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बड़ी खबर: 14.9 करोड़ पासवर्ड लीक, क्या आपका नाम इस लिस्ट में है?

नई दिल्ली जीमेल, फेसबुक, नेटफ्लिक्स, इंस्टाग्राम आदि का यूज करते हैं तो आपके लिए एक जरूरी खबर है. दरअसल, हाल ही में 14.9 करोड़ यूनिक आईडी लॉगइन और पासवर्ड लीक होने का मामला सामना आया है. ये डेटा बिना किसी सिक्योरिटी और पासवर्ड के अवेलेबल है, जिसकी जानकारी WIRED ने अपनी रिपोर्ट में दी है.  जाने-माने सिक्योरिटी एनालिस्ट Jeremiah Fowler ने इस डेटाबेस का पता लगाया है. फाउलर के मुताबिक, ये लीक हुए रिकॉर्ड लगभग हर बड़े ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जुड़ा है.  इन ऐप्स का डेटा हुआ लीक  लीक पासवर्ड से प्रभावित हुए ऐप की लिस्ट में फेसबकु, इंस्टाग्राम, टिकटॉक, X (पहले Twitter) और कुछ डेटिंग ऐप्स का नाम शामिल है. इस लीक में स्ट्रीमिंग ऐप्स और एंटरटेनमेंट ऐप्स के नाम भी शामिल है, जिसमें  Netflix, HBO Max, Disney Plus, and Roblox के नाम शामिल हैं.      ईमेल अकाउ्टस : फाउलर के मुताबिक, करीब 4.8 करोड़ जीमेल अकाउंटस, 40 लाख याहू अकाउंट्स, और 15 लाख आउटलुक अकाउंट का डेटा लीक हुआ है.       सोशल मीडिया : 1.7 करोड़ फेसबुक अकाउंट्स, 65 लाख इंस्टाग्राम अकाउंट और 780 हजार टिकटॉक अकाउंट की डिटेल्स लीक हुई है.      एंटरटेनमेंटः इस सेगमेंटमें करीब 34 लाख Netflix अकाउंट के लॉगइन और पासवर्ड लीक हुए हैं. इसमें डिज्नी प्लस समेत की और नाम शामिल है.      फाइनेंशियल और सरकारी अकाउंट्स की लिस्ट में 420 हजार लॉगइन डिटेल्स और पासवर्ड के नाम शामिल हैं.  ये डेटा कैसे लीक हुआ ? फाउलर ने कहा है कि यह डेटाबेस इन्फोस्टेलर नाम के मैलवेयर ने क्रिएट किया है, जो एक तरह का खतरनाक सॉफ्टवेयर है. इसको ऐसे डिजाइन किया गया है, जिससे यह चुपचाप तरीके से डिवाइस को नुकसान पहुंचाते हैं और लॉगइन व डिटेल्स को चोरी करते हैं.  फाउलर ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि जब भी डेटा कलेक्ट या चोरी किया जाता है तो उसको कहीं स्टोर करना होता है. ऐसे क्लाउड पर डेटा स्टोर करना सबसे बेस्ट माना जाता है. इस खोज से पता चलता है कि साइबर हैकर्स का भी डेटा चोरी हो जाता है.   डेटा और लीक नुकसान कैसे बचाएं?  डेटा या पासवर्ड लीक होने पर अपने अकाउंट को कैसे बचाएं. इसके लिए कुछ खास ट्रिक्स का यूज किया जा सकता है. अलग-अलग पासवर्ड रखें  अलग-अलग प्लेटफॉर्म के लिए अलग-अलग पासवर्ड का यूज करें. पासवर्ड बनाते समय कम से कम 12-16 कैरेक्टर का यूज करें.  2 स्टेप वेरिफिकेशन्स यूज करें लगभग सभी प्लेटफॉर्म पर टू स्टेप वेरिफिकेशन्स की सुविधा मिलती है. टू स्टेप वेरिफिकेशन्स में मोबाइल नंबर पर OTP या फिर जीमेल पर OTP आता है.  

टोल टैक्स नियमों में बदलाव, सरकार ने 70% तक की बंपर छूट का ऐलान, देखें कहां मिलेगा लाभ

नई दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्गों पर सफर करने वाले यात्रियों के लिए अच्छी खबर है। सरकार ने टोल टैक्स के नियम बदले हैं। इसके तहत अब 70 प्रतिशत तक की छूट मिलेगी। एनएचआई के नए नियम के मुताबिक, दो लेन के राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण के दौरान टोल टैक्स में 70 फीसदी की छूट देने का निर्णय लिया है। सड़क यात्री टोल टैक्स का सिर्फ 30 प्रतिशत भुगतान करेंगे। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क नियम, 2008 में महत्वपूर्ण संशोधन किया गया है। इस नए नियम के तहत दो-लेन (पेव्ड शोल्डर सहित) वाले राष्ट्रीय राजमार्ग को चार-लेन या उससे अधिक चौड़ा करने के दौरान वहां से गुजरने वाले वाहन चालकों से पूरा टोल टैक्स नहीं लिया जाएगा। इसमें 70 फीसदी की बड़ी कटौती की गई है। संशोधित नियमों के अनुसार, निर्माण कार्य शुरू होने की तारीख से लेकर परियोजना पूरा होने तक सड़क यात्रियों को तय टोल का केवल 30 प्रतिशत ही भुगतान करना होगा। यानी निर्माण के दौरान यात्रियों को टोल दरों में 70 प्रतिशत की सीधी छूट मिलेगी। मालूम हो कि एनएचएआई हर साल टोल दरों में सात से 10 फीसदी की वृद्धि करता है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह संशोधन नए साल से लागू कर दिया गया है। सरकार ने इस बाबत अधिसूचना जारी कर दी है। नया नियम उन सभी वर्तमान और नई राजमार्ग परियोजनाओं पर लागू होगा, जहां दो-लेन राजमार्ग को चार-लेन या उससे अधिक में अपग्रेड किया जा रहा है। चार लेन के हाईवे पर 25 फीसदी की छूट नए नियम के अनुसार, राजमार्ग के चार-लेन से छह या आठ-लेन बनने पर टोल टैक्स में 25 फीसदी की छूट दी जाएगी। यानी टोल टैक्स की तय दर का 75 फीसदी भुगतान करना होगा। इसके अलावा, टोल रोड की लागत पूरी होने पर टैक्स सिर्फ 40 प्रतिशत लेने का नियम पहले से है। 25-30 हजार किमी पर चल रहा काम सरकार के आंकड़ों के अनुसार, देशभर में लगभग 25 से 30 हजार किलोमीटर के दो-लेन राजमार्गों को चार-लेन में अपग्रेड किया जाना है। इसके लिए करीब 10 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है। अधिकारी ने बताया कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर माल ढुलाई का हिस्सा 40 फीसदी है, जिसे बढ़ाकर 80 फीसदी करने का लक्ष्य है। चार-लेन कॉरिडोर बनने से व्यावसायिक वाहनों की औसत रफ्तार 30-35 से बढ़कर 50 किमी प्रतिघंटा से अधिक हो जाएगी।

बांग्लादेश: 23 साल के चंचल भौमिक की गैरेज में जलाकर हत्या, हिंदू समुदाय पर हमला

ढाका बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा का एक और गंभीर मामला सामने आया है. नरसिंदी पुलिस लाइन्स से सटे मस्जिद मार्केट इलाके में 23 साल के हिंदू युवक चंचल चंद्र भौमिक की बेरहमी से हत्या किए जाने का आरोप है. आशंका जताई जा रही है कि चंचल को गैराज के भीतर ही जिंदा जला दिया गया. मृतक चंचल चंद्र भौमिक कुमिल्ला जिले के लक्ष्मीपुर गांव का रहने वाला था. वह पिछले कई वर्षों से नरसिंदी के एक गैराज में काम करता था और काम के सिलसिले में वहीं रह रहा था. चंचल अपने परिवार का मंझला बेटा था और परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य भी था. गैराज के शटर पर पेट्रोल डालकर लगा दी आग प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, शुक्रवार देर रात जब चंचल गैराज के अंदर सो रहा था, तभी दुकान के बाहर लगे शटर पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी गई. आग लगते ही लपटें तेजी से पूरे गैराज में फैल गईं. घटना से जुड़े एक वीडियो में देखा जा सकता है कि एक व्यक्ति दुकान के बाहर आग लगाता है, जिसके बाद आग तेजी से अंदर फैल जाती है. एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद बुझी आग घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय लोगों ने फायर सर्विस को सूचना दी. नरसिंदी फायर सर्विस की एक टीम मौके पर पहुंची और करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया. आग बुझाने के बाद गैराज के अंदर से चंचल चंद्र भौमिक का जला हुआ शव बरामद किया गया. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, चंचल लंबे समय तक आग में जलता रहा और उसकी बेहद दर्दनाक मौत हो गई. परिजनों ने इस घटना को पूरी तरह पूर्व नियोजित हत्या बताया है. उन्होंने दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी और उन्हें कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग की है. इस घटना के बाद इलाके में भारी तनाव का माहौल है और अल्पसंख्यक समुदाय की सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा हो गई हैं. स्थानीय हिंदू नेताओं में आक्रोश पुलिस का कहना है कि घटनास्थल से साक्ष्य इकट्ठा किए गए हैं. सीसीटीवी फुटेज की जांच की जा रही है और मामला दर्ज करने की प्रक्रिया जारी है. वहीं स्थानीय हिंदू समुदाय के नेताओं ने इस निर्मम हत्या की कड़ी निंदा की है. उन्होंने दोषियों की तुरंत पहचान और गिरफ्तारी की मांग करते हुए प्रशासन से इलाके में अल्पसंख्यक समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी कदम उठाने की अपील की है.

राम मंदिर शिखर का धर्म ध्वज सात महाद्वीपों तक पहुंचेगा, ऐतिहासिक संकल्प लिया गया

अयोध्या   धर्म नगरी अयोध्या से सनातन संस्कृति और प्रभु श्रीराम की भक्ति को वैश्विक मंच तक पहुंचाने की एक ऐतिहासिक और प्रेरणादायी पहल शुरू हो चुकी है. राम मंदिर के शिखर पर स्थापित होने वाला पवित्र धर्म ध्वज अब केवल अयोध्या तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे दुनिया के सातों महाद्वीपों तक ले जाकर फहराने का संकल्प लिया गया है. इस विशेष अभियान की विधिवत शुरुआत अयोध्या में पूजा अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों के साथ की गई, जिसने इसे आध्यात्मिक के साथ साथ सांस्कृतिक आंदोलन का स्वरूप दे दिया है. अयोध्या में विधिविधान से हुआ अभियान का शुभारंभ राम जन्मभूमि अयोध्या में हुए इस आयोजन के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार और पूजा अर्चना के साथ धर्म ध्वज यात्रा का शुभारंभ किया गया. यह वही ध्वज है जो राम मंदिर के शिखर पर स्थापित होगा और अब उससे पूर्व पूरी दुनिया में सनातन धर्म की पहचान का संदेश लेकर निकलेगा. आयोजन में संत समाज और श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने इस पहल को और भी पवित्र और ऐतिहासिक बना दिया. नरेंद्र कुमार कर रहे हैं नेतृत्व इस वैश्विक अभियान का नेतृत्व हरियाणा के हिसार निवासी और प्रसिद्ध पर्वतारोही नरेंद्र कुमार कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि यह धर्म ध्वज केवल एक कपड़ा या प्रतीक नहीं, बल्कि सनातन धर्म, प्रभु श्रीराम और भारतीय संस्कृति के मूल्यों का प्रतिनिधित्व करता है. उनका लक्ष्य है कि वर्ष 2026 के अंत तक इस पवित्र ध्वज को विश्व के सभी सात महाद्वीपों पर फहराया जाए, ताकि राम और सनातन संस्कृति का संदेश हर कोने तक पहुंचे. नेपाल से शुरू हुआ पहला चरण नरेंद्र कुमार के अनुसार इस यात्रा का पहला चरण नेपाल से शुरू किया गया. 21 दिसंबर को यात्रा की शुरुआत हुई और 29 दिसंबर को नेपाल में संबंधित महाद्वीप पर धर्म ध्वज फहराया गया. इसके बाद अब चरणबद्ध तरीके से अन्य महाद्वीपों की यात्रा की जाएगी. यह पूरी पहल अयोध्या से शिखर तक निकाली जा रही धर्म ध्वज यात्रा के रूप में आयोजित की जा रही है, जो अपने आप में एक अनूठा धार्मिक अभियान है. धार्मिक के साथ सामाजिक उद्देश्य भी राम मंदिर के शिखर पर लगने वाला यह धर्म ध्वज अब पूरी दुनिया में सनातन धर्म की पहचान बनेगा. इस अभियान का उद्देश्य केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक भी है. नरेंद्र कुमार का मानना है कि आज का युवा वर्ग भौतिकवाद की दौड़ में अपनी सांस्कृतिक जड़ों से दूर होता जा रहा है. इस यात्रा के माध्यम से युवाओं को धर्म, संस्कार और भारतीय मूल्यों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है. श्रीराम के आदर्शों का वैश्विक संदेश इस यात्रा का मूल उद्देश्य प्रभु श्रीराम के जीवन चरित्र और आदर्शों को वैश्विक स्तर पर पहुंचाना है. नरेंद्र कुमार का कहना है कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का जीवन आज भी समाज को त्याग, कर्तव्य, मर्यादा और सत्य का मार्ग दिखा सकता है. अयोध्या में संपन्न हुई पूजा अर्चना के बाद यह धर्म ध्वज यात्रा अब अंतरराष्ट्रीय स्वरूप ले चुकी है. आने वाले समय में जब यह ध्वज सातों महाद्वीपों पर फहराएगा, तब पूरी दुनिया में राम मंदिर और सनातन संस्कृति की भक्ति का संदेश गूंजेगा.

ट्रैफिक जाम से हर साल 130 घंटे की बर्बादी, बेंगलुरु-दिल्ली समेत 10 शहरों में वाहनों की रेंगती भीड़

नई दिल्ली आप जब ऑफिस, स्कूल या अन्य किसी काम से जाने के लिए घर से बाहर निकलते हैं तो मंजिल पर पहुंचने से पहले जाम में फंसना, उसे झेलना आपकी दिनचर्या में शुमार हो गया है. ये भारत के किसी एक शहर या व्यक्ति की समस्या नहीं है, बल्कि पूरे देश और उसकी 1.46 अरब आबादी की है. इसी जाम की बदौलत आपका करीब 130 घंटा हर साल बर्बाद हो रहा है. ये हम नहीं बल्कि दुनिया के 492 शहरों के ट्रैफिक का अध्ययन करने वाली नीदरलैंड की कंपनी टॉमटॉम की एक रिपोर्ट कह रही है. बोस्ट ग्रुप की रिपोर्ट में देश को करीब 1.47 लाख करोड़ रुपए की हानि का भी उल्लेख किया गया है. टॉमटॉम ट्रैफिक इंडेक्स में भारत के 10 शहरों की यातायात व्यवस्था के बारे में बताया गया है. जिसमें बेंगलुरु दुनिया में दूसरे नंबर पर है. यानी दुनिया का दूसरा सबसे धीमा शहर. जहां औसत यात्रा समय 3.37 मिनट प्रति किमी है. ETV Bharat Explainer में जानते हैं अन्य शहरों में क्या स्थिति है, जाम के क्या कारण हैं और निपटने के साधन क्या हैं? खराब ट्रैफिक की टॉप-5 लिस्ट में भारत के 2 शहर: टॉमटॉम ट्रैफिक इंडेक्स 2025 के अनुसार, बेंगलुरु दुनिया के सबसे खराब ट्रैफिक जाम वाले शहरों में दूसरे नंबर पर है. मतलब कि बेंगलुरु गंभीर ट्रैफिक जाम की समस्या से जूझ रहा है. इंडेक्स में सबसे ऊपर मेक्सिको सिटी है, आयरलैंड का डबलिन तीसरे स्थान पर है, जबकि पोलैंड का लॉड्ज चौथे स्थान पर है. पांचवें नंबर पर भारत का ही पुणे है. टॉप-5 में भारत के 2 शहरों का शामिल होना यह दर्शाता है कि शहरी विकास और निजी वाहनों पर निर्भरता ने गंभीर चुनौतियां खड़ी कर दी हैं. ट्रैफिक मैनेजमेंट पहले से कठिन हुआ: टॉमटॉम ट्रैफिक इंडेक्स के अनुसार जैसे-जैसे शहर बढ़ते हैं और लोगों की ट्रैवलिंग बढ़ती है, नगर निगमों, नगर योजनाकारों और परिवहन अधिकारियों के सामने सड़क नेटवर्क के प्रबंधन की चुनौती बढ़ती जाती है. कंपनी ने माना है कि ट्रैफिक को ठीक से मैनेज करना पहले से कहीं अधिक कठिन हो गया है. अमेरिका-जापान समेत कई देशों में यात्रा का समय बढ़ा: टॉमटॉम ट्रैफिक इंडेक्स के अनुसार लंदन (इंग्लैंड), बेंगलुरु (भारत), डबलिन (आयरलैंड), मेक्सिको सिटी (मेक्सिको), बार्सिलोना (स्पेन), एथेंस (ग्रीस), मिलान (इटली), रोसारियो (अर्जेंटीना), हिरोशिमा (जापान), सैन फ्रांसिस्को (संयुक्त राज्य अमेरिका) समेत कई अन्य प्रमुख शहरों में यात्रा का समय बढ़ गया. 2023 में बेंगलुरु छठा और 2024 में तीसरा सबसे अधिक भीड़भाड़ वाला शहर था. एशिया का सबसे धीमा शहर बेंगलुरु: ट्रैफिक इंडेक्स के अनुसार एशिया में बेंगलुरु एक बार फिर सबसे धीमा शहर बन गया है. यहां औसत यात्रा समय 3 मिनट 37 सेकंड प्रति किलोमीटर है. हालांकि, सामान्य यातायात की स्थिति में यात्रा समय घटकर 2 मिनट 4 सेकंड रह जाता है. भीड़भाड़ के स्तर के मामले में बेंगलुरु दुनिया का दूसरा सबसे भीड़भाड़ वाला शहर है, जिसका स्कोर 74.4 है, जो एक साल पहले 72.7 था. आयरलैंड का ऐतिहासिक शहर डबलिन 72.9 स्कोर के साथ तीसरे स्थान पर है. जो दुनिया का छठा सबसे धीमा शहर भी है, जहां प्रति किमी यात्रा का समय 3.27 मिनट है. दक्षिण भारत के राज्यों में ट्रैफिक की स्थिति सबसे खराब: ट्रैफिक इंडेक्स ने भारत के 10 शहरों का सर्वे किया, जिसमें बेंगलुरु, पुणे, मुंबई, नई दिल्ली, कोलकाता, जयपुर, चेन्नई, हैदराबाद, एर्नाकुलम, अहमदाबाद शामिल हैं. इनमें 7 शहर भारत के दक्षिण से आते हैं. इस हिसाब से कहा जा सकता है कि दक्षिण के शहरों में ट्रैफिक व्यवस्था सबसे ज्यादा खराब है.  छोटे शहरों में भी बढ़ी जाम की समस्या: मुंबई, नई दिल्ली और कोलकाता यह दिखाते हैं कि महानगर भी लगातार ट्रैफिक की गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं. जयपुर, चेन्नई और हैदराबाद जैसे उभरते शहरों में भी ट्रैफिक जाम की समस्या बढ़ती जा रही है. यही नहीं एर्नाकुलम और अहमदाबाद जैसे छोटे शहर भी रैंकिंग में शामिल हैं, जो दर्शाता है कि ट्रैफिक की समस्या केवल महानगरों तक ही सीमित नहीं हैं. बेंगलुरु में 10 किमी की दूरी 36 मिनट में हो रही पूरी: बेंगलुरु में ट्रैफिक की स्थिति ऐसी है कि लोग 15 मिनट में केवल 4.2 किलोमीटर की दूरी ही तय कर पाते हैं. यानी 10 किलोमीटर की दूरी तय करने में 36.09 मिनट का समय लग रहा है. जो 2024 की तुलना में 2 मिनट से अधिक है. व्यस्त समय में औसत गति घटकर 13.9 किमी/घंटा रह गई, जो पिछले वर्ष की तुलना में पूरे 1 किमी/घंटा धीमी है. ये आंकड़े बेंगलुरु के सड़क नेटवर्क पर पड़ने वाले गंभीर दबाव को दर्शाते हैं. जहां व्यस्त समय में लगने वाला ट्रैफिक न केवल समय बर्बाद करता है, बल्कि ईंधन की खपत में कमी, प्रदूषण और यात्रियों के तनाव को भी बढ़ाता है. ये आंकड़े दुनिया के सबसे भीड़भाड़ वाले शहरों में मेट्रो विस्तार, कॉर्पोरेट कम्यूट, स्थायी परिवहन समाधानों की आवश्यकता पर जोर देते हैं. ट्रैफिक जाम के कारण     निजी वाहनों की बढ़ती संख्या: शहरी परिवारों में आमदनी बढ़ने से जीवन स्तर में सुधार हुआ है. आर्थिक समृद्धि ने लोगों को निजी वाहनों का मालिक बनने में सक्षम बनाया है, जिससे सड़क पर भीड़ बढ़ गई है.     सड़कों का डिजाइन बढ़ा रहा जाम: सड़कों के रेडियल डिजाइन के कारण शहरों के केंद्रीय व्यावसायिक जिलों (सीबीडी) में और उसके आसपास ट्रैफिक जाम की समस्या ज्यादा हो गई है. लोगों को अक्सर सीबीडी से होकर गुजरना पड़ता है, जिसके चलते इन क्षेत्रों में भारी जाम लग जाता है.     पार्किंग की समस्या: सड़क पर सीमित जगह होने के कारण किनारे पार्किंग बढ़ जाती है. अधिकांश शहरों में सड़क से अलग पार्किंग सुविधाएं, बहुमंजिला पार्किंग स्थल या विशेष पार्किंग क्षेत्र अपर्याप्त हैं. इससे व्यावसायिक क्षेत्रों में ट्रैफिक जाम की समस्या और भी गंभीर हो जाती है.     ट्रैफिक नियामों की जानकारी का न होना: यातायात नियमों की जानकारी न होने के कारण भी सड़कों पर जाम की स्थिति बन जाती है. ट्रैफिक जाम से निपटने के उपाय     सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देना: जब लोग सार्वजनिक बसों, ट्रेनों और मेट्रो का उपयोग करते हैं, तो सड़कों से निजी कारों की संख्या कम होती है. बेहतर सार्वजनिक परिवहन प्रणालियां मिलने पर लोग अपनी गाड़ियों के बजाय इन साधनों … Read more

Budget की 92 साल पुरानी परंपरा को तोड़ा, अरुण जेटली ने शुरू किया था ये ऐतिहासिक कदम

  नई दिल्ली वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण रविवार 1 फरवरी 2026 को आम बजट पेश करने वाली हैं. मंत्री के रूप में निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) लगातार 9वीं बजट पेश करने जा रही हैं. उन्होंने पहला बजट 5 जुलाई 2019 को पेश किया था. दरअसल, मोदी सरकार के दौरान कई पुरानी परंपराएं बदली हैं, जिनमें रेल बजट (Rail Budget) जुड़ी एक परंपरा भी शामिल है.  92 साल से जारी थी ये परंपरा  भारतीय बजट इतिहास (Indian Budget History) पर नजर डालें तो मोदी सरकार के कार्यकाल में कई बड़े बदलाव देखने को मिले हैं. इनमें से एक सबसे अहम है, रेल बजट से जुड़ा हुआ है, जिसे 92 साल बाद मोदी सरकार में बदला गया था आम बजट में रेल बजट का विलय  मोदी सरकार के दौरान साल 2017 में ये बड़ा बदलाव किया गया था, और सरकार ने 92 साल के बाद आम बजट और रेल बजट को अलग-अलग पेश करने की परंपरा तोड़ी थी, जिसके बाद से Union Budget-Rail Budget को एक साथ पेश किया जाने लगा. पहले अलग-अलग पेश होते थे बजट बजट इतिहास पर गौर करें तो PM Narendra Modi के नेतृत्व वाली सरकार में साल 2017 में किए गए इस बदलाव से पहले तक देश में दो तरह के बजट पेश किए जाते थे. पहला रेल बजट (Rail Budget) और दूसरा आम बजट (Union Budget). इस दौरान आम बजट में जहां सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य, रक्षा और देश की आर्थिक विकास से जुड़ी कई महत्वपूर्ण घोषणाओं के बारे में जानकारी देती थी. वहीं रेलवे से जुड़ी घोषणाओं के लिए अलग से रेलवे बजट संसद में पेश किया जाता था. 1924 से चली आ रही थी ये परंपरा रेल बजट (Rail Budget) पहली बार साल 1924 में ब्रिटिश शासन के दौरान पेश किया गया था. इसके बाद से ही लगातार हर साल आम बजट से एक दिन पहले रेलवे बजट (Railway Budget) पेश किए जाने की परंपरा चली आ रही थी, लेकिन मोदी सरकार ने 2017 में आम बजट और रेलवे बजट को मर्ज कर दिया और इसके बाद से संसद में 1 फरवरी को सुबह 11 बजे केवल एक ही बजट पेश किया जाने लगा. अरुण जेटली ने किया था पहला कॉमन बजट पेश वर्षों पुरानी इस परंपरा में बदलाव करने के बाद जब आम बजट और रेल बजट को मिलाकर कॉमन बजट पेश किया गया, तो इसे सबसे पहले संसद में पेश करने वाले वित्त मंत्री अरुण जेटली थे. उन्होंने 2017 में पहली बार आम बजट में ही रेलवे बजट पढ़ा था. यहां इस बात का जिक्र करना भी बेहद जरूरी है कि आखिर इस बदलाव के लिए सरकार से किसने सिफारिश की थी. तो बता दें कि नीति आयोग (Niti Aayog) ने ब्रिटिश शासन से चली आ रही इस परंपरा को खत्म करने की सलाह दी थी.

Post Office की धाकड़ स्कीम से हर महीने ₹20,500 की कमाई, बुढ़ापे के लिए सुरक्षित भविष्य

 नई दिल्ली     रिटायरमेंट के बाद जिंदगी मौज में कटे और पैसों की कोई टेंशन न रहे. इसके लिए हर कोई अपनी कमाई में से कुछ न कुछ बचत (Savings) करके ऐसी जगह निवेश (Investment) करना चाहता है, जहां उसका पैसा सुरक्षित भी रहे और रिटर्न भी जोरदार मिले. कुछ लोगों की ये निवेश प्लानिंग होती है कि रिटायर होने के बाद उन्हें नियमित आय (Reguler Income) होती रहे. इस लिहाज से पोस्ट ऑफिस की एक सेविंग स्कीम्स (Post Office Schemes) खासी पॉपुलर है. हम बात कर रहे हैं पोस्ट ऑफिस सीनियर सिटीजन सेविंग स्कीम (Post Office SCSS Scheme) की, जो विशेष रूप से सीनियर सिटीजंस के लिए है और इसमें निवेश पर हर महीने 20500 रुपये की कमाई पक्की कर सकते हैं.  रिस्क जीरो, ब्याज धुआंधार  Post Office की सेविंग स्कीम्स पर निवेशक इसलिए भी भरोसा करते हैं, क्योंकि ये रिस्क फ्री निवेश (Risk Free Investment) माना जाता है. इसका कारण ये है कि इसमें किए गए हर छोटे-बड़े निवेश पर सुरक्षा की गारंटी खुद सरकार देती है. सरकारी स्कीम (Govt Scheme) पोस्ट ऑफिस सीनियर सिटीजन सेविंग्स पर मिल रहे ब्याज की बात करें, तो बैंक एफडी (Bank FD) भी फेल हैं, POSCSS में निवेश पर सरकार शानदार 8.2 फीसदी की दर से ब्याज ऑफर कर रही है.  1000 रुपये से शुरुआत, Tax छूट भी  इस सरकारी स्कीम (Govt Scheme) में सिर्फ 1000 रुपये से निवेश की शुरुआत की जा सकती है. रेगुलर इनकम, सुरक्षित निवेश के लिहाज से ही नहीं, बल्कि पोस्ट ऑफिस की ये स्कीम टैक्स छूट (Tax Benefits) का लाभ भी देती है. POSCSS में निवेश करने वाले व्यक्ति को इसमें आयकर अधिनियम की धारा 80 सी के तहत 1.5 लाख रुपये तक की सालाना टैक्स छूट दी जाती है. इस सीनियर सिटीजन सेविंग स्कीम में अधिकतम निवेश की सीमा 30 लाख रुपये तय की गई है. रिटायरमेंट के बाद फाइनेंशियली फिट रहने में ये पोस्ट ऑफिस स्कीम कारगर साबित हो सकती है. इसमें 60 साल या उससे अधिक आयु के किसी भी व्यक्ति या पति/पत्नी के साथ जॉइंट अकाउंट खोला जा सकता है. अगर आयु सीमा की बात करें, तो कुछ मामलों में छूट दिए जाने का भी प्रावधान है. VRS लेने वाले व्यक्ति की उम्र खाता खुलवाते समय 55 साल से अधिक और 60 साल से कम हो सकती है, वहीं डिफेंस से रिटायर हुए कर्मचारी 50 साल से अधिक और 60 साल से कम उम्र में निवेश कर सकते हैं. 5 साल मैच्योरिटी, पहले खाता बंद कराना महंगा Post Office Senior Citizen Scheme में निवेश के लिए मैच्योरिटी पीरियड पांच साल का है, इसका मतलब है कि आपको इस स्कीम का पूरा लाभ लेने के लिए 5 साल तक निवेश करना होगा. वहीं अगर इस अकाउंट को इस अवधि से पहले बंद किया जाता है, तो नियमों के मुताबिक खाताधारक को पेनल्टी देनी होती है. इस सरकारी योजना में निवेश पर ब्याज राशि का पेमेंट हर तीन महीने में किए जाने का प्रावधान है. मैच्योरिटी पीरियड पूरा होने से पहले खाताधारक की मृत्यु होने पर अकाउंट क्लोज कर दिया जाता है और सारी रकम दस्तावेजों में दर्ज नॉमिनी को सौंप दी जाती है.   हर महीने कैसे 20500 रुपये की कमाई? आप किसी भी नजदीकी डाकघर में जाकर अपनी SCSS अकाउंट आसानी से खुलवा सकते हैं. इसमें सिंगल अकाउंट से 15 लाख एकमुश्‍त और जॉइंट अकाउंट से 30 लाख रुपये अधिकतम निवेश किया जा सकता है.  अगर किसी व्यक्ति ने 30 लाख रुपये Post Office SCSS में ज्‍वाइंट अकाउंट के तहत निवेश किया तिमाही आधार पर उसे सिर्फ ब्‍याज से 61500 रुपये मिलेंगे और यह पूरे 5 साल तक मिलता रहेगा. पांच साल बाद आप 30 लाख मूल राशि भी निकाल सकते हैं या फिर 3 साल के लिए और बढ़ा सकते हैं. इसे मंथली बेसिस के आधार पर कैलकुलेट करें, तो…  सालाना ब्याज से कमाई: ₹30,00,000 का 8.2% = ₹2,46,000 तिमाही ब्याज से कमाई:  ₹2,46,000/4 = ₹61,500 मंथली ब्याज से कमाई:    ₹2,46,000/3 = ₹20,500 गौरतलब है कि एक बार निवेश करने के बाद, आपकी मैच्‍योरिटी अवधि के लिए यही ब्याज दर लागू रहती है, भले ही सरकार तिमाही आधार पर किए जाने वाले संशोधन के तहत आगे चलकर ब्याज दरें क्यों न बदल दे.

भारत की आर्थिक प्रगति: अगले 5 साल में प्रति व्यक्ति आय 4000 डॉलर, चीन से बराबरी करेगा देश

नई दिल्ली भारत के पड़ोसी चीन की जीडीपी भले ही अभी भारत से अधिक हो, लेकिन कई आर्थिक संकेतकों में भारत अब उसके बराबर पहुंचने या उससे तेजी से नजदीक आने की स्थिति में है. स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस दशक के अंत तक भारत ‘अपर-मिडिल इनकम’ श्रेणी में शामिल हो जाएगा और प्रति व्यक्ति आय के मामले में चीन और इंडोनेशिया की बराबरी कर लेगा. यह रिपोर्ट भारत की आय संरचना में एक बड़े और ऐतिहासिक बदलाव की ओर इशारा करती है. इनकम में चीन की बराबरी करेगा भारत   एसबीआई के अनुसार, अगले चार वर्षों में यानी 2030 तक भारत की प्रति व्यक्ति आय 4,000 डॉलर तक पहुंच सकती है. भारत की आय में यह बढ़ोतरी लंबी और क्रमिक प्रक्रिया का नतीजा है. आजादी के बाद भारत को लो-इनकम से लोअर-मिडिल इनकम इकोनॉमी बनने में करीब 60 साल लग गए और यह मुकाम 2007 में हासिल हुआ. इस दौरान प्रति व्यक्ति औसत आय 1962 में जहां मात्र 90 डॉलर थी, वहीं 2007 तक यह बढ़कर 910 डॉलर हो गई, यानी सालाना औसतन 5.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई. इसके बाद भारत की आर्थिक रफ्तार में तेजी आई. आजादी के बाद देश को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने में लगभग छह दशक लगे, लेकिन 2014 तक भारत दो ट्रिलियन डॉलर, 2021 तक तीन ट्रिलियन डॉलर और फिर सिर्फ चार वर्षों में 2025 तक ब्रिटेन को पीछे छोड़ते हुए चार ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बन गया. इसके साथ ही भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनकर उभरा. मौजूदा अनुमानों के अनुसार, 2027 तक भारत की अर्थव्यवस्था 5 ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े को भी छू सकती है. 5 ट्रिलियन डॉलर की ओर भारत SBI की रिपोर्ट के अनुसार, अगर मौजूदा ग्रोथ ट्रेंड जारी रहा तो भारत अगले दो साल में 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बन सकता है. भारत को 1 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बनने में करीब छह दशक लगे, लेकिन इसके बाद रफ्तार तेज हो गई.     दूसरा ट्रिलियन सिर्फ 7 साल में जुड़ा     तीसरा ट्रिलियन 2021 तक     चौथा ट्रिलियन 2025 तक हासिल होने का अनुमान     2027 के आसपास 5 ट्रिलियन डॉलर का लक्ष्य संभव प्रति व्यक्ति आय में तेज उछाल SBI के मुताबिक, भारत को लो-इनकम देश से लोअर-मिडिल इनकम देश बनने में करीब 60 साल लगे.     1962 में प्रति व्यक्ति आय: 90 डॉलर     2007 में: 910 डॉलर     2009 में: 1,000 डॉलर     2019 में: 2,000 डॉलर     2026 तक अनुमान: 3,000 डॉलर 2030 तक अपर-मिडिल इनकम देश रिपोर्ट के अनुसार, 2030 तक भारत की प्रति व्यक्ति आय 4,000 डॉलर (करीब 3.64 लाख रुपये) तक पहुंच सकती है. इसके साथ ही भारत अपर-मिडिल इनकम देशों की श्रेणी में आ जाएगा, जहां फिलहाल चीन और इंडोनेशिया जैसे देश शामिल हैं. यह बदलाव सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं होगा, बल्कि करोड़ों भारतीयों के जीवन स्तर में सुधार का संकेत देगा. 2047 का बड़ा लक्ष्य सरकार का लक्ष्य है कि 2047 तक भारत एक हाई-इनकम देश बने. इसके लिए प्रति व्यक्ति आय को करीब 13,936 डॉलर तक ले जाना होगा. SBI का मानना है कि अगर भारत 7.5% की औसत वार्षिक आर्थिक वृद्धि बनाए रखता है, तो यह लक्ष्य हासिल किया जा सकता है. हालांकि, अगर हाई-इनकम की सीमा बढ़कर 18,000 डॉलर हो जाती है, तो देश को और तेज रफ्तार से विकास करना होगा. इसके लिए शिक्षा, रोजगार, उद्योग, निर्यात और संरचनात्मक सुधारों पर विशेष जोर देना जरूरी होगा. वैश्विक स्तर पर मजबूत स्थिति पिछले एक दशक में भारत की आर्थिक वृद्धि दर वैश्विक औसत से बेहतर रही है. ग्लोबल ग्रोथ रैंकिंग में भारत 95वें परसेंटाइल में पहुंच चुका है, यानी दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते देशों में शामिल है. वर्ल्ड बैंक के आंकड़ों के मुताबिक, 1990 में जहां केवल 39 देश हाई-इनकम थे, वहीं 2024 तक इनकी संख्या बढ़कर 87 हो गई है. भारत भी अब तेजी से उसी दिशा में आगे बढ़ता नजर आ रहा है. साल दर साल आय में इजाफा प्रति व्यक्ति आय के मोर्चे पर भी यही रुझान देखने को मिला है. साल 2009 तक भारत की प्रति व्यक्ति आय 1,000 डॉलर तक पहुंची और अगले दस वर्षों में, यानी 2019 तक, यह दोगुनी होकर 2,000 डॉलर हो गई. अनुमान है कि 2026 तक यह बढ़कर 3,000 डॉलर तक पहुंच जाएगी, जिससे देश की खपत क्षमता और मध्यम वर्ग का आकार और मजबूत होगा. इसी पृष्ठभूमि में रेटिंग एजेंसी मूडीज ने भी चालू वित्त वर्ष में भारत की आर्थिक वृद्धि दर 7.3 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है. मूडीज का मानना है कि मजबूत आर्थिक विस्तार से औसत घरेलू आय को समर्थन मिलेगा, जिसका सीधा असर बीमा जैसे क्षेत्रों की मांग पर पड़ेगा. एजेंसी के अनुसार, तेज ग्रोथ, बढ़ता डिजिटलीकरण, कर सुधार और सरकारी स्वामित्व वाली बीमा कंपनियों में प्रस्तावित बदलाव बीमा प्रीमियम में निरंतर वृद्धि को बढ़ावा देंगे, जिससे उद्योग की लाभप्रदता में भी सुधार आने की संभावना है.

Budget 2026 में हो सकता है होम लोन पर बड़ा बदलाव, NAREDCO ने 5 लाख की ब्याज छूट की मांग की

नई दिल्ली: केंद्रीय बजट 2026-27 से पहले रियल एस्टेट सेक्टर की शीर्ष संस्था नेशनल रियल एस्टेट डेवलपमेंट काउंसिल (NAREDCO) ने सरकार के सामने कई अहम मांगें रखी हैं. संगठन ने होम लोन पर मिलने वाली ब्याज कटौती की सीमा बढ़ाने, किफायती आवास की परिभाषा में बदलाव करने और रियल एस्टेट क्षेत्र को उद्योग का दर्जा देने की आवश्यकता पर जोर दिया है. NAREDCO का कहना है कि मौजूदा आर्थिक और शहरी परिस्थितियों को देखते हुए आवास क्षेत्र को अतिरिक्त समर्थन की जरूरत है, ताकि ‘सभी के लिए आवास’ के लक्ष्य को हासिल किया जा सके. होम लोन पर ब्याज छूट बढ़ाने की मांग NAREDCO के अध्यक्ष प्रवीण जैन ने कहा कि होम लोन पर चुकाए गए ब्याज पर आयकर अधिनियम के तहत मिलने वाली दो लाख रुपये की छूट सीमा को बढ़ाकर पांच लाख रुपये किया जाना चाहिए. उन्होंने बताया कि यह सीमा करीब 12 वर्ष पहले तय की गई थी, जबकि इस दौरान प्रॉपर्टी की कीमतों और निर्माण लागत में काफी वृद्धि हो चुकी है. जैन के अनुसार, ब्याज छूट की सीमा बढ़ाने से मध्यम वर्ग और पहली बार घर खरीदने वालों को राहत मिलेगी, जिससे आवासीय मांग को बढ़ावा मिलेगा. उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि बजट 2026 में इस प्रस्ताव को शामिल किया जाए. किफायती आवास की परिभाषा में बदलाव जरूरी NAREDCO ने किफायती आवास की मौजूदा परिभाषा को भी अव्यावहारिक बताते हुए इसमें संशोधन की मांग की है. संगठन का कहना है कि वर्तमान में 45 लाख रुपये तक के घरों को किफायती आवास माना जाता है, लेकिन बढ़ती भूमि कीमतों और निर्माण लागत के कारण यह सीमा अब अप्रासंगिक हो गई है. संस्था ने सुझाव दिया कि 90 लाख रुपये तक की कीमत वाले घरों को किफायती आवास की श्रेणी में शामिल किया जाना चाहिए. इससे अधिक संख्या में परियोजनाएं इस श्रेणी में आ सकेंगी और खरीदारों को एक प्रतिशत जीएसटी जैसी कर राहत का लाभ मिलेगा. रियल एस्टेट को उद्योग का दर्जा देने पर जोर NAREDCO के चेयरमैन निरंजन हीरानंदानी ने कहा कि रियल एस्टेट क्षेत्र देश की जीडीपी, रोजगार सृजन और शहरी विकास में महत्वपूर्ण योगदान देता है. इसके बावजूद अब तक इसे उद्योग का दर्जा नहीं दिया गया है. उन्होंने कहा कि यदि रियल एस्टेट को उद्योग का दर्जा मिलता है, तो डेवलपर्स को सस्ते ऋण, बेहतर वित्तीय संसाधन और निर्माण से जुड़े कच्चे माल की आसान उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेगी. इससे परियोजनाओं की लागत कम होगी और आवास की आपूर्ति बढ़ेगी. किराये के आवास को बढ़ावा देने की जरूरत NAREDCO ने किराये के आवास को प्रोत्साहन देने की भी मांग की है. प्रवीण जैन ने बताया कि मौजूदा समय में किराये से मिलने वाला रिटर्न मात्र एक से तीन प्रतिशत के बीच है, जिससे रियल एस्टेट कंपनियों के लिए इस क्षेत्र में निवेश करना आकर्षक नहीं रह गया है. उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार कर छूट, वित्तीय प्रोत्साहन और नीतिगत समर्थन के जरिए किराये के आवास को बढ़ावा दे सकती है, जिससे शहरी क्षेत्रों में बढ़ती आवासीय जरूरतों को पूरा किया जा सके. सरकारी जमीन और PPP मॉडल का प्रस्ताव निरंजन हीरानंदानी ने यह भी सुझाव दिया कि सरकार अपने पास उपलब्ध खाली पड़ी जमीन का उपयोग किफायती और मध्यम आय वर्ग के आवास निर्माण के लिए करे. इसके लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल को अपनाया जा सकता है, जिससे तेजी से आवासीय परियोजनाओं का विकास संभव होगा. 2030 तक 1000 अरब डॉलर का सेक्टर NAREDCO का अनुमान है कि भारतीय रियल एस्टेट उद्योग 2030 तक 1,000 अरब डॉलर के आकार तक पहुंच सकता है. संगठन का मानना है कि यदि बजट में आवास ऋण, कर ढांचे और नीति सुधारों पर ध्यान दिया गया, तो यह क्षेत्र देश की आर्थिक वृद्धि को और गति देगा.

सफेद मौत अमेरिका में फैल रही, 23 करोड़ लोग प्रभावित, सिर्फ 10 मिनट बाहर रहना खतरनाक

वॉशिंगटन  अमेरिका में इस वक्त मौसम वैज्ञानिकों के हाथ-पांव फूल हुए हैं. हाल ही में कुदरत के कहर की चेतावनी जारी की गई है. जिसमें 23 करोड़ से ज्यादा लोगों के सिर पर ‘सफेद मौत’ का साया मंडरा रहा है. ये वॉर्निंग विंटर स्टॉर्म फर्न को लेकर की गई है, जो कई राज्यों में तबाही मचाने वाला है. दावा किया जा रहा है कि इस बार पिछले साल तक के सारे रिकॉर्ड टूटने वाले हैं. इस तूफान की वजह से इंसानों का बाहर निकलना मुश्किल हो जाएगा. बताया जा रहा है कि इस सफेद तूफान का सामना करने वाले का शरीर 10 मिनट में फ्रॉस्टबाइट की चपेट में आ जाएगा. कितने राज्यों में ‘स्टेट ऑफ इमरजेंसी’ यह कोई मामूली बर्फबारी नहीं है बल्कि यह बर्फ, जमा देने वाली बारिश और ‘आर्कटिक कोल्ड’ का वो जानलेवा मिश्रण है जो पूरे अमेरिका को ठप कर देगा. बताया जा रहा है कि ये भयानक तूफान 2,300 मील लंबा मौत का रास्ता तय करने वाला है. यानी इसकी चपेट में टेक्सास से लेकर न्यूयॉर्क तक, करीब 15 राज्य आने वाले हैं. आने वाला खतरा देखते हुए यहां की सरकारों ने ‘स्टेट ऑफ इमरजेंसी’ घोषित कर दी है. टूट जाएंगे Winter Storm के सारे रिकॉर्ड न्यूयॉर्क सिटी और फिलाडेल्फिया जैसे शहरों में पिछले 4 साल की सबसे बड़ी बर्फबारी होने की आशंका है. रविवार का दिन इन शहरों के लिए सबसे खतरनाक होगा, जब बर्फीले तूफान की रफ्तार और तीव्रता अपने चरम पर होगी. सोमवार तक चलने वाला यह तूफान अपने पीछे 1 फुट से ज्यादा बर्फ और जानलेवा पाला यानी जमी हुई बर्फ छोड़ जाएगा. इस खतरे को देखते हुए शनिवार के लिए 1,400 से ज्यादा उड़ानें पहले ही रद्द की जा चुकी हैं. डलास और फोर्ट वर्थ जैसे बड़े एयरपोर्ट्स पर सन्नाटा पसरने वाला है. इसके अलावा भारी बर्फ की वजह से बिजली की लाइनें टूटने का खतरा है. दक्षिण के राज्यों में 2 इंच तक की बर्फ की परत जम सकती है. इसकी वजह से हजारों घर अंधेरे में डूब सकते हैं. 10 मिनट बाहर रहे तो… इस तूफान के साथ ‘पोलर वोर्टेक्स’ (Polar Vortex) की ठंडी हवाएं भी मिक्स हो जाएंगी यानी दोगुनी तबाही का अंदेशा है. शिकागो और मिडवेस्ट के इलाकों में तापमान -30 से -46 डिग्री सेल्सियस तक जा सकता है. इतनी ठंड में सिर्फ 10 मिनट बाहर रहने पर ‘फ्रॉस्टबाइट’ का खतरा है. यानी इंसान का शरीर सुन्न पड़ जाएगा. फ्रॉस्टबाइट की चपेट में आए शरीर के अंग काले पड़ जाते हैं. कंडीशन ज्यादा सीरियस होने पर फ्रॉस्टबाइट अंगों को गला सकती है.