा और भावनात्मक कार्ड खेला है. उन्होंने जयशंकर से मुलाकात के बाद सार्वजनिक तौर पर अपील करते हुए कहा है कि ‘भारत ही वह महान देश है जो इजरायल-फिलिस्तीन जंग को रुकवा सकता है. पीएम मोदी की इजरायल से दोस्ती और अरब देशों से रिश्ते उन्हें दुनिया का सबसे बड़ा ‘मध्यस्थ’ बनाते हैं’. फिलिस्तीन ने भारत से गाजा के पुनर्निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाने की मांग की है. इजरायल का जिगरी दोस्त दिसंबर 2025 में जब जयशंकर इजरायल में थे, तो वहां सिडनी (ऑस्ट्रेलिया) के एक हमले में यहूदियों की मौत पर उन्होंने गहरी संवेदना जताई थी. भारत और इजरायल ने ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति को फिर से दोहराया है. भारत और इजरायल के बीच ड्रोन तकनीक और मिसाइल डिफेंस को लेकर एक गुप्त समझौता भी परवान चढ़ रहा है. जयशंकर का बैलेंसिंग एक्ट एक तरफ भारत इजरायल के साथ अत्याधुनिक हथियारों का सौदा कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ 22 अरब देशों को एक साथ मेज पर बिठाकर अपनी ऊर्जा जरूरतों (Energy Security) को सुरक्षित कर रहा है. जयशंकर ने साबित कर दिया है कि भारत अब दुनिया के उन चंद देशों में से है, जो युद्ध के दो धुर विरोधियों से एक साथ हाथ मिला सकते हैं. ‘मिडिल ईस्ट’ का नया पावर सेंटर: भारत     अरब देशों के साथ बैठक की सह-अध्यक्षता UAE कर रहा है. जयशंकर ने साफ कर दिया है कि भारत जियो पॉलिटिक्स का एक बड़ा और अहम प्लेयर है.     भारत इस साल BRICS की अध्यक्षता कर रहा है. जयशंकर इसे ‘ग्लोबल साउथ’ की आवाज बना रहे हैं, जहाँ अरब देशों का समर्थन भारत के लिए बहुत जरूरी है.     सिल्क रूट को टक्कर: ‘भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे’ (IMEC) को फिर से जिंदा करने के लिए अरब देशों का साथ लेना इस बैठक का गुप्त एजेंडा है.  

30 लाख दस्तावेजों में छुपा बिल गेट्स का विवादित सच, एपस्टीन फाइल्स ने किया खुलासा

वॉशिंगटन: अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस (DOJ) ने जेफ्री एपस्टीन के नए सीक्रेट दस्तावेज पब्लिक कर दिए हैं. कुख्यात जेफ्री एपस्टीन प्रकरण में रिलीज की गई 30 लाख से ज्यादा फाइलों में फिर से एक बड़े नाम को लेकर चौंकाने वाले राज खुले हैं. ये बड़ा नाम ‘माइक्रोसॉफ्ट का मसीहा’ और दुनिया के सबसे अमीर व्यक्तियों में शुमार बिल गेट्स का है. लीक किए गए सीक्रेट ईमेल्स की मानें तो गेट्स को एक जानलेवा गुप्त रोग (STD) लग गया था, जिसे दुनिया से छिपाने के लिए वे तड़प रहे थे. ईमेल में उन रशियन लड़कियों का भी जिक्र है, जो गेट्स के इस घिनौने सच की सबसे बड़ी गवाह थीं. बिल गेट्स के ईमेल्स में खुला शॉकिंग राज गेट्स से जुड़े डॉक्यूमेंट्स में खुलासा हुआ है कि उन्हें यौन संचारित रोग हो गया था. चौंकाने वाली बात तो यह है कि उन्होंने इस लाइलाज बीमारी के सबूत मिटाने के लिए कुख्यात अपराधी जेफ्री एपस्टीन को सरेआम धमकियां तक दे डाली थीं. इन ईमेल्स में बिल गेट्स ने रशियन लड़कियों का भी जिक्र किया था. जुलाई 2013 में जेफ्री एपस्टीन ने खुद को एक लंबा ईमेल भेजा था. यह ईमेल उस वक्त का है जब बिल गेट्स ने एपस्टीन से दूरी बनानी शुरू कर दी थी. एपस्टीन ने इस ईमेल में गुस्से और बदले की आग में वो राज उगल दिए जिन्हें गेट्स शायद दुनिया से हमेशा के लिए छिपाना चाहते थे. एपस्टीन ने लिखा था कि गेट्स ने उससे विनती की थी कि वह उनके STD (यौन संचारित रोग/गुप्त रोग) से जुड़े ईमेल डिलीट कर दे. एपस्टीन ने अपनी इस ‘धमकी’ में साफ लिखा था कि उसके पास गेट्स के रशियन लड़कियों के साथ संबंधों और उसके बाद पैदा हुई बीमारियों का पूरा कच्चा चिट्ठा मौजूद है. मेलिंडा के साथ वो ‘खतरनाक’ धोखा! इन दस्तावेजों में बिल गेट्स की पूर्व पत्नी मेलिंडा गेट्स से जुड़ा एक भयानक किस्सा भी है. दस्तावेजों के मुताबिक, गेट्स ने रशियन लड़कियों के साथ संबंध बनाने के बाद एक गुप्त रोग (STD) पकड़ लिया था. पकड़े जाने के डर से, गेट्स ने कथित तौर पर एपस्टीन से ऐसी एंटीबायोटिक दवाएं मांगी थीं जिन्हें वे चुपके से मेलिंडा को दे सकें. उद्देश्य यह था कि मेलिंडा को बिना बताए उनका इलाज हो जाए और उन्हें कभी पता ही न चले कि उनके पति ने उन्हें मौत के मुंह में धकेल दिया था. रशियन लड़कियां और राइट हैंड का कबूलनामा इन फाइलों में गेट्स के पूर्व सलाहकार बोरिस निकोलिक के नाम से लिखे गए ड्रॉफ्ट ईमेल भी मिले हैं. निकोलिक, जो गेट्स के सबसे भरोसेमंद ‘राइट हैंड’ माने जाते थे, उन्होंने अपने इस्तीफे के ड्रॉफ्ट में लिखा था कि उन्हें ऐसी चीजों में शामिल होने के लिए मजबूर किया गया जो न केवल अनैतिक थीं, बल्कि गैरकानूनी भी थीं. उन्होंने आरोप लगाया कि उन्होंने गेट्स के लिए रशियन लड़कियों का इंतजाम करने, नशीली दवाएं पहुंचाने और यहां तक कि अवैध ट्रस्ट बनाने में मदद की थी. उन्होंने यह भी खुलासा किया कि गेट्स ब्रिज टूर्नामेंट्स के दौरान अपनी दिमागी क्षमता बढ़ाने के लिए ‘एडेरॉल’ जैसे ड्रग्स का इस्तेमाल करते थे. मेलिंडा का तलाक: अब जुड़ीं सारी कड़ियां जब 2021 में बिल और मेलिंडा का तलाक हुआ, तो दुनिया हैरान थी. मेलिंडा ने सिर्फ इतना कहा था कि बिल की एपस्टीन के साथ दोस्ती और उनके अफेयर्स ने शादी को खोखला कर दिया. लेकिन अब सामने आई इन कड़ियों से साफ है कि मेलिंडा 2019 से ही तलाक की प्लानिंग कर रही थीं. जैसे ही वॉल स्ट्रीट जर्नल में बिल और एपस्टीन की आधी रात की मुलाकातों की खबरें आईं, मेलिंडा समझ गई थीं कि जिस इंसान के साथ वे सालों से रह रही हैं, उसकी सच्चाई कुछ और ही है. एपस्टीन के साथ बिल की मुलाकातों में मिस स्वीडन जैसी खूबसूरत महिलाओं का शामिल होना और देर रात तक उनके घर पर रुकना, मेलिंडा के लिए बर्दाश्त से बाहर था. बिल गेट्स के झूठ और एपस्टीन की ‘जादुई’ दुनिया बिल गेट्स ने हमेशा मीडिया के सामने यही कहा कि उनकी एपस्टीन के साथ कोई दोस्ती नहीं थी, वे कभी उनके निजी विमान (Lolita Express) में नहीं बैठे और न ही उनके किसी घर पर गए. लेकिन सच इसके उलट है. फ्लाइट मैनिफेस्ट बताते हैं कि मार्च 2013 में गेट्स ने एपस्टीन के प्राइवेट जेट में सफर किया था. एपस्टीन के मैनहट्टन टाउनहाउस में वे कई बार देर रात तक रुके थे. गेट्स ने खुद एक ईमेल में लिखा था कि एपस्टीन का लाइफस्टाइल बहुत ‘अलग और दिलचस्प’ है. एपस्टीन की मौत और अधूरे राज जेफ्री एपस्टीन ने 2019 में जेल में आत्महत्या कर ली थी, लेकिन उसके पास मौजूद ‘ब्लैक बुक’ और ईमेल आज भी दुनिया के सबसे ताकतवर लोगों की रातों की नींद उड़ा रहे हैं. बिल गेट्स का नाम इन दस्तावेजों में बार-बार आना यह साबित करता है कि परोपकार की आड़ में कहीं न कहीं कुछ बहुत बड़ा और काला छिपा हुआ था. हालांकि गेट्स के प्रवक्ताओं ने इन दावों को खारिज किया है, लेकिन DOJ द्वारा जारी किए गए हजारों पन्नों के ये ईमेल झूठ नहीं बोलते.

आज से लागू Rule Change! पान-मसाला और सिगरेट के शौकीनों को झटका, कीमतें बढ़ीं

नई दिल्ली जनवरी का महीना खत्म होने वाला है और कल से नए फरवरी महीने की शुरुआत हो जाएगा. हर महीने की तरह ये महीना भी कई बड़े बदलावों (Rule Change From 1st February) के साथ शुरू होने जा रहा है. इनमें एलपीजी सिलेंडर की कीमतों (LPG Cylinder Price) से लेकर टोल टैक्स पर फास्टैग से जुड़े नियम (FASTag Rule Change) तक शामिल हैं. वहीं सबसे बड़ा शॉक पान-मसाला और सिगरेट के शौकीनों को लगने वाला है. जी हां, 1 फरवरी 2026 से इन तंबाकू प्रोडक्ट्स की कीमतें बढ़ (Pan-Masala Cigarette Price Hike) सकती हैं, क्योंकि सरकार इन पर लागू टैक्स में इजाफा करने वाली है.  साल की शुरुआत में की थी तैयारी इस साल की शुरुआत में ही सरकार की ओर से GST क्षतिपूर्ति उपकर के स्थान पर एक नया उत्पाद शुल्क और उपकर अधिसूचित किया गया था. पीटीआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इसके तहत देश में 1 फरवरी 2026 से तंबाकू उत्पादों और पान मसाला पर अधिक टैक्स का प्रावधान किया गया है. अधिसूचना को देखें, तो तंबाकू और पान मसाला पर नए शुल्क लागू जीएसटी दरों के अतिरिक्त लगाए जाएंगे. जनवरी की शुरुआत में वित्त मंत्रालय ने चबाने वाले तंबाकू, जर्दा और गुटखा पैकिंग मशीन (क्षमता निर्धारण और शुल्क संग्रह) नियम, 2026 को भी अधिसूचित किया. ये नियम चबाने वाले तंबाकू प्रोडक्ट्स के निर्माताओं से उत्पादन क्षमता का आकलन करने और शुल्क वसूलने की प्रक्रिया निर्धारित करते हैं. रिपोर्ट की मानें, तो केंद्र सरकार का यह कदम दिसंबर 2025 में संसद द्वारा दो विधेयकों को मंजूरी दिए जाने के बाद आया, जो पान मसाला निर्माण पर नए स्वास्थ्य और राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर और तंबाकू उत्पादों पर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लगाने की अनुमति देते हैं.   कीमतों पर दिखेगा टैक्स इफेक्ट  सरकार द्वारा संशोधित टैक्स स्ट्रक्चर के तहत 1 फरवरी से सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों पर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लगाने से लंबी, प्रीमियम सिगरेट पर सबसे अधिक वृद्धि देखने को मिलेगी. बदलाव के तहत सिगरेट की लंबाई के आधार पर प्रति 1,000 स्टिक पर 2,050 रुपये से लेकर 8,500 रुपये तक का उत्पाद शुल्क लगाया जाएगा, जो फरवरी  पहली तारीख से प्रभावी होगा. ध्यान रहे कि यह शुल्क 40% जीएसटी से अलग होगा.  टैक्स की मार के चलते इन तंबाकू प्रोडक्ट्स को बनाने वाली कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन प्रभावित होगा और ऐसे में कंपनियां इसकी भरपाई के लिए ग्राहकों पर बोझ बढ़ा सकती हैं. सीधे शब्दों में कहें तो सिगरेट, पान-मसाला, गुटखा महंगे हो जाएंगे और इनके शौकीनों को अब ज्यादा जेब ढीली करनी पड़ेगी.  Crisil ने इसे लेकर क्या कहा?  क्रिसिल की एक रिपोर्ट को देखें, तो सिगरेट उद्योग को शुल्क में बढ़ोतरी से बिक्री में गिरावट का सामना भी करना पड़ सकता है. वर्तमान में, सिगरेट पर 28 प्रतिशत वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के साथ-साथ विभिन्न प्रकार के क्षतिपूर्ति उपकर भी लगते हैं, लेकिन 1 फरवरी से ये क्षतिपूर्ति उपकर हटा दिया जाएगा और सिगरेट की लंबाई के आधार पर एक अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लागू होगा. क्रिसिल ने Tax Hike से घरेलू सिगरेट उद्योग में अगले वित्तीय वर्ष में 6-8 फीसदी की गिरावट का अनुमान जताया है. 

नई डिफेंस तकनीक: राफेल से बड़ा ब्रह्मास्त्र, दुश्मन को छुपा और पानी में तबाही

नई दिल्ली भारत और जर्मनी के बीच करीब 8 अरब डॉलर (लगभग 70,000 से 72,000 करोड़ रुपये) के प्रोजेक्ट-75(I) पनडुब्बी निर्माण समझौते पर मार्च के अंत तक हस्ताक्षर होने की संभावना है. यह सबमरीन डील अब तक का भारत का सबसे बड़ा रक्षा सौदा बन सकता है और दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होगा. बातचीत अंतिम चरण में पहुंच चुकी है और सूत्रों के मुताबिक इसे हाल ही में जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज की जनवरी में भारत यात्रा के दौरान निर्णायक गति मिली. प्रोजेक्ट-75 इंडिया (P-75I) का उद्देश्य इंडियन नेवी के पुराने हो चुके पारंपरिक पनडुब्बी बेड़े को आधुनिक बनाना और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा एवं डेटरेंस कैपेबिलिटी (प्रतिरोध की क्षमता) को मजबूत करना है. ऐसे समय में जब चीन और पाकिस्तान हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी नौसैनिक मौजूदगी बढ़ा रहे हैं, भारत के लिए अल्‍ट्रा मॉडर्न सबमरीन की तैनाती रणनीतिक रूप से बेहद अहम मानी जा रही है. P-75I प्रोजेक्‍ट के तहत छह उन्नत पारंपरिक डीजल-इलेक्ट्रिक अटैक सबमरीन का निर्माण किया जाएगा. शॉर्टलिस्‍ट किए गए टाइप-214 नेक्स्ट जेनरेशन सबमरीन फ्यूल सेल आधारित एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (AIP) तकनीक से लैस होंगी, जिससे वे कई हफ्तों तक बिना सतह पर आए समुद्र के भीतर रह सकती हैं. इससे उनकी पहचान और ट्रैकिंग का जोखिम काफी कम हो जाता है और नौसेना की सीक्रेट ऑपरेशन क्षमता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होती है. चीन और पाकिस्‍तान ने खासतौर पर अरब सागर के साथ ही हिन्‍द महासागर क्षेत्र में अपनी गतिविधियों को काफी बढ़ावा दिया है. इससे भारत की समुद्री सुरक्षा के लिए नई चुनौतियां पेश होने लगी हैं. यही वजह है कि भारत सबमरीन फ्लीट को अपग्रेड करने के साथ ही उसे बढ़ा भी रहा है. क्‍या है सबमरीन डील? oइस परियोजना में जर्मनी की थाइसेनक्रुप मरीन सिस्टम्स (TKMS) के साथ साझेदारी में मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) देश में ही इन पनडुब्बियों का निर्माण करेगी. ‘टाइम्‍स ऑफ इंडिया’ की रिपोर्ट के अनुसार, रणनीतिक साझेदारी मॉडल के तहत 45 से 60 प्रतिशत तक स्वदेशीकरण का लक्ष्य रखा गया है, जिससे ‘मेक इन इंडिया’ पहल को मजबूती मिलेगी. प्रस्तावित समझौते में पनडुब्बी निर्माण से जुड़ी अहम टेक्‍नोलॉजिकल ट्रांसफर का भी प्रावधान होने की संभावना है, जो भारत की लॉन्‍ग टर्म रक्षा आत्मनिर्भरता के लिए अहम माना जा रहा है. भारतीय नौसेना के पास फिलहाल करीब एक दर्जन रूसी मूल की पनडुब्बियां और छह फ्रांसीसी निर्मित स्कॉर्पीन श्रेणी की आधुनिक पनडुब्बियां हैं. हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि तेजी से बदलते सामरिक हालात और क्षेत्रीय चुनौतियों के मद्देनजर भारत को अपनी पनडुब्बी क्षमता में और विस्तार की जरूरत है. इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए अक्टूबर 2014 में रक्षा अधिग्रहण परिषद ने प्रोजेक्ट-75(I) के तहत 6 नई पनडुब्बियों की खरीद को मंजूरी दी थी, जबकि जुलाई 2021 में औपचारिक अनुरोध प्रस्ताव (RFP) जारी किया गया. राफेल फाइटर जेट से भी बड़ी डील यह प्रोजेक्‍ट केवल नेवी की युद्ध क्षमता को ही नहीं बढ़ाएगी, बल्कि देश के जहाज निर्माण और रक्षा विनिर्माण क्षेत्र को भी बड़ा प्रोत्साहन देगी. इससे सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) के लिए नए अवसर पैदा होंगे और पनडुब्बी प्रणालियों, स्पेयर पार्ट्स तथा उपकरणों के निर्माण से जुड़ा एक व्यापक औद्योगिक इकोसिस्टम विकसित होगा. जर्मनी के साथ सबमरीन करार भारत के लिए अभी तक की सबसे बड़ी डिफेंस डील साबित होगी. यह साल 2016 में की गई राफेल फाइटर जेट खरीद समझौते से भी बड़ा है. भारत ने फ्रांस से 36 राफेल फाइटर जेट ₹58000 में खरीदा था, जबकि जर्मनी के साथ सबमरीन डील ₹72000 करोड़ की है. नेवी के लिए 51 वॉरशिप सरकार हाल के वर्षों में भारतीय नौसेना के स्वदेशीकरण रोडमैप 2015–2030 को तेजी से लागू कर रही है. इसके तहत देश में 51 बड़े युद्धपोतों का निर्माण जारी है, जिनकी कुल लागत करीब 90,000 करोड़ रुपये है. वर्ष 2014 से अब तक भारतीय शिपयार्ड्स नौसेना को 40 से अधिक स्वदेशी युद्धपोत और पनडुब्बियां सौंप चुके हैं, और बीते एक वर्ष में औसतन हर 40 दिन में एक नया पोत नौसेना में शामिल हुआ है. विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत-जर्मनी के बीच होने वाला यह पनडुब्बी सौदा न केवल रक्षा क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाई देगा, बल्कि भारत को क्षेत्रीय समुद्री शक्ति संतुलन में और अधिक सशक्त भूमिका निभाने में मदद करेगा.

भारत में कर्ज़ का भार: ये 10 राज्य सबसे ज्यादा ऋणग्रस्त, पंजाब और पश्चिम बंगाल शामिल

नई दिल्ली भारतीय अर्थव्यवस्था (Indian Economy) की रफ्तार तेज है और ये दुनिया में सबसे तेजी से आगे बढ़ती हुई इकोनॉमी में बना हुआ है. वर्ल्ड बैंक से लेकर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) तक ने इसका लोहा माना है. लेकिन तेजी से बढ़ते देश में, क्या आप जानते हैं कि कौन से राज्य सबसे ज्यादा कर्ज में डूबे हुए हैं? तो भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों पर नजर डाल लें, जिनसे पता चलता है कि कई बड़े राज्यों को कर्ज के बोझ तले दबकर अपने रेवेन्यू का एक बड़ा हिस्सा इनके ब्याज के भुगतान में खर्च करना पड़ता है.  भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के FY2025 के आंकड़ों से पता चलता है कि कई बड़े राज्यों में कर्ज के ब्याज का भुगतान उसके अपने टैक्स और नॉन-टैक्स रेवेन्यू का 42% तक हिस्सा ले लेता है. इस तगड़े ब्याज भुगतान की वजह से इन राज्यों के पास सड़क, स्कूल, हेल्थ सर्विसेज और नए प्रोजेक्ट्स पर खर्च करने के लिए पैसों की कमी हो जाती है. कर्ज की मार झेल रहे भारत के 10 टॉप राज्यों के बारे में बात करें, तो… पश्चिम बंगाल वित्त वर्ष 2025 में पश्चिम बंगाल पर ब्याज भुगतान का बोझ अन्य राज्यों की तुलना में सबसे ज्यादा था. राज्य को टैक्स और नॉन टैक्स रेवेन्यू से 1.09 लाख करोड़ रुपये मिले थे, लेकिन सिर्फ ब्याज भुगतान पर 45 हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए. इसका मतलब हुआ कि उसके राजस्व का 42% हिस्सा तो ब्याज चुकाने में ही चला गया.  पंजाब-बिहार दूसरे पायदान पर पंजाब रहा, जिसने अर्जित रेवेन्यू का 34% हिस्सा ब्याज भुगतान करने में खर्च कर दिया. Punjab का राजस्व कलेक्शन 70,000 करोड़ रुपये था और इसने कर्ज के ब्याज भुगतान पर करीब 24,000 करोड़ रुपये खर्च किए. इसके बाद तीसरे नंबर पर Bihar का नाम आता है, जिसने 62,000 करोड़ रुपये के रेवेन्यू में से लगभग 21 हजार करोड़ रुपये का ब्याज भुगतान किया और ये इसका 33% रहा.  केरल-तमिलनाडु केरल द्वारा FY2025 में 1.03 लाख करोड़ रुपये का रेवेन्यू कलेक्शन किया गया था और इसका 28% या करीब 29,000 करोड़ रुपये तो ब्याज के पेमेंट में ही चला गया. पांचवे नंबर पर तमिलनाडु रहा, जिसने अपने कलेक्शन में से 62,000 करोड़ रुपये या 28% का ब्याज पेमेंट किया था. इसके टैक्स रेवेन्यू सबसे अधिक रहा, लेकिन कर्ज की मार से ये राज्य भी बेहाल रहा.  हरियाण-राजस्थान और आंध्र प्रदेश Top-10 कर्ज के तले दबे राज्यों में अगला नंबर हरियाणा का है और इसने 94,000 करोड़ रुपये का राजस्व जुटाने के बाद इसमें से 27% या करीब 25,000 करोड़ रुपये का ब्याज भुगतान किया. सातवें पायदान पर राजस्थान था और राज्य ने 1.48 लाख करोड़ रुपये के राजस्व में से 38,000 करोड़ रुपये का ब्याज चुकाया. इसके अलावा आंध्र प्रदेश ने 1.2 लाख करोड़ रुपये के राजस्व पर 29 हजार करोड़ रुपये ब्याज भरा था.  MP-कर्नाटक लिस्ट में नौवें स्थान पर मध्य प्रदेश शामिल हैं और इसका वित्त वर्ष 2025 में टैक्स और नॉन-टैक्स रेवेन्यू 1.23 लाख करोड़ रुपये रहा था, जिसमें से ब्याज के भुगतान पर 27,000 करोड़ रुपये या कुल कलेक्शन का करीब 22% खर्च हुआ. बात दसवें पायदान की करें, तो यहां पर कर्नाटक है, जिसका कलेक्शन 2.03 लाख करोड़ रुपये का था और ब्याज भुगतान 19% यानी 39,000 करोड़ रुपये रहा.